सेना के मेजर की पत्नी पर जासूसी का शक! स्विटजरलैंड स्टडी ट्रिप में विदेशी एजेंट्स के संपर्क में आई, कौन है ये, क्या-क्या लीक किया?

Spy News: जम्मू में एक भारतीय सेना के अधिकारी की पत्नी के खिलाफ कथित जासूसी से जुड़ी गतिविधियों के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि उसने चीनी खुफिया एजेंट के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर विश्लेषणात्मक दस्तावेज तैयार करने के लिए ‘चैटजीपीटी’ और ‘क्लाउड’ जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का इस्तेमाल किया। मेजर की पत्नी पर विदेशी खुफिया एजेंटों के संपर्क में आने और संवेदनशील सैन्य जानकारी शेयर करने के आरोपों की जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, महिला के पति की तैनाती पठानकोट में 9 कोर की इंटेलिजेंस यूनिट के साथ है। मामले में सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर कौन-सी जानकारी शेयर की गई और इसका सोर्स क्या था।

अधिकारियों के अनुसार, तेलंगाना की रहने वाली आरोपी महिला हाइली क्वालिफाइड है। उसने 2023 में संयुक्त राष्ट्र (UN) में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के क्षेत्र में इंटर्नशिप की थी। फिलहाल वह स्वतंत्र शोधकर्ता के रूप में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि उसे गिरफ्तार तो नहीं किया गया है। लेकिन FIR दर्ज होने के बाद उससे पूछताछ की गई है। वह जांच एजेंसियों का सहयोग कर रही है।

महिला के खिलाफ केस दर्ज, जांच शुरू

अधिकारियों ने बताया कि महिला को संवेदनशील सुरक्षा, रक्षा और भू-राजनीतिक मुद्दों पर विश्लेषणात्मक लेख तैयार करने का काम सौंपे जाने का आरोप है। इन विषयों में जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) से जुड़ी गतिविधियां, अरुणाचल प्रदेश में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और ड्रोन की तैनाती शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में शुक्रवार को जम्मू के गांधी नगर थाने में मामला दर्ज किया गया है।

महिला पर जासूसी करने और गोपनीय सरकारी जानकारी को बिना अनुमति इस्तेमाल करने से जुड़े शासकीय गोपनीयता अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा, आपराधिक साजिश रचने और देश की संप्रभुता के खिलाफ अपराधों से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं भी लगाई गई हैं।

कैसे हुआ शक?

मामले की जांच का जिम्मेदारी एक पुलिस उपाधीक्षक (SP) को सौंपी गई है। अधिकारियों ने बताया कि खुफिया सूचना मिलने के बाद केंद्रीय खुफिया एजेंसी और पुलिस की संयुक्त टीम ने 14 अक्टूबर को जम्मू तवी रेलवे स्टेशन पर महिला को उस समय रोका, जब वह कथित तौर पर पठानकोट जाने वाली ट्रेन में सवार होने की तैयारी कर रही थी। इसके बाद उसे पूछताछ के लिए पास के एक सैन्य स्टेशन ले जाया गया। महिला का मोबाइल फोन जब्त कर विस्तृत फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।

खुफिया इनपुट के बाद सुरक्षा कर्मियों ने रोका

सूत्रों के अनुसार, खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद महिला को उसके परिवार के साथ यात्रा करते समय 9 कोर के क्षेत्र में सुरक्षा कर्मियों ने रोका था। इसके बाद खुफिया अधिकारियों और मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) के कर्मियों की एक टीम ने उससे पूछताछ की। जांच एजेंसियां कथित तौर पर विदेशी खुफिया नेटवर्क से उसके संपर्कों और सैन्य सूचनाओं के संभावित आदान-प्रदान की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।

विदेश में पढ़ाई के दौरान संपर्क में आने का दावा

सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह आशंका जताई गई है कि महिला पश्चिमी देशों की यात्रा के दौरान एक विदेशी खुफिया एजेंट के संपर्क में आई थी। बताया जा रहा है कि स्विट्जरलैंड समेत कुछ देशों की यात्रा के दौरान उसे लेख लिखने के काम के बहाने संपर्क किया गया। आरोप है कि शुरुआत में उसे प्रत्येक लेख के लिए 200 से 300 डॉलर देने की पेशकश की गई। जांचकर्ताओं को संदेह है कि शुरुआत में लेख लिखने के नाम पर शुरू हुआ यह संपर्क बाद में कथित तौर पर संवेदनशील सैन्य जानकारी साझा करने तक पहुंच गया। हालांकि, विदेशी एजेंट से संपर्क और जानकारी साझा करने से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सेना की तैनाती और प्रतिबंधित क्षेत्रों की जानकारी लीक करने का आरोप

जांच एजेंसियों को संदेह है कि कथित तौर पर साझा की गई जानकारी में सेना की कोर, सैन्य संरचनाओं, जवानों की तैनाती और प्रतिबंधित सैन्य क्षेत्रों से संबंधित विवरण शामिल हो सकते हैं। अब जांच का अहम पहलू यह है कि महिला को ये जानकारियां कहां से मिलीं। एजेंसियां इस संभावना की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या उसे अपने पति की आधिकारिक तैनाती से जुड़ी किसी जानकारी तक पहुंच थी या उसने किसी अन्य माध्यम से संवेदनशील डिटेल्स हासिल किए थे।

भुगतान और वित्तीय लेन-देन की जांच

सूत्रों के अनुसार, महिला ने कथित तौर पर लेख लिखने के बदले नियमित भुगतान मिलने की बात स्वीकार की है। जांच एजेंसियां अब उसके वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि भुगतान किसने किया, रकम कहां से आई और क्या किसी लेन-देन का संबंध कथित खुफिया गतिविधियों से है। हालांकि, भुगतान मिलने की बात अपने आप में जासूसी के आरोप को साबित नहीं करती। जांच एजेंसियों को कथित सैन्य जानकारी साझा किए जाने और विदेशी संपर्कों के बीच संबंध स्थापित करना होगा।

दो महीने की बच्ची होने की भी चर्चा

सूत्रों से मिली जानकारी में दावा किया गया है कि महिला को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है और इसके पीछे उसकी दो महीने की बच्ची होने की बात बताई जा रही है। हालांकि, गिरफ्तारी नहीं होने के इस कथित कारण की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। फिलहाल, मामले में आगे की जांच जारी है। महिला पर लगाए गए आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं। जांच के नतीजों से ही स्पष्ट होगा कि संवेदनशील सैन्य सूचनाओं के कथित लीक में उसकी क्या भूमिका थी और क्या इस मामले के तार किसी विदेशी खुफिया नेटवर्क से जुड़े हैं।

ये भी पढ़ें- New Noida Project: ‘न्यू नोएडा’ के लिए जमीन अधिग्रहण जल्द, 281 किसानों ने दी सहमति; 2027 तक पहला चरण पूरा करने का लक्ष्य

Greater Noida Family Deaths: नूडल्स नहीं, बल्कि प्रॉपर्टी विवाद के चलते 5 लोगों की गई जान! ग्रेटर नोएडा मामले में मृतक की बहनें-जीजा गिरफ्तार

Greater Noida Family Deaths Case: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के एक गांव में पति-पत्नी और उनके तीन बच्चों की कथित जान देने के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत के मामले में जांच के दौरान शुरुआती तौर पर चाय और नूडल्स खाने के बाद फूड पॉइजनिंग से जोड़कर देखा जा रहा था। लेकिन पोस्टमार्टम में जहर के संकेत मिलने के बाद पुलिस अब संपत्ति विवाद और मौत को गले लगाने के लिए उकसाने के एंगल से जांच कर रही है। इस मामले में मृतक की दो बहनों और उनके जीजा को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस जांच में पता चला है कि मृतक महेश जिस मकान में पत्नी और बच्चों सहित रहता था, उसे उसकी ही सगी बहन सुनीता ने मां से अपने नाम करवा लिया था। इसे लेकर महेश हमेशा टेंशन में रहता था। उसके मोबाइल से एक ऑडियो मिली है। इसमें मौत का जिम्मेदार बहन सुनीता, बहनोई शेखर, छोटी बहन सपना को बताया है। शिकायत के आधार पर ग्रेटर नोएडा पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि परिवार लंबे समय से संपत्ति विवाद से जूझ रहा था। इसी विवाद को पांचों की मौत की परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

मौत से पहले महेश ने वॉयस नोट में खोला राज!

पुलिस के मुताबिक, मृतक महेश ने अपनी मौत से पहले मोबाइल फोन में एक वॉयस नोट रिकॉर्ड किया था। इसमें उसने परिवार की स्थिति के लिए अपनी दोनों बहनों और जीजा को जिम्मेदार ठहराया है। इस रिकॉर्डिंग को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, आरोपियों की भूमिका और मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। रबूपुरा के थाना प्रभारी (SHO) सुजीत उपाध्याय ने पीटीआई को बताया कि मृतक व्यक्ति की दो बहनों और एक जीजा को एक रिश्तेदार की ओर से मिली शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के अनुसार, 37 वर्षीय महेश ने अपनी मौत से पहले मोबाइल फोन पर एक ‘वॉयस नोट’ रिकॉर्ड किया था, जिसमें कथित तौर पर तीनों आरोपियों को मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच से संकेत मिलता है कि संपत्ति के विवाद के कारण यह घटना हुई होगी। थाना प्रभारी ने बताया कि पोस्टमार्टम में जहर दिए जाने के संकेत मिले हैं, जिसके बाद विसरा के सैंपल फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं।

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत का सटीक कारण पता चल सकेगा। महेश, उनकी पत्नी ललिता (35), बेटी मिष्टी (7) और बेटे लड्डू (11) व साक्षात (3) के शव शनिवार सुबह रबूपुरा के पास नगला श्री पदम गांव स्थित उनके घर से बरामद हुए थे। शुरुआत में मौत का कारण खाद्य विषाक्तता माना जा रहा था क्योंकि खबरों से पता चला था कि परिवार के सदस्यों ने मौत से पहले ‘नूडल्स’ खाए थे। फिलहाल, मामले में अन्य एंगल से भी जांच चल रही है।

शिकायत के आधार पर तीन रिश्तेदार गिरफ्तार

पुलिस ने महेश की दो बहनों सुनीता और सपना तथा उनके जीजा शेखर को गिरफ्तार किया है। मृतकों में से एक के भाई की शिकायत के आधार पर तीनों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तीनों रिश्तेदार महेश और उसके परिवार को परेशान कर रहे थे। पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है। फिलहाल, यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित उत्पीड़न और संपत्ति विवाद का पांचों की मौत से क्या संबंध था।

विसरा रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज

पोस्टमार्टम में जहर के संकेत मिलने के बाद डॉक्टरों ने पांचों मृतकों के विसरा सैंपल सुरक्षित रखे थे। इन नमूनों को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। फिलहाल, पुलिस आत्महत्या की आशंका, जहर दिए जाने की संभावना, संपत्ति विवाद और वॉयस नोट में लगाए गए आरोपों सहित सभी पहलुओं की जांच कर रही है। ऐसे में विसरा रिपोर्ट इस मामले में अहम साबित हो सकती है।

ये भी पढ़ें- IMD Weather Alert: इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट! कई इलाकों में आंधी-तूफान और तेज हवाओं की चेतावनी, 24 अक्टूबर तक बरसेंगे बादल

नोएडा में एक भी सेक्टर 100% अतिक्रमण मुक्त नहीं! गांवों में बिल्डिंग बायलॉज लागू नहीं होने से खड़े हो रहे कई मंजिला घर, अधिकारी छुप्पी साधे

Noida Encroachment News: नोएडा में अतिक्रमण को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। राजधानी दिल्ली से सटे यूपी के प्रमुख शहर में नंबरिंग के हिसाब से कुल 168 सेक्टर हैं।  लेकिन इनमें कुछ सेक्टर मास्टर प्लान में शामिल नहीं हैं। वहीं धरातल पर नोएडा के भूभाग में मौजूद करीब 163 सेक्टरों में एक भी ऐसा सेक्टर नहीं है जिसे 100 प्रतिशत अतिक्रमण मुक्त कहा जा सके. यहां तक कि सेक्टर-15ए, 14ए, 105 और 108 जैसे प्रमुख सेक्टर भी अतिक्रमण से पूरी तरह अछूते नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब शहर के प्रमुख और विकसित सेक्टर भी पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त नहीं हैं, तो नोएडा में अतिक्रमण पर नियंत्रण की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

किरायेदारों की जान जोखिम में

वहीं, दूसरी बड़ी तस्वीर नोएडा से सटे गांवों की है। नोएडा के गांवों में प्राधिकरण की नक्शा नीति लागू नहीं होती और बिल्डिंग बायलॉज भी लागू नहीं होने की बात सामने आती है। हालांकि गांवों में सड़क, पानी और सीवर जैसी मूलभूत सुविधाओं की जिम्मेदारी प्राधिकरण की है। इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर शहर से सटे कई गांवों में कई-कई मंजिला इमारतें खड़ी कर ली जाती हैं।

इन बिल्डिंग में बड़ी संख्या में किरायेदारों के रहते हैं। इससे सुरक्षा और हादसों को लेकर सवाल खड़े होते हैं। खासकर लाल डोरा वाली जमीन पर अवैध निर्माण को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहते हैं। वहीं कुछ जगहों पर भूमाफिया, स्थानीय लोगों और संबंधित व्यवस्था की मिलीभगत से निर्माण गतिविधियां चलती हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि बिना स्वीकृत नक्शे और निर्धारित बिल्डिंग नियमों के कई मंजिला इमारतें आखिर कैसे खड़ी हो रही हैं।

अधिकारियों का जवाब पढ़िये

इसी मुद्दे पर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों से सवाल किया गया कि नोएडा में ऐसा कौन सा सेक्टर है जो 100 प्रतिशत अतिक्रमण मुक्त है। साथ ही यह भी पूछा गया कि जब गांवों में प्राधिकरण की नक्शा नीति और बिल्डिंग बायलॉज लागू नहीं हैं, तो वहां कई मंजिला इमारतों के निर्माण और उनमें रहने वाले लोगों की सुरक्षा की निगरानी कैसे होती है।

NOIDA_ATIKRAMD_

इस मामले में प्राधिकरण की AECO वंदना त्रिपाठी से बात की गई। उन्होंने कहा कि इस विषय पर बेहतर जवाब OSD क्रांति शेखर सिंह दे पाएंगे। OSD क्रांति शेखर सिंह से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि यह उनके कार्यक्षेत्र में आता है। लेकिन इस बारे में उनसे अधिक बेहतर जवाब GM ए.के. अरोड़ा और GM एस.पी. सिंह दे सकते हैं।

अवैध निर्माण लगातार जारी

अधिकारियों का पक्ष जानने के लिए GM ए.के. अरोड़ा और GM एस.पी. सिंह से लगातार दो दिन तक फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई। दोनों अधिकारियों की ओर से कॉल का जवाब नहीं मिला। एस.पी. सिंह के PA ने फोन उठाकर बताया कि साहब मीटिंग में हैं। मीटिंग से आते ही वापस कॉल करेंगे। इसके बाद भी कोई जवाब नहीं आया। अधिकारियों को संदेश भेजकर भी सवालों का जवाब मांगा गया, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं मिला।

NOIDA_ATIKRAMD_1

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नोएडा के किसी भी सेक्टर को 100 प्रतिशत अतिक्रमण मुक्त नहीं है, तो अतिक्रमण रोकने की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है? वहीं गांवों में बिल्डिंग बायलॉज लागू नहीं होने की स्थिति में कई मंजिला निर्माण, किरायेदारी और लोगों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारी किसकी है। इन सवालों के जवाब प्राधिकरण के आलाधिकारी नहीं दे पाए।

(नोएडा से सुमित राजपूत की रिपोर्ट)

‘बच्चों सहित सभी के लिए इंटरनेट तक पहुंच एक मौलिक अधिकार है’, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Supreme Court Internet Rights: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इंटरनेट का इस्तेमाल करना और उस तक पहुंच रखना संविधान के अनुच्छेद 21 और 19(1)(a) के तहत एक मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने साफ किया कि बच्चों को भी यह अधिकार हासिल है। उन्हें पूरी तरह से इंटरनेट इस्तेमाल करने से नहीं रोका जा सकता। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि बच्चों को इंटरनेट के उपयोग से पूरी तरह वंचित करना उतना ही बेतुका होगा, जितना यह कहना कि उनमें ऐसी कोई विवेक-बुद्धि नहीं है जिसकी रक्षा की जानी चाहिए, या उनके पास अभिव्यक्ति की ऐसी कोई स्वतंत्रता नहीं है जिसे वे व्यक्त कर सकें।

पीठ ने कहा, “हमारे बच्चों की सुरक्षा और उनकी आजादी एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। हमारे बच्चे इन दोनों के ही हकदार हैं।”

सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणी तब आई, जब कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य ऑनलाइन सेवाओं से बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (CSEAM) का पता लगाने और उसे हटाने की व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए।

इंटरनेट तक पहुंच और बच्चों की सुरक्षा, दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट की बेंच ने इस बात पर विचार किया कि क्या बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्हें इंटरनेट और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत मिलने वाले ‘वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ के अधिकार में, जानकारी और विचारों को जानने, प्राप्त करने और साझा करने का अधिकार भी शामिल है।

कोर्ट ने इंटरनेट को विचारों, रचनात्मक अभिव्यक्ति और जानकारी का एक बाजार बताते हुए कहा कि इसका महत्व केवल इसमें मौजूद कंटेंट में ही नहीं है, बल्कि इस बात में भी है कि यह बड़ों और बच्चों, दोनों को जानकारी तक पहुंच प्रदान करता है।

कोर्ट ने कहा, “कई बच्चों के लिए, खासकर दूर-दराज के इलाकों में, यह अक्सर सीखने और जानकारी पाने का एकमात्र जरिया होता है।” कोर्ट ने आगे कहा कि इंटरनेट विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है; उनके लिए ऑनलाइन जगहें ऐसे मौके दे सकती हैं, जहां वे दोस्त बना सकें और अपने जैसी परिस्थितियों वाले अन्य लोगों से जुड़ सकें।

पीठ ने माना कि इंटरनेट, अपने मौजूदा रूप में, बच्चों के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म चलाने वाली कंपनियां हानिकारक सामग्री को पहचानने और हटाने में नाकाम रहती हैं, तो इसकी सजा बच्चों को नहीं दी जा सकती। उन्हें इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना सही नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि ऐसा रवैया अपनाने पीड़ित को ही समस्या मानने जैसा होगा।

बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने का प्रस्ताव खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ कानून बनाकर बच्चों को इंटरनेट इस्तेमाल करने से रोक देने का मतलब यह नहीं है कि वे इसका इस्तेमाल करना बंद कर देंगे। ऐसी पाबंदियों के बाद बच्चे दूसरे अनियंत्रित प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों का रुख कर सकते हैं, जहां उनके लिए खतरा और भी ज्यादा हो सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पूरी तरह से पाबंदी लगाने से ऐसे बच्चे हतोत्साहित हो सकते हैं जिन्हें ऑनलाइन बहकाया जा रहा है, धमकाया जा रहा है या जिनका शोषण हो रहा है। वे अपने माता-पिता, अभिभावकों या किसी भरोसेमंद बड़े व्यक्ति को ऐसी घटनाओं के बारे में बताने से डरेंगे, क्योंकि उन्हें डर होगा कि इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए उन्हें डांट पड़ेगी।

पीठ ने टिप्पणी की, “बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल पर किसी भी तरह की पूर्ण पाबंदी लगाना, एक ऐसा कदम है जो न तो कारगर साबित हुआ है और न ही उचित है।”

कोर्ट ने उम्र के आधार पर इंटरनेट इस्तेमाल पर रोक लगाने से जुड़ी एक और चिंता जताई। उसने कहा कि ऐसी व्यवस्था लागू करने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को यूजर्स की उम्र की पहचान करनी पड़ सकती है और बार-बार इसकी पुष्टि करनी पड़ सकती है। इसके लिए संवेदनशील निजी जानकारी जुटाई और उस पर नजर रखी जा सकती है। इससे डेटा के गलत इस्तेमाल और लोगों की ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी का खतरा पैदा हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के लिए ऑनलाइन सुरक्षा उपाय सुझाए

पूरी तरह से पाबंदी लगाने के बजाय, बेंच ने स्पष्ट किया कि उनके सुझावों का मतलब यह नहीं है कि बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखने के लिए उम्र के हिसाब से सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए जा सकते। कोर्ट ने सुझाव दिया कि जब बच्चे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें, तो माता-पिता की सहमति, मार्गदर्शन और निगरानी पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने बच्चों के अकाउंट के लिए एक खास “चाइल्ड मोड” (child mode) लाने की संभावना पर भी बात की।

कोर्ट के मुताबिक, ऐसे इंतजामों में बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट को डिफॉल्ट रूप से प्राइवेट रखना, अनजान वयस्कों के मैसेज और संपर्क पर रोक लगाना और उन्हें दिखाए जाने वाले विज्ञापनों व कंटेंट को नियंत्रित करना शामिल हो सकता है।

बेंच ने कहा कि ये सुरक्षा उपाय खासतौर पर कम उम्र के बच्चों यानी प्री-टीन्स (13 साल से कम उम्र के) के लिए तैयार किए जा सकते हैं। इसके लिए माता-पिता की सहमति की पुष्टि करने के उचित और संतुलित तरीके अपनाए जा सकते हैं। हालांकि, इन उपायों को लागू करने का पूरा ब्योरा तय करने की जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार पर छोड़ दी।

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसकी टिप्पणियों का मतलब यह नहीं है कि सरकार बच्चों के लिए नुकसानदायक कंटेंट या ऑनलाइन सेवाओं पर रोक नहीं लगा सकती। सरकार ऐसी वेबसाइटों और सेवाओं तक बच्चों की पहुंच सीमित कर सकती है, जो उनके लिए हानिकारक हैं। इनमें वयस्कों के लिए बनी अश्लील सामग्री वाली वेबसाइटें भी शामिल हैं।

कोर्ट ने बाल यौन शोषण सामग्री को हटाने के लिए कदम उठाने का दिया आदेश

बच्चों के इंटरनेट अधिकारों पर अपनी टिप्पणियों के साथ-साथ, सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री का पता लगाने और उसे हटाने की प्रक्रिया को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

इन उपायों में एक व्यापक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाना शामिल है, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी सामग्री की पहचान करने और उसे हटाने में मदद करेगा।

यह भी पढ़ें: Greater Noida Family Death: ग्रेटर नोएडा में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत से सनसनी, सभी ने रात में खाए थे नूडल्स

Greater Noida Family Death: ग्रेटर नोएडा में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत से सनसनी, सभी ने रात में खाए थे नूडल्स

Greater Noida Family Death: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा से शनिवार सुबह एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई। रबूपुरा इलाके के नगला श्री पदम गांव में एक ही परिवार के पांच लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतकों में पति-पत्नी और उनके तीन मासूम बच्चे शामिल हैं। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। मृतकों की पहचान 37 वर्षीय महेश, उनकी 35 वर्षीय पत्नी ललिता और तीन बच्चों लड्डू (11), मिस्टी (7) और साक्षत (3) के रूप में हुई है। बच्चों की उम्र महज 3 से 11 साल के बीच थी।

पुलिस को आशंका है कि परिवार की मौत फूड पॉइजनिंग यानी दूषित खाना खाने की वजह से हुई हो सकती है। हालांकि, अभी तक मौत की असली वजह साफ नहीं हो पाई है।

पुलिस ने दी जानकारी

पुलिस के मुताबिक, शनिवार सुबह रबूपुरा थाने को इस घटना की जानकारी मिली। इसके बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है।

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस के साथ वरिष्ठ अधिकारी, एंबुलेंस और खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। मामले की जांच के लिए फॉरेंसिक टीम और पुलिस की फील्ड यूनिट ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। टीम ने मौत की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए मौके से जरूरी वैज्ञानिक सबूत जुटाने शुरू कर दिए हैं।

रात में खाए नूडल्स, सुबह घर में मिले पांचों के शव

शुरुआती पूछताछ में पड़ोसियों और महेश की मां ने पुलिस को बताया कि परिवार के सभी सदस्यों ने रात में नूडल्स खाए थे। इसके बाद अगली सुबह पांचों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मृतकों के मुंह से झाग भी निकल रहा था। हालांकि, अधिकारियों ने अभी यह पुष्टि नहीं की है कि इसका मौत की वजह से कोई संबंध है या नहीं।

पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में फूड पॉइजनिंग यानी दूषित खाना खाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो सकेगी।

यह भी पढ़ें: UP Holiday List 2026: 18 से 20 अक्टूबर तक दफ्तर बंद, चलिए जानते हैं मायावती, अखिलेश या योगी-किस सरकार में मिलीं ज्यादा छुट्टियां?

न्यूज़रूम से वड़ा पाव के ठेले तक | Journalist Couple VadaPav Business | Patrakar Couple VadaPav Wale

न्यूज़रूम से वड़ा पाव के ठेले तक | Journalist Couple VadaPav Business | Patrakar Couple VadaPav Wale

#thebetterindia #goodnews #positivestories #indianews #thebetterindiahindi #hindi

Follow us for more:
12 साल तक मीडिया में काम किया, लेकिन एक वक्त ऐसा आया जब जसवीर सिंह जस्सी और पत्नी सुधा शाह की नौकरियाँ चली गईं। आर्थिक तंगी आई, लोगों ने ताने मारे और कई बार लगा कि अब आगे कोई रास्ता नहीं है।
फिर मुंबई में सिद्धिविनायक मंदिर गए और वहाँ पर खाए एक वड़ा पाव ने उनकी ज़िंदगी की दिशा बदल दी।
आज यही कपल नोएडा सेक्टर 19 में अपना वड़ा पाव स्टॉल चलाता है और मेहनत से अपनी नई पहचान बना रहा है।
उनकी कहानी याद दिलाती है कि कोई काम छोटा नहीं होता, अगर आप उसे ईमानदारी और हौसले से करते हैं।
आपके लिए सफलता का असली मतलब क्या है?
@patrakarcouple

न्यूज़रूम से वड़ा पाव के ठेले तक | Journalist Couple Vada Pav Business | Patrakar Couple Vada Pav Wale | Noida

[Journalist couple started vada pav business in Noida, journalist turned street food entrepreneur, Couple lost jobs and started their own business, Small business success story, From job loss to successful business]

Facebook: https://www.facebook.com/thebetterindia.hindi
Instagram: https://www.instagram.com/thebetterindia.hindi/
Twitter: https://twitter.com/TbiHindi
LinkedIn: https://www.linkedin.com/company/the-better-india-hindi/

Website: https://hindi.thebetterindia.com/

CJI Video: कांग्रेस नेताओं से मिलने से इनकार के बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत का पहला रिएक्शन, बोले- सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सबके लिए खुले

Delhi Protest Update: चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार (12 अक्टूबर) को कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे हर किसी के लिए खुले हैं। कोई भी आम नागरिक या निर्वाचित जनप्रतिनिधि अपनी शिकायत लेकर अदालत आ सकता है। उन्होंने विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ ब्लॉक के नेताओं से मुलाकात नहीं करने के फैसले पर पहला बयान दिया है। CJI ने बताया कि उन्हें रविवार 11 अक्टूबर को मुलाकात के अनुरोध से जुड़ा पत्र मिला था। इसके बाद उन्होंने उसी रात जवाब देकर मुलाकात नहीं कर पाने की वजह बता दी थी।

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “मुझे कल बैठक के अनुरोध के संबंध में एक पत्र मिला था। और मैंने कल रात ही उसका जवाब दे दिया था, जिसमें उन कारणों का उल्लेख किया गया था कि मैं क्यों नहीं मिल पाऊंगा।” उन्होंने यह भी कहा, “सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। किसी भी आम नागरिक या निर्वाचित निकाय के सदस्य की किसी भी याचिका का स्वागत है। हर भारतीय नागरिक को अदालत का दरवाजा खटखटाने का अधिकार है, और हम उनकी चिंताओं को सुनेंगे और कानून के तहत जो भी उचित होगा, वह करेंगे।”

CJI सूर्यकांत ने यह बयान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के 33वें स्थापना दिवस समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेता चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी शिकायतों को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की तैयारी कर रहे हैं। चीफ जस्टिस के इस बयान को विपक्षी नेताओं के उस अनुरोध के संदर्भ में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने कथित चुनावी अनियमितताओं के मुद्दे पर CJI से मुलाकात कर अपना पक्ष रखने और ज्ञापन सौंपने की मांग की थी।

विपक्षी नेताओं से मुलाकात क्यों नहीं करेंगे CJI?

इससे पहले CJI जस्टिस सूर्यकांत ने INDIA ब्लॉक के नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने से इनकार कर दिया था। पीटीआई के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से यह कहते हुए मुलाकात से इनकार कर दिया कि इस तरह के मुद्दे पहले ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन हैं। सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी के मुलाकात के अनुरोध पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कांग्रेस नेता से याचिका दायर करने को कहा, जिस पर मंगलवार को सुनवाई हो सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, सीजेआई ने कहा कि यदि किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो सुप्रीम कोर्ट उसके लिए 24 घंटे उपलब्ध है। सूत्रों ने बताया कि जस्टिस सूर्यकांत ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासनिक स्तर पर कार्यपालिका के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। इससे पहले, अपनी मांगों को लेकर विपक्षी दलों ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय तक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की थी। कांग्रेस ने इसे ‘चलो दिल्ली- लोकतंत्र के लिए मार्च’ का नाम दिया है। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े उनके आरोपों पर उचित कार्रवाई हो।

ये भी पढ़ें- Noida Investment News: जेवर एयरपोर्ट के पास लगेंगी 25 नई कंपनियां; ₹3,155 करोड़ का निवेश और 9,000 को मिलेगी नौकरी

दिल्ली में सुरक्षा कड़ी, कई जगह बैरिकेडिंग

विपक्षी नेताओं के प्रस्तावित मार्च को देखते हुए मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बाराखंभा रोड और मंडी हाउस के आसपास सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। दिल्ली पुलिस के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान भी तैनात हैं। सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के 6 स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट गेट बंद कर दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 12 अक्टूबर को शाम 4 बजे तक कुछ स्टेशनों के गेट बंद रहेंगे।

नोएडा अथॉरिटी ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी, सेक्टर 150 स्पोर्ट्स सिटी का रिवाइज्ड लेआउट प्लान मंजूर

Noida Sports City: नोएडा के सेक्टर-150 में लंबे समय से चर्चा में रहे स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। नोएडा अथॉरिटी ने स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट-02 के संशोधित मास्टर लेआउट प्लान को मंजूरी दे दी है। अथॉरिटी ने इस फैसले की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को हलफनामे के जरिए दी है। इस मंजूरी के बाद प्रोजेक्ट के विकास से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

नोएडा अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कृष्णा करुणेश ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा, “नोएडा अथॉरिटी ने हलफनामा दाखिल किया है और संशोधित मास्टर लेआउट प्लान के बारे में स्टेटस रिपोर्ट दी है। इस प्लान को 6 अप्रैल 2026 को अथॉरिटी की 222वीं बोर्ड बैठक में मंजूरी दी गई थी। इससे पहले आम लोगों की आपत्तियों पर विचार किया गया था। यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के 24 नवंबर 2025 के आदेश के अनुसार पूरी की गई है। प्रोजेक्ट के डेवलपर, लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन्स ने 2 जनवरी, 2026 को तय फीस के साथ संशोधित मास्टर लेआउट प्लान जमा किया था। अथॉरिटी ने 6 अप्रैल को सैद्धांतिक मंजूरी दी और 6 मई, 2026 को औपचारिक मंजूरी पत्र जारी किया।”

अथॉरिटी के अधिकारियों के मुताबिक, संशोधित योजना को मंजूरी देने से पहले, अथॉरिटी ने दो राष्ट्रीय अखबारों में आपत्तियां मंगाने के लिए नोटिस जारी किए और योजना को अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया। उन्होंने कहा कि बाद में मिली आपत्तियों पर कार्रवाई की गई। अधिकारियों के अनुसार, संशोधित लेआउट में लगभग 300 एकड़ जमीन शामिल है और कुल क्षेत्र का 70% हिस्सा खेल सुविधाओं के लिए आरक्षित है।

अथॉरिटी ने यह भी बताया कि सेक्टर 150 में प्लॉट SC-02 के लिए बिल्डिंग प्लान को 9 जून को मंजूरी दी गई थी। अधिकारियों ने कहा कि संशोधित लेआउट स्काईलाइन आर्किटेक्चरल कंसल्टेंट द्वारा तैयार किया गया था और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) द्वारा इसकी जांच की गई थी।

अधिकारियों ने बताया कि अथॉरिटी ने स्पोर्ट्स सिटी 02 में चार हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए सशर्त ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी किए हैं — जिन्हें ब्रिक राइज डेवलपर्स, ऐस इन्फ्रासिटी, लैंड कार्ट बिल्डर्स और समृद्धि इन्फ्रा स्क्वायर ने विकसित किया है।

अधिकारियों के मुताबिक, पिछले महीने, तीन और डेवलपर्स ने अपने स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट्स के लिए बदले हुए लेआउट प्लान जमा किए। लॉजिक्स इंफ्रा डेवलपर्स ने सेक्टर 150 के लिए, 3C ग्रीन डेवलपर्स ने सेक्टर 78-79 के लिए और ATS होम्स ने सेक्टर 152 के लिए प्लान जमा किए। अधिकारियों ने बताया कि इन प्रस्तावों पर आगे कोई कदम उठाने से पहले अथॉरिटी ने जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान फैसला किया कि तीनों स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट मामलों की अलग-अलग सुनवाई की जाएगी, ताकि हर प्रोजेक्ट से जुड़े मुद्दों पर ध्यान से विचार किया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि इन तीनों मामलों में अगली सुनवाई क्रमशः 9 दिसंबर, 16 दिसंबर और 20 जनवरी को तय की गई है।

नोएडा स्पोर्ट्स सिटी: 798 एकड़ के स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का प्लान कैसे रुका

स्पोर्ट्स सिटी का कॉन्सेप्ट 2004 का है, जब नोएडा अथॉरिटी ने कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का प्लान बनाया था। अधिकारियों के मुताबिक, 2010-11 और 2015-16 के बीच चार स्कीम शुरू की गईं, जिनमें 32.3 लाख वर्ग मीटर (798 एकड़) जमीन शामिल थी और इसका 70% हिस्सा स्पोर्ट्स सुविधाओं के लिए तय किया गया था।

हालांकि, CAG की एक रिपोर्ट में गड़बड़ियों का जिक्र किया गया, जिसमें जरूरी मंजूरी के बिना अलॉटमेंट भी शामिल थे। 18 जनवरी 2021 को अथॉरिटी ने डेवलपमेंट से जुड़े काम रोक दिए, जिनमें मैप की मंजूरी और ऑक्यूपेंसी से जुड़ी प्रक्रियाएं शामिल थीं। बाद में, CAG रिपोर्ट उत्तर प्रदेश की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी के सामने रखी गई, जिसने 29 अगस्त 2024 को स्पोर्ट्स सिटी से जुड़ी CAG की टिप्पणियों का निपटारा कर दिया।

इसके बाद 24 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अथॉरिटी को 30-45 दिनों के अंदर बैन हटाने का निर्देश दिया। हालांकि, इस मामले पर जवाब देने के लिए लोटस ग्रीन्स उपलब्ध नहीं था।

यह भी पढ़ें: कल का मौसम: दिल्ली-UP समेत कई राज्यों में बारिश और आंधी का अलर्ट, 60 kmph तक चलेंगी हवाएं

Noida Investment News: जेवर एयरपोर्ट के पास लगेंगी 25 नई कंपनियां; ₹3,155 करोड़ का निवेश और 9,000 को मिलेगी नौकरी

Noida Investment News: यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए 25 कंपनियों को ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ (LOI) जारी किए हैं। इसके तहत करीब 95 एकड़ क्षेत्र में ₹3,155 करोड़ का निवेश आएगा। इसके साथ ही इससे 9,000 से अधिक रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। एयरपोर्ट के आसपास उद्योगों के विस्तार से यमुना सिटी को एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाएं मजबूत हो रही हैं।

ऑटोमोबाइल से लेकर दवा उद्योग तक लगेंगी यूनिट

YEIDA की ओर से जारी किए गए लेटर ऑफ इंटेंट के तहत विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियां अपनी औद्योगिक इकाइयां स्थापित करेंगी। इनमें ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइस, फार्मास्यूटिकल्स, प्रिंटिंग एवं पैकेजिंग, हस्तशिल्प और परिधान उद्योग शामिल हैं।

इन परियोजनाओं से यमुना सिटी में औद्योगिक गतिविधियों का दायरा बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। खास बात यह है कि प्रस्तावित निवेश अलग-अलग क्षेत्रों में होने से यहां कई तरह के उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।

किस सेक्टर में कितनी कंपनियां लगाएंगी यूनिट?

यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सीईओ आरके सिंह के मुताबिक, 25 कंपनियों को अलग-अलग सेक्टरों में औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए LOI जारी किए गए हैं।

सेक्टर 8D: 11 कंपनियां

सेक्टर 29: 8 कंपनियां

सेक्टर 24: 3 कंपनियां

सेक्टर 6: 2 कंपनियां

सेक्टर 28: 1 कंपनी

इन औद्योगिक परियोजनाओं को निर्धारित औद्योगिक क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा। इनमें अपैरल पार्क, हैंडीक्राफ्ट पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा पार्क जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इससे संबंधित उद्योगों को एक ही क्षेत्र में विकसित करने और औद्योगिक गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

गेनवेल कॉमोसलेस करेगी सबसे बड़ा निवेश

टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित परियोजनाओं में गेनवेल कॉमोसलेस (Gainwell Commosales) सबसे बड़ा निवेश करने जा रही है। कंपनी ने 20 एकड़ मिश्रित उपयोग वाली जमीन पर इंजीनियरिंग एवं मैन्युफैक्चरिंग परियोजना स्थापित करने के लिए 497 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है। इस परियोजना से करीब 850 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।

वहीं, मल्टीटेक्स फिल्ट्रेशन इंजीनियर्स (Multitex Filteration Engineers) पांच एकड़ जमीन पर हेवी फैब्रिकेशन यूनिट स्थापित करने के लिए 282 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस परियोजना से लगभग 350 लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है।

दूसरी ओर, साइनो लाइफसाइंसेज (Cyno Lifesciences) ने 2.5 एकड़ जमीन पर दवाओं और औषधियों के निर्माण की यूनिट लगाने के लिए 206 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है। इससे करीब 150 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

एयरपोर्ट शुरू होने के बाद बढ़ी औद्योगिक भूखंडों की मांग

अधिकारियों के मुताबिक, 15 जून को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का परिचालन शुरू होने के बाद यमुना सिटी में औद्योगिक भूखंडों की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। एयरपोर्ट के आसपास बेहतर कनेक्टिविटी और औद्योगिक बुनियादी ढांचे की संभावनाओं के चलते कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ रही है।

एयरपोर्ट के विकास के साथ इस क्षेत्र में मैन्यूफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। ऐसे में नए औद्योगिक निवेश को क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

अब तक 1,122 औद्योगिक भूखंड आवंटित

YEIDA क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए प्राधिकरण लगातार भूखंडों का आवंटन कर रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अब तक कुल 1,122 औद्योगिक भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं। इनमें से 118 भूखंडों का कब्जा आवंटियों को सौंपा जा चुका है। जबकि 63 मामलों में लीज डीड निष्पादित की गई है। इसके अलावा 62 औद्योगिक इकाइयों के भवन निर्माण नक्शों को मंजूरी मिल चुकी है। प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, 15 उद्यमियों ने अपनी इकाइयों में कामकाज शुरू कर दिया है, जबकि 12 इकाइयों ने फैक्ट्री अधिनियम के तहत पंजीकरण कराया है।

रोजगार और औद्योगिक विकास को मिलेगी नई दिशा

यमुना सिटी में प्रस्तावित 3,155 करोड़ रुपये का निवेश क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि परियोजनाएं तय योजनाओं के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो हजारों लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने के साथ सहायक उद्योगों, परिवहन, पैकेजिंग और अन्य सेवाओं में भी अवसर पैदा हो सकते हैं। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास उद्योगों का विस्तार गौतमबुद्ध नगर और आसपास के क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों को नई गति दे सकता है।

ये भी पढ़ें- Saudi-Houthi War: सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों का फिर बड़ा हमला! रियाद एयरपोर्ट पर मिसाइल हमले में भारतीय की मौत, 10 अन्य इंडियन घायल

नोएडा के DLF मॉल में घी, रिफाइंड ऑयल चुराते पकड़ी गई महिला, बिना पैसे दिए फरार होना चाहती थी महिला

नोएडा के सेक्टर 18 स्थित DLF मॉल ऑफ इंडिया के एक स्टोर का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक महिला पर कथित तौर घी और रिफाइंड कुकिंग ऑयल चुराने का आरोप लगाया जा रहा है। वीडियो में एक महिला को मॉल की सिक्योरिटी टीम ने पकड़ रखा है और उसे लेकर जा रही है। बताया जा रहा है कि महिला मॉल के स्टोर से बिना चीजों का भुगतान किए सामान लेकर जाते हुए पकड़ी गई है। हालांकि, पुलिस और मॉल मैनेजमेंट ने यह कन्फर्म नहीं किया है कि महिला ने कोई सामान चुराया है।

लगभग 30 सेकंड के इस वीडियो में दो महिला सिक्योरिटी गार्ड कथित चोरी की आरोपी महिला को स्टोर के अंदर रोककर ले जाते हुए नजर आ रही हैं। महिला को बाहर निकलते समय अपना चेहरा ढकते हुए देखा जा सकता है। घटना के दौरान, स्टोर के एक कर्मचारी को उस पर सामान चुराने का आरोप लगाते हुए सुना जा सकता है। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो के साथ कई दावे किए गए हैं कि महिला लगभग एक महीने से स्टोर आ रही थी और कथित तौर पर कई बार बिना पेमेंट किए घी और रिफाइंड ऑयल ले गई थी। कुछ पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि उसकी गतिविधियां स्टोर के CCTV कैमरों में कैद हो गई थीं।

हालांकि, इन आरोपों को सपोर्ट करने वाला कोई CCTV फुटेज वायरल वीडियो के साथ शेयर नहीं किया गया है। वीडियो में भी महिला को कोई सामान चुराते या बिना पेमेंट किए स्टोर से जाते हुए नहीं दिखाया गया है। वीडियो के चर्चा में आने के बाद, सेक्टर 20 पुलिस से जानकारी मांगी गई। पुलिस ने कहा कि उनकी शुरुआती जांच में पता चला है कि महिला ने स्टोर से लिए गए सामान के लिए पेमेंट किया था। अधिकारियों ने कहा कि मॉल मैनेजमेंट ने भी पुलिस को यही जानकारी दी। पुलिस ने कहा, “महिला ने सामान के लिए पेमेंट किया था। सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे आरोप साबित नहीं हुए हैं।”

इस वीडियो पर सोशल मीडिया पर कई तरह के रिएक्शन आए हैं, कई यूजर्स ने इस घटना को शेयर और कमेंट किया है। खबर है कि इसे 100 से ज्यादा लोगों ने शेयर किया है। पुलिस ने कहा कि फुटेज से अभी सिर्फ यह पता चलता है कि महिला को सिक्योरिटी वालों ने रोका था और स्टोर के एक कर्मचारी ने उस पर चोरी का आरोप लगाया था। महिला को किन हालात में रोका गया और स्टोर के अंदर क्या हुआ, यह सिर्फ वायरल वीडियो से पक्के तौर पर पता नहीं लगाया जा सकता। अधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया पर किए गए दावों को तब तक साबित सच नहीं माना जाना चाहिए जब तक कि उनके पीछे सबूत न हों।

कल का मौमस: देश के 20 से ज्यादा राज्यों में भारी बारिश-तूफान का अलर्ट, दिल्ली-NCR से लेकर दक्षिण भारत तक बदलेगा मौसम