ईरान बोला-एक ग्राम एनरिच्ड-यूरेनियम भी देश से बाहर नहीं जाएगा:जब तक अमेरिका भरोसा पैदा नहीं करता, कोई बातचीत नहीं होगी

ईरान ने मंगलवार को कहा कि वह अपना एक ग्राम भी एनरिच्ड यूरेनियम किसी दूसरे देश नहीं भेजेगा। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सेक्रेटरी मोहसिन रजाई ने कहा कि जब तक अमेरिका भरोसा जीतने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता और ईरान की सभी शर्तें नहीं मानता, तब तक बातचीत नहीं होगी। ईरान ने अमेरिका के सामने 7 शर्तें रखीं ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका तब तक ईरान का भरोसा नहीं जीत सकता, जब तक वह उसकी सात शर्तें पूरी नहीं करता। ये शर्तें पिछले महीने होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के लिए रखी गई थीं। ईरान की प्रमुख मांगों में उसके बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकेबंदी खत्म करना, तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाना और क्षेत्र के सभी मोर्चों पर लड़ाई रोकना शामिल है। ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई भी कह चुके हैं कि हथियार बनाने के लिए जरूरी स्तर के करीब पहुंच चुके एनरिच्ड यूरेनियम को देश से बाहर नहीं भेजा जाना चाहिए। परमाणु कार्यक्रम पर दोनों देशों में विवाद ईरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिका के साथ समझौते की राह में बड़ी रुकावट बना हुआ है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसी महीने की शुरुआत में कहा था कि ईरान को यूरेनियम संवर्धन की अपनी क्षमता में ठोस कमी करनी होगी। उनके मुताबिक, ऐसा करना अमेरिकी मांगें मानने और दोनों देशों के बीच आठ महीने से चल रही जंग खत्म करने के लिए जरूरी है। एनरिच्ड यूरेनियम वह यूरेनियम होता है, जिसमें एक खास तरह के परमाणु की मात्रा बढ़ाई जाती है। इसका इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा बनाने के साथ परमाणु हथियारों में भी हो सकता है। ईरान पर परमाणु हथियार बनाने का आरोप अमेरिका, इजराइल और कई पश्चिमी देश लंबे समय से ईरान पर परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाते रहे हैं। इन देशों की चिंता की एक बड़ी वजह ईरान का यूरेनियम को 60% तक संवर्धित करना है। आम तौर पर नागरिक परमाणु ऊर्जा के लिए इतने ऊंचे स्तर की जरूरत नहीं होती, जबकि परमाणु हथियारों में इस्तेमाल होने वाले यूरेनियम का संवर्धन स्तर करीब 90% होता है। हालांकि, ईरान इन आरोपों से इनकार करता रहा है। उसका कहना है कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं कर रहा है। ट्रम्प बोले- ईरान परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 15 अक्टूबर को न्यूजमैक्स को दिए इंटरव्यू में दोबारा कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। रॉयटर्स मुताबिक, ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार न हों, क्योंकि अगर उसके पास ऐसे हथियार हुए तो वह उनका इस्तेमाल करेगा। ट्रम्प ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े पहाड़ के नीचे बने ठिकाने को निशाना बनाने की संभावना भी जताई। उन्होंने कहा कि इस ठिकाने पर हमला करना पड़ सकता है। हालांकि, ट्रम्प ने यह भी साफ किया कि ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका परमाणु बम का इस्तेमाल नहीं करेगा। पाकिस्तान बातचीत की कोशिश करा रहा पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराने के लिए ईरान के दौरे पर हैं। उन्होंने मुनीर के साथ मुलाकात में भी ईरान का यही रुख दोहराया। ईरानी मीडिया के मुताबिक, मंगलवार को राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने तेहरान में मुनीर से मुलाकात की। समाचार एजेंसी नूर न्यूज के अनुसार, इस दौरान क्षेत्र के हालात और बातचीत कराने की कोशिशों पर चर्चा हुई। मुनीर ने ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ से भी मुलाकात की। पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इससे पहले पाकिस्तान की कोशिशों से जून में दोनों देशों के बीच अंतरिम शांति समझौता हुआ था।लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद अमेरिका और ईरान के बीच फिर लड़ाई शुरू हो गई और समझौता टूट गया। 28 फरवरी से चल रही है अमेरिका-ईरान की लड़ाई अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। अमेरिका का कहना है कि उसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। वहीं ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार है। ———————— यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प मिडटर्म चुनाव हार सकते हैं:10 में से 9 सर्वे में पीछे, महंगाई-ईरान जंग से लोकप्रियता घटी, अपने ही उम्मीदवार दूरी बना रहे अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

Asian Market Today: अमेरिकी AI कंपनियों की शानदार कमाई से एशियाई बाजारों में तेजी,Kospi 3.6% तक उछला

Asian Market Today: एशियाई बाजारों में तेजी देखने को मिली। अमेरिकी इक्विटी-इंडेक्स फ्यूचर्स में आई बढ़त का असर एशियाई बाजारों पर दिखा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर से सबसे ज्यादा फायदा उठाने वाली कुछ बड़ी कंपनियों की शानदार कमाई ने निवेशकों का टेक्नोलॉजी शेयरों के प्रति उत्साह फिर से जगा दिया है।

MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स 0.6% ऊपर चढ़ा, जिसमें दक्षिण कोरिया और जापान सबसे आगे रहे। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) इंडेक्स 3.62% उछल गया। इससे पहले, दक्षिण कोरिया के बाजार में हाल ही में एक IPO की शुरुआत बेहद खराब रही थी, जिससे अब बाजार ने जोरदार वापसी की है। जापान में, निक्केई 225 (Nikkei 225) में 1.76% और व्यापक टॉपिक्स (Topix) इंडेक्स में 1.12% की बढ़त दर्ज की गई। हैंग सेंग फ्यूचर्स भी 0.5% ऊपर रहा।

भारत में, GIFT निफ्टी (जो यह संकेत देता है कि दिन की शुरुआत में शेयर बाजार कैसा रहेगा) ने सूचकांकों के लिए एक सकारात्मक (हरे निशान में) शुरुआत का अनुमान जताया है।

इसके अलावा, बुधवार को जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए सब्सक्रिप्शन भी शुरू होने जा रहा है। बाजार के जानकारों ने इसे ‘सभी IPO की जननी’ (Mother of all IPOs) करार दिया है, क्योंकि उम्मीद है कि यह देश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा IPO होगा। करेंसी मार्केट में, जापानी येन 158.29 प्रति डॉलर के स्तर पर लगभग स्थिर रहा, जबकि ऑफशोर युआन 6.6746 प्रति डॉलर पर बना रहा।

अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में भी तेजी दिखी। नैस्डैक 100 (Nasdaq 100) फ्यूचर्स 0.7% ऊपर चढ़े। वहीं, स्पेसएक्स (SpaceX) के शेयरों में एक्सटेंडेड ट्रेडिंग के दौरान करीब 7% की उछाल आई, क्योंकि कंपनी ने अपने तीसरी तिमाही के नतीजे जारी किए हैं।

सुपर माइक्रो कंप्यूटर (Super Micro Computer) ने भी उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया और पोस्ट-मार्केट ट्रेडिंग में 15% की तेजी दर्ज की, जिससे AI-इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयरों को बढ़ावा मिला। दूसरी ओर, नेटफ्लिक्स (Netflix) के शेयरों में गिरावट आई, क्योंकि कंपनी ने भविष्य के लिए निराशाजनक अनुमान (forecast) जारी किया है।

स्पेसएक्स (SpaceX) की इस तेजी के पीछे एलन मस्क की सैटेलाइट, रॉकेट और AI कंपनी का शानदार प्रदर्शन रहा। सितंबर में समाप्त तिमाही के लिए कंपनी ने 4.4 अरब डॉलर की नेट इनकम दर्ज की, जबकि इसका रेवेन्यू एक साल पहले की तुलना में 161% बढ़ गया है।

इसके अलावा, मस्क ने बताया कि स्पेसएक्स और टेस्ला ने संभावित विलय (merger) की संभावना तलाशने के लिए विशेष कमेटियां बनाई हैं। यह कदम अब तक के सबसे बड़े कॉर्पोरेट गठबंधन की दिशा में एक शुरुआती पहल है।

पिछले हफ्ते AI वैल्यूएशन और फाइनेंसिंग को लेकर चिंताओं के कारण टेक्नोलॉजी शेयरों में काफी उतार-चढ़ाव आया था, लेकिन हालिया नतीजों ने निवेशकों को कुछ राहत दी है। अब निवेशकों की नज़र कंपनियों के आने वाले नतीजों पर है। वे यह देखना चाहेंगे कि क्या विकास के आंकड़े AI इंफ्रास्ट्रक्चर में लगाए जा रहे अरबों डॉलर के निवेश को सही ठहराते हैं।

इस बीच, मंगलवार को उतार-चढ़ाव भरे सत्र के बाद, एशियाई बाज़ार की शुरुआती ट्रेडिंग में तेल की कीमतों में आई तेज़ी बनी रही। मंगलवार को ट्रेडर्स अमेरिका-ईरान युद्ध को खत्म करने की कोशिशों से जुड़ी अलग-अलग खबरों का आकलन कर रहे थे। एशियाई बाज़ार की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड 109.52 डॉलर पर कारोबार कर रहा था, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 0.7% की बढ़त के साथ 98.48 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

बॉन्ड बाजार में, न्यूयॉर्क सत्र के दौरान लॉन्ग-टर्म US ट्रेज़री का प्रदर्शन बेहतर रहा, जिसका असर डॉलर पर पड़ा। इस साल अब तक US ट्रेज़री यील्ड पर तेल की कीमतों का काफी असर रहा है, लेकिन पिछले हफ्ते बॉन्ड निवेशकों ने कच्चे तेल की कीमतों पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया, क्योंकि AI निवेश से जुड़े शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Polycab Share Price: ₹2.78 करोड़ की कानूनी लड़ाई, NSE ने कॉल-पुट पर लगाया बैन तो शेयर धड़ाम

Polycab Share Price: वायर और केबल बनाने वाली देश की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड कंपनी पॉलीकैब के शेयरों ने आज निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया। एनएसई ने जब 30 दिसंबर, 2026 से इसके F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) कॉन्ट्रैक्ट्स को बंद करने को कहा तो आज इसमें बिकवाली का दबाव दिखा। एनएसई ने दिसंबर के बाद से इसे डेरिवेटिव सेगमेंट से बाहर करने का आदेश इसलिए दिया क्योंकि कंपनी अब IBC (इनसॉल्वेंस एंड बैंकरप्सी कोड) फ्रेमवर्क के तहत आ गई। इसके बाद अब कंपनी के शेयर धड़ाम हो गए। फिलहाल बीएसई पर यह 2.16% की गिरावट के साथ ₹8232.00 पर है। इंट्रा-डे में यह 5.38% टूटकर ₹7,961.10 तक आ गया था।

Polycab क्यों आई IBC फ्रेमवर्क के शॉर्टलिस्ट में

एनएसई ने पॉलीकैब इंडिया को इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट से बाहर करने का फैसला इसलिए किया क्योंकि यह आईबीसी फ्रेमवर्क के तहत शॉर्टलिस्ट हुई है। यह मामला पॉलीकैब इंडिया के खिलाफ एक दिवालिया याचिका से जुड़ा है, जिसे एशियर मेटल्स (Asier Metals) ने फाइल किया है और इस पर सुनवाई के लिए NCLT (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) ने दोनों पक्षों की बहस के बाद मंजूरी दे दी है।

यह मामला ₹2.78 करोड़ के डिफॉल्ट से जु़ड़ा है। एशियर मेटल्स का कहना है कि पॉलीकैब के साथ उसका कारोबार संबंध साल 2020 में शुरू हुआ और इसके तहत पहले ही तय हो गया था कि एलुमिनियम इनगॉट्स की सप्लाई के पेमेंट 100% एडवांस होगा। सप्लायर एशियर मेटल्स के मुताबिक ऐसा मार्च 2026 तक चलता रहा और फिर इसके बाद 8 जून और 25 जून को जो दो ऑर्डर्स पॉलीकैब ने दिए, उसका एडवांस पेमेंट नहीं मिला। सप्लायर ने बाद में सप्लाई और बकाये के आधार पर पेमेंट मांगा।

सप्लायर के दावे के मुताबिक उसने प्रति किग्रा ₹405 के भाव पर एलुमिनियम इनगॉट्स की सप्लाई की और 29 इनवॉइस जारी की। रिफंड्स, क्रेडिट नोट्स और अन्य एडजस्टमेंट्स के बाद एशियर मेटल्स ने ₹2.78 करोड़ के बकाए की बात कही, जिस पर कंपनी 26 जून को डिफॉल्ट हो गई यानी कि दे नहीं पाई। इस पर सप्लायर ने 6 अगस्त को स्टैटुअर डिमांड नोटिस भेजा। पेमेंट नहीं मिलने पर सप्लायर ने 24 अगस्त को एनसीएलटी में याचिका डाली, जिसे 7 अक्टूबर को एनसीएलटी ने स्वीकार कर लिया।

कंपनी के दावे की बात करें तो पॉलीकैब का कहना है कि इनवॉइस प्रोविजिनल बिलिंग थी और इसमें फाइनल प्राइसिंग, रिकंसिलिएशन, क्वांटिटी डिस्काउंट्स, क्रेडिट नोट्स और अन्य एडजस्टमेंट्स होने थे। पॉलीकैब ने ₹17.52 करोड़ का काउंटर-क्लेम भी किया और डिटेंशन/डेमरेज के लिए ₹80 लाख के एडजस्टमेंट की मांग की। कंपनी का दावा है कि सप्लायर ने यह रकम एकतरफा और बिना मिलान किए गए हिसाब-किताब से निकाली थी। वहीं सप्लायर ने पर्चेज ऑर्डर का हवाला देते हुए कहा कि इसमें साफतौर पर प्रति किग्रा ₹405 की कीमत तय लिखी है।

क्या है NSE के आदेश का मतलब

एनएसई ने 12 अक्टूबर के अपने आदेश में पॉलीकैब इंडिया को इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट से बाहर निकालने का आदेश दिया, जिसके तहत 30 दिसंबर, 2026 से इसके F&O (फ्यूचर्स एंड कॉन्ट्रैक्ट्स) की ट्रेडिंग नहीं होगी। हालांकि इस सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि अक्टूबर 2026 के कॉन्ट्रैक्ट्स एक्सपायर होने के बाद एक्सपायरी महीनों के लिए कोई नया कॉन्ट्रैक्ट जारी नहीं होगा। वहीं अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर 2026 में एक्सपायर होने वाले मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स अपने-अपने एक्सपायरी डेट तक ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध रहेंगे। NSE का यह भी कहना है कि सभी मौजूदा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स पर T+2 दिन के आधार पर 100% मार्जिन लगाया जाएगा। यह नियम 13 अक्टूबर, 2026 तक की सभी ओपन पोजीशन्स और 14 अक्टूबर से बनने वाली नई पोजीशन्स पर लागू होगा।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

पॉलीकैब के शेयरों ने अमेरिका-ईरान के बीच के युद्ध, टैरिफ वार की आंच और महंगाई की मार के बीच निवेशकों को कम समय में अच्छा रिटर्न दिया है। 27 जनवरी 2026 को बीएसई पर यह ₹6,660.50 पर था, जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से 5 महीने में यह 52.07% उछलकर 22 जून 2026 को ₹10,128.60 पर पहुंच गया था।

Polycab India Q1 Results: अनुमान से कमजोर रहा नेट प्रॉफिट और रेवेन्यू

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Petrol Diesel Price: पेट्रोल-डीजल आज सस्ता हुआ या महंगा? चेक करें अपने शहर का ताजा रेट

Petrol Diesel Price Today:  पेट्रोल और डीजल की कीमतों में होने वाला थोड़ा सा भी बदलाव सीधे आम लोगों के बजट को प्रभावित करता है। तेल कंपनियां हर दिन सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल के नए रेट जारी करती हैं। वहीं 8 अक्टूबर, गुरुवार को देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध की आशंका और तेल सप्लाई प्रभावित होने की चिंता के कारण वैश्विक बाजार में दबाव बढ़ा है। इसके बावजूद भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखे हैं।

ईंधन के दाम बढ़ने या घटने का असर सिर्फ वाहन चालकों पर ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतों और सामान की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसलिए रोजाना पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट जानना लोगों के लिए जरूरी है।

आपके शहर में आज कितनी है पेट्रोल, डीजल की कीमत

शहर                       पेट्रोल (₹/लीटर)            डीजल (₹/लीटर)

नई दिल्ली               102.12                               95.20

मुंबई                       111.21                                97.83

कोलकाता               113.51                                99.82

चेन्नई                       107.77                               99.55

गुड़गांव                  102.97                                95.64

नोएडा                   101.96                                 95.44

बेंगलुरु                  111.68                                  99.56

भुवनेश्वर                108.97                                 100.68

चंडीगढ़                 101.54                                 89.47

हैदराबाद               116.15                                  104.23

जयपुर                  112.66                                 98.25

लखनऊ                101.86                                 95.36

पटना                    113.37                                   99.36

तिरुवनंतपुरम       115.49                                  104.40

इस कंपनी ने बढ़ाए थे दाम

इस बीच, देश की बड़ी निजी ईंधन कंपनियों में शामिल नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं। कंपनी ने पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने के बाद कंपनी ने यह कदम उठाया है। फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद तेल की कीमतों में तेजी का असर ग्राहकों तक पहुंचाने वाली नायरा एनर्जी पहली भारतीय ईंधन खुदरा कंपनी बनी थी।

आज का एक्सप्लेनर:हूतियों से लड़ने सऊदी जा रहीं पाक-तुर्किये की सेनाएं, पाकिस्तान ने पहले इनकार किया, आखिर किस मजबूरी में एक्टिवेट हुआ ‘मक्का पैक्ट’

पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब ने पहली बार ‘मक्का पैक्ट’ एक्टिवेट कर दिया है। 2 महीने पहले हुए करार के तहत किसी एक देश पर हमला, तीनों पर हमला माना जाएगा। यानी, अब हूतियों से जंग में उलझे सऊदी की मदद के लिए पाक-तुर्किये को सेनाएं भेजनी पड़ेंगी। आखिर मदद मांगने को कैसे मजबूर हुआ सऊदी, क्या वाकई दूसरे देश के लिए लड़ेंगी पाकिस्तान-तुर्किये की सेनाएं और क्या इससे भारत को चिंता करनी चाहिए; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: हूतियों ने सऊदी अरब को मदद मांगने पर कैसे मजबूर किया? जवाब: सऊदी अरब के पड़ोस में है यमन। यहां की कुल 4 करोड़ की आबादी में करीब 35% जैदी शिया हैं। इन्हीं शियाओं का हथियारबंद समूह और राजनीतिक ऑर्गेनाइजेशन है हूती। यमन की मान्यता प्राप्त सरकार को सऊदी अरब का समर्थन हासिल है। सऊदी के जवान सरकार की सेना के साथ मिलकर कई इलाकों में डेरा डाले हुए हैं। वहीं सरकार के खिलाफ विद्रोह करके यमन के उत्तर-पश्चिम इलाके, राजधानी सना और लाल सागर के तटीय इलाके में हूतियों का कब्जा है। इन्हें ईरान से हथियार और पैसे की मदद मिलती है। 2015 से ही हूतियों और सऊदी समर्थित यमन की सेना में इलाकों पर कब्जे को लेकर छिटपुट संघर्ष चलता रहा। 2022 में संयुक्त राष्ट्र ने सीजफायर करवाया। बीते साल शुरू हुई ईरान-अमेरिका जंग के दौरान ईरान ने अमेरिका के सहयोगी सऊदी पर भी हमले किए। हूतियों ने भी कई बार सऊदी पर हमला करने की धमकी दी। 5 अगस्त 2026 को हूतियों ने सऊदी समर्थित यमन सेना के कैंपों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले शुरू कर दिए. हूतियों ने आरोप लगाया कि यहां सऊदी गठबंधन सेना जमावड़ा बढ़ा रही थी। इसी के साथ 4 साल पुराना सीजफायर टूट गया… सवाल-2: पाकिस्तान ने पहले टाला, फिर जमीनी सेना भेजने को क्यों तैयार हुआ? जवाब: 10 सितंबर को पाकिस्तान ने कहा, ‘सऊदी पर हूतियों के हमले के खिलाफ मक्का पैक्ट के तहत कोई कार्रवाई करने पर कोई बातचीत नहीं हुई है। जब वक्त आएगा, तब कदम उठाएंगे।’ पाकिस्तान के इस रुख के पीछे 3 वजहें थीं… 1. साझा सैन्य कमांड का कोई ढांचा नहींः तुर्किये के डिप्लोमेट रहे मुस्तफा एनेस एसेन के मुताबिक, ‘मक्का पैक्ट प्रतीकात्मक है, क्योंकि इसका एक जॉइंट सैन्य कमांड स्ट्रक्चर नहीं है। तुर्किये और पाकिस्तान का सीधे टकराव में शामिल होना मुश्किल है। 2. मध्यस्थ की भूमिका को खतराः पाकिस्तान, अमेरिका-ईरान जंग में मध्यस्थता की भूमिका में है। उसने ईरान से हूतियों पर लगाम कसने के लिए कहा और सऊदी पर हमलों की निंदा भी की। लेकिन इससे आगे बढ़ने से पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली भूमिका खतरे में पड़ सकती थी। 3. शिया-सुन्नी की लड़ाई में नहीं उलझना चाहताः पाकिस्तान में शियाओं की भी बड़ी आबादी है। 2015 में सऊदी ने हूतियों के खिलाफ जंग में मदद मांगी थी, तब भी पाकिस्तान ने इनकार कर दिया था। तब के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था, ‘हम किसी सांप्रदायिक जंग का हिस्सा नहीं बनना चाहते, क्योंकि इसकी दरारें पाकिस्तान के अंदर भी नजर आएंगी।’ इधर 10 सितंबर को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से फोन पर हूतियों पर हवाई हमले करने को कहा था। ट्रम्प ने मदद ठुकरा दी। फिर 15 सितंबर को हूतियों और अमेरिका में सीक्रेट मीटिंग हुई, जिसमें हूतियों ने वादा किया कि वो लाल सागर में अमेरिका और इजराइल के जहाजों पर हमला नहीं करेंगे। इससे सऊदी को अमेरिकी मदद मिलने की उम्मीद और कम हो गई। सऊदी ने दावा किया कि 15-16 सितंबर की रात हूतियों ने सऊदी के पवित्र शहर मक्का की तरफ ड्रोन छोड़े। हूतियों के प्रवक्ता याह्या सिरी का कहना था, ‘हमारा निशाना सऊदी के तेल और सैन्य ठिकाने थे, जो कि पवित्र स्थलों से काफी दूर हैं।’ हालांकि ड्रोन को रोकने के दौरान मक्का प्रांत के ताइफ शहर में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो लोग घायल हो गए। इसके बाद पाकिस्तान का रुख बदलने लगा… सवाल-3: तो क्या वाकई पाक-तुर्किये की सेनाएं हूतियों से लड़ेंगी? जवाब: साझा बयान में कहा गया है, ‘तीनों देश सऊदी में ‘तेजी से’ जॉइंट फोर्सेज और दूसरी ताकत (यानी हथियार, इंटेलिजेंस वगैरह) तैनात करेंगे।’ हालांकि पाकिस्तानी सैनिकों का सऊदी जाना नई बात नहीं है…. वहीं तुर्किये के विदेश मंत्री फिदान ने कहा है कि मक्का पैक्ट, नाटो की तरह काम करेगा, लेकिन मदद का पैमाना आगे की बातचीत से तय होगा। तुर्किये के सामने अपनी सेना भेजने में एक अड़चन ये भी है कि उसके कानून के तहत विदेश में सेना भेजने के लिए संसद की मंजूरी लेनी होगी। 5 अक्टूबर के फैसले में भी कहा गया है कि सऊदी की मदद में सेनाओं की तैनाती तीनों देशों के राष्ट्रीय कानूनों और आपसी सहमति के आधार पर होगी। सवाल-4: पाकिस्तान-भारत जंग छिड़ी, तो क्या तुर्किये-सऊदी भी लड़ने आएंगे? जवाब: सऊदी और तुर्किये भारत को दुश्मन नहीं मानते, इसलिए जंग में उनके हमले की आशंका बेहद कम है। लेकिन 3 बातें गौर करनी चाहिए… पाकिस्तान पैक्ट का फायदा उठाएगा: कार्नेगी इंडिया थिंकटैंक में सिक्योरिटी स्टडीज प्रोग्राम के फेलो दिनकर पेरी के मुताबिक, ‘यह पैक्ट पश्चिम एशिया के लिए बना है, लेकिन पाकिस्तान इसे भारत के साथ संघर्षों में इस्तेमाल करने की कोशिश करेगा। खासकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद बनी हालात के चलते।’ सऊदी भारत पर हमला नहीं करेगा: भारत और सऊदी अरब के अच्छे कूटनीतिक संबंध हैं। सऊदी और भारत में सालाना 40 बिलियन डॉलर से ज्यादा का व्यापार होता है। सऊदी-पाकिस्तान से यह 5 बिलियन डॉलर से भी कम है। इसलिए पूर्व भारतीय राजदूत नवदीप सूरी कहते हैं, ‘अगर भारत पाकिस्तान पर हमला करे या ऑपरेशन सिंदूर जैसी स्थिति दोबारा पैदा हो, तो सऊदी पाकिस्तान का रक्षक बनकर नहीं आएगा।’ तुर्किये हथियार सप्लाई जारी रखेगा: रिपोर्ट्स के मुताबिक 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्किये ने पाकिस्तान को 350 से ज्यादा ड्रोन्स भेजे थे। पाकिस्तान के समर्थन में स्टेटमेंट जारी किया था। पाकिस्तान में भारत के पूर्व उच्चायुक्त अजय बिसारिया के मुताबिक, ‘इस पैक्ट से भारत-पाकिस्तान की स्थिति नहीं बदलेगी। तुर्किये पाकिस्तान को ड्रोन सप्लाई करता रहेगा और सऊदी खुद को पाकिस्तान का समर्थक दिखाने से बचेगा।’ सवाल-5: भारत के पास इस नई चुनौती की क्या काट है? जवाब: भारत की सबसे बड़ी काट उसके खाड़ी देशों से डिप्लोमैटिक और व्यापारिक रिश्ते हैं। खाड़ी देशों में 89 लाख भारतीय रहते हैं। भारत सऊदी अरब का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। सऊदी अरब अपना करीब 16% तो UAE करीब 11% कच्चा तेल भारत को बेचता है। मई 2026 में ही भारत ने UAE के साथ रक्षा समझौता किया है। यह रिश्ते और मजबूत किए जा सकते हैं… ——– ये एक्सप्लेनर भी पढ़िए… पैरों में हवाई चप्पल, कमर में लुंगी, मुंह में कात दबाए हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब का F-15 फाइटर जेट गिरा दिया है। वो भी अपनी देसी बैलिस्टिक मिसाइल से। यमन की सऊदी समर्थित सेना की बख्तरबंद गाड़ियां छीन लीं और निशाना चूकी DF-15 मिसाइल भी उठा ले गए। हूतियों के हमले से इस्लाम का सबसे पवित्र शहर मक्का तक हाई अलर्ट पर है। पूरी खबर पढ़िए…

RBI क्या 7 अक्तूबर को बढ़ाएगा इंटरेस्ट रेट, क्या होम लोन, कार लोन सहित दूसरे लोन होंगे महंगा ?

आरबीआई 7 अक्तूबर यानी बुधवार को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान करेगा। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की मीटिंग 5 अक्तूबर को शुरू हुई। इसके नतीजे बुधवार को आएंगे। सवाल है कि क्या केंद्रीय बैंक इसमें रेपो रेट बढ़ाने का ऐलान करेगा?

रेपो रेट एक चौथाई-फीसदी बढ़ सकता है

इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि RBI 7 अक्तूबर को रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स यानी एक चौथाई-फीसदी बढ़ा सकता है। इसकी वजह यह है कि रिटेल इनफ्लेशन लगातार बीते कई महीनों से केंद्रीय बैंक के 4 फीसदी के तय लक्ष्य से ऊपर बना हुआ है। मध्यपूर्व में अमेरिका-ईरान की लड़ाई की वजह से क्रूड की कीमतों में उछाल आया है। इसने इनफ्लेशन पर दबाव बढ़ाया है।

फेडरल रिजर्व ने बढ़ाया था इंटरेस्ट रेट

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स में ग्लोबल चीफ इकोनॉमिस्ट्स पॉल ग्रुएनवाल्ड ने कहा कि आरबीआई उन केंद्रीय बैंकों की लिस्ट में शामिल है सकता है, जिन्होंने महंगाई को बढ़ने से रोकने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि, उनका मानना है कि दुनिया में इंटरेस्ट रेट में होने वाली वृद्धि सीमित रहेगी।

दिसंबर में भी बढ़ सकता है रेपो रेट 

क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्ट डी के जोशी का भी मानना है कि आरबीआई अक्तूबर की पॉलिसी में रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा सकता है। हालांकि, उनका कहना है कि फिर दिसंबर की पॉलिसी में भी इंटरेस्ट रेट बढ़ने की काफी उम्मीद है। उसके बाद इंटरेस्ट रेट में वृद्धि इकोनॉमी से जुड़े डेटा पर निर्भर करेगी।

अगले साल आर्थिक डेटा पर निर्भर करेगी वृद्धि

जोशी ने कहा, “हमारा मानना है कि इंटरेस्ट रेट में वृद्धि दिसंबर में भी होगी। उसके बाद इसके बढ़ने की कम उम्मीद है। हालांकि, यह इकोनॉमी से जुड़े डेटा पर निर्भर करेगा।” उनका मानना है कि केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट में आक्रामक वृद्धि का साइकिल शुरू करने की जगह नापतौल कर इस बारे में फैसला लेगा।

अगस्त की पॉलिसी के बाद हुए हैं तीन बड़े बदलाव 

उन्होंने अगस्त की आरबीआई की पॉलिसी के बाद हुए तीन बदलावों का जिक्र किया। मानसून की बारिश कम हुई है और असमान रही है। पश्चिम एशिया में स्थिति गंभीर हुई है। ऑयल की कीमतें हाई लेवल पर बनी हुई हैं। इस बीच. पहली तिमाही में देश में जीडीपी की ग्रोथ आरबीआई की उम्मीद से ज्यादा रही है।

इनफ्लेशन पर दबाव जारी रहने के आसार 

उपर्युक्त वजहों से इनफ्लेशन पर दबाव बना रह सकता है। अमेरिका और भारत के इंटरेस्ट रेट के बीच घटता फर्क दूसरी ब़ड़ी वजह है, जिसका असर पॉलिसी से जुड़े आरबीआई के फैसले पर पड़ सकता है। जोशी ने कहा कि 10 साल की भारत और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बीच का फर्क घटकर 190 बेसिस प्वाइंट्स रह गया है, जो तीन साल पहले करीब 450 बेसिस प्वाइंट्स था। फेडरल रिजर्व भी इस महीने के आखिर में पॉलिसी का ऐलान करेगा। वह लगातार दूसरी बार इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है।

रिटेल इनफ्लेशन अगस्त में 4.82 फीसदी पहुंचा

भारतीय युवा शक्ति ट्रस्ट की फाउंडिंग और मैनेजिंग ट्रस्टी लक्ष्मी वेंकटरमण ने कहा कि अगस्त में भारत में रिटेल इनफ्लेशन बढ़कर 4.82 फीसदी पर पहुंच गया। यह जुलाई में 4.45 फीसदी था। हालांकि, इंडस्ट्रियल आउटपुट जुलाई के 6.7 फीसदी से बढ़कर अगस्त में 8 फीसदी रहा। ऐसे में दोनों के बीच बैलेंस जरूरी है। उन्होंने कहा कि आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी का फोकस मैक्रोइकोनॉमिक स्टैबिलिटी पर होगा। हालांकि, केंद्रीय बैंक की कोशिश कर्ज तक आसान पहुंच बनाए रखने पर भी होगी।

Gold Silver Price: सोने में मामूली तेजी, विदेश में चांदी 2% हुई महंगी, इस हफ्ते बुलियन मार्केट के लिए अहम संकेत

Gold Silver Price: इंटरनेशनल मार्केट में सोमवार (5 अक्टूबर) को शुरुआती कारोबार में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। बुलियन मार्केट अमेरिकी डॉलर, ट्रेजरी यील्ड और जियोपॉलिटिकल (भू-राजनीतिक) घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए है। 5 अक्टूबर के मार्केट डेटा के अनुसार, COMEX पर सोना 0.47% बढ़कर $4,182 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था, जबकि चांदी 1.96% बढ़कर $61.60 प्रति औंस पर थी।

यह बढ़त पिछले हफ्ते आई भारी गिरावट के बाद हुई है। दिसंबर डिलीवरी के लिए COMEX गोल्ड फ्यूचर्स पिछले हफ्ते 3.7% गिरकर $4,162.3 प्रति औंस पर बंद हुआ था, जबकि चांदी 6.7% गिरकर $60.41 प्रति औंस पर आ गई थी।

पिछले हफ्ते मजबूत अमेरिकी डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड का असर बुलियन पर पड़ा, जिससे प्रॉफिट-बुकिंग हुई। इससे पहले, कमजोर अमेरिकी रोजगार डेटा और मॉनेटरी पॉलिसी (मौद्रिक नीति) को लेकर उम्मीदों से सोने को सपोर्ट मिला था।

सोने के लिए, डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड निकट भविष्य में अहम कारक बने रहेंगे। डॉलर में लगातार बढ़ोतरी या यील्ड में और वृद्धि से सोने पर दबाव पड़ सकता है, जबकि इनमें से किसी में भी बदलाव से कुछ सपोर्ट मिल सकता है।

जियोपॉलिटिकल घटनाक्रमों से भी कीमतों में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। अगर तनाव बढ़ता है, तो अमेरिका-ईरान के बीच अनसुलझे हालात ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) के तौर पर सोने की मांग को फिर से बढ़ा सकते हैं, हालांकि तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं कम होने से पिछले हफ्ते बुलियन में जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम कुछ कम हुआ था।

कीमती और इंडस्ट्रियल मेटल (औद्योगिक धातु) के तौर पर दोहरी भूमिका के कारण चांदी में अपेक्षाकृत अधिक उतार-चढ़ाव रह सकता है। हाल ही में इसमें सोने की तुलना में अधिक गिरावट आई थी, और इंडस्ट्रियल कमोडिटीज में व्यापक कमजोरी का असर भी इसकी कीमतों पर पड़ा।

घरेलू मोर्चे पर, निवेशक इस हफ्ते के आखिर में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मॉनेटरी पॉलिसी के फैसले पर नज़र रखेंगे। साथ ही, वे ब्याज दरों, डॉलर और बुलियन के बारे में और संकेतों के लिए ग्लोबल इकोनॉमिक डेटा – जिसमें सर्विसेज PMI रीडिंग, अमेरिकी व्यापार के आंकड़े और कंज्यूमर सेंटीमेंट डेटा शामिल हैं – पर भी ध्यान देंगे। MCX पर, दिसंबर डिलीवरी के लिए सोने के फ़्यूचर्स पिछले हफ़्ते के आखिर में लगभग ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए, जिसमें करीब 2% की गिरावट आई, जबकि चांदी की कीमत लगभग 4% गिरकर ₹2.25 लाख प्रति किलोग्राम के आसपास आ गई।

जानकारों का मानना ​​है कि डॉलर, बॉन्ड यील्ड और जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम में बदलाव का असर बुलियन (सोने-चांदी) की कीमतों पर पड़ेगा और निकट भविष्य में इनकी चाल दोनों तरफ़ (ऊपर-नीचे) रहने की संभावना है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

AI का जोश, एशियाई कंपनियो ने जुटाया 6 साल का रिकॉर्ड फंड, लिस्टिंग के बाद मार्केट में फिर जल्द एंट्री की होड़

AI Boom in Stock Market: हॉन्ग कॉन्ग में एआई से जुड़ी कंपनियों ने इस बार रिकॉर्डतोड़ पैसे जुटाए। यह तेजी ऐसे समय में आई, जब हॉन्ग कॉन्ग के शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। कंपनियों ने आईपीओ, प्लेसमेंट्स और ब्लॉक ट्रेड्स के जरिए जुलाई-सितंबर में $47.5 अरब जुटाए, जोकि ब्लूमबर्ग के मुताबिक किसी साल की तीसरी तिमाही में अब तक की सबसे बड़ी रकम है।

इसके साथ ही इस साल अब तक हॉन्ग कॉन्ग में कुल $92 अरब से अधिक फंड जुटाए गए जोकि साल 2021 में $112.5 अरब के रिकॉर्ड के काफी करीब है। यह ऐसे समय में हुआ, जब बॉन्ड यील्ड में तेजी और कई नए शेयरों के खराब परफॉरमेंस के कारण निवेशक और कंपनियां अब पहले की तुलना में अधिक सतर्कता बरत रही हैं।

AI ने भरा जोश

हॉन्ग कॉन्ग में रौनक के पीछे एआई रही है लेकिन इस गर्मी तो इसने तगड़ा जोश दिखा दिया। चीन की कंपनियों ने तेजी से बढ़ रही एआई इंडस्ट्री में विस्तार के लिए ताबड़तोड़ पैसे जुटाए और पहले की तुलना में मार्केट में बहुत जल्द दोबारा एंट्री की। सबसे तगड़ा सौदा तो अलीबाबा ग्रुप की $10.2 अरब का फॉलो-ऑन ऑफर रहा तो Zhongji Innolight ने करीब $8 अरब जुटाए जोकि लगभग सात वर्षों में हॉन्ग कॉन्ग की सबसे बड़ी लिस्टिंग रही। अन्य कंपनियों ने भी बार-बार निवेशकों से पैसे जुटाए। एआई मॉडल बनाने वाली Z.AI ने इस साल IPO, प्लेसमेंट और कन्वर्टिबल बॉन्ड के जरिए कुल $9.6 अरब जुटाए।

गोल्डमैन में एशिया (एक्स-जापान) इक्विटी कैपिटल मार्केट्स के प्रमुख जेम्स वांग का कहना है कि पहले कंपनियां एक बार पैसे जुटाने के बाद फिर एक-दो साल बाद ही दोबारा ऐसी कोशिश करती थी लेकिन अब लॉकअप पीरियड समाप्त होते ही पूंजी जुटाने लगी हैं। उनका कहना है कि AI की वजह से यह सिलसिला अगले कुछ वर्षों तक जारी रहेगा और इसकी रफ्तार जल्द धीमे होने के कोई संकेत नहीं हैं।

Z.AI के अलावा एक और एआई मॉडल कंपनी मिनीमैक्स ग्रुप, चिप बनाने वाली कंपनी शंघाई एलुवेटर कोरएक्स सेमीकंडक्टर और शंघाई बिरेन टेक्नोलॉजी भी अपने IPO लॉकअप की अवधि खत्म होने के तुरंत बाद जुलाई में दोबारा बाजार में लौट आईं।

यह तेजी सिर्फ चीन या हॉन्ग कॉन्ग तक ही नहीं रही, पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में देखने को मिली। तीसरी तिमाही में इस क्षेत्र में शेयर बिक्री के जरिए रिकॉर्ड $120 अरब से अधिक जुटाए गए, जो छह वर्षों में इस अवधि के लिए सबसे अधिक है। चीन में भी इस दौरान मेमोरी चिप बनाने वाली Corp का 66.6 अरब युआन (लगभग $9.9 अरब) का IPO आया, जो चीन में अब तक का दूसरा सबसे बड़ा IPO रहा।

भारत में भी दिखी रौनक

साल की शुरुआत में अमेरिका-ईरान युद्ध, शेयर बाजार में हाहाकार और विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली के दबाव में रहने के बाद भारतीय बाजार ने भी जोरदार वापसी की। जुलाई से अब तक यहां शेयरों की बिक्री के जरिए कंपनियों ने रिकॉर्ड $26 अरब जुटाए, जिसके साथ भारतीय मार्केट के लिए यह अब तक की सबसे अच्छी तिमाही साबित हुई।

इस दौरान सबसे बड़े डील्स की बात करें तो एलआईसी में $3.2 अरब की सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री शामिल थी तो एनएसई ने $2.4 अरब का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ पेश किया। यह ऐसे समय में हुआ जब निफ्टी 50 अगस्त की शुरुआत के अपने हाई लेवल से लगभग 9.5% नीचे आ गया था। घरेलू बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी ने नए शेयर ऑफरिंग की मांग को मजबूत बनाए रखा।

आगे भी आईपीओ का पाइपलाइन काफी मजबूत है। मुकेश अंबानी की जियो प्लेटफॉर्म्स नवंबर में संभावित लिस्टिंग से पहले निवेशकों से मुलाकात कर रही है। ब्लूमबर्ग न्यूज के अनुसार यह भारत के सबसे बड़े IPO में से एक हो सकता है। सिटीग्रुप में इक्विटी कैपिटल मार्केट्स के प्रमुख हरीश रमन का कहना है कि इस साल अभी और आईपीओ आ सकते हैं और वैश्विक निवेशकों की दिलचस्पी भी बनी हुई है।

आगे कैसा है रुझान

एआई पर होने वाले भारी खर्च भविष्य में पर्याप्त रिटर्न दे पाएगा या नहीं, इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं लेकिन इसके बावजूद एआई से जुड़ी कंपनियां ताबड़तोड़ पैसा जुटा रही हैं और निवेशकों की दिलचस्पी भी बनी हुई है। हालांकि HSBC के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी कैपिटल मार्केट्स मार्टिन जोल (Martin Zoll) का कहना है कि कई कंपनियों के शेयर आईपीओ प्राइस से नीचे आ गए हैं, जिसके चलते निवेशक सावधानी भी बरतने लगे हैं। बता दें कि जुलाई की शुरुआत से हांगकांग में हुए 10 सबसे बड़े सौदों में से केवल दो ही अपने ऑफर प्राइस से ऊपर हैं। फास्ट-फैशन रिटेलर शेन ग्लोबल होल्डिंग्स (Shein Global Holdings) और चिपमेकर लॉन्गसिस इलेक्ट्रॉनिक्स (chipmaker Longsys Electronics) के शेयर तो पहले ही दिन इश्यू प्राइस के नीचे आ गए।

आगे की बात करें तो आईपीओ और अन्य सौदों की पाइपलाइन काफी बड़ी है। फिलीपींस के सबसे लोकप्रिय मोबाइल पेमेंट ऐप GCash की पैरेंट कंपनी Mynt Inc ने आईपीओ का भाव फिक्स कर दिया है और यह फिलीपींस का सबसे बड़ा आईपीओ बनने वाला है। ऑस्ट्रेलिया भी एआई से जुड़ी इस तेजी का एक हिस्सा बनने वाला है। वहां डेटा सेंटर ऑपरेटर Firmus Grid $5 अरब का IPO देश में अब तक के सबसे बड़े लिस्टिंग में से एक होगा।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

कार, बाइक चलाने वालों को बड़ा झटका, इस कंपनी ने बढ़ाई पेट्रोल और डीजल की कीमतें

कार और बाइक चलाने वाले लोगों को यह खबर झटका देने वाली है। नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा दी हैं। यह वृद्धि तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है। कंपनी ने पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 5 रुपये बढ़ाई है, जबकि डीजल की कीमत प्रति लीटर 3 रुपये बढ़ाई है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताई ऑयल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों और रिटेल कीमतों में बढ़ते फर्क को कम करने के लिए कंपनी ने यह कदम उठाया है।

ब्रेंट क्रूड फिर से लगातार 100 डॉलर से ऊपर 

बीते कुछ हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में फिर से उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर से ऊपर बना हुआ है। इससे पेट्रोल और डीजल अपने पेट्रोल पंप्स से बेचने वाली कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। Nayara Energy देश की सबसे प्राइवेट फ्यूल रिटेलर्स है। देशभर में इसके 7,108 पेट्रोल पंप्स हैं। इस वृद्धि के बारे में ईमेल से पूछ गए सवालों के जवाब कंपनी ने नहीं दिए।

इस साल मार्च में नायरा ने सबसे पहले बढ़ाए थे प्राइस

इस साल फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतों में तेज उछाल आया था। तब सबसे पहले नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई थी। कंपनी ने 26 मार्च को पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर 5 रुपये और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 3 रुपये का इजाफा किया था। इससे इसके आउटलेट्स पर पेट्रोल की कीमत बढ़कर 100.71 रुपये और डीजल की कीमत 91.31 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई थी।

सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने भी बढ़ाए थे प्राइस

नायरा एनर्जी के पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने के बाद सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें मई में बढ़ाना शुरू किया था। मई के आखिर तक पेट्रोल की कीमतें प्रति लीटर 7.5 रुपये तक बढ़ गई थी। चौथी बार ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 25 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई थीं। तब पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 2.61 और डीजल की कीमत प्रति लीटर 2.71 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गई थी।

नायरा ने जुलाई में पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटाई थीं

नायरा एनर्जी ने बाद में पेट्रोल और डीजल की कीमतें घटा दी थी। उसने 1 जलाई को पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 5 रुपये और डीजल की कीमत प्रति लीटर 3 रुपये घटा दी थी। तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में नरमी आई थी। हालांकि, अभी पेट्रोल और डीजल की रिटेल सेल्स में सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का दबदबा है। हालांकि, अभी सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने मई के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई है।

ऑयल कंपनियों को रोजाना हो रहा बड़ा नुकसान 

पिछले महीने रेटिंग एजेंसी इकरा ने बताया था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें बढ़ने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सितंबर में उन्हें पेट्रोल पर प्रति लीटर 8 रुपये और डीजल पर प्रति लीटर 9 रुपये का लॉस हो रहा था। इससे सितंबर में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर उन्हें रोजाना करीब 530 करोड़ रुपये का लॉस हो रहा था।

होर्मुज में जहाज पर मिसाइल हमला, 5 भारतीय सवार थे:सभी सुरक्षित; 8 महीने में इस इलाके में 11 भारतीय नाविकों की जान गई

होर्मुज स्ट्रेट में शुक्रवार को एक जहाज पर मिसाइल हमला हुआ। इस जहाज में 5 भारतीय सवार थे। ओमान में भारतीय दूतावास ने शनिवार को बताया कि पांचों भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया है। ये नाविक कुवैत के झंडे वाले टैंकर एमटी काजिमाह III पर सवार थे। यह कच्चे तेल से भरा था और अफ्रीका की ओर जा रहा था। हालांकि, यह हमला किसने किया, यह अभी जानकारी तक सामने नहीं आई। फरवरी से अब तक होर्मुज में हमलो में 100 से ज्यादा भारतीय नाविक प्रभावित हो चुके हैं। वहीं, इन हमलों में 11 भारतीय नाविकों की जान गई। खाड़ी क्षेत्र में जहाजों पर 4500 भारतीय नाविक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इससे पहले मंगलवार को बताया था कि इस क्षेत्र में चल रहे व्यावसायिक जहाजों पर 4500 से ज्यादा भारतीय नाविक सवार हैं। जायसवाल के मुताबिक, इस समय फारस की खाड़ी में भारत के झंडे वाले 6 कमर्शियल जहाज हैं। इसके अलावा 6 विदेशी झंडे वाले जहाज भी हैं, जो भारत के लिए सामान लेकर जा रहे हैं। इन 12 जहाजों पर करीब 163 भारतीय नाविक सवार हैं। जायसवाल के मुताबिक, भारत का शिपिंग मंत्रालय इन जहाजों की आवाजाही पर नजर रख रहा है। भारतीय दूतावासों और स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर नाविकों की सुरक्षा और उनकी स्थिति की जानकारी ली जा रही है। उन्होंने बताया कि जरूरत पड़ने पर भारतीय दूतावास नाविकों की सुरक्षा और भलाई के लिए जरूरी कदम उठाते हैं। उन्होंने कहा कि विदेशों में काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा और उनकी भलाई भारत की प्राथमिकता है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में नाविकों की सुरक्षा पर चिंता जताई थी विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा की 81वीं बैठक में व्यावसायिक जहाजों और नाविकों पर हमलों को लेकर चिंता जताई थी। जयशंकर ने कहा था, समुद्र में नए खतरे पहले से मौजूद जमीन से जुड़े संकटों को और बढ़ा रहे हैं। भारतीय नाविकों के साथ दूसरे देशों के नाविकों की भी जान गई है। यह पूरी तरह अस्वीकार्य है। जयशंकर ने खाड़ी क्षेत्र में तुरंत तनाव कम करने और संयम बरतने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि इससे आम लोगों के लिए काम कर रहे जहाजों के क्रू की सुरक्षा बनी रहेगी और ऊर्जा की सप्लाई के साथ-साथ दुनिया का व्यापार भी बिना रुकावट चलता रहेगा। ट्रम्प ने ईरान का जंग खत्म करने का प्रस्ताव ठुकराया अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान का युद्ध खत्म करने और होर्मुज खोलने का प्रस्ताव ठुकरा दिया। ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, क्योंकि वह बुरी तरह हार रहा है और उसके पास पैसा नहीं आ रहा। उन्होंने कहा कि ईरान की कमाई होर्मुज से होने वाले कारोबार पर निर्भर है। अमेरिका ने इस समुद्री रास्ते पर सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी नाकेबंदी की है, जो लोहे की दीवार जैसी है। 28 फरवरी से चल रही है अमेरिका-ईरान की लड़ाई अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। अमेरिका का कहना है कि उसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। वहीं ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार है। ———————— यह खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- सऊदी अरब हूती विद्रोहियों पर हमला करेगा सऊदी अरब यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग शुरू करने की तैयारी कर रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी 1 लाख से ज्यादा यमनी सैनिकों को उतार सकता है। पूरी खबर पढ़ें…