अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले राजनीतिक प्रचार में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। उम्मीदवारों और राजनीतिक संगठनों ने AI से बने विज्ञापनों के प्रचार पर करीब 1300 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। एक विज्ञापन में न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी और गवर्नर कैथी होकुल को महंगाई और अपराध का डर दूर करने वाली दवा बेचते दिखाया गया। एक दूसरे विज्ञापन में मिशिगन के डेमोक्रेटिक सीनेट उम्मीदवार डॉ. अब्दुल एल-सय्यद का AI से बना वीडियो दिखाया गया। इसमें वे ‘डेथ टू अमेरिका’ और ‘9/11 हमले का जश्न मनाओ’ लिखे कार्ड देखकर हंसते नजर आए। 80% AI विज्ञापन ट्रम्प की पार्टी ही बना रही अमेरिका की वेस्लेयन यूनिवर्सिटी की जांच में 220 से ज्यादा ऐसे वीडियो की पहचान हुई है जिनमें AI का इस्तेमाल किया गया था। वेस्लेयन मीडिया प्रोजेक्ट की प्रोफेसर एरिका फ्रैंकलिन फाउलर ने कहा, कई विज्ञापनों में AI का इस्तेमाल इतनी सफाई से किया गया कि बिना किसी जानकारी के यह पहचानना मुश्किल हो सकता है कि वीडियो में AI का इस्तेमाल हुआ है। इसका मकसद- विरोधियों को बदनाम करना AI से बनाए गए कुछ विज्ञापनों में राजनीतिक विरोधियों को ऐसे नेताओं के साथ दिखाया गया, जिनसे जुड़ने पर मतदाताओं के बीच विवाद हो सकता है। इनमें डेमोक्रेटिक पार्टी की हिलेरी क्लिंटन और अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज जैसे नेता शामिल हैं। ओक्लाहोमा में ‘मेक ओक्लाहोमा ग्रेट अगेन’ नाम के एक समूह ने डेमोक्रेटिक गवर्नर उम्मीदवार को हिलेरी क्लिंटन के साथ गले मिलते दिखाया। वीडियो में दोनों को हाथ पकड़े हुए दिखाया गया, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प किनारे उदास खड़े नजर आए। स्क्रीन पर लिखा था, ‘क्लिंटन का समर्थक, ट्रम्प का विरोधी।’ चुनवी रैलियों में भीड़ के लिए भी AI का इस्तेमाल AI का इस्तेमाल चुनावी रैलियों में ज्यादा भीड़ दिखाने के लिए भी किया जा रहा है। वहीं, फ्लोरिडा के गवर्नर पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार जेम्स फिशबैक के एक विज्ञापन में उन्हें डेमोक्रेटिक सांसद इल्हान उमर और ईरान के नेताओं के साथ पार्टी करते दिखाया गया। वीडियो में ईरानी नेताओं को तलवारों से यहूदी धर्म के प्रतीक ‘स्टार ऑफ डेविड’ पर हमला करते दिखाया गया। राजनीतिक विज्ञापनों में AI का इस्तेमाल केवल नकली घटनाएं बनाने तक सीमित नहीं है। ओक्लाहोमा के रिपब्लिकन उम्मीदवार चिप कीटन के एक विज्ञापन की शुरुआत में उनकी पुरानी असली तस्वीर दिखाई गई। यह तस्वीर उस समय की थी, जब वे ओक्लाहोमा में पुलिस अधिकारी थे। AI की मदद से तस्वीर में उनका सिर ऊपर उठता और चेहरे पर बड़ी मुस्कान आती दिखाई गई। AI से 19 करोड़ में बनने वाले विज्ञापन 1 करोड़ में बन रहे हॉलीवुड की विज्ञापन कंपनी स्ट्रैटेजिक परसेप्शन के संस्थापक फ्रेड एन. डेविसे मुताबिक, AI विज्ञापन बनाने की लागत काफी कम कर रहा है। उन्होंने एक विज्ञापन का उदाहरण देते हुए बताया कि इसे पारंपरिक तरीके से बनाने पर करीब लगभग 19 करोड़ रुपए खर्च होते। इसमें कलाकारों, कपड़ों की व्यवस्था, खाने-पीने और कैमरा-लाइटिंग के साथ पूरे दिन की शूटिंग की जरूरत पड़ती। लेकिन AI की मदद से वही दृश्य तैयार करने पर खर्च करीब 1.8 करोड़ रुपए रह गया है। अब AI कम समय और कम खर्च में ऐसे विज्ञापन बना सकता है। कई बार दर्शकों को पता भी नहीं चलता कि वीडियो में दिखाई गई घटना असली नहीं है। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार AI के इस्तेमाल में ज्यादा सतर्क डेमोक्रेटिक उम्मीदवार AI के इस्तेमाल को लेकर रिपब्लिकन उम्मीदवारों से ज्यादा सतर्क हैं। इसकी एक वजह यह है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक इस तकनीक की ज्यादा आलोचना करते हैं और इस पर नियम बनाने की मांग करते हैं। वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और प्रोजेक्ट के सह-निदेशक ट्रैविस एन. रिडआउट ने कहा कि AI का इस्तेमाल करने से डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों और संगठनों की छवि को नुकसान पहुंचने का खतरा ज्यादा है, क्योंकि वे खुद इस तकनीक पर नियंत्रण के लिए नियम बनाने की मांग कर रहे हैं। —————————– यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका ने मदद रोकी तो यूक्रेन का क्या होगा:जेलेंस्की का साथ छोड़ पुतिन के साथ दिख रहे ट्रम्प; 1 सप्ताह में 4 झटके दिए रूस से करीब 5 साल से युद्ध लड़ रहे यूक्रेन के सामने अब नई मुसीबत खड़ी हो गई है। जिस अमेरिका के हथियारों और खुफिया जानकारी के दम पर यूक्रेनी सेना रूसी हमलों का मुकाबला कर रही है, उसी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
रूस से करीब 5 साल से युद्ध लड़ रहे यूक्रेन के सामने अब एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। जिस अमेरिका के हथियारों और खुफिया जानकारी के दम पर यूक्रेनी सेना रूसी हमलों का मुकाबला कर रही है, उसी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। ट्रम्प ने महज एक सप्ताह में 4 ऐसे कदम उठाए, जिनसे यूक्रेन की मुश्किलें बढ़ गईं। अब सवाल है कि अगर ट्रम्प ने यूक्रेन को सैन्य मदद और खुफिया जानकारी देना बंद कर दिया, तो जेलेंस्की की सेना का क्या होगा? क्या यूक्रेन अमेरिकी मदद के बिना रूस का मुकाबला कर पाएगा? और ट्रम्प के बदले रुख से पुतिन को कितना फायदा मिल सकता है? 9 अक्टूबर: डीजल की बढ़ी कीमतों के लिए यूक्रेन युद्ध को जिम्मेदार ठहराया ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध को अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतों की वजह बताया। इसके बाद उन्होंने रूसी डीजल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी राहत दी। उनका कहना था कि इससे ईंधन की कीमतें कम करने में मदद मिलेगी। यह फैसला इसलिए अहम है, क्योंकि रूस तेल और गैस की बिक्री से बड़ी कमाई करता है। इस कमाई से उसे युद्ध का खर्च उठाने में भी मदद मिलती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से मॉस्को को आर्थिक फायदा हो सकता है। 10 अक्टूबर: जेलेंस्की से कहा- नया राष्ट्रपति चुनो अगले दिन ट्रम्प ने सीधे जेलेंस्की के नेतृत्व पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को नया राष्ट्रपति चुनना चाहिए, जो रूस के साथ समझौता करके युद्ध खत्म कर सके। ट्रम्प का आरोप था कि जेलेंस्की के पास युद्ध खत्म करने के कई मौके थे, लेकिन उन्होंने उनका फायदा नहीं उठाया। उनका कहना था कि यूक्रेन के राष्ट्रपति को रूस के साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। 11 अक्टूबर: जेलेंस्की से बात किए बिना युद्धविराम का ऐलान तीसरे दिन ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए युद्धविराम का ऐलान किया। ऊर्जा ठिकानों में बिजली संयंत्र, तेल रिफाइनरी और ईंधन से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण ढांचे शामिल होते हैं। रूस और यूक्रेन दोनों एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमले करते रहे हैं। इन हमलों से बिजली आपूर्ति, ईंधन की उपलब्धता और सैन्य अभियानों पर असर पड़ता है। लेकिन ट्रम्प के ऐलान के बाद विवाद खड़ा हो गया। जेलेंस्की ने कहा कि उन्हें इस समझौते की पहले से जानकारी नहीं थी। उन्होंने साफ किया कि यूक्रेन रूस के ऊर्जा ठिकानों पर हमले तभी रोकेगा, जब रूस भी यूक्रेन पर ऐसे हमले बंद करेगा। 13 अक्टूबर: स्टारलिंक सर्विस की स्पीड कम की यूक्रेन जिस इंटरनेट से अपने तेज रफ्तार ड्रोन उड़ा रहा था और रूस में हमले कर रहा था, उस पर अचानक स्पीड लॉक लगा दिया गया। पहले ये 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हमला करते थे। लॉक लगने के बाद इसकी रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा रह गई। जैसे ही कोई ड्रोन इस रफ्तार से तेज हुआ, उस पर लगा इंटरनेट सिग्नल कट गया और ड्रोन गिरने लगा। जेलेंस्की ने इसका जिम्मेदार मस्क को बताया। बाद में मस्क ने इस पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह अमेरिकी सरकार कर रही है। अमेरिका ने मदद रोक दी तो यूक्रेन का क्या होगा? 1. मिसाइल हमलों की चेतावनी मिलने में दिक्कत: अमेरिका की खुफिया जानकारी यूक्रेन को रूसी मिसाइलों के हमलों के बारे में पहले से आगाह करने में मदद करती है। इससे सैनिकों और आम नागरिकों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचने का समय मिलता है। अमेरिकी जानकारी बंद होने पर यह व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है। 2. पैट्रियट मिसाइलों की कमी: यूक्रेन पैट्रियट मिसाइलों की मदद से रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इनकी आपूर्ति रोक देता है, तो यूक्रेन के शहरों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा करना और मुश्किल हो सकता है। 3. सैन्य अभियानों पर असर: अमेरिकी संचार तकनीक में रुकावट आने से ड्रोन के जरिए निगरानी और हमले करने, युद्ध के मैदान में सैनिकों की गतिविधियों पर नजर रखने और हमलों की योजना बनाने में मुश्किल होगी। 4. रूस पर दबाव बनाने की रणनीति कमजोर: यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ठिकानों पर हमले करके रूस की कमाई और युद्ध क्षमता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इन हमलों का विरोध करता है और रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत देता है, तो यूक्रेन की रणनीति पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी मदद बंद होते ही यूक्रेन युद्ध हार जाएगा। यूक्रेन ने अपने देश में हथियारों का उत्पादन बढ़ाया है और यूरोपीय देश भी उसे सैन्य सहायता देते हैं। लेकिन अमेरिकी खुफिया जानकारी और कुछ खास हथियारों का पूरा विकल्प तैयार करना आसान नहीं होगा। ट्रम्प के फैसलों से रूस को क्या फायदा? रूस के लिए सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि यूक्रेन और अमेरिका के बीच मतभेद बढ़ने से कीव पर दबाव बढ़ेगा। अगर यूक्रेन को खुफिया जानकारी और हथियार कम मिलते हैं, तो उसे रूसी हमलों का मुकाबला करने में ज्यादा मुश्किल हो सकती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से रूस को आर्थिक फायदा भी हो सकता है। वहीं, ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का दबाव यूक्रेन की उस रणनीति को कमजोर कर सकता है, जिसके जरिए वह रूस की युद्ध क्षमता पर चोट करना चाहता है। ट्रम्प का जेलेंस्की का साथ छोड़ने की वजह क्या है? 1. युद्ध खत्म करने के लिए यूक्रेन पर दबाव: ट्रम्प चाहते हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच जल्द समझौता हो। इसके लिए वे जेलेंस्की से रियायतें देने को कह रहे हैं। 2. रूस से रिश्ते सुधारने की कोशिश: ट्रम्प रूस के साथ बातचीत और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इससे यूक्रेन को मिलने वाली अमेरिकी मदद पर असर पड़ने की आशंका है। 3. अमेरिका में तेल की कीमतें घटाना: यूक्रेन के रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज ट्रम्प ने कहा कि इन हमलों से डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं। वे रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतें कम करना चाहते हैं। 4. पुतिन से समझौते की कोशिश: ट्रम्प ने रूस से डीजल कारोबार की अनुमति देने और जेलेंस्की पर हमले रोकने का दबाव बनाने जैसे कदम उठाए हैं। इससे रूस को आर्थिक फायदा मिल सकता है, जबकि यूक्रेन की स्थिति कमजोर पड़ने की आशंका है। —————————
यह खबर भी पढ़ें… मस्क ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड घटाई:रूस के खिलाफ सेना के ऑपरेशन पर असर
अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड पर लिमिट लगा दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्टनोव ने बुधवार को बताया कि इस फैसले से रूस के खिलाफ लड़ रही यूक्रेनी सेना के कई ऑपरेशन पर असर पड़ा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
रूस से करीब 5 साल से युद्ध लड़ रहे यूक्रेन के सामने अब एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। जिस अमेरिका के हथियारों और खुफिया जानकारी के दम पर यूक्रेनी सेना रूसी हमलों का मुकाबला कर रही है, उसी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। ट्रम्प ने महज एक सप्ताह में 4 ऐसे कदम उठाए, जिनसे यूक्रेन की मुश्किलें बढ़ गईं। अब सवाल है कि अगर ट्रम्प ने यूक्रेन को सैन्य मदद और खुफिया जानकारी देना बंद कर दिया, तो जेलेंस्की की सेना का क्या होगा? क्या यूक्रेन अमेरिकी मदद के बिना रूस का मुकाबला कर पाएगा? और ट्रम्प के बदले रुख से पुतिन को कितना फायदा मिल सकता है? 9 अक्टूबर: डीजल की बढ़ी कीमतों के लिए यूक्रेन युद्ध को जिम्मेदार ठहराया ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध को अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतों की वजह बताया। इसके बाद उन्होंने रूसी डीजल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी राहत दी। उनका कहना था कि इससे ईंधन की कीमतें कम करने में मदद मिलेगी। यह फैसला इसलिए अहम है, क्योंकि रूस तेल और गैस की बिक्री से बड़ी कमाई करता है। इस कमाई से उसे युद्ध का खर्च उठाने में भी मदद मिलती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से मॉस्को को आर्थिक फायदा हो सकता है। 10 अक्टूबर: जेलेंस्की से कहा- नया राष्ट्रपति चुनो अगले दिन ट्रम्प ने सीधे जेलेंस्की के नेतृत्व पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को नया राष्ट्रपति चुनना चाहिए, जो रूस के साथ समझौता करके युद्ध खत्म कर सके। ट्रम्प का आरोप था कि जेलेंस्की के पास युद्ध खत्म करने के कई मौके थे, लेकिन उन्होंने उनका फायदा नहीं उठाया। उनका कहना था कि यूक्रेन के राष्ट्रपति को रूस के साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। 11 अक्टूबर: जेलेंस्की से बात किए बिना युद्धविराम का ऐलान तीसरे दिन ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए युद्धविराम का ऐलान किया। ऊर्जा ठिकानों में बिजली संयंत्र, तेल रिफाइनरी और ईंधन से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण ढांचे शामिल होते हैं। रूस और यूक्रेन दोनों एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमले करते रहे हैं। इन हमलों से बिजली आपूर्ति, ईंधन की उपलब्धता और सैन्य अभियानों पर असर पड़ता है। लेकिन ट्रम्प के ऐलान के बाद विवाद खड़ा हो गया। जेलेंस्की ने कहा कि उन्हें इस समझौते की पहले से जानकारी नहीं थी। उन्होंने साफ किया कि यूक्रेन रूस के ऊर्जा ठिकानों पर हमले तभी रोकेगा, जब रूस भी यूक्रेन पर ऐसे हमले बंद करेगा। 13 अक्टूबर: स्टारलिंक सर्विस की स्पीड कम की यूक्रेन जिस इंटरनेट से अपने तेज रफ्तार ड्रोन उड़ा रहा था और रूस में हमले कर रहा था, उस पर अचानक स्पीड लॉक लगा दिया गया। पहले ये 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हमला करते थे। लॉक लगने के बाद इसकी रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा रह गई। जैसे ही कोई ड्रोन इस रफ्तार से तेज हुआ, उस पर लगा इंटरनेट सिग्नल कट गया और ड्रोन गिरने लगा। जेलेंस्की ने इसका जिम्मेदार मस्क को बताया। बाद में मस्क ने इस पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह अमेरिकी सरकार कर रही है। अमेरिका ने मदद रोक दी तो यूक्रेन का क्या होगा? 1. मिसाइल हमलों की चेतावनी मिलने में दिक्कत: अमेरिका की खुफिया जानकारी यूक्रेन को रूसी मिसाइलों के हमलों के बारे में पहले से आगाह करने में मदद करती है। इससे सैनिकों और आम नागरिकों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचने का समय मिलता है। अमेरिकी जानकारी बंद होने पर यह व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है। 2. पैट्रियट मिसाइलों की कमी: यूक्रेन पैट्रियट मिसाइलों की मदद से रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इनकी आपूर्ति रोक देता है, तो यूक्रेन के शहरों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा करना और मुश्किल हो सकता है। 3. सैन्य अभियानों पर असर: अमेरिकी संचार तकनीक में रुकावट आने से ड्रोन के जरिए निगरानी और हमले करने, युद्ध के मैदान में सैनिकों की गतिविधियों पर नजर रखने और हमलों की योजना बनाने में मुश्किल होगी। 4. रूस पर दबाव बनाने की रणनीति कमजोर: यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ठिकानों पर हमले करके रूस की कमाई और युद्ध क्षमता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इन हमलों का विरोध करता है और रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत देता है, तो यूक्रेन की रणनीति पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी मदद बंद होते ही यूक्रेन युद्ध हार जाएगा। यूक्रेन ने अपने देश में हथियारों का उत्पादन बढ़ाया है और यूरोपीय देश भी उसे सैन्य सहायता देते हैं। लेकिन अमेरिकी खुफिया जानकारी और कुछ खास हथियारों का पूरा विकल्प तैयार करना आसान नहीं होगा। ट्रम्प के फैसलों से रूस को क्या फायदा? रूस के लिए सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि यूक्रेन और अमेरिका के बीच मतभेद बढ़ने से कीव पर दबाव बढ़ेगा। अगर यूक्रेन को खुफिया जानकारी और हथियार कम मिलते हैं, तो उसे रूसी हमलों का मुकाबला करने में ज्यादा मुश्किल हो सकती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से रूस को आर्थिक फायदा भी हो सकता है। वहीं, ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का दबाव यूक्रेन की उस रणनीति को कमजोर कर सकता है, जिसके जरिए वह रूस की युद्ध क्षमता पर चोट करना चाहता है। ट्रम्प का जेलेंस्की का साथ छोड़ने की वजह क्या है? 1. युद्ध खत्म करने के लिए यूक्रेन पर दबाव: ट्रम्प चाहते हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच जल्द समझौता हो। इसके लिए वे जेलेंस्की से रियायतें देने को कह रहे हैं। 2. रूस से रिश्ते सुधारने की कोशिश: ट्रम्प रूस के साथ बातचीत और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इससे यूक्रेन को मिलने वाली अमेरिकी मदद पर असर पड़ने की आशंका है। 3. अमेरिका में तेल की कीमतें घटाना: यूक्रेन के रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज ट्रम्प ने कहा कि इन हमलों से डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं। वे रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतें कम करना चाहते हैं। 4. पुतिन से समझौते की कोशिश: ट्रम्प ने रूस से डीजल कारोबार की अनुमति देने और जेलेंस्की पर हमले रोकने का दबाव बनाने जैसे कदम उठाए हैं। इससे रूस को आर्थिक फायदा मिल सकता है, जबकि यूक्रेन की स्थिति कमजोर पड़ने की आशंका है। —————————
यह खबर भी पढ़ें… मस्क ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड घटाई:रूस के खिलाफ सेना के ऑपरेशन पर असर
अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड पर लिमिट लगा दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्टनोव ने बुधवार को बताया कि इस फैसले से रूस के खिलाफ लड़ रही यूक्रेनी सेना के कई ऑपरेशन पर असर पड़ा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने वाले कानून को फिलहाल रोक दिया है। ट्रम्प ने शुक्रवार को इस फैसले से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर किए और कहा कि यह कदम अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता था। इन देशों में चीन, भारत, स्लोवाकिया समेत हंगरी और अजरबैजान शामिल थे। प्रतिबंध से जुड़े कानून का मकसद रूस की कमाई के रास्ते बंद करना था, ताकि यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के लिए उसे पैसा जुटाने में मुश्किल हो। खास बात ये है कि ट्रम्प ने 9 अक्टूबर को ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल खरीदने की डील की थी। ट्रम्प को 30 दिन के अंदर फैसला लेना था ट्रम्प ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल (लिंडसे ग्राहम एक्ट) पर 18 सितंबर 2026 को साइन किए थे। 16 सितंबर को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने इसे 262-159 वोटों से मंजूरी दी थी। कानून पर साइन करने के बाद ट्रम्प को प्रतिबंध लगाने का फैसला 30 दिन के अंदर करना था। हालांकि, ट्रम्प ने इससे पहले ही प्रतिबंधों और टैरिफ पर छूट दे दी। भारत के तेल आयात में रूस का 45% हिस्सा भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है। अगस्त 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 45% थी। भारत ने अगस्त में रूस से रोजाना औसतन 20.8 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था। ऐसे में रूस से तेल खरीदने पर 100% तक टैरिफ लगने का खतरा भारत के लिए चिंता की वजह था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा था कि भारत तेल की उपलब्धता और दुनिया के हालात को देखकर अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने का फैसला करता है। भारत पहले भी अमेरिकी अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठा चुका है। जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर असर के बीच रूस से तेल की सप्लाई कम करना दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ा सकता है।
इसलिए अमेरिका के लिए रूस पर और सख्त प्रतिबंध लगाना आसान फैसला नहीं है। मिडटर्म चुनाव से पहले तेल की कीमतों की चिंता ट्रम्प ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब अमेरिका में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। यूक्रेन के रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। इससे दुनिया में तेल महंगा हो रहा है। ट्रम्प चाहते हैं कि तेल की कीमतें कम हों, ताकि अमेरिका में पेट्रोल सस्ता हो सके। नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने हैं। इन चुनावों में मतदाता महंगाई और पेट्रोल की कीमतों जैसे मुद्दों पर सरकार का काम देखेंगे। इस फैसले से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की नाराज हैं। यूरोपीय अधिकारियों ने भी इसका विरोध किया। इसी हफ्ते अमेरिकी संसद के दोनों दलों के कुछ सदस्यों ने ट्रम्प से डीजल की बिक्री पर दी गई छूट वापस लेने की मांग की। अमेरिकी सांसदों ने ट्रम्प के फैसले का विरोध किया कानून को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों पार्टियों का समर्थन मिला था। हालांकि रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले नए कानून को फिलहाल रोकने के ट्रम्प के फैसले की अमेरिकी सांसदों ने आलोचना की। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक कुछ सांसदों को पहले से आशंका थी कि ट्रम्प कानून के तहत रूस पर सख्ती नहीं करेंगे। ————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 30 हजार भारतीय मजदूरों ने काम छोड़ा:इनके पास पूरे कागजात नहीं, पकड़े जाने का डर अमेरिका के कैलिफोनिया में करीब 30 हजार भारतीय मजदूरों को खेती का काम छोड़ना पड़ा है। इनमें से कई मजदूरों के पास अमेरिका में रहने और काम करने के पूरे कागजात नहीं हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ संपर्क बढ़ाते हुए रूस को कई रियायतें दी हैं। उनके इन कदमों की अमेरिका में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने आलोचना की है, जिससे मध्यावधि चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी को मुश्किल सवालों का सामना करना पड़ रहा है।
मतदान में करीब तीन सप्ताह शेष रहने के बीच ट्रंप के हाल के फैसलों ने पुतिन के साथ उनके एक दशक पुराने संबंधों को फिर चर्चा में ला दिया है। शुक्रवार को पुतिन से बातचीत के बाद ट्रंप ने ऐसे कई कदम उठाए, जिनकी आलोचकों के अनुसार रूस को बिना किसी ठोस रियायत के फायदा हुआ है।
श्री ट्रंप ने शुक्रवार को वैश्विक बाजार में लाखों टन रूसी डीजल की आपूर्ति की अनुमति देने संबंधी समझौते की घोषणा की। आलोचकों का कहना है कि इससे रूस के युद्ध से होने वाली आय सीमित करने के उद्देश्य से लगाए गए प्रतिबंधों में ढील मिली है। उन्होंने शनिवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की रूसी तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाने के लिए आलोचना की और यूक्रेन से अपना नेता बदलने की मांग की।
इसके अगले दिन श्री ट्रंप ने तत्काल ‘ऊर्जा संघर्षविराम’ की घोषणा की। रूस ने हालांकि यूक्रेन की ऊर्जा अवसंरचना पर हमले जारी रखे और अमेरिका की ओर से इसका कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया।
श्री ट्रंप ने सोमवार को उन खुफिया आकलनों पर आधारित खबरों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि रूस ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों की जानकारी देकर उसके युद्ध प्रयासों में मदद कर रहा है।
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उन्होंने मंगलवार को डीजल समझौते का बचाव करते हुए इस आशंका को भी खारिज किया कि इससे होने वाली आय रूस के युद्ध को वित्तपोषित करने में मदद कर सकती है। रिपब्लिकन सांसदों ने हालांकि इस समझौते को ‘विश्वासघात’ और ‘दुश्मन को दिया गया उपहार’ बताया।
ऊर्जा विश्लेषकों ने सवाल उठाया है कि क्या डीजल समझौते से ईरान से जुड़े युद्ध के कारण बढ़ी ईंधन कीमतों में उल्लेखनीय कमी आएगी। यूरोप में अमेरिकी रुख को लेकर नाटो के भीतर मतभेद बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। रूस पर तोड़फोड़, साइबर हमलों और ड्रोन घुसपैठ की घटनाओं को तेज करने के आरोप भी हैं।
राजनीतिक रूप से श्री ट्रंप ऐसे रूसी नेता के साथ नजदीकी बढ़ा रहे हैं, जो अमेरिकी मतदाताओं के बीच अलोकप्रिय हैं। जनवरी में यूगोव के एक सर्वेक्षण में श्री ट्रंप को 2024 में वोट देने वाले 81 प्रतिशत लोगों ने श्री पुतिन के प्रति प्रतिकूल राय व्यक्त की थी।
रूसी राष्ट्रपति के साथ श्री ट्रंप के संबंध 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद से विवादों में रहे हैं। श्री ट्रंप ने सोमवार को फिर कहा कि श्री पुतिन, श्री जेलेंस्की की तुलना में युद्ध समाप्त करने के लिए अधिक इच्छुक हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “मुझे वास्तव में लगता है कि पुतिन, जेलेंस्की से अधिक समझौता करना चाहते हैं।
मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के कांग्रेस में अपना नियंत्रण खोने की आशंका है। ऐसा होने पर श्री ट्रंप का विधायी एजेंडा प्रभावित हो सकता है और उनके प्रशासन को कांग्रेस की बढ़ती जांच तथा समन का सामना करना पड़ सकता है।
श्री ट्रंप ने चुनावी नतीजों से अपने संबंध को अलग रखने की कोशिश की है। उन्होंने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा मैं चुनाव नहीं लड़ रहा हूं, मैं पहले ही भारी बहुमत से जीत चुका हूं।
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की पर रूस के साथ समझौता करने के लिए दबाव बढ़ा दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की फिलहाल राष्ट्रपति जेलेंस्की की तुलना में समझौता करने में अधिक रुचि है।
श्री ट्रंप ने पत्रकारों से कहा श्री जेलेंस्की को समझौता करने पर ध्यान देना चाहिए न कि उस बारे में बात करने पर। हमें श्री जेलेंस्की को समझौता करने के लिए तैयार करना होगा।
इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने दोनों पक्षों की सीधी तुलना करते हुए कहा मुझे लगता है कि वास्तव में पुतिन, जेलेंस्की की तुलना में समझौता करने के लिए अधिक इच्छुक हैं।
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श्री ट्रंप ने रूस से डीज़ल आपूर्ति के संदर्भ में हुए अपने हालिया समझौते का बचाव किया। उन्होंने कुछ रिपब्लिकन नेताओं की आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि रूसी ईंधन के निर्यात पर रोक लगाने से वैश्विक बाजार को नुकसान होगा।
श्री ट्रंप ने कहा यह वास्तव में मेरे लिए कोई समझौता नहीं है बल्कि यह बाकी दुनिया के लिए एक समझौता है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने तर्क दिया कि डीज़ल की आपूर्ति सीमित करने से अंतरराष्ट्रीय ईंधन बाजार पर बहुत असर पड़ेगा और उन्होंने कहा कि वह ऐसे उपायों का समर्थन करते हैं जिनसे अमेरिकी किसानों और पशुपालकों को मदद मिल सके।
राष्ट्रपति ट्रंप की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब अमेरिका यूक्रेन पर रूस के साथ बातचीत की दिशा में आगे बढ़ने का दबाव बढ़ा रहा है और साथ ही डीजल समझौते के माध्यम से रूस के साथ ऊर्जा सहयोग भी बढ़ा रहा है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से ज्यादा शांति समझौता करना चाहते हैं। ट्रम्प ने 11 अक्टूबर को रूस-यूक्रेन युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए सीजफायर का दावा किया था। इसके दो दिन बाद यूक्रेन ने कहा कि रूस ने उसके 6 ऊर्जा ठिकानों पर हमले किए और 33 लोग घायल हुए। ट्रम्प बोले- इस महीने युद्ध में 32 हजार लोग मारे गए ट्रम्प ने दावा किया कि इस महीने युद्ध में 32 हजार लोग मारे गए हैं। हालांकि, इस आंकड़े की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ट्रम्प ने दावा किया कि दोनों देश एनर्जी सीजफायर के लिए तैयार हो गए हैं। सोमवार को जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि रूस और यूक्रेन ने सहमति से इनकार किया है, तो उन्होंने कहा, वे सहमत हो गए। पता है क्यों? क्योंकि मैंने कहा कि वे सहमत हैं। इसी वजह से वे सहमत हुए। इस मामले को सुलझाना ही होगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि रूस ने सीजफायर तोड़ा है या नहीं। यूक्रेन बोला- जवाबी कार्रवाई करेंगें यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि रूस की ओर से ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। उनके मुताबिक, रूस ने सोमवार को यूक्रेन के 6 ऊर्जा ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों में देशभर में 33 लोग घायल हुए। जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर कहा कि यूक्रेन अमेरिका के प्रस्ताव के तहत ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए तैयार है। लेकिन इसके लिए रूस को भी ऐसा करना होगा। इससे पहले उन्होंने वारसॉ सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में कहा था कि अगर रूस ने ऊर्जा ठिकानों पर हमले नहीं रोके, तो यूक्रेन भी जवाबी कार्रवाई करेगा। यूक्रेन के मुताबिक, अमेरिकी प्रस्ताव के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद पूर्वी यूक्रेन के एक बिजलीघर पर हमला हुआ। रूस बोला- लंबे समय की शांति चाहिए रूस ने भी ऊर्जा सीजफायर लागू होने की पुष्टि नहीं की है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस कुछ समय के लिए लड़ाई रोकने के बजाय ऐसी शांति चाहता है, जो लंबे समय तक बनी रहे। पेस्कोव के मुताबिक, पुतिन यूक्रेन में चुनाव के दिन रूसी सेना को गोलीबारी रोकने का आदेश देंगे। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि स्थायी शांति के लिए रूस किन शर्तों पर सहमत हो सकता है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी जेलेंस्की को अस्थायी राहत देने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि जेलेंस्की ऐसी राहत के हकदार नहीं हैं। रूस के हमले में यूक्रेन के 8 लोगों की मौत सीजफायर के दावे के बाद रूस के हमलों के चलते यूक्रेन के अलग-अलग इलाकों में कम से कम 8 लोगों की मौत हुई है। रूस ने सोमवार को यूक्रेन की राजधानी कीव के एक रिहायशी इलाके में 25 मंजिला इमारत पर हमला किया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के मुताबिक, हमले में 2 लोगों की मौत हो गई और 9 लोग घायल हुए। इमारत के पास खड़ी एक कार में भी एक शव मिला। यूक्रेन के दूसरे बड़े शहर खार्किव में रूसी गोलाबारी से एक अपार्टमेंट की इमारत का प्रवेश द्वार ढह गया, जिसमें 5 लोग घायल हुए। मलबे में कुछ लोगों के दबे होने की आशंका है। इसके अलावा, खार्किव क्षेत्र के लोजोवा शहर में ड्रोन हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई। पूर्वी डोनेत्स्क क्षेत्र के क्रामातोर्स्क के पास एक गांव में गोलाबारी से 3 लोग मारे गए। वहीं, कीव के पास फास्टिव कस्बे और दक्षिण-पूर्वी शहर निप्रो में भी एक-एक व्यक्ति की मौत हुई। रूस और यूक्रेन के लिए ऊर्जा ठिकाने क्यों अहम हैं? रूस लंबे समय से यूक्रेन के बिजलीघरों और बिजली सप्लाई करने वाले ठिकानों पर हमले कर रहा है। इससे यूक्रेन में बिजली की कमी हो जाती है। सर्दियों में इसका असर लोगों के घर गर्म रखने और रोजमर्रा के कामों पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर, यूक्रेन रूस की तेल रिफाइनरियों और ईंधन बनाने वाले ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमले करता रहा है। इन हमलों से रूस में कच्चे तेल से पेट्रोल-डीजल बनाने का काम प्रभावित होता है। इससे रूस के तेल कारोबार को भी नुकसान पहुंचता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में यूक्रेन के हमलों के कारण रूस का डीजल उत्पादन करीब 30% घट गया। रूस में तेल से ईंधन बनाने का काम भी पिछले 20 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका पिछले एक साल से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध रुकवाने के लिए बातचीत करा रहा है। इससे पहले भी दोनों देशों के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की कोशिश हुई थी, लेकिन दोनों के बीच सहमति नहीं बन सकी या समझौते ज्यादा समय तक नहीं चल पाए। ————————— ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- रूस और यूक्रेन में एनर्जी सीजफायर हुआ:एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमला नहीं करेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बताया है कि रूस और यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए सहमत हो गए हैं। उन्होंने रविवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि सीजफायर तत्काल प्रभाव से लागू होगा और दोनों देशों को इसका पालन करना चाहिए। पूरी खबर यहां पढ़ें…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से डीजल खरीदने के फैसले का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि यह सौदा अमेरिका के हित में है। ट्रम्प ने दावा किया कि यूरोपीय संघ (EU) ने भी रूस से ऊर्जा खरीदने पर 250 अरब डॉलर खर्च किए हैं, लेकिन अमेरिकी मीडिया इस मुद्दे को नजरअंदाज कर रहा है। ट्रम्प ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि EU ने रूस को ऊर्जा के लिए 250 अरब डॉलर दिए, लेकिन फेक न्यूज मीडिया इस खबर पर बात नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा अमेरिकी लोगों के हित में फैसले लिए हैं और उनकी नीति ‘अमेरिका फर्स्ट’ है। रूस अमेरिका को लाखों टन डीजल भेजेगा ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा था कि रूस तुरंत 3 लाख टन से ज्यादा डीजल अमेरिका भेजेगा। इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और फिर 10 लाख टन डीजल भेजने की बात कही गई। ट्रम्प के मुताबिक, रूस की रिफाइनरियों की स्थिति के आधार पर कुछ समय बाद 30 लाख टन डीजल और भेजा जा सकता है। ट्रम्प ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को इस समझौते के लिए धन्यवाद दिया था। उन्होंने इसे बड़ा सौदा बताते हुए कहा कि अमेरिका को बड़ी मात्रा में डीजल मिलेगा। पुतिन ने भी कहा कि रूस अमेरिका और दुनिया के दूसरे बाजारों को तेल और पेट्रोलियम उत्पाद देने के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। EU ने 826 रूसी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए ट्रम्प के रूस से डीजल खरीदने के फैसले का बचाव करने के बीच यूरोपीय संघ ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। यूरोपीय परिषद के मुताबिक, नए प्रतिबंधों में 1,569 लोगों और संस्थाओं को शामिल किया गया है। इनमें 826 रूसी कंपनियां और उन कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के तौर पर काम करने वाले 743 लोग शामिल हैं। इन प्रतिबंधों का मकसद रूस के सैन्य उद्योग को सामान और सेवाएं देने वाली कंपनियों पर दबाव बढ़ाना है। यूरोपीय परिषद के मुताबिक, इन कंपनियों का सालाना कारोबार कम से कम 20 अरब यूरो है और इनमें 2.5 लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं। जेलेंस्की बोले- रूस को युद्ध के लिए ज्यादा पैसा मिलेगा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोमवार को EU के नए प्रतिबंधों का स्वागत किया, लेकिन रूस से डीजल खरीदने के अमेरिकी फैसले की आलोचना की। उनका कहना है कि ऊर्जा बेचकर रूस की कमाई बढ़ेगी और वह इस पैसे का इस्तेमाल युद्ध जारी रखने के लिए कर सकता है। जेलेंस्की ने दावा किया कि अमेरिका की ओर से ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए संघर्षविराम की घोषणा के अगले ही दिन रूस ने यूक्रेन की 6 ऊर्जा सुविधाओं पर हमला किया। उन्होंने कहा कि इन हमलों में देशभर में 33 लोग घायल हुए। ट्रम्प ने रविवार को रूस और यूक्रेन में एनर्जी सीजफायर की जानकारी दी ट्रम्प ने रविवार को बताया था कि रूस और यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए सहमत हो गए हैं। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि सीजफायर तत्काल प्रभाव से लागू होगा और दोनों देशों को इसका पालन करना चाहिए। ————————-
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से डीजल खरीदने के फैसले का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि यह सौदा अमेरिका के हित में है। ट्रम्प ने दावा किया कि यूरोपीय संघ (EU) ने भी रूस से ऊर्जा खरीदने पर 250 अरब डॉलर खर्च किए हैं, लेकिन अमेरिकी मीडिया इस मुद्दे को नजरअंदाज कर रहा है। ट्रम्प ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि EU ने रूस को ऊर्जा के लिए 250 अरब डॉलर दिए, लेकिन फेक न्यूज मीडिया इस खबर पर बात नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा अमेरिकी लोगों के हित में फैसले लिए हैं और उनकी नीति ‘अमेरिका फर्स्ट’ है। रूस अमेरिका को लाखों टन डीजल भेजेगा ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा था कि रूस तुरंत 3 लाख टन से ज्यादा डीजल अमेरिका भेजेगा। इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और फिर 10 लाख टन डीजल भेजने की बात कही गई। ट्रम्प के मुताबिक, रूस की रिफाइनरियों की स्थिति के आधार पर कुछ समय बाद 30 लाख टन डीजल और भेजा जा सकता है। ट्रम्प ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को इस समझौते के लिए धन्यवाद दिया था। उन्होंने इसे बड़ा सौदा बताते हुए कहा कि अमेरिका को बड़ी मात्रा में डीजल मिलेगा। पुतिन ने भी कहा कि रूस अमेरिका और दुनिया के दूसरे बाजारों को तेल और पेट्रोलियम उत्पाद देने के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। EU ने 826 रूसी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए ट्रम्प के रूस से डीजल खरीदने के फैसले का बचाव करने के बीच यूरोपीय संघ ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। यूरोपीय परिषद के मुताबिक, नए प्रतिबंधों में 1,569 लोगों और संस्थाओं को शामिल किया गया है। इनमें 826 रूसी कंपनियां और उन कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के तौर पर काम करने वाले 743 लोग शामिल हैं। इन प्रतिबंधों का मकसद रूस के सैन्य उद्योग को सामान और सेवाएं देने वाली कंपनियों पर दबाव बढ़ाना है। यूरोपीय परिषद के मुताबिक, इन कंपनियों का सालाना कारोबार कम से कम 20 अरब यूरो है और इनमें 2.5 लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं। जेलेंस्की बोले- रूस को युद्ध के लिए ज्यादा पैसा मिलेगा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोमवार को EU के नए प्रतिबंधों का स्वागत किया, लेकिन रूस से डीजल खरीदने के अमेरिकी फैसले की आलोचना की। उनका कहना है कि ऊर्जा बेचकर रूस की कमाई बढ़ेगी और वह इस पैसे का इस्तेमाल युद्ध जारी रखने के लिए कर सकता है। जेलेंस्की ने दावा किया कि अमेरिका की ओर से ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए संघर्षविराम की घोषणा के अगले ही दिन रूस ने यूक्रेन की 6 ऊर्जा सुविधाओं पर हमला किया। उन्होंने कहा कि इन हमलों में देशभर में 33 लोग घायल हुए। ट्रम्प ने रविवार को रूस और यूक्रेन में एनर्जी सीजफायर की जानकारी दी ट्रम्प ने रविवार को बताया था कि रूस और यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए सहमत हो गए हैं। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि सीजफायर तत्काल प्रभाव से लागू होगा और दोनों देशों को इसका पालन करना चाहिए। ————————-
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को कहा कि यूक्रेन को नया राष्ट्रपति चुनना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए दावा किया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन के साथ युद्ध खत्म करने के लिए शांति समझौता करना चाहते हैं, लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की बातचीत के मौके गंवा रहे हैं। यह बयान ऐसे समय आया है, जब ट्रम्प ने शुक्रवार को बताया कि अमेरिका अब रूस से डीजल खरीदेगा। जेलेंस्की ने इस फैसले का विरोध किया। उन्होंने कहा था कि इससे रूस को युद्ध जारी रखने के लिए और पैसा मिलेगा। रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमलों से ट्रम्प नाराज ट्रम्प ने यूक्रेन की ओर से रूस की तेल रिफाइनरियों पर किए जा रहे हमलों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इन हमलों से दुनिया में ईंधन की समस्या बढ़ सकती है। यूक्रेन रूस की तेल से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बना रहा है। इससे रूस की तेल से होने वाली कमाई और उसकी सेना तक ईंधन पहुंचाने की व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला शुरू किया था। तब से दोनों देशों के बीच युद्ध जारी है। अमेरिका ने रूस से डीजल खरीदने पर पाबंदी हटाई ईरान-अमेरिका और इजराइल के युद्ध के कारण इस साल ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इसी बीच अमेरिका ने रूसी डीजल के निर्यात पर लगी पाबंदियां अगले साल अप्रैल तक हटा दीं है। इस फैसले से रूस के लिए अमेरिका और दूसरे देशों को डीजल बेचने का रास्ता खुल गया है। जेलेंस्की ने इस फैसले को कमजोर कदम बताया। उनका कहना है कि रूस को तेल और डीजल बेचने की छूट मिलने से उसकी कमाई बढ़ेगी और वह इस पैसे का इस्तेमाल युद्ध जारी रखने में कर सकेगा। मियामी में युद्ध रोकने की बातचीत बेनतीजा रही अमेरिका और यूक्रेन के अधिकारियों के बीच 9 अक्टूबर को मियामी में युद्ध रोकने को लेकर करीब 6 घंटे बातचीत हुई थी। लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। बैठक में ट्रम्प के दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ भी शामिल थे। जेलेंस्की ने कहा था कि यूक्रेन की टीम बातचीत के लिए गई थी, लेकिन इसके बाद रूस को राहत देने वाला फैसला कर लिया गया। यूक्रेन का मानना है कि रूस पर दबाव बनाए बिना युद्ध खत्म करना मुश्किल है। रूस को मनाने के लिए अमेरिका ने आर्थिक प्रस्ताव रखे थे सितंबर के आखिर में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान अमेरिका ने रूस से युद्ध रोकने का समझौता कराने के लिए कुछ प्रस्तावों पर चर्चा की थी। इसके बदले रूस को आर्थिक राहत देने के विकल्प रखे गए थे। इनका मकसद ऊर्जा से जुड़ी जगहों और समुद्र में हमले रुकवाना था। प्रस्तावों में पश्चिमी देशों में जब्त रूस की सरकारी संपत्ति का कुछ हिस्सा लौटाना, रूसी कंपनी लुकोइल की कुछ संपत्तियां मध्य-पूर्व के निवेशकों को बेचने की इजाजत देना और बेलारूस को पोटाश (खाद बनाने में इस्तेमाल होता है) बेचने की छूट देना शामिल था। यूक्रेन इन प्रस्तावों के पूरी तरह खिलाफ नहीं था। लेकिन उसने कहा कि अगर रूस युद्ध रोकने का समझौता तोड़ता है, तो उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। यूक्रेन ने यह सुझाव भी दिया कि रूस की जब्त संपत्ति से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल यूक्रेन की मदद के लिए किया जाए। ——————– यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी चुनाव से पहले डीजल महंगा, ट्रम्प रूस से खरीदेंगे:इसी वजह से भारत पर 100% टैरिफ की धमकी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूसी डीजल खरीदने पर लगी रोक 7 अप्रैल 2027 तक हटा दी है। अब अमेरिका रूस से डीजल खरीद सकेगा। रूस ने 2022 में यूक्रेन पर हमला किया था। इसके बाद अमेरिका ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगा दिए थे। पूरी खबर पढ़ें…

