रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच समुद्र में रूसी जहाजों को लेकर तनाव बढ़ गया है। रूस के नागरिक और कारोबारी जहाजों पर हमलों को लेकर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चेतावनी दी है। उन्होंने इसे आतंकवाद करार दिया और कहा कि इससे रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता की संभावना और मुश्किल हो रही है। पुतिन ने नॉर्वे की ओर से रूसी रिसर्च जहाज प्रोफेसर मोलचानोव को हिरासत में लिए जाने पर भी नाराजगी जताई। नॉर्वे ने यूक्रेन के कहने पर जहाज जब्त किया नॉर्वे ने यूक्रेन की सरकारी कंपनी नाफ्टोगाज की मांग पर इस जहाज को हिरासत में लिया। उस वक्त ‘प्रोफेसर मोलचानोव’ स्वालबार्ड के बारेंट्सबर्ग इलाके में खड़ा था। यह रूस का सरकारी रिसर्च जहाज है। इस पर वैज्ञानिकों और रिसर्च से जुड़े कर्मचारियों के अलावा उनके परिवार और पर्यटक भी सफर करते हैं। यह स्वालबार्ड की रूसी बस्तियों के लिए जरूरी सामान भी पहुंचाता है। नॉर्वे ने यह जहाज किसी समुद्री प्रतिबंध के उल्लंघन के आरोप में नहीं, बल्कि एक पुराने मुआवजे के मामले में जब्त किया। 2014 में रूस ने क्रीमिया पर कब्जा करने के बाद वहां नाफ्टोगाज की संपत्तियों पर नियंत्रण कर लिया था। इसके बाद नाफ्टोगाज ने रूस से मुआवजा मांगा। 2023 में हेग की एक अंतरराष्ट्रीय अदालत ने रूस को नाफ्टोगाज को करीब 4.22 अरब डॉलर देने का आदेश दिया। रूस ने अब तक यह रकम नहीं दी है। पुतिन बोले- यूक्रेन ने 100 रूसी जहाजों पर हमले किए पुतिन ने कहा कि उनकी नाराजगी सिर्फ नॉर्वे द्वारा जहाज जब्त किए जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यूक्रेन अब समुद्र में रूसी नागरिक जहाजों को सीधे निशाना बना रहा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 40 दिनों के भीतर लगभग 100 रूसी व्यापारिक जहाजों पर हमले किए गए, जिनमें कई रूसी व विदेशी नाविकों की जान गई है। पुतिन ने चेतावनी दी कि रूस दुनिया के किसी भी कोने में इसका करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। अमेरिका से बातचीत का रास्ता अभी बंद नहीं हुआ यूक्रेन के साथ शांति वार्ता को लेकर भले ही मुश्किलें बढ़ रही हों, लेकिन पुतिन ने अमेरिका के साथ बातचीत का रास्ता खुला होने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि रूस और अमेरिका के बीच संपर्क लगातार बना हुआ है और मॉस्को, वॉशिंगटन के साथ रिश्ते फिर सामान्य करना चाहता है। पुतिन ने यह भी साफ किया कि इसके लिए सिर्फ रूस की इच्छा काफी नहीं है। अमेरिका को भी इसके लिए तैयार होना होगा। पुतिन ने ट्रम्प के रुख को लेकर कहा कि उनकी समझ के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति सकारात्मक बातचीत के पक्ष में हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों की खुफिया एजेंसियों के बीच संपर्क जारी है। ट्रम्प के दूत भी रूस के संपर्क में हैं। इसी बीच पिछले हफ्ते CIA प्रमुख जॉन रैटक्लिफ ने मॉस्को में रूस के खुफिया अधिकारियों से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में क्या बात हुई, यह दोनों देशों ने सार्वजनिक नहीं किया है। पुतिन ने नई सैन्य लामबंदी की खबरों को खारिज किया राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूस में नई अनिवार्य सैन्य भर्ती या लामबंदी की खबरों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल रूस को नए सैनिकों की लामबंदी की जरूरत नहीं है। व्लादिवोस्तोक में ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम में पुतिन ने कहा, “आज ऐसी कोई स्थिति नहीं है, जिसके लिए लामबंदी की जरूरत हो।” उन्होंने इन खबरों को दुष्प्रचार अभियान बताया। पुतिन के मुताबिक, इस महीने होने वाले रूस के निचले सदन स्टेट ड्यूमा के चुनाव से पहले यह अभियान चलाया जा रहा है, ताकि चुनाव के नतीजों को प्रभावित किया जा सके। उन्होंने कहा कि लोग अपनी इच्छा से सेना में शामिल हो रहे हैं और सैन्य सेवा के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन कर रहे हैं। 2022 में 3 लाख लोगों की हुई थी लामबंदी रूस में आखिरी बार सितंबर 2022 में आंशिक लामबंदी हुई थी। क्रेमलिन के मुताबिक, तब करीब 3 लाख रिजर्व सैनिकों को सेना में बुलाया गया था। इस फैसले के बाद रूस में काफी विरोध हुआ था और बड़ी संख्या में सैन्य सेवा की उम्र वाले पुरुष देश छोड़कर चले गए थे। इसके बाद से क्रेमलिन कई बार कह चुका है कि रूस में दोबारा ऐसी लामबंदी की कोई योजना नहीं है।

भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को लेकर एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। रूस ने भारत के सामने अपने अत्याधुनिक S-500 Prometheus एयर डिफेंस सिस्टम और Su-57 पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट का प्रस्ताव रखा है। खबरों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 31 अगस्त को बिश्केक में हुई मुलाकात के बाद रक्षा सहयोग पर चर्चा एक बार फिर केंद्र में है। दोनों नेताओं की नई दिल्ली में भी मुलाकात होने की संभावना है।
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रूस की नई पेशकश ऐसे समय में आई है जब भारत की रक्षा नीति तेजी से बदल रही है। एक तरफ भारत स्वदेशी रक्षा तकनीक और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रहा है, वहीं दूसरी ओर वायुसेना की तत्काल जरूरतें भी हैं। भारत को तय करना होगा कि S-500 जैसी विदेशी एयर डिफेंस प्रणाली की कितनी जरूरत है, जबकि Project Kusha जैसी स्वदेशी प्रणालियां आगे बढ़ रही हैं।
IAF को यह भी तय करना होगा कि AMCA के आने तक इंतजार करना बेहतर है या Su-57 जैसे विदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर को अंतरिम विकल्प के तौर पर शामिल किया जाए। अंतिम फैसला केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात से नहीं होगा, लेकिन दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व से मिलने वाला राजनीतिक समर्थन बड़े रक्षा समझौतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
S-400 के बाद S-500 पर रूस का फोकस
रूस भारत के साथ एयर और मिसाइल डिफेंस सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने के लिए S-500 Prometheus का प्रस्ताव आगे बढ़ा रहा है। इससे पहले भारत द्वारा तैनात किए गए रूसी S-400 सिस्टम ने भी काफी ध्यान आकर्षित किया है। खबरों के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तानी हवाई खतरों से निपटने के लिए S-400 सिस्टम का इस्तेमाल किया था। इसी अनुभव के बाद रूस अब भारत को अतिरिक्त S-400 सिस्टम देने के साथ S-500 पर भी चर्चा आगे बढ़ा रहा है।
मोदी-पुतिन मुलाकात से एक दिन पहले रूस की ओर से भारत को S-400 की पांच अतिरिक्त स्क्वाड्रन देने का प्रस्ताव रखे जाने की भी रिपोर्ट सामने आई। अगर यह प्रस्ताव स्वीकार होता है तो भारत के पास पहले से तय स्क्वाड्रन की संख्या में बड़ा इजाफा हो सकता है।
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S-500 खरीदना भारत के लिए कितना जरूरी?
भारत के सामने S-500 को लेकर फैसला आसान नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि भारत खुद लंबी दूरी की एयर डिफेंस क्षमता विकसित कर रहा है। Project Kusha को S-400 श्रेणी की स्वदेशी एयर डिफेंस प्रणाली के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा भारत का बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस कार्यक्रम भी महत्वपूर्ण चरण में है। ऐसे में भारत को यह आकलन करना होगा कि S-500 वास्तव में किसी मौजूदा क्षमता की कमी को पूरा करेगा या फिर यह स्वदेशी प्रणालियों के साथ काफी हद तक समान भूमिका निभाएगा।
Su-57 पर भी भारत के सामने बड़ा फैसला
रूस की दूसरी बड़ी पेशकश Su-57 Felon पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर विमान है। रूस का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारतीय वायुसेना लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी से जूझ रही है और भारत का स्वदेशी Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) अभी ऑपरेशनल होने से कई साल दूर है।
रूस ने संकेत दिए हैं कि Su-57 के संभावित सौदे में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, स्थानीय स्तर पर उत्पादन और भारत में मैन्युफैक्चरिंग जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं। Su-57 को AMCA के उपलब्ध होने तक एक संभावित स्टॉपगैप विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, भारत के लिए इसे खरीदने में कीमत, लॉजिस्टिक्स, मेंटेनेंस और रणनीतिक जरूरतों जैसे कई पहलुओं पर विचार करना होगा।
चीन और पाकिस्तान की पांचवीं पीढ़ी के फाइटर से बढ़ी चुनौती
भारत के सामने चुनौती इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि पड़ोसी देश भी स्टील्थ फाइटर क्षमता तेजी से बढ़ा रहे हैं।
चीन के पास बड़ी संख्या में J-20 स्टील्थ फाइटर होने का अनुमान है, जबकि पाकिस्तान को चीन से J-35 पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट मिलने की उम्मीद है। ऐसे में भारत के सामने अहम सवाल है कि क्या AMCA के आने तक इंतजार किया जाए या फिर अंतरिम अवधि के लिए किसी विदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर को शामिल किया जाए।
Su-57 से IAF के लिए बढ़ सकती है लॉजिस्टिक चुनौती
Su-57 को भारतीय वायुसेना में शामिल करने से एक और चुनौती सामने आ सकती है। IAF के बेड़े में पहले से ही कई अलग-अलग प्रकार के लड़ाकू विमान शामिल हैं। भारतीय वायुसेना के प्रमुख फाइटर बेड़े में Su-30MKI, MiG-29, Rafale, Mirage 2000, Jaguar और स्वदेशी Tejas शामिल हैं। हर नए फाइटर के लिए अलग पायलट ट्रेनिंग, स्पेयर पार्ट्स, हथियार, मेंटेनेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स की जरूरत होती है। ऐसे में Su-57 को शामिल करने से बेड़े का संचालन और जटिल हो सकता है।
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S-500 और Su-57 के अलावा भी रूस की कई पेशकश
रूस की पेशकश केवल S-500 और Su-57 तक सीमित नहीं है। मॉस्को भारत के लिए Voronezh Strategic Early-Warning Radar पर भी सहयोग की संभावना तलाश रहा है। यह रडार लंबी दूरी से बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च और अन्य खतरों का पता लगाने के लिए बनाया गया है। इसके अलावा रूस, Hindustan Aeronautics Limited (HAL) के साथ भारत के Su-30MKI बेड़े के अपग्रेड और रूसी मूल की Kilo-class submarines के आधुनिकीकरण में भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को डर है कि अगर उन्होंने पूरा डोनबास अपने कब्जे में लिए बिना यूक्रेन युद्ध खत्म कर दिया, तो रूस के ताकतवर लोगों में उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ सकती है। इससे उनकी सत्ता पर भी खतरा आ सकता है। द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन को लगता है कि अपनी बड़ी मांगें पूरी किए बिना यूक्रेन युद्ध खत्म करना रूस में उनकी कमजोरी मानी जाएगी। क्रेमलिन के एक करीबी सूत्र ने बताया कि युद्ध खत्म करने के नतीजों पर बात करते हुए पुतिन ने एक बार कहा था, “वे मुझे फांसी पर लटका देंगे।” पुतिन का मानना है कि अगर रूस का नेता कमजोर दिखता है तो उसके लिए सत्ता में बने रहना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि वह युद्ध खत्म करने के लिए बड़े समझौते करने से बच रहे हैं। यूक्रेन के डोनेत्स्क और लुहांस्क क्षेत्रों को मिलाकर डोनबास कहा जाता है। रूस का डोनबास के करीब 90% हिस्से पर कंट्रोल है। लुहांस्क: करीब 99.8% हिस्से पर रूस का नियंत्रण डोनेत्स्क: करीब 80% हिस्से पर रूस का नियंत्रण पुतिन के सामने अब क्या रास्ता है? रिपोर्ट के मुताबिक, पांच साल से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध ने पुतिन के लिए स्थिति मुश्किल कर दी है। युद्ध जारी रखने पर यूक्रेन रूस के तेल और ऊर्जा ठिकानों पर लगातार हमले कर रहा है। इससे रूस का खर्च लगातार बढ़ रहा है। युद्ध रोकना भी पुतिन के लिए आसान नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें आम लोगों की नाराजगी से ज्यादा चिंता रूस के उन ताकतवर लोगों की है, जिनके पास पैसा, हथियार और सत्ता तक पहुंच है। एस्टोनियाई खुफिया प्रमुख रोसिन के मुताबिक, इन लोगों के बीच अब पहले की तरह रूस की पूरी जीत की बात नहीं हो रही है। इसके बजाय वे यह सोच रहे हैं कि इस युद्ध को सही तरीके से कैसे खत्म किया जाए। पांच साल की जंग के बाद लोगों की नाराजगी बढ़ी द इकोनॉमिस्ट के मुताबिक, रूस के ताकतवर लोगों में अब यह सवाल उठने लगा है कि करीब पांच साल तक युद्ध लड़ने के बाद आखिर देश ने हासिल क्या किया। चिंता सिर्फ अर्थव्यवस्था या युद्ध के नतीजे की नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रहे इस युद्ध की कीमत को लेकर भी है। रिपोर्ट में रूस के एक ताकतवर व्यक्ति के हवाले से कहा गया कि वहां अब यह भावना बढ़ रही है कि “राजा के पास कपड़े नहीं हैं।” यानी सत्ता की कमजोरियां अब पहले की तरह छिपी नहीं हैं और लोगों को दिखाई देने लगी हैं। हालांकि, पुतिन की सत्ता पर पकड़ अभी भी मजबूत है। लेकिन रूस की राजनीति में हिंसा को सहन किया जा सकता है, नाकामी को नहीं। ऐसे में पुतिन को कथित तौर पर डर है कि अगर डोनबास पर पूरी तरह कब्जा किए बिना जंग खत्म हुई तो उन्हें सत्ता से हटा दिया जाएगा।
Putin SCO Development Bank Proposal: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सदस्य देशों से एक नया ‘SCO डेवलपमेंट बैंक’ बनाने का आह्वान किया है। पुतिन का मानना है कि यह बैंक पश्चिमी देशों और अमेरिका के प्रभुत्व वाले वित्तीय तंत्र से पूरी तरह स्वतंत्र होकर काम करेगा, जिसका इस्तेमाल पश्चिमी देश आर्थिक और भू-राजनीतिक दबाव बनाने के लिए ‘हथियार’ के रूप में करते हैं।
किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित 2026 के SCO शिखर सम्मेलन में बोलते हुए पुतिन ने कहा कि प्रस्तावित विकास बैंक को उन देशों के वित्तीय ढांचे से जितना संभव हो सके स्वतंत्र रखा जाना चाहिए, जो अंतरराष्ट्रीय मामलों में एकतरफा फायदा उठाने के लिए आर्थिक हथियारों का इस्तेमाल करते हैं।
क्या है ‘SCO डेवलपमेंट बैंक’?
डेवलपमेंट बैंक या विकास बैंक ऐसी वित्तीय संस्थाएं होती हैं, जो सदस्य देशों में ऊर्जा, परिवहन, बुनियादी ढांचे और सीमा पार परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक फंडिंग प्रदान करती हैं। पुतिन के अनुसार, यह बैंक सदस्य देशों के बीच बड़े आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को बिना किसी पश्चिमी रुकावट के फाइनेंस करने का काम करेगा।
यह बैंक SCO बिजनेस काउंसिल और इंटरबैंक एसोसिएशन की तरह सदस्य राष्ट्रों के आपसी व्यापारिक और व्यावसायिक रिश्तों को एक नया आयाम देगा।
डॉलर के दबदबे को खत्म करने और सैंक्शंस से बचने की कोशिश
यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस और ईरान जैसे देश भारी पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं। यही वजह है कि मॉस्को अब अमेरिकी डॉलर और SWIFT जैसे पश्चिमी वित्तीय तंत्र पर अपनी निर्भरता को खत्म करना चाहता है।
98% व्यापार स्थानीय मुद्राओं में: पुतिन ने खुलासा किया कि पिछले साल SCO देशों के साथ रूस का व्यापार $400 अरब से अधिक रहा। सबसे खास बात यह है कि रूस और SCO देशों के बीच 98% से अधिक लेनदेन अब उनकी अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है।
वैकल्पिक भुगतान प्रणाली: प्रस्तावित बैंक SCO के भीतर एक वैकल्पिक पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम है, ताकि पश्चिमी पाबंदियों का इन देशों के व्यापार पर कोई असर न पड़े।
SCO का बढ़ता दायरा और ‘मल्टीपोलर वर्ल्ड’
2001 में रूस, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान द्वारा स्थापित SCO का विस्तार पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से हुआ है। भारत और पाकिस्तान 2017 में इसमें शामिल हुए, जबकि ईरान 2023 में इसका पूर्ण सदस्य बना।
पुतिन ने SCO को उभरती हुई बहुध्रुवीय दुनिया का एक अत्यंत प्रभावशाली केंद्र बताया और कहा कि इस ब्लॉक का मजबूत होना सभी सदस्य देशों की आर्थिक समृद्धि के लिए जरूरी है।
SCO बैंक को लेकर भारत-चीन की ये है रणनीतिक चुनौतियां
चीन द्वारा समर्थन दिए जाने के बावजूद प्रस्तावित SCO डेवलपमेंट बैंक को जमीन पर उतारना बेहद जटिल है, क्योंकि भारत और चीन जैसे देशों के प्रमुख वित्तीय संस्थान और कॉर्पोरेट्स वैश्विक अर्थव्यवस्था और पश्चिमी बैंकिंग प्रणाली से गहराई से जुड़े हुए हैं। ऐसे में अमेरिकी सेकंडरी सैंक्शंस का खतरा बना रहता है, जिससे बचने के लिए दोनों देशों के बैंक बेहद सतर्क रुख अपनाते हैं।
इसके अलावा, भारत का हमेशा से यह स्पष्ट और संतुलित रुख रहा है कि SCO को किसी भी स्थिति में पश्चिमी-विरोधी मंच के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, जो इस बैंक को पूरी तरह से पश्चिमी वित्तीय तंत्र से काटने के बजाय केवल एक वैकल्पिक व्यवस्था तक सीमित रखता है।
भारत के लिए यह बैंक पश्चिमी वित्तीय तंत्र को पूरी तरह से नकारने के बजाय आपसी व्यापार और परियोजनाओं को बिना किसी तीसरे देश की दखलअंदाजी के सुचारू रूप से चलाने का एक अतिरिक्त वित्तीय चैनल बन सकता है।
किर्गिस्तान बिश्केक में हो रहे SCO शिखर सम्मेलन का आज दूसरा दिन है। पीएम मोदी आज समिट को संबोधित कर सकते हैं। कल मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई देशों के नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकात की। बिश्केक में हो रहे SCO शिखर सम्मेलन में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान और ईरान समेत 10 सदस्य देशों के नेता शामिल हो रहे हैं। SCO समिट के पहले दिन की तस्वीरें… मोदी ने पुतिन को ब्रिक्स समिट में शामिल होने का न्योता दिया पीएम मोदी ने भारत में अगले महीने होने वाली ब्रिक्स समिट के लिए रूस के राष्ट्रपति पुतिन को न्योता दिया था। मोदी ने कहा था- “भारत कुछ दिनों बाद ब्रिक्स समिट का आयोजन कर रहा है। सभी सभी भारतीय आपका और आपके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करने के लिए बहुत उत्सुक हैं।” पुतिन बोले- रूस में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 7 गुना बढ़ी राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी से मुलाकात के बाद कहा- रूस में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या के मामले में भारत टॉप लिस्ट में शामिल है। पिछले कुछ सालों में यह संख्या 7 गुना बढ़कर 40,000 हो गई है। हम नियमित रूप से भारत और रूस के सांस्कृतिक उत्सव आयोजित करते हैं। हमारे बीच पर्यटकों का आना-जाना भी काफी होता है, जिसमें 16% की वृद्धि देखी गई है। पीएम ने प्रवासी भारतीयों से मुलाकात की पीएम मोदी ने किर्गिस्तान में भारत से जुड़े लोगों से मुलाकात की, जिनमें प्रवासी सदस्य, शिक्षाविद, शोधकर्ता, ITEC पूर्व छात्र और योग अभ्यासकर्ता शामिल थे। अगले साल पाकिस्तान को मिल सकती है मेजबानी यह SCO के 25 साल पूरे होने पर आयोजित ऐतिहासिक सम्मेलन है। यूरेशिया की सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक संतुलन के लिहाज से यह साल का सबसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय सम्मेलन माना जा रहा है। समिट के बाद किर्गिस्तान की अध्यक्षता समाप्त होगी और 2026–27 की अध्यक्षता पाकिस्तान को सौंपे जाने की उम्मीद है। 2027 का SCO शिखर सम्मेलन पाकिस्तान में प्रस्तावित है। ——————————————- ये खबर भी पढ़ें… किर्गिस्तान में पुतिन-मोदी की मुलाकात, दोनों लीडर गले मिले:PM ने BRICS के लिए न्योता दिया; एक ही कार में बैठकर नोमैड गेम्स सेरेमनी में पहुंचे
पीएम मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई। यह बैठक करीब 10 मिनट चली। पूरी खबर पढ़ें…
PM Modi Putin Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत की। प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन और मध्य पूर्व में जारी संघर्षों के बीच “लगातार युद्ध” की जगह “युद्ध खत्म करने” की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, इन संघर्षों का वैश्विक भू-राजनीति पर भी बड़ा असर पड़ रहा है।
बता दें कि अला-आर्चा स्टेट रेजिडेंस में मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से गले मिलकर एक-दूसरे का स्वागत किया। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, पुतिन ने अक्साकल मीटिंग रूम में मोदी का स्वागत किया। इस दौरान उनके साथ वरिष्ठ रूसी अधिकारियों और मंत्रियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था।
पुतिन ने दी मुझे यूक्रेन के बारे में जानकारी दी- पीएम मोदी
बैठक के दौरान, मोदी ने कहा कि पुतिन ने उन्हें यूक्रेन के हालात के बारे में जानकारी दी और शांति की कोशिशों के लिए भारत का समर्थन दोहराया।
मोदी ने कहा, “आपने मुझे यूक्रेन के हालात के बारे में जानकारी दी। भारत शांति की सभी कोशिशों का समर्थन करता है। युद्ध में बीता हर दिन इंसानियत को पीछे धकेलता है। वहीं, शांति की ओर एक कदम उम्मीद जगाता है। हमें कभी न खत्म होने वाले युद्ध से युद्ध के अंत की ओर बढ़ना होगा, जो इंसानियत के हित में है। सभी मुद्दों को जल्द सुलझाया जाना चाहिए।”
मोदी ने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के मजबूत होने पर भी जोर दिया और कहा कि राष्ट्रीय हित दोनों देशों के लिए “सबसे बड़ी प्राथमिकता” है।
पुतिन से मिलकर खुशी हुई
मोदी ने कहा, “मुझे पुतिन से मिलकर बहुत खुशी हुई। पिछले साल पुतिन का भारत दौरा बहुत सफल रहा था। आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिली है।”
भारत और रूस के बीच व्यापार का कुल मूल्य 2% से ज्यादा बढ़ा
इस बीच, पुतिन ने कहा कि रूस और भारत के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग में सकारात्मक रुझान दिख रहे हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार का कुल मूल्य 2% से ज्यादा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि मोदी के व्यक्तिगत ध्यान की वजह से दोनों देशों के संबंध और मजबूत हो रहे हैं।
रूसी राष्ट्रपति ने पर्यटन के क्षेत्र में बढ़ते संबंधों का भी जिक्र किया और कहा कि 2025 में भारत और रूस के बीच पर्यटकों की आवाजाही में 16% की बढ़ोतरी हुई।
यह बैठक भारत के लिए एक अहम मोड़ पर हो रही है, क्योंकि अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई में रुकावट आ रही है और रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है। ये बातचीत और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि एक तरफ नई दिल्ली रूसी कच्चे तेल पर काफी हद तक निर्भर रहते हुए अपनी ऊर्जा सप्लाई सुरक्षित करना चाहती है, तो दूसरी तरफ मॉस्को अपने तेल निर्यात से होने वाली कमाई को सुरक्षित रखना चाहता है।
यूक्रेन युद्ध पर भारत ने फिर साफ किया रुख
बता दें कि फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमले के बाद से ही भारत ने इस मामले में सावधानी भरा रुख अपनाया है। नई दिल्ली ने बार-बार शांति और संघर्ष खत्म करने की अपील की है, लेकिन क्रेमलिन की सीधे तौर पर आलोचना करने से परहेज किया है।
गौरतलब है कि रूस भारत का एक अहम साझेदार बना हुआ है, खासकर ऊर्जा और रक्षा के क्षेत्र में। वित्त वर्ष 2026 में दोनों देशों के बीच करीब 60 अरब डॉलर का कारोबार हुआ। अब दोनों देशों की नजर इस दशक के अंत तक आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने पर है।
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