आकाश अंबानी ने जियो प्लेटफॉर्म्स की प्राथमिकताएं बताईं, कहा-इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा उठाने पर होगा फोकस

जियो प्लेटफॉर्म्स अपनी ग्रोथ स्ट्रेटेजी के फोकस में बदलाव कर रही है। अब तक कंपनी का जोर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर रहा है। अब कंपनी अपने नेटवर्क का मैक्सिमम फायदा उठाने पर फोकस कर रही है। कंपनी ने पिछले सालों में पूरे देश में कनेक्टिविटी बढ़ाने पर भारी निवेश किया है। अब वह अपने सर्विसेज पोर्टफोलियो का विस्तार करना चाहती है और निवेश की गई पूंजी पर रिटर्न बढ़ाना चाहती है। इस बारे में जियो प्लेटफॉर्म्स के एमडी आकाश अंबानी ने बताया।

इंफ्रास्ट्रक्चर से मैक्सिमम वैल्यू हासिल करने पर होगा फोकस

मनीकंट्रोल को दिए ईमेल इंटरव्यू में अंबानी ने कहा, “हमारे कैपिटल एलोकेशन की दिशा सस्टेनेबल लॉन्ग टर्म वैल्यू क्रिएट करने के मकसद पर निर्भर करेगी। हम वहां निवेश करना जारी रखेंगे, जहां हमें टेक्नोलॉजी, कस्टमर डिमांड और उपलब्ध मौकों का फायदा उठाने के लिहाज से ऐसा करना सही लगेगा।” उन्होंने कहा कि मीडियम और लॉन्ग टर्म में हमारा फोकस उस इंफ्रास्ट्रक्चर से मैक्सिमम वैल्यू हासिल करना है, जिसे हमने बनाया है।

पिछले सालों में कंपनी ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश किया है

जियो प्लेटफॉर्म्स ने व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया है। मार्च 2026 में कंपनी के 3,60,382 नेटवर्क टावर्स थे। इसमें 10 लाख रूट किलोमीटर से ज्यादा लंबा फाइबर नेटवर्क शामिल है। कंपनी के वायरलेस ब्रॉडबहैंड नेटवर्क के तहत देश की आबादी का 99 फीसदी से ज्यादा हिस्सा आता है। फिक्स्ड ब्रॉडबैंड का कवरेज करीब 98 फीसदी पिन कोड्स तक है। FY26 में इंडिया के वायरलेस डेटा ट्रैफिक में जियो की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी थी।

अब पूंजीगत निवेश की रफ्तार में धीर-धीरे कमी आ रही

कई सालों तक भारी निवेश करने के बाद अब इनवेस्टमेंट की तेज रफ्तार कम हुई है। FY26 में कंपनी का कैश कैपिटल एक्सपेंडिचर घटकर 34,184 करोड़ रुपये रही। यह FY25 में 44,268 करोड़ रुपये थी। FY24 में 53,510 करोड़ रुपये थी। नेटवर्क कैपेक्स अकेले 40,617 करोड़ रुपये से घटकर 29,377 करोड़ रुपये पर आ गया। उधर, बिजनेस की ऑपरेटिंग अर्निंग्स अब अच्छे लेवल पर पहुंच गई है। जियो प्लेटफॉर्म्स का ऑपरेशन से रेवेन्यू FY26 में बढ़कर 1.47 लाख करोड़ रुपये हो गया। EBITDA 76,255 करोड़ रुपये रहा। यह करीब 52 फीसदी का मार्जिन है। कंपनी का नेट प्रॉफिट 30,049 करोड़ रुपये रहा।

जियो की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल विदेश में करने पर भी होगा फोकस

कंपनी ने शॉर्ट टर्म में कंपनी की प्राथमिकताओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा इसमें नेटवर्क क्वालिटी बनाए रखना, होम ब्रॉडबैंड और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस का विस्तार करना और एंटरप्राइज एंड डिजिटल सर्विसेज का विस्तार शामिल हैं। जियो AI-एनेबल्ड एंटरप्राइज सॉल्यूशंस, IoT, क्लाउड कंप्यूटिंग और AR/VR में भी मौकों पर नजर रखेगी। उन्होंने कहा कि जियो की टेक्नोलॉजी कपैबिलिटी के लिए विदेश में मौकों की तलाश भी प्राथमिकता में शामिल होगी।

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जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर को निवेश के लिए खुल जाएगा

जियो प्लेटफॉर्म्स के 30,200 करोड़ रुपये के आईपीओ में सिर्फ नए शेयर इश्यू होंगे। इसमें कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल नहीं है। यह आईपीओ 21 अक्तूबर यानी बुधवार को खुलेगा और 23 अक्तूबर यानी शुक्रवार को बंद होगा। कंपनी ने प्रति शेयर 1,065-1,119 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर कंपनी की वैल्यूएशन करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये है। कंपनी आईपीओ से आने वाले पैसे के बड़े हिस्से का इस्तेमाल अपनी सब्सिडियरी रिलायंस का कर्ज चुकाने के लिए करेगी।

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Jio IPO: ‘कमाई बढ़ाने के लिए नई रणनीति पर फोकस’, आकाश अंबानी ने कहा- सिर्फ टैरिफ बढ़ाने पर नहीं रहेगा जोर

Jio IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स अपनी कमाई बढ़ाने के लिए सिर्फ मोबाइल रिचार्ज महंगे करने पर निर्भर नहीं रहना चाहती। कंपनी अब डेटा की बढ़ती खपत, प्रीमियम डिजिटल सेवाओं, होम ब्रॉडबैंड और कॉरपोरेट सेवाओं से कमाई बढ़ाने की तैयारी में है। Jio का लक्ष्य अपने 50 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों से ज्यादा रेवेन्यू हासिल करना है।

Jio Platforms के चेयरमैन आकाश अंबानी ने Moneycontrol को बताया कि कंपनी हर GB डेटा के लिए ज्यादा पैसे वसूलने को ही कमाई बढ़ाने का एकमात्र तरीका नहीं मानती। उनके मुताबिक, टैरिफ कारोबार का एक हिस्सा है। लेकिन कमाई बढ़ाने के दूसरे रास्ते भी हैं।

Jio ग्राहकों को देगी प्रीमियम सेवाएं

Jio अपनी डिजिटल सेवाओं को और बेहतर बनाने पर काम कर रही है। कंपनी चाहती है कि ग्राहक प्रीमियम सेवाओं का ज्यादा इस्तेमाल करें। इसके अलावा, होम ब्रॉडबैंड और फिक्स्ड वायरलेस इंटरनेट का विस्तार भी किया जाएगा।

कंपनी कॉरपोरेट ग्राहकों के साथ अपना कारोबार बढ़ाना चाहती है। साथ ही, इंटरनेट कनेक्शन के साथ दूसरी सेवाएं भी जोड़ी जाएंगी। इनमें OTT वीडियो, म्यूजिक, क्लाउड स्टोरेज और AI आधारित सेवाएं शामिल हैं।

आकाश अंबानी के मुताबिक, ग्राहक इन सेवाओं का ज्यादा इस्तेमाल करेंगे, तो कमाई बढ़ाने के नए मौके मिलेंगे। प्रीमियम इंटरनेट कनेक्टिविटी और AI सेवाएं भी इसमें अहम भूमिका निभा सकती हैं।

Airtel से पीछे है Jio की प्रति ग्राहक कमाई

वित्त वर्ष 2026 में Jio की औसत प्रति यूजर कमाई यानी ARPU 214 रुपये प्रति माह रही। वहीं, Bharti Airtel की ARPU 257 रुपये थी।

एनालिस्ट्स का मानना है कि Jio के पास कमाई बढ़ाने की काफी गुंजाइश है। कंपनी के पास ग्राहकों की संख्या ज्यादा है। उसके नेटवर्क पर डेटा का इस्तेमाल भी काफी होता है। ऐसे में प्रीमियम सेवाओं और डेटा की बढ़ती खपत से कंपनी को फायदा मिल सकता है।

हालांकि, आकाश अंबानी ने यह नहीं बताया कि अगली बार मोबाइल टैरिफ कब बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि आने वाले समय में कीमतें किस स्तर पर स्थिर हो सकती हैं। उनके मुताबिक, टैरिफ का फैसला ग्राहकों की जरूरत, बाजार में प्रतिस्पर्धा, महंगाई और नेटवर्क पर होने वाले निवेश को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

Jio Platforms का ₹30,213 करोड़ का IPO

Jio Platforms का ₹30,213 करोड़ का IPO 21 अक्टूबर को खुला है और 23 अक्टूबर को बंद होगा। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू है। इसके लिए 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है।

इस IPO में 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जा रहे हैं। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) नहीं है। ऊपरी प्राइस बैंड पर कंपनी का वैल्यूएशन करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये है। शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को BSE और NSE पर होनी है।

₹27,500 करोड़ से चुकाया जाएगा कर्ज

वित्त वर्ष 2026 में Jio Platforms का रेवेन्यू 1.47 लाख करोड़ रुपये रहा। कंपनी को 30,049 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हुआ। वहीं, EBITDA 76,255 करोड़ रुपये रहा।

IPO से मिलने वाली रकम में से 27,500 करोड़ रुपये Reliance Jio Infocomm का कर्ज चुकाने के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे। यह Jio Platforms की सब्सिडियरी कंपनी है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Cult.fit को IPO के लिए SEBI से मिली मंजूरी, रहेंगे ₹950 करोड़ तक के नए शेयर

फिटनेस सर्विसेज प्लेटफॉर्म Cult.fit को IPO लाने के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI से मंजूरी मिल गई है। सेबी की वेबसाइट पर मौजूद एक दस्तावेज से पता चलता है कि कंपनी अब लिस्टिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। Cult.fit के पब्लिक इश्यू में 950 करोड़ रुपये तक के नए इक्विटी शेयर जारी होंगे। साथ ही मौजूदा शेयरधारकों की ओर से 17.86 करोड़ तक इक्विटी शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा।

Cult.fit भारत में 77 शहरों में 708 फिटनेस सेंटर चलाती है। 31 मार्च, 2026 तक इसके 987,000 से अधिक पेड मेंबर थे। यह कई माध्यमों से मेंबरशिप बेचती है, जिनमें इसका ऐप, वेबसाइट, कॉरपोरेट पार्टनरशिप प्रोग्राम और फिटनेस सेंटरों पर होने वाली डायरेक्ट सेल शामिल हैं। कल्ट फिट ने इस साल जुलाई में SEBI के पास IPO के लिए आवेदन किया था।

कंपनी में टेमासेक होल्डिंग्स के निवेश वाली मैकरिची इनवेस्टमेंट्स, फिटनेस फर्स्ट लक्जमबर्ग, IDG वेंचर्स इंडिया फंड, टाटा डिजिटल, चिराटे ट्रस्ट, श्रोडर्स कैपिटल, ट्वेंटी नाइन कैपिटल पार्टनर्स और एक्सेल इंडिया V (मॉरीशस) का भी पैसा लगा हुआ है।

IPO के पैसे कैसे इस्तेमाल करेगी Cult.fit

Cult.fit अपने IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल नए सेंटर खोलने, और ब्रांडिंग व मार्केटिंग के खर्चों के लिए करेगी। इस इश्यू के लिए एक्सिस कैपिटल और गोल्डमैन सैक्स जैसी एंटिटीज ‘बुक-रनिंग लीड मैनेजर’ हैं। साल 2016 में शुरू हुई कल्ट फिट भारत में जिम, ग्रुप वर्कआउट, आउटडोर फॉर्मेट, एट-होम वर्कआउट और फिटनेस प्रोडक्ट्स जैसे- कपड़े, जूते और जिम के सामान बेचने वाला एक बहुत बड़ा और जाना-माना प्लेटफॉर्म बन चुका है।

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इन कंपनियों के IPO को भी मंजूरी

कल्ट फिट के अलावा SEBI ने ईश्वरी ग्लोबल मेटल इंडस्ट्रीज और सोहन लाल कमोडिटी मैनेजमेंट के IPO को भी मंजूरी दी है। ईश्वरी ग्लोबल मेटल इंडस्ट्रीज के IPO में 500 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी होंगे और 1.32 करोड़ इक्विटी शेयरों का OFS रहेगा। IPO का साइज 1,100 करोड़ रुपये से 1,300 करोड़ रुपये के बीच रह सकता है। सोहन लाल कमोडिटी मैनेजमेंट ने मार्च में कॉन्फिडेंशियल रूट से SEBI के पास IPO ड्राफ्ट जमा किया था। साल 2026 में अब तक 97 मेनबोर्ड कंपनियां अपने IPO के जरिए 1.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक जुटा चुकी हैं।

Jio Platforms IPO: 21 अक्टूबर को खुलेगा आईपीओ, जानें प्राइस बैंड से लेकर कारोबारी सेहत तक 8 बड़ी बातें

Jio Platforms IPO: रिलायंस इंडस्ट्रीज की सब्सिडियरी Jio Platforms ने IPO के लिए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर दिया है। कंपनी का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर 2026 को बंद होगा। इस इश्यू में 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचेंगे।

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने बुधवार, 14 अक्टूबर को अहमदाबाद स्थित गुजरात के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास RHP दाखिल किया। इसमें आईपीओ की पूरी रूपरेखा, जुटाई गई रकम के इस्तेमाल और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजों की जानकारी दी गई है। आइए, आईपीओ से जुड़ी 8 बड़ी बातें जानते हैं।

1. 21 अक्टूबर को खुलेगा IPO

Jio Platforms का आईपीओ बुधवार, 21 अक्टूबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। निवेशक शुक्रवार, 23 अक्टूबर तक इसमें बोली लगा सकेंगे। वहीं, एंकर निवेशकों के लिए बोली लगाने की तारीख 19 अक्टूबर तय की गई है।

2. 27 करोड़ तक नए शेयर जारी होंगे

इस आईपीओ में 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) नहीं होगा। यानी पुराने निवेशक अपने शेयर नहीं बेचेंगे, बल्कि कंपनी नए शेयर जारी करके पैसा जुटाएगी। हालांकि, कुल कितनी रकम जुटाई जाएगी, यह अंतिम इश्यू शर्तों पर निर्भर करेगा।

3. जुटाए गए पैसे से चुकाया जाएगा कर्ज

Jio Platforms आईपीओ से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल अपनी टेलीकॉम सब्सिडियरी Reliance Jio Infocomm Ltd (RJIL) का कर्ज चुकाने में करेगी। इसके अलावा, कुछ रकम सामान्य कारोबारी जरूरतों पर खर्च की जाएगी। इससे RJIL पर कर्ज का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है।

4. रिलायंस के शेयरधारकों के लिए ₹2500 करोड़ के शेयर

आईपीओ में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व रखे गए हैं। इसमें तय शर्तों को पूरा करने वाले व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) शामिल हो सकते हैं, जिनके पास रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर हैं।

5. कर्मचारियों के लिए ₹500 करोड़ तक के शेयर

Jio Platforms ने अपने पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व रखे हैं। कर्मचारी आईपीओ की शर्तों के मुताबिक इन शेयरों के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह हिस्सा दूसरे निवेशक वर्गों के लिए उपलब्ध शेयरों से अलग होगा।

6. पहली तिमाही में रेवेन्यू 11.8% बढ़ा

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में Jio Platforms का रेवेन्यू सालाना आधार पर 11.8% बढ़कर 39,173 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 35,032 करोड़ रुपये था। कंपनी का EBITDA भी 15.1% बढ़कर 20,865 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो एक साल पहले 18,141 करोड़ रुपये था।

इस दौरान EBITDA मार्जिन 51.78% से बढ़कर 53.26% हो गया। कंपनी का नेट प्रॉफिट भी बढ़कर 7,764 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 7,110 करोड़ रुपये था।

7. 1,065 से 1,119 रुपये प्राइस बैंड

Jio Platforms ने आईपीओ के लिए 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। लॉट साइज 13 शेयरों का रहेगा। रिटेल इनवेस्टर्स को कम से कम एक लॉट के लिए बोली लगानी है। इसके लिए ₹14,534 लगेंगे। लिस्टिंग 28 अक्टूबर को BSE और NSE पर होने वाली है।

8. जियो 53.33 करोड़ ग्राहक

जियो के पास पहली तिमाही के अंत में 53.33 करोड़ ग्राहक थे। तिमाही के दौरान कंपनी ने 89 लाख नए ग्राहक जोड़े। वहीं, प्रति यूजर औसत मासिक रेवेन्यू (ARPU) 215.6 रुपये रहा।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

SME IPO पर सख्ती की तैयारी! SEBI का मुनाफे से लेकर ऑफर फॉर सेल तक के नियम बदलने का प्रस्ताव

SME IPO लाने वाली कंपनियों के लिए नियम सख्त हो सकते हैं। मार्केट रेगुलेटर SEBI ने इसके लिए कई बदलावों का प्रस्ताव दिया है। सबसे बड़ा बदलाव मुनाफे की शर्त को लेकर है। प्रस्ताव के मुताबिक, कंपनियों को पिछले तीन वित्त वर्षों में औसतन 3 करोड़ रुपये का सालाना ऑपरेटिंग प्रॉफिट दिखाना होगा।

SEBI ने 14 अक्टूबर 2026 को इस बारे में कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें SME IPO के नियमों में बदलाव की बात कही गई है। आम लोगों और बाजार से जुड़े पक्षों से 4 नवंबर तक सुझाव मांगे गए हैं। अभी ये प्रस्ताव हैं, लागू नियम नहीं।

SME IPO के लिए मुनाफे की नई शर्त

अभी कंपनी को पिछले तीन वित्त वर्षों में से कम से कम दो साल में 1 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग प्रॉफिट दिखाना होता है। SEBI अब इसकी जगह नई शर्त लाना चाहता है। इसके तहत पिछले तीन साल का औसत सालाना ऑपरेटिंग प्रॉफिट कम से कम 3 करोड़ रुपये होना चाहिए।

जो कंपनियां यह शर्त पूरी नहीं कर पाएंगी, उनके लिए भी IPO लाने का रास्ता खुला रह सकता है। हालांकि, उन्हें दूसरी शर्तें पूरी करनी होंगी। ऐसी कंपनियों को बुक बिल्डिंग प्रक्रिया अपनानी होगी। साथ ही, IPO के नेट इश्यू का कम से कम 75% हिस्सा बड़े संस्थागत निवेशकों यानी QIBs को देना होगा। अगर इतना आवंटन नहीं हो पाता है, तो निवेशकों की पूरी रकम लौटानी होगी।

मार्केट कैप से तय होगी लिस्टिंग की पात्रता

SEBI कंपनियों की पात्रता तय करने का तरीका भी बदलना चाहता है। अभी इसके लिए पेड-अप कैपिटल को आधार बनाया जाता है। नए प्रस्ताव में कंपनी के मार्केट कैप को आधार बनाने की बात है।

इसके मुताबिक, IPO के बाद 1,000 करोड़ रुपये तक के मार्केट कैप वाली कंपनियां सिर्फ SME प्लेटफॉर्म पर लिस्ट हो सकेंगी। 1,000 करोड़ से ज्यादा और 4,000 करोड़ रुपये तक के मार्केट कैप वाली कंपनियां भी तय शर्तों के साथ SME प्लेटफॉर्म चुन सकेंगी। इनके वित्तीय दस्तावेज Ind AS के नियमों के मुताबिक होने चाहिए।

अगर ऑफर डॉक्यूमेंट के तय चरण में कंपनी का मार्केट कैप 4,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाता है, तो उसे मेनबोर्ड के नियमों के तहत दोबारा दस्तावेज जमा करने होंगे।

IPO में आवेदन की रकम घटेगी

SEBI SME IPO में आवेदन की न्यूनतम रकम घटाने का प्रस्ताव भी लाया है। अभी न्यूनतम आवेदन की रकम 2 लाख रुपये से ज्यादा है। इसे घटाकर 1 लाख रुपये करने की तैयारी है। हालांकि, निवेशकों को कम से कम चार लॉट के लिए आवेदन करना होगा। हर लॉट की कीमत कम से कम 25,000 रुपये होगी।

इसके अलावा, IPO में कम से कम 200 निवेशकों को शेयर देने की शर्त बढ़ाकर 500 करने का प्रस्ताव है। रिटेल निवेशकों को शेयर देने के तरीके में भी बदलाव हो सकता है। नए प्रस्ताव के मुताबिक, शेयरों का आवंटन न्यूनतम लॉट के गुणकों से बंधा नहीं रहेगा। यह उपलब्ध शेयरों पर निर्भर करेगा।

कंपनियों को IPO से जुटाई गई रकम में से जनरल कॉरपोरेट कामों पर खर्च करने की 10 करोड़ रुपये की सीमा से भी राहत मिल सकती है। हालांकि, कुल जुटाई गई रकम के 15% तक खर्च करने की मौजूदा सीमा बनी रहेगी।

शेयर बेचने और लॉक-इन के नियम बदलेंगे

SEBI ने ऑफर फॉर सेल (OFS) के लिए अलग नियम बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत कुछ छूटों को छोड़कर बिक्री के लिए रखे जाने वाले शेयर कम से कम एक साल से शेयरधारक के पास होने चाहिए।

अभी OFS में कुल इश्यू साइज का अधिकतम 20% हिस्सा बेचा जा सकता है। शेयरधारक अपनी पहले से मौजूद हिस्सेदारी का अधिकतम 50% हिस्सा भी बेच सकते हैं। SEBI ने बड़े संस्थागत निवेशकों यानी QIB शेयरधारकों को इन सीमाओं से छूट देने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, मुनाफे की शर्त पूरी नहीं करने वाली कंपनियों के लिए यह छूट नहीं होगी।

SEBI ने शेयरों के लॉक-इन नियम बदलने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत, प्रमोटरों के न्यूनतम जरूरी शेयर IPO में आवंटन की तारीख से तीन साल तक लॉक रहेंगे। अतिरिक्त प्रमोटर शेयरों पर एक साल की रोक होगी। वहीं, पुराने गैर-प्रमोटर निवेशकों के शेयरों का लॉक-इन एक साल से घटाकर छह महीने करने का प्रस्ताव है। प्रमोटर ग्रुप की कुछ हिस्सेदारी पर भी एक साल का लॉक-इन लागू हो सकता है।

SME IPO से अब तक जुटाए गए 40,222 करोड़ रुपये

SEBI के मुताबिक, SME प्लेटफॉर्म शुरू होने के बाद से अब तक 1,496 कंपनियां इस पर लिस्ट हो चुकी हैं। इनमें वे कंपनियां भी शामिल हैं, जो बाद में मेनबोर्ड पर चली गईं। कुल 365 कंपनियां मेनबोर्ड में माइग्रेट कर चुकी हैं।

SME IPO के जरिए कंपनियों ने अब तक 40,222 करोड़ रुपये जुटाए हैं। 31 जुलाई 2026 तक SME प्लेटफॉर्म की कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4,70,984 करोड़ रुपये था। इस आंकड़े में मेनबोर्ड पर जा चुकी कंपनियां भी शामिल हैं।

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Jio Platforms IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में निवेश से पहले ये 6 सबसे जरूरी बातें जान लीजिए

Jio Platforms IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ जल्द आ रहा है। इनवेस्टर्स काफी समय से इस आईपीओ का इंतजार कर रहे हैं। रिलायंस जियो देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है। यह रिलायंस समूह की डिजिटल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का हिस्सा है। जियो प्लेफॉर्म्स का आईपीओ देश का सबसे बड़ा आईपीओ होगा।

आईपीओ में कंपनी 27 करोड़ तक नए शेयर इश्यू करेगी

जियो प्लेटफॉर्म्स के डीआरएचपी के मुताबिक, कंपनी आईपीओ में 27 करोड़ तक नए शेयर जारी रहेगी। प्रत्येक शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये होगी। इस आईपीओ में ऑफर फॉर सेल (OFS) नहीं होगा। इसका मतलब है कि पुराने इनवेस्टर्स अपने शेयर इस आईपीओ में नहीं बेचेंगे। कंपनी के शेयर बीएसई और एनएसई दोनों पर लिस्ट होंगे।

यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 30,200 करोड़ रुपये का हो सकता है। इस तरह यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। अभी सबसे बड़ा आईपीओ पेश करने के रिकॉर्ड ऑटो कंपनी ह्यूंडई मोटर इंडिया के नाम है। इसने 2024 में 27,870 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश किया था। NSE ने पिछले महीने 22,562 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश किया था।

10 लाख करोड़ एम-कैप वाली क्लब में होगी शामिल

शेयरों की लिस्टिंग के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स उन कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो जाएगी, जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। इस लिस्ट में रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल और एचडीएफसी बैंक शामिल हैं। रिलांयस इंडस्ट्रीज देश की सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनी है। रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैपिटलाइजेशन 15,68,421 करोड़ रुपये है।

21 अक्तूबर को निवेश के लिए खुल सकता है आईपीओ

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ के 21 अक्टूबर को खुलने की उम्मीद है। हालांकि, अभी कंपनी ने इस बारे में औपचारिक ऐलान नहीं किया है। यह इश्यू तीन दिन के लिए खुला रहेगा। इस महीने के आखिरी हफ्तों में शेयर बीएसई और एनएसई पर लिस्ट हो जाएंगे। यह आईपीओ ऐसे वक्त आ रहा है, जब शेयर बाजारों पर बिकवाली का दबाव दिख रहा है।

आईपीओ से मिले पैसे का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए होगा

कंपनी आईपीओ से आए पैसे के बड़े हिस्से का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी। जियो प्लेटफॉर्म्स पर FY26 में 70,781 करोड़ रुपये का कर्ज था। कर्ज का बोझ घटने से कंपनी की बैलेंशशीट मजबूत होगी। जियो प्लेटफॉर्म्स मोबाइल एंड फिक्स्ड ब्रॉडबैंड, एंटरटेनमेंट, क्लाउड कंप्यूटिंग, क्लाउड गेमिंग, स्टोरेज, स्मार्ट होम सॉल्यूशंस और आर्टफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित प्रोडक्ट्स में मौजूद है।

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रिलायंस जियो के कस्टमर्स की संख्या 53 करोड़ के पार 

जियो प्लेटफॉर्म्स की सब्सिडियरी जियो के इस साल जून के अंत में 53.33 करोड़ कस्टमर्स थे। इसमें 28.5 करोड़ 5जी यूजर्स शामिल हैं। कंपनी के फिक्स्ड ब्रॉडबैंड कनेक्शंस की संख्या 2.86 करोड़ थी। कंपनी का औसत रेवेन्यू प्रति यूजर (ARPU) जून तिमाही में बढ़कर 215.6 रुपये पहुंच गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 13 अक्टूबर को 0.67 फीसदी चढ़कर 1,166.70 रुपये पर बंद हुआ।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट के पास है, जिसकी रिलायंस इंडस्ट्रीज एकमात्र लाभार्थी है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

HD Fire Protect IPO: एंकर इनवेस्टर्स से जुटाए ₹213 करोड़, 13 अक्टूबर से ओपनिंग; ग्रे मार्केट में उड़ान भर रहा है शेयर

मेनबोर्ड सेगमेंट में HD फायर प्रोटेक्ट का ₹712.31 करोड़ का IPO आज, 13 अक्टूबर से खुलने वाला है। एक दिन पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों से 213.11 करोड़ रुपये जुटाए। प्राइस बैंड के अपर एंड पर 25 इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स को 78.64 लाख इक्विटी शेयर अलॉट किए गए। कुल एंकर एलोकेशन में से, 56,52,331 इक्विटी शेयर 9 घरेलू म्यूचुअल फंड्स को दिए गए। इनमें SBI म्यूचुअल फंड, HDFC एसेट मैनेजमेंट कंपनी, कोटक म्यूचुअल फंड, UTI म्यूचुअल फंड, ICICI प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी, आदित्य बिड़ला सन लाइफ एसेट मैनेजमेंट कंपनी, PGIM इंडिया, बंधन म्यूचुअल फंड और मिरे एसेट शामिल हैं।

बजाज लाइफ इंश्योरेंस और एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस ने कुल 14.95 करोड़ रुपये के 5.51 लाख शेयर सब्सक्राइब किए। अशोका व्हाइटओक, एलियांज ग्लोबल इनवेस्टर्स फंड और अमुंडी फंड्स जैसे दूसरे बड़े इनवेस्टर्स ने भी एंकर बुक में हिस्सा लिया।

HD फायर प्रोटेक्ट IPO 15 अक्टूबर को बंद होगा। प्राइस बैंड ₹258-₹271 प्रति शेयर और लॉट साइज 55 शेयर है। कंपनी के IPO में 2.63 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। नए शेयर जारी नहीं होंगे। OFS में कंपनी के 2 प्रमोटर- हरीश नरशी धरमशी और कुसुम हरीश धरमशी शेयरों को बिक्री के​ लिए रखेंगे। IPO बंद होने के बाद अलॉटमेंट 16 अक्टूबर को फाइनल होगा। शेयरों की लिस्टिंग NSE और BSE पर 21 अक्टूबर को हो सकती है।

क्या करती है HD Fire Protect

HD फायर प्रोटेक्ट आग से सुरक्षा करने वाले इक्विपमेंट और सिस्टम बनाती और सप्लाई करती है। यह आग बुझाने के पानी, फोम और गैस-बेस्ड सॉल्यूशंस की पेशकश करती है। कंपनी 8 प्रोडक्ट कैटेगरीज में कई तरह के प्रोडक्ट बनाती है, जैसे कि स्प्रिंकलर, अलार्म वॉल्व व एक्सेसरीज, डेल्यूज वॉल्व और सिस्टम, फोम इक्विपमेंट व सप्रेशन सिस्टम, मॉनिटर व नोजल, वॉटर स्प्रे नोजल, कस्टम-इंजीनियर्ड सिस्टम, गैस सप्रेशन सिस्टम आदि।

कंपनी के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल इंडस्ट्रियल, रेजिडेंशियल और कमर्शियल कामों में होता है, जैसे कि ऑयल व गैस, रिफाइनिंग व पेट्रोकेमिकल्स, पावर एंड एनर्जी, हेवी इंजीनियरिंग, एयरोस्पेस, फार्मास्यूटिकल्स, डेटा सेंटर, हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर। HD Fire Protect के प्रोडक्ट एक्सपोर्ट भी होते हैं।

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IPO में कितना हिस्सा रिजर्व

IPO में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है। HD Fire Protect IPO के लिए एंबिट प्राइवेट लिमिटेड, आनंद राठी एडवाइजर्स लिमिटेड और IIFL कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं। रजिस्ट्रार MUFG Intime India Pvt.Ltd. है।

ग्रे मार्केट में दौड़ रहा है शेयर

HD Fire Protect की लिस्टिंग अच्छी रहने की उम्मीद है। ग्रे मार्केट में शेयर 31.73 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं। कंपनी का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में रेवेन्यू 114 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध मुनाफा 23.87 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान रेवेन्यू 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 505.12 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 116.79 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Zetwerk Manufacturing IPO 15 अक्टूबर से, प्राइस बैंड ₹143-₹151 प्रति शेयर तय

जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस लिमिटेड का IPO 15 अक्टूबर को खुलने जा रहा है। इसके लिए प्राइस बैंड ₹143-₹151 प्रति शेयर फिक्स किया गया है। लॉट साइज 99 शेयर है। कंपनी का इरादा ₹5,012.33 करोड़ जुटाने का है। IPO में ₹2,830 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे, साथ ही ₹2,182.33 करोड़ के शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। इश्यू 19 अक्टूबर को बंद होगा, जिसके बाद अलॉटमेंट 21 अक्टूबर को फाइनल हो सकता है। 20 अक्टूबर को शेयर बाजार में दशहरा की छुट्टी है। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 23 अक्टूबर को लिस्ट हो सकते हैं।

जेटवर्क पहले एक डिजिटल मार्केटप्लेस थी और अब मैन्युफैक्चरर्स को ग्राहकों से जोड़कर एक एंड-टू-एंड इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म बन गई है। यह कई सेक्टर्स में कस्टम-बिल्ट कंपोनेंट्स के लिए इंजीनियरिंग, उत्पादन और डिलीवरी को व्यवस्थित करती है। ग्राहक डिजाइन प्रदान करते हैं, जेटवर्क सप्लायर का चयन, गुणवत्ता नियंत्रण, टाइमलाइंस और लॉजिस्टिक्स को संभालती है। कंपनी लैपटॉप, हियरेबल्स, वियरेबल्स, IT हार्डवेयर बनाती है। जेटवर्क में खोसला वेंचर्स, एक्सेल, लाइटस्पीड, पीक XV पार्टनर्स, ग्रीनओक्स, एवेनिर जैसे दिग्गजों का पैसा लगा हुआ है।

जेटवर्क में फुली डाइल्यूटेड बेसिस पर पीक XV पार्टनर्स इनवेस्टमेंट्स V सबसे बड़ी इंडीविजुअल शेयरहोल्डर है, जिसके पास 9.12 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ग्रीनओक्स कैपिटल अपॉर्चुनिटीज फंड II के पास 8.61 प्रतिशत, रामकृष्णन के पास 8.36 प्रतिशत, एक्सेल इंडिया V के पास 7.74 प्रतिशत और आचार्य के पास 7.53 प्रतिशत हिस्सा है।

Zetwerk IPO को जुलाई में सेबी से मिली थी मंजूरी

जेटवर्क ने अपने IPO के लिए इस साल मार्च में कॉन्फिडेंशियल तरीके से ड्राफ्ट पेपर जमा किए थे। कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी से जुलाई में मंजूरी मिलने के बाद अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस 13 अगस्त 2026 को फाइल किया। OFS में प्रमोटर-ग्रुप एंटिटी Creovate Innovation, को-फाउंडर अमृत आचार्य, श्रीनाथ रामकृष्णन के साथ-साथ निवेशक पीक XV पार्टनर्स, एक्सेल, लाइटस्पीड वेंचर, के कैपिटल आदि भी शेयरों को बिक्री के लिए रखेंगे।

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IPO के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, मॉर्गन स्टेनली इंडिया, गोल्डमैन सैक्स (इंडिया) सिक्योरिटीज, एवेंडस कैपिटल, जेएम फाइनेंशियल, एचएसबीसी सिक्योरिटीज एंड कैपिटल मार्केट्स (इंडिया), पैंटोमैथ कैपिटल एडवाइजर्स, बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं। रजिस्ट्रार Kfin Technologies Ltd. है। इश्यू में 75 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 10 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

Zetwerk अपने IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल अपना और सब्सिडियरीज का कर्ज चुकाने, पहले से न पता अधिग्रहणों, अन्य रणनीतिक निवेशों और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹4,195.70 करोड़ और शुद्ध घाटा ₹732.98 करोड़ रहा। इस बीच कंपनी पर ₹1,942.19 करोड़ की उधारी थी। वित्त वर्ष 2025-26 में जेटवर्क का रेवेन्यू 40 प्रतिशत बढ़कर ₹16,100.63 करोड़ रहा। घाटा 1,606.17 करोड़ दर्ज किया गया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

HD Fire Protect IPO: 13 अक्टूबर से खुलेगा इश्यू, GMP 30% के पार; जानिए प्राइस बैंड समेत पूरी डिटेल

HD Fire Protect IPO: आग से बचाने वाले इक्विपमेंट बनाने वाली HD Fire Protect के आईपीओ को लेकर ग्रे मार्केट में तगड़ी हलचल दिख रही है। यह इश्यू 13 अक्टूबर से खुलेगा, मगर इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) अभी से करीब 32% है।

कंपनी ने IPO के लिए ₹258 से ₹271 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। यह IPO 13 अक्टूबर को खुलेगा और 15 अक्टूबर 2026 को बंद होगा। इसके जरिए कंपनी ₹712.31 करोड़ जुटाने जा रही है।

₹80 प्रति शेयर के लिस्टिंग गेन का संकेत

इनवेस्टरगेन के मुताबिक, ग्रे मार्केट में HD Fire Protect का GMP 31.73% है। इस हिसाब से शेयर की संभावित लिस्टिंग कीमत करीब ₹357 हो सकती है। IPO का ऊपरी प्राइस बैंड ₹271 है। यानी इस कीमत के मुकाबले करीब ₹86 प्रति शेयर का संभावित फायदा दिख रहा है।

हालांकि, GMP के आधार पर लिस्टिंग प्राइस तय नहीं होती। यह बाजार में चल रहा अनौपचारिक भाव है। लिस्टिंग से पहले इसमें बदलाव हो सकता है। इसलिए इसे मुनाफे की गारंटी नहीं मानना चाहिए।

पूरा IPO ऑफर फॉर सेल है

HD Fire Protect का पूरा IPO ऑफर फॉर सेल (OFS) है। इसमें 2,62,84,500 मौजूदा शेयर बेचे जाएंगे। इनकी कुल कीमत ₹712.31 करोड़ है। इसका मतलब है कि कंपनी को IPO से कोई नया पैसा नहीं मिलेगा। शेयर बेचने से मिलने वाली पूरी रकम मौजूदा शेयरधारकों को जाएगी।

प्रमोटर हरीश नरशी धरमशी 89,83,700 शेयर बेचेंगे। इनकी कीमत करीब ₹243.46 करोड़ है। वहीं, प्रमोटर कुसुम हरीश धरमशी 1,73,00,800 शेयर बेचेंगी। इनकी कीमत करीब ₹468.85 करोड़ है। दोनों प्रमोटर मिलकर करीब 2.63 करोड़ शेयर बेच रहे हैं। इनकी कुल कीमत ₹712.31 करोड़ है।

कब होगा अलॉटमेंट और लिस्टिंग?

HD Fire Protect IPO का अलॉटमेंट 16 अक्टूबर को फाइनल होने की उम्मीद है। वहीं, कंपनी के शेयर 21 अक्टूबर को NSE और BSE पर लिस्ट हो सकते हैं।

IPO का लॉट साइज 55 शेयर है। ₹271 के ऊपरी प्राइस बैंड पर एक लॉट के लिए ₹14,905 लगाने होंगे। यानी रिटेल निवेशकों को कम से कम इतनी रकम की जरूरत होगी।

कंपनी की कमाई और मुनाफा कितना बढ़ा?

HD Fire Protect की कुल आय वित्त वर्ष 2026 में 12% बढ़कर ₹505 करोड़ हो गई। वित्त वर्ष 2025 में यह ₹451 करोड़ थी। कंपनी का मुनाफा भी बढ़ा है। वित्त वर्ष 2026 में प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 6% बढ़कर ₹117 करोड़ रहा। एक साल पहले यह ₹110 करोड़ था।

कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू वित्त वर्ष 2024 में ₹372.95 करोड़ था। वित्त वर्ष 2026 में यह बढ़कर ₹489.28 करोड़ हो गया। इस दौरान रेवेन्यू की सालाना औसत ग्रोथ 14.54% रही।

क्या काम करती है HD Fire Protect?

HD Fire Protect की शुरुआत अप्रैल 1997 में हुई थी। कंपनी आग से बचाव के इक्विपमेंट और सिस्टम बनाती है। इसके प्रोडक्ट पानी, फोम और गैस की मदद से आग बुझाने में काम आते हैं। कंपनी के प्रोडक्ट में स्प्रिंकलर, अलार्म और डिल्यूज वाल्व, फोम उपकरण, मॉनिटर और नोजल शामिल हैं। इसके अलावा कंपनी वॉटर स्प्रे नोजल, खास जरूरतों के हिसाब से तैयार किए गए सिस्टम और गैस से आग बुझाने वाले सिस्टम भी बनाती है।

कंपनी के ग्राहक कई तरह के उद्योगों में हैं। इनमें तेल और गैस, पेट्रोकेमिकल्स, बिजली, इंजीनियरिंग, एयरोस्पेस, फार्मा, डेटा सेंटर, होटल और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर शामिल हैं। इसके प्रोडक्ट का इस्तेमाल औद्योगिक, आवासीय और व्यावसायिक जगहों पर होता है।

Stocks to Watch: 12 अक्टूबर को फोकस में रहेंगे ये 12 शेयर, बैंकिंग स्टॉक्स पर भी रहेगी नजर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Fusion CX IPO: ₹702 करोड़ का एक और इश्यू 14 अक्टूबर से; रहेंगे ₹500 करोड़ के नए शेयर; चेक करें प्राइस बैंड

मेनबोर्ड सेगमेंट में फ्यूजन CX का ₹702 करोड़ का IPO 14 अक्टूबर को खुलने वाला है। प्राइस बैंड ₹275-₹289 प्रति शेयर और लॉट साइज 51 शेयर है। कंपनी वॉइस, ईमेल, चैट, सोशल मीडिया और मैसेजिंग के जरिए मल्टीचैनल कस्टमर सपोर्ट उपलब्ध कराती है। यह AI डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस भी देती है, जिसमें डेटा कलेक्शन, डेटा एनोटेशन, इमेज व वीडियो लेबलिंग, और रोबोटिक टेली-ऑपरेशंस शामिल हैं।

Fusion CX इंसानी विशेषज्ञता को टेक्नोलॉजी और अपने खास AI टूल्स के साथ कंबाइन करके कई भाषाओं में और कई चैनलों के जरिए कस्टमर एंगेजमेंट उपलब्ध कराती है, काम करने की क्षमता बेहतर बनाती है और कस्टमर के साथ बातचीत को ऑटोमेट करती है। 30 जून, 2026 तक Fusion CX के 13 देशों में 40 डिलीवरी सेंटर थे।

कंपनी के पब्लिक इश्यू में ₹500 करोड़ के 1.73 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। साथ ही ₹202 करोड़ के 69.90 लाख शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। OFS में प्रमोटर्स P.N.S. बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड और रसीश कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड शेयरों को बिक्री के लिए रखेंगे। एंकर निवेशक 13 अक्टूबर को बोली लगा सकेंगे।

कब होगी लि​स्टिंग

IPO 16 अक्टूबर को बंद होगा, जिसके बाद अलॉटमेंट 19 अक्टूबर को फाइनल हो सकता है। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 22 अक्टूबर को लिस्ट होंगे। इस इश्यू के लिए ‘नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट लिमिटेड’ बुक रनिंग लीड मैनेजर है। रजिस्ट्रार Kfin Technologies है। IPO में 75 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए और 10 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

ग्रे मार्केट में Fusion CX का शेयर अभी से 19.03 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

Fusion CX का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में रेवेन्यू ₹503.85 करोड़ रहा। शुद्ध मुनाफा ₹55.70 करोड़ दर्ज किया गया। इस बीच कंपनी पर ₹238.13 करोड़ की उधारी थी। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 37 प्रतिशत बढ़कर ₹1,851.83 करोड़ और शुद्ध मुनाफा 129 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹169.84 करोड़ रहा।

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

कंपनी अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयरों को जारी कर होने वाली कमाई का इस्तेमाल अपना और सब्सिडियरीज का कर्ज चुकाने के लिए, स्टेप डाउन सब्सिडियरीज में निवेश के लिए, पहले से न पता अधिग्रहणों के जरिए इनऑर्गेनिक ग्रोथ के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।