कौन है अनिल पंडित? टाइगर श्रॉफ पर हमले से लेकर दिल्ली-पुणे की फायरिंग तक जुड़ा है नाम

Tiger Shroff Attack: मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर कथित हमले के मामले में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आया है। गैंग से जुड़े बताए जा रहे अनिल पंडित ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस हमले की जिम्मेदारी ली है। पोस्ट में यह भी कहा गया कि टाइगर श्रॉफ को सलमान खान के साथ काम न करने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया। हालांकि, पुलिस अभी इस सोशल मीडिया पोस्ट और एक वॉयस नोट की जांच कर रही है।

कौन है अनिल पंडित?

32 वर्षीय पंडित के अमेरिका से काम करने का संदेह है। जांचकर्ताओं ने उसे हरियाणा, दिल्ली और पुणे में हुई गोलीबारी और जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) के मामलों से जोड़ा है।

मूल रूप से हरियाणा के पानीपत जिले के एक गांव का रहने वाला अनिल पंडित, 2023 में भारत छोड़कर कनाडा गया था और बाद में अमेरिका चला गया। वहां गैंगस्टर रणदीप मलिक के संपर्क में आने के बाद, वह कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग में शामिल हो गया।

आरोप है कि पिछले छह महीनों में पंडित ने भारत में मौजूद शूटर्स के एक नेटवर्क का इस्तेमाल करके कई आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया है। हरियाणा, दिल्ली और पुणे की घटनाओं सहित गोलीबारी के कई मामलों की जांच में भी उसका नाम सामने आया है।

पानीपत से अमेरिका तक

सूत्रों के अनुसार, पंडित का सफर हरियाणा के पानीपत जिले से शुरू हुआ। बताया जाता है कि वह 2023 में भारत छोड़कर कनाडा चला गया था। बाद में, लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े गैंगस्टर बताए जाने वाले रणदीप मलिक के संपर्क में आने के बाद, वह अमेरिका के कैलिफोर्निया पहुंच गया।

जांचकर्ताओं को शक है कि विदेश में रहते हुए भी पंडित भारत में मौजूद शूटर्स के साथ तालमेल बिठाता रहा। उससे जुड़ी कुछ घटनाओं में हरियाणा में गोलीबारी और जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) के मामले शामिल हैं, जिनमें पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स ने इसमें शामिल होने के शक में शूटर्स को गिरफ्तार किया था।

दिल्ली के जिम में हुई गोलीबारी मामले में नाम सामने आया

पंडित पर दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित एक जिम में गोलीबारी की साजिश रचने का भी आरोप है। इस जिम में अक्सर गायक गुरु रंधावा आते-जाते थे। बताया जा रहा है कि इस घटना का संबंध गायक के सलमान खान के साथ जुड़ाव से है।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल ने इस मामले में पंडित से जुड़े चार शूटरों को गिरफ्तार किया है। जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपी पंडित से बातचीत करने के लिए ‘सिग्नल’ ऐप का इस्तेमाल करते थे और उनके पास से विदेशी हथियार बरामद हुए हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक, जिम के बाहर हुई इस गोलीबारी की जिम्मेदारी पहले ही पंडित ले चुका था।

पुणे के ज्वेलरी स्टोर पर गोलीबारी में भी आया नाम

दिल्ली में हुई घटना के करीब 15 दिन बाद पुणे में एक ज्वेलरी स्टोर पर गोलीबारी की खबर सामने आई। इस मामले की जांच के दौरान एक बार फिर अनिल पंडित का नाम सामने आया।

महाराष्ट्र पुलिस ने इस घटना में कथित तौर पर शामिल शूटरों को गिरफ्तार किया। जांच में उनके तार अनिल पंडित और लॉरेंस बिश्नोई के करीबी बताए जाने वाले शुभम लोनकर से जुड़े होने की बात सामने आई।

रिपोर्ट के मुताबिक, गोलीबारी के तीनों आरोपी राजस्थान के हनुमानगढ़ के रहने वाले थे। उन पर शक है कि वे खास तौर पर इस वारदात को अंजाम देने के लिए पुणे पहुंचे थे।

टाइगर श्रॉफ पर हमले का दावा

यह नया घटनाक्रम तब सामने आया जब लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने सोशल मीडिया पर टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली। पंडित द्वारा पोस्ट किए गए संदेश में, उसने और हरमन संधू ने अभिनेता के खिलाफ की गई इस कार्रवाई की जिम्मेदारी ली है।

पोस्ट में आरोप लगाया गया है कि श्रॉफ ने सलमान खान के साथ काम न करने की चेतावनियों को नजरअंदाज किया था। साथ ही, मुंबई फिल्म इंडस्ट्री के उन अन्य लोगों को भी धमकी दी गई है जो इस सुपरस्टार के साथ काम करना जारी रखे हुए हैं। इसमें विरोधी गैंग के सदस्यों को भी धमकी दी गई है।

सूत्रों के अनुसार, हमलावरों ने कथित तौर पर कई दिनों तक श्रॉफ की गतिविधियों पर नजर रखी थी। पुलिस जांच के हिस्से के रूप में इस सोशल मीडिया पोस्ट और एक वॉयस नोट की पुष्टि कर रही है।

अलग-अलग राज्यों के मामलों में पंडित की कथित भूमिका ने भारत में सक्रिय आपराधिक नेटवर्क और विदेशों में मौजूद गैंग के सदस्यों के बीच संभावित संबंधों की ओर ध्यान खींचा है। सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए दावे और पंडित को अलग-अलग घटनाओं से जोड़ने वाले आरोप अभी भी पुलिस जांच के दायरे में हैं।

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जुलाई हिंसा की जांच का दायरा बढ़ेगा

नई दिल्ली। इस साल जुलाई में दिल्ली के जंतर मंतर और देश के अन्य हिस्सों में हुई हिंसा की जांच का दायरा बढ़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान अलग अलग हिस्सों में हुई हिंसा की जांच के लिए एक हाई पावर्ड इन्क्वायरी कमेटी यानी एचपीईसी का गठन किया था। रिटायर जज जस्टिस आर सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यों की कमेटी ने एक पोर्टल लॉन्च किया है। इस पर जुलाई में हुई हिंसा से प्रभावित लोग अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं।

समिति का गठन तीन महीने पहले अगस्त में हुआ था। तीन महीने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह पोर्टल तैयार किया है, जिसे शनिवार को लॉन्च किया गया। hpec.nic.in नाम से तैयार इस पोर्टल पर प्रभावित आम लोगों के साथ साथ पुलिसकर्मी भी अपने साथ हुई हिंसा की शिकायत दर्ज कर सकेंगे। गौरतलब है कि 20 जुलाई की घटना के बाद दिल्ली पुलिस के कई अधिकारियों और जवानों के परिजनों से प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उसके बाद अक्टूबर के घटनाक्रम में भी दिल्ली पुलिस के जवानों को पीड़ित दिखाते हुए वीडियो बनाया गया है।

इस मामले में पहले दिन से ऐसा लग रहा है कि सरकार किसी तरह से प्रदर्शनकारियों को कठघरे में खड़ा करना चाहती है। पुलिस की बर्बर कार्रवाई के ऊपर प्रदर्शनकारियों के कथित हमले को मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है। इस पोर्टल को इस तरह के तैयार किया गया है कि संवेदनशील मामलों में प्रभावित लोगों की पहचान गोपनीय रखी जा सके और उनकी इच्छा के अनुसार पहचान सार्वजनिक न हो।

हिंसा से प्रभावित लोगों और अन्य संबंधित पक्षों से अपील की गई है कि वे पोर्टल पर जाकर तय फॉर्मेट के अनुसार अपनी शिकायतें या प्रतिनिधित्व अपलोड करें। कहा गया है कि यह कमेटी जुलाई में हुई हिंसा खास कर पैलेट गन के इस्तेमाल की शिकायतों की विस्तार से जांच करेगी। यह भी कहा गया है कि कमेटी दोनों पक्षों की ओर से की गई हिंसा की जांच करेगी। महिला प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई की भी जांच की जाएगी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के ऊपर दर्ज सारे मुकदमे रद्द करा चुकी है। लेकिन इस जांच के बाद क्या होगा, यह नहीं कहा जा सकता है।

रामलीला मैदान में कांग्रेस करेगी रैली

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में हुई कथित गड़बड़ियों के खिलाफ कई दिन तक प्रदर्शन के बाद अब कांग्रेस पार्टी ने बड़ी रैली का ऐलान किया है। एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में इसे लेकर एक महारैली का आय़ोजन किया जाएगा। कांग्रेस पार्टी ने इस रैली के लिए दिल्ली पुलिस की अनुमति हासिल कर ली है।

शनिवार को दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस पार्टी को रामलीला मैदान में एक नवंबर को होने वाली रैली के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी एनओसी जारी कर दिया। सेंट्रल दिल्ली के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि पार्टी ने मैदान की बुकिंग के लिए 25 अक्टूबर से तीन नवंबर तक की तारीखें मांगी थी। उसे एक नवंबर को रैली करने की इजाजत मिल गई है। इससे पहले कांग्रेस पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर छह अक्टूबर से लेकर 12 अक्टूबर तक लगातार प्रदर्शन किया।

गौरतलब है कि पिछले दिनों गृह मंत्रालय ने जंतर मंतर पर प्रदर्शनों पर रोक लगाते हुए रामलीला मैदान सहित तीन जगहों को प्रदर्शन स्थल घोषित किया। इन तीन जगहों में रामलीला मैदान एक है, जहां 50 हजार लोगों तक की रैली हो सकती है। अभी यह तय नहीं है कि रैली सिर्फ कांग्रेस पार्टी की होगी या उसमें विपक्षी पार्टियों के नेताओं को भी बुलाया जाएगा। गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और एसआईआर के खिलाफ कांग्रेस के आंदोलन में ‘इंडिया’ ब्लॉक की सभी पार्टियां शामिल रही हैं।

मोदी, भागवत पर राहुल का हमला

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ अपनी बातचीत का एक वीडियो शनिवार को जारी किया। इसमें छात्रों से बात करते हुए राहुल गांधी ने भाजपा और आरएसएस के ऊपर तीखा हमला किया। राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, इनका लोकतंत्र मे विश्वास नहीं है।

इस वीडियो में राहुल छात्रों से कह रहे हैं, ‘ऊपर बैठे लोगों में से अधिकांश डेमोक्रेसी में विश्वास नहीं करते। प्रधानमंत्री, मोहन भागवत, आरएसएस के लोग डेमोक्रेसी में विश्वास नहीं करते’। उन्होंने देश के संभ्रांत वर्ग पर भी निशाना साथा और कहा, ‘एलीट वर्ग के लोग डेमोक्रेसी में विश्वास नहीं करते। शिक्षा का अनप्राइवेटाइज सिस्टम डेमोक्रेसी का सॉलिड प्रोटेक्टर है’।

इस वीडियो में राहुल ने उन प्रदर्शनकारी छात्रों से बात की, जो पुलिस की कार्रवाई का शिकार हुए थे। राहुल ने वीडियो के साथ एक पोस्ट भी लिखी है, जिसमें उन्होंने कहा है, ‘यौन उत्पीड़न, कपड़े खींचना और प्राइवेट पार्ट्स पर हमला, लोकतंत्र के लिए आवाज उठाने वाले छात्रों और महिलाओं के खिलाफ दिल्ली पुलिस की बर्बरता ने शर्मनाक हदें पार कर दी हैं’। इस वीडियो में प्रदर्शनकारी छात्र और छात्राओं ने अपना अनुभव सुनाया है। उन्होंने बताया है कि पुलिस ने उनके ऊपर किस तरह से हमला किया। एक छात्रा ने पुलिसकर्मियों द्वारा पिन चुभोने के आरोप भी लगाए।

CJP नेता अभिजीत दिपके को सशर्त जमानत, बॉन्ड की शर्त के बाद अब आंदोलन का क्या होगा?

CJP नेता अभिजीत दिपके को सशर्त जमानत, बॉन्ड की शर्त के बाद अब आंदोलन का क्या होगा?

Abhijit Dipke Cockroach Janata Party

Abhijeet Dipke Conditional Bail: कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SME) कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। दिल्ली पुलिस द्वारा शांति भंग करने के आरोप में की गई कार्रवाई के बाद कोर्ट ने उन्हें शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरने की शर्त पर जमानत दे दी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दिपके द्वारा बॉन्ड भरने के बाद सीजेपी का आंदोलन ठंडा पड़ जाएगा। 

 

शर्त के मुताबिक, दिपके को एक बॉन्ड भरना होगा जिसमें उल्लेख है कि वे ऐसी कोई गतिविधि नहीं करेंगे जिससे शांति भंग होने की आशंका हो। दिपके को 50 हजार रुपए का मुचलका भी भरना होगा। जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें रिहा कर दिया जाएगा। इससे पहले सीजेपी ने दिपके की गिरफ्तारी पर भी सवाल उठाए थे। दिपके की हिरासत से पहले सीजेपी के दो सह-संयोजकों सौरव दास और आशुतोष रांका को भी गिरफ्तार किया गया था।  ALSO READ: Abhijeet Dipke : दिल्ली में तिरंगा यात्रा पर अड़े CJP प्रमुख अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया

कानूनी प्रक्रिया और गिरफ्तारी का आधार

दिल्ली पुलिस के अनुसार, दिपके को पहले कनॉट प्लेस में मार्च से पूर्व एहतियातन हिरासत में लिया गया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत प्राथमिक औपचारिकताएं पूरी की गईं। तत्पश्चात, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 170 के तहत शांति भंग करने का नया मामला दर्ज कर उन्हें आधिकारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। शनिवार को एसईएम कोर्ट में पेशी के बाद अदालत ने उन्हें सशर्त जमानत पर रिहा करने का फैसला सुनाया। ALSO READ: CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हंगामा, अभिजीत दीपके बोले- 50-100 रुपए देकर बाहर कीजिए, लहरा दो तिरंगा को लेकर बताया प्लान

पहले भी लिया गया था हिरासत में

उल्लेखनीय है कि 10 अक्टूबर को भी दिल्ली एयरपोर्ट पर दिपके को हिरासत में लिया गया था और शांति भंग करने का मामला दर्ज किया गया था। उस दौरान उनसे एक साल की अवधि तक शांति बनाए रखने के मुचलके (Bond) पर हस्ताक्षर कराए गए थे। शुक्रवार को पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा समेत करीब 150 प्रदर्शनकारियों को एहतियातन हिरासत में लिया था। दीपके को जाफरपुर कलां थाने ले जाया गया था।

कनॉट प्लेस और मंडी हाउस में भारी विरोध-प्रदर्शन

पुलिस की कार्रवाई के बावजूद कनॉट प्लेस के इनर सर्कल और मंडी हाउस में छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं का भारी जमावड़ा देखा गया। प्रदर्शनकारियों ने कनॉट प्लेस में मार्च निकाला, बीच-बीच में ‘जय हिंद’ के नारे लगाए और राष्ट्रगान गाया। आइसा (AISA) और एसएफआई (SFI) के सदस्यों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने तथा निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित नए अधिनियम को वापस लेने की मांग की।

सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके को मिली जमानत

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) संस्थापक अभिजीत दिपके को शनिवार शाम विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने कुछ शर्तों पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

उन्हें यहां कनॉट प्लेस में आयोजित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च के आह्वान के दौरान शुक्रवार को निवारक धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया था। इस मार्च से पहले हिरासत में लिए गए श्री दीपके के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126/170 के तहत कार्रवाई शुरू की गई थी। श्री दिपके के अलावा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी शनिवार तड़के रिहा कर दिया गया।

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पुलिस के अनुसार सुश्री बोरा को दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत औपचारिक प्रक्रियाओं के बाद रिहा किया गया। इससे पहले शुक्रवार को सीजेपी ने दावा किया था कि श्री दीपके को किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया था। संगठन के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे ने शुक्रवार देर रात कहा था कि उन्हें हिरासत में लिए जाने के आठ घंटे से अधिक समय बाद भी उनके ठिकाने की जानकारी नहीं दी गई और उन्हें वकील या पार्टी टीम से बात करने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। पुलिस ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और यातायात का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए शुक्रवार को लगभग 150 लोगों को हिरासत में लिया गया था।

सीजेपी के सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका पहले से पांच दिन की न्यायिक हिरासत में हैं। सर्वश्री दास, रांका और 12 अन्य लोगों को मंगलवार (13 अक्टूबर) की सुबह जंतर-मंतर के बंद द्वार पर चढ़कर परिसर में प्रवेश करने के बाद हिरासत में लिया गया था। जंतर मंतर को हाल ही में विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित स्थल सूची से बाहर कर दिया गया था। बाद में सीजेपी के अजिंक्य शिंदे और 11 अन्य लोगों को रिहा कर दिया गया था।

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दिल्ली में तिरंगा मार्च से पहले CJP संस्थापक अभिजीत दिपके हिरासत में, नेहा बोरा ने सरकार पर उठाए सवाल

Abhijeet Dipke: दिल्ली में तिरंगा फहराने को लेकर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को हिरासत में लिया गया था। अब उन्हें एहतियातन हिरासत में रखा गया है। पार्टी ने कनॉट प्लेस में ‘लहरा दो तिरंगा’ नाम से प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी।

वहीं, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की प्रमुख नेहा बोरा को रविवार को रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 65 के तहत जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें छोड़ा गया।

पुलिस के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत दिपके के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। उन्हें आज, 17 अक्टूबर को एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया जाएगा।

पुलिस ने बताया कि CJP के संस्थापक को दो नोटिस भेजे गए थे, जिनमें उन्हें प्रस्तावित आंदोलन के लिए कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में न जाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन कथित तौर पर उन्होंने इन निर्देशों का पालन नहीं किया।

पुलिस के मुताबिक, उन्होंने 50,000 रुपये का एक बॉन्ड भी भरा था और उन्हें एक साल तक सार्वजनिक शांति भंग न करने का निर्देश दिया गया था।

‘कानून-व्यवस्था की हर तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं’

अपनी रिहाई के बाद ANI से बात करते हुए, AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

बोरा ने सवाल किया, “कानून-व्यवस्था की हर तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आम नागरिकों के साथ ऐसा बर्ताव किया जाता है जैसे वे कोई खूंखार अपराधी हों; हमारे देश में लंबे समय से यही चलन चला आ रहा है। मौजूदा आंदोलन ने साफ कर दिया है कि लोगों को किस तरह हिरासत में लिया जा रहा है—चाहे दिन हो या शाम, उन्हें पूरी रात हिरासत में रखा जाता है और अगले दिन सुबह या शाम को ही छोड़ा जाता है। आखिर किस अधिकार के तहत इसे सही ठहराया जा सकता है? किस कानून या आदेश के तहत हिरासत में लिए गए लोगों को पूरी रात कैद में रखना जायज है?”

उन्होंने विवादित ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया को लेकर, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने की CJP की मांग को फिर से दोहराया।

बोरा ने कहा, “कानूनी तौर पर, लोगों को-खासकर महिलाओं को सूर्यास्त के बाद रिहा कर दिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। इसके अलावा, एक नया नैरेटिव (विमर्श) फैलाया जा रहा है-अराजकता और अव्यवस्था का। कैसी अराजकता और अव्यवस्था? वैसी ही, जैसी आपने सेंट्रल दिल्ली में फैलाई थी? दिल्ली के लोग चैन की सांस भी नहीं ले पा रहे हैं; वे काम पर जाने के लिए जो भी रास्ता चुनते हैं, वह बंद मिलता है। आप पूरे देश में अराजकता और अव्यवस्था फैला रहे हैं। कृपया, भारत के लोगों को बख्श दें। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग (impeachment) चलाएं और SIR को रोकें, ताकि इस देश के आम नागरिक चैन की सांस ले सकें, सुकून महसूस कर सकें और उनके मतदान के अधिकार सुरक्षित रह सकें।”

बोरा ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस उन्हें अपने वकीलों से बात नहीं करने दे रही थी।

उन्होंने कहा, “उन्होंने (पुलिस ने) मेरा नाम, पता और अन्य विवरण मांगे। काफी देर तक, उन्होंने मुझे किसी कानूनी सलाहकार (वकील) से बात करने या सलाह लेने भी नहीं दिया। हमारे वकील 5-6 घंटे तक मुझसे संपर्क करने की कोशिश करते रहे; जब हमने किसी तरह उन्हें फोन किया, तब जाकर उन्हें मुझसे मिलने की अनुमति मिली। ये लोग लंबे समय से इसी तरह की हरकतें करते आ रहे हैं।”

CJP ने दिपके के ठिकाने के बारे में जानकारी मांगी

CJP ने आरोप लगाया है कि दिपके को किसी अज्ञात जगह पर ले जाया गया है और उनके वकीलों को उनसे बात नहीं करने दी जा रही है।

X पर एक पोस्ट में, CJP ने लिखा, “अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस ने अगवा कर लिया है। उन्हें उठाए हुए 10 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अभी तक उनके माता-पिता, वकीलों या CJP की टीम को उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।”

यह घटनाक्रम CJP के अन्य सदस्यों, जिनमें सौरव दास और आशुतोष रांका शामिल हैं, को हिरासत में लिए जाने के बाद हुआ है। इन दोनों नेताओं को जंतर-मंतर में घुसने के आरोप में हिरासत में लिया गया था, जिसे अब विरोध-प्रदर्शन की जगह के रूप में मान्यता नहीं दी गई है।

बता दें कि CJP, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वापस लेने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रही है।

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दीपके, नेहा पुलिस हिरासत में

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में लेकर उनका तिरंगा मार्च रोक दिया। दीपके अपने समर्थकों के साथ शाम पांच बजे के करीब कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च निकालने जा रहे थे। लेकिन पुलिस ने वहां पहुंचने से पहले ही उनको हिरासत में ले लिया गया। हालांकि उनके कुछ समर्थक तिरंगा लेकर सेंट्रल पार्क पहुंच गए थे और वहां तिरंगा फहराया। सीपीआई माले के छात्र संगठन आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। सीजेपी ने देर शाम कहा कि दीपके को दिल्ली पुलिस किसी अज्ञात जगह ले गई है।

दिल्ली पुलिस ने डेढ़ सौ अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया है। दीपके को छह दिन में दूसरी बार दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। इससे पहले 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए आए दीपके को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर ही हिरासत में ले लिया गया था। एक दिन बाद 11 अक्टूबर को दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका एक बॉन्ड भर कर रिहा हुए थे। पांच दिन बाद उनको फिर से हिरासत में लिया गया। दीपके को हिरासत में लिए जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी ने इसे अघोषित आपातकाल बताया।

गौरतलब है कि सीजेपी का तिरंगा मार्च रोकने के लिए एनडीएमसी ने सेंट्रल पार्क को दिन के लिए बंद कर दिया था और पुलिस ने नई दिल्ली जिले में बीएनएसएस की धारा 163 लागू कर दी है। इसके तहत चार या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर रोक है। बहरहाल, दीपके को हिरासत में लेने से पहले दिल्ली पुलिस झंडेवालान स्थित उस घर पर पहुंची थी, जहां वे ठहरे हुए थे। पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन नहीं करने का नोटिस दिया था। यह घर शरद पवार की एनसीपी के एक नेता का है।

पुलिस जब उनको नोटिस देने गई तो इस दौरान दीपके की पुलिस से बहस हो गई थी। दीपके ने पुलिस से कहा कि यह कोई रैली या प्रोटेस्ट नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हम सिर्फ सेंट्रल पार्क तक जाकर तिरंगा फहराना चाहते हैं’। गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को शाम पांच बजे ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च का ऐलान किया था। सीजेपी ने प्रदर्शनकारियों को शाम पांच बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में आने के लिए कहा था।

दूसरी ओर इस मार्च को रोकने के लिए दिल्ली में 28 हजार से ज्यादा सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था। अर्धसैनिक बलों के साथ साथ दिल्ली पुलिस के जवानों ने पूरे कनॉट प्लेस को घेर लिया था। सात लेयर की बैरिकेडिंग की गई थी। ऐसी की बैरिकेडिंग और सुरक्षा बंदोबस्त करके 10 अक्टूबर का जंतर मंतर का प्रदर्शन भी रोका गया था। उस दिन सात हजार के करीब लोग हिरासत में लिए गए थे।

‘अमित शाह की पुलिस’ की बर्बरता को अनदेखा नहीं किया जाएगा: राहुल गांधी

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई में कई विद्यार्थियों के घायल होने का हवाला देते हुए शुक्रवार को कहा कि ‘‘अमित शाह की दिल्ली पुलिस की बर्बरता को अनदेखा नहीं किया जाएगा’’ और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ हर कानूनी रास्ता अपनाया जाएगा।

गांधी ने इन विद्यार्थियों से हाल ही में हुई मुलाकात का एक वीडियो ‘एक्स’ पर साझा किया। इनमें कुछ का संबंध कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई से है। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने केरल की अथिरा और राजस्थान की रितु समेत कई विद्यार्थियों की पिटाई की, लेकिन इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार किया जा रहा है।

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से बात की तथा उनसे संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ अपने यहां मामला दर्ज कराने के लिए कहा।

उन्होंने कहा कि केरल में पहले ही ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज की जा चुकी है और घटना के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ केरल, राजस्थान तथा अदालतों में उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल किया जाएगा। गांधी ने कहा अमित शाह की दिल्ली पुलिस की बर्बरता को अनदेखा नहीं किया जाएगा।’’

कांग्रेस नेता ने इस घटना की तुलना 1930 के धरासणा सत्याग्रह से भी की और कहा कि उस समय सरोजिनी नायडू के नेतृत्व में निहत्थे सत्याग्रहियों ने पुलिस की लाठियों का सामना किया था, लेकिन उनमें से किसी ने जवाब में हाथ नहीं उठाया और पूरी दुनिया ने इसे देखा था। उन्होंने कहा पुलिस हड्डियां तोड़ सकती है, सत्याग्रह नहीं।’’

गांधी ने कहा कि देश के युवा, विशेषकर युवतियां निडर, दृढ़ और एकजुट’’ हैं तथा लोकतंत्र के लिए खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा मैं उनके साथ खड़ा हूं।

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राष्ट्रपति भवन के पास ‘आप’ ने निकाला ‘तिरंगा मार्च’

कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के शुक्रवार शाम को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले आम आदमी पार्टी (आप) ने राष्ट्रपति भवन के पास तिरंगा मार्च निकाला और कहा कि यह तय करना केंद्र सरकार का काम नहीं है कि जनता राष्ट्रीय ध्वज कहां फहराए।

‘आप’ की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने हाथों में तिरंगा लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस की मौजूदगी में नॉर्थ एवेन्यू में मार्च निकाला।

भारद्वाज ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा सरकार और पुलिस यह तय नहीं कर सकती कि नागरिक राष्ट्रीय ध्वज कहां फहराएं? यह उनका काम नहीं है। हमने यहां ध्वज फहराया। हम शाम को कॉजपा के मार्च में भी शामिल होंगे… जहां भी तिरंगा फहरा सकते हैं, लोगों को वहां फहराना चाहिए।

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कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बृहस्पतिवार को लोगों से कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में शामिल होने की अपील की थी।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन करने के मुद्दे पर दिल्ली पुलिस के साथ गतिरोध के बीच उन्होंने यह अपील की थी।

हालांकि, नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने ‘‘प्रशासनिक कारणों’’ से शुक्रवार और शनिवार को सेंट्रल पार्क आम लोगों के लिए बंद रखने की घोषणा की है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने कहा है कि वह किसी उपयुक्त स्थान पर चुनिंदा लोगों के समूह को राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रगान गाने की अनुमति देने की व्यवस्था कर सकती है।

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