आदिवासी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं द्रौपदी मुर्मु

आदिवासी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं द्रौपदी मुर्मु

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 20 जून को अपना 68वां जन्मदिन मनाएंगी। आदिवासी समाज के साथ ही पूरे देश के लिए द्रौपदी मुर्मु प्रेरणास्रोत हैं। हालांकि, जीवन यात्रा के दौरान दो जवान बेटे उनकी आंखों के सामने दुनिया को छोड़कर चले गए। बाद में जीवनसाथी की भी मौत हो गई। समय बार-बार उनका इम्तिहान ले रहा था। यह गम ऐसा था, जो किसी को भी अंदर से तोड़ सकता था लेकिन उन्होंने आत्मविश्वास और हौसलों के साथ इन हालातों का सामना किया और खुद को मजबूत किया। अध्यात्म के सहारे खुद को इतना सबल बनाया कि मुश्किलें उनके सामने सिर झुकाने लगीं। देश की प्रथम नागरिक और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के जीवन की कहानी सच में प्रेरणादायक है।

ओडिशा के एक छोटे से आदिवासी गांव से निकलकर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचना किसी के लिए भी आसान नहीं था। खासकर सीमित संसाधन, सामाजिक चुनौतियां और कठिन हालात में उन्होंने जिस तरह शिक्षा को अपना हथियार बनाया और आगे बढ़ती रहीं, वह उनकी मजबूत  इच्छाशक्ति का उदाहरण है। अपने गांव से कॉलेज जाने वाली पहली छात्रा से लेकर राष्ट्रपति बनने तक उनका सफर भी लोकतंत्र की ताकत को दिखाता है।

द्रौपदी मुर्मु का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के दूरस्थ मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव में एक संथाल आदिवासी परिवार में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उपरबेड़ा प्राथमिक विद्यालय में हुई। अपने दृढ़ संकल्प के माध्यम से और शिक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य से वे 8वीं कक्षा से आगे की पढ़ाई के लिए भुवनेश्वर गईं। वह मैट्रिक की परीक्षा पास करने और कला स्नातक की उपाधि प्राप्त करने वाली अपने गांव की पहली बालिका बनीं। उन्होंने साल 1979 में भुवनेश्वर के रमादेवी महिला महाविद्यालय से राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र में कला स्नातक की उपाधि प्राप्त की। 1980 में उनकी शादी श्यामचरण मुर्मु से हुई, जो एक बैंक अधिकारी थे।

उनके प्रारंभिक जीवन को संघर्ष, धैर्य और उनके परिवार से मिले मजबूत नैतिक मूल्यों से आकार मिला। उन्होंने अनेक सामाजिक और वित्तीय कठिनाइयों का सफलतापूर्वक सामना किया और वे आदिवासी समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनीं। इन प्रारंभिक संघर्ष भरे वर्षों में उनकी सार्वजनिक सेवा और नेतृत्वशीलता से प्राप्त उपलब्धियों की नींव रखी गई।

एक समय ऐसा आया जब 2009 में द्रौपदी मुर्मु डिप्रेशन में चली गई थीं। 25 साल की उम्र में उनके बेटे की असमय मौत हो गई थी, जिससे उन्हें गहरा सदमा लगा था और वे डिप्रेशन में जा चुकी थीं। खुद को हिम्मत देने के लिए उन्होंने आध्यात्म का रास्ता चुना और वे ब्रह्माकुमारी संस्था के साथ जुड़ गईं। वह धीरे-धीरे डिप्रेशन से बाहर आ ही रही थीं लेकिन समय ने उनकी एक और परीक्षा ले ली। दुख का पहाड़ ऐसा टूटा था कि सिर्फ चार साल के बाद 2013 में एक अन्य दुर्घटना में द्रौपदी मुर्मु के दूसरे बेटे का भी निधन हो गया था।

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दोनों बेटों का निधन उनके लिए किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं था लेकिन दुखों का यह दौर यहीं समाप्त नहीं हुआ। दूसरे बेटे की मृत्यु के कुछ दिनों बाद ही उनकी मां और उनके भाई का निधन हो गया था। वे इस गम को भुला पातीं, उसके पहले 2014 में पति श्यामचरण मुर्मु भी दुनिया को छोड़कर चले गए। इस तरह कुछ वर्षों में ही धीरे-धीरे परिवार के कई सदस्य उनको छोड़कर चले गए। हालांकि, उन्होंने आध्यात्म के साथ योग शुरू किया, ताकि खुद डिप्रेशन से बाहर आ सकें। उन्होंने इसके खिलाफ तब तक लड़ाई लड़ी जब तक उन्होंने उसे हरा नहीं दिया।

अपने कष्टसाध्य व्यक्तिगत जीवन के बावजूद द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्र निर्माण के प्रति गहरे समर्पण से कार्य किया है, जिससे उनकी समय के अनुसार ढल जाने की असाधारण क्षमता का पता चलता है। उनकी दृढ़ता और उद्देश्यपूर्ण यात्रा से ऐसे समावेशी और सशक्त भारत बनाने की प्रेरणा मिलती रहेगी जहां हर व्यक्ति की गरिमा का सम्मान हो और सबको आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध हों।

द्रौपदी मुर्मु जमीनी स्तर पर लोकतंत्र से गहराई से जुड़ी रही हैं। उन्होंने समावेश, प्रतिसंवेदना और हाशिए पर पड़े लोगों के उत्थान के प्रति दृढ़ संकल्प रखते हुए शासन के तीनों स्तरों पर अपनी सेवाएं दी हैं।

मुर्मू ने 1997 में रायरंगपुर नगर पंचायत में पार्षद के तौर पर अपना राजनीतिक करियर शुरू किया। 2000 में, वह ओडिशा में भाजपा-बीजेडी गठबंधन सरकार के दौरान मंत्री बनीं। उन्हें 2007 में ओडिशा विधानसभा की ओर से सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए पंडित ‘नीलकंठ दास-सर्वश्रेष्ठ विधायक’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

वह ओडिशा के रायरंगपुर से भाजपा के टिकट पर दो बार (2000 और 2009) विधायक रहीं। 2009 के चुनावों में जब बीजेडी ने भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया और सीएम नवीन पटनायक ने बड़ी जीत हासिल की, तब भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी।

द्रौपदी मुर्मु ने ओडिशा सरकार के परिवहन, वाणिज्य, मत्स्य पालन और पशुपालन मंत्रालयों का कामकाज संभाला। वह ओडिशा में भाजपा के अनुसूचित जनजाति मोर्चा की उपाध्यक्ष और बाद में अध्यक्ष रहीं। मुर्मू को 2010 में भाजपा की मयूरभंज (पश्चिम) इकाई का जिला अध्यक्ष चुना गया और 2013 में वह फिर से चुनी गईं। उसी साल उन्हें भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी (एसटी मोर्चा) का सदस्य भी बनाया गया। 2015 में उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया और वे इस पद पर पहुंचने वाली पहली आदिवासी नेता बनीं।

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Defence Stock: भारत फोर्ज की बड़ी डिफेंस डील, अमेरिका की AM General के साथ मिलकर बनाएगी घातक हथियार

Defence Stock: घरेलू डिफेंस भारत फोर्ज की डिफेंस यूनिट Kalyani Strategic Systems Ltd (KSSL) ने अमेरिकी आर्मी के लिए गाड़ियां बनाने वाली कंपनी AM General के साथ रणनीतिक साझेदारी की है। इस समझौते पर फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित Eurosatory डिफेंस एक्सपो के दौरान हस्ताक्षर किए गए।

दोनों कंपनियों का लक्ष्य दुनिया भर की सेनाओं को मोबाइल आर्टिलरी गन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है। फोकस 155mm आर्टिलरी सिस्टम पर रहेगा। इन्हें अलग-अलग इलाकों और हर तरह के मौसम में आसानी से तैनात किया जा सकेगा।

क्या बनाएंगी दोनों कंपनियां?

इस साझेदारी के तहत AM General ने अमेरिकी सेना के Mobile Tactical Cannon (MTC) प्रोग्राम के लिए प्रस्ताव भी जमा किया है।

इस प्रस्ताव में KSSL के Mounted Artillery Gun (MArG) प्लेटफॉर्म पर आधारित 155mm Mobile Tactical Cannon सिस्टम विकसित करने की योजना है। अगर अमेरिकी सेना इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो इसकी डिलीवरी 2027 में शुरू हो सकती है।

MArG सिस्टम की खासियत क्या है?

दोनों कंपनियों के मुताबिक MArG प्लेटफॉर्म में 52-कैलिबर की 155mm तोप लगी है। इसमें रिकॉइल कम करने वाली तकनीक दी गई है। साथ ही ऑटोमेटेड लोड-असिस्ट सिस्टम और ऑल-वेदर फायर कंट्रोल सिस्टम भी मौजूद है।

यह सिस्टम 40 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक स्टैंडर्ड हाई-एक्सप्लोसिव गोले दाग सकता है। इसकी एक और बड़ी खासियत यह है कि यह 20 से ज्यादा प्रोजेक्टाइल और प्रोपेलेंट चार्ज अपने साथ ले जा सकता है।

Bharat Forge ने क्या कहा?

Bharat Forge के वाइस चेयरमैन और जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अमित कल्याणी ने कहा कि AM General के साथ यह साझेदारी कंपनी की एडवांस्ड आर्टिलरी तकनीक और क्षमताओं पर भरोसे को दिखाती है।

उन्होंने कहा कि कंपनी आधुनिक युद्ध की जरूरतों के मुताबिक तकनीक विकसित करने और युद्ध में परखे गए समाधान देने के लिए प्रतिबद्ध है।

AM General ने क्या कहा?

AM General के प्रेसिडेंट और CEO जॉन चैडबोर्न ने कहा कि KSSL के साथ यह साझेदारी मित्र देशों और उनके सैनिकों को बेहतर सैन्य क्षमताएं उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम है।

उन्होंने कहा कि कंपनी की पेटेंटेड सॉफ्ट रिकॉइल तकनीक और KSSL के आधुनिक प्लेटफॉर्म का मेल युद्धक्षेत्र में बड़ा फायदा दे सकता है। इससे सेनाओं को नई और अधिक प्रभावी क्षमता मिलेगी।

वैश्विक बाजार पर नजर

दोनों कंपनियों का कहना है कि इस साझेदारी का मकसद MArG प्लेटफॉर्म की वैश्विक पहुंच बढ़ाना है। साथ ही दुनिया भर में मोबाइल आर्टिलरी सिस्टम की बढ़ती मांग को पूरा करना भी इसका लक्ष्य है।

कंपनियों को उम्मीद है कि यह प्लेटफॉर्म मित्र देशों और साझेदार देशों की सेनाओं के बीच अच्छी मांग हासिल कर सकता है।

शेयर का क्या रहा हाल?

Bharat Forge का शेयर 18 जून को NSE पर 0.85% की गिरावट के साथ 2,017.20 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में स्टॉक 43.32% चढ़ा है। वहीं, 1 साल में करीब 55% रिटर्न दिया है। इसका मार्केट कैप 96.67 हजार करोड़ रुपये है।

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समझौते के बाद अमेरिका और ईरान आमने-सामने, 19 जून को होगी पहली वार्ता

समझौते के बाद अमेरिका और ईरान आमने-सामने, 19 जून को होगी पहली वार्ता

संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक पर्वतीय रिसॉर्ट में बैठक की योजना बना रहे हैं। स्विस विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि यह बैठक उनके समझौते को लागू करने के लिए शुरुआती बातचीत के तौर पर होगी।

मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर का वह स्वागत करता है। यह क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि फिलहाल बैठक के एजेंडे और अन्य विवरणों के बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी जा सकती।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान के साथ हुए इस समझौते का जोरदार बचाव किया। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक कूटनीतिक उपलब्धि बताया, जिसके कारण मध्य पूर्व में बड़े युद्ध की आशंका टल गई, होर्मुज स्‍ट्रेट फिर से खुल गया और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से हमेशा के लिए रोका जा सका।

फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद हुई एक लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कई बार इस समझौते को बड़ी सफलता बताया। उनका कहना था कि यह सैन्य दबाव और कूटनीति, दोनों के मेल से संभव हो पाया।

ट्रंप ने कहा रविवार को हमने ईरान के साथ एक ऐसा समझौता किया जिसने हमारे सभी लक्ष्य पूरे कर दिए।

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उन्होंने कहा क‍ि मौजूदा संघर्ष को खत्म करना, होर्मुज स्‍ट्रेट को फिर से खोलना और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना ही हमारा मुख्य उद्देश्य था।

ट्रंप का कहना था कि अगर सैन्य कार्रवाई जारी रहती, तो खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ती और वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित होते।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ शर्तों के साथ अमेरिका ईरान के सिविलियन परमाणु कार्यक्रम को स्वीकार कर सकता है। यह अब तक के सबसे स्पष्ट संकेतों में से एक माना जा रहा है कि वॉशिंगटन आगे ईरान के साथ बातचीत को किस दिशा में ले जा सकता है।

जब उनसे पूछा गया कि अगर ईरान नए समझौते का पालन करता है, तो क्या उसे नागरिक परमाणु कार्यक्रम जारी रखने की अनुमति मिल सकती है, तो ट्रंप ने कहा कि यह एक जटिल मुद्दा है।

उन्होंने कहा मैं उनसे हमेशा कहता रहा हूं कि दुनिया में आपके पास शायद तीसरा सबसे बड़ा तेल भंडार है, फिर आपको परमाणु ऊर्जा की जरूरत ही क्या है?

उन्होंने कहा क‍ि बिजली उत्पादन के लिए कुछ हद तक परमाणु ऊर्जा की जरूरत पड़ सकती है।

ट्रंप ने कहा कि वह लंबे समय से ईरान के इस दावे पर सवाल उठाते रहे हैं कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण और ऊर्जा उत्पादन के उद्देश्यों के लिए है, क्योंकि देश के पास पहले से ही तेल और गैस के विशाल भंडार मौजूद हैं।

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ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते पर लगी मुहर

ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते पर लगी मुहर

ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से जारी संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच एक समझौता किया गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने डिजिटल माध्यम से ईरान-अमेरिका समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस में अपने समकक्ष इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए। 

व्हाइट हाउस के उप प्रमुख स्टाफ डैन स्कैविनो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आज शाम फ्रांस के वर्सेल्स में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा आयोजित डिनर से ठीक पहले, विदेश मंत्री मार्को रुबियो को ईरान समझौता ज्ञापन प्राप्त हुआ, जिसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर किए।

रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट ने बुधवार को फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को कमजोर करते हुए और कूटनीति के लिए रास्ता खोलते हुए वह हासिल किया है, जिसे कई लोग असंभव मानते थे।

श्मिट ने कहा कि ईरान ने पहली बार परमाणु हथियार विकसित नहीं करने का वादा किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समझौता भरोसे के बजाय सत्यापन के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए।

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अमेरिकी मीडिया संस्थान न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के साथ ईरान की शुरुआती शांति व्यवस्था तेहरान के लिए लेबनान में हिज्बुल्लाह की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने का मार्ग खोल सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि समझौते के बाद ईरान को अनफ्रीज किए गए फंड और तेल सौदों से धन प्राप्त होना शुरू हो सकता है।

अमेरिकी मीडिया न्यूयॉर्क पोस्ट ने न्यूज एजेंसी के सूत्रों के हवाले से बताया कि इस एमओयू के तहत, ईरान को युद्ध के बाद के निवेश, प्रतिबंधों से राहत और अनफ्रीज्ड फंड से सैकड़ों अरबों का फायदा होगा। ऐसे में ईरान रिकंस्ट्रक्शन फंड का इस्तेमाल लेबनान में अपने बुरी तरह से तबाह हो चुके टेरर प्रॉक्सी को सहारा देने के लिए करेगा।

दो क्षेत्रीय राजनयिकों और दो वरिष्ठ लेबनानी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि तेहरान ने हिज्बुल्लाह को जल्द वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का वादा किया है, जिससे समूह को लेबनान में अपनी सैन्य और राजनीतिक गतिविधियों के पुनर्गठन में मदद मिल सकती है।

हिज्बुल्लाह के संचार कार्यालय ने पुष्टि की है कि ईरान संगठन को सार्वजनिक रूप से समर्थन देता है। अमेरिकी वित्त विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वर्ष लगभग एक ​​बिलियन डॉलर का ट्रांसफर भी इसमें शामिल था। कार्यालय ने कहा कि ईरान का समर्थन जारी रहेगा, चाहे फंड की वापसी से जुड़ी व्यवस्थाएं कुछ भी हों।

अमेरिका ने कहा है कि ईरान अपने अनफ्रीज किए गए फंड का उपयोग किसी भी आतंकवादी संगठन के वित्तपोषण के लिए नहीं कर सकता। साथ ही चेतावनी दी गई है कि समझौते का उल्लंघन होने पर धनराशि को फिर से फ्रीज किया जा सकता है।

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