आकाश अंबानी ने जियो प्लेटफॉर्म्स की प्राथमिकताएं बताईं, कहा-इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा उठाने पर होगा फोकस

जियो प्लेटफॉर्म्स अपनी ग्रोथ स्ट्रेटेजी के फोकस में बदलाव कर रही है। अब तक कंपनी का जोर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर रहा है। अब कंपनी अपने नेटवर्क का मैक्सिमम फायदा उठाने पर फोकस कर रही है। कंपनी ने पिछले सालों में पूरे देश में कनेक्टिविटी बढ़ाने पर भारी निवेश किया है। अब वह अपने सर्विसेज पोर्टफोलियो का विस्तार करना चाहती है और निवेश की गई पूंजी पर रिटर्न बढ़ाना चाहती है। इस बारे में जियो प्लेटफॉर्म्स के एमडी आकाश अंबानी ने बताया।

इंफ्रास्ट्रक्चर से मैक्सिमम वैल्यू हासिल करने पर होगा फोकस

मनीकंट्रोल को दिए ईमेल इंटरव्यू में अंबानी ने कहा, “हमारे कैपिटल एलोकेशन की दिशा सस्टेनेबल लॉन्ग टर्म वैल्यू क्रिएट करने के मकसद पर निर्भर करेगी। हम वहां निवेश करना जारी रखेंगे, जहां हमें टेक्नोलॉजी, कस्टमर डिमांड और उपलब्ध मौकों का फायदा उठाने के लिहाज से ऐसा करना सही लगेगा।” उन्होंने कहा कि मीडियम और लॉन्ग टर्म में हमारा फोकस उस इंफ्रास्ट्रक्चर से मैक्सिमम वैल्यू हासिल करना है, जिसे हमने बनाया है।

पिछले सालों में कंपनी ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश किया है

जियो प्लेटफॉर्म्स ने व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया है। मार्च 2026 में कंपनी के 3,60,382 नेटवर्क टावर्स थे। इसमें 10 लाख रूट किलोमीटर से ज्यादा लंबा फाइबर नेटवर्क शामिल है। कंपनी के वायरलेस ब्रॉडबहैंड नेटवर्क के तहत देश की आबादी का 99 फीसदी से ज्यादा हिस्सा आता है। फिक्स्ड ब्रॉडबैंड का कवरेज करीब 98 फीसदी पिन कोड्स तक है। FY26 में इंडिया के वायरलेस डेटा ट्रैफिक में जियो की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी थी।

अब पूंजीगत निवेश की रफ्तार में धीर-धीरे कमी आ रही

कई सालों तक भारी निवेश करने के बाद अब इनवेस्टमेंट की तेज रफ्तार कम हुई है। FY26 में कंपनी का कैश कैपिटल एक्सपेंडिचर घटकर 34,184 करोड़ रुपये रही। यह FY25 में 44,268 करोड़ रुपये थी। FY24 में 53,510 करोड़ रुपये थी। नेटवर्क कैपेक्स अकेले 40,617 करोड़ रुपये से घटकर 29,377 करोड़ रुपये पर आ गया। उधर, बिजनेस की ऑपरेटिंग अर्निंग्स अब अच्छे लेवल पर पहुंच गई है। जियो प्लेटफॉर्म्स का ऑपरेशन से रेवेन्यू FY26 में बढ़कर 1.47 लाख करोड़ रुपये हो गया। EBITDA 76,255 करोड़ रुपये रहा। यह करीब 52 फीसदी का मार्जिन है। कंपनी का नेट प्रॉफिट 30,049 करोड़ रुपये रहा।

जियो की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल विदेश में करने पर भी होगा फोकस

कंपनी ने शॉर्ट टर्म में कंपनी की प्राथमिकताओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा इसमें नेटवर्क क्वालिटी बनाए रखना, होम ब्रॉडबैंड और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस का विस्तार करना और एंटरप्राइज एंड डिजिटल सर्विसेज का विस्तार शामिल हैं। जियो AI-एनेबल्ड एंटरप्राइज सॉल्यूशंस, IoT, क्लाउड कंप्यूटिंग और AR/VR में भी मौकों पर नजर रखेगी। उन्होंने कहा कि जियो की टेक्नोलॉजी कपैबिलिटी के लिए विदेश में मौकों की तलाश भी प्राथमिकता में शामिल होगी।

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जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर को निवेश के लिए खुल जाएगा

जियो प्लेटफॉर्म्स के 30,200 करोड़ रुपये के आईपीओ में सिर्फ नए शेयर इश्यू होंगे। इसमें कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल नहीं है। यह आईपीओ 21 अक्तूबर यानी बुधवार को खुलेगा और 23 अक्तूबर यानी शुक्रवार को बंद होगा। कंपनी ने प्रति शेयर 1,065-1,119 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर कंपनी की वैल्यूएशन करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये है। कंपनी आईपीओ से आने वाले पैसे के बड़े हिस्से का इस्तेमाल अपनी सब्सिडियरी रिलायंस का कर्ज चुकाने के लिए करेगी।

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Jio IPO: ‘कमाई बढ़ाने के लिए नई रणनीति पर फोकस’, आकाश अंबानी ने कहा- सिर्फ टैरिफ बढ़ाने पर नहीं रहेगा जोर

Jio IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स अपनी कमाई बढ़ाने के लिए सिर्फ मोबाइल रिचार्ज महंगे करने पर निर्भर नहीं रहना चाहती। कंपनी अब डेटा की बढ़ती खपत, प्रीमियम डिजिटल सेवाओं, होम ब्रॉडबैंड और कॉरपोरेट सेवाओं से कमाई बढ़ाने की तैयारी में है। Jio का लक्ष्य अपने 50 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों से ज्यादा रेवेन्यू हासिल करना है।

Jio Platforms के चेयरमैन आकाश अंबानी ने Moneycontrol को बताया कि कंपनी हर GB डेटा के लिए ज्यादा पैसे वसूलने को ही कमाई बढ़ाने का एकमात्र तरीका नहीं मानती। उनके मुताबिक, टैरिफ कारोबार का एक हिस्सा है। लेकिन कमाई बढ़ाने के दूसरे रास्ते भी हैं।

Jio ग्राहकों को देगी प्रीमियम सेवाएं

Jio अपनी डिजिटल सेवाओं को और बेहतर बनाने पर काम कर रही है। कंपनी चाहती है कि ग्राहक प्रीमियम सेवाओं का ज्यादा इस्तेमाल करें। इसके अलावा, होम ब्रॉडबैंड और फिक्स्ड वायरलेस इंटरनेट का विस्तार भी किया जाएगा।

कंपनी कॉरपोरेट ग्राहकों के साथ अपना कारोबार बढ़ाना चाहती है। साथ ही, इंटरनेट कनेक्शन के साथ दूसरी सेवाएं भी जोड़ी जाएंगी। इनमें OTT वीडियो, म्यूजिक, क्लाउड स्टोरेज और AI आधारित सेवाएं शामिल हैं।

आकाश अंबानी के मुताबिक, ग्राहक इन सेवाओं का ज्यादा इस्तेमाल करेंगे, तो कमाई बढ़ाने के नए मौके मिलेंगे। प्रीमियम इंटरनेट कनेक्टिविटी और AI सेवाएं भी इसमें अहम भूमिका निभा सकती हैं।

Airtel से पीछे है Jio की प्रति ग्राहक कमाई

वित्त वर्ष 2026 में Jio की औसत प्रति यूजर कमाई यानी ARPU 214 रुपये प्रति माह रही। वहीं, Bharti Airtel की ARPU 257 रुपये थी।

एनालिस्ट्स का मानना है कि Jio के पास कमाई बढ़ाने की काफी गुंजाइश है। कंपनी के पास ग्राहकों की संख्या ज्यादा है। उसके नेटवर्क पर डेटा का इस्तेमाल भी काफी होता है। ऐसे में प्रीमियम सेवाओं और डेटा की बढ़ती खपत से कंपनी को फायदा मिल सकता है।

हालांकि, आकाश अंबानी ने यह नहीं बताया कि अगली बार मोबाइल टैरिफ कब बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि आने वाले समय में कीमतें किस स्तर पर स्थिर हो सकती हैं। उनके मुताबिक, टैरिफ का फैसला ग्राहकों की जरूरत, बाजार में प्रतिस्पर्धा, महंगाई और नेटवर्क पर होने वाले निवेश को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

Jio Platforms का ₹30,213 करोड़ का IPO

Jio Platforms का ₹30,213 करोड़ का IPO 21 अक्टूबर को खुला है और 23 अक्टूबर को बंद होगा। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू है। इसके लिए 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है।

इस IPO में 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जा रहे हैं। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) नहीं है। ऊपरी प्राइस बैंड पर कंपनी का वैल्यूएशन करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये है। शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को BSE और NSE पर होनी है।

₹27,500 करोड़ से चुकाया जाएगा कर्ज

वित्त वर्ष 2026 में Jio Platforms का रेवेन्यू 1.47 लाख करोड़ रुपये रहा। कंपनी को 30,049 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हुआ। वहीं, EBITDA 76,255 करोड़ रुपये रहा।

IPO से मिलने वाली रकम में से 27,500 करोड़ रुपये Reliance Jio Infocomm का कर्ज चुकाने के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे। यह Jio Platforms की सब्सिडियरी कंपनी है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

OYO का अब आईपीओ में सिर्फ 3350 करोड़ रुपये के नए शेयर इश्यू करने का प्लान, जानिए वजह

ओयो की पेरेंट कंपनी प्रिज्म अपने प्रस्तावित आईपीओ में अपने नए शेयरों की संख्या घटाकर आधी करना चाहती है। पहले वह आईपीओ में 6,650 करोड़ रुपये के नए शेयर इश्यू करने वाली थी। अब वह 3,350 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी करने के बारे में सोच रही है। सूत्रों ने मंगलवार को यह बताया।

स्ट्रॉन्ग कैश जेनरेशन की वजह से कंपनी ने बदला प्लान

इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने पीटीआई को बताया कि स्ट्रॉन्ग कैश जेनरेशन की वजह से प्रिज्म इश्यू का साइज घटाना चाहती है। कंपनी का कैश जेनरेशन स्ट्रॉन्ग बना हुआ है। बैलेंसशीट भी स्ट्रॉन्ग है। इससे कंपनी को अब पहले के मुकाबले कम कैपिटल की जरूरत है।

पहले कंपनी को ज्यादा पूंजी की जरूरत थी 

एक सूत्र ने बताया कि कंपनी ने जब आईपीओ का प्लान बनाया था तब उसे ज्यादा पूंजी की जरूरत थी। लेकिन, हाल में बेहतर फाइनेंशियल परफॉर्मेंस के बाद अब कंपनी को कम पूंजी की जरूरत है। सूत्र ने बताया कि कंपनी अब उतनी ही पूंजी जुटाना चाहती है, जितनी उसकी जरूरत है। कंपनी का प्लान अगले दो से तीन साल में कर्ज चुकाने का है।

पहले कंपनी का प्लान 6650 करोड़ जुटाने का था

OYO ने पहले आईपीओ से 6,650 करोड़ रुपये जुटाने का प्लान बनाया था। इसमें से कंपनी 5,000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करने वाली थी। आईपीओ के रिवाइज्ड स्ट्रक्चर के मुताबिक, कंपनी इश्यू से आने वाले ज्यादातर पैसे का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी।

मूडीज ने पेरेंट कंपनी प्रिज्म का आउटलुक बदला

रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स ने प्रिज्म के आउटलुक को ‘स्टेबल’ से बदलकर ‘पॉजिटिव’ कर दिया है। उसने इस बी2 कॉर्पोरेट फैमिली रेटिंग भी दी है। मूडीज ने कहा है कि उसे अगले 12-18 महीनों में ओयो की एबिड्टा बढ़कर करीब 3,000 करोड़ रुपये पहुंच जाने की उम्मीद है। FY26 में कंपनी का EBITDA दोगुना यानी 2,630 करोड़ रुपये हो गया। FY25 में यह 1,080 करोड़ रुपये था।

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ओयो में सॉफ्टबैंक की सब्सिडियरी की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी

ओयो की शुरुआत 2013 में हुई थी। रीतेश अग्रवाल इसके फाउंडर हैं। उनकी इस कंपनी में 30.52 फीसदी हिस्सेदारी है। इस कंपनी में सबसे ज्यादा करीब 40 फीसदी हिस्सेदारी एसवीएफ इंडिया होल्डिंग्स (केमैन) की है, जो सॉफ्टबैंक ग्रुप कॉर्प की सब्सिडियरी है।

Stocks to Watch: 21 अक्टूबर को इन 10 शेयरों पर रहेगी नजर, हिंदुस्तान जिंक से IREDA तक शामिल

Stocks to Watch: बुधवार, 21 अक्टूबर को शेयर बाजार में कई कंपनियों के शेयर खबरों के दम पर फोकस में रहेंगे। कुछ कंपनियों ने सितंबर तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं, तो कुछ के मुनाफे में गिरावट आई है। वहीं, कुछ कंपनियां अपने कारोबार और मैनेजमेंट से जुड़े बदलावों को लेकर चर्चा में हैं। ऐसे में निवेशकों की नजर इन 10 शेयरों पर रहेगी।

Bajaj Finance

नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी Bajaj Finance का सितंबर तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 28.8% बढ़कर ₹6,367 करोड़ हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 23.6% बढ़कर ₹13,335 करोड़ रही। कंपनी की नेट टोटल इनकम 23% बढ़कर ₹15,974 करोड़ पहुंच गई। तिमाही के दौरान कंपनी ने 1.345 करोड़ नए लोन भी दिए।

Hindustan Zinc

वेदांता ग्रुप की मेटल कंपनी Hindustan Zinc का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 142% उछलकर ₹6,412 करोड़ पहुंच गया। कंपनी का रेवेन्यू 76.5% बढ़कर रिकॉर्ड ₹15,093 करोड़ हो गया। EBITDA भी दोगुने से ज्यादा बढ़कर ₹9,248 करोड़ रहा।

IREDA

सरकारी रिन्यूएबल एनर्जी फाइनेंस कंपनी IREDA का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट मामूली 0.5% बढ़कर ₹552 करोड़ रहा। हालांकि, ऑपरेटिंग प्रॉफिट 16.5% बढ़कर ₹904 करोड़ पहुंच गया। कंपनी की ग्रॉस NPA घटकर 3.57% और नेट NPA 1.08% रह गई। इससे पिछले साल के मुकाबले खराब कर्ज के स्तर में सुधार दिखा।

Piramal Finance

पिरामल ग्रुप की फाइनेंस कंपनी Piramal Finance का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 67% बढ़कर ₹545 करोड़ हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 35% बढ़कर ₹1,530 करोड़ पहुंच गई। इसके अलावा, SBI के पूर्व चेयरमैन दिनेश खारा को 19 अक्टूबर 2026 से पांच साल के लिए कंपनी का स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया गया है।

L&T Technology Services

टेक्नोलॉजी सर्विसेज कंपनी L&T Technology Services (LTTS) का सितंबर तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट तिमाही आधार पर 53.7% बढ़कर ₹548.2 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 3.4% बढ़कर ₹3,040 करोड़ रहा। यह ₹3,022.5 करोड़ के अनुमान से ज्यादा है।

Waaree Renewable Technologies

वारी ग्रुप की सोलर EPC कंपनी Waaree Renewable Technologies का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 30% गिरकर ₹82 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू 36.53% बढ़कर ₹1,057.84 करोड़ पहुंच गया। कंपनी की अधूरी ऑर्डर बुक ₹5,500 करोड़ से ज्यादा है। इसके अलावा, सोलर, बैटरी स्टोरेज और ट्रांसमिशन-डिस्ट्रिब्यूशन प्रोजेक्ट्स में भी बड़े मौके मौजूद हैं।

Just Dial

हाइपरलोकल सर्च प्लेटफॉर्म Just Dial का सितंबर तिमाही में रेवेन्यू सालाना आधार पर 13.2% बढ़कर ₹343 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी अवधि में यह ₹303.1 करोड़ था। EBITDA भी 4.5% बढ़कर ₹91 करोड़ पहुंच गया। हालांकि, EBITDA मार्जिन घटकर 26.4% रह गया। एक साल पहले यह 28.7% था।

Nelco

टाटा ग्रुप की सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विसेज कंपनी Nelco का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 6.79% बढ़कर ₹1.73 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 5.1% बढ़कर ₹78.14 करोड़ रहा। EBITDA में 22% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹9.1 करोड़ पहुंच गया। कंपनी का EBITDA मार्जिन भी एक साल पहले के 10% से बढ़कर 11.7% हो गया।

SML Mahindra

कमर्शियल गाड़ियों की कंपनी SML Mahindra का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 42.9% गिरकर ₹12 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू 20.7% बढ़कर ₹670 करोड़ पहुंच गया। EBITDA 31% गिरकर ₹29 करोड़ रहा। कंपनी का EBITDA मार्जिन भी 7.6% से घटकर 4.3% रह गया।

Trent

टाटा ग्रुप की रिटेल कंपनी Trent के नॉन-एग्जीक्यूटिव और नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर हरीश भट्ट ने इस्तीफा दे दिया है। वह 12 साल से ज्यादा समय से कंपनी के बोर्ड में थे। उन्होंने बढ़ती पेशेवर और निजी जिम्मेदारियों का हवाला दिया। उनका इस्तीफा 17 अक्टूबर से प्रभावी हुआ। कंपनी के सितंबर तिमाही के नतीजे 29 अक्टूबर को आने वाले हैं।

Stock Split: एक साल में 190% और 5 साल में 1000% चढ़ी कीमत, अब 10 टुकड़ों में टूटेगा शेयर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Neogen Chemicals Share Price: एनालिस्ट की पसंद बना ये केमिकल स्टॉक, दे सकता है 24% का रिटर्न

Neogen Chemicals Share Price: पिछले 6 महीनों में अच्छे रिटर्न के बाद घरेलू ब्रोकरेज फर्म ‘एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग’ ने Neogen Chemicals पर कवरेज शुरू किया है। उन्होंने इसे ‘Buy’ की रेटिंग दी है और ₹3,050 का टारगेट प्राइस तय किया है। इसका मतलब है कि ₹2,482 के मौजूदा मार्केट प्राइस से इसमें लगभग 23% की तेजी आ सकती है।

ब्रोकरेज का मानना ​​है कि स्पेशलिटी केमिकल्स बनाने वाली यह कंपनी अब कमाई में तेज बढ़ोतरी के दौर में प्रवेश करने वाली है। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि कंपनी का बैटरी केमिकल्स का कारोबार बढ़ रहा है, जिसे घरेलू बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, ग्राहकों की मंजूरी और चीन के बाहर की सप्लाई चेन में मिल रहे मौकों का समर्थन मिल रहा है।

एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने कहा Neogen Chemicals के पास एक मजबूत स्पेशलिटी केमिकल्स कारोबार है और साथ ही बैटरी के क्षेत्र में भी बड़े मौके हैं। चूंकि प्लांट काफी हद तक तैयार हो चुके हैं और ग्राहकों द्वारा मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है, इसलिए मुख्य रुकावटें अब पीछे छूट गई हैं। अब कमाई में तेजी आना बाकी है, जो विकास और री-रेटिंग का एक बेहतरीन मौका बनाता है।”

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि FY26 से FY30 के बीच Neogen का रेवेन्यू, EBITDA और टैक्स के बाद का एडजस्टेड प्रॉफिट (PAT) क्रमशः 45%, 49% और 87% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ेगा। हालांकि, इस निवेश की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नई सुविधाएं समय पर शुरू होती हैं या नहीं, ग्राहक कितना माल खरीदते हैं, और कंपनी अपने बढ़े हुए कर्ज को कैसे संभालती है।

ब्रोकरेज स्टॉक पर बुलिश क्यों

आने वाले वर्षों में बैटरी केमिकल्स, नियोजेन के विकास का सबसे बड़ा जरिया बनने की उम्मीद है। इसकी सब्सिडियरी कंपनी, ‘नियोजेन आयोनिक्स’, बैटरी इलेक्ट्रोलाइट और लिथियम हेक्साफ्लोरोफॉस्फेट (LiPF6) बनाती है। LiPF6 एक महत्वपूर्ण सॉल्ट है जिसका इस्तेमाल लिथियम-आयन बैटरी में किया जाता है। कंपनी इसके लिए ‘MU आयोनिक सॉल्यूशंस’ की जापानी मैन्युफैक्चरिंग तकनीक का इस्तेमाल करती है और जापान की ‘मोरिता’ के साथ एक जॉइंट वेंचर के जरिए अपना सॉल्ट कारोबार चलाती है।

एंटीक का अनुमान है कि नियोजेन के कुल रेवेन्यू में बैटरी केमिकल्स का हिस्सा FY26 के 4% से बढ़कर FY30 तक 62% हो जाएगा। FY26 तक यह सेगमेंट घाटे में था, क्योंकि उस दौरान इलेक्ट्रोलाइट और सॉल्ट बनाने की सुविधाएं तैयार हो रही थीं और ग्राहकों से मंजूरी लेने की प्रक्रिया चल रही थी। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि FY27 तक यह कारोबार EBITDA के स्तर पर ‘ब्रेक-ईवन’ (यानी बिना नुकसान या मुनाफे की स्थिति) तक पहुंच जाएगा। एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग का कहना है कि, “कमीशनिंग में देरी के कारण काम की गति (रैंप-अप) कुछ आगे खिसक गई है, लेकिन इससे मध्यम अवधि की कमाई के अनुमानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि FY30E (वित्त वर्ष 2030) के हमारे अनुमान जिन क्षमताओं और ग्राहकों की मंजूरी पर आधारित हैं, वे पहले से ही मौजूद हैं।”

ब्रोकरेज का मानना ​​है कि ग्राहकों द्वारा दी जाने वाली योग्यता(क्वालिफिकेशन) कंपनी को एक प्रतिस्पर्धी बढ़त दिला सकती है। इस तरह की मंजूरी मिलने में 12-24 महीने लग सकते हैं, और एक बार किसी उत्पाद को मंजूरी मिल जाने के बाद, बैटरी निर्माता आमतौर पर अपने सप्लायर को बदलना नहीं चाहते। नियोजेन ने अमेरिका के तीन इलेक्ट्रोलाइट निर्माताओं के साथ अपने प्लांट का अंतिम ऑडिट पूरा कर लिया है। इससे कंपनी उन अमेरिकी टैक्स-क्रेडिट नियमों से जुड़ी मांग को पूरा करने की स्थिति में आ गई है, जो 2027 से कुछ चीनी सप्लायरों से सामान लेने पर रोक लगाते हैं।

भारत में बैटरी निर्माण क्षमता बढ़ने के साथ, घरेलू स्तर पर भी अवसर बढ़ सकते हैं। नियोजेन की दहेज और पाखाजन इकाइयां स्थानीय सेल निर्माताओं को सेवा देने के लिए तैयार हैं, जबकि इसकी लिथियम सॉल्ट क्षमता निर्यात के अतिरिक्त अवसर प्रदान करती है। बैटरी रसायनों के अलावा, कंपनी का स्पेशलिटी केमिकल्स का स्थापित कारोबार कमाई का एक स्थिर आधार देता है। इसे कॉन्ट्रैक्ट सिंथेसिस एंड मैन्युफैक्चरिंग (CSM), एडवांस्ड इंटरमीडिएट्स और दहेज प्लांट में आग लगने की घटना के बाद उत्पादन में हुए सुधार से भी मजबूती मिलती है।

स्टॉक का परफॉर्मेंस

इस केमिकल स्टॉक में पिछले 3 महीनों में 14%, 6 महीनों में 64% और पिछले 1 साल में 70% की तेजी आई है। हालांकि, हाल के समय में इसमें 1 हफ्ते में 2% और पिछले 1 महीने में 0.3% की गिरावट देखी गई है। अक्टूबर 2026 में यह स्टॉक अपने 52-हफ्तों के उच्चतम स्तर ₹2785 पर पहुंच गया था, जबकि दिसंबर 2025 में यह अपने 52-हफ्तों के निचले स्तर ₹978 पर था।

 

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Powerica Share Price: ₹700 तक जा सकता है ₹565 का शेयर, इस कारण नुवामा हुआ बुलिश

Powerica  Share Price: नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (Nuvama Institutional Equities) पावरिका लिमिटेड (Powerica Ltd) के शेयरों को लेकर बुलिश नजर आ रहा है। ब्रोकरेज फ्रर्म ने स्टॉक पर Buy रेटिंग दी है और इसके लिए 700 रुपये का टारगेट प्राइस दिया। जो मौजूदा लेवल से 20 फीसदी की तेजी दिखा रहा है । बता दें कि Powerica के शेयर अपने आईपीओ प्राइस ₹395 से लगभग 48% की तेजी आई है। सोमवार को ये 564.45 रुपये पर बंद हुआ। 2 अप्रैल 2026 को BSE और NSE पर लिस्ट होने के बाद, पिछले 6 महीनों में इस स्टॉक में 34.51% की बढ़त दर्ज की गई है।

ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि नुवामा का यह सकारात्मक नजरिया तीन मुख्य ग्रोथ ड्राइव पर टिका है। कंपनी के डीजल जनरेटर (DG) बिजनेस में सुधार, विंड इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर (IPP) पोर्टफोलियो का विस्तार, और रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइसेस (RECDs) के क्षेत्र में लंबे समय के अवसर।

स्टॉक पर क्या है ब्रोकरेज की राय

पावरिका का पावर-सॉल्यूशन पोर्टफोलियो काफी विविध है, जिसमें DG सेट, विंड पावर जनरेशन और RECDs शामिल हैं। नुवामा को उम्मीद है कि FY26 से FY29 के दौरान इन व्यवसायों से अच्छी कमाई होगी। इसके पीछे डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग, अधिक कुशल विंड टर्बाइन और एमिशन-कंट्रोल तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाना जैसे कारण हैं।

ब्रोकरेज का अनुमान है कि FY26 से FY29 के बीच, DG बिजनेस के टैक्स के बाद मुनाफे (PAT) में लगभग 21% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) देखने को मिलेगी। वहीं, विंड IPP के EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन से पहले की कमाई) में 44% और RECD के PAT में 27% की CAGR रहने की उम्मीद है।

पावरिका का DG बिजनेस लगातार कैश जनरेट करने का एक मजबूत आधार है। भारत में कमिंस (Cummins) के लिए केवल तीन जनरेटर ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (GOEMs) में से एक होने के नाते, कंपनी को एक खास फायदा मिलता है।

भारत में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है, खासकर दक्षिण और पश्चिमी भारत में, जिसका फायदा पावरिका को मिल सकता है। नुवामा ने बताया कि पावरिका के पास डेटा सेंटर से जुड़े लगभग ₹1,100 करोड़ के ऑर्डर हैं। इसकी तुलना में, FY26 में डेटा सेंटर से बिक्री लगभग ₹340 करोड़ रही थी, जो भविष्य में कंपनी की ग्रोथ की अच्छी संभावनाओं को दर्शाती है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि मार्जिन में सुधार आएगा, क्योंकि कंपनी कमिंस (Cummins) द्वारा बढ़ाई गई कीमतों का बोझ ग्राहकों पर डाल देगी। औद्योगिक पूंजीगत व्यय (industrial capital expenditure) में तेजी आने से इसे और बढ़ावा मिल सकता है।

हालांकि, यह सुधार इस बात पर निर्भर करता है कि पॉवरिका (Powerica) बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर कितनी अच्छी तरह डाल पाती है। नुवामा (Nuvama) ने चेतावनी दी है कि अगर कंपनी बढ़ती कमोडिटी लागत के बीच कीमतों में हुई बढ़ोतरी को खुद सहने या ग्राहकों पर डालने में विफल रहती है, तो इससे DG मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।

पॉवरिका का विंड पावर (पवन ऊर्जा) कारोबार, नुवामा की निवेश थीसिस का एक और मुख्य आधार है। कंपनी की विंड कैपेसिटी, मिले हुए ‘लेटर ऑफ अवार्ड’ (LOAs) के सहारे, वित्त वर्ष 2029 तक लगभग 330 MW से बढ़कर 631 MW होने की उम्मीद है।

कंपनी का पोर्टफोलियो भी नए और अधिक कुशल टर्बाइनों की ओर बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2029 तक इनका हिस्सा 65% से बढ़कर लगभग 82% होने का अनुमान है। ये नई संपत्तियां 30% से अधिक का प्लांट लोड फैक्टर (PLF) और लगभग 80% का EBITDA मार्जिन दे सकती हैं, जिससे पूरे पोर्टफोलियो की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

नुवामा को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2029 तक ब्लेंडेड PLF लगभग 29.4% और विंड बिजनेस का EBITDA मार्जिन लगभग 77% तक पहुंच जाएगा। इसी के आधार पर, वित्त वर्ष 2026 से वित्त वर्ष 2029 के बीच विंड IPP कारोबार के लिए 44% EBITDA CAGR (चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर) का अनुमान लगाया गया है।

पॉवरिका का RECD कारोबार अभी काफी छोटा है, लेकिन जैसे-जैसे उत्सर्जन नियंत्रण (emission-control) की जरूरतें बढ़ेंगी, यह विकास का एक महत्वपूर्ण जरिया बन सकता है। नुवामा के अनुसार, इसका संभावित बाजार लगभग 60,000 करोड़ रुपये का है, जिसमें केवल पांच से छह प्रमाणित प्रतिस्पर्धी ही मौजूद हैं।

ब्रोकरेज ने बताया कि इस कारोबार में इक्विटी पर लगभग 47% रिटर्न मिलने की संभावना है। साथ ही, विभिन्न राज्यों में RECD से जुड़े नियमों का लागू होना और कंपनी की नए ऑर्डर हासिल करने की क्षमता, इसके लिए महत्वपूर्ण कारक होंगे।

नुवामा का मानना ​​है कि पॉवरिका की रिपोर्ट की गई कमाई, उसकी नकदी पैदा करने की वास्तविक क्षमता को पूरी तरह से नहीं दर्शाती है। FY26 में ऑपरेटिंग कैश फ्लो PAT का लगभग 170% रहा, जबकि इसके विंड एसेट्स इक्विटी पर लगभग 15–17% का कैश रिटर्न देते हैं।

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि कंसोलिडेटेड रिटर्न ऑन इक्विटी FY27 के लगभग 12% से बढ़कर FY30 तक 14.4% हो जाएगा, क्योंकि नई विंड परियोजनाओं के लिए लगभग 70:30 के डेट-टू-इक्विटी अनुपात के साथ फंडिंग की जाएगी। नुवामा (Nuvama) के अनुसार वैल्यूएशन आकर्षक हैं। इसमें विंड बिजनेस के लिए FY29 में अनुमानित एंटरप्राइज वैल्यू-टू-EBITDA लगभग 6.8 गुना है, और DG सेट के लिए प्राइस-टू-अर्निंग मल्टीपल लगभग 21 गुना है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Q2 Results: सोलर कंपनी का मुनाफा 30% फिसला, मार्जिन में भी गिरावट; फोकस में रहेगा स्टॉक

Waaree Renewable Q2 Results: सोलर कंपनी Waaree Renewable Technologies के रेवेन्यू में सितंबर तिमाही के दौरान अच्छी बढ़त हुई। लेकिन कंपनी का मुनाफा घट गया। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 30% गिरकर ₹82 करोड़ रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹116 करोड़ था।

दूसरी ओर, कंपनी का रेवेन्यू 36.53% बढ़कर ₹1,057.84 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹775 करोड़ था। हालांकि, EBITDA सिर्फ 1.3% बढ़कर ₹160 करोड़ हुआ। इसका असर EBITDA मार्जिन पर भी पड़ा। यह 20% से घटकर 15% रह गया।

पहली छमाही में कैसा रहा प्रदर्शन?

अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच वारी रिन्यूएबल का रेवेन्यू 43.84% बढ़कर ₹1,982.09 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी अवधि में यह ₹1,377.97 करोड़ था। EBITDA भी 21.04% बढ़कर ₹333.46 करोड़ पहुंच गया।

हालांकि, नेट प्रॉफिट में बढ़त नहीं हुई। यह पिछले साल के ₹202.75 करोड़ से घटकर ₹200.44 करोड़ रह गया। कंपनी के मुताबिक, अधिग्रहण से जुड़े खर्च और नए कारोबार के अलग-अलग प्रॉफिट मार्जिन का असर मुनाफे पर पड़ा है।

महाराष्ट्र में लगाएगी सोलर प्लांट

वारी रिन्यूएबल के बोर्ड ने महाराष्ट्र के वर्धा में 35 मेगावाट पीक क्षमता वाला सोलर प्लांट लगाने को मंजूरी दी है। इसकी AC क्षमता 25 मेगावाट होगी। कंपनी इस प्लांट से बिजली बनाएगी और बेचेगी।

कंपनी की अधूरी ऑर्डर बुक ₹5,500 करोड़ से ज्यादा है। यानी इतने मूल्य के प्रोजेक्ट अभी पूरे होने बाकी हैं। इसके अलावा, 34.6 GWp से ज्यादा के सोलर प्रोजेक्ट्स की बोली पाइपलाइन भी है। बैटरी स्टोरेज और बिजली ट्रांसमिशन कारोबार में भी कंपनी को अवसर दिख रहे हैं।

नए कारोबार पर भी नजर

Waaree Renewable अपने EPC और बिजली ट्रांसमिशन कारोबार को बढ़ाना चाहती है। कंपनी सोलर प्रोजेक्ट्स के रखरखाव से जुड़ी सेवाओं का भी विस्तार करेगी।

इसके लिए ड्रोन से सोलर पैनल की जांच, डेटा के जरिए खराबी का पहले पता लगाने और भूमिगत बिजली केबल में गड़बड़ी पहचानने जैसी तकनीकों पर काम किया जा रहा है।

नतीजों से पहले सोमवार, 19 अक्टूबर को NSE पर Waaree Renewable का शेयर 0.44% गिरकर ₹833.40 पर बंद हुआ।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

JIO Platforms के IPO को लेकर फुल जोश में मार्केट दिग्गज, 4 साल में मार्केट कैप डबल होने की जता रहे उम्मीद

Jio Platforms IPO : जियो प्लेटफार्म्स के IPO का काउंटडाउन शुरू हो गया है। आज यह इश्यू एंकर निवेशकों के लिए खुला। इसमें घरेलू और विदेशी कंपनियां बढ़ चढ़कर बोलियां लगा सकती हैं। बुधवार से यह IPO सभी निवेशकों के लिए खुलेगा। इसका प्राइस बैंड 1065 से 1119 रुपए प्रति शेयर के बीच है। Jio Platforms अपने 30000 करोड़ से ज्यादा के इश्यू साइज से भारतीय बाजार में एक नया इतिहास रचने जा रही है। डिजिटल इंडिया के इस पोस्टर BOY ने महज 10 सालों में देश में डिजिटल क्रांति की इबारत लिखी है। ये सिर्फ एक टेलीकॉम कंपनी नहीं, उससे कहीं बढ़कर है। यह देश का सबसे बड़ा डिजिटल और मोबाइल ब्रॉडबैंड नेटवर्क है।

JIO PLATFORMS के IPO को लेकर बाजार के दिग्गज फुल जोश में हैं। दिग्गज निवेशकों ने इसमें बढ़कर चढ़कर निवेश करने की सलाह दी है। एनाम ग्रुप के को-फाउंडर वल्लभ भंशाली ने कहा है। सिर्फ 10 साल में बेहतरीन कंपनी बनकर तैयार हुई है। रमेश दमानी ने कहा है कि जियो IPO को निवेशक हाथों हाथ लेंगे। उधर देवेन चोकसी ने कहा है कि कंपनी की ग्रोथ बेहतरीन है। इसका मार्केट कैप 4 साल में डबल हो जाएगा।

जियो प्लेटफॉर्म्स IPO पर उदय कोटक ने कहा कि यह दुनिया की अकेली ऐसी कंपनी है जिसके पास प्रोपराइटरी एंड-टू-एंड कनेक्टिविटी (Proprietary End-to-End Connectivity है। समय के साथ लगातार तेज ग्रोथ बनी हुई है।

फिच रेटिंग्स के डायरेक्टर, गिरीश मदान ने कहा है कि जियो प्लेटफॉर्म्स मार्केट लीडर है। आगे ARPU बढ़ाने की काफी गुंजाइश है। कंपनी की बैलेंस शीट दमदार है। कंपनी की नेट डेट टू EBITDA 1x से कम है। यह आगे और नीचे आएगा। कंपनी क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत है।

JIO IPO पर मार्केट एक्सपर्ट राकेश बंसल ने कहा कि जियो IPO के लिए नए डीमैट अकाउंट खुल रहे हैं। वहीं, कंप्लीट सर्किल के गुरमीत चड्ढा ने कहा कि अच्छे वैल्युएशन पर, निवेशकों के लिए इसमें कमाई के अच्छे मौके हैं।

JIO IPO पर SMIFS की राय है कि इसमें निवेशक लंबे वक्त के लिए सब्सक्राइब करें। रेलिगेयर की भी इसमें सब्सक्राइब करने की सलाह है। मोतीलाल ओसवाल का भी JIO IPO पर पॉजिटिव व्यू है।

बोनांजा का कहना है का JIO IPO का वैल्युएशन वाजिब है। यह भारती से डिस्काउंट पर मिल रहा है। अर्निंग ग्रोथ और टैरिफ बढ़ने पर आगे ठीक-ठाक ग्रोथ देखने को मिलेगी। वहीं, मंगलदास केशव का कहना है कि JIO IPO उम्मीद से बेहतर वैल्युएशन पर आय है। IPO प्राइसिंग वाजिब नजर आ रही है।

JIO IPO पर वेंचुरा की राय है कि आगे टैरिफ बढ़ोतरी और प्रीमियमाइजेशन अहम फैक्टर का काम करेंगे। यह भारती के इंडिया टेलीकॉम कारोबार के मुकाबले प्रीमियम पर है।

दिग्गज निवेशकों की राय

इसके साथ ही बाजार के दिग्गज निवेशक भी जियो प्लेटफॉर्म जैसे बड़े IPO को भारतीय बाजार की मजबूती की कहानी कह रहे हैं। सभी ने एक लाइन में कहा निवेशक जियो IPO को हाथों हाथ लेंगे। BSE के मेंबर और बाजार के दिग्गज निवेश रमेश दमानी के मुताबिक जियो के IPO को निवेशक हाथों हाथ लेंगे। जियो के 55 करोड़ ग्राहक हैं जो एक तिहाई भारतीयों को सेवा दे रही है। सिर्फ 10 साल में मुकेश अंबानी ने जियो को IPO के लिए तैयार कर दिया। हैरानी होती है कि भारत में जियो जैसी इतनी बड़ी कंपनी है। मुकेश अंबानी हर बड़े प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करते हैं। मुकेश अंबानी ने 10 साल में जियो को IPO के लिए तैयार किया। निवेशक जियो IPO को हाथों हाथ लेंगे।

HDFC AMC के MD नवनीत मुनोत ने कहा कि भारतीय बाजार में बड़े IPO आ रहे हैं। बड़े IPOs बाजार की मजबूती बता रहे हैं। कंपनियां अरबों डालर जुटाने में कामयाब हो रही हैं। भारतीय बाजार में काफी मजबूती है।10 साल पहले जियो ने बड़ी शुरुआत की। जियो प्लेटफॉर्म अब बड़ी रकम जुटा रहा है।

DRChoksey FinServ के MD,देवेन चौकसी ने कहा कि JIO IPO निवेशकों के लिए बेहतर मौका है। कंपनी का मार्केट कैप 10 लाख करोड़ रुपए है। पिछले कुछ साल में EBITDA ग्रोथ 18% रही। अगले कुछ साल में 20% CAGR ग्रोथ की उम्मीद। अगले 4 साल में इसका EBITDA दोगुना हो सकता है। कंपनी का मार्केट कैप 10 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 20 लाख करोड़ रुपए हो सकता है।

Elixir Equities के डायरेक्टर दीपन मेहता के मुताबिक जियो के IPO का वैल्युएशन काफी अच्छा है और लिस्टिंग पर अच्छे रिटर्न मिलने की उम्मीद है। AI और डाटा सेंटर इंडस्ट्री इसके लिए ग्रोथ का अहम ट्रिगर होंगे। डाटा कंजम्प्शन बढ़ने से इंडस्ट्री ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। जियो IPO को लेकर आउटलुक पॉजिटिव है।

 

 

(डिस्क्लेमर: नेटवर्क 18 मीडिया एंड इनवेस्टमेंट लिमिटेड पर इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट का मालिकाना हक है। इसकी बेनफिशियरी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।)

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Urban Company Share Price : कमजोर नतीजों के बाद आज 8.75% टूटा शेयर, जानिए क्या है ब्रोकरेज की राय

Urban Company Share Price : दूसरी तिमाही में अर्बन कंपनी के नतीजे कमजोर रहे हैं। नतीजों के बाद शेयर में बड़ा एक्सिडेंट दिखा है। सोमवार को इंट्राडे में अर्बन कंपनी के शेयरों में लगभग 8% की भारी गिरावट आई। कंपनी द्वारा सितंबर तिमाही के कंसोलिडेटेड नेट लॉस में सालाना आधार पर बड़ी बढ़ोतरी की रिपोर्ट जारी करने के बाद यह शेयर दबाव में आ गया है। फिलहाल NSE पर अर्बन कंपनी के शेयर 13.82 रुपए यानी 8.74 फीसदी की गिरावट के साथ 144.30 रुपए पर दिख रहे हैं।

इस होम सर्विसेज प्लेटफॉर्म ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में 182.48 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया है। जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह नुकसान 59.33 करोड़ रुपये था। इस अवधि में कंपनी की कामकाजी आय सालाना आधार पर 41.4% बढ़कर 537.29 करोड़ रुपये रही है, जो वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (Q2 FY26) में 380.03 करोड़ रुपये थी। डिलीवर किए गए ऑर्डर्स की संख्या 15.1 मिलियन तक पहुंच गई, जो सालाना आधार पर 103% की बढ़त दिखाता है। जबकि नेट ट्रांजैक्शन वैल्यू (NTV) 39% बढ़कर 1,432 करोड़ रुपये हो गई।

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने अर्बन कंपनी पर अपनी ‘बाय’ (खरीदने की) रेटिंग बरकरार रखी है और इसके टारगेट प्राइस को लगभग 5.3% बढ़ाकर 190 रुपये से 200 रुपये कर दिया है।

ब्रोकरेज का कहना है कि अर्बन कंपनी (UC) ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (2QFY27) में अच्छा प्रदर्शन किया है। इसमें इंडिया कंज्यूमर सर्विसेज (इंस्टाहेल्प को छोड़कर) (ICS) का NTV, एक ऊंचे बेस के बावजूद, सालाना आधार पर 26.3% बढ़ा है, जबकि इंटरनेशनल NTV में सालाना आधार पर 66.9% की ग्रोथ हुई है। एमके ने आगे कहा कि UC के हर सेगमेंट में विकास की काफी संभावनाएं हैं, क्योंकि इनका लोकल नेटवर्क मजबूत है, कोर बिजनेस में इसका एकाधिकार (मोनोपोली) है और अन्य इंटरनेट कंपनियों की तुलना में इसका मार्जिन भी अधिक है।

जमकर कैश होने के बावजूद कंपनी क्यों जुटा रही है फंड?

स्नैबिट अब कंपनी का बड़ा कंपिटीटर बन रहा है। स्नैबिट भी अब तकरीबन अर्बन कंपनी जैसे ही आंकड़े डिलिवर कर रहा है। इसका मतलब है कि इस इंडस्ट्री में बड़ा कंपिटीशन होगा। इससे निपटने के लिए बोर्ड से इक्विटी के जरिए 2500 करोड़ रुपए जुटाने को मंजूरी दी है। इस बीच अर्बन कंपनी के मैनेजमेंट कमेंट्री में कहा गया है कि Q3FY28 में Adj. EBITDA के ब्रेकइवन की उम्मीद है। FY31 में Adj. EBITDA 1,000 करोड़ रुपए के पार जाना संभव है। बोर्ड से नई कैटेगरी रेसिडेंशियल एयर कंडिशनर्स को मंजूरी दी है।

कंपनी की फंड जुटाने की योजना पर बात करते हुए एमके (Emkay) ने कहा कि 25 अरब रुपये तक की यह फंड जुटाने की योजना कोर और नेटिव (Native) ग्रोत, इंस्टाहेल्प (InstaHelp) के ग्रोथ, और चुनिंदा अधिग्रहणों (acquisitions) में मदद करेगी।

ब्रोकरेज ने आगे कहा कि फंड जुटाने से निवेश क्षमता मजबूत होती है, हालांकि पूंजी का इस्तेमाल और इक्विटी डाइल्यूशन (dilution) ऐसे पहलू हैं जिनका वैल्युएशन के समय ध्यान रखना होगा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही के लिए अपने कंसोलिडेटेड एडजस्टेड EBITDA ब्रेक-ईवन के अनुमान और वित्त वर्ष 2031 के लिए 10 अरब रुपये के लक्ष्य को बरकरार रखा है।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।