‘नाजी जर्मनी जैसा है ईरानी शासन…’, मार्को रुबियो बोले- ‘कट्टरपंथी शिया मौलवियों’ से समझौता बेहद मुश्किल

Marco Rubio On Iran: भारत आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान और उसकी शीर्ष नेतृत्व प्रणाली पर जमकर निशाना साधा है। नेटवर्क18 के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि ईरान के साथ शांति समझौते पर पहुंचना बेहद मुश्किल है, क्योंकि देश की कमान थियोलॉजी यानी धार्मिक नीतियों से संचालित होने वाले ‘कट्टरपंथी शिया मौलवियों’ के हाथों में है।

नाजी U-Boat रणनीति से की तुलना, भारतीय नाविकों की मौतों पर जताई चिंता

मार्को रुबियो ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए ईरान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने ईरान की इन हरकतों की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी की सबमरीन रणनीतियों से की।

रुबियो ने कहा, ‘ईरान खुलेआम कह रहा है कि वे निर्दोष नाविकों को मारने और कमर्शियल जहाजों को डुबोने की कोशिश कर रहे हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ऐसा कभी नहीं देखा गया। पूरी दुनिया को एक साथ आकर इसकी कड़ी निंदा करनी चाहिए।’

उन्होंने बताया कि इन हमलों में कई भारतीय नाविकों ने भी अपनी जान गंवाई है, क्योंकि वैश्विक मर्चेंट नेवी में भारतीय नाविकों की बड़ी संख्या है। वैसे अमेरिकी नौसेना अधिकांश ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर रही है।

‘कट्टरपंथी मौलवियों के हाथ में कमान’, कूटनीति पर संकट

तेहरान के साथ राजनयिक समझौते और भविष्य में सैन्य तनाव की संभावना पर रुबियो ने स्पष्ट किया कि ईरानी नेतृत्व की कट्टरपंथी सोच के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है।

उन्होंने कहा, ‘ईरानी शासन के साथ डील करना बहुत कठिन है। दुर्भाग्य से वे समझौता करना नहीं जानते और वे कट्टरपंथी शिया मौलवियों द्वारा नियंत्रित हैं।’ रुबियो ने स्पष्ट किया कि उनका हमला सामान्य शिया समुदाय पर नहीं, बल्कि शासन चला रहे कट्टरपंथियों पर है।

अमेरिका की ‘इकोनॉमिक एस्फिक्सिया’ नीति जारी रहेगी

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि वाशिंगटन तेहरान पर असाधारण आर्थिक दबाव बनाना जारी रखेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान अपने नागरिकों की भलाई के बजाय मिलने वाले हर डॉलर का उपयोग आतंकवाद को स्पॉन्सर करने, मिसाइलें और ड्रोन बनाने में करता है।

इससे पहले अगस्त में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने ईरान के खिलाफ ‘इकोनॉमिक एस्फिक्सिया’ यानी आर्थिक तौर पर पंगु बनाने की रणनीति का ऐलान किया था, जिसके तहत डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, गोल्ड, एविएशन और शिपिंग सेक्टर्स पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए हैं।

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होर्मुज के पास जहाज पर हमला, 11 भारतीय जख्मी:भारत ने तुरंत हमले रोकने को कहा; पिछले 6 महीने में 100 से ज्यादा भारतीय घायल

भारत ने मंगलवार को ओमान के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पनामा के झंडे वाले व्यापारिक जहाज पर हमले की निंदा की। हमले में 12 क्रू मेंबर घायल हुए, जिनमें 11 भारतीय हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जहाज एमटी ऑन पीस ओमान के तट से गुजर रहा था। इसी दौरान उस पर एक प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। जहाज पर कुल 19 लोग सवार थे। इनमें 17 भारतीय नागरिक थे। ओमानी अधिकारियों की मदद से घायलों को निकालकर ओमान के खासाब में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। भारत ने क्षेत्र में जहाजों पर जारी हमलों पर चिंता जताई। उसने शांति और स्थिरता के लिए ऐसे हमले तुरंत रोकने की मांग की। फरवरी से अब तक होर्मुज में हमलो में 100 से ज्यादा भारतीय नाविक प्रभावित हो चुके हैं। वहीं, इन हमलों में 11 भारतीय नाविकों की जान गई। खाड़ी क्षेत्र में 4,500 से ज्यादा भारतीय नाविक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 29 सितंबर को बताया था कि फारस की खाड़ी और आसपास के इलाके में अलग-अलग कमर्शियल जहाजों पर 4,500 से ज्यादा भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया था कि होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में 6 भारत-झंडे वाले कमर्शियल जहाज मौजूद हैं। इसके अलावा 6 विदेशी झंडे वाले जहाज भी भारत के लिए सामान लेकर चल रहे हैं। इन 12 जहाजों पर करीब 163 भारतीय नाविक सवार हैं। जायसवाल के मुताबिक, भारत का शिपिंग मंत्रालय इन जहाजों की आवाजाही पर नजर रख रहा है। भारतीय दूतावासों और स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर नाविकों की सुरक्षा और उनकी स्थिति की निगरानी की जा रही है। जरूरत पड़ने पर भारतीय मिशन उनकी मदद के लिए जरूरी कदम उठा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र में भी भारत ने उठाया था मुद्दा विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र में कमर्शियल जहाजों और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि होर्मुज स्ट्रेट, रेड सी और ब्लैक सी में जहाजों और नाविकों पर लगातार हमले हो रहे हैं। उन्होंने इन हमलों को पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए कहा था कि ऐसी हिंसा और जान का नुकसान रुकना चाहिए। इसके अगले दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के बयान में भी जयशंकर ने कहा कि समुद्र में बढ़ते नए खतरे पहले से मौजूद जमीनी संकट को और गंभीर बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि खाड़ी और दूसरे समुद्री रास्तों पर हुए हमलों में भारतीय और अन्य देशों के नाविकों की जान गई है। भारत ने तनाव कम करने, संयम बरतने और कमर्शियल जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की अपील की। —————————— यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान का ड्रोन हमलों से बचने के लिए सस्ता तरीका:सेना-पुलिस के ठिकानों पर मछली पकड़ने वाला जाल लगा रहे पाकिस्तान में ड्रोन हमलों से बचने के लिए पुलिस और सेना अब मछली पकड़ने वाले जाल का इस्तेमाल कर रही है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

ड्रोन हमले के बाद तुर्किये का मालवाहक जहाज ब्लैक सी में डूब, 3 भारतीय सहित 11 को सुरक्षित बचाया गया

हाल ही में ब्लैक सी यानी काला सागर में ड्रोन हमले की चपेट में आने से तुर्किये का एक मालवाहक जहाज MV रोयाड मम्मादोव डूब गया। उस पर सवार दो विदेशी नागरिकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य क्रू मेंबर घायल हो गए। इस जहाह पर सवार 3 भारतीयों समेत 11 अन्य लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। बचाए गए भारतीयों में से एक घायल है, जिसका इलाज रोमानिया में किया जा रहा है।

रोमानिया में भारतीय दूतावास ने सोमवार को बताया कि ब्लैक सी में एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला हुआ। इसमें सवार तीन भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं, जिनमें से एक घायल है और उसका रोमानिया में इलाज चल रहा है। MV रोयाड मम्मादोव जहाज पर ब्लैक सी में सफर करते समय हमला हुआ। जिसमें दो विदेशी नागरिकों की मौत हो गई और कई क्रू मेंबर घायल हो गए। भारतीय मिशन के मुताबिक, घायल क्रू मेंबर को इलाज के लिए रोमानिया ले जाया गया।

रोमानिया में भारतीय दूतावास ने X पर एक पोस्ट में कहा, “तीनों भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। हमने उनसे बात की है। उनमें से एक घायल हो गया है और उसका इलाज चल रहा है।”

रोमानिया में भारतीय राजदूत मनोज महापात्रा ने भी कॉन्स्टैंटा काउंटी हॉस्पिटल में तीन भारतीय क्रू मेंबर से बात की, जहां उनका इलाज चल रहा था। दूतावास ने कहा कि राजदूत ने हॉस्पिटल के चीफ फिजिशियन से भी बात की। इंडियन मिशन ने कहा कि वह रोमानियाई अधिकारियों और हॉस्पिटल अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित भारतीय क्रू मेंबर्स को हर मुमकिन मदद दे रहा है।

ड्रोन हमले से जहाज में लगी आग, 2 की मौत

रोमानियाई अधिकारियों ने कहा कि ब्लैक सी में 139 मीटर लंबे जहाज में आग लगने से दो क्रू मेंबर्स की मौत हो गई और 11 अन्य को बचा लिया गया। खबर है कि जहाज में अजरबैजानी और भारतीय नागरिक सवार थे। तुर्किये का मालवाहक जहाज रोमानियाई मछली पकड़ने वाले पोर्ट स्फांटू घोरघे से लगभग 30 नॉटिकल मील दक्षिण में डूब गया। रोमानिया के गृह मंत्रालय ने कहा कि उसके कोस्ट गार्ड बॉर्डर पुलिस को अलर्ट किया गया था कि रोमानिया के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन में मौजूद एक कमर्शियल जहाज में आग लग गई है।

ड्रोन हमले के लिए रूस जिम्मेदार

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने इस घटना के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया, और आरोप लगाया कि रूसी ड्रोन हमला अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में यात्रा कर रहे नागरिक जहाज पर किया गया। जेलेंस्की ने X पर एक पोस्ट में कहा, “न्यूट्रल पानी में मक्का ले जा रहे एक नागरिक जहाज पर दो रूसी ड्रोन ने भयानक हमला किया।” उन्होंने यह भी कहा कि हमले में जहाज का कैप्टन मारा गया।

रूस-यूक्रेन युद्ध से ब्लैक सी में कारोबार पर बढ़ खतरा

इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि रूस-यूक्रन युद्ध से काला सागर से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर खतरा बढ़ गया है। हमले और मिलिट्री ऑपरेशन की वजह से इस इलाके में और उसके आस-पास चलने वाले मर्चेंट जहाजों को बढ़ती सुरक्षा चिंताओं का सामना करना पड़ रहा है।

भारत ने कमर्शियल शिपिंग पर हमलों पर चिंता जताई

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब भारत ने मुख्य समुद्री कॉरिडोर में बढ़ते खतरों के बीच कमर्शियल जहाजों और नाविकों की सुरक्षा पर बार-बार चिंता जताई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पिछले हफ्ते 81वीं यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली में अपने भाषण में खाड़ी, लाल सागर और काला सागर में कमर्शियल शिपिंग और नाविकों पर हमलों पर जोर दिया।

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होर्मुज में जहाज पर मिसाइल हमला, 5 भारतीय सवार थे:सभी सुरक्षित; 8 महीने में इस इलाके में 11 भारतीय नाविकों की जान गई

होर्मुज स्ट्रेट में शुक्रवार को एक जहाज पर मिसाइल हमला हुआ। इस जहाज में 5 भारतीय सवार थे। ओमान में भारतीय दूतावास ने शनिवार को बताया कि पांचों भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया है। ये नाविक कुवैत के झंडे वाले टैंकर एमटी काजिमाह III पर सवार थे। यह कच्चे तेल से भरा था और अफ्रीका की ओर जा रहा था। हालांकि, यह हमला किसने किया, यह अभी जानकारी तक सामने नहीं आई। फरवरी से अब तक होर्मुज में हमलो में 100 से ज्यादा भारतीय नाविक प्रभावित हो चुके हैं। वहीं, इन हमलों में 11 भारतीय नाविकों की जान गई। खाड़ी क्षेत्र में जहाजों पर 4500 भारतीय नाविक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इससे पहले मंगलवार को बताया था कि इस क्षेत्र में चल रहे व्यावसायिक जहाजों पर 4500 से ज्यादा भारतीय नाविक सवार हैं। जायसवाल के मुताबिक, इस समय फारस की खाड़ी में भारत के झंडे वाले 6 कमर्शियल जहाज हैं। इसके अलावा 6 विदेशी झंडे वाले जहाज भी हैं, जो भारत के लिए सामान लेकर जा रहे हैं। इन 12 जहाजों पर करीब 163 भारतीय नाविक सवार हैं। जायसवाल के मुताबिक, भारत का शिपिंग मंत्रालय इन जहाजों की आवाजाही पर नजर रख रहा है। भारतीय दूतावासों और स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर नाविकों की सुरक्षा और उनकी स्थिति की जानकारी ली जा रही है। उन्होंने बताया कि जरूरत पड़ने पर भारतीय दूतावास नाविकों की सुरक्षा और भलाई के लिए जरूरी कदम उठाते हैं। उन्होंने कहा कि विदेशों में काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा और उनकी भलाई भारत की प्राथमिकता है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में नाविकों की सुरक्षा पर चिंता जताई थी विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा की 81वीं बैठक में व्यावसायिक जहाजों और नाविकों पर हमलों को लेकर चिंता जताई थी। जयशंकर ने कहा था, समुद्र में नए खतरे पहले से मौजूद जमीन से जुड़े संकटों को और बढ़ा रहे हैं। भारतीय नाविकों के साथ दूसरे देशों के नाविकों की भी जान गई है। यह पूरी तरह अस्वीकार्य है। जयशंकर ने खाड़ी क्षेत्र में तुरंत तनाव कम करने और संयम बरतने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि इससे आम लोगों के लिए काम कर रहे जहाजों के क्रू की सुरक्षा बनी रहेगी और ऊर्जा की सप्लाई के साथ-साथ दुनिया का व्यापार भी बिना रुकावट चलता रहेगा। ट्रम्प ने ईरान का जंग खत्म करने का प्रस्ताव ठुकराया अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान का युद्ध खत्म करने और होर्मुज खोलने का प्रस्ताव ठुकरा दिया। ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, क्योंकि वह बुरी तरह हार रहा है और उसके पास पैसा नहीं आ रहा। उन्होंने कहा कि ईरान की कमाई होर्मुज से होने वाले कारोबार पर निर्भर है। अमेरिका ने इस समुद्री रास्ते पर सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी नाकेबंदी की है, जो लोहे की दीवार जैसी है। 28 फरवरी से चल रही है अमेरिका-ईरान की लड़ाई अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। अमेरिका का कहना है कि उसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। वहीं ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार है। ———————— यह खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- सऊदी अरब हूती विद्रोहियों पर हमला करेगा सऊदी अरब यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग शुरू करने की तैयारी कर रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी 1 लाख से ज्यादा यमनी सैनिकों को उतार सकता है। पूरी खबर पढ़ें…

‘आतंकवाद का सीरियल प्रैक्टिशनर है पाकिस्तान’; UNGA में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शहबाज शरीफ को जमकर धोया

India-Pakistan Dispute: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार (26 सितंबर) को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए पाकिस्तान पर जमकर तीखा हमला बोला। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना उसे ‘आतंकवाद का सीरियल प्रैक्टिशनर’ करार दिया। जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को सामान्य बनाने या उसके लिए किसी तरह की छूट मांगने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद लंबे समय से वैश्विक शांति के लिए खतरा बना हुआ है। उन्होंने विशेष रूप से राज्य प्रायोजित आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती बताया।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में विश्व नेताओं से कहा, “ऐसी गतिविधियों में शामिल सरकारों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। आतंकवाद के प्रति हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति में किसी तरह की ढील नहीं होनी चाहिए। खास तौर पर आतंकवाद के वित्तीय पहलुओं को उजागर किया जाना चाहिए और उनका मुकाबला किया जाना चाहिए।”

शहबाज पर जयशंकर का सीधा निशाना

पाकिस्तान का नाम लिए बिना जयशंकर ने कहा, “कल आतंकवाद का एक सीरियल प्रैक्टिशनर इस महासभा के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर रहा था। आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके परिणामों से बचने के लिए तर्क दिए गए। ऐसा नहीं चल सकता।”

विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत को आतंकवादी हमलों से अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है। वह इसका इस्तेमाल करेगा। उन्होंने कहा कि दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ सह-अस्तित्व में नहीं रह सकते। जयशंकर ने कहा, “आतंकवाद को अंजाम देने वाले को ही अपना रास्ता सुधारना होगा।”

पाक PM के नापाक बयान के बाद आया पलटवार

जयशंकर की यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के शुक्रवार को UNGA में दिए भाषण के एक दिन बाद आई। शरीफ ने अपने संबोधन में सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, बाधित करने या मोड़ने की किसी भी कोशिश को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। शहबाज शरीफ ने UNGA में एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा भी उठाया।

भारत ने ‘राइट टू रिप्लाई’ में भी दिया जवाब

भारत की ओर से राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत ने शरीफ के बयानों को अजीब करार दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा का ध्यान पाकिस्तान पर लगे उन आरोपों की ओर दिलाया, जिनमें उस पर हाई-प्रोफाइल आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगाया जाता रहा है।

गहलोत ने विशेष रूप से 9/11 हमलों के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन का जिक्र किया और कहा कि वह पाकिस्तान में रह रहा था। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच केंद्रीय मुद्दा पाकिस्तान की सीमा पार आतंकवाद की लंबे समय से चली आ रही नीति है। गहलोत ने कहा कि भारत ने पिछले वर्ष यह स्पष्ट कर दिया था कि आतंकवादियों के लिए न तो कोई सुरक्षित ठिकाना होगा और न ही छिपने की कोई जगह।

‘अंतहीन युद्ध का अब अंत होना चाहिए’

भारत ने खाड़ी क्षेत्र में अशांति पर चिंता जताने के साथ यूक्रेन में संघर्ष को भी समान रूप से चिंताजनक बताते हुए कहा कि अंतहीन युद्ध का अब अंत होना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र की आम चर्चा को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “इस साल हम खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष देख रहे हैं, जिससे पहले से ही मुश्किल हालात और बिगड़ रहे हैं। जारी तनाव को लेकर हम बेहद चिंतित हैं।” उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों और नाविकों को निशाना बनाए जाने को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया।

जयशंकर ने कहा, “भारत सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऊर्जा तथा व्यापार के निर्बाध प्रवाह को बनाए रखने का आह्वान करता है।” उन्होंने कहा कि यूक्रेन में संघर्ष समान रूप से चिंताजनक है। जयशंकर ने अगस्त में बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा, “अंतहीन युद्ध का अब अंत होना चाहिए।”

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उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी हिंसा पर भी चिंता जताई। जयशंकर ने इजराइल-फलस्तीन संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा, “पश्चिम एशिया या मध्य पूर्व में भी तनाव और हिंसा दुर्भाग्य से जारी है। हमारा दृढ़ विश्वास है कि स्थायी और दीर्घकालिक शांति के लिए दो-राष्ट्र समाधान जरूरी है।” जयशंकर ने कहा, “इस बीच, भारत फलस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता और राहत प्रयासों में योगदान दे रहा है।”

ओमान के पास जहाज पर हमला, 14 भारतीय सवार थे:13 का रेस्क्यू हुआ, एक लापता; भारत ने हमले की निंदा की

ओमान के तट के पास रविवार को कमर्शियल जहाज एमटी एल गाइया पर हमला हुआ। जहाज पर 14 भारतीय सवार थे। विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि 13 भारतीय क्रू सदस्यों को बचा लिया गया है। एक भारतीय अब भी लापता है और उसकी तलाश जारी है। विदेश मंत्रालय ने हमले की निंदा की। मंत्रालय ने कहा कि लापता भारतीय की तलाश के लिए बचाव अभियान चल रहा है। मंत्रालय के मुताबिक, ओमान में भारतीय दूतावास स्थिति पर नजर रख रहा है। दूतावास ओमानी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। हालांकि, अभी तक हमले की जिम्मेदारी अमेरिका या ईरानी सेना ने नहीं ली है। होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी जहाज भी हमले की चपेट में भारत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब रविवार सुबह ईरान के केश्म द्वीप के पास एक ईरानी कार्गो जहाज पर भी हमला होने की खबर सामने आई। यह इलाका होर्मुज स्ट्रेट में आता है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस हमले में एक शख्स की मौत हुई और चार लोग घायल हुए। हमले के बाद जहाज में आग लग गई थी और लोगों को बाहर निकालने का ऑपरेशन शुरू किया गया था। केश्म के गवर्नर हुसैन अमीरतेइमूरी ने तस्नीम से कहा कि जहाज पर हमला एक प्रोजेक्टाइल से किया गया था। उन्होंने इसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार बताया। इस हमले से कुछ घंटे पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने सोशल मीडिया पर कहा था कि ईरान के लोगों को दबाव डालकर झुकाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, ‘ईरान सरेंडर नहीं करेगा।’ रिपोर्ट- होर्मुज में नए रास्ते पर ईरान-ओमान में समझौता हुआ ईरान और ओमान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को लेकर एक समझौता किया है। ईरान की न्यूज एजेंसी तस्नीम ने ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया कि दोनों देशों ने होर्मुज से जहाजों के आने-जाने के रास्ते की जानकारी तय कर ली है। सोमवार को ओमान की राजधानी मस्कट में होने वाली क्षेत्रीय बैठक में खाड़ी देशों को इस समझौते की जानकारी दी जाएगी। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने बताया कि क्षेत्र के अरब देशों के विदेश मंत्री ओमान में बैठक करेंगे। इसमें होर्मुज के रास्ते को लेकर सहमति बनाई जाएगी। इसके बाद इस व्यवस्था की जानकारी अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन को दी जाएगी। नया रास्ता पूरी तरह ईरान के इलाके में नए समझौते के तहत खाड़ी देशों से होर्मुज में प्रवेश करने वाला रास्ता पूरी तरह ईरान के क्षेत्रीय जल में होगा। बाहर निकलने वाले रास्ते का एक हिस्सा भी ईरान के क्षेत्रीय जल में रहेगा। तस्नीम ने ईरानी सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। व्यवस्था पर सहमति बनने के बाद होर्मुज का दक्षिणी रास्ता सीधे बंद कर दिया जाएगा। यह अमेरिका की मांग के खिलाफ है। जंग के बाद अब तक दो रास्तों में बंटा होर्मुज जंग शुरू होने से पहले होर्मुज को एक ही समुद्री रास्ता माना जाता था। जहाज तय रास्ते से गुजरते थे। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद अभी तक यह अहम समुद्री मार्ग दो अलग रास्तों में बंट गया। ईरानी रास्ता: यह होर्मुज के उत्तरी हिस्से में ईरान के तट के पास है। यह लारक और किश्म द्वीपों के करीब से गुजरता है और ईरान के बंदरगाहों और तेल टर्मिनलों तक जाता है। ओमानी रास्ता: यह होर्मुज के दक्षिणी हिस्से में ओमान के करीब है और ईरान के तट से दूर है। अमेरिका इसी रास्ते से जहाजों को गुजरने पर जोर देता है। अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा में चलने वाले कई कॉमर्शियल जहाज भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। ——————- यह खबर भी पढ़ें… होर्मुज के बाद अब दूसरे तेल रूट पर संकट: अल मंदेब पर हूती विद्रोहियों का कब्जा; कहा- सऊदी अरब के अलावा किसी का जहाज नहीं रोकेंगे होर्मुज स्ट्रेट के बाद अब एक और समुद्री ऑयल रूट बाब अल-मंदेब स्ट्रेट संकट में है। यमन के हूती विद्रोहियों ने यहां कब्जे का एलान किया है। पूरी खबर पढ़ें…

Iran-America War Update: अमेरिका-ईरान की जंग ने लिया खतरनाक मोड़! ईरानी सेना ने बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिकी युद्धपोतों को बनाया निशाना

Iran-America War Update: ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध एक बार फिर बेहद गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। ईरान ने दावा किया है कि उसकी सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और अमेरिकी नौसेना के डिस्ट्रॉयर पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी है। इस खतरनाख हमले से ईरान के आसपास के समुद्री इलाकों में तेहरान और वाशिंगटन के बीच तनाव और बढ़ गया है। ‘अल जजीरा’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, IRGC ने कहा कि दो अमेरिकी युद्धपोतों को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वे ईरानी जहाजों को परेशान कर रहे थे। ईरानी नौसैनिक नाकेबंदी में शामिल थे।

ईरानी सेना ने दावा किया कि मिसाइल हमले से जहाजों को नुकसान पहुंचा और उसके बाद दोनों युद्धपोत उस इलाके से चले गए। ‘अल जजीरा’ के हवाले से तस्नीम न्यूज एजेंसी ने IRGC के दावे की रिपोर्ट दी कि दोनों जहाज नुकसान पहुंचने और आगे के हमलों के डर से संघर्ष वाले इलाके से भागने को मजबूर हुए। ईरान का यह दावा उस समय आया है जब इस इलाके में सैन्य और कमर्शियल जहाजों के बीच हमलों का दौर चल रहा है, जो ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिकी हमलों के बाद शुरू हुआ।

IRGC ने और कड़े हमले की चेतावनी दी

IRGC ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर की पहले की चेतावनी का भी जिक्र किया, जिन्होंने कहा था, “अगर आप हमारे दो जहाजों पर गोली चलाते हैं, तो हम और भी भारी आर्थिक कीमत वसूलेंगे। आपके तीन जहाजों को नष्ट कर देंगे।” IRGC ने इस बयान का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि अगर ईरानी शिपिंग के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो इसका और भी जोरदार जवाब दिया जा सकता है।

अल जजीरा की रिपोर्ट मुताबिक, IRGC ने कहा, “अगर अमेरिका अपनी दुश्मनी भरी और आक्रामक कार्रवाई जारी रखता है, तो अमेरिकी सरकार को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सशस्त्र सेनाओं से कड़े जवाब की उम्मीद करनी चाहिए। हम पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हैं।”

अमेरिका का पलटवार

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका की सेना ने ईरान के तीन तेल टैंकरों को निशाना बनाकर उन्हें नष्ट कर दिया है। जारी किए गए वीडियो में अमेरिकी लड़ाकू विमान ईरानी टैंकर KYLO पर अटैक कर रहे हैं। इसके बाद टैंकर में भीषण आग और भारी क्षति होती दिखती है। रविवार सुबह US सेंट्रल कमांड ने एक वीडियो जारी किया जिसमें अमेरिकी सेना ओमान की खाड़ी में ईरान के एक ऑयल टैंकर को डुबोती हुई दिखाई दे रही है।

यह दशकों में ईरान के पेट्रोलियम इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ की गई सबसे अहम सैन्य कार्रवाइयों में से एक है। US सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की कि कोमोरोस के झंडे वाले M/T काइलो (जिसे नॉक्सन के नाम से भी जाना जाता है) को तब नष्ट कर दिया गया, जब उसके क्रू ने जहाज को छोड़ दिया था।

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने जहाजों को निशाना बनाया

ईरान के ये ताजा दावे तीन ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिकी हमलों के बाद आए हैं। अमेरिकी सेना ने कहा कि अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमले के बाद उसकी सेना ने उन जहाजों पर हमला किया। न्यूज एजेंसी ‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने बाद में कहा कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले तीन टैंकरों को निशाना बनाया, जिन्हें उसने अनधिकृत रास्तों पर चलने वाला बताया था।

साथ ही तीन अन्य जहाजों को भी निशाना बनाया जिनके बारे में उसने आरोप लगाया कि वे अमेरिका से जुड़े थे। ईरानी सेना ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर वाशिंगटन ईरानी शिपिंग में दखल देना जारी रखता है, तो अमेरिकी सैन्य जहाजों पर हमले और भी गंभीर हो जाएंगे।

अमेरिका का कहना है कि जहाज ईरानी हमलों से बच निकले

वहीं, अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि इलाके में काम करते समय एक अमेरिका का एयरक्राफ्ट कैरियर और डिस्ट्रॉयर ईरान के कई हमलों से बच निकले। ‘एसोसिएटेड प्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इस झड़प में कोई भी अमेरिकी कर्मी घायल नहीं हुआ। इसके बाद अमेरिका ने कहा कि ईरान के तीन तेल टैंकरों को बेकार या नष्ट कर दिया गया है। एडमिरल कूपर ने चेतावनी दी कि वॉशिंगटन अमेरिकी सेना की रक्षा करेगा और जरूरत पड़ने पर ईरान के खुले में मौजूद तेल टैंकरों को निशाना बनाएगा।

पीएम मोदी ने की युद्ध खत्म करने की अपील

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले सप्ताह ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से कहा कि भारत पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन करता है। उन्होंने क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता और नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के महत्व पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन से इतर पेजेश्कियान के साथ बैठक की। फरवरी में ईरान-अमेरिका संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली द्विपक्षीय वार्ता थी।

बैठक में PM मोदी ने ईरानी नेता से यह भी कहा कि भारत आने वाले समय में ईरान के साथ व्यापार के दायरे को बढ़ाना और उसमें विविधता लाना चाहता है। पेजेश्कियान ने पीएम मोदी से आग्रह किया कि वह अलग-अलग पक्षों के साथ भारत के व्यापक संपर्कों का इस्तेमाल करके उन्हें युद्ध और खून-खराबे के रास्ते से हटाकर बातचीत और समझौते के रास्ते पर लौटने में मदद करें।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के संघर्ष पर चर्चा की और उभरती स्थिति पर अपने विचार साझा किए। मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई और भारत के इस रुख को दोहराया कि सभी मुद्दों को बातचीत और कूटनीति के ज़रिये सुलझाया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए लगातार कोशिशें जारी रखने की जरूरत पर भी ज़ोर दिया। एक बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स और एससीओ जैसे बहुपक्षीय संगठनों में ईरान के साथ मिलकर काम करने के भारत के इरादे को दोहराते हुए कहा कि उन्हें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति पेजेश्कियान का भारत में स्वागत करने का इंतजार है।

ईरान में शादी वाले घर पर अमेरिकी मिसाइल का कहर! बच्चे समेत 5 की मौत; तेहरान का जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में US ठिकानों पर जवाबी हमला

US-Iran War Update: ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान एक दर्दनाक घटना सामने आई है। दक्षिणी ईरान में एक ऐसे रिहायशी मकान को मिसाइल हमले से नुकसान पहुंचा, जहां शादी का समारोह चल रहा था। अमेरिकी सेना के हमले में एक बच्चे समेत कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई। जबकि 50 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। वहीं, तेहरान ने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में मौजूद US ठिकानों पर जवाबी हमला किया है।

ईरानी रेड क्रिसेंट के मुताबिक, यह हमला होर्मोजगान प्रांत के सिरिक काउंटी के कुहेस्तक शहर में हुआ। जिस घर को हमले के दौरान नुकसान पहुंचा, वहां शादी का जश्न मनाया जा रहा था। रेड क्रिसेंट ने बताया कि अमेरिकी मिसाइल हमले के बाद मिसाइल के छर्रे रिहायशी मकान तक पहुंचे, जिससे वहां मौजूद लोग इसकी चपेट में आ गए।

रेड क्रिसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि हमले में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। शुरुआती जानकारी में एक छोटे बच्चे समेत चार लोगों की मौत की बात कही गई थी। जबकि बाद की रिपोर्टों में मृतकों की संख्या बढ़कर 5 बताई गई। घायलों की संख्या 50 से ज्यादा है।

मलबे में तब्दील हुआ घर, चीख-पुकार का वीडियो सामने आया

ईरानी सरकारी मीडिया ने हमले के बाद का कथित वीडियो भी जारी किया है। फुटेज में घटनास्थल पर भारी मलबा और मकान को हुआ नुकसान दिखाई देता है। वीडियो में आसपास मौजूद लोगों की चीख-पुकार भी सुनाई देती है। हालांकि, वीडियो और मृतकों तथा घायलों से जुड़े आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

ईरान का पलटवार, जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में अमेरिका के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले

इस बीच, ईरान ने अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। ईरान ने बुधवार तड़के जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य हितों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए। ये हमले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी के कुछ ही समय बाद हुए, जिसमें उन्होंने ईरान को अमेरिका के खिलाफ किसी भी हमले की स्थिति में और ज्यादा कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी थी।

ईरानी हमले ऐसे समय हुए जब अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में हमलों की एक नई लहर शुरू की थी। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों में ईरानी सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। वॉशिंगटन के मुताबिक, यह कार्रवाई हाल में होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों और अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ कथित हमले के प्रयासों के जवाब में की गई।

जॉर्डन में 10 मिसाइलों को मार गिराने का दावा

जॉर्डन में ईरानी IRGC ने एक अमेरिकी मरीन कॉर्प्स बेस पर बड़े पैमाने पर बैलिस्टिक मिसाइल हमला करने का दावा किया। ईरानी मीडिया ने इस सैन्य ठिकाने की पहचान कैंप टिटिन के तौर पर की है, जो अकाबा की खाड़ी के पास स्थित बताया गया है। ईरानी न्यूज एजेंसी ‘तस्नीम’ ने दावा किया कि हमले में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाया गया। जवाबी हमले में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की बात कही। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, जॉर्डन की ओर से 10 ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट किए जाने की जानकारी सामने आई है।

हमले से बढ़ता तनाव, खाड़ी क्षेत्र पर मंडरा रहा खतरा

अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। एक तरफ अमेरिकी सेना ईरान के सैन्य और IRGC से जुड़े ठिकानों पर हमले कर रही है। वहींं ईरान जवाब में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी वाले देशों और ठिकानों को निशाना बना रहा है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां सैन्य तनाव बढ़ने का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

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अमेरिका का ईरान पर नया हमला:चाबहार, बंदर अब्बास और केश्म द्वीप को निशाना बनाया; US बोला- हमारे सैनिकों को निशाना बनाने के बदले किया

ईरानी मीडिया ने मंगलवार को बताया कि दक्षिणी ईरान में सोमवार को कई जगह धमाकों की खबर है। इनमें रणनीतिक बंदरगाह शहर बंदर अब्बास, चाबहार और केश्म द्वीप शामिल हैं। धमाकों को लेकर ईरान की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इन घटनाओं में किसी के हताहत होने या नुकसान की भी पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिका ने कहा कि ये हमले होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर IRGC के हालिया हमलों की कोशिशों और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की घटनाओं के बाद किए गए हैं। खबर लगातार अपडेट हो रही है….