रिलायंस Jio आसमान में बिछाएगा सैटेलाइट्स का जाल, भारत के जंगलों और पहाड़ों पर भी मिलेगी सुपरफास्ट कनेक्टिविटी

रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं AGM में बोलते हुए रिलायंस जियो के एमडी आकाश अंबानी ने कहा कि रिलायंस जियो एक सॉवरेन लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन (पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किए जाने वाले उपग्रहों का जाल) डेवलप करने पर विचार कर रही है और साथ ही इस तरह की कैपेसिटी लीज पर लेने के लिए ग्लोबल सैटेलाइट ऑपरेटरों के साथ साझेदारी भी कर रही है।

यह कदम सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के क्षेत्र में जियो की अब तक की सबसे बड़ी पहल है। इसका मकसद भारत के सबसे दूर-दराज और पिछड़े इलाकों तक कनेक्टिविटी पहुंचाना है। आकाश अंबानी ने कहा,”जियो ने जमीन पर भारत को जोड़ा है। अब हमें आसमान से भारत को जोड़ना होगा।” उन्होंने बताया कि दूर-दराज के गांव ओर द्वीपों पर रहने वाले लोग और सीमावर्ती चौकियां अभी भी जमीनी मोबाइल नेटवर्क की पहुंच से बाहर हैं।

उन्होंने आगे कहा कि इसके लिए Jio दोहरी रणनीति अपनाएगी। कंपनी तेजी से सेवाएं शुरू करने के लिए पहले से मौजूद ग्लोबल सैटेलाइट नेटवर्क से सैटेलाइट क्षमता लीज पर लेगी। साथ लॉन्ग टर्म रणनीति के तहत अपना खुद का सैटेलाइट नेटवर्क बनाएगी। इस तरीके से कंपनी भारत की कनेक्टिविटी जरूरतों को तेजी से पूरा कर पाएगी और साथ ही एक ऐसा भारतीय सैटेलाइट ब्रॉडबैंड प्लेटफ़ॉर्म तैयार कर पाएगी जिसे दुनिया भर में फैलाया जा सके।

Jio भारत में बना रही  ग्राउंड स्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर

इन योजनाओं को सपोर्ट करने के लिए,Jio भारत में ग्राउंड स्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर भी बना रही है। ये सुविधाएं पार्टनर सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन और Jio के भविष्य के सैटेलाइट,दोनों को सपोर्ट करेंगी। इससे स्पेस और जमीनी नेटवर्क को जोड़ने वाला एक इंटीग्रेटेड सैटेलाइट ब्रॉडबैंड इकोसिस्टम बन सकेगा।

रिलायंस की तरफ से यह ऐलान ऐसे समय में हुआ है जब भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर में कॉम्पिटिशन बढ़ रहा है और स्टारलिंक,यूटेलसैट वनवेब और अमेजन LEO जैसी कंपनियां इस मार्केट पर नजर बनाए हुए हैं। अंबानी ने कहा कि इस पहल से स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता मजबूत होगी और देश को ग्लोबल सैटेलाइट ब्रॉडबैंड मैप पर मजबूती से स्थापित करने में मदद मिलेगी।

 JioSat के जरिए दी जाएगी सैटेलाइट कम्युनिकेशन सुविधा

इसके अलावा,रिलायंस जियो की कंपनी’जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस’ने डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) से ‘ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट'(GMPCS) लाइसेंस और इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (IN-SPACe) से जरूरी मंजूरी हासिल कर ली है। इससे भारत में कमर्शियल सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सर्विस शुरू करने में आने वाली दो बड़ी रेगुलेटरी रुकावटें दूर हो गई हैं।

इन मंजूरियों के मिलने से JioSat उन कुछ कंपनियों में शामिल हो गई है जो भारत के उभरते सैटकॉम (सैटेलाइट कम्युनिकेशन) मार्केट में उतरने के लिए तैयार हैं। कंपनी का प्लान है कि वह SES के साथ अपने जॉइंट वेंचर का इस्तेमाल करके दूर-दराज,ग्रामीण और कम सुविधा वाले इलाकों में हाई-स्पीड कनेक्टिविटी पहुंचाए। हालांकि,कमर्शियल सर्विस शुरू करने से पहले कंपनी को अभी भी स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट और दूसरी ऑपरेशनल मंजूरियां लेनी होंगी।

 

 

RIL AGM 2026 : ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद रिलायंस ने हासिल किया रिकॉर्ड तोड़ रेवेन्यू,EBITDA और नेट प्रॉफिट

 

Reliance AGM 2026 : भारत को AI के क्षेत्र में क्रिएटर और ग्लोबल लीडर बनाने पर होना चाहिए फोकस -मुकेश अंबानी

Amazon Prime Day Sale 2026: इस दिन शुरू होगी Amazon की सबसे बड़ी सेल, कई प्रोडक्ट्स पर मिलेंगे जबरदस्त डिस्काउंट

Amazon Prime Day Sale 2026: Amazon ने भारत में अपनी 10वीं सालाना Prime Day सेल की तारीखों का आधिकारिक तौर पर ऐलान कर दिया है। इससे ग्राहकों को स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन, घरेलू उपकरणों और अन्य चीजों पर शानदार डील्स पाने का मौका मिलेगा। यह ई-कॉमर्स कंपनी एक बार फिर इस इवेंट को तीन दिनों तक चलाएगी और साथ ही Prime मेंबरशिप, बैंक ऑफर और AI-पावर्ड शॉपिंग टूल्स पर नए डिस्काउंट भी पेश करेगी। यहां आपको Amazon Prime Day Sale 2026 से जुड़ी हर जरूरी जानकारी मिलेगी, जैसे तारीखें, ऑफर्स, नए लॉन्च और मेंबरशिप बेनिफिट्स।

बता दें कि इस साल की Amazon Prime Day सेल 72 घंटे तक चलेगी, जो 4 जुलाई को रात 12 बजे शुरू होगी और 6 जुलाई को रात 11:59 बजे खत्म होगी। पिछले सालों की तरह, यह सेल सिर्फ Prime मेंबर्स के लिए होगी।

इस इवेंट को और आकर्षक बनाने के लिए, Amazon कई पेमेंट ऑफर लेकर आया है। SBI और Axis Bank के क्रेडिट कार्ड यूजर्स (EMI ट्रांजैक्शन सहित) को सेल के दौरान 10% का इंस्टेंट डिस्काउंट मिलेगा। वहीं, Amazon Pay ICICI Bank क्रेडिट कार्ड यूजर्स को Prime मेंबरशिप के तहत होने वाली योग्य खरीदारी पर 5% तक का अनलिमिटेड कैशबैक मिलता रहेगा।

Flipkart की प्रतिद्वंद्वी कंपनी ‘Amazon Pay Later’ को भी प्रमोट कर रही है, जिससे ग्राहक 1,500 रुपये या उससे ज्यादा की खरीदारी को तीन बिना-ब्याज वाली किश्तों में बांट सकते हैं। इस साल ऑफर में ट्रैवल बुकिंग भी शामिल है, जिसमें MakeMyTrip के ग्राहकों को तुरंत 10% की छूट, साथ ही होटल पर 75% तक की छूट और बस टिकट पर 17% तक की बचत मिल रही है।

इस लोकप्रिय ई-कॉमर्स कंपनी के अनुसार, Prime Day 2026 में 100 से ज्यादा भारतीय और ग्लोबल ब्रांड्स के 500 से ज्यादा नए प्रोडक्ट्स लॉन्च किए जाएंगे। इसमें Samsung, OnePlus, HP, Lenovo, Asus, iQOO और Redmi जैसे पॉपुलर ब्रांड्स के शामिल होने की उम्मीद है। Adidas, Allen Solly, Puma और Van Heusen जैसे फैशन ब्रांड्स के साथ-साथ LG, Bosch, Crompton और Shark Ninja जैसे होम अप्लायंस बनाने वाली कंपनियां भी इस सेल में शामिल हो सकती हैं।

Amazon का कहना है कि इस साल वह खरीदारों को प्रोडक्ट्स खोजने, अलग-अलग विकल्पों की तुलना करने और अपनी पसंद के हिसाब से सुझाव (पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन) पाने में मदद करने के लिए AI-पावर्ड टूल्स का और भी ज्यादा इस्तेमाल करेगा।

जो लोग अभी तक प्राइम मेंबर नहीं हैं, उनके लिए कंपनी ने एनिवर्सरी के दौरान सब्सक्रिप्शन की कीमतों में छूट दी है। स्टैंडर्ड प्राइम मेंबरशिप 1,499 रुपये की जगह 999 रुपये में मिल रही है, जबकि प्राइम लाइट की कीमत 799 रुपये से घटकर 599 रुपये हो गई है। प्राइम शॉपिंग एडिशन भी 399 रुपये के बजाय 299 रुपये की कम कीमत पर उपलब्ध है।

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Amazon Prime Day Sale 2026: इस दिन शुरू होगी Amazon की सबसे बड़ी सेल, कई प्रोडक्ट्स पर मिलेंगे जबरदस्त डिस्काउंट

Amazon Prime Day Sale 2026: Amazon ने भारत में अपनी 10वीं सालाना Prime Day सेल की तारीखों का आधिकारिक तौर पर ऐलान कर दिया है। इससे ग्राहकों को स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन, घरेलू उपकरणों और अन्य चीजों पर शानदार डील्स पाने का मौका मिलेगा। यह ई-कॉमर्स कंपनी एक बार फिर इस इवेंट को तीन दिनों तक चलाएगी और साथ ही Prime मेंबरशिप, बैंक ऑफर और AI-पावर्ड शॉपिंग टूल्स पर नए डिस्काउंट भी पेश करेगी। यहां आपको Amazon Prime Day Sale 2026 से जुड़ी हर जरूरी जानकारी मिलेगी, जैसे तारीखें, ऑफर्स, नए लॉन्च और मेंबरशिप बेनिफिट्स।

बता दें कि इस साल की Amazon Prime Day सेल 72 घंटे तक चलेगी, जो 4 जुलाई को रात 12 बजे शुरू होगी और 6 जुलाई को रात 11:59 बजे खत्म होगी। पिछले सालों की तरह, यह सेल सिर्फ Prime मेंबर्स के लिए होगी।

इस इवेंट को और आकर्षक बनाने के लिए, Amazon कई पेमेंट ऑफर लेकर आया है। SBI और Axis Bank के क्रेडिट कार्ड यूजर्स (EMI ट्रांजैक्शन सहित) को सेल के दौरान 10% का इंस्टेंट डिस्काउंट मिलेगा। वहीं, Amazon Pay ICICI Bank क्रेडिट कार्ड यूजर्स को Prime मेंबरशिप के तहत होने वाली योग्य खरीदारी पर 5% तक का अनलिमिटेड कैशबैक मिलता रहेगा।

Flipkart की प्रतिद्वंद्वी कंपनी ‘Amazon Pay Later’ को भी प्रमोट कर रही है, जिससे ग्राहक 1,500 रुपये या उससे ज्यादा की खरीदारी को तीन बिना-ब्याज वाली किश्तों में बांट सकते हैं। इस साल ऑफर में ट्रैवल बुकिंग भी शामिल है, जिसमें MakeMyTrip के ग्राहकों को तुरंत 10% की छूट, साथ ही होटल पर 75% तक की छूट और बस टिकट पर 17% तक की बचत मिल रही है।

इस लोकप्रिय ई-कॉमर्स कंपनी के अनुसार, Prime Day 2026 में 100 से ज्यादा भारतीय और ग्लोबल ब्रांड्स के 500 से ज्यादा नए प्रोडक्ट्स लॉन्च किए जाएंगे। इसमें Samsung, OnePlus, HP, Lenovo, Asus, iQOO और Redmi जैसे पॉपुलर ब्रांड्स के शामिल होने की उम्मीद है। Adidas, Allen Solly, Puma और Van Heusen जैसे फैशन ब्रांड्स के साथ-साथ LG, Bosch, Crompton और Shark Ninja जैसे होम अप्लायंस बनाने वाली कंपनियां भी इस सेल में शामिल हो सकती हैं।

Amazon का कहना है कि इस साल वह खरीदारों को प्रोडक्ट्स खोजने, अलग-अलग विकल्पों की तुलना करने और अपनी पसंद के हिसाब से सुझाव (पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन) पाने में मदद करने के लिए AI-पावर्ड टूल्स का और भी ज्यादा इस्तेमाल करेगा।

जो लोग अभी तक प्राइम मेंबर नहीं हैं, उनके लिए कंपनी ने एनिवर्सरी के दौरान सब्सक्रिप्शन की कीमतों में छूट दी है। स्टैंडर्ड प्राइम मेंबरशिप 1,499 रुपये की जगह 999 रुपये में मिल रही है, जबकि प्राइम लाइट की कीमत 799 रुपये से घटकर 599 रुपये हो गई है। प्राइम शॉपिंग एडिशन भी 399 रुपये के बजाय 299 रुपये की कम कीमत पर उपलब्ध है।

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Market Outlook : लाल निशान में बंद हुए सेंसेक्स- निफ्टी जानिए 22 जून को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : शुक्रवार,19 जून को बेंचमार्क इक्विटी इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार पांच दिनों की बढ़त का सिलसिला थम गया। इसकी सबसे बड़ी वजह एक्सेंचर (Accenture) द्वारा अपने रेवेन्यू ग्रोथ आउटलुक में कटौती करने के फैसले के बाद आईटी शेयरों में आई भारी बिकवाली रही। कमजोर ग्लोबल संकेतों, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की फिर से शुरू हुई बिकवाली और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों का सेंटीमेंट खराब किया। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 607 अंक या 0.78% गिरकर 76,802.90 पर और निफ्टी 154.90 अंक या 0.64% गिरकर 24,013.10 पर बंद हुआ।

हालांकि,छोटे-मझोले शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.22% और 0.42% की बढ़त देखने को मिली। सेक्टोरल इंडेक्सों पर नजर डालें तो Nifty IT सबसे ज्यादा गिरा और इसमें 3.6% से ज्यादा की गिरावट आई। निफ्टी ऑटो, निफ्टी बैंक और निफ्टी ऑयल एंड गैस भी आज गिरावट के साथ बंद हुए। इसके विपरीत निफ्टी मीडिया, निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी केमिकल्स बढ़त के साथ ट्रेड करते दिखे।

मार्केट व्यू

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के.विजयकुमार ने कहा कि मौजूदा मार्केट स्ट्रक्चर से पता चलता है कि गिरावट पर खरीदारी करना एक असरदार रणनीति हो सकती है। उन्होंने आगे कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट और बेहतर होते मैक्रो-इकोनॉमिक हालात मार्केट की अंदरूनी मजबूती को सहारा दे रहे हैं।

Reliance AGM 2026 : भारत को AI के क्षेत्र में क्रिएटर और ग्लोबल लीडर बनाने पर होना चाहिए फोकस -मुकेश अंबानी

एक्सिस डायरेक्ट में रिसर्च हेड राजेश पालवीय ने कहा कि जब तक निफ्टी 24,000 के अहम लेवल से ऊपर बना हुआ है तब तक मार्केट का ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव रहेगा। उनके मुताबिक,24,000 का लेवल तत्काल सपोर्ट का काम करेगा,जबकि 24,250-24,400 का जोन एक अहम रेजिस्टेंस एरिया बना रहेगा। 24,400 के ऊपर एक मज़बूत ब्रेकआउट से नई तेजी और शॉर्ट कवरिंग आ सकती है। जिससे और ऊंचे लेवल तक जाने का रास्ता खुल सकता है। दूसरी ओर,अगर यह लगातार 24,050 के नीचे बना रहता है तो 23,950 की तरफ प्रॉफिट बुकिंग हो सकती है और अगला सपोर्ट 23,850 के आसपास होगा। कुल मिलाकर,जब तक इंडेक्स 24,000 से ऊपर है,तब तक गिरावट पर खरीदारी (buy on dips)की रणनीति अपनानी चाहिए,क्योंकि मीडियम-टर्म में तेजी का ट्रेंड बना हुआ है।

बाजार जानकारों का कहना है कि तेजी का दौर (bullish momentum)वापस लाने के लिए निफ्टी का 23,900 के लेवल पर बने रहना जरूरी होगा। बजाज ब्रोकिंग में टेक्निकल रिसर्च के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पवित्रो मुखर्जी ने कहा,”निफ्टी के लिए 23,900-23,800 का लेवल तत्काल सपोर्ट का काम करेगा, क्योंकि यहीं पर 50-दिन का EMA और पिछले सोमवार के बुलिश गैप एरिया का ऊपरी बैंड मिल रहे हैं।

कोटक सिक्योरिटीज में इक्विटी रिसर्च के हेड श्रीकांत चौहान की राय है कि निफ्टी में 24,100 और 24,000 के बीच गिरावट आने पर खरीदारी करें और 23,900 पर स्टॉप लॉस रखें।

डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Reliance AGM 2026 : भारत को AI के क्षेत्र में क्रिएटर और ग्लोबल लीडर बनाने पर होना चाहिए फोकस -मुकेश अंबानी

Reliance AGM 2026 : रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने शुक्रवार को कहा कि भारत को कहीं और बनाई गई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सिर्फ उपभोक्ता बनकर नहीं रहना चाहिए,बल्कि इस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उसे क्रिएटर,एडॉप्टर और ग्लोबल लीडर बनना चाहिए। रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं एजीएम में बोलते हुए अंबानी ने कहा कि AI और एनर्जी के मामले में आत्मनिर्भरता भारत के लिए राष्ट्रीय मिशन बनने चाहिए।

अंबानी ने शेयरधारकों से कहा,”मैंने पहले भी आपसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्रांतिकारी ताकत के बारे में बात की है। मेरा पक्का मानना ​​है कि भारत को कहीं और बनी AI का सिर्फ इस्तेमाल करने वाला नहीं बनना चाहिए। उसे AI के क्षेत्र में क्रिएटर,उसे अपनाने वाला और ग्लोबल लीडर बनना चाहिए।”

अंबानी ने कहा कि पिछले साल ग्रुप के नए ग्रोथ इंजन के तौर पर घोषित किया गया रिलायंस इंटेलिजेंस अब अपने एग्जीक्यूशन फ़ेज़ में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसका मकसद एक मुनाफे वाला AI इंफ़्रास्ट्रक्चर,प्लेटफ़ॉर्म और सर्विसेज का बिजनेस बनाना है। रिलायंस इंटेलिजेंस का लक्ष्य “हर किसी के लिए,हर जगह AI”का है।

शेयरहोल्डर्स को संबोधित करते हुए आकाश अंबानी ने भी कहा कि रिलायंस “भारत का सॉवरेन AI बैकबोन”बना रहा है और उसका मकसद AI को हर भारतीय के लिए सुगम और सस्ता बनाना है। उन्होंने कहा कि 120 MW का पहला AI कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर 2026 के आखिर तक चालू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि रिलायंस अपने AI प्लान के तहत NVIDIA GB300 इंफ्रास्ट्रक्चर को भी चालू कर रहा है।

आकाश अंबानी ने बताया कि रिलायंस 22 भारतीय भाषाओं में AI सर्विस बना रही है और कंपनी के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोलआउट में भाषा तक पहुंच को फोकस में रखा गया है। जियो अपने नेटवर्क में सीधे AI को शामिल कर रही है और उसने जियो कॉल्स में AI वॉयस असिस्टेंट को इंटीग्रेट किया है।

मुकेश अंबानी ने कहा कि जियो अब सिर्फ टेक्नोलॉजी को इंटीग्रेट नहीं कर रहा है,बल्कि ओरिजिनल टेक्नोलॉजी भी बना रहा है। रिलायंस इंटेलिजेंस के इंजीनियर राष्ट्रीय स्तर की समस्याओं पर काम करेंगे। उन्होंने कहा,”हम आपको हमारे समय की सबसे अहम चुनौतियों को हल करने के लिए जरूरी स्केल, संसाधन और आजादी देंगे।”

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AI से जुड़ी ये घोषणाएं आत्मनिर्भरता की बड़ी मुहिम का हिस्सा थीं। अंबानी ने कहा कि दुनिया में जारी उठापटक के बीच भारत के लिए सबसे जरूरी सबक यह है कि देश को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिशों को और तेज किया जाए। भारत को अहम टेक्नोलॉजी और जरूरी खनिजों के मामले में आत्मनिर्भर बनना होगा। ऊर्जा और AI के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय मिशन बनाना होगा।

कंपनी ने अपने AI प्लान को Jio के टेलीकॉम और डिजिटल नेटवर्क से भी जोड़ा। आकाश अंबानी ने बताया कि Jio के 5G ग्राहकों की संख्या 26.8 करोड़ तक पहुंच गई है,जबकि JioAirFiber से 1.3 करोड़ घर जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि Jio का डेटा ट्रैफ़क 241 एक्साबाइट तक पहुंच गया है और टैक्स के बाद Jio का मुनाफा पहली बार 30,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।

मुकेश अंबानी ने कहा कि Jio ने 10 साल पूरे कर लिए हैं और भारत की डिजिटल और AI क्रांति में मुख्य भूमिका निभाने वाली कंपनी बन गई है।

 

 

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आकाश अंबानी ने रखा Jio का AI रोडमैप : कॉल, कारोबार और खेती तक पहुंचेगा एआई

आकाश अंबानी ने रखा Jio का AI रोडमैप : कॉल, कारोबार और खेती तक पहुंचेगा एआई

Akash Ambani outlines Jio's AI roadmap

– जियोभारतआईक्यू, एआई व्यापार, जियोहेल्थआईक्यू, जियोलर्नआईक्यू औरजियोकृषिआईक्यू जैसी सेवाएं 

– भारतीय भाषाओं में नेटिव एआई बना रहा जियो, 22 भारतीय भाषाओं में सेवाओं की तैयारी

– रिलायंस इंटेलिजेंस जामनगर में भारत का सॉवरेन एआई बैकबोन बना रहा है

जियो (Jio) की अगली बड़ी छलांग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में होगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Limited) की 49वीं वार्षिक आम बैठक में चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश डी. अंबानी ने कहा कि भारत को बाहर बने एआई (AI) का केवल उपभोक्ता नहीं बने रहना चाहिए। भारत को एआई का निर्माता और ग्लोबल लीडर बनना चाहिए।

 

मुकेश अंबानी ने कहा कि इसी सोच के साथ रिलायंस इंटेलिजेंस (Reliance Intelligence) को कंपनी के नए ग्रोथ इंजन के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रिलायंस इंटेलिजेंस का उद्देश्य उपभोक्ताओं, उद्यमों और सरकारों के लिए बड़े पैमाने पर एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्लेटफॉर्म और सेवाओं का लाभकारी बिजनेस तैयार करना है।

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जियो के चेयरमैन आकाश एम. अंबानी ने रिलायंस इंटेलिजेंस की सेवाओं और एआई उत्पादों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रिलायंस इंटेलिजेंस जामनगर में भारत का सॉवरेन एआई बैकबोन बना रहा है। यह इंफ्रास्ट्रक्चर रिलायंस की अपनी सौर ऊर्जा से संचालित होगा। इसकी पहली 120 मेगावाट क्षमता 2026 के अंत तक शुरू करने की योजना है। पूरी तरह चालू होने पर यह क्षमता दो लाख से अधिक एच100-इक्विवेलेंट जीपीयू तक बढ़ सकती है।

 

आकाश अंबानी ने कहा, “दुनिया के एआई प्लेटफॉर्म पहले अंग्रेजी में बनते हैं और बाद में उनका अनुवाद किया जाता है। इसके विपरीत, जियो भारतीय भाषाओं में नेटिव एआई बना रहा है। भारत का एआई भारतीय भाषा में बोलेगा। भारत के दिलों को जोड़ेगा। भारत की तस्वीर और तकदीर बदलेगा।”

 

रिलायंस इंटेलिजेंस 22 भारतीय भाषाओं में भरोसेमंद, किफायती और बहुभाषी एआई सेवाएं देने की तैयारी कर रहा है। इनमें जियोभारतआईक्यू, एआई व्यापार, जियोहेल्थआईक्यू, जियोलर्नआईक्यू और जियोकृषिआईक्यू जैसी सेवाएं शामिल होंगी। इन सेवाओं का उद्देश्य किसानों, छात्रों, दुकानदारों, परिवारों और छोटे कारोबारियों तक एआई की उपयोगिता पहुंचाना है।

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जियो अपने नेटवर्क में भी एआई को सीधे जोड़ रहा है। कंपनी जियो कॉल एजेंट पर काम कर रही है। इसके जरिए हर जियो कॉल में, ग्राहक की अनुमति से, एआई एजेंट जुड़ सकेगा। यह कॉल को ट्रांसक्राइब कर सकेगा, उसका सार बना सकेगा और जरूरत पड़ने पर खाना ऑर्डर करने, कैब बुक करने, टेबल रिजर्व करने या मीटिंग तय करने जैसे काम भी कर सकेगा।

 

आकाश अंबानी ने जियो की पांचवीं प्रतिबद्धता को भारत की तकनीक को दुनिया तक ले जाने से जोड़ा। उन्होंने कहा कि 5जी, फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस और एआई सेवाओं के लिए जियो में बनाया गया अपना डीप-टेक स्टैक अब चुनिंदा देशों में अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ इस्तेमाल के लिए तैयार है।

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रिलायंस ने गूगल, मेटा और एनवीडिया के साथ साझेदारियों का भी उल्लेख किया। कंपनी का कहना है कि इन साझेदारियों के जरिए वैश्विक तकनीक को भारतीय क्रियान्वयन, भारतीय इन्फ्रास्ट्रक्चर और भारत-प्रथम गवर्नेंस के साथ जोड़ा जाएगा।

 

जियो ने जिस तरह डेटा को हर भारतीय के लिए किफायती बनाया था, रिलायंस इंटेलिजेंस अब एआई को आसान, भरोसेमंद और किफायती बनाने की तैयारी कर रहा है। कंपनी का दावा है कि जब एआई सुलभ होगा, तब भारत केवल एआई युग में भागीदार नहीं रहेगा, बल्कि उसका नेतृत्व करेगा।

आकाश अंबानी ने रखा Jio का AI रोडमैप : कॉल, कारोबार और खेती तक पहुंचेगा एआई

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– जियोभारतआईक्यू, एआई व्यापार, जियोहेल्थआईक्यू, जियोलर्नआईक्यू औरजियोकृषिआईक्यू जैसी सेवाएं 

– भारतीय भाषाओं में नेटिव एआई बना रहा जियो, 22 भारतीय भाषाओं में सेवाओं की तैयारी

– रिलायंस इंटेलिजेंस जामनगर में भारत का सॉवरेन एआई बैकबोन बना रहा है

जियो (Jio) की अगली बड़ी छलांग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में होगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Limited) की 49वीं वार्षिक आम बैठक में चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश डी. अंबानी ने कहा कि भारत को बाहर बने एआई (AI) का केवल उपभोक्ता नहीं बने रहना चाहिए। भारत को एआई का निर्माता और ग्लोबल लीडर बनना चाहिए।

 

मुकेश अंबानी ने कहा कि इसी सोच के साथ रिलायंस इंटेलिजेंस (Reliance Intelligence) को कंपनी के नए ग्रोथ इंजन के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रिलायंस इंटेलिजेंस का उद्देश्य उपभोक्ताओं, उद्यमों और सरकारों के लिए बड़े पैमाने पर एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्लेटफॉर्म और सेवाओं का लाभकारी बिजनेस तैयार करना है।

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जियो के चेयरमैन आकाश एम. अंबानी ने रिलायंस इंटेलिजेंस की सेवाओं और एआई उत्पादों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रिलायंस इंटेलिजेंस जामनगर में भारत का सॉवरेन एआई बैकबोन बना रहा है। यह इंफ्रास्ट्रक्चर रिलायंस की अपनी सौर ऊर्जा से संचालित होगा। इसकी पहली 120 मेगावाट क्षमता 2026 के अंत तक शुरू करने की योजना है। पूरी तरह चालू होने पर यह क्षमता दो लाख से अधिक एच100-इक्विवेलेंट जीपीयू तक बढ़ सकती है।

 

आकाश अंबानी ने कहा, “दुनिया के एआई प्लेटफॉर्म पहले अंग्रेजी में बनते हैं और बाद में उनका अनुवाद किया जाता है। इसके विपरीत, जियो भारतीय भाषाओं में नेटिव एआई बना रहा है। भारत का एआई भारतीय भाषा में बोलेगा। भारत के दिलों को जोड़ेगा। भारत की तस्वीर और तकदीर बदलेगा।”

 

रिलायंस इंटेलिजेंस 22 भारतीय भाषाओं में भरोसेमंद, किफायती और बहुभाषी एआई सेवाएं देने की तैयारी कर रहा है। इनमें जियोभारतआईक्यू, एआई व्यापार, जियोहेल्थआईक्यू, जियोलर्नआईक्यू और जियोकृषिआईक्यू जैसी सेवाएं शामिल होंगी। इन सेवाओं का उद्देश्य किसानों, छात्रों, दुकानदारों, परिवारों और छोटे कारोबारियों तक एआई की उपयोगिता पहुंचाना है।

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जियो अपने नेटवर्क में भी एआई को सीधे जोड़ रहा है। कंपनी जियो कॉल एजेंट पर काम कर रही है। इसके जरिए हर जियो कॉल में, ग्राहक की अनुमति से, एआई एजेंट जुड़ सकेगा। यह कॉल को ट्रांसक्राइब कर सकेगा, उसका सार बना सकेगा और जरूरत पड़ने पर खाना ऑर्डर करने, कैब बुक करने, टेबल रिजर्व करने या मीटिंग तय करने जैसे काम भी कर सकेगा।

 

आकाश अंबानी ने जियो की पांचवीं प्रतिबद्धता को भारत की तकनीक को दुनिया तक ले जाने से जोड़ा। उन्होंने कहा कि 5जी, फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस और एआई सेवाओं के लिए जियो में बनाया गया अपना डीप-टेक स्टैक अब चुनिंदा देशों में अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ इस्तेमाल के लिए तैयार है।

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रिलायंस ने गूगल, मेटा और एनवीडिया के साथ साझेदारियों का भी उल्लेख किया। कंपनी का कहना है कि इन साझेदारियों के जरिए वैश्विक तकनीक को भारतीय क्रियान्वयन, भारतीय इन्फ्रास्ट्रक्चर और भारत-प्रथम गवर्नेंस के साथ जोड़ा जाएगा।

 

जियो ने जिस तरह डेटा को हर भारतीय के लिए किफायती बनाया था, रिलायंस इंटेलिजेंस अब एआई को आसान, भरोसेमंद और किफायती बनाने की तैयारी कर रहा है। कंपनी का दावा है कि जब एआई सुलभ होगा, तब भारत केवल एआई युग में भागीदार नहीं रहेगा, बल्कि उसका नेतृत्व करेगा।

Reliance AGM 2026 Live Updates: मुकेश अंबानी ने RIL AGM को किया संबोधित, सभी की निगाहें Jio IPO, AI प्लान्स पर

Reliance AGM 2026 live: रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की 49वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) जल्द ही होने वाली है, जिसमें इन्वेस्टर कंपनी के कुछ खास ग्रोथ बिज़नेस के अपडेट्स पर करीब से नज़र रखेंगे।उम्मीद है कि इसका फोकस Jio IPO, नए एनर्जी सेगमेंट में प्रोग्रेस और कंपनी के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एम्बिशन पर रहेगा।

मार्केट रिलायंस की AI स्ट्रैटेजी पर भी करीब से नज़र रखेगा। कंपनी डेटा सेंटर इन्वेस्टमेंट और स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के ज़रिए अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर फुटप्रिंट को बढ़ा रही है, जिसमें हाल ही में मेटा के साथ जामनगर में घोषित 168 MW का AI-इनेबल्ड डेटा सेंटर प्रोजेक्ट भी शामिल है।

एक और जिस एरिया पर करीब से नज़र रखी जाएगी, वह है रिलायंस का नया एनर्जी बिज़नेस। इन्वेस्टर कंपनी के सोलर मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रोलाइज़र प्रोडक्शन के प्लान्स के साथ-साथ उसके कच्छ एनर्जी कॉम्प्लेक्स में डेवलपमेंट्स पर अपडेट्स मांगेंगे।

FY26 में देखे गए मार्जिन प्रेशर के बीच ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) और ऑयल एंड गैस बिज़नेस पर मैनेजमेंट कमेंट्री भी फोकस में रहेगी। इसके अलावा, मार्केट डिविडेंड, टेलीकॉम टैरिफ और ग्रुप की बैलेंस शीट पर किसी भी कमेंट पर नज़र रखेगा क्योंकि रिलायंस अपने कंज्यूमर और टेक्नोलॉजी-लेड बिजनेस को बढ़ाना जारी रखे हुए है।

आखिर में, इन्वेस्टर संभावित रिलायंस रिटेल IPO पर सिग्नल देखेंगे। रिटेल ब्रांच कंपनी के लिए एक बड़े ग्रोथ इंजन के तौर पर उभरी है, और लिस्टिंग प्लान या लॉन्ग-टर्म ग्रोथ टारगेट पर किसी भी कमेंट पर स्ट्रीट की करीबी नज़र रहेगी।

Accenture Q3 Results: एक्सेंचर के कमजोर नतीजों ने तोड़ी आईटी शेयरों की कमर, अब इस सेक्टर में क्या हो निवेश रणनीति?

Accenture Q3 Results: एक्सेंचर(Accenture) के कमजोर नतीजे और गाइडेंस ने आज आईटी सेक्टर की कमर तोड़ दी है। निफ्टी का आईटी इंडेक्स करीब 6 फीसदी फिसला है। आज निफ्टी और वायदा के सभी टॉप लूजर्स IT शेयर हैं। टेक महिंद्रा,इंफोसिस,TCS और एम्फैसिस 5-8 फीसदी तक लुढ़के हैं। कंपनी के तीसरी तिमाही के नतीजे काफी खराब रहे हैं। इसने अपना आगे का अनुमान भी घटा दिया है।

Accenture Q3 नतीजे (YoY)

तीसरी तिमाही में EPS 3.49 डॉलर से बढ़कर 3.80 डॉलर रहा है। रेवेन्यू 5.6% बढ़कर 18.76 अरब डॉलर रही है। Q3 में आय अनुमान से कम रही है। नई बुकिंग्स 1.9% घटकर 19.32 अरब डॉलर रही हैं। कंसल्टिंग बुकिंग्स 13% बढ़ी हैं। ऑपरेटिंग कैश फ्लो 3.79 अरब डॉलर रहा है। वहीं, मैनेज्ड सर्विसेज बुकिंग्स 15% घटी है। बड़े AI ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम्स बढ़ने की उम्मीद है।

Accenture Q4 गाइडेंस

रेवेन्यू 17.75-18.4 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। रेवेन्यू ग्रोथ 1 से 5% रहने का अनुमान है। रेवेन्यू गाइडेंस 18.47 अरब डॉलर के अनुमान से कम रहा है। Accenture के FY26 आउटलुक की बात करें तो FY26 के लिए आय ग्रोथ अनुमान घटाकर 3-4% कर दिया गया है, जो पहले 3-5% था। फेडरल असर को छोड़कर रेवेन्यू ग्रोथ 4-5% रहने का अनुमान (पहले 4-6% था)हैं। वहीं, Adj EPS आउटलुक बढ़ाकर 13.78-13.90 डॉलर किया गया है। ऑपरेटिंग और फ्री कैश फ्लो आउटलुक बकररार रखा गया है। वेस्ट एशिया युद्ध से रेवेन्यू पर 10 करोड़ डॉलर और सेल्स पर 40 करोड़ डॉलर का असर पड़ा है।

Accenture के नतीजों का असर

गुरुवार को Accenture का शेयर 18 फीसदी गिरा। यह इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट है। Accenture के नतीजों के बाद Cognizant में 10.5 फीसदी, Capgemini में 9 फीसदी, Infosys ADR में 10 फीसदी और Wipro ADR में 4 फीसदी की गिरावट हुई।

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IT शेयरों में अब क्या हो रणनीति?

सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल में कहा है कि निफ्टी IT मार्च में 28,500 तक गिरा था। वहां से 31,800 की रैली हुई जिसमें हमने फंसने से बचाया। कई लोग उस रैली में बुरी तरह फंस गए थे। उसके बाद वहां से फिर वन-वे गिरावट आई और 14 मई का क्लोज 27,360 था। फिर वहां से 31,116 तक की एक बड़ी रैली हुई जिसमें फिर हमने फंसने से बचाया, फिर भी कुछ लोग उस रैली में बुरे फंस गए। इसके बाद 16 जून तक वाली गिरावट में 27,800 की क्लोजिंग मिली। इस बार ये नजरिया लिया गया कि शायद एक डबल बॉटम बना है। अब जब तक 27,500 के ऊपर हैं,बहुत बड़ी गिरावट शायद ना हो। मगर लार्ज कैप IT से CNBC-आवाज ने हमेशा सतर्क ही किया है।

Accenture के नतीजे से एक बात साफ है कि ट्रेडिशनल IT बिजनेस पर दबाव है। अब IT कंपनियों को कुछ बोल्ड कदम उठाने होंगे। जैसे HCLTech ने Sarvam में निवेश किया और Coforge ने कुछ बड़े अधिग्रहण किए। मगर अब आज की गिरावट के बाद शॉर्ट करना थोड़ा रिस्की होगा। आज की क्लोजिंग साफ कर देगी कि IT में डबल बॉटम बना या नहीं।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

क्या टेलीग्राम पर पाबंदी से नीट परीक्षा सही होगी?

क्या टेलीग्राम पर पाबंदी से नीट परीक्षा सही होगी?

सरकार को तकनीकी, प्रशासनिक और कानूनी सुधारों के साथ आगे बढ़ना चाहिए ताकि नीट जैसी परीक्षाएं मेरिट का प्रतीक बनें, न कि विवाद का। छात्रों का भविष्य दांव पर है, ऐसे में आधी-अधूरी कोशिशें पर्याप्त नहीं हो सकती। पूर्ण सुधार से ही विश्वास बहाल होगा।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार द्वारा NEET-UG 2026 के पुनर्परीक्षा 21 जून से ठीक पहले ‘टेलीग्राम’ ऐप पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है। मेडिकल की परीक्षा प्रक्रिया में बढ़ती डिजिटल धोखाधड़ी और पेपर लीक की समस्या को लेकर सरकार का यह कदम गंभीर चिंता का प्रतीक है। यह कदम सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत लिया गया है, जो सार्वजनिक व्यवस्था के हित में किया गया है। एनटीए के अनुसार, पेपर लीक का  गिरोह टेलीग्राम चैनलों का इस्तेमाल फर्जी पेपर बेचने, गलत सूचना फैलाने और अभ्यर्थियों को ठगने के लिए कर रहे थे। इसलिए सरकार को ऐसा कदम उठाना पड़ा।

यह प्रतिबंध 22 जून तक है, जो परीक्षा के दिन और उसके तुरंत बाद को कवर करता है। साथ ही, टेलीग्राम के मैसेज एडिटिंग फीचर को भी 30 जून तक अक्षम कर दिया गया है ताकि फर्जी सबूत न बनाए जा सकें। यह फैसला पिछले मई के पेपर लीक कांड के बाद आया है, जिसमें परीक्षा रद्द करनी पड़ी और इस मामले पर सीबीआई जांच चल रही है। सरकार ने परीक्षा पेपर की सुरक्षित डिलीवरी के लिए भारतीय वायुसेना की मदद ली है, जो सुरक्षा की दिशा में सकारात्मक कदम है।

परंतु यदि इस समस्या का विश्लेषण किया जाए तो लीक रोकने में यह कदम कितना प्रभावी साबित होगा? नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में पेपर लीक एक पुरानी समस्या है, जो छात्रों के भविष्य और मेरिट को नष्ट करती है। वहीं ‘टेलीग्राम’ ऐप की कुछ ऐसी विशेषताएं हैं जो अन्य ऐप में नहीं पाई जाती। मिसाल के तौर पर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, बड़े ग्रुप/चैनल, फाइल शेयरिंग, मैसेज एडिटिंग और अपेक्षाकृत कम मॉनिटरिंग। यह सभी विशेषताएँ इस ऐप को धोखेबाजों के लिए आकर्षक बनाती हैं। पिछले घटनाक्रमों में ऐसे चैनल फर्जी पेपर बेचते पाए गए, जिससे अभ्यर्थी लाखों रुपये गंवा बैठे और परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे।

सरकार का यह कदम तात्कालिक रूप से लीक की संभावना को कम कर सकता है। प्रतिबंध के दौरान ऐसे चैनल एक्सेसिबल नहीं रहेंगे, जिससे रीयल-टाइम शेयरिंग रुक सकती है। लेकिन स्वतंत्र नजरिये से देखें तो यह पूरी तरह प्रभावी नहीं है। पेपर लीक मुख्य रूप से स्रोत (पेपर सेटर्स, प्रिंटिंग प्रेस, ट्रांसपोर्ट) से शुरू होता है, न कि सिर्फ सोशल मीडिया से। सोशल मीडिया तो केवल एक माध्यम है। टेलीग्राम बंद होने पर पेपर लीक गिरोह व्हाट्सएप, सिग्नल, एन्क्रिप्टेड ईमेल, डार्कवेब या यहां तक कि ऑफलाइन नेटवर्क (USB, हार्ड ड्राइव) का सहारा भी ले सकते हैं। टेलीग्राम सीईओ पावेल दुरोव ने भी कहा है कि ऐसा करने से समस्या जड़ से नहीं सुलझेगी, बल्कि अन्य प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट हो जाएगी।

ऐसा करने से इन पेपर लीक गिरोह के अलावा, 15 करोड़ से ज्यादा भारतीय यूजर्स प्रभावित होंगे, जो वैध संचार (बिजनेस, शिक्षा, परिवार) के लिए इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं। विपक्षी नेता राहुल गांधी समेत कई लोगों ने इसे आलोचना का विषय बनाया है। यह कदम डिजिटल स्वतंत्रता और परीक्षा सुरक्षा के बीच संतुलन की चुनौती को उजागर करता है।

तो सवाल उठता है कि लीक रोकने के लिए सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए? इस ऐप पर प्रतिबंध अस्थायी राहत है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए बहुआयामी रणनीति जरूरी है। जैसे कि स्रोत-स्तरीय सुरक्षा: पेपर सेटिंग, प्रिंटिंग और ट्रांसपोर्ट को पूरी तरह डिजिटल और बायोमेट्रिक निगरानी में रखें। वायु सेना जैसी व्यवस्था को स्थायी बनाएं, GPS ट्रैकिंग और सील्ड बॉक्स को अनिवार्य करें। साइबर इंटेलिजेंस और मॉनिटरिंग: NTA और MeitY को AI-आधारित टूल्स से सोशल मीडिया, डार्क वेब और एन्क्रिप्टेड ऐप्स पर निरंतर निगरानी करनी चाहिए। बड़े चैनल्स/ग्रुप्स की प्रोएक्टिव ब्लॉकिंग और गिरोहों पर छापेमारी की जानी चाहिए। परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता: प्रश्न बैंक का डिजिटलीकरण, रैंडमाइज्ड पेपर, सीसीटीवी और जामर का व्यापक इस्तेमाल किया जाए। अभ्यर्थियों के लिए व्हिसलब्लोअर मैकेनिज्म और त्वरित शिकायत निस्तारण पर भी विचार किया जाना चाहिए। शिक्षा सुधार: कोचिंग माफिया पर सख्ती, मेरिट-आधारित सिलेक्शन को मजबूत करें ताकि लीक का आर्थिक प्रलोभन कम हो। कानूनी और संस्थागत मजबूती: लीक को राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा मानकर सख्त सजा (जैसे UFSPA जैसी विशेष प्रावधान) और फास्ट-ट्रैक कोर्ट होना चाहिए। एनटीए को स्वायत्त और जवाबदेह बनाएं जिससे कि ज़िम्मेदार व्यक्ति को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले।

सरकार पूर्ण गारंटी नहीं दे सकती, क्योंकि कोई भी सिस्टम 100% मज़बूत नहीं होता। लेकिन बेहतर तैयारी से जोखिम को न्यूनतम किया जा सकता है। अगर फिर भी लीक होता है, तो जिम्मेदारी एनटीए, शिक्षा मंत्रालय, MeitY और संबंधित राज्य एजेंसियों की होगी। ऐसे में सीबीआई या विशेष जांच टीम तुरंत सक्रिय होनी चाहिए।

सरकार को इस संदर्भ में ऐसा कानून बनाना कहिए जहाँ दोषी पाए जाने पर, फिर वो चाहे कोई भी हो, पेपर सेटर, ट्रांसपोर्टर, गिरोह सदस्य या भ्रष्ट अधिकारी, ना सिर्फ़ कठोर कार्रवाई हो, बल्कि गिरफ्तारी, संपत्ति जब्ती, नौकरी से बर्खास्तगी और लंबी जेल तक का प्रावधान हो। इस क़ानून में अभ्यर्थियों को मुआवजा और पुनर्परीक्षा का अधिकार मिलना चाहिए। इसके साथ ही पारदर्शी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि सरकार पर जनता का विश्वास बहाल हो।

टेलीग्राम प्रतिबंध एक आवश्यक लेकिन अपर्याप्त कदम है। यह परीक्षा की अखंडता बचाने की दिशा में सकारात्मक अवश्य है, परंतु इस उद्योग के जड़ों (भ्रष्टाचार, कमजोर सुरक्षा और माफिया नेटवर्क) को नहीं छूता। सरकार को तकनीकी, प्रशासनिक और कानूनी सुधारों के साथ आगे बढ़ना चाहिए ताकि नीट जैसी परीक्षाएं मेरिट का प्रतीक बनें, न कि विवाद का। छात्रों का भविष्य दांव पर है, ऐसे में आधी-अधूरी कोशिशें पर्याप्त नहीं हो सकती। पूर्ण सुधार से ही विश्वास बहाल होगा।