जन नेता कामरेड होमी एफ दाजी – शताब्दी पर जयजगत!

जन नेता कामरेड होमी एफ दाजी - शताब्दी पर जयजगत!

होमी एफ. दाजी, साम्यवादी विचारधारा के साथ ज़ीने वाले साम्यवादी राजनेता होने के साथ ही वंचित तबके से लेकर पढ़े-लिखे बुद्धिजीवियों के मन मस्तिष्क को गहराई से प्रभावित करने वाले राजनेता थे। होमी दाजी का जन्म 5 सितम्बर 1926 को बम्बई में एक पारसी परिवार में हुआ था। 14 मई 2009 को कामरेड होमी दाजी ने अपनी जीवन यात्रा इन्दौर में 82 वर्ष की आयु में पूरी की। जीवन संघर्ष क्या होता है यह होमी दाजी ने अपने जीवन के प्रारंभ में ही अच्छे से समझ लिया था।

 

बम्बई से अपने पिताजी के साथ होमी दाजी इन्दौर आए और इन्दौर में आपने अपना और अपने परिवार के निजी जीवन को गढ़ने की खुद शुरुआत की और जीवन संघर्ष में सतत आगे बढ़ते रहने का अनथक सिलसिला प्रारंभ किया। होमी दाजी के समूचे जीवन की कहानी वंचित समूह के लोगों में ज़ीने के साथ हक एवं गरिमापूर्वक जीते रहने की आशा और विश्वास पैदा करने की अनोखी कहानी है। आजादी आने के शुरुआती काल में सभी लोगों के मन में बहुत बढ़िया उत्साह का वातावरण बना हुआ था। आजादी की खुशी और आगे बढ़कर देश समाज के कार्य में सहजता से भागीदारी की प्रवृत्ति भी बहुतायत से मौजूद थी।

 

आजादी आंदोलन के कारण जनचेतना समाज के सभी तबकों और हिस्सों में मौजूद थीं। गुलामी के कालखंड की उदासीनता छट चुकी थी। इस कालखंड में नौजवान होमी दाजी जो खुद घनघोर आर्थिक संकटों से घिरे हुए थे, ने अपनी परवाह किए बगैर लोगों के अरमानों को जगाने और उनके सपनों में रंग भरने के लिए संघर्ष की राजनीति की राह चुनी। छात्र जीवन में अपने अध्ययन हेतु स्कूल की फीस भरने लायक आर्थिक स्थिति नहीं होने पर भी होमी दाजी ने बिना घबराए और बिना पीछे हटे, छात्र जीवन संघर्ष की वैचारिक प्रतिबद्धता एवं तेजस्विता के साथ इतिहास विषय में आगरा यूनिवर्सिटी से एमए करने के साथ साथ ही एलएलबी की डिग्री मेरिट लिस्ट में स्थान पाकर हासिल की थी। यह युवा होमी दाजी के व्यक्तित्व का उजला पृष्ठ है कि परिस्थितियां कैसी भी हो हिम्मत कभी न हारो।

 

कामरेड होमी दाजी जैसा शब्दों और आवाज का जादूगर किसी भी कालखंड में यदा-कदा ही संघर्षमयी सार्वजनिक, राजनीतिक जीवन के सतत, सक्रिय, संघर्ष में से उभरकर आता हैं। कामरेड होमी दाजी को सुनने के लिए लोग लालायित बने रहते थे। दाजी का कालखंड एक तरह से लगातार आमसभाओं की वैचारिक सक्रियता का कालखंड था। होमी दाजी को अपने श्रोताओं के मानस की गहरी समझ थी। यदि गरीब वंचित और निरक्षर लोगों के बीच होमी दाजी बोलते थे तो इस तरह बोलते थे कि उनके द्वारा बोली हुई बातें श्रोताओं के दिल दिमाग में उतर जाएं। इसी तरह दिग्गज पढ़े-लिखे विद्वानों की सभा में भी शामिल श्रोता समूह, मंत्रमुग्ध हो दाजी को सुनता रहता था।

 

आम सभा हो या कपड़ा मिलों में मजदूरों की छुट्टी होने पर होने वाली गेट मीटिंग, होमी दाजी के भाषण न केवल मजदूरों को राजनीतिक चिंतन का विषय देते थे वरन गेट मीटिंग सुनने वाले मजदूर, अपनी-अपनी बस्तियों में जाकर लोगों को बताते थे कि आज होमी दाजी ने अपने भाषण में यह बात कही और इस तरह मज़दूरों को गेट मीटिंग के माध्यम से अपनी बस्तियों में जाकर राजनीतिक चेतना को फ़ैलाने की लोक कोचिंग वे आम सभाओं के माध्यम से करते रहते थे।

 

होमी दाजी की वकालत का कार्यालय एक तरह से वकालत के साथ ही राजनीतिक सामाजिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण संचालन केन्द्र की तरह जाना जाता था। होमी दाजी की वकालत केवल कोर्ट परिसर तक ही सीमित नहीं थी, जनता के बीच भी दाजी की वकालत सार्वजनिक मुद्दों पर चलती रहती थी। पर होमी दाजी की वकालत का लोहा विधि जगत मानने लगा था।

 

कामरेड होमी दाजी ने सन 1962 में चीन के भारत पर हमले की पृष्ठभूमि में इन्दौर से लोकसभा का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा और वे तीसरी लोकसभा के सदस्य बने, 1962 के इस लोकसभा निर्वाचन की एक और उल्लेखनीय बात यह थी कि समाजवादी पार्टी ने सुप्रसिद्ध मामा बालेश्वर दयाल को इन्दौर लोकसभा से प्रत्याशी बनाया था। इस आम चुनाव में जीत होमी दाजी को मिली। इन्दौर लोकसभा क्षेत्र से मामा बालेश्वर दयाल के समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ने से जो राजनीतिक चेतना निकली उसकी परिणति यह हुई कि 1967 के विधानसभा चुनाव में इन्दौर से साथी कल्याण जैन और साथी आरिफ बेग दोनों समाजवादी विधायक निर्वाचित हुए। इस तरह कामरेड होमी दाजी और मामा बालेश्वर दयाल के निर्वाचन लड़ने से इन्दौर की चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़ आया और समाजवादी और साम्यवादी विचारधारा की इन्दौर की राजनीति और समाजिक जीवन में पकड़ मजबूत हुई।

 

लोकसभा में कामरेड होमी दाजी ने अपनी भाषण कला के साथ संसदीय प्रक्रिया की गहरी संवैधानिक समझ होने की छाप संसदीय प्रक्रिया में निरंतर सक्रिय भागीदारी कर लोकमानस पर छोड़ने के साथ ही राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका की शुरुआत की। इस कालखंड में पंडित जवाहरलाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे। समाजवादी नेता डॉ. राममनोहर लोहिया सहित देश के दिग्गज राजनेता लोकसभा में मौजूद थे। लोकसभा में सक्रिय भूमिका से कामरेड होमी दाजी ने देश के दिग्गज राजनेताओं सहित जनमानस का ध्यान आकर्षित किया और देश की संसदीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

कामरेड होमी दाजी दो बार मध्य प्रदेश की विधानसभा के सदस्य के रूप में इन्दौर के श्रमिक क्षेत्र से निर्वाचित हुए। कामरेड होमी दाजी बाद में 1967 के लोकसभा चुनाव में प्रकाशचन्द्र सेठी से चुनाव हार गए। 1971 में पुनः इन्दौर के श्रमिक क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। इन्दौर, मध्यप्रदेश और भारत के श्रमिक आंदोलन में कामरेड होमी दाजी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। एटक में राष्ट्रीय स्तर पर भी कामरेड होमी दाजी की महत्वपूर्ण भूमिका इतिहास में दर्ज है।

 

कामरेड होमी दाजी की जीवनसाथी कामरेड पैरिन दाजी ने घर, परिवार से लेकर कम्युनिस्ट पार्टी, श्रम आन्दोलन और सार्वजनिक एवं निजी जीवन में बराबरी से सहभागिता कर एक आदर्श प्रस्तुत किया जो सार्वजनिक जीवन में मिलने वाला बिरला उदाहरण है। कामरेड होमी दाजी एवं पैरिन दाजी का एक बेटा रूसी दाजी जो एक अभिभाषक होने के साथ-साथ आजीवन सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहा। इसी तरह एक बेटी कामरेड डाक्टर रोशनी दाजी जो रूस से डाक्टर बनकर आई और इन्दौर की वंचित बस्तियों में वंचित वर्ग के लोगों के लिए चिकित्सकीय परामर्श और इलाज एक डिस्पेंसरी के माध्यम से करते हुए राजनीतिक सामाजिक गतिविधियों में आजीवन शामिल रही।

 

कामरेड दाजी के दोनों बच्चों का युवा अवस्था में ही देहावसान हो जाना दाजी दम्पति के जीवन काल की गहरी दुखदाई घटना होने पर भी दाजी दम्पति ने निराशा को अपने निजी जिंदगी में फटकने नहीं दिया और आशा, विश्वास और संघर्ष को अपने जीवन क्रम का एक हिस्सा माना। अपनी लंबी निजी जिंदगी और संघर्षपूर्ण सार्वजनिक जीवन को जिस हिम्मत से शांतिपूर्वक तरीके से स्वीकार कर जीवन में निराशा को न तो दोनों ने आने दिया और न ही संघर्ष से पलायन कर अपने जीवन संघर्ष में आईं चुनौतियों से धबराए। यही दाजी दम्पति का निजी और सार्वजनिक जीवन जीने वाले सभी सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए खुला और सीधा संदेश है कि “हिम्मत कभी न हारो”।

 

होमी दाजी ने 50-55 साल से भी ज्यादा का समय सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका के साथ बिताया। इस कालखंड में हजारों नौजवानों, मजदूरों, किसानों और राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ताओं को जनता के लिए और जनता की तरह जीते हुए निर्भय राजनीति करते रहने का रास्ता दिखाया। मैं सन 1960 से इन्दौर के सार्वजनिक राजनीतिक सामाजिक जीवन में सतत सक्रिय हूं और 1960 में 9 वर्ष की आयु में पहली बार कामरेड होमी दाजी से एक आम सभा में मिला था। तब से लेकर कामरेड होमी दाजी के अंतिम संस्कार तक की घटनाएं मेरी स्मृति में आज भी जीवन्त रूप में दर्ज हैं। मुझे कामरेड होमी दाजी को देखने, सुनने, समझने और साथ काम करने का लंबा अवसर मिला।

 

कामरेड होमी दाजी से जीवन के कई नए आयाम सीखने का अद्भुत अवसर भी मिला। इन्दौर के साम्यवादी विचारधारा के कई कार्यकर्ताओं और राजनीतिक सामाजिक नेतृत्व से भी सम्पर्क का अवसर कामरेड होमी दाजी के साथ कई आन्दोलनों एवं मुद्दों पर साथ काम करने से मिला। इन्दौर में साम्यवादी आन्दोलन के काफी नेताओं को देखने-सुनने और मिलने का अवसर भी मिला। दत्तात्रय सरमंडल, कामरेड अनंत लागू से लेकर इन्दौर के साम्यवादी आन्दोलन की आज की पीढ़ी एवं पुरानी पीढ़ी के लगभग सभी साथियों एवं लोगों से पिछले 60-65 सालों से मिलने और जानने का एक लंबा सिलसिला जारी है, जो मेरे सार्वजनिक जीवन के अनुभवों का अनमोल खजाना है। इन्दौर में नगर निगम की चुनावी राजनीति में नागरिक समिति के रूप में विपक्षी राजनैतिक दलों का मोर्चा बनाने में भी कामरेड होमी दाजी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

 

यह वर्ष कामरेड होमी दाजी का शताब्दी वर्ष है। 100 वर्ष में सारी दुनिया में जमीन आसमान का अंतर आता गया है। पर सारी दुनिया में मनुष्यता के बुनियादी सवाल और अधिक गहराई से वैसे ही उठ रहे हैं जैसे 100 साल पहले या उससे पहले भी उठ रहे थे। 100 साल यानी पांच पीढ़ियों का कालखंड। आज का कालखंड एक दम भिन्न हो गया है पर भारत ही नहीं सारी दुनिया की समस्याएं और उन्हें समझने और धीरज के साथ बेहतर रास्ता निकालने की समझ जरूरी है। वैसे ही आज के कालखंड के नौजवान, मजदूर, किसान और जीवन संघर्ष में रास्ता खोज रहे राजनैतिक, सामाजिक गतिविधियों में लगे हुए आन्दोलनकारी लोगों को नया बेहतर रास्ता निकालने का आमंत्रण दे रहे हैं जैसा कि कामरेड होमी दाजी की युवावस्था में आजाद भारत के शुरुआती दिनों में युवा होमी दाजी की पीढ़ी को मिला था। 

 

किसी भी व्यक्ति की शताब्दी के वर्ष में बहुत सारे लोग, संदर्भ और पूरा जनजीवन बदल जाता है, पर फिर भी जीवन का बुनियादी संघर्ष नहीं बदलता, बुनियादी सवाल नई चुनौतियों के साथ आ जाते हैं। कामरेड होमी दाजी की जन्म शताब्दी पर कामरेड पैरिन दाजी, कामरेड रूसी दाजी, कामरेड डाक्टर रोशनी दाजी सहित जीवन संघर्ष के सभी साथियों सहित सभी दिवंगत साथियों का भी सादर स्मरण। सबको जयजगत।

नेपाल के दार्चुला में लैंडस्लाइड, निचले इलाकों में अलर्ट:त्रिशूली से 3 और भारतीयों का रेस्क्यू; बाढ़ में अबतक 1300 की मौत, 5 हजार लापता

नेपाल के दार्चुला जिले में शुक्रवार को भारी भूस्खलन के बाद चौलानी नदी का रास्ता बंद हो गया। निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। नदी का प्रवाह प्रभावित होने से आसपास के इलाकों में खतरा बढ़ गया है। वहीं, 26 अगस्त की बाढ़-लैंडस्लाइड के बाद से राहत-बचाव कार्य जारी है। त्रिशूली बाजार इलाके से 5 साल का बच्चे समेत तीन भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को बताया कि अब तक 169 भारतीयों को सुरक्षित निकाला है, जबकि 275 अब भी लापता हैं। इससे पहले शुक्रवार को बाढ़ के 9 दिन बाद त्रिशूली-3 ‘A’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से 2 मजदूर जिंदा निकाले गए हैं। 40 लोग अब भी फंसे हैं। बाढ़ से प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं में करीब 900 मजदूर लापता हैं। इनमें लगभग 500 के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। नेपाल में अब तक करीब 1300 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि राहत और बचाव दलों ने 12 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला है। फिलहाल 5300 से ज्यादा लोग लापता हैं। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ से 32,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। नेपाल आपदा से जुड़ी 3 तस्वीरें… चीन से 1,907 भारतीय सुरक्षित नेपाल पहुंचे विदेश मंत्रालय ने बताया कि चीन से 1,907 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। चीन के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में अब कोई भारतीय यात्री फंसा नहीं है। भारत ने 7 विमानों से भेजी 95 टन राहत सामग्री विदेश मंत्रालय के अनुसार, 26 अगस्त को बाढ़ आने के बाद से भारत ने नेपाल को करीब 95 टन राहत सामग्री भेजी है। यह सामग्री 7 विमानों के जरिए पहुंचाई गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अगस्त को नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह से बात कर हरसंभव मदद का भरोसा दिया था। इसके कुछ घंटे बाद भारत ने राहत सामग्री की पहली खेप भेज दी थी। भारत ने राहत-बचाव के लिए 54 विशेषज्ञों को भी नेपाल भेजा है। इनमें 30 सुरंग बचाव विशेषज्ञ, 19 फोरेंसिक विशेषज्ञ और 5 सदस्यीय मेडिकल टीम शामिल है। भारतीय टीमें नेपाल के अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। नेपाल में 35 मोटरेबल और 45 सस्पेंशन ब्रिज क्षतिग्रस्त स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ से मुख्य रूप से मध्य नेपाल में 35 मोटरेबल ब्रिज, 45 सस्पेंशन ब्रिज और करीब 40 किलोमीटर पक्की सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इससे कई इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ है। भारत ने कहा है कि वह नेपाल सरकार की जरूरत के अनुसार आगे भी मदद जारी रखेगा। इसके तहत फोरेंसिक किट, बेली ब्रिज और अन्य जरूरी सामग्री भेजने की योजना है।

दुनिया का नक्शा बदलने की तैयारी, UN में आज वोटिंग:यूरोप-रूस-कनाडा का साइज छोटा होगा, अफ्रीका-दक्षिण अमेरिका को फायदा

बचपन से किताबों, टीवी और इंटरनेट पर हम दुनिया का जो नक्शा देखते आए हैं, उसमें कई देशों और महाद्वीपों का आकार असल से काफी अलग दिखता है। अब इसे बदलने की कोशिश हो रही है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में शुक्रवार को इस प्रस्ताव पर वोटिंग होगी। इसमें ऐसा विश्व नक्शा अपनाने की बात है, जिसमें देशों और महाद्वीपों का आकार जमीन पर उनके असली आकार के करीब दिखे।

अगर यह प्रस्ताव पास होता है, तो दुनिया का नक्शा काफी बदल जाएगा। अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका बड़े दिखेंगे, जबकि ग्रीनलैंड, यूरोप और कनाडा मौजूदा नक्शे के मुकाबले छोटे नजर आएंगे।

इस बदलाव की मुहिम कुछ अफ्रीकी देशों ने शुरू की है। उनका कहना है कि मौजूदा नक्शे में अफ्रीका को उसके असली आकार से काफी छोटा दिखाया जाता रहा है। मौजूदा नक्शे में आखिर दिक्कत क्या है? दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले नक्शों में से एक मर्केटर नक्शा है। इसे यूरोपियन मैप मेकर जेरार्डस मर्केटर ने 1569 में बनाया था। इस नक्शे की एक बड़ी खासियत है कि यह समुद्र में रास्ता तय करने और जहाजों के नेविगेशन के लिए काफी उपयोगी है। लेकिन पूरी गोल धरती को सपाट नक्शे पर दिखाने की वजह से इसमें देशों और महाद्वीपों का आकार असल से अलग नजर आने लगता है। जैसे-जैसे कोई इलाका भूमध्य रेखा से दूर जाता है, वह नक्शे पर जरूरत से ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही वजह है कि उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के कई इलाके असल से काफी बड़े नजर आते हैं। ग्रीनलैंड इसका सबसे मशहूर उदाहरण है। मर्केटर नक्शे में ग्रीनलैंड दक्षिण अमेरिका के लगभग बराबर दिखाई देता है। लेकिन असल में दोनों के आकार में बहुत बड़ा अंतर है। ग्रीनलैंड का क्षेत्रफल करीब 22 लाख वर्ग किलोमीटर है। यह लगभग डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के बराबर है। वहीं अफ्रीका का क्षेत्रफल करीब 3 करोड़ वर्ग किलोमीटर है। यानी अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है। फिर भी मर्केटर नक्शे को देखकर दोनों का आकार लगभग एक जैसा लग सकता है। यही वह फर्क है जिसे अब कम करने की कोशिश हो रही है। अफ्रीकी देशों को आखिर दिक्कत क्या है अफ्रीकी देशों का कहना है कि बात सिर्फ नक्शे पर किसी देश या महाद्वीप के छोटा-बड़ा दिखने की नहीं है। दुनिया का नक्शा यह भी तय करता है कि हम अलग-अलग हिस्सों को किस नजर से देखते हैं। UN के सामने रखे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि मर्केटर नक्शे में अफ्रीका का वास्तविक आकार काफी छोटा नजर आता है। लंबे समय तक ऐसी तस्वीर देखने से लोगों के मन में अफ्रीका के आकार और वैश्विक महत्व को लेकर गलत धारणा बन सकती है। प्रस्ताव में लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया का भी जिक्र है। इसमें कहा गया है कि नक्शे में इन क्षेत्रों का छोटा नजर आना उनकी विकास जरूरतों, बुनियादी ढांचे और आर्थिक क्षमता को भी कम करके आंकने की धारणा बना सकता है। अब दिखेगी दुनिया की ज्यादा सही तस्वीर UN के सामने रखे गए प्रस्ताव का नाम ‘करेक्ट द मैप’ है। इसे अफ्रीकी संघ के सदस्य देशों और बहामास ने मिलकर आगे बढ़ाया है। इसमें मर्केटर नक्शे की जगह ऐसे नक्शे इस्तेमाल करने की बात कही गई है, जिनमें दुनिया के अलग-अलग हिस्से उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाई दें। इनमें ‘इक्वल अर्थ’ नक्शा खास है। इसे 2018 में पेश किया गया था। इसका मकसद दुनिया के देशों और महाद्वीपों का आकार इस तरह दिखाना है कि वह जमीन पर उनके असली क्षेत्रफल के ज्यादा करीब नजर आए। इस नक्शे में बदलाव पहली नजर में ही दिखाई देता है… यानी जमीन पर कुछ नहीं बदलता, सिर्फ उसे नक्शे पर दिखाने का तरीका बदल जाता है। न्यूजीलैंड भी पुराने नक्शे से परेशान अफ्रीका अकेला ऐसा इलाका नहीं है जिसे पुराने नक्शे से शिकायत रही है। न्यूजीलैंड भी लंबे समय से दुनिया के नक्शे पर अपनी जगह को लेकर मजाक करता रहा है। 2018 में न्यूजीलैंड के एक पर्यटन विज्ञापन में तत्कालीन प्रधानमंत्री जैसिंडा आर्डर्न भी नजर आई थीं। इसमें मजाकिया अंदाज में दिखाया गया था कि दुनिया के कई नक्शों में न्यूजीलैंड जैसे गायब ही हो जाता है। दरअसल, मर्केटर नक्शे में न्यूजीलैंड नीचे दाईं ओर एकदम किनारे पर दिखाई देता है। कई बार नक्शे में वह पूरी तरह छूट भी जाता है। इक्वल अर्थ नक्शे के कुछ रूपों में ओशिनिया को केंद्र के करीब लाया जाता है। इससे ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों की स्थिति भी ज्यादा प्रमुख नजर आती है। फ्रांस भी नए नक्शे के समर्थन में इस मुहिम को फ्रांस का भी समर्थन मिला है। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने शुक्रवार को कहा कि उनका देश ऐसे नक्शों का इस्तेमाल करेगा, जिनमें देशों और महाद्वीपों का आकार जमीन पर उनके असली क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखे। उन्होंने कहा कि मौजूदा नक्शे में अमेरिका, रूस और चीन जैसे देश अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया के मुकाबले ज्यादा बड़े और प्रमुख नजर आते हैं। बारो ने कहा कि नक्शे पर बार-बार दिखने वाला यह फर्क धीरे-धीरे लोगों की सोच पर भी असर डालता है। इसलिए अब दुनिया को नक्शे पर ज्यादा सही तरीके से दिखाने का समय आ गया है। अफ्रीका ने पहले खुद बदला नक्शा अफ्रीका सिर्फ यह शिकायत नहीं कर रहा कि उसे दुनिया के नक्शे पर छोटा दिखाया जाता है। उसने इसे बदलने की शुरुआत खुद कर दी है। अफ्रीकी संघ ने मार्च में इक्वल अर्थ नक्शे को अपनाने का फैसला किया। इसके बाद अप्रैल में टोगो ने अफ्रीकी संघ की ओर से संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से भी ऐसे नक्शों को अपनाने की अपील की। यानी अब कोशिश सिर्फ अफ्रीका के नक्शे बदलने तक सीमित नहीं है। अफ्रीकी देश चाहते हैं कि दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले नक्शों में भी महाद्वीपों का आकार ज्यादा सही दिखाई दे। जुलाई में संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस मुद्दे पर शुरुआती बातचीत हुई और अब मामला वोटिंग तक पहुंच गया है। अफ्रीकी संघ की आयुक्त अम्मा ट्वुम-अमोआ ने मार्च में कहा था कि अफ्रीका को लंबे समय से नक्शों पर उसके असली आकार से छोटा दिखाया जाता रहा है। उनके मुताबिक, अब समय आ गया है कि दुनिया अफ्रीका को सिर्फ नक्शे पर नहीं, बल्कि उसके इतिहास, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और वैश्विक भूमिका के हिसाब से भी देखे। गूगल मैप का भी नक्शा बदलेगा अब सवाल सिर्फ स्कूलों में टंगे नक्शों या किताबों में छपे मैप का नहीं है। दुनिया का नक्शा बदलने की यह बहस हमारे मोबाइल की स्क्रीन तक पहुंच सकती है। आज हम दुनिया को कागज से ज्यादा गूगल मैप्स जैसे डिजिटल मैप पर देखते हैं। इन प्लेटफॉर्म पर भी धरती को स्क्रीन पर दिखाने के लिए नक्शे के अलग-अलग प्रोजेक्शन का इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि UN का प्रस्ताव टेक कंपनियों को भी इस बहस में शामिल करना चाहता है। प्रस्ताव में कंपनियों से कहा गया है कि वे ज्यादा सटीक प्रोजेक्शन अपनाने और इसके लिए UN के सदस्य देशों व क्षेत्रीय संगठनों के साथ मिलकर काम करने पर विचार करें। यानी अगर आने वाले समय में ज्यादा सटीक प्रोजेक्शन को व्यापक रूप से अपनाया जाता है, तो जिस दुनिया को हम फोन पर देखते हैं, उसका नक्शा भी बदल सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि UN का प्रस्ताव पास होते ही अगले दिन गूगल मैप्स खोलने पर पूरी दुनिया बदली हुई नजर आएगी। इसके बाद अलग-अलग टेक कंपनियों, देशों और संस्थानों को अपने स्तर पर फैसला लेना होगा। तो क्या सच में दुनिया का नक्शा बदल जाएगा? अगर संयुक्त राष्ट्र महासभा का प्रस्ताव पास हो जाता है, तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि पूरी दुनिया में एक ही नया नक्शा इस्तेमाल करना अनिवार्य हो जाएगा। लेकिन इससे नक्शे बनाने और पढ़ाने में ऐसे तरीकों को बढ़ावा मिल सकता है, जिनमें देशों और महाद्वीपों का वास्तविक क्षेत्रफल ज्यादा सही दिखाई दे। दुनिया तो वही रहेगी। अफ्रीका, ग्रीनलैंड, यूरोप, दक्षिण अमेरिका और भारत अपनी जगह पर ही रहेंगे। फर्क सिर्फ इतना होगा कि नक्शे पर वे जैसे दिखते हैं, वह जमीन पर उनके असली आकार के ज्यादा करीब होगा।

बेल्जियम PM बोले- मोदी ने हमें पहले ही चेताया था:तब हमने नहीं सुनी, अमेरिका-चीन के भरोसे रहने का खतरा अब समझ आ रहा

बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने गुरुवार को कहा कि यूरोप को अब आर्थिक निर्भरता का खतरा समझ आ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोप को इस बारे में काफी पहले चेताया था। दिल्ली में CII के कार्यक्रम में उन्होंने कहा- दुनिया तेजी से बदल रही है, लेकिन यूरोप इस बदलाव के साथ कदम नहीं मिला पा रहा। वह बूढ़ा हो चुका है। वेबर के मुताबिक, चीन और अमेरिक यूरोप से बहुत आगे निकल चुके हैं। इनोवेशन और प्रोडक्टिविटी में यूरोप बहुत पीछे चला गया है, इसलिए उसे हर तरफ से झटके लग रहे हैं। ‘हम अपनी रक्षा करने में सक्षम नहीं’ डी वेवर ने कहा कि यूरोप की कमजोरी सिर्फ अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है। यूरोपीय देश अपनी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी खुद उठाने की स्थिति में भी नहीं हैं। यूरोप को हर समय अपमानित होना पड़ता है। वेबर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब यूरोपीय देशों पर रक्षा के लिए ज्यादा खर्च करने और अपनी सुरक्षा में ज्यादा जिम्मेदारी लेने का दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, आप इस इतिहास से गुजर चुके हैं। आपके प्रधानमंत्री ने यूरोप को बहुत पहले चेताया था, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। अब हम सुन रहे हैं। यूरोप को यह समझ थोड़ी देर से आई है, लेकिन अब यह बदलाव हो रहा है। डी वेवर ने यूरोप की इस स्थिति को ‘रूड अवेकनिंग’ यानी कड़वी हकीकत से जागना बताया।
सस्ते आयात से कमजोर हुई यूरोप की इंडस्ट्री वेवर ने कहा कि यूरोप ने लंबे समय तक विदेशी कंपनियों को बड़े पैमाने पर अपने बाजार में जगह दी। कम कीमत पर आने वाले सामान ने यूरोप की स्थानीय कंपनियों के लिए मुश्किलें बढ़ाईं और धीरे-धीरे वहां की इंडस्ट्री कमजोर होती गई। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का सबसे ज्यादा फायदा जिस देश को हुआ, वह यूरोप का करीबी पड़ोसी है और उसे सभी जानते हैं। डी वेवर ने देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके इस बयान को चीन की ओर इशारा माना जा रहा है। भारत को बताया ‘नंबर-1’ रणनीतिक पार्टनर डी वेवर ने भारत को यूरोप के लिए सबसे अहम रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि यूरोप को ऐसे देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने चाहिए, जो सहयोग और बहुपक्षीय व्यवस्था में भरोसा रखते हों और ताकत के बजाय आपसी सम्मान के आधार पर संबंध बनाते हों। उन्होंने कहा, “अगर भारत उस सूची में नहीं है तो आपने कुछ बहुत बुनियादी बात मिस कर दी है। भारत उस सूची में है। नंबर-1।” डी वेवर ने भारत की तेज आर्थिक growth, बड़ी टैलेंट पूल और टेक्नोलॉजी क्षमता को दोनों पक्षों के लिए बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोप के बीच व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की बड़ी संभावनाएं हैं। बेल्जियम खुद भी बजट के दबाव में डी वेवर की ये चिंताएं ऐसे समय सामने आई हैं, जब बेल्जियम सरकार खुद बड़े बजट कटौती के फैसलों की तैयारी कर रही है। सरकार का लक्ष्य 2029 तक करीब 10 अरब यूरो यानी 11.7 अरब डॉलर की बचत करना है। प्रधानमंत्री ने माना कि इन फैसलों का असर देश के लगभग हर वर्ग पर पड़ेगा। उन्होंने कहा, “मैं अच्छी नींद नहीं ले पा रहा हूं और इस बारे में बहुत सोचता हूं।” डी वेवर ने कहा कि बजट का घाटा सिर्फ अमीरों पर ज्यादा टैक्स लगाकर पूरा नहीं किया जा सकता। वहीं, खर्च में कटौती को लेकर उन्होंने कहा कि आम तौर पर हर कोई चाहता है कि बचत का असर किसी और पर पड़े, उस पर नहीं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, “हर कोई सोचता है कि अगर बचत करनी है तो उसका खर्च मेरे पड़ोसी पर पड़े, मुझ पर नहीं।”

Krishna Janmotsav 2026: आज आधी रात में पधारेंगे मुरलीधर श्याम, जानें आज निशिता काल पूजा विधि, महत्व और पारण का सही समय

Krishna Janmotsav 2026: आज भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है और आज के दिन ही द्वापर युग में देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र श्रीकृष्ण के रूप में भगवान विष्णु ने अवतार लिया था। इसलिए हर साल इस दिन भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन मध्यरात्रि में भक्त वत्सल मनमोहन श्याम अपने लाखों करोड़ों भक्तों के बीच जन्म लेते हैं। निशिता काल में जब यह पल आता है, तब शंख और घंटों की आवाज और कृष्ण कन्हैया लाल की जय के साथ भगवान के अवतरण का उत्सव मनाया जाता है।

इस साल 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण का 5253वीं जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। बहुत से भक्त आज के दिन व्रत करते हैं, घर और मंदिर में भगवान कृष्ण के जन्म और लीलाओं की झाकियां सजाते हैं। आइए कृष्ण जन्माष्टमी पर जानते हैं तिथि, समय, महत्व, पूजा विधि, नियम, व्रत के प्रकार और पारण का समय।

जन्माष्टमी 2026: मध्यरात्रि निशिता काल पूजा विधि

  • भगवान कृष्ण की मूर्ति को धोकर साफ चौकी पर एक नया या साफ कपड़ा बिछाएं।
  • इसके बाद फलों, मोर पंख, तुलसी के पत्तों और पालकी को सजाएं।
  • भगवान कृष्ण की लड्डू गोपाल मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद साफ जल और आखिर में गंगाजल की कुछ बूंदें डालें।
  • मूर्ति को साफ कपड़े से सुखाएं, इसके बाद नए कपड़े पहनाएं, आभूषण लगाएं, मुकुट में मोर पंख और हाथ में बांसुरी दें। चंदन और रोली का तिलक और अक्षत लगाएं।
  • इसके बाद भगवान कृष्ण को पंजीरी, तुलसी पत्ते, फल-फूल, माखन-मिश्री और पंचमेवा का भोग अर्पित करें।
  • इसके बाद भगवान कृष्ण को पालने में बिठाएं और ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल’ की गीत गाते हुए धीरे से झुलाएं।
  • इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा मंत्र ‘ऊं’ नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करें। संभव हो तो कृष्ण अष्टकम का जाप करें।
  • भगवान कृष्ण की जन्म घोषणा करने के लिए शंख बजाएं फिर घी के दीये और कपूर से आरती करें। प्रसाद और चरणामृत सभी में बांटें।
  • पारण व्रत से जुड़े नियम

कई भक्त जाने-अनजाने में आधी रात की आरती के फौरन बाद ही व्रत तोड़ देते हैं। जबकि जन्माष्टमी व्रत का पारणा अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों के समाप्त होने के बाद ही किया जाता है।

अष्टमी तिथि 5 सितंबर को सुबह 11 बजकर 23 मिनट तक रहेगा, इसलिए सही मायने में पारण शनिवार की सुबह ही करनी चाहिए।

जन्माष्टमी पूजा सामग्री

दूध, दही, शुद्ध देसी घी, शहद, चीनी, तिलक के लिए रोली और चंदन पाउडर, अक्षत (साबुत चावल) मौली या कलावा, अभिषेक करने के लिए तांबे का लोटा, शंख, आरती के लिए भीमसेनी कपूर और सूती बत्तियां, भोग के लिए पंचमेवा, माखन-मिश्री और धनिया पंजीरी आरती की थाली, घी का दीया, अगरबत्ती, तुलसी पत्ता, मोर पंख, बांसुरी, मूर्ति के लिए वस्त्र।

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नेपाल के मलबे में जिंदगी के निशान तलाशने की आखिरी कोशिश! अपने 36 लापता नागरिकों को बचाने ऑस्ट्रेलिया ने भेजी हाई-टेक ‘ड्रोन फौज’

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद से ही रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भारत सहित कई देश नेपाल की मदद के लिए अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कर रहे हैं और मलबों में फंसे लोगों को निकालने के लिए सर्च अभियान चला रहे हैं। इसी क्रम में ऑस्ट्रेलिया के आपदा राहत विशेषज्ञ भी लोगों की तलाश में शामिल होने के लिए शुक्रवार को नेपाल के लिए रवाना हुए। वहीं, इस भयानक आपदा के बाद ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने अपने 36 लापता नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है।

बता दें कि 26 अगस्त को ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के बाद नेपाल में आई अचानक बाढ़ में अब तक 1,200 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 5,000 लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल सरकार के मुताबिक, लापता लोगों में 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि नेपाल सरकार के अनुरोध पर 15 सदस्यों वाली ‘ऑस्ट्रेलियाई आपदा सहायता प्रतिक्रिया टीम’ को तैनात किया गया है। इस टीम में ज्यादातर सदस्य राज्य की आपातकालीन सेवाओं के ड्रोन पायलट हैं।

ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी ने दी जानकारी

न्यू साउथ वेल्स फायर एंड रेस्क्यू के कमिश्नर जेरेमी फ्यूट्रेल ने शुक्रवार को सिडनी एयरपोर्ट पर पत्रकारों से कहा, “हमें अभी भी उम्मीद है कि कुछ जगहों पर लोग जीवित हो सकते हैं और उम्मीद है कि यह टीम ऐसे लोगों का पता लगाने में मदद कर सकेगी।”

उन्होंने कहा, “इस टीम में मुख्य रूप से हमारे खास ड्रोन के पायलट शामिल हैं।” उन्होंने आगे बताया कि उनके पास अलग-अलग तरह के ड्रोन हैं जो हवा से बड़े इलाकों का सर्वे कर सकते हैं और ऐसी तंग जगहों पर भी जा सकते हैं जहां बचाव कर्मियों का पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

जेरेमी फ्यूट्रेल ने आगे कहा, “हम जो मदद दे रहे हैं, वह नेपाली अधिकारियों के अनुरोध पर दी जा रही है। इसके तहत उन्हें ऐसे कई साधन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनसे उन्हें वाकई मदद मिलेगी।”

उन्होंने कहा, इसके अलावा, ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस के 7 विशेषज्ञ भी शनिवार को नेपाल पहुंचेंगे। ये विशेषज्ञ आपदा में मारे गए या लापता लोगों की पहचान करने में मदद करेंगे।

19 ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी पहले से ही नेपाल में मौजूद 

बता दें कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने गुरुवार को इनकी तैनाती की घोषणा की थी। विदेश मंत्री पेनी वोंग ने बताया कि 19 ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी पहले से ही नेपाल में मौजूद हैं, जिनमें कॉन्सुलर अधिकारी, मानवीय सहायता से जुड़े पुलिसकर्मी और रक्षा व पुलिस के जवान शामिल हैं।

गौरतलब है कि नेपाल के विदेश मंत्री ने पिछले हफ्ते कहा था कि उन्हें विशेष और तकनीकी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत है।

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि बचे हुए लोगों के मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है, लेकिन चीन की सीमा के पास बचाव कार्य जारी है।

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, लापता ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के कुछ रिश्तेदार भी खुद तलाश करने के लिए नेपाल गए हैं।

ऑस्ट्रेलिया के ट्रेजरर जिम चाल्मर्स ने शुक्रवार को बताया कि 36 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक अभी भी लापता हैं, जबकि रात भर में दो लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।

उन्होंने ABC न्यूज ब्रेकफास्ट को बताया, “हमें उन 36 ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के बारे में अभी भी बहुत चिंता है जिनका अभी तक पता नहीं चल पाया है।”

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क्या आज बदल जाएगा पूरी दुनिया का नक्शा? UN में 450 साल पुरानी व्यवस्था पर बड़ी वोटिंग, जानिए मर्केटर मैप का पूरा विवाद

UN Map Voting Controversy: क्या आपने कभी सोचा है कि जिस दुनिया के नक्शे को हम बचपन से स्कूलों, किताबों और गूगल मैप्स पर देखते आ रहे हैं, वह असल में सही है ही नहीं? संयुक्त राष्ट्र महासभा में आज एक ऐसे मसौदे पर ऐतिहासिक वोटिंग होने जा रही है, जो 450 साल पुरानी नक्शा प्रणाली को बदलकर पूरी दुनिया का भूगोल देखने का जरिया ही बदल सकती है।

अफ्रीकी देश टोगो की अगुवाई में और 55 देशों वाले अफ्रीकी संघ के समर्थन से यह प्रस्ताव लाया गया है। मांग यह है कि 1569 से चले आ रहे पारंपरिक मर्केटर मैप को हटाकर वास्तविक आकार दर्शाने वाले ‘इक्वल अर्थ मैप’ को वैश्विक रूप से अपनाया जाए।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि सदियों पुराना नक्शा गलत क्यों माना जा रहा है और इसको लेकर UN में इतना बड़ा विवाद क्यों खड़ा हुआ है।

क्या है 450 साल पुराना मर्केटर मैप और विवाद की असली वजह?

सन 1569 में फ्लेमिश मानचित्रकार गेरार्डस मर्केटर ने एक नक्शा तैयार किया था। उस समय इसका मुख्य मकसद समुद्री नाविकों को सीधी रेखा में दिशा दिखाना था। लेकिन इस गोल पृथ्वी को चपटे कागज पर ढालने के चक्कर में एक बड़ी गड़बड़ी हो गई।

भूमध्य रेखा के पास के देश छोटे दिखने लगे: अफ्रीका, भारत और दक्षिण अमेरिका जैसे भूमध्य रेखा के पास स्थित क्षेत्रों का आकार नक्शे में उनकी असली सीमा से काफी छोटा हो गया।

ध्रुवों के पास के देश बड़े दिखने लगे: यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ग्रीनलैंड जैसे ध्रुवों के पास वाले देश अपनी असली सीमा से कई गुना ज्यादा विशाल दिखाई देने लगे।

ग्रीनलैंड बनाम अफ्रीका: असली सच चौंका देने वाला है

नक्शे की इस गड़बड़ी का सबसे हैरान करने वाला उदाहरण ग्रीनलैंड और अफ्रीका का मुकाबला है। मर्केटर मैप पर ग्रीनलैंड और पूरा अफ्रीका महाद्वीप लगभग एक ही साइज के दिखाई देते हैं। जबकि कड़वी सच्चाई ये है कि अफ्रीका महाद्वीप असल में ग्रीनलैंड से 14 गुना ज्यादा बड़ा है।

अफ्रीका का क्षेत्रफल (3.03 करोड़ वर्ग किमी) इतना बड़ा है कि इसके भीतर अमेरिका, चीन, भारत, जापान, मैक्सिको और लगभग पूरा यूरोप एक साथ समा सकते हैं। इसी गैर-बराबरी को लेकर अफ्रीकी संघ ने #CorrectTheMap अभियान शुरू किया है। टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसे ने कहा, ‘अफ्रीका कोई विशेषाधिकार या दया की भीख नहीं मांग रहा। हम बस दुनिया के भूगोल में अपनी असली जगह और सही आकार मांग रहे हैं।’

‘कार्टोग्राफिक उपनिवेशवाद’ और ‘इक्वल अर्थ मैप’ का विकल्प

आलोचकों और भूगोलवेत्ताओं का कहना है कि मर्केटर मैप का यह गलत फैलाव पश्चिमी देशों को ज्यादा शक्तिशाली और समृद्ध दिखाने का एक जरिया बना, जिसे ‘कार्टोग्राफिक कोलोनियलिज्म’ कहा जाता है। इससे दुनिया की सोच में ग्लोबल साउथ का दबदबा कम आंका गया।

क्या है ‘Equal Earth’ मैप?

संयुक्त राष्ट्र में जिस नए नक्शे को अपनाने की बात हो रही है, उसे 2018 में कार्टोग्राफर्स की टीम ने विकसित किया था। इसे ‘इक्वल अर्थ मैप’ कहा जाता है। यह नक्शा बिना किसी देश की आकृति को ज्यादा बिगाड़े, हर महाद्वीप और देश को उसके वास्तविक अनुपातिक आकार में दिखाता है।

अगर UN में प्रस्ताव पास हो गया तो क्या-क्या बदलेगा?

संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी तो नहीं होगा, लेकिन यदि यह पास हो जाता है तो:

स्कूल और किताबें: दुनिया भर के स्कूलों, प्रकाशकों और शैक्षणिक संस्थानों में नए और सही आकार वाले नक्शे पढ़ाए जाने लगेंगे।

टेक कंपनियां: गूगल मैप्स और अन्य डिजिटल नेविगेशन कंपनियां अपनी वैश्विक मैपिंग में ‘इक्वल अर्थ’ प्रोजेक्शन को प्राथमिकता दे सकती हैं।

वैश्विक नजरिया: अफ्रीका और एशिया जैसे बड़े महाद्वीपों के असली आकार को देखकर दुनिया का उनके प्रति भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टिकोण बदलेगा।

iQOO 16 जल्द ही नए Samsung डिस्प्ले के साथ होगा लॉन्च, जिसमें मिलेगी iPhone Ultra जैसी टेक्नोलॉजी

iQOO 16 को इस महीने के आखिर में कंपनी के नए फ्लैगशिप फोन के तौर पर लॉन्च किया जा सकता है। यह फोन iQOO 15 का अपग्रेड वर्जन होगा। हाल ही में iQOO 16 को एक बेंचमार्किंग प्लेटफॉर्म पर देखा गया था, जहां इसके कई अहम स्पेसिफिकेशंस और फीचर्स सामने आए। इसके अलावा, यह हैंडसेट पहले लीक हुई तस्वीरों में भी देखा गया है, जिससे संकेत मिलता है कि इसमें नए डिजाइन वाला रियर कैमरा मॉड्यूल हो सकता है। अब, iQOO 16 के बारे में एक नई लीक से पता चलता है कि टेक कंपनी इस हैंडसेट में इंडस्ट्री का पहला OLED पैनल लगाने की योजना बना रही है। खबर है कि कंपनी Samsung के साथ मिलकर iQOO 16 में वही डिस्प्ले टेक्नोलॉजी लाने पर काम कर रही है जो Apple के आने वाले बुक-स्टाइल फोल्डेबल फोन में होगी।

iQOO 16 के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स (अनुमानित)

वीबो (Weibo) पर एक पोस्ट में, टिपस्टर ‘डिजिटल चैट स्टेशन’ (चीनी भाषा से अनुवादित) ने आने वाले iQOO 16 के बारे में अहम जानकारी शेयर की है। कहा जा रहा है कि यह पहला ऐसा Android स्मार्टफोन होगा जिसमें M16 ल्यूमिनसेंट मटीरियल वाला लेटेस्ट सैमसंग OLED डिस्प्ले और नेक्स्ट-जेनरेशन LEAD [लो पावर, इको-फ्रेंडली, ऑगमेंटेड ब्राइटनेस और स्लिम व लाइट डिज़ाइन] डिस्प्ले टेक्नोलॉजी होगी।

इसके अलावा, लीक करने वाले का दावा है कि iQOO 16 पहला ऐसा Android फोन होगा जिसमें Samsung की LEAD डिस्प्ले टेक्नोलॉजी होगी। उम्मीद है कि यह टेक्नोलॉजी Apple के पहले बुक-स्टाइल फोल्डेबल स्मार्टफोन, iPhone Ultra में भी देखने को मिलेगी। खबर है कि Vivo का सब-ब्रांड, फ्लैगशिप iQOO 16 में डिस्प्ले से जुड़े और भी फीचर्स लाने के लिए Samsung के साथ मिलकर काम कर रहा है। हालांकि, इनमें से किसी भी टेक कंपनी ने इन जानकारियों की पुष्टि नहीं की है।

हाल ही में, iQOO 16 के कथित रेंडर ऑनलाइन सामने आए हैं, जिनसे फोन के डिजाइन का पता चलता है। तस्वीर में आने वाले स्मार्टफोन का री-डिजाइन किया गया रियर कैमरा मॉड्यूल दिख रहा है, जिसमें ट्रिपल कैमरा सिस्टम है। फोन के फ्लैट रियर पैनल को भी मेटल जैसा नया पैटर्न देकर री-डिजाइन किया जा सकता है। पैनल के निचले हिस्से में बीच में iQOO की ब्रांडिंग दिख रही है। वहीं, iQOO 16 के दाईं ओर पावर बटन और वॉल्यूम कंट्रोल हो सकते हैं।

इसके अलावा, iQOO 16 को हाल ही में Geekbench बेंचमार्किंग प्लेटफॉर्म पर मॉडल नंबर V2606A के साथ देखा गया था। खबरों के मुताबिक, इस हैंडसेट को Qualcomm के अभी तक रिलीज नहीं हुए ऑक्टा-कोर Snapdragon 8 Elite Gen 6 Pro चिपसेट के साथ लिस्ट किया गया था, जो 5.01GHz की पीक क्लॉक स्पीड देता है। Geekbench पर iQOO 16 को Android 17 पर चलते हुए भी देखा गया है। फोन से जुड़ी और भी कई जानकारियां आने वाले हफ्तों में सामने आने की उम्मीद है।

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Oppo Find X10 भारत में मचाएगा तहलका! BIS सर्टिफिकेशन पर दिखा फोन, फीचर्स भी हुए लीक

Oppo अपनी लेटेस्ट फ्लैगशिप, Oppo Find X10 सीरीज को ग्लोबल मार्केट में लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। खास बात यह है कि Oppo Find X10 पहले ही BIS सर्टिफिकेशन वेबसाइट पर दिख चुका है, जिसका मतलब है कि यह डिवाइस भारत में लॉन्च होने के लिए तैयार हो रहा है। इसके अलावा, Oppo Find X10 Pro Max भी थाईलैंड के NBTC डेटाबेस पर सामने आया है और इसे TUV मंजूरी भी मिल गई है।

इस सीरीज के भारत-स्पेसिफिक वेरिएंट की बात करें, तो Oppo Find X10 का मॉडल नंबर CPH2911 है। सीरीज के Pro वेरिएंट के बारे में अफवाहें हैं कि कंपनी इसे सिर्फ चीन तक ही सीमित रखेगी। हालांकि, अभी तक Oppo Find X10 Pro Max के भारत में उपलब्ध होने की भी पुष्टि नहीं हुई है। तो चलिए अब, लीक, अफवाहों और अनुमानों के आधार पर इस फोन के बारे में जो भी जानकारी मिली है वह यहां हम आपको बताते हैं।

Oppo Find X10 सीरीज के अनुमानित स्पेसिफिकेशन्स

Oppo Find X10 में 6.59-इंच का 1.5K डिस्प्ले और बहुत पतले बेजेल्स होने की उम्मीद है। इसके अलावा, इस डिवाइस में MediaTek Dimensity 9600 सीरीज या Dimensity 9500 Plus चिपसेट हो सकता है, साथ ही 12GB RAM और 256GB इंटरनल स्टोरेज भी मिल सकती है। इसके कई RAM और स्टोरेज वेरिएंट्स भी आ सकते हैं। ऐसी भी खबरें हैं कि इस फोन में 8000mAh की बैटरी होगी और यह 80W वायर्ड और 50W वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करेगा। यह Android 17 ऑपरेटिंग सिस्टम पर आधारित होगा और इसमें ColorOS स्किन होगी।

कैमरे की बात करें तो, Oppo Find X10 में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप होगा, जिसमें 200MP का पेरिस्कोप सेंसर, 200MP का प्राइमरी सेंसर और 50MP का अल्ट्रा-वाइड-एंगल सेंसर शामिल होगा। सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए, इस डिवाइस में 50MP का फ्रंट कैमरा भी हो सकता है। अभी तक डिवाइस की कीमत के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। उम्मीद है कि Oppo की ओर से आधिकारिक घोषणा होने पर ही इस बारे में और जानकारी मिल पाएगी।

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Teacher day essay : शिक्षक दिवस पर बच्चो के लिए निबंध

Teacher day essay : शिक्षक दिवस पर बच्चो के लिए निबंध

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प्रस्तावना:

प्रतिवर्ष 5 सितंबर का दिन भारत में 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाया जाता है। यह दिन पूरी तरह से गुरु-शिष्य की पवित्र परंपरा और शिक्षकों के समर्पण को याद करने के लिए है। भारत की संस्कृति में गुरु का स्थान सदैव से बहुत ऊँचा और पवित्र रहा है। मानव जीवन में शिक्षकों के सही योगदान और महत्व को समझाने के लिए ही इस विशेष दिन को मनाया जाता है।

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माता-पिता और गुरु का स्थान

हमारे जीवन में माता-पिता का स्थान सर्वोपरि है, क्योंकि वे हमें इस दुनिया में लाते हैं और हमारा पालन-पोषण करते हैं। इसीलिए कहा भी जाता है कि बच्चे के जीवन के पहले गुरु उसके माता-पिता ही होते हैं। लेकिन इस दुनिया में जीने का सही तरीका और ज्ञान हमें शिक्षक ही प्रदान करते हैं। शिक्षक ही हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं और जीवन में सफलता की ऊंचाइयों तक पहुँचाते हैं।

 

शिक्षक दिवस: कब और क्यों?

शिक्षक दिवस भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक और शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म-दिवस (5 सितंबर 1888) के अवसर पर मनाया जाता है। डॉ. राधाकृष्णन का शिक्षा और अध्यापन के प्रति गहरा लगाव था। जब उनके शिष्यों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई, तो उन्होंने कहा कि “यदि मेरे जन्मदिन को शिक्षकों के सम्मान के रूप में मनाया जाए, तो मुझे सबसे अधिक गर्व होगा।”

 

वे एक कुशल राजनयिक, महान विचारक और आदर्श शिक्षक थे। इस दिन पूरे देश में भारत सरकार द्वारा उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जाता है।

 

शिक्षक दिवस पर तैयारियाँ और आयोजन

शिक्षक दिवस पर देश के सभी स्कूल-कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में उत्सव जैसा माहौल रहता है:

सांस्कृतिक कार्यक्रम: छात्र अपने शिक्षकों के सम्मान में नाटक, गीत, नृत्य और भाषण प्रस्तुत करते हैं।

शिक्षकों की भूमिका में छात्र: कई स्कूलों में वरिष्ठ छात्र पूरे दिन शिक्षक बनकर कक्षाएं चलाते हैं और अध्यापन का अनुभव प्राप्त करते हैं।

सम्मान समारोह: छात्र अपने शिक्षकों को धन्यवाद कार्ड, फूल और उपहार देकर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

संकल्प दिवस: शिक्षक भी इस दिन गुरु-शिष्य परंपरा को बनाए रखने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का संकल्प लेते हैं।

 

गुरु-शिष्य संबंध का महत्व

गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति का एक स्वर्णिम हिस्सा है। शिक्षक उस माली के समान होता है जो अलग-अलग प्रकार के पौधों को सींचकर एक सुंदर बगीचा तैयार करता है। वह छात्रों को जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कुराते हुए आगे बढ़ने की सीख देता है। एक आदर्श गुरु ही शिष्य में नैतिकता और अच्छे चरित्र का निर्माण करता है।

 

वर्तमान परिप्रेक्ष्य और चुनौतियाँ

  • आज के आधुनिक दौर में गुरु-शिष्य परंपरा में कुछ कमियाँ भी देखने को मिल रही हैं:
  • शिक्षा का व्यवसायीकरण होने से गुरु और शिष्य के संबंध में आत्मीयता की कमी आई है।
  • आए दिन मीडिया में शिक्षकों और विद्यार्थियों के एक-दूसरे के प्रति दुर्व्यवहार की खबरें देखने को मिलती हैं, जो हमारी प्राचीन संस्कृति पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
  • डिजिटल युग में मोबाइल और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से छात्रों का ध्यान पढ़ाई और संस्कारों से भटक रहा है।

 

उपसंहार

शिक्षक दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि गुरुओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने और अपनी जिम्मेदारियों को समझने का दिन है।

विद्यार्थियों का यह कर्तव्य है कि वे अपने शिक्षकों का सदैव सम्मान करें और उनके द्वारा दिए गए संस्कारों को जीवन में अपनाएं। वहीं शिक्षकों को भी चाहिए कि वे अपने पद की गरिमा बनाए रखें और विद्यार्थियों को सही दिशा दिखाकर एक सशक्त समाज और देश के निर्माण में अपना योगदान दें।

 

सभी को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!