ममता बनर्जी के साथ साये की तरह रहने वाले पुलिस वालों को हटाया, क्या है इनसाइड स्टोरी?

पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहे राजनीतिक संकट के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने उनके पुराने सुरक्षा अधिकारियों (PSO) को हटाकर नई टीम तैनात की, लेकिन ममता बनर्जी ने नए सुरक्षाकर्मियों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

टीएमसी के मुताबिक, ममता बनर्जी के साथ करीब 20 साल से जुड़े सुरक्षा अधिकारी अचानक हटा दिए गए हैं। इसके बाद उनके कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर फिलहाल कोई आधिकारिक सरकारी सुरक्षा तैनात नहीं है। पार्टी का दावा है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए दो निजी गार्ड लगाए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी के पांच पीएसओ उस समय से उनके साथ थे जब वह केंद्र सरकार में रेल मंत्री थीं। बाद में 2011 में मुख्यमंत्री बनने के बाद इन अधिकारियों को राज्य पुलिस व्यवस्था में शामिल कर लिया गया था। हाल ही में उन्हें उनकी मूल यूनिट में वापस भेजने के निर्देश दिए गए, जबकि कोलकाता पुलिस ने उनकी जगह तीन नए सुरक्षाकर्मी भेजे। ममता ने इन नए अधिकारियों को स्वीकार नहीं किया।

मामला तब चर्चा में आया जब टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ममता बनर्जी के पुराने सुरक्षा अधिकारी हटा दिए गए हैं और उनके घर के बाहर कोई सुरक्षा तैनात नहीं है। उन्होंने कहा कि वह पूरी रात अपने वाहन के साथ घर के बाहर मौजूद रहेंगे, ताकि कोई अनधिकृत व्यक्ति परिसर में प्रवेश न कर सके।

टीएमसी ने इस कदम को “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह ममता बनर्जी को अलग-थलग करने और उनकी सुरक्षा को खतरे में डालने की सोची-समझी कोशिश है।

टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि किसी पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा राजनीति का नहीं, बल्कि सरकार की संस्थागत जिम्मेदारी का विषय है।

वहीं टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कहा कि इतने वरिष्ठ नेता को बिना जानकारी दिए लंबे समय से जुड़े सुरक्षाकर्मियों को हटाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु से पुराने सुरक्षा इंतजाम बहाल करने और ममता के दो पुराने पीएसओ को वापस लाने की मांग की।

टीएमसी का आरोप है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा समर्थित नई सत्ता व्यवस्था आने के बाद से ममता बनर्जी के आवास के आसपास सुरक्षा व्यवस्था धीरे-धीरे कम की गई है। पहले हरिश चटर्जी स्ट्रीट पर लगे बैरिकेड हटाए गए और अब उनके पुराने सुरक्षाकर्मियों को भी हटा दिया गया है।

इसके अलावा, ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर की सुरक्षा भी सरकार बदलने के बाद वापस ले ली गई थी।

फिलहाल इस मुद्दे पर राज्य सरकार की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन टीएमसी इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बताकर भाजपा और राज्य प्रशासन पर लगातार निशाना साध रही है।

West Bengal News Update: ‘ये राम राज्य है…’; हाथों में हथकड़ी और कमर में रस्सी… पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद TMC के बाहुबलियों का सरेआम निकाला जुलूस

West Bengal News Update: तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान को छुड़ाने के लिए पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा थाने पर धावा बोलने का प्रयास करने के आरोप में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पश्चिम बंगाल पुलिस ने 9 दिन पहले जहांगीर खान को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें उनके गढ़ फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में तीन बार घुमाया गया। इसके जवाब में, खान के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किए और TMC नेता को छुड़ाने के लिए पुलिस स्टेशन पर धावा बोलने की कोशिश भी की।

जहांगीर खान अकेले ऐसे नेता नहीं हैं जिन्हें गिरफ्तारी के बाद घुमाया गया है। पश्चिम बंगाल में बदलते राजनीतिक माहौल के बीच, कई TMC नेताओं और उनके साथियों को पुलिस या पैरामिलिट्री फ़ोर्स ने उनके गढ़ों में सबके सामने घुमाया है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, इनमें से कुछ TMC नेताओं को सिर्फ़ अंडरवियर पहने, हथकड़ी और कमर पर बंधी रस्सी के साथ देखा गया। कुछ वायरल वीडियो में नेताओं को उकड़ू बैठकर कान पकड़े और सबके सामने माफी मांगते हुए घुमाया जा रहा था।

‘जानबूझकर बदनाम या अपमानित न करे’

इस तरह सबके सामने घुमाए जाने की एक घटना के बाद, कलकत्ता हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने इस घटना पर नाराज़गी जताई। अदालत ने राज्य सरकार से उन हालात और कानूनी प्रावधानों के बारे में रिपोर्ट मांगी जिनके तहत ऐसा हुआ। कोर्ट ने माना कि कानून के मुताबिक लोगों को गिरफ़्तार किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उन्हें जानबूझकर बदनाम या सबके सामने अपमानित नहीं किया जा सकता।

अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए पुलिस ने कहा कि यह पूरी तरह से जांच से जुड़ा था। इसका मकसद अपराध वाली जगह पर घटना को फिर से दोहराकर देखना (reconstruction of crime scenes) था। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सीनियर IPS अधिकारी ने कहा कि पुलिस बहुत ही नाजुक स्थिति में काम कर रही थी।

TMC ने ‘मानवाधिकारों के उल्लंघन’ का आरोप लगाया, BJP ने इसे ‘राम राज्य’ बताया

इस बीच, TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी अपने नेताओं को सबके सामने घुमाने के कथित मामले को लेकर पुलिस के ख़िलाफ कानूनी कार्रवाई करने की योजना बना रही है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए उन्होंने कहा, “यह आर्टिकल 21 का पूरी तरह से उल्लंघन और मानवाधिकारों का हनन है।”

वहीं, हावड़ा उत्तर से बीजेपी विधायक उमेश राय ने एक जनसभा में टीएमसी के आकाश सिंह की गिरफ्तारी पर कहा, “एक समय था जब वह 100 बाइकों के काफिले के साथ सड़कों पर घूमता था और लोगों को डराता-धमकाता था। आज उसी आदमी को कमर में रस्सी बांधकर घुमाया जा रहा है। असली राम राज्य ऐसा ही होता है।”

किन-किन TMC नेताओं को घुमाया गया?

आकाश सिंह

बीजेपी सरकार के सत्ता संभालने के चार दिन बाद 13 मई को हावड़ा की गोलाबाड़ी पुलिस ने आकाश सिंह को गिरफ्तार किया। फिर उसका सिर मुंडवाकर सिर्फ बनियान और अंडरवियर पहनाकर इलाके में घुमाया। स्थानीय स्तर पर ‘नॉर्थ हावड़ा के डॉन’ के तौर पर पहचाने जाने वाले आकाश पर लगभग 20 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें पुलिस पर गोली चलाने और एक सब-इंस्पेक्टर को घायल करने, 2021 के बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान बम हमले करने, जबरन वसूली और हत्या की कोशिश जैसे आरोप शामिल हैं।

अभिजीत रॉय

उत्तर 24 परगना के कांचरापाड़ा के रहने वाले स्थानीय TMC युवा नेता रॉय को 28 मई को अरेस्ट किया गया था। इसके बाद उन्हें कमर में रस्सी बांधकर इलाके में घुमाया गया। उस समय वहां भारी भीड़ जमा थी और लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। पुलिस के मुताबिक, रॉय पर बिजपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज जबरन वसूली के एक मामले में आरोप है।

साथ ही, उन पर म्युनिसिपल सफाई कर्मचारियों के लिए बनी प्लास्टिक की बाल्टियों समेत अन्य सामानों का गैर-कानूनी तरीके से स्टॉक करने और उन्हें दोबारा बेचने का भी आरोप है। पुलिस ने बताया कि BJP के सत्ता में आने के बाद रॉय छिप गए थे। आखिरकार उन्हें पूर्वी मिदनापुर के मंदारमणि से गिरफ्तार किया गया।

जहांगीर खान

फाल्टा और डायमंड हार्बर में TMC के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले जहांगीर खान ने बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान एक पुलिस अधिकारी के साथ सार्वजनिक टकराव के बाद पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। फाल्टा से तत्कालीन TMC उम्मीदवार ने एक आक्रामक बयान में खुद की तुलना ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘पुष्पा’ के मुख्य किरदार से करते हुए कहा था कि वह कभी किसी के सामने नहीं झुकेंगा।

फाल्टा एकमात्र विधानसभा क्षेत्र था जहां दोबारा मतदान (री-पोल) हुआ था। हालांकि, जब तक मतदान हुआ, पश्चिम बंगाल का राजनीतिक माहौल बदल चुका था। खान ने चुनाव से हटकर TMC को चौंका दिया था। इसके बाद पार्टी में हुई फूट के दौरान कई नेताओं ने खान के प्रति नेतृत्व के नरम रवैये को अपनी नाराजगी की एक वजह बताया था। शुरुआत में डकैती और हत्या की कोशिश के मामलों में नाम आने के बाद, खान पर जबरन वसूली और अन्य आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए।

गिरफ्तारी के बाद खान को तीन अलग-अलग मौकों पर फाल्टा में घुमाया गया था। एक वायरल वीडियो में उन्हें पुलिस की निगरानी में अपने कान पकड़कर सबके सामने माफी मांगते हुए देखा गया। पुलिस का कहना है कि यह सब क्राइम सीन को फिर से समझने (रीकंस्ट्रक्शन) के लिए किया गया था। साथ ही दावा किया कि खान ने खुद ही अपने कान पकड़े, उठक-बैठक की और जनता से माफ़ी मांगी।

गुड्डू अंसारी

उत्तर 24 परगना के कमारहाटी के एक जाने-माने स्थानीय नेता, अंसारी को वरिष्ठ TMC नेता और कमारहाटी के विधायक मदन मित्रा का करीबी सहयोगी माना जाता था। मित्रा उन पार्टी नेताओं में से एक थे जो पार्टी में बंटवारे के बाद भी ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहे। अंसारी को 31 मई को गिरफ्तार किया गया और बाद में हथकड़ी पहनाकर कमारहाटी में घुमाया गया।

पुलिस का आरोप है कि अंसारी अलग-अलग तरह के कारोबार में कई सिंडिकेट चलाते थे। वह इलाके पर अपना दबदबा बनाए रखने के लिए हथियारों के दम पर लोगों को डराते-धमकाते थे। बेलघरिया पुलिस के एक अधिकारी ने इस तरह सबके सामने घुमाने का बचाव करते हुए कहा कि इसका मकसद अपराधियों को कड़ी चेतावनी देना था।

शमीम अहमद

‘गब्बर’ के नाम से पहचाने जाने वाले अहमद, शिबपुर में वार्ड नंबर 36 के अध्यक्ष हैं। उन्हें TMC के एक पूर्व मंत्री का करीबी माना जाता है। उनकी पत्नी, शमीमा बानू, पहले इसी वार्ड से पार्षद रह चुकी हैं। अहमद को 21 मई को मुंबई के चेंबूर से गिरफ्तार किया गया और बाद में कोलकाता पुलिस उन्हें दक्षिण हावड़ा के संकराइल में भीड़-भाड़ वाले बाज़ार में कमर से रस्सी बांधकर घुमाती हुई ले गई। पुलिस ने उन पर 7 मई को हावड़ा माइनॉरिटी सेल के अध्यक्ष सिकंदर खान के नेतृत्व में BJP की जीत के बाद निकाली गई रैली पर हमले में शामिल होने का आरोप लगाया है। इस हमले में तीन लोग घायल हो गए थे।

शाहिन मोल्ला

शाहिन मोल्ला उर्फ ​​सनी एक ट्रैफिक होम गार्ड थे। उन्हें TMC के एक पूर्व मंत्री से करीबी होने के कारण दक्षिण हावड़ा में प्रभावशाली माना जाता था। उन्हें संकराइल पुलिस ने 23 मई को करोड़ों रुपये की कथित रंगदारी (एक्सटॉर्शन) रैकेट के मामले में अरेस्ट किया। गिरफ्तारी के बाद सेंट्रल फ़ोर्स और संकराइल पुलिस के जवान उन्हें कमर से रस्सी बांधकर सेंट्रल हावड़ा के चौरा बस्ती इलाके से पैदल ले गए। बंगाल पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई जांच के सिलसिले में की गई थी।

ये भी पढ़ें- US-Iran Peace Deal: होर्मुज और 300 अरब डॉलर की फंडिंग से लेकर और परमाणु हथियार तक…अमेरिका-ईरान MoU के 14 पॉइंट्स में क्या-क्या है?

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जहांगीर खान अकेले ऐसे नेता नहीं हैं जिन्हें गिरफ्तारी के बाद घुमाया गया है। पश्चिम बंगाल में बदलते राजनीतिक माहौल के बीच, कई TMC नेताओं और उनके साथियों को पुलिस या पैरामिलिट्री फ़ोर्स ने उनके गढ़ों में सबके सामने घुमाया है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, इनमें से कुछ TMC नेताओं को सिर्फ़ अंडरवियर पहने, हथकड़ी और कमर पर बंधी रस्सी के साथ देखा गया। कुछ वायरल वीडियो में नेताओं को उकड़ू बैठकर कान पकड़े और सबके सामने माफी मांगते हुए घुमाया जा रहा था।

‘जानबूझकर बदनाम या अपमानित न करे’

इस तरह सबके सामने घुमाए जाने की एक घटना के बाद, कलकत्ता हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने इस घटना पर नाराज़गी जताई। अदालत ने राज्य सरकार से उन हालात और कानूनी प्रावधानों के बारे में रिपोर्ट मांगी जिनके तहत ऐसा हुआ। कोर्ट ने माना कि कानून के मुताबिक लोगों को गिरफ़्तार किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उन्हें जानबूझकर बदनाम या सबके सामने अपमानित नहीं किया जा सकता।

अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए पुलिस ने कहा कि यह पूरी तरह से जांच से जुड़ा था। इसका मकसद अपराध वाली जगह पर घटना को फिर से दोहराकर देखना (reconstruction of crime scenes) था। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सीनियर IPS अधिकारी ने कहा कि पुलिस बहुत ही नाजुक स्थिति में काम कर रही थी।

TMC ने ‘मानवाधिकारों के उल्लंघन’ का आरोप लगाया, BJP ने इसे ‘राम राज्य’ बताया

इस बीच, TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी अपने नेताओं को सबके सामने घुमाने के कथित मामले को लेकर पुलिस के ख़िलाफ कानूनी कार्रवाई करने की योजना बना रही है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए उन्होंने कहा, “यह आर्टिकल 21 का पूरी तरह से उल्लंघन और मानवाधिकारों का हनन है।”

वहीं, हावड़ा उत्तर से बीजेपी विधायक उमेश राय ने एक जनसभा में टीएमसी के आकाश सिंह की गिरफ्तारी पर कहा, “एक समय था जब वह 100 बाइकों के काफिले के साथ सड़कों पर घूमता था और लोगों को डराता-धमकाता था। आज उसी आदमी को कमर में रस्सी बांधकर घुमाया जा रहा है। असली राम राज्य ऐसा ही होता है।”

किन-किन TMC नेताओं को घुमाया गया?

आकाश सिंह

बीजेपी सरकार के सत्ता संभालने के चार दिन बाद 13 मई को हावड़ा की गोलाबाड़ी पुलिस ने आकाश सिंह को गिरफ्तार किया। फिर उसका सिर मुंडवाकर सिर्फ बनियान और अंडरवियर पहनाकर इलाके में घुमाया। स्थानीय स्तर पर ‘नॉर्थ हावड़ा के डॉन’ के तौर पर पहचाने जाने वाले आकाश पर लगभग 20 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें पुलिस पर गोली चलाने और एक सब-इंस्पेक्टर को घायल करने, 2021 के बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान बम हमले करने, जबरन वसूली और हत्या की कोशिश जैसे आरोप शामिल हैं।

अभिजीत रॉय

उत्तर 24 परगना के कांचरापाड़ा के रहने वाले स्थानीय TMC युवा नेता रॉय को 28 मई को अरेस्ट किया गया था। इसके बाद उन्हें कमर में रस्सी बांधकर इलाके में घुमाया गया। उस समय वहां भारी भीड़ जमा थी और लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। पुलिस के मुताबिक, रॉय पर बिजपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज जबरन वसूली के एक मामले में आरोप है।

साथ ही, उन पर म्युनिसिपल सफाई कर्मचारियों के लिए बनी प्लास्टिक की बाल्टियों समेत अन्य सामानों का गैर-कानूनी तरीके से स्टॉक करने और उन्हें दोबारा बेचने का भी आरोप है। पुलिस ने बताया कि BJP के सत्ता में आने के बाद रॉय छिप गए थे। आखिरकार उन्हें पूर्वी मिदनापुर के मंदारमणि से गिरफ्तार किया गया।

जहांगीर खान

फाल्टा और डायमंड हार्बर में TMC के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले जहांगीर खान ने बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान एक पुलिस अधिकारी के साथ सार्वजनिक टकराव के बाद पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। फाल्टा से तत्कालीन TMC उम्मीदवार ने एक आक्रामक बयान में खुद की तुलना ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘पुष्पा’ के मुख्य किरदार से करते हुए कहा था कि वह कभी किसी के सामने नहीं झुकेंगा।

फाल्टा एकमात्र विधानसभा क्षेत्र था जहां दोबारा मतदान (री-पोल) हुआ था। हालांकि, जब तक मतदान हुआ, पश्चिम बंगाल का राजनीतिक माहौल बदल चुका था। खान ने चुनाव से हटकर TMC को चौंका दिया था। इसके बाद पार्टी में हुई फूट के दौरान कई नेताओं ने खान के प्रति नेतृत्व के नरम रवैये को अपनी नाराजगी की एक वजह बताया था। शुरुआत में डकैती और हत्या की कोशिश के मामलों में नाम आने के बाद, खान पर जबरन वसूली और अन्य आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए।

गिरफ्तारी के बाद खान को तीन अलग-अलग मौकों पर फाल्टा में घुमाया गया था। एक वायरल वीडियो में उन्हें पुलिस की निगरानी में अपने कान पकड़कर सबके सामने माफी मांगते हुए देखा गया। पुलिस का कहना है कि यह सब क्राइम सीन को फिर से समझने (रीकंस्ट्रक्शन) के लिए किया गया था। साथ ही दावा किया कि खान ने खुद ही अपने कान पकड़े, उठक-बैठक की और जनता से माफ़ी मांगी।

गुड्डू अंसारी

उत्तर 24 परगना के कमारहाटी के एक जाने-माने स्थानीय नेता, अंसारी को वरिष्ठ TMC नेता और कमारहाटी के विधायक मदन मित्रा का करीबी सहयोगी माना जाता था। मित्रा उन पार्टी नेताओं में से एक थे जो पार्टी में बंटवारे के बाद भी ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहे। अंसारी को 31 मई को गिरफ्तार किया गया और बाद में हथकड़ी पहनाकर कमारहाटी में घुमाया गया।

पुलिस का आरोप है कि अंसारी अलग-अलग तरह के कारोबार में कई सिंडिकेट चलाते थे। वह इलाके पर अपना दबदबा बनाए रखने के लिए हथियारों के दम पर लोगों को डराते-धमकाते थे। बेलघरिया पुलिस के एक अधिकारी ने इस तरह सबके सामने घुमाने का बचाव करते हुए कहा कि इसका मकसद अपराधियों को कड़ी चेतावनी देना था।

शमीम अहमद

‘गब्बर’ के नाम से पहचाने जाने वाले अहमद, शिबपुर में वार्ड नंबर 36 के अध्यक्ष हैं। उन्हें TMC के एक पूर्व मंत्री का करीबी माना जाता है। उनकी पत्नी, शमीमा बानू, पहले इसी वार्ड से पार्षद रह चुकी हैं। अहमद को 21 मई को मुंबई के चेंबूर से गिरफ्तार किया गया और बाद में कोलकाता पुलिस उन्हें दक्षिण हावड़ा के संकराइल में भीड़-भाड़ वाले बाज़ार में कमर से रस्सी बांधकर घुमाती हुई ले गई। पुलिस ने उन पर 7 मई को हावड़ा माइनॉरिटी सेल के अध्यक्ष सिकंदर खान के नेतृत्व में BJP की जीत के बाद निकाली गई रैली पर हमले में शामिल होने का आरोप लगाया है। इस हमले में तीन लोग घायल हो गए थे।

शाहिन मोल्ला

शाहिन मोल्ला उर्फ ​​सनी एक ट्रैफिक होम गार्ड थे। उन्हें TMC के एक पूर्व मंत्री से करीबी होने के कारण दक्षिण हावड़ा में प्रभावशाली माना जाता था। उन्हें संकराइल पुलिस ने 23 मई को करोड़ों रुपये की कथित रंगदारी (एक्सटॉर्शन) रैकेट के मामले में अरेस्ट किया। गिरफ्तारी के बाद सेंट्रल फ़ोर्स और संकराइल पुलिस के जवान उन्हें कमर से रस्सी बांधकर सेंट्रल हावड़ा के चौरा बस्ती इलाके से पैदल ले गए। बंगाल पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई जांच के सिलसिले में की गई थी।

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जहांगीर खान अकेले ऐसे नेता नहीं हैं जिन्हें गिरफ्तारी के बाद घुमाया गया है। पश्चिम बंगाल में बदलते राजनीतिक माहौल के बीच, कई TMC नेताओं और उनके साथियों को पुलिस या पैरामिलिट्री फ़ोर्स ने उनके गढ़ों में सबके सामने घुमाया है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, इनमें से कुछ TMC नेताओं को सिर्फ़ अंडरवियर पहने, हथकड़ी और कमर पर बंधी रस्सी के साथ देखा गया। कुछ वायरल वीडियो में नेताओं को उकड़ू बैठकर कान पकड़े और सबके सामने माफी मांगते हुए घुमाया जा रहा था।

‘जानबूझकर बदनाम या अपमानित न करे’

इस तरह सबके सामने घुमाए जाने की एक घटना के बाद, कलकत्ता हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने इस घटना पर नाराज़गी जताई। अदालत ने राज्य सरकार से उन हालात और कानूनी प्रावधानों के बारे में रिपोर्ट मांगी जिनके तहत ऐसा हुआ। कोर्ट ने माना कि कानून के मुताबिक लोगों को गिरफ़्तार किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उन्हें जानबूझकर बदनाम या सबके सामने अपमानित नहीं किया जा सकता।

अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए पुलिस ने कहा कि यह पूरी तरह से जांच से जुड़ा था। इसका मकसद अपराध वाली जगह पर घटना को फिर से दोहराकर देखना (reconstruction of crime scenes) था। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सीनियर IPS अधिकारी ने कहा कि पुलिस बहुत ही नाजुक स्थिति में काम कर रही थी।

TMC ने ‘मानवाधिकारों के उल्लंघन’ का आरोप लगाया, BJP ने इसे ‘राम राज्य’ बताया

इस बीच, TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी अपने नेताओं को सबके सामने घुमाने के कथित मामले को लेकर पुलिस के ख़िलाफ कानूनी कार्रवाई करने की योजना बना रही है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए उन्होंने कहा, “यह आर्टिकल 21 का पूरी तरह से उल्लंघन और मानवाधिकारों का हनन है।”

वहीं, हावड़ा उत्तर से बीजेपी विधायक उमेश राय ने एक जनसभा में टीएमसी के आकाश सिंह की गिरफ्तारी पर कहा, “एक समय था जब वह 100 बाइकों के काफिले के साथ सड़कों पर घूमता था और लोगों को डराता-धमकाता था। आज उसी आदमी को कमर में रस्सी बांधकर घुमाया जा रहा है। असली राम राज्य ऐसा ही होता है।”

किन-किन TMC नेताओं को घुमाया गया?

आकाश सिंह

बीजेपी सरकार के सत्ता संभालने के चार दिन बाद 13 मई को हावड़ा की गोलाबाड़ी पुलिस ने आकाश सिंह को गिरफ्तार किया। फिर उसका सिर मुंडवाकर सिर्फ बनियान और अंडरवियर पहनाकर इलाके में घुमाया। स्थानीय स्तर पर ‘नॉर्थ हावड़ा के डॉन’ के तौर पर पहचाने जाने वाले आकाश पर लगभग 20 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें पुलिस पर गोली चलाने और एक सब-इंस्पेक्टर को घायल करने, 2021 के बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान बम हमले करने, जबरन वसूली और हत्या की कोशिश जैसे आरोप शामिल हैं।

अभिजीत रॉय

उत्तर 24 परगना के कांचरापाड़ा के रहने वाले स्थानीय TMC युवा नेता रॉय को 28 मई को अरेस्ट किया गया था। इसके बाद उन्हें कमर में रस्सी बांधकर इलाके में घुमाया गया। उस समय वहां भारी भीड़ जमा थी और लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। पुलिस के मुताबिक, रॉय पर बिजपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज जबरन वसूली के एक मामले में आरोप है।

साथ ही, उन पर म्युनिसिपल सफाई कर्मचारियों के लिए बनी प्लास्टिक की बाल्टियों समेत अन्य सामानों का गैर-कानूनी तरीके से स्टॉक करने और उन्हें दोबारा बेचने का भी आरोप है। पुलिस ने बताया कि BJP के सत्ता में आने के बाद रॉय छिप गए थे। आखिरकार उन्हें पूर्वी मिदनापुर के मंदारमणि से गिरफ्तार किया गया।

जहांगीर खान

फाल्टा और डायमंड हार्बर में TMC के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले जहांगीर खान ने बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान एक पुलिस अधिकारी के साथ सार्वजनिक टकराव के बाद पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। फाल्टा से तत्कालीन TMC उम्मीदवार ने एक आक्रामक बयान में खुद की तुलना ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘पुष्पा’ के मुख्य किरदार से करते हुए कहा था कि वह कभी किसी के सामने नहीं झुकेंगा।

फाल्टा एकमात्र विधानसभा क्षेत्र था जहां दोबारा मतदान (री-पोल) हुआ था। हालांकि, जब तक मतदान हुआ, पश्चिम बंगाल का राजनीतिक माहौल बदल चुका था। खान ने चुनाव से हटकर TMC को चौंका दिया था। इसके बाद पार्टी में हुई फूट के दौरान कई नेताओं ने खान के प्रति नेतृत्व के नरम रवैये को अपनी नाराजगी की एक वजह बताया था। शुरुआत में डकैती और हत्या की कोशिश के मामलों में नाम आने के बाद, खान पर जबरन वसूली और अन्य आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए।

गिरफ्तारी के बाद खान को तीन अलग-अलग मौकों पर फाल्टा में घुमाया गया था। एक वायरल वीडियो में उन्हें पुलिस की निगरानी में अपने कान पकड़कर सबके सामने माफी मांगते हुए देखा गया। पुलिस का कहना है कि यह सब क्राइम सीन को फिर से समझने (रीकंस्ट्रक्शन) के लिए किया गया था। साथ ही दावा किया कि खान ने खुद ही अपने कान पकड़े, उठक-बैठक की और जनता से माफ़ी मांगी।

गुड्डू अंसारी

उत्तर 24 परगना के कमारहाटी के एक जाने-माने स्थानीय नेता, अंसारी को वरिष्ठ TMC नेता और कमारहाटी के विधायक मदन मित्रा का करीबी सहयोगी माना जाता था। मित्रा उन पार्टी नेताओं में से एक थे जो पार्टी में बंटवारे के बाद भी ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहे। अंसारी को 31 मई को गिरफ्तार किया गया और बाद में हथकड़ी पहनाकर कमारहाटी में घुमाया गया।

पुलिस का आरोप है कि अंसारी अलग-अलग तरह के कारोबार में कई सिंडिकेट चलाते थे। वह इलाके पर अपना दबदबा बनाए रखने के लिए हथियारों के दम पर लोगों को डराते-धमकाते थे। बेलघरिया पुलिस के एक अधिकारी ने इस तरह सबके सामने घुमाने का बचाव करते हुए कहा कि इसका मकसद अपराधियों को कड़ी चेतावनी देना था।

शमीम अहमद

‘गब्बर’ के नाम से पहचाने जाने वाले अहमद, शिबपुर में वार्ड नंबर 36 के अध्यक्ष हैं। उन्हें TMC के एक पूर्व मंत्री का करीबी माना जाता है। उनकी पत्नी, शमीमा बानू, पहले इसी वार्ड से पार्षद रह चुकी हैं। अहमद को 21 मई को मुंबई के चेंबूर से गिरफ्तार किया गया और बाद में कोलकाता पुलिस उन्हें दक्षिण हावड़ा के संकराइल में भीड़-भाड़ वाले बाज़ार में कमर से रस्सी बांधकर घुमाती हुई ले गई। पुलिस ने उन पर 7 मई को हावड़ा माइनॉरिटी सेल के अध्यक्ष सिकंदर खान के नेतृत्व में BJP की जीत के बाद निकाली गई रैली पर हमले में शामिल होने का आरोप लगाया है। इस हमले में तीन लोग घायल हो गए थे।

शाहिन मोल्ला

शाहिन मोल्ला उर्फ ​​सनी एक ट्रैफिक होम गार्ड थे। उन्हें TMC के एक पूर्व मंत्री से करीबी होने के कारण दक्षिण हावड़ा में प्रभावशाली माना जाता था। उन्हें संकराइल पुलिस ने 23 मई को करोड़ों रुपये की कथित रंगदारी (एक्सटॉर्शन) रैकेट के मामले में अरेस्ट किया। गिरफ्तारी के बाद सेंट्रल फ़ोर्स और संकराइल पुलिस के जवान उन्हें कमर से रस्सी बांधकर सेंट्रल हावड़ा के चौरा बस्ती इलाके से पैदल ले गए। बंगाल पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई जांच के सिलसिले में की गई थी।

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