अब मिलेगी ₹12,500 मंथली पेंशन! वेज सीलिंग हाइक के बाद EPS नियमों पर EPFO ने दिया ये बड़ा अपडेट

EPFO Pension Rules: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने अनिवार्य कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया है। इस फैसले से कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद ₹12,500 तक की मंथली पेंशन का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, इस कदम से देश के 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को पेंशन और सामाजिक सुरक्षा का फायदा मिलेगा।

इसी बीच पेंशन पात्रता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच EPFO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट जारी कर कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) की सदस्यता के नए नियमों को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है।

EPFO ने EPS सदस्यता के लिए क्या नियम तय किए हैं?

EPFO के अनुसार, पेंशन योजना (EPS) में शामिल होने के लिए दो मुख्य शर्तें और नियम तय किए गए हैं:

सैलरी ₹25,000 या उससे कम होने पर: अगर किसी कर्मचारी का मूल वेतन और महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर ₹25,000 या उससे कम है, तो उसके लिए EPS की सदस्यता अनिवार्य है और उसकी सैलरी से पेंशन अंशदान काटा जाएगा।

सैलरी ₹25,000 से अधिक होने पर: अगर किसी नए कर्मचारी का मासिक वेतन ₹25,000 से अधिक है और वह पहले कभी EPS का सदस्य नहीं रहा है, तो वह EPS का पात्र नहीं होगा और उसके वेतन से EPS के लिए कोई कटौती नहीं की जाएगी।

(नोट: इसका मतलब यह है कि केवल सैलरी का आंकड़ा ही पात्रता तय नहीं करता, बल्कि कर्मचारी का पुराना EPS रिकॉर्ड भी यह तय करने में अहम भूमिका निभाता है कि वह पेंशन पाने का हकदार है या नहीं।)

EPF और EPS में कैसे बंटता है एंप्लॉयर का योगदान?

नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए PF और पेंशन दो अलग-अलग घटक हैं। नियम के मुताबिक कंपनी कर्मचारी के वेतन का कुल 12% हिस्सा ईपीएफ फंड में योगदान करती है। इस 12% योगदान को दो भागों में बांटा जाता है:

8.33% हिस्सा: कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जमा होता है।

शेष 3.67% हिस्सा: कर्मचारी के भविष्य निधि (EPF) खाते में जमा किया जाता है।

कैलकुलेशन का गणित: अगर किसी कर्मचारी की पेंशन योग्य सैलरी ₹25,000 प्रति माह है, तो कंपनी का कुल 12% योगदान ₹3,000 बनता है। इसमें से:

EPS (पेंशन फंड): 8.33% के हिसाब से ₹2,082.50 जाएंगे।

EPF (फंड खाता): बचा हुआ ₹917.50 ईपीएफ खाते में जमा होगा।

EPS अंशदान न कटने या गलत कटने पर क्या करें?

EPFO ने कर्मचारियों को सलाह दी है कि अगर ₹25,000 या उससे कम सैलरी होने के बावजूद उनका EPS अंशदान नहीं काटा जा रहा है, या अपात्र होने के बाद भी कटौती की जा रही है, तो वे ये कदम उठाएं:

पहले नियोक्ता से संपर्क करें: अपने HR या सैलरी विभाग से संपर्क करके अपनी पिछली EPS सदस्यता हिस्ट्री और पात्रता की जांच करवाएं।

EPFiGMS पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें: अगर नियोक्ता स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होता है, तो कर्मचारी ईपीएफओ के आधिकारिक EPFiGMS पोर्टल पर जाकर अपनी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

20% से ज्यादा ब्याज पर लिए तीन लोन, फिर भी Mutual Funds में कर रहा था निवेश, Barber की कहानी सुन CEO ने दी बड़ी सीख

आजकल ज्यादा रिटर्न पाने के लिए कई लोग म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। लेकिन कभी-कभी निवेश के चक्कर में वे अपने कर्ज को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसा ही एक मामला स्टार्टअप CEO आबिद हसन ने सोशल मीडिया पर साझा किया है। वह अपने नाई के साथ बातचीत कर रहे थे, तभी उन्हें पता चला कि वह एक तरफ म्यूचुअल फंड में पैसा लगा रहा है, जबकि दूसरी तरफ उस पर भारी ब्याज वाले कई लोन भी हैं। इस घटना के बाद हसन ने लोगों को निवेश और कर्ज से जुड़ी एक जरूरी सलाह दी।

बाल कटवाते समय सामने आई हैरान करने वाली बात

आबिद हसन ने X पर बताया कि एक दिन उनके नाई ने उनसे अपने म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो के बारे में राय मांगी। इसके बाद हसन ने उसकी आर्थिक स्थिति को समझने की कोशिश की। बातचीत में पता चला कि नाई ने तीन लोन ले रखे थे, जिन पर 20 फीसदी से ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा था।

इसके बावजूद वह म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहा था। जब हसन ने उससे इसकी वजह पूछी, तो उसने बताया कि उसे अपने निवेश से 30 फीसदी से ज्यादा रिटर्न मिलने की उम्मीद है।

20% ब्याज वाले कर्ज के बीच निवेश करना कितना सही?

हसन ने इस सोच पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड से हर बार ज्यादा रिटर्न मिलने की गारंटी नहीं होती। बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण निवेश की वैल्यू घट भी सकती है। दूसरी तरफ, लोन पर ब्याज चुकाना एक जरूरी जिम्मेदारी है।

उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति को अपने कर्ज पर 20 फीसदी ब्याज देना पड़ रहा है, तो उसके लिए निवेश से लगातार इससे ज्यादा रिटर्न कमाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में बाजार से मुनाफे की उम्मीद करने के बजाय महंगे कर्ज को कम करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

10% से ज्यादा ब्याज वाला लोन पहले चुकाने की सलाह

आबिद हसन ने सलाह दी कि अगर किसी व्यक्ति पर 10 फीसदी से ज्यादा ब्याज वाला कर्ज है, तो उसे अतिरिक्त निवेश करने से पहले कर्ज चुकाने पर ध्यान देना चाहिए। इससे ब्याज का बोझ कम हो सकता है और आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि लोन की किस्त समय पर नहीं चुकाने पर पेनल्टी और अतिरिक्त खर्च बढ़ सकते हैं। नौकरी छूटने जैसी स्थिति में कर्ज चुकाना और भी मुश्किल हो सकता है।

कम आमदनी वाले लोगों के लिए भी जरूरी संदेश

हसन ने लोगों से अपील की कि वे यह सलाह घरेलू कामगारों, ब्लू-कॉलर कर्मचारियों और कम अनुभव वाले नौकरीपेशा लोगों तक भी पहुंचाएं। कई बार लोग लोन की असली लागत और ब्याज दर को ठीक से समझ नहीं पाते।

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने क्या कहा?

हसन की पोस्ट पर कुछ यूजर्स ने कहा कि कई लोग म्यूचुअल फंड को बचत का जरिया मानते हैं और कर्ज को अलग जिम्मेदारी समझते हैं। एक यूजर ने बताया कि उसके दोस्त ने लोन लिया था, जिसकी प्रभावी सालाना ब्याज दर 24 फीसदी से ज्यादा निकली।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

Video: 61 साल की उम्र में गजब की फिटनेस, एक घंटे में 1,575 पुश-अप्स के बाद 5 घंटे प्लैंक कर रचा इतिहास

INDIA Bloc Protest: CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर आर-पार की लड़ाई, INDIA गठबंधन आज सुप्रीम कोर्ट तक करेगा मार्च

INDIA Bloc Protest: INDIA गठबंधन सोमवार, 12 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी में एक नया विरोध प्रदर्शन करने जा रहा है। यह विरोध चुनाव में कथित गड़बड़ियों, वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा है।

इससे पहले विपक्षी गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने और इस मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत से हस्तक्षेप करने की मांग करने की योजना बनाई थी। माना जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस पहल की अगुवाई करेंगे।

हालांकि, CJI ने विपक्ष के नेताओं की मुलाकात की मांग को ठुकरा दिया है। उन्होंने कहा कि चूंकि यह मामला पहले से ही अदालत में विचाराधीन है, इसलिए उन्हें याचिका दायर करके अदालत का रुख करना चाहिए।

इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, नेताओं को ईमेल के जरिए एक विस्तृत जवाब भेजा गया, जिसमें इस फैसले के पीछे की वजहें बताई गई थीं। इस जवाब में कहा गया कि इन आरोपों पर प्रशासनिक स्तर पर बात करने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के जरिए बेहतर ढंग से विचार किया जा सकता है।

बता दें कि यह प्रस्तावित प्रदर्शन, दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लिए जाने, भारी सुरक्षा तैनाती और हिंसा के आरोपों के एक दिन बाद हो रहा है।

वहीं, कांग्रेस ने प्रस्तावित आंदोलन को देखते हुए अपने सांसदों से सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद रहने को कहा है।

राहुल गांधी ने केंद्र पर युवाओं को दबाने का आरोप लगाया

INDIA गठबंधन के अगले दौर के विरोध प्रदर्शनों की घोषणा करते हुए, राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए पिछले प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस और BJP कार्यकर्ताओं ने छात्रों और महिलाओं के खिलाफ हिंसा की थी।

शनिवार को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट किए, जिसमें उन्होंने ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दिल्ली पुलिस पर “गुंडागर्दी” करने और RSS-BJP कार्यकर्ताओं को प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने की छूट देने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “अमित शाह की दिल्ली पुलिस ने न केवल खुद गुंडागर्दी की है, बल्कि RSS-BJP के असली गुंडों को महिलाओं और युवाओं के खिलाफ हिंसा करने के लिए खुली छूट और बढ़ावा भी दे रही है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘मोगैंबो’ (फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ में अमरीश पुरी का निभाया मशहूर विलेन का किरदार) कहकर संबोधित करते हुए गांधी ने कहा कि युवाओं को दबाने की कोशिशों से उनका गुस्सा और बढ़ेगा।

12 अक्टूबर को होने वाले विरोध प्रदर्शन की घोषणा करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “सोमवार, 12 अक्टूबर को कांग्रेस, पूरा INDIA गठबंधन और देश के युवा एक बार फिर बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरेंगे। और इस बार भी, यह आवाज पूरे देश में गूंजेगी – पहले से कहीं ज्यादा जोरदार तरीके से।”

गांधी ने प्रधानमंत्री पर चुनावी गड़बड़ियों और असहमति की आवाज को दबाकर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप भी लगाया।

दिल्ली के हालात के बारे में बताते हुए उन्होंने लिखा, “आज नई दिल्ली में यह नजारा देखने को मिला: पूरा शहर बंद है, इंटरनेट बंद कर दिया गया है, और पुलिस व बीजेपी के गुंडे छात्रों की पिटाई कर रहे हैं।”

राहुल गांधी ने दावा किया कि विपक्ष ने प्रधानमंत्री को घेर लिया है और कहा कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों पर कथित तौर पर हमला हुआ, उन्हें न्याय मिलेगा।

उन्होंने कहा, “आज जिन युवाओं और छात्रों पर हमला हुआ, उन्हें न्याय मिलेगा और हमलावरों को माकूल जवाब दिया जाएगा।” साथ ही उन्होंने कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

CJI ने INDIA ब्लॉक के नेताओं की मुलाकात की अपील ठुकराई

बता दें कि विपक्षी नेताओं ने सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत से मिलने की योजना बनाई थी। वे उनसे मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे। इसमें कथित ‘वोट चोरी’, वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ी चिंताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर दखल देने की अपील की जानी थी।

हालांकि, CJI ने यह कहते हुए मुलाकात की अपील ठुकरा दी कि यह मामला पहले से ही अदालत में विचाराधीन है। उन्होंने नेताओं को सलाह दी कि वे याचिका के जरिए अदालत का दरवाजा खटखटाएं।

इससे पहले विपक्षी गठबंधन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी एक ज्ञापन सौंपा था, जिसमें चुनावी प्रक्रिया को लेकर ऐसी ही चिंताएं जताई गई थीं।

दिल्ली में बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लिए जाने के बाद INDIA ब्लॉक का विरोध प्रदर्शन

यह प्रस्तावित मार्च शनिवार को दिल्ली में की गई कड़ी सुरक्षा कार्रवाई के बाद हो रहा है, जब अधिकारियों ने CEC के खिलाफ प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया था।

विपक्षी नेताओं और CJP समर्थकों ने आरोप लगाया कि हिरासत में लेना गैर-कानूनी था, जबकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए एहतियातन गिरफ्तारियां की गई थीं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को कई जगहों पर करीब 7,000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था और बाद में उन सभी को रिहा कर दिया गया।

हिरासत में लिए गए लोगों में AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, CPI(M) नेता पिनाराई विजयन और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार शामिल थे।

कार्यकर्ताओं के आरोपों के मुताबिक, CJP के नेता अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को भी विमान से उतारने के बाद हिरासत में लिया गया था।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार की शर्त पर 50,000 रुपये का बेल बॉन्ड और जमानतदार का बॉन्ड जमा करने के बाद तीनों को रिहा कर दिया गया।

हालांकि, तीनों नेताओं ने अपनी हिरासत को गैरकानूनी बताया। उन्होंने कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

आशुतोष रंका ने कहा, “हम कोई खतरनाक अपराधी नहीं हैं; हम विरोध करने के लिए नरेंद्र मोदी या अमित शाह के घर नहीं जा रहे हैं। तय जगह पर विरोध करने से शांति भंग नहीं होती।”

सौरव दास ने SIR के मुद्दे पर राजनीतिक एकजुटता की अपील करते हुए कहा: “विचारधारा से परे, सभी राजनीतिक दलों को SIR के मुद्दे पर एकजुट होना चाहिए। अगर वोट देने का अधिकार छीन लिया जाता है, तो यह किसी भी पार्टी के लिए अच्छा नहीं है।”

सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को सामान्य सेवाएं जारी रखने का निर्देश दिया

विरोध प्रदर्शनों के दौरान लगाई गई पाबंदियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। यह नोटिस मेट्रो और ट्रेन सेवाओं के संबंध में कोर्ट के निर्देशों के कथित उल्लंघन पर अवमानना ​​की कार्यवाही की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया गया।

बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि दिल्ली मेट्रो अपने सामान्य शेड्यूल के अनुसार चले और कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए इंटरनेट सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी रहें।

कोर्ट ने यह भी कहा कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य लोगों को उनके पेशेवर कर्तव्यों का पालन करने से नहीं रोका जाना चाहिए।

बता दें कि दिल्ली मेट्रो ने रविवार को सामान्य कामकाज फिर से शुरू कर दिया, हालांकि मुख्य रास्तों पर भारी बैरिकेडिंग अभी भी जारी थी।

प्रदर्शनकारी कई जगहों पर इकट्ठा हुए और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी की। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस की बसों में बैठाकर ले जाते हुए भी देखा गया।

जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे लोगों में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और क्रांतिकारी युवा संगठन (KYS) जैसे छात्र संगठनों के सदस्य भी शामिल थे। इन सभी को हिरासत में लिया गया।

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Delhi Traffic Advisory: आज घर से निकलने से पहले जान लें ट्रैफिक एडवाइजरी, दिल्ली की 25 से ज्यादा सड़कों पर रहेगा डायवर्जन

Delhi Police Traffic Advisory: कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन और दिल्ली में कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली में 12 अक्टूबर को कई प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित रह सकती है। ट्रैफिक पुलिस ने 12 अक्टूबर के लिए एक अहम ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने कई जगहों पर डायवर्जन की तैयारी की है, जो जरूरत के अनुसार सुबह 6 बजे से लागू होगें। ऐसे में एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या ISBT जाने वाले लोगों को घर से निकलने से पहले ट्रैफिक अपडेट जरूर देख लेना चाहिए।

सुबह 6 बजे से होगा डायवर्जन

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, जरूरत पड़ने पर सुबह 6 बजे से कई रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया जाएगा। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अगर जरूरी ना हो तो यात्रा से बचें और अगर रेलवे स्टेशन, ISBT या एयरपोर्ट जाना जरूरी है तो घर से थोड़ा जल्दी निकलें। खासकर नई दिल्ली और सेंट्रल दिल्ली से होकर जाने वाले लोगों को एक्स्ट्रा टाइम लेकर चलने की सलाह दी गई है। ऐसे में अगर आज आप ऑफिस, कॉलेज या बच्चों को स्कूल छोड़ने जा रहे हैं तो सबसे पहले ट्रैफिक एडवाजरी का अपडेट जरूर जान लें।

इन रास्तों पर होगा डावर्जन

ट्रैफिक प्रभावित होने वाले प्रमुख स्थानों में शंकर रोड-वंदे मातरम टी-पॉइंट, धौला कुआं फ्लाईओवर, झंडेवालान, पंचकुइयां, मंडी हाउस, डॉ. दिनेश नंदिनी डालमिया चौक, राम चरण अग्रवाल चौक, मिंटो रोड-डीडीयू मार्ग, गुरु नानक चौक, चेम्सफोर्ड रोड, कनॉट प्लेस, लोधी रोड फ्लाईओवर, नीला गुम्बद, मदरसा टी-पॉइंट, सम्राट होटल, सरदार पटेल मार्ग-पंचशील मार्ग, भीकाजी कामा प्लेस, मोती बाग फ्लाईओवर, रिंग रोड-सैन मार्टिन मार्ग, अशोका रोड-जंतर मंतर रोड, विंडसर पैलेस, टॉल्स्टॉय-जनपथ क्रॉसिंग, रेल भवन, जय सिंह रोड-संसद मार्ग, बाराखंबा रोड, गोल डाकखाना, पटेल चौक और आरएमएल अस्पताल के आसपास के रास्ते शामिल हैं।

पुलिस ने बताया कि ट्रैफिक की स्थिति के अनुसार इन डायवर्जन और प्रतिबंधों में बदलाव किया जा सकता है। इसलिए लोगों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले ट्रैफिक का ताजा अपडेट जरूर देखें और जरूरत पड़ने पर दूसरे रास्ते का इस्तेमाल करें।

 

CJP कल मांगेगी परमिशन

CJP ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी के नेता आशुतोष रंका ने बताया कि सोमवार सुबह 10 बजे वह सौरव दास और संगठन के अन्य सदस्यों के साथ पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन जाएंगे। वहां दिल्ली पुलिस से प्रदर्शन के लिए तारीख और अनुमति देने का अनुरोध किया जाएगा। रंका के मुताबिक, अगर पुलिस 24 घंटे के अंदर प्रदर्शन की तारीख नहीं देती है, तो संगठन अपने स्तर पर प्रदर्शन की घोषणा करेगा।

हवा में था विमान…अचानक निकलने लगा धुआं, दिल्ली से चेन्नई जा रही IndiGo फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग

ट्रम्प बोले- रूस और यूक्रेन में एनर्जी सीजफायर हुआ:एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमला नहीं करेंगे; समझौता न तोड़ने की चेतावनी दी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बताया है कि रूस और यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए सहमत हो गए हैं। उन्होंने रविवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि सीजफायर तत्काल प्रभाव से लागू होगा और दोनों देशों को इसका पालन करना चाहिए। हालांकि, ट्रम्प ने यह नहीं बताया कि सीजफायर कितने समय तक लागू रहेगा। रूस और यूक्रेन की ओर से इस समझौते की आधिकारिक पुष्टि और इसकी शर्तों की जानकारी भी सामने नहीं आई है। रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमलों से ट्रम्प नाराज ट्रम्प रूस की तेल रिफानरियों पर यूक्रेन के हमलों को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने शनिवार को इन हमलों की आलोचना करते हुए कहा कि इन हमलों से दुनिया में ईंधन की समस्या बढ़ सकती है। दरअसल, यूक्रेन रूस की तेल से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बना रहा है। इससे रूस की तेल से होने वाली कमाई और उसकी सेना तक ईंधन पहुंचाने की व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला शुरू किया था। तब से दोनों देशों के बीच युद्ध जारी है। जेलेंस्की बोले थे- रूस हमले रोके तो हम भी हमला बंद करेंगे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा था कि अगर रूस यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोक देता है, तो यूक्रेन भी रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले बंद करने को तैयार होगा। उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा था कि तनाव कम करने के लिए दोनों देशों को एक साथ कदम उठाने होंगे और इसके लिए पक्की सुरक्षा गारंटी भी जरूरी है। जेलेंस्की ने चुनाव कराने के लिए 2 महीने के सीजफायर की मांग रखी जेलेंस्की ने कहा है कि अगर ट्रम्प और रूसी राष्ट्रपति पुतिन यूक्रेन में चुनाव चाहते हैं, तो रूस को 60 दिन के लिए युद्ध रोकना होगा। जेलेंस्की ने कहा कि इस दौरान पूरी तरह सीजफायर लागू होने पर यूक्रेन चुनाव कराने के लिए तैयार है। 11 अक्टूबर को ABC न्यूज को दिए इंटरव्यू में जेलेंस्की ने कहा कि देश का अगला नेता कौन होगा, यह फैसला यूक्रेन की जनता करेगी। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में मार्शल लॉ लागू होने के कारण फिलहाल चुनाव नहीं कराए जा सकते। रूस के हमले के बाद देश में मार्शल लॉ लगाया गया था। जेलेंस्की बोले- पुतिन को रोकना ज्यादा मुश्किल जेलेंस्की ने कहा कि कुछ नेता युद्ध जारी रहने के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, क्योंकि वे पुतिन को रोकने का तरीका नहीं खोज पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दूसरों पर दबाव डालने के मुकाबले पुतिन को रोकना ज्यादा मुश्किल है। अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतों के लिए यूक्रेन के हमलों को जिम्मेदार ठहराने वाले ट्रम्प के दावे को भी जेलेंस्की ने खारिज किया। उन्होंने कहा कि कीमतें बढ़ने की वजह मध्य पूर्व में युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी है। जेलेंस्की ने उम्मीद जताई कि अमेरिका, यूरोप और यूक्रेन मिलकर रूस को रोकने की कोशिश जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को अमेरिकी मदद की उम्मीद है, लेकिन वह अपनी आजादी और स्वतंत्रता की रक्षा भी करता रहेगा। खबर अपडेट हो रही है…

ऐसा प्रोटेस्ट हुआ कि पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में लगाना पड़ गया आपातकाल! वहां क्यों मचा है बवाल?

पाकिस्तान में इमरान खान के समर्थकों के विरोध और बढ़ती हिंसा के बीच रविवार को खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लगा दी गई। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने देश के उत्तरी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और बढ़ते आतंकी हमलों का हवाला देते हुए आपातकाल की घोषणा की है। राष्ट्रपति ने तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार को भी बर्खास्त कर दिया। राष्ट्रपति के इस फैसले का असर तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। बता दें इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर उनके हजारों समर्थक खैबर पख्तूनख्वा में मार्च कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी देश की खराब आर्थिक स्थिति को लेकर भी सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ने लगाया इमरजेंसी

इमरजेंसी लागू होने के बाद पाकिस्तान की केंद्र सरकार को प्रांत के प्रशासन पर ज्यादा अधिकार मिल गए हैं। ये फैसला संविधान के दो सुरक्षा प्रावधानों के तहत लिया गया। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कानून-व्यवस्था की स्थिति और सरकारी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत बेनतीजा रहने के बाद मिली सिफारिशों के आधार पर इस आदेश पर हस्ताक्षर किए। राष्ट्रपति कार्यालय ने आदेश पर उनके हस्ताक्षर वाली तस्वीर भी जारी की है।

खैबर पख्तूनख्वा की बढ़ाई गई सुरक्षा

AFP के एक रिपोर्टर के अनुसार, रविवार को खैबर पख्तूनख्वा की राजधानी पेशावर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी, जबकि प्रांत के कई अन्य शहरों में भी सड़कों को बंद रखा गया। सरकार के साथ बातचीत विफल होने के बाद PTI समर्थकों ने करीब एक सप्ताह पहले प्रांत के अलग-अलग कस्बों और शहरों से गुजरते हुए ‘लॉन्ग मार्च’ शुरू किया था।

PTI ने किया विरोध

खैबर पख्तूनख्वा को इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) का मजबूत गढ़ माना जाता है। रविवार को उठाए गए संवैधानिक कदमों के बाद प्रांत की PTI सरकार के अधिकार सीमित हो जाएंगे। PTI के चेयरमैन गौहर अली खान ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे गंभीर राजनीतिक भूल और लोकतंत्र के खिलाफ उठाया गया कदम बताया। उन्होंने X पर लिखा कि, ‘लोग अपने अधिकारों के खिलाफ उठाए जा रहे ऐसे कदमों को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।’

2023 से जेल में बंद है इमरान खान

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और मशहूर क्रिकेटर इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, देशद्रोह और हिंसा भड़काने समेत कई मामले दर्ज हैं। ये मामले मई 2023 में हुए बड़े सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद सामने आए थे। वहीं, इमरान खान और उनकी कानूनी टीम ने सभी आरोपों को गलत बताया। उनके मुताबिक, ये मामले राजनीतिक बदले की भावना से बनाए गए और इनका उद्देश्य इमरान की लोकप्रियता को नुकसान पहुंचाना है।

बाचतीच हुई फेल

पाकिस्तान सरकार ने PTI के साथ बातचीत में इमरान खान की मांगों को खैबर पख्तूनख्वा की सुरक्षा से जोड़ दिया था। खान के समर्थक चाहते थे कि उन्हें अपने डॉक्टरों से मिलने की अनुमति दी जाए। लेकिन 4 अक्टूबर को सरकार और PTI के बीच बातचीत सफल नहीं हो सकी, जिसके बाद समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। वहीं, पाकिस्तान ने खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में बढ़ते हमलों के लिए अफगानिस्तान से होने वाली आतंकी गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, तालिबान सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पाकिस्तान पर अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन करने और आम लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।

Delhi CJP Protest: माकपा सांसद संग मारपीट के बाद सड़क पर घायल छोड़ने का आरोप, कौन हैं MP जॉन ब्रिटास?

Delhi CJP Protest: राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया यानी CPI-M (मार्क्सवादी) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास को हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया है। CPI-M ने रविवार (11 अक्टूबर) को आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने उनके सांसद के साथ बर्बरतापूर्ण तरीके से मारपीट की और बाद में उन्हें सड़क किनारे छोड़ दिया। पार्टी के मुताबिक, उस समय ब्रिटास घायल थे। उन्हें चलने में भी परेशानी हो रही थी। हालांकि, सांसद को चोट कैसे और कहां लगी, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

माकपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो शेयर करते हुए दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। पार्टी के अनुसार, वीडियो में ब्रिटास दिल्ली पुलिस की बस के पास बैठे नजर आ रहे हैं। एक व्यक्ति उन्हें उठने और चलने में मदद करता दिखाई देता है। वीडियो में एक पुलिसकर्मी भी उन्हें ऑटोरिक्शा तक पहुंचने में सहायता करता नजर आ रहा है।

जंतर-मंतर की ओर मार्च के दौरान हिरासत में लिए गए सांसद

जानकारी के मुताबिक, रविवार को ब्रिटास उन कई प्रदर्शनकारियों में शामिल थे, जिन्हें दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित इनर सर्कल और राजीव चौक से जंतर-मंतर की ओर मार्च करने के दौरान सुरक्षा कर्मियों ने हिरासत में लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बुलाए गए इस प्रदर्शन का रविवार को दूसरा दिन था।

माकपा ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने सांसद के साथ दुर्व्यवहार किया। पार्टी ने अपनी X पोस्ट में कहा कि दिल्ली पुलिस ने सभी सीमाएं पार कर दी हैं। हालांकि, ब्रिटास को लगी चोटों की परिस्थितियों और पुलिस के साथ कथित झड़प के पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

शनिवार को भी हिरासत में लिए गए थे जॉन ब्रिटास

जॉन ब्रिटास को शनिवार को भी प्रदर्शन के पहले दिन हिरासत में लिया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, उस दिन दिल्ली पुलिस ने करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिया था। कस्टडी में लिए गए नेताओं में चार पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल बताए गए। प्रदर्शन CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित किया गया था। रविवार को भी प्रदर्शनकारियों के मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई जारी रही।

माकपा के राज्यसभा सदस्यों जॉन ब्रिटास और ए. ए. रहीम ने शनिवार को मुंबई से दिल्ली पहुंचने पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और अन्य लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रविवार को आलोचना की। CJP संस्थापक दीपके और दो अन्य नेताओं सौरव दास तथा आशुतोष रांका को शनिवार को इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोरट् पर विमान के उतरने के बाद दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर फ्लाइट के अंदर ही हिरासत में ले लिया था।

ब्रिटास ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा कि CJP नेताओं के साथ अपहरणकर्ताओं या कथित तौर पर बड़े वित्तीय घोटालों को अंजाम देने वालों से भी बुरा व्यवहार किया गया। ब्रिटास ने पत्रकारों के खिलाफ की गई कार्रवाई की भी निंदा की और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए यह सब कर रहे हैं। रहीम ने आरोप लगाया कि कॉजपा के कई कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों को प्रताड़ित किया गया।

केजरीवाल के साथ भी धक्का-मुक्की का आरोप

इस मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी अपने राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके अरविंद केजरीवाल के साथ शनिवार को कथित तौर पर धक्का-मुक्की किए जाने का आरोप लगाया था। पार्टी के अनुसार, हिरासत में लिए जाने के बाद केजरीवाल को जाफरपुर कलां पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां उन्हें करीब छह घंटे तक रखा गया। फिलहाल, जॉन ब्रिटास के साथ कथित मारपीट को लेकर माकपा के आरोपों और सामने आए वीडियो के आधार पर मामला चर्चा में है।

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जॉन ब्रिटास कौन हैं?

डॉ. जॉन ब्रिटास केरल से आने वाले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) के वरिष्ठ नेता, राज्यसभा सांसद और अनुभवी पत्रकार हैं। वह मलयालम मीडिया जगत का भी जाना-पहचाना चेहरा हैं। जॉन ब्रिटास केरल से CPI(M) के टिकट पर राज्यसभा के लिए चुने गए थे। उन्होंने 24 अप्रैल 2021 को राज्यसभा सांसद के रूप में अपना कार्यकाल शुरू किया। राजनीति में आने से पहले उन्होंने तीन दशक से अधिक समय तक पत्रकारिता और टीवी के क्षेत्र में काम किया। वह मलयालम न्यूज चैनल कैराली टीवी नेटवर्क (Kairali TV) के मैनेजिंग डायरेक्टर और मुख्य संपादक भी रहे हैं।

Tanishaa Mukerji: ‘यहां से जाइए हमें आपकी जरूरत नहीं’, प्रोटेस्ट के दौरान एलीट हिंदू की अंधी नफरत देख शॉक्ड हुईं तनीशा मुखर्जी

Tanishaa Mukerji: काजोल की बहन और एक्ट्रेस तनीषा एस मुखर्जी अक्सर अपने X अकाउंट पर अलग-अलग मुद्दों पर अपनी बेबाक राय शेयर करती रहती हैं। जब देश में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, तो केंद्र सरकार की भी आलोचना हो रही है। इसी बीच तनीषा ने सोशल मीडिया पर कुछ ‘अच्छे-खासे पढ़े-लिखे और खुद को ऊंचा समझने वाले’ आलोचकों पर ‘अंधी नफरत’ के साथ काम करने का आरोप लगाया।

तनीषा ने क्या कहा

हालांकि तनीषा ने विरोध प्रदर्शनों का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया और न ही अपनी पोस्ट के लिए कोई संदर्भ दिया। लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर किसी को अपने देश का साथ देना चाहिए। X पर उन्होंने लिखा, “मैं कुछ ऐसे तथाकथित पढ़े-लिखे और खुद को ऊंचा समझने वाले हिंदुओं की अंधी नफरत देखकर सचमुच हैरान हूं, जो अभी भी पूरी तरह से ब्रिटिश सोच में जी रहे हैं! अगर आपको लंदन और अमेरिका इतना ही पसंद है तो प्लीज चले जाइए! हमें यहां आपकी जरूरत नहीं है कि आप हमें नीचा दिखाएं! हां बहुत सारी समस्याएं हैं, लेकिन समय लगता है और देखिए पिछले 10 सालों में हम कहां पहुंच गए हैं!”

‘बातें लॉजिकल और तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए’

तनीषा ने आगे कहा कि लोग किसी भी व्यक्ति को इस आधार पर तुरंत किसी कैटेगरी में डाल देते हैं कि वे किस राजनीतिक पार्टी का समर्थन करते हैं, जिससे आपस में मतभेद पैदा होते हैं। “अगर हम अपनी सरकार का समर्थन करते हैं, तो हम अंधभक्त और अनपढ़ कहलाते हैं। लेकिन अगर हम अमेरिका और जर्मनी से इस देश को बर्बाद करने की कोशिश करने वाले गुटों का समर्थन करते हैं, तो हम ‘कूल’ और ‘वोके’ (जागरूक) कहलाते हैं!

आपकी सोच, आपके ध्यान और आपके विचारों को लेकर एक जंग चल रही है। लेकिन प्लीज मीडिया से इतने भी प्रभावित न हों कि आप अपनी सामान्य समझ (कॉमन सेंस) का इस्तेमाल करना ही छोड़ दें! बातें लॉजिकल और तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। कानूनों से चलने वाला समाज ही हमें सुरक्षित रखता है।

कुछ दिन पहले तनीषा मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुई थीं। वहां उन्होंने पैपराजी और आम जनता से अपील करते हुए कहा था कि वे जुहू के SNDT ग्राउंड में मुखर्जी परिवार द्वारा आयोजित ‘नॉर्थ बॉम्बे सार्वजनीन दुर्गा पूजा’ के दौरान मर्यादा बनाए रखें।

तनीषा के करियर के बारे में

तनुजा की बेटी तनीषा ने 2003 में करण नाथ और डिनो मोरिया के साथ फिल्म ‘Sssshhh’ से बॉलीवुड में धमाकेदार एंट्री की थी। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही। इसके बाद उन्होंने ‘सरकार’, ‘नील ‘एन’ निक्की’ और तमिल हिट फिल्म ‘उन्नाले उन्नाले’ में काम किया। ‘उन्नाले उन्नाले’ के लिए उन्हें विजय अवॉर्ड के लिए नॉमिनेशन भी मिला। 2013 में ‘बिग बॉस 7’ में फर्स्ट रनर-अप बनकर उन्हें काफी लोकप्रियता मिली, जहां अरमान कोहली के साथ उनके रिश्ते ने खूब सुर्खियां बटोरीं थीं।

इसके बाद उन्होंने ‘फियर फैक्टर: खतरों के खिलाड़ी 7’ (2016) में हिस्सा लिया और ‘झलक दिखला जा 11’ में भी एक कंटेस्टेंट के तौर पर नजर आईं। बाद में वह कॉमेडी शो ‘गैंग्स ऑफ हसीपुर’ में जज के तौर पर भी दिखीं। तनीषा आखिरी बार 2024 की फिल्म ‘लव यू शंकर’ में नजर आई थीं।

Honda 0 Alpha EV spied testing ahead of expected debut by end-2026

Honda 0 Alpha EV spied testing ahead of expected debut by end-2026
Honda 0 Alpha SUV spied

Following the Elevate facelift, Honda’s next launch for India will be the all-new 0 Alpha electric SUV – the brand’s first all-electric vehicle for our market. Honda is expected to reveal the official name later this year and also perhaps showcase the production-spec model before it goes on sale by early 2027. Ahead of its launch, a heavily camouflaged prototype of 0 Alpha SUV has recently been spied testing on our roads. 

  • India-built model planned for global markets, including Japan
  • To be manufactured at the Tapukara plant in Rajasthan
  • No technical details available as of yet 

Honda 0 Alpha SUV spied: what to expect?

The Honda 0 Alpha was first preview by a concept about exactly a year ago at the Japan Mobility Show 2025. And looking at these camouflaged spy shots, the radical shape doesn’t seem to have changed at all. It looks nothing like any existing Honda, with the characteristic design element being the near-vertical rear end with a thick C-pillar area, almost reminiscent of an MPV. It gets a large rear windscreen that’ll likely be wrapped around by an LED light bar, while the lower section gets a protruding bumper and is expected to feature a diffuser like element. 

Image Credit: Ferrarirules86 via X.

At the debut of the concept, Honda had said the design was already near production-ready, so much of the details, including the lighting signatures and the glass panels could be seen on the final model. The front ‘grille’ area is expected to sport an illuminated Honda logo and a charging port, framed on the side and above by the headlights.

A previous sighting of a camouflaged test mule has also given us a look at the interior of the upcoming electric SUV. The most prominent element in the cabin is a massive central infotainment touchscreen mounted atop the dashboard. To its right sits a much smaller digital driver’s display, ahead of which there’s a three-spoke flat-bottomed steering wheel with paddleshifters for regeneration. The 0 Alpha’s interior incorporates an array of buttons on the centre console, seemingly for functions such as climate control and ventilated seats.

Image Credit: pxrtth.gpt via Instagram 

The Honda 0 Alpha SUV is expected to have a wheelbase of about 2700-2800mm, with the priority being maximising interior space. The upright rear tailgate also hints at good luggage space and interior room.

Honda 0 Alpha technical details 

Technical details on the 0 Alpha are quite scarce at the moment, but the brand has previously confirmed that it will be offered with two battery pack options. Both will be LFP batteries, likely ranging in the size of 65kWh-75kWh units. At launch, the Honda 0 Alpha SUV is expected to use a single-motor, front-wheel-drive layout. 

The upcoming electric SUV will be manufactured in India, with Honda’s Tapukara plant in Rajasthan expected to serve as the production base. It’s expected to go on sale by early 2027, with India and Japan among the initial markets. The 0 Alpha will rival electric midsize SUVs such as the Mahindra BE 6, MG ZS EV, Hyundai Creta Electric, Tata Sierra EV, Maruti Suzuki e Vitara and Toyota Urban Cruiser Ebella.

CJP Protest News: दिल्ली में इस प्रोटेस्टर को जिन 4 ने पीटा उनकी पहचान हुई और पुलिस ने ट्रेस भी कर लिया! अब होगा ये एक्शन

CJP Protest News: राजधानी में एक प्रदर्शनकारी के साथ कथित मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। दिल्ली पुलिस ने मामले में चार लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के दौरान सामने आई थी। पुलिस के मुताबिक, घटना दिल्ली के डीडीयू मार्ग पर हुई, जो कमला मार्केट थाना क्षेत्र में आता है। मामले में किसी औपचारिक शिकायत का इंतजार किए बिना पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है।

दिल्ली पुलिस ने रविवार को X पर लिखा, “सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो का दिल्ली पुलिस (कमला मार्केट थाना) ने खुद संज्ञान लिया। इस वीडियो में चार लोग एक पुरुष प्रदर्शनकारी के साथ मारपीट करते हुए दिख रहे थे। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।”

पुलिस ने सोशल मीडिया पोस्ट में आगे लिखा, “घटना में शामिल चारों लोगों की पहचान कर ली गई है और उनका पता लगा लिया गया है। कानून के मुताबिक आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। दिल्ली पुलिस हिंसा की घटनाओं के खिलाफ उचित कार्रवाई करने और ऐसी शिकायतों पर तुरंत ध्यान देने के लिए प्रतिबद्ध है।”

कौन हैं मारपीट के आरोप में गिरफ्तार चारों आरोपी?

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान रमन सैनी (50), विवेकानंद उर्फ विवेक (32), कपिल कुमार (27) और रविंदर सिंह उर्फ गोविंद हिंदू (35) के रूप में हुई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, चारों ने खुद को हिंदू रक्षा दल से जुड़ा हुआ बताया है। इस संबंध में सामने आई जानकारी आरोपियों के कथित जुड़ाव पर आधारित है। पुलिस ने वीडियो सामने आने के बाद उसकी जांच की और सुरक्षा व्यवस्था में तैनात कर्मियों से जानकारी जुटाई। इसके बाद घटनास्थल की पहचान डीडीयू मार्ग के रूप में की गई। शुरुआती दौर में वीडियो कहां का है, यह स्पष्ट नहीं था।

बिना शिकायत के पुलिस ने क्यों लिया संज्ञान?

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, घटना को लेकर पुलिस के पास उस समय तक पीड़ित या किसी अन्य व्यक्ति अथवा संगठन की ओर से औपचारिक शिकायत नहीं पहुंची थी। हालांकि, वीडियो के तेजी से वायरल होने और आरोपियों के दिल्ली-एनसीआर से बाहर जाने की आशंका संबंधी जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई की। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आशंका थी कि आरोपी क्षेत्र छोड़कर कहीं और जा सकते हैं। इसके बाद पुलिस ने उनकी पहचान की और उन्हें हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

वायरल वीडियो में क्या दिखाई दिया?

सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में कुछ लोगों को प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की और मारपीट करते हुए देखा जा सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, वीडियो में युवाओं को धक्का देते और पीटते हुए दिखाया गया है। इसमें महिलाओं के साथ भी कथित तौर पर धक्का-मुक्की और मारपीट होती दिखाई देती है।

वीडियो सामने आने के बाद इसे कई सोशल मीडिया अकाउंट्स ने साझा किया। इनमें युवा कांग्रेस, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और CJP से जुड़े अकाउंट भी शामिल बताए गए हैं। घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। हालांकि, वायरल वीडियो अपने आप में घटना के सभी पहलुओं या आरोपियों की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम प्रमाण नहीं है। इसकी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

CJP के प्रदर्शन के दौरान सामने आई घटना

यह मामला दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए CJP के प्रदर्शन से जुड़ा है। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर पार्टी विरोध कर रही है। प्रदर्शन के दौरान राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी। पुलिस ने कई स्थानों पर लोगों को जुटने से रोकने के लिए कार्रवाई की थी। इसी घटनाक्रम के बीच डीडीयू मार्ग पर कथित मारपीट का वीडियो सामने आया, जिसने पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी।

अब आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?

चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले में पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। जांच के दौरान पुलिस घटना के वीडियो, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल कर सकती है। इसके आधार पर यह स्पष्ट किया जाएगा कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और किसकी क्या भूमिका थी।

दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में कहा है कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कानून के अनुसार की जा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में आरोपियों के खिलाफ दर्ज FIR की धाराओं, उन्हें अदालत में पेश किए जाने या अदालत के किसी आदेश का विस्तृत डिटेल्स नहीं दिया गया है।

दीपके, रांका और दास रिहा

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने के बाद एहतियातन गिरफ्तार किया गया था। लेकिन रविवार को उन्हें कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के बाद रिहा कर दिया गया।

CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने बताया कि उन्हें इस शर्त पर रिहा किया गया है कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे। इससे पहले, रविवार सुबह पुलिस ने बताया था कि उसने राष्ट्रीय राजधानी में CJP नेताओं को उनका विमान उतरने के बाद हिरासत में ले लिया था और फिर उन्हें एहतियातन गिरफ्तार कर लिया गया था।

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सूत्रों के अनुसार, CJP नेताओं के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 (शांति बनाए रखने के लिए प्रतिभूति) और धारा 170 (संज्ञेय अपराधों को रोकने के लिए गिरफ्तारी) के तहत कार्रवाई की गई। शनिवार को CJP नेताओं को हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई दिल्ली में सुरक्षा के अत्यधिक कड़े इंतजामों के बीच हुई, जहां प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकने के लिए विभिन्न स्थानों पर 7,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था।