High Return Stock: इस शेयर ने 2026 में पैसा दोगुना किया है, क्या निवेश करना चाहिए?

High Return Stock: आईनॉक्स इंडिया ने हाई वैल्यू बिजनेस पर फोकस बढ़ाया है। स्ट्रॉन्ग ऑर्डर बुक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मौजूदगी और नए अप्लिकेशंस में एंट्री से कंपनी की ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। कंपनी का शेयर 3 सितंबर को 3.84 फीसदी चढ़कर 2,180 रुपये पर बंद हुआ। इस शेयर ने 2026 में निवेशकों को मालामाल किया है। इस दौरान इसने निवेशकों का पैसा दोगुना कर दिया है।

कपैसिटी बढ़ने से ग्रोथ को मिलेगा सपोर्ट

Inox India कांडला में अपनी कपैसिटी बढ़ा रही है। इससे भी ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। शेयरों में ज्यादा तेजी का असर वैल्यूएशन पर पड़ा है। कंपनी की वैल्यूएशन 2028 में अनुमानित अर्निंग्स का करीब 44 गुना हो गई है। हालांकि, जून तिमाही में साल दर साल आधार पर कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ 8.3 फीसदी रही है। अगर लॉजिस्टिक्स से जुड़े मसले नहीं होते तो रेवेन्यू ग्रोथ ज्यादा रहती।

EBITDA मार्जिन करीब 23.5 फीसदी रहा

मुश्किल के बावजूद कंपनी का EBITDA साल दर साल आधार पर 1.4 फीसदी बढ़कर करीब 90 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन करीब 23.5 फीसदी रहा, जो अच्छा है। साल दर साल आधार पर टैक्स बाद प्रॉफिट (PAT) बगैर बदलाव के 61 करोड़ रुपये रहा। जून तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन बेहतर रहता, क्योंकि 32-35 करोड़ रुपये के इक्विपमेंट डिस्पैच के लिए तैयार हैं।

फ्रेट कॉस्ट में उछाल से इक्विपमेंट की शिपिंग में बाधा

माल ढुलाई की बढ़ती लागत और शिपिंग की सीमित उपलब्धता की वजह से इक्विपमेंट की शिपिंग नहीं हो सकी। कंपनी के मैनेजमेंट ने बताया है कि यूरोपियन कनटेनर रेट्स 3,000-4000 से बढ़कर 8,000-9,000 ड़लर तक पहुंच गए हैं। कुछ ग्राहकों ने ज्यादा फ्रेट रेट्स को देखते हुए डिलीवरी टाल दी है। मैनेजमेंट का कहना है कि यह मुश्किल थोड़े समय के लिए है।

1686 करोड़ रुयये की स्ट्रॉन्ग ऑर्डरबुक

जून तिमाही में कंपनी को 532 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले। इससे कुल ऑर्डरबुक बढ़कर जून के अंत में 1,686 करोड़ रुपये पहुंच गई। इसमें एक्सपोर्ट ऑर्डर्स की 1,140 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी है। कंपनी के लिए एयरोस्पेस नए मौके के रूप में उभरा है। कंपनी को 1,500 क्यूबिक मीटर क्राइजोनिक स्टोरेज टैंक्स के 8 बड़े ऑर्डर्स मिले हैं। उसी ग्राहक से छह अतिरिक्त टैंक के भी ऑर्डर मिले हैं।

सेमीकंडक्टर ईकोसिस्टम में भी पैर जमाने की कोशिश

कंपनी भारत में नए उभरते सेमीकंडक्टर ईकोसिस्टम में भी पैर जमाने की कोशिश कर रही है। इसे धोलेरा में सेमीकंडक्टर फैसिलिटी के लिए स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट इक्विपमेंट के ऑर्डर मिले हैं। मैनेजमेंट ने बताया है कि ये ऑर्डर करीब 30 करोड़ रुपये के हैं। कंपनी के संभावित ग्राहकों में Micron, Foxconn और टाटा जैसी बड़ी कंपनियां शामिल है।

मैनेजमेंट ने 18-20 फीसदी का रेवेन्यू गाइडेंस बनाए रखा

मैनेजमेंट ने FY27 के रेवेन्यू ग्रोथ के 18-20 फीसदी गाइडेंस को बनाए रखा है। एबिड्टा मार्जिन के 21-24 फीसदी गाइडेंस को भी बनाए रखा है। यह इसके बावजूद है कि पहली तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन अनुमान से थोड़ा कमजोर रहा। कंपनी की 1,686 करोड़ रुपये की ऑर्डरबुक से रेवेन्यू को लेकर अगले कई सालों की तस्वीर साफ है।

क्या कोई प्राइवेट कंपनी आपके ITR और EPFO डेटा को एक्सेस कर सकती है? जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है

क्या प्राइवेट कंपनियां आपका इनकम टैक्स रिटर्न या प्रोविडेंट फंड रिकॉर्ड एक्सेस कर सकती हैं? सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से उन आरोपों की जांच करने को कहा है जिनमें यह कहा गया है कि प्राइवेट वेरिफिकेशन कंपनियां लोगों के एंप्लॉयमेंट और फाइनेंशियल जानकारियां एक्सेस कर रही हैं और उनका व्यावसायिक इस्तेमाल कर रही हैं।

आईटीआर और ईपीएफओ को डेटा को संवेदनशील माना जाता है

सरकार ने एक जनहित याचिका पर यह निर्देश जारी किया है। इस याचिका में कहा गया है कि एक ऐसा कमर्शियल ईकोसिस्टम बना है, जिसमें EPFO/UAN Records और PAN से जुड़े फाइनेंशियल डेटा को प्राइवेट कंपनियां एक्सेस कर रही हैं। ऐसे डेटा को काफी संवेदनशील माना जाता है।

याचिकाकर्ता ने प्राइवेट कंपनियों के डेटा के एक्सेस पर सवाल उठाए हैं

सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि किसी कंपनी को ऐसी जानकारियां गैरकानूनी तरीके से एक्सेस करते नहीं पाया है। उसने यह भी नहीं कहा है कि प्राइवेट कंपनियों के पास लोगों के आईटीआर और ईपीएफओ रिकॉर्ड के इस्तेमाल की आजादी है। लेकिन, इस याचिका से एक बड़ा मसले को लेकर सवाल उठे हैं, जो करोड़ों भारतीयों से जुड़ा है।

डेटा एक्सेस के मसले से जुड़े तीन अहम सवाल सामने आए हैं

इस मसले से जुड़े कई सवाल हैं। पहला, सरकारी एजेंसियों के पास लोगों की जो व्यक्तिगत जानकारियां हैं, उनमें से किन जानकारियों का इस्तेमाल प्राइवेट कंपनियां कर सकती हैं? दूसरा, उनके इस्तेमाल का तरीका क्या होगा? तीसरा, क्या वे व्यक्ति विशेष से उसकी इन जानकारियों के इस्तेमाल की इजाजत लेती हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तिगत जानकारियों के इस्तेमाल पर चिंता जताई है

सुप्रीम कोर्ट ने लोगों की संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारियों के कथित दुरुपयोग पर चिंता जताई है। उसने सरकार से इस मामले की जांच करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने कहा कि सरकार इस समस्या पर लगाम लगाने के तरीके पर विचार कर सकती है। वह इस फील्ड के एक्सपर्ट्स की मदद ले सकती है।

याचिकाकर्ता ने कुछ प्राइवेट सर्विसेज के एडवर्टाइजमेंट पर सवाल उठाए हैं

याचिकाकर्ता ने अपनी शिकायत में उन प्राइवेट सर्विसेज का जिक्र किया है, जो कथित रूप से ‘ईपीएफओ पासबुक एपीआई’, ‘फॉर्म26 एपीआई’ और ‘इनकम टैक्स रिटर्न एपीआई’ जैसे प्रो़क्ट्स का विज्ञापन देती हैं। उन्होंने कहा है कि इससे यह सवाल उठता है कि ऐसी संवेदनशील जानकारियां कैसे हासिल या वेरिफाय की जा रही हैं।

Shiprocket Share Price: लगातार दूसरे दिन रॉकेट बने शेयर, IPO में निवेश का मौका चूक गए तो अब क्या करें?

Shiprocket Share Price: शिपरॉकेट के शेयर 20 अगस्त को लगातार दूसरे दिन रॉकेट बन गए। कंपनी के शेयर 19 अगस्त को 35 फीसदी प्रीमियम पर लिस्ट हुए थे। उसके बाद शेयरों में जबर्दस्त तेजी दिखी थी। कारोबार खत्म होने पर शेयर करीब 48 फीसदी तेजी के साथ बंद हुए। आज यानी 20 अगस्त को लगातार दूसरे दिन शेयरों में जबर्दस्त तेजी दिखी। खुलते ही शेयर करीब 8 फीसदी तक उछल गए। हालांकि, बाद में तेजी थोड़ी सुस्त पड़ी। 11:00 बजे शेयर 5.26 फीसदी चढ़कर 150.78 रुपये पर चल रहा था।

गोल्डमैन सैक्स की कंपनी ने किया बड़ा निवेश

Shiprocket के शेयरों में आज (20 अगस्त) को आई तेजी की वजह एक खबर है। खबर है कि गोल्डमैन सैक्स की कंपनी गोल्डमैन सैक्स इंडिया इक्विटी पोर्टफोलियो ने शिपरॉकेट के 40,24,040 शेयर खरीदे हैं। यह ट्रांजेक्शन प्रति शेयर 131 रुपये के प्राइस पर हुआ है। इससे लगातार दूसरे दिन शेयरों को पंख लग गए। जिन निवेशकों को आईपीओ में शेयर एलॉट हुए हैं, वे शेयरों में जबर्दस्त तेजी का जश्न मना रहे है।

आईपीओ को जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिला था

Shiprocket के आईपीओ को निवेशकों का जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिला था। यह इश्यू 99 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ था। आईपीओ 12-14 अगस्त के बीच खुला था। खास बात यह है कि शेयर की लिस्टिंग ग्रे मार्केट के संकेत के मुताबिक रही। कंपनी के शेयर पर ग्रे मार्केट प्रीमियम करीब 36-37 फीसदी चल रहा था।

निवेशक शेयरों में कुछ मुनाफावसूली कर सकते हैं

आनंदराठी शेयर्स के फंडामेंटल रिसर्च हेड नरेंद्र सोलंकी ने कहा कि शिपरॉकेट को इंडिया में ई-कॉमर्स ईकोसिस्टम की स्ट्रक्चरल ग्रोथ का फायदा मिल सकता है। हालांकि, इस मार्केट में काफी प्रतियोगिता है। उन्होंने कहा कि जिन निवेशकों को आईपीओ में शेयर एलॉट हुए हैं, वे कुछ लिस्टिंग गेंस बुक कर सकते हैं। बाकी शेयर वे अपने पास रख सकते हैं। लंबी अवधि में शेयरों का प्रदर्शन अच्छा रह सकता है।

नए इनवेस्टर्स ‘वेट एंड वॉच’ की पॉलिसी अपना सकते हैं

कांतिलाल छगनलाल सिक्योरिटीज में वाइस प्रेसिडेंट महेश एम ओझा ने कहा कि जिन निवेशकों ने आईपीओ में अप्लाई नहीं किया था या जिन्हें अप्लाई करने के बाद भी शेयर एलॉट नहीं हुए, वे ‘वेट एंड वॉच’ यानी इंतजार करो और देखो की पॉलिसी अपना सकते हैं। उन्हें अगली 1-2 तिमाही तक कंपनी के रिजल्ट्स को देखना चाहिए। रेवेन्यू ग्रोथ, ऑपेरेटिंग प्रॉफिट देखने के बाद ही निवेश का फैसला लेना चाहिए।

शिपरॉकेट में टेमासेक और जोमैटो का इनवेस्टमेंट

शिपरॉकेट में टेमासेक और जोमैटो के पैसे लगे हैं। शुरुआत में यह कंपनी शिपिंग सर्विस देती थी। अब इसका फुल-स्टैक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है, जिससे जरिए यह डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर ब्रांड्स से लेकर MSME का शिपिंग सर्विसेज ऑफर करती है। इसके बिजनेस के दो सेगमेंट-कोर बिजनेस और इमर्जिंग बिजनेस हैं।

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कंपनी कई तरह की शिपिंग सर्विसेज ऑफर करती है

कंपनी के कोर बिजनेस में डोमेस्टिक शिपिंग और शिपिंग अप्लिकेशंस आते हैं। इमर्जिंग बिजनेसेज में कार्गो एंड फुलफिलमेंट, क्रॉस-बॉर्डर शिपिंग, एडवर्टाइजिंग एंड मार्केटिंग सॉल्यूशंस, कैपिटल सॉल्यूशंस और हायपर लोकल डिलीवरीज आती हैं। इकोनॉमिक एक्टिविटीज बढ़ने का फायदा कंपनी को मिलेगा।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

 

Gold Outlook: सोने में अगली तेजी में Gen Z का होगा बड़ा हाथ, जानिए WGC की रिपोर्ट क्या कहती है

Gold Outlook: गोल्ड के साथ रिश्ता बदल रहा है। इसमें जेनजी का बड़ा हाथ है। इस बारे में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) की नई रिपोर्ट में बताया गया है। इसमें कहा गया है कि इंडिया में गोल्ड में अगली बड़ी तेजी में सिर्फ ज्वेलरी की खरीदारी नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी, डिजिटल फाइनेंस और न्यू-एज इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट्स का हाथ होगा।

गोल्ड में निवेश के तरीके में आ रहा है बदलाव

WGC की स्वर्णिम उड़ान 20247 में कई दिलचस्प बातें बताई गई हैं। यह रिपोर्ट तब आई है, जब सोने की कीमतों में पिछले कुछ सालों में बड़ी तेजी से लोगों की खरीदारी की आदत में बदलाव आ रहा है। हालांकि, अब भी भारत में लोग ज्वेलरी पर काफी पैसे खर्च कर रहे हैं।

भारत में लोगों के पास 31000 टन सोना

इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लोगों के पास 31,000 टन सोना है। इसकी कीमत करीब 315 लाख करोड़ रुपये (3.4 ट्रिलियन डॉलर) है। इसमें से ज्यादातर सोना घरों में बेकार पड़ा है। इस वजह से भारत में यह सबसे ज्यादा अंडरयूटिलाइज्ड एसेट है। हालांकि, इसके पीछे सोने को लेकर लोगों की पारंपरिक सोच है।

Gen Z गोल्ड को अलग नजरिए से देख रहे

WGC के मुताबिक, 1997 से 2012 के बीच जन्म लेने वाले लोग सोने को सिर्फ विरासत में मिले एसेट के रूप में नहीं देखते हैं। उनका जोर सोने की लिक्विडिटी और डिजिटल एक्सेस जैसी चीजों पर भी है। यही वजह है कि सिर्फ फिजिकल ज्वेलरी के बजाय वे डिजिटल गोल्ड और टेक्नोलॉजी आधारित इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट्स में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

ज्वेलर्स युवा खरीदारों को अट्रैक्ट करने के तरीके तलाश रहे

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि युवा इनवेस्टर्स गोल्ड में निवेश करने से पहले ऑनलाइन रिसर्च करते हैं। इस वजह से ज्वेलर्स इन नए कस्टमर्स को अट्रैक्ट करने के तरीके तलाश रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, 2035 तक जेनजी की कंज्यूमर स्पेंडिंग करीब 2 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती है। इसका असर भविष्य में इंडिया के गोल्ड मार्केट पर दिखेगा।

फाइनेंशियल ईकोसिस्टम का हिस्सा बना रहा गोल्ड

डब्ल्यूजीसी के मुताबिक, इंडिया में गोल्ड की डिमांड अब सिर्फ ज्वेलरी तक सीमित रहने वाली नहीं है। गोल्ड अब फाइनेंशियल ईकोसिस्टम का हिस्सा बन रहा है। इसमें गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम, रिसाइक्लिंग नेटवर्क, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स, डिजिटल गोल्ड और बुलियन बैंकिंग का बड़ा हाथ हो सकता है। इस इंटिग्रेशन से घरों में पड़ा सोना भी इकोनॉमी का हिस्सा बन सकता है।

UPI : क्या यूपीआई से पेमेंट करना अब महंगा हो जाएगा? जानें अपने हर सवाल का जवाब

यूपीआई पेमेंट से जुड़ी कई खबरें आपने देखी होगी। इसकी वजह इससे जुड़े नियमों में कुछ बदलाव है। इन खबरों को देख पेमेंट के लिए रोजाना यूपीआई का इस्तेमाल करने वाले कुछ लोग चिंतित हैं। उन्हें लगता है कि यूपीआई से पेमेंट करना अब महंगा हो जाएगा। क्या सच में ऐसा होने जा रहा है? आइए इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

यूपीआई का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए पेमेंट की सुविधा पूरी तरह से फ्री रहेगी। पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने 7 अगस्त को यह साफ कर दिया था। उसने कहा था कि यूपीआई कंज्यूमर्स के लिए फ्री बना बना रहेगा। साथ ही छोटे दुकानदारों को भी यूपीआई से से पेमेंट लेने पर कोई फीस नहीं चुकानी होगी।

अब सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले यूपीआई पेमेंट प्लेटफॉर्म PhonePe के सीईओ समीर निगम ने भी यह बात साफ कर दी है। उन्होंने इस बारे में सोशल मीडिया ऐप X पर एक पोस्ट किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि यूपीआई पेमेंट्स कंज्यूमर्स के लिए फ्री बना रहेगा। दरअसल, लोकसभा में नया टैक्स अमेंडमेंट बिल पारित होने के बाद इस बारे में कनफ्यूजन बढ़ा है।

कुछ खास यूपीआई ट्रांजेक्शंस पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का प्रस्ताव है। इससे कंज्यूमर्स के बीच कनफ्यूजन बढ़ा है। कई कंज्यूमर्स को लगता है कि उब यूपीआई से पेमेंट करने पर उन्हें फीस चुकानी होगी। हालांकि, पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस बारे में स्थिति स्पष्ट की है। उसने कहा है कि अगर कहीं मर्चेंट सर्विस चार्ज लगता है तो यह मर्चेंट्स और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच का अरेंजमेंट है। इसका मतलब यह नहीं है कि कंज्यूमर्स को डिजिटल पेमेंट के लिए कोई चार्ज देना होगा।

PCI ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई चार्ज लगने वाला होगा तो उसका पेमेंट कमर्शियल अरेंजमेंट के तहत मर्चेंट को करना होगा। यह चार्ज कंज्यूमर्स यानी यूपीआई का इस्तेमाल करने वाले आम आदमी से नहीं लिया जाएगा। दरअसल, टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 के तहत इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के कुछ खास तरीकों पर एमडीआर लगाने का अधिकार सरकार को मिल गया है।

इस बिल के तहत 2,000 रुपये के कुछ खास बिजनेस-डायरेक्टेड यूपीआई ट्रांजेक्शंस पर 0.25 से 0.4 फीसदी चार्ज लगाने का प्रस्ताव है। लेकिन, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को होने वाला पेमेंट इस लेवी के दायरे में नहीं आएगा। इसका मतलब है कि प्रस्तावित फ्रेमवर्क कुछ ट्रांजेक्शंस के लिए मर्चेंट या बिजनेसेज के लिए है।

मर्चें डिस्काउंट रेट (MDR) एक तरह की फीस है, जो डिजिटल पेमेंट से जुड़ी है। आम तौर पर यह फीस मर्चेंट उन कंपनियों को चुकाता है जो ट्रांजेक्शन की प्रोसेसिंग में शामिल होती हैं। जहां तक यूपीआई की बात है तो अभी तक ज्यादातर ट्रांजेक्शंस बगैर एमडीआर के होते रहे हैं। इसका मतलब है कि इनमें मर्चेंट्स को कोई फीस नहीं चुकानी पड़ी है। इस ईकोसिस्टम पर आने वाले खर्च का बोझ बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और दूसरे पार्टिसिपेंट्स उठाते आ रहे हैं।

स्पेसएक्स का 4000 किलो वजनी रॉकेट चांद से टकराया:8,690 kmph की रफ्तार से अंतरिक्ष में घूम रहा था; NASA ने कहा- धरती को खतरा नहीं

इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स का एक बेकाबू रॉकेट चांद की सतह से टकरा गया है। 4 हजार किलो वजनी और करीब 5 मंजिला इमारत जितना बड़ा यह रॉकेट करीब 8,690 किमी/घंटा की रफ्तार से टकराया। नासा ने कहा कि इस टक्कर से पृथ्वी को कोई खतरा नहीं है। हालांकि इस टक्कर की पुष्टि तस्वीरों के आने के बाद होगी। यह बेकाबू टुकड़ा स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट का ऊपरी हिस्सा है। इसे जनवरी 2025 में फ्लोरिडा से अमेरिका और जापान के दो लूनर लैंडर को अंतरिक्ष में भेजने के लिए लॉन्च किया गया था। मिशन पूरा होने के बाद रॉकेट का यह हिस्सा अंतरिक्ष में तैरता रह गया। पिछले 18 महीनों के दौरान पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण की वजह से इसका रास्ता धीरे-धीरे बदल गया। खगोलविदों ने डेटा का अध्ययन करके पहले ही अनुमान लगा लिया था कि यह रॉकेट भटककर सीधे चांद की ओर जा रहा है और उससे टकराएगा। आइंस्टीन क्रेटर के पास टक्कर हुई, दूरबीन से भी देखना मुश्किल यह टक्कर चांद के ‘आइंस्टीन क्रेटर’ के पास हुई। यह क्षेत्र चांद के उस हिस्से में है जहां दिन का उजाला रहता है और जो पृथ्वी से दिखाई देता है। हालांकि, वैज्ञानिकों के मुताबिक इसे आम टेलिस्कोप से देखना नामुमकिन था, क्योंकि टक्कर के वक्त बनी रोशनी बेहद हल्की थी। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के खगोलविद डॉ. मैट बोथवेल का कहना है कि टक्कर के कारण चांद की धूल का एक बड़ा गुबार उठा होगा, जो 100 किलोमीटर तक ऊपर गया होगा और कई मिनटों तक रहा होगा। तस्वीरों के लिए इंतजार करना होगा, ऑर्बिटर जारी करेंगे डेटा फिलहाल जब यह हादसा हुआ, तब चांद का चक्कर लगा रहा कोई भी स्पेसक्राफ्ट सही पोजिशन में नहीं था, इसलिए लाइव तस्वीरें नहीं मिल पाई हैं। दक्षिण कोरिया का ‘दानुरी’ ऑर्बिटर और नासा का ‘लूनर रिकोनिसेंस ऑर्बिटर’ (LRO) आने वाले दिनों में टक्कर वाली जगह के ऊपर से गुजरेंगे और तस्वीरें लेंगे। वैज्ञानिक पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना करके चांद की सतह पर बने नए निशान की पहचान करेंगे। चांद पर पहले से मौजूद है 190 टन कचरा इस टक्कर के बाद चांद पर इंसानों की छोड़ी गई या दुर्घटनाग्रस्त हुई चीजों की संख्या बढ़कर लगभग 3,000 हो गई है। इनका कुल वजन करीब 190 टन हो चुका है। सितंबर 1959 में सोवियत संघ का ‘लूना 2’ चांद की सतह पर पहुंचने वाला पहला मानव निर्मित ऑब्जेक्ट था। इसके अलावा नासा के अकेले अपोलो प्रोग्राम से जुड़ी 796 चीजें चांद पर मौजूद हैं। चांद पर कोई वायुमंडल या पर्यावरण नहीं है, इसलिए इस कचरे से वहां किसी ईकोसिस्टम को नुकसान नहीं पहुंचता। हालांकि, वैज्ञानिक चिंतित हैं कि भविष्य में बढ़ते लूनर ट्रैफिक के कारण ऐतिहासिक अपोलो लैंडिंग साइट्स को नुकसान न पहुंचे और नए स्पेसक्राफ्ट्स के टकराने का जोखिम न बढ़े। NASA और वैज्ञानिकों को इस टक्कर से क्या फायदा होगा? साइंस म्यूजियम की स्पेस हेड लिब्बी जैक्सन के अनुसार, यह वैज्ञानिकों के लिए काफी रोमांचक प्रयोग है क्योंकि रॉकेट की स्पीड, वजन और आकार का डेटा पहले से मौजूद था। आमतौर पर जब कोई प्राकृतिक उल्कापिंड चांद से टकराता है, तो वैज्ञानिकों के पास उसका शुरुआती डेटा नहीं होता। इस टक्कर से बने नए गड्ढे और उड़ी हुई धूल की परत का अध्ययन करके वैज्ञानिक यह समझ सकेंगे कि अरबों साल पहले चांद और हमारे सौर मंडल का निर्माण कैसे हुआ था। इधर ऊपरी हिस्सा टकराया, उधर 18वीं बार उड़ने को तैयार बूस्टर स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट का निचला हिस्सा रीयूजेबल होता है। इसे बूस्टर कहते हैं और लैंडिंग करके धरती पर वापस आ जाता है। जिस जनवरी 2025 वाले मिशन का ऊपरी हिस्सा भटककर चांद से टकराया, उसी रॉकेट के निचले बूस्टर को 10 अगस्त को 18वीं बार लॉन्च किया जाएगा। नॉलेज पार्ट: जानें क्या है स्पेस डैब्रिस और आइंस्टीन क्रेटर… इंसान द्वारा अंतरिक्ष में भेजे गए रॉकेट्स के छूटे हुए टुकड़े, निष्क्रिय सैटेलाइट्स और मलबे को स्पेस डैब्रिस कहा जाता है। वहीं चंद्रमा के पश्चिमी किनारे पर स्थित एक बड़ा गड्ढा है, जिसका व्यास करीब 170 किलोमीटर है। इसे आइंस्टीन क्रेटर नाम दिया गया है। —————————————- ये खबर भी पढ़े… हजारों वॉट्सएप अकाउंट अचानक बंद, मैसेज आया- अंडर रीव्यू:बिना वार्निंग सभी फीचर्स ब्लॉक, कंपनी बोली- कभी-कभी गलती हो जाती है मैसेजिंग एप वॉट्सएप ने भारत समेत कुछ अन्य देशों में हजारों यूजर्स के अकाउंट 24 घंटे के लिए रीव्यू में डाल दिए हैं। इस दौरान एप के सभी मैसेजिंग और कॉलिंग फीचर्स को ब्लॉक कर दिया गया। पूरी खबर पढ़े…

ग्लो झील ने रचा इतिहास! अरुणाचल प्रदेश को मिली पहली रामसर साइट

अरुणाचल प्रदेश के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य के लोहित जिले में ग्लो झील को भारत की 101वीं रामसर साइट का दर्जा मिला है। यह उपलब्धि राज्य के लिए बेहद खास मानी जा रही है और इससे अरुणाचल प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।

ग्लो झील (Glow Lake)

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अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में स्थित ग्लो झील को रामसर साइट घोषित किया गया है। यह राज्य की पहली वेटलैंड है, जिसे रामसर कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। यह उपलब्धि अरुणाचल प्रदेश के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रामसर साइट बनने का मतलब है कि यह झील पर्यावरण और जैव-विविधता के लिहाज से बेहद खास है। अब इस प्राकृतिक धरोहर की सुरक्षा और संरक्षण पर पहले से ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। इससे आने वाले समय में झील को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

 

रामसर साइट (Ramsar Site)

Glow Lake - A Unique Destination With Friendly Atmosphere

रामसर साइट उन वेटलैंड यानी आर्द्रभूमियों को कहा जाता है, जिनका पर्यावरण और बायोडाइवर्सिटी के लिए विशेष महत्व होता है। इन जगहों को इंटरनेशनल लेवल पर संरक्षण के लिए चुना जाता है। ऐसी जगहों पर कई दुर्लभ पौधे, पक्षी और वन्यजीव रहते हैं। साथ ही ये जल संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। इसलिए इनकी सुरक्षा पूरी दुनिया के लिए जरूरी मानी जाती है।

 

मीठे पानी की झील (Freshwater lake)

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ग्लो झील ऊंचाई पर मीठे पानी की झील है। इसमें पहाड़ों से निकलने वाली बारहमासी जलधाराओं का साफ पानी आता है। झील चारों ओर से घने जंगलों और प्राकृतिक हरियाली से घिरी हुई है, जिससे यहां का वातावरण बेहद शांत और सुंदर दिखाई देता है। इस इलाके में 150 से ज्यादा तरह के पेड़ और 49 प्रकार के ऑर्किड पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसे पूर्वी हिमालय का एक बायोडाइवर्सिटी हॉटस्पॉट माना जाता है।

 

पर्यावरण के लिए जरूरी (Importance for Environment)

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ग्लो झील केवल एक खूबसूरत टूरिस्ट डेस्टिनेशन नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी जरुरी है। यह झील पानी को सुरक्षित रखने, आसपास की नदियों में जल प्रवाह बनाए रखने और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। इसके अलावा यह कार्बन को संग्रहित करने में भी भूमिका निभाती है, जिससे जलवायु परिवर्तन के इफेक्ट को कम करने में मदद मिलती है। साइंटिस्ट भी इस झील को महत्वपूर्ण मानते हैं।

 

लोगों और टूरिस्म को फायदा (Benefits for Local Communities and Tourism)

रामसर साइट का दर्जा मिलने के बाद इस एरिया में इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे देश-विदेश से ज्यादा टूरिस्ट यहां आ सकते हैं, जिससे यहां के लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर मिलेंगे। लोकल आदिवासी समुदाय अपनी संस्कृति और प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए टूरिस्म से जुड़ सकेंगे। इससे इलाके का डेवेलप भी होगा और लोगों की आजीविका भी बेहतर होगी।

संरक्षण और रिसर्च (Conservation and Research)

रामसर साइट बनने के बाद ग्लो झील के संरक्षण के लिए विशेष प्रबंधन योजनाएं तैयार की जाएंगी। इसके साथ ही इस क्षेत्र को बेहतर कानूनी सुरक्षा और इंटरनेशनल एक्सपर्ट की टेक्निकल सलाह भी मिल सकेगी। भविष्य में यहां साइंटिस्ट रिसर्च, पर्यावरण अध्ययन और बायोडाइवर्सिटी पर निगरानी के लिए फंड मिलने की संभावना भी बढ़ जाएगी।

 

प्राकृतिक धरोहर की रक्षा (Protection of natural heritage)

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू (Pema Khandu) ने ग्लो झील को रामसर साइट का दर्जा मिलने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह राज्य के लिए गर्व की बात है और इससे बायोडाइवर्सिटी कंजर्वेशन को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस उपलब्धि से पर्यावरण संरक्षण के साथ ही आने वाली जनरेशन भी राज्य की इस अनमोल प्राकृतिक धरोहर की रक्षा के लिए प्रेरित होंगी।