रिलायंस के पास रिफाइनिंग की असाधारण क्षमता! जामनगर दौरे से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बड़ा बयान

Marco Rubio Jamnagar Refinery: गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज की दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी के दौरे से ठीक पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने कंपनी की रिफाइनिंग क्षमताओं की जमकर तारीफ की है। नेटवर्क18 के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए एक विशेष इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि रिलायंस ग्लोबल एनर्जी सेक्टर में एक बेहद महत्वपूर्ण प्लेयर है और उनका दौरा वेनेजुएला तथा पश्चिमी गोलार्ध से कच्चे तेल के आयात और प्रसंस्करण को बढ़ाने पर केंद्रित होगा।

‘रिलायंस के पास रिफाइनिंग की असाधारण क्षमता’

बुधवार को जामनगर स्थित रिलायंस रिफाइनरी का दौरा करने जा रहे अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, ‘रिलायंस एक बेहद महत्वपूर्ण कंपनी है। उसके पास कच्चे तेल को रिफाइन करने की असाधारण क्षमता है।’ रुबियो ने ये भी कहा कि रिलायंस की रिफाइनिंग क्षमताएं भारत को अपनी ऊर्जा आपूर्ति को विविध बनाने में बड़ी मदद कर सकती हैं।

वेनेजुएला के कच्चे तेल पर रिलायंस के साथ सहयोग का बड़ा प्लान

रुबियो ने कहा कि वेनेजुएला में कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ रहा है और भारत का इतिहास रहा है कि वह वेनेजुएला के भारी और उच्च-सल्फर तेल को आसानी से रिफाइन कर लेता है।

उन्होंने स्पष्ट किया, ‘पश्चिमी गोलार्ध से आने वाले तेल को जब भारत में रिफाइन किया जाता है, तो यह भारत के लिए भी फायदेमंद है और हमारे लिए भी।’ अमेरिकी विदेश मंत्री ने अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र में रिलायंस के मौजूदा निवेश और रिफाइनिंग क्षमताओं की भी सराहना की।

जामनगर में है दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स

रिलायंस इंडस्ट्रीज जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स चलाती है, जिसकी कच्चा तेल प्रसंस्करण क्षमता लगभग 14 लाख बैरल प्रति दिन है।

इस कॉम्प्लेक्स में दो बड़ी रिफाइनरी शामिल हैं, जो वेनेजुएला द्वारा उत्पादित भारी और उच्च-सल्फर ग्रेड जैसे जटिल कच्चे तेल को भी आसानी से प्रोसेस करने में सक्षम हैं।

‘बस कुछ हफ्तों की बात…’, भारत से ट्रेड डील पर US विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दे दिया बहुत बड़ा संकेत

Disclaimer: मनीकंट्रोल नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट के पास है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Marco Rubio Interview: ‘भारत-अमेरिका ट्रेड डील जल्द’, जानिए ईरान युद्ध, आतंकवाद से लेकर रूसी तेल की खरीद पर क्या बोले मार्को रुबियो

Marco Rubio Interview: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत के साथ ट्रेड डील, रूस से तेल खरीदने, पाकिस्तान, ईरान और क्वाड जैसे अहम मुद्दों पर बात की। नेटवर्क18 के ग्रुप एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील लगभग तैयार है। इसे पूरा होने में महीनों नहीं, बल्कि कुछ हफ्ते लगने की उम्मीद है।

रुबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अपने रिश्तों की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास आपसी संबंध मजबूत करने के असाधारण अवसर हैं। रुबियो ने रूस से तेल खरीद, पाकिस्तान में आतंकवाद और ईरान युद्ध के बारे में भी बात की।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील

रुबियो ने कहा कि ट्रेड डील अब अंतिम चरण में है। कुछ तकनीकी मुद्दों को सुलझाना और समझौते की भाषा को अंतिम रूप देना बाकी है। उनके मुताबिक, घोषणा से पहले जरूरी है कि दोनों देश हर शर्त पर सहमत हों। उन्हें उम्मीद है कि डील कुछ हफ्तों में पूरी हो जाएगी।

भारत को दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर टैरिफ मिलने के सवाल पर रुबियो ने कहा कि किसी भी ट्रेड डील का मकसद मौजूदा स्थिति से बेहतर शर्तें हासिल करना होता है। लेकिन इससे भी जरूरी है कि दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते लंबे समय तक टिकाऊ रहें।

उन्होंने कहा कि हर देश के अपने राष्ट्रीय हित होते हैं। भारत अपने हितों की रक्षा करेगा और अमेरिका भी ऐसा ही करेगा। लेकिन दोस्ती और सहयोग की वजह से दोनों देश मतभेदों को सुलझा सकते हैं। रुबियो के मुताबिक, समझौता ऐसा होना चाहिए, जो कुल मिलाकर दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो।

रूस से तेल खरीदने पर भारत की स्थिति समझते हैं रुबियो

अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ और प्रतिबंध लगाने की बात करता है, जबकि खुद भी रूस से डीजल खरीद रहा है। इस सवाल पर रुबियो ने कहा कि यूक्रेन युद्ध पांचवें साल में पहुंच चुका है और इसे खत्म करना जरूरी है। लेकिन रूस पर प्रतिबंधों का असर सिर्फ उसी देश पर नहीं पड़ता। रूस के साथ कारोबार करने वाले दूसरे देशों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका के सामने दो चुनौतियां हैं। पहली, रूस पर दबाव बनाना, ताकि वह युद्ध खत्म करने के लिए समझौते पर आए। दूसरी, यह देखना कि इस दबाव का असर दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ रहा है।

रुबियो के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका के हितों के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को भी देखना जरूरी है। उन्होंने माना कि रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच तनाव है। उम्मीद जताई कि ट्रेड डील और बातचीत से मतभेद कम हो सकते हैं।

अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नफरत

अमेरिका के इलिनॉय स्टेट में एक हिंदू मंदिर पर हमले की कथित साजिश और भारतीयों के खिलाफ नफरत के सवाल पर रुबियो ने कहा कि कोई भी देश ऐसी घटनाओं से पूरी तरह अछूता नहीं है। हर समाज में कुछ लोग अज्ञानता और नफरत के कारण गलत काम करते हैं।

हालांकि, उन्होंने इस बात से इनकार किया कि अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नफरत व्यापक स्तर पर फैली हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के बाद भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ आसपास के लोग भी पीड़ितों के समर्थन में खड़े होते हैं।

रुबियो ने विस्कॉन्सिन में सिख समुदाय के साथ हुई एक भयावह घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने अमेरिका में यहूदी विरोधी घटनाओं में बढ़ोतरी पर चिंता जताई। उनके मुताबिक, नेताओं को ऐसी नफरत को बढ़ावा नहीं देना चाहिए, न ही उसका बचाव करना चाहिए या उसे नजरअंदाज करना चाहिए।

पाकिस्तान पर अमेरिकी नीति

पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी नीति पर रुबियो ने कहा कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी आतंकवाद और उसे समर्थन देने वालों के खिलाफ है। हालांकि, विदेश मंत्री के तौर पर उन्हें उन देशों के साथ भी संबंध बनाए रखने पड़ते हैं, जिनसे कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं।

राहुल जोशी ने उन्हें याद दिलाया कि 2025 में अमेरिकी सीनेटर रहते हुए रुबियो ने पाकिस्तान को अमेरिकी सुरक्षा सहायता रोकने से जुड़ा विधेयक लाने की बात कही थी, अगर वह भारत के खिलाफ आतंकवाद को समर्थन देता है। उनसे पूछा गया कि क्या अब उनकी नीति बदल गई है।

रुबियो ने कहा कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और भौगोलिक स्थिति के लिहाज से भी अमेरिका के लिए उससे बातचीत करना जरूरी है। उन्होंने इसकी तुलना भारत के ईरान के साथ संबंधों से की। उनके मुताबिक, भारत को भी ईरान के नेताओं से बातचीत करनी पड़ती है, भले ही कुछ मुद्दों पर मतभेद हों।

रुबियो ने कहा कि पाकिस्तान के साथ संबंध बनाए रखने से अमेरिका को उन मुद्दों पर बातचीत करने का मौका मिल सकता है, जिनसे भारत को चिंता है। इससे आतंकवाद को समर्थन देने वाली गतिविधियों को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद भी की जा सकती है।

ईरान और होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव

ईरान के साथ संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमलों को लेकर रुबियो ने कहा कि ईरान की सरकार के साथ समझौता करना मुश्किल है। उन्होंने ईरान की तुलना नाजी जर्मनी से की और आरोप लगाया कि ईरान व्यावसायिक जहाजों को निशाना बना रहा है। और ऐसे नाविकों की जान खतरे में डाल रहा है, जिनका युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है।

रुबियो ने कहा कि अमेरिका हर रात समुद्री जहाजों की सुरक्षा के लिए काम कर रहा है। उनके मुताबिक, ईरान की ओर से दागे जाने वाले ज्यादातर ड्रोन और मिसाइलों को नष्ट कर दिया जाता है। हालांकि, कुछ हमले जहाजों तक पहुंच जाते हैं। इससे जहाजों को नुकसान होता है और लोगों की जान भी जाती है।

उन्होंने खास तौर पर भारतीय नाविकों की मौत का जिक्र किया। रुबियो ने कहा कि समुद्र में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं। इसी वजह से इन हमलों में कई भारतीयों की भी जान गई है। उन्होंने ईरान से ऐसे हमले रोकने की अपील की।

क्वाड की बैठक साल के अंत से पहले

रुबियो ने उम्मीद जताई कि क्वाड देशों के नेताओं की बैठक इस साल के अंत से पहले होगी। उन्होंने बताया कि बैठक फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान सम्मेलन के दौरान आयोजित करने पर सहमति बनी है। हालांकि, तारीख अभी तय नहीं हुई है।

क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। रुबियो ने बताया कि विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी पहली बैठक क्वाड से जुड़ी थी, जिसमें जयशंकर भी शामिल थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच सात या आठ बार बातचीत हो चुकी है। उन्होंने अटलांटा में G20 के दौरान एक और बैठक होने की जानकारी भी दी।

रुबियो के मुताबिक, क्वाड अब सिर्फ बैठकों और समझौतों तक सीमित नहीं है। इसके तहत ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगली शिखर बैठक में भी ऐसे फैसलों और उनके नतीजों की घोषणा होनी चाहिए, जिनका वास्तविक असर दिखाई दे।

जयशंकर के साथ रिश्तों की तारीफ

रुबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अपने रिश्तों को शानदार बताया। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी पहली बैठक में जयशंकर शामिल थे। इसके बाद दोनों कम से कम 12 बार मिल चुके हैं। जयशंकर चार बार अमेरिका भी गए हैं। दोनों की मुलाकातें अंतरराष्ट्रीय बैठकों और सम्मेलनों में भी हुई हैं।

रुबियो ने कहा कि जब भी दोनों किसी बैठक या कार्यक्रम के लिए एक ही शहर में होते हैं, तो मिलने का समय जरूर निकालते हैं। उनके मुताबिक, पिछले डेढ़ साल में दोनों के बीच मजबूत कामकाजी रिश्ता बना है। इससे कई संवेदनशील और मुश्किल मुद्दों को संभालने में मदद मिली है।

जामनगर में रिलायंस से मुलाकात क्यों?

रुबियो ने अपनी जामनगर यात्रा को रिलायंस की रिफाइनिंग क्षमता और ऊर्जा सहयोग से जोड़ा। उन्होंने कहा कि रिलायंस के पास कच्चे तेल को उपयोगी उत्पादों में बदलने की असाधारण क्षमता है। उन्होंने इसे भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए अहम बताया।

रुबियो के मुताबिक, रिलायंस भारत को ऊर्जा आपूर्ति के अलग-अलग स्रोतों से जोड़ने में मदद कर सकती है। उन्होंने वेनेजुएला के तेल का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, वेनेजुएला अपना तेल उत्पादन बढ़ा रहा है और भारत लंबे समय से इस तरह के कच्चे तेल को रिफाइन करने में सक्षम रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि रिलायंस ने अमेरिका में रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश किया है। रुबियो ने कहा कि जामनगर में कंपनी के कामकाज को देखने और उसके अधिकारियों से बातचीत करने का मकसद ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाशना है।

उन्होंने कहा कि खास तौर पर पश्चिमी गोलार्ध से आने वाले कच्चे तेल को रिफाइन करने में सहयोग दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो सकता है। इससे भारत को ऊर्जा आपूर्ति के नए विकल्प मिलेंगे और अमेरिका को भी लाभ होगा।

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BLS Polymers IPO: 27 अक्टूबर से खुलेगा ₹255 करोड़ का इश्यू, GMP दे रहा तगड़े मुनाफे का संकेत

BLS Polymers IPO: बीएलएस पॉलिमर्स का ₹255 करोड़ का IPO 27 अक्टूबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। इसका प्राइस बैंड ₹142 से ₹150 प्रति शेयर तय किया गया है। इस हिसाब से कंपनी की वैल्यू करीब ₹930.5 करोड़ होगी। IPO में 1.7 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। इश्यू 29 अक्टूबर को बंद होगा, जबकि एंकर निवेशक 26 अक्टूबर को बोली लगा सकेंगे।

शेयरों का अलॉटमेंट 30 अक्टूबर तक फाइनल होने की उम्मीद है। वहीं, स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्टिंग 3 नवंबर को हो सकती है। कंपनी को दिसंबर 2025 में SEBI से IPO की मंजूरी मिली थी।

BLS Polymers IPO का GMP

ग्रे मार्केट में BLS पॉलिमर्स के आईपीओ को तगड़ा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसका लेटेस्ट GMP ₹30 है। यह अपर प्राइस बैंड से 20% लिस्टिंग गेन का संकेत दे रहा है। हालांकि, GMP सिर्फ आईपीओ की डिमांड का अंदाजा भर होता है। इसे लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं समझना चाहिए।

IPO से जुटाए पैसे कहां खर्च होंगे?

BLS पॉलिमर्स IPO से मिलने वाली रकम में से ₹77.56 करोड़ गोवा स्थित अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के विस्तार पर खर्च करेगी। इसके अलावा, ₹89.5 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों के लिए रखे जाएंगे। बाकी रकम का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों में होगा।

क्या करती है कंपनी?

नई दिल्ली स्थित BLS Polymers खास तरह के पॉलिमर कंपाउंड बनाती है। इनका इस्तेमाल बिजली, टेलीकॉम, रेलवे, पानी और तेल-गैस से जुड़े उद्योगों में होता है। कंपनी के प्रोडक्ट तारों, केबलों और पाइपलाइनों को सुरक्षा देने में काम आते हैं।

मुनाफा 27.8% बढ़ा

FY26 में कंपनी का नेट प्रॉफिट 27.8% बढ़कर ₹27 करोड़ हो गया, जो FY25 में ₹21.1 करोड़ था। इस दौरान रेवेन्यू भी 6.4% बढ़कर ₹349.4 करोड़ पहुंच गई। जून 2026 तिमाही में कंपनी ने ₹107.02 करोड़ की रेवेन्यू पर ₹10.2 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया।

‘बस कुछ हफ्तों की बात…’, भारत से ट्रेड डील पर US विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दे दिया बहुत बड़ा संकेत

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अमेरिका ने भारत को रिफाइनिंग सुपरपावर बताया:विदेश मंत्री बोले- यहां वेनेजुएला का कच्चा तेल साफ होगा; दुनिया की तेल आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिलेगी

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को ‘रिफाइनिंग सुपरपावर’ बताया। उन्होंने कहा कि भारत के पास भारी कच्चे तेल को रिफाइन करके पेट्रोल, डीजल और दूसरे ईंधन बनाने की क्षमता है। न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए मार्को रुबियो ने कहा, मेरा मानना है कि जैसे-जैसे वेनेजुएला का ज्यादा तेल बाजार में आएगा, भारत उसे रिफाइन कर सकता है। इससे दुनिया में तेल आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिलेगी। भारतीय कंपनियां वेनेजुएला में भी बढ़ा सकती हैं तेल उत्पादन रुबियो ने वेनेजुएला में भारतीय कंपनियों की मौजूदा तेल परियोजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियां वहां पहले से मौजूद तेल संपत्तियों से उत्पादन बढ़ा सकती हैं। रुबियो के मुताबिक, इस मुद्दे पर भारत के साथ पहले भी बातचीत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि भारत इस दिशा में काम करने के लिए तैयार और इच्छुक नजर आ रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस योजना को आगे बढ़ाने में अमेरिकी प्रतिबंधों और अन्य पाबंदियों से जुड़े मुद्दे सामने आ सकते हैं। इन पर अमेरिका और भारत को मिलकर काम करना होगा। रुबियो बोले- दोनों देश 21वीं सदी की दिशा तय कर सकते हैं मुंबई में ‘फ्रीडम 250’ कार्यक्रम में अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत और अमेरिका के बीच उन अहम मुद्दों पर असाधारण तालमेल है, जो दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों को तय करते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया की दो बड़ी शक्तियां मिलकर 21वीं सदी की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। रुबियो ने कहा, दुनिया के कोई भी दो देश हर मुद्दे पर पूरी तरह सहमत नहीं हो सकते। कुछ मामलों में मतभेद होंगे। लेकिन उन अहम मुद्दों पर, जो भारत और अमेरिका के राष्ट्रीय हितों को तय करते हैं, दोनों देशों के बीच असाधारण तालमेल है। जयशंकर बोले- भारत-अमेरिका के रिश्ते लगातार मजबूत हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध पिछले कई दशकों में काफी आगे बढ़े हैं। दोनों देशों के बीच सहयोग अब बुनियादी ढांचे, शिक्षा, खाद्य और कृषि, तकनीक, ऊर्जा, रक्षा और नागरिक उड्डयन जैसे कई क्षेत्रों तक फैल चुका है। जयशंकर ने कहा, हमारे संबंधों ने वास्तव में लंबा सफर तय किया है। इतिहास में दर्ज है कि कई अमेरिकी भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के समर्थक थे। आजादी के बाद भी हमारी साझेदारी ने भारत के विकास में वास्तविक योगदान दिया है। जयशंकर ने अमेरिकी तकनीकी क्षेत्र में भारतीय प्रतिभाओं के योगदान को भी अहम बताया। उन्होंने माना कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के तरीकों को लेकर दोनों देशों के बीच अलग-अलग राय रही है। इसके बावजूद पिछले कुछ दशकों में साझेदारी लगातार बढ़ी है और इसमें सहयोग के नए क्षेत्र जुड़ते गए हैं। मार्को रुबियो और मुकेश अंबानी की कल मुलाकात अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो बुधवार को जामनगर में दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स का दौरा करेंगे। इस दौरान वे रिलायंस के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी से भी मिलेंगे। रूबियो रिलायंस के साथ वेनेजुएला का कच्चा तेल रिफाइन करने पर बातचीत करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज अमेरिका के टेक्सास में एक ऑइल रिफाइनरी में बड़ा निवेश करने की तैयारी में है, जो 50 साल में अमेरिका में बनने वाली पहली रिफाइनरी होगी।इसी वजह से यह मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है। रूबियो का जामनगर दौरा 3 वजहों से अहम… 1. अमेरिका में डीजल 155 रुपए के पार अमेरिका में डीजल की कीमतें 6 डॉलर प्रति गैलन के पार हैं, यानी करीब 155 रुपए प्रति लीटर। इसके चलते ट्रक ड्राइवर, किसान और माल ढुलाई कारोबारी परेशान हैं। ट्रम्प सरकार चाहती है कि 3 नवंबर को होने वाले मिड टर्म इलेक्शन से पहले अमेरिका में पर्याप्त डीजल सप्लाई हो सके। इसलिए अमेरिका रूस से डीजल खरीद रहा है। रिलायंस भी सस्ती कीमतों में कच्चा तेल रिफाइन करके अमेरिका को पेट्रोल-डीजल बेच सकता है, जिससे अमेरिका फ्यूल क्राइसिस से बच सके। 2. वेनेजुएला से और तेल खरीदे रिलायंस जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के बाद से अमेरिकी सरकार ही विदेशों में वेनेजुएला का तेल बेच रही है। रिलायंस वेनेजुएला के सबसे बड़े तेल खरीदारों में से एक है। ग्लोबल ट्रेड इंटेलिजेंस फर्म Kpler के मुताबिक, सितंबर में भारत ने वेनेजुएला से रोजाना 2.57 लाख बैरल तेल मंगाया। इसका 76% हिस्सा रिलायंस ने खरीदा। अमेरिका चाहता है कि रिलायंस वेनेजुएला से और ज्यादा तेल खरीदे। क्योंकि अमेरिका कई बार कह चुका है कि भारत वेनेजुएला से तेल खरीदे। हालांकि सरकारी तेल कंपनियों ने ऐसा नहीं किया। 3. अमेरिका में रिलायंस का 300 अरब डॉलर का निवेश रिलायंस अमेरिका के टेक्सास राज्य में एक नई रिफाइनरी खोल रही है, जो 50 साल में अमेरिका में बनने वाली पहली रिफाइनरी होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मार्च 2026 में इसे 300 अरब डॉलर का सौदा बताया था। अमेरिका चाहता है कि ये निवेश जल्द से जल्द हो। दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी है जामनगर रिलायंस के मुताबिक, जामनगर रिफाइनरी एक ही जगह पर बनी दुनिया की सबसे बड़ी और आधुनिक रिफाइनरी है। यहां हर दिन 14 लाख बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता है।

2 घंटे में ही 2500 से ज्यादा फ्लैट बुक! दशहरा पर DDA का 15 लाख वाला फ्लैट का ऑफर मचा रहा धूम, 25% डिस्काउंट संग सारी डिटेल जानिए

DDA Awas Nivesh Scheme: दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की आवास निवेश योजना 2026 को लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा। दिल्ली के उपराज्यपाल और डीडीए अध्यक्ष सरदार तरनजीत सिंह संधू के मार्गदर्शन में इस योजना की शुरुआत हुई है। योजना के तहत 20 अक्टूबर 2026 को ऑनलाइन बुकिंग शुरू होने के केवल दो घंटे के अंदर ही निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के 2,500 से ज्यादा फ्लैट बुक हो गए। इतने कम समय में बड़ी संख्या में फ्लैट बुक होने से पता चलता है कि दिल्ली में किफायती और अच्छी सुविधाओं वाले घरों की मांग बनी हुई है। डीडीए की इस योजना को मिली प्रतिक्रिया से आम लोगों को सस्ते आवास उपलब्ध कराने की उसकी कोशिशों को भी मजबूती मिली है।

कहां पर मिल रहे कितने फ्लैट

दिल्ली के नरेला इलाके में घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए डीडीए ने किफायती आवास का मौका दिया। योजना के तहत सेक्टर जी2 से जी6 के पॉकेट 3 और पॉकेट 6 में कुल 2,516 एलआईजी फ्लैट उपलब्ध कराए गए। इन फ्लैटों की ऑनलाइन बुकिंग 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे से ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर शुरू हुई। खास बात यह है कि फ्लैटों की कीमत पर 25 प्रतिशत की छूट दी जा रही है और इनकी शुरुआती कीमत करीब 14.95 लाख रुपये रखी गई है। उपलब्ध फ्लैटों में से 1,020 पॉकेट 3 और 1,496 पॉकेट 6 में हैं।

डीडीए आवास में को मिल रही अच्छी प्रतिक्रिया

डीडीए आवास निवेश योजना 2026 को मिली अच्छी प्रतिक्रिया को दिल्ली में लोगों को घर उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। दिल्ली का नरेला इलाका तेजी से विकसित हो रहा है। डीडीए यहां सड़क, परिवहन और अन्य जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है। आने वाले समय में नरेला आवास, शिक्षा और खेल सुविधाओं के लिहाज से एक अहम केंद्र बन सकता है। डीडीए के मुताबिक, वह राजधानी में लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कम कीमत पर अच्छे घर उपलब्ध कराने और शहर को बेहतर तरीके से विकसित करने के लिए लगातार काम कर रहा है।

आकाश अंबानी ने जियो प्लेटफॉर्म्स की प्राथमिकताएं बताईं, कहा-इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा उठाने पर होगा फोकस

जियो प्लेटफॉर्म्स अपनी ग्रोथ स्ट्रेटेजी के फोकस में बदलाव कर रही है। अब तक कंपनी का जोर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर रहा है। अब कंपनी अपने नेटवर्क का मैक्सिमम फायदा उठाने पर फोकस कर रही है। कंपनी ने पिछले सालों में पूरे देश में कनेक्टिविटी बढ़ाने पर भारी निवेश किया है। अब वह अपने सर्विसेज पोर्टफोलियो का विस्तार करना चाहती है और निवेश की गई पूंजी पर रिटर्न बढ़ाना चाहती है। इस बारे में जियो प्लेटफॉर्म्स के एमडी आकाश अंबानी ने बताया।

इंफ्रास्ट्रक्चर से मैक्सिमम वैल्यू हासिल करने पर होगा फोकस

मनीकंट्रोल को दिए ईमेल इंटरव्यू में अंबानी ने कहा, “हमारे कैपिटल एलोकेशन की दिशा सस्टेनेबल लॉन्ग टर्म वैल्यू क्रिएट करने के मकसद पर निर्भर करेगी। हम वहां निवेश करना जारी रखेंगे, जहां हमें टेक्नोलॉजी, कस्टमर डिमांड और उपलब्ध मौकों का फायदा उठाने के लिहाज से ऐसा करना सही लगेगा।” उन्होंने कहा कि मीडियम और लॉन्ग टर्म में हमारा फोकस उस इंफ्रास्ट्रक्चर से मैक्सिमम वैल्यू हासिल करना है, जिसे हमने बनाया है।

पिछले सालों में कंपनी ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश किया है

जियो प्लेटफॉर्म्स ने व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया है। मार्च 2026 में कंपनी के 3,60,382 नेटवर्क टावर्स थे। इसमें 10 लाख रूट किलोमीटर से ज्यादा लंबा फाइबर नेटवर्क शामिल है। कंपनी के वायरलेस ब्रॉडबहैंड नेटवर्क के तहत देश की आबादी का 99 फीसदी से ज्यादा हिस्सा आता है। फिक्स्ड ब्रॉडबैंड का कवरेज करीब 98 फीसदी पिन कोड्स तक है। FY26 में इंडिया के वायरलेस डेटा ट्रैफिक में जियो की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी थी।

अब पूंजीगत निवेश की रफ्तार में धीर-धीरे कमी आ रही

कई सालों तक भारी निवेश करने के बाद अब इनवेस्टमेंट की तेज रफ्तार कम हुई है। FY26 में कंपनी का कैश कैपिटल एक्सपेंडिचर घटकर 34,184 करोड़ रुपये रही। यह FY25 में 44,268 करोड़ रुपये थी। FY24 में 53,510 करोड़ रुपये थी। नेटवर्क कैपेक्स अकेले 40,617 करोड़ रुपये से घटकर 29,377 करोड़ रुपये पर आ गया। उधर, बिजनेस की ऑपरेटिंग अर्निंग्स अब अच्छे लेवल पर पहुंच गई है। जियो प्लेटफॉर्म्स का ऑपरेशन से रेवेन्यू FY26 में बढ़कर 1.47 लाख करोड़ रुपये हो गया। EBITDA 76,255 करोड़ रुपये रहा। यह करीब 52 फीसदी का मार्जिन है। कंपनी का नेट प्रॉफिट 30,049 करोड़ रुपये रहा।

जियो की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल विदेश में करने पर भी होगा फोकस

कंपनी ने शॉर्ट टर्म में कंपनी की प्राथमिकताओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा इसमें नेटवर्क क्वालिटी बनाए रखना, होम ब्रॉडबैंड और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस का विस्तार करना और एंटरप्राइज एंड डिजिटल सर्विसेज का विस्तार शामिल हैं। जियो AI-एनेबल्ड एंटरप्राइज सॉल्यूशंस, IoT, क्लाउड कंप्यूटिंग और AR/VR में भी मौकों पर नजर रखेगी। उन्होंने कहा कि जियो की टेक्नोलॉजी कपैबिलिटी के लिए विदेश में मौकों की तलाश भी प्राथमिकता में शामिल होगी।

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जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर को निवेश के लिए खुल जाएगा

जियो प्लेटफॉर्म्स के 30,200 करोड़ रुपये के आईपीओ में सिर्फ नए शेयर इश्यू होंगे। इसमें कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल नहीं है। यह आईपीओ 21 अक्तूबर यानी बुधवार को खुलेगा और 23 अक्तूबर यानी शुक्रवार को बंद होगा। कंपनी ने प्रति शेयर 1,065-1,119 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर कंपनी की वैल्यूएशन करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये है। कंपनी आईपीओ से आने वाले पैसे के बड़े हिस्से का इस्तेमाल अपनी सब्सिडियरी रिलायंस का कर्ज चुकाने के लिए करेगी।

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Jio IPO: ‘कमाई बढ़ाने के लिए नई रणनीति पर फोकस’, आकाश अंबानी ने कहा- सिर्फ टैरिफ बढ़ाने पर नहीं रहेगा जोर

Jio IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स अपनी कमाई बढ़ाने के लिए सिर्फ मोबाइल रिचार्ज महंगे करने पर निर्भर नहीं रहना चाहती। कंपनी अब डेटा की बढ़ती खपत, प्रीमियम डिजिटल सेवाओं, होम ब्रॉडबैंड और कॉरपोरेट सेवाओं से कमाई बढ़ाने की तैयारी में है। Jio का लक्ष्य अपने 50 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों से ज्यादा रेवेन्यू हासिल करना है।

Jio Platforms के चेयरमैन आकाश अंबानी ने Moneycontrol को बताया कि कंपनी हर GB डेटा के लिए ज्यादा पैसे वसूलने को ही कमाई बढ़ाने का एकमात्र तरीका नहीं मानती। उनके मुताबिक, टैरिफ कारोबार का एक हिस्सा है। लेकिन कमाई बढ़ाने के दूसरे रास्ते भी हैं।

Jio ग्राहकों को देगी प्रीमियम सेवाएं

Jio अपनी डिजिटल सेवाओं को और बेहतर बनाने पर काम कर रही है। कंपनी चाहती है कि ग्राहक प्रीमियम सेवाओं का ज्यादा इस्तेमाल करें। इसके अलावा, होम ब्रॉडबैंड और फिक्स्ड वायरलेस इंटरनेट का विस्तार भी किया जाएगा।

कंपनी कॉरपोरेट ग्राहकों के साथ अपना कारोबार बढ़ाना चाहती है। साथ ही, इंटरनेट कनेक्शन के साथ दूसरी सेवाएं भी जोड़ी जाएंगी। इनमें OTT वीडियो, म्यूजिक, क्लाउड स्टोरेज और AI आधारित सेवाएं शामिल हैं।

आकाश अंबानी के मुताबिक, ग्राहक इन सेवाओं का ज्यादा इस्तेमाल करेंगे, तो कमाई बढ़ाने के नए मौके मिलेंगे। प्रीमियम इंटरनेट कनेक्टिविटी और AI सेवाएं भी इसमें अहम भूमिका निभा सकती हैं।

Airtel से पीछे है Jio की प्रति ग्राहक कमाई

वित्त वर्ष 2026 में Jio की औसत प्रति यूजर कमाई यानी ARPU 214 रुपये प्रति माह रही। वहीं, Bharti Airtel की ARPU 257 रुपये थी।

एनालिस्ट्स का मानना है कि Jio के पास कमाई बढ़ाने की काफी गुंजाइश है। कंपनी के पास ग्राहकों की संख्या ज्यादा है। उसके नेटवर्क पर डेटा का इस्तेमाल भी काफी होता है। ऐसे में प्रीमियम सेवाओं और डेटा की बढ़ती खपत से कंपनी को फायदा मिल सकता है।

हालांकि, आकाश अंबानी ने यह नहीं बताया कि अगली बार मोबाइल टैरिफ कब बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि आने वाले समय में कीमतें किस स्तर पर स्थिर हो सकती हैं। उनके मुताबिक, टैरिफ का फैसला ग्राहकों की जरूरत, बाजार में प्रतिस्पर्धा, महंगाई और नेटवर्क पर होने वाले निवेश को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

Jio Platforms का ₹30,213 करोड़ का IPO

Jio Platforms का ₹30,213 करोड़ का IPO 21 अक्टूबर को खुला है और 23 अक्टूबर को बंद होगा। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू है। इसके लिए 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है।

इस IPO में 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जा रहे हैं। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) नहीं है। ऊपरी प्राइस बैंड पर कंपनी का वैल्यूएशन करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये है। शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को BSE और NSE पर होनी है।

₹27,500 करोड़ से चुकाया जाएगा कर्ज

वित्त वर्ष 2026 में Jio Platforms का रेवेन्यू 1.47 लाख करोड़ रुपये रहा। कंपनी को 30,049 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हुआ। वहीं, EBITDA 76,255 करोड़ रुपये रहा।

IPO से मिलने वाली रकम में से 27,500 करोड़ रुपये Reliance Jio Infocomm का कर्ज चुकाने के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे। यह Jio Platforms की सब्सिडियरी कंपनी है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Jio Platforms IPO GMP: आईपीओ खुलने से ठीक एक दिन पहले पहले भागा जियो प्लेटफॉर्म्स का ग्रे मार्केट प्रीमियम

Jio Platforms IPO GMP: जियो प्लेटफॉर्म्स का ग्रे मार्केट प्रीमियम 20 अक्तूबर को प्रति शेयर 257 रुपये चल रहा था। इसका मतलब है कि यह शेयर करीब 23 फीसदी प्रीमियम पर लिस्ट हो सकता है। यह इश्यू 21 अक्तूबर यानी बुधवार को खुलेगा। इसमें 23 अक्तूबर तक बोली लगाई जा सकती है।

जीएमपी 245 से बढ़कर 257 रुपये पहुंचा

जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रीमियम एक दिन पहले यानी 19 अक्तूबर के मुकाबले बढ़ा है। 19 अक्तूबर को यह प्रति शेयर 245 रुपये था। 20 अक्तूबर को यह बढ़कर 257 रुपये हो गया। इसका मतलब है कि कंपनी का शेयर 1,376 रुपये पर लिस्ट हो सकता है। यह प्राइस बैंड के 1,119 रुपये के ऊपरी लेवल से करीब 23 फीसदी ज्यादा है। इसका मतलब है कि शेयरों के एक लॉट पर इनवेस्टर को 3,084 रुपये का बेनेफिट हो सकता है।

कम से कम एक लॉट के लिए बोली लगानी होगी

इनवेस्टर्स को कम से कम शेयरों के एक लॉट के लिए अप्लाई करना होगा। एक लॉट 12 शेयरों का है। इनवेस्टर्स को यह ध्यान में रखने की जरूरत है कि जीएमपी से सिर्फ शेयर के संभावित लिस्टिंग प्राइस का संकेत मिलता है। यह लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं है। इसलिए इनवेस्टर्स को किसी इश्यू में सिर्फ जीएमपी के आधार पर बोली लगाने का फैसला नहीं करना चाहिए।

यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ 

जियो प्लेटफॉर्म्स का यह आईपीओ शेयरों के प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर 30,213 करोड़ रुपये का है। यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ है। इससे पहले सबसे बड़ा आईपीओ पेश करने का रिकॉर्ड ह्यूंडई मोटर इंडिया के नाम है। कंपनी ने 2024 में 27,800 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश किया था।

10 लाख करोड़ से ज्यादा वैल्यूएशन वाली कंपनी 

प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर जियो प्लेटफॉर्म्स की वैल्यूएशन 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। इसका मतलब है कि लिस्टिंग के बाद कंपनी 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा वैल्यूएशन वाली कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो जाएगी। अभी इस लिस्ट में रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल और एचडीएफसी बैंक शामिल हैं।

एंकर इनवेस्टर्स ने दिखाई जबर्दस्त दिलचस्पी

जियो प्लेटफॉर्म्स के इश्यू को एंकर इनवेस्टर्स का जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिला है। कंपनी ने 212 एंकर इनवेस्टर्स से 8,110 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इसमें देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी एलआईसी और कई दिग्गज विदेशी इनवेस्टमेंट फर्मों ने निवेश किया है। अनुमान है कि इश्यू ओपन होने के बाद दूसरी कैटेगरी के निवेशकों की भी अच्छी दिलचस्पी दिखेगी।

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28 अक्टूबर को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होंगे शेयर 

जियो प्लेटफॉर्म्स का शेयर बीएसई और एनएसई पर 28 अक्तूबर को लिस्ट होने की उम्मीद है। ब्रोकरेज फर्मों की इस आईपीओ पर पॉजिटिव राय है। उनका मानना है कि जियो प्लेटफॉर्म्स की ग्रोथ के लिए आगे अच्छी संभावनाएं हैं। रिलायंस जियो इंफोकॉम इसकी सब्सिडियरी है, जो देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है। शुरुआत के 10 साल के अंदर इसके सब्सक्राइबर्स की संख्या 53 करोड़ पहुंच गई है।

Silver Prices: चांदी में रिकॉर्ड हाई से 46% की गिरावट, जेपी मॉर्गन ने कीमतों के लिए अनुमान घटाया

Silver Prices: चांदी में निवेश करने वालों को पिछले कुछ महीनों में बड़ा झटका लगा है। 29 जनवरी को चांदी की कीमत ₹3,84,632 प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। लेकिन 19 अक्टूबर तक यह गिरकर ₹2,08,380 प्रति किलो रह गई। यानी रिकॉर्ड हाई से करीब 45.8% की गिरावट आई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी दबाव में है। मंगलवार को इसकी कीमत करीब 56.50 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। जनवरी के 121 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर से यह करीब 54% नीचे है।

चांदी की कीमतों पर दबाव क्यों?

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और बॉन्ड यील्ड भी ऊंची बनी हुई है। इससे बाजार को लग रहा है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रख सकते हैं। चांदी पर इसका दबाव पड़ रहा है, क्योंकि इससे नियमित ब्याज आय नहीं होती।

चांदी का भाव कितना गिर सकता है?

J.P. Morgan Global Research को उम्मीद है कि 2026 की चौथी तिमाही में चांदी करीब 63 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर सकती है। बैंक ने 2026 के लिए औसत भाव का अनुमान 84 डॉलर से घटाकर 70 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। 2027 के लिए उसका अनुमान 63 डॉलर प्रति औंस है।

Bloomberg Intelligence के कमोडिटी रणनीतिकार माइक मैकग्लोन ने भी गिरावट की आशंका जताई है। Kitco के मुताबिक, उनके अनुसार चांदी निकट भविष्य में 50 डॉलर प्रति औंस तक गिर सकती है। लंबे समय तक इसका भाव 50 से 84 डॉलर के दायरे में रह सकता है।

तेल, डॉलर और अमेरिकी ब्याज दरों पर नजर

मंगलवार को ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। मध्य पूर्व और पूर्वी यूरोप में बढ़ते तनाव ने तेल की कीमतों को सहारा दिया। महंगा तेल महंगाई बढ़ा सकता है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें ऊंची रखने या बढ़ाने की आशंका बढ़ती है।

बाजार को उम्मीद है कि फेड 27-28 अक्टूबर की बैठक में दरें नहीं बदलेगा। हालांकि, दिसंबर में ब्याज दर बढ़ने की आशंका भी बढ़ी है। आने वाले अमेरिकी CPI और PPI आंकड़े इस दिशा में अहम होंगे। महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा रहे, तो चांदी पर दबाव बढ़ सकता है।

भारतीय निवेशकों को क्या करना चाहिए?

मई में इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से घरेलू चांदी की कीमतों को कुछ सहारा मिला है। लेकिन इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार की गिरावट पूरी तरह नहीं रुक सकती।

चांदी में आगे भी उतार-चढ़ाव रह सकता है। निवेशकों को कच्चे तेल, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर नजर रखनी चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ कीमत गिरने को सस्ता खरीदने का संकेत न मानें। एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय चरणों में खरीदारी करने से समय चुनने का जोखिम कुछ कम हो सकता है।

Gold Price Today: सोने में गिरावट पर लगा ब्रेक, दशहरा पर 24 और 22 कैरेट दोनों का भाव चढ़ा

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इशाक डार के सामने राजनाथ सिंह ने आतंकवाद पर घेरा:कहा- आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ एकजुट हों, चीन पर भी निशाना

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को किसी भी तरह सही नहीं ठहराया जा सकता। मंत्री ने कहा कि आतंकवाद से निपटने में दोहरा रवैया नहीं होना चाहिए। आतंकियों को पैसा देने, उनका समर्थन करने और उन्हें पनाह देने वालों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार भी बैठक में मौजूद थे। राजनाथ ने कहा कि आतंकवाद से निर्दोष लोगों की जान जाती है। इससे निवेश और कारोबार प्रभावित होते हैं, समाज में कट्टरता बढ़ती है। उन्होंने सदस्य देशों से आतंकवाद के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई करने की अपील की। राजनाथ ने अपने भाषण में पाकिस्तान या इशाक डार का नाम लेकर सीधे कोई आरोप नहीं लगाया। उन्होंने बिना नाम लिए चीन पर भी निशाना साधा और कहा कि कनेक्टिविटी के नाम पर किसी भी देश की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। राजनाथ बोले- संप्रभुता का सम्मान करते हुए योजनाएं बनें राजनाथ सिंह ने कहा कि देशों को जोड़ने वाली परियोजनाएं सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हुए बनाई जानी चाहिए। इसके लिए सभी संबंधित देशों से सलाह-मशविरा करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि इन सिद्धांतों का पालन नहीं करने वाली परियोजनाएं लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकतीं। भारत ऐसी परियोजनाओं का समर्थन करता है, जो देशों के बाजारों को जोड़ें, व्यापार बढ़ाएं और विकास के नए रास्ते खोलें। लेकिन इनके नाम पर किसी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। राजनाथ सिंह ने चीन का नाम नहीं लिया, लेकिन संप्रभुता और कनेक्टिविटी पर उनकी बात भारत के इसी पुराने रुख से जुड़ती है। इसके पीछे सबसे अहम मामला चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का है। BRI प्रोजेक्ट का विरोध करता है भारत चीन ने 2013 में बेल्ट एंड रोड (BRI) पहल शुरू की थी। इसका मकसद सड़क, रेल, बंदरगाह और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के जरिए चीन को एशिया, यूरोप और अन्य क्षेत्रों के बाजारों से जोड़ना है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) बेल्ट एंड रोड (BRI) पहल की प्रमुख परियोजनाओं में से एक है। यह चीन के शिनजियांग क्षेत्र को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ता है। इसका एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से गुजरता है। भारत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के उन इलाकों को अपना हिस्सा मानता है, जिन पर पाकिस्तान का कब्जा है। भारत का कहना है कि इन इलाकों में चीन की परियोजनाएं उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े सवाल उठाती हैं। राजनाथ सिंह के बयान की 4 और अहम बातें… – चाबहार बंदरगाह पर: राजनाथ ने ईरान के चाबहार बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इनसे मध्य एशिया को बड़े बाजारों से जोड़ने और व्यापार बढ़ाने में मदद मिल सकती है। – SCO की भूमिका पर: राजनाथ ने कहा कि संगठन में सिर्फ नई संस्थाएं बनाने से उपलब्धियां नहीं बढ़ेंगी। नई व्यवस्थाएं ऐसी होनी चाहिए, जो सदस्य देशों की जरूरतें पूरी करें, पहले से चल रहे काम को न दोहराएं और लोगों को सीधा फायदा पहुंचाएं। – दुनिया की आर्थिक चुनौतियों पर: भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार में रुकावटें, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा की चिंताएं और तकनीक के क्षेत्र में बढ़ता अंतर वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। राजनाथ ने इनसे निपटने के लिए आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करने और व्यापार व निवेश को आसान बनाने पर जोर दिया। – व्यापार को आसान बनाने पर: राजनाथ ने कहा कि देशों को जोड़ने के लिए केवल सड़क, रेल और बंदरगाह बनाना काफी नहीं है। सीमा शुल्क की प्रक्रिया आसान करनी होगी, डिजिटल दस्तावेजों का इस्तेमाल बढ़ाना होगा और सामान की ढुलाई से जुड़ी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना होगा, ताकि कारोबार की लागत घटे।