ममता बनर्जी के पैर में लगी चोट नकली थी? फ्रैक्चर केस में शुभेंदु अधिकारी का बड़ा दावा, बंगाल सरकार ने जांच के दिए आदेश

Mamata Banerjee Leg Injury: पश्चिम बंगाल सरकार 2021 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पैर में लगी चोट के कथित झूठे दावों की फिर से जांच शुरू करेगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार (3 अक्टूबर) को यह बड़ी घोषणा की। इसी के साथ अधिकारी ने नंदीग्राम में 2021 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी के पैर में लगी चोट से जुड़े विवाद को फिर से हवा दी है। अधिकारी ने आरोप लगाया है कि बनर्जी ने चोट का नाटक किया था। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज के मेडिकल रिकॉर्ड का हवाला दिया है।

राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अधिकारी ने आरोप लगाया कि बनर्जी ने चुनाव के दौरान अपनी चोट का नाटक किया था। अधिकारी ने बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस द्वारा जारी बनर्जी की मेडिकल रिपोर्ट दिखाते हुए कहा, “ममता बनर्जी ने 2021 में नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान पैर में चोट लगने का नाटक किया था। हमारे पास मेडिकल रिपोर्ट है, जिसमें कहा गया है कि फ्रैक्चर या हड्डी खिसकने का कोई प्रमाण नहीं है। हम इस मामले की जांच शुरू करेंगे।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “उनके झूठे आरोप से नंदीग्राम के लोगों का अपमान हुआ। 9 अक्टूबर के बाद आदर्श आचार संहिता हटने पर मैं इस बारे में और जानकारी सामने रखूंगा। मैं कल किए गए अपने दावों के समर्थन में आज यह बात कह रहा हूं।” नंदीग्राम में छह अक्टूबर को उपचुनाव होना है। जबकि इसके नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।

मार्च, 2021 में लगी थी पैर में चोट

सीएम अधिकारी ने इससे पहले नंदीग्राम-2 विकासखंड के बिरुलिया बाजार में एक रैली को संबोधित करते हुए यह दावा किया था। यही वह स्थान है, जहां पांच साल पहले बनर्जी घायल हुई थीं। तत्कालीन मुख्यमंत्री बनर्जी को 10 मार्च, 2021 को चुनाव प्रचार के दौरान नंदीग्राम के बिरुलिया के रेयापाड़ा इलाके में बाएं पैर और कमर में चोट लगी थी। बनर्जी ने शुरुआत में कहा था कि कुछ अज्ञात लोगों ने जानबूझकर उन्हें उनकी कार के दरवाजे की ओर धक्का दिया, जिससे दरवाजा उनके बाएं पैर से जोर से टकराया और भारी भीड़ के बीच पैर चोटिल हो गया।

बाद में अस्पताल से जारी एक वीडियो संदेश में बनर्जी ने बताया था कि समर्थकों का अभिवादन करते समय भारी भीड़ उनकी कार के पास आ गई थी, जिससे उनका पैर दब गया और उन्हें चोट लगी। उन्हें आधिकारिक तौर पर बाएं टखने और पैर की हड्डियों में गंभीर चोट के साथ-साथ दाहिने कंधे, हाथ, गर्दन और कमर में चोट एवं दर्द की जानकारी दी गई थी। इसके बाद उन्हें कोलकाता लाया गया और राज्य संचालित एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया।

विस्तृत जांच के बाद बनर्जी को 12 मार्च को अस्पताल से छुट्टी दी गई। उस समय उनके बाएं पैर पर प्लास्टर था और उन्होंने बाद में व्हीलचेयर पर बैठकर चुनाव प्रचार जारी रखा। इन चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 294 में से 216 सीटें जीतकर बड़ी जीत दर्ज की थी। जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) 77 सीटों पर सिमट गई थी।

रिपोर्ट में क्या है?

अधिकारी द्वारा शेयर किए गए मेडिकल दस्तावेजों से पता चलता है कि 11 मार्च, 2021 के सीटी स्कैन में जांच किए गए क्षेत्रों में कथित तौर पर कोई फ्रैक्चर नहीं दिखा। हालांकि, केवल इन रिपोर्टों से यह साबित नहीं होता है कि बनर्जी की कुल चोटें बनावटी थीं। एसएसकेम (SSKM) अस्पताल की उस समय की रिपोर्टों में उनके बाएं टखने और पैर में चोटों के साथ-साथ कंधे, अग्रबाहु (forearm) और गर्दन में चोटों का भी जिक्र था।

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अधिकारी द्वारा घोषित नई जांच से 2021 की घटना से जुड़ी परिस्थितियों की और जांच होने की उम्मीद है। नंदीग्राम उपचुनाव से ठीक पहले यह विवाद फिर से उठ खड़ा हुआ है, जिससे 2021 के चुनाव का घटनाक्रम एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।

Skoda Slavia Facelift की लॉन्च डेट फिक्स, इन दिन होगी एंट्री, 10.25-इंच डिस्प्ले समेत मिलेंगे ये फीचर्स

Skoda Slavia Facelift, जिसे पिछले महीने भारत में पेश किया गया था, 6 अक्टूबर 2026 को देश में लॉन्च होने वाली है। बता दें कि इस नई सेडान का प्रोडक्शन पुणे के चाकन स्थित कंपनी के प्लांट में शुरू हो चुका है। वहीं, कंपनी नई Slavia को 6 ट्रिम लेवल में पेश करेंगी: Classic, Classic+, Signature, Sportline, Prestige और Monte Carlo। फिलहाल, इसकी बुकिंग शुरू हो चुकी है, जबकि डिलीवरी की तारीख लॉन्च के समय बताई जाएगी। कीतम की बात करें तो, मौजूदा मॉडल की कीमत 10 लाख रुपये से 18.19 लाख रुपये के बीच है, और अपडेटेड सेडान की कीमत काफी ज्यादा हो सकती है क्योंकि इसके बाहरी और अंदरूनी हिस्से में काफी बदलाव किए गए हैं।

Skoda Slavia Facelift: एक्सटीरियर और इंटीरियर

मेकओवर के बाद, Skoda ने कार की बनावट (सिलुएट) को तो वैसा ही रखा है, लेकिन डिटेल्स में काफी बदलाव किए हैं जिससे Facelifted मॉडल एकदम नया और फ्रेश लगता है। इसमें नए डिजाइन वाले LED हेडलैंप्स दिए गए हैं। इसके अलावा, Skoda ने बंपर्स में भी बदलाव किए हैं। वहीं, पिछले हिस्से में अपडेटेड टेललैंप्स और सीक्वेंशियल इंडिकेटर्स दिए गए हैं। अपडेटेड सेडान में नए अलॉय व्हील्स भी मिलते हैं। इसके अलावा, कलर ऑप्शन में दो नए एक्सटीरियर कलर्स (Arctic Silver और Cappuccino Beige) भी जोड़े गए हैं।

अपडेटेड Slavia के केबिन में अब बड़ी 10.1-इंच की इंफोटेनमेंट स्क्रीन और 10.25-इंच का डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले मिलता है। Google Cloud पर आधारित नए AI कंपैनियन के साथ, Slavia फेसलिफ्ट में वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay की सुविधा भी दी गई है। अन्य फीचर्स में 360-डिग्री एरिया व्यू कैमरा और पिछली सीट पर मसाज फंक्शन शामिल हैं। एयर-कंडीशनिंग सिस्टम के लिए एक वेरिएबल-जियोमेट्री कंप्रेसर भी जोड़ा गया है।

Skoda Slavia Facelift: इंजन

मैकेनिकल तौर पर, नई Slavia में दो टर्बो-पेट्रोल इंजन मिलते हैं: 1.0-लीटर इंजन (115hp और 178Nm) और 1.5-लीटर इंजन (150hp और 250Nm)। छोटे इंजन को 6-स्पीड मैनुअल या नए 8-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ जोड़ा जा सकता है। इस ट्रांसमिशन ने पुरानी Slavia के छह-स्पीड ऑटोमैटिक की जगह ली है। वहीं, पावरफुल 1.5-लीटर इंजन सात-स्पीड डुअल-क्लच ऑटोमैटिक के साथ आता है।

Skoda Slavia Facelift: बुकिंग और मुकाबले की गाड़ियां

अपडेटेड Slavia की बुकिंग 15,000 रुपये में शुरू हो चुकी है। इस सेगमेंट में इसका मुकाबला Volkswagen Virtus, Hyundai Verna और Honda City से होगा।

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7.84 लाख में आई Renault की नई 7-सीटर कार, Turbo इंजन के साथ मिलेंगे ये दमदार फीचर्स

अगर आप कम बजट में ऐसी 7-सीटर कार देख रहे हैं, जिसमें ज्यादा पावर का विकल्प भी मिले, तो Renault Triber आपके लिए एक नया ऑप्शन लेकर आई है। कंपनी ने भारत में Triber Turbo लॉन्च कर दी है। इसमें पहले से ज्यादा दमदार इंजन दिया गया है और इसकी शुरुआती कीमत 7.84 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) रखी गई है।

Renault Triber Turbo में नया 1.0-लीटर टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन मिलता है। इससे Triber में पावरट्रेन का एक नया विकल्प जुड़ गया है। साथ ही, कंपनी को उम्मीद है कि इससे कॉम्पिटिटिव MPV सेगमेंट में Triber की स्थिति और मजबूत होगी। फिलहाल Triber Turbo को सिर्फ 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स के साथ पेश किया गया है। इसके टॉप-स्पेक वेरिएंट की कीमत 8.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक जाती है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि टर्बो-पेट्रोल इंजन पूरी रेंज के बजाय सिर्फ कुछ खास वेरिएंट्स में ही मिलेगा। ज्यादा जानने के लिए आगे पढ़ें।

Renault Triber Turbo की कीमत: अलग-अलग वेरिएंट की कीमतों पर एक नजर

कार बनाने वाली कंपनी ने MPV के तीन वैरिएंट में नया टर्बो-पेट्रोल इंजन पेश किया है। Evolution Turbo की कीमत 7.84 लाख रुपये है। Techno Turbo की कीमत 8.53 लाख रुपये है। वहीं, टॉप-स्पेक Emotion Turbo की कीमत 8.99 लाख रुपये है। बता दें कि स्टैंडर्ड नैचुरली एस्पिरेटेड वर्जन की शुरुआती कीमत अभी भी लगभग 5.80 लाख रुपये है। सभी कीमतें एक्स-शोरूम हैं।

वेरिएंटइंजन और गियरबॉक्सकीमत (एक्स-शोरूम)
Triber Evolution Turbo1.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल, 5-स्पीड मैनुअल7.84 लाख रुपये
Triber Techno Turbo1.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल, 5-स्पीड मैनुअल8.53 लाख रुपये
Triber Emotion Turbo1.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल, 5-स्पीड मैनुअल8.99 लाख रुपये

Renault Triber Turbo: डिजाइन और फीचर्स

Renault Triber Turbo के डिजाइन में ज्यादा बदलाव नहीं किया गया है। इसका लुक मौजूदा Triber जैसा ही है। पीछे की तरफ टेलगेट पर ‘Turbo’ बैज दिया गया है, जिससे इसके टर्बो वर्जन की पहचान की जा सकती है।

कार के अंदर भी केबिन का लेआउट पहले जैसा ही रखा गया है। इसमें वेरिएंट के हिसाब से 8-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलता है, जो वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay को सपोर्ट करता है। इसके अलावा ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और वायरलेस चार्जिंग जैसे फीचर्स भी मिलते हैं।

Triber Turbo में सीटिंग को जरूरत के हिसाब से बदलने की सुविधा भी बरकरार रखी गई है। सेफ्टी के लिए इसमें 6 एयरबैग, ट्रैक्शन कंट्रोल, ABS के साथ EBD, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) और हिल-स्टार्ट असिस्ट जैसे फीचर्स दिए गए हैं।

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उत्तरपाड़ा में EV प्रोजेक्ट की तैयारी, CKA बिड़ला ग्रुप से पश्चिम बंगाल सरकार ने मांगी DPR

पश्चिम बंगाल सरकार ने CKA Birla Group से उत्तरपाड़ा में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बनाने के प्रस्ताव की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) जल्द से जल्द जमा करने को कहा है। Moneycontrol को मिली जानकारी के मुताबिक, सरकार चाहती है कि ग्रुप इस प्रोजेक्ट से जुड़ी पूरी जानकारी जल्द उपलब्ध कराए।

ग्रुप के एक प्रतिनिधि ने राज्य के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से संपर्क किया था। इसके बाद एक सरकारी अधिकारी ने ग्रुप से DPR जल्द जमा करने को कहा। हालांकि, ग्रुप ने अभी तक यह रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंपी है।

मनीकंट्रोल ने 21 सितंबर को रिपोर्ट दी थी कि CKA बिड़ला ग्रुप ने पुरानी हिंदुस्तान मोटर्स फैक्ट्री में EVs बनाने के प्रस्ताव के साथ पश्चिम बंगाल सरकार से संपर्क किया था। उस समय प्रस्ताव पर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा था।

प्रस्तावित प्रोजेक्ट में कितना निवेश किया जाएगा, किस तरह के इलेक्ट्रिक वाहन बनाए जाएंगे, कितनी गाड़ियों का उत्पादन होगा और प्रोजेक्ट कब तक शुरू होगा, इन सबकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। यह भी साफ नहीं है कि कौन सी ग्रुप कंपनी इस प्रोजेक्ट पर काम करेगी।

हालांकि, मनीकंट्रोल ने पश्चिम बंगाल सरकार और CKA बिड़ला ग्रुप (जिसे पहले CK बिड़ला ग्रुप के नाम से जाना जाता था) को DPR रिक्वेस्ट और प्रस्तावित प्रोजेक्ट के बारे में सवाल भेजे हैं। अब उनके जवाब का इंतजार है।

बता दें कि उत्तरपाड़ा में कभी Hindustan Motors की फैक्ट्री थी, जहां Ambassador और Contessa गाड़ियां बनती थीं। इस फैक्ट्री में काम 2014 में रोक दिया गया था। इस प्रस्ताव से एक दशक से ज़्यादा समय के बाद उस जगह पर फिर से गाड़ियों का प्रोडक्शन शुरू हो सकता है, लेकिन जमीन की उपलब्धता एक अहम सवाल बनी हुई है।

395 एकड़ जमीन पर सरकार का कब्जा

Hindustan Motors ने अपनी FY26 की सालाना रिपोर्ट में बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने फैक्ट्री की पूरी जमीन (लगभग 395 एकड़) वापस ले ली है और उस पर कब्जा कर लिया है। कंपनी ने अपने फाइनेंशियल स्टेटमेंट में इस प्रॉपर्टी को राइट-ऑफ भी कर दिया है।

वहीं, जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने जमीन वापस लिए जाने के पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली Hindustan Motors की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद कंपनी ने कहा था कि वह इस फैसले पर दोबारा विचार के लिए याचिका दायर करने और जमीन के एक हिस्से की मांग करने की योजना बना रही है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में गाड़ियों का निर्माण भले ही कम होता हो, लेकिन वहां गाड़ियों का एक बड़ा बाजार है। SIAM के आंकड़ों के मुताबिक, FY26 में राज्य में लगभग 10.2 लाख दो-पहिया और 1.25 लाख पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री हुई। हालांकि, यहां अभी तक किसी गाड़ी बनाने वाले प्लांट के आस-पास कंपोनेंट सप्लायर्स का कोई बड़ा नेटवर्क नहीं बन पाया है।

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अदाणी ग्रुप का पश्चिम बंगाल के लिए मास्टरप्लान! 2035 तक ₹1 लाख करोड़ के निवेश का ऐलान, पोर्ट से डेटा सेंटर तक क्या-क्या बनेगा?

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने गुरुवार, 24 सितंबर को कहा कि अदाणी ग्रुप 2035 तक पश्चिम बंगाल में पोर्ट, लॉजिस्टिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी, बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन, सड़कों और पुलों, ग्रीन सीमेंट और हाइपरस्केल डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश करेगा। ₹1 लाख करोड़ के निवेश के इस रोडमैप में 2035 तक पूरे राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी प्रोजेक्ट्स शामिल होंगे।

यह घोषणा गौतम अदाणी और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा कोलकाता के न्यू टाउन में ग्रुप के प्रस्तावित 2,000-बेड वाले ‘अदाणी आरोग्य मंदिर’ की आधारशिला रखने के मौके पर की गई। अदाणी फाउंडेशन द्वारा विकसित किए जाने वाले इस हॉस्पिटल प्रोजेक्ट में ₹4,000 करोड़ से ज़्यादा का निवेश होगा।

अपनी निवेश योजना के बारे में बात करते हुए गौतम अदाणी ने कहा, “हम पश्चिम बंगाल को पूर्व में अपनी कर्मभूमि मानते हैं।” उन्होंने ग्रुप के पूर्वी क्षेत्र के कामकाज में राज्य की भूमिका की तुलना गुजरात के मुंद्रा से की, जिसे उन्होंने ग्रुप के बड़े प्रोजेक्ट्स की नींव बताया।

अस्पताल में कैंसर के इलाज की होगी सुविधा

अदाणी आरोग्य मंदिर 51.75 एकड़ में फैला होगा और इसमें 2,000 बिस्तरों वाला मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल, एक मेडिकल कॉलेज, एक नर्सिंग कॉलेज और सहयोगी हेल्थकेयर व पैरामेडिकल शिक्षा के संस्थान शामिल होंगे।

इस हेल्थकेयर प्रोजेक्ट के बारे में बात करते हुए गौत अदाणी ने कहा, “अडानी आरोग्य मंदिर एक नॉन-प्रॉफिट मेडिकल इंस्टीट्यूट होगा जिसमें 2,000 बिस्तर होंगे। इनमें से 1,000 बिस्तर समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए होंगे, जो राज्य और केंद्र की स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के तहत पात्र हैं।”

अस्पताल के पहले चरण में कैंसर के इलाज पर फोकस किया जाएगा और टर्शियरी और स्पेशलाइज़्ड हेल्थकेयर सर्विस दी जाएंगी। कैंपस में स्टेप-डाउन और ट्रांज़िशनल केयर की सुविधाएं, मरीज़ों के रिश्तेदारों के लिए रहने की जगह और हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल्स के लिए रिहायशी सुविधाएं भी होंगी।

मेडिकल कॉलेज में हर साल 150 अंडरग्रेजुएट छात्र, 100 से ज़्यादा पोस्टग्रेजुएट छात्र और 40 से ज़्यादा सुपर-स्पेशलिस्ट दाखिला ले सकेंगे। ग्रुप ने कहा कि बड़े हेल्थकेयर इकोसिस्टम से लगभग 10,000 नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।

इस प्रोजेक्ट में जीनोमिक्स, प्रिसिजन मेडिसिन, बायोमेडिकल इंफॉर्मेटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लिनिकल ट्रायल और बायोमेडिकल साइंस के दूसरे क्षेत्रों से जुड़ी रिसर्च सुविधाएं भी शामिल होंगी।

ग्रुप की योजनाओं में राज्य की भूमिका के बारे में बात करते हुए सुवेंदु अधिकारी ने कहा, “हम बंगाल को पुनर्निमित करने में आपकी मौजूदगी की उम्मीद करते हैं। इसका अंतिम विज़न सिर्फ़ एक हॉस्पिटल कैंपस नहीं, बल्कि एक पूरी तरह से इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर सिटी बनाना है।”

राइटर्स बिल्डिंग के जीर्णोद्धार और दुर्गा पूजा के लिए हुए करार

हेल्थकेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के साथ-साथ, अदाणी ग्रुप ने पश्चिम बंगाल सरकार के साथ दो और समझौते (MoU) किए। एक समझौता राइटर्स बिल्डिंग के जीर्णोद्धार से जुड़ा है, जबकि दूसरा ग्रुप की ‘अदाणी पूजा प्रीव्यू’ पहल के ज़रिए कोलकाता के दुर्गा पूजा इकोसिस्टम को सहयोग देने से संबंधित है। अदाणी ग्रुप ने कुमारतुली घाट के कायाकल्प में सहयोग की भी घोषणा की।

 

 

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पश्चिम बंगाल के इन 250 मदरसों को क्यों बंद करने जा रहे हैं शुभेंदु अधिकारी? दुर्गा पूजा से पहले मिलेगी रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल में चल रहे मदरसों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सरकारी से मान्यता प्राप्त 250 प्राइवेट मदरसों को धीरे-धीरे बंद करने का फैसला किया गया है।

मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि इनमें से ज्यादातर में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या बहुत कम या नामात्र की है और बुनियादी ढांचा भी पर्याप्त नहीं है। बताया जा रहा है कि इन मदरसों में वर्तमान में जो छात्र एनरोल हैं, उनके लिए दिसंबर तक कक्षाएं जारी रहेंगी। इसके बाद इन्हें बंद कर दिया जाएगा।

1.51 लाख भर्ती प्रस्ताव को मिली मंजूरी

बुधवार को कैबिनेट बैठक में अलग-अलग सरकारी विभागों में लगभग 1.51 लाख लोगों की भर्ती के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई। इसमें पश्चिम बंगाल पुलिस के लिए 12,000 और कोलकाता पुलिस के लिए 4,000 लोग शामिल हैं।

दुर्गा पूजा से से पहले रिपोर्ट मिलने की उम्मीद

अधिकारी ने कहा, “कैबिनेट ने 250 प्राइवेट मदरसों को बंद करने का फैसला किया, जिनमें सही इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है और छात्रों की संख्या बहुत कम है। उन्हें दिसंबर तक काम करने दिया जाएगा।” अधिकारी ने कहा कि इन संस्थानों से रिपोर्ट दुर्गा पूजा उत्सव से पहले मिलने की उम्मीद है। इसके बाद जरूरी प्रशासनिक कार्यवाही की जाएगी।

सरकार पहले बंद कर चुकी है 252 बिना इजाजत वाले मदरसे

यह कदम राज्य सरकार के 252 बिना इजाजत वाले मदरसों को बंद करने और करीब 100 दूसरे मदरसों को कारण बताओ नोटिस भेजने के कुछ दिनों बाद आया है। राज्य भर में हुए एक सर्वे में पाया गया था कि ऐसे कई संस्थानों के पास जरूरी मंजूरी और बुनियादी ढांचा की कमी थी।

अलग-अलग चरणों में बंद हो सकते हैं 2500 मदरसे

अधिकारी ने कहा कि अलग-अलग चरण में राज्य भर में बिना सरकारी पंजीकरण के चल रहे करीब 2,500 मदरसे भी बंद हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने कथित गड़बड़ियों को लेकर 100 दूसरे मदरसों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की भी मंजूरी दे दी है।

सभी विभागों में भर्ती में तेजी लाना चाहती है सरकार

राज्य में मंजूर की गई भर्तियों पर वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “सरकार सभी विभागों में भर्ती में तेजी लाना चाहती है और खाली जगहों को भरना चाहती है ताकि सार्वजनिक सेवा पर असर न पड़े। संबंधित विभागों को भर्ती प्रक्रिया में रुकावट डालने वाले मुद्दों को सुलझाने के लिए कहा गया है।”

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नंदीग्राम में कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव लड़ सकते हैं

कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में कांग्रेस पार्टी और साथ साथ ममता बनर्जी की भी बड़ी राहत दी है। अदालत ने कहा है कि नंदीग्राम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे कांग्रेस के प्रत्याशी मिलन प्रधान को अगर जमानत मिलती है तो उनको चुनाव लड़ने दिया जाए। मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस सौगत  भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल सरकार के वकील से कहा है कि जमानत मिलने पर कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को चुनाव लड़ने दिया जाए।

गौरतलब है कि मिलन प्रधान नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार हैं, जिन्हें ममता बनर्जी ने समर्थन दिया है क्योंकि ममता की प्रत्याशी संचिता प्रधान डे चुनावी मुकाबले से हट गई हैं। बहरहाल, कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान पर 11 केस दर्ज हैं। उन्हें पांचमामलों में गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल वे जेल में हैं। गिरफ्तारी के बाद हल्दिया एसडीएम कोर्ट ने उन्हें 19 सितंबर को चार मामलों में तीन अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा था। गौरतलब है कि नंदीग्राम सीट पर छह अक्टूबर को मतदान होना है।

बहरहाल, मिलन प्रधान के ऊपर दर्ज मामले 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े हैं। नामांकन के समय भी उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। लेकिन जैसे ही ममता बनर्जी ने उनको समर्थन दिया, पुलिस को उनके सारे मामले याद आ गए। उनको नंदीग्राम आंदोलन के अलावा आर्म्स एक्ट के भी दो दशक पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया। हालांकि अदालत की टिप्पणी के बावजूद इस बात की संभावना कम है कि मिलन प्रधान खुद से चुनाव प्रचार कर पाएंगे। चार अक्टूबर को चुनाव प्रचार बंद हो जाएगा।

जीएसटी की तरह यूसीसी

जिस तरह जीएसटी के बावजूद अनेक किस्म के कर लोगों को चुकाने होते हैं क्या वैसे ही यूसीसी के बावजूद कई तरह के निजी कानून चलते रहेंगे? एसटी के अलावा दूसरी जातियों को भी यूसीसी के दायरे से बाहर रखने की तैयारी चल रही है। गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने वस्तु व सेवा कर यानी जीएसटी को ‘एक देश, एक कर’ के रूप में प्रचारित किया और इसे आजाद भारत का सबसे बड़ा क्षण बनाने के लिए आधी रात को संसद का सत्र बुला कर सेंट्रल हॉल में साझा सत्र में इसे कानून बनाया। लेकिन क्या यह सचमुच ‘एक देश, एक कर’ का प्रतीक है? यह सवाल इसलिए है क्योंकि अब भी आयकर और जीएसटी के अलावा दस तरह के कर लोगों को देने पड़ रहे हैं। हाल ही में सरकार ने यूपीआई पर भी एक कर लगाया है। टोल टैक्स अलग है और पेट्रोल व शराब पर लगने वाला कर अलग है। सीमा शुल्क भी लगता ही है। करों और शुल्कों के अलावा कई उपकर और दूसरी चीजें भी हैं। खुद जीएसटी के इतने स्लैब हैं कि लोग उसी में कंफ्यूज हुए रहते हैं। इसी तरह से ‘एक देश, एक कानून’ के तौर पर यूसीसी यानी समान नागरिक संहिता को प्रचारित किया जा रहा है। हालांकि ऐस लग रहा है कि इसका भी हस्र जीएसटी वाला ही होगा।

सबसे पहले उत्तराखंड में यह कानून बना और लागू हुआ। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की कमेटी की सिफारिशों के आधार पर कानून बना। अब उत्तराखंड का कानून पूरे देश में टेम्पलेट के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। उत्तराखंड में कानून बना तो अनुसूचित जनजाति यानी एसटी को इससे बाहर रखा गया। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऐलान किया कि कहीं भी अनुसूचित जनजाति को इस कानून के दायरे में नहीं लाया जाएगा। यानी देश के नागरिकों के एक बड़े समूह पर यूसीसी लागू होगा, जबकि करीब आठ फीसदी आबादी वाले एसटी समुदाय पर अलग कानून लागू होगा। अभी तक यूसीसी में एसटी को छूट दिया गया था लेकिन अब छूट देने का दायरा बढ़ रहा है। दूसरी जातियों को भी कानून के दायरे से बाहर रखने की घोषणाएं हो रही हैं।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ऐलान किया है कि उनके राज्य में एसटी समुदाय के अलावा कुड़मी जाति को भी यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाएगा। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के दक्षिणी हिस्से में और खास कर झारखंड से सटे पुरुलिया आदि के इलाके में बड़ी कुड़मी आबादी है, जो अपने को एसटी समुदाय में शामिल करने की मांग करती रहती है। कोई भी सरकार कुड़मी या कुर्मी को एसटी में शामिल करने की हिम्मत नहीं कर पा रही है। लेकिन शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने कुड़मी को एसटी की ही तरह यूसीसी से बाहर रखने का ऐलान कर दिया है। यह उनको एसटी का दर्जा देने की दिशा में उठा पहला कदम है। उसका अपना अलग असर होगा। लेकिन एक बार कुड़मी को यूसीसी से बाहर रखने का नियम बना तो फिर हर राज्य में इस तरह से किसी न किसी जाति को अलग करने की मांग उठेगी। झारखंड में भी कुड़मी बरसों से एसटी का दर्जा मांग रहे हैं। अगर कभी झारखंड में भाजपा की सरकार बनी तो वहां भी कुड़मी को अलग रखना होगा। पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले से पंडोरा बॉक्स खुल जाएगा। कई राज्यों में कई अति पिछड़ी जातियां एससी या एसटी में शामिल होने की नांग कर रही हैं। वे भी इस तरह की छूट मांगेंगी। अगर हर राज्य में 10 फीसदी या उससे ज्यादा आबादी यूसीसी से बाहर हो गई तो फिर ‘एक देश, एक कानून’ के सिद्धांत का क्या मतलब रह जाएगा?

Who is Bushra Bano: इंशाअल्लाह-जजाकअल्लाह कहने को लेकर क्यों घेरा जा रहा है? IPS बुशरा बानो कौन हैं, जानिए इनकी पूरी कहानी

Who is Bushra Bano: भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित पश्चिम बंगाल में एक IPS अधिकारी के ट्रांसफर को लेकर राज्य में राजनीतिक और सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया है। ‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक ‘हिंदू अधिकार समूह’ ने कॉम्पिटिटिव एग्जाम के लिए कोचिंग प्लेटफॉर्म को प्रमोट करने वाले एक वीडियो में उनके इस्लामिक अभिवादन के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। खड़गपुर में एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) और 2021 बैच की IPS अधिकारी बुशरा बानो को 14 सितंबर को राज्य सशस्त्र पुलिस की चौथी बटालियन में डिप्टी कमांडेंट के पद पर ट्रांसफर कर दिया गया। उनकी जगह पार्थ घोष को खड़गपुर का नया ASP बनाया गया है।

दबाव में हुआ ट्रांसफर या रूटीन प्रक्रिया है?

विवाद के बीच बंगाल सरकार ने इस ट्रांसफर को रूटीन प्रक्रिया बताया है। हलांकि, यह फेरबदल बुशरा बानो द्वारा एक दिन पहले यानी 13 सितंबर को X पर पोस्ट किए गए एक वीडियो पर हुई आलोचना के समय ही हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो में वह पुलिस की वर्दी में थीं। इस दौरान वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी में बिताए अपने समय के बारे में बात कर रही थीं। यहां उन्होंने UPSC परीक्षाओं की तैयारी की थी।

वीडियो में क्या है?

वीडियो में बुशरा बानो ने बताया कि UPSC की तैयारी के लिए सऊदी अरब में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर काम करने के बाद वह भारत लौटी थीं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय कोचिंग एकेडमी की किताबों, लाइब्रेरी और मॉक टेस्ट को दिया। साथ ही छात्रों को वहां एडमिशन लेने के लिए प्रोत्साहित किया। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि और छात्र एकेडमी में दाखिला लेंगे और इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेंगे ताकि मेरे जैसे और लोग आगे आ सकें।”

विवाद उनके संदेश से नहीं। बल्कि उसे देते समय उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए धार्मिक शब्दों से पैदा हुआ। रिपोर्ट में बताया गया है कि उन्होंने वीडियो की शुरुआत ‘अस्सलाम-अलैकुम’ से की। फिर अपनी बातचीत के दौरान ‘इंशाल्लाह’ का इस्तेमाल किया। साथ ही इसका अंत ‘जजाकल्लाह खैर’ से किया।

हिंदू संगठनों ने जताया विरोध

‘हिंदू नेटवर्क फाउंडेशन’ की एक यूनिट के तौर पर अपनी पहचान रखने वाले ‘हिंदू लीगल फंड’ ने उनके शब्दों के चयन को लेकर पश्चिम बंगाल के गृह सचिव के पास शिकायत दर्ज कराई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में संगठन ने तर्क दिया कि भारतीय राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले एक कार्यरत अधिकारी को इसके बजाय ‘वंदे मातरम’ या ‘जय हिंद’ जैसे राष्ट्रीय अभिवादनों का इस्तेमाल करना चाहिए था।

उन्होंने मामले की समीक्षा करने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रुप की शिकायत में यह सवाल उठाया गया कि एक सरकारी अधिकारी, जो अपनी रैंक बता रही थी और यूनिफॉर्म में थी, वह आधिकारिक दिखने वाले सार्वजनिक संदेश में ऐसी भाषा का इस्तेमाल कैसे कर सकती है।

सोशल मीडिया पर बढ़ा विवाद

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यह विवाद बढ़ गया। रिपोर्ट में बताया गया कि यूज़र्स के बीच इसे लेकर मतभेद था। कछ लोग धार्मिक बातों का जिक्र करने के लिए बुशरा बानो की आलोचना कर रहे थे। जबकि दूसरे यह सवाल उठा रहे थे कि क्या सभी सरकारी अधिकारियों के लिए निष्पक्षता का नियम एक जैसा लागू किया जा रहा है।

किसने क्या कहा?

पूर्व सिविल सर्वेंट आशीष जोशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन किया है। उन्होंने लिखा, “भारत की असली ताकत विविधता में एकता है। बुशरा बानो IPS की तारीफ़ होनी चाहिए। उन्होंने दो बार UPSC पास किया,।सऊदी अरब में एक आरामदायक नौकरी छोड़ी और अब पूरी लगन से देश की सेवा कर रही हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “उनके शब्दों का चुनाव उनके निजी विश्वास को दिखाता है, न कि उस देश के प्रति अनादर को जिसकी वह रक्षा करती हैं। भारत जैसे विशाल और विविधता वाले देश में यह सह-अस्तित्व कोई कमजोरी नहीं, बल्कि हमारा गर्व है। आपकी सेवा के लिए धन्यवाद, बुशरा! जजाकल्लाह खैर!”

अन्य यूजर्स ने सार्वजनिक जीवन में वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं द्वारा हिंदू धार्मिक नारों के इस्तेमाल से इसकी तुलना की। वहीं, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक सोशल मीडिया ग्रुप ने आरोप लगाया कि दक्षिणपंथी संगठन बुशरा बानो को इसलिए निशाना बना रहे हैं, क्योंकि वह अल्पसंख्यक समुदाय से हैं।

बुशरा बानो!

इस विवाद ने उनके अनोखे करियर सफर पर भी असर डाला है। उत्तर प्रदेश के कन्नौज की रहने वाली बुशरा बानो ने सऊदी अरब में काम करने से पहले अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से अपनी PhD पूरी की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत लौटने पर उन्होंने UPSC की तैयारी जारी रखते हुए कोल इंडिया में नौकरी की।

उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और शुरू में इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस के लिए चुनी गईं। बाद में उन्होंने सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट बनने के लिए उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास की। फिर दूसरी बार UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करके IPS में जगह बनाई। उनकी उपलब्धि ने पहले भी लोगों का ध्यान खींचा था क्योंकि उन्होंने दो बच्चों की परवरिश करते हुए दो बार UPSC पास किया था।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की प्रतिस्पर्धी सिविल सेवा प्रणाली में दृढ़ता के उदाहरण के तौर पर अक्सर इस बात का ज़िक्र किया जाता है। ट्रांसफर और वीडियो विवाद ने अब एक खास सवाल को सामने ला दिया है। क्या आधिकारिक संदेश में किसी अधिकारी का निजी धार्मिक इजहार सरकारी सेवकों से अपेक्षित निष्पक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है? सुवेंदु अधिकारी सरकार अपने इस रुख पर कायम है कि तबादला एक सामान्य प्रक्रिया थी, जबकि धर्म, सार्वजनिक पद और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति को लेकर बहस जारी है।