IMD Heavy Rain Alert: इन 13 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, MP से राजस्थान तक 30 इलाकों में आंधी-तूफान! 24 जून तक ऐसा रहेगा मौसम

IMD Heavy Rain Alert: देश के मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 24 जून तक के लिए देश का विस्तृत राष्ट्रीय बुलेटिन जारी कर दिया है। इसके तहत दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता और नए पश्चिमी विक्षोभ के चलते देश के 13 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का कड़ा अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार समेत देश के 30 अलग-अलग इलाकों (मौसम उप-मंडलों) में भीषण आंधी-तूफान, ओलावृष्टि और थंडरस्क्वाल की चेतावनी जारी की गई है। उत्तर प्रदेश समेत कुछ राज्यों में लू का प्रकोप भी देखने को मिलेगा।

मानसून प्रोग्रेस: अगले 4-5 दिनों में इन राज्यों में बढ़ेगा आगे

दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा (NLM) अभी हरनाई, सोलापुर, हैदराबाद, भद्राचलम, कोरापुट, फूलबनी, रांची, जमुई और मुजफ्फरपुर से होकर गुजर रही है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 4-5 दिनों के भीतर मानसून के तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार के कुछ और हिस्सों तथा छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं।

बिहार, बंगाल, केरल समेत इन 13 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट (24 जून तक)

मौसम विभाग ने 18 से 24 जून की अवधि के दौरान देश के 13 राज्यों में मूसलाधार बारिश का पूर्वानुमान जताया है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 18-19 जून और 21-23 जून के दौरान अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होगी। वहीं 20 जून को बेहद भारी बारिश का रेड अलर्ट है। 24 जून को भी यहां भारी बारिश जारी रहेगी। असम और मेघालय: यहां 19 से 22 जून के बीच भारी से बहुत भारी बारिश होगी। इसके अलावा 18 जून, 23 जून और 24 जून को भी भारी बारिश की चेतावनी है।

18 जून को केरल और माहे में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। इसके बाद 21 से 23 जून तक भारी बारिश दर्ज की जाएगी। बिहार में 18 से 20 जून तक लगातार भारी बारिश होने का अनुमान है। तटीय कर्नाटक में 18 जून और 21 से 24 जून तक जबकि दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 18 जून व 21-22 जून और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में 21-22 जून को भारी बारिश की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा में 18 से 23 जून तक लगातार भारी बारिश का अलर्ट है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में 18-19 जून को भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार में 80 Kmph का महातूफान और आंधी

मौसम विभाग ने देश के लगभग 30 मौसम क्षेत्रों (इलाकों) में 40 से 80 किमी/घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं और आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया है। 18 जून को पश्चिमी राजस्थान में और 18-19 जून को पूर्वी राजस्थान में 60-70 किमी/घंटे की रफ्तार से थंडरस्क्वाल (तीव्र झंझावात) आएगा। इसके झोंके 80 किमी/घंटे तक पहुंच सकते हैं। इसके बाद 19-20 जून को पश्चिमी राजस्थान और 20 जून को पूर्वी राजस्थान में 70 किमी/घंटे तक की रफ्तार की हवाएं चलेंगी। पश्चिमी राजस्थान में 18-20 जून और पूर्वी राजस्थान में 18 जून को धूलभरी आंधी चलेगी।

बिहार में 18-19 जून को 60-70 किमी/घंटे की रफ्तार वाला भीषण थंडरस्क्वाल आएगा। इसकी अधिकतम गति 80 किमी/घंटे तक हो सकती है। इसके बाद 20-24 जून तक 50 किमी/घंटे की रफ्तार वाली आंधी और बिजली का दौर चलेगा। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 18-19 जून को 50-60 किमी/घंटे की रफ्तार से थंडरस्क्वाल चलने की आशंका है। इसकी रफ्तार 70 किमी/घंटे तक पहुंच सकती है। इसके बाद 20-22 जून तक 50 किमी/घंटे की आंधी का येलो अलर्ट है। पूर्वी मध्य प्रदेश में भी 18-22 जून तक आंधी-तूफान का असर रहेगा। झारखंड में 18-20 जून और ओडिशा में 18-19 जून को 50-60 किमी/घंटे (झोंके 70 किमी/घंटे) की रफ्तार से तेज आंधी-तूफान की चेतावनी दी गई है।

दिल्ली, यूपी और पंजाब-हरियाणा सहित अन्य 30 इलाकों में आंधी-बिजली का हाल

दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में 18 से 22 जून के बीच लगातार गरज-चमक, आकाशीय बिजली और 40-50 किमी/घंटे (झोंके 60 किमी/घंटे) की रफ्तार से तेज आंधी चलने का अलर्ट जारी किया गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 18-22 जून और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 18-19 जून को आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली का असर रहेगा। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 18-19 जून को (जम्मू-कश्मीर में 20 जून तक) गरज-चमक के साथ ओले गिरने और 60 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की गंभीर चेतावनी है।

पश्चिम और दक्षिण भारत का मौसम कैसा रहेगा?

कोंकण व गोवा, मध्य महाराष्ट्र और मारथवाड़ा में 18-19 जून को और कोंकण व मध्य महाराष्ट्र में 22-24 जून को 50 किमी/घंटे की आंधी चलेगी। गुजरात और सौराष्ट्र-कच्छ में 18 जून आंधी-बिजली का अलर्ट है। दक्षिण भारत के तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, रायलसीमा और कर्नाटक के आंतरिक हिस्सों में 18-22 जून तक आंधी और बिजली कड़कने की घटनाएं होंगी। इसके अलावा अंडमान और निकोबार, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में भी 22 जून तक तेज हवाएं चलेंगी।

उत्तर प्रदेश में 24 जून तक जारी रहेगा हीट वेव का सितम

मौसम में आ रहे इस बदलाव के बीच देश के कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी रहेगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 18 से 24 जून तक और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 19 से 24 जून तक लगातार अलग-अलग पॉकेट्स में भीषण लू की स्थिति बनी रहेगी। बिहार, तटीय आंध्र प्रदेश और ओडिशा में 18 जून को लू चलेगी। इसके अलावा महाराष्ट्र (मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, विदर्भ) और तेलंगाना में 18 से 20 जून तक लू का प्रकोप जारी रहेगा। गंगीय पश्चिम बंगाल (18-19 जून), ओडिशा (18-20 जून), कोंकण व गोवा (18-21 जून) और तटीय आंध्र प्रदेश व रायलसीमा (19-20 जून) में असहनीय उमस भरी गर्मी परेशान करेगी।

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Mumbai Water Crisis: मुंबई को पानी सप्लाई करने वाले वॉटर रिजर्वायर में अब सिर्फ 10% स्टॉक! इन चीजों पर तो पड़ने लगा फौरन असर

Mumbai Water Crisis: मुंबई में पीने के पानी की सप्लाई करने वाले सात प्रमुख जलाशयों (वॉटर रिजर्वायर) में पानी का स्टॉक घटकर कुल उपयोगी क्षमता का सिर्फ 10.01 प्रतिशत रह गया है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के आने में हो रही देरी के बीच मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने पानी की भारी किल्लत से निपटने के लिए बड़े और कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पानी की इस भारी कमी का सीधा और फौरन असर मुंबई के कई सेक्टरों पर दिखने लगा है। इसमें कंस्ट्रक्शन से लेकर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स और स्विमिंग पूल्स तक शामिल हैं।

जलाशयों में पानी की ताजा स्थिति (बुधवार तक के आंकड़े)

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, बीएमसी के हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को सातों झीलों में कुल उपयोगी भंडारण क्षमता का केवल 10.01 प्रतिशत यानी 144918 मिलियन लीटर पानी उपलब्ध था। हालांकि, यह स्टॉक पिछले दो वर्षों की इसी अवधि की तुलना में थोड़ा बेहतर है। पिछले साल इसी दिन 141510 मिलियन लीटर (9.78%) पानी था। 2024 में यह आंकड़ा 77851 मिलियन लीटर (5.38%) दर्ज किया गया था।

आपको बता दें कि मुंबई को रोजाना करीब 4000 मिलियन लीटर पीने के पानी की सप्लाई करने वाली सातों झीलों की कुल उपयोगी भंडारण क्षमता 14.47 लाख मिलियन लीटर है। वर्तमान में विभिन्न झीलों में पानी की स्थिति इस प्रकार है:-

भातसा (ठाणे जिला- सबसे बड़ा स्रोत): 66,627 मिलियन लीटर (उपयोगी क्षमता का 9.29%)

मोदक सागर: 37,933 मिलियन लीटर (29.42%)

मिडल वैतरणा: 20,008 मिलियन लीटर (10.34%)

विहार (मुंबई के भीतर): 42.11% क्षमता

तुलसी (मुंबई के भीतर): 23.06% क्षमता

(नोट: सातों झीलों में भातसा, अपर वैतरणा, मिडल वैतरणा, मोदक सागर, तानसा, विहार और तुलसी शामिल हैं।)

इन चीजों पर पड़ा फौरन और सीधा असर

पानी के गिरते स्तर को देखते हुए मंगलवार को एक समीक्षा बैठक बुलाई गई। इसके बाद बीएमसी ने पीने के पानी को सुरक्षित रखने के लिए कई बड़े प्रतिबंधों की घोषणा की है। बीएमसी ने निर्माण स्थलों के लिए नए पानी के कनेक्शन जारी करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके साथ ही मौजूदा साइटों को दी जाने वाली सप्लाई में भी कटौती की गई है।

मुंबई में चल रहे सभी स्विमिंग पूल्स और कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स के लिए पानी की सप्लाई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। बीएमसी ने औद्योगिक, कमर्शियल और खेल प्रतिष्ठानों को दी जाने वाली पानी की सप्लाई में 20 प्रतिशत की कटौती लागू कर दी है। ये कटौती 17 जून से प्रभावी हो गई है। इसके पहले 15 मई से ही पूरे शहर में 10 प्रतिशत पानी की कटौती लागू है।

सेंट्रल रेलवे, वेस्टर्न रेलवे, आरसीएफ, एचपीसीएल, बीपीसीएल, नेवी, एमआईडीसी और मुंबई पोर्ट अथॉरिटी जैसे बड़े प्रतिष्ठानों को सलाह दी गई है कि वे अपने परिचालन और माध्यमिक कार्यों के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित पानी का दोबारा उपयोग करें।

रियल एस्टेट और होम डिलीवरी पर संकट के बादल

बीएमसी द्वारा कंस्ट्रक्शन साइट्स के पानी पर रोक लगाने से मुंबई के रियल एस्टेट मार्केट में हड़कंप मच गया है। इससे नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की मंजूरियों और उनकी लॉन्चिंग पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। इससे इस साल पूरे होने वाले हजारों घरों की डिलीवरी समय पर होने को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी फर्म ‘एनरॉक’ की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल मुंबई में लगभग 1.43 लाख घर बनकर तैयार होने वाले हैं। अगर पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) की बात करें, तो करीब 2.07 लाख घर निर्माण के अंतिम चरण में हैं। एमएमआर में वर्तमान में लगभग 6.86 लाख आवास इकाइयां निर्माणाधीन हैं। इनमें से 75% से अधिक (लगभग 5.15 लाख इकाइयां) अकेले मुंबई में स्थित हैं।

एक्सपर्ट्स की चेतावनी: रुक सकती है रफ्तार

एनरॉक के मुताबिक इस फैसले का तत्काल असर चल रहे निर्माण कार्यों के बजाय प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग और अप्रूवल पर अधिक महसूस होगा। निर्माण कार्य के लिए साइटें मुख्य रूप से भूजल और गैर-पेय स्रोतों पर निर्भर रहती हैं, जबकि बीएमसी के पानी का उपयोग मुख्य रूप से वहां काम करने वाले मजदूरों के कल्याण और पीने के लिए किया जाता है। इस पाबंदी से कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम करने की स्थिति और मजदूरों की उत्पादकता प्रभावित होगी, जो पहले से ही वैश्विक संघर्षों के कारण पैदा हुई अनिश्चितता और लेबर शॉर्टेज से जूझ रहे हैं।

यह पाबंदी मुंबई के कुछ खास माइक्रो-मार्केट्स के लिए स्थानीय जोखिम पैदा कर सकती है। इनमें दक्षिण मुंबई, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC), अंधेरी, बोरीवली और मुलुंड शामिल हैं। अगर मानसून की स्थिति और बिगड़ती है और एमएमआर के अन्य नगर निगम भी बीएमसी की राह पर चलते हैं तो पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण जारी सप्लाई चेन व्यवधानों के बीच साल 2026 में होम डिलीवरी पर गंभीर दबाव आ सकता है। यह स्थिति महामारी के दौर की याद दिला सकती है जब योजनाबद्ध घरों में से केवल 46% की ही वास्तविक डिलीवरी हो पाई थी।

नारेडको (NAREDCO) महाराष्ट्र के अध्यक्ष कमलेश ठाकुर ने भी चिंता जताते हुए कहा कि कंक्रीटिंग, क्योरिंग, प्लास्टरिंग और फिनिशिंग जैसे निर्माण कार्य पूरी तरह से पानी की विश्वसनीय आपूर्ति पर निर्भर होते हैं। लंबे समय तक होने वाला व्यवधान प्रोजेक्ट्स के शेड्यूल को प्रभावित कर सकता है, निर्माण लागत बढ़ा सकता है और घरों व इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की डिलीवरी में देरी कर सकता है।

मानसून में देरी और अल नीनो का साया

मुंबई में आमतौर पर मानसून 10 जून के आसपास दस्तक दे देता है, लेकिन इस साल इसकी शुरुआत में देरी हुई है। पिछले साल मानसून मई में ही समय से काफी पहले आ गया था। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस बार अल नीनो (El Niño) की स्थिति विकसित होने की संभावना जताई है, जिससे मानसून की रफ्तार और इसके वितरण को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि, मौसम विभाग के नवीनतम पूर्वानुमान के मुताबिक अगले कुछ दिनों में मानसून मुंबई पहुंच सकता है जिससे बीएमसी और मुंबईकरों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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US-Iran Peace Deal: होर्मुज और 300 अरब डॉलर की फंडिंग से लेकर और परमाणु हथियार तक…अमेरिका-ईरान MoU के 14 पॉइंट्स में क्या-क्या है?

US-Iran Peace Deal: कई हफ्तों की अटकलों के बाद अमेरिका और ईरान ने आखिरकार बहुप्रतीक्षित शांति समझौता ज्ञापन (MoU) पर आखिरकार साइन कर दिए हैं। फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में हुए इस समझौते का 14 सूत्रीय मसौदा सार्वजनिक किया गया है। हालांकि यह अंतिम शांति संधि नहीं है। लेकिन यह दोनों देशों के बीच स्थायी समझौते की दिशा में एक महत्वपूर्ण रोडमैप माना जा रहा है। समझौते की पहली शर्त के तहत अमेरिका और ईरान के बीच तत्काल प्रभाव से युद्धविराम लागू हो गया है।

यह युद्धविराम लेबनान समेत सभी संघर्ष क्षेत्रों पर लागू होगा। दोनों देशों ने भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई या बल प्रयोग की धमकी नहीं देने का भी वादा किया है। इसके साथ ही अमेरिका ने संघर्ष के दौरान लगाए गए नौसैनिक को हटाने और युद्ध से संबंधित सैन्य तैनाती को वापस लेने पर सहमति जताई है।

समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलना है। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक इस समुद्री रास्ते पर कमर्शियल जहाजों की आवाजाही बहाल करने का वादा किया है। दोनों देश समुद्री सुरक्षा और सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता लौट सकती है और तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

300 अरब डॉलर का फंड

आर्थिक मोर्चे पर अमेरिका ने ईरान के पुनर्निर्माण और विकास के लिए लगभग 300 अरब डॉलर के फंड का समर्थन करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, यह राशि सीधे नहीं दी जाएगी। बल्कि ईरान द्वारा समझौते की शर्तों का पालन करने पर चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा अमेरिका ने ईरान पर लगाए गए कई प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाने, तेल निर्यात की अनुमति देने और विदेशों में जमे ईरानी धन को चरणबद्ध तरीके से जारी करने पर भी सहमति व्यक्त की है।

परमाणु कार्यक्रम

परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी समझौते में महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। ईरान ने दोहराया है कि वह कभी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। साथ ही उसने अपने समृद्ध (एनरिच्ड) यूरेनियम भंडार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में डाउन-ब्लेंड करने पर सहमति जताई है। इसका मतलब है कि उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम को ऐसे स्तर तक कम किया जाएगा, जिसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में नहीं किया जा सकेगा, लेकिन वह शांतिपूर्ण नागरिक उद्देश्यों के लिए उपयोगी रहेगा।

जानें- डील की 14 मुख्य बातें

तत्काल सीजफायर

अमेरिका और ईरान के बीच सभी सैन्य कार्रवाई तुरंत बंद होगी। यह सीजफायर लेबनान समेत सभी संघर्ष क्षेत्रों पर लागू होगा।

संप्रभुता का सम्मान

दोनों देश एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता का सम्मान करेंगे।

अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त

अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के खिलाफ लागू नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा और संघर्ष के लिए तैनात सैन्य संसाधनों को वापस बुलाएगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खुलेगा

ईरान अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध आवाजाही बहाल करेगा।

300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण फंड

अमेरिका ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए लगभग 300 अरब डॉलर के फंड का समर्थन करेगा।

प्रतिबंधों में चरणबद्ध राहत

अमेरिका ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा।

परमाणु हथियार नहीं बनाएगा ईरान

डील में ईरान ने दोहराया है कि वह कभी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा।

एनरिच्ड यूरेनियम का डाउन-ब्लेंडिंग

ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार को IAEA की निगरानी में डाउन-ब्लेंड करेगा। यानी उसे हथियार-ग्रेड स्तर से नीचे लाया जाएगा।

60 दिनों तक कोई तनाव नहीं बढ़ेगा

वार्ता पूरी होने तक ईरान परमाणु गतिविधियां नहीं बढ़ाएगा और अमेरिका नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा।

तेल निर्यात फिर शुरू होगा

अमेरिका प्रतिबंधों में छूट देकर ईरान को तेल निर्यात और उससे जुड़े बैंकिंग लेनदेन की अनुमति देगा।

जमी हुई ईरानी संपत्तियों की रिहाई

विदेशों में फंसी ईरान की संपत्तियों तक उसकी पहुंच बहाल की जाएगी।

संयुक्त निगरानी तंत्र बनेगा

समझौते के पालन की निगरानी और विवादों के समाधान के लिए एक संयुक्त तंत्र स्थापित किया जाएगा।

कुछ मुद्दे अभी लंबित रहेंगे

सभी विवादित विषयों का समाधान इस MoU में नहीं किया गया है। बाकी मुद्दों पर आगे बातचीत होगी।

फाइनल डील को UN की मंजूरी

स्थायी शांति समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाध्यकारी प्रस्ताव के जरिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता दी जाएगी।

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कल का मौसम 18 जून: IMD ने बिहार, बंगाल समेत 13 राज्यों में हैवी बारिश का अलर्ट दिया, हरियाणा-दिल्ली समेत इन 26 राज्यों में आंधी-तूफान की चेतावनी

Weather Update 18 June: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के मौसम को लेकर 18 जून के लिए वेदर बुलेटिन जारी कर दिया है। गुरुवार 18 जून को देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा। दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता और नए पश्चिमी विक्षोभ के असर से 18 जून को देश के 13 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

दिल्ली, यूपी, पंजाब और हरियाणा समेत देश के 26 से अधिक राज्यों में आंधी-तूफान, ओलावृष्टि और बिजली कड़कने को लेकर गंभीर चेतावनी दी गई है। इस आंधी-पानी के बीच उत्तर और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में लू का असर भी देखने को मिलेगा।

बिहार, बंगाल और पूर्वोत्तर समेत इन 13 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक 18 जून देश के 13 राज्यों के अलग-अलग पॉकेट्स में मूसलाधार बारिश होने की प्रबल संभावना है। असम, मेघालय और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 18 जून को मूसलाधार से बेहद भारी बारिश का अलर्ट है। बिहार, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, केरल व माहे और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में 18 जून को भारी बारिश होने का पूर्वानुमान है।

IMD ने बताया है कि मानसून की उत्तरी सीमा (NLM) फिलहाल हरनाई, सोलापुर, हैदराबाद, भद्राचलम, कोरापुट, फूलबनी, रांची, जमुई और मुजफ्फरपुर पर टिकी हुई है। अगले 4-5 दिनों में इसके बिहार, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं।

दिल्ली, हरियाणा और पंजाब समेत 26 राज्यों में आंधी-तूफान का कहर

18 जून को देश के 26 से अधिक राज्यों में तेज आंधी, आकाशीय बिजली और झंझावाती हवाओं का शिकंजा रहेगा। मौसम विभाग ने राज्यों को तीन श्रेणियों में बांटा है:-

40 से 50 किमी/घंटे की आंधी वाले राज्य: दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तर प्रदेश (पूर्वी और पश्चिमी), मध्य प्रदेश (पूर्वी और पश्चिमी), छत्तीसगढ़, विदर्भ, छत्तीसगढ़, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, कोंकण व गोवा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, झारखंड, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल।

30 से 40 किमी/घंटे की हवाएं: तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और केरल व माहे।

सिर्फ बिजली और गरज-चमक: अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा।

राजस्थान में 80 किमी/घंटे की रफ्तार से महातूफान और धूलभरी आंधी

मौसम विभाग ने राजस्थान के लिए सबसे खतरनाक अलर्ट जारी किया है। राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में 60 से 70 किमी/घंटे की रफ्तार से भयंकर चक्रवाती तूफान चलेगा। इसकी अधिकतम स्पीड 80 किमी/घंटे तक पहुंच सकती है। इसके साथ ही पश्चिमी राजस्थान के इलाकों में भीषण धूलभरी आंधी चलने की भी चेतावनी है।

बिहार, ओडिशा और झारखंड में 60 किमी/घंटे का थंडरस्क्वाल

पूर्वी भारत के राज्यों में हवा की रफ्तार बेहद आक्रामक रहेगी। आईएमडी के मुताबिक कल बिहार और ओडिशा के अलग-अलग स्थानों पर 50 से 60 किमी/घंटे की रफ्तार से तीव्र झंझावाती तूफान आने की आशंका है, जिससे कच्चे मकानों और फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।

हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में ओलावृष्टि की चेतावनी

उत्तर-पश्चिम भारत में 18 जून को एक नया पश्चिमी विक्षोभ दस्तक दे रहा है। इसके प्रभाव से हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बल्टिस्तान व मुजफ्फरबाद के अलग-अलग इलाकों में भारी आंधी और आकाशीय बिजली के साथ ओले गिरने की गंभीर चेतावनी जारी की गई है।

उत्तर प्रदेश, बिहार और एमपी समेत इन राज्यों में हीट वेव का भी सितम

मौसम के इस विरोधाभास के बीच, देश के 6 राज्यों में भीषण लू का प्रकोप भी बना रहेगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना और महाराष्ट्र के अलग-अलग पॉकेट्स में भीषण लू चलने की आशंका है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, गंगीय पश्चिम बंगाल, कोंकण व गोवा और ओडिशा में अत्यधिक उमस भरी गर्मी लोगों को बेहाल करेगी।

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