ईरान को सुबह धमकी दी, रात में कहा- डील साइन:ईरान से समझौते के दिन कैसे बदलता रहा ट्रम्प का मिजाज; 12 PHOTOS

अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए समझौते पर डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में साइन किए। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे। अमेरिका-ईरान की पीस डील 19 जून को स्विट्जरलैंड में होनी थी। ऐसे में किसी को भी यह अंदाजा नहीं था कि 2 दिन पहले ट्रम्प यह ऐतिहासिक फैसला करेंगे। ट्रम्प ने समझौते के दिन की शुरुआत ईरान को धमकी देने से शुरू की। उन्होंने G7 समिट के दौरान कहा कि अगर अगले 60 दिनों में समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका फिर से ईरान पर बम बरसाएगा। रात होते-होते ट्रम्प नरम पड़ गए और पीस डील पर साइन कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस समय वहां मौजूद लोगों को कुछ मिनट पहले तक इसकी जानकारी नहीं थी। ट्रम्प के ईरान को धमकी देने से लेकर पीस डील पर साइन करने से जुड़ी 12 तस्वीरें… G7 वर्किंग सेशन और प्रेस कॉन्फ्रेंस PM मोदी से मुलाकात, लुक की तारीफ की ट्रम्प वर्साय पैलेस की ओर रवाना हुए

BitCoin Crash: 8 ही महीने में 50% टूटा बिटकॉइन, इन 4 वजहों से क्रिप्टो मार्केट में हाहाकार

BitCoin Crash: क्रिप्टो मार्केट में हाहाकार अब भी मचा हुआ है। मार्केट कैप के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टो बिटकॉइन रिकॉर्ड हाई से करीब 50% नीचे आ चुका है। बाकी भी क्रिप्टो की हालत अच्छी नहीं है और अधिकतर क्रिप्टो अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। बिटकॉइन की बात करें तो 7 अक्टूबर 2025 को $1.26 लाख के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के करीब आठ महीने में यह करीब 50% टूटकर $64 हजार के नीचे आ गया। सिर्फ यही नहीं, इस महीने तो यह $60 हजार के मनोवैज्ञानिक स्तर को भी नीचे की तरफ तोड़ दिया था जो इसके लिए पिछले डेढ़ साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

BitCoin Crash: इन 4 वजहों से मचा हाहाकार

अमेरिकी नीतियों के सपोर्ट से बदलकर झटका देने वाले में बदलाव

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की क्रिप्टो समर्थक नीतियों ने बिटकॉइन समेत अन्य क्रिप्टोकरेंसीज की चमक बढ़ा दी थी और संस्थागत निवेशकों ने जमकर पैसा डाला। हालांकि टैरिफ वार और अमेरिका की ईरान से जंग ने निवेशकों को डरा दिया और वे क्रिप्टो जैसे रिस्की एसेट्स से पैसे निकालकर सेफ एसेट्स में पैसे डालने लगे।

बिटकॉइन के सबसे बड़े निवेशकों में शुमार माइकल का बेयरेश रुझान

माइकल सायलर (Michael Saylor) ने साल 2020 में अपनी कंपनी स्ट्रैटेजी की नकदी का बड़ा हिस्सा बिटकॉइन में निवेश करना शुरू किया और स्ट्रैटेजी ने इसके बाद लगातार बिटकॉइन खरीदना जारी रखा और यह दुनिया के सबसे बड़े कॉरपोरेट बिटकॉइन होल्डर कंपनियों में शामिल हो गई। हालांकि ‘स्ट्रैटेजी’ ने साल 2022 के बाद से पहली बार अपनी होल्डिंग का कुछ हिस्सा बेचा तो हड़कंप मच गया। कुछ हफ्ते पहले उन्होंने $25 लाख के 32 बिटकॉइन बेचे तो बिटकॉइन टूटकर $72 हजार के नीचे आ गया था। इससे पहले स्ट्रैटेजी ने साल 2022 में 704 बिटकॉइन %$18 हजार के भाव पर बेचे थे।

SpaceX का जादू

हाल ही में स्पेसएक्स ने दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ पेश किया था। एआई पर इसकी आक्रामक स्ट्रैटेजी ने निवेशकों को आकर्षित किया और इसके चलते अनुमान लगाया जा रहा है कि क्रिप्टो मार्केट का भी कुछ पैसा इसमें आया। स्पेसएक्स ने दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क (Elon Musk) को और अमीर बनाया और दुनिया के पहले और इकलौते ट्रिलेनियर बन गए।

BitCoin ETF से ताबड़तोड़ निकासी

पिछले महीने बिटकॉइन ईटीएफ से $200 करोड़ से अधिक यानी करीब ₹16 हजार करोड़ की निकासी ने क्रिप्टो मार्केट पर दबाव डाला।

SpaceX ने Elon Musk को बनाया ट्रिलेनियर, लेकिन अब लटकी यह तलवार

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि क्रिप्टो मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Insight : बाजार अब नई तेजी के लिए तैयार, PSU बैंक,ऑटो,रियल एस्टेट और NBFCs अभी भी सबसे मजबूत सेक्टर

Market Insight : बाजार की आगे की चाल पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि पिछले सोमवार के निचले स्तर से हम निफ्टी में 1000 अंक ऊपर हैं। बैंक निफ्टी में करीब 3500-4000 अंक की रैली आ चुकी है। बैंक निफ्टी पर 52,800 से हमारा लॉन्ग नजरिया रहा है। पिछले सोमवार भी पैनिक ना करने की सलाह थी। अब यहां से 2 बड़े सवाल हैं। पहला– अगर लॉन्ग पोजिशन है तो क्या करें? दूसरा– अगर मैंने रैली मिस कर दी तो क्या करूं?

पहले सवाल का जवाब आसान है, अपने SL को ट्रेल कर लीजिए। अगर आप शुरू से लॉन्ग हैं तो पिछले सोमवार के निचले स्तर का ही SL रखें। लेकिन अगर आप स्विंग लॉन्ग में हैं तो 23,950 और 57,200 का SL रखें। बाजार में शायद एक नई और बड़ी वाली तेजी की शुरुआत हुई है। बाजार ने बहुत कुछ झेला और काफी मजबूती दिखाई है। सिर्फ मानसून का एक निगेटिव फैक्टर बचा है,शायद उसे भी हम पचा लें।

US-ईरान डील साइन

US और ईरान ने अलग-अलग जगह से डील पर साइन कर दिए हैं। डॉनल्ड ट्रंप ने साइन करके कहा, ये आसान नहीं था। US अधिकारियों ने कन्फर्म किया कि MoU अब प्रभावी हो गया है। मीडिया के पास मौजूद MoU ड्राफ्ट के मुताबिक होर्मूज ‘तेजी से’फिर से खुलेगा। ईरान के न्यूक्लियर मुद्दे और आगे के फाइनेंशियल फायदे की आगे बातचीत होगी। अभी ये साफ नहीं है कि होर्मूज पूरी तरह खुल गया है या नहीं। JD वेंस और ईरान संसद स्पीकर गालिबाफ शुक्रवार को औपचारिक रूप से डील पर साइन करेंगे।

फेड का फैसला

US फेड ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। US फेड ने दर 3.50%-3.75% की रेंज में बरकरार रखी है। फेड ने लगातार चौथी बार दरों को स्थिर रखा है। केविन वार्श की पहली फेड बैठक मीटिंग में साफ हॉकिश बदलाव दिखा है। फेड ने महंगाई का अनुमान बढ़ाया और ईजिंग बॉयस को हटा दिया है। फेड का डॉट प्लॉट सीमित हुआ है। अब 9 सदस्यों ने 2026 में रेट हाइक का अनुमान लगाया है।

बाजार ने दिया जोरदार रिएक्शन

2 साल की US बॉन्ड यील्ड्स 13 Bps उछली है। मनी मार्केट अब अक्टूबर तक रेट हाइक को पूरी तरह से पचा चुके हैं। फेड के बाद US डॉलर में उछाल आया, यह 100.40 पर पहुंच गया। US बाजारों में गिरावट आई,नैस्डेक 1.3% और S&P 1.2% गिरा। मगर US फ्यूचर्स में वापस रैली हुई है। सोने-चांदी में दबाव दिखा है। सोना $4250 और सिल्वर $68 के नीचे फिसली है। कच्चे तेल में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है। ब्रेंट $78 पर है।

आज के संकेत

आज सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी का दिन है। बाजार में मोमेंटम काफी मजबूत है। कल हम दिन के हाई पर बंद हुए और बैंक निफ्टी ने लीड किया।

बाजार: क्या ये नई तेजी की शुरुआत है?

निफ्टी ने 26,300 पर डबल टॉप बनाया था। सितंबर 2024 और जनवरी 2026 में हम करीब 26,300 तक गए थे। मगर मजे की बात ये कि दोनों बार करेक्शन में बॉटम एक ही रहा। मार्च 2025 में भी और मार्च 2026 में भी बॉटम बना। यहां से वापस 26,300 का रास्ता खुला है। बाजार ने इतनी बड़ी FII बिकवाली के बावजूद अपने लो नहीं तोड़े हैं। अब यहां से बाजार को अर्निंग्स में फेवरेबल बेस इफेक्ट मिलेगा। हो सकता है Q1 में कुछ दिक्कत आए क्योंकि ब्रेंट $100 के ऊपर रहा। मगर बाजार अब इस फैक्टर को पचा चुका है।

Q2 से नतीजों में तेज रिकवरी की उम्मीद रहेगी, क्योंकि बेस इफेक्ट अब हमारे फेवर में काम करेगा। FIIs की बिकवाली भी काफी हद तक हो चुकी है। अगर बाजार में मोमेंटम आया तो खरीदारी भी आ सकती है। ऐसा नहीं है कि इन 2 सालों में बाजार पूरा निगेटिव रहा। इन 2 सालों में भी चुनिंदा शेयरों में 50-200% रिटर्न मिले हैं। यहां से शायद वापस एक ब्रॉड बेस्ड रैली की भी शुरुआत हो सकती है।

निफ्टी में जल्द हासिल हो सकते हैं 24250-24400 के टारगेट, इस शेयर में दिख रहा दमदार कमाई का मौका

बाजार: क्या हो रणनीति?

बाजार में अपनी रणनीति को अब थोड़ा बदलना होगा। यह बाजार डे ट्रेडर से ज्यादा पोजिशनल ट्रेडर को रिवॉर्ड कर रहा है। हर घंटे के हर 100 अंक के मूव पकड़ने का लालच मत रखिए। बड़ा ट्रेंड पकड़िए और उसके साथ बने रहिए। पूरे मार्च में हमने निगेटिव नजरिया रखा और प्ले भी किया। पूरे अप्रैल में पॉजिटिव नजरिया लिया और स्टॉक स्पेसिफिक नजरिया रखा। मई में लगातार दोनों तरफ के मौके ढूंढे गए और जून में लगातार सिर्फ पॉजिटिव नजरिया रहा है। अपने फायदे वाले सौदों को पकड़ के रखिए और SL के साथ कैरी कीजिए। हर 5% के मूव पर अपने ट्रेलिंग SL को ऊपर ले आएं।

PSU बैंक,ऑटो,रियल एस्टेट,NBFCs अभी भी सबसे मजबूत हैं। इसके अलावा IT में भी अब डबल बॉटम के संकेत मिले हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप में एक अलग ही बुल मार्केट चल रही है। अभी भी काफी अच्छे शेयर 200 DMA के आसपास मिल जाएंगे। पोर्टफोलियो में से अपने बड़े अंडरपरफॉर्मर्स को अब हटाइए।

निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट जोन 23,950-24,000 पर और बड़ा सपोर्ट जोन 23,800-23,850 पर है। मौजूदा लॉन्ग सौदों के लिए 23,950 का क्लोजिंग और 23,850 का इंट्राडे SL रखें। नए लॉन्ग सौदों के लिए खरीदारी का सबसे अच्छा जोन 23,950-24,050 है। SL 23,850 पर रखें। निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 24,100-24,150 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 24,200-24,250 पर है। अगर निफ्टी 24,250 पार हो तो SL ट्रेल करके 24,100 पर लाएं। फिलहाल निफ्टी में कोई बिकवाली का ट्रेड नहीं है।

बैंक निफ्टी पर स्ट्रैटेजी

बैंक निफ्टी में हमारा एकतरफा पॉजिटिव नजरिया रहा है। 52,800 से सिर्फ लॉन्ग रहने की सलाह रही है और हर रैली पर स्टॉप लॉस को ऊपर लाया गया है। कल तक ट्रेलिंग स्टॉप लॉस 56,800 पर था। अब क्लोजिंग बेसिस पर 57,200 और इंट्राडे में 57,000 का SL रखें। 57,200-57,400 तक की कोई भी गिरावट में खरीदारी करें,SL 57,000 पर रखें।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

West Bengal News Update: ‘ये राम राज्य है…’; हाथों में हथकड़ी और कमर में रस्सी… पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद TMC के बाहुबलियों का सरेआम निकाला जुलूस

West Bengal News Update: तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान को छुड़ाने के लिए पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा थाने पर धावा बोलने का प्रयास करने के आरोप में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पश्चिम बंगाल पुलिस ने 9 दिन पहले जहांगीर खान को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें उनके गढ़ फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में तीन बार घुमाया गया। इसके जवाब में, खान के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किए और TMC नेता को छुड़ाने के लिए पुलिस स्टेशन पर धावा बोलने की कोशिश भी की।

जहांगीर खान अकेले ऐसे नेता नहीं हैं जिन्हें गिरफ्तारी के बाद घुमाया गया है। पश्चिम बंगाल में बदलते राजनीतिक माहौल के बीच, कई TMC नेताओं और उनके साथियों को पुलिस या पैरामिलिट्री फ़ोर्स ने उनके गढ़ों में सबके सामने घुमाया है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, इनमें से कुछ TMC नेताओं को सिर्फ़ अंडरवियर पहने, हथकड़ी और कमर पर बंधी रस्सी के साथ देखा गया। कुछ वायरल वीडियो में नेताओं को उकड़ू बैठकर कान पकड़े और सबके सामने माफी मांगते हुए घुमाया जा रहा था।

‘जानबूझकर बदनाम या अपमानित न करे’

इस तरह सबके सामने घुमाए जाने की एक घटना के बाद, कलकत्ता हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने इस घटना पर नाराज़गी जताई। अदालत ने राज्य सरकार से उन हालात और कानूनी प्रावधानों के बारे में रिपोर्ट मांगी जिनके तहत ऐसा हुआ। कोर्ट ने माना कि कानून के मुताबिक लोगों को गिरफ़्तार किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उन्हें जानबूझकर बदनाम या सबके सामने अपमानित नहीं किया जा सकता।

अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए पुलिस ने कहा कि यह पूरी तरह से जांच से जुड़ा था। इसका मकसद अपराध वाली जगह पर घटना को फिर से दोहराकर देखना (reconstruction of crime scenes) था। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सीनियर IPS अधिकारी ने कहा कि पुलिस बहुत ही नाजुक स्थिति में काम कर रही थी।

TMC ने ‘मानवाधिकारों के उल्लंघन’ का आरोप लगाया, BJP ने इसे ‘राम राज्य’ बताया

इस बीच, TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी अपने नेताओं को सबके सामने घुमाने के कथित मामले को लेकर पुलिस के ख़िलाफ कानूनी कार्रवाई करने की योजना बना रही है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए उन्होंने कहा, “यह आर्टिकल 21 का पूरी तरह से उल्लंघन और मानवाधिकारों का हनन है।”

वहीं, हावड़ा उत्तर से बीजेपी विधायक उमेश राय ने एक जनसभा में टीएमसी के आकाश सिंह की गिरफ्तारी पर कहा, “एक समय था जब वह 100 बाइकों के काफिले के साथ सड़कों पर घूमता था और लोगों को डराता-धमकाता था। आज उसी आदमी को कमर में रस्सी बांधकर घुमाया जा रहा है। असली राम राज्य ऐसा ही होता है।”

किन-किन TMC नेताओं को घुमाया गया?

आकाश सिंह

बीजेपी सरकार के सत्ता संभालने के चार दिन बाद 13 मई को हावड़ा की गोलाबाड़ी पुलिस ने आकाश सिंह को गिरफ्तार किया। फिर उसका सिर मुंडवाकर सिर्फ बनियान और अंडरवियर पहनाकर इलाके में घुमाया। स्थानीय स्तर पर ‘नॉर्थ हावड़ा के डॉन’ के तौर पर पहचाने जाने वाले आकाश पर लगभग 20 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें पुलिस पर गोली चलाने और एक सब-इंस्पेक्टर को घायल करने, 2021 के बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान बम हमले करने, जबरन वसूली और हत्या की कोशिश जैसे आरोप शामिल हैं।

अभिजीत रॉय

उत्तर 24 परगना के कांचरापाड़ा के रहने वाले स्थानीय TMC युवा नेता रॉय को 28 मई को अरेस्ट किया गया था। इसके बाद उन्हें कमर में रस्सी बांधकर इलाके में घुमाया गया। उस समय वहां भारी भीड़ जमा थी और लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। पुलिस के मुताबिक, रॉय पर बिजपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज जबरन वसूली के एक मामले में आरोप है।

साथ ही, उन पर म्युनिसिपल सफाई कर्मचारियों के लिए बनी प्लास्टिक की बाल्टियों समेत अन्य सामानों का गैर-कानूनी तरीके से स्टॉक करने और उन्हें दोबारा बेचने का भी आरोप है। पुलिस ने बताया कि BJP के सत्ता में आने के बाद रॉय छिप गए थे। आखिरकार उन्हें पूर्वी मिदनापुर के मंदारमणि से गिरफ्तार किया गया।

जहांगीर खान

फाल्टा और डायमंड हार्बर में TMC के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले जहांगीर खान ने बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान एक पुलिस अधिकारी के साथ सार्वजनिक टकराव के बाद पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। फाल्टा से तत्कालीन TMC उम्मीदवार ने एक आक्रामक बयान में खुद की तुलना ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘पुष्पा’ के मुख्य किरदार से करते हुए कहा था कि वह कभी किसी के सामने नहीं झुकेंगा।

फाल्टा एकमात्र विधानसभा क्षेत्र था जहां दोबारा मतदान (री-पोल) हुआ था। हालांकि, जब तक मतदान हुआ, पश्चिम बंगाल का राजनीतिक माहौल बदल चुका था। खान ने चुनाव से हटकर TMC को चौंका दिया था। इसके बाद पार्टी में हुई फूट के दौरान कई नेताओं ने खान के प्रति नेतृत्व के नरम रवैये को अपनी नाराजगी की एक वजह बताया था। शुरुआत में डकैती और हत्या की कोशिश के मामलों में नाम आने के बाद, खान पर जबरन वसूली और अन्य आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए।

गिरफ्तारी के बाद खान को तीन अलग-अलग मौकों पर फाल्टा में घुमाया गया था। एक वायरल वीडियो में उन्हें पुलिस की निगरानी में अपने कान पकड़कर सबके सामने माफी मांगते हुए देखा गया। पुलिस का कहना है कि यह सब क्राइम सीन को फिर से समझने (रीकंस्ट्रक्शन) के लिए किया गया था। साथ ही दावा किया कि खान ने खुद ही अपने कान पकड़े, उठक-बैठक की और जनता से माफ़ी मांगी।

गुड्डू अंसारी

उत्तर 24 परगना के कमारहाटी के एक जाने-माने स्थानीय नेता, अंसारी को वरिष्ठ TMC नेता और कमारहाटी के विधायक मदन मित्रा का करीबी सहयोगी माना जाता था। मित्रा उन पार्टी नेताओं में से एक थे जो पार्टी में बंटवारे के बाद भी ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहे। अंसारी को 31 मई को गिरफ्तार किया गया और बाद में हथकड़ी पहनाकर कमारहाटी में घुमाया गया।

पुलिस का आरोप है कि अंसारी अलग-अलग तरह के कारोबार में कई सिंडिकेट चलाते थे। वह इलाके पर अपना दबदबा बनाए रखने के लिए हथियारों के दम पर लोगों को डराते-धमकाते थे। बेलघरिया पुलिस के एक अधिकारी ने इस तरह सबके सामने घुमाने का बचाव करते हुए कहा कि इसका मकसद अपराधियों को कड़ी चेतावनी देना था।

शमीम अहमद

‘गब्बर’ के नाम से पहचाने जाने वाले अहमद, शिबपुर में वार्ड नंबर 36 के अध्यक्ष हैं। उन्हें TMC के एक पूर्व मंत्री का करीबी माना जाता है। उनकी पत्नी, शमीमा बानू, पहले इसी वार्ड से पार्षद रह चुकी हैं। अहमद को 21 मई को मुंबई के चेंबूर से गिरफ्तार किया गया और बाद में कोलकाता पुलिस उन्हें दक्षिण हावड़ा के संकराइल में भीड़-भाड़ वाले बाज़ार में कमर से रस्सी बांधकर घुमाती हुई ले गई। पुलिस ने उन पर 7 मई को हावड़ा माइनॉरिटी सेल के अध्यक्ष सिकंदर खान के नेतृत्व में BJP की जीत के बाद निकाली गई रैली पर हमले में शामिल होने का आरोप लगाया है। इस हमले में तीन लोग घायल हो गए थे।

शाहिन मोल्ला

शाहिन मोल्ला उर्फ ​​सनी एक ट्रैफिक होम गार्ड थे। उन्हें TMC के एक पूर्व मंत्री से करीबी होने के कारण दक्षिण हावड़ा में प्रभावशाली माना जाता था। उन्हें संकराइल पुलिस ने 23 मई को करोड़ों रुपये की कथित रंगदारी (एक्सटॉर्शन) रैकेट के मामले में अरेस्ट किया। गिरफ्तारी के बाद सेंट्रल फ़ोर्स और संकराइल पुलिस के जवान उन्हें कमर से रस्सी बांधकर सेंट्रल हावड़ा के चौरा बस्ती इलाके से पैदल ले गए। बंगाल पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई जांच के सिलसिले में की गई थी।

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West Bengal News Update: ‘ये राम राज्य है…’; हाथों में हथकड़ी और कमर में रस्सी… पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद TMC के बाहुबलियों का सरेआम निकाला जुलूस

West Bengal News Update: तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान को छुड़ाने के लिए पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा थाने पर धावा बोलने का प्रयास करने के आरोप में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पश्चिम बंगाल पुलिस ने 9 दिन पहले जहांगीर खान को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें उनके गढ़ फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में तीन बार घुमाया गया। इसके जवाब में, खान के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किए और TMC नेता को छुड़ाने के लिए पुलिस स्टेशन पर धावा बोलने की कोशिश भी की।

जहांगीर खान अकेले ऐसे नेता नहीं हैं जिन्हें गिरफ्तारी के बाद घुमाया गया है। पश्चिम बंगाल में बदलते राजनीतिक माहौल के बीच, कई TMC नेताओं और उनके साथियों को पुलिस या पैरामिलिट्री फ़ोर्स ने उनके गढ़ों में सबके सामने घुमाया है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, इनमें से कुछ TMC नेताओं को सिर्फ़ अंडरवियर पहने, हथकड़ी और कमर पर बंधी रस्सी के साथ देखा गया। कुछ वायरल वीडियो में नेताओं को उकड़ू बैठकर कान पकड़े और सबके सामने माफी मांगते हुए घुमाया जा रहा था।

‘जानबूझकर बदनाम या अपमानित न करे’

इस तरह सबके सामने घुमाए जाने की एक घटना के बाद, कलकत्ता हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने इस घटना पर नाराज़गी जताई। अदालत ने राज्य सरकार से उन हालात और कानूनी प्रावधानों के बारे में रिपोर्ट मांगी जिनके तहत ऐसा हुआ। कोर्ट ने माना कि कानून के मुताबिक लोगों को गिरफ़्तार किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उन्हें जानबूझकर बदनाम या सबके सामने अपमानित नहीं किया जा सकता।

अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए पुलिस ने कहा कि यह पूरी तरह से जांच से जुड़ा था। इसका मकसद अपराध वाली जगह पर घटना को फिर से दोहराकर देखना (reconstruction of crime scenes) था। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सीनियर IPS अधिकारी ने कहा कि पुलिस बहुत ही नाजुक स्थिति में काम कर रही थी।

TMC ने ‘मानवाधिकारों के उल्लंघन’ का आरोप लगाया, BJP ने इसे ‘राम राज्य’ बताया

इस बीच, TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी अपने नेताओं को सबके सामने घुमाने के कथित मामले को लेकर पुलिस के ख़िलाफ कानूनी कार्रवाई करने की योजना बना रही है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए उन्होंने कहा, “यह आर्टिकल 21 का पूरी तरह से उल्लंघन और मानवाधिकारों का हनन है।”

वहीं, हावड़ा उत्तर से बीजेपी विधायक उमेश राय ने एक जनसभा में टीएमसी के आकाश सिंह की गिरफ्तारी पर कहा, “एक समय था जब वह 100 बाइकों के काफिले के साथ सड़कों पर घूमता था और लोगों को डराता-धमकाता था। आज उसी आदमी को कमर में रस्सी बांधकर घुमाया जा रहा है। असली राम राज्य ऐसा ही होता है।”

किन-किन TMC नेताओं को घुमाया गया?

आकाश सिंह

बीजेपी सरकार के सत्ता संभालने के चार दिन बाद 13 मई को हावड़ा की गोलाबाड़ी पुलिस ने आकाश सिंह को गिरफ्तार किया। फिर उसका सिर मुंडवाकर सिर्फ बनियान और अंडरवियर पहनाकर इलाके में घुमाया। स्थानीय स्तर पर ‘नॉर्थ हावड़ा के डॉन’ के तौर पर पहचाने जाने वाले आकाश पर लगभग 20 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें पुलिस पर गोली चलाने और एक सब-इंस्पेक्टर को घायल करने, 2021 के बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान बम हमले करने, जबरन वसूली और हत्या की कोशिश जैसे आरोप शामिल हैं।

अभिजीत रॉय

उत्तर 24 परगना के कांचरापाड़ा के रहने वाले स्थानीय TMC युवा नेता रॉय को 28 मई को अरेस्ट किया गया था। इसके बाद उन्हें कमर में रस्सी बांधकर इलाके में घुमाया गया। उस समय वहां भारी भीड़ जमा थी और लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। पुलिस के मुताबिक, रॉय पर बिजपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज जबरन वसूली के एक मामले में आरोप है।

साथ ही, उन पर म्युनिसिपल सफाई कर्मचारियों के लिए बनी प्लास्टिक की बाल्टियों समेत अन्य सामानों का गैर-कानूनी तरीके से स्टॉक करने और उन्हें दोबारा बेचने का भी आरोप है। पुलिस ने बताया कि BJP के सत्ता में आने के बाद रॉय छिप गए थे। आखिरकार उन्हें पूर्वी मिदनापुर के मंदारमणि से गिरफ्तार किया गया।

जहांगीर खान

फाल्टा और डायमंड हार्बर में TMC के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले जहांगीर खान ने बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान एक पुलिस अधिकारी के साथ सार्वजनिक टकराव के बाद पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। फाल्टा से तत्कालीन TMC उम्मीदवार ने एक आक्रामक बयान में खुद की तुलना ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘पुष्पा’ के मुख्य किरदार से करते हुए कहा था कि वह कभी किसी के सामने नहीं झुकेंगा।

फाल्टा एकमात्र विधानसभा क्षेत्र था जहां दोबारा मतदान (री-पोल) हुआ था। हालांकि, जब तक मतदान हुआ, पश्चिम बंगाल का राजनीतिक माहौल बदल चुका था। खान ने चुनाव से हटकर TMC को चौंका दिया था। इसके बाद पार्टी में हुई फूट के दौरान कई नेताओं ने खान के प्रति नेतृत्व के नरम रवैये को अपनी नाराजगी की एक वजह बताया था। शुरुआत में डकैती और हत्या की कोशिश के मामलों में नाम आने के बाद, खान पर जबरन वसूली और अन्य आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए।

गिरफ्तारी के बाद खान को तीन अलग-अलग मौकों पर फाल्टा में घुमाया गया था। एक वायरल वीडियो में उन्हें पुलिस की निगरानी में अपने कान पकड़कर सबके सामने माफी मांगते हुए देखा गया। पुलिस का कहना है कि यह सब क्राइम सीन को फिर से समझने (रीकंस्ट्रक्शन) के लिए किया गया था। साथ ही दावा किया कि खान ने खुद ही अपने कान पकड़े, उठक-बैठक की और जनता से माफ़ी मांगी।

गुड्डू अंसारी

उत्तर 24 परगना के कमारहाटी के एक जाने-माने स्थानीय नेता, अंसारी को वरिष्ठ TMC नेता और कमारहाटी के विधायक मदन मित्रा का करीबी सहयोगी माना जाता था। मित्रा उन पार्टी नेताओं में से एक थे जो पार्टी में बंटवारे के बाद भी ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहे। अंसारी को 31 मई को गिरफ्तार किया गया और बाद में हथकड़ी पहनाकर कमारहाटी में घुमाया गया।

पुलिस का आरोप है कि अंसारी अलग-अलग तरह के कारोबार में कई सिंडिकेट चलाते थे। वह इलाके पर अपना दबदबा बनाए रखने के लिए हथियारों के दम पर लोगों को डराते-धमकाते थे। बेलघरिया पुलिस के एक अधिकारी ने इस तरह सबके सामने घुमाने का बचाव करते हुए कहा कि इसका मकसद अपराधियों को कड़ी चेतावनी देना था।

शमीम अहमद

‘गब्बर’ के नाम से पहचाने जाने वाले अहमद, शिबपुर में वार्ड नंबर 36 के अध्यक्ष हैं। उन्हें TMC के एक पूर्व मंत्री का करीबी माना जाता है। उनकी पत्नी, शमीमा बानू, पहले इसी वार्ड से पार्षद रह चुकी हैं। अहमद को 21 मई को मुंबई के चेंबूर से गिरफ्तार किया गया और बाद में कोलकाता पुलिस उन्हें दक्षिण हावड़ा के संकराइल में भीड़-भाड़ वाले बाज़ार में कमर से रस्सी बांधकर घुमाती हुई ले गई। पुलिस ने उन पर 7 मई को हावड़ा माइनॉरिटी सेल के अध्यक्ष सिकंदर खान के नेतृत्व में BJP की जीत के बाद निकाली गई रैली पर हमले में शामिल होने का आरोप लगाया है। इस हमले में तीन लोग घायल हो गए थे।

शाहिन मोल्ला

शाहिन मोल्ला उर्फ ​​सनी एक ट्रैफिक होम गार्ड थे। उन्हें TMC के एक पूर्व मंत्री से करीबी होने के कारण दक्षिण हावड़ा में प्रभावशाली माना जाता था। उन्हें संकराइल पुलिस ने 23 मई को करोड़ों रुपये की कथित रंगदारी (एक्सटॉर्शन) रैकेट के मामले में अरेस्ट किया। गिरफ्तारी के बाद सेंट्रल फ़ोर्स और संकराइल पुलिस के जवान उन्हें कमर से रस्सी बांधकर सेंट्रल हावड़ा के चौरा बस्ती इलाके से पैदल ले गए। बंगाल पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई जांच के सिलसिले में की गई थी।

ये भी पढ़ें- US-Iran Peace Deal: होर्मुज और 300 अरब डॉलर की फंडिंग से लेकर और परमाणु हथियार तक…अमेरिका-ईरान MoU के 14 पॉइंट्स में क्या-क्या है?

West Bengal News Update: ‘ये राम राज्य है…’; हाथों में हथकड़ी और कमर में रस्सी… पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद TMC के बाहुबलियों का सरेआम निकाला जुलूस

West Bengal News Update: तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान को छुड़ाने के लिए पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा थाने पर धावा बोलने का प्रयास करने के आरोप में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पश्चिम बंगाल पुलिस ने 9 दिन पहले जहांगीर खान को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें उनके गढ़ फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में तीन बार घुमाया गया। इसके जवाब में, खान के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किए और TMC नेता को छुड़ाने के लिए पुलिस स्टेशन पर धावा बोलने की कोशिश भी की।

जहांगीर खान अकेले ऐसे नेता नहीं हैं जिन्हें गिरफ्तारी के बाद घुमाया गया है। पश्चिम बंगाल में बदलते राजनीतिक माहौल के बीच, कई TMC नेताओं और उनके साथियों को पुलिस या पैरामिलिट्री फ़ोर्स ने उनके गढ़ों में सबके सामने घुमाया है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, इनमें से कुछ TMC नेताओं को सिर्फ़ अंडरवियर पहने, हथकड़ी और कमर पर बंधी रस्सी के साथ देखा गया। कुछ वायरल वीडियो में नेताओं को उकड़ू बैठकर कान पकड़े और सबके सामने माफी मांगते हुए घुमाया जा रहा था।

‘जानबूझकर बदनाम या अपमानित न करे’

इस तरह सबके सामने घुमाए जाने की एक घटना के बाद, कलकत्ता हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने इस घटना पर नाराज़गी जताई। अदालत ने राज्य सरकार से उन हालात और कानूनी प्रावधानों के बारे में रिपोर्ट मांगी जिनके तहत ऐसा हुआ। कोर्ट ने माना कि कानून के मुताबिक लोगों को गिरफ़्तार किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उन्हें जानबूझकर बदनाम या सबके सामने अपमानित नहीं किया जा सकता।

अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए पुलिस ने कहा कि यह पूरी तरह से जांच से जुड़ा था। इसका मकसद अपराध वाली जगह पर घटना को फिर से दोहराकर देखना (reconstruction of crime scenes) था। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सीनियर IPS अधिकारी ने कहा कि पुलिस बहुत ही नाजुक स्थिति में काम कर रही थी।

TMC ने ‘मानवाधिकारों के उल्लंघन’ का आरोप लगाया, BJP ने इसे ‘राम राज्य’ बताया

इस बीच, TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी अपने नेताओं को सबके सामने घुमाने के कथित मामले को लेकर पुलिस के ख़िलाफ कानूनी कार्रवाई करने की योजना बना रही है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए उन्होंने कहा, “यह आर्टिकल 21 का पूरी तरह से उल्लंघन और मानवाधिकारों का हनन है।”

वहीं, हावड़ा उत्तर से बीजेपी विधायक उमेश राय ने एक जनसभा में टीएमसी के आकाश सिंह की गिरफ्तारी पर कहा, “एक समय था जब वह 100 बाइकों के काफिले के साथ सड़कों पर घूमता था और लोगों को डराता-धमकाता था। आज उसी आदमी को कमर में रस्सी बांधकर घुमाया जा रहा है। असली राम राज्य ऐसा ही होता है।”

किन-किन TMC नेताओं को घुमाया गया?

आकाश सिंह

बीजेपी सरकार के सत्ता संभालने के चार दिन बाद 13 मई को हावड़ा की गोलाबाड़ी पुलिस ने आकाश सिंह को गिरफ्तार किया। फिर उसका सिर मुंडवाकर सिर्फ बनियान और अंडरवियर पहनाकर इलाके में घुमाया। स्थानीय स्तर पर ‘नॉर्थ हावड़ा के डॉन’ के तौर पर पहचाने जाने वाले आकाश पर लगभग 20 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें पुलिस पर गोली चलाने और एक सब-इंस्पेक्टर को घायल करने, 2021 के बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान बम हमले करने, जबरन वसूली और हत्या की कोशिश जैसे आरोप शामिल हैं।

अभिजीत रॉय

उत्तर 24 परगना के कांचरापाड़ा के रहने वाले स्थानीय TMC युवा नेता रॉय को 28 मई को अरेस्ट किया गया था। इसके बाद उन्हें कमर में रस्सी बांधकर इलाके में घुमाया गया। उस समय वहां भारी भीड़ जमा थी और लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। पुलिस के मुताबिक, रॉय पर बिजपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज जबरन वसूली के एक मामले में आरोप है।

साथ ही, उन पर म्युनिसिपल सफाई कर्मचारियों के लिए बनी प्लास्टिक की बाल्टियों समेत अन्य सामानों का गैर-कानूनी तरीके से स्टॉक करने और उन्हें दोबारा बेचने का भी आरोप है। पुलिस ने बताया कि BJP के सत्ता में आने के बाद रॉय छिप गए थे। आखिरकार उन्हें पूर्वी मिदनापुर के मंदारमणि से गिरफ्तार किया गया।

जहांगीर खान

फाल्टा और डायमंड हार्बर में TMC के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले जहांगीर खान ने बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान एक पुलिस अधिकारी के साथ सार्वजनिक टकराव के बाद पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। फाल्टा से तत्कालीन TMC उम्मीदवार ने एक आक्रामक बयान में खुद की तुलना ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘पुष्पा’ के मुख्य किरदार से करते हुए कहा था कि वह कभी किसी के सामने नहीं झुकेंगा।

फाल्टा एकमात्र विधानसभा क्षेत्र था जहां दोबारा मतदान (री-पोल) हुआ था। हालांकि, जब तक मतदान हुआ, पश्चिम बंगाल का राजनीतिक माहौल बदल चुका था। खान ने चुनाव से हटकर TMC को चौंका दिया था। इसके बाद पार्टी में हुई फूट के दौरान कई नेताओं ने खान के प्रति नेतृत्व के नरम रवैये को अपनी नाराजगी की एक वजह बताया था। शुरुआत में डकैती और हत्या की कोशिश के मामलों में नाम आने के बाद, खान पर जबरन वसूली और अन्य आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए।

गिरफ्तारी के बाद खान को तीन अलग-अलग मौकों पर फाल्टा में घुमाया गया था। एक वायरल वीडियो में उन्हें पुलिस की निगरानी में अपने कान पकड़कर सबके सामने माफी मांगते हुए देखा गया। पुलिस का कहना है कि यह सब क्राइम सीन को फिर से समझने (रीकंस्ट्रक्शन) के लिए किया गया था। साथ ही दावा किया कि खान ने खुद ही अपने कान पकड़े, उठक-बैठक की और जनता से माफ़ी मांगी।

गुड्डू अंसारी

उत्तर 24 परगना के कमारहाटी के एक जाने-माने स्थानीय नेता, अंसारी को वरिष्ठ TMC नेता और कमारहाटी के विधायक मदन मित्रा का करीबी सहयोगी माना जाता था। मित्रा उन पार्टी नेताओं में से एक थे जो पार्टी में बंटवारे के बाद भी ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहे। अंसारी को 31 मई को गिरफ्तार किया गया और बाद में हथकड़ी पहनाकर कमारहाटी में घुमाया गया।

पुलिस का आरोप है कि अंसारी अलग-अलग तरह के कारोबार में कई सिंडिकेट चलाते थे। वह इलाके पर अपना दबदबा बनाए रखने के लिए हथियारों के दम पर लोगों को डराते-धमकाते थे। बेलघरिया पुलिस के एक अधिकारी ने इस तरह सबके सामने घुमाने का बचाव करते हुए कहा कि इसका मकसद अपराधियों को कड़ी चेतावनी देना था।

शमीम अहमद

‘गब्बर’ के नाम से पहचाने जाने वाले अहमद, शिबपुर में वार्ड नंबर 36 के अध्यक्ष हैं। उन्हें TMC के एक पूर्व मंत्री का करीबी माना जाता है। उनकी पत्नी, शमीमा बानू, पहले इसी वार्ड से पार्षद रह चुकी हैं। अहमद को 21 मई को मुंबई के चेंबूर से गिरफ्तार किया गया और बाद में कोलकाता पुलिस उन्हें दक्षिण हावड़ा के संकराइल में भीड़-भाड़ वाले बाज़ार में कमर से रस्सी बांधकर घुमाती हुई ले गई। पुलिस ने उन पर 7 मई को हावड़ा माइनॉरिटी सेल के अध्यक्ष सिकंदर खान के नेतृत्व में BJP की जीत के बाद निकाली गई रैली पर हमले में शामिल होने का आरोप लगाया है। इस हमले में तीन लोग घायल हो गए थे।

शाहिन मोल्ला

शाहिन मोल्ला उर्फ ​​सनी एक ट्रैफिक होम गार्ड थे। उन्हें TMC के एक पूर्व मंत्री से करीबी होने के कारण दक्षिण हावड़ा में प्रभावशाली माना जाता था। उन्हें संकराइल पुलिस ने 23 मई को करोड़ों रुपये की कथित रंगदारी (एक्सटॉर्शन) रैकेट के मामले में अरेस्ट किया। गिरफ्तारी के बाद सेंट्रल फ़ोर्स और संकराइल पुलिस के जवान उन्हें कमर से रस्सी बांधकर सेंट्रल हावड़ा के चौरा बस्ती इलाके से पैदल ले गए। बंगाल पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई जांच के सिलसिले में की गई थी।

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IT Sector का भारी दबाव, Sensex-Nifty कभी लाल तो कभी हरा, इन 5 वजहों से दोनों तरफ भाग रहा मार्केट

Stock Market moving up and down: कच्चे तेल की नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर जियो-पॉलिटिकल टेंशन में कमी के बावजूद घरेलू स्टॉक मार्केट में खास जोश नहीं दिख रहा। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में ग्रीन और रेड जोन में झूल रहे। ब्रोडर लेवल पर भी मिला-जुला रुझान है और निफ्टी मिडकैप 100 में फिलहाल मामूली बढ़त है तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे फीसदी से अधिक की बढ़त है। फिलहाल 10:14 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 120.12 प्वाइंट्स यानी 0.16% की बढ़त के साथ 77,275.74 और और निफ्टी (Nifty) भी 43.20 प्वाइंट्स यानी 0.18% के उछाल के साथ 24,128.90 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 111.23 प्वाइंट्स फिसलकर 77,044.39 और 164.70 की बढ़त के साथ 77,320.32 तक पहुंचा तो निफ्टी भी 26.85 प्वाइंट्स गिरकर 24,058.85 और 53.95 प्वाइंट्स चढ़कर 24,085.70 तक पहुंचा।

Stock Market in pressure: ये है वजह

अमेरिका में ब्याज दरें स्थिर लेकिन आगे बढ़ाने के संकेत

अमेरिकी फेड के नए चेयरमैन केविन वार्श ने अपनी अगुवाई में पहली बार तय हुई मौद्रिक नीतियों में दरों को स्थिर रखा है। हालांकि फेडरल रिजर्व ने इस साल दरों में बढ़ोतरी के संकेत भी दिए हैं। इसके चलते ही मार्केट में उठा-पटक दिख रही है।

IT Sector का दबाव

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने इस साल ब्याज दरों में बढ़ोतरी का संकेत दिया जिससे दुनिया भर में टेक स्टॉक्स को लेकर निवेशकों का रुझान फीका पड़ा। भारतीय मार्केट में भी इसने आईटी शेयरों को तोड़ दिया और निफ्टी आईटी डेढ़ फीसदी से अधिक फिसल गया। अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची होने पर आमतौर पर टेक्नोलॉजी स्टॉक्स पर दबाव आता है क्योंकि इससे भविष्य की कमाई का वर्तमान मूल्य घट जाता है और वैश्विक कंपनियों के खर्च में भी कमी आ सकती है और यही वैश्विक कंपनियां भारतीय आईटी सेवा कंपनियों की प्रमुख ग्राहक हैं। वहीं दूसरी तरफ मेटल, पीएसयू बैंक, फार्मा और एफएमसीजी जैसे अहम सेक्टर मार्केट को ऊपर खींचने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। इनके निफ्टी इंडेक्स में करीब आधे फीसदी की बढ़त है।

India VIX में नरमी

मार्केट की घबराहट को मापने वाले वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया वीआईएक्स में गिरावट से मार्केट को सपोर्ट मिला। फिलहाल यह 1.66% की गिरावट के साथ 12.97 पर है। इसके अधिक होने का मतलब मार्केट में वोलैटिलिटी का बढ़ना और नीचे आने का मतलब होता है वोलैटिलिटी का कम होना।

एशियाई बाजारों से मिला-जुला रुझान

घरेलू मार्केट पर आज एशियाई बाजारों के मिले-जुले रुझानों का भी असर दिख रहा है। एक तरफ जापान का निक्केई 225 करीब 2% उछल पड़ा तो दक्षिण कोरिया का कोस्पी तो 2% चढ़कर 9,040.52 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया। ताइवान के ताइवान वेटेड में करीब 1% की बढ़त है। वहीं दूसरी तरफ इंडोनेशिया के जकार्ता कंपोजिट में 1% से अधिक और चीन के शंघाई कंपोजिट में आधे फीसदी की गिरावट है।

Sensex की एक्सपायरी

आज सेंसेक्स के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में दोनों तरफ मूवमेंट दिख रहा है।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

US Fed ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव, लेकिन एक खास सिग्नल पर ट्रंप ने कहा- यकीन करना मुश्किल 

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

दुनिया देखती रह गई और पाकिस्तान बन गया ‘किंगमेकर’! शहबाज शरीफ ने किया अमेरिका और ईरान ‘मेगा डील’ का ऐलान

US Iran Sign Islamabad MoU: खाड़ी में सीजफायर के बीच दुनिया के लिए एक और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को खत्म करने के लिए ऐतिहासिक ‘इस्लामाबाद समझौते’ पर हस्ताक्षर हो गए हैं। अब यह समझौता तुरंत प्रभाव से लागू भी हो गया है।

इस ऐतिहासिक शांति समझौते की मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी आधिकारिक घोषणा की है। उन्होंने लिखा कि, ‘इस समझौते के तहत ईरान तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल देगा, वहीं अमेरिका भी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को ‘तुरंत’ हटा लेगा’।

शहबाज शरीफ और कतर की मध्यस्थता से हुई डील

पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने X पर लिखा, ‘मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ पर आज इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर किए गए हैं। दोनों देशों के माननीय राष्ट्रपतियों ने इस पर दस्तखत किए हैं और मध्यस्थ के रूप में मैंने भी इस पर हस्ताक्षर किए हैं’।

शहबाज शरीफ ने बताया कि पाकिस्तान, सह-मध्यस्थ कतर के सहयोग से 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में एक आधिकारिक समारोह की मेजबानी करेगा, जहां तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू होगी। उन्होंने इस समझौते को क्षेत्र में शांति, आपसी सम्मान और साझा समृद्धि की एक मजबूत नींव बताया।

ट्रंप ने वर्साय के महल में किए दस्तखत

व्हाइट हाउस ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष को समाप्त करने वाले इस समझौते को अपनी मंजूरी दे दी है। रॉयटर्स और एएफपी के मुताबिक, G7 शिखर सम्मेलन के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ वर्साय के महल में डिनर के दौरान ट्रंप ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

वर्साय से रवाना होते समय ट्रंप ने खुद पत्रकारों से इसकी पुष्टि करते हुए कहा, ‘यह साइन हो चुका है… मैंने वर्साय में इस पर दस्तखत किए हैं।’ हालांकि, ट्रंप ने यह चेतावनी भी दी कि अगर ईरान ने इसका उल्लंघन किया, तो सख्त कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि स्थिति की निगरानी के लिए अमेरिकी सेना कुछ समय तक खाड़ी में मौजूद रहेगी।

ईरान ने भी की पुष्टि, लेबनान को लेकर हुआ बड़ा फैसला

ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘इर्ना’ (IRNA) के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने भी समझौते के फाइनल होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के सर्वोच्च अधिकारियों के दस्तखत के बाद अब इस समझौते को लागू करने की परीक्षा है।

समझौते की ये है मुख्य बातें:

  1. ईरान ने साफ किया कि लेबनान में युद्ध को समाप्त करना और सीजफायर उनकी प्राथमिकता है। इस समझौते के शुरुआती क्लॉज में लेबनान का तीन बार जिक्र है और लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही गई है।
  2. समझौते के तहत अगले 60 दिनों तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के लिए बातचीत का दौर चलेगा।
  3. ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम इस बातचीत के एजेंडे से पूरी तरह बाहर है और उस पर कोई समझौता नहीं होगा।

ईरानी संसद के स्पीकर बोले- ‘हमारा हाथ ट्रिगर पर है’

भले ही समझौते पर हस्ताक्षर हो गए हों, लेकिन ईरान के भीतर अमेरिका को लेकर अभी भी भारी अविश्वास है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने वाशिंगटन के प्रति गहरा संदेह जताते हुए कहा, ‘अमेरिका पर मेरा अविश्वास सबसे ज्यादा है। भले ही यह समझौता फाइनल हो जाए और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) इसे मंजूरी दे दे, फिर भी अमेरिका भरोसे के लायक नहीं है’।

होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी, ‘ईरान के वहां संप्रभु अधिकार हैं और स्वाभाविक रूप से हम सेवाओं के लिए शुल्क लेंगे। हमारा हाथ अभी भी ट्रिगर पर है।’

पीएम शरीफ ने इन नेताओं का जताया आभार

शहबाज शरीफ ने इस ऐतिहासिक डील तक पहुंचने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जेडी वेंस, जेरेड कुशनर और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद मोजतबा खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का शुक्रिया अदा किया। इसके अलावा उन्होंने कतर, सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र के नेतृत्व और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के अथक प्रयासों की सराहना की।

‘भारतीय नाविकों की सुरक्षा जरूरी’… पीएम मोदी ने ट्रंप के सामने उठाया 3 नाविकों की मौत का मुद्दा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को G7 समिट के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर चिंता जताई। इस मुद्दे को उठाते हुए पीएम मोदी ने कहा: “ईरान के साथ किसी भी समझौते में समुद्री जहाजों पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा और हिफाजत पक्की की जानी चाहिए।” बता दें कि इस महीने की शुरुआत में, ओमान की खाड़ी में एक ऑयल टैंकर पर अमेरिकी नौसेना के हमले में तीन भारतीय नाविक मारे गए थे।

वहीं, जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह पीड़ितों के परिवारों के लिए कोई संदेश या शोक संवेदना देना चाहते हैं, तो उन्होंने कहा, “हां, बिल्कुल।” उन्होंने समुद्री व्यापार में काम करने वाले लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि वह “उन सभी लोगों से प्यार करते हैं।”

बुधवार को CNN-News18 के एक सवाल के जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा: “मैंने भारतीय नाविकों के बारे में सुना। यह एक मुश्किल पेशा है। हम उन सभी लोगों का सम्मान करते हैं।”

बता दें कि हमले के समय पलाऊ के झंडे वाला तेल टैंकर सेट्टेबेलो (Settebello) पर कुल 28 लोग सवार थे। इनमें 24 भारतीय नागरिक और 4 विदेशी नागरिक शामिल थे। विदेशी नागरिकों में दो पाकिस्तानी, एक यूक्रेनी और एक रूसी थे।

इस घटना के बाद 21 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था। वहीं, लापता नाविकों की तलाश तब तक जारी रहीं जब तक कि उनकी मौत की पुष्टि नहीं हो गई।

वहीं, अमेरिकी सेना ने जहाज पर हमला करने की बात मानी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (USCENTCOM) के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने टैंकर को तब निशाना बनाया जब उसने अमेरिकी नौसेना के कर्मियों के निर्देशों का पालन नहीं किया और ईरान से तेल ले जाने की कोशिश की, जो अमेरिकी नाकेबंदी (ब्लॉकेड) का उल्लंघन था।

गौरतलब है कि यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण लगाए गए समुद्री प्रतिबंधों से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में भी रुकावटें आ रही हैं।

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अमेरिका-ईरान के 14 पॉइंट वाले समझौते की पूरी डिटेल:होर्मुज सिर्फ 60 दिन फ्री, ईरान को ₹28 लाख करोड़ हर्जाना, परमाणु हथियार नहीं बनाने का वादा

अमेरिका और ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए तैयार किए गए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने बुधवार देर रात डिजिटल हस्ताक्षर किए, जिसके साथ ही यह समझौता लागू हो गया। इस डील से जुड़े एक अमेरिकी अधिकारी ने बुधवार को रिपोर्टरों के साथ हुई एक कॉन्फ्रेंस कॉल में 14 पॉइंट्स वाले डील की पूरी जानकारी दी है। इसके मुताबिक होर्मुज को सिर्फ 60 दिनों के लिए मुफ्त खोले जाने की बात कही गई है। वही, ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने का भरोसा दिया है। इसके बदले में ईरान के लिए 300 अरब डॉलर (28 लाख करोड़ रुपए) का फंड बनाया जाएगा। अधिकारी ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर यह जानकारी दी। पॉइंट-1: सभी मोर्चों पर संघर्ष खत्म होगा समझौते के पहले पॅाइंट में कहा गया है कि अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी देशों के बीच सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और स्थायी रूप से बंद की जाएगी। इसमें लेबनान भी शामिल है। अमेरिका की नजर में यह मुद्दा इसलिए अहम है, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को चिंता थी कि हिजबुल्लाह के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई ईरान के साथ हुए इस समझौते को कमजोर कर सकती है। इसे इजराइल की चिंताओं को नजरअंदाज करने के रूप में देखा जा रहा है। इजराइल का कहना है कि लेबनान में मौजूद ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह बहुत बड़ा खतरा है। इजराइल पहले ही कह चुका है कि वह अमेरिका-ईरान बातचीत में लेबनान को लेकर हुई किसी भी सहमति को नहीं मानेगा। पॉइंट-2: एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे समझौते में कहा गया है कि अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की आजादी, सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान करेंगे। दोनों देश एक-दूसरे के घरेलू मामलों में दखल भी नहीं देंगे। अमेरिकी अधिकारियों ने पत्रकारों को समझौते का जो हिस्सा पढ़कर सुनाया, उसमें यह बात साफ तौर पर शामिल थी। समझौते का यह हिस्सा ईरान के सरकार विरोधी गुटों को पसंद नहीं आ सकता। इन्हें उम्मीद थी कि अमेरिका भविष्य में भी ईरान में राजनीतिक बदलाव या लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों का खुलकर समर्थन करेगा। दरअसल, इसी साल ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कहा था कि उनकी मदद की जाएगी। लेकिन नए समझौते में एक-दूसरे के आंतरिक मामलों से दूर रहने की बात कही गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि ईरान के अंदरूनी मुद्दों को लेकर अमेरिका का रुख पहले की तुलना में नरम हुआ है। पॉइंट-3: 60 दिनों में अंतिम समझौते का टारगेट अमेरिका और ईरान ने अधिकतम 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर बातचीत पूरी करने और उसे लागू करने का टारगेट तय किया है। हालांकि, दोनों देशों की सहमति होने पर इस समयसीमा को आगे भी बढ़ाया जा सकता है। दोनों देशों के नेताओं द्वारा समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाने के साथ ही 60 दिनों की यह समयसीमा शुरू हो गई है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक 60 दिनों की यह समयसीमा काफी छोटी मानी जा रही है। अमेरिकी अधिकारी भी निजी तौर पर मानते हैं कि इतने कम समय में अंतिम समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा, खासकर इसलिए क्योंकि ईरान के साथ पहले हुई परमाणु वार्ताओं में कई साल लग चुके हैं। हालांकि ट्रम्प प्रशासन ने जानबूझकर यह महत्वाकांक्षी समयसीमा तय की है। अगर 60 दिनों के भीतर कोई अंतिम समझौता हो जाता है, तो यह अमेरिका के मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों से पहले राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि साबित हो सकता है। ऐसे समय में जब उनकी घरेलू लोकप्रियता में गिरावट देखी जा रही है, यह समझौता उन्हें राजनीतिक फायदा भी पहुंचा सकता है। पॉइंट-4: अमेरिका समुद्री नाकेबंदी हटाएगा अमेरिका दस्तखत के बाद ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी नौसैनिक नाकेबंदी और अन्य बाधाओं को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर देगा। यह नाकेबंदी 30 दिनों के भीतर पूरी तरह खत्म कर दी जाएगी। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी हटने के बाद ईरान फिर से अपने बंदरगाहों से तेल और अन्य सामान निर्यात कर सकेगा। साथ ही दूसरे देशों से आने वाला माल भी बिना बड़ी रुकावट के ईरान पहुंच सकेगा। यह ईरान के लिए बहुत बड़ी और तत्काल राहत होगी, क्योंकि उसके ज्यादातर निर्यात चीन को जाते हैं। जैसे ही निर्यात दोबारा शुरू होगा, ईरान के पास विदेशी मुद्रा और राजस्व आना शुरू हो जाएगा, जिससे उसकी मौजूदा आर्थिक मुश्किलें काफी हद तक कम हो सकती हैं। लेकिन इस फैसले का एक दूसरा पहलू भी है। नाकेबंदी हटने से अमेरिका अपने सबसे प्रभावी दबाव के साधनों में से एक खो देगा। पॉइंट-5: होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा समझौते पर दस्तखत होते ही ईरान ने वादा किया है कि वह अपनी पूरी कोशिश करके फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच आने-जाने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा। यह व्यवस्था 60 दिनों तक लागू रहेगी और इस दौरान जहाजों से कोई एक्स्ट्रा टैक्स नहीं लिया जाएगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इस समझौते की सबसे अहम लाइन है- सिर्फ 60 दिनों तक बिना किसी फीस के। इसका मतलब है कि अगले 60 दिनों तक ईरान होर्मुज से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों से कोई पैसा नहीं लेगा। लेकिन 60 दिन पूरे होने के बाद ईरान जहाजों पर शुल्क या फीस लगा सकता है। युद्ध से पहले ईरान आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय जहाजों से इस तरह का पैसा नहीं लेता था। इसलिए अगर भविष्य में फीस लगाई जाती है, तो यह एक बड़ा बदलाव होगा और होर्मुज से गुजरने वाली वैश्विक समुद्री व्यापार लागत बढ़ सकती है। पॉइंट-6: ईरान को ₹28 लाख करोड़ का हर्जाना समझौते के तहत अमेरिका ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर (28 लाख करोड़ रुपए) की योजना तैयार करने का वादा किया है। हालांकि यह पैसा तुरंत नहीं दिया जाएगा। पहले अमेरिका और ईरान को 60 दिनों के भीतर एक अंतिम और व्यापक समझौते पर पहुंचना होगा। उसी अंतिम समझौते में यह तय किया जाएगा कि 300 अरब डॉलर का फंड कैसे बनाया जाएगा, पैसा कहां से आएगा और उसे किस तरह खर्च किया जाएगा। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि इस योजना को लागू करने के लिए जरूरी सभी लाइसेंस, छूट और वित्तीय मंजूरियां अमेरिका देगा, ताकि निवेश और धन के लेनदेन में कानूनी बाधाएं न आएं। राष्ट्रपति ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि इस फंड में अमेरिका सीधे पैसा नहीं लगाएगा। हालांकि, उन्होंने यह संभावना जरूर खुली छोड़ी कि खाड़ी देश, जैसे सऊदी अरब, कतर और UAE इस फंड के लिए पैसा उपलब्ध करा सकते हैं। पॉइंट-7: ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटेंगे समझौते के मुताबिक, अमेरिका ने अंतिम समझौता होने पर ईरान पर लगे सभी तरह के प्रतिबंधों को एक-एक करके खत्म करने का वादा किया है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देना शायद वह सबसे बड़ा कदम है, जिसके बदले अमेरिका ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त सीमाएं स्वीकार करने के लिए राजी कर सकता है। यही व्यवस्था 2015 के परमाणु समझौते में भी अपनाई गई थी। उस समझौते के तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर कई प्रतिबंध स्वीकार किए थे और बदले में उसे आर्थिक प्रतिबंधों से राहत मिली थी। हालांकि उस समझौते में लगी पाबंदियों की अवधि अधिकतम 15 साल थी। लेकिन ट्रम्प का कहना है कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हमेशा के लिए प्रतिबंध चाहते हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि दोनों देश इस बात पर सहमत कैसे होते हैं कि कौन-कौन से प्रतिबंध हटाए जाएंगे और उन्हें किस समय हटाया जाएगा। साथ ही यह भी तय करना होगा कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के कौन-कौन से कदम कब उठाएगा। पॉइंट-8: ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा समझौते में ईरान ने एक बार फिर भरोसा दिया है कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और न ही उन्हें हासिल करने की कोशिश करेगा। दस्तावेज में कहा गया है कि ईरान के पास पहले से मौजूद संवर्धित यूरेनियम (एनरिच्ड यूरेनियम) के भंडार का क्या किया जाएगा, इस पर दोनों देश मिलकर फैसला करेंगे। इसके लिए एक अलग व्यवस्था बनाई जाएगी, जिस पर आगे की बातचीत में सहमति बनेगी। फिलहाल न्यूनतम सहमति यह है कि इस संवर्धित सामग्री को ईरान के भीतर ही इस तरह बदला जाएगा कि उससे परमाणु हथियार बनाना संभव न रहे। यह पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में होगी। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक यह समझौते का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि इसमें पहली बार सीधे ईरान के परमाणु कार्यक्रम की बात की गई है। यही मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और युद्ध की सबसे बड़ी वजह रहा है। हालांकि इस पॉइंट में सबसे विवादित मुद्दों पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। दस्तावेज में ईरान ने फिर से कहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। लेकिन यह कोई नई बात नहीं है। ईरान 1970 में परमाणु अप्रसार संधि में शामिल होने के समय भी यही वादा कर चुका था। बाद में 2015 के परमाणु समझौते में भी उसने यही कहा था कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। समझौते में ईरान से कहा गया है कि वह अपने पास मौजूद लगभग 11 टन संवर्धित परमाणु सामग्री को कम घनत्व वाला बनाए। इसे डाउन-ब्लेंडिंग कहा जाता है। इसका मतलब है कि यूरेनियम को इतना पतला कर दिया जाए कि उसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में न हो सके। इन 11 टन सामग्री में करीब 970 पाउंड ऐसा यूरेनियम भी शामिल है, जिसे 60% तक एनरिच्ड किया जा चुका है। यह स्तर परमाणु बम बनाने के लिए जरूरी स्तर के काफी करीब माना जाता है। लेकिन समझौते में यह नहीं कहा गया है कि ईरान को यह सामग्री देश से बाहर भेजनी होगी। ईरान लंबे समय से अपने यूरेनियम भंडार को विदेश भेजने का विरोध करता रहा है। हालांकि 2015 के परमाणु समझौते में ईरान ने अपने उस समय के लगभग 97 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम भंडार को रूस भेज दिया था। यही कारण है कि अभी कई बड़े सवाल अनसुलझे हैं। जैसे कि पॉइंट-9: दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति में बदलाव नहीं करेंगे समझौते में कहा गया है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता नहीं हो जाता, तब तक दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेंगे। इसका मतलब है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को अभी जिस स्तर पर चला रहा है, उससे आगे नहीं बढ़ाएगा। वह नए बड़े कदम नहीं उठाएगा और न ही अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार करेगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक यह प्रावधान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे बातचीत के लिए एक स्पष्ट शुरुआती स्थिति तय हो जाती है। इसका मकसद यह है कि अंतिम समझौता होने तक अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर अतिरिक्त दबाव डालकर नई रियायतें हासिल करने की कोशिश न करें। यानी बातचीत के दौरान न तो ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाएगा और न ही अमेरिका नए प्रतिबंध लगाएगा या क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य ताकत भेजेगा। पॉइंट-10: ईरानी सामानों के निर्यात पर छूट समझौते के मुताबिक, MoU पर दस्तखत होते ही अमेरिका ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और उनसे जुड़े अन्य सामान के निर्यात पर राहत देना शुरू कर देगा। इसके लिए अमेरिकी वित्त मंत्रालय जरूरी छूट और मंजूरियां जारी करेगा, ताकि ईरान अपना तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच सके। यह राहत सिर्फ तेल बेचने तक सीमित नहीं होगी। इसमें बैंकिंग लेन-देन, बीमा, जहाजरानी, माल ढुलाई और अन्य वित्तीय सेवाओं से जुड़ी बाधाओं को भी कम किया जाएगा, जो ईरान के तेल निर्यात में रुकावट बनती रही हैं। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक समझौते का यह हिस्सा ईरान के खिलाफ सख्त रुख रखने वाले नेताओं और विशेषज्ञों के बीच सबसे ज्यादा चिंता का कारण बना हुआ है। उनका मानना है कि तेल निर्यात पर लगी रोक अमेरिका का सबसे प्रभावी दबाव का साधन थी। इसी के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव बना हुआ था। पॉइंट-11: ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियां जारी होंगी समझौते के तहत अमेरिका ने वादा किया है कि वह ईरान के उन धन और संपत्तियों को इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराएगा, जो अभी तक विभिन्न प्रतिबंधों के कारण फ्रीज्ड हैं या जिन पर रोक लगी हुई है। हालांकि यह पैसा कब और किस प्रक्रिया के तहत जारी होगा, इसका तरीका अमेरिका और ईरान आपसी बातचीत के जरिए तय करेंगे। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इसका मतलब यह हो सकता है कि अंतिम समझौता होने का इंतजार किए बिना ही ईरान के लिए अरबों डॉलर की रकम जारी होना शुरू हो जाए। अनुमान है कि यह राशि 24 अरब डॉलर या उससे भी अधिक हो सकती है। पॉइंट-12: दोनों देश मिलकर निगरानी व्यवस्था बनाएंगे अमेरिका और ईरान मिलकर एक विशेष निगरानी व्यवस्था बनाएंगे, जो यह देखेगी कि MoU की सभी शर्तों का सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं। यह सिस्टम इस बात की जांच करेगा कि: न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका यह तय करना चाहता है कि ईरान के हर वादे की स्वतंत्र रूप से जांच और पुष्टि की जा सके। यानी केवल ईरान के वादे करना पर्याप्त नहीं होगा। अमेरिका चाहता है कि यह साबित भी किया जा सके कि ईरान वास्तव में अपने परमाणु कार्यक्रम, संवर्धित यूरेनियम के भंडार और अन्य प्रतिबद्धताओं से जुड़े समझौते का पालन कर रहा है। पॉइंट 13: तुरंत सभी मुद्दों पर बातचीत शुरू नहीं होगी सबसे पहले दोनों देशों को समझौते के कुछ अहम बिंदुओं को लागू करना होगा। इनमें युद्धविराम बनाए रखना, होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना, नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, तेल निर्यात पर राहत देना और ईरान की जमी हुई संपत्तियों तक पहुंच बहाल करना जैसे कदम शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इससे पता चलता है कि आने वाले दौर की बातचीत का सबसे बड़ा और सबसे अहम विषय ईरान का परमाणु कार्यक्रम ही होगा। परमाणु गतिविधियों की सीमा क्या होगी, एनरिच्ड यूरेनियम का क्या होगा, निरीक्षण व्यवस्था कैसी होगी और प्रतिबंध किस तरह हटाए जाएंगे, जैसे सवाल अभी पूरी तरह तय नहीं हुए हैं। पॉइंट 14: अंतिम समझौते को UNSC मंजूरी देगी जब अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता हो जाएगा, तो उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक प्रस्ताव के जरिए मंजूरी दी जाएगी। इसका मतलब है कि अंतिम समझौता केवल अमेरिका और ईरान के बीच का राजनीतिक समझौता नहीं रहेगा, बल्कि उसे अंतरराष्ट्रीय कानूनी मान्यता भी मिल जाएगी। यदि सुरक्षा परिषद इस समझौते को मंजूरी देती है, तो इसके प्रावधानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की ताकत मिल जाएगी और दुनिया के अन्य देशों को भी उसका सम्मान करना होगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे समझौते को मजबूती मिलेगी, जैसा कि पिछले वर्ष गाजा से जुड़े समझौते के मामले में हुआ था, जिसे भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का समर्थन मिला था। हालांकि कई एक्सपर्ट्स को शक है कि यह चरण वास्तव में आएगा भी या नहीं। —————————————- अमेरिका- ईरान से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें अमेरिका-ईरान युद्ध खत्म, ट्रम्प चिल्लाकर बोले- डील साइन:ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने डिजिटल दस्तखत किए, पेरिस के वर्साय पैलेस में समझौता अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते (MoU) पर दस्तखत हो गए हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने बुधवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान पेरिस के वर्साय पैलेस में इस दस्तावेज पर साइन किए। 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