Asian Paints Dividend: एशियन पेंट्स की डिविडेंड देने की तैयारी! 29 अक्टूबर की बोर्ड मीटिंग में होगा फैसला, रिकॉर्ड डेट का ऐलान

Asian Paints Dividend: पेंट कंपनी एशियन पेंट्स के शेयरधारकों को जल्द डिविडेंड का तोहफा मिल सकता है। कंपनी 29 अक्टूबर को होने वाली बोर्ड मीटिंग में अंतरिम डिविडेंड पर फैसला करेगी।

अगर डिविडेंड का ऐलान होता है, तो इसके लिए 4 नवंबर को रिकॉर्ड डेट तय की गई है। यानी इस तारीख को कंपनी के रिकॉर्ड में जिन निवेशकों के नाम होंगे, वे डिविडेंड के लिए पात्र होंगे।

29 अक्टूबर को आएंगे नतीजे

डिविडेंड के साथ कंपनी के तिमाही नतीजों पर भी बोर्ड चर्चा करेगा। 30 सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही और छमाही के वित्तीय नतीजे बैठक में रखे जाएंगे। कंपनी स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड दोनों नतीजों पर विचार करेगी।

FY27 में 8-10% ग्रोथ की उम्मीद

Asian Paints को FY27 में मांग मजबूत रहने की उम्मीद है। कंपनी ने वॉल्यूम ग्रोथ 8-10% रहने का अनुमान दिया है। वहीं, मार्जिन 18-20% के बीच रहने की उम्मीद है। कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनी को कारोबार में मजबूती की उम्मीद है।

कंपनी के MD और CEO अमित सिंघल के मुताबिक, ग्रामीण मांग से कारोबार को सपोर्ट मिल रहा है। इंडस्ट्रियल कारोबार और सरकार की निर्माण गतिविधियों से भी मांग बढ़ रही है।

पहली तिमाही में मुनाफा 40% बढ़ा

Asian Paints का Q1 FY27 में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 39.6% बढ़कर 1,559 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल इसी तिमाही में मुनाफा 1,117 करोड़ रुपये था। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू 18% बढ़कर 10,542 करोड़ रुपये रहा। EBITDA भी 33.5% बढ़कर 2,169 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन भी सुधरा है। यह 18.2% से बढ़कर 20.6% हो गया।

6 अक्टूबर को Asian Paints का शेयर 1.94% बढ़कर 2,411.90 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 10.42% चढ़ा है।

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Infosys Share Price: इंट्राडे में छह साल के निचले स्तर पर आया इंफोसिस, अब खरीदें या बेचने में भलाई?

Infosys Share Price: आईटी कंपनी Infosys के शेयर मंगलवार को NSE पर छह साल के निचले स्तर ₹980.40 तक पहुंच गए। हालांकि, बाद में शेयर में रिकवरी आई और यह ₹1,015.40 पर बंद हुआ। दिन में शेयर 1.2% चढ़ा।

Nifty IT के शेयरों में Infosys ही बढ़त के साथ बंद हुआ। दूसरी ओर, Nifty IT इंडेक्स 1.5% गिर गया। LTIMindtree और Mphasis में 4% तक की गिरावट रही।

चार्ट पर डाउनट्रेंड साफ

Share.Market by PhonePe के मार्केट एनालिस्ट मयंक जैन के मुताबिक इंफोसिस के डेली चार्ट पर डाउनट्रेंड साफ दिख रहा है। शेयर लगातार निचले हाई और निचले लो बना रहा है।

20-डे, 50-डे और 200-डे जैसे प्रमुख मूविंग एवरेज भी नीचे जा रहे हैं। इससे शेयर पर दबाव बना हुआ है। शॉर्ट टर्म मूविंग एवरेज फिलहाल रेजिस्टेंस की तरह काम कर रहा है।

₹980-1,000 का सपोर्ट अहम

मयंक जैन का कहना है कि इंफोसिस अभी ₹980-1,000 के अहम सपोर्ट जोन के आसपास है। मौजूदा स्तर से शेयर में कुछ समय के लिए रिकवरी हो सकती है।

अगर सपोर्ट से खरीदारी आती है तो शेयर ₹1,100-1,150 तक जा सकता है। हालांकि, यह सिर्फ शॉर्ट टर्म राहत वाली तेजी हो सकती है।

अगर शेयर भारी वॉल्यूम के साथ ₹980 के नीचे बंद होता है तो बिकवाली और बढ़ सकती है। ऐसे में आगे और कमजोरी देखने को मिल सकती है।

₹1,180-1,200 पर बड़ी चुनौती

जैन के मुताबिक, ऊपर की तरफ ₹1,180-1,200 का जोन अहम रेजिस्टेंस है। यह शेयर के पिछले ब्रेकडाउन का स्तर है। यहां पहुंचने पर बिकवाली का दबाव आ सकता है।

उनका कहना है कि इंफोसिस में मजबूत तेजी का ट्रेंड तभी बन सकता है जब शेयर ₹1,200 के ऊपर टिके। इसके साथ 200-डे मूविंग एवरेज के ऊपर जाना भी जरूरी होगा।

फंडामेंटल पर भी दबाव

129 Wealth & Research के फंड मैनेजर और एनालिस्ट प्रसेनजित पॉल के मुताबिक कंपनी AI, टैलेंट और प्लेटफॉर्म में निवेश बढ़ा रही है। Q1 FY27 में कंपनी का मार्जिन 21.1% था।

हालांकि, इन निवेशों का असर आने वाले समय में ग्रोथ और मार्जिन पर पड़ सकता है। पॉल का कहना है कि फंडामेंटल आउटलुक अभी सकारात्मक नहीं है। टेक्निकल चार्ट भी कमजोरी दिखा रहा है।

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Patanjali Foods share Price : स्टॉक में रैली जारी, चार कारोबारी सत्रों में करीब 15% भागा शेयर, जानिए मैनेजमेंट की राय

Patanjali Foods Share Price : सोमवार, 21 सितंबर को भी पतंजलि फूड्स के शेयरों की हालिया तेजी जारी है। आज इसमें 6 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली है। कंपनी के मैनेजमेंट ने FY27 में ग्रोथ की संभावनाओं (खासकर FMCG और खाने के तेल के सेक्टर में) को लेकर उम्मीद जताई है और साथ ही मजबूत फ्री कैश फ्लो का अनुमान भी लगाया है। शुरूआती कारोबार में यह शेयर 6.5 प्रतिशत बढ़कर 390.75 रुपये पर पहुंच गया। जिससे पिछले चार सेशन में इसकी कुल बढ़त लगभग 15 प्रतिशत हो गई है। इस रिकवरी के बावजूद,पतंजलि फूड्स में 2026 में अब तक लगभग 30 प्रतिशत की गिरावट आई है,जबकि निफ्टी 50 में इसी अवधि में 10.7 प्रतिशत की गिरावट आई है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग 42,300 करोड़ रुपये है।

FY27 में FMCG बिज़नेस में 18-20% ग्रोथ की उम्मीद

पतंजलि फूड्स के CEO संजीव अस्थाना ने CNBC-TV18 के साथ हुई बातचीत में कहा कि कंपनी को उम्मीद है कि FY27 में उसका FMCG बिजनेस 18-20 प्रतिशत बढ़ेगा,जबकि फूड्स बिजनेस के 8-10 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। खाने के तेल के बिजनेस में 4 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की उम्मीद है। अस्थाना ने कहा कि कंपनी को FY27 के अपने लक्ष्य पूरे करने का भरोसा है और उम्मीद है कि इस अवधि में कंपनी 700-800 करोड़ रुपये का फ्री कैश फ्लो जेनरेट करेगी।

कंज्यूमर डिमांड को लेकर मैनेजमेंट की राय मिलीजुली

कंज्यूमर डिमांड को लेकर मैनेजमेंट की राय मिली-जुली है। अस्थाना ने कहा कि शहरी इलाकों में डिमांड मजबूत बनी हुई है और फेस्टिव सीज़न के अच्छे रहने की उम्मीद है। लेकिन खराब मॉनसून की वजह से कंपनी ग्रामीण इलाकों में डिमांड को लेकर उतने उत्साहित नहीं है। खाने के तेल की सप्लाई की स्थिति भी एक चिंता का विषय है। अस्थाना के मुताबिक,भारत में सूरजमुखी तेल का 90 फीसदी से ज्यादा इंपोर्ट अभी अटका हुआ है,जिससे सप्लाई एक बड़ी समस्या बन गई है।

अस्थाना ने यह भी कहा कि कंपनी के फ़ूड बिजनेस से जुड़ा कोई रेगुलेटरी मुद्दा नहीं है और प्रमोटरों की 38 प्रतिशत हिस्सेदारी के बदले कोई लोन नहीं लिया गया है।

जून तिमाही में शानदार प्रदर्शन

जून तिमाही में शानदार प्रदर्शन के बाद मैनेजमेंट ने नया आउटलुक जारी किया है। Q1 FY27 में पतंजलि फूड्स का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 86% बढ़कर 335.7 करोड़ रुपये हो गया,जबकि कंपनी की कामकाजी आय 29% बढ़कर 11,337.5 करोड़ रुपये रही। EBITDA 69% बढ़कर 543.3 करोड़ रुपये हो गया और EBITDA मार्जिन एक साल पहले के 3.7% से बढ़कर 4.8% पर रह। जून तिमाही कंपनी की लगातार चौथी तिमाही थी जिसमें रिकॉर्ड रेवेन्यू दर्ज किया गया।

कानूनी राहत मिलने से भी आया जोश

हाल ही में स्टॉक में आई तेजी के साथ-साथ पतंजलि ग्रुप को कानूनी राहत भी मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद से जुड़े इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल के सात आदेशों को रद्द कर दिया है और प्रक्रिया में पाई गई कमियों और ट्रिब्यूनल द्वारा मामलों को संभालने के तरीके की आलोचना की है।

 

 

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Manika Plastech IPO: 26% लिस्टिंग गेन का इशारा! 4x से ज्यादा हुआ सब्सक्राइब, बोली लगाए या नहीं? जानें

Manika Plastech IPO: प्लास्टिक पैकेजिंग प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनी मानिका प्लास्टेक के ₹125.50 करोड़ के आईपीओ में दांव लगाने का आज दूसरा दिन है। शेयर बाजार में इस आईपीओ को लेकर निवेशकों की तरफ से काफी अच्छा रिस्पांस देखने को मिल रहा है।

सोमवार, 15 सितंबर सुबह 11 बजे तक यह आईपीओ कुल मिलाकर 3.8 गुना सब्सक्राइब हो चुका था। वहीं, अनौपचारिक ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयर मजबूत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं, जो पहले ही दिन निवेशकों को शानदार लिस्टिंग गेन मिलने का इशारा कर रहे हैं।

सब्सक्रिप्शन को लेकर रिटेल और NII निवेशकों में ज्यादा उत्साह

11 सितंबर को खुले इस आईपीओ को पहले ही दिन निवेशकों ने हाथों-हाथ लिया और यह 1.42 गुना सब्सक्राइब होकर पूरी तरह भर गया था। दूसरे दिन सुबह 11 बजे तक के आंकड़े इस प्रकार हैं:

रिटेल निवेशक (RIIs): 5.45 गुना सब्सक्रिप्शन

गैर-संस्थागत निवेशक (NIIs): 4.37 गुना सब्सक्रिप्शन

संस्थागत निवेशक (QIBs): 35% (0.35 गुना) सब्सक्रिप्शन

वैसे अमूमन बड़े संस्थागत निवेशक (QIBs) आईपीओ के आखिरी दिन ही अपनी बोलियां लगाते हैं, इसलिए आने वाले समय में इसके आंकड़े और ऊपर जा सकते हैं।

कंपनी क्या करती है और पैसों का क्या करेगी?

मुंबई बेस्ड यह कंपनी प्रिसिजन-इंजीनियर रिजिड पॉलिमर्स बनाती है। यह बैटरियों के प्लास्टिक केसिंग, बाल्टियां और पतली दीवारों वाले कंटेनर बनाती है, जिसका इस्तेमाल ऑटोमोटिव, पेंट्स, एग्रोकेमिकल्स, कंस्ट्रक्शन और फूड-डेयरी इंडस्ट्रीज में होता है।कंपनी के देशभर में 7 मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 29,200 MTPA है।

आईपीओ के फ्रेश इश्यू से मिलने वाले पैसों में से ₹54.9 करोड़ का इस्तेमाल नए प्लांट व मशीनरी खरीदने में किया जाएगा, जबकि ₹15 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में होगा।

कैसी है कंपनी की वित्तीय सेहत?

जून 2026 को समाप्त हुई तिमाही (Q1 FY27) में कंपनी ने ₹162.4 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जिस पर उसे ₹13 करोड़ का शुद्ध मुनाफा हुआ। आपको बता दें कि आम लोगों के लिए आईपीओ खुलने से ठीक पहले, 10 सितंबर को कंपनी ने ट्रस्ट म्यूचुअल फंड समेत 4 एंकर निवेशकों से ₹37.6 करोड़ जुटा लिए थे।

लिस्टिंग पर कितना हो सकता है मुनाफा?

ग्रे मार्केट गतिविधियों पर नजर रखने वाली वेबसाइटों के मुताबिक, मानिका प्लास्टेक के शेयर 16% से लेकर 26% तक के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। ‘IPO Watch’ के अनुसार, इसका जीएमपी लगभग 25.58% के प्रीमियम को दर्शा रहा है। वहीं ‘Investorgain’ के मुताबिक, इसका जीएमपी ₹7 चल रहा है, जो करीब 16.28% के लिस्टिंग गेन का संकेत देता है। अगर यही रुझान बना रहता है, तो 21 सितंबर को बाजारों में इसके शेयरों की एंट्री के साथ निवेशकों को पहले ही दिन 26% तक का तगड़ा मुनाफा हो सकता है।

क्या है एक्सपर्ट की राय?

स्मॉल और मिड-कैप पैकेजिंग सेगमेंट में मानिका प्लास्टेक का ट्रैक रिकॉर्ड और वित्तीय नतीजे मजबूत नजर आ रहे हैं। अगर आप लिस्टिंग गेन के साथ-साथ पैकेजिंग सेक्टर की ग्रोथ में लंबी अवधि के लिए दांव लगाना चाहते हैं, तो यह आईपीओ एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। वैसे, ग्रे मार्केट प्रीमियम में समय-समय पर उतार-चढ़ाव आता रहता है, इसलिए अंतिम फैसला अपनी जोखिम क्षमता के आधार पर लें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

NSE IPO: सेबी की हरी झंडी के बाद हलचल तेज! जानिए आईपीओ की पूरी डिटेल और किसे होगा कितना बंपर फायदा?

NSE IPO Benefits & Details: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के ₹30000 करोड़ के आईपीओ को बीते दिनों सेबी से मंजूरी मिली। लगभग एक दशक के लंबे इंतजार के बाद आ रहा यह इश्यू देश का सबसे बड़ा आईपीओ बनने जा रहा है। इस मेगा आईपीओ में कौन-कौन से बड़े सरकारी बैंक और इंश्योरेंस कंपनियां अपने शेयर बेच रही हैं, किसे कितना तगड़ा मुनाफा होगा और आईपीओ की प्रमुख डिटेल्स क्या हैं? आइए आपको बताते हैं।

किसे और कितना होगा बंपर फायदा?

यह पूरा आईपीओ ऑफर फॉर सेल (OFS) है, यानी एक्सचेंज कोई नया शेयर जारी नहीं कर रहा है। इसके बजाय NSE के शुरुआती शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचकर भारी ‘वैल्यू अनलॉकिंग’ करेंगे। चूंकि इन कंपनियों ने बहुत ही मामूली कीमत पर शेयर खरीदे थे, इसलिए इन्हें तगड़ा फायदा मिलने वाला है:

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI): सबसे बड़ा लिस्टेड सेलिंग शेयरधारक। SBI अपने 2.47 करोड़ शेयर्स बेचेगा, जिससे बैंक के खजाने में भारी कैश आएगा।

बैंक ऑफ बरोड़ा: लगभग 1.1 करोड़ शेयर्स ऑफलोड करके बंपर मुनाफा कमाने की तैयारी में है।

जीआईसी री (GIC Re): सरकारी री-इंश्योरेंस कंपनी लगभग 1.1 करोड़ शेयर्स बेचेगी।

न्यू इंडिया एश्योरेंस (NIACL): लगभग 1.05 करोड़ शेयर्स बेचने की योजना है।

आईएफसीआई (IFCI): इसकी सब्सिडियरी SHCIL के जरिए NSE में 4.4% की अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी है, जिससे इसके शेयरों में भी जबरदस्त एक्शन देखने को मिलेगा।

NSE IPO की प्रमुख डिटेल्स

कुल इश्यू साइज: ₹30,000 करोड़ (14.89 करोड़ शेयर्स)।

सब्सक्रिप्शन की संभावित तारीख: 15 सितंबर 2026 (अनुमानित)।

शेयर लिस्टिंग डेट: 24 से 25 सितंबर 2026 के बीच (पितृपक्ष शुरू होने से ठीक पहले लिस्टिंग का लक्ष्य)।

प्राइस बैंड: अगले हफ्ते जारी होने की उम्मीद है।

कैसी है NSE की वित्तीय सेहत?

आईपीओ में उतरने से पहले NSE का चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1 FY27) में शानदार वित्तीय प्रदर्शन रहा है। कंपनी का नेट प्रॉफिट (PAT) 7% बढ़कर ₹3120 करोड़ पर पहुंच गया। कुल आय में 9% की बढ़ोतरी के साथ ₹5252 करोड़ दर्ज की गई। इस दौरान कंपनी की कमाई का मुख्य जरिया ट्रांजेक्शन फीस रही, जिससे ₹3623 करोड़ का राजस्व मिला।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

GDP Growth: सरकार ने 2.6% GDP ग्रोथ के दावे को खारिज किया, 7.8% को सटीक बताया

GDP Growth: सरकार ने पहली तिमाही की GDP ग्रोथ 2.6% रहने के दावे को खारिज कर दिया है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने कहा कि 7.8% की GDP ग्रोथ का आंकड़ा मजबूत प्रोडक्शन डेटा पर आधारित है। उन्होंने पुराने और नए GDP डेटा की तुलना को ‘सेब और संतरे की तुलना’ जैसा बताया। PTI के मुताबिक, सरकार ने कहा कि दोनों आंकड़े अलग-अलग डेटा सीरीज के हैं और उनकी सीधी तुलना नहीं की जा सकती।

यह विवाद पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के बयान के बाद शुरू हुआ था। उनका कहना था कि अगर पिछले साल की पहली तिमाही की GDP को ₹86 लाख करोड़ से घटाकर ₹80 लाख करोड़ नहीं किया जाता, तो मौजूदा ग्रोथ करीब 2.6% होती।

सरकार ने 2.6% के दावे को क्यों बताया गलत?

सौरभ गर्ग के मुताबिक, आलोचक FY26 की पहली तिमाही के पुराने ₹86.05 लाख करोड़ के GDP आंकड़े की तुलना नए ₹80 लाख करोड़ के आंकड़े से कर रहे हैं। यह ₹86.05 लाख करोड़ का आंकड़ा पुराने 2011-12 बेस ईयर वाली GDP सीरीज का था।

फरवरी 2026 में सरकार ने 2022-23 को बेस ईयर मानकर नई GDP सीरीज जारी की। इसके बाद पुरानी सीरीज की जगह नई सीरीज लागू हो गई। नई सीरीज में Q1 FY26 का GDP पहले ₹80.32 लाख करोड़ आंका गया। बाद में यह ₹80.44 लाख करोड़ हुआ और फिर नए IIP और PPI डेटा के आधार पर इसे ₹80 लाख करोड़ किया गया।

PTI के मुताबिक, मंत्रालय ने कहा कि यह सामान्य डेटा रिवीजन की प्रक्रिया है। इसका मकसद पिछले साल का GDP घटाकर मौजूदा ग्रोथ रेट को बढ़ाना नहीं था।

असली तुलना किससे होनी चाहिए?

सरकार का कहना है कि GDP ग्रोथ की तुलना एक ही डेटा सीरीज और स्थिर कीमतों पर की जानी चाहिए। नई 2022-23 बेस ईयर सीरीज के मुताबिक, FY27 की पहली तिमाही में भारत की रियल GDP ग्रोथ 7.8% रही।

मंत्रालय ने स्टील, सीमेंट और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टरों में मजबूत वॉल्यूम ग्रोथ का भी हवाला दिया। PTI के मुताबिक, सरकार का तर्क है कि वास्तविक उत्पादन में बढ़ोतरी के आंकड़े भी मजबूत आर्थिक गतिविधि दिखाते हैं।

मैन्युफैक्चरिंग में रियल ग्रोथ ज्यादा कैसे?

मैन्युफैक्चरिंग की रियल GVA ग्रोथ 9.2% रही, जबकि नॉमिनल ग्रोथ 7.7% रही। इसके चलते इंप्लिसिट GVA डिफ्लेटर माइनस 1.5% रहा।

मंत्रालय ने कहा कि इसका मतलब फैक्ट्री गेट कीमतें घटीं, यह जरूरी नहीं है। नई पद्धति में आउटपुट और इनपुट को अलग-अलग डिफ्लेट किया जाता है। अगर कच्चे माल और दूसरे इनपुट की कीमतें आउटपुट कीमतों से ज्यादा तेजी से बढ़ती हैं, तो ऐसा अंतर आ सकता है।

माइनिंग में रियल ग्रोथ घटी, नॉमिनल क्यों बढ़ी?

Q1 FY27 में माइनिंग की रियल GVA 2.4% घटी। लेकिन नॉमिनल GVA 22.3% बढ़ी। PTI के मुताबिक, इसकी बड़ी वजह मिनरल्स की कीमतों में तेज उछाल रही।

माइनिंग और क्वॉरिंग की PPI महंगाई अप्रैल में 22% और मई में 21.2% रही। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई।

GDP डिफ्लेटर और CPI-WPI में अंतर क्यों?

सरकार ने कहा कि GDP डिफ्लेटर को CPI और WPI से सीधे नहीं मिलाया जा सकता। CPI घरों के खर्च की तय बास्केट को मापता है। WPI मुख्य रूप से वस्तुओं की कीमतों को ट्रैक करता है। वहीं, GDP डिफ्लेटर निवेश, सरकारी खर्च, एक्सपोर्ट और सर्विसेज समेत पूरी अर्थव्यवस्था को कवर करता है।

मंत्रालय ने कहा कि उत्पादन और खर्च के आधार पर निकाले गए GDP आंकड़ों के बीच सांख्यिकीय अंतर भी सामान्य है। जैसे-जैसे ज्यादा डेटा आता है, इसमें बदलाव हो सकता है। इसलिए मौजूदा अंतर को GDP में किसी गड़बड़ी का सबूत नहीं माना जाना चाहिए।

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