Noida Investment News: जेवर एयरपोर्ट के पास लगेंगी 25 नई कंपनियां; ₹3,155 करोड़ का निवेश और 9,000 को मिलेगी नौकरी

Noida Investment News: यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए 25 कंपनियों को ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ (LOI) जारी किए हैं। इसके तहत करीब 95 एकड़ क्षेत्र में ₹3,155 करोड़ का निवेश आएगा। इसके साथ ही इससे 9,000 से अधिक रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। एयरपोर्ट के आसपास उद्योगों के विस्तार से यमुना सिटी को एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाएं मजबूत हो रही हैं।

ऑटोमोबाइल से लेकर दवा उद्योग तक लगेंगी यूनिट

YEIDA की ओर से जारी किए गए लेटर ऑफ इंटेंट के तहत विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियां अपनी औद्योगिक इकाइयां स्थापित करेंगी। इनमें ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइस, फार्मास्यूटिकल्स, प्रिंटिंग एवं पैकेजिंग, हस्तशिल्प और परिधान उद्योग शामिल हैं।

इन परियोजनाओं से यमुना सिटी में औद्योगिक गतिविधियों का दायरा बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। खास बात यह है कि प्रस्तावित निवेश अलग-अलग क्षेत्रों में होने से यहां कई तरह के उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।

किस सेक्टर में कितनी कंपनियां लगाएंगी यूनिट?

यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सीईओ आरके सिंह के मुताबिक, 25 कंपनियों को अलग-अलग सेक्टरों में औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए LOI जारी किए गए हैं।

सेक्टर 8D: 11 कंपनियां

सेक्टर 29: 8 कंपनियां

सेक्टर 24: 3 कंपनियां

सेक्टर 6: 2 कंपनियां

सेक्टर 28: 1 कंपनी

इन औद्योगिक परियोजनाओं को निर्धारित औद्योगिक क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा। इनमें अपैरल पार्क, हैंडीक्राफ्ट पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा पार्क जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इससे संबंधित उद्योगों को एक ही क्षेत्र में विकसित करने और औद्योगिक गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

गेनवेल कॉमोसलेस करेगी सबसे बड़ा निवेश

टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित परियोजनाओं में गेनवेल कॉमोसलेस (Gainwell Commosales) सबसे बड़ा निवेश करने जा रही है। कंपनी ने 20 एकड़ मिश्रित उपयोग वाली जमीन पर इंजीनियरिंग एवं मैन्युफैक्चरिंग परियोजना स्थापित करने के लिए 497 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है। इस परियोजना से करीब 850 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।

वहीं, मल्टीटेक्स फिल्ट्रेशन इंजीनियर्स (Multitex Filteration Engineers) पांच एकड़ जमीन पर हेवी फैब्रिकेशन यूनिट स्थापित करने के लिए 282 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस परियोजना से लगभग 350 लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है।

दूसरी ओर, साइनो लाइफसाइंसेज (Cyno Lifesciences) ने 2.5 एकड़ जमीन पर दवाओं और औषधियों के निर्माण की यूनिट लगाने के लिए 206 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है। इससे करीब 150 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

एयरपोर्ट शुरू होने के बाद बढ़ी औद्योगिक भूखंडों की मांग

अधिकारियों के मुताबिक, 15 जून को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का परिचालन शुरू होने के बाद यमुना सिटी में औद्योगिक भूखंडों की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। एयरपोर्ट के आसपास बेहतर कनेक्टिविटी और औद्योगिक बुनियादी ढांचे की संभावनाओं के चलते कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ रही है।

एयरपोर्ट के विकास के साथ इस क्षेत्र में मैन्यूफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। ऐसे में नए औद्योगिक निवेश को क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

अब तक 1,122 औद्योगिक भूखंड आवंटित

YEIDA क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए प्राधिकरण लगातार भूखंडों का आवंटन कर रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अब तक कुल 1,122 औद्योगिक भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं। इनमें से 118 भूखंडों का कब्जा आवंटियों को सौंपा जा चुका है। जबकि 63 मामलों में लीज डीड निष्पादित की गई है। इसके अलावा 62 औद्योगिक इकाइयों के भवन निर्माण नक्शों को मंजूरी मिल चुकी है। प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, 15 उद्यमियों ने अपनी इकाइयों में कामकाज शुरू कर दिया है, जबकि 12 इकाइयों ने फैक्ट्री अधिनियम के तहत पंजीकरण कराया है।

रोजगार और औद्योगिक विकास को मिलेगी नई दिशा

यमुना सिटी में प्रस्तावित 3,155 करोड़ रुपये का निवेश क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि परियोजनाएं तय योजनाओं के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो हजारों लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने के साथ सहायक उद्योगों, परिवहन, पैकेजिंग और अन्य सेवाओं में भी अवसर पैदा हो सकते हैं। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास उद्योगों का विस्तार गौतमबुद्ध नगर और आसपास के क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों को नई गति दे सकता है।

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Apple Layoffs: iPhone मेकर ने फिर की छंटनी, 200 लोगों की नौकरी पर खतरा; इस बार कौन सी टीम्स प्रभावित

आईफोन मेकर एपल इंक अपने सिरी डिजिटल असिस्टेंट और विजन प्रो हेडसेट से जुड़ी टीमों में नौकरियां कम कर रही है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वालों के हवाले से कहा गया है कि Apple अपनी ‘इंटेलिजेंट सिस्टम्स एक्सपीरियंस’ टीम के कर्मचारियों की भी छंटनी कर रही है। यह टीम सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग विभाग का हिस्सा है और डिवाइसेज के कुछ AI फीचर्स की जिम्मेदारी इस पर है।

बदलावों के तहत, कंपनी Vision Pro के लिए गेमिंग पर फोकस्ड टीम को काफी हद तक शट डाउन कर रही है और डिवाइस के लिए इमर्सिव वीडियो कंटेंट बनाने वाली यूनिट का साइज भी घटा रही है। कुल मिलाकर, इस जॉब कट से 200 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। Vision Pro विभाग से लगभग 100 पद खत्म किए गए हैं। Siri व सॉफ्टवेयर टीमों से भी 100 पद हटाए गए हैं।

लॉन्च के समय से ही इमर्सिव वीडियो Vision Pro की बिक्री का एक मुख्य आकर्षण रहा है। लेकिन हर 3D वीडियो बनाने के लिए Apple कर्मचारियों और कॉन्ट्रैक्टर्स की कई टीमों की जरूरत होती है। इमर्सिव वीडियो सीरीज के एक एपिसोड को शूट करने में कई मिलियन डॉलर का खर्च आ सकता है। Vision Pro के एक्टिव यूजर्स की कम संख्या को देखते हुए, इन खर्चों ने बिजनेस पर दबाव डाला है।

किस टीम में किस तरह की रीस्ट्रक्चरिंग

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, Siri में बदलाव, इस असिस्टेंट के आने वाले AI-इनफ्यूज्ड वर्जन से जुड़े हैं। इस बदलाव के लिए जरूरी विशेषज्ञता में बदलाव की जरूरत है, जिसके कारण कंपनी को कुछ मौजूदा भूमिकाओं को खत्म करना पड़ा। साथ ही रिसोर्सेज को को फिर से एलोकेट करना पड़ा और अपडेटेड Siri को सपोर्ट करने वाली नई भूमिकाएं क्रिएट करनी पड़ीं।

‘इंटेलिजेंट सिस्टम्स एक्सपीरियंस’ टीम में बदलाव AI-संचालित क्षमताओं पर काम को फिर से व्यवस्थित करने के प्रयास को दर्शाते हैं। जैसे-जैसे और अधिक ग्रुप्स की ओर से ऐप्स, फीचर्स और सर्विसेज में AI फंक्शन लाए जा रहे हैं, Apple प्राथमिकताओं के अनुरूप टीमों को फिर से व्यवस्थित कर रही है। इस रीस्ट्रक्चरिंग से कुछ मौजूदा पद खत्म होंगे और नई भूमिकाएं क्रिएट होंगी।

Vision Pro में बदलावों के बारे में कर्मचारियों को बताया गया है कि यह ग्राहकों द्वारा डिवाइस के इस्तेमाल के तरीके के आधार पर प्राथमिकताओं को फिर से व्यवस्थित करने और भविष्य के अन्य उत्पादों की ओर रिसोर्सेज को बेहतर ढंग से निर्देशित करने का प्रयास है।

Mobile Manufacturing Scheme 2.0 : सरकार ने लॉन्च की 62,500 करोड़ करोड़ रुपए की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, जानिए पूरी डिटेल

Vision Pro और visionOS ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं हो रहा बंद

Apple इमर्सिव वीडियो को पूरी तरह से बंद नहीं कर रही है। कंपनी की योजना है कि वह खुद कम संख्या में वीडियो बनाएगी। साथ ही थर्ड-पार्टी कंपनियों को इस डिवाइस के लिए कंटेंट बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी। कंपनी ने कर्मचारियों से कहा है कि Vision Pro और इसका visionOS ऑपरेटिंग सिस्टम बंद नहीं होने वाला है। ब्लूमबर्ग न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी 2028 के आखिर तक एक नया Vision Pro मॉडल लॉन्च करने पर भी विचार कर रही है।

एक बयान में एपल ने माना कि वह कुछ टीमों को फिर से व्यवस्थित कर रही है ताकि अपने यूजर्स को बेहतरीन अनुभव देने के लिए बिजनेस को आगे बढ़ा सके। कंपनी के मुताबिक, “हालांकि इस बदलाव के तहत हम नए जॉब रोल क्रिएट करेंगे, लेकिन इसका असर कुछ मौजूदा रोल्स पर भी पड़ेगा। हम इन टीम मेंबर्स के योगदान के लिए आभारी हैं और इस बदलाव के दौरान उनकी मदद करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसमें Apple में अन्य भूमिकाओं के लिए आवेदन करने के अवसर भी शामिल हैं।”

Mobile Manufacturing Scheme 2.0 : सरकार ने लॉन्च की 62,500 करोड़ करोड़ रुपए की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, जानिए पूरी डिटेल

Mobile Manufacturing Scheme : आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2.0 के लॉन्च की घोषणा की है। 62 हजार 500 करोड़ रुपए की इस स्कीम का लक्ष्य भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। इसके तहत सरकार कंपनियों को उत्पादन के लिए 5% तक इंसेंटिव देगी। इस स्कीम के जरिए 40 लाख करोड़ के मोबाइल का उत्पादन हो सकेगा। ये स्कीम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी।

मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2.0 के तहत कंपनियों से आवेदन मांगने की शुरुआत कर दी गई है। 15 जुलाई को कैबिनेट ने स्कीम को मंजूरी दी थी। स्कीम का कुल बजट 62,500 करोड़ रुपए और अवधि 5 साल यानी वित्त वर्ष 2027 से वित्त वर्ष 2031 तक है। इसमें मोबाइल उत्पादन,घरेलू वैल्यू एडिशन और कंपोनेंट सोर्सिंग को कवर किया गया है।

1 अप्रैल 2026 से लागू होगी स्कीम

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने कहा कि यह योजना मौजूदा फाइनेंशियल ईयर से यानी 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी और फाइनेंशियल ईयर 2031 तक चलेगी। इस स्कीम के तहत,भारत में बने मोबाइल फोन की बिक्री पर मैन्युफ़ैक्चरर्स को 2.25% से 5% तक का इंसेंटिव मिलेगा। कंपनियां खास कंपोनेंट्स और सब-असेंबली को घरेलू स्तर पर सोर्स करके 1.5% तक का अतिरिक्त इंसेंटिव भी पा सकती हैं। कैबिनेट से मंज़ूर इस फ़्रेमवर्क में भारतीय ब्रांड बनाने के मकसद से प्रोडक्ट डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए 3% का अतिरिक्त इंसेंटिव भी दिया जाएगा।

बड़ी मात्रा में मिलेगा रोजगार

एस कृष्णन ने कहा कि भारतीय हैंडसेट ब्रांड पर 5 प्रतिशत के ज्यादा इंसेंटिव दिया जाएगा। इसके जरिए सरकार उन घरेलू कंपनियों को सपोर्ट करना चाहती है जो विदेशी बाजारों में अपना विस्तार करना चाहती हैं। सरकार का अनुमान है कि इस स्कीम के जरिए 5 साल में कुल लगभग 40 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का उत्पादन हो सकता है और करीब 60,000 प्रत्यक्ष नौकरियां मिल सकती हैं।

PLI 1.0 ने प्रोडक्शन और इन्वेस्टमेंट के लक्ष्यों को भी किया पार

यह स्कीम इसके पहले आई प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (PLI-LSEM) के बाद आई है,जिसकी अवधि 31 मार्च, 2026 को खत्म हुई थी। पहले वाले प्रोग्राम का मुख्य मकसद बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग करना और मोबाइल फोन प्रोडक्शन को बढ़ाना था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक PLI 1.0 के तहत मोबाइल फोन का प्रोडक्शन 11.61 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया,जबकि इसका लक्ष्य 8.12 लाख करोड़ रुपये था। PLI 1.0 का निवेश लक्ष्य 7,000 करोड़ रुपये था लेकिन इसके तहत हुआ निवेश 20,500 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।

पहले की PLI स्कीम ने ग्लोबल हैंडसेट बनाने वाली कंपनियों और कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को आकर्षित किया,जिनमें सैमसंग और भारत में Apple डिवाइस बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं।

लोकलाइजेंशन पर फोकस

मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2.0 में देश में बनने वाले कंपोनेंट्स और सब-असेंबली की हिस्सेदारी बढ़ाने पर ज्यादा जोर दिया जाएगा। एस कृष्णन कृष्णन ने कहा कि मोबाइल फोन बनाने में घरेलू स्तर पर वैल्यू एडिशन लगभग 15 प्रतिशत से बढ़कर 23 प्रतिशत हो गया है। MPMS के तहत अतिरिक्त सोर्सिंग इंसेंटिव का मकसद मैन्युफैक्चरर्स को अपनी घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

 

 

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