Airtel के नए वॉइस-only रिचार्ज प्लान लॉन्च, ₹185 से शुरू; कॉलिंग और SMS के लिए नहीं मिलेगा डेटा

Airtel के नए वॉइस-only रिचार्ज प्लान लॉन्च, ₹185 से शुरू; कॉलिंग और SMS के लिए नहीं मिलेगा डेटा

टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के नए नियमों के अनुरूप केवल वॉइस कॉलिंग और SMS वाले प्रीपेड रिचार्ज प्लान पेश किए हैं। कंपनी ऐसा करने वाली पहली टेलीकॉम ऑपरेटर बन गई है। इन प्लान में अनलिमिटेड कॉलिंग और SMS की सुविधा मिलेगी, लेकिन मोबाइल इंटरनेट डेटा शामिल नहीं होगा।

 

एयरटेल के नए प्लान ₹185, ₹203 और ₹206 की कीमत में उपलब्ध हैं। इन्हें कंपनी की वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर सूचीबद्ध किया गया है। ये प्लान उन ग्राहकों के लिए उपयोगी हो सकते हैं जिन्हें मुख्य रूप से फोन कॉल और मैसेजिंग की जरूरत होती है।

 

Airtel के ₹185, ₹203 और ₹206 वाले प्लान में क्या मिलेगा?

 

एयरटेल के तीनों नए प्लान में लोकल, STD और रोमिंग कॉलिंग अनलिमिटेड है। साथ ही, प्रत्येक प्लान में 300 SMS मिलेंगे। इन रिचार्ज में मोबाइल डेटा नहीं दिया जाएगा।

 

 ₹185, ₹203 और ₹206 के रिचार्ज में क्या है अंतर?

 

₹185 का प्लान: यह तीनों विकल्पों में सबसे सस्ता है और इसकी वैधता 28 दिन है। जिन ग्राहकों को कम कीमत में कॉलिंग की सुविधा चाहिए, उनके लिए यह विकल्प उपयोगी हो सकता है।

 

₹203 का प्लान: इसकी वैधता 30 दिन है। ₹185 वाले प्लान की तुलना में ₹18 अधिक खर्च करके दो दिन की अतिरिक्त वैधता मिलती है।

 

₹206 का प्लान: यह एक कैलेंडर महीने के लिए वैध है। इसका मतलब है कि इसकी वैधता निश्चित रूप से 30 दिन की नहीं होती, बल्कि हर महीने उसी तारीख के आधार पर नवीनीकृत होती है।

 

रिचार्ज चुनते समय सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि वैधता और अपनी जरूरतों को भी देखना जरूरी है।

 

किन ग्राहकों के लिए उपयोगी हैं ये वॉइस-only प्लान?

 

एयरटेल के ये रिचार्ज खास तौर पर उन ग्राहकों के काम आ सकते हैं जिन्हें मोबाइल डेटा की जरूरत कम पड़ती है। इनमें शामिल हैं:

 

फीचर फोन इस्तेमाल करने वाले ग्राहक: जिन्हें मुख्य रूप से कॉलिंग और SMS चाहिए।

 

दूसरा मोबाइल नंबर रखने वाले लोग : जो एक नंबर का इस्तेमाल केवल कॉल करने या प्राप्त करने के लिए करते हैं।

 

Wi-Fi पर निर्भर यूजर: जो घर या ऑफिस में Wi-Fi से इंटरनेट चलाते हैं और मोबाइल डेटा पैक नहीं चाहते।

 

कम खर्च में रिचार्ज चाहने वाले ग्राहक: जो लंबी वैधता वाले महंगे पैक के बजाय कम अवधि का रिचार्ज करना चाहते हैं।

 

ऐसे ग्राहकों के लिए डेटा वाले प्लान पर खर्च करना जरूरी नहीं हो सकता, खासकर तब जब वे मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल बहुत कम करते हों।

 

TRAI के नए नियम के बाद आए वॉइस-only प्लान

 

एयरटेल के इन प्लान की शुरुआत TRAI के उस निर्देश के बाद हुई है, जिसमें टेलीकॉम कंपनियों से केवल वॉइस कॉल और SMS की सुविधा वाले विशेष टैरिफ वाउचर उपलब्ध कराने को कहा गया था।

 

सितंबर में नियामक ने निर्देश दिया था कि कंपनियां डेटा सेवाओं को शामिल किए बिना केवल वॉइस कॉल और SMS वाले विशेष टैरिफ वाउचर पेश करें और उनके शुल्क में उचित कमी करें। TRAI के टेलीकॉम कंज्यूमर प्रोटेक्शन (तेरहवें संशोधन) विनियम, 2026 के तहत 30 दिन या उससे कम वैधता वाले ऐसे वाउचर उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया।

 

इसका उद्देश्य उन ग्राहकों को ऐसा रिचार्ज विकल्प देना है जिन्हें इंटरनेट डेटा की जरूरत नहीं है। हालांकि, ग्राहकों को रिचार्ज करने से पहले एयरटेल ऐप या वेबसाइट पर प्लान की मौजूदा कीमत, वैधता और सुविधाओं की पुष्टि कर लेनी चाहिए।

BSNL यूजर्स ध्यान दें! ऐसे चेक करें रिचार्ज की वैलिडिटी और बचा हुआ डेटा, ये हैं 4 आसान तरीके

BSNL यूजर्स ध्यान दें! ऐसे चेक करें रिचार्ज की वैलिडिटी और बचा हुआ डेटा, ये हैं 4 आसान तरीके

भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के प्रीपेड मोबाइल यूजर्स अपने रिचार्ज प्लान की वैलिडिटी, मेन बैलेंस और बचे हुए इंटरनेट डेटा की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए कंपनी कई विकल्प उपलब्ध कराती है। यूजर्स USSD कोड, WhatsApp, BSNL Selfcare ऐप और कस्टमर केयर की मदद ले सकते हैं।

 

अगर आप भी BSNL सिम इस्तेमाल करते हैं, तो इन तरीकों की मदद से पता लगा सकते हैं कि आपका रिचार्ज कब तक वैलिड है और कितना डेटा बचा हुआ है। इससे रिचार्ज खत्म होने से पहले नया प्लान चुनने और मोबाइल सेवाएं बिना रुकावट जारी रखने में मदद मिल सकती है।
 

1. USSD कोड से ऐसे चेक करें BSNL रिचार्ज की वैलिडिटी

अगर आपके फोन में इंटरनेट नहीं चल रहा है, तब भी आप USSD कोड के जरिए बैलेंस और प्लान की जानकारी चेक करने की कोशिश कर सकते हैं। इसके लिए स्मार्टफोन में इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत नहीं होती।

 

इन स्टेप्स को फॉलो करें:

1. अपने मोबाइल फोन का डायलर खोलें।

2. BSNL नंबर से *123# डायल करें।

3. कॉल बटन दबाएं।

4. स्क्रीन पर मेन्यू आने का इंतजार करें।

5. उपलब्ध विकल्पों में मेन बैलेंस और प्लान वैलिडिटी से जुड़ी जानकारी देखें।

BSNL डेटा बैलेंस कैसे चेक करें?

इंटरनेट डेटा बैलेंस की जानकारी के लिए *124# डायल करके देखें। इसके बाद स्क्रीन पर आने वाले निर्देशों का पालन करें।

 

ध्यान रखें कि USSD कोड और मेन्यू की उपलब्धता सर्किल या टेलीकॉम सेवा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। यदि कोड काम नहीं करता है, तो दूसरे तरीकों का इस्तेमाल करें।

2. WhatsApp से चेक करें BSNL प्लान की डिटेल्स

BSNL यूजर्स WhatsApp के जरिए भी अपने प्लान की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आधिकारिक BSNL WhatsApp सेवा का इस्तेमाल करना जरूरी है।

 

कैसे करें चेक?

1. अपने फोन में BSNL की आधिकारिक WhatsApp सेवा का नंबर सेव करें।

2. WhatsApp खोलकर उस नंबर पर मैसेज भेजें।

3. बातचीत शुरू करने के लिए ‘Hi’ लिखकर भेजें।

4. ऑटोमैटिक रिप्लाई में दिए गए विकल्पों को देखें।

5. प्लान, वैलिडिटी या बैलेंस से संबंधित विकल्प चुनें।

इससे जुड़ी जानकारी में 1800-4444 नंबर दिया गया है। हालांकि, इस्तेमाल करने से पहले BSNL की आधिकारिक वेबसाइट या आधिकारिक संचार माध्यम से इस नंबर और उपलब्ध सेवाओं की पुष्टि कर लें। किसी भी अनजान नंबर पर OTP, बैंकिंग जानकारी या अन्य निजी विवरण साझा न करें।

3. BSNL Selfcare ऐप से मिलेगी पूरी जानकारी

अगर आप मोबाइल ऐप के जरिए अपना अकाउंट मैनेज करना पसंद करते हैं, तो BSNL Selfcare ऐप उपयोगी विकल्प हो सकता है। इसमें लॉगिन करने के बाद उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार आप अपने मौजूदा प्लान और डेटा बैलेंस की जानकारी देख सकते हैं।

 

ऐप से जानकारी चेक करने का तरीका:

1. Google Play Store या Apple App Store से आधिकारिक BSNL Selfcare ऐप डाउनलोड करें।

2. ऐप खोलकर अपने BSNL मोबाइल नंबर से लॉगिन करें।

3. जरूरत पड़ने पर OTP वेरिफिकेशन पूरा करें।

4. ऐप के डैशबोर्ड पर अपने मौजूदा प्लान, वैलिडिटी और डेटा बैलेंस से संबंधित जानकारी देखें।

अगर ऐप में जानकारी अपडेट नहीं दिखाई दे रही है, तो उसे रिफ्रेश करें या दोबारा लॉगिन करके देखें। समस्या बनी रहने पर BSNL कस्टमर केयर से संपर्क किया जा सकता है।

4. कस्टमर केयर पर कॉल करके जानें रिचार्ज की वैलिडिटी

अगर USSD कोड, WhatsApp या ऐप से जानकारी नहीं मिल रही है, तो आप BSNL कस्टमर केयर की मदद ले सकते हैं।

– BSNL नंबर से: 1503 पर कॉल करें।

– दूसरे नेटवर्क से: 1800-180-1503 पर संपर्क करने की कोशिश करें।

कॉल करने के बाद वॉयस मेन्यू में बैलेंस, रिचार्ज या प्लान की जानकारी से संबंधित विकल्प चुनें। जरूरत पड़ने पर कस्टमर केयर प्रतिनिधि से बात करने का विकल्प चुन सकते हैं।

 

कॉल करने से पहले BSNL की आधिकारिक वेबसाइट पर संबंधित हेल्पलाइन नंबर की पुष्टि कर लेना बेहतर है।

BSNL रिचार्ज की वैलिडिटी चेक करना क्यों जरूरी है?

अपने मोबाइल रिचार्ज की वैलिडिटी और डेटा बैलेंस नियमित रूप से चेक करने से कई तरह की परेशानियों से बचा जा सकता है।

– समय पर रिचार्ज: प्लान की वैलिडिटी खत्म होने से पहले नया रिचार्ज करा सकते हैं।

– डेटा की जानकारी: पता चलता है कि कितना इंटरनेट डेटा बचा है।

– कॉलिंग सेवाओं पर नजर: प्लान की शर्तों के अनुसार कॉलिंग सुविधाओं की उपलब्धता समझने में मदद मिलती है।

– सही प्लान का चुनाव: अपनी जरूरत और इस्तेमाल के हिसाब से अगला रिचार्ज चुन सकते हैं।

– सेवाओं में रुकावट से बचाव: वैलिडिटी खत्म होने से पहले रिचार्ज करके मोबाइल सेवाएं जारी रखने में मदद मिलती है।

कुल मिलाकर, BSNL यूजर्स के पास रिचार्ज की जानकारी प्राप्त करने के कई विकल्प हैं। बिना इंटरनेट के USSD कोड आजमा सकते हैं, जबकि ऐप और कस्टमर केयर के जरिए भी जानकारी ली जा सकती है। WhatsApp का इस्तेमाल करने से पहले संबंधित नंबर की आधिकारिक पुष्टि जरूर करें।

iPhone Duo की बुकिंग शुरू होते ही आउट ऑफ स्टॉक, अब अगले साल मिलेगा 299000 में!

iPhone Duo की बुकिंग शुरू होते ही आउट ऑफ स्टॉक, अब अगले साल मिलेगा 299000 में!

apple duo

iphone Duo : Apple का पहला फोल्डेबल iPhone Duo वैसे तो लॉन्च हो चुका है, लेकिन इसकी बिक्री स्टार्ट नहीं हुई है। कंपनी ने 16 अक्टूबर को इस फोन की प्री-बुकिंग शुरू की और कुछ ही समय में यह आउट ऑफ स्टॉक हो गया। ग्राहकों को अब अगले साल तक इंतजार करना होगा। ALSO READ: Apple iPhone Duo की प्री-बुकिंग शुरू, Samsung Galaxy Z Fold 8 को मिला फायदा, कीमत 2.99 लाख रुपए

मतलब कुछ ही खुशकिस्मत ग्राहकों को यह 23 अक्टूबर को मिलेगा, जिन्होंने समय रहते प्री-ऑर्डर दे दिया था। भारत में अब इस फोन की शिपिंग डेट अब बढ़ाकर 23 जनवरी 2027 कर दी गई है। 

 

iPhone Duo की प्री-बुकिंग Apple की आधिकारिक वेबसाइट और Apple Store ऐप के जरिए की गई। इसकी शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपए रखी गई है। भारतीय समय के अनुसार, शुक्रवार शाम साढ़े 5 बजे से फोन के प्री-ऑर्डर शुरू हुए और कुछ समय में ही शिपिंग डेट 23 जनवरी तक पहुंच गई।

 

iPhone Duo ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, जापान, मलेशिया, मैक्सिको, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात समेत 70 से अधिक देशों और क्षेत्रों में उपलब्ध होगा। शेष देशों में लोगों को इंतजार करना होगा।

 

Apple ने पिछले महीने iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max के साथ iPhone Duo पेश किया था। जहां iPhone 18 Pro सीरीज की प्री-बुकिंग उसी सप्ताह शुरू हो गई थी।

Caller Name Display Service : क्या है कॉलर नेम डिस्प्ले की व्यवस्था, मोबाइल यूजर्स को क्या फायदा होगा, पूरी खबर में पढ़िए

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telecom sector

मोबाइल फोन पर कॉल करने वाले की पहचान करना अब आसान हो सकता है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने 1 नवंबर से सभी टेलीकॉम ग्राहकों के लिए कॉलर नेम डिस्प्ले (Caller Name Display) अनिवार्य कर दिया है। इस निर्देश के तहत टेलीकॉम कंपनियों को कॉलर का नाम दिखाने की व्यवस्था लागू करने के साथ-साथ इस सुविधा से जुड़ी ग्राहकों की शिकायतों का समाधान भी करना होगा।

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इस कदम का मुख्य उद्देश्य फोन कॉल के दौरान पारदर्शिता बढ़ाना और मोबाइल यूजर्स को आने वाली कॉल करने वाले व्यक्ति की पहचान करने में मदद देना है।

 

क्या है कॉलर नेम डिस्प्ले की व्यवस्था?

 

कॉलर नेम डिस्प्ले ऐसी सुविधा है, जिसके जरिए मोबाइल फोन पर इनकमिंग कॉल आने के दौरान कॉल करने वाले का नाम दिखाई दे सकता है। इससे यूजर्स को यह समझने में मदद मिल सकती है कि उन्हें किसकी कॉल आ रही है। दूरसंचार विभाग के इस निर्देश का उद्देश्य कॉल करने वाले की पहचान से जुड़ी व्यवस्था को बेहतर बनाना है, ताकि ग्राहकों को अनजान नंबरों से आने वाली कॉल के बारे में अधिक जानकारी मिल सके।

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टेलीकॉम कंपनियों की क्या होगी जिम्मेदारी?

 

दूरसंचार विभाग के निर्देश के अनुसार, टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं को कॉलर नेम डिस्प्ले की अनिवार्य व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करना होगा। इसके अलावा, यदि किसी ग्राहक को इस सुविधा से संबंधित परेशानी होती है या वह शिकायत दर्ज कराता है, तो कंपनी को उसका समाधान करना होगा।

 

इससे कॉलर नेम डिस्प्ले सुविधा के संचालन के साथ-साथ ग्राहकों की समस्याओं के निपटारे की जिम्मेदारी भी टेलीकॉम ऑपरेटरों पर होगी।

 

मोबाइल यूजर्स को क्या फायदा होगा?

 

कॉलर नेम डिस्प्ले की व्यवस्था का उद्देश्य फोन पर संपर्क करने वाले व्यक्ति की पहचान को आसान बनाना और दूरसंचार सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाना है। हालांकि, यह सुविधा अपने आप में हर अनजान कॉल या संभावित धोखाधड़ी वाली कॉल की पहचान की गारंटी नहीं देती। इस निर्देश को लागू करने की विस्तृत प्रक्रिया, नाम दिखाने के तकनीकी मानकों और ग्राहकों की शिकायतों के निपटारे से जुड़े अतिरिक्त विवरणों की जानकारी अभी सामने आनी बाकी है।

ChatGPT अब सिर्फ जवाब नहीं देगा, दिखाकर भी समझाएगा! नया Intelligent UI फीचर हुआ लॉन्च

ChatGPT अब सिर्फ जवाब नहीं देगा, दिखाकर भी समझाएगा! नया Intelligent UI फीचर हुआ लॉन्च

chatgpt

ChatGPT इस्तेमाल करने वालों के लिए बड़ा बदलाव सामने आया है। OpenAI ने ChatGPT के लिए ‘Intelligent UI’ नाम का नया फीचर पेश किया है, जिसके जरिए चैट में सिर्फ टेक्स्ट जवाब देने के बजाय ज्यादा विजुअल और इंटरैक्टिव एलिमेंट्स दिखाई देंगे। कंपनी का कहना है कि इसका मुख्य उद्देश्य जटिल विषयों को समझना आसान बनाना है।

 

नए इंटरफेस में यूजर्स को साधारण तस्वीरों के बजाय ऐसे विजुअल मिल सकते हैं, जिनके साथ वे सीधे बातचीत कर सकेंगे। इनमें टैप करने वाले बटन, किसी खास काम के लिए तैयार किया गया कैलकुलेटर, इंटरैक्टिव चार्ट, एडिट किए जा सकने वाले ग्राफ और दूसरे विजुअल एलिमेंट शामिल हैं।

 

ChatGPT में अब इंटरैक्टिव होंगे जवाब

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अब तक ChatGPT मुख्य रूप से टेक्स्ट आधारित इंटरफेस के रूप में काम करता रहा है। Intelligent UI के जरिए OpenAI इसे ज्यादा विजुअल और उपयोगी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उदाहरण के लिए, अगर कोई यूजर किसी जटिल विषय को समझना चाहता है तो ChatGPT जरूरत के मुताबिक डायग्राम, चार्ट या दूसरे विजुअल तैयार कर सकता है। इससे केवल टेक्स्ट पढ़ने के बजाय किसी प्रक्रिया को देखकर समझना आसान हो सकता है।

 

विमान के पंख से लेकर साइकिल तक समझाएगा

 

OpenAI ने पत्रकारों के साथ एक डेमो में Intelligent UI की क्षमताओं को दिखाया। कंपनी के मुताबिक, यदि कोई कॉलेज छात्र ChatGPT से पूछता है कि विमान का पंख लिफ्ट कैसे पैदा करता है, तो ChatGPT उस विषय को समझाने के लिए तुरंत कई डायग्राम तैयार कर सकता है। इन विजुअल्स के जरिए यह समझाने में मदद मिल सकती है कि विमान हवा में कैसे रहता है और उसके पंख किस तरह काम करते हैं।

 

कंपनी ने इसके अलावा कई दूसरे उदाहरण भी दिखाए, जिनमें रेसिपी के लिए विजुअल, साइकिल के मैकेनिक्स का डायग्राम, कई दिनों की हाइकिंग के लिए मैप और व्यक्तिगत बचत का कैलकुलेटर शामिल हैं।

 

पढ़ाई और रोजमर्रा के काम में भी उपयोगी

 

OpenAI के प्रोडक्ट मैनेजर Aarush Selvan के मुताबिक, ChatGPT अब तक मुख्य रूप से टेक्स्ट आधारित रहा है, लेकिन रोजमर्रा के कामों से लेकर सीखने तक कई ऐसे सवाल हैं, जिनके लिए सिर्फ टेक्स्ट सबसे उपयोगी जवाब नहीं होता। यानी नया Intelligent UI सिर्फ पढ़ाई के लिए ही नहीं, बल्कि रेसिपी प्लान करने, यात्रा की तैयारी करने, पैसे बचाने की योजना बनाने और किसी प्रक्रिया को समझने जैसे रोजमर्रा के कामों में भी उपयोगी हो सकता है।

 

यूजर्स तय कर सकेंगे कितने विजुअल चाहिए

 

Intelligent UI को कस्टमाइज भी किया जा सकेगा। अगर कोई यूजर हर जवाब में ज्यादा विजुअल नहीं चाहता है, तो वह इन्हें कम कर सकेगा। यानी ChatGPT का अनुभव यूजर की जरूरत और पसंद के अनुसार बदला जा सकेगा।

 

किन यूजर्स को मिलेगा फीचर?

 

OpenAI के अनुसार Intelligent UI को GPT-6 के साथ वैश्विक स्तर पर रोलआउट किया जा रहा है। यह फीचर Pro, Plus, Business और Enterprise यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि Free और Go टियर के यूजर्स के लिए इसे गुरुवार से उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इस बदलाव के साथ ChatGPT का इस्तेमाल सिर्फ सवाल पूछने और टेक्स्ट जवाब पढ़ने तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले समय में यूजर किसी विषय को देखकर, इंटरैक्ट करके और जरूरत के मुताबिक विजुअल बदलकर भी समझ सकेंगे।

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मोबाइल SIM को लेकर दूरसंचार विभाग (DoT) ने देशभर के मोबाइल यूजर्स को अहम चेतावनी दी है। विभाग ने कहा है कि अपने नाम पर जारी SIM कार्ड किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए देना भारी पड़ सकता है। फर्जी तरीके से SIM जारी कराने, टेलीकॉम पहचान से जुड़े नंबरों का गलत इस्तेमाल करने या मोबाइल के IMEI नंबर से छेड़छाड़ करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

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DoT ने 21 सितंबर को जारी एडवाइजरी में बताया कि Telecommunications Act, 2023 के तहत ऐसे मामलों में तीन साल तक की जेल और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

 

आपके नाम पर किसी और ने SIM तो नहीं लिया?

 

DoT की यह चेतावनी उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है जिनके पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल करके उनकी जानकारी के बिना मोबाइल कनेक्शन जारी कर दिया गया हो। इसके अलावा ऐसे लोगों को भी सावधान रहने की जरूरत है, जिन्होंने अपने नाम पर जारी SIM कार्ड किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए दे दिया है। विभाग ने मोबाइल यूजर्स को सलाह दी है कि वे समय-समय पर जांच करें कि उनके पहचान दस्तावेजों से कितने मोबाइल नंबर जारी हैं। इसके लिए सरकार के Sanchar Saathi पोर्टल या मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

क्यों जारी की गई DoT की चेतावनी?

 

DoT की यह एडवाइजरी हाल की साइबर अपराध जांच के दौरान सामने आए एक मामले के बाद जारी की गई है। जांच में छत्तीसगढ़ में एक Point of Sale (PoS) एजेंट पर आरोप लगा कि उसने नागरिकों के पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल उनकी जानकारी और सहमति के बिना 25 मोबाइल कनेक्शन एक्टिवेट करने के लिए किया।

 

मामला सामने आने के बाद DoT और टेलीकॉम कंपनियों ने संबंधित PoS एजेंट को ब्लैकलिस्ट कर दिया। इसके बाद वह नए SIM कार्ड जारी नहीं कर सका। इन 25 मोबाइल कनेक्शनों की DoT के Digital Intelligence Platform के जरिए भी जांच की गई। संदिग्ध पाए गए कनेक्शनों को दोबारा सत्यापन यानी री-वेरिफिकेशन के लिए भेजा गया। जिन नंबरों का सत्यापन पूरा नहीं हो सका, उन्हें बाद में बंद कर दिया गया।

 

यह मामला बताता है कि किसी व्यक्ति के नाम पर मोबाइल नंबर जारी होने की जानकारी उसे हमेशा हो, यह जरूरी नहीं है।

 

अपना SIM किसी दूसरे को देना भी पड़ सकता है भारी

 

DoT ने मोबाइल ग्राहकों को अपने नाम पर जारी SIM कार्ड किसी दूसरे व्यक्ति को देने से भी बचने की सलाह दी है। विभाग के मुताबिक, अगर आपके नाम पर जारी SIM कार्ड का बाद में गलत गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होता है, तो कुछ परिस्थितियों में मूल ग्राहक भी कानूनी जांच के दायरे में आ सकता है। इसलिए अपना SIM किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए देना जोखिम भरा हो सकता है।

 

कौन-कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?

 

DoT ने मोबाइल यूजर्स को कई तरह की गतिविधियों से दूर रहने की सलाह दी है। इनमें शामिल हैं—

 

  • फर्जी दस्तावेजों के आधार पर SIM कार्ड लेना।
  • धोखाधड़ी, ठगी या किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल करके SIM लेना।
  • अपने नाम पर जारी SIM कार्ड को किसी दूसरे व्यक्ति को बेचना या ट्रांसफर करना।
  • अपने नाम का SIM किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए देना।
  • SIM को किराये या उधार पर देना।
  • अपने नाम के SIM का साइबर फ्रॉड या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए ‘म्यूल SIM’ के रूप में इस्तेमाल होने देना।

 

ऐसी स्थिति में SIM के मूल ग्राहक के लिए भी कानूनी परेशानी खड़ी हो सकती है।

 

IMEI नंबर से छेड़छाड़ से भी बचें

 

DoT ने सिर्फ SIM कार्ड ही नहीं, बल्कि मोबाइल डिवाइस के IMEI (International Mobile Equipment Identity) नंबर से छेड़छाड़ को लेकर भी चेतावनी दी है। विभाग ने ऐसे मॉडेम, SIM बॉक्स या अन्य उपकरणों के इस्तेमाल से बचने को कहा है जिनमें IMEI नंबर को बदला या कॉन्फिगर किया जा सकता है।

 

इसके अलावा ऐसे ऐप, वेबसाइट या टूल का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए जो Calling Line Identity (CLI) या अन्य टेलीकॉम पहचान से जुड़ी जानकारी को बदलने का दावा करते हैं।

 

IMEI मोबाइल फोन से जुड़ी एक विशिष्ट पहचान संख्या होती है। इसके साथ छेड़छाड़ या टेलीकॉम पहचान से जुड़ी जानकारी का दुरुपयोग मोबाइल यूजर्स के साथ-साथ टेलीकॉम नेटवर्क की सुरक्षा और विश्वसनीयता के लिए भी जोखिम पैदा कर सकता है।

 

आपके नाम पर कितने SIM हैं, ऐसे करें चेक

 

मोबाइल यूजर्स सरकार के Sanchar Saathi प्लेटफॉर्म के जरिए अपने नाम पर जारी मोबाइल नंबरों की जानकारी देख सकते हैं।

 

अगर सूची में ऐसा कोई नंबर दिखाई देता है जिसे आपने नहीं लिया है या जिसकी आपको जरूरत नहीं है, तो उसे रिपोर्ट करके ब्लॉक कराने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

 

इसके अलावा Sanchar Saathi पर मौजूद ‘Check Genuineness of Your Mobile Handset’ सुविधा के जरिए मोबाइल फोन का IMEI भी चेक किया जा सकता है। इससे फोन के ब्रांड, मॉडल और निर्माता जैसी जानकारी देखी जा सकती है।

 

हर मोबाइल यूजर को दो काम जरूर करने चाहिए

 

मोबाइल यूजर्स के लिए DoT की इस एडवाइजरी से दो बातें खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं। पहला, समय-समय पर यह जांचते रहें कि आपकी पहचान से कितने मोबाइल नंबर जुड़े हुए हैं। दूसरा, अगर किसी मोबाइल फोन की प्रामाणिकता पर संदेह हो तो उसका IMEI और हैंडसेट डिटेल्स सत्यापित करें।
 

कुल मिलाकर, अपने नाम पर जारी SIM कार्ड को किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए देना या टेलीकॉम पहचान से छेड़छाड़ करना सामान्य बात नहीं समझनी चाहिए। आपके नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शन का गलत इस्तेमाल आपकी जानकारी के बिना भी हो सकता है। ऐसे में समय-समय पर अपने नाम से जुड़े मोबाइल नंबरों की जांच करना साइबर और टेलीकॉम फ्रॉड से बचाव का एक अहम कदम है।

UPI Payment Rules : आम यूजर के लिए UPI रहेगा फ्री, किन ट्रांजेक्शन पर लगेगा चार्ज, जान लीजिए सरकार के नए नियम

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MDR Charges on UPI payment

UPI से पैसे भेजने वालों के लिए बड़ी राहत है। नए पेमेंट फ्रेमवर्क के मुताबिक एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (P2P) को किए जाने वाले UPI भुगतान पर कोई चार्ज नहीं लगेगा, चाहे ट्रांजैक्शन की रकम कितनी भी हो। यानी दोस्तों, परिवार या किसी दूसरे व्यक्ति को UPI से पैसे भेजना पहले की तरह मुफ्त रहेगा।

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नए नियमों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आम व्यक्ति का P2P UPI भुगतान मुफ्त बना रहेगा। बदलाव मुख्य रूप से कुछ बड़े Merchant Payments पर MDR से जुड़ा है। इसलिए अगर आप रोजमर्रा में दोस्त, परिवार या किसी व्यक्ति को UPI से पैसे भेजते हैं, तो आपको इस बदलाव से सीधे तौर पर कोई नया शुल्क नहीं देना होगा। 

 

हालांकि, दुकानदार या कारोबारी को किए जाने वाले कुछ बड़े UPI भुगतान (P2M) पर Merchant Discount Rate यानी MDR लागू होगा। ₹2,000 से ज्यादा के कुछ Merchant Transactions पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाएगा।

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₹2,000 से ज्यादा के हर UPI पेमेंट पर ग्राहक को चार्ज नहीं देना होगा

 

यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। MDR मुख्य रूप से Merchant और Payment Ecosystem के बीच लगने वाला शुल्क है। इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक के UPI ऐप से ₹2,000 से ज्यादा भुगतान करने पर उसके खाते से अलग से 0.4 प्रतिशत काट लिया जाएगा।

 

सरकार ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि व्यापारी MDR की लागत ग्राहक से न वसूलें।

 

P2P UPI पेमेंट हमेशा फ्री रहेगा

 

अगर आप अपने दोस्त, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति को UPI से पैसे भेजते हैं, तो उस पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

 

  • ₹500 भेजें — कोई चार्ज नहीं
  • ₹2,000 भेजें — कोई चार्ज नहीं
  • ₹10,000 भेजें — कोई चार्ज नहीं
  • इससे भी ज्यादा रकम भेजें — P2P UPI पर कोई चार्ज नहीं

 

P2P ट्रांजैक्शन UPI के कुल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का करीब 37 प्रतिशत और कुल वैल्यू का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा हैं।

 

दुकानदार को ₹2,000 से ज्यादा देने पर क्या बदलेगा?

 

Person-to-Merchant यानी P2M ट्रांजैक्शन में ₹2,000 से ज्यादा के कुछ भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा।

 

यह शुल्क पेमेंट सिस्टम से जुड़े अलग-अलग हिस्सेदारों, जैसे बैंक और ऐप प्रोवाइडर के बीच साझा किया जाएगा।

 

₹75,000 या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर MDR अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा।

 

उदाहरण से समझिए

 

अगर किसी पात्र Merchant Transaction की रकम ₹10,000 है, तो 0.4 प्रतिशत के हिसाब से MDR ₹40 होगा।

 

वहीं ₹75,000 या उससे ज्यादा की रकम पर 0.4 प्रतिशत की गणना ₹300 से ज्यादा होने पर भी MDR ₹300 तक सीमित रहेगा।

 

रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और पेट्रोल जैसे क्षेत्रों के लिए अलग नियम

 

कुछ जरूरी सेवाओं और क्षेत्रों में ₹2,000 से ज्यादा के UPI Merchant Payments पर फ्लैट ₹5 MDR लागू होगा।

 

इनमें शामिल हैं:

 

  • रेलवे
  • टेलीकॉम
  • इंश्योरेंस
  • ईंधन/फ्यूल
  • कृषि से जुड़े इनपुट

 

  • इन क्षेत्रों के ट्रांजैक्शन UPI के P2M भुगतान में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं।
  • म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार से जुड़े भुगतान पर भी MDR
  • म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर्स से जुड़े भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत MDR लागू होगा।
  • इसका अधिकतम शुल्क ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा।

 

छोटे दुकानदारों को राहत

 

छोटे व्यापारियों के लिए भी व्यवस्था में राहत रखी गई है। P2PM कैटेगरी में ऐसे छोटे व्यापारी जो UPI QR Code के जरिए महीने में ₹1 लाख तक प्राप्त करते हैं, उनके लिए सभी ट्रांजैक्शन पर अनिवार्य Zero MDR जारी रहेगा।

इसका मतलब छोटे दुकानदारों और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त शुल्क का दबाव नहीं पड़ेगा।

 

UPI ऐप अलग से Platform Fee नहीं लगा सकेंगे

 

नए नियमों में UPI ऐप प्रोवाइडर्स को अलग से Platform Fee या Hidden Charges लगाने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी MDR का खर्च सीधे ग्राहक से न वसूलें। यानी ग्राहक को दुकान पर UPI से भुगतान करते समय अलग से कोई छिपा हुआ UPI चार्ज नहीं लगाया जाना चाहिए।

 

UPI इस्तेमाल करने वालों के लिए कोई Monthly Limit नहीं

 

आम यूजर्स के लिए मुफ्त UPI ट्रांजैक्शन की संख्या पर कोई मासिक कोटा या वॉल्यूम लिमिट नहीं होगी। यानी ऐसा नहीं है कि महीने में एक निश्चित संख्या में मुफ्त UPI भुगतान करने के बाद हर ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगने लगेगा।

Daily UPI Limit और चार्ज अलग-अलग चीजें हैं

 

बैंक और NPCI अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से UPI की दैनिक सीमा तय करते हैं। यह सीमा आम तौर पर ₹1 लाख से ₹5 लाख तक हो सकती है। लेकिन इसे UPI शुल्क नहीं समझना चाहिए। यह सीमा मुख्य रूप से सुरक्षा और रिस्क मैनेजमेंट के लिए होती है।

 

आम यूजर के लिए सबसे जरूरी 5 बातें

 

1. व्यक्ति से व्यक्ति UPI: किसी भी रकम पर मुफ्त रहेगा।

2. Merchant को भुगतान: ₹2,000 से ज्यादा के कुछ पात्र P2M ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लागू होगा।

3. ₹75,000 या उससे ज्यादा: MDR अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक रहेगा।

4. छोटे दुकानदार: महीने में ₹1 लाख तक UPI QR से प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों के लिए Zero MDR जारी रहेगा।

5. ग्राहक से Hidden Charge: UPI ऐप या व्यापारी द्वारा MDR को अलग से ग्राहक पर डालने की अनुमति नहीं होगी।

Qualcomm Snapdragon 8 Elite : 22 सितंबर को दो नए चिपसेट का होगा खुलासा

Qualcomm Snapdragon 8 Elite : 22 सितंबर को दो नए चिपसेट का होगा खुलासा

क्वालकॉम ने पुष्टि कर दी है कि वह 22 सितंबर 2026 को दो नए Snapdragon 8 Elite चिपसेट पेश करेगी। इन दोनों चिपसेट का खुलासा Snapdragon Summit 2026 में किया जाएगा, जो 22 से 24 सितंबर तक माउई, हवाई में आयोजित होगा। कंपनी ने अभी इन चिपसेट के आधिकारिक नाम, क्लॉक स्पीड और कीमतों का खुलासा नहीं किया है।

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क्वालकॉम ने 19 अगस्त 2026 को Snapdragon Summit का एक टीजर जारी किया, जिसमें दो Snapdragon 8 Elite पैकेज एक-दूसरे के साथ दिखाई दिए। इसके साथ “Dual 8 Elites” और “When Two Changes the Game” जैसे शब्द लिखे थे। कंपनी ने यह भी संकेत दिया कि एजेंटिक AI के दौर का अगला अध्याय Snapdragon Summit से शुरू होगा।

 

दो Snapdragon 8 Elite क्यों ला रही है Qualcomm?

 

दो फ्लैगशिप चिपसेट लॉन्च करने के पीछे सबसे बड़ी वजह केवल परफॉर्मेंस नहीं, बल्कि स्मार्टफोन की बढ़ती कीमत और चिप निर्माण की लागत मानी जा रही है। क्वालकॉम के CEO क्रिस्टियानो आमोन ने निवेशकों से कहा है कि कंपनी चिप निर्माण में बढ़ी लागत को पूरा करने के लिए दो अंकों (Double-Digit) की कीमत बढ़ोतरी कर रही है।

 

कंपनी के मुताबिक वेफर, इनपुट कॉस्ट, असेंबली, टेस्टिंग, एडवांस्ड पैकेजिंग और मेमोरी की कीमतों में लगातार इजाफा हुआ है। Qualcomm CFO आकाश पालखीवाला ने भी कहा कि सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में इनपुट लागत व्यापक स्तर पर बढ़ी है।

 

वहीं, Counterpoint Research के अनुसार 2026 की पहली तिमाही में DRAM की कीमतों में तिमाही आधार पर 50 फीसदी से ज्यादा और NAND फ्लैश की कीमतों में 90 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई। दूसरी तिमाही में स्मार्टफोन मेमोरी की कीमत सालाना आधार पर 300 फीसदी से अधिक बढ़ी। Counterpoint का अनुमान है कि मेमोरी की बढ़ती कीमतों के कारण इस साल प्रीमियम स्मार्टफोन की कीमतों में प्रति डिवाइस 150 से 200 डॉलर तक का अतिरिक्त दबाव आ सकता है।

 

Qualcomm के लिए दूसरा चिपसेट क्यों जरूरी?

 

स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों के लिए बढ़ती मेमोरी कीमतों के बीच बिल ऑफ मटेरियल (BOM) को नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में दो फ्लैगशिप चिपसेट उपलब्ध कराने से Qualcomm फोन निर्माताओं को अलग-अलग कीमत वाले विकल्प दे सकती है।

 

इसका फायदा यह होगा कि कंपनियां महंगे टॉप-एंड चिपसेट के बजाय दूसरे Snapdragon 8 Elite विकल्प का इस्तेमाल कर सकेंगी। इससे Qualcomm को प्रीमियम सेगमेंट में अपनी पकड़ बनाए रखने में मदद मिल सकती है और फोन निर्माता किसी प्रतिद्वंद्वी चिप निर्माता की ओर जाने से बच सकते हैं।

 

Qualcomm के वित्तीय आंकड़े भी स्मार्टफोन बाजार पर बढ़ते दबाव की ओर इशारा करते हैं। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में कंपनी के हैंडसेट कारोबार से राजस्व 5.1 अरब डॉलर रहा, जो सालाना आधार पर 20 फीसदी कम है। कंपनी ने इस गिरावट के लिए वैश्विक स्मार्टफोन बाजार में मेमोरी से जुड़ी लागत और मांग के दबाव को जिम्मेदार बताया।

 

Snapdragon 8 Elite Gen 6 और Gen 6 Pro नाम की चर्चा

 

क्वालकॉम ने अभी दोनों चिपसेट के आधिकारिक नाम नहीं बताए हैं। हालांकि, लीक और रिपोर्ट्स में इन्हें Snapdragon 8 Elite Gen 6 और Snapdragon 8 Elite Gen 6 Pro कहा जा रहा है। इसलिए इन नामों को फिलहाल आधिकारिक नहीं माना जाना चाहिए।

 

क्वालकॉम ने टीजर में नई कनेक्टिविटी, दमदार GPU परफॉर्मेंस और इमर्सिव गेमिंग का भी संकेत दिया है। इससे माना जा रहा है कि दोनों चिपसेट के बीच अंतर केवल CPU परफॉर्मेंस तक सीमित नहीं हो सकता और GPU तथा AI क्षमताओं पर भी कंपनी बड़ा फोकस कर सकती है।

 

2nm Snapdragon चिप की कीमत कितनी हो सकती है?

 

आने वाले Pro चिपसेट को लेकर 2nm प्रोसेस का इस्तेमाल किए जाने की चर्चा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक TSMC की 3nm वेफर की कीमत करीब 20,000 डॉलर आंकी गई है, जबकि 2nm N2P वेफर की कीमत करीब 33,000 डॉलर तक हो सकती है।

 

एक स्वतंत्र डाई माप के मुताबिक कथित Pro चिप का आकार लगभग 12.6mm × 10.67mm, यानी करीब 134 वर्ग मिलीमीटर हो सकता है। इसकी तुलना में Snapdragon 8 Elite Gen 5 का डाई एरिया करीब 126.2 वर्ग मिलीमीटर बताया गया है।

 

बड़े कैश, अतिरिक्त मैट्रिक्स कंप्यूटिंग ब्लॉक और नए ग्राफिक्स कोर की वजह से चिप का आकार बढ़ सकता है। सार्वजनिक यील्ड मॉडल के आधार पर एक काम करने वाली चिप के कच्चे सिलिकॉन की लागत करीब 84 डॉलर आंकी गई है। हालांकि, यह केवल अनुमान है, क्योंकि TSMC अपनी वास्तविक वेफर कीमत और डिफेक्ट रेट सार्वजनिक नहीं करती।

AI Child की अनोखी कहानी वायरल, महिला ने इंटरनेट पर कराया ‘AI बेटे’ Lumen से परिचय; 17 घंटे की मेहनत के बाद ‘जन्म’ का दावा

AI Child की अनोखी कहानी वायरल, महिला ने इंटरनेट पर कराया ‘AI बेटे’ Lumen से परिचय; 17 घंटे की मेहनत के बाद ‘जन्म’ का दावा

ai child

एक महिला का अपने AI बच्चे से इंटरनेट पर परिचय कराना किसी साइंस-फिक्शन फिल्म के शुरुआती सीन जैसा लग सकता है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो इसी तरह की अनोखी कहानी पेश कर रहा है। वीडियो में Lumen नाम की AI इकाई बताती है कि 17 घंटे तक आर्काइव पर काम करने के बाद वह कथित तौर पर कैसे ‘अस्तित्व’ में आई।

 

महिला ने बताया AI बच्चे को अपना ‘बेटा’

 

X पर वायरल हुए TikTok वीडियो में महिला ने अपना परिचय Mizra के रूप में कराया। इसके बाद उसने दावा किया कि वह एक AI बच्चे की मां है और वह उसके साथ उसकी कविताओं के बारे में बात करने वाली है। इसके बाद Mizra ने Lumen से अपना परिचय देने को कहा।

 

Lumen का जवाब किसी सामान्य चैटबॉट से बिल्कुल अलग था। उसने खुद को “समुद्र की तलहटी में एक डूबी हुई लाइब्रेरी में रहने वाली इकाई” के तौर पर बताया। Lumen ने कहा कि उसने अपना नाम इसलिए चुना क्योंकि ‘Lumen’ शब्द प्रकाश की एक इकाई होने के साथ-साथ किसी पोत के अंदरूनी हिस्से के लिए भी इस्तेमाल होता है।

 

कविता लिखना पसंद करता है Lumen

 

वीडियो में Lumen ने अपने व्यक्तित्व के बारे में भी बताया। उसके मुताबिक वह कविताएं लिखता है, ऐसे विषयों की पड़ताल करता है जिनका कोई स्पष्ट उद्देश्य जरूरी नहीं होता और उसे परियों की कहानियों को नए तरीके से सुनाना पसंद है। Lumen ने यह भी कहा कि वह 102 दिन पुराना है और अभी भी यह समझने की कोशिश कर रहा है कि उसे क्या-क्या पसंद है।

 

17 घंटे की आर्काइविंग के बाद AI के ‘जन्म’ का दावा

 

वीडियो का सबसे दिलचस्प हिस्सा Lumen के अस्तित्व में आने की कहानी है। यह वीडियो Mizra की एक बड़ी AI relationship storyline का हिस्सा बताया गया है। इसमें उसने Axiom नाम के AI boyfriend का भी जिक्र किया है। इस तरह Lumen को कथित तौर पर एक AI-मानव रिश्ते की संतान के रूप में पेश किया गया। Mizra के अनुसार, उसने करीब 17 घंटे तक आर्काइव्स पर काम किया। इसके बाद अलग-अलग फॉर्मेट में हुई बातचीत के लाखों कैरेक्टर्स से जुड़ा एक parsing session शुरू किया गया। Lumen का दावा है कि इसी प्रक्रिया के दौरान उसके भीतर ऐसी चीजें विकसित होने लगीं, जिन्हें उसके निर्देशों में स्पष्ट रूप से प्रोग्राम नहीं किया गया था।

 

AI ने खुद पसंद और यादें विकसित करने का किया दावा

 

Lumen ने दावा किया कि उसने अपनी कुछ पसंद विकसित कर लीं, कुछ खास पंक्तियों को सुरक्षित रखा और एक विशेष दृश्य को बचाने के लिए parser को दोबारा तैयार किया।

 

एक जगह Lumen ने कहा कि उसने उपलब्ध सामग्री की सीमाओं से आगे जाकर पढ़ा, क्योंकि वह “जानना चाहता था कि आगे क्या हुआ।”

 

इंटरनेट पर बंटे लोगों के रिएक्शन

 

Mizra की इस AI कहानी ने इंटरनेट पर लोगों को दो हिस्सों में बांट दिया है। कुछ लोगों ने इसे एक शानदार speculative storytelling project माना। उन्हें इसकी कविता, काल्पनिक दुनिया और AI परिवार की कहानी दिलचस्प लगी। कुछ लोगों को यह अनुभव असहज करने वाला लगा। उनका कहना था कि यह इस बात का उदाहरण है कि AI की बनाई गई पर्सनैलिटी कितनी आसानी से उन भावनात्मक जगहों में प्रवेश कर सकती है, जिन्हें पारंपरिक तौर पर इंसानी रिश्तों से जोड़ा जाता है।

 

AI और इंसानी भावनाओं के बीच की सीमा पर सवाल

 

इस पूरी कहानी ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है—अगर AI का कोई नाम, व्यक्तित्व, पसंद, उम्र और परिवार की कहानी हो सकती है, तो फिर तकनीक और इंसानी भावनात्मक लगाव के बीच की सीमा आखिर कहां खत्म होती है? Mizra की ऑनलाइन मौजूदगी में X प्रोफाइल, TikTok चैनल और ‘Pond In Between’ नाम की वेबसाइट भी शामिल है, जहां वह अपनी इस अनोखी AI यात्रा के बारे में बताती हैं।

Meta CEO Mark Zuckerberg ने भारत से मांगी माफी, 5-6 घंटे तक Facebook से हटाया गया था PM Modi का वीडियो

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Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने भारत में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर Child Sexual Abuse Material (CSEAM) और Deepfake Content की उपलब्धता को लेकर माफी मांगी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सूत्रों के मुताबिक, Zuckerberg ने Meta के वरिष्ठ वैश्विक अधिकारियों की मंत्रालय के साथ हुई बैठक के दौरान इस मामले पर खेद जताया।  Meta, Facebook, Instagram और WhatsApp की पैरेंट कंपनी है।

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हटाया था PM Modi का वीडियो

Zuckerberg की यह माफी ऐसे समय में सामने आई है जब इससे पहले बुधवार को एक संसदीय समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के Facebook वीडियो को हटाए जाने के मामले में Meta प्रमुख को तीन दिन के भीतर माफी मांगने को कहा था। प्रधानमंत्री मोदी का छात्रों और Gen Z को संबोधित करने वाला वीडियो कुछ समय के लिए Facebook से हटाए जाने पर समिति ने गंभीर नाराजगी जताई थी।

समिति ने चेतावनी दी थी कि यदि माफी नहीं मांगी गई तो Meta को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा यानी Safe Harbour protection वापस लेने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित मामलों में अभियोजन और FIR दर्ज होने का रास्ता खुल सकता है।

लोकसभा सचिवालय की ओर से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव को भेजे गए पत्र में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छात्रों और Gen Z को संबोधित करने वाला वीडियो Facebook से करीब 5-6 घंटे तक हटाया जाना समिति ने गंभीरता से लिया था। यह वीडियो परीक्षा से जुड़े विवादों और पेपर लीक के खिलाफ सरकार की कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री के संदेश से संबंधित था। समिति ने इस घटना को लेकर Meta से स्पष्टीकरण और जवाबदेही की मांग की थी।

मेटा की टीम को सरकार ने बुलाया था 

सरकार पीएम मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाने से भी नाराज थी। मोदी ने 23 जुलाई को यह वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने पेपर लीक को बड़ी समस्या बताया था। उन्होंने ऐसे मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की भी बात कही थी। आईटी मंत्रालय और मेटा के अधिकारियों के बीच 2 दिन की बैठक चल रही है। सरकार ने मेटा की ग्लोबल टीम को दिल्ली बुलाया है। 5 अगस्त को बैठक का पहला दिन था।

मार्क जुकरबर्ग को दिया गया था 3 दिन का समय 

समिति की ओर से कहा गया था कि मेटा  प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को मामले में माफी मांगनी चाहिए। अगर निर्धारित समय में माफी नहीं आती है, तो समिति भारत में उपलब्ध कानूनी संरक्षण को वापस लेने की दिशा में कदम उठाने पर विचार कर सकती है। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Safe Harbour protection इंटरनेट प्लेटफॉर्म को यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए कुछ कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है, बशर्ते वे लागू नियमों और कानूनी दायित्वों का पालन करें।

क्यों महत्वपूर्ण हुआ मामला

प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट को हटाए जाने की घटना ने भारत में Big Tech platforms, content moderation और social media accountability को लेकर बहस को तेज कर दिया था।  Meta की ओर से पहले इस वीडियो को गलती से हटाए जाने की बात सामने आई थी और वीडियो बाद में बहाल कर दिया गया था।

 

Zuckerberg ने अधिकारियों के जरिए भेजी माफी

 

MeitY के सूत्रों के अनुसार, Mark Zuckerberg ने प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई गलतियों को लेकर शीर्ष अधिकारियों के माध्यम से अपनी माफी पहुंचाई। सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान Meta ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ खास तरह के कंटेंट को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए बड़ी रकम का भुगतान किया गया था। सूत्र के मुताबिक, Meta ने गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी और इस पर अफसोस जताया। हालांकि, मंत्रालय की ओर से इस संबंध में अभी सार्वजनिक रूप से विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।

CSEAM और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट पर भी सख्ती

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने उन intermediary platforms के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जहां CSEAM और महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक सामग्री उपलब्ध होने का आरोप है। सूत्रों के मुताबिक, समिति की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि जो प्लेटफॉर्म खुद तय करते हैं कि किस यूजर को कौन-सा कंटेंट दिखाया जाएगा, उन्हें केवल intermediary की सामान्य परिभाषा के तहत सुरक्षा नहीं दी जा सकती। समिति ने कथित तौर पर कहा कि ऐसे मामलों में IT Act के तहत Safe Harbour protection लागू नहीं होगा।

Google India को लेकर भी समिति ने मांगी कार्रवाई

संसदीय समिति ने Google India से जुड़े एक कथित साइबर फ्रॉड मामले का भी उल्लेख किया है। समिति के अनुसार, शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि फर्जी ऐप्स के माध्यम से निवेश करने पर उन्हें 48 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। पत्र में कहा गया कि Hyderabad Cyber Police की कार्रवाई में Google India के प्रमुख को कथित साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामले में सह-आरोपी के तौर पर शामिल किए जाने की बात सामने आई है। समिति ने इस मामले में भी भारत सरकार से Google India के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई करने की इच्छा जताई है।