PM VBRY: पहली नौकरी पर ₹15,000 का तोहफा! जानिए EPFO की इस खास स्कीम के बारे में

PM Viksit Bharat Rozgar Yojana PM VBRY: फॉर्मल सेक्टर में पहली बार नौकरी शुरू करने वाले युवाओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से बड़ी खुशखबरी है। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के तहत पहली बार नौकरी जॉइन करने वाले योग्य कर्मचारियों को ₹15,000 तक का इंसेंटिव दिया जा रहा है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के माध्यम से संचालित इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को फॉर्मल रोजगार से जोड़ना और ईपीएफ (EPF) सिस्टम में उनका स्वागत करना है।

वैसे यह ₹15,000 का इंसेंटिव सभी को एकमुश्त या खुद-ब-खुद नहीं मिलेगा। इसके लिए सरकार और ईपीएफओ ने कुछ जरूरी शर्तें, सैलरी सीमा और सर्विस पीरियड तय किया है।

कब से कब तक की नौकरियों पर मिलेगा फायदा?

यह योजना 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच सर्जित होने वाली नई नौकरियों पर लागू होगी। अगर कर्मचारी का मासिक ईपीएफ वेतन ₹1 लाख प्रति माह तक है, तो वह इस योजना के तहत योग्य माना जाएगा। इंसेंटिव की राशि कर्मचारी के 1 महीने के ईपीएफ वेज के बराबर (अधिकतम ₹15,000 की सीमा तक) होगी।

कौन है ₹15,000 इंसेंटिव के लिए योग्य?

PM-VBRY के ‘पार्ट-ए’ के तहत इंसेंटिव पाने के लिए कर्मचारी को पहली बार ईपीएफ सदस्य बनना अनिवार्य है। पात्रता की मुख्य शर्तें नीचे टेबल में दी गई हैं:

पात्रता की शर्तइसका क्या मतलब है?
पहली बार EPF मेंबरशिपकर्मचारी 1 अगस्त 2025 से पहले कभी भी ईपीएफ का अंशदान करने वाला सदस्य (छूट प्राप्त पीएफ ट्रस्ट समेत) नहीं होना चाहिए।
जॉइनिंग की तारीख नौकरी में कार्यभार संभालने की तिथि 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच होनी चाहिए।
मासिक सैलरी कर्मचारी का मासिक वेतन ₹1 लाख तक होना चाहिए (योजना की परिभाषा के अनुसार)।
सर्विस की अवधिपहली किस्त के लिए 6 महीने और दूसरी किस्त के लिए 12 महीने की निरंतर सेवा आवश्यक है।
एंप्लॉयर कम्प्लायंसजिस कंपनी/संस्था में काम कर रहे हैं, उसने ईपीएफओ में जरूरी रिपोर्टिंग और कंट्रीब्यूशन (ECR) दाखिल किया हो।

 कैसे मिलेगी ₹15,000 की रकम?

यह इंसेंटिव कर्मचारियों को सीधे दो किस्तों में दिया जाएगा:

किस्तजरूरी शर्त  अधिकतम राशि
पहला किस्त निरंतर 6 महीने की योग्य सेवा पूरी होने पर ₹7,500
दूसरी किस्त 12 महीने की सेवा और फाइनेंशियल लिटरेसी प्रोग्राम पूरा करने परबाकी बची राशि (कुल ₹15,000 तक)

ध्यान दें: इंसेंटिव की राशि योग्य सैलरी के आधार पर तय होगी, इसलिए हर किसी को फ्लैट ₹15,000 नहीं मिलेंगे। इसके अलावा, दूसरी किस्त तुरंत कैश में निकालने योग्य नहीं हो सकती है; गाइडलाइंस के मुताबिक इसे किसी उपयुक्त सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट या डिपॉजिट अकाउंट में तय समय के लिए रखा जा सकता है।

फाइनेंशियल लिटरेसी कोर्स क्यों है जरूरी?

दूसरी किस्त पाने के लिए फाइनेंशियल लिटरेसी प्रोग्राम को पूरा करना अनिवार्य बनाया गया है। 6 महीने की नौकरी पूरी होने पर पहली किस्त मिल जाएगी, लेकिन पूरे ₹15,000 पाने के लिए कर्मचारी को 12 महीने की नौकरी के साथ-साथ इस कोर्स को भी पूरा करना होगा।

इसके लिए कर्मचारी PM-VBRY के ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर पूरी गाइडेंस ले सकते हैं। पोर्टल पर यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) जनरेट करने और यूएएन-आधार लिंकिंग से जुड़ी जानकारियां भी उपलब्ध हैं।

पैसा बैंक खाते में कैसे आएगा?

सरकार ने साफ किया है कि पार्ट-ए के तहत इंसेंटिव का भुगतान सीधे कर्मचारी के आधार-सीडेड बैंक अकाउंट (DBT) में आधार ब्रिज पेमेंट सिस्टम के जरिए किया जाएगा। इसलिए कर्मचारियों को अपने बैंक खाते और यूएएन को आधार से लिंक रखना जरूरी है।

एंप्लॉयर्स के लिए अलग लाभ

इस योजना में कंपनियों/नियुक्तियों के लिए भी अलग प्रावधान (‘पार्ट-बी’) है, जहां एंप्लॉयर को हर नए योग्य कर्मचारी पर ₹3,000 प्रति माह तक का इंसेंटिव मिल सकता है। इसे कर्मचारियों के ₹15,000 वाले व्यक्तिगत इंसेंटिव से जोड़कर न देखें।

आपके PF के पैसे का क्या होता है? जानिए EPFO कहां इन्वेस्ट करता है और कैसे तय होता है ब्याज

Where EPFO invests PF money: नौकरीपेशा लोगों की सैलरी से हर महीने प्रोविडेंट फंड (PF) के नाम पर जो कटौती होती है, उसे हम भविष्य की सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार मानते हैं। जितनी रकम आपकी सैलरी से कटती है, उतना ही योगदान आपकी कंपनी भी आपके खाते में जमा करती है।

लेकिन क्या कभी आपने यह जानने की कोशिश की है कि आपकी तिजोरी में जमा होने वाले करोड़ों-अरबों रुपये आखिर कहां जाते हैं? क्या यह पैसा किसी बैंक में रखा रहता है या कहीं और निवेश होता है? कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) आपके इस पैसे को सुरक्षित रखने और उस पर शानदार रिटर्न (जैसे हालिया 8.25% ब्याज) देने के लिए क्या रणनीति अपनाता है, आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

EPFO आपके पैसे का क्या करता है?

EPFO कोई साधारण बैंक नहीं है, बल्कि भारत के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन काम करने वाला एक बड़ा वैधानिक निकाय है। कर्मचारियों के इस विशाल फंड के प्रबंधन की जिम्मेदारी सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) के पास होती है। बोर्ड के तय नियमों और सुरक्षा मानकों के तहत इस पैसे को देश के अलग-अलग वित्तीय और सरकारी साधनों में निवेश किया जाता है। इस निवेश से होने वाली कमाई से ही आपके पीएफ खाते में हर साल ब्याज का पैसा भेजा जाता है।

कहां-कहां होता है पीएफ का निवेश?

सरकार के तय दिशा-निर्देशों के मुताबिक, ईपीएफओ निवेशकों के पैसे की सुरक्षा और बेहतर रिटर्न के बीच संतुलन बनाने के लिए फंड को दो मुख्य हिस्सों में बांटता है:

  1. सुरक्षित डेट इंस्ट्रूमेंट्स: लगभग 85% तक
  2. इक्विटी यानी शेयर बाजार (Equity – ETFs): 15% तक

पोर्टफोलियो श्रेणी संभावित आवंटन % मुख्य साधन
सरकारी प्रतिभूतियां (G-Secs)45% – 65% केंद्र सरकार के बॉन्ड्स, स्टेट डेवलपमेंट लोन (SDLs)
कॉरपोरेट बॉन्ड्स व डेट20% – 45%PSUs, सरकारी वित्तीय संस्थानों व सुरक्षित कॉरपोरेट बॉन्ड्स
इक्विटी (शेयर बाजार) 5% – 15%केवल इंडेक्स आधारित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs – Nifty 50, Sensex)
शॉर्ट-टर्म डेट/मनी मार्केट0% – 5% लिक्विडिटी और तात्कालिक नकदी प्रबंधन के लिए ट्राइ-पार्टी रेपो (TREPS)

85% पैसा जाता है पूरी तरह सुरक्षित सरकारी डेट में

ईपीएफओ अपने पास आने वाले कुल फंड का करीब 85 हिस्सा ऐसी जगहों पर लगाता है जहां डूबने का जोखिम न के बराबर होता है:

सरकारी बॉन्ड्स और स्टेट डेवलपमेंट लोन: ईपीएफओ का एक बहुत बड़ा हिस्सा केंद्र और राज्य सरकारों की विकास योजनाओं के बॉन्ड्स में लगा होता है। इससे देश का बुनियादी ढांचा (सड़कें, बिजली, रेलवे) मजबूत होता है और पीएफ के लिए तयशुदा रिटर्न सुनिश्चित होता है।

PSU के कॉरपोरेट बॉन्ड्स: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और अन्य महारत्न कंपनियों के सुरक्षित डेट सिक्योरिटीज में भी यह पैसा निवेश किया जाता है।

15% हिस्सा शेयर बाजार में: क्या आपका पैसा जोखिम में है?

साल 2015 से पहले ईपीएफओ शेयर बाजार में निवेश नहीं करता था। लेकिन कम ब्याज दरों की चुनौती से निपटने और रिटर्न बढ़ाने के लिए सरकार ने अगस्त 2015 से इक्विटी में 5% से 15% तक निवेश करने की अनुमति दी।

सीधे शेयरों की खरीद नहीं: ईपीएफओ कभी भी किसी कंपनी विशेष के शेयर सीधे बाजार से नहीं खरीदता।

केवल इंडेक्स ETFs का सहारा: यह निवेश केवल BSE Sensex और NSE Nifty-50 जैसे शीर्ष सूचकांकों को ट्रैक करने वाले ETFs के जरिए किया जाता है, जिससे जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।

ईपीएफओ कैसे तय करता है आपका सालाना ब्याज?

वित्तीय वर्ष के दौरान डेट बॉन्ड्स से मिलने वाला तय ब्याज और इक्विटी (ETFs) की बिक्री से हुआ मुनाफा जोड़ा जाता है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) सभी आंकड़ों का विश्लेषण कर ब्याज दर का प्रस्ताव तैयार करता है। वित्त मंत्रालय की मुहर लगने के बाद तय ब्याज दर कर्मचारियों के पीएफ खातों में क्रेडिट कर दी जाती है।

PF खाते से कब और कितनी बार निकाल सकते हैं एडवांस पैसा? जानिए मेडिकल, शादी, मकान और पढ़ाई के लिए क्या हैं नियम

EPFO Advance Withdrawal Rules: अगर आप कहीं नौकरी करते हैं, तो हर महीने आपकी सैलरी से एक तय हिस्सा कटता है। जितनी रकम आपकी सैलरी से कटती है, उतनी ही रकम आपकी कंपनी भी आपके प्रोविडेंट फंड यानी PF खाते में जमा करती है। यह जमा पैसा आपकी रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा सहारा बनता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि जरूरत पड़ने पर आप रिटायरमेंट से पहले भी अपने पीएफ खाते से एडवांस पैसा निकाल सकते हैं?

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने पीएफ एडवांस से जुड़े नियमों को काफी आसान और पारदर्शी बना दिया है। नए नियमों (EPF Scheme, 2026) के तहत आंशिक निकासी के लिए न्यूनतम मेंबरशिप की अवधि को घटाकर 12 महीने कर दिया गया है।

किस काम के लिए कितनी बार निकाल सकते हैं पीएफ का पैसा?

ईपीएफओ ने विभिन्न जरूरतों को तीन मुख्य श्रेणियों- जरूरी जरूरतें, मकान से जुड़ी जरूरतें और विशेष परिस्थितियां में बांटा है:

निकासी का कारण कितनी बार निकाल सकते हैं एडवांस?
इलाज/मेडिकल जरूरतेंकोई सीमा नहीं (जितनी बार चाहें निकाल सकते हैं)
बच्चों की पढ़ाईमेंबरशिप के दौरान कुल 10 बार
शादी (स्वयं या बच्चों की)मेंबरशिप के दौरान कुल 5 बार
मकान/प्लाट/होम लोनमेंबरशिप के दौरान कुल 5 बार
विशेष परिस्थितियांएक वित्तीय वर्ष में 2 बार तक

1. मेडिकल इमरजेंसी के लिए निकासी

अगर आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को अचानक इलाज के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है, तो आप पीएफ से एडवांस निकाल सकते हैं। मेडिकल इमरजेंसी के लिए निकासी की कोई अधिकतम सीमा नहीं रखी गई है।

2. बच्चों की पढ़ाई और शादी के लिए

बच्चों की उच्च शिक्षा के खर्चों को पूरा करने के लिए आप पूरी नौकरी (मेंबरशिप) के दौरान 10 बार तक एडवांस निकाल सकते हैं। वहीं, अगर परिवार में या खुद की शादी का खर्च उठाना है, तो इसके लिए 5 बार तक निकासी की अनुमति दी गई है।

3. मकान खरीदने, बनाने या होम लोन चुकाने के लिए

अगर आप नया घर या प्लॉट खरीदना चाहते हैं, घर का निर्माण कराना चाहते हैं, घर का रेनोवेशन कराना चाहते हैं या पुराने होम लोन की किस्त चुकाना चाहते हैं, तो आप अपने पीएफ खाते का इस्तेमाल कर सकते हैं। आवास से जुड़ी जरूरतों के लिए आप 5 बार तक एडवांस पैसा निकाल सकते हैं।

4. विशेष परिस्थितियों के लिए

केंद्रीय बोर्ड द्वारा अधिसूचित कुछ विशेष या आपातकालीन परिस्थितियों में भी कर्मचारियों को राहत दी जाती है। ऐसी स्थिति में कर्मचारी एक वित्तीय वर्ष में दो बार एडवांस निकाल सकते हैं।

आप अपने पीएफ से कितना पैसा निकाल सकते हैं?

ईपीएफओ के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अगर आपकी मेंबरशिप को 12 महीने पूरे हो चुके हैं, तो आप अपने पीएफ बैलेंस का 75% तक एडवांस निकाल सकते हैं। इस बैलेंस में आपका अंशदान, कंपनी का अंशदान और उस पर मिला ब्याज शामिल होता है।

पीएफ एडवांस निकालने से पहले अपनी पात्रता की जांच जरूर कर लें। इसके लिए आप सीधे ईपीएफओ के आधिकारिक मेम्बर सेवा पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं।

EPS Pension: ₹25,000 सैलरी पर कितनी मिलेगी पेंशन? जानिए 50, 58 और 60 साल की उम्र पर पूरा हिसाब

EPS Pension Calculation: नौकरीपेशा कर्मचारियों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि उनकी मौजूदा सैलरी के हिसाब से रिटायरमेंट के बाद कितनी ईपीएस पेंशन मिलेगी। अगर आपकी सैलरी 25,000 रुपये प्रति महीना है, तो हो सकता है कि आप यही उम्मीद कर रहे हों कि पेंशन की गणना भी इसी रकम पर होगी। वैसे, EPFO के मानक नियमों के अनुसार, पेंशन योग्य वेतन की सीमा अधिकतम 15,000 रुपये प्रति महीना तय की गई है।

इसके अलावा, आप किस उम्र में पेंशन लेना शुरू करते हैं, इसका असर भी मिलने वाली मासिक पेंशन पर सीधे तौर पर पड़ता है। कर्मचारी चाहें तो 50 साल की उम्र से अर्ली पेंशन ले सकते हैं, 58 की उम्र में नॉर्मल पेंशन पा सकते हैं या फिर 58 के बाद इसे टालकर ज्यादा पेंशन हासिल कर सकते हैं। आइए समझते हैं इसका पूरा गणित।

₹25,000 सैलरी का गणित कैसे तय होता है?

मानक ईपीएस फॉर्मूले में दो मुख्य चीजें इस्तेमाल होती हैं पेंशन योग्य वेतन और पेंशन योग्य सेवा। मानक नियमों के तहत पेंशन योग्य वेतन पर 15,000 रुपये की कैपिंग लागू होती है।

पेंशन का फॉर्मूला: (पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा) ÷ 70

2 साल का वेटेज नियम: अगर किसी कर्मचारी ने कम से कम 20 साल की पेंशन योग्य सेवा पूरी की है और वह 58 वर्ष की उम्र में रिटायर होता है, तो उसकी सेवा अवधि में 2 साल का बोनस/वेटेज जोड़ा जाता है।

मान लीजिए एक कर्मचारी की सैलरी ₹25,000 है और उसकी सेवा अवधि 30 साल है। मानक ₹15,000 की सीलिंग के तहत 58 साल की उम्र में पेंशन की गणना इस प्रकार होगी:

कुल सेवा वर्ष = 30 वर्ष + 2 वर्ष (वेटेज) = 32 वर्ष

मासिक पेंशन = (₹15,000 × 32) ÷ 70 = लगभग ₹6,857 प्रति महीना।

अगर 50 साल की उम्र में ही ले ली पेंशन

ईपीएस नियमों के अनुसार, अगर किसी सदस्य ने कम से कम 10 साल की सेवा पूरी कर ली है, तो वह 50 वर्ष की उम्र से ही ‘अर्ली पेंशन’ लेने का हकदार होता है। वैसे, इसका नुकसान यह है कि 58 वर्ष से जितने साल पहले आप पेंशन शुरू करेंगे, प्रति वर्ष 4 प्रतिशत की स्थायी कटौती की जाएगी।

50 साल की उम्र में पेंशन शुरू करने का मतलब है 58 साल की सामान्य उम्र से 8 साल पहले पेंशन लेना।

कुल कटौती = 8 साल × 4% = 32 प्रतिशत की कटौती।

₹6,857 की मूल पेंशन पर 32% की कटौती लागू करने के बाद पेंशन लगभग ₹4,663 प्रति महीना रह जाएगी।

(नोट: अगर 55 साल की उम्र में पेंशन ली जाए तो 12% और 56 की उम्र में 8% की कटौती होगी।)

58 साल की सामान्य उम्र पर पेंशन

ईपीएस के तहत 58 वर्ष की आयु को सामान्य पेंशन योग्य आयु माना जाता है। अगर 30 साल की कुल सेवा अवधि के साथ 15,000 रुपये की मानक सीलिंग पर पेंशन की गणना की जाए, तो 58 साल की उम्र में सदस्य को लगभग ₹6,857 प्रति महीना की पेंशन मिलेगी।

अगर 60 साल तक टाल दी पेंशन

सदस्य के पास 58 वर्ष की आयु के बाद भी पेंशन को टालने का विकल्प होता है। ईपीएस नियमों के तहत, 58 साल के बाद पेंशन टालने पर प्रति पूर्ण वर्ष 4 प्रतिशत का अतिरिक्त लाभ मिलता है।

अगर कोई कर्मचारी 2 पूरे वर्षों के लिए यानी 60 साल की उम्र तक पेंशन टालता है, तो उसे 8 प्रतिशत (2 × 4%) का इजाफा मिलेगा। ऐसे में ₹6,857 की मासिक पेंशन बढ़कर लगभग ₹7,406 प्रति महीना हो जाएगी।

उम्र के हिसाब से पेंशन का तुलनात्मक चार्ट

EPS Pension Calculation उम्र के हिसाब से पेंशन का तुलनात्मक चार्ट

क्यों अलग हो सकती है आपकी वास्तविक पेंशन?

केवल 25,000 रुपये की सैलरी से ही आपकी अंतिम ईपीएस पेंशन तय नहीं होती है। सदस्य का वास्तविक पेंशन योग्य वेतन और कुल सेवा अवधि इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं।

इसके अलावा, जिन पात्र कर्मचारियों ने हायर पेंशन का विकल्प चुना है और उसकी सभी शर्तों को पूरा करते हैं, उनकी पेंशन की गणना 15,000 रुपये की मानक सीलिंग से अलग (उनकी वास्तविक बेसिक सैलरी के आधार पर) की जाती है। इसलिए, अपनी सेवानिवृत्ति की योजना बनाने से पहले ईपीएफओ के रिकॉर्ड में दर्ज अपने पेंशन योग्य वेतन और सेवा विवरण की जांच जरूर कर लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: क्या ₹25,000 सैलरी पाने वाले कर्मचारी को इसी राशि के आधार पर ईपीएस पेंशन मिल सकती है?

मानक गणना के तहत ऐसा नहीं होता है। सामान्य ईपीएस नियमों में पेंशन योग्य वेतन की सीमा ₹15,000 ही रहती है। हालांकि, हायर पेंशन का विकल्प चुनने वाले पात्र मामलों में नियम अलग होते हैं।

Q2: 58 साल की उम्र में 30 साल की सर्विस पर कितनी पेंशन बनेगी?

₹15,000 के मानक पेंशन योग्य वेतन और 2 साल के वेटेज नियम के आधार पर, 30 साल की सर्विस पर लगभग ₹6,857 प्रति महीना पेंशन मिलेगी।

Q3: 50 साल की उम्र में ईपीएस पेंशन लेने पर क्या होता है?

58 साल की उम्र से जितने साल पहले आप पेंशन लेंगे, हर साल के हिसाब से 4% की स्थायी कटौती होगी। 50 साल की उम्र में लेने पर पेंशन की रकम घटकर लगभग ₹4,663 प्रति महीना रह जाएगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अब मिलेगी ₹12,500 मंथली पेंशन! वेज सीलिंग हाइक के बाद EPS नियमों पर EPFO ने दिया ये बड़ा अपडेट

EPFO Pension Rules: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने अनिवार्य कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया है। इस फैसले से कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद ₹12,500 तक की मंथली पेंशन का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, इस कदम से देश के 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को पेंशन और सामाजिक सुरक्षा का फायदा मिलेगा।

इसी बीच पेंशन पात्रता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच EPFO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट जारी कर कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) की सदस्यता के नए नियमों को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है।

EPFO ने EPS सदस्यता के लिए क्या नियम तय किए हैं?

EPFO के अनुसार, पेंशन योजना (EPS) में शामिल होने के लिए दो मुख्य शर्तें और नियम तय किए गए हैं:

सैलरी ₹25,000 या उससे कम होने पर: अगर किसी कर्मचारी का मूल वेतन और महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर ₹25,000 या उससे कम है, तो उसके लिए EPS की सदस्यता अनिवार्य है और उसकी सैलरी से पेंशन अंशदान काटा जाएगा।

सैलरी ₹25,000 से अधिक होने पर: अगर किसी नए कर्मचारी का मासिक वेतन ₹25,000 से अधिक है और वह पहले कभी EPS का सदस्य नहीं रहा है, तो वह EPS का पात्र नहीं होगा और उसके वेतन से EPS के लिए कोई कटौती नहीं की जाएगी।

(नोट: इसका मतलब यह है कि केवल सैलरी का आंकड़ा ही पात्रता तय नहीं करता, बल्कि कर्मचारी का पुराना EPS रिकॉर्ड भी यह तय करने में अहम भूमिका निभाता है कि वह पेंशन पाने का हकदार है या नहीं।)

EPF और EPS में कैसे बंटता है एंप्लॉयर का योगदान?

नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए PF और पेंशन दो अलग-अलग घटक हैं। नियम के मुताबिक कंपनी कर्मचारी के वेतन का कुल 12% हिस्सा ईपीएफ फंड में योगदान करती है। इस 12% योगदान को दो भागों में बांटा जाता है:

8.33% हिस्सा: कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जमा होता है।

शेष 3.67% हिस्सा: कर्मचारी के भविष्य निधि (EPF) खाते में जमा किया जाता है।

कैलकुलेशन का गणित: अगर किसी कर्मचारी की पेंशन योग्य सैलरी ₹25,000 प्रति माह है, तो कंपनी का कुल 12% योगदान ₹3,000 बनता है। इसमें से:

EPS (पेंशन फंड): 8.33% के हिसाब से ₹2,082.50 जाएंगे।

EPF (फंड खाता): बचा हुआ ₹917.50 ईपीएफ खाते में जमा होगा।

EPS अंशदान न कटने या गलत कटने पर क्या करें?

EPFO ने कर्मचारियों को सलाह दी है कि अगर ₹25,000 या उससे कम सैलरी होने के बावजूद उनका EPS अंशदान नहीं काटा जा रहा है, या अपात्र होने के बाद भी कटौती की जा रही है, तो वे ये कदम उठाएं:

पहले नियोक्ता से संपर्क करें: अपने HR या सैलरी विभाग से संपर्क करके अपनी पिछली EPS सदस्यता हिस्ट्री और पात्रता की जांच करवाएं।

EPFiGMS पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें: अगर नियोक्ता स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होता है, तो कर्मचारी ईपीएफओ के आधिकारिक EPFiGMS पोर्टल पर जाकर अपनी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

हर महीने मिलेगी ₹3,000 की गारंटीड पेंशन, दुकानदारों और व्यापारियों के लिए है ये खास स्कीम, ऐसे करें अप्लाई

NPS for Traders Scheme Update: अगर आप एक छोटे व्यापारी, दुकानदार या सेल्फ-एंप्लॉयड हैं और बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, तो आपके लिए बड़ी खबर है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने व्यापारियों और दुकानदारों से ‘व्यापारियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना’ में तुरंत रजिस्ट्रेशन कराने की अपील की है।

इस सरकारी पेंशन योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि 60 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद लाभार्थी को हर महीने ₹3,000 यानी सालाना ₹36,000 की न्यूनतम पक्की पेंशन दी जाती है। आइए जानते हैं कि इस योजना का लाभ कौन-कौन उठा सकता है और इसके लिए आवेदन की क्या प्रक्रिया है।

NPS Traders Scheme: क्या है योजना की सबसे बड़ी खासियत?

व्यापारियों और दुकानदारों के लिए शुरू की गई इस पेंशन योजना का उद्देश्य उन लोगों को बुढ़ापे में वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है, जो ईपीएफओ जैसी किसी औपचारिक रिटायर्ड पेंशन व्यवस्था के दायरे में नहीं आते हैं।

50% योगदान सरकार का: यह एक स्वैच्छिक और सह-अंशदायी योजना है। इसमें जितना योगदान व्यापारी जमा करेगा, ठीक उतनी ही 50% राशि केंद्र सरकार अपनी जेब से जमा करेगी।

मामूली मासिक निवेश: आपकी उम्र के हिसाब से आपको हर महीने महज ₹55 से ₹200 तक का योगदान देना होता है।

गारंटीड रिटर्न: 60 साल की उम्र पूरी होते ही आपको आजीवन ₹3,000 प्रति माह की एश्योर्ड पेंशन मिलना शुरू हो जाएगी।

NPS-Traders: मुख्य पात्रता और विशेषताएं

NPS-Traders: मुख्य पात्रता और विशेषताएं

कैसे करें आवेदन और कहां कराएं रजिस्ट्रेशन?

इस योजना में खुद को रजिस्टर कराना बेहद आसान है:

जन सेवा केंद्र (CSC): आप अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर आधार कार्ड और बचत बैंक खाते के विवरण के साथ आवेदन कर सकते हैं।

ऑनलाइन पोर्टल: योजना के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर भी खुद से सेल्फ-एनरोलमेंट किया जा सकता है।

आधिकारिक आंकड़े: सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 26 नवंबर 2025 तक व्यापारियों और स्व-रोजगार व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना के तहत 60,538 लोग पंजीकृत हो चुके हैं।

किन बातों का ध्यान रखना है जरूरी?

वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, असंगठित क्षेत्र और छोटे दुकानदारों को पेंशन सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए यह एक बेहद प्रभावी कदम है। फाइनेंशियल फर्म Floatr के सह-संस्थापक अमित एचएल का कहना है, ‘आज के समय में ₹3,000 की मासिक पेंशन का कुछ मूल्य हो सकता है, लेकिन आज से दो-तीन दशक बाद महंगाई के कारण इसकी क्रय शक्ति कम हो जाएगी। इसलिए, जैसे-जैसे योजना आगे बढ़े, सरकार को समय-समय पर इस पेंशन राशि की समीक्षा करके इसे बढ़ाने पर भी विचार करना चाहिए ताकि यह लंबी अवधि में भी सार्थक बनी रहे।’

EPF New Rules: अगर आपकी बेसिक सैलरी ₹40,000 या ₹50,000 है तो ईपीएफ के नए नियमों का असर किस तरह पड़ेगा?

EPF New Rules: सरकार ने ईपीएफओ के नियम में हाल में बड़ा बदलाव किया है। अब ईपीएफओ कवरेज के लिए बेसिक सैलरी (प्लस डीए) की लिमिट बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी गई है। अब तक यह सीमा 15,000 रुपये थी। सरकार का अनुमान है कि इस बदलाव से प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले और 51 लाख लोग ईपीएफओ के दायरे में आ जाएंगे।

सबसे पहले यह समझ लेना जरूरी है कि ईपीएफओ के तहत प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोग आते हैं। यह रिटायरमेंट बेनेफिट्स स्कीम है। इस स्कीम के मुख्य रूप से तीन बेनेफिट्स हैं। पहला एंप्लॉयीज के रिटायर करने पर उसके ईपीएफ में जमा पैसा उसे एकमुश्त मिल जाता है। दूसरा, रिटायरमेंट के बाद व्यक्ति को हर महीने पेंशन मिलती है। यह ईपीएफओ के एंप्लॉयीज पेंशन स्कीम के तहत मिलती है। हालांकि, इसके लिए कुछ शर्तें हैं। तीसरा फायदा एंप्लाॉयीज डिपॉजिट-लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) स्कीम के तहत मिलता है।

ईपीएफओ के तहत एंप्लॉयीज की बेसिक सैलरी (प्लस डीए) से हर महीने 12 फीसदी पैसा कटता है। यह पैसा उसके ईपीएफ अकाउंट में जमा होता है। एंप्लॉयर भी एंप्लॉयीज के लिए हर महीने 12 फीसदी (बेसिक सैलरी प्लस डीए) का कंट्रिब्यूशन करता है। लेकिन, इस 12 फीसदी में से 8.33 फीसदी एंप्लॉयीज के पेंशन फंड में जाता है और 3.67 फीसदी ईपीएफ अकाउंट में जाता है। रिटायरमेंट के बाद एंप्लॉयीज को जो हर महीने पेंशन मिलती है, वह एंप्लॉयीज के पेंशन फंड में जमा पैसे से ही मिलती है।

नए नियम के मुताबिक, अब ऐसे एंप्लॉयीज भी अनिवार्य रूप से ईपीएफओ के तहत आएंगे, जिनकी बेसिक सैलरी 25,000 रुपये तक होगी। अगर किसी व्यक्ति की बेसिक सैलरी 25,000 रुपये है तो इसका 12 फीसदी कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयीज की सैलरी से जाएगा। यह अमाउंट 3000 रुपये होगा। 3000 रुपये का ही कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयर भी करेगा। एंप्लॉयर को अनिवार्य रूप से इस नियम का पालन करना होगा। इससे एंप्लॉयीज को रिटायरमेंट पर फायदा होगा।

सवाल है कि अगर किसी एंप्लॉयीज की बेसिक सैलरी 40,000 है या 50,000 रुपये है तो क्या होगा? एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई कंपनियों में पहले से एंप्लॉयीज की बेसिक सैलरी के आधार पर ईपीएफ में कंट्रिब्यूशन होता है। ऐसी कंपनियों के एंप्लॉयीज पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा। इसे एक उदाहरण की मदद से समझा जा सकता है। मान लीजिए आपकी बेसिक सैलरी 40,000 रुपये है और पहले से आपकी बेसिक सैलरी पर 12-12 फीसदी कंट्रिब्यूशन का नियम लागू है तो आपकी नेट सैलरी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

ऐसी स्थिति में पहले की तरह आपकी 40,000 की बेसिक सैलरी का 12 फीसदी यानी 6 हजार रुपये ईपीएफ अकाउंट में जमा होगे। 6,0000 रुपये का कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयर भी करेगा, जिसका 8.33 फीसदी एंप्लॉयी के पेंश फंड में जाएगा और बाकी 3.67 फीसदी ईपीएफ अकाउंट में जाएगा। इसका मतलब है कि आपके रिटायरमेंट बेनेफिट भी पहले की तरह बने रहेंगे।

अगर आपका एंप्लॉयर कहता है कि वह सिर्फ 25,000 रुपये की नई वेज सीलिंग का पालन करेगा तो आपकी सैलरी से सिर्फ 3000 रुपये कटेंगे। इतना ही कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयर भी करेगा। ऐसी स्थिति में आपकी नेट सैलरी घट जाएगी, क्योंकि पहले के नियम के तहत एंप्लॉयर 15,000 रुपये की बेसिक सैलरी (प्लस डीए) पर आपका पैसा काटता था और खुद भी उतना कंट्रिब्यूशन करता था। यह बात 50,000 की बेसिक सैलरी पर भी लागू होगी। बेसिक सैलरी 50,000 होने के बावजूद एंप्लॉयर कंट्रिब्यूशन के लिए सिर्फ 25,000 बेसिक सैलरी की सीमा का इस्तेमाल करेगा।

25 हजार रु प्रति माह वेतन तक पीएफ

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा के लिए वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने को मंजूरी दे दी है। सरकार के अनुसार इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी ईपीएफओ के अनिवार्य दायरे में आ सकते हैं। नई सीमा 17 सितंबर, 2026 से लागू होगी।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को मंत्रिमंडल के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि भविष्य निधि कटौती के लिए अब 25,000 रुपये प्रति माह वेतन की नई सीमा होगी। इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में लाया जा सकेगा।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार संशोधित वेतन सीमा 17 सितंबर यानी विश्वकर्मा पूजा के दिन से प्रभावी होगी।

ईपीएफओ की वेतन सीमा में 12 साल बाद बदलाव हुआ है। वर्ष 2004 से 2014 के बीच यह सीमा अपरिवर्तित रही थी। सितंबर 2014 में इसे 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था। उसके बाद से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ।

सरकार का कहना है कि पिछले वर्षों में वेतन और आय में लगातार बढ़ोतरी हुई है। संगठित क्षेत्र में रोजगार का भी विस्तार हुआ है। कई राज्यों और क्षेत्रों में न्यूनतम वेतन मौजूदा 15,000 रुपये की सीमा के करीब या उससे ऊपर पहुंच गया है। इसे देखते हुए वेतन सीमा बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का फैसला किया गया।

इस फैसले पर सालाना करीब 11,339 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आने का अनुमान है। मौजूदा वार्षिक बजटीय सहायता करीब 10,250 करोड़ रुपये है। पांच वर्षों में अनुमानित खर्च करीब 56,696 करोड़ रुपये होगा।

सरकार के अनुसार इससे अधिक कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ के तहत बचत, कर्मचारी पेंशन योजना यानी ईपीएस के तहत पेंशन और कर्मचारी जमा संबद्ध बीमा योजना यानी ईडीएलआई के तहत बीमा सुरक्षा मिलेगी। साथ ही भविष्य निधि अंशदान और पेंशन योग्य वेतन की व्यवस्था को मौजूदा वेतन स्तर के अधिक अनुरूप बनाया जा सकेगा।

अभी 15,000 रुपये से अधिक मासिक वेतन पर नौकरी शुरू करने वाला नया कर्मचारी स्वतः ईपीएफ के अनिवार्य दायरे में नहीं आता। सीमा बढ़ने के बाद 15,000 से 25,000 रुपये मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों का बड़ा वर्ग अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में शामिल हो जाएगा।

श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि मंत्रिमंडल का फैसला देश के श्रमिकों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा देने के साथ संगठित क्षेत्र में रोजगार को भी गति देगा।

उन्होंने कहा कि 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा और सेवा दिवस का अवसर है और यह फैसला उसी दिन से लागू होगा। ईपीएफओ दुनिया की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक का संचालन करता है। इसके तहत ईपीएफ, ईपीएस और ईडीएलआई योजनाएं चलती हैं।

ईपीएफओ के ताजा आंकड़ों के अनुसार करीब 7.98 करोड़ सदस्य लगभग 7.68 लाख प्रतिष्ठानों से जुड़े हैं। ईपीएस के तहत करीब 82 लाख पेंशनधारकों को पेंशन मिलती है, जबकि ईडीएलआई ईपीएफ सदस्यों को बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराता है।

NPS vs EPF: हर महीने ₹10,000 निवेश करने पर किसमें बनेगा ज्यादा फंड? जानिए टैक्स नियम और मुनाफे का सटीक कैलकुलेशन

NPS vs EPF 10000 Monthly Investment: रिटायरमेंट की प्लानिंग करते समय नौकरीपेशा लोगों के सामने दो सबसे भरोसेमंद विकल्प आते हैं कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)। दोनों ही योजनाएं लंबी अवधि में एक बड़ा फंड तैयार करने में मदद करती हैं, लेकिन दोनों में ब्याज या रिटर्न की दर और टैक्स छूट के नियम काफी अलग हैं।

अगर आप हर महीने ₹10,000 का निवेश करते हैं, तो 25-30 सालों में NPS और EPF में से कौन सी स्कीम आपको ज्यादा अमीर बनाएगी? आइए आधिकारिक टैक्स नियमों और संभावित रिटर्न के आधार पर इसका पूरा गणित समझते हैं।

दोनों स्कीमों का बेसिक स्ट्रक्चर और रिटर्न का तरीका

EPF (फिक्स्ड और गारंटीड रिटर्न): ईपीएफओ (EPFO) द्वारा संचालित इस सरकारी स्कीम में ब्याज दर सरकार तय करती है। फिलहाल वित्त वर्ष 2023-24 के लिए EPF पर 8.25% सालाना ब्याज तय किया गया है। इसमें आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है और बाजार के उतार-चढ़ाव का इस पर कोई असर नहीं पड़ता।

NPS (मार्केट-लिंक्ड रिटर्न): एनपीएस एक पेंशन स्कीम है जिसमें आपका पैसा पेंशन फंड मैनेजर्स के जरिए इक्विटी (शेयर बाजार), कॉर्पोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटीज में लगाया जाता है। इसमें आपके पास 75% तक हिस्सा शेयर बाजार में लगाने का विकल्प होता है। ऐतिहासिक रूप से एनपीएस के इक्विटी-ओरिएंटेड ऑप्शन ने लंबी अवधि में औसतन 10% से 12% सालाना रिटर्न दिया है।

रिटर्न का गणित: ₹10,000 महीने के निवेश पर 25 साल बाद कितना बनेगा फंड?

अगर कोई निवेशक 30 साल की उम्र में निवेश शुरू करता है और 55-60 की उम्र तक लगातार 25 सालों के लिए हर महीने ₹10,000 जमा करता है, तो दोनों में संभावित फंड इस प्रकार बनेगा:

रिटर्न का गणित: ₹10,000 महीने के निवेश पर 25 साल बाद कितना बनेगा फंड?

निकासी के नियम

EPF: रिटायरमेंट (58 साल) पर आप पूरी राशि एकमुश्त बिना किसी टैक्स के निकाल सकते हैं।

NPS: रिटायरमेंट (60 साल) पर आप कुल फंड का अधिकतम 60% हिस्सा ही एकमुश्त निकाल सकते हैं। बाकी का कम से कम 40% हिस्सा एन्युटी में लगाना अनिवार्य है, जिससे आपको जीवनभर मासिक पेंशन मिलती है।

किसमें मिलती है ज्यादा टैक्स छूट?

आयकर अधिनियम के आधिकारिक प्रावधानों के अनुसार दोनों स्कीमों के टैक्स फायदे इस प्रकार हैं:

EPF के टैक्स नियम:

धारा 80C: ईपीएफ में सालाना ₹1.5 लाख तक के योगदान पर Section 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है।

टैक्स-फ्री स्टेटस: ईपीएफ को ‘EEE’ (Exempt-Exempt-Exempt) दर्जा प्राप्त है। यानी जमा, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी राशि तीनों टैक्स-फ्री होते हैं।

शर्त: अगर किसी वित्तीय वर्ष में कर्मचारी का ईपीएफ योगदान ₹2.5 लाख से अधिक होता है, तो उस अतिरिक्त योगदान पर अर्जित ब्याज टैक्सेबल हो जाता है।

NPS के टैक्स नियम:

धारा 80CCD (1) और 80C: एनपीएस में ₹1.5 लाख तक का योगदान धारा 80C की कुल सीमा में कवर होता है।

अतिरिक्त ₹50,000 का फायदा [सेक्शन 80CCD (1B)]: एनपीएस की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसमें आपको धारा 80C के ₹1.5 लाख के अलावा ₹50,000 का एक्स्ट्रा डिडक्शन मिलता है। यानी आप कुल ₹2 लाख तक का टैक्स क्लेम कर सकते हैं।

मैच्योरिटी पर टैक्स: 60 साल की उम्र में एनपीएस से निकाली गई 60% एकमुश्त राशि पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है। बाकी 40% जो एन्युटी में जाता है, उससे मिलने वाली मासिक पेंशन आपकी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होती है।

आपके लिए कौन सा विकल्प बेहतर है?

सुरक्षा और गारंटी के लिए (EPF): अगर आप बाजार का रिस्क बिल्कुल नहीं लेना चाहते और रिटायरमेंट पर एकमुश्त 100% टैक्स-फ्री पैसा चाहते हैं, तो ईपीएफ सबसे भरोसेमंद विकल्प है।

बड़ा फंड और पेंशन के लिए (NPS): अगर आप थोड़ी सी मार्केट वोलेटिलिटी झेल सकते हैं, 80C के अलावा ₹50,000 की एक्स्ट्रा टैक्स छूट चाहते हैं और रिटायरमेंट के बाद एक तय मासिक पेंशन का सुरक्षा चक्र बनाना चाहते हैं, तो एनपीएस आपके लिए ज्यादा रिटर्न जनरेट कर सकता है।

वैसे स्मार्ट निवेशक कभी भी केवल एक टोकरी में सारे अंडे नहीं रखते। अगर आप जॉब में हैं, तो आपका ईपीएफ तो कटेगा ही। इसके साथ ही, अतिरिक्त टैक्स बचाने और लंबी अवधि में ज्यादा वेल्थ बनाने के लिए एनपीएस में ₹50,000 सालाना (या ₹4,166/महीना) का अतिरिक्त निवेश करना सबसे संतुलित रणनीति मानी जाती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

UPSC EPFO APFC 2026: ईपीएफओ में एपीएफसी भर्ती के लिए अब इस तारीख तक कर सकते हैं आवेदन, आयोग ने बढ़ाई लास्ट डेट

UPSC EPFO APFC 2026: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने एम्प्लॉयी प्रॉविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) में असिस्टेंट प्रोविडेंट फंड कमिश्नर (APFC) भर्ती 2026 के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख बढ़ा दी है। इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के इच्छुक उम्मीदवार अब 14 सितंबर 2026, शाम 6:00 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इससे कैंडिडेट्स को भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कुछ और दिन मिल जाएंगे। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए ईपीएफओ में 80 एपीएफसी की भर्ती की जाएगी।

इससे पहले यूपीएससी ईपीएफओ एपीएफसी भर्ती 2026 के लिए आवेदन की आखिरी तारीख 11 सितंबर 2026 थी। पिछली डेडलाइन से चूक गए उम्मीदवारों के पास अब आवेदन करने का एक और मौका है। इस कदम से देश भर के उन हजारों कैंडिडेट्स को फायदा होने की उम्मीद है जो समय पर अपने फॉर्म नहीं भर पाए थे। आवेदकों को आखिरी समय तक इंतजार नहीं करना चाहिए और यूपीएससी वेबसाइट पर तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए जल्द से जल्द अप्लाई करना चाहिए। इच्छुक आवेदक आधिकारिक वेबसाइट upsconline.nic.in के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

यूपीएससी ईपीएफओ एपीएफसी 2026 हाइलाइट्स

जानकारी डिटेल्स

कंडक्टिंग बॉडी यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC)

पोस्ट का नाम असिस्टेंट प्रोविडेंट फंड कमिश्नर (APFC)

टोटल वैकेंसी 80

एप्लीकेशन शुरू होने की तारीख 22 अगस्त 2026

पहले की आखिरी तारीख 11 सितंबर 2026, शाम 6:00 बजे

बढ़ी हुई आखिरी तारीख 14 सितंबर 2026, शाम 6:00 बजे

आवेदन का तरीका ऑनलाइन (UPSC ORA पोर्टल)

ऑफिशियल वेबसाइट upsc.gov.in

आवेदन शुल्क ₹25 (UR/OBC/EWS पुरुष कैंडिडेट); SC/ST/PwBD/महिला कैंडिडेट्स के लिए छूट

चयन प्रक्रिया रिक्रूटमेंट टेस्ट (RT) जिसके बाद इंटरव्यू होगा

भर्ती परीक्षा की तारीख 20 दिसंबर 2026

यूपीएससी ईपीएफओ एपीएफसी 2026 योग्ता मानदंड

शैक्षणिक योग्यता : यूपीएससी ईपीएफओ एपीएफसी 2026 भर्ती प्रक्रियर में शामिल होने के इच्छुक आवेदक के पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या इंस्टीट्यूशन से बैचलर डिग्री होनी चाहिए। डिग्री किसी भी विषय में हो सकती है।

उम्र सीमा : एपीएफसी पद के लिए ऊपरी उम्र सीमा UR/EWS कैंडिडेट्स के लिए 35 साल, OBC कैंडिडेट्स के लिए 38 साल और SC/ST कैंडिडेट्स के लिए 40 साल है। उम्र की गणना आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख के हिसाब से की जाती है। सरकारी नियमों के अनुसार PwBD और दूसरी एलिजिबल कैटेगरी के लिए भी छूट लागू है।

राष्ट्रीयता : इन पदों पर भर्ती के इच्छुक उम्मीदवार का भारतीय नागरिक होना जरूरी है।

यूपीएससी ईपीएफओ एपीएफसी भर्ती 2026 एप्लीकेशन फीस

एप्लीकेशन फीस कैटेगरी के हिसाब से अलग-अलग है। आवेदकों को फॉर्म शुरू करने से पहले पेमेंट डिटेल्स तैयार रखनी चाहिए।

UR/OBC/EWS पुरुष कैंडिडेट: ₹25

SC/ST/PwBD और सभी महिला कैंडिडेट: फीस से छूट

यूपीएससी ईपीएफओ एपीएफसी भी 2026 के लिए कैसे करें आवेदन

  • यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट upsconline.nic.in पर जाएं।
  • अगर पहले से नहीं किया है, तो वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) सिस्टम का इस्तेमाल करके रजिस्टर करें।
  • लॉग इन करें और UPSC EPFO APFC 2026 अप्लाई ऑनलाइन लिंक ढूंढें।
  • पर्सनल, एजुकेशनल और कैटेगरी की जानकारी ध्यान से भरें।
  • तय फॉर्मेट में फोटो, सिग्नेचर और ज़रूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें।
  • एप्लीकेशन फीस (अगर लागू हो) भरें और पेमेंट स्टेटस वेरिफाई करें।
  • फाइनल सबमिशन से पहले फॉर्म को अच्छी तरह से रिव्यू करें।
  • फॉर्म सबमिट करें और भविष्य के लिए एक कॉपी डाउनलोड/सेव करें।

UPSSSC Livestock Extension Officer: यूपी में पशुधन प्रसार अधिकारी के 1251 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन शुरू, 12वीं पास भी कर सकते हैं आवेदन