सेना के मेजर की पत्नी पर जासूसी का शक! स्विटजरलैंड स्टडी ट्रिप में विदेशी एजेंट्स के संपर्क में आई, कौन है ये, क्या-क्या लीक किया?

Spy News: जम्मू में एक भारतीय सेना के अधिकारी की पत्नी के खिलाफ कथित जासूसी से जुड़ी गतिविधियों के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि उसने चीनी खुफिया एजेंट के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर विश्लेषणात्मक दस्तावेज तैयार करने के लिए ‘चैटजीपीटी’ और ‘क्लाउड’ जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का इस्तेमाल किया। मेजर की पत्नी पर विदेशी खुफिया एजेंटों के संपर्क में आने और संवेदनशील सैन्य जानकारी शेयर करने के आरोपों की जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, महिला के पति की तैनाती पठानकोट में 9 कोर की इंटेलिजेंस यूनिट के साथ है। मामले में सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर कौन-सी जानकारी शेयर की गई और इसका सोर्स क्या था।

अधिकारियों के अनुसार, तेलंगाना की रहने वाली आरोपी महिला हाइली क्वालिफाइड है। उसने 2023 में संयुक्त राष्ट्र (UN) में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के क्षेत्र में इंटर्नशिप की थी। फिलहाल वह स्वतंत्र शोधकर्ता के रूप में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि उसे गिरफ्तार तो नहीं किया गया है। लेकिन FIR दर्ज होने के बाद उससे पूछताछ की गई है। वह जांच एजेंसियों का सहयोग कर रही है।

महिला के खिलाफ केस दर्ज, जांच शुरू

अधिकारियों ने बताया कि महिला को संवेदनशील सुरक्षा, रक्षा और भू-राजनीतिक मुद्दों पर विश्लेषणात्मक लेख तैयार करने का काम सौंपे जाने का आरोप है। इन विषयों में जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) से जुड़ी गतिविधियां, अरुणाचल प्रदेश में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और ड्रोन की तैनाती शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में शुक्रवार को जम्मू के गांधी नगर थाने में मामला दर्ज किया गया है।

महिला पर जासूसी करने और गोपनीय सरकारी जानकारी को बिना अनुमति इस्तेमाल करने से जुड़े शासकीय गोपनीयता अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा, आपराधिक साजिश रचने और देश की संप्रभुता के खिलाफ अपराधों से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं भी लगाई गई हैं।

कैसे हुआ शक?

मामले की जांच का जिम्मेदारी एक पुलिस उपाधीक्षक (SP) को सौंपी गई है। अधिकारियों ने बताया कि खुफिया सूचना मिलने के बाद केंद्रीय खुफिया एजेंसी और पुलिस की संयुक्त टीम ने 14 अक्टूबर को जम्मू तवी रेलवे स्टेशन पर महिला को उस समय रोका, जब वह कथित तौर पर पठानकोट जाने वाली ट्रेन में सवार होने की तैयारी कर रही थी। इसके बाद उसे पूछताछ के लिए पास के एक सैन्य स्टेशन ले जाया गया। महिला का मोबाइल फोन जब्त कर विस्तृत फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।

खुफिया इनपुट के बाद सुरक्षा कर्मियों ने रोका

सूत्रों के अनुसार, खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद महिला को उसके परिवार के साथ यात्रा करते समय 9 कोर के क्षेत्र में सुरक्षा कर्मियों ने रोका था। इसके बाद खुफिया अधिकारियों और मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) के कर्मियों की एक टीम ने उससे पूछताछ की। जांच एजेंसियां कथित तौर पर विदेशी खुफिया नेटवर्क से उसके संपर्कों और सैन्य सूचनाओं के संभावित आदान-प्रदान की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।

विदेश में पढ़ाई के दौरान संपर्क में आने का दावा

सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह आशंका जताई गई है कि महिला पश्चिमी देशों की यात्रा के दौरान एक विदेशी खुफिया एजेंट के संपर्क में आई थी। बताया जा रहा है कि स्विट्जरलैंड समेत कुछ देशों की यात्रा के दौरान उसे लेख लिखने के काम के बहाने संपर्क किया गया। आरोप है कि शुरुआत में उसे प्रत्येक लेख के लिए 200 से 300 डॉलर देने की पेशकश की गई। जांचकर्ताओं को संदेह है कि शुरुआत में लेख लिखने के नाम पर शुरू हुआ यह संपर्क बाद में कथित तौर पर संवेदनशील सैन्य जानकारी साझा करने तक पहुंच गया। हालांकि, विदेशी एजेंट से संपर्क और जानकारी साझा करने से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सेना की तैनाती और प्रतिबंधित क्षेत्रों की जानकारी लीक करने का आरोप

जांच एजेंसियों को संदेह है कि कथित तौर पर साझा की गई जानकारी में सेना की कोर, सैन्य संरचनाओं, जवानों की तैनाती और प्रतिबंधित सैन्य क्षेत्रों से संबंधित विवरण शामिल हो सकते हैं। अब जांच का अहम पहलू यह है कि महिला को ये जानकारियां कहां से मिलीं। एजेंसियां इस संभावना की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या उसे अपने पति की आधिकारिक तैनाती से जुड़ी किसी जानकारी तक पहुंच थी या उसने किसी अन्य माध्यम से संवेदनशील डिटेल्स हासिल किए थे।

भुगतान और वित्तीय लेन-देन की जांच

सूत्रों के अनुसार, महिला ने कथित तौर पर लेख लिखने के बदले नियमित भुगतान मिलने की बात स्वीकार की है। जांच एजेंसियां अब उसके वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि भुगतान किसने किया, रकम कहां से आई और क्या किसी लेन-देन का संबंध कथित खुफिया गतिविधियों से है। हालांकि, भुगतान मिलने की बात अपने आप में जासूसी के आरोप को साबित नहीं करती। जांच एजेंसियों को कथित सैन्य जानकारी साझा किए जाने और विदेशी संपर्कों के बीच संबंध स्थापित करना होगा।

दो महीने की बच्ची होने की भी चर्चा

सूत्रों से मिली जानकारी में दावा किया गया है कि महिला को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है और इसके पीछे उसकी दो महीने की बच्ची होने की बात बताई जा रही है। हालांकि, गिरफ्तारी नहीं होने के इस कथित कारण की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। फिलहाल, मामले में आगे की जांच जारी है। महिला पर लगाए गए आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं। जांच के नतीजों से ही स्पष्ट होगा कि संवेदनशील सैन्य सूचनाओं के कथित लीक में उसकी क्या भूमिका थी और क्या इस मामले के तार किसी विदेशी खुफिया नेटवर्क से जुड़े हैं।

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नौकरी नहीं मिली तो परेशान थे, अब बिना अप्लाई किए रोज आ रहे ऑफर, वायरल हुई शख्स की पोस्ट

जिंदगी में कई बार ऐसा होता है कि जिस चीज की हमें सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उसे हासिल करना उतना ही मुश्किल लगता है। नौकरी चाहिए तो कंपनियां जवाब नहीं देतीं और पढ़ाई के लिए लोन मांगो तो बैंक पीछे हट जाते हैं। लेकिन वक्त बदलते ही तस्वीर भी बदल जाती है। गोवा के एक फाउंडर अक्षत श्रीवास्तव ने लिंक्डइन पर अपना ऐसा ही अनुभव साझा किया है। उनका कहना है कि अब जब उन्हें नौकरी या लोन की जरूरत नहीं है, तो दोनों के ऑफर लगातार मिल रहे हैं। उनकी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।

जब 100 कंपनियों से किया संपर्क

अक्षत श्रीवास्तव ने बताया कि आज उन्हें लिंक्डइन पर रोजाना करीब दो जॉब ऑफर मिलते हैं, जबकि वह नौकरी की तलाश में भी नहीं हैं। लेकिन जब वह खुद नौकरी पाने के लिए कोशिश कर रहे थे, तब हालात बिल्कुल अलग थे। उस समय उन्होंने करीब 100 कंपनियों से संपर्क किया था, लेकिन उनमें से सिर्फ दो कंपनियों की तरफ से जवाब आया। यह अनुभव बताता है कि नौकरी की तलाश में मेहनत करने के बावजूद मनचाहा मौका मिलना हमेशा आसान नहीं होता।

विदेश में पढ़ाई के लिए लोन लेना भी था मुश्किल

अक्षत ने अपनी पोस्ट में एजुकेशन लोन का किस्सा भी साझा किया। विदेश में एमबीए करने के लिए उन्हें आर्थिक मदद की जरूरत थी। इसके लिए उन्होंने कई बैंकों से संपर्क किया, लेकिन उन्हें महसूस हुआ कि पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने वाला लोन मिलना मुश्किल होगा। वहीं, अब जब उन्हें कर्ज की जरूरत नहीं है, तो उनके मुताबिक, उन्हें रोजाना करीब पांच लोन ऑफर मिल रहे हैं। इसी विरोधाभास ने उनके अनुभव को चर्चा का विषय बना दिया है।

जरूरत के वक्त ही क्यों नहीं मिलते मौके?

अक्षत की पोस्ट पर कई यूजर्स ने अपने अनुभव साझा किए। एक यूजर ने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी नौकरी में खुश होता है, तब रिक्रूटर्स उसे नौकरी के ऑफर देते हैं। लेकिन जैसे ही वह नौकरी तलाशना शुरू करता है, कंपनियों की तरफ से जवाब मिलना मुश्किल हो जाता है। कुछ लोगों ने इस स्थिति को जिंदगी का अजीब संयोग बताया, जबकि अन्य ने इसके पीछे व्यावहारिक वजहें तलाशने की कोशिश की।

‘काबिलियत बढ़ाओ, कामयाबी खुद पीछे आएगी’

एक यूजर ने इस अनुभव को किस्मत से जोड़ने के बजाय व्यक्ति की योग्यता और विश्वसनीयता से जोड़ा। उसके मुताबिक, कंपनियां उम्मीदवार की क्षमता, अनुभव और उपलब्धियों को देखकर फैसला करती हैं। इसी तरह बैंक भी कर्ज देने से पहले व्यक्ति की आर्थिक स्थिति और उसे चुकाने की क्षमता का आकलन करते हैं।

अपनी बात समझाने के लिए यूजर ने फिल्म 3 इडियट्स का मशहूर डायलॉग भी याद दिलाया, “काबिल बनो, कामयाबी झक मारकर पीछे आएगी।”

अक्षत का अनुभव हर किसी की जिंदगी पर लागू हो, यह जरूरी नहीं। लेकिन उनकी पोस्ट ने एक अहम सवाल जरूर खड़ा किया है: क्या सफलता के लिए सिर्फ मौके तलाशना काफी है, या खुद को बेहतर बनाना भी उतना ही जरूरी है?

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पाकिस्तान में फिजिक्स गोल्ड मेडलिस्ट युवती ने खुदकुशी की:हार्वर्ड में एडमिशन दिलाने के नाम पर 93 लाख की ठगी, जमीन बेचकर रुपए जुटाए थे

पाकिस्तान में एक 20 साल की युवती ने पढ़ाई के नाम पर हुई 93 लाख रुपए की ठगी के बाद खुदकुशी कर ली। फिजिक्स गोल्ड मेडलिस्ट रही युवती का नाम लैबा इजाज है। वह अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ना चाहती थीं। परिवार का आरोप है कि एडमिशन, स्कॉलरशिप और अमेरिकी वीजा दिलाने का वादा करने वाले एक व्यक्ति ने उनसे पैसे लिए और फर्जी दस्तावेज दे दिए। 9 अक्टूबर को इस्लामाबाद के जी-10 सेक्टर के एक बाजार में लैबा का शव मिला। मामले में पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। हार्वर्ड में पढ़ने के लिए परिवार ने जमीन बेची, गहने गिरवी रखे लैबा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा की रहने वाली थीं। उन्होंने इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी इस्लामाबाद से फिजिक्स में ग्रेजुएशन किया था और गोल्ड मेडल हासिल किया था। उनका सपना अमेरिका में आगे की पढ़ाई करके वैज्ञानिक बनने का था। उनके पिता 1994 से इस्लामाबाद की सड़कों पर दूध और दही बेचकर परिवार चलाते हैं। बेटी की पढ़ाई के लिए उन्होंने घर बनाने के मकसद से खरीदी जमीन बेच दी। उनकी मां ने भी अपने गहने गिरवी रख दिए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लैबा को सऊदी अरब में पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप मिली थी, लेकिन उन्होंने अमेरिका में पढ़ने के अपने सपने को प्राथमिकता दी। एडमिशन और वीजा दिलाने का वादा करके लिए 93 लाख रुपए परिवार ने मोहम्मद नौमान नाम के व्यक्ति से संपर्क किया था। उसने खुद को विदेशी शिक्षा से जुड़ा कंसल्टेंट बताया और हार्वर्ड में एडमिशन, स्कॉलरशिप और अमेरिकी वीजा दिलाने का भरोसा दिया। परिवार का आरोप है कि नौमान ने इसके बदले 93 लाख पाकिस्तानी रुपए लिए। उसने यूनिवर्सिटी में एडमिशन और फीस जमा होने से जुड़े दस्तावेज भी दिए, लेकिन बाद में उनकी पुष्टि नहीं हो सकी। पाकिस्तान की FIA के मुताबिक, इस रकम में से 29 लाख रुपए लैबा के बैंक खाते के जरिए ट्रांसफर किए गए थे, जबकि बाकी पैसे नकद दिए गए थे। अमेरिकी दूतावास में फर्जी दस्तावेज का खुलासा हुआ लैबा जब इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास में वीजा इंटरव्यू के लिए पहुंचीं, तो उनके दस्तावेजों की पुष्टि नहीं हो सकी। परिवार ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और अमेरिकी दूतावास से भी संपर्क किया, लेकिन दस्तावेजों को सही नहीं पाया गया। लैबा के बहनोई जैद बिन अफजल के मुताबिक, आरोपी कई बार वीजा इंटरव्यू की तारीख आगे बढ़ाता रहा। वह कथित तौर पर तय तारीख से एक रात पहले फोन करके इंटरव्यू रद्द होने की बात कह देता था। आरोप है कि बाद में उसने 12 अक्टूबर को इंटरव्यू होने की बात कही और उससे पहले 22 लाख पाकिस्तानी रुपए और मांगे। तब तक लैबा को कथित धोखाधड़ी का पता चल चुका था और वह काफी परेशान थीं। एक आरोपी गिरफ्तार, दूसरे के खिलाफ भी मामला दर्ज पाकिस्तान की FIA ने 11 अक्टूबर को मुहम्मद नौमान की गिरफ्तारी की पुष्टि की। एजेंसी ने फातिमा सरवर नाम की एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। FIA के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी स्कॉलरशिप लेटर, यूनिवर्सिटी में एडमिशन के प्रस्ताव और फीस जमा करने की रसीदें तैयार की थीं। एजेंसी मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मामले का संज्ञान लेते हुए पुलिस अधिकारियों को जल्द कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भी लैबा के परिवार से मुलाकात की और मामले की निगरानी करने का भरोसा दिया। विदेश में पढ़ाई के नाम पर ठगी कैसे होती है? विदेश की नामी यूनिवर्सिटी में एडमिशन, स्कॉलरशिप और वीजा दिलाने का सपना दिखाकर ठग छात्रों से लाखों रुपए वसूलते हैं। वे फर्जी एडमिशन लेटर, स्कॉलरशिप के दस्तावेज और फीस की रसीदें दिखाकर परिवारों का भरोसा जीतते हैं। ठगी के 5 तरीके… 1. नामी यूनिवर्सिटी में एडमिशन का वादा: ठग दावा करते हैं कि उनके यूनिवर्सिटी में सीधे संपर्क हैं और वे आसानी से एडमिशन दिला सकते हैं। 2. स्कॉलरशिप का झांसा: वे पूरी या बड़ी स्कॉलरशिप दिलाने के नाम पर रजिस्ट्रेशन या प्रोसेसिंग फीस मांगते हैं। कई बार फर्जी स्कॉलरशिप लेटर भी देते हैं। 3. फर्जी दस्तावेज: यूनिवर्सिटी के नाम और लोगो का इस्तेमाल करके नकली एडमिशन लेटर, फीस की रसीदें और स्कॉलरशिप के कागज तैयार किए जाते हैं। 4. वीजा की गारंटी:कुछ एजेंट वीजा लगवाने का दावा करके अतिरिक्त पैसे मांगते हैं। जबकि वीजा देने का फैसला संबंधित देश के अधिकारी करते हैं। 5. देरी का डर दिखाकर रकम मांगना: ठग एडमिशन, फीस या वीजा प्रक्रिया का हवाला देकर हर बार नए पैसे मांगते हैं। वे यह दबाव भी बनाते हैं कि देर होने पर मौका हाथ से निकल जाएगा। ठगी होने पर क्या करें? पैसे गंवाने पर तुरंत बैंक से संपर्क करें और पुलिस या संबंधित साइबर अपराध एजेंसी में शिकायत दर्ज कराएं। फर्जी दस्तावेजों की जानकारी यूनिवर्सिटी को भी दें। ————————– ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा में इमरान की पार्टी की सरकार बर्खास्त:इमरजेंसी लगी; पूर्व पीएम की रिहाई के लिए राज्य के CM मार्च निकाल रहे थे पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने रविवार को खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी लगा दी और सरकार बर्खास्त कर दी। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इसकी घोषणा की। पूरी खबर यहां पढ़ें…

SBI Scholarship 2026: स्टूडेंट्स को SBI दे रहा ₹15 लाख तक की स्कॉलरशिप! 19 सितंबर तक है मौका, जानें पूरी डिटेल्स

SBI Asha Scholarship 2026-27: अगर आप या आपके घर में कोई स्टूडेंट स्कूल, कॉलेज, IIT, IIM, मेडिकल या विदेश में पढ़ाई कर रहा है और पढ़ाई का खर्च आड़े आ रहा है, तो देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक की यह स्कीम आपके बड़े काम आ सकती है। एसबीआई फाउंडेशन ने ‘एसबीआई प्लेटिनम जुबली आशा स्कॉलरशिप 2026-27’ के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।

क्या है इस स्कीम में?

एसबीआई की इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले मेधावी छात्रों को ₹15,000 से लेकर ₹15 लाख सालाना तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से निःशुल्क और ऑनलाइन है। आधिकारिक पोर्टल के अनुसार, 2026-27 सत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन की लास्ट डेट बढ़ाकर 19 सितंबर 2026 कर दी गई है।

किस कैटेगरी में मिलेगी कितनी स्कॉलरशिप?

एसबीआई आशा स्कॉलरशिप अलग-अलग शैक्षणिक स्तर के हिसाब से दी जा रही है:

  • कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्र: ₹15,000 सालाना।
  • अंडरग्रेजुएट (UG) छात्र: ₹75,000 तक।
  • पोस्टग्रेजुएट (PG) छात्र: ₹1.5 लाख तक।
  • MBBS (मेडिकल) छात्र: ₹2 लाख तक।
  • IITs (इंजीनियरिंग) छात्र: ₹2 लाख तक।
  • IIMs (MBA/PGDM) छात्र: ₹5 लाख तक।
  • विदेश में पढ़ाई करने वाले : ₹15 लाख तक।

कौन कर सकता है अप्लाई?

स्कॉलरशिप पाने के लिए एसबीआई फाउंडेशन ने कुछ शैक्षणिक और फैमिली इनकम की शर्तें तय की हैं:

कक्षा 9 से 12वीं के लिए: पिछली कक्षा में कम से कम 75% अंक या 7.5 CGPA होना अनिवार्य है। SC/ST छात्रों के लिए न्यूनतम अंक 65% और दिव्यांग छात्रों (PwBD) के लिए 60% तय किए गए हैं। पारिवारिक आय सीमा ₹3 लाख सालाना से अधिक नहीं होनी चाहिए।

ग्रेजुएशन और पोस्टग्रेजुएशन (UG/PG): UG छात्रों के लिए पारिवारिक आय सीमा ₹6 लाख सालाना है। कॉलेज/संस्थान NIRF ओवरऑल रैंकिंग की टॉप 300 सूची में या NAAC ‘A’ ग्रेड प्राप्त होना चाहिए।

MBBS: AIIMS या NIRF टॉप 50 मेडिकल कॉलेज में एडमिशन होना चाहिए। साथ ही NEET स्कोरकार्ड अनिवार्य है।

IIT: देश के 23 IITs में से किसी एक में पढ़ाई और वैध JEE Advanced स्कोरकार्ड।

IIM: देश के 22 IIMs में अध्ययनरत छात्र और वैध CAT स्कोरकार्ड (आय सीमा व शैक्षणिक नियम लागू)।

विदेश में उच्च शिक्षा: QS टॉप 200 यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई कर रहे या एडमिशन ऑफर लेटर पाने वाले भारतीय छात्र पात्र हैं। पारिवारिक आय ₹6 लाख सालाना से कम होनी चाहिए। वैध GRE, GMAT, MCAT, LNAT या LSAT स्कोरकार्ड होना अनिवार्य है।

आवेदन कैसे करें और क्या-क्या डॉक्यूमेंट्स चाहिए?

पोर्टल पर जाएं: आधिकारिक SBI Asha Scholarship पोर्टल पर जाकर अपना अकाउंट बनाएं।

कैटेगरी चुनें: अपनी योग्यता के अनुसार सही स्कॉलरशिप कैटेगरी का चयन करें और फॉर्म भरें।

डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें: पिछली शैक्षणिक मार्कशीट, पहचान पत्र (Aadhaar/Govt ID), आय प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक डिटेल्स, एडमिशन/बोनाफाइड सर्टिफिकेट और फीस रसीद, प्रवेश परीक्षा स्कोरकार्ड (JEE/NEET/CAT/GRE/GMAT आदि), कास्ट सर्टिफिकेट या दिव्यांग प्रमाण पत्र (अगर लागू हो)।

ध्यान दें: एक बार फॉर्म सबमिट होने के बाद इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया जा सकेगा। शॉर्टलिस्ट किए गए छात्रों का टेलीफोनिक इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद फाइनल सिलेक्शन होगा।

भावनगर में जहरीली शराब से 8 की मौत, 14 आरोपी गिरफ्तार

भावनगर में जहरीली शराब से 8 की मौत, 14 आरोपी गिरफ्तार

poisonous liquor

गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब पीने से 8 लोगों की मौत हो चुकी है और 61 लोग प्रभावित हैं। पुलिस ने अब तक 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच तेज कर दी है। इस पूरी घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रभावित लोगों के इलाज और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। ALSO READ: भूपेंद्र पटेल की वर्ल्ड बैंक संग बड़ी बैठक, GIFT City से AI तक पर चर्चा; वॉलमार्ट के साथ MSME को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर मंथन

 

अस्पताल से अब तक 16 डिस्चार्ज 

अस्पताल में भर्ती मरीजों में से अब तक 16 लोगों को डिस्चार्ज कर दिया गया है, जबकि वर्तमान में 19 मरीज अस्पताल में उपचाराधीन हैं। इलाज करा रहे मरीजों में से 5 मरीजों को आईसीयू (ICU) में रखा गया है, जिनमें से एक मरीज की हालत बेहद गंभीर बताई गई है। इस हादसे में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2 मरीजों की मौत संदिग्ध मानी जा रही है। राहत की बात यह है कि पिछले 24 घंटों में कोई नया मरीज अस्पताल में भर्ती नहीं हुआ है। 

 

पुलिस रिमांड पर आरोपी

नकली शराबकांड को लेकर पुलिस ने जांच तेज कर दी है और अब तक कुल 14 आरोपियों को पकड़ा जा चुका है। शुरुआत में पकड़े गए 13 आरोपियों को कोर्ट ने 10 दिन के रिमांड पर भेजा था। इस मामले के मुख्य आरोपी रईस के 9 दिन की पुलिस रिमांड पर है। पुलिस द्वारा मामले में आरोपियों की भूमिका, नकली शराब की सप्लाई और पूरे नेटवर्क को लेकर गहन जांच की जा रही है। 

 

इस मामले में पकड़े गए सभी आरोपियों की रिमांड अवधि 31 अगस्त को पूरी हो रही है। रिमांड खत्म होने के बाद सभी आरोपियों को दोबारा अदालत के सामने पेश किया जाएगा। पुलिस जांच आगे बढ़ने के साथ ही इस नकली शराबकांड से जुड़े अन्य लोगों और उनके नेटवर्क के बारे में भी नई जानकारी सामने आने की संभावना है। ALSO READ: गुजरात सरकार का बड़ा फैसला, विदेश में पढ़ाई के लिए अब 10 लाख रुपये तक आय वालों को मिलेगा लोन

 

मामले पर गरमाई सियासत

भावनगर की इस गंभीर घटना को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी बयानबाजी देखने को मिल रही है। इसी सिलसिले में कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल भावनगर का दौरा करेंगे। वे वहां पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी लेंगे और प्रभावित परिवारों तथा मौजूदा स्थिति का जायजा लेंगे। फिलहाल भावनगर में स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अमला पूरी स्थिति पर सख्त निगरानी बनाए हुए हैं।

₹5 करोड़ vs ₹10 करोड़: रिटायरमेंट के बाद कितने फंड में मिलेगी असली आजादी? जानिए एक्सपर्ट्स का ‘नो रिस्क’ फॉर्मूला

Rs 5 Crore vs Rs 10 Crore Retirement Corpus: भारत में फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस या अर्ली रिटायरमेंट का सपना देखने वाले ज्यादातर लोगों के दिमाग में एक ‘मैजिक नंबर’ होता है। अधिकतर भारतीय निवेशकों के लिए यह नंबर ₹5 करोड़ से ₹10 करोड़ के बीच झूलता रहता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ₹5 करोड़ का फंड जुटाने के बाद आपकी पैसों की चिंताएं पूरी तरह खत्म हो जाती हैं, या ₹10 करोड़ का कॉर्पस ही असली आजादी दिला पाता है?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन दोनों पड़ावों के बीच का असली फर्क केवल पैसों का नहीं, बल्कि फ्लेक्सिबिलिटी, सुरक्षा और लाइफस्टाइल में मिलने वाले मार्जिन का है। आइए आसान भाषा में समझते हैं ₹5 करोड़ और ₹10 करोड़ के फंड का पूरा गणित।

क्या ₹5 करोड़ का फंड रिटायरमेंट के लिए काफी है?

आपकी उम्र, खर्च, निर्भर सदस्यों, मेडिकल जरूरतों और लाइफस्टाइल के आधार पर ₹5 करोड़ का फंड फाइनेंशियल फ्रीडम दिला सकता है। लेकिन इस लेवल पर आपको कड़े वित्तीय अनुशासन और सोच-समझकर पैसे निकालने की जरूरत होती है।

MIRA Money के इनवेस्टमेंट रिसर्च एनालिस्ट रोहन गोयल के अनुसार, अगर आप 4% के स्टैंडर्ड विड्रॉल रेट से पैसे निकालते हैं, तो ₹5 करोड़ के फंड से आपको सालाना ₹20 लाख या करीब ₹1.6 लाख महीना मिल सकता है (जो महंगाई के हिसाब से एडजस्ट होगा)।

यह रकम नौकरी छोड़ने, करियर से ब्रेक लेने या कम तनाव वाली नौकरी चुनने के लिए काफी है, लेकिन जोखिम भी है। अचानक आई मेडिकल इमरजेंसी, बच्चे की विदेश में पढ़ाई या शेयर बाजार में लंबी मंदी आपके पूरे प्लान को बिगाड़ सकती है। यही वजह है कि ₹5 करोड़ वाले लेवल पर ज्यादातर लोग कोई न कोई पैसिव इनकम या काम जारी रखते हैं।

कॉर्पस ₹10 करोड़ पहुंचने पर क्या-क्या बदल जाता है?

जब आपका कॉर्पस बढ़कर ₹10 करोड़ हो जाता है, तो 4% के नियम के हिसाब से आपकी सालाना आय दोगुनी होकर ₹40 लाख (लगभग ₹3.33 लाख महीना) हो जाती है। यह रकम आपको केवल आराम ही नहीं, बल्कि अनिश्चितताओं से निपटने की बड़ी ढाल भी देती है।

₹10 करोड़ के लेवल पर हेल्थकेयर, अंतरराष्ट्रीय यात्राएं या बच्चों/माता-पिता की मदद करना आपके बजट पर भारी नहीं पड़ता।

अगर रिटायरमेंट के शुरुआती सालों में ही शेयर बाजार गिर जाता है, तब भी आपके पोर्टफोलियो पर इसका असर कम पड़ता है क्योंकि आपका विड्रॉल रेट आपके कुल फंड के मुकाबले काफी सुरक्षित होता है।

क्या ₹10 करोड़ होने का मतलब ज्यादा फिजूलखर्ची करना है?

बिल्कुल नहीं। बड़ा कॉर्पस आपको तभी तक वित्तीय आजादी दे सकता है जब तक आपकी लाइफस्टाइल और खर्च नियंत्रण में रहें। वाइज फिनसर्व की डायरेक्टर और सीओओ चारू पहूजा चेतावनी देती हैं कि यहाँ ‘लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन’ यानी अमीर होने के साथ खर्च बढ़ाने की आदत सबसे बड़ा खतरा बन सकती है। बड़ा घर, महंगी गाड़ियां और बार-बार महंगे वेकेशन आपके मंथली बजट को इतना बढ़ा सकते हैं कि ₹10 करोड़ का बड़ा फंड भी कम पड़ने लगे।

₹5 करोड़ और ₹10 करोड़ में सबसे बड़ा फर्क क्या है?

₹5 करोड़ और ₹10 करोड़ में सबसे बड़ा फर्क क्या है?

आपके लिए कौन सा आंकड़ा सही है?

फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस का मतलब केवल पैसों का ढेर लगाना नहीं, बल्कि काम को मजबूरी के बजाय ‘अपनी पसंद’ बनाना है। ₹5 करोड़ आपको काम छोड़ने की आजादी दे सकता है, लेकिन ₹10 करोड़ आपको जिंदगी में किसी भी अनचाहे मोड़ या मंदी से बेफिक्र होने का सुकून देता है। सही कॉर्पस वही है जो आपकी मौजूदा लाइफस्टाइल को बनाए रखे और महंगाई को पछाड़ते हुए आपको कभी दोबारा मजबूरी में काम पर न लौटने दे।

डिस्क्लेमर: यह खबर वित्तीय विशेषज्ञों के विचारों और सैद्धांतिक कैलकुलेशन पर आधारित है। इसे व्यक्तिगत निवेश या रिटायरमेंट सलाह न माना जाए। अपनी उम्र और वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (CFP) से सलाह जरूर लें।

हरियाणा के युवक की यूरोप में मौत,बहन ने दी मुखाग्नि:समुद्र देखने गया तो डूबा, ₹15 लाख लगाकर विदेश भेजा था; पिता की पहले मौत हो चुकी

हरियाणा के जींद से यूरोप गए 22 वर्षीय युवक की डूबने से मौत हो गई। वो मॉल्डोवा में दोस्तों के साथ वीकएंड पर समुद्र घूमने गया था। जिस बोट में वो बैठा अचानक से थे, वह डूबने लगी। समुद्र में डूबने से युवक की मौत हो गई। युवक 9 महीने पहले यूरोप स्टडी वीजा पर गया था। पढ़ाई के साथ-साथ वहां पर एक होटल में पार्ट टाइम डिलीवरी बॉय का काम करता था। युवक के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इसी कारण उसे विदेश भेजा गया था ताकि वो पढ़ाई के साथ वहां जॉब कर पैसे भेज सके। युवक के पिता की 7 साल पहले मौत हो चुकी है। मां ने रिश्तेदारों से पैसे उधार लेकर इकलौते बेटे को भेजा था। अब 10 लाख रुपए खर्च कर युवक का शव गांव लाया गया। शव गांव पहुंचने पर आज बड़ी बहन ने भाई का अंतिम संस्कार किया और मुखाग्नि दी। 9 महीने पहले विदेश भेजा था चचेरे भाई प्रवीन कुमार ने बताया कि गांव चांदपुर के रहने वाले परिवार ने करीब 9 महीने पहले निहाल सिंह (22) को स्टडी वीजा पर विदेश भेजा था। परिवार को उम्मीद थी कि वह वहां पढ़ाई के साथ कमाई करके आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद करेगा। विदेश भेजने में 15 लाख रुपए खर्च किए प्रवीन के मुताबिक, निहाल को विदेश भेजने में परिवार ने करीब 15 लाख रुपए खर्च किए थे। मां के पास इतने पैसे नहीं थे, इसलिए रिश्तेदारों और जानकारों से रकम जुटाई गई थी। अब शव भारत लाने में भी करीब 10 लाख रुपए खर्च हुए हैं, जिसमें कुछ राशि परिवार और कुछ भाईचारे से जुटाई गई। पिता की मौत के बाद निहाल था सहारा प्रवीन ने बताया कि निहाल के पिता कृष्ण कुमार की 7 साल पहले ही हार्ट अटैक से मौत हो चुकी थी। इसके बाद मां सुनीता देवी ने दोनों बच्चों का पालन-पोषण किया। घर के पास उनकी करियाना की दुकान है और निहाल परिवार में अकेला कमाने वाला था। निहाल से परिवार को बड़ी उम्मीदें थीं परिवार को उम्मीद थी कि निहाल विदेश में पढ़ाई पूरी करने के साथ कमाई कर मां और बहन का सहारा बनेगा। उसकी मौत के बाद परिवार की उम्मीदें टूट गईं। गांव में शव पहुंचने के बाद परिवार में मातम छा गया। दोपहल 2 बजे निहाल का अंतिम संस्कार किया गया।

Study Abroad India: सरकार ने संसद में दिया जवाब, अब विदेशी यूनिवर्सिटी करेंगी भारत का रुख और भारत से विदेश पढ़ने जा रहे छात्र घटे

Study Abroad India: हर साल बड़ी संख्या में भारतीय छात्र विदेश पढ़ने जाते हैं। लेकिन, ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन (BoI) द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि पढ़ाई के मकसद से विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में गिरावट आई है। यह क्रम लगातार दूसरे साल बना रहा है। 2025 में विदेश जाते समय 6,19,264 भारतीयों ने पढ़ाई या शिक्षा को अपनी यात्रा का मकसद बताया। यह 2024 में 7,60,060 और 2023 में 8,94,758 से कम था। यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में दी।

एक तरफ, विदेश में पढ़ाई करने जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में कमी आई है। वहीं, यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने ऑस्ट्रेलिया, इटली, यूनाइटेड किंगडम (UK) और यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका (USA) के फॉरेन हायर एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन्स (FHEIs) को 16 लेटर ऑफ इंटेंट (LoIs) जारी किए हैं। यूजीसी ने कर्नाटक में छह, महाराष्ट्र में छह, दिल्ली एनसीआर में तीन और तमिलनाडु में एक एफएचईआई को एनओआई जारी किए हैं। महाराष्ट्र के छह एलओआई में से, चार एफएचईआई (यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क, यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल, यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन और इलिनोइस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) को मुंबई में एकेडमिक ऑपरेशन शुरू करने के लिए लेटर ऑफ अप्रूवल दिया गया है। यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्प्टन और यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स ने पहले ही गुरुग्राम और बेंगलुरु में अपने कैंपस बना लिए हैं।

भारतीय छात्रों की विदेश में पढ़ाई करने की संख्या कम होने के साथ ही कई प्रतिष्ठित भारतीय संस्थानों ने अपने ओवरसीज कैंपस खोले हैं। विदेश में कैंपस खोलने वाले संस्थानों में आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थान शामिल हैं। आईआईटी मद्रास, आईआईटी दिल्ली और आईआईएम अहमदाबाद ने क्रमशः 2023 में जांजीबार, 2024 में अबू धाबी और 2025 में दुबई में अपने विदेशी परिसर स्थापित किए हैं। आईआईएम अहमदाबाद ने मध्य-पूर्व, एशिया और अफ्रीका के छात्रों के लिए सितंबर 2025 में दुबई परिसर में एक साल का पूर्णकालिक एमबीए कार्यक्रम और एक सामान्य प्रबंधन कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम में 35 छात्र हैं।

इधर, बीओआई द्वारा जारी विदेश पढ़ने जाने वाले छात्रों का पांच साल का डेटा महामारी के बाद तेजी से बढ़ोतरी और फिर लगातार गिरावट दिखाता है। 2021 में, 4,45,580 भारतीयों ने पढ़ाई या शिक्षा को अपना घोषित मकसद बताकर विदेश यात्रा की। 2022 में यह संख्या बढ़कर 7,52,100 हो गई और फिर 2023 में और बढ़कर 8,94,758 हो गई। तब से, यह संख्या 2024 में घटकर 7,60,060 और 2025 में 6,19,264 हो गई है।

कोविड के बाद 2022 में पढ़ाई के लिए विदेश जाने वाले भारतीयों की संख्या में लगभग 69% की बढ़ोतरी हुई। 2023 में यह और 19% बढ़ी। लेकिन 2024 में दिशा बदल गई। पिछले साल की तुलना में यह संख्या लगभग 15% कम हो गई। 2025 में यह गिरावट और बढ़ गई। विदेश पढ़ने जाने वाले छात्रों की संख्या में लगभग 18.5% की कमी आई। 2025 में विदेश जाने वाले स्टूडेंट की संख्या 2023 के मुकाबले लगभग 2.76 लाख कम थी। वहीं, यह 2021 के मुकाबले अभी भी लगभग 1.74 लाख ज़्यादा थी।

पांच साल के इस क्रम को सरकार ने दो फेज में बांटा

पहला रिकवरी और एक्सपेंशन फेज। छात्र मोबिलिटी 2021 में 4.46 लाख से बढ़कर 2022 में 7.52 लाख हो गई और फिर 2023 में 8.9 लाख को पार कर गई। दूसरा चरण 2024 में शुरू हुआ। यह संख्या आठ लाख से नीचे आ गई और फिर 2025 में और गिरकर 6.19 लाख हो गई। सरकार ने इस क्रम को किसी एक वजह से नहीं जोड़ा है। शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि विदेश में पढ़ाई करने का फैसला अफोर्डेबिलिटी, फाइनेंस तक पहुंच, विदेशी समाजों के संपर्क में आना और पढ़ाई की किसी खास ब्रांच के लिए एप्टीट्यूड जैसे फैक्टर्स पर निर्भर करता है।

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विदेशी डिग्री का क्रेज खत्म,घर लौटे 52 लाख चीनी छात्र:कम हुआ विदेश जाने का रुझान; पिछले साल 94% छात्र स्वदेश लौटे

चीन में विदेश जाकर पढ़ाई करने का चलन तेजी से कम हो रहा है। माता-पिता मानते हैं कि देश के अपने विश्वविद्यालय अब पहले से बेहतर हो गए हैं। इसलिए भारी खर्च करके विदेश जाने का फायदा कम दिखता है। इसी वजह से 2019 में जहां 7 लाख छात्र विदेश पढ़ने गए थे, 2025 में यह संख्या घटकर करीब 5.7 लाख रह गई। दूसरी ओर विदेश से पढ़ाई पूरी करके चीन लौटने वालों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। 2025 में विदेश में रुकने के बजाय करीब 94% छात्र वापस लौट आए। 10 साल में कुल 52 लाख ग्रेजुएट लौट चुके हैं। न्यू ओरिएंटल के आंकड़ों के मुताबिक, विदेश से लौटने वाले छात्रों की शुरुआती सैलरी औसतन करीब 1.80 लाख रुपए प्रति महीना है। वहीं, देश में ही पढ़ाई करने वालों की औसत सैलरी करीब 1 लाख रुपए है। हालांकि हालात ऐसे हैं कि कई विदेश-पढ़े युवाओं को इससे भी कम कमाई मिल रही है और गुजारे के लिए डिलीवरी जैसे काम करने पड़ रहे हैं। विदेशी डिग्री का फायदा घटा,कंपनियों का नजरिया बदला कई कंपनियां अब विदेशी डिग्री को पहले जैसी तरजीह नहीं देतीं। विदेश की पढ़ाई के कोर्स की समय सीमों कम होना और आसान दाखिले के कारण कुछ एचआर इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाते हैं। जैसे चीन में पोस्ट ग्रेजुएशन तीन साल का होता है। वहीं ब्रिटेन और अमेरिका में एक साल का। सरकारी नौकरियों में भी विदेश से पढ़े युवाओं के लिए मुश्किलें बढ़ी हैं। शिक्षा पर खर्च बढ़ा तो परिवारों ने बजट घटाया विदेश में पढ़ाई का खर्च तेजी से बढ़ा है। सर्वे के मुताबिक, 2025 में विदेश पढ़ाई का औसत खर्च बढ़कर 85 लाख रुपए हो गया है। यह 2023 के मुकाबले करीब 20% ज्यादा है। इसलिए जो छात्र अब भी बाहर जा रहे हैं, वे ऐसे देश चुन रहे हैं जहां पैसा वसूल हो सके। चीन की यूनिवर्सिटीज मजबूत, फीस कम चीन के विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में सुधार हुआ है। वर्ल्ड रैंकिंग में पेकिंग और त्सिंगहुआ यूनिवर्सिटी अब 13वें और 14वें नंबर पर हैं। देश के ‘985’ और ‘211’ समूह के कॉलेज कई विदेशी संस्थानों से बेहतर माने जा रहे हैं। सरकारी यूनिवर्सिटी की सालाना फीस विदेशों के से बहुत कम है।

विदेश में पढ़ाई के खर्चे पर अभिजीत दीपके ने बताया सच, कहा अब लोन चुकाना है

Abhijeet Deepke

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी अमेरिका में पढ़ाई के खर्चे को लेकर उठे सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी बोस्टन यूनिवर्सिटी में एमएस (पब्लिक रिलेशंस) की डिग्री स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन से पूरी हुई। उन्होंने स्कॉलरशिप दस्तावेज भी सार्वजनिक रूप से दिखाने की पेशकश की है।

अभिजीत दीपके ने पत्रकार बरखा दत्त को दिए इंटरव्यू में कहा, “मैं बोस्टन यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप प्राप्त की थी और बाकी खर्च के लिए एजुकेशन लोन लिया था, जिसे मुझे अभी चुकाना है।” उन्होंने डीन स्कॉलरशिप का दस्तावेज साझा करते हुए बताया कि यूनिवर्सिटी ने उन्हें प्रति सेमेस्टर 12,500 डॉलर की स्कॉलरशिप दी, जो तीन सेमेस्टर के लिए कुल 37,500 डॉलर (लगभग 30 लाख रुपये से अधिक) बनी।
 
विवाद की शुरुआत : विवाद तब शुरू हुआ जब सूरत के आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके (महाराष्ट्र सरकार के रिटायर्ड जूनियर इंजीनियर) की वित्तीय स्थिति की जांच की मांग की। तिवारी ने सवाल उठाया कि मासिक वेतन लगभग 60-65 हजार रुपए वाले रिटायर्ड कर्मचारी ने अमेरिका जैसी महंगी पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया। उन्होंने चुनाव आयोग, इनकम टैक्स विभाग और महाराष्ट्र सरकार को पत्र लिखकर जांच की अपील की थी।

अभिजीत ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि वे अपना स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन दस्तावेज दिखाने को तैयार हैं। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर चुनौती दी, “मैं अपना स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन लेटर दिखाने को तैयार हूं। क्या सम्राट अपना डिग्री दिखाएंगे?” कितना खर्च आया पढ़ाई पर? अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस के मास्टर कोर्स पर ट्यूशन फीस, रहन-सहन, स्वास्थ्य बीमा आदि मिलाकर कुल खर्च 30 लाख से 1 करोड़ रुपये तक हो सकता है। अभिजीत की स्कॉलरशिप ने काफी हिस्सा कवर किया, जबकि बाकी लोन से पूरा हुआ। उनके पिता ने पहले भी लोन लेकर बेटे को पढ़ाने की बात कही थी।

CJP की फंडिंग को लेकर भी सवाल : अभिजीत दीपके ने पुणे से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद वे अमेरिका गए और हाल ही में जून 2026 में भारत लौटकर बड़े प्रदर्शन आंदोलन का नेतृत्व किया। CJP की फंडिंग को लेकर भी सवाल उठे हैं, जिस पर उन्होंने क्राउडफंडिंग और पूर्ण पारदर्शिता का वादा किया है।यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहां लोग दीपके के जवाब और RTI कार्यकर्ता के सवालों पर अपनी राय रख रहे हैं। अभिजीत दीपके की स्पष्टता ने कई सवालों के जवाब दिए हैं, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। अभिजीत दीपके ने बयान दिया है कि पढ़ाई का खर्च स्कॉलरशिप और लोन से हुआ। अब लोन चुकाना है।

बता दें कि अभिजीत दीपके कॉकरोच पार्टी बनाकर चर्चा में आए थे। पार्टी बनाने के बाद उन्‍होंने दिल्‍ली के जंतर मंतर में प्रोटेस्‍ट किया। बाद में ये प्रोटेस्‍ट जेंनजी प्रोटेस्‍ट बन गया। जिसका असर यह हुआ कि नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्‍तीफा देना पडा।