भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों से कई दूसरे देश ‘जलते’ हैं। गोर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प प्रधानमंत्री मोदी को अपना दोस्त मानते हैं और दिसंबर में होने वाले G20 समिट के दौरान जिन नेताओं से वह मिलना चाहते हैं, उनमें मोदी का नाम सबसे ऊपर होगा। G20 में मोदी-ट्रम्प की अलग मुलाकात संभव सर्जियो गोर ने इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में कहा कि ट्रम्प और मोदी के बीच अच्छे व्यक्तिगत रिश्ते हैं। ऐसे में दिसंबर में G20 समिट के लिए मोदी के फ्लोरिडा पहुंचने पर दोनों नेताओं की अलग से मुलाकात भी हो सकती है। हालांकि, मोदी और ट्रम्प के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। गोर ने ट्रम्प के 2027 में भारत दौरे की संभावना के भी संकेत दिए। उन्होंने कहा कि ट्रम्प 2020 में अपनी भारत यात्रा को अब भी याद करते हैं। अमेरिकी राजदूत के मुताबिक, जब भी ट्रम्प भारत की बात करते हैं तो वह यहां के लोगों से मुलाकात और प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने रिश्तों को याद करते हैं। गोर ने कहा कि अगला साल आने में ज्यादा समय नहीं है। हालांकि, उन्होंने ट्रम्प के भारत दौरे की कोई तारीख या आधिकारिक कार्यक्रम नहीं बताया। ट्रेड डील पर बोले- समझौते के काफी करीब भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर गोर ने कहा कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद डील से जुड़े मुद्दों पर दोबारा काम किया जा रहा है। उन्हें उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में दोनों देश समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं। गोर ने कहा कि इतने बड़े व्यापार समझौते में समय लगना सामान्य है। उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े व्यापारिक समझौतों में कई साल लग सकते हैं। 240 अरब डॉलर का व्यापार, 500 अरब डॉलर का लक्ष्य गोर के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच अभी करीब 240 अरब डॉलर का व्यापार है। दोनों देशों का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इसे बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करना है। उन्होंने कहा कि ट्रेड डील से दोनों देशों को आर्थिक फायदा हो सकता है। अमेरिका एक मजबूत और स्थिर भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है। गोर के बयान से साफ है कि भारत-अमेरिका के रिश्तों में व्यापार के साथ दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी भी अहम है। ————————– यह भी पढ़ें….. पीएम मोदी ने मेलोनी को बधाई दी: सबसे लंबे समय तक इटली की प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने पर बधाई दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
SBI Asha Scholarship 2026-27: अगर आप या आपके घर में कोई स्टूडेंट स्कूल, कॉलेज, IIT, IIM, मेडिकल या विदेश में पढ़ाई कर रहा है और पढ़ाई का खर्च आड़े आ रहा है, तो देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक की यह स्कीम आपके बड़े काम आ सकती है। एसबीआई फाउंडेशन ने ‘एसबीआई प्लेटिनम जुबली आशा स्कॉलरशिप 2026-27’ के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।
क्या है इस स्कीम में?
एसबीआई की इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले मेधावी छात्रों को ₹15,000 से लेकर ₹15 लाख सालाना तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से निःशुल्क और ऑनलाइन है। आधिकारिक पोर्टल के अनुसार, 2026-27 सत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन की लास्ट डेट बढ़ाकर 19 सितंबर 2026 कर दी गई है।
किस कैटेगरी में मिलेगी कितनी स्कॉलरशिप?
एसबीआई आशा स्कॉलरशिप अलग-अलग शैक्षणिक स्तर के हिसाब से दी जा रही है:
- कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्र: ₹15,000 सालाना।
- अंडरग्रेजुएट (UG) छात्र: ₹75,000 तक।
- पोस्टग्रेजुएट (PG) छात्र: ₹1.5 लाख तक।
- MBBS (मेडिकल) छात्र: ₹2 लाख तक।
- IITs (इंजीनियरिंग) छात्र: ₹2 लाख तक।
- IIMs (MBA/PGDM) छात्र: ₹5 लाख तक।
- विदेश में पढ़ाई करने वाले : ₹15 लाख तक।
कौन कर सकता है अप्लाई?
स्कॉलरशिप पाने के लिए एसबीआई फाउंडेशन ने कुछ शैक्षणिक और फैमिली इनकम की शर्तें तय की हैं:
कक्षा 9 से 12वीं के लिए: पिछली कक्षा में कम से कम 75% अंक या 7.5 CGPA होना अनिवार्य है। SC/ST छात्रों के लिए न्यूनतम अंक 65% और दिव्यांग छात्रों (PwBD) के लिए 60% तय किए गए हैं। पारिवारिक आय सीमा ₹3 लाख सालाना से अधिक नहीं होनी चाहिए।
ग्रेजुएशन और पोस्टग्रेजुएशन (UG/PG): UG छात्रों के लिए पारिवारिक आय सीमा ₹6 लाख सालाना है। कॉलेज/संस्थान NIRF ओवरऑल रैंकिंग की टॉप 300 सूची में या NAAC ‘A’ ग्रेड प्राप्त होना चाहिए।
MBBS: AIIMS या NIRF टॉप 50 मेडिकल कॉलेज में एडमिशन होना चाहिए। साथ ही NEET स्कोरकार्ड अनिवार्य है।
IIT: देश के 23 IITs में से किसी एक में पढ़ाई और वैध JEE Advanced स्कोरकार्ड।
IIM: देश के 22 IIMs में अध्ययनरत छात्र और वैध CAT स्कोरकार्ड (आय सीमा व शैक्षणिक नियम लागू)।
विदेश में उच्च शिक्षा: QS टॉप 200 यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई कर रहे या एडमिशन ऑफर लेटर पाने वाले भारतीय छात्र पात्र हैं। पारिवारिक आय ₹6 लाख सालाना से कम होनी चाहिए। वैध GRE, GMAT, MCAT, LNAT या LSAT स्कोरकार्ड होना अनिवार्य है।
आवेदन कैसे करें और क्या-क्या डॉक्यूमेंट्स चाहिए?
पोर्टल पर जाएं: आधिकारिक SBI Asha Scholarship पोर्टल पर जाकर अपना अकाउंट बनाएं।
कैटेगरी चुनें: अपनी योग्यता के अनुसार सही स्कॉलरशिप कैटेगरी का चयन करें और फॉर्म भरें।
डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें: पिछली शैक्षणिक मार्कशीट, पहचान पत्र (Aadhaar/Govt ID), आय प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक डिटेल्स, एडमिशन/बोनाफाइड सर्टिफिकेट और फीस रसीद, प्रवेश परीक्षा स्कोरकार्ड (JEE/NEET/CAT/GRE/GMAT आदि), कास्ट सर्टिफिकेट या दिव्यांग प्रमाण पत्र (अगर लागू हो)।
ध्यान दें: एक बार फॉर्म सबमिट होने के बाद इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया जा सकेगा। शॉर्टलिस्ट किए गए छात्रों का टेलीफोनिक इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद फाइनल सिलेक्शन होगा।
Bank of India Recruitment 2026: सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक ने 205 ऑफिसर पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। यह बैंक ऑफ इंडिया (BOI) है, जो स्केल 4 तक अलग-अलग स्ट्रीम में ऑफिसर पोस्ट के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट bankofindia.bank.in पर अपने एप्लीकेशन जमा कर सकते हैं।
आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026 आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत 10 सितंबर से होगी और 25 सितंबर, 2026 को खत्म होगा। उम्र, शैक्षिक योग्यता और काम का अनुभव तय करने की कट-ऑफ डेट 1 अगस्त, 2026 है।
बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026 चयन प्रक्रिया
बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026 के तहत उम्मीदवार का चयन ऑनलाइन परीक्षा और/या पर्सनल इंटरव्यू के जरिए किया जाएगा, जो आवेदकों और योग्य उम्मीदवारों की संख्या पर निर्भर करेगा।
बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026: एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया की स्क्रूटनी
बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026 में शामिल होने के इच्छुक उम्मीदवारों को अपनी योग्यता का समर्थन करने वाले डॉक्यूमेंट अपलोड करने होंगे, जिसमें संबंधित पेशेवर अनुभव का प्रमाणपत्र, जरूरी सर्टिफिकेशन और शैक्षिक योग्यता शामिल हैं। पंजीकरण के समय अपलोड किए गए डॉक्यूमेंट्स के आधार पर आवेदन को आगे की चयन प्रक्रिया के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाएगा, जिसमें शामिल हैं:
संबंधित पेशेवर अनुभव
जरूरी सर्टिफिकेट
शैक्षिक योग्यता
बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026 नोटिफिकेशन में कहा गया है कि आवेदकों को सिर्फ रजिस्ट्रेशन के समय योग्यता मानक के समर्थन में अपलोड किए गए डॉक्यूमेंट्स के आधार पर शॉर्टलिस्ट या रिजेक्ट किया जाएगा। बाद में डॉक्यूमेंट्स जमा करने के लिए कोई और पूछताछ या अपील पर विचार नहीं किया जाएगा।
बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026 ऑनलाइन परीक्षा
ऑनलाइन परीक्षा 100 मिनट की होगी। इसमें 25 अंकों की अंग्रेजी भाषा परीक्षा और 100 अंकों की पद से संबंधित पेशवेर ज्ञान परीक्षा शामिल होगी। इंग्लिश लैंग्वेज के टेस्ट को छोड़कर, सभी टेस्ट इंग्लिश और हिंदी में बाइलिंगुअल होंगे। इंग्लिश लैंग्वेज का टेस्ट क्वालिफाइंग होगा, और मेरिट लिस्ट बनाते समय इस हिस्से में मिले अंकों पर विचार नहीं किया जाएगा।
जनरल और EWS उम्मीदवारों के लिए इंग्लिश लैंग्वेज के टेस्ट और प्रोफेशनल नॉलेज टेस्ट में कम से कम 35% अंक प्राप्त करना जरूरी होगा। SC, ST, OBC और PwBD कैटेगरी के कैंडिडेट, जो अपनी-अपनी कैटेगरी के लिए रिजर्व वैकेंसी के लिए अप्लाई कर रहे हैं, उन्हें क्वालिफ़ाइंग मार्क्स में 5 परसेंट पॉइंट की छूट मिलेगी। कैंडिडेट को हर टेस्ट में न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स लाने होंगे।
बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026: गलत जवाबों के लिए पेनल्टी
ऑब्जेक्टिव टेस्ट में हर सवाल का गलत जवाब देने पर एक-चौथाई अंक काट लिया जाएगा। बिना जवाब वाले सवालों के लिए कोई मार्क्स नहीं काटे जाएंगे।
बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026: इंटरव्यू
ऑनलाइन परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर एक मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी, जिसमें सिर्फ प्रोफेशनल नॉलेज टेस्ट में मिले मार्क्स ही माने जाएंगे। मेरिट लिस्ट अपनी-अपनी कैटेगरी – SC, ST, OBC, EWS, और जनरल के लिए घटते क्रम में तैयार की जाएगी। ऑनलाइन टेस्ट में मिनिमम क्वालिफाइंग मार्क्स और मेरिट लिस्ट में अच्छी रैंक लाने वाले उम्मीदवारों को पर्सनल इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा।
Taapsee Pannu: हाल ही में एक इंटरव्यू में तापसी पन्नू ने यश और कियारा आडवाणी की बड़ी फिल्म ‘टॉक्सिक’ पर इशारों-इशारों में तंज कसा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में रिलीज हुई “ऐसी फिल्में” करने के बजाय वह रिटायर होना पसंद करेंगी। हालांकि तापसी ने किसी फ़िल्म या एक्टर का नाम नहीं लिया, लेकिन यूजर्स का मानना है कि उनकी बात ‘टॉक्सिक’ के बारे में थी।
सुचिन मेहरोत्रा के साथ बातचीत में तापसी ने कहा कि वह खुद को “खुशनसीब” मानती हैं कि उन्होंने अपना करियर एक दशक पहले शुरू किया था, जब हिंदी की मेनस्ट्रीम फ़िल्में अलग तरह की होती थीं और “एक ही तरह” की नहीं होती थीं। उन्होंने कहा, “अगर आज के समय में सिर्फ़ इसी तरह की फ़िल्में बन रही होतीं, तो मुझ जैसे इंसान का करियर शायद बन ही नहीं पाता।”
‘गंधारी’ फ़िल्म की एक्ट्रेस ने बताया कि हाल ही में अपने परिवार के साथ पिछले कुछ महीनों में रिलीज़ हुई कुछ फ़िल्में देखते हुए उन्होंने इस बारे में बात की थी। तापसी ने साफ़ किया कि एक एक्टर के तौर पर वह आजकल बन रही इस तरह की फ़िल्मों का हिस्सा नहीं बनना चाहतीं।
एक्ट्रेस ने कहा, “मैंने सोचा कि क्या अब मेरे रिटायर होने का समय आ गया है।”तापसी ने साफ़ किया कि वह समझती हैं कि ऐसी फ़िल्मों के लिए दर्शक होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह खुद ऐसी फ़िल्में करना चाहेंगी। मुझे अपना काम पसंद है, लेकिन इतना भी नहीं कि मैं आंख बंद करके कुछ भी करूं। मैं अपने काम से इतना अंधा प्यार नहीं करती कि वैसी फ़िल्में करती रहूं।”
अपने फ़िल्मी सफ़र पर बात करते हुए तापसी ने कहा कि वह ऐसी फ़िल्मों की लिस्ट बनाना चाहती हैं जो समय की कसौटी पर खरी उतरें। पन्नू ने कहा, “और मेरा पक्का मानना है कि एक फ़िल्मोग्राफ़ी होती है, है ना? समय बदलेगा, लेकिन फ़िल्मोग्राफ़ी नहीं बदलेगी।” तापसी ने आगे कहा कि वह चाहती हैं कि सालों बाद जब वह अपने काम को देखें, तो उन्हें अपने फैसलों पर शर्मिंदगी महसूस न हो। उन्होंने कहा, “आज से 10 साल बाद, शायद जॉनर बदल जाए, जैसा कि मैंने कहा, लेकिन मेरी फ़िल्मोग्राफ़ी वैसी ही रहेगी।”
इंटरनेट का रिएक्शन
जैसे ही यह क्लिप वायरल हुई, इंटरनेट पर लोगों ने कमेंट करना शुरू कर दिया। लोगों का कहना था कि तापसी ने कियारा आडवाणी की फिल्म ‘Toxic’ पर तंज कसा है। एक यूज़र ने कहा, “असल में तापसी पन्नू ने अपने करियर की शुरुआत में ही वे सभी फिल्में कर ली थीं। इसलिए अब उनके पास देने के लिए कुछ खास नहीं बचा है। अब रोना बंद करो @taapsee, कियारा आडवाणी का करियर बहुत शानदार है।”
एक और कमेंट में लिखा था, “कियारा ने तो कम से कम फिल्म में काम किया… आपकी तो OTT पर ‘हसीन दिलरुबा’ आई थी… जो दिखाना था, आपने दिखा दिया।” एक और कमेंट में कहा गया, “तो उनसे कहिए कि रिटायर हो जाएं और अगर वह ‘अपनी ज़िंदगी, अपने नियम’ वाली बात करती हैं, तो यही बात दूसरी अभिनेत्रियों पर भी लागू होती है।”
‘Toxic: A Fairy Tale for Grown-ups’ को KVN प्रोडक्शंस और मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स के तहत वेंकट के. नारायण और यश ने प्रोड्यूस किया है। कन्नड़ और अंग्रेज़ी में लिखी और शूट की गई इस फिल्म के हिंदी, तेलुगु, तमिल और मलयालम डब वर्जन भी रिलीज हुए हैं। गीतू मोहनदास की डायरेक्ट की गई इस फिल्म में नयनतारा, हुमा कुरैशी, कियारा आडवाणी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत जैसे शानदार कलाकार हैं। फिल्म को मिले-जुले रिव्यू मिले। फिल्म ने अब तक उतनी कमाई नहीं की है जितनी उम्मीद की जा रही थी।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को कहा कि उन्हें नहीं लगता कि भारत और ईरान किसी ट्रेड डील पर बातचीत कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने दूसरे देशों को चेतावनी दी कि वे तेहरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद न करें।
रुबियो ने फॉक्स न्यूज रेडियो के ‘द ब्रायन किल्मीड शो’ में एक इंटरव्यू के दौरान ये बातें कहीं। उनसे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट के दौरान बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की मुलाकात के बारे में पूछा गया था।
रूबियो ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच कोई ट्रेड डील हुई है। जाहिर है, हर देश अपनी विदेश नीति बनाता है और दुनिया भर के कई देश ईरान की सरकार से बातचीत करते हैं।”
इस बात पर प्रतिक्रिया देते हुए कि पीएम मोदी और पेजेशकियन के बीच ट्रेड डील होने की संभावना दिख रही है, रूबियो ने आगे कहा: “मेरा मतलब है कि हमने भी ईरान की सरकार के कुछ लोगों से मुलाकात की है, क्योंकि कुछ बातचीत हुई है और उनसे संपर्क भी रहा है।”
रूबियो ने US प्रतिबंधों को लेकर चेतावनी दी
रूबियो ने कहा कि US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन का रुख साफ कर दिया है: देशों को ईरान की मदद नहीं करनी चाहिए कि वह US प्रतिबंधों से बच सके।
रूबियो ने कहा, “किसी भी देश को ऐसे तरीके बनाने में उनकी मदद नहीं करनी चाहिए जिनसे वे कमाई कर सकें और उस पैसे का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने और परमाणु हथियार बनाने की कोशिश में कर सकें।”
उन्होंने आगे कहा, “और अगर देश ऐसा करने का फैसला करते हैं, तो हमें उन पर भी प्रतिबंध लगाने होंगे।”
रुबियो का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत ईरान के साथ अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंध बनाए हुए है, और साथ ही पश्चिम एशिया में चल रहे व्यापक युद्ध के बीच अमेरिका के साथ भी बातचीत कर रहा है।
मोदी-पेजेशकियन की मुलाकात में क्या हुआ?
फरवरी में ईरान-अमेरिका के बीच तनाव शुरू होने के बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को बिश्केक में पेजेशकियन से अपनी पहली द्विपक्षीय बातचीत की।
बैठक के दौरान, मोदी ने कहा कि भारत ईरान के साथ अपने व्यापार के दायरे को “बढ़ाना और उसमें विविधता लाना” चाहता है। साथ ही, उन्होंने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति के प्रयासों के लिए नई दिल्ली के समर्थन को भी दोहराया।
दोनों नेताओं ने इस टकराव और आम नागरिकों, नागरिक बुनियादी ढांचे और नेविगेशन की आजादी की सुरक्षा की जरूरत पर भी चर्चा की।
पेजेशकियान ने पीएम मोदी से आग्रह किया कि वे बातचीत को बढ़ावा देने और लड़ाई खत्म करने में मदद के लिए, संघर्ष में शामिल देशों के साथ भारत के व्यापक संपर्कों का इस्तेमाल करें।
भारत ने ईरान और अन्य संबंधित पक्षों के साथ चाबहार बंदरगाह के भविष्य पर भी बातचीत जारी रखी है। यह दोनों देशों के बीच एक अहम कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट है, जिस पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण अनिश्चितता बनी हुई है।
नई दिल्ली का मानना है कि इस क्षेत्र में विवादों को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाया जाना चाहिए, साथ ही उसे अपने व्यापार, कनेक्टिविटी और व्यापक रणनीतिक हितों की भी रक्षा करनी चाहिए।
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पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की मुलाकात के बाद अमेरिका ने भारत-ईरान व्यापार संबंधों को लेकर अपनी स्थिति साफ की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच फिलहाल किसी ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है। हालांकि, उन्होंने साथ ही चेतावनी दी कि अगर कोई देश ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करता है तो उस देश पर भी अमेरिका प्रतिबंध लगा सकता है। रुबियो ने एक इंटरव्यू के दौरान ये बात कही। SCO में मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की मुलाकात अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात के बाद आया है। दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंध, व्यापार और पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की। मोदी ने कहा था कि भारत ईरान के साथ अपने पुराने संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और नए क्षेत्रों को इसमें शामिल करने पर भी जोर दिया गया था। मोदी ने कहा था कि भारत BRICS और SCO जैसे मंचों पर ईरान के साथ सहयोग जारी रखेगा। उन्होंने पेजेश्कियन को 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने का न्योता भी दिया। पश्चिम एशिया के तनाव पर बातचीत अमेरिका का ईरान की कमाई के 5 रास्तों पर बैन दरअसल, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था के 5 अहम क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। जिनका इस्तेमाल ईरान दूसरे देशों में अपनी आर्थिक गतिविधियों के लिए करता है। इनमें डिजिटल एसेट्स (जैसे क्रिप्टोकरेंसी), टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग सेक्टर शामिल हैं। अमेरिका इन क्षेत्रों के जरिए ईरान की कमाई और अंतरराष्ट्रीय कारोबार को रोकना चाहता है। यानी अगर कोई देश इन क्षेत्रों में ईरान के साथ ऐसा कारोबार करता है जिससे उसे पैसा या आर्थिक फायदा मिलता है। तो अमेरिका उस देश पर भी प्रतिबंध लगा सकता है या उसे अमेरिकी डॉलर की वित्तीय व्यवस्था से बाहर कर सकता है। अमेरिका बोला- अब ईरान के पास सिर्फ दो रास्ते बचे अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि हमने ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ शुरू किया है। यह ईरान और उसके सहयोगी देशों के खिलाफ एक अभियान है। ईरान के सामने अब सिर्फ दो रास्ते हैं। पहला- पूरी तरह से दुनिया से अलग-थलग पड़ना और गुजारे लायक अर्थव्यवस्था। दूसरा- फिर से सामान्य स्थिति की ओर बढ़ना और वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से शामिल होने का मौका पाना। भारत की 4 कंपनियों पर भी प्रतिबंध अमेरिका ने ईरान से तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार के आरोप में भारत की 4 कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, इन कंपनियों ने ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पाद खरीदने या भारत लाने में भूमिका निभाई। इनमें पोर्टीज पार्टनर्स, सदाशिवा ओवरसीज, पीपी सॉफ्टटेक और प्रकृति इंफ्रा इम्पेक्स इंडिया शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की तेल से होने वाली कमाई रोकने और उसके कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने के लिए की गई है। भारत पर क्या असर पड़ सकता है, 5 पॉइंट में समझें… तेल: भारत ईरान से कच्चा तेल खरीदता है तो अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भुगतान और खरीद मुश्किल हो सकती है। चाबहार पोर्ट: ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारत की रणनीतिक और कारोबारी रुचि है। अमेरिकी प्रतिबंधों का असर इस परियोजना पर पड़ सकता है। डॉलर में भुगतान: अगर ईरान से जुड़े भारतीय कारोबार पर अमेरिकी वित्तीय प्रतिबंध लगते हैं, तो डॉलर में लेन-देन करना मुश्किल हो सकता है। व्यापार: ईरान के साथ कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों को अमेरिकी नियमों का पालन करना पड़ सकता है। कूटनीतिक दबाव: अमेरिका भारत से भी ईरान के साथ आर्थिक संबंध सीमित करने को कह सकता है। हालांकि, भारत अपने राष्ट्रीय हित और ऊर्जा जरूरतों के आधार पर फैसला करेगा। —————————- ये खबर भी पढ़ें… 2 दिन बाद अमेरिका का ईरान पर फिर मिसाइल हमला, 19 की मौत, 68 घायल अमेरिका ने 2 दिन बाद फिर ईरान पर हमला किया है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात सिरिक, खुजस्तान, केश्म द्वीप और बंदर अब्बास में मिसाइल और ड्रोन स्ट्राइक की। ईरान के अनुसार इन हमलों में 19 लोगों की मौत हुई है, जबकि 68 लोग घायल हुए हैं। पूरी खबर पढ़ें…
Ram Mandir CEO: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अपनी भूमिका के लिए ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ पाने वाले रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्री राम जन्मभूमि मंदिर का चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) चुना गया है। यह फैसला तब लिया गया जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को अयोध्या में हुई एक बैठक में CEO की नियुक्ति पर विचार विमर्श किया।
इसके अलावा, ट्रस्ट ने तीन नए ट्रस्टी भी नियुक्त किए: दिल्ली के महेश भागचंदका (जो VHP के दिवंगत नेता अशोक सिंघल के रिश्तेदार हैं), अयोध्या के मदन मोहन पांडे और शिकोहाबाद की निर्मला यादव।
भारतीय वायु सेना के सम्मानित पूर्व कमांडर अप्रैल 2026 में रिटायर हुए थे और अब वे मंदिर ट्रस्ट के कामकाज के विस्तार के साथ एक अहम प्रशासनिक भूमिका संभालेंगे।
बता दें कि मिश्रा उन सीनियर मिलिट्री कमांडरों में शामिल थे जिन्हें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उनकी लीडरशिप के लिए सम्मानित किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी शानदार सेवाओं और महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से सम्मानित किया था।
यह मेडल युद्ध, संघर्ष या सैन्य कार्रवाई के दौरान सबसे बेहतरीन सेवा के लिए दिया जाता है और यह भारत के सबसे बड़े युद्ध-कालीन मिलिट्री सम्मानों में से एक है।
जितेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के हवाई हमलों के बारे में बताया
हाल ही में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में, मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चलाए गए हवाई अभियान के बारे में बात की और बताया कि कैसे भारतीय सेना ने पाकिस्तान के अंदर काफी दूर मौजूद ठिकानों की पहचान की और उन पर हमला किया।
उन्होंने एक ऑपरेशन का जिक्र करते हुए बताया कि करीब 314 किलोमीटर दूर स्थित एक टारगेट को नष्ट किया गया था। मिश्रा के मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान सिर्फ एक छोटा सा ऑपरेशनल निर्देश दिया गया और इसके बाद टारगेट को सफलतापूर्वक तबाह कर दिया गया।
ऑपरेशन के बारे में बात करते हुए, मिश्रा ने प्लानिंग, सटीकता, टेक्नोलॉजी और सशस्त्र बलों की अलग-अलग शाखाओं के बीच तालमेल के महत्व पर जोर दिया। हालांकि, ऑपरेशन से जुड़ी कई बातें अभी भी गोपनीय रखी गई हैं।
उनकी बातों से एयर कैंपेन की प्लानिंग और उसे अंजाम देने के बारे में कुछ खास जानकारी मिली, हालांकि, उन्होंने ऐसी कोई संवेदनशील जानकारी साझा नहीं की, जिसका सार्वजनिक किया जाना सुरक्षा के लिहाज से ठीक न हो।
जितेंद्र मिश्रा का उत्तर प्रदेश से है खास कनेक्शन
मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपतपुरा के रहने वाले हैं, जो अयोध्या से सड़क मार्ग से लगभग तीन घंटे की दूरी पर है। वे एक मध्यम-वर्गीय परिवार से आते हैं और उनके पिता बतौर लेक्चरर काम करते थे।
अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर में एक अहम प्रशासनिक पद संभालने के बाद अब उनका उत्तर प्रदेश से और खास जुड़ाव हो गया है।
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के तौर पर जितेंद्र मिश्रा क्या करेंगे?
CEO के तौर पर, मिश्रा से उम्मीद है कि वे मंदिर ट्रस्ट के रोजमर्रा के कामकाज को संभालेंगे और इसके बढ़ते हुए ऑपरेशन्स में तालमेल बिठाएंगे।
उनकी जिम्मेदारियों में तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं, वित्तीय इंतजाम, स्टाफ के बीच तालमेल, सुरक्षा से जुड़ा तालमेल और बड़े धार्मिक आयोजनों का प्रबंधन शामिल हो सकता है।
अपने मिलिट्री करियर के दौरान बड़े संगठनों को संभालने, ऑपरेशनल प्लानिंग और तालमेल बिठाने का उनका अनुभव इस भूमिका के लिए काम का साबित हो सकता है।
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा कौन हैं?
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (SYSM, AVSM, VSM) भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारी हैं, जिन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर काम किया है।
रिटायरमेंट से पहले, मिश्रा ने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ के तौर पर काम किया। इससे पहले, उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग) के तौर पर भी काम किया था।
मिश्रा को 6 दिसंबर, 1986 को एयर फोर्स एकेडमी से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन किया गया था।
जितेंद्र मिश्रा का 38 साल का IAF करियर
मिश्रा का मिलिट्री करियर 38 साल से ज्यादा का रहा, जिसमें उन्होंने 3,000 घंटे से ज्यादा की फ्लाइंग का अनुभव हासिल किया।
उन्होंने 18 से ज्यादा तरह के फाइटर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर उड़ाए और फाइटर पायलट, फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के तौर पर काम किया। उन्होंने कई इंस्ट्रक्शनल और स्टाफ पद भी संभाले।
स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर, मिश्रा उस टीम का हिस्सा थे जिसने कारगिल युद्ध की शुरुआत में मिराज 2000 एयरक्राफ्ट पर लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल किया था। इन हथियारों का इस्तेमाल बाद में ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर हमलों में किया गया था।
कारगिल युद्ध में जितेंद्र मिश्रा की भूमिका
IAF में अपने करियर के दौरान मिश्रा ने कई अहम ऑपरेशनल जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने ईस्टर्न सेक्टर में एक फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर काम किया और बाद में विंग कमांडर के पद पर रहते हुए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नासिक डिवीन में चीफ टेस्ट पायलट बने।
ग्रुप कैप्टन के तौर पर, उन्होंने एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट में चीफ टेस्ट पायलट और नई दिल्ली में एयर हेडक्वार्टर में ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप के डायरेक्टर के तौर पर काम किया।
जून 2010 में, फ्रांस में होने वाली मल्टीनेशनल एयर एक्सरसाइज ‘गरुड़ IV’ में भारतीय वायु सेना की टुकड़ी का नेतृत्व करने के लिए मिश्रा को चुना गया।
जितेंद्र मिश्रा की सीनियर IAF पोस्टिंग
एयर कमोडोर के तौर पर, मिश्रा ने एयर फोर्स स्टेशन बरेली में 15 विंग और एयर फोर्स स्टेशन पठानकोट में 18 विंग की कमान संभाली।
बाद में उन्होंने एयर हेडक्वार्टर में एयर कमोडोर (एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स) के तौर पर काम किया।
एयर वाइस मार्शल के पद पर प्रमोट होने के बाद, मिश्रा ने एयर हेडक्वार्टर में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) और एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट के कमांडेंट के तौर पर काम किया।
ऑपरेशन सिंदूर में जितेंद्र मिश्रा की भूमिका
मिश्रा को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी भूमिका के लिए 2025 में स्वतंत्रता दिवस पर ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से सम्मानित किया गया था।
उन्हें मिले अन्य सम्मानों में 2024 में मिला ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ (AVSM) और 2013 में मिला ‘विशिष्ट सेवा मेडल’ (VSM) शामिल हैं।
‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी बेहतरीन सेवा को मान्यता दी और उनके करियर में मिले सैन्य सम्मानों की लंबी सूची में एक और सम्मान जोड़ा।
जितेंद्र मिश्रा वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख कब बने?
मिश्रा को एयर मार्शल के पद पर प्रमोट किया गया और उन्होंने 9 जनवरी, 2023 को इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग) के डिप्टी चीफ के तौर पर कार्यभार संभाला।
इसके बाद, 5 दिसंबर, 2023 को वे इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ बने।
1 जनवरी, 2025 को मिश्रा ने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पद संभाला। उन्होंने एयर मार्शल पंकज मोहन सिन्हा की जगह ली, जो 31 दिसंबर, 2024 को रिटायर हुए थे।
बता दें कि 38 साल से ज्यादा के करियर के बाद, मिश्रा अप्रैल 2026 में इंडियन एयर फोर्स से रिटायर हुए।
SBI to Dilute Stake in NSE IPO: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और उसकी सब्सिडियरी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स मिलकर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रस्तावित ₹30,000 करोड़ के आईपीओ में अपनी 1% तक हिस्सेदारी बेचने जा रहे हैं।
इस बात की पुष्टि खुद एसबीआई के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने की है। इसके साथ ही उन्होंने बैंक के होम लोन पोर्टफोलियो और हालिया एसबीआई म्यूचुअल फंड आईपीओ को लेकर भी कई अहम जानकारियां साझा की हैं।
NSE IPO में SBI ग्रुप कितना बेचेगा हिस्सा?
एसबीआई चेयरमैन सी एस शेट्टी ने एक इंटरव्यू में बताया कि बैंक और उसकी सहयोगी कंपनी मिलकर एनएसई के आईपीओ (OFS के जरिए) में हिस्सा बेचेंगे। एसबीआई मुख्य रूप से एनएसई में अपनी 0.65% हिस्सेदारी बेचेगा। एसबीआई कैपिटल मार्केट्स अपनी 0.35% हिस्सेदारी बेचेगा। इस तरह एसबीआई ग्रुप मिलकर कुल 1% हिस्सेदारी कैश करेगा। अन्य शेयरधारकों के शामिल होने के आधार पर यह आंकड़ा थोड़ा कम भी हो सकता है।
वर्तमान में कितनी है हिस्सेदारी?
मौजूदा समय में एनएसई में SBI की 3.23% और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स की 4.33% हिस्सेदारी है। चेयरमैन ने साफ किया कि फिलहाल बैंक की किसी अन्य सब्सिडियरी कंपनी के मोनेटाइजेशन या आईपीओ की तत्काल कोई योजना नहीं है।
सुपरहिट रहा था SBI Mutual Fund का IPO
हाल ही में एसबीआई ने अपने विदेशी पार्टनर ‘अमुंडी’ के साथ मिलकर एसबीआई म्यूचुअल फंड में लगभग 10% हिस्सेदारी बेची थी। ₹9,800 करोड़ का यह पब्लिक ऑफर निवेशकों के बीच बेहद सुपरहिट रहा और इसे 42 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था।लिस्टिंग के बाद एसबीआई की हिस्सेदारी 61.76% से घटकर 55.46% रह गई, जबकि अमुंडी की हिस्सेदारी 3.7% घटकर 32.56% पर आ गई।
होम लोन पोर्टफोलियो ₹10 लाख करोड़ पार करने की तैयारी में
हाउसिंग फाइनेंस सेगमेंट में एसबीआई की बादशाहत कायम है। बैंक जल्द ही एक बड़ा नया रिकॉर्ड बनाने जा रहा है। चालू तिमाही में एसबीआई का होम लोन पोर्टफोलियो ₹10 लाख करोड़ के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर जाएगा। बीते वित्त वर्ष में बैंक ने ₹9 लाख करोड़ का आंकड़ा पार किया था। होम लोन सेगमेंट में एसबीआई की बाजार हिस्सेदारी लगभग 28% है। देशभर में बैंक के 460 से ज्यादा होम लोन प्रोसेसिंग सेंटर्स काम कर रहे हैं, जो ग्राहकों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाते हैं।
देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है होम लोन: CS Setty
सी एस शेट्टी ने कहा कि ग्राहक कागजी कार्रवाई की पारदर्शिता, बिल्डर्स की ड्यू-डिलिजेंस और बैंक के भरोसे के कारण एसबीआई से होम लोन लेना पसंद करते हैं।उन्होंने जोर देकर कहा कि होम लोन को केवल एक बैंकिंग प्रोडक्ट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। 200 से अधिक उद्योग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रियल एस्टेट सेक्टर पर निर्भर हैं, इसलिए होम लोन भारत की आर्थिक वृद्धि का एक अभिन्न और महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अगले हफ्ते निफ़्टी के 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे टूटने की संभावना कम है। जब तक इंडेक्स 23,950 के अहम सपोर्ट जोन के नीचे नहीं जाता है, इसमें बड़ी गिरावट का डर नहीं है। ये बातें SBI सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड सुदीप शाह ने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कही हैं। उनके मुताबिक बहुत आक्रामक बिकवाली न होने से पता चलता है कि मंदड़ियों का अभी पूरी तरह से दबदबा नहीं बना है। निफ्टी अपने अहम मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है,लेकिन इनमें से ज्यादातर एवरेज अब फ्लैट हो गए हैं,जो बड़ी गिरावट के बजाय कंसोलिडेशन (बाजार के एक दायरे में रहने) का संकेत दे रहे हैं।
उनका मानना है कि हालिया तेजी के बाद बीच-बीच में प्रॉफ़िट बुकिंग की संभावना के बावजूद,निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स से निकट भविष्य में बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन जारी रखने की उम्मीद है।
अगले हफ्ते निफ्टी के 24,000 के स्तर से नीचे जाने की संभावना कम
बाजार की चाल पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि अगले हफ्ते निफ्टी के 24,000 के स्तर से नीचे जाने की संभावना कम है। जब तक इंडेक्स 23,950 के अहम सपोर्ट जोन के नीचे नहीं जाता है,इसमें बड़ी गिरावट का डर नहीं है। पिछले सात ट्रेडिंग सेशन में निफ़्टी 24,379 और 24,077 के दायरे में ही घूमता रहा है,जिससे साफ पता चलता है कि इसमें किसी खास दिशा में बढ़ने का मोमेंटम नहीं है। इंडेक्स अपने 200-दिन के EMA के ऊपर टिक नहीं पाया और हफ्ते के आखिर में 24,200 के आस-पास बंद हुआ,जो लगातार तीसरी वीकली गिरावट है। हालांकि,जबरदस्त बिकवाली न होने से संकेत मिलता है कि मंदड़ियों का अभी पूरी तरह से दबदबा नहीं बना है।
टेक्निकल नजरिए से देखें तो निफ़्टी अपने अहम मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है,लेकिन इनके ज्यादातर एवरेज अब सपाट हो गए हैं,जो किसी बड़ी गिरावट के बजाय कंसोलिडेशन का संकेत दे रहे हैं। मोमेंटम इंडिकेटर भी इस बात का सपोर्ट कर रहे हैं। डेली RSI पिछले 13 सेशन से एक ही दायरे में बना हुआ है,जबकि स्टोकेस्टिक ऑसिलेटर भी एक रेंज में ही ऊपर-नीचे हो रहा है,जो बाजार में अनिश्चितता की भावना को दिखाता है।
अब निफ्टी के लिए 24,000-23,950 का जोन काफी अहम हो गया है,जो पिछले स्विंग लो और ऊपर की ओर जाने वाली ट्रेंडलाइन सपोर्ट से मेल खाता है। अगर निफ्टी लगातार 23,950 के नीचे बना रहता है,तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इंडेक्स जल्द ही 23,700 की ओर जा सकता है।
ऊपर की तरफ निफ्टी के लिए 24,250-24,300 का जोन तत्काल रेजिस्टेंस बना हुआ है। इस रेंज के किसी भी तरफ ब्रेकआउट होने से बाजार की अगली चाल तय हो सकती है।
अगले हफ्ते बैंक निफ्टी में एक मजबूत चाल दिखने की उम्मीद
बैंक निफ्टी पर बात करते हुए सुदीप शाह ने कहा कि ऐसा लगता है कि अगले हफ्ते बैंक निफ़्टी में एक मजबूत चाल देखने को मिल सकती है,हालांकि ब्रेकआउट किस दिशा में होगा,यह अभी तय नहीं है। पिछले कुछ सेशन से इंडेक्स लगभग 1,075 अंकों के दायरे में ही घूम रहा है,जिससे पता चलता है कि मार्केट में कोई फैसला नहीं हो पा रहा है और न ही तेजड़िए और न ही मंदड़ियों का साफ दबदबा दिख रहा है।
बैंक निफ्टी के लिए एक अहम घटना डेली चार्ट पर बोलिंगर बैंड स्क्वीज़ का बनना है,जो उतार-चढ़ाव में भारी कमी का संकेत है। ऐसे सेटअप के बाद अक्सर कीमतों में बड़ी हलचल देखने को मिलती है,जिससे संकेत मिलता है कि बैंक निफ्टी में जल्द ही एक बड़ा ब्रेकआउट हो सकता है।
मोमेंटम इंडिकेटर न्यूट्रल बने हुए हैं,जिसमें RSI और स्टोकेस्टिक ऑसिलेटर दोनों ही साइडवेज (एक ही दायरे में)चल रहे हैं। ADX गिरकर 7.17 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है,जो बहुत कमजोर ट्रेंड का संकेत है। पिछले आंकड़ों की बात करें तो ADX की ऐसी कम रीडिंग के बाद अक्सर कीमतों में किसी एक दिशा में तेज चाल देखने को मिलती है।
टेक्निकल तौर पर बैंक निफ्टी के लिए 58,000-58,200 का स्तर अहम रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है,जबकि 57,200-57,000 एक अहम सपोर्ट एरिया है। इन दोनों में से किसी भी जोन के पार निर्णायक ब्रेकआउट से बैंक निफ्टी के अगले बड़े ट्रेंड का पता चलने की संभावना है।
जारी रहेगी छोटे-मझोले शेयरों का आउटपरफॉर्मेंस
सुदीप शाह का मानना है कि आगे मिड और स्मॉलकैप स्टॉक बेंचमार्क इंडेक्सों से बेहतर प्रदर्शन करते दिख सकते हैं। उनका कहना है कि हाल की तेजी के बाद बीच-बीच में होने वाली प्रॉफ़िट बुकिंग की संभावना के बावजूद,निकट भविष्य में ब्रॉडर मार्केट के बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन जारी रखने की उम्मीद है। निफ़्टी मिडकैप 100 और निफ़्टी स्मॉलकैप 100 दोनों ने नए रिकॉर्ड स्तर छुए हैं,जो मज़बूत मार्केट भागीदारी और बेहतर सेंटीमेंट को दिखाते हैं।
तकनीकी तौर पर ये दोनों इंडेक्स मजबूत अपट्रेंड में बने हुए हैं और अपने अहम मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। साथ ही मोमेंटम इंडिकेटर भी बुलिश जोन में हैं। निफ्टी मिडकैप 100 के लिए, 63,700-63,500 का जोन एक अहम सपोर्ट एरिया है। अगर यह इसके ऊपर बना रहता है,तो यह इंडेक्स 65,000-65,800 के स्तर तक जा सकता है।
निफ्टी स्मॉलकैप 100 के लिए 19,980-19,950 एक अहम सपोर्ट जोन बना हुआ है। 20,150 के स्तर को मजबूती से पार करने पर नई खरीदारी का मोमेंटम बन सकता है और इंडेक्स 20,400-20,600 के स्तर तक पहुंच सकता है। कुल मिलाकर,इनका ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है।
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SBI PO Prelims Result 2026: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की प्रोबेश्नरी अधिकारी (PO) भर्ती 2026 की प्रीलिम्स परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों के लिए अहम अपडेट है। इस परीक्षा का आयोजन चुनिंदा परीक्षा केंद्रों पर 01 और 02 अगस्त 2026 को किया गया था। बैंक ने एसबीआई पीओ प्री परीक्षा का रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट sbi.bank.in पर घोषित कर दिया है।
एसबीआई प्रोबेशनरी ऑफिसर प्रीलिम्स परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अब एसबीआई करियर पोर्टल के जरिए अपना क्वालिफाइंग स्टेटस चेक कर सकते हैं। यह रिजल्ट 1,500 प्रोबेशनरी ऑफिसर पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया में पहला बड़ा स्क्रीनिंग स्टेज है। एसबीआई पीओ प्रीलिम्स रिजल्ट बैंक के आधिकारिक भर्ती पोर्टल के जरिए चेक किया जा सकता है। रिजल्ट में उन कैंडिडेट की डिटेल दर्ज है जिन्होंने प्रारंभिक परीक्षा का पहला चरण पास कर लिया है और दूसरे चरण में मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए योग्य हैं।
यह भर्ती 1,500 प्रोबेशनरी ऑफिसर पदों के लिए की जा रही है। प्रीलिम्स परीक्षा 1 और 2 अगस्त को कई शिफ्ट में हुई थी, जिसमें कैंडिडेट का इंग्लिश लैंग्वेज, क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड और रीज़निंग एबिलिटी का टेस्ट लिया गया था।
एसबीआई पीओ प्रीलिम्स रिजल्ट 2026: डाउनलोड करने के स्टेप्स
एसबीआई पीओ प्री परीक्षा 2026 में शामिल उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर एसबीआई पीओ प्रीलिम्स रिजल्ट 2026 डाउनलोड करने के लिए यहां बताए गए स्टेप्स फॉलो कर सकते हैं:
- एसबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं और करियर सेक्शन, sbi.bank.in खोलें।
- करंट ओपनिंग्स या रिक्रूटमेंट रिजल्ट्स सेक्शन में जाएं।
- एडवर्टाइजमेंट नंबर CRPD/PO/2026-27/09 के तहत प्रोबेशनरी ऑफिसर्स के लिए रिक्रूटमेंट नोटिस ढूंढें।
- प्रीलिमनरी एग्जामिनेशन रिजल्ट लिंक पर क्लिक करें।
- रिजल्ट डॉक्यूमेंट स्क्रीन पर खुल जाएगा।
- रोल नंबर सर्च करने के लिए कंप्यूटर पर Ctrl + F फंक्शन का इस्तेमाल करें।
- जिन कैंडिडेट्स के रोल नंबर लिस्ट में हैं, उन्हें अगले स्टेज के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है।
- रिजल्ट को भविष्य के लिए डाउनलोड करके सेव कर लें।
एसबीआई पीओ प्री रिजल्ट 2026 के बाद आगे क्या?
एसबीआई भर्ती प्री परीक्षा 2026 के जरिए 1500 पदों पर भर्ती होनी है। इसमें 1446 सामान्य पद हैं जबकि 54 पद बैकलॉग श्रेणी के हैं। इस चरण को पार करने वाले उम्मीदवार मेन्स परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड डाउनलोड कर पाएंगे। मेन्स परीक्षा 12 सितंबर 2026 को होगी। इसके बाद उम्मीदवारों को साइकोमेट्रिक टेस्ट, ग्रुप एक्सरसाइज और पर्सनल इंटरव्यू जैसे चरणों से भी गुजरना होगा।
मेन्स परीक्षा का वेटेज होगा 75%
एसबीआई पीओ भर्ती 2026 में शामिल सभी उम्मीदवारों को ध्यान रखना चाहिए कि प्री परीक्षा इस भर्ती प्रक्रिया का पहला स्क्रीनिंग चरण था। इसके बाद मुख्य परीक्षा दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण स्क्रीनिंग का चरण होगा। अंतिम चयन सूची तैयार करते वक्त मेन्स परीक्षा का वेटेज सबसे ज्यादा, यानी 75% रहेगा, जबकि इंटरव्यू और ग्रुप एक्सरसाइज को मिलाकर बाकी 25% अंक मिलेंगे। यानी मेन्स परीक्षा असली गेम चेंजर होगी। एसबीआई पीओ भर्ती 2026 की फाइनल मेरिट लिस्ट इसी साल के अंत तक जारी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

