Bengaluru-Mumbai Vande Bharat: 01 नवंबर से शुरू होगी बेंगलुरू-मुंबई स्लीपर वंदे भारत, राज्योत्सव गिफ्ट से 8 घंटे कम हो जाएगा यात्रा का समय

Bengaluru-Mumbai Vande Bharat: बेंगलुरु और मुंबई के बीच ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों को दक्षिण रेलवे इस कर्नाटक राज्योत्सव के मौके पर बड़ी सौगात दे सकता है। अभी इन दोनों मेट्रो शहरों के बीच 1,118 km की दूरी तय करने में सबसे तेज उद्यान एक्सप्रेस को लगभग 24 घंटे लगते थे। लेकिन, इस कर्नाटक राज्योत्सव में यह बदल सकता है, क्योंकि साउथ वेस्टर्न रेलवे 1 नवंबर को बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस की पहली स्पेशल ट्रेन चलाने का प्रस्ताव दे रहा है।

इस प्रस्तावित सेवा से दोनों शहरों के बीच सफर का समय 24 घंटे से घटकर लगभग 16 घंटे होने की उम्मीद है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि कर्नाटक के बढ़ते यात्री ट्रैफिक के लिए रेल कनेक्टिविटी को और बढ़ाना जरूरी है, जिसमें बेंगलुरु को मुंबई, हैदराबाद और चेन्नई से जोड़ने वाली तेज ट्रेनें हों। कर्नाटक के लिए, 1 नवंबर का प्रस्ताव एक अच्छी शुरुआत हो सकता है। अगर यह योजना आगे बढ़ती है, तो यह भारत के दो सबसे बड़े आर्थिक केंद्रों को जोड़ने वाले रेल नेटवर्क में एक बड़ा मील का पत्थर होगा।

16 घंटे में पूरा होगा 1,118 km का सफर

इस प्रस्तावित सेवा से 1,118 km का सफर लगभग 16 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है, जिससे सफर का समय लगभग आठ घंटे कम हो जाएगा। हालाकि, नियमित व्यावसायिक सेवा शुरू होने की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। उम्मीद है कि केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पहली स्पेशल ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। यह ट्रेन दक्षिण भारत में पहली वंदे भारत स्लीपर सर्विस होगी। रेलवे सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित ट्रेन अक्टूबर में लॉन्च नहीं की जा सकी क्योंकि कर्नाटक विधान परिषद चुनावों के लिए आचार संहिता लागू थी।

16 कोच की होगी ट्रेन

बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस में 16 कोच होंगे, 11 AC थ्री-टियर, चार AC टू-टियर और एक AC फर्स्ट-क्लास कोच, जिनकी कुल क्षमता 823 बर्थ होगी। सफर का किराया क्लास के आधार पर ₹2,600 और ₹4,250 के बीच होने की उम्मीद है, हालांकि फाइनल किराया अभी घोषित नहीं किया गया है। प्रस्तावित रूट में ट्रेन मुंबई पहुंचने से पहले अनंतपुर, गुंटकल, रायचूर, कलबुर्गी, सोलापुर और कल्याण से गुजरेगी।

‘हमें सिर्फ एक नहीं, बल्कि और ट्रेनों की जरूरत है’

एक शहरी यातायात विशेषज्ञ ने नाम न बताने की शर्त पर News18 से बात की। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित सेवा का स्वागत है, लेकिन कर्नाटक को रेल नेटवर्क के और भी बड़े विस्तार की जरूरत है। एक्सपर्ट ने बड़ी संख्या में यात्रियों के बेंगलुरु आने-जाने की ओर इशारा किया। खासकर, छुट्टियों के दौरान देश भर के लोगों के लिए एक डेस्टिनेशन के रूप में शहर की खास स्थिति देखने को मिलती है। एक्सपर्ट ने तर्क दिया कि कर्नाटक को दशकों से रेलवे ने कम आंका है और उसे अलग-अलग रूटों पर कई सेवाओं की जरूरत है।

त्योहारों के मौसम में यात्रा की मांग तेजी से बढ़ती है और यात्रियों को अक्सर सस्ते टिकट खोजने में मुश्किल होती है। बेंगलुरु और मुंबई के बीच एक तेज ट्रेन राहत दे सकती है, लेकिन शहर को दूसरी बड़ी जगहों से जोड़ने के लिए और ज्यादा सर्विस की जरूरत है।

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कैबिनेट ने सामाजिक सहायता योजना के लिए 53428 करोड़ रुपये किए मंजूर , विकलांग पेंशन में भी हुई बढ़ोतरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ‘राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम’ (NSAP) को 2026-27 से 2030-31 तक, यानी पांच साल के लिए जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इसके लिए कुल 53,428 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। ग्रामीण विकास विभाग की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव में कार्यक्रम और उसके जुड़ी योजनाओं का नाम बदलना,विकलांग पेंशन के नियमों में बदलाव करना और वृद्धावस्था पेंशन,विधवा पेंशन तथा पारिवारिक लाभ योजनाओं को उनके मौजूदा स्वरूप में जारी रखना शामिल है।

इसकी जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “दुनिया के सबसे व्यापक सोशल सिक्योरिटी नेट में से एक का विस्तार किया गया है और इसे 2031 तक बढ़ा दिया गया है। इस विस्तारित सोशल सिक्योरिटी नेट के लिए कुल 53,428 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।”

उन्होंने आगे कहा, “विकलांग लोगों के लिए, विकलांगता पेंशन पाने की पिछली पात्रता सीमा 80 प्रतिशत विकलांगता थी। अब इस सीमा को घटाकर आधा यानी 40 प्रतिशत कर दिया गया है, जिसका मतलब है कि 40 प्रतिशत विकलांगता वाले लोग भी विकलांग पेंशन पाने के पात्र होंगे।”

विकलांगता पेंशन में बदलाव

सबसे अहम बदलाव विकलांगता पेंशन के नियमों में हुए हैं। इसके तहत 0 से 79 साल की उम्र के लाभार्थियों को हर महीने 375 रुपये और 80 साल या उससे ज़्यादा उम्र के लोगों को 625 रुपये की मदद मिलेगी।

विकलांगता के लिए पात्रता की सीमा (बेंचमार्क) को मौजूदा 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया जाएगा। न्यूनतम उम्र की शर्त भी हटा दी जाएगी, जिससे विकलांग लोग जन्म से ही इसके लिए पात्र हो सकेंगे।

वृद्धावस्था पेंशन,विधवा पेंशन और फेमिली बेनिफिट योजनाएं बिना किसी बदलाव के जारी रहेंगी।

कैबिनेट ने कहा कि सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 3.20 करोड़ लाभार्थियों को इसमें शामिल किया जाएगा। विकलांगता पेंशन योजना के तहत संशोधित पात्रता शर्तों, लाभार्थियों की संख्या और सहायता की दर के बारे में विस्तार से बताने वाली गाइडलाइंस तीन महीने के भीतर जारी और लागू की जाएंगी।

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इन योजनाओं के बदलेंगे नाम

नाम बदलने की कवायद के तहत,NSAP अब प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना बन जाएगी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना कर दिया जाएगा, जबकि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना बन जाएगी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांग पेंशन योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना कर दिया जाएगा और राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना का नाम प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना हो जाएगा।

बता दें कि NSAP को 15 अगस्त 1995 को गरीब परिवारों को मदद देने के लिए शुरू किया गया था। यह संविधान के अनुच्छेद 41 (जो राज्य की नीति के निर्देशक सिद्धांतों में से एक है) के तहत केंद्र की ज़िम्मेदारी को पूरा करने के लिए किया गया था। इस प्रोग्राम के लिए पूरा पैसा केंद्र सरकार देती है, ताकि पूरे देश में एक जैसी मदद मिल सके।

विकलांग पेंशन में किए गए बदलाव ‘विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016’ के तहत किए गए हैं। यह कानून ‘बेंचमार्क विकलांगता’ को 40 प्रतिशत की सीमा के आधार पर परिभाषित करता है और यह प्रावधान करता है कि विकलांगता से जुड़ी सहायता राशि, अन्य श्रेणियों के लाभार्थियों के लिए समान योजनाओं के तहत मिलने वाली सहायता से कम से कम 25 प्रतिशत अधिक होनी चाहिए।

 

दिवाली पर रेलवे का धमाकेदार ऐलान! 11.5 लाख कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस, खाते में आएगा मोटा पैसा

छोटे भाई का अंतिम संस्कार मेरा इंतजार कर रहा है, ट्रेन लेट मत करना… पैसेंजर ने की भावुक अपील तो रेलवे ने दिया ये जवाब

अपने किसी करीबी को आखिरी विदाई देना जिंदगी के सबसे मुश्किल पलों में से एक होता है। ऐसे समय में अगर ट्रेन लेट हो जाए, तो परिवार तक समय पर पहुंचने की चिंता और बढ़ जाती है। कुछ ऐसी ही परेशानी का सामना एक यात्री को करना पड़ा, जिसने ट्रेन नंबर 15910, अवध असम एक्सप्रेस के लेट होने पर सोशल मीडिया के जरिए भारतीय रेलवे से मदद मांगी। यात्री ने बताया कि उसके छोटे भाई की अंतिम यात्रा उसका इंतजार कर रही है और वह समय पर पहुंचना चाहता है। उसकी इस अपील ने रेलवे की समयबद्ध सेवा और यात्रियों की आपात परिस्थितियों से जुड़े सवाल को सामने ला दिया।

‘कृपया ट्रेन को और लेट न करें‘, यात्री ने लगाई गुहार

9 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:20 बजे किए गए पोस्ट में यात्री ने भारतीय रेलवे और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को टैग करते हुए अपनी परेशानी साझा की। उसने अनुरोध किया कि अवध असम एक्सप्रेस को और देर न हो, क्योंकि उसे अपने छोटे भाई की अंतिम यात्रा में शामिल होना है।

यात्री की अपील का भाव साफ था वह किसी सामान्य काम के लिए नहीं, बल्कि अपने भाई को आखिरी विदाई देने के लिए समय पर पहुंचना चाहता था। ऐसे संवेदनशील मौके पर ट्रेन की देरी उसके लिए बेहद मुश्किल स्थिति पैदा कर रही थी।

रेलवे ने बताई ट्रेन लेट होने की वजह

यात्री की पोस्ट पर मुरादाबाद मंडल के आधिकारिक अकाउंट @drm_mb ने जवाब दिया। रेलवे के मुताबिक, ट्रेन पिछले मंडल से ही देरी से पहुंची थी। इसके बाद संबंधित रेल सेक्शन में भारी भीड़ और ट्रेनों के एक साथ चलने के कारण भी देरी बढ़ गई।

मंडल ने बताया कि यात्री की शिकायत ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों तक पहुंचा दी गई है। कर्मचारियों से ट्रेन की निगरानी करने और संभव होने पर देरी कम करने की कोशिश करने को कहा गया। रेलवे ने यात्री को जल्द से जल्द गंतव्य तक पहुंचाने का भरोसा भी दिया और हुई असुविधा पर खेद जताया।

RailwaySeva ने भी दिया जवाब, साझा करने को कहा यात्रा का विवरण

इस मामले में रेलवे की आधिकारिक सहायता सेवा RailwaySeva ने भी प्रतिक्रिया दी। उसने यात्री से अनुरोध किया कि वह अपना पीएनआर या यूटीएस नंबर और मोबाइल नंबर निजी संदेश (DM) के जरिए साझा करे, ताकि मामले में तत्काल कार्रवाई की जा सके। रेलवे ने शिकायत दर्ज कराने के लिए RailMadad पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 139 का विकल्प भी बताया।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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Bullet Train Project Update: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में बड़ी कामयाबी, 12 मंजिला बिल्डिंग जितना ऊंचा साबरमती नदी पुल तैयार, अब आगे क्या?

Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project Update: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने अहमदाबाद में साबरमती नदी पर बने 12 मंजिला बिल्डिंग जितना ऊंचा पुल का निर्माण पूरा कर लिया है। NHSRCL ने बताया कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत साबरमती नदी पर 480 मीटर लंबा और 36 मीटर ऊंचा पुल बनकर तैयार हो गया है। एनएचएसआरसीएल ने एक बयान में कहा कि करीब 118 फुट ऊंचा यह पुल 12 मंजिला इमारत के बराबर है। यह मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के प्रमुख ढांचों में से एक है।

14.8 मीटर की ऊंचाई पर है पुल

आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह पुल पश्चिम रेलवे की अहमदाबाद-दिल्ली मुख्य रेल लाइन के पास स्थित है, जो जमीन के स्तर से करीब 14.8 मीटर की ऊंचाई पर है। यह पुल साबरमती और अहमदाबाद बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच स्थित है। यह साबरमती स्टेशन से करीब एक किलोमीटर और अहमदाबाद स्टेशन से चार किलोमीटर दूर है। बयान के अनुसार, साबरमती नदी पुल के खंभों को ज्यादा ऊंचाई वाला बनाया गया है ताकि मौजूदा बुनियादी ढांचे से जरूरी वर्टिकल क्लीयरेंस बनाए रखी जा सके। NHSRCL के मुताबिक, साबरमती नदी पर बने इस पुल की लंबाई 480 मीटर है। इसकी करीब 36 मीटर ऊंचाई इसे परियोजना के प्रमुख इंजीनियरिंग स्ट्रक्चर में शामिल करती है।

पुल की बड़ी बातें

नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने बताया कि पुल को आठ गोलाकार पिलर का सहारा दिया गया है। इनमें से चार पिलर नदी की तलहटी में, दो पिलर नदी के दोनों किनारों पर और दो पिलर नदी के किनारों से बाहर स्थित हैं। पिलर को रणनीतिक तरीके से इस तरह लगाया गया है कि नदी में जल प्रवाह में कम से कम रुकावट हो। NHSRCLने कहा कि पुल का निर्माण ‘बैलेंस्ड कैंटिलीवर मेथड’ से किया गया है। यह नदियों और गहरे जलमार्गों पर लंबी दूरी वाले पुलों के निर्माण के लिए इस्तेमाल की जाने वाली विशेष तकनीक है। इस तकनीक से पुल के ऊपरी ढांचे के नीचे पारंपरिक मचान लगाए बिना उसका निर्माण किया जा सकता है।

बयान में आगे कहा गया है कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (एमएएचएसआर) का मार्ग कई मौजूदा बुनियादी ढांचा सुविधाओं से होकर गुजरता है, जिनमें फ्लाईओवर, पुल, रेलवे लाइन और मेट्रो कॉरिडोर शामिल हैं। विज्ञप्ति के अनुसार, इस कॉरिडोर में नदी पर कुल 25 पुल हैं, जिनमें 21 गुजरात और चार महाराष्ट्र में हैं। गुजरात में प्रस्तावित 21 नदी पुलों में से अब तक 18 का निर्माण पूरा हो चुका है।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट

मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर देश की पहली हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट है। इसके तहत गुजरात और महाराष्ट्र को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत साबरमती और अहमदाबाद समेत कई स्टेशनों और बड़े इंजीनियरिंग स्ट्रक्चर का निर्माण किया जा रहा है।

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इस बीच, साबरमती नदी पर 480 मीटर लंबे पुल का निर्माण पूरा होना परियोजना के निर्माण कार्य में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। भारत में पहली बुलेट ट्रेन 15 अगस्त 2027 के आसपास शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। यह ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर चलेगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया था कि शुरुआत में सूरत-बिलिमोरा सेक्शन पर सेवा शुरू होगी।

रबी की फसलों की एमएसपी बढ़ी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अगले सीजन के लिए रबी के फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की मंजूरी दी है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में साल 2027-28 के लिए सभी छह रबी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी बढ़ाने का फैसला हुआ है। गेहूं की एमएसपी में 25 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक में हुए फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दिल्ली में ट्रैफिक की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए 17 सौ करोड़ रुपए की योजना की मंजूरी भी दी गई है।

वैष्णव ने बताया है कि कुसुम, सरसों, राई और मसूर की एमएसपी भी बढ़ाई गई है। एमएसपी बढ़ाने के अलावा सस्ते दाम पर खाद उपलब्ध कराने के लिए कैबिनेट ने उर्वरकों पर 41,533 करोड़ रुपए की सब्सिडी मंजूर दी है। उन्होंने कैबिनेट के अन्य फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज तीन योजना को भी मंजूरी दी गई है। इस योजना पर एक लाख 86 हजार 405 करोड़ रुपए खर्च होंगे। योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट तक रिन्यूएबल एनर्जी के लिए इंट्रा स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम बनाया जाएगा। यह काम साल 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

EPFO के तहत सैलरी लिमिट बढ़कर ₹25,000 हुई, आपके वेतन और पेंशन पर क्या असर होगा?

EPFO salary Hike: सरकार ने एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) के तहत अनिवार्य सोशल सिक्योरिटी कवरेज के लिए वेज सीलिंग यानी सैलरी सीमा को मौजूदा 15,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दी है। इसका मकसद ज्यादा कर्मचारियों को प्रोविडेंट फंड बचत और पेंशन सुरक्षा के दायरे में लाना है। सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, “प्रोविडेंट फंड कटौती के लिए नई वेतन सीमा अब ₹25,000 प्रति माह होगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस फैसले से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य EPFO ​​कवरेज के दायरे में आ सकते हैं।”

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कहा, “संशोधित वेतन सीमा 17 सितंबर, 2026 से लागू हो गई है।” EPFO वेतन सीमा 2004 और 2014 के बीच बदली नहीं गई थी। सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर ₹15,000 प्रति माह कर दिया गया था। सितंबर 2014 से पहले वेतन सीमा ₹6,500 प्रति माह थी। सरकार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सैलरी और आय में लगातार बढ़ोतरी और संगठित क्षेत्र में रोज़गार बढ़ने को देखते हुए अब सीमा को बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया गया है।

₹11,339 करोड़ का अतिरिक्त खर्च

इस फ़ैसले से सालाना लगभग ₹11,339 करोड़ का अतिरिक्त खर्च होने का अनुमान है। जबकि मौजूदा सालाना बजटीय सहायता लगभग ₹10,250 करोड़ है। पांच वर्षों में अनुमानित खर्च लगभग ₹56,696 करोड़ होगा। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, “यह फैसला ज्यादा कर्मचारियों को प्रोविडेंट फंड बचत एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) के तहत पेंशन सुरक्षा और एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम (EDLI) के तहत बीमा कवरेज का लाभ उठाने में सक्षम बनाएगा।”

सैलरी बढ़ने से नौकरीपेशा को क्या होगा फायदा?

यह बदलाव प्रोविडेंट फंड योगदान और पेंशन योग्य सैलरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मौजूदा वेतन स्तरों के अनुरूप बनाने में भी मदद करेगा। अभी, ₹15,000 से ज्यादा मासिक वेतन वाली नौकरी शुरू करने वाला कोई नया कर्मचारी अपने आप EPF के दायरे में नहीं आता है। लेकिन अब वेतन सीमा (wage ceiling) बढ़ने से हर महीने ₹15,000 से ₹25,000 कमाने वाले कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा अनिवार्य सोशल सिक्योरिटी दायरे में आ जाएगा।

सरकार ने कहा कि सितंबर 2014 में पिछली बार सैलरी सीमा बढ़ाए जाने के बाद से देश भर में वेतन और आय में लगातार बढ़ोतरी हुई है। साथ ही संगठित क्षेत्र में रोजगार का विस्तार भी हुआ है। कई राज्यों और क्षेत्रों में न्यूनतम वेतन भी मौजूदा सीमा के करीब पहुंच गया है। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “कैबिनेट का यह फैसला देश के श्रमिकों को व्यापक सोशल सिक्योरिटी देगा और संगठित क्षेत्र में रोजगार को भी बढ़ावा देगा।”

वेज सीलिंग बढ़ने पर पेंशन पर क्या असर होगा?

इसका सबसे बड़ा और लंबे समय का असर एंप्लॉय पेंशन स्कीम (EPS) के तहत मिलने वाले पेंशन फायदों पर पड़ सकता है। स्टैंडर्ड EPS फ्रेमवर्क के तहत पेंशन-योग्य वेतन की सीमा 2014 से ₹15,000 तय की गई है। एक अधिकारी ने कहा कि इससे असल में एम्प्लॉयर का EPS योगदान पेंशन-योग्य वेतन के 8.33% के हिसाब से लगभग ₹1,250 प्रति माह तक सीमित हो गया था। अब जब यह सीमा बढ़कर ₹25,000 हो रही है, तो इसके हिसाब से 8.33% योगदान लगभग ₹2,083 प्रति माह होगा।

इसका मतलब है कि जिन कर्मचारियों पर नई लिमिट लागू होती है, उनके लिए EPS में ज्यादा से ज्यादा योगदान में हर महीने लगभग 833 रुपये की बढ़ोतरी होगी। स्टैंडर्ड EPS पेंशन फॉर्मूले के तहत पेंशन मुख्य रूप से पेंशन योग्य सैलरी और पेंशन योग्य सर्विस से जुड़ी होती है।

अधिकारी का अनुमान है कि 35 साल की पेंशन योग्य सर्विस वाले कर्मचारी की मासिक पेंशन, नई लिमिट के हिसाब से गिनी गई सर्विस के लिए लगभग 7,500 रुपये से बढ़कर 12,500 रुपये हो सकती है। यह पुरानी 15,000 रुपये की लिमिट के आधार पर गिनी गई पेंशन की तुलना में लगभग 66% की बढ़ोतरी होगी।

EPFO क्या है?

EPFO दुनिया के सबसे बड़े सोशल सिक्योरिटी सिस्टम में से एक का मैनेजमेंट करता है। यह एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF), एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) और एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) स्कीम का संचालन करता है। लेटेस्ट EPFO ​​आंकड़ों के अनुसार, लगभग 7.98 करोड़ सदस्य करीब 7.68 लाख कंपनियों से जुड़े हैं। EPS के तहत लगभग 82 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलता है। EDLI स्कीम EPF सदस्यता से जुड़ा इंश्योरेंस कवर प्रदान करती है।

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Bullet train India: भारत की खुद की 350 kmph स्पीड वाली बुलेट ट्रेन का प्लान आया सामने, जानिए जापान की E10 सीरीज को कैसे देगा टक्कर

Bullet train India: भारत अब हाई-स्पीड रेल के क्षेत्र में अपनी तकनीक और ट्रेनें विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। रेलवे मंत्रालय ने 2030 तक 350 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड वाली स्वदेशी बुलेट ट्रेन तैयार करने की योजना बनाई है। यह ट्रेन जापान की अगली पीढ़ी की E10 सीरीज की हाई-स्पीड ट्रेनों की क्षमता के बराबर होगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “भारत की अगली पीढ़ी की बुलेट ट्रेन को 350 किलोमीटर प्रति घंटे की टॉप स्पीड के हिसाब से प्लान किया जा रहा है। ट्रेन के डिज़ाइन का काम अगले छह महीनों में शुरू होने की उम्मीद है।” 2

016 में शुरू हुआ 508 किलोमीटर लंबा मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर अभी बन रहा है। इसे फिलहाल 320 kmph तक की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों के लिए बनाया जा रहा है। इसके ऑपरेशन का पहला चरण अगस्त 2027 में शुरू होने की उम्मीद है। इसके साथ ही मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) कॉरिडोर की लागत में भी बड़ा इजाफा हुआ है। कैबिनेट ने प्रोजेक्ट की संशोधित लागत को 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक मंजूरी दी है। यह 2015 में तैयार शुरुआती अनुमान की तुलना में लगभग दोगुनी है।

350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली B35 ट्रेन

रेलवे मंत्रालय की योजना के तहत भारत अपनी B35 हाई-स्पीड ट्रेन विकसित करेगा। इसका डिजाइन स्पीड 350 किमी प्रति घंटा रखी जाएगी। इसका उद्देश्य भारत में ऐसी स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन तैयार करना है, जो दुनिया की आधुनिक बुलेट ट्रेन तकनीक के स्तर की हो। रिपोर्ट के मुताबिक, इसका लक्ष्य जापान की अगली पीढ़ी की E10 सीरीज से मेल करना है।

जापान ने दिसंबर 2024 में भारत सरकार को बताया था कि उसकी मौजूदा E5 सीरीज की ट्रेनों का उत्पादन चरणबद्ध तरीके से बंद किया जा रहा है। जापान के अनुसार, E10 ट्रेनों का उत्पादन 2030 से शुरू होगा। ये 2034 तक संचालन के लिए उपलब्ध हो सकती हैं। भारत इन ट्रेनों के उपलब्ध होने तक अपने स्वदेशी विकल्प को तैयार करने पर काम कर रहा है।

पहले B28 ट्रेनें होंगी तैयार

भारत की तत्काल योजना B28 हाई-स्पीड ट्रेनों के निर्माण की है। मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर पर शुरुआत में इन्हीं ट्रेनों को चलाया जाएगा। इंडियन रेलवे के मुताबिक, BEML को 32 B28 ट्रेनों के निर्माण का कॉन्ट्रैक्ट मिल चुका है। इसके अलावा BEML को 15 और B28 ट्रेनों के निर्माण के लिए 5,400 करोड़ रुपये का अलग कॉन्ट्रैक्ट मिला है। इस तरह कुल 47 B28 ट्रेनों के निर्माण की योजना है।

  • B28 ट्रेनों की डिजाइन स्पीड: 280 किमी प्रति घंटा
  • अधिकतम ऑपरेटिंग स्पीड: 249 किमी प्रति घंटा

2027 की शुरुआत में प्रोटोटाइप का ट्रायल

B28 ट्रेन के दो प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे। इनका ट्रायल 2027 की पहली तिमाही में शुरू होने की उम्मीद है। इसके बाद ट्रेनों के प्रदर्शन, सुरक्षा और हाई-स्पीड संचालन से जुड़ी जांच के आधार पर आगे का उत्पादन और संचालन किया जाएगा।

भारत का अपना ट्रेन कंट्रोल सिस्टम भी

स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेनों के साथ भारत अपना Bharat Train Control System (BTCS) भी विकसित करेगा। यह सिस्टम ट्रेन की रफ्तार, ट्रेनों के बीच दूरी, संचालन और सुरक्षा को नियंत्रित करने में मदद करेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, BTCS की अवधारणा चीन के Chinese Train Control System (CTCS) जैसी होगी। इसका इस्तेमाल हाई-स्पीड और सामान्य रेल नेटवर्क में ट्रेन की गति और सुरक्षा प्रबंधन के लिए किया जाता है।

प्रोजेक्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी लागत में इजाफा

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट की लागत में भी भारी वृद्धि हुई है। 2015 में इस प्रोजेक्ट की शुरुआती अनुमानित लागत करीब 1.11 लाख करोड़ रुपये थी। अब इसकी संशोधित लागत 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक लागत बढ़ने के प्रमुख कारणों में जमीन अधिग्रहण, इंफ्रास्ट्रक्चर और सिग्नलिंग सिस्टम की लागत में बढ़ोतरी शामिल है।

जमीन अधिग्रहण की लागत में तीन गुना से ज्यादा वृद्धि हुई है। यह खर्च बढ़कर करीब 19,700 करोड़ रुपये हो गया है। प्रोजेक्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी लागत में भी करीब 50% की वृद्धि हुई है। यह अब 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई है। 2015 के अनुमान की तुलना में ट्रेन सिग्नलिंग सिस्टम पर होने वाला खर्च भी करीब 100% बढ़ गया है। मौजूदा अनुमान के अनुसार, भविष्य में आने वाली जापानी ट्रेनों की लागत को छोड़कर पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 399 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर खर्च आ रहा है।

508 किलोमीटर लंबा है मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है। इस पर शुरुआत में B28 हाई-स्पीड ट्रेनें चलाई जाएंगी। कॉरिडोर को दिसंबर 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच हाई-स्पीड रेल सेवा शुरू होगी। भारत में पहली बार इस तरह की हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन सेवा का संचालन होगा।

भारत की हाई-स्पीड रेल योजना में अब दो चरण

पूरे प्लान को आसान भाषा में समझें तो भारत की योजना दो स्तरों पर आगे बढ़ रही है। इससे भारत का लक्ष्य सिर्फ हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि भविष्य में हाई-स्पीड ट्रेन और उसके कंट्रोल सिस्टम को देश में ही विकसित करने की दिशा में भी आगे बढ़ेगा।

  • पहला चरण: मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के लिए B28 ट्रेनों का स्वदेशी निर्माण और संचालन होगा।
  • दूसरा चरण: इसी अनुभव और तकनीकी क्षमता के आधार पर 2030 तक 350 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड वाली B35 स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन को विकसित करना है।

फिलहाल, BEML और इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) मिलकर B28 बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इसे 280 kmph तक की रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है। इसका प्रोटोटाइप अगले साल की शुरुआत तक पूरा होने की उम्मीद है। अगस्त 2027 तक मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के एक हिस्से पर इसका ऑपरेशन शुरू होने की योजना है।

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25 हजार रु प्रति माह वेतन तक पीएफ

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा के लिए वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने को मंजूरी दे दी है। सरकार के अनुसार इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी ईपीएफओ के अनिवार्य दायरे में आ सकते हैं। नई सीमा 17 सितंबर, 2026 से लागू होगी।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को मंत्रिमंडल के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि भविष्य निधि कटौती के लिए अब 25,000 रुपये प्रति माह वेतन की नई सीमा होगी। इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में लाया जा सकेगा।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार संशोधित वेतन सीमा 17 सितंबर यानी विश्वकर्मा पूजा के दिन से प्रभावी होगी।

ईपीएफओ की वेतन सीमा में 12 साल बाद बदलाव हुआ है। वर्ष 2004 से 2014 के बीच यह सीमा अपरिवर्तित रही थी। सितंबर 2014 में इसे 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था। उसके बाद से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ।

सरकार का कहना है कि पिछले वर्षों में वेतन और आय में लगातार बढ़ोतरी हुई है। संगठित क्षेत्र में रोजगार का भी विस्तार हुआ है। कई राज्यों और क्षेत्रों में न्यूनतम वेतन मौजूदा 15,000 रुपये की सीमा के करीब या उससे ऊपर पहुंच गया है। इसे देखते हुए वेतन सीमा बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का फैसला किया गया।

इस फैसले पर सालाना करीब 11,339 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आने का अनुमान है। मौजूदा वार्षिक बजटीय सहायता करीब 10,250 करोड़ रुपये है। पांच वर्षों में अनुमानित खर्च करीब 56,696 करोड़ रुपये होगा।

सरकार के अनुसार इससे अधिक कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ के तहत बचत, कर्मचारी पेंशन योजना यानी ईपीएस के तहत पेंशन और कर्मचारी जमा संबद्ध बीमा योजना यानी ईडीएलआई के तहत बीमा सुरक्षा मिलेगी। साथ ही भविष्य निधि अंशदान और पेंशन योग्य वेतन की व्यवस्था को मौजूदा वेतन स्तर के अधिक अनुरूप बनाया जा सकेगा।

अभी 15,000 रुपये से अधिक मासिक वेतन पर नौकरी शुरू करने वाला नया कर्मचारी स्वतः ईपीएफ के अनिवार्य दायरे में नहीं आता। सीमा बढ़ने के बाद 15,000 से 25,000 रुपये मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों का बड़ा वर्ग अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में शामिल हो जाएगा।

श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि मंत्रिमंडल का फैसला देश के श्रमिकों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा देने के साथ संगठित क्षेत्र में रोजगार को भी गति देगा।

उन्होंने कहा कि 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा और सेवा दिवस का अवसर है और यह फैसला उसी दिन से लागू होगा। ईपीएफओ दुनिया की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक का संचालन करता है। इसके तहत ईपीएफ, ईपीएस और ईडीएलआई योजनाएं चलती हैं।

ईपीएफओ के ताजा आंकड़ों के अनुसार करीब 7.98 करोड़ सदस्य लगभग 7.68 लाख प्रतिष्ठानों से जुड़े हैं। ईपीएस के तहत करीब 82 लाख पेंशनधारकों को पेंशन मिलती है, जबकि ईडीएलआई ईपीएफ सदस्यों को बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराता है।

Smartphone GST Cut: क्या सस्ते होने वाले हैं स्मार्टफोन? इंडस्ट्री की GST 18% से घटाकर 5% करने की मांग

Smartphone GST Cut: स्मार्टफोन की कीमत लगातार बढ़ रही है, क्योंकि जरूरी पार्ट्स महंगे हो गए हैं। खासकर, AI की वजह से। ऐसे में मोबाइल फोन पर GST कम करने की मांग तेज हो गई है। इंडस्ट्री चाहती है कि GST को मौजूदा 18% से घटाकर 5% किया जाए। उसका कहना है कि इससे फोन सस्ते होंगे और बिक्री बढ़ सकती है।

GST 18% से घटाकर 5% करने की मांग

स्मार्टफोन कंपनियों की इंडस्ट्री बॉडी इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) ने यह मांग उठाई है। ICEA ने 2 और 3 सितंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र भेजे हैं।

एसोसिएशन चाहती है कि इस प्रस्ताव को अगली GST काउंसिल की बैठक में रखा जाए। ICEA में Apple, Xiaomi, Oppo, Vivo, Dixon, Bhagwati और Lava जैसी कंपनियां शामिल हैं। इंडस्ट्री का कहना है कि 18% GST से खासकर सस्ते स्मार्टफोन खरीदने वालों पर बोझ बढ़ रहा है। इसलिए टैक्स घटाने की जरूरत है।

फोन पहले ही काफी महंगे हो चुके हैं

ICEA के मुताबिक, पिछले एक साल में स्मार्टफोन की कीमतों में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है। इसकी एक वजह मोबाइल मेमोरी चिप की बढ़ती कीमत है।

एसोसिएशन का कहना है कि सितंबर 2025 से DRAM और NAND फ्लैश की कीमतें करीब चार गुना बढ़ चुकी हैं। AI डेटा सेंटर में मेमोरी चिप की मांग बढ़ने से दुनियाभर में इसकी सप्लाई पर दबाव आया है। इसका असर भारत में भी दिखा है। ICEA के मुताबिक, पिछले एक साल में एंट्री-लेवल स्मार्टफोन की कीमतें करीब 35-45% बढ़ी हैं।

₹10,000 से सस्ते फोन की सप्लाई घटी

सबसे ज्यादा दबाव सस्ते फोन के बाजार पर है। ICEA के मुताबिक, ₹10,000 से कम कीमत वाले स्मार्टफोन की सप्लाई अब 5% से भी कम रह गई है। कंपनियों के लिए मेमोरी चिप की बढ़ी पूरी लागत खुद उठाना मुश्किल है। इसलिए उसका कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालना पड़ रहा है। ऊपर से 18% GST भी लग रहा है।

ICEA के मुताबिक, फोन की प्री-टैक्स कीमत में ₹1 की बढ़ोतरी होती है तो 18% GST के हिसाब से टैक्स का बोझ भी 18 पैसे बढ़ जाता है।

पहली बार फोन खरीदने वालों पर ज्यादा असर

ICEA का कहना है कि महंगे फोन का असर सबसे ज्यादा पहली बार स्मार्टफोन खरीदने वालों पर पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों और कम आय वाले परिवारों के लिए भी फोन खरीदना मुश्किल हुआ है।

अगर GST 5% किया जाता है, तो फोन की शुरुआती कीमत कम हो सकती है। इससे लोग पुराने फोन बदलने के लिए भी प्रोत्साहित हो सकते हैं। साथ ही फीचर फोन और 2G यूजर्स के स्मार्टफोन पर आने की रफ्तार बढ़ सकती है।

पहले 12% था मोबाइल पर GST

मोबाइल फोन पर हमेशा से 18% GST नहीं था। जुलाई 2017 में GST लागू हुआ था। उस समय मोबाइल फोन को 12% GST स्लैब में रखा गया था। अप्रैल 2020 में GST बढ़ाकर 18% कर दिया गया। अब ICEA इसे सीधे 5% करने की मांग कर रहा है।

एसोसिएशन का कहना है कि यह दर GST लागू होने से पहले के टैक्स स्ट्रक्चर के ज्यादा करीब होगी। GST से पहले मोबाइल फोन पर 1% बेसिक एक्साइज ड्यूटी लगती थी। ज्यादातर राज्यों में VAT भी 5% या उससे कम था।

GST 18% से 5% घटने पर क्या असर होगा?

अगर GST 18% से घटकर 5% हो जाता है, तो फोन की कीमत में अच्छी खासी कमी आ सकती है। मसलन, ₹10,000 का फोन करीब ₹8,898 का हो सकता है। यानी करीब ₹1,102 की बचत। ₹20,000 का फोन करीब ₹17,797 और ₹30,000 का फोन करीब ₹26,695 का हो सकता है।

वहीं ₹50,000 का फोन करीब ₹44,492 और ₹1 लाख का फोन करीब ₹88,983 में मिल सकता है। यानी जितना महंगा फोन, उतनी ज्यादा बचत। हालांकि यह तभी होगा, जब कंपनियां GST कटौती का पूरा फायदा ग्राहकों को दें।

सरकार का रेवेन्यू भी पूरी तरह नहीं घटेगा?

ICEA ने सरकार के रेवेन्यू को लेकर भी अपना पक्ष रखा है। उसका कहना है कि GST घटने से टैक्स रेवेन्यू में शुरुआती कमी आ सकती है। लेकिन ज्यादा फोन बिकने पर इसकी कुछ भरपाई हो सकती है। इसके अलावा ग्रे मार्केट की खरीदारी का ज्यादा हिस्सा औपचारिक बाजार में आ सकता है। मोबाइल डेटा, सब्सक्रिप्शन और डिजिटल सर्विसेज से मिलने वाला GST भी बढ़ सकता है।

अब ICEA चाहती है कि वित्त मंत्रालय इस प्रस्ताव पर विचार करे और इसे अगली GST काउंसिल की बैठक में रखा जाए। अगर GST में कटौती पर सहमति बनती है, तो इसका सीधा फायदा स्मार्टफोन खरीदारों को मिल सकता है।

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Gala Dinner: PM मोदी के गाला डिनर में नहीं शामिल हुए जिनपिंग, सामने आई ये बड़ी वजह

BRICS Summit 2026: नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विदेशी मेहमानों के लिए आयोजित भव्य गाला डिनर से एक बड़ी खबर सामने आई है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस हाई-प्रोफाइल डिनर में शामिल नहीं हुए।

उनके अलावा अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद भी सम्मेलन के बाद वापस अपने देश रवाना हो जाने के कारण इस डिनर में मौजूद नहीं थे।

क्यों गायब रहे शी जिनपिंग? सामने आई यह वजह

चीनी राष्ट्रपति के डिनर में शामिल न होने का सटीक और आधिकारिक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक शी जिनपिंग सम्मेलन के व्यस्त शेड्यूल के बाद आराम करने के लिए सीधे अपने होटल चले गए थे।

गौरतलब है कि शी जिनपिंग शनिवार दोपहर को ही नई दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने दिन में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सत्रों में हिस्सा लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक भी की थी।

पुतिन से लेकर कई दिग्गजों की रही मौजूदगी

शी जिनपिंग भले ही डिनर में मौजूद नहीं रहे, लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने पीएम मोदी द्वारा आयोजित इस शाही भोज में शिरकत की। इस डिनर में केंद्र सरकार के कई दिग्गज मंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए:

केंद्रीय मंत्री: अमित शाह, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, अश्विनी वैष्णव और शिवराज सिंह चौहान।

मुख्यमंत्री व नेता: यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस, असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा, पश्चिम बंगाल के सुवेंदु अधिकारी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला।

ये सभी केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री संसद भवन से दो बसों में सवार होकर डिनर के वेन्यू यानी भारत मंडपम पहुंचे थे।

डिनर के मेन्यू में क्या था खास?

विदेशी और देसी मेहमानों के लिए परोसे गए भोजन में भारतीय व्यंजनों का खास स्वाद देखने को मिला:

मेन कोर्स: खांडवी मिल-फॉय, खुंब गलोटी, पनीर लबाबदार, गुच्ची मार्मिक, गाजर-बीन्स पोरियल और मिलेट्स (बाजरा) पुलाव।

डेजर्ट (मीठा): पुरानी दिल्ली की फ्रूट क्रीम के साथ गरमा-गरम जलेबी और शहतूत फिरनी परोसी गई।

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