Who is Bushra Bano: इंशाअल्लाह-जजाकअल्लाह कहने को लेकर क्यों घेरा जा रहा है? IPS बुशरा बानो कौन हैं, जानिए इनकी पूरी कहानी

Who is Bushra Bano: भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित पश्चिम बंगाल में एक IPS अधिकारी के ट्रांसफर को लेकर राज्य में राजनीतिक और सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया है। ‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक ‘हिंदू अधिकार समूह’ ने कॉम्पिटिटिव एग्जाम के लिए कोचिंग प्लेटफॉर्म को प्रमोट करने वाले एक वीडियो में उनके इस्लामिक अभिवादन के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। खड़गपुर में एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) और 2021 बैच की IPS अधिकारी बुशरा बानो को 14 सितंबर को राज्य सशस्त्र पुलिस की चौथी बटालियन में डिप्टी कमांडेंट के पद पर ट्रांसफर कर दिया गया। उनकी जगह पार्थ घोष को खड़गपुर का नया ASP बनाया गया है।

दबाव में हुआ ट्रांसफर या रूटीन प्रक्रिया है?

विवाद के बीच बंगाल सरकार ने इस ट्रांसफर को रूटीन प्रक्रिया बताया है। हलांकि, यह फेरबदल बुशरा बानो द्वारा एक दिन पहले यानी 13 सितंबर को X पर पोस्ट किए गए एक वीडियो पर हुई आलोचना के समय ही हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो में वह पुलिस की वर्दी में थीं। इस दौरान वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी में बिताए अपने समय के बारे में बात कर रही थीं। यहां उन्होंने UPSC परीक्षाओं की तैयारी की थी।

वीडियो में क्या है?

वीडियो में बुशरा बानो ने बताया कि UPSC की तैयारी के लिए सऊदी अरब में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर काम करने के बाद वह भारत लौटी थीं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय कोचिंग एकेडमी की किताबों, लाइब्रेरी और मॉक टेस्ट को दिया। साथ ही छात्रों को वहां एडमिशन लेने के लिए प्रोत्साहित किया। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि और छात्र एकेडमी में दाखिला लेंगे और इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेंगे ताकि मेरे जैसे और लोग आगे आ सकें।”

विवाद उनके संदेश से नहीं। बल्कि उसे देते समय उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए धार्मिक शब्दों से पैदा हुआ। रिपोर्ट में बताया गया है कि उन्होंने वीडियो की शुरुआत ‘अस्सलाम-अलैकुम’ से की। फिर अपनी बातचीत के दौरान ‘इंशाल्लाह’ का इस्तेमाल किया। साथ ही इसका अंत ‘जजाकल्लाह खैर’ से किया।

हिंदू संगठनों ने जताया विरोध

‘हिंदू नेटवर्क फाउंडेशन’ की एक यूनिट के तौर पर अपनी पहचान रखने वाले ‘हिंदू लीगल फंड’ ने उनके शब्दों के चयन को लेकर पश्चिम बंगाल के गृह सचिव के पास शिकायत दर्ज कराई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में संगठन ने तर्क दिया कि भारतीय राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले एक कार्यरत अधिकारी को इसके बजाय ‘वंदे मातरम’ या ‘जय हिंद’ जैसे राष्ट्रीय अभिवादनों का इस्तेमाल करना चाहिए था।

उन्होंने मामले की समीक्षा करने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रुप की शिकायत में यह सवाल उठाया गया कि एक सरकारी अधिकारी, जो अपनी रैंक बता रही थी और यूनिफॉर्म में थी, वह आधिकारिक दिखने वाले सार्वजनिक संदेश में ऐसी भाषा का इस्तेमाल कैसे कर सकती है।

सोशल मीडिया पर बढ़ा विवाद

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यह विवाद बढ़ गया। रिपोर्ट में बताया गया कि यूज़र्स के बीच इसे लेकर मतभेद था। कछ लोग धार्मिक बातों का जिक्र करने के लिए बुशरा बानो की आलोचना कर रहे थे। जबकि दूसरे यह सवाल उठा रहे थे कि क्या सभी सरकारी अधिकारियों के लिए निष्पक्षता का नियम एक जैसा लागू किया जा रहा है।

किसने क्या कहा?

पूर्व सिविल सर्वेंट आशीष जोशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन किया है। उन्होंने लिखा, “भारत की असली ताकत विविधता में एकता है। बुशरा बानो IPS की तारीफ़ होनी चाहिए। उन्होंने दो बार UPSC पास किया,।सऊदी अरब में एक आरामदायक नौकरी छोड़ी और अब पूरी लगन से देश की सेवा कर रही हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “उनके शब्दों का चुनाव उनके निजी विश्वास को दिखाता है, न कि उस देश के प्रति अनादर को जिसकी वह रक्षा करती हैं। भारत जैसे विशाल और विविधता वाले देश में यह सह-अस्तित्व कोई कमजोरी नहीं, बल्कि हमारा गर्व है। आपकी सेवा के लिए धन्यवाद, बुशरा! जजाकल्लाह खैर!”

अन्य यूजर्स ने सार्वजनिक जीवन में वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं द्वारा हिंदू धार्मिक नारों के इस्तेमाल से इसकी तुलना की। वहीं, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक सोशल मीडिया ग्रुप ने आरोप लगाया कि दक्षिणपंथी संगठन बुशरा बानो को इसलिए निशाना बना रहे हैं, क्योंकि वह अल्पसंख्यक समुदाय से हैं।

बुशरा बानो!

इस विवाद ने उनके अनोखे करियर सफर पर भी असर डाला है। उत्तर प्रदेश के कन्नौज की रहने वाली बुशरा बानो ने सऊदी अरब में काम करने से पहले अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से अपनी PhD पूरी की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत लौटने पर उन्होंने UPSC की तैयारी जारी रखते हुए कोल इंडिया में नौकरी की।

उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और शुरू में इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस के लिए चुनी गईं। बाद में उन्होंने सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट बनने के लिए उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास की। फिर दूसरी बार UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करके IPS में जगह बनाई। उनकी उपलब्धि ने पहले भी लोगों का ध्यान खींचा था क्योंकि उन्होंने दो बच्चों की परवरिश करते हुए दो बार UPSC पास किया था।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की प्रतिस्पर्धी सिविल सेवा प्रणाली में दृढ़ता के उदाहरण के तौर पर अक्सर इस बात का ज़िक्र किया जाता है। ट्रांसफर और वीडियो विवाद ने अब एक खास सवाल को सामने ला दिया है। क्या आधिकारिक संदेश में किसी अधिकारी का निजी धार्मिक इजहार सरकारी सेवकों से अपेक्षित निष्पक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है? सुवेंदु अधिकारी सरकार अपने इस रुख पर कायम है कि तबादला एक सामान्य प्रक्रिया थी, जबकि धर्म, सार्वजनिक पद और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति को लेकर बहस जारी है।

West Bengal News Update: ‘ये राम राज्य है…’; हाथों में हथकड़ी और कमर में रस्सी… पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद TMC के बाहुबलियों का सरेआम निकाला जुलूस

West Bengal News Update: तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान को छुड़ाने के लिए पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा थाने पर धावा बोलने का प्रयास करने के आरोप में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पश्चिम बंगाल पुलिस ने 9 दिन पहले जहांगीर खान को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें उनके गढ़ फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में तीन बार घुमाया गया। इसके जवाब में, खान के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किए और TMC नेता को छुड़ाने के लिए पुलिस स्टेशन पर धावा बोलने की कोशिश भी की।

जहांगीर खान अकेले ऐसे नेता नहीं हैं जिन्हें गिरफ्तारी के बाद घुमाया गया है। पश्चिम बंगाल में बदलते राजनीतिक माहौल के बीच, कई TMC नेताओं और उनके साथियों को पुलिस या पैरामिलिट्री फ़ोर्स ने उनके गढ़ों में सबके सामने घुमाया है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, इनमें से कुछ TMC नेताओं को सिर्फ़ अंडरवियर पहने, हथकड़ी और कमर पर बंधी रस्सी के साथ देखा गया। कुछ वायरल वीडियो में नेताओं को उकड़ू बैठकर कान पकड़े और सबके सामने माफी मांगते हुए घुमाया जा रहा था।

‘जानबूझकर बदनाम या अपमानित न करे’

इस तरह सबके सामने घुमाए जाने की एक घटना के बाद, कलकत्ता हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने इस घटना पर नाराज़गी जताई। अदालत ने राज्य सरकार से उन हालात और कानूनी प्रावधानों के बारे में रिपोर्ट मांगी जिनके तहत ऐसा हुआ। कोर्ट ने माना कि कानून के मुताबिक लोगों को गिरफ़्तार किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उन्हें जानबूझकर बदनाम या सबके सामने अपमानित नहीं किया जा सकता।

अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए पुलिस ने कहा कि यह पूरी तरह से जांच से जुड़ा था। इसका मकसद अपराध वाली जगह पर घटना को फिर से दोहराकर देखना (reconstruction of crime scenes) था। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सीनियर IPS अधिकारी ने कहा कि पुलिस बहुत ही नाजुक स्थिति में काम कर रही थी।

TMC ने ‘मानवाधिकारों के उल्लंघन’ का आरोप लगाया, BJP ने इसे ‘राम राज्य’ बताया

इस बीच, TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी अपने नेताओं को सबके सामने घुमाने के कथित मामले को लेकर पुलिस के ख़िलाफ कानूनी कार्रवाई करने की योजना बना रही है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए उन्होंने कहा, “यह आर्टिकल 21 का पूरी तरह से उल्लंघन और मानवाधिकारों का हनन है।”

वहीं, हावड़ा उत्तर से बीजेपी विधायक उमेश राय ने एक जनसभा में टीएमसी के आकाश सिंह की गिरफ्तारी पर कहा, “एक समय था जब वह 100 बाइकों के काफिले के साथ सड़कों पर घूमता था और लोगों को डराता-धमकाता था। आज उसी आदमी को कमर में रस्सी बांधकर घुमाया जा रहा है। असली राम राज्य ऐसा ही होता है।”

किन-किन TMC नेताओं को घुमाया गया?

आकाश सिंह

बीजेपी सरकार के सत्ता संभालने के चार दिन बाद 13 मई को हावड़ा की गोलाबाड़ी पुलिस ने आकाश सिंह को गिरफ्तार किया। फिर उसका सिर मुंडवाकर सिर्फ बनियान और अंडरवियर पहनाकर इलाके में घुमाया। स्थानीय स्तर पर ‘नॉर्थ हावड़ा के डॉन’ के तौर पर पहचाने जाने वाले आकाश पर लगभग 20 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें पुलिस पर गोली चलाने और एक सब-इंस्पेक्टर को घायल करने, 2021 के बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान बम हमले करने, जबरन वसूली और हत्या की कोशिश जैसे आरोप शामिल हैं।

अभिजीत रॉय

उत्तर 24 परगना के कांचरापाड़ा के रहने वाले स्थानीय TMC युवा नेता रॉय को 28 मई को अरेस्ट किया गया था। इसके बाद उन्हें कमर में रस्सी बांधकर इलाके में घुमाया गया। उस समय वहां भारी भीड़ जमा थी और लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। पुलिस के मुताबिक, रॉय पर बिजपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज जबरन वसूली के एक मामले में आरोप है।

साथ ही, उन पर म्युनिसिपल सफाई कर्मचारियों के लिए बनी प्लास्टिक की बाल्टियों समेत अन्य सामानों का गैर-कानूनी तरीके से स्टॉक करने और उन्हें दोबारा बेचने का भी आरोप है। पुलिस ने बताया कि BJP के सत्ता में आने के बाद रॉय छिप गए थे। आखिरकार उन्हें पूर्वी मिदनापुर के मंदारमणि से गिरफ्तार किया गया।

जहांगीर खान

फाल्टा और डायमंड हार्बर में TMC के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले जहांगीर खान ने बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान एक पुलिस अधिकारी के साथ सार्वजनिक टकराव के बाद पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। फाल्टा से तत्कालीन TMC उम्मीदवार ने एक आक्रामक बयान में खुद की तुलना ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘पुष्पा’ के मुख्य किरदार से करते हुए कहा था कि वह कभी किसी के सामने नहीं झुकेंगा।

फाल्टा एकमात्र विधानसभा क्षेत्र था जहां दोबारा मतदान (री-पोल) हुआ था। हालांकि, जब तक मतदान हुआ, पश्चिम बंगाल का राजनीतिक माहौल बदल चुका था। खान ने चुनाव से हटकर TMC को चौंका दिया था। इसके बाद पार्टी में हुई फूट के दौरान कई नेताओं ने खान के प्रति नेतृत्व के नरम रवैये को अपनी नाराजगी की एक वजह बताया था। शुरुआत में डकैती और हत्या की कोशिश के मामलों में नाम आने के बाद, खान पर जबरन वसूली और अन्य आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए।

गिरफ्तारी के बाद खान को तीन अलग-अलग मौकों पर फाल्टा में घुमाया गया था। एक वायरल वीडियो में उन्हें पुलिस की निगरानी में अपने कान पकड़कर सबके सामने माफी मांगते हुए देखा गया। पुलिस का कहना है कि यह सब क्राइम सीन को फिर से समझने (रीकंस्ट्रक्शन) के लिए किया गया था। साथ ही दावा किया कि खान ने खुद ही अपने कान पकड़े, उठक-बैठक की और जनता से माफ़ी मांगी।

गुड्डू अंसारी

उत्तर 24 परगना के कमारहाटी के एक जाने-माने स्थानीय नेता, अंसारी को वरिष्ठ TMC नेता और कमारहाटी के विधायक मदन मित्रा का करीबी सहयोगी माना जाता था। मित्रा उन पार्टी नेताओं में से एक थे जो पार्टी में बंटवारे के बाद भी ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहे। अंसारी को 31 मई को गिरफ्तार किया गया और बाद में हथकड़ी पहनाकर कमारहाटी में घुमाया गया।

पुलिस का आरोप है कि अंसारी अलग-अलग तरह के कारोबार में कई सिंडिकेट चलाते थे। वह इलाके पर अपना दबदबा बनाए रखने के लिए हथियारों के दम पर लोगों को डराते-धमकाते थे। बेलघरिया पुलिस के एक अधिकारी ने इस तरह सबके सामने घुमाने का बचाव करते हुए कहा कि इसका मकसद अपराधियों को कड़ी चेतावनी देना था।

शमीम अहमद

‘गब्बर’ के नाम से पहचाने जाने वाले अहमद, शिबपुर में वार्ड नंबर 36 के अध्यक्ष हैं। उन्हें TMC के एक पूर्व मंत्री का करीबी माना जाता है। उनकी पत्नी, शमीमा बानू, पहले इसी वार्ड से पार्षद रह चुकी हैं। अहमद को 21 मई को मुंबई के चेंबूर से गिरफ्तार किया गया और बाद में कोलकाता पुलिस उन्हें दक्षिण हावड़ा के संकराइल में भीड़-भाड़ वाले बाज़ार में कमर से रस्सी बांधकर घुमाती हुई ले गई। पुलिस ने उन पर 7 मई को हावड़ा माइनॉरिटी सेल के अध्यक्ष सिकंदर खान के नेतृत्व में BJP की जीत के बाद निकाली गई रैली पर हमले में शामिल होने का आरोप लगाया है। इस हमले में तीन लोग घायल हो गए थे।

शाहिन मोल्ला

शाहिन मोल्ला उर्फ ​​सनी एक ट्रैफिक होम गार्ड थे। उन्हें TMC के एक पूर्व मंत्री से करीबी होने के कारण दक्षिण हावड़ा में प्रभावशाली माना जाता था। उन्हें संकराइल पुलिस ने 23 मई को करोड़ों रुपये की कथित रंगदारी (एक्सटॉर्शन) रैकेट के मामले में अरेस्ट किया। गिरफ्तारी के बाद सेंट्रल फ़ोर्स और संकराइल पुलिस के जवान उन्हें कमर से रस्सी बांधकर सेंट्रल हावड़ा के चौरा बस्ती इलाके से पैदल ले गए। बंगाल पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई जांच के सिलसिले में की गई थी।

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West Bengal News Update: तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान को छुड़ाने के लिए पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा थाने पर धावा बोलने का प्रयास करने के आरोप में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पश्चिम बंगाल पुलिस ने 9 दिन पहले जहांगीर खान को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें उनके गढ़ फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में तीन बार घुमाया गया। इसके जवाब में, खान के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किए और TMC नेता को छुड़ाने के लिए पुलिस स्टेशन पर धावा बोलने की कोशिश भी की।

जहांगीर खान अकेले ऐसे नेता नहीं हैं जिन्हें गिरफ्तारी के बाद घुमाया गया है। पश्चिम बंगाल में बदलते राजनीतिक माहौल के बीच, कई TMC नेताओं और उनके साथियों को पुलिस या पैरामिलिट्री फ़ोर्स ने उनके गढ़ों में सबके सामने घुमाया है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, इनमें से कुछ TMC नेताओं को सिर्फ़ अंडरवियर पहने, हथकड़ी और कमर पर बंधी रस्सी के साथ देखा गया। कुछ वायरल वीडियो में नेताओं को उकड़ू बैठकर कान पकड़े और सबके सामने माफी मांगते हुए घुमाया जा रहा था।

‘जानबूझकर बदनाम या अपमानित न करे’

इस तरह सबके सामने घुमाए जाने की एक घटना के बाद, कलकत्ता हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने इस घटना पर नाराज़गी जताई। अदालत ने राज्य सरकार से उन हालात और कानूनी प्रावधानों के बारे में रिपोर्ट मांगी जिनके तहत ऐसा हुआ। कोर्ट ने माना कि कानून के मुताबिक लोगों को गिरफ़्तार किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उन्हें जानबूझकर बदनाम या सबके सामने अपमानित नहीं किया जा सकता।

अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए पुलिस ने कहा कि यह पूरी तरह से जांच से जुड़ा था। इसका मकसद अपराध वाली जगह पर घटना को फिर से दोहराकर देखना (reconstruction of crime scenes) था। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सीनियर IPS अधिकारी ने कहा कि पुलिस बहुत ही नाजुक स्थिति में काम कर रही थी।

TMC ने ‘मानवाधिकारों के उल्लंघन’ का आरोप लगाया, BJP ने इसे ‘राम राज्य’ बताया

इस बीच, TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी अपने नेताओं को सबके सामने घुमाने के कथित मामले को लेकर पुलिस के ख़िलाफ कानूनी कार्रवाई करने की योजना बना रही है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए उन्होंने कहा, “यह आर्टिकल 21 का पूरी तरह से उल्लंघन और मानवाधिकारों का हनन है।”

वहीं, हावड़ा उत्तर से बीजेपी विधायक उमेश राय ने एक जनसभा में टीएमसी के आकाश सिंह की गिरफ्तारी पर कहा, “एक समय था जब वह 100 बाइकों के काफिले के साथ सड़कों पर घूमता था और लोगों को डराता-धमकाता था। आज उसी आदमी को कमर में रस्सी बांधकर घुमाया जा रहा है। असली राम राज्य ऐसा ही होता है।”

किन-किन TMC नेताओं को घुमाया गया?

आकाश सिंह

बीजेपी सरकार के सत्ता संभालने के चार दिन बाद 13 मई को हावड़ा की गोलाबाड़ी पुलिस ने आकाश सिंह को गिरफ्तार किया। फिर उसका सिर मुंडवाकर सिर्फ बनियान और अंडरवियर पहनाकर इलाके में घुमाया। स्थानीय स्तर पर ‘नॉर्थ हावड़ा के डॉन’ के तौर पर पहचाने जाने वाले आकाश पर लगभग 20 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें पुलिस पर गोली चलाने और एक सब-इंस्पेक्टर को घायल करने, 2021 के बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान बम हमले करने, जबरन वसूली और हत्या की कोशिश जैसे आरोप शामिल हैं।

अभिजीत रॉय

उत्तर 24 परगना के कांचरापाड़ा के रहने वाले स्थानीय TMC युवा नेता रॉय को 28 मई को अरेस्ट किया गया था। इसके बाद उन्हें कमर में रस्सी बांधकर इलाके में घुमाया गया। उस समय वहां भारी भीड़ जमा थी और लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। पुलिस के मुताबिक, रॉय पर बिजपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज जबरन वसूली के एक मामले में आरोप है।

साथ ही, उन पर म्युनिसिपल सफाई कर्मचारियों के लिए बनी प्लास्टिक की बाल्टियों समेत अन्य सामानों का गैर-कानूनी तरीके से स्टॉक करने और उन्हें दोबारा बेचने का भी आरोप है। पुलिस ने बताया कि BJP के सत्ता में आने के बाद रॉय छिप गए थे। आखिरकार उन्हें पूर्वी मिदनापुर के मंदारमणि से गिरफ्तार किया गया।

जहांगीर खान

फाल्टा और डायमंड हार्बर में TMC के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले जहांगीर खान ने बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान एक पुलिस अधिकारी के साथ सार्वजनिक टकराव के बाद पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। फाल्टा से तत्कालीन TMC उम्मीदवार ने एक आक्रामक बयान में खुद की तुलना ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘पुष्पा’ के मुख्य किरदार से करते हुए कहा था कि वह कभी किसी के सामने नहीं झुकेंगा।

फाल्टा एकमात्र विधानसभा क्षेत्र था जहां दोबारा मतदान (री-पोल) हुआ था। हालांकि, जब तक मतदान हुआ, पश्चिम बंगाल का राजनीतिक माहौल बदल चुका था। खान ने चुनाव से हटकर TMC को चौंका दिया था। इसके बाद पार्टी में हुई फूट के दौरान कई नेताओं ने खान के प्रति नेतृत्व के नरम रवैये को अपनी नाराजगी की एक वजह बताया था। शुरुआत में डकैती और हत्या की कोशिश के मामलों में नाम आने के बाद, खान पर जबरन वसूली और अन्य आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए।

गिरफ्तारी के बाद खान को तीन अलग-अलग मौकों पर फाल्टा में घुमाया गया था। एक वायरल वीडियो में उन्हें पुलिस की निगरानी में अपने कान पकड़कर सबके सामने माफी मांगते हुए देखा गया। पुलिस का कहना है कि यह सब क्राइम सीन को फिर से समझने (रीकंस्ट्रक्शन) के लिए किया गया था। साथ ही दावा किया कि खान ने खुद ही अपने कान पकड़े, उठक-बैठक की और जनता से माफ़ी मांगी।

गुड्डू अंसारी

उत्तर 24 परगना के कमारहाटी के एक जाने-माने स्थानीय नेता, अंसारी को वरिष्ठ TMC नेता और कमारहाटी के विधायक मदन मित्रा का करीबी सहयोगी माना जाता था। मित्रा उन पार्टी नेताओं में से एक थे जो पार्टी में बंटवारे के बाद भी ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहे। अंसारी को 31 मई को गिरफ्तार किया गया और बाद में हथकड़ी पहनाकर कमारहाटी में घुमाया गया।

पुलिस का आरोप है कि अंसारी अलग-अलग तरह के कारोबार में कई सिंडिकेट चलाते थे। वह इलाके पर अपना दबदबा बनाए रखने के लिए हथियारों के दम पर लोगों को डराते-धमकाते थे। बेलघरिया पुलिस के एक अधिकारी ने इस तरह सबके सामने घुमाने का बचाव करते हुए कहा कि इसका मकसद अपराधियों को कड़ी चेतावनी देना था।

शमीम अहमद

‘गब्बर’ के नाम से पहचाने जाने वाले अहमद, शिबपुर में वार्ड नंबर 36 के अध्यक्ष हैं। उन्हें TMC के एक पूर्व मंत्री का करीबी माना जाता है। उनकी पत्नी, शमीमा बानू, पहले इसी वार्ड से पार्षद रह चुकी हैं। अहमद को 21 मई को मुंबई के चेंबूर से गिरफ्तार किया गया और बाद में कोलकाता पुलिस उन्हें दक्षिण हावड़ा के संकराइल में भीड़-भाड़ वाले बाज़ार में कमर से रस्सी बांधकर घुमाती हुई ले गई। पुलिस ने उन पर 7 मई को हावड़ा माइनॉरिटी सेल के अध्यक्ष सिकंदर खान के नेतृत्व में BJP की जीत के बाद निकाली गई रैली पर हमले में शामिल होने का आरोप लगाया है। इस हमले में तीन लोग घायल हो गए थे।

शाहिन मोल्ला

शाहिन मोल्ला उर्फ ​​सनी एक ट्रैफिक होम गार्ड थे। उन्हें TMC के एक पूर्व मंत्री से करीबी होने के कारण दक्षिण हावड़ा में प्रभावशाली माना जाता था। उन्हें संकराइल पुलिस ने 23 मई को करोड़ों रुपये की कथित रंगदारी (एक्सटॉर्शन) रैकेट के मामले में अरेस्ट किया। गिरफ्तारी के बाद सेंट्रल फ़ोर्स और संकराइल पुलिस के जवान उन्हें कमर से रस्सी बांधकर सेंट्रल हावड़ा के चौरा बस्ती इलाके से पैदल ले गए। बंगाल पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई जांच के सिलसिले में की गई थी।

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West Bengal News Update: ‘ये राम राज्य है…’; हाथों में हथकड़ी और कमर में रस्सी… पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद TMC के बाहुबलियों का सरेआम निकाला जुलूस

West Bengal News Update: तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान को छुड़ाने के लिए पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा थाने पर धावा बोलने का प्रयास करने के आरोप में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पश्चिम बंगाल पुलिस ने 9 दिन पहले जहांगीर खान को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें उनके गढ़ फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में तीन बार घुमाया गया। इसके जवाब में, खान के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किए और TMC नेता को छुड़ाने के लिए पुलिस स्टेशन पर धावा बोलने की कोशिश भी की।

जहांगीर खान अकेले ऐसे नेता नहीं हैं जिन्हें गिरफ्तारी के बाद घुमाया गया है। पश्चिम बंगाल में बदलते राजनीतिक माहौल के बीच, कई TMC नेताओं और उनके साथियों को पुलिस या पैरामिलिट्री फ़ोर्स ने उनके गढ़ों में सबके सामने घुमाया है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, इनमें से कुछ TMC नेताओं को सिर्फ़ अंडरवियर पहने, हथकड़ी और कमर पर बंधी रस्सी के साथ देखा गया। कुछ वायरल वीडियो में नेताओं को उकड़ू बैठकर कान पकड़े और सबके सामने माफी मांगते हुए घुमाया जा रहा था।

‘जानबूझकर बदनाम या अपमानित न करे’

इस तरह सबके सामने घुमाए जाने की एक घटना के बाद, कलकत्ता हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने इस घटना पर नाराज़गी जताई। अदालत ने राज्य सरकार से उन हालात और कानूनी प्रावधानों के बारे में रिपोर्ट मांगी जिनके तहत ऐसा हुआ। कोर्ट ने माना कि कानून के मुताबिक लोगों को गिरफ़्तार किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उन्हें जानबूझकर बदनाम या सबके सामने अपमानित नहीं किया जा सकता।

अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए पुलिस ने कहा कि यह पूरी तरह से जांच से जुड़ा था। इसका मकसद अपराध वाली जगह पर घटना को फिर से दोहराकर देखना (reconstruction of crime scenes) था। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सीनियर IPS अधिकारी ने कहा कि पुलिस बहुत ही नाजुक स्थिति में काम कर रही थी।

TMC ने ‘मानवाधिकारों के उल्लंघन’ का आरोप लगाया, BJP ने इसे ‘राम राज्य’ बताया

इस बीच, TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी अपने नेताओं को सबके सामने घुमाने के कथित मामले को लेकर पुलिस के ख़िलाफ कानूनी कार्रवाई करने की योजना बना रही है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए उन्होंने कहा, “यह आर्टिकल 21 का पूरी तरह से उल्लंघन और मानवाधिकारों का हनन है।”

वहीं, हावड़ा उत्तर से बीजेपी विधायक उमेश राय ने एक जनसभा में टीएमसी के आकाश सिंह की गिरफ्तारी पर कहा, “एक समय था जब वह 100 बाइकों के काफिले के साथ सड़कों पर घूमता था और लोगों को डराता-धमकाता था। आज उसी आदमी को कमर में रस्सी बांधकर घुमाया जा रहा है। असली राम राज्य ऐसा ही होता है।”

किन-किन TMC नेताओं को घुमाया गया?

आकाश सिंह

बीजेपी सरकार के सत्ता संभालने के चार दिन बाद 13 मई को हावड़ा की गोलाबाड़ी पुलिस ने आकाश सिंह को गिरफ्तार किया। फिर उसका सिर मुंडवाकर सिर्फ बनियान और अंडरवियर पहनाकर इलाके में घुमाया। स्थानीय स्तर पर ‘नॉर्थ हावड़ा के डॉन’ के तौर पर पहचाने जाने वाले आकाश पर लगभग 20 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें पुलिस पर गोली चलाने और एक सब-इंस्पेक्टर को घायल करने, 2021 के बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान बम हमले करने, जबरन वसूली और हत्या की कोशिश जैसे आरोप शामिल हैं।

अभिजीत रॉय

उत्तर 24 परगना के कांचरापाड़ा के रहने वाले स्थानीय TMC युवा नेता रॉय को 28 मई को अरेस्ट किया गया था। इसके बाद उन्हें कमर में रस्सी बांधकर इलाके में घुमाया गया। उस समय वहां भारी भीड़ जमा थी और लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। पुलिस के मुताबिक, रॉय पर बिजपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज जबरन वसूली के एक मामले में आरोप है।

साथ ही, उन पर म्युनिसिपल सफाई कर्मचारियों के लिए बनी प्लास्टिक की बाल्टियों समेत अन्य सामानों का गैर-कानूनी तरीके से स्टॉक करने और उन्हें दोबारा बेचने का भी आरोप है। पुलिस ने बताया कि BJP के सत्ता में आने के बाद रॉय छिप गए थे। आखिरकार उन्हें पूर्वी मिदनापुर के मंदारमणि से गिरफ्तार किया गया।

जहांगीर खान

फाल्टा और डायमंड हार्बर में TMC के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले जहांगीर खान ने बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान एक पुलिस अधिकारी के साथ सार्वजनिक टकराव के बाद पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। फाल्टा से तत्कालीन TMC उम्मीदवार ने एक आक्रामक बयान में खुद की तुलना ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘पुष्पा’ के मुख्य किरदार से करते हुए कहा था कि वह कभी किसी के सामने नहीं झुकेंगा।

फाल्टा एकमात्र विधानसभा क्षेत्र था जहां दोबारा मतदान (री-पोल) हुआ था। हालांकि, जब तक मतदान हुआ, पश्चिम बंगाल का राजनीतिक माहौल बदल चुका था। खान ने चुनाव से हटकर TMC को चौंका दिया था। इसके बाद पार्टी में हुई फूट के दौरान कई नेताओं ने खान के प्रति नेतृत्व के नरम रवैये को अपनी नाराजगी की एक वजह बताया था। शुरुआत में डकैती और हत्या की कोशिश के मामलों में नाम आने के बाद, खान पर जबरन वसूली और अन्य आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए।

गिरफ्तारी के बाद खान को तीन अलग-अलग मौकों पर फाल्टा में घुमाया गया था। एक वायरल वीडियो में उन्हें पुलिस की निगरानी में अपने कान पकड़कर सबके सामने माफी मांगते हुए देखा गया। पुलिस का कहना है कि यह सब क्राइम सीन को फिर से समझने (रीकंस्ट्रक्शन) के लिए किया गया था। साथ ही दावा किया कि खान ने खुद ही अपने कान पकड़े, उठक-बैठक की और जनता से माफ़ी मांगी।

गुड्डू अंसारी

उत्तर 24 परगना के कमारहाटी के एक जाने-माने स्थानीय नेता, अंसारी को वरिष्ठ TMC नेता और कमारहाटी के विधायक मदन मित्रा का करीबी सहयोगी माना जाता था। मित्रा उन पार्टी नेताओं में से एक थे जो पार्टी में बंटवारे के बाद भी ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहे। अंसारी को 31 मई को गिरफ्तार किया गया और बाद में हथकड़ी पहनाकर कमारहाटी में घुमाया गया।

पुलिस का आरोप है कि अंसारी अलग-अलग तरह के कारोबार में कई सिंडिकेट चलाते थे। वह इलाके पर अपना दबदबा बनाए रखने के लिए हथियारों के दम पर लोगों को डराते-धमकाते थे। बेलघरिया पुलिस के एक अधिकारी ने इस तरह सबके सामने घुमाने का बचाव करते हुए कहा कि इसका मकसद अपराधियों को कड़ी चेतावनी देना था।

शमीम अहमद

‘गब्बर’ के नाम से पहचाने जाने वाले अहमद, शिबपुर में वार्ड नंबर 36 के अध्यक्ष हैं। उन्हें TMC के एक पूर्व मंत्री का करीबी माना जाता है। उनकी पत्नी, शमीमा बानू, पहले इसी वार्ड से पार्षद रह चुकी हैं। अहमद को 21 मई को मुंबई के चेंबूर से गिरफ्तार किया गया और बाद में कोलकाता पुलिस उन्हें दक्षिण हावड़ा के संकराइल में भीड़-भाड़ वाले बाज़ार में कमर से रस्सी बांधकर घुमाती हुई ले गई। पुलिस ने उन पर 7 मई को हावड़ा माइनॉरिटी सेल के अध्यक्ष सिकंदर खान के नेतृत्व में BJP की जीत के बाद निकाली गई रैली पर हमले में शामिल होने का आरोप लगाया है। इस हमले में तीन लोग घायल हो गए थे।

शाहिन मोल्ला

शाहिन मोल्ला उर्फ ​​सनी एक ट्रैफिक होम गार्ड थे। उन्हें TMC के एक पूर्व मंत्री से करीबी होने के कारण दक्षिण हावड़ा में प्रभावशाली माना जाता था। उन्हें संकराइल पुलिस ने 23 मई को करोड़ों रुपये की कथित रंगदारी (एक्सटॉर्शन) रैकेट के मामले में अरेस्ट किया। गिरफ्तारी के बाद सेंट्रल फ़ोर्स और संकराइल पुलिस के जवान उन्हें कमर से रस्सी बांधकर सेंट्रल हावड़ा के चौरा बस्ती इलाके से पैदल ले गए। बंगाल पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई जांच के सिलसिले में की गई थी।

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