
जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कालजयी विचार नन्हे बच्चों की असीम कल्पनाशीलता से मिलते हैं, तो नजारा कितना खूबसूरत होता है! इसका जीवंत उदाहरण आज पोदार जंबो किड्स, वैशाली नगर, इंदौर में देखने को मिला। संस्थान द्वारा दोनों महान विभूतियों की जयंती के उपलक्ष्य में एक बेहद अनूठा और प्रेरणादायक पारिवारिक उत्सव “सीड्स ऑफ पीस, हार्वेस्ट ऑफ होप” (शांति के बीज, उम्मीद की फसल) आयोजित किया गया।
इस विशेष अवसर पर पूरा स्कूल परिसर भारत की समृद्ध विरासत और संस्कृति के रंगों में सराबोर नजर आया। उत्सव की खास बात यह रही कि इसमें बच्चों के साथ उनके माता-पिता और दादा-दादी/नाना-नानी ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। खादी और सूती (कॉटन) के पारंपरिक परिधानों में सजे परिवारों ने परिसर में कदम रखते ही सादगी, देशभक्ति और आपसी सद्भाव के माहौल को महसूस किया।
किताबी ज्ञान से दूर, बच्चों को खेल-खेल में जीवन के बड़े मूल्य सिखाने के लिए कई मजेदार फैमिली चैलेंज, कहानियां और सामूहिक गतिविधियां आयोजित की गईं। इन गतिविधियों के जरिए बच्चों ने सीखा कि एक महान देश का निर्माण ईमानदारी, आपसी सम्मान, दयालुता और सेवा जैसे छोटे-छोटे प्रयासों से ही होता है।

इस आयोजन के माध्यम से जहां नन्हे बच्चों को महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के मार्ग से परिचित कराया गया, वहीं लाल बहादुर शास्त्री के प्रसिद्ध नारे “जय जवान, जय किसान” के जरिए देश की रक्षा करने वाले सैनिकों और हमारा पेट भरने वाले किसानों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करना सिखाया गया।
संस्थान की ओर से सेंटर हेड सुश्री सारिका भाटिया ने कहा: “हमारा मानना है कि संस्कार और मूल्य सिर्फ पढ़ाए नहीं, बल्कि जिए जाते हैं। ‘सीड्स ऑफ पीस, हार्वेस्ट ऑफ होप’ सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि तीन पीढ़ियों को जोड़ने वाला एक पुल था। आज अगर हम इन कोमल मनों में दया और करुणा के बीज बोएंगे, तो कल हमें एक मजबूत, संवेदनशील और शांतिपूर्ण समाज की फसल मिलेगी।”
यह उत्सव केवल एक आयोजन न रहकर एक ऐसा भावनात्मक सफर बन गया, जहां परिवारों ने मिलकर खूबसूरत यादें संजोईं। पोदार जंबो किड्स हमेशा से बच्चों को वैश्विक नागरिक बनाने के साथ-साथ अपनी भारतीय संस्कृति और जड़ों से जोड़े रखने के लिए प्रतिबद्ध रहा है।


