भारतीय हाई कमिश्नर बोले- हसीना को पनाह देना मजबूरी थी:उन्हें बांग्लादेश भेजने की प्रकिया जारी; तख्तापलट के बाद 2 साल से भारत में पूर्व PM

बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भारत ने कहा कि उन्हें पनाह देना भारत की मजबूरी थी। यह बात भारत के बांग्लादेश में हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने शनिवार कही है। दिनेश त्रिवेदी बे ऑफ बंगाल कन्वर्सेशन 2026 कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान एक छात्र ने हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भी सवाल पूछा। जवाब में त्रिवेदी ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया जारी है। हसीना को बांग्लादेश कब भेजा जाएगा, इसकी समयसीमा नहीं बताई जा सकती। सत्ता से हटने के बाद वे 5 अगस्त 2024 को भारत आई थीं। बीते दो साल से हसीना भारत में रह रहींं हैं। ‘हसीना को भारत आने से रोकने का विकल्प नहीं था’ हसीना के भारत आने के फैसले पर भी त्रिवेदी ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2024 को जब हसीना ने ढाका छोड़ा, तब वह अभी भी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थीं और वहां हालात तेजी से बदल रहे थे। त्रिवेदी ने कहा कि उस समय भारत के पास हसीना को दिल्ली में उतरने की अनुमति देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। अगर भारत उन्हें उतरने की अनुमति नहीं देता तो स्थिति अलग हो सकती थी। हसीना को भारतीय सेना नहीं लाई थी त्रिवेदी ने यह भी स्पष्ट किया कि हसीना को भारत भारतीय वायुसेना या भारतीय सेना नहीं लाई थी। 5 अगस्त को उन्हें पहले बांग्लादेश के सैन्य हेलिकॉप्टर से उनके आवास के पास से निकाला गया। इसके बाद वह बांग्लादेश एयरफोर्स के विमान से भारत पहुंचीं। भारत-बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण संधि है भारत और बांग्लादेश ने 2013 में प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें कुछ परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को दूसरे देश को सौंपने से इनकार करने के प्रावधान हैं। इनमें राजनीतिक प्रकृति के अपराध से जुड़े मामले भी शामिल हैं। हसीना पर बांग्लादेश में 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और मौतों से जुड़े गंभीर आरोप हैं। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार उन्हें वापस लाकर कानूनी कार्रवाई करना चाहती है। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने नवंबर 2025 में हसीना और उनके तत्कालीन गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को मौत की सजा सुनाई थी। 15 सितंबर 2026 को हसीना सरकार के कुछ पूर्व सहयोगियों को भी सजा सुनाई गई। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की जांच के मुताबिक, जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन के दौरान करीब 1,400 लोगों की मौत हुई थी। हसीना ने कहा- दिसंबर में लौटूंगी हसीना ने 5 अगस्त 2026 को कहा था कि वह दिसंबर तक बांग्लादेश लौटेंगी। CNN-News18 को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वह कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें सुरक्षा, वकील तक पहुंच, अपना बचाव करने का अधिकार, स्वतंत्र न्यायपालिका और निष्पक्ष सुनवाई चाहिए। उन्होंने BNP के साथ किसी भी बैकचैनल बातचीत से इनकार किया था और कहा था कि भारत अब भी उनका दोस्त है। भारत बोला- बांग्लादेश अपने फैसले खुद ले शेख हसीना का भारत में रहना दोनों देशों के बीच एक संवेदनशील मुद्दा है। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार भारत से हसीना को वापस भेजने की मांग करती रही है। वह यह भी चाहती है कि हसीना भारत से बांग्लादेश की राजनीति में दखल न दें। भारत ने कहा है कि बांग्लादेश एक आजाद देश है। उसे यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वह किस देश के साथ कैसे रिश्ते रखेगा। ———————-

ममता बनर्जी के पैर में लगी चोट नकली थी? फ्रैक्चर केस में शुभेंदु अधिकारी का बड़ा दावा, बंगाल सरकार ने जांच के दिए आदेश

Mamata Banerjee Leg Injury: पश्चिम बंगाल सरकार 2021 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पैर में लगी चोट के कथित झूठे दावों की फिर से जांच शुरू करेगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार (3 अक्टूबर) को यह बड़ी घोषणा की। इसी के साथ अधिकारी ने नंदीग्राम में 2021 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी के पैर में लगी चोट से जुड़े विवाद को फिर से हवा दी है। अधिकारी ने आरोप लगाया है कि बनर्जी ने चोट का नाटक किया था। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज के मेडिकल रिकॉर्ड का हवाला दिया है।

राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अधिकारी ने आरोप लगाया कि बनर्जी ने चुनाव के दौरान अपनी चोट का नाटक किया था। अधिकारी ने बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस द्वारा जारी बनर्जी की मेडिकल रिपोर्ट दिखाते हुए कहा, “ममता बनर्जी ने 2021 में नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान पैर में चोट लगने का नाटक किया था। हमारे पास मेडिकल रिपोर्ट है, जिसमें कहा गया है कि फ्रैक्चर या हड्डी खिसकने का कोई प्रमाण नहीं है। हम इस मामले की जांच शुरू करेंगे।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “उनके झूठे आरोप से नंदीग्राम के लोगों का अपमान हुआ। 9 अक्टूबर के बाद आदर्श आचार संहिता हटने पर मैं इस बारे में और जानकारी सामने रखूंगा। मैं कल किए गए अपने दावों के समर्थन में आज यह बात कह रहा हूं।” नंदीग्राम में छह अक्टूबर को उपचुनाव होना है। जबकि इसके नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।

मार्च, 2021 में लगी थी पैर में चोट

सीएम अधिकारी ने इससे पहले नंदीग्राम-2 विकासखंड के बिरुलिया बाजार में एक रैली को संबोधित करते हुए यह दावा किया था। यही वह स्थान है, जहां पांच साल पहले बनर्जी घायल हुई थीं। तत्कालीन मुख्यमंत्री बनर्जी को 10 मार्च, 2021 को चुनाव प्रचार के दौरान नंदीग्राम के बिरुलिया के रेयापाड़ा इलाके में बाएं पैर और कमर में चोट लगी थी। बनर्जी ने शुरुआत में कहा था कि कुछ अज्ञात लोगों ने जानबूझकर उन्हें उनकी कार के दरवाजे की ओर धक्का दिया, जिससे दरवाजा उनके बाएं पैर से जोर से टकराया और भारी भीड़ के बीच पैर चोटिल हो गया।

बाद में अस्पताल से जारी एक वीडियो संदेश में बनर्जी ने बताया था कि समर्थकों का अभिवादन करते समय भारी भीड़ उनकी कार के पास आ गई थी, जिससे उनका पैर दब गया और उन्हें चोट लगी। उन्हें आधिकारिक तौर पर बाएं टखने और पैर की हड्डियों में गंभीर चोट के साथ-साथ दाहिने कंधे, हाथ, गर्दन और कमर में चोट एवं दर्द की जानकारी दी गई थी। इसके बाद उन्हें कोलकाता लाया गया और राज्य संचालित एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया।

विस्तृत जांच के बाद बनर्जी को 12 मार्च को अस्पताल से छुट्टी दी गई। उस समय उनके बाएं पैर पर प्लास्टर था और उन्होंने बाद में व्हीलचेयर पर बैठकर चुनाव प्रचार जारी रखा। इन चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 294 में से 216 सीटें जीतकर बड़ी जीत दर्ज की थी। जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) 77 सीटों पर सिमट गई थी।

रिपोर्ट में क्या है?

अधिकारी द्वारा शेयर किए गए मेडिकल दस्तावेजों से पता चलता है कि 11 मार्च, 2021 के सीटी स्कैन में जांच किए गए क्षेत्रों में कथित तौर पर कोई फ्रैक्चर नहीं दिखा। हालांकि, केवल इन रिपोर्टों से यह साबित नहीं होता है कि बनर्जी की कुल चोटें बनावटी थीं। एसएसकेम (SSKM) अस्पताल की उस समय की रिपोर्टों में उनके बाएं टखने और पैर में चोटों के साथ-साथ कंधे, अग्रबाहु (forearm) और गर्दन में चोटों का भी जिक्र था।

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अधिकारी द्वारा घोषित नई जांच से 2021 की घटना से जुड़ी परिस्थितियों की और जांच होने की उम्मीद है। नंदीग्राम उपचुनाव से ठीक पहले यह विवाद फिर से उठ खड़ा हुआ है, जिससे 2021 के चुनाव का घटनाक्रम एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।

Komal Rani-Govinda: ‘जिनकी खुदकी शादियां नहीं बच पा रही वो सिंदूर शादी पर ज्ञान न दें…’, कोमल रानी ने दिव्या खोसला पर किया पलटवार

Komal Rani-Govinda: गोविंदा के साथ लालबागचा राजा जाने पर सिंदूर लगाने को लेकर दिव्या खोसला ने गोविंदा की रूमर्ड गर्लफ्रेंड कोमल रानी स्वर्णकार पर सवाल उठाए थे, जिसका कोमल ने कड़ा जवाब दिया है। इंस्टाग्राम पर एक लंबे नोट में कोमल ने दिव्या का नाम लिए बिना उन कमेंट्स पर नाराजगी जताई। वहीं सुनीता आहूजा पर भी तीखा तंज कसा।

‘अपने हीरो के साथ बाहर जाना कब से शर्म की बात हो गई?’

कोमल ने अपने नोट में उन सेलेब्रिटीज की आलोचना की जो उनके और गोविंदा के नाम को बदनाम कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनके बारे में खुलकर बात करते हैं, जबकि अहम राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर चुप रहते हैं। उन्होंने गोविंदा के साथ लालबागचा राजा जाने का बचाव करते हुए कहा कि यह उनकी आने वाली फिल्म ‘रूपा’ के लिए आशीर्वाद लेने के मकसद से था।

उन्होंने लिखा, “अपने हीरो के साथ गणपति बप्पा के दर्शन करने और अपनी आने वाली फिल्म ‘रूपा’ की सफलता के लिए प्रार्थना करने को शर्म की बात, राष्ट्रीय मुद्दा या दूसरों के लिए ‘दिखावा’ कब से माना जाने लगा? और जब यही तथाकथित सेलेब्रिटीज अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए अपने मेल को-स्टार्स के साथ अलग-अलग सार्वजनिक जगहों पर जाते हैं, तो क्या उन्हें खुद ऐसा करते हुए शर्म नहीं आती?”

‘सिंदूर पर सीख लेने में कोई दिलचस्पी नहीं’

कोमल ने उनके और गोविंदा के रिश्ते पर कमेंट करने वालों पर निशाना साधा और उन पर विवाद का इस्तेमाल करके चर्चा में बने रहने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा, “फिल्म इंडस्ट्री की कुछ अभिनेत्रियां, जिनका करियर ठंडा पड़ चुका है, जिनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर नहीं चल रही हैं, उनके पास अपने फीके पड़ चुके ब्रांड टैग के अलावा कुछ नहीं बचा है। वे दूसरों के चल रहे विवादों में दखल देकर और खुद को लाइमलाइट में बनाए रखने की पुरजोर कोशिश करके चर्चा में बने रहने की कोशिश कर रही हैं।”

सिंदूर वाले कमेंट पर कोमल ने लिखा, “मुझे उन महिलाओं से सिंदूर, शादी या हमारी भारतीय संस्कृति और परंपराओं के बारे में सीख लेने में कोई दिलचस्पी नहीं है जो खुद सिंदूर का मजाक उड़ाती हैं, जिनकी अपनी शादियां टूट रही हैं और जो अपने शादीशुदा रिश्तों की पवित्रता भी बनाए नहीं रख सकतीं।”

कोमल ने ‘मैन-ईटर्स’ पर निशाना साधा

कोमल ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में बिना किसी का नाम लिए, शराब की लत और बेवफाई का जिक्र करते हुए अपने आलोचकों पर भी इशारों-इशारों में निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “मैं ऐसी महिलाओं को खुद को जज करने के लायक नहीं मानती – खासकर उन को जो ऐसे लोगों को आदर्श मानती हैं और उनका समर्थन करती हैं जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी रात-रात भर शराब पीने, दूसरे पुरुषों के साथ कई अफेयर चलाने और बुढ़ापे में भी तीन-तीन पुरुषों के साथ ‘वन-नाइट स्टैंड’ के सपने देखने में बिता दी हो और साथ ही शोहरत पाने के लिए उन पतियों को सबके सामने जलील किया। जिनके साथ वे रहीं और जिनसे उन्हें जिंदगी भर फायदा मिला। सच कहूं तो मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि ये लोग मुझे अच्छा इंसान समझते हैं या बुरा।”

कोमल ने अपना नोट इस बात के साथ खत्म किया कि महिलाएं उनके नाम का इस्तेमाल करके चर्चा में बने रहने की कोशिश न करें। उन्होंने लिखा, “मुझे लगता है कि वे सभी एक ही ग्रुप का हिस्सा हैं और अपनी नाकाम शादियों की निराशा किसी और पर निकाल रही हैं। वे ‘मैन-ईटर्स’ की तरह व्यवहार करती हैं – ऐसी महिलाएं जो अपने पतियों की इज्जत और प्रतिष्ठा को बर्बाद कर देती हैं। लगातार मेरे नाम से जुड़कर चर्चा में बने रहने की कोशिश करना बंद करें। शायद यह कहावत सच है- आपकी इज्जत आपके अपने हाथों में है। ऐसे लोगों को अपनी हद पता होनी चाहिए और दूसरों को इतना नहीं उकसाना चाहिए कि उनका अपना अतीत भी सबके सामने आ जाए।”

दिव्या खोसला ने क्या कहा?

गोविंदा और कोमल उसी दिन लालबागचा राजा के दर्शन करने गए थे, जिस दिन सुनीता आहूजा अकेले पंडाल गई थीं। गोविंदा और कोमल के अफेयर की खबरों के बीच इस बात ने लोगों का ध्यान खींचा। हालांकि गोविंदा ने इन आरोपों को बार-बार नकारा है और कहा है कि कोमल के साथ उनका दिखना उनके प्रोफेशनल रिश्ते और उनकी आने वाली फिल्म ‘रूपा’ से जुड़ा है।

इस बीच दिव्या गोविंदा और सुनीता की मुश्किल भरी शादी पर खुलकर कमेंट कर रही हैं। हाल ही में उन्होंने गोविंदा के साथ लालबागचा राजा जाते समय कोमल के सिंदूर लगाने पर सवाल उठाए और उन पर अपने एजेंडे के लिए धर्म का इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया।

3 बार रहे विधायक, मिला पद्म श्री और ओलंपिक में की भारत की कप्तानी, जानिए पंजाब कांग्रेस के नए बॉस परगट सिंह की पूरी कहानी

पंजाब में कांग्रेस की कमान अब परगट सिंह के हाथ में होगी। ये वही परगट सिंह हैं जिन्होंने हॉकी के मैदान में कई बार भारत का प्रतिनिधित्व किया है। अपनी हॉकी से विरोधी टीम को धूल चटाने वाले परगट सिंह तीन बार विधायक रह चुके हैं। पूर्व ओलंपियन और भारतीय हॉकी कप्तान अब राज्य की राजनीति में सबसे आगे हैं।

पद्मश्री से सम्मानित परगट सिंह जालंधर कैंटोनमेंट सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं। 61 साल के परगट सिंह को शुक्रवार को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले लुधियाना के सांसद अमरिंदर सिंह राजा वारिंग की जगह ली है। पंजाब के दोआबा इलाके के जाट सिख नेता सिंह की यह पदोन्नति राज्य इकाई के नेतृत्व को लेकर कई हफ्तों की अंदरूनी खींचतान के बाद हुई है, जिससे विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के कैंपेन को नुकसान पहुंचने का खतरा था।

विजय इंदर सिंगला थे दौड़ में सबसे आगे

पंजाब के पूर्व मंत्री और हिंदू चेहरा विजय इंदर सिंगला को पंजाब कांग्रेस प्रमुख के पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा था। लेकिन पार्टी हाईकमान ने आखिरकार खिलाड़ी से नेता बने परगट सिंह को चुना क्योंकि वह 2027 के चुनावों से पहले राज्य इकाई के झगड़ते गुटों को साथ लेना चाहता है। लेकिन, सिंह का राजनीतिक करियर हॉकी के मैदान से शुरू हुए सफर का सिर्फ एक हिस्सा है।

खेल से राजनीति का सफर

मार्च 1965 में जालंधर के मीठापुर में जन्मे सिंह ने बतौर हॉकी खिलाड़ी 1992 बार्सिलोना और 1996 अटलांटा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने नेशनल हॉकी टीम की कप्तानी की। देश बेहतरीन हॉकी डिफेंडर रहे सिंह के योगदान के लिए उन्हें 1989 में अर्जुन अवॉर्ड और 1998 में पद्म श्री मिला। अंतरराष्ट्रीय हॉकी से रिटायर होने के बाद, सिंह स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े, और चुनावी पॉलिटिक्स में आने से पहले उन्होंने पंजाब में डायरेक्टर ऑफ स्पोर्ट और सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस के तौर पर काम किया।

शिरोमणि अकाली दल के साथ शुरू हुआ राजनीतिक सफर

परगट सिंह का राजनीतिक सफर शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ शुरू हुआ जब उन्होंने 2012 के पंजाब विधान सभा चुनाव में जालंधर कैंटोनमेंट सीट से चुनाव लड़ा। उन्होंने कांग्रेस कैंडिडेट को 6,000 से ज्यादा वोटों के मार्जिन से हराया। 2016 में, उन्हें एसएडी से सस्पेंड कर दिया गया था। 2017 के विधान सभा चुनाव में वह नवजोत सिंह सिद्धू के फ्रंट ‘आवाज-ए-पंजाब’ का हिस्सा बने। वर्तमान में कांग्रेस से जुड़े सिद्धू को जब पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया, तो सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया। उनकी चुनावी सफलता 2017 के विधानसभा चुनावों में भी जारी रही। उन्होंने अकाली दल के सरबजीत सिंह मक्कड़ को 29,000 से ज्यादा वोटों से हराया। 2022 के चुनावों में भी उन्होंने अपनी विधायकी बरकरार रखी। इस चुनाव में कांग्रेस 117 सदस्यों वाली विधानसभा में 18 सीटों पर सिमट गई थी।

राजनीति में भी कायम है मैदान की आक्रामकता

चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में, सिंह के पास शिक्षा और खेल जैसे अहम मंत्रालय थे। पंजाब से जुड़े मामलों पर अपने विचार साझा करने के लिए जाने जाने वाले सिंह, लॉ एंड ऑर्डर, स्पोर्ट्स, एजुकेशन और अपने चुनाव क्षेत्र से जुड़े मामलों सहित कई मुद्दों पर वर्तमान सरकार पर आक्रामक रहे हैं। 1 जुलाई को, सिंह को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की मैनिफेस्टो कमेटी का सह अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। अभी, वह जम्मू और कश्मीर के इंचार्ज AICC सेक्रेटरी भी हैं।

क्षेत्रीय समीकरणों पर आधारित है पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष का पद

पंजाब में कांग्रेस अध्यक्ष पद पर उनकी तरक्की पार्टी के क्षेत्रीय समीकरण में भी फिट बैठती है। जाट सिख प्रताप सिंह बाजवा पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं। वहीं, जालंधर के सांसद चरणजीत सिंह चन्नी, जो दलित चेहरा हैं, पार्टी की कैंपेन कमेटी के प्रमुख हैं। गुरदासपुर के एमपी सुखजिंदर सिंह रंधावा भी जाट सिख हैं। पार्टी सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस की पंजाब यूनिट के प्रेसिडेंट के तौर पर वारिंग की जगह लेने का फैसला पार्टी के पंजाब के इंचार्ज जनरल सेक्रेटरी सचिन पायलट से मिले ऑर्गेनाइज़ेशनल फीडबैक के बाद लिया गया।

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दिल्ली पुलिस नहीं रोक सकी प्रदर्शन

नई दिल्ली। जंतर मंतर पर पिछली बार हुए प्रदर्शन से सबक लेकर इस बार दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के भरपूर प्रयास किए। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हुए। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग करते हुए हजारों की संख्या में लोग नई दिल्ली में अलग अलग जगहों पर जमा हुए। पुलिस ने लोगों को जंतर मंतर पर पहुंचने से रोकने के लिए कई किलोमीटर पहले से रास्ते बंद कर दिए थे और 11 मेट्रो स्टेशन भी बंद कर दिए थे। फिर भी देर शाम तक हजारों लोग कनॉट प्लेस और आसपास के इलाके में जमा रहे। कई जगह पुलिस के साथ लोगों की झड़प हुई और कई जगह जम कर बवाल हुआ।

शुक्रवार की सुबह से ही जंतर मंतर के आसपास हजारों की संख्या में पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात थे। सुबह सबसे पहले आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और पार्टी के विधायक संजीव झा पहुंचे थे। पुलिस ने उनको तत्काल हिरासत में लेकर बस में बैठाया और वहां से हटा दिया। आप की नेता व पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और आईसा की नेता नेहा बोरा को भी पुलिस ने हिरासत में लेकर वहां से हटाया। पुलिस ने करीब सात सौ लोगों को हिरासत में लिया। सबको जबरदस्ती बसों में भर कर जंतर मंतर से हटाया गया।

पुलिस ने इस प्रदर्शन को रोकने के लिए जंतर मंतर से पांच किलोमीटर दूर कर रास्ते बंद किए थे। लोगों को लोधी रोड पर रोका जा रहा था तो तीन मूर्ति के पास भी रास्ता बंद कर दिया गया था। सेंट्रल दिल्ली के आसपास के सारे मेट्रो स्टेशन बंद थे। कनॉट प्लेस से लेकर पटेल चौक, जीपीओ, टॉल्स्टॉय मार्ग, जंतर मंतर रोड, संसद मार्ग और आसपास की सड़कों पर ट्रैफिक बंद कर दिया गया था।

गौरतलब है कि 30 सितंबर को विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक के नेताओं की बैठक हुई थी, जिसमें दो से आठ अक्टूबर तक चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन का फैसला हुआ था। शुक्रवार को गांधी जयंती के मौके पर युवाओं, छात्रों और अलग अलग समूहों के लोगों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसमें एसआईआर के जरिए वोट काटने से लेकर रोजगार की समस्या तक का मुद्दा उठाया गया। पुलिस ने हालांकि इस प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी थी। तब भी देर शाम तक हजारों नौजवान कनॉट प्लेस और आसपास के इलाके में जमा रहे।

इस प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी और वामपंथी दलों के अलावा सीपीआई माले के छात्र संगठन आइसा, सीपीएम के छात्र संगठन एसएफआई और कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के सदस्य शामिल हुए। इसके अलावा कई और सामाजिक समूहों के लोग प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। प्रदर्शन में लोगों की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की थी। गौरतलब है कि एसआईआर में अब तक 13 करोड़ से ज्यादा नाम कट चुके हैं। राजनीतिक दल इसे चुनौती दे रहे हैं।

इमरान की पार्टी और PAK सरकार की बातचीत आज:इस्लामाबाद मार्च टालने पर चर्चा; PTI की मांग- इमरान से मिलने दें, अस्पताल में इलाज कराएं

पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और सरकार के बीच आज फिर बातचीत होगी। बैठक में 4 अक्टूबर को होने वाले PTI के इस्लामाबाद मार्च को टालने और राजनीतिक तनाव कम करने पर चर्चा होगी।
शुक्रवार को दोनों पक्षों के बीच पहली बैठक हुई थी, लेकिन किसी तरह की सहमति नहीं बन पाई। PAK संसद स्पीकर अयाज सादिक के चैंबर में दोपहर 2 बजे होने वाली बैठक में सरकार, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) और PTI के प्रतिनिधि शामिल होंगे। PTI ने मांग रखी है कि इमरान खान से तुरंत मुलाकात करने दी जाए। उन्हें ऐसे अस्पताल ले जाया जाए, जहां उनके निजी डॉक्टर उनकी जांच कर सकें। पार्टी ने इमरान की बहनों और प्रदर्शन से पहले गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों को रिहा करने की मांग भी की है। इसके अलावा, इमरान की पत्नी बुशरा बीबी की मेडिकल जांच कराने और उनके खिलाफ चल रहे मामलों की बिना किसी दखल के सुनवाई करने की मांग रखी गई है। 4 अक्टूबर से इस्लामाबाद मार्च निकालने की तैयारी PTI ने पहले 27 सितंबर को इस्लामाबाद तक लॉन्ग मार्च निकालने की घोषणा की थी। बाद में इसे एक हफ्ते टालकर 4 अक्टूबर कर दिया गया। जुल्फिकार बुखारी के मुताबिक, मार्च खैबर पख्तूनख्वा के लक्की मरवत में गांधी चौक से शुरू होगा। इसका पहला पड़ाव करक और दूसरा 5 अक्टूबर को कोहाट में होगा। इसके बाद मार्च पेशावर जिले में दाखिल होगा। मार्च को देखते हुए सरकार ने इस्लामाबाद में सुरक्षा बढ़ा दी है। राजधानी में जाने वाले रास्तों पर शिपिंग कंटेनर लगाए गए हैं और अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को तैनात किया जा रहा है। शुक्रवार की बैठक में बातचीत के जरिए समाधान पर बात हुई सरकार और PTI के बीच शुक्रवार को हुई पहली बैठक में देश के राजनीतिक हालात और मतभेद दूर करने पर चर्चा हुई। तीनों पक्षों ने बातचीत से समस्याओं का हल निकालने पर जोर दिया। बैठक में सरकार की ओर से प्रधानमंत्री के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह के नेतृत्व में 6 सदस्यीय टीम शामिल हुई। इसमें गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी थे। PTI की ओर से पार्टी अध्यक्ष बैरिस्टर गौहर अली खान और पूर्व स्पीकर असद कैसर समेत कई नेता पहुंचे। वहीं, PPP की ओर से सैयद नदीम कमर, शेरी रहमान और एजाज जखरानी शामिल हुए। स्पीकर बोले- संसद में ही मुद्दों का समाधान संभव नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक दोनों पक्षों के बीच बातचीत करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। देश के मुद्दों और मतभेदों को सुलझाने के लिए संसद ही सही मंच है। बैठक से पहले सरकार के प्रतिनिधि राणा सनाउल्लाह ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन से समस्याएं हल नहीं होतीं। बातचीत से ही समाधान निकल सकता है। उन्होंने कहा कि इमरान खान के खिलाफ चल रहे मामलों पर फैसला सरकार नहीं, अदालतें करेंगी। वहीं, PTI अध्यक्ष गौहर अली खान ने बातचीत सफल होने की उम्मीद जताई। अगस्त 2023 से जेल में हैं इमरान 73 साल के इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उन्हें तोशाखाना मामले में 3 साल की सजा मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन पर सिफर, अल-कादिर ट्रस्ट और इद्दत निकाह समेत कई मामले दर्ज हुए। बाद में सिफर और इद्दत निकाह मामलों में उन्हें अदालत से राहत मिल गई। तोशाखाना मामले में भी उनकी एक सजा रोक दी गई। इसके बावजूद दूसरे मामलों के चलते वह अभी जेल में हैं। इमरान खान और उनकी पार्टी PTI का कहना है कि 2022 में प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद उनके खिलाफ राजनीतिक वजहों से मामले दर्ज किए गए। उनका आरोप है कि उन्हें राजनीति और चुनाव से दूर रखने के लिए ऐसा किया गया। वहीं, पाकिस्तान सरकार और जांच एजेंसियां इन आरोपों को खारिज करती हैं। उनका कहना है कि ये मामले कानूनी प्रक्रिया के तहत चल रहे हैं। ———————– ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान में ट्रम्प के बेटों की कंपनी ड्रोन यूनिट लगाएगी:3 साइट्स चुनीं; भारत की 4 फैक्ट्री तैयार, 3 बनाई जा रहीं, 2 प्रस्तावित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बेटों से जुड़ी पॉवरस कंपनी पाकिस्तान में ड्रोन प्रोडक्शन यूनिट लगाने जा रही है। एरिक ट्रम्प और डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर की कंपनी ने पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर के साथ मर्री में सीक्रेट मीटिंग की है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

इमरान की पार्टी और PAK सरकार की बातचीत आज:इस्लामाबाद मार्च टालने पर चर्चा; PTI की मांग- इमरान से मिलने दें, अस्पताल में इलाज कराएं

पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और सरकार के बीच आज फिर बातचीत होगी। बैठक में 4 अक्टूबर को होने वाले PTI के इस्लामाबाद मार्च को टालने और राजनीतिक तनाव कम करने पर चर्चा होगी।
शुक्रवार को दोनों पक्षों के बीच पहली बैठक हुई थी, लेकिन किसी तरह की सहमति नहीं बन पाई। PAK संसद स्पीकर अयाज सादिक के चैंबर में दोपहर 2 बजे होने वाली बैठक में सरकार, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) और PTI के प्रतिनिधि शामिल होंगे। PTI ने मांग रखी है कि इमरान खान से तुरंत मुलाकात करने दी जाए। उन्हें ऐसे अस्पताल ले जाया जाए, जहां उनके निजी डॉक्टर उनकी जांच कर सकें। पार्टी ने इमरान की बहनों और प्रदर्शन से पहले गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों को रिहा करने की मांग भी की है। इसके अलावा, इमरान की पत्नी बुशरा बीबी की मेडिकल जांच कराने और उनके खिलाफ चल रहे मामलों की बिना किसी दखल के सुनवाई करने की मांग रखी गई है। 4 अक्टूबर से इस्लामाबाद मार्च निकालने की तैयारी PTI ने पहले 27 सितंबर को इस्लामाबाद तक लॉन्ग मार्च निकालने की घोषणा की थी। बाद में इसे एक हफ्ते टालकर 4 अक्टूबर कर दिया गया। जुल्फिकार बुखारी के मुताबिक, मार्च खैबर पख्तूनख्वा के लक्की मरवत में गांधी चौक से शुरू होगा। इसका पहला पड़ाव करक और दूसरा 5 अक्टूबर को कोहाट में होगा। इसके बाद मार्च पेशावर जिले में दाखिल होगा। मार्च को देखते हुए सरकार ने इस्लामाबाद में सुरक्षा बढ़ा दी है। राजधानी में जाने वाले रास्तों पर शिपिंग कंटेनर लगाए गए हैं और अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को तैनात किया जा रहा है। शुक्रवार की बैठक में बातचीत के जरिए समाधान पर बात हुई सरकार और PTI के बीच शुक्रवार को हुई पहली बैठक में देश के राजनीतिक हालात और मतभेद दूर करने पर चर्चा हुई। तीनों पक्षों ने बातचीत से समस्याओं का हल निकालने पर जोर दिया। बैठक में सरकार की ओर से प्रधानमंत्री के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह के नेतृत्व में 6 सदस्यीय टीम शामिल हुई। इसमें गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी थे। PTI की ओर से पार्टी अध्यक्ष बैरिस्टर गौहर अली खान और पूर्व स्पीकर असद कैसर समेत कई नेता पहुंचे। वहीं, PPP की ओर से सैयद नदीम कमर, शेरी रहमान और एजाज जखरानी शामिल हुए। स्पीकर बोले- संसद में ही मुद्दों का समाधान संभव नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक दोनों पक्षों के बीच बातचीत करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। देश के मुद्दों और मतभेदों को सुलझाने के लिए संसद ही सही मंच है। बैठक से पहले सरकार के प्रतिनिधि राणा सनाउल्लाह ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन से समस्याएं हल नहीं होतीं। बातचीत से ही समाधान निकल सकता है। उन्होंने कहा कि इमरान खान के खिलाफ चल रहे मामलों पर फैसला सरकार नहीं, अदालतें करेंगी। वहीं, PTI अध्यक्ष गौहर अली खान ने बातचीत सफल होने की उम्मीद जताई। अगस्त 2023 से जेल में हैं इमरान 73 साल के इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उन्हें तोशाखाना मामले में 3 साल की सजा मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन पर सिफर, अल-कादिर ट्रस्ट और इद्दत निकाह समेत कई मामले दर्ज हुए। बाद में सिफर और इद्दत निकाह मामलों में उन्हें अदालत से राहत मिल गई। तोशाखाना मामले में भी उनकी एक सजा रोक दी गई। इसके बावजूद दूसरे मामलों के चलते वह अभी जेल में हैं। इमरान खान और उनकी पार्टी PTI का कहना है कि 2022 में प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद उनके खिलाफ राजनीतिक वजहों से मामले दर्ज किए गए। उनका आरोप है कि उन्हें राजनीति और चुनाव से दूर रखने के लिए ऐसा किया गया। वहीं, पाकिस्तान सरकार और जांच एजेंसियां इन आरोपों को खारिज करती हैं। उनका कहना है कि ये मामले कानूनी प्रक्रिया के तहत चल रहे हैं। ———————– ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान में ट्रम्प के बेटों की कंपनी ड्रोन यूनिट लगाएगी:3 साइट्स चुनीं; भारत की 4 फैक्ट्री तैयार, 3 बनाई जा रहीं, 2 प्रस्तावित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बेटों से जुड़ी पॉवरस कंपनी पाकिस्तान में ड्रोन प्रोडक्शन यूनिट लगाने जा रही है। एरिक ट्रम्प और डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर की कंपनी ने पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर के साथ मर्री में सीक्रेट मीटिंग की है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

अखिलेश, तेजस्वी या हेमंत—2029 का चंद्रबाबू नायडू कौन?

कई कथित जानकार इस ख्याल में हैं कि राहुल गांधी कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। यदि ऐसा है तो हेमंत सोरेन, तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव भला नाथवानी-अडानी की घास क्यों न खाएँ? सो इनके बूते उत्तर प्रदेश में योगी की जगह अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने का करिश्मा भी संभव है? चुनाव में भारी चंदा मिल सकता है? कर्नाटक में अडानी मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार को इतनी कारोबारी ताकत और राजनीतिक हैसियत दिला सकते हैं कि कांग्रेस हाईकमान कभी उन्हें हटाना भी चाहे तो हटा न पाए? या परिमल नाथवानी ने लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव को भरोसा दिया होगा कि झारखंड में उन्हे सांसद बनाने के लिए वोट देंगे तो तो मौका आने पर वे बदले में बिहार में लालू परिवार की सत्ता लौटाने में मदद करेंगे!

जान ले गुजराती कारोबारी की कोई चाल धंधे के बिना नहीं होती। वह राजनीति से पहले धंधे, सौदे और खरीद-फरोख्त की रूपरेखा बनाता है। उसकी बिसात बड़ी होती है। प्यादों को भी छोटी-मोटी थैलियों से नहीं साधा जाता। इसलिए बात केवल राज्यसभा की एक सीट की नहीं है। इंदिरा गांधी की आकस्मिक मृत्यु के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने। तब वे अंबानी और क्रोनी पूँजीपतियों को पसन्द नहीं करते थे। “दलाल हटाओ, देश बचाओ” जैसे जुमलों में थे। पर धीरूभाई ने ऐसे ही एंपायर नहीं बनाया। वे राजीव गांधी से मिले तो उनकी एप्रोच केवल चाँदी की जूती पहनाने वाली नहीं थी बल्कि अंदाज सीधा था—यह सब इंदिराजी की कृपा है। बताइए, मैं क्या करूँ? सब तो आपका है!

दिल्ली में तब धीरूभाई के कर्ताधर्ता बालू थे। मेरा मित्र टोनी यूएसआईएस की नौकरी छोड़कर उनका शागिर्द हुआ ही था। उस समय दिल्ली में न राजीव शुक्ला का मतलब था, न नाथवानी का। धीरूभाई के ही धंधे का एक और शातिर प्यादा था—देसाई। संसद भवन और सांसदों पर उसकी पकड़ देखकर मैं हैरान होता था। मजाल कि रिलायंस को लेकर संसद में सवाल उठे और उसके लोगों को पहले खबर न हो! बहस होने से पहले ही हर तरह का हिसाब तैयार रहता था।

फिलहाल इतना जान लें कि मुकेश अंबानी और गौतम अडानी दोनों अपनी-अपनी नई शतरंज सजा रहे हैं। उस बिसात पर मोदी-शाह हमेशा किंग और वजीर नहीं रहेंगे। विपक्ष की सम्भावनाएँ हैं। सो बतौर पूँजी ढाई घर चलने वाली चाल के लिए अखिलेश, तेजस्वी, हेमंत और डी. के. शिवकुमार जैसे घोड़े भी हैं।

मामूली बात नहीं है कि मुकेश अंबानी अब ट्रंप के दरबार तक पहुँच रखते हैं। रिलायंस का संस्थागत आधार मोदी युग से बहुत पुराना और कहीं अधिक विविध है। स्वयं अडानी एंटरप्राइजेज अपने कारोबारी मॉडल को देश के लिए “अत्यावश्यक विशाल आधारभूत ढाँचा” और “भारत के विकास के अगले चरण को शक्ति देने वाला” बताती है।

मतलब दोनों घराने यह निश्चित माने हुए होंगे कि मोदी जैसे कई आएँगे-जाएँगे, लेकिन उनके कारोबारी साम्राज्य को पीढ़ियों तक रहना है। उनके पास एक चुनाव का नहीं, पीढ़ियों का रोडमैप होगा। सो जब तक मौजूदा सत्ता है, उसे दुहो। अंधेरा बनने लगे, नए घोड़ों की लगाम पकड़ो। कसौटी है कि जो भी आए लगाम पकड घुडसवारी शुरू हो जाए!

रिपोर्ट- सऊदी अरब हूती विद्रोहियों पर हमला करेगा:1 लाख सैनिक उतारने की तैयारी, बाब-अलमंदेब से कब्जा छुड़ाएगा; यहां से दुनिया का 12% तेल गुजरता है

सऊदी अरब यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग शुरू करने की तैयारी कर रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी 1 लाख से ज्यादा यमनी सैनिकों को उतार सकता है। इसका मकसद लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को हूतियों के कब्जे से छुड़ाना और समुद्री व्यापार का रास्ता सुरक्षित करना है। हूतियों की इस इलाके में बढ़ती पकड़ से दुनिया के अहम समुद्री रास्तों पर खतरा बढ़ गया है। यह रास्ता एशिया और यूरोप के बीच व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है। बाब-अल-मंदेब दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। दुनिया का 12% तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
बाब-अल-मंदेब पर कब्जे के लिए जंग क्यों? पिछले महीने हूतियों ने यमन के तटीय इलाकों में आगे बढ़ते हुए इस रास्ते के आसपास अपनी पकड़ मजबूत की। उन्होंने सऊदी समर्थित यमन के सरकारी बलों और UAE समर्थित नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज को पीछे धकेला। बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। इसके रास्ते जहाज एशिया से लाल सागर और स्वेज नहर होते हुए यूरोप तक पहुंचते हैं। इस वजह से यह वैश्विक व्यापार और तेल की सप्लाई के लिए अहम है। सऊदी अरब को आशंका है कि हूतियों का नियंत्रण बना रहा तो इस रास्ते से होने वाले व्यापार और तेल की ढुलाई पर खतरा बढ़ सकता है। हूतियों के खिलाफ दो तरह के सैन्य ऑपरेशन पर विचार रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के सामने सैन्य कार्रवाई के दो विकल्प हैं। पहले विकल्प में बाब-अल-मंदेब के आसपास सीमित हमला करके समुद्री रास्ते को सुरक्षित करने की कोशिश की जाएगी। दूसरे विकल्प में यमन के कई इलाकों में एक साथ ऑपरेशन चलाया जा सकता है। इसमें अल-बायदा, मारिब, ताइज और अल-जौफ जैसे इलाके शामिल हो सकते हैं। इस ऑपरेशन का नेतृत्व यमन की सेनाएं करेंगी, जिन्हें सऊदी अरब का समर्थन मिलेगा। जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब हवाई हमले भी कर सकता है। ऑपरेशन के दायरे के हिसाब से 1 लाख से ज्यादा यमनी सैनिक जुटाए जा सकते हैं। हालांकि, सैन्य कार्रवाई की समयसीमा को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है। अमेरिका सीधे युद्ध में उतरने को तैयार नहीं रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका सऊदी अरब को खुफिया जानकारी, लक्ष्य तय करने में मदद और सैन्य सलाह दे रहा है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सऊदी नेतृत्व की सीधे सैन्य मदद और हवाई हमले करने की मांग पर सहमति नहीं दी है। फिलहाल अमेरिका के सीधे युद्ध में शामिल होने की उम्मीद नहीं है। सऊदी अरब को पाकिस्तान और तुर्किये से भी सैन्य मदद मिली है। पाकिस्तान ने पिछले महीने अदन में एयर डिफेंस सिस्टम, हल्की तोपें, ड्रोन और ड्रोन रोधी उपकरण भेजे थे। पाकिस्तानी सैन्य सलाहकार सऊदी अधिकारियों के साथ काम कर रहे हैं। हालांकि, पाकिस्तान ने यमन में लड़ाई के लिए अपने सैनिक भेजने का फैसला नहीं किया है। तुर्किये के ड्रोन भी यमन में तैनात किए गए हैं। वहीं, फ्रांस ने यानबू में रक्षात्मक प्रणालियां और सैनिक भेजने की घोषणा की है। सऊदी अरब के सामने क्या चुनौती है? यमन में हूतियों के विरोधी गुटों के बीच एकता की कमी सऊदी अरब के लिए बड़ी चुनौती है। इन गुटों के हित और राजनीतिक लक्ष्य अलग-अलग हैं। ऐसे में केवल सैनिकों की संख्या बढ़ाने से ऑपरेशन की सफलता तय नहीं होगी। सऊदी अरब की चिंता अपने तेल ठिकानों की सुरक्षा को लेकर भी है। हूती पहले भी ड्रोन और मिसाइलों से सऊदी अरब को निशाना बना चुके हैं। अगर यमन में लड़ाई तेज होती है, तो सऊदी तेल ठिकानों और समुद्री व्यापार पर हमलों का खतरा भी बढ़ सकता है। ———————— ये खबर भी पढ़ें…. नेतन्याहू बोले- हमलावर को किसने भेजा, जांच कर रहे:उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी; रिपोर्ट- चुनाव में हार रहे थे नेतन्याहू, हादसे का फायदा मिला इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि फ्लाईदुबई की फ्लाइट में कैप्टन पर हमले के आरोपी ओमानी पायलट को किसने भेजा था, इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस घटना के पीछे कोई व्यक्ति या संगठन मिला, तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

रिपोर्ट- सऊदी अरब हूती विद्रोहियों पर हमला करेगा:1 लाख सैनिक उतारने की तैयारी, बाब-अलमंदेब से कब्जा छुड़ाएगा; यहां से दुनिया का 12% तेल गुजरता है

सऊदी अरब यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग शुरू करने की तैयारी कर रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी 1 लाख से ज्यादा यमनी सैनिकों को उतार सकता है। इसका मकसद लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को हूतियों के कब्जे से छुड़ाना और समुद्री व्यापार का रास्ता सुरक्षित करना है। हूतियों की इस इलाके में बढ़ती पकड़ से दुनिया के अहम समुद्री रास्तों पर खतरा बढ़ गया है। यह रास्ता एशिया और यूरोप के बीच व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है। बाब-अल-मंदेब दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। दुनिया का 12% तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
बाब-अल-मंदेब पर कब्जे के लिए जंग क्यों? पिछले महीने हूतियों ने यमन के तटीय इलाकों में आगे बढ़ते हुए इस रास्ते के आसपास अपनी पकड़ मजबूत की। उन्होंने सऊदी समर्थित यमन के सरकारी बलों और UAE समर्थित नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज को पीछे धकेला। बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। इसके रास्ते जहाज एशिया से लाल सागर और स्वेज नहर होते हुए यूरोप तक पहुंचते हैं। इस वजह से यह वैश्विक व्यापार और तेल की सप्लाई के लिए अहम है। सऊदी अरब को आशंका है कि हूतियों का नियंत्रण बना रहा तो इस रास्ते से होने वाले व्यापार और तेल की ढुलाई पर खतरा बढ़ सकता है। हूतियों के खिलाफ दो तरह के सैन्य ऑपरेशन पर विचार रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के सामने सैन्य कार्रवाई के दो विकल्प हैं। पहले विकल्प में बाब-अल-मंदेब के आसपास सीमित हमला करके समुद्री रास्ते को सुरक्षित करने की कोशिश की जाएगी। दूसरे विकल्प में यमन के कई इलाकों में एक साथ ऑपरेशन चलाया जा सकता है। इसमें अल-बायदा, मारिब, ताइज और अल-जौफ जैसे इलाके शामिल हो सकते हैं। इस ऑपरेशन का नेतृत्व यमन की सेनाएं करेंगी, जिन्हें सऊदी अरब का समर्थन मिलेगा। जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब हवाई हमले भी कर सकता है। ऑपरेशन के दायरे के हिसाब से 1 लाख से ज्यादा यमनी सैनिक जुटाए जा सकते हैं। हालांकि, सैन्य कार्रवाई की समयसीमा को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है। अमेरिका सीधे युद्ध में उतरने को तैयार नहीं रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका सऊदी अरब को खुफिया जानकारी, लक्ष्य तय करने में मदद और सैन्य सलाह दे रहा है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सऊदी नेतृत्व की सीधे सैन्य मदद और हवाई हमले करने की मांग पर सहमति नहीं दी है। फिलहाल अमेरिका के सीधे युद्ध में शामिल होने की उम्मीद नहीं है। सऊदी अरब को पाकिस्तान और तुर्किये से भी सैन्य मदद मिली है। पाकिस्तान ने पिछले महीने अदन में एयर डिफेंस सिस्टम, हल्की तोपें, ड्रोन और ड्रोन रोधी उपकरण भेजे थे। पाकिस्तानी सैन्य सलाहकार सऊदी अधिकारियों के साथ काम कर रहे हैं। हालांकि, पाकिस्तान ने यमन में लड़ाई के लिए अपने सैनिक भेजने का फैसला नहीं किया है। तुर्किये के ड्रोन भी यमन में तैनात किए गए हैं। वहीं, फ्रांस ने यानबू में रक्षात्मक प्रणालियां और सैनिक भेजने की घोषणा की है। सऊदी अरब के सामने क्या चुनौती है? यमन में हूतियों के विरोधी गुटों के बीच एकता की कमी सऊदी अरब के लिए बड़ी चुनौती है। इन गुटों के हित और राजनीतिक लक्ष्य अलग-अलग हैं। ऐसे में केवल सैनिकों की संख्या बढ़ाने से ऑपरेशन की सफलता तय नहीं होगी। सऊदी अरब की चिंता अपने तेल ठिकानों की सुरक्षा को लेकर भी है। हूती पहले भी ड्रोन और मिसाइलों से सऊदी अरब को निशाना बना चुके हैं। अगर यमन में लड़ाई तेज होती है, तो सऊदी तेल ठिकानों और समुद्री व्यापार पर हमलों का खतरा भी बढ़ सकता है। ———————— ये खबर भी पढ़ें…. नेतन्याहू बोले- हमलावर को किसने भेजा, जांच कर रहे:उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी; रिपोर्ट- चुनाव में हार रहे थे नेतन्याहू, हादसे का फायदा मिला इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि फ्लाईदुबई की फ्लाइट में कैप्टन पर हमले के आरोपी ओमानी पायलट को किसने भेजा था, इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस घटना के पीछे कोई व्यक्ति या संगठन मिला, तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। पूरी खबर यहां पढ़ें…