Iran-US War Update: ‘ईरान में लोग मर रहे हैं, पैसे के लिए खोलना चाहता है होर्मुज’; ट्रंप का बड़ा दावा, तेहरान ने किया पलटवार

Iran-US War Update: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार (26 सितंबर) को दावा किया कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना चाहता है, क्योंकि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के चलते उसके पास पैसे नहीं आ रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने खुद ही अपने लिए मुश्किल खड़ी कर ली है। मीडिया रिपोर्टर्स से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “वे तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना चाहते हैं। जानते हैं क्यों? क्योंकि वे मुश्किल में हैं। उनके पास पैसे नहीं आ रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपना पैसा होर्मुज से मिलता है। इसलिए उन्होंने खुद को ही मात दे दी।”

ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से पूरी दुनिया के लिए परेशानी पैदा हुई। लेकिन अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर अब तक की सबसे बड़ी नाकेबंदी लागू कर दी। उन्होंने इसे ‘स्टील की दीवार’ बताते हुए कहा कि इसके कारण ईरान के पास अब धन का प्रवाह नहीं हो रहा है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान ने सोचा था कि जलडमरूमध्य बंद करने से दुनिया के लिए समस्या खड़ी होगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने जवाब में जलडमरूमध्य को ईरान के लिए बंद कर दिया। जबकि अन्य देशों को इसका इस्तेमाल करने की अनुमति दी।

ईरान के शांति प्रस्ताव को ट्रंप ने ठुकराया

ट्रंप की यह टिप्पणी एक दिन बाद आई, जब उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने कतर के मध्यस्थों के जरिए ईरान की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ईरान ने इस प्रस्ताव की घोषणा इसी सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान की थी। इसके बाद ईरान ने रविवार को कहा कि अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष का समाधान केवल कूटनीति के जरिए ही संभव है। तेहरान ने यह भी कहा कि वह अभी अपने प्रस्ताव पर अमेरिका के आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहा है।

क्या था ईरान का प्रस्ताव?

न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने प्रस्ताव दिया था कि अगर अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी हटाता है, तेहरान तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में छूट देगा। साथ ही अगर सभी मोर्चों पर युद्धविराम लागू होता है, तो ईरान सात दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने के लिए तैयार है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि ट्रंप द्वारा प्रस्ताव खारिज किए जाने की बात अभी आधिकारिक तौर पर तेहरान तक नहीं पहुंची है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा रूट्स में से एक है। इसके जरिए बड़ी मात्रा में तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों का परिवहन होता है। जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में मौजूदा युद्ध 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ।

इसके बाद ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया। इसके बाद वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भारी उथल-पुथल और कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली।

जयशंकर ने रूस और ईरान के विदेश मंत्रियों से की मुलाकात

रूस और ईरान से तेल एवं गैस खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध से संबंधित एक नए कानून पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षर किए जाने के कुछ दिन बाद भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र के इतर रूस और ईरान के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान और रूस के अपने समकक्षों से मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय मुद्दों, ब्रिक्स समूह में सहयोग और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष समेत विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात कर द्विपक्षीय मुद्दों और ब्रिक्स समूह में सहयोग पर चर्चा की।

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ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। भारत ने इस महीने की शुरुआत में ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी, जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी भाग लिया था।

Stocks To Buy: मैक्वेरी ने इन 4 शेयरों पर दी खरीद की राय, मिलेगा 39% का रिटर्न, क्या इनमें से कोई है आपके पास

Stock To Buy: ब्रोकरेज फर्म मैक्वेरी ने गुरुवार, 24 सितंबर को कैपिटल मार्केट की 5 कंपनियों पर अपनी कवरेज शुरू की है। इनमें से चार कंपनियों के लिए उसने “outperform” और “buy” की सलाह दी है।

मैक्वेरी ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) (जो आज ही शेयर बाजार में लिस्ट हुआ) के साथ-साथ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE), MCX, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म Groww की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures और Angel One पर कवरेज शुरू की है।

इन पांचो में से, मैक्वेरी के अनुसार Groww में सबसे ज़्यादा 39% तक की तेजी की संभावना है, जबकि बाकी कंपनियों के लिए मैक्वेरी ने 11% से 22% के बीच का रिटर्न का अनुमान लगाया है।

NSE पर क्या है राय

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को अपनी लिस्टिंग के दिन ही पहली बार तेज़ी (bullish) की सलाह मिली। मैक्वेरी ने इसे ₹1,965 के प्राइस टारगेट के साथ “आउटपरफॉर्म” रेटिंग दी है, जिसका मतलब है कि इसके इश्यू प्राइस से लगभग 11% की बढ़त की संभावना है।

मैक्वेरी ने NSE को “डोमिनेटर” (बाज़ार पर दबदबा रखने वाला) कहा है, क्योंकि इसका मार्केट शेयर और ताकत सबसे ज़्यादा है। उसने कहा कि सेवाओं का पूरा सेट, टेक्नोलॉजी स्टैक और भारी लिक्विडिटी NSE को भारत के फाइनेंशियलाइज़ेशन थीम का मुख्य आधार (lynchpin) बनाती है।

मजबूत नेटवर्क, इंडस्ट्री में सबसे ज़्यादा मुनाफ़ा और कैश कुछ ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से मैक्वेरी NSE को लेकर पॉज़िटिव है।

BSE पर मैक्वेरी का भरोसा किन वजहों से है?

मैक्वेरी ने BSE को ₹4,000 के प्राइस टारगेट के साथ “आउटपरफॉर्म” रेटिंग दी है, जो मौजूदा स्तरों से 22% की बढ़त की संभावना दिखाता है।

इसे “चैलेंजर” (चुनौती देने वाला) बताते हुए, मैक्वेरी ने कहा कि इंडेक्स ऑप्शन की ओर बढ़ने से BSE, NSE का एक मज़बूत कॉम्पिटिटर बन गया है।

BSE द्वारा प्लेटफॉर्म का विस्तार और मार्केट शेयर में बढ़ोतरी से रेवेन्यू और मार्जिन के नए मौके बनते हैं, जिससे मज़बूत कैश जेनरेशन में मदद मिलती है।

कमाई में बढ़ोतरी, मार्जिन का विस्तार और प्लेटफॉर्म के नए मौकों की वजह से मैक्वेरी BSE को लेकर पॉजिटिव है।

मैक्वेरी MCX पर क्यों है पॉजिटिव?

ब्रोकरेज ने MCX को “फीनिक्स” कहा है क्योंकि यह “लगभग खत्म होने” जैसी स्थिति से उबरकर वापस आया है और कमोडिटी ट्रेडिंग में दबदबा बनाने के लिए ‘फर्स्ट-मूवर एडवांटेज’ (सबसे पहले शुरुआत करने का फायदा) का इस्तेमाल किया है, मैक्वेरी के नोट में कहा गया है। FY26 का बेस ऊंचा होने के बावजूद, MCX में इन्वेस्टर्स और प्रोडक्ट्स की कम पहुंच में सुधार की गुंजाइश है, जिससे साफ तौर पर ग्रोथ और ज़्यादा मार्जिन मिल सकता है।

मैक्वेरी ने MCX के लिए “आउटपरफॉर्म” रेटिंग और ₹3,820 का प्राइस टारगेट दिया है।

Groww को लेकर मैक्वेरी का भरोसा किस वजह से है?

Groww को “डिसरप्टर” (बाजार में बड़ा बदलाव लाने वाला) बताते हुए, मैक्वेरी ने इस प्लेटफ़ॉर्म के लिए “आउटपरफॉर्म” रेटिंग और ₹260 का प्राइस टारगेट दिया है। इसका मतलब है कि इसमें 39% की बढ़त की संभावना है, जो इन पांचों स्टॉक्स में सबसे ज़्यादा है।

मैक्वेरी का कहना है कि Groww का प्लेटफ़ॉर्म-बेस्ड अप्रोच ‘फ्लाईव्हील’ फायदे देता है, जिससे मार्केट शेयर बढ़ता है, मार्जिन बेहतर होता है और काफी कैश जेनरेट होता है।

Angel One को लेकर मैक्वेरी क्यों सतर्क है?

इन पांच स्टॉक्स में से सिर्फ Angel One ही ऐसा स्टॉक है जिसे लेकर मैक्वेरी का नजरिया तेज़ी वाला (बुलिश) नहीं है। उसने इस स्टॉक के लिए “न्यूट्रल” रेटिंग और ₹285 का प्राइस टारगेट तय किया है, जिसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से इसमें 5% की गिरावट की संभावना है।

Angel One को “ट्रांसफ़ॉर्मर” (बदलाव लाने वाला) बताते हुए – क्योंकि यह पारंपरिक “ब्रिक्स एंड मॉर्टर” ब्रोकर से “ब्रिक्स एंड क्लिक्स” ब्रोकर में बदल रहा है । मैक्वेरी ने कहा कि उसे इस स्टॉक के लिए कई चुनौतियां दिख रही हैं। इसकी वजहें हैं बढ़ता कॉम्पिटिशन, वॉल्यूम घटने पर कमाई में ज़्यादा उतार-चढ़ाव और फ्लोट इनकम का ज़्यादा हिस्सा।

इस साल अब तक BSE के शेयर 25% बढ़े हैं, जबकि Angel One के शेयर भी 26% बढ़े हैं। MCX के शेयर अब तक 53% बढ़े हैं, जबकि Groww के शेयर 21% बढ़े हैं।

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जेलर 2 में विद्या बालन का कांता के रूप में दमदार अवतार

सन पिक्चर्स ने ‘जेलर 2’ की एक झलक जारी की है , जिसमें अभिनेत्री विद्या बालन कांता के किरदार में दमदार अंदाज में नजर आ रही हैं। नीली साड़ी और हाथ में सिगरेट लिए विद्या का यह नया अवतार चर्चा में है।

अनिरुद्ध रविचंदर के बैकग्राउंड स्कोर के बीच झलक में कांता सीढ़ियों से नीचे उतरती दिखाई देती हैं। साड़ी का पल्लू संभालने का अंदाज और सिगरेट के कश लेते हुए उनका बेबाक तेवर किरदार के प्रभावशाली व्यक्तित्व की झलक देता है।

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नेल्सन दिलीपकुमार के निर्देशन में बन रही ‘जेलर 2’ में रजनीकांत एक बार फिर टाइगर मुथुवेल पांडियन के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म में राम्या कृष्णन और योगी बाबू के अलावा सूरज वेंजारामूडु, एस.जे. सूर्या और विद्या बालन भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।

सन पिक्चर्स निर्मित ‘जेलर 2’ दुनियाभर में 15 अक्टूबर 2026 को रिलीज होगी। फिल्म में विद्या बालन के कांता के रूप में परिचय ने दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी है।

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बालेन और तारिक कब आएंगे भारत?

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह और बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान अभी तक भारत नहीं आए हैं। तारिक रहमान तो भारत आने से पहले चीन की यात्रा कर आए हैं, जबकि यह अघोषित नियम था कि इन दोनों देशों के प्रधानमंत्री शपथ लेने के बाद सबसे पहले भारत की यात्रा करते हैं। य़ह परंपरा पहले मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने तोड़ी फिर नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने तोड़ी और अब तारिक रहमान ने तोड़ी है। जानकार सूत्रों का कहना है कि भारत सरकार की ओर से दोनों नेताओं के दौरे का प्रयास किया जा रहा है।

गौरतलब है कि तारिक रहमान के भारत आने का फैसला दो बार टला है। वे भारत के बुलावे पर ब्रिक्स सम्मेलन में भी नहीं आए। बांग्लादेश ने कहा कि उनको बिम्सटेक के अध्यक्ष के नाते बुलाया गया है, प्रधानमंत्री के नाते नहीं। हालांकि प्रधानमंत्री के नाते पहले बुलाया गया था तब भी वे नहीं आए। अब कहा जा रहा है कि वे नवंबर में भारत की यात्रा कर सकते हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के बारे में भी खबर है कि वे नवंबर में भारत के दौरे पर आ सकते हैं। ध्यान रहे दक्षिण एशिया में भारत के सारे पड़ोसी चीन के साथ ज्यादा दोस्ती बढ़ा रहे हैं।

ब्रिक्स में आईएफएस बनाम आईएंडबी

हाल में संपन्न हुए ब्रिक्स सम्मेलन में नई दिल्ली डिक्लेरेशन को लेकर जितनी चर्चा हुई उससे ज्यादा चर्चा तरह तरह की तस्वीरों औऱ वायरल वीडियोज को लेकर हुई। कहीं प्रधानमंत्री की नरेंद्र मोदी की वीडियो वायरल हुई, जिसमें वे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का हाथ पकड़ कर खींच रहे हैं तो कहीं बस में भाजपा नेताओं के साथ बैठे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की फोटो वायरल हुई। पहले ही दिन एक महिला पत्रकार ने विदेश मंत्रालय की ओर से पत्रकारों को दिए गए किट को खोल कर एक एक चीज की वीडियो बनाई।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के विदेशी मेहमानों के पीछे बैठ कर लगातार कुछ खाते रहने की वीडिया वायरल हुई। हालांकि पता नहीं है कि ये वीडियो सही है या एआई जेनेरेटेड है या सही है लेकिन संपादित है। आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के ऐसे रॉ वीडियो वायरल नहीं होते हैं। बताया जा रहा है कि विदेश मंत्रालय ने इस बार सूचना व प्रसारण मंत्रालय को पूरे कार्यक्रम से दूर रखा। सब कुछ विदेश सेवा के अधिकारियों की देखरेख में विदेश मंत्रालय द्वारा किया गया। तभी कई खराब ऑपटिक्स बने।

ब्रिक्स की बातों से बनेगा क्या?

ब्रिक्स को लेकर कूटनीतिक और सामरिक जानकारों की राय बंटी हुई है। एक वर्ग ऐसा है, जो मानता है कि इसकी कोई प्रासंगिकता नहीं है और इससे भारत को कुछ भी हासिल नहीं होगा। सुरजीत भल्ला जैसे आर्थिक जानकार और राजेश राजगोपालन जैसे विश्व मामलों के जानकार इस श्रेणी में आते हैं। दूसरी ओर जानकारों का एक समूह है, जो मानता है कि यह पश्चिमी दुनिया के वर्चस्व के बीच संतुलन बनाने वाला मंच है और नई दिल्ली में हुए 18वें ब्रिक्स सम्मेलन की यह बहुत बड़ी उपलब्धि है कि मौजूदा विश्व व्यवस्था के बीच एक वैकल्पिक बहुपक्षीय मंच उभरा है, जिसमें सबकी आवाज बराबर है और जो बहुत बड़े आर्थिक, राजनीतिक व सामरिक वजन वाला है। भाजपा और सरकार के लोगों के अलावा प्रतिष्ठित सामरिक विशेषज्ञ ब्रह्मा चैलानी इस राय के हैं। असल में वास्तविकता इन दोनों अतिवादी विचारों के बीच है। ब्रिक्स न तो बिल्कुल अप्रासंगिक है और न इतना प्रासंगिक है कि वह अमेरिका व यूरोप केंद्रित विश्व व्यवस्था को चुनौती दे सके या उसका विकल्प बन सके।

इस बात को समझने के लिए सबसे पहले ब्रिक्स सम्मेलन में बार बार दोहराए गए आंकड़ों की वास्तविकता समझने की जरुरत है। नई दिल्ली सम्मेलन की मेजबानी कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन आंकड़ों को कई बार दोहराया तो रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी इनका जिक्र किया। भारतीय मीडिया तो उन्हीं आंकड़ों पर खेल ही रहा है। जैसे कहा गया कि ब्रिक्स दुनिया की 50 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। यह मैटर ऑफ फैक्ट है, जिसे कोई चुनौती नहीं दे सकता। दुनिया के आठ अरब लोगों में से तीन अरब तो भारत और चीन में ही रहते हैं। लेकिन इसके बाद का जो आंकड़ा है उसे वस्तुनिष्ठ तरीके से देखने की जरुरत है। कहा गया कि ब्रिक्स देशों की जीडीपी 40 फीसदी है और जी 7 देशों की जीडीपी 29 फीसदी है। यह नहीं बताया गया कि यह आंकड़ा पीपीपी यानी परचेज पावर पैरिटी पर आधारित है। जब नॉमिनल जीडीपी यानी बाजार विनियम दर पर जीडीपी को देखते हैं तो  जी 7 देशों की जीडीपी 44 फीसदी है और ब्रिक्स की 29 फीसदी है। पीपीपी के आधार पर गणना में ब्रिक्स की जीडीपी इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि स्थानीय बाजार में कीमतें कम हैं और लोगों के जीवन यापन का खर्च भी बहुत कम है।

इन आंकड़ों का हवाला देने वाले इस सामान्य बात की भी अनदेखी कर देते हैं कि ब्रिक्स में से चीन की अर्थव्यवस्था को निकाल दें तो कुछ नहीं बचता है। अगर ब्रिक्स की ऩॉमिनल जीडीपी 30 से 35 ट्रिलियन डॉलर की है तो उसमें अकेले चीन की जीडीपी करीब 21 ट्रिलियन की है। एक आंकड़ा यह भी दिया गया कि ब्रिक्स देशों की साझा आय़ 2011 में 21.9 फीसदी थी, जो 2025 में बढ़ कर 28.9 फीसदी हो गई। यानी करीब डेढ़ दशक में इसमें सात फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन इसमें से चीन को निकाल दें तो बाकी दस देशों की साझा आय इसी अवधि में 11.9 से घट कर 11.5 फीसदी हो गई है। असल में विश्व की आय में चीन की हिस्सेदारी 2011 में 10 फीसदी थी, जो 2025 में बढ़ कर 17.4 फीसदी हुई है। जीडीपी, आय और व्यापार के आंकड़ों के बीच इस बात को भी छिपा दिया गया कि ब्रिक्स के देश आपस में सात से आठ सौ बिलियन डॉलर का कारोबार करते हैं, जबकि पश्चिमी देशों खास कर जी 7 देशों के साथ उनका व्यापार सात से आठ ट्रिलियन डॉलर का है। यानी आपसी व्यापार से दस गुने के बराबर। इसलिए आधे अधूरे आंकड़ों के आधार पर ब्रिक्स देशों को महान अर्थव्यवस्था या महान सामरिक ताकत वाला बताने की जरुरत नहीं है। उसकी असल ताकत चीन है।

ब्रिक्स देशों ने कुछ समय पहले बहुत जोर शोर से प्रचार किया था कि डॉलर का वर्चस्व खत्म करने के लिए ब्रिक्स की नई मुद्रा लाई जाएगी। कई देशों ने मिल कर चीन की मुद्रा को आपसी लेन देन का माध्यम बनाने का प्रयास भी किया था। लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति की एक घुड़की के बाद सारे प्रयास बंद हो गए। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर किसी ने कोई वैकल्पिक मुद्रा बनाने का प्रयास किया तो सौ फीसदी टैरिफ लगाएंगे। उसके बाद सारे देश पीछे हट गए। अब बात स्थानीय मुद्रा में कारोबार की हो रही है। कुल मिला कर ब्रिक्स एक ऐसा मंच है, जिस पर व्यापार की बातें हो सकती हैं और कुछ सामरिक चर्चा भी संभव है। लेकिन सभी देशों को चीन की विस्तारवादी नीतियों से सावधान रहते हुए काम करना होगा। उनको ध्यान रखना होगा कि चीन और रूस मिल कर इस मंच को अमेरिका और पश्चिमी दुनिया के विरोध में न खड़ा कर दें। इससे उन दोनों को कोई खास नुकसान नहीं होगा लेकिन बाकी देशों के लिए मुश्किल होगी। पुतिन और जिनपिंग दोनों भी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ दोस्ताना बढ़ा रहे हैं। इसी महीने जिनपिंग अमेरिका जाएंगे और नवंबर में राष्ट्रपति ट्रंप चीन का दौरा करेंगे, जहां पुतिन भी मौजूद रहेंगे।

बहरहाल, इसमें कोई संदेह नहीं है कि ब्रिक्स का नई दिल्ली में आयोजन सफल रहा। इस सफल आयोजन से भारत का वजन भी कुछ बढ़ा है लेकिन असल में क्या हासिल हुआ है या क्या हासिल होगा? ‘नई दिल्ली घोषणा’ के हवाले से कहा गया कि चीन और रूस संयुक्त राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद में सीट के लिए भारत का समर्थन करेंगे। हालांकि उसमें सिर्फ इतना लिखा हुआ है कि भारत की बड़ी भूमिका का समर्थन किया जाएगा। लेकिन सबको पता है कि 2024 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक से इतर ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों का सम्मेलन हुआ था, जिसमें यह मुद्दा उठा था और तब कहा गया था कि सुरक्षा परिषद में अफ्रीकी देशों का प्रतिनिधित्व कौन करेगा, यह तय नहीं है और इस आधार पर मामले को टाल दिया गया था। उसके पीछे चीन का हाथ था। चीन कतई नहीं चाहेगा कि भारत सुरक्षा परिषद का सदस्य बने।

चीन के साथ भारत के संबंध कैसे रहते हें इस पर भी ब्रिक्स का भविष्य टिका हुआ है। जहां तक चीन और भारत के संबंधों की बात है तो वह तीन मुद्दों से जुड़ा है। पहला, पाकिस्तान के प्रति चीन का क्या रुख रहता है। दूसरा, हिमालय में भारत व चीन के नियंत्रण वाली रेखा को लेकर उसका क्या रुख रहता है और तीसरा, व्यापार को लेकर वह भारत को छूट देता है या नहीं। गौरतलब है कि पाकिस्तान उसका ऑल वेदर फ्रेंड है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने उसकी मदद की थी। अगर उसका यही रवैया रहा तो भारत का विश्वास नहीं बहाल होगा। जहां तक सीमा की बात है तो चीन लगातार भारतीय सीमा में अतिक्रमण कर रहा है और अफसोस की बात है कि भारत सरकार उसके हिसाब से समझौते कर रही है। व्यापार के मामले में भी चीन दुर्लभ खनिज और प्रौद्योगिकी भारत को देने में हिचकता है। गौरतलब है कि भारत और चीन के व्यापार में भारत का घाटा बहुत बड़ा है। भारत के पास अपना विनिर्माण का इकोसिस्टम बहुत मजबूत नहीं है। चीन इसका फायदा उठाता है। सो, अगर चीन की शर्तों पर भारत उसके साथ संबंध रखे तब तो सारी चीजें ठीक चलेंगी, जिस दिन भारत ने अपनी शर्तें रखनी शुरू की उसी दिन से सब बिगड़ने लगेगा।

सुषमा वर्मा टीकेआर के साथ जुड़ीं, यास्तिका भाटिया की लेंगी जगह

भारत की विकेटकीपर-बल्लेबाज़ सुषमा वर्मा ने 2026 विमेंस कैरेबियन प्रीमियर लीग के नॉकआउट से पहले ट्रिनबागो नाइट राइडर्स (टीकेआर) में यास्तिका भाटिया की जगह ली है।

इस टूर्नामेंट की दूसरी सबसे ज़्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज़ यास्तिका, ऑस्ट्रेलिया ए के ख़िलाफ़ अपनी इंडिया ए की ज़िम्मेदारी के लिए समय से पहले रवाना हो रही हैं। वह 20 सितंबर से शुरू होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज़ में कप्तान हैं। इसके बाद चार दिवसीय मैच भी खेला जाएगा।

सुषमा के लिए यह शीर्ष स्तर के क्रिकेट में वापसी का मौक़ा है। वह आख़िरी बार 2023 में दक्षिण अफ़्रीका में हुई टी 20 ट्राई-सीरीज़ के दौरान राष्ट्रीय टीम का हिस्सा थीं, हालांकि उन्हें खेलने का मौक़ा नहीं मिला था। अब तक उनका एकमात्र फ़्रैंचाइज़ी अनुभव 2023 डब्ल्यूपीएल का रहा है, जब वह गुजरात जायंट्स के लिए खेली थीं। उन्होंने पांच पारियों में 79.24 के स्ट्राइक रेट से 42 रन बनाए थे।

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हाल के दिनों में सुषमा ने अपनी हिटिंग पर काफ़ी काम किया है। 2025-26 के घरेलू वनडे टूर्नामेंट में उन्होंने छह पारियों में नौ छक्के लगाए, जो टूर्नामेंट में किसी बल्लेबाज़ द्वारा लगाए गए तीसरे सबसे ज़्यादा छक्के थे।

सुषमा ने क्रिकइंफो से कहा, “डब्ल्यूसीपीएल का हिस्सा बनना मेरे लिए ख़ास है और इस मौक़े के लिए मैं नाइट राइडर्स के सेट-अप की शुक्रगुज़ार हूं। मुझे लगता है कि यह मेरे टी20 खेल पर की गई मेहनत का फल है।

सुषमा डब्ल्यूसीपीएल 2026 में खेलने वाली छठी भारतीय होंगी। उनके और यास्तिका के अलावा शिखा पांडे भी टीकेआर के साथ हैं, जबकि किरण नवगिरे, पूजा वस्त्रकर और हरलीन देओल बारबाडोस ट्राइडेंट्स के लिए खेल रही हैं।

टीकेआर ने चार टीमों वाले लीग चरण में शीर्ष पर रहने के बाद सीधे फ़ाइनल में जगह पक्की कर ली है। दूसरी फ़ाइनलिस्ट टीम का फ़ैसला ट्राइडेंट्स और गुयाना ऐमेजॉन वॉरियर्स के बीच होने वाले प्लेऑफ़ से होगा। ख़िताबी मुक़ाबला 17 सितंबर को ब्रिज़टाउन में खेला जाएगा।

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UCC Row In NDA: 2029 तक 21 राज्यों में UCC के अमित शाह के दावे को मिला JDU का चैलेंज! TDP और चिराग पासवान का भी सख्त रुख

UCC Row In NDA: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा कि 21 राज्यों की भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकारें 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करेंगी। शाह ने कहा, “तीन तलाक को समाप्त करके मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार दिए गए हैं। हमने कई राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू की है। मुझे विश्वास है कि BJP-NDA शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू कर दिया जाएगा।”

शाह ने कहा कि सरकार ने भारतीय न्याय संहिता के माध्यम से देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत किया है। साथ ही दावा किया कि कई राज्यों में एक साल में दोषसिद्धि दर में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि तीन साल के भीतर न्याय दिलाने के लिए एक व्यवस्था स्थापित की जा रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर शाह ने कहा कि आर्टिकल 370 और 35ए को बिना एक बूंद खून बहाए या एक गोली चलाए समाप्त किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पांच दशक से जारी नक्सलवाद को समाप्त किया है। देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में 14 से अधिक शांति समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

UCC पर NDA में हलचल, JDU ने किया विरोध

अमित शाह के 2029 से पहले NDA शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू किए जाने के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि वह इस मुद्दे पर जल्द ही गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे। फिर उनकी पार्टी अपना रुख तय करेगी। झा ने इस विषय पर पीटीआई से कहा कि वह जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे और उसके बाद पार्टी यूसीसी के मुद्दे पर अपना रुख तय करेगी।

बिहार में लागू नहीं होने देंगे: श्याम रजक

इस बीच, बिहार में सत्तारूढ़ राजग के प्रमुख घटक JDU के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने कहा कि पार्टी ने संसद में यूसीसी से जुड़े विधेयक का समर्थन किया था। लेकिन बिहार में इसे लागू करने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सर्वोच्च नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मुद्दे पर अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं।

बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन में सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी ने भले ही नागरिक संहिता से जुड़े विधेयक का संसद में समर्थन किया था। लेकिन वह इसे राज्य में लागू करने के पक्ष में नहीं है। JDU के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रजक ने दावा किया कि इस मुद्दे पर पार्टी का रुख सर्वोच्च नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं।

JDU विधायक दल के नेता एवं बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने भी यूसीसी पर सीधे टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी के प्रवक्ता बोलेंगे। उन्होंने कहा कि उनका पक्ष सुनने के बाद वह कुछ कहेंगे। JDU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने भी संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यूसीसी के मुद्दे पर पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत करेंगे। बिहार में भारतीय जनता पार्टी नीत राजग सरकार में JDU दूसरा सबसे बड़ा घटक है। अगला लोकसभा चुनाव 2029 में होना है।

चिराग ने भी जताया विरोध

बिहार में बीजेपी की प्रमुख सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि पहले ड्राफ्ट आए। इसमें सभी पक्षों के हित शामिल रहें। पासवान ने एक पोस्ट में लिखा, “भारत का सामाजिक ताना-बाना विविधतापूर्ण है। हर वर्ग की अपनी नागरिक परंपराएँ और रीति-रिवाज हैं। संविधान ने स्वयं इसे स्वीकार किया है। पांचवीं-छठी अनुसूची, आर्टिकल 371A व 371G, और अब तक की हर संहिता में अनुसूचित जनजातियों को दी गई छूट इसका प्रमाण है। मेरी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) समानता और विविधता- दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है। प्रारूप सार्वजनिक हो, सभी हितधारकों के हितों का अवलोकन हो, व्यापक विचार-विमर्श हो> तत्पश्चात अवलोकन उपरांत पार्टी अपना मत रखेगी।”

TDP का मिला समर्थन

लोकसभा में TDP के नेता लावू कृष्ण देवरायालु ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा, “हम इसका समर्थन करेंगे।” कृष्ण ने कहा, “अभी तो कोई चर्चा नहीं हो रही है। लेकिन जब भी हमें इसकी जरूरत महसूस होगी, हम इस पर विचार करेंगे। इसे अपनाने से पहले हम निश्चित रूप से अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को इसमें शामिल करेंगे।”

ओवैसी ने यूसीसी को लेकर शाह पर साधा निशाना

देश के 21 राज्यों में भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकारों के 2029 से पहले यूसीसी लागू करने के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल मुसलमानों को निशाना बनाना चाहता है।नउन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और शाह संविधान के आर्टिकल 25 (जो धर्म की आजादी की गारंटी देता है) और आर्टिकल 14 (जो समानता के अधिकार की गारंटी देता है) का उल्लंघन करते हुए समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।

ओवैसी ने कहा कि देश की आत्मा उसकी विविधता है। यूसीसी लागू करने का मतलब गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार द्वारा नियुक्त विधि आयोग ने यह निष्कर्ष निकाला था कि यूसीसी न तो जरूरी है और न ही वांछनीय। गोवा में यूसीसी के अलग-अलग प्रावधानों का जिक्र करते हुए, उन्होंने पूछा कि क्या शाह और भाजपा पश्चिमी राज्य में भी उसी यूसीसी को लागू करेंगे, जैसा उत्तराखंड जैसे भाजपा-शासित राज्यों में लागू है।

उन्होंने यह भी पूछा कि क्या एन. चंद्रबाबू नायडू, नीतीश कुमार और चिराग पासवान जैसे NDA नेता यूसीसी के प्रावधानों का समर्थन करेंगे। दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-चीन संबंधों में आए सुधार पर ओवैसी ने सवाल उठाया कि क्या बेहतर द्विपक्षीय संबंधों का मतलब यह है कि भारत ने भारत-चीन सीमा पर अपने गश्त करने के अधिकार खो दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को हथियार दिए थे।

‘सांप्रदायिक राजनीतिक के लिए कर रही यूसीसी का इस्तेमाल’

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा को लेकर सोमवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस मुद्दे का इस्तेमाल सांप्रदायिक और बहुसंख्यकवादी राजनीति के लिए कर रही है। माकपा ने कहा कि एकरूपता का मतलब हमेशा समानता नहीं होता और यूसीसी लागू करने की घोषणा से भाजपा का राजनीतिक इरादा स्पष्ट हो गया है।

माकपा ने आरोप लगाया कि BJP समान अधिकारों से जुड़े जटिल सवाल को सांप्रदायिक और बहुसंख्यकवादी राजनीति के हथियार में बदल रही है। अगले लोकसभा चुनाव से पहले अपने हिंदुत्व वोट बैंक को मजबूत करना चाहती है। वाम दल ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, कृषि संकट और छात्रों की समस्याओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से निपटने के बजाय भाजपा एक और विभाजनकारी अभियान चलाने को प्राथमिकता दे रही है।

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Stocks to Watch: लंबे वीकेंड बाद Nifty की एक्सपायरी; HDFC Bank, Indiabulls, Raymond समेत ये 29 शेयर फोकस में

Stocks to Watch: अधिकतर एशियाई बाजारों से कमजोर रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू मार्केट में ग्रीन शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। इस तरह लगातार पांच हफ्ते की गिरावट और लंबे वीकेंड के बाद इस हफ्ते की शुरुआत ग्रीन हो सकती है। इस हफ्ते सोमवार 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के मौके पर स्टॉक मार्केट में कारोबार बंद था जिसके चलते मार्केट आज तीन दिनों की छुट्टियों के बाद खुल रहा है। चूंकि आज निफ्टी की वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज हलचल दिख सकती है।

एक कारोबारी दिन पहले 11 सितंबर को सेंसेक्स (Sensex) 120.83 प्वाइंट्स यानी 0.16% की गिरावट के साथ 74,781.76 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 79.70 प्वाइंट्स यानी 0.34% की फिसलन के साथ 23,398.10 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

Horizon Industrial Parks Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर होरिजोन इंडस्ट्रियल पार्क्स घाटा कंसालिडेटेड लेवल पर ₹64.3 करोड़ से घटकर ₹10.3 करोड़ रह गया तो रेवेन्यू 23.1% बढ़कर ₹200.5 करोड़ पर पहुंच गया।

Lalithaa Jewellery Mart Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर ललिता ज्वैलरी मार्ट का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 21.6% गिरकर ₹208.2 करोड़ पर आ गया लेकिन रेवेन्यू 26% बढ़कर ₹6,031.2 करोड़ पर पहुंच गया।

Nova Iron & Steel Q1 (YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर नोवा आयरन एंड स्टील का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 61.1% गिरकर ₹86 लाख और रेवेन्यू 40.3% फिसलकर ₹67.5 करोड़ पर आ गया।

HDFC Bank

एचडीएफसी बैंक के बोर्ड ने अगले एमडी और सीईओ के लिए आरबीआई के पास दो नाम सैलरी स्ट्रक्चर के साथ प्राथमिकता के क्रम में भेजे हैं। इसके अलावा बोर्ड ने एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स के तौर पर वी श्रीनिवास रंगन और जिम्मी टाटा को तीन साल के लिए फिर जिम्मेदारी दी है तो बोर्ड ने पूर्णकालिक निदेशक का एक और पद बनाने को मंजूरी दी है, जिससे एमडी और सीईओ के अलावा पूर्णकालिक निदेशकों की संख्या बढ़कर चार हो गई है।

Solar Industries India

सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया की सब्सिडियरी सोलर SA इन्वेस्टमेंट्स प्रोप्राइटरी ने ओमनिया होल्डिंग्स के सभी बकाया शेयर $135.5 करोड़ (₹12,951 करोड़) में खरीदने के लिए ओमनिया होल्डिंग्स के साथ डेफिनिटिव एग्रीमेंट किया है।

KEC International

केईसी इंटरनेशनल को भारत, मिडिल ईस्ट और अमेरिका में T&D (ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन) प्रोजेक्ट के लिए ₹1,303 करोड़ के नए ऑर्डर मिले हैं। इन ऑर्डरों के साथ इस साल अब तक कंपनी को ₹7,600 करोड़ से अधिक के ऑर्डर्स मिल चुके हैं।

Indiabulls

इंडियाबुल्स ने फिनटेक क्लाउड के साथ एक डेफिनिटिव एग्रीमेंट किया है। इसके तहत कंपनी एनसीएलटी स्कीम के जरिए ₹1,050 करोड़ में फिनटेक क्लाउड में 70% हिस्सेदारी खरीदेगी।

Cochin Shipyard

कोचीन शिपयार्ड ने नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट 2026 के दौरान ड्रायडॉक्स वर्ल्ड दुबई – FZCO (DDW) के साथ एक जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट किया है।

Strides Pharma Science

अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने 2 सितंबर से 11 सितंबर, 2026 के दौरान चेन्नई के अलाथुर में स्ट्राइड्स फार्मा साइंस की फॉर्मूलेशन फैसिलिटी में रूटीन cGMP (करंट गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) इंस्पेक्शन किया और इसके बाद तीन ऑब्ज़र्वेशन के साथ फॉर्म 483 जारी किया।

Dr Reddy’s Laboratories

अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने मेक्सिको में डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज के एपीआई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के रिकॉर्ड्स का एसेसमेंट पूरा कर लिया है और दो ऑब्जर्वेशन के साथ फॉर्म FDA 2953 जारी किया है। यह एसेसमेंट 17 जुलाई से 8 सितंबर, 2026 के बीच हुआ था।

Aurobindo Pharma

अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने 7 सितंबर से 11 सितंबर, 2026 के बीच आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में अरबिंदों फार्मा की सब्सिडियरी एपिटोरिया फार्मा की API मैन्युफैक्चरिंग यूनिट (यूनिट-IV) का निरीक्षण किया, जिसमें कोई खामी नहीं मिली।

Sun Pharmaceutical Industries

सन फार्मा की तीन सब्सिडियरीज ने अमेरिका में जेनेरेकि दवाओं की प्राइसिंग से जुड़े एक कानूनी मामले में सेटलमेंट किया है। हालांकि सौदा कितने में हुआ, यह बात सामने नहीं आई है और कंपनी ने कोई गलती भी नहीं मानी है।

Jubilant Pharmova

जुबिलैंट फार्मोका की अमेरिकी यूनिट जुबिलैंट Jubilant HollisterStier LLC की वॉशिंगटन में स्थित सीएमओ फैसिलिटी की अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने 8-17 जून के बीच जांच की, जिसमें फैसिलिटी को VAI (वालंटरी एक्शन इंडिकेटेड) कैटेगरी में रखा गया यानी कि कुछ रेगुलेटरी कंसर्न मिले हैं। Jubilant HollisterStier LLC की बात करें तो यह जुबिलैंट फार्मा होल्डिंग इंक की सब्सिडियरी है जोकि जुबिलैंट फार्मोवा के पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी जुबिलैंट फार्मा की सब्सिडियरी है।

Greenply Industries

ग्रीनप्लाई इंडस्ट्रीज ने अपनी जॉइंट वेंचर ग्रीनप्लाई सैमेट के प्रस्तावित कैपिटल रीस्ट्रक्चरिंग का ऐलान किया है। इसकी शुरुआती शर्तों के तहत ज्वाइंच वेंचर पार्टनर सैमेट दो से तीन वर्षों में इसमें ₹3.0-4.0 करोड़ की अतिरिक्त पूंजी का निवेश करेगी।

Raymond

रेमंड की एयरोस्पेस सब्सिडियरी को एयरोस्पेस का एक बड़ा और नया काम मिला है। इसमें रेमंड की सब्सिडियरी को जहाज में इस्तेमाल होने वाले 300 से अधिक अलग-अलग तरह के पार्ट्स बनाने हैं और हर साल 37 हजार से अधिक पार्ट्स की जरूरत होगी। इससे कंपनी को सालाना करीब ₹33 करोड़ का रेवेन्यू मिल सकता है।

TVS Motor Company

टीवीएस मोटर कंपनी ने श्रीलंका में अपनी टीवीएस अपाचे मोटरसाइकिल रेंज को और बढ़ाया और इसमें फ्लैगशिप TVS अपाचे RR 310, TVS अपाचे RTR 310, TVS अपाचे RTR 200 4V TFT और TVS अपाचे RTR 160 4V TFT को शामिल किया।

Coforge

कोफोर्ज में डीके सिंह ने नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और NRC (नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमिटी) के चेयरपर्सन के पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। बोर्ड ने एनआरसी और एसआरसी (स्टेकहोल्डर्स रिलेशनशिप कमिटी) का फिर से गठन किया है और नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर बेथ बाउचर को एनआरसी का चेयरपर्सन नियुक्त किया है।

Piramal Finance

मूडीज रेटिंग्स ने पिरामल फाइनेंस की लॉन्ग-टर्म कॉर्पोरेट फैमिली रेटिंग (CFR) और सीनियर सिक्योर्ड डेट रेटिंग को Ba3 से बढ़ाकर Ba2 कर दिया है।

Info Edge (India)

हिमांशु अग्रवाल 17 सितंबर से इन्फो एज (इंडिया) में सीएफओ और एडिशनल डायरेक्टर के तौर पर शामिल होंगे।

HDFC Life Insurance Company

एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को मुंबई में ब्याज और पेनल्टी समेत कुल ₹3,365.15 करोड़ के जीएसटी का डिमांड नोटिस मिला है। कंपनी का कहना है कि इसका कंपनी के बिजनेस पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा और वह जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल में इसे चुनौती देगी।

WeWork India Management

वीवर्क इंडिया मैनेजमेंट ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल, बेंगलुरु से फॉर्म RSC-1 के तहत शेयर कैपिटल में प्रस्तावित कटौती की मंजूरी मांगी है। प्रस्ताव के तहत कंपनी की योजना अपने सिक्योरिटीज प्रीमियम अकाउंट में मौजूद ₹2,158.9 करोड़ के बैलेंस में से ₹2,050.16 करोड़ का इस्तेमाल करके मार्च 2026 तक के ₹2,050.16 करोड़ के घाटे को पूरी तरह खत्म करने का है।

BlackBuck

दिग्गज निवेशक सुनील सिंघानिया की कंपनी एबेकस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स ने एक्सेल इंडिया IV (मॉरीशस) से प्रति शेयर ₹576.05 के भाव पर ₹155.5 करोड़ में ब्लैकबक के 27 लाख शेयर (1.48% हिस्सेदारी) खरीदे। जून 2026 तक एक्सेल इंडिया IV की ब्लैकबक में 7.17% हिस्सेदारी (1.3 करोड़ इक्विटी शेयर) थी।

Jamna Auto Industries

जमना ऑटो इंडस्ट्रीज के प्रमोटर रणदीप सिंह जौहर और प्रदीप सिंह जौहर ने 99.95 लाख-99.95 लाख शेयर (2.5% हिस्सेदारी) ₹255.87 करोड़ में प्रति शेयर ₹128 के भाव पर बेच दिए। इनमें से 360 वन म्यूचुअल फंड और 360 वन एसेट मैनेजमेंट ने ₹127.93 करोड़ में जमना ऑटो के 99.95 लाख शेयर (2.5% हिस्सेदारी) तो डीएसपी म्यूचुअल फंड ने ₹100 करोड़ में 78.12 लाख शेयर (1.95% हिस्सेदारी) और अबूधाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी ने ₹27.93 करोड़ में 21.82 लाख शेयर (0.54% हिस्सेदारी) खरीदे हैं।

Granules India

प्रमोटर कृष्णा प्रसाद चिगुरुपति ने ग्रैन्यूल्स इंडिया में 5.36% हिस्सेदारी वाले 1.33 करोड़ इक्विटी शेयर ₹1160 करोड़ में प्रति शेयर ₹872.50 के भाव और 39.04 लाख शेयर (1.57% हिस्सेदारी) भी ₹892.84 के भाव पर ₹348.64 करोड़ में बेच दिए। कुल मिलाकर प्रमोटर ने ₹1,508.64 करोड़ के शेयर बेचे, जिससे कंपनी में उनकी हिस्सेदारी 6.94% कम हो गई। वहीं दूसरी तरफ कैपिटल ग्रुप, कोटक महिंद्रा लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, 360 वन पाइप फंड, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड, जगदीश नरेश मास्टर, मायरा वरुण रहेजा, सुंदरम म्यूचुअल फंड, बीएनपी पारिबास फाइनेंशियल मार्केट्स, बॉयंट अपॉर्चुनिटीज स्ट्रैटेजी-III, क्लैरस कैपिटल 1, एडलवाइज म्यूचुअल फंड, एमर्जिंग मार्केट्स इक्विटी फंड, फ्लोरिडा रिटायरमेंट सिस्टम, गोल्डमैन सैक्स बैंक यूरोप और ऑप्टिमिक्स होलसेल ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट्स शेयर ट्रस्ट ने ग्रैन्यूल्स इंडिया में 5.36% हिस्सेदारी खरीदी।

Sri Lotus Developers and Realty

मॉर्गन स्टेनली एशिया सिंगापुर ने मोहम्मद इरफान मोहम्मद लतीफ शेख से प्रति शेयर ₹201.75 के भाव पर ₹30.26 करोड़ श्री लोटस डेवलपर्स एंड रियल्टी के 15 लाख शेयर (0.3% हिस्सेदारी) हासिल की।

NRB Bearings

प्रमोटर एंटिटी त्रिलोचन सिंह साहनी ट्रस्ट 1 ने एनआरबी बेयरिंग्स में 0.51% हिस्सेदारी वाले 5 लाख शेयर ₹25.25 करोड़ में प्रति शेयर ₹505 के भाव पर बेचे। इनमें से 2.27 लाख शेयर ₹11.49 करोड़ में डीटी फंड ने खरीदे तो जीपी इमर्जिंग मार्केट्स स्ट्रैटेजीज एलपी ने ₹5.64 करोड़ में 1.11 लाख शेयर और यूनिवर्सिटी ऑफ नोट्रे डेम डू लैक ने ₹8.1 करोड़ में 1.6 लाख शेयर खरीदे।

Electrotherm India

रेडिएंट ग्लोबल फंड-क्लास B पार्टिसिपेटिंग शेयर्स ने 8 स्क्वायर कैपिटल से प्रति शेयर ₹951.83 के भाव पर इलेक्ट्रोथर्म (इंडिया) के अतिरिक्त 2.15 लाख (1.69% हिस्सेदारी) ₹20.53 करोड़ में खरीदे हैं। इससे पहले जून 2026 तक रेडिएंट ग्लोबल फंड-क्लास B पार्टिसिपेटिंग शेयर्स की इलेक्ट्रोथर्म में 1.41% तो 8 स्क्वायर कैपिटल की 2.32% हिस्सेदारी थी।

Pranav Constructions, Apana Logistics

प्रणव कंस्ट्रक्शंस के शेयर आज बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होंगे तो अपना लॉजिस्टिक्स के शेयरों की बीएसई एसएमई पर एंट्री होगी।

Stocks to Watch: इन पर भी रहेगी नजर

आज इन कंपनियों के आएंगे रिजल्ट: सनशाइन पिक्चर्स

एक्स-डिविडेंड: कर्नाटक बैंक, मनकसिया एल्युमीनियम कंपनी, आरती फार्मालैब्स, एजी ग्रीनपैक, अक्षरकेम इंडिया, एरो ग्रीनटेक, बेलराइज इंडस्ट्रीज, ब्लू डार्ट एक्सप्रेस, कैरीसिल, दिलीप बिल्डकॉन, फिलाटेक्स इंडिया, फ्रंटियर स्प्रिंग्स, हेक्सागोन न्यूट्रिशन, द हाई-टेक गियर्स, एचपी एडहेसिव्स, इंडिया टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन, आईटीएल इंडस्ट्रीज, IL&FS इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स, द इंडियन वुड प्रोडक्ट्स कंपनी, जे कुमार इंफ्राप्रोजेक्ट्स, कांची कर्पूरम, केएनआर कंस्ट्रक्शन्स, एनडीएल वेंचर्स, निखिल एडहेसिव्स, पोंडी ऑक्साइड्स एंड केमिकल्स, समक्रग पिस्टन्स एंड रिंग्स, सिमंड्स मार्शल, सोलेक्स एनर्जी, सुपरहाउस, सुपर टैनरी, सुरक्षा डायग्नोस्टिक, सिस्टेमैटिक्स कॉरपोरेट सर्विसेज, तिलकनगर इंडस्ट्रीज, टाइम टेक्नोप्लास्ट, टीपीएल प्लास्टेक, वेबसोल एनर्जी सिस्टम

एक्स-राइट्स: सेंचुरी एक्स्ट्रूजन्स

F&O बैन: आज बंधन बैंक, आईनॉक्स विंड, कीन्स टेक्नोलॉजी इंडिया, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, मणप्पुरम फाइनेंस, SAIL

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ब्रिक्स के लाइमलाइट से दूर रहे शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ब्रिक्स नेताओं के सम्मान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दिए गए रात्रिभोज में शामिल हुए थे। वे अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ ही बस में सवार होकर भारत मंडपम पहुंचे थे। जेपी नड्डा, ओम बिरला, निर्मला सीतारमण आदि उसी बस में थे। हालांकि उससे पहले या उसके बाद वे कहीं नहीं दिखे। अमित शाह लगभग पूरी तरह से ब्रिक्स के लाइमलाइट से दूर रहे। ब्रिक्स सम्मेलन से पहले भी बिजनेस फोरम की बैठक हो या बाद का आयोजन वे इससे दूर रहे या शामिल हुए भी तो यह प्रयास किया कि किसी तरह से उनके ऊपर फोकस नहीं बने।

ब्रिक्स सम्मेलन के दूसरे दिन यानी समापन के दिन अमित शाह दिल्ली में नहीं थे। वे तीन दिन के दौरे पर मुंबई चले गए। वहां उन्होंने सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत की। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन यानी 17 सितंबर के अवसर पर भाजपा पूरे देश में सेवा संकल्प अभियान चला रही है। सात अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे हो रहे हैं। इसलिए इस बार का अभियान खास है। इस अभियान में अमित शाह भी दूसरे किसी अन्य मंत्री की तरह शामिल हो रहे हैं और इससे भाजपा के नेताओं व कार्यकर्ताओं को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। बहरहाल, ब्रिक्स के लाइमलाइट से शाह के दूर रहने के पहले से ही इस बात की चर्चा हो रही है कि सरकार और पार्टी के कामकाज में वे पहले जैसे सक्रिय नहीं हैं।