Bank Strike: हफ्ते में 5 दिन वर्किंग पर नहीं बनी बात, 11 सितंबर को बैंक हड़ताल तय! आगे भी कई दिन कामकाज रहेगा प्रभावित

Bank 5-day Work Week: अगर आपको बैंक से जुड़ा कोई भी जरूरी काम करना है, तो उसे पहले ही निपटा लें। क्योंकि सितंबर और अक्टूबर में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल होने वाली है। बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कई दिनों तक बैंक का काम प्रभावित हो सकता है। बता दें हफ्ते में 5 दिन वर्किंग की मांग को लेकर बैंक कर्मचारी यूनियनों और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के बीच बातचीत बेनतीजा रही। 4 सितंबर को हुई बैठक में इस मुद्दे पर कोई सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने साफ किया कि वह 11 सितंबर 2026 को होने वाली प्रस्तावित देशव्यापी बैंक हड़ताल को फिलहाल टाल नहीं सकता। ऐसे में बैंकिंग सेवाओं पर इसका असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।

पोस्ट कर दी जानकारी

UFBU ने X पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि “UFBU और IBA के बीच 4 सितंबर को हुई बैठक किसी सकारात्मक नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। संगठन के मुताबिक, पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था, भेदभावपूर्ण PLI और अन्य लंबित मुद्दों पर अब तक समाधान नहीं हो पाया है। ऐसे में 11 सितंबर को होने वाली देशव्यापी बैंक हड़ताल के आह्वान को टालने का फिलहाल कोई कारण नहीं है।”

बैंक हड़ताल की तारीखें

  • 11 सितंबर, 2026: एक दिन की देशव्यापी बैंक हड़ताल
  • 28-30 सितंबर, 2026: तीन दिन की देशव्यापी बैंक हड़ताल
  • 26 अक्टूबर, 2026 से: अनिश्चितकालीन देशव्यापी हड़ताल

मीटिंग में क्या हुआ

UFBU के अनुसार, हड़ताल के नोटिस में उठाई गई मांगों पर चर्चा करने के लिए IBA ने बैंक यूनियनों के प्रतिनिधियों को बैठक के लिए बुलाया था। IBA ने यूनियनों से हड़ताल का फैसला टालने और बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान निकालने की अपील की। हालांकि, UFBU का कहना है कि इन मुद्दों पर काफी समय से चर्चा चल रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। इसी वजह से यूनियनों को हड़ताल टालने का कोई मजबूत आधार नजर नहीं आ रहा है।

क्या है मांग

बैकों में 5 दिन वर्किंग लागू करने का प्रस्ताव बैंक कर्मचारियों के कामकाजी दिनों में बदलाव से जुड़ा है। बैकों में 5 दिन वर्किंग लागू होने पर दूसरे और चौथे शनिवार को छोड़कर बाकी सभी शनिवार को बैंक बंद रहेंगे। इसके बदले बैंक कर्मचारी सोमवार से शुक्रवार तक रोज करीब 40 मिनट ज्यादा काम करेंगे, ताकि ग्राहकों को बैंकिंग सेवाएं मिलने के समय में ज्यादा कमी न हो। यह प्रस्ताव IBA और बैंक यूनियनों के बीच 8 मार्च 2024 को हुए समझौते और जॉइंट नोट का हिस्सा है। यूनियनों का कहना है कि इस प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी के लिए भेजे काफी समय हो गया है, लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है। इसलिए UFBU सरकार से इसे जल्द मंजूरी देकर लागू करने की मांग कर रहा है।

PLI को लेकरय उठाए सवाल

बैंक यूनियनों ने वरिष्ठ अधिकारियों के लिए बनाई गई नई PLI (परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव) व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। UFBU का कहना है कि पहले IBA के साथ तय हुआ था कि PLI बैंक के पूरे प्रदर्शन के आधार पर मिलेगा और स्केल VII तक सभी कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए इंसेंटिव के दिन बराबर होंगे। लेकिन नई व्यवस्था में अधिकारियों के अलग-अलग स्तर के लिए अलग नियम बनाए गए हैं। इसके तहत स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों को अधिकतम 365 दिनों तक का PLI मिल सकता है, जबकि स्केल III तक के अधिकारियों के लिए यह सीमा सिर्फ 15 दिन है। यूनियनों का मानना है कि यह अंतर सही नहीं है और इस योजना को लागू करने से पहले उनसे बातचीत होनी चाहिए।

लोगों को हो सकती है परेशानी

अगर बैंक यूनियनों और IBA के बीच कोई समझौता नहीं होता है, तो 11 सितंबर को प्रस्तावित बैंक हड़ताल हो सकती है। इससे बैंक की शाखाओं में कामकाज प्रभावित हो सकता है और ग्राहकों को कुछ जरूरी कामों के लिए परेशानी हो सकती है। लेकिन, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और ATM जैसी सेवाएं चलती रह सकती हैं। इन सेवाओं पर असर अलग-अलग बैंकों में अलग हो सकता है।

कृष्ण वाणी: मन को मजबूत कैसे बनाये? भगवान श्री कृष्ण ने भगवत गीता में बताया मुश्किलों से लड़ने का सीक्रेट!

भगवान श्री कृष्ण की भगवद गीता की सीख हमें जीवन को एक अलग नजरिए से देखने की राह दिखाती है। जीवन में कई बार ऐसा समय आता है, जब नौकरी को लेकर चिंता बनी रहती है, पैसों की परेशानी जल्दी खत्म नहीं होती या किसी रिश्ते को ठीक करने की कोशिश के बावजूद हालात वैसे ही रहते हैं। ऐसे समय में मन बार-बार यही सोचता है कि आखिर बदलाव कब आएगा और हमें कोई रास्ता या संकेत कब मिलेगा। हर दिन एक जैसा लगने लगता है और इंतजार करना भी मुश्किल हो जाता है। गीता का यह संदेश हमें याद दिलाता है कि जीवन में कोई भी सिचुएशन हमेशा एक जैसी नहीं रहती।

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1. लोगों से अटैचमेंट छोड़ें

जब कोई परेशानी लंबे समय तक चलती है, तो हमें लगने लगता है कि अब जिंदगी शायद हमेशा ऐसी ही रहेगी। करियर में बार-बार निराशा मिलना, पैसों की कमी या किसी अपने का साथ न होना उस समय बहुत बड़ी परेशानी लग सकती है। धीरे-धीरे इंसान उसी सिचुएशन को अपनी जिंदगी का हिस्सा मान लेता है और सोचने लगता है कि इसमें अब कुछ नहीं बदलेगा। लेकिन श्री कृष्ण की सीख हमें याद दिलाती है कि जिंदगी में कोई भी सिचुएशन हमेशा एक जैसी नहीं रहती। जैसे मौसम बदलता है, वैसे ही सुख-दुख और जिंदगी के हालात भी बदलते रहते हैं।2. नई आदतें और हुनर अपनाएं

कई बार हम सिर्फ नतीजे देखकर तय करते हैं कि हमारी जिंदगी आगे बढ़ रही है या नहीं। प्रमोशन नहीं मिला, तो लगता है कि करियर रुक गया है। सैलरी नहीं बढ़ी, तो लगता है कि मेहनत का कोई फायदा नहीं हुआ। असल जिंदगी में बदलाव धीरे-धीरे होता है और उसका असर तुरंत दिखाई नहीं देता। हो सकता है कि इस दौरान आपका एक्सपीरियंस बढ़ रहा हो, आप नई चीजें सीख रहे हों या आपको अपनी जिंदगी और जरूरतों को पहले से बेहतर समझ आने लगा हो।3. करियर रीसेट करें

मुश्किल दौर से गुजरना और पूरी जिंदगी को मुश्किल मान लेना, दोनों अलग बातें हैं। कोई रिश्ता खत्म हो गया, तो इसका मतलब यह नहीं कि आपको आगे कभी अच्छा रिश्ता नहीं मिलेगा। करियर में रुकावट आई है, तो इसका मतलब यह भी नहीं कि आप आगे सफल नहीं हो सकते। इसी तरह आज पैसों की परेशानी है, तो जरूरी नहीं कि आगे भी हालात वैसे ही रहें। श्री कृष्ण की सीख है कि बाहर की सिचुएशन चाहे जैसी हों, हमें खुद को अंदर से मजबूत और शांत रखने की कोशिश करनी चाहिए।4. बदलाव की शुरुआत खुद से करें

समय बदलने का इंतजार करना ठीक है, लेकिन इसके लिए हाथ पर हाथ रखकर बैठना जरूरी नहीं है। अगर नौकरी नहीं मिल रही है, तो नई जगह कोशिश की जा सकती है या कोई नया हुनर सीखा जा सकता है। पैसों की परेशानी है, तो खर्चों पर ध्यान देकर बचत शुरू की जा सकती है। किसी रिश्ते में परेशानी है, तो अपनी सीमाएं तय करने या सही तरीके से बात करने की जरूरत हो सकती है। कई बार जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए कुछ पुरानी आदतों, लोगों या कामों को छोड़ना भी जरूरी होता है।

5. कल की चिंता छोड़ें

मुश्किल समय में हमारा ध्यान अक्सर इस बात पर लगा रहता है कि चीजें कब ठीक होंगी। लेकिन श्री कृष्ण की सीख है कि हमें फ्यूचर के नतीजे की चिंता में अपना आज खराब नहीं करना चाहिए। जो काम इस समय हमारे हाथ में है, उसे पूरी ईमानदारी और मेहनत से करते रहें।

श्री कृष्ण की यह सीख उन लोगों के लिए बहुत खास है, जो काफी समय से किसी मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। गीता हमें यह उम्मीद नहीं देती कि हर परेशानी एक पल में खत्म हो जाएगी, बल्कि यह समझाती है कि आज की मुश्किल को अपने पूरे जीवन की सच्चाई न मानें। सही दिशा में छोटे-छोटे कदम उठाते रहें, क्योंकि समय और हालात हमेशा एक जैसे नहीं रहते।

Stocks to Watch: 4 सितंबर को Gland Pharma, RVNL, Avalon Tech, Coal India समेत ये शेयर फोकस में, 4 कंपनियां होंगी लि​स्ट

शुक्रवार, 4 सितंबर को कई शेयरों पर फोकस रहेगा क्योंकि तेज हलचल देखने को मिल सकती है। इनमें ग्लैंड फार्मा, रेल विकास निगम, पावर ग्रिड, सिप्ला, स्टरलाइट टेक, धूत ट्रांसमिशन जैसे नाम प्रमुख हैं। वजह हैं- तिमाही नतीजे, नई डील या कॉन्ट्रैक्ट, कारोबार से जुड़े डेवलपमेंट्स, एग्रीमेंट आदि। इसके अलावा शुक्रवार को मेनबोर्ड और SME सेगमेंट में 2-2 कंपनियों की लिस्टिंग होने वाली है। साथ ही 40 से ज्यादा कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करने वाले हैं। कुछ शेयर एक्स-बोनस और एक्स-स्प्लिट ट्रेड भी करेंगे। आइए डिटेल में जानते हैं किन प्रमुख शेयरों पर रहेगी नजर…

आज के नतीजे

धूत ट्रांसमिशन

5 सितंबर को ये कंपनी जारी करेगी तिमाही नतीजे

मोलबायो डायग्नोस्टिक्स

इन शेयरों पर रहेगी नजर

Indian Energy Exchange: अगस्त महीने में बिजली का ट्रेडेड वॉल्यूम सालाना आधार पर 20.2% बढ़कर 13.94 BU हो गया। रियल-टाइम इलेक्ट्रिसिटी मार्केट वॉल्यूम 10.6% बढ़कर 5.6 BU हो गया। ‘डे-अहेड कंटीजेंसी’ और ‘टर्म-अहेड मार्केट’ का ट्रेडेड वॉल्यूम 111.3% उछलकर 1,765 MU हो गया।

Gland Pharma: CNBC-TV18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि फोसुन फार्मा इंडस्ट्रियल ब्लॉक डील के जरिए 5% इक्विटी हिस्सेदारी बेच सकती है। इस ऑफर का साइज 2,279.5 करोड़ रुपये रह सकता है। फ्लोर प्राइस 2,763 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है।

Rail Vikas Nigam: कंपनी ईस्ट कोस्ट रेलवे के 404.88 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली (L1) कंपनी बनकर उभरी है।

Power Grid Corporation of India: कंपनी को ‘बिल्ड, ओन, ऑपरेट एंड ट्रांसफर’ (BOOT) बेसिस पर एक इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम बनाने के लिए 1,152.49 करोड़ रुपये का ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ (LoI) मिला है। यह गुजरात के लकाडिया REZ-फेज II (7,500 MW) में रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स से बिजली को जोड़ने के लिए है। इस प्रोजेक्ट में गुजरात में एक नया 765/400 kV लकाडिया-II सबस्टेशन बनाना शामिल है।

Welspun Investments and Commercials: बोर्ड ने सब्सिडियरी, विश्वकर्मा रियल्टी में 1,285 करोड़ रुपये तक का फंड लगाने की मंजूरी दी है। यह फंड 75 करोड़ तक कंपल्सरी कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (CCDs) और 53.50 करोड़ तक ऑप्शनली कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (OCDs) के सब्सक्रिप्शन के जरिए लगाया जाएगा। इन्हें एक या ज्यादा किश्तों में जारी किया जाएगा।

इसके अलावा, बोर्ड ने विश्वकर्मा रियल्टी द्वारा प्रमोटर ग्रुप की कंपनी इंडिवारा रियल्टी में फंड लगाने की भी मंजूरी दी है। यह फंड 100 करोड़ तक OCDs के सब्सक्रिप्शन के जरिए लगाया जाएगा। इनकी कुल वैल्यू 1,000 करोड़ रुपये तक होगी और इन्हें एक या ज्यादा किश्तों में जारी किया जाएगा।

Shanthi Gears: कंपनी के बोर्ड ने साईं कृष्णा अल्लूरी को तुरंत प्रभाव से कंपनी का चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नियुक्त किया है। इसके साथ ही, सुकांत कुमार पाणिग्रही अब कंपनी के अंतरिम CFO नहीं रहे।

Avalon Technologies: EMS कंपनी एवलॉन टेक्नोलॉजीज और यूरोप की नामी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज कंपनी जोलनर इलेक्ट्रॉनिक AG ने भारत में PCBA, बॉक्स-बिल्ड और सिस्टम-इंटीग्रेशन मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक जॉइंट वेंचर (JV) बनाने की घोषणा की है।

Cipla: कंपनी की सब्सिडियरी इनवेजेन फार्मास्यूटिकल्स इंक. ने अमेरिका में QL2107 (जो कीट्रूडा/pembrolizumab का बायोसिमिलर है) के एक्सक्लूसिव लाइसेंसिंग और सप्लाई के लिए Qilu फार्मास्युटिकल कंपनी के साथ एक स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की है। इस एग्रीमेंट के तहत Qilu पर प्रोडक्ट के डेवलपमेंट, रेगुलेटरी रजिस्ट्रेशन और सप्लाई की जिम्मेदारी होगी, जबकि सिप्ला USA इंक. तय इलाके में अपनी मजबूत कमर्शियल मौजूदगी का फायदा उठाकर इस एसेट को कमर्शियलाइज करने की जिम्मेदारी संभालेगी।

WeWork India Management: कंपनी के बोर्ड ने कर्नाटक में 10 MWp का कैप्टिव सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

Max Healthcare Institute: बोर्ड ने सब्सिडियरी कलिंगा हॉस्पिटल में राइट्स बेसिस पर इक्विटी शेयरों के सब्सक्रिप्शन के जरिए लगभग 87.87 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी दी है।

Sterlite Technologies: ऑप्टिकल फाइबर केबल और कनेक्टिविटी सॉल्यूशंस की ग्लोबल मांग को देखते हुए कंपनी के बोर्ड ने मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए 3,000 करोड़ रुपये के कैपिटल एक्सपेंडिचर (capex) को मंजूरी दी है।

Bharat Forge: सब्सिडियरी कंपनी, कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स (KSSL) ने FN ब्राउनिंग ग्रुप की सब्सिडियरी FN हर्स्टल के साथ एक MoU साइन किया है। इसका मकसद छोटे हथियारों, इंटीग्रेटेड वेपन सिस्टम्स और काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS) सॉल्यूशंस की लोकल मैन्युफैक्चरिंग करना है।

RBL Bank: बैंक को दिल्ली के असिस्टेंट कमिश्नर से एक कारण बताओ नोटिस मिला है। इसमें वित्त वर्ष 2022-23 के लिए लागू ब्याज और पेनल्टी समेत कुल 164.13 करोड़ रुपये के GST की डिमांड की गई है।

Market Trend : बाजार पर तेजड़ियों की पकड़ ढ़ीली, कमजोर बाजार में भी इस कैपिटल मार्केट शेयर में दिख रहा दम

बल्क और ब्लॉक डील्स

Meesho: SVF II मीरकाट (DE) LLC ने कंपनी में 8 करोड़ इक्विटी शेयर ₹1,650.4 करोड़ में बेचे हैं। पूरी 1.73% हिस्सेदारी वैश्विक और घरेलू निवेशकों ने खरीदी।

Clean Max Enviro Energy Solutions: DSDG होल्डिंग ApS ने 16.33 लाख शेयर ₹199.3 करोड़ में बेचे हैं। सभी शेयर बड़े इंस्टीट्यूशनल निवेशकों ने खरीदे, जिनमें SBI लाइफ इंश्योरेंस, महिंद्रा मैन्युलाइफ म्यूचुअल फंड, ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस, DSP इंडिया फंड और व्हाइटओक कैपिटल MF शामिल हैं।

Updater Services: SIS लिमिटेड ने और 10.12 लाख शेयर ₹23.76 करोड़ में खरीदे हैं।

Advit Jewels: Taurus Mutual Fund Flexicap Share Multi Cap ने 4.82 लाख शेयर 11.63 करोड़ रुपये में बेचे हैं। रमेश सवालराम सरावगी ने 5 लाख शेयर 12.14 करोड़ रुपये में खरीदे हैं।

Bulkcorp International: Chanakya Opportunities Fund I ने अतिरिक्त 1.08 लाख शेयर 81.63 लाख रुपये में खरीदे हैं। Care Wealth Advisors LLP ने अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी है। 91,200 शेयर 68.94 लाख रुपये में बेचे गऐ।

Knowledge Realty Trust: मीरा गोयल ने IIFL मैनेजमेंट सर्विसेज से 28.31 लाख यूनिट ₹31 करोड़ में खरीदी हैं।

KSR Footwear: Alpa Wealth Creator ने 3.38 लाख शेयर 1.06 करोड़ रुपये में बेचे हैं। रानू परवाल HUF ने 1.5 लाख शेयर 46.8 लाख रुपये में और इंद्रा इनवेस्टमेंट ने 1.5 लाख शेयर 47.38 लाख रुपये में खरीदे हैं।

मेनबोर्ड लिस्टिंग

ESDS सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन

प्रायोरिटी ज्वेल्स

SME लिस्टिंग

पलक टेक्नोलॉजीज

कंप्लीट स्पोर्ट्स एंड मैनेजमेंट इंडिया

ये शेयर करेंगे एक्स-डिविडेंड ट्रेड

कोल इंडिया

ऑयल इंडिया

ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन

अरविंद

BMW इंडस्ट्रीज

क्लीन साइंस एंड टेक्नोलॉजी

एमक्योर फार्मास्यूटिकल्स

कैपरी ग्लोबल कैपिटल

फिनोलेक्स केबल्स

फेडरल-मोगुल गोएट्ज (इंडिया)

AIA इंजीनियरिंग

हाईटेक कॉर्पोरेशन

इंडिगो पेंट्स

गल्फ ऑयल लुब्रिकेंट्स इंडिया

सिटाडेल रियल्टी एंड डेवलपर्स

मैक ट्रैवल सॉल्यूशंस

फिनोटेक्स केमिकल

जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया

हिकल

जैगसनपाल फार्मास्यूटिकल्स

माज्दा

पारादीप फॉस्फेट्स

परमेश्वर मेटल

नाहर कैपिटल एंड फाइनेंशियल सर्विसेज

नाहर पॉलीफिल्म

नाहर स्पिनिंग मिल्स

मेट्रो ब्रांड्स

OM इंफ्रा

पैनासोनिक एनर्जी इंडिया कंपनी

POCL एंटरप्राइजेज

प्रीवेस्ट डेनप्रो

SKP सिक्योरिटीज

SP अपैरल्स

संधू फार्मास्यूटिकल्स

शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया

शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लैंड एंड एसेट्स

शिल्पा मेडिकेयर

स्पेशियलिटी रेस्टोरेंट्स

स्पोर्टकिंग इंडिया

सूरज प्रोडक्ट्स

वीनस पाइप्स एंड ट्यूब्स

स्टोव क्राफ्ट

सुप्रिया लाइफसाइंस

Promoter Holding: इन 10 मिडकैप शेयरों में प्रमोटर्स ने हिस्सेदारी घटाई, जानिए 1 महीने में कैसा रहा रिटर्न

स्प्लिट के लिए ये शेयर करेंगे एक्स-ट्रेड

इंटीग्रेटेड प्रोटीन्स

TCC कॉन्सेप्ट

ये शेयर करेंगे एक्स-बोनस ट्रेड

जोंजुआ ओवरसीज

बाय-बैक के लिए एक्स-डेट पर ट्रेड करने वाले स्टॉक्स

PVR INOX

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

चीन- PhD छोड़, रिसर्च पेपर की गड़बड़ियां खोजने लगा शख्स:40 वैज्ञानिकों का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया, जिनपिंग सरकार ने फंडिंग-पुरस्कार छीने

चीन में एक पूर्व PhD छात्र गेंग होंगवेई के रिसर्च पेपर में गड़बड़ियां पकड़ने के बाद 40 से ज्यादा रिसर्चर्स पर कार्रवाई हुई है। चीन की प्रमुख रिसर्च फंडिंग संस्था नेशनल नेचुरल साइंस फाउंडेशन ऑफ चाइना (NSFC) ने 31 मामलों में कार्रवाई की है। इसे संस्था की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। कार्रवाई की जद में कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ प्रोफेसर भी हैं। इनमें 4 ऐसे वैज्ञानिक हैं, जिनके पेपर पर पूर्व PhD छात्र गेंग होंगवेई ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए थे। गेंग को ‘स्टूडेंट गेंग’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने 2025 में बायोसाइंस की PhD छोड़ दी थी। इसके बाद वह रिसर्च पेपर में डेटा, तस्वीरों और ग्राफ की गड़बड़ियां खोजकर सोशल मीडिया पर सामने लाने लगे। उनके सवालों के बाद संबंधित संस्थानों ने जांच शुरू की और अब मामला NSFC की कार्रवाई तक पहुंच गया है। PhD ड्रॉपआउट ने क्या पकड़ा? 1. आंकड़ों में अजीब पैटर्न
एक पेपर में एक कॉलम के लगभग सभी आंकड़ों का आखिरी अंक 5 था। दूसरे कॉलम में भी आंकड़े एक तय पैटर्न में थे। एक कॉलम के आंकड़े दूसरे से लगभग हर जगह 0.3 के अंतर पर थे। गेंग ने इसे डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वाली बात बताया। 2. 196 चूहों के वजन में सटीकता
एक रिसर्च में 196 लैब चूहों का वजन दो दशमलव तक दर्ज किया गया था। गेंग ने सवाल उठाया कि चलते-फिरते चूहों का वजन इतनी सटीकता से कैसे दर्ज किया गया। इससे डेटा के साथ छेड़छाड़ की आशंका पैदा हुई। 3. एक ही तस्वीर, अलग-अलग प्रयोग
कुछ पेपर में एक जैसी तस्वीरों को अलग-अलग प्रयोगों के नतीजे के तौर पर इस्तेमाल किए जाने पर सवाल उठे। कुछ डेटा सेट भी असामान्य रूप से एक-दूसरे से मिलते थे। नेचर ने भी बताया था कि गेंग ने कई पेपर के आंकड़ों में असामान्यताएं पकड़ी थीं। चार बड़े वैज्ञानिक भी कार्रवाई की जद में गेंग ने अप्रैल में चीन के चार प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से जुड़े वैज्ञानिकों के रिसर्च पर सवाल उठाए थे। इनमें टोंगजी यूनिवर्सिटी के वांग पिंग, नानकाई यूनिवर्सिटी के चेन चुआन, शंघाई यूनिवर्सिटी के सु जियाचन और सन यात-सेन यूनिवर्सिटी के कुआंग डोंगमिंग शामिल हैं। इन चारों को चीन का प्रतिष्ठित नेशनल साइंस फंड फॉर डिस्टिंग्विश्ड यंग स्कॉलर्स मिल चुका था। यह चीन में युवा वैज्ञानिकों को दिया जाने वाला प्रमुख सम्मान है। इनमें से तीन अपने संस्थानों में डीन या एसोसिएट डीन जैसे प्रशासनिक पदों पर रह चुके हैं। इन वैज्ञानिकों के खिलाफ उनके विश्वविद्यालयों ने भी कार्रवाई की। कुछ को प्रशासनिक पदों से हटाया गया। इसके बाद NSFC ने भी इन मामलों में कार्रवाई की। संस्था ने संबंधित रिसर्च फंडिंग और सम्मान वापस ले लिए। उन्हें पहले मिली 1 करोड़ युआन से ज्यादा यानी करीब 15 लाख डॉलर की रिसर्च ग्रांट लौटाने का आदेश दिया गया। साथ ही तीन से सात साल तक NSFC की फंडिंग के लिए दोबारा आवेदन करने पर रोक लगा दी गई। अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स के पेपर भी जांच के घेरे में गेंग के सवालों में नेचर, नेचर कैंसर और सेल बायोलॉजी जैसे प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित रिसर्च पेपर भी शामिल थे। मई में साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने रिपोर्ट किया था कि चीनी सोशल मीडिया पर इन जर्नल्स में प्रकाशित कुछ रिसर्च पेपर को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसके बाद स्प्रिंगर नेचर ने कहा था कि उसे पांच पेपर को लेकर चिंताएं मिली हैं और उनकी जांच की जा रही है। जुलाई में नेचर और नेचर कैंसर ने चीन के वैज्ञानिकों के दो रिसर्च पेपर वापस ले लिए।

ट्रम्प के जन्मजात नागरिकता से जुड़े आदेश पर रोक:जज बोलीं- सरकार जन्म से मिली नागरिकता नहीं छीन सकती

अमेरिका में फेडरल जज ने बुधवार को ट्रम्प प्रशासन के नए आदेश पर रोक लगा दी। यह आदेश अमेरिका में जन्म से मिलने वाली नागरिकता के नियम सीमित करने के लिए जारी किया गया था। ग्रीनबेल्ट की अमेरिकी जिला जज डेबोरा बोर्डमैन ने बुधवार को यह फैसला दिया। प्रवासी अधिकार संगठनों ने ट्रम्प के आदेश के खिलाफ याचिका लगाई थी। विवाद 30 जून को आए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुआ था। तब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन की उस कोशिश को खारिज कर दिया था, जिसमें ऐसे बच्चों की जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने की बात कही गई थी, जिनके माता-पिता अमेरिकी नागरिक या ग्रीन कार्ड धारक नहीं हैं। ट्रम्प ने बर्थ टूरिज्म को बनाया निशाना इसके बाद ट्रम्प ने 6 अगस्त को नया आदेश जारी किया। इसमें खास तौर पर ‘बर्थ टूरिज्म’ को निशाना बनाया गया था। बर्थ टूरिज्म उस स्थिति को कहा जाता है, जब विदेशी नागरिक अपने बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के लिए अमेरिका जाकर जन्म देते हैं। नए आदेश में कुछ अन्य श्रेणियों के बच्चों की नागरिकता पर भी सवाल उठाया गया था। नए आदेश के खिलाफ उन बच्चों की ओर से अदालत में याचिका दायर की गई, जिनकी नागरिकता प्रभावित हो सकती थी। याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि मुकदमे के नतीजे आने तक उनकी नागरिकता को पूरी तरह मान्यता दी जाए। सरकार नागरिकता को नकार नहीं सकती जज बोर्डमैन ने याचिकाकर्ताओं से सहमति जताते हुए कहा कि ट्रम्प का नया आदेश भी संविधान के खिलाफ हो सकता है। उन्होंने अपने फैसले में लिखा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि इस मामले से जुड़े बच्चे जन्म से अमेरिकी नागरिक हैं। ऐसे में सरकार उनकी नागरिकता को नकार नहीं सकती। अदालत के आदेश के बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय, गृह सुरक्षा विभाग और सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन जैसी संघीय एजेंसियां फिलहाल उन बच्चों की नागरिकता में दखल नहीं दे सकेंगी, जो इस मुकदमे के दायरे में आते हैं। संविधान से मिला हक राष्ट्रपति नहीं बदल सकते इस मामले में प्रवासी अधिकार संगठन CASA और असायलम सीकर अडवोकेट प्रोजेक्ट याचिकाकर्ता हैं। संगठनों का कहना है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता संविधान से मिला अधिकार है और इसे राष्ट्रपति के आदेश से नहीं बदला जा सकता। सरकार का तर्क – कोर्ट ने जल्दबाजी में दखल दिया अमेरिकी सरकार का तर्क है कि अदालत ने जल्दबाजी में दखल दिया, क्योंकि आदेश को कैसे लागू किया जाएगा, इससे जुड़े नियम और दिशा-निर्देश अभी जारी नहीं हुए हैं। हालांकि जज बोर्डमैन ने कहा कि मामले में तत्काल अदालत की दखल जरूरी है। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रपति की ओर से नागरिकता के अधिकार को सीमित करने की यह नई कोशिश भी न्यायिक समीक्षा के दायरे में आती है। ———————-

मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों पर जलवायु के गंभीर खतरे का डर

मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों पर जलवायु के गंभीर खतरे का डर

climate change

प्रभाकर मणि तिवारी

संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट ने पर्यावरणविदों और मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशिया के मुंबई, कोलकाता और ढाका समेत निचले इलाको में बसे कई शहरों में 1.40 करोड़ लोगों पर निकट भविष्य में विस्थापन का खतरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2024 में समुद्री जलस्तर में रिकार्ड छह मिलीमीटर की वृद्धि ने इस खतरे को कई गुना बढ़ा दिया है। ALSO READ: हिमालय क्षेत्र में भविष्य में भी ग्लेशियर फ्लड आने का गंभीर खतरा

 

क्या-क्या कहा गया है यूएन की रिपोर्ट में?

संयुक्त राष्ट्र की उप-महासचिव अमीना मोहम्मद ने 55वीं पैसिफिक आइलैंड्स फोरम लीडर्स मीटिंग में सोमवार को यह रिपोर्ट जारी की। संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव नवीद हनीफ ने भी न्यूयार्क में पत्रकारों को विस्तार से इसकी जानकारी दी।

 

रिपोर्ट में विस्थापन के खतरे की समयसीमा के बारे में तो कुछ नहीं कहा गया है। हालांकि इसके मुताबिक, दुनिया भर के करीब 77 करोड़ लोग इस खतरे की चपेट में आ सकते हैं। इसमें कहा गया है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर आगे चल कर खाद्य सुरक्षा, पूर्वजों की जमीन और हमारी पहचान के लिए भी खतरा बन सकता है। ऐसे में सरकारों को इस मुद्दे को अपनी योजना प्रक्रिया का हिस्सा बनाने के लिए एक बहुत ही व्यापक दृष्टिकोण अपनाना होगा।

 

रिपोर्ट में हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने से बाढ़ और सूखे के बढ़ने की चेतावनी भी दी गई है। इसमें कहा गया है कि ग्लेशियरों की तादाद ज्यादा होने के कारण दक्षिण एशिया दुनिया का 'तीसरा ध्रुव' बन गया है।

 

अब तक मिले संकेतों से अनुमान लगाए जा रहे हैं कि अगले 15-20 वर्षों में दक्षिण एशिया में ग्लेशियरों के पिघलने के कारण बाढ़ की समस्या गंभीर हो सकती है। उसके बाद पैदा होने वाली सूखे की स्थिति के कारण खेती और खाद्य सुरक्षा पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ऐसे बदलाव हिमालयी नदी प्रणाली और खेती पर निर्भर समुदायों को के लिए बड़ा खतरा बनेंगे।

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियरों के पिघलने की प्रक्रिया तेज होती है और पानी गर्म होता है। इसका असर कई स्तरों पर नजर आता है। समुद्र का जलस्तर बढ़ने से शहरी बुनियादी ढांचे, जल प्रणालियों, परिवहन, ऊर्जा ग्रिड, इमारतों और भूजल संसाधनों को पहले ही नुकसान पहुंच रहा है। इसके दूरगामी नतीजे सामने आ रहे हैं।

 

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने का सबसे ज्यादा असर कम ऊंचाई वाले द्वीपीय देशों पर होगा। हालांकि यह उन तक ही सीमित नहीं रहेगा।समुद्र का बढ़ता जलस्तर विकसित और विकासशील, दोनों वर्ग के देशों को प्रभावित कर सकता है। अमेरिका के न्यूयार्क और मियामी के अलावा ग्वांझू जैसे ज्यादा आय वाले शहरों में तटवर्ती इलाके के बुनियादी ढांचे पर भी खतरे की आशंका है। ALSO READ: भारत के विमानन क्षेत्र पर संकट के बादल

 

एशिया के किन शहरों पर खतरा ज्यादा?

रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया में खासकर भारतीय शहरों कोलकाता और मुंबई के अलावा बांग्लादेश की राजधानी ढाका पर समुद्री जलस्तर में वृद्धि से पैदा होने वाले खतरे गंभीर हैं।  दूसरे इलाकों की तुलना में यहां खतरा ज्यादा होने की क्या वजह है?

 

पर्यावरणविदों का कहना है कि इन शहरों में समुद्री जमीन पर तेजी से बुनियादी ढांचे के साथ ही इंसानी बस्तियां बसाई जा रही हैं। लगातार बढ़ती आबादी के कारण जमीन की कमी हो रही है। ऐसे में टाउन प्लानरों के सामने समुद्री जमीन हासिल करने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है।

 

उनके मुताबिक, सबसे ज्यादा खतरा इन शहरों के उन तटीय इलाकों में हैं जहां बीते 15-20 साल में समुद्री जमीन पर बड़े पैमाने पर बस्तियां बसाई गई हैं।

 

कोलकाता के जादवपुर विश्वविद्यालय में सामुद्रिक विज्ञान संस्थान के प्रमुख डा। सुगत हाजरा डीडब्ल्यू से कहते हैं, “समुद्री जमीन पर बुनियादी ढांचा और इंसानी बस्तियां बसाने की योजना बनाते समय पर्यावरणया भविष्य में पैदा होने खतरों की अनदेखी की जा रही है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्री जलस्तर में वृद्धि से पैदा होने वाले खतरे को ध्यान में रखते हुए इससे निपटने के लिए दीर्घकालीन रणनीति बनाने और उस पर अमल करने की जरूरत है।”

 

हाजरा कहते हैं, “बंगाल के सुंदरबन इलाके में बसे द्वीपों पर बीते कई सालों से ग्लोबल वार्मिंग के कारण होने वाले बदलाव का असर नजर आ रहा है। बंगाल की खाड़ी के बढ़ते जलस्तर के कारण इलाके के कई द्वीप पानी में डूब चुके हैं और कई डूबने की कगार पर हैं। उन इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों पर विस्थापन की तलवार लटक रही है।” ALSO READ: शहरों को ठंडा रखने वाले पेड़ों को भी अब चाहिए सहारा

 

जादवपुर विश्वविद्यालय में ही जलवायु परिवर्तनकार्यक्रम की प्रमुख जयश्री राय डीडब्ल्यू से कहती हैं, “संयुक्त राष्ट्र पहले से इस खतरे की चेतावनी देता रहा है। अफसोस की बात यह है कि सरकार ने इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया है। शायद इस खतरे से बचने की दिशा में ठोस पहल करने से पहले हम सिक्किम, धराली और नेपाल जैसी किसी आपदा का इंतजार कर रहे हैं।”

 

कोलकाता में मौसम विज्ञानी डा. प्रणवेश कुंडू डीडब्ल्यू से कहते हैं, “संयुक्त राष्ट्र समेत तमाम एजेंसियां समय-समय पर इस खतरे से आगाह करती रही हैं। लेकिन अखबारों में सुर्खियां बनने के बाद लोग इसे भूल जाते हैं।” वो बताते हैं, “वर्ष 2019 में अमेरिका स्थित शोध समूह क्लाइमेट सेंट्रल की रिपोर्ट ने जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान की गंभीर तस्वीर पेश की थी। उसमें में कहा गया था कि वर्ष 2050 तक भारत में बाढ़ और समुद्र का जलस्तर बढ़ने की वजह से 3।60 करोड़ लोग प्रभावित होंगे।”

 

कुंडू ने यह भी कहा कि रिपोर्ट में सूरत, मुंबई, कोलकाता, केरल, ओडीशा और चेन्नई जैसी तटवर्ती इलाकों पर भी भारी खतरा मंडराने की चेतावनी दी गई थी। लेकिन उसका गंभीरता से संज्ञान तक नहीं लिया गया। अब ताजा रिपोर्ट में भी वही चेतावनी दोहराई गई है।

गोदरेज ग्रुप का स्टॉक 55% उछल सकता है, कोटक ने ₹1010 का टारगेट दिया

गोदरेज ग्रुप की कंपनी Godrej Agrovet के शेयर मंगलवार, 1 सितंबर को 12% तक चढ़ गए। हालांकि, बाद में तेजी कुछ कम हुई। शेयर आखिर में 5.96% की बढ़त के साथ ₹652 पर बंद हुआ। कंपनी के शेयर में लगातार दूसरे दिन तेजी देखने को मिली।

Kotak ने टारगेट बढ़ाया

Kotak Institutional Equities ने Godrej Agrovet पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट प्राइस बढ़ाकर ₹1,010 कर दिया है।

मंगलवार के क्लोजिंग प्राइस ₹652 के मुकाबले यह टारगेट करीब 55% ज्यादा है। इससे पहले Kotak ने 8 जुलाई 2026 को शेयर का टारगेट ₹850 रखा था। यानी ब्रोकरेज ने नया टारगेट करीब 19% बढ़ा दिया है।

₹4,500 करोड़ EBITDA का अनुमान

Kotak का मानना है कि कंपनी का EBITDA FY31 तक ₹4,500 करोड़ तक पहुंच सकता है। EBITDA मार्जिन 23% से ज्यादा रह सकता है। ब्रोकरेज के मुताबिक, कंपनी की ग्रोथ कम से कम 2040 तक मजबूत बनी रह सकती है।

ब्रोकरेज को खासतौर पर कंपनी के पाम ऑयल कारोबार से बड़ी उम्मीद है।

पाम ऑयल बिजनेस पर बड़ा दांव

Godrej Agrovet के पाम ऑयल बिजनेस ने FY26 में ₹430 करोड़ का EBITDA कमाया था। कंपनी को उम्मीद है कि FY31 तक यह आंकड़ा ₹1,000 करोड़ के पार पहुंच जाएगा।

इसकी बड़ी वजह FFB यानी Fresh Fruit Bunch वॉल्यूम में दोहरे अंकों की ग्रोथ हो सकती है। Kotak का मानना है कि पाम ऑयल कारोबार में लंबी अवधि की मजबूत ग्रोथ की संभावना है। साथ ही मार्जिन भी स्थिर रह सकता है और कैपिटल पर अच्छा रिटर्न मिल सकता है।

ब्रोकरेज का कहना है कि अकेले पाम ऑयल बिजनेस की वैल्यू कंपनी के मौजूदा मार्केट कैप से भी ज्यादा हो सकती है। कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹12,872 करोड़ है। स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ को देखते हुए Kotak ने इस कारोबार के लिए EBITDA मल्टीपल 15 गुना से बढ़ाकर 18 गुना कर दिया है।

वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स से भी उम्मीद

Kotak ने कहा कि कंपनी के कारोबार में वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी बढ़ रही है। इससे आने वाले वर्षों में कमाई और प्रॉफिटेबिलिटी को सपोर्ट मिल सकता है।

पाम ऑयल कारोबार आगे चलकर कंपनी के लिए बड़ा वैल्यू ड्राइवर बन सकता है। स्टॉक को कवर करने वाले 5 अन्य एनालिस्ट भी शेयर पर ‘Buy’ रेटिंग देते हैं।

जून तिमाही में मुनाफा घटा

FY27 की पहली तिमाही में कंपनी के नतीजे मिले-जुले रहे। जून तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 13.8% घटकर ₹128.3 करोड़ रह गया। एक साल पहले यह ₹149 करोड़ था।

हालांकि, रेवेन्यू 9.2% बढ़कर ₹2,855.2 करोड़ हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹2,614.3 करोड़ था।

EBITDA 10.9% घटकर ₹240.1 करोड़ रह गया। एक साल पहले यह ₹269.6 करोड़ था। EBITDA मार्जिन भी घटकर 8.41% रह गया। पिछले साल यह 10.32% था।

शेयर का हाल

Godrej Agrovet का शेयर मंगलवार को इंट्राडे में 12% तक चढ़ा। बाद में इसमें मुनाफावसूली दिखी और तेजी कम हो गई। शेयर आखिर में 5.96% की बढ़त के साथ ₹652 पर बंद हुआ।

पिछले एक महीने में शेयर करीब 22% चढ़ चुका है। यह 52 हफ्ते के हाई ₹760 से करीब 14% नीचे है। वहीं, 52 हफ्ते के लो ₹506.10 से करीब 29% ऊपर कारोबार कर रहा है।

Crude Oil Price: ब्रेंट क्रूड 92 डॉलर के पार, इन कंपनियों के शेयर फिसले, ONGC और ऑयल इंडिया में उछाल

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रिपोर्ट-पुतिन को जंग खत्म करने पर सत्ता जाने का डर:कहा- डोनबास पर कब्जा किए बिना लड़ाई रोका तो मुझे फांसी पर लटका दिया जाएगा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को डर है कि अगर उन्होंने पूरा डोनबास अपने कब्जे में लिए बिना यूक्रेन युद्ध खत्म कर दिया, तो रूस के ताकतवर लोगों में उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ सकती है। इससे उनकी सत्ता पर भी खतरा आ सकता है। द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन को लगता है कि अपनी बड़ी मांगें पूरी किए बिना यूक्रेन युद्ध खत्म करना रूस में उनकी कमजोरी मानी जाएगी। क्रेमलिन के एक करीबी सूत्र ने बताया कि युद्ध खत्म करने के नतीजों पर बात करते हुए पुतिन ने एक बार कहा था, “वे मुझे फांसी पर लटका देंगे।” पुतिन का मानना है कि अगर रूस का नेता कमजोर दिखता है तो उसके लिए सत्ता में बने रहना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि वह युद्ध खत्म करने के लिए बड़े समझौते करने से बच रहे हैं। यूक्रेन के डोनेत्स्क और लुहांस्क क्षेत्रों को मिलाकर डोनबास कहा जाता है। रूस का डोनबास के करीब 90% हिस्से पर कंट्रोल है। लुहांस्क: करीब 99.8% हिस्से पर रूस का नियंत्रण डोनेत्स्क: करीब 80% हिस्से पर रूस का नियंत्रण पुतिन के सामने अब क्या रास्ता है? रिपोर्ट के मुताबिक, पांच साल से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध ने पुतिन के लिए स्थिति मुश्किल कर दी है। युद्ध जारी रखने पर यूक्रेन रूस के तेल और ऊर्जा ठिकानों पर लगातार हमले कर रहा है। इससे रूस का खर्च लगातार बढ़ रहा है। युद्ध रोकना भी पुतिन के लिए आसान नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें आम लोगों की नाराजगी से ज्यादा चिंता रूस के उन ताकतवर लोगों की है, जिनके पास पैसा, हथियार और सत्ता तक पहुंच है। एस्टोनियाई खुफिया प्रमुख रोसिन के मुताबिक, इन लोगों के बीच अब पहले की तरह रूस की पूरी जीत की बात नहीं हो रही है। इसके बजाय वे यह सोच रहे हैं कि इस युद्ध को सही तरीके से कैसे खत्म किया जाए। पांच साल की जंग के बाद लोगों की नाराजगी बढ़ी द इकोनॉमिस्ट के मुताबिक, रूस के ताकतवर लोगों में अब यह सवाल उठने लगा है कि करीब पांच साल तक युद्ध लड़ने के बाद आखिर देश ने हासिल क्या किया। चिंता सिर्फ अर्थव्यवस्था या युद्ध के नतीजे की नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रहे इस युद्ध की कीमत को लेकर भी है। रिपोर्ट में रूस के एक ताकतवर व्यक्ति के हवाले से कहा गया कि वहां अब यह भावना बढ़ रही है कि “राजा के पास कपड़े नहीं हैं।” यानी सत्ता की कमजोरियां अब पहले की तरह छिपी नहीं हैं और लोगों को दिखाई देने लगी हैं। हालांकि, पुतिन की सत्ता पर पकड़ अभी भी मजबूत है। लेकिन रूस की राजनीति में हिंसा को सहन किया जा सकता है, नाकामी को नहीं। ऐसे में पुतिन को कथित तौर पर डर है कि अगर डोनबास पर पूरी तरह कब्जा किए बिना जंग खत्म हुई तो उन्हें सत्ता से हटा दिया जाएगा।

पहली बार चक दे गर्ल्स Girls हॉकी विश्वकप में Boys से निकली आगे

हॉकी विश्वकप में हमेशा भारतीय पुरुष टीम से महिला टीम कोसो पीछे रहती थी। ना जाने कितनी बार तो महिला टीम क्वालिफाय ही नहीं कर पाती थी। लेकिन इस बार महिला टीम ने ना केवल क्वालिफाय किया बल्कि अपने पुरुष साथियों से बेहतर प्रदर्शन किया। इस बार उम्मीद की पुरुष टीम कम से कम सेमीफाइनल खेलेगी और महिला टीम से कोई उम्मीद ही नहीं थी। लेकिन भारतीय महिला टीम ने पांचवा पायदान पाया और पुरुष टीम को आठवां पायदान मिला।

अगले महीने जापान में होने वाले एशियाई खेलों से पहले मनोबल बढ़ाने वाली जीत के साथ, भारतीय महिला हॉकी टीम ने हॉकी वर्ल्ड कप में शानदार समापन किया। टीम ने 5वें-छठे स्थान के लिए खेले गए मैच में दुनिया की नंबर 5 टीम जर्मनी को 3-1 से हराया। यह मैच गुरुवार शाम को खेला गया।

इस नतीजे से भारतीय महिला टीम को पांचवां स्थान मिला, जो 1974 में हुए पहले महिला वर्ल्ड कप (जिसमें वे चौथे स्थान पर रही थीं) के बाद से उनका वर्ल्ड कप में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है।टीम ने पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ़ एक हार का सामना किया। उन्होंने चीन, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी बेहतर रैंकिंग वाली टीमों के साथ मैच ड्रॉ कराए और दक्षिण अफ्रीका को 6-1 से हराया। आखिर में, मुख्य कोच शुअर्ड मरिने के मार्गदर्शन में जर्मनी के खिलाफ जीत के साथ उन्होंने अपना अभियान पूरा किया।पहले मैच में चीन के खिलाफ 2-2 की बराबरी और फिर ऑस्ट्रेलिया से 0-0 की बराबरी। टीम नीदरलैंड्स से भी सिर्फ 2 गोल से हारी।यह सब भारत ने तब किया जब दल में 11 युवा खिलाड़ी थे और अपना पहला विश्वकप खेल रहे थे।

वहीं पुरुष टीम ने खासा निराश किया। पुरुष टीम की आलोचना पूर्व भारतीय गोलकीपर श्रीजेश ने भी की। हरमनप्रीत सिंह ने ने अंतिम मैच में गोल दागकर खुद को शीर्ष 5 गोल स्कोरर में स्थापित कर दिया लेकिन कुल मिलाकर टीम का अभियान निराशाजनक रहा।पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि धीमी शुरूआत, मौके गंवाने और डिफेंस में चूक से आगे यह समस्या और बड़ी है और इसका हल काफी पहले निकाला जाना चाहिये था।

पुरुष टीम ने पूल डी के मुकाबले में इंग्लैंड जैसी टीम से 4-2 से मैच गंवाया।वह भी मैच में बढ़त बनाने के बाद। इसके बाद टीम का पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन अच्छा था लेकिन 5-3 की स्कोरलाइन संतोषजनक नहीं थी।

अगले दौर में टीम को नीदरलैंड्स और अर्जेंटीना मिली। नीदरलैंड्स ने भारतीय टीम को 3-1 से हराया। नीदरलैंड से हारने के बाद भारत पूल ई से अंतिम चार की दौड़ से लगभग बाहर ही हो गया था लेकिन अर्जेंटीना की इंग्लैंड पर जीत के बाद तकनीकी तौर पर उसके रास्ते खुले थे । इसके लिये उसे कम से कम तीन गोल के अंतर से जीत दर्ज करनी थी।  लेकिन भारत ने पहले छह मिनट में ही दो गोल गंवा दिये और इस दबाव से टीम निकल ही नहीं सकी। अर्जेंटीना के खिलाफ भारत 3-5 से हारकर सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गया।

लेकिन निराशाजनक अभियान और ज्यादा निराशाजनक तब हो जब सातवें और आठवें पायदान के लिए भारत बेल्जियम से भिड़ा।भारतीय पुरुष हॉकी टीम को एफआईएच विश्व कप सह-मेजबान बेल्जियम के खिलाफ सातवें / आठवें स्थान के क्लासीफिकेशन के रोमांचक मुकाबले में शूटआउट में 3-4 से हार का सामना करना पड़ा।निर्धारित समय में दोनों टीमें 3-3 से बराबरी पर रहीं, लेकिन शूटआउट में बेल्जियम ने बाजी मारकर भारत को एफआईएच विश्व कप में आठवें स्थान पर रहने के लिए मजबूर कर दिया।

Sensex, Nifty लगातार तीसरे हफ्ते गिरे, क्या बाजार के अच्छे दिन अभी दूर हैं?

शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट आई। बाजार में काफी उतार-चढ़ाव भी दिखा। यह बीते पांच महीनों में गिरावट का सबसे लंबा सिलसिला रहा। हालांकि, 28 अगस्त को यानी हफ्ते के अंतिम दिन सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान में बंद हुए।

इस हफ्ते प्रमुख सूचकांकों में 0.47 फीसदी तक गिरावट आई

28 अगस्त को निफ्टी 0.35 फीसदी यानी 84 अंक चढ़कर 24,175 पर बंद हुआ। Sensex 0.43 फीसदी यानी 330 अंक चढ़कर 77,264 पर क्लोज हुआ। बीते एक हफ्ते में सेंसेक्स 0.44 फीसदी गिरा है। निफ्टी इस दौरान 0.47 फीसदी यानी 114 प्वाइंट्स गिरा है। शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट ने इनवेस्टर्स को चिंतित कर दिया है।

BSE का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 1 लाख करोड़ घटा

बीएसई का मार्केट कैपिटलाइजेशन इस हफ्ते करीब 1 लाख करोड़ रुपये घटा है। इस गिरावट में रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल और महिंद्रा एंड महिंद्रा का बड़ा हाथ रहा। उधर, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगातार दूसरे हफ्ते बिकवाली की। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी से बाजार को कुछ सपोर्ट मिला।

जियोपॉलिटिकल स्थितियां अब भी चिंताजनक

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैश्विक स्थितियां अभी भी चिंताजनक बनी हुई हैं। खासकर मिडिलईस्ट में हालात में बदलाव नहीं आया है। ईरान और अमेरिका के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। उधर, ईरान और ओमान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर बातचीत हुई है। इससे क्रूड ऑयल की कीमतों में थोड़ी नरमी आई है। लेकिन, अब भी ब्रेंट क्रूड 88 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। यह चिंता की बात है।

अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने का आसार

उधर, अमेरिका में फेडरल रिजर्व चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच के बाद 28 अगस्त को शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आई। वॉर्श ने यह साफ कर दिया है कि फेड का फोकस फिलहाल महंगाई को बढ़ने से रोकने पर होगा। इसका मतलब है कि अगले महीने मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक के बाद फेड इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का एलान कर सकता है। अगर अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ता है तो उसका असर भारत में भी आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी पर पड़ेगा। भारत में भी इनफ्लेशन आरबीआई की तय रेंज से बाहर निकल चुका है।

क्रूड में तेजी जारी रही तो बढ़ेगी महंगाई

क्रूड की कीमतें अगर नीचे नहीं आती हैं तो इनफ्लेशन बढ़ना जारी रहेगा। इस बीच इनवेस्टर्स की नजरें अगस्त के रिटेल इनफ्लेशन के डेटा पर लगी हैं। सितंबर के दूसरे हफ्ते में अगस्त के इनफ्लेशन के डेटा आएंगे। अगर इनफ्लेशन ज्यादा बढ़ता है तो अक्तूबर में आरबीआई इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। इसका असर कंपनियों के कैपिटल एक्सपेंडिचर प्लान पर पड़ेगा।

निफ्टी-सेंसेक्स में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव

बाजार के जानकारों का कहना है कि जून तिमाही के कंपनियों के नतीजे अच्छे आए हैं। इससे इकोनॉमी में डिमांड स्ट्रॉन्ग रहने का संकेत मिलता है। लेकिन, शेयरों की कीमतों में बड़ी तेजी तभी दिखेगी, जब क्रूड की कीमतें नीचे आएंगी। इस बीच निफ्टी और सेंसेक्स में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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फिलहाल बड़ी गिरावट की आशंका नहीं

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी ने कहा कि निफ्टी का अंडरलाइंग ट्रेंड बता रहा है कि सूचकांक सीमित दायरे में रह सकता है। हालांकि, इंडिया वीआईएक्स में नरमिी है। यह 3.5 फीसदी गिरकर 10.68 पर आ गया है। यह अपने शॉर्ट टर्म मूविंग एवरेजज से नीचे है। इसका मतलब है कि बाजार में आगे बड़ी गिरावट की आशंका नहीं है। फिलहाल बाजार सीमित दायरे में रह सकता है।