रिलायंस फाउंडेशन की बड़ी पहल, 10 लाख ‘साइबर सखी’ तैयार होंगी, महिलाओं को मिलेगा साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण

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रिलायंस फाउंडेशन ने ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से ‘e-SafeHER’ कार्यक्रम की शुरुआत की है। यह एक साइबर सुरक्षा जागरूकता प्रशिक्षण पहल है, जिसे भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाली C-DAC संस्था (‘सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग’) के साथ मिलकर शुरू किया गया है। 

 

इस कार्यक्रम का लक्ष्य अगले तीन वर्षों के भीतर देशभर में 10 लाख महिलाओं को ‘साइबर सखी’ के रूप में तैयार करना है, ताकि वे सुरक्षित और आत्मविश्वास के साथ डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर सकें। मध्य प्रदेश और ओडिशा से कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी, जिसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में विस्तार दिया जाएगा। 

महिलाओं को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक और सक्षम बनाने वाला कार्यक्रम e-SafeHER के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को ऑनलाइन सुरक्षा, डिजिटल लेन-देन और इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग की ट्रेनिंग दी जाएगी। यह पहल खास तौर पर उन महिलाओं पर केंद्रित है, जो तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ रही हैं। रिलायंस फाउंडेशन इस कार्यक्रम को देशभर में स्वयं सहायता समूहों और अपने जमीनी नेटवर्क के जरिए आगे बढ़ाएगा, जबकि C-DAC प्रशिक्षण सामग्री और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगा।

 

इस मौके पर रिलायंस फाउंडेशन की डायरेक्टर ईशा अंबानी ने कहा, “भारत में ग्रामीण महिलाएं पहले से कहीं ज्यादा तेजी से ऑनलाइन आ रही हैं। रिलायंस फाउंडेशन का उद्देश्य सिर्फ डिजिटल पहुंच बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रहने के लिए जरूरी जानकारी और कौशल देना भी है। e-SafeHER के जरिए हम महिलाओं को यह सिखाना चाहते हैं कि वे डिजिटल दुनिया का इस्तेमाल आत्मविश्वास के साथ करें और अपने जीवन और आजीविका को मजबूत बनाएं।”

 

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा, “देश में साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए हम, e-SafeHER जैसी पहल के जरिए दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं तक पहुंच बना रहे हैं। ताकि वे डिजिटल दुनिया में सुरक्षित और सशक्त बन सकें। यह एक ऐसा मॉडल है, जिसे आगे बड़े स्तर पर अपनाया और विस्तार दिया जा सकता है।”

 

रिलायंस फाउंडेशन का कहना है कि यह पहल महिलाओं के डिजिटल सशक्तिकरण के उसके व्यापक प्रयासों का हिस्सा है, जिसके तहत डिजिटल साक्षरता, रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। Edited by : Sudhir Sharma

10,000 से ज्यादा के Online Payment पर 1 घंटे का होल्ड, क्या है RBI ला रहा है 3 फीचर्स

डिजिटल फ्रॉड को रोकने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने कई बड़े बदलाव के सुझाव दिए हैं। इनमें से एक यह है कि ₹10,000 से ज्यादा के डिजिटल पेमेंट्स को लाभार्थी के खाते में जमा होने में 1 घंटे की देरी का नियम लागू किया जाए। अधिकतर डिजिटल ट्रांजैक्शन तुरंत होते हैं, जिससे यूजर को सोचने या गलती सुधारने का मौका नहीं मिलता। 

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हालांकि अभी ये सिर्फ प्रस्तावित हैं, लागू नहीं हुए हैं। इस प्लान में किल स्विच से लेकर पेमेंट होने में एक घंटे वाली देरी शामिल है। इससे अगर गलत ट्रांजेक्शन हो जाता है तो उसे रोकने या कैंसिल करने का अवसर मिल सकता है। देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड को रोकने के लिए RBI ने ये प्रस्ताव रखा है। RBI का मानना है कि जालसाज अक्सर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर जल्दबाजी में पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।  RBI सिर्फ टाइम लिमिट ही नहीं, बल्कि 3 नए फीचर्स भी ला रहा है।

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क्या होगा फायदा 

अभी हम जैसे ही 'Pay' बटन दबाते हैं, पैसा तुरंत दूसरे के खाते में पहुंच जाता है। जालसाज (Scammers) इसी जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। RBI का नया प्रस्ताव कहता है कि अगर आप ₹10,000 से ज्यादा भेज रहे हैं, तो वह पैसा सामने वाले को तुरंत नहीं मिलेगा। उस 1 घंटे के दौरान आप ट्रांजेक्शन को चेक कर सकते हैं। अगर गलती से पेमेंट हुआ है, तो उसे कैंसिल कर सकते हैं। और धोखाधड़ी का अहसास होने पर पेमेंट रोक सकते हैं। Edited by : Sudhir Sharma

Gemma 4: गूगल ने पेश किया अब तक का सबसे शक्तिशाली ओपन AI मॉडल; जानें इसकी खासियतें और इस्तेमाल का तरीका

गूगल ने अपनी अब तक की सबसे सक्षम ओपन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल सीरीज 'Gemma 4' से पर्दा उठा दिया है। इस कदम को दुनिया भर के डेवलपर्स, शोधकर्ताओं और व्यवसायों के लिए शक्तिशाली AI एप्लिकेशन बनाने की राह में एक बड़ी क्रांति के रूप में देखा जा रहा है। 

 

गूगल डीपमाइंड (Google DeepMind) द्वारा विकसित यह मॉडल विशेष रूप से 'एडवांस्ड रीजनिंग' और 'जटिल ऑटोमेटेड वर्कफ़्लो' के लिए तैयार किया गया है। कंपनी के आधिकारिक ब्लॉग के अनुसार इसे अपाचे 2.0 (Apache 2.0) लाइसेंस के तहत जारी किया गया है, जिसका अर्थ है कि कोई भी इसका व्यावसायिक उपयोग, संशोधन और निर्माण पूरी तरह से मुफ्त में कर सकता है। एक्सपर्ट्‍स का कहना है कि व्यावसायिक उपयोग के लिए फ्री लाइसेंस देकर गूगल ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह ओपन-सोर्स AI इकोसिस्टम में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है।

 

क्या है Gemma 4 की खासियत?

 

Gemma 4 को उसी तकनीक और रिसर्च पर बनाया गया है जिस पर गूगल का मुख्य मॉडल Gemini 3 आधारित है। इसके फीचर्स- 
चार अलग-अलग साइज: यह मॉडल मोबाइल फोन से लेकर बड़े सर्वर तक के लिए चार आकारों में उपलब्ध है।  बिना इंटरनेट के काम: इसके छोटे 'एज मॉडल्स' (2 बिलियन और 4 बिलियन पैरामीटर्स) को विशेष रूप से फोन, रास्पबेरी पाई और एनवीडिया जेटसन जैसे डिवाइस पर ऑफलाइन चलाने के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि बैटरी और रैम की बचत हो सके।

 

 बहुभाषी क्षमता: यह 140 से अधिक भाषाओं को सपोर्ट करता है, जिससे यह वैश्विक स्तर पर उपयोगी बन जाता है।

 

स्वायत्त कार्य (Autonomous Action): यह केवल चैटबॉट तक सीमित नहीं है, बल्कि मल्टी-स्टेप प्लानिंग, कोड जनरेशन और ऑडियो-विजुअल प्रोसेसिंग जैसे जटिल काम भी कर सकता है।

 

अब आपके स्मार्टफोन पर चलेगा शक्तिशाली AI

'एंड्रॉयड डेवलपर्स ब्लॉग' के मुताबिक, Gemma 4 की सबसे बड़ी खूबी इसका मोबाइल पर सीधे चलना है। डेवलपर्स आज से ही 'AICore डेवलपर प्रीव्यू' के जरिए इसका उपयोग कर सकते हैं। गूगल ने पुष्टि की है कि Gemma 4 के लिए लिखा गया कोड इस साल के अंत में आने वाले Gemini Nano 4 सक्षम डिवाइस पर भी काम करेगा। गूगल के 'AI Edge Gallery' ऐप के जरिए यूजर्स बिना इंटरनेट कनेक्शन के 'एजेंट स्किल्स' जैसे फीचर्स का अनुभव ले सकेंगे, जो पूरी तरह से डिवाइस पर ही प्रोसेस होते हैं।

 

कैसे करें Gemma 4 का उपयोग?

यदि आप एक डेवलपर, छात्र या व्यवसायी हैं, तो आप इन तरीकों से इसकी शुरुआत कर सकते हैं:

बड़े मॉडल्स (31B और 26B): इनका उपयोग Google AI Studio के जरिए किया जा सकता है।


डाउनलोड: मॉडल के वेट (Weights) को Hugging Face, Kaggle या Ollama से सीधे डाउनलोड किया जा सकता है।


टूल सपोर्ट: यह मॉडल पहले दिन से ही Hugging Face Transformers, vLLM, llama.cpp और NVIDIA NIM जैसे लोकप्रिय टूल्स को सपोर्ट करता है।

 

डेस्कटॉप और रोबोटिक्स: यह विंडोज, लिनक्स और मैक ओएस पर चलता है। साथ ही, रास्पबेरी पाई 5 के जरिए इसे रोबोटिक्स में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

बाजार में कड़ी टक्कर और विशेषज्ञों की राय

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने Gemma 4 की कार्यक्षमता की सराहना करते हुए इसे 'इंटेलिजेंस-पर-पैरामीटर' के मामले में सबसे कुशल बताया है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इसे मेटा (Meta) की Llama सीरीज और चीन के DeepSeek मॉडल्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। Edited by : Sudhir Sharma 

MP-CG में Jio का धमाका! जनवरी 2026 में सबसे ज्यादा मोबाइल और ब्रॉडबैंड यूजर्स जुड़े, TRAI रिपोर्ट में खुलासा

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) की जनवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार जियो ने एक बार फिर मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ सर्किल में सबसे अधिक मोबाइल और ब्रॉडबैंड ग्राहक जोड़े हैं। जनवरी 2026 में जियो से 6.2 लाख नए मोबाइल ग्राहक जुड़े जबकि JioFiber और Jio AirFiber ब्रॉडबैंड सेवाओं को 66 हजार से अधिक नए ग्राहकों ने अपनाया। 

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TRAI के आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में कुल मोबाइल ग्राहकों की संख्या 8.49 करोड़ से अधिक हो चुकी है जबकि फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) और वायरलाइन ब्रॉडबैंड उपभोक्ताओं की संख्या 31.6 लाख से ज्यादा है। इनमें जियो के 4.9 करोड़ मोबाइल ग्राहक और 19.1 लाख से अधिक ब्रॉडबैंड ग्राहक शामिल हैं, जो इसकी मजबूत उपस्थिति को दर्शाते हैं। 

 

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में डिजिटल क्रांति को नई गति देते हुए रिलायंस जियो की JioFiber और AirFiber सेवाएं तेजी से लोगों की पहली पसंद बन रही हैं। इन सेवाओं के माध्यम से अब तक दोनों राज्यों में 19 लाख से अधिक घर हाई-स्पीड इंटरनेट से जुड़ चुके हैं, जिससे शिक्षा, रोजगार, व्यापार और घरेलू जीवन में व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है। 

 

शिक्षा, रोजगार और जीवनशैली में बदलाव

JioFiber की उपलब्धता ने छात्रों के लिए ऑनलाइन शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और नई डिजिटल स्किल्स सीखने के अवसर बढ़ाए हैं। वहीं, कामकाजी लोगों के लिए वर्क फ्रॉम होम, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डिजिटल कार्यप्रणाली पहले की तुलना में अधिक सरल और प्रभावी हो गई है।

गृहिणियां भी अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अपने हुनर को पहचान दिलाते हुए घर बैठे छोटे व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। 

 

बेहतर एंटरटेनमेंट और डिजिटल अनुभव

JioFiber और Jio AirFiber कनेक्शन के साथ उपभोक्ताओं को 4K में क्रिकेट देखने का शानदार अनुभव, 1000+ टीवी चैनल,लाइव टीवी फीचर्स (जिसमें 350+ HD चैनल शामिल हैं), 13+ OTT ऐप्स और अनलिमिटेड वाई-फाई जैसी सुविधाएं मिल रही हैं। ये सेवाएं घर को एक स्मार्ट डिजिटल हब में बदल रही हैं। 

 

हर गांव तक पहुंच रही 5G ताकत

मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ सर्किल में जियो के पास कुल 5G स्पेक्ट्रम क्षमता का 70% से अधिक हिस्सा है, जो दोनों राज्यों के सभी  जिलों के 10 हजार से अधिक गांवों तक उपलब्ध है। जियो की स्टैंडअलोन ट्रू 5G सेवा अब शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी पहुंच चुकी है। Edited by : Sudhir Sharma

Sora वीडियो ऐप को क्यों बंद कर रहा है OpenAI, ये वीडियो एआई टूल्स बन सकते हैं बेस्ट ऑप्शन्स

सैम ऑल्टमैन की कंपनी OpenAI ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए Sora को बंद करने की घोषणा कर दी। यह ऐलान उसी समय हुआ जब Disney ने भी OpenAI के साथ अपनी बड़ी पार्टनरशिप खत्म कर दी।  घोषणा के तरीके से ऐसा लगा कि OpenAI के भीतर चीजें तेजी से बदल रही हैं। हालांकि Sora को पूरी तरह कब बंद किया जाएगा और इससे यूजर्स के बनाए गए वीडियो पर क्या असर पड़ेगा- इस बारे में अभी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

X पर Sora अकाउंट ने कहा कि हम जल्द ही और जानकारी साझा करेंगे, जिसमें ऐप और API की टाइमलाइन और आपके काम को सुरक्षित रखने से जुड़ी डिटेल्स शामिल होंगी। ये वीडियो एआई टूल्स आपके लिए बेस्ट ऑप्शन बन सकते हैं।

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पहले क्या खास था Sora में?

यह बहुत ही आसान था। इसमें टेक्स्ट लिखते ही वीडियो बना जाते, जो सिनेमेटिक और रियलिस्टिक क्लिप्स

 की तरह होते थे। यह बिलकुल सोशल मीडिया जैसा वीडियो प्लेटफॉर्म था। लेकिन महंगा, रिस्की और विवादों में भी यह आया। लॉन्च होने के  बाद यह काफी वायरल हुआ, लेकिन  इसके बंद होने के पीछे कॉपीराइट विवाद, डीपफेक और गलत कंटेंट और बहुत ज्यादा खर्च बताया जा रहा है। 

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 Google Veo 3

 

Google का Veo 3 मॉडल सबसे लोकप्रिय ऑप्शन्स में से एक माना जा रहा है। लॉन्च के समय इसे 'बेहद रियलिस्टिक' बताया गया था।  इस टूल से हाई-क्वालिटी वीडियो बनाए जा सकते हैं , लेकिन इसके लिए Google का पेड AI प्लान लेना होगा। इसकी कीमत लगभग 7.99 डॉलर प्रति माह से शुरू होती है।  इन प्लान्स के साथ Gemini जैसे एडवांस AI फीचर्स भी मिलते हैं।

Luma Ray3

Ray3  भी एक पावरफुल AI वीडियो जनरेशन टूल है। 1080p वीडियो आउटपुट के साथ एडवांस एडिटिंग फीचर्स मिलते हैं। साथ ही प्रोफेशनल क्वालिटी वीडियो भी बनाए जा सकते हैं, लेकिन इसकी कीमत ज्यादा होने के कारण यह हर यूज़र के लिए किफायती नहीं है। Edited by : Sudhir Sharma

AI Technology : दुनिया में AI की रेस तेज, नई टेक्नोलॉजी से बदलेगा भविष्य, क्या हैं चुनौतियां

नई-नई AI तकनीकों के आने से न सिर्फ टेक्नोलॉजी सेक्टर बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और रोज़मर्रा की जिंदगी में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ वर्षों में AI दुनिया की सबसे प्रभावशाली तकनीक बन सकती है। टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्‍स का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI इंसानों के जीवन का अहम हिस्सा बन जाएगा। ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और स्मार्ट टेक्नोलॉजी के जरिए काम करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। दुनिया तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दिशा में आगे बढ़ रही है। 

 

AI की दौड़ में बड़ी कंपनियां

 

दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां AI को लेकर भारी निवेश कर रही हैं। कई कंपनियां ऐसे AI मॉडल विकसित कर रही हैं जो इंसानों की तरह सोचने, समझने और निर्णय लेने में सक्षम होंगे।

 

कई क्षेत्रों में बदल रही तस्वीर

AI की मदद से अब ऑटोमेशन तेजी से बढ़ रहा है। डेटा एनालिसिस आसान हो रहा है। रोबोटिक्स और मशीन लर्निंग का उपयोग बढ़ रहा है। इससे उद्योगों की कार्यक्षमता भी काफी बढ़ रही है। AI तकनीक का असर अब कई क्षेत्रों में साफ दिखाई देने लगा है। स्वास्थ्य क्षेत्र में AI की मदद से बीमारियों का जल्दी पता लगाया जा रहा है।

शिक्षा क्षेत्र में AI आधारित लर्निंग टूल छात्रों की पढ़ाई को आसान बना रहे हैं। व्यापार और उद्योग में कंपनियां AI के जरिए बड़े डेटा का विश्लेषण कर बेहतर निर्णय ले रही हैं।

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 चुनौतियां भी कम नहीं

AI तकनीक के कारण स्मार्ट सिटी, स्मार्ट ट्रांसपोर्ट और ऑटोमेटेड सिस्टम का विकास भी तेजी से हो रहा है। कई देशों में AI आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट और सुरक्षा सिस्टम लागू किए जा रहे हैं। हालांकि AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कई पारंपरिक नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी का खतरा बढ़ सकता है। AI के गलत इस्तेमाल को रोकना भी बड़ी चुनौती होगी।

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भविष्य में क्या होगा?

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI इंसानों के जीवन का अहम हिस्सा बन जाएगा। ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और स्मार्ट टेक्नोलॉजी के जरिए काम करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। कुल मिलाकर, AI तकनीक आने वाले समय में दुनिया की अर्थव्यवस्था, शिक्षा और जीवनशैली को नई दिशा देने वाली है।

क्या होंगी चुनौतियां

हालांकि AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। एक्सपर्ट्‍स का कहना है कि कई पारंपरिक नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।  डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी का खतरा बढ़ सकता है । AI के गलत इस्तेमाल को रोकना भी बड़ी चुनौती होगी।  Edited by : Sudhir Sharma

WhatsApp Data Privacy Case: सुप्रीम कोर्ट में Meta का हलफनामा, जानिए अब यूजर्स के डेटा और विज्ञापन शेयरिंग पर क्या बदलेंगे नियम

WhatsApp Meta

Meta और WhatsApp ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के आदेश का पालन करने का भरोसा दिया। यह आदेश भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा तय की गई प्राइवेसी और यूज़र कंसेंट से जुड़ी सुरक्षा शर्तों के विस्तार से संबंधित है।

 

इसका सीधा अर्थ है कि अब यूजर्स को अपने डेटा शेयरिंग को लेकर अधिक नियंत्रण और स्पष्ट विकल्प (Opt-in/Opt-out) मिलेंगे। सुप्रीम कोर्ट में Meta की अपील और CCI की क्रॉस-अपील अभी लंबित है। कंपनियों ने कहा कि वे 16 मार्च तक NCLAT के निर्देशों का पालन करेंगी।

 

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि एक शपथपत्र दाखिल किया गया है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि कौन-सा डेटा साझा किया जाता है और कौन-सा नहीं।

 

 कोर्ट ने कंपनियों के बयान को रिकॉर्ड पर लिया और अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

 

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क्या है पूरा मामला?

 

नवंबर 2025 में NCLAT ने CCI द्वारा व्हाट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर लगाए गए 213.14 करोड़ रुपये के जुर्माने को बरकरार रखा था। ट्रिब्यूनल ने माना था कि व्हाट्सऐप ने यूजर्स पर अनुचित शर्तें थोपीं और क्रॉस-प्लेटफॉर्म डेटा शेयरिंग से Meta को ऑनलाइन विज्ञापन में अनुचित लाभ मिला।

 

हालांकि, NCLAT ने पांच साल तक विज्ञापन के लिए डेटा शेयरिंग पर रोक लगाने के आदेश को रद्द कर दिया। उसने कहा कि यदि यूजर्स को स्पष्ट और वापस लेने योग्य सहमति (Revocable Consent) दी जाती है तो पूर्ण प्रतिबंध उचित नहीं है।

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बाद में CCI ने स्पष्टता की मांग की, जिस पर 15 दिसंबर को NCLAT ने कहा कि सभी गैर-व्हाट्सऐप उद्देश्यों, जिनमें विज्ञापन भी शामिल है, के लिए डेटा संग्रह और साझा करने पर यह सुरक्षा निर्देश लागू होंगे।  Edited by : Sudhir Sharma

India AI Impact Summit 2026 का चौथा दिन: जब मंच पर आमने-सामने आए धुर विरोधी; Prime Minister Narendra Modi के कहने पर भी नहीं मिलाए सैम ऑल्टमैन और डारियो अमोदेई ने हाथ

 'AI इम्पैक्ट समिट' के चौथे दिन एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जिसने तकनीक की दुनिया में जारी खींचतान को कैमरे के सामने ला दिया। समिट के दौरान जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एकजुटता दिखाने के लिए मंच पर मौजूद सभी वक्ताओं से एक-दूसरे का हाथ थामकर ऊपर उठाने का आग्रह किया, तो लगभग सभी दिग्गज अधिकारियों ने इसे सहर्ष स्वीकार किया।

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लेकिन इस दौरान सिलिकॉन वैली की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्विता भी साफ झलक उठी। OpenAI के सैम ऑल्टमैन और Anthropic के डारियो अमोदेई एक-दूसरे के बगल में तो खड़े थे, लेकिन उन्होंने हाथ नहीं मिलाए।

दिखी प्रतिद्वंद्विता की लकीर

AI की रेस में एक-दूसरे को पछाड़ने में जुटे ये दोनों दिग्गज प्रधानमंत्री के इशारे के बावजूद अपनी मुट्ठियाँ अलग-अलग रखे नजर आए। जहाँ बाकी लोग एक-दूसरे का हाथ थामकर एकजुटता का संदेश दे रहे थे, वहीं ऑल्टमैन और अमोदेई ने दूरी बनाए रखना ही बेहतर समझा।

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ऑल्टमैन के चेहरे पर दिखी असहजता

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इस दौरान सैम ऑल्टमैन काफी असहज नजर आ रहे थे। जब प्रधानमंत्री मोदी सभी को हाथ जोड़ने का संकेत दे रहे थे, तब ऑल्टमैन ने अन्य लोगों का अनुसरण करने के बजाय अपनी नजरें दूसरी ओर फेर लीं। तकनीक की दुनिया के दो सबसे बड़े प्रतिस्पर्धियों के बीच का यह 'कोल्ड वॉर' अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। Edited by : Sudhir Sharma 

Who is Neha Singh : नेहा सिंह कौन हैं, AI इम्पैक्ट समिट में ‘रोबोडॉग’ से चर्चाओं में, Galgotias University ने झाड़ा पल्ला

galgoti uni

देश की राजधानी में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट के दौरान प्रदर्शित एक रोबोटिक डॉग को लेकर गलगोटिया यूनिवर्सिटी (Galgotias University) हाल ही में विवादों में आ गई। मीडिया रिपोर्ट्‍स के मुताबिक समिट में यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर दिखाए गए ‘रोबोडॉग’ को चीनी निर्मित बताया गया। इसके बाद यूनिवर्सिटी से एक्सपो स्पेस खाली करने के लिए कहा गया।

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इवेंट से जुड़ा एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें प्रोफेसर नेहा सिंह रोबोट को 'ओरायन' नाम से पेश करती नजर आईं। इसके बाद ऑनलाइन अटकलें लगने लगीं कि क्या इस मशीन को यूनिवर्सिटी की इन-हाउस इनोवेशन के तौर पर प्रस्तुत किया गया था। इस वीडियो के बाद नेहा सिंह भी चर्चाओं में आ गई। 

कौन हैं नेहा सिंह, यूनिवर्सिटी ने झाला पल्ला 

गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ बिजनेस में कम्युनिकेशंस विभाग की प्रमुख (हेड ऑफ डिपार्टमेंट) हैं। वह कोर टेक्निकल फैकल्टी का हिस्सा नहीं हैं। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने इस बात को स्पष्ट किया।  विवाद के बाद मीडिया बातचीत में नेहा सिंह ने कहा कि उन्हें रोबोट के विकास से जुड़ी तकनीकी जानकारियों की पूरी जानकारी नहीं थी।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यूनिवर्सिटी ने यह दावा नहीं किया था कि रोबोट का निर्माण उसी ने किया है। मीडिया के सामने उन्होंने स्वीकार किया कि समिट में प्रस्तुति के तरीके के कारण स्थिति बिगड़ सकती है। उन्होंने बताया कि उन्होंने रोबोट का परिचय उत्साह और तेज़ रफ्तार माहौल में दिया, जिससे गलतफहमी पैदा हो सकती है। उनके मुताबिक, रोबोटिक डॉग को यूनिवर्सिटी द्वारा निर्मित बताने का कोई इरादा नहीं था। बल्कि इसे छात्रों को प्रेरित करने और उन्हें इससे भी उन्नत तकनीक विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रदर्शन के तौर पर लाया गया था।

 

यूनिवर्सिटी ने कहा- बयान देने का अधिकार नहीं था 

मीडिया खबरों के मुताबिक चाइनीज रोबोडॉग विवाद पर गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने माफीनामा जारी किया है। यूनिवर्सिटी ने कहा कि AI समिट में उनके स्टॉल पर मौजूद प्रतिनिधि जानकारी के अभाव में कैमरे के सामने गलत बयान दे बैठीं जबकि उन्हें मीडिया से बात करने का अधिकार नहीं था। Edited by : Sudhir Sharma

AI Impact Summit में रोबोटिक डॉग विवाद : Galgotiyas University ने मांगी माफी, सरकार की कड़ी चेतावनी

robot dog galgotias controversy

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' (India AI Impact Summit) के दौरान चीन में निर्मित ‘रोबोटिक डॉग’ के प्रदर्शन को लेकर ‘असमंजस’ की स्थिति पैदा होने के लिए बुधवार को माफी मांगी। ने कहा कि उसके पवेलियन में मौजूद उसके एक प्रतिनिधि को इस रोबोटिक उत्पाद के बारे में ‘सही जानकारी’ नहीं थी और उसने चीन में बने रोबोटिक डॉग को विश्वविद्यालय का नवोन्मेष बताया, जो सही नहीं था।

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इस बीच गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़े 'रोबो-डॉग' विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को सख्त चेतावनी जारी की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शनी में शामिल होने वाले संस्थान ऐसी किसी भी वस्तु का प्रदर्शन न करें जो उनकी अपनी नहीं है।

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 आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि प्रदर्शनी लगाने वालों को ऐसी चीजें प्रदर्शित नहीं करनी चाहिए जो उनकी अपनी (मौलिक) नहीं हैं। मीडिया खबरों के मुताबिक गलगोटिया यूनिवर्सिटी का पैवेलियन बंद कर दिया गया है और बिजली भी काट दी गई है। 

यह था पूरा मामला 

यह विवाद तब शुरू हुआ जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर आरोप लगा कि उन्होंने 'एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में चीन की 'यूनिट्री' (Unitree) कंपनी द्वारा निर्मित एक रोबो-डॉग को अपना खुद का आविष्कार बताकर पेश किया। सोशल मीडिया पर समिट के वीडियो वायरल होने के बाद कई यूजर्स और विशेषज्ञों ने इस विसंगति को पकड़ लिया।  Edited by : Sudhir Sharma