अमेरिका बोला- पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार, उससे बातचीत जरूरी:रुबियो बोले- विदेश नीति के लिए ये जरूरी, भारत भी ईरान से दोस्ती रखता है

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि अमेरिका के लिए उससे बातचीत करना जरूरी है। नेटवर्क18 को दिए एक इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि अमेरिका को उन देशों के साथ भी राजनयिक संबंध बनाए रखने पड़ते हैं, जिनसे उसके मतभेद हैं। रुबियो ने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत भी ईरान के साथ संबंध रखता है और वहां के नेताओं से मुलाकात करता है। उनके मुताबिक, विदेश नीति में अलग-अलग देशों के साथ रिश्तों का संतुलन बनाए रखना मुश्किल है, लेकिन ऐसा करना जरूरी है। रुबियो बोले- अमेरिका आतंकवाद का समर्थन करने वालों के खिलाफ अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी आतंकवाद का समर्थन करने वालों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रहने से अमेरिका को उन गतिविधियों को रोकने की कोशिश करने का मौका मिल सकता है, जिनसे भारत को चिंता होती है। रुबियो ने कहा, ये मुश्किल फैसले हैं, लेकिन विदेश नीति के तहत हमें ऐसा करना पड़ता है। मुझे लगता है कि यह सकारात्मक भी हो सकता है। अगर हमारे पाकिस्तान के साथ संबंध हैं और हम उससे बात कर सकते हैं, तो इससे हमें उन गतिविधियों को हतोत्साहित करने में मदद मिल सकती है, जिनसे भारत चिंतित है। रुबियो बोले- ईरान पर कट्टरपंथी शिया धर्मगुरुओं का कंट्रोल रुबियो ने ईरान के नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा कि वहां की सरकार के साथ किसी समझौते पर पहुंचना मुश्किल है। उन्होंने कहा, दुर्भाग्य से, वे समझौता करना नहीं जानते। वहां कट्टरपंथी शिया धर्मगुरुओं का नियंत्रण है। मैं सभी शिया धर्मगुरुओं की बात नहीं कर रहा, बल्कि उन कट्टरपंथी धर्मगुरुओं की बात कर रहा हूं, जो धार्मिक विचारधारा से प्रेरित हैं। ऐसे लोगों के साथ समझौता करना बहुत मुश्किल है। होर्मुज में तेल की आवाजाही 80 से 100% हुई रुबियो ने कहा कि होर्मुज से तेल और दूसरे ऊर्जा संसाधनों की सप्लाई जारी है। उनके मुताबिक, इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही और तेल की सप्लाई संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर की 80 से 100% तक बनी हुई है। रुबियो ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह उन व्यापारिक जहाजों पर हमले कर रहा है, जिनका युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि इन जहाजों पर सवार नाविकों की जान भी खतरे में पड़ रही है। रुबियो ने दुनिया के देशों से ऐसे हमलों की निंदा करने की अपील की। उन्होंने ईरान के इन हमलों की तुलना दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी की नाजी सेना की पनडुब्बियों से की। रुबियो के मुताबिक, उस दौर में भी पनडुब्बियों से व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया जाता था। उन्होंने कहा कि दुनिया को ऐसे हमलों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए। फैक्ट चेक: स्ट्रैटेजिक एनर्जी मैप वेबसाइट के मुताबिक 20 अक्टूबर को होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले करीब 99% घट गई थी। यानी, अगर युद्ध से पहले एक दिन में 100 टैंकर गुजरते थे, तो इस आंकड़े के मुताबिक अब केवल 1 टैंकर गुजर रहा था। भारतीय नाविकों की मौत का जिक्र किया रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों से समुद्री जहाजों की रक्षा कर रहा है। उनके मुताबिक, जहाजों को निशाना बनाने के लिए दागे जाने वाले ज्यादातर ड्रोन और मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर दिया जाता है। हालांकि, कुछ हमले जहाजों तक पहुंच जाते हैं और नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने खास तौर पर भारतीय नाविकों की मौत का जिक्र किया। रुबियो ने कहा कि इन हमलों में कई भारतीय नाविकों की जान गई है। इसकी एक वजह यह भी है कि समुद्री व्यापार में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं। नोट- पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान अब तक 11 भारतीय नाविकों की मौत की खबर सामने आई है। वहीं 2 भारतीय नाविक लापता बताए गए हैं। ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाता रहेगा अमेरिका रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान अपने संसाधनों का इस्तेमाल आम लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने के बजाय आतंकवाद को समर्थन देने और मिसाइल-ड्रोन बनाने में करता है। रुबियो ने आरोप लगाया कि ईरान को मिलने वाले पैसे और संसाधनों का इस्तेमाल देश के विकास के बजाय आतंकवाद को समर्थन देने और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने वाले हथियार तैयार करने में किया जाता है। रुबियो के बयान के तीन बड़े संकेत

Marco Rubio Interview: ‘भारत-अमेरिका ट्रेड डील जल्द’, जानिए ईरान युद्ध, आतंकवाद से लेकर रूसी तेल की खरीद पर क्या बोले मार्को रुबियो

Marco Rubio Interview: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत के साथ ट्रेड डील, रूस से तेल खरीदने, पाकिस्तान, ईरान और क्वाड जैसे अहम मुद्दों पर बात की। नेटवर्क18 के ग्रुप एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील लगभग तैयार है। इसे पूरा होने में महीनों नहीं, बल्कि कुछ हफ्ते लगने की उम्मीद है।

रुबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अपने रिश्तों की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास आपसी संबंध मजबूत करने के असाधारण अवसर हैं। रुबियो ने रूस से तेल खरीद, पाकिस्तान में आतंकवाद और ईरान युद्ध के बारे में भी बात की।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील

रुबियो ने कहा कि ट्रेड डील अब अंतिम चरण में है। कुछ तकनीकी मुद्दों को सुलझाना और समझौते की भाषा को अंतिम रूप देना बाकी है। उनके मुताबिक, घोषणा से पहले जरूरी है कि दोनों देश हर शर्त पर सहमत हों। उन्हें उम्मीद है कि डील कुछ हफ्तों में पूरी हो जाएगी।

भारत को दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर टैरिफ मिलने के सवाल पर रुबियो ने कहा कि किसी भी ट्रेड डील का मकसद मौजूदा स्थिति से बेहतर शर्तें हासिल करना होता है। लेकिन इससे भी जरूरी है कि दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते लंबे समय तक टिकाऊ रहें।

उन्होंने कहा कि हर देश के अपने राष्ट्रीय हित होते हैं। भारत अपने हितों की रक्षा करेगा और अमेरिका भी ऐसा ही करेगा। लेकिन दोस्ती और सहयोग की वजह से दोनों देश मतभेदों को सुलझा सकते हैं। रुबियो के मुताबिक, समझौता ऐसा होना चाहिए, जो कुल मिलाकर दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो।

रूस से तेल खरीदने पर भारत की स्थिति समझते हैं रुबियो

अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ और प्रतिबंध लगाने की बात करता है, जबकि खुद भी रूस से डीजल खरीद रहा है। इस सवाल पर रुबियो ने कहा कि यूक्रेन युद्ध पांचवें साल में पहुंच चुका है और इसे खत्म करना जरूरी है। लेकिन रूस पर प्रतिबंधों का असर सिर्फ उसी देश पर नहीं पड़ता। रूस के साथ कारोबार करने वाले दूसरे देशों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका के सामने दो चुनौतियां हैं। पहली, रूस पर दबाव बनाना, ताकि वह युद्ध खत्म करने के लिए समझौते पर आए। दूसरी, यह देखना कि इस दबाव का असर दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ रहा है।

रुबियो के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका के हितों के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को भी देखना जरूरी है। उन्होंने माना कि रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच तनाव है। उम्मीद जताई कि ट्रेड डील और बातचीत से मतभेद कम हो सकते हैं।

अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नफरत

अमेरिका के इलिनॉय स्टेट में एक हिंदू मंदिर पर हमले की कथित साजिश और भारतीयों के खिलाफ नफरत के सवाल पर रुबियो ने कहा कि कोई भी देश ऐसी घटनाओं से पूरी तरह अछूता नहीं है। हर समाज में कुछ लोग अज्ञानता और नफरत के कारण गलत काम करते हैं।

हालांकि, उन्होंने इस बात से इनकार किया कि अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नफरत व्यापक स्तर पर फैली हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के बाद भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ आसपास के लोग भी पीड़ितों के समर्थन में खड़े होते हैं।

रुबियो ने विस्कॉन्सिन में सिख समुदाय के साथ हुई एक भयावह घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने अमेरिका में यहूदी विरोधी घटनाओं में बढ़ोतरी पर चिंता जताई। उनके मुताबिक, नेताओं को ऐसी नफरत को बढ़ावा नहीं देना चाहिए, न ही उसका बचाव करना चाहिए या उसे नजरअंदाज करना चाहिए।

पाकिस्तान पर अमेरिकी नीति

पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी नीति पर रुबियो ने कहा कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी आतंकवाद और उसे समर्थन देने वालों के खिलाफ है। हालांकि, विदेश मंत्री के तौर पर उन्हें उन देशों के साथ भी संबंध बनाए रखने पड़ते हैं, जिनसे कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं।

राहुल जोशी ने उन्हें याद दिलाया कि 2025 में अमेरिकी सीनेटर रहते हुए रुबियो ने पाकिस्तान को अमेरिकी सुरक्षा सहायता रोकने से जुड़ा विधेयक लाने की बात कही थी, अगर वह भारत के खिलाफ आतंकवाद को समर्थन देता है। उनसे पूछा गया कि क्या अब उनकी नीति बदल गई है।

रुबियो ने कहा कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और भौगोलिक स्थिति के लिहाज से भी अमेरिका के लिए उससे बातचीत करना जरूरी है। उन्होंने इसकी तुलना भारत के ईरान के साथ संबंधों से की। उनके मुताबिक, भारत को भी ईरान के नेताओं से बातचीत करनी पड़ती है, भले ही कुछ मुद्दों पर मतभेद हों।

रुबियो ने कहा कि पाकिस्तान के साथ संबंध बनाए रखने से अमेरिका को उन मुद्दों पर बातचीत करने का मौका मिल सकता है, जिनसे भारत को चिंता है। इससे आतंकवाद को समर्थन देने वाली गतिविधियों को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद भी की जा सकती है।

ईरान और होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव

ईरान के साथ संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमलों को लेकर रुबियो ने कहा कि ईरान की सरकार के साथ समझौता करना मुश्किल है। उन्होंने ईरान की तुलना नाजी जर्मनी से की और आरोप लगाया कि ईरान व्यावसायिक जहाजों को निशाना बना रहा है। और ऐसे नाविकों की जान खतरे में डाल रहा है, जिनका युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है।

रुबियो ने कहा कि अमेरिका हर रात समुद्री जहाजों की सुरक्षा के लिए काम कर रहा है। उनके मुताबिक, ईरान की ओर से दागे जाने वाले ज्यादातर ड्रोन और मिसाइलों को नष्ट कर दिया जाता है। हालांकि, कुछ हमले जहाजों तक पहुंच जाते हैं। इससे जहाजों को नुकसान होता है और लोगों की जान भी जाती है।

उन्होंने खास तौर पर भारतीय नाविकों की मौत का जिक्र किया। रुबियो ने कहा कि समुद्र में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं। इसी वजह से इन हमलों में कई भारतीयों की भी जान गई है। उन्होंने ईरान से ऐसे हमले रोकने की अपील की।

क्वाड की बैठक साल के अंत से पहले

रुबियो ने उम्मीद जताई कि क्वाड देशों के नेताओं की बैठक इस साल के अंत से पहले होगी। उन्होंने बताया कि बैठक फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान सम्मेलन के दौरान आयोजित करने पर सहमति बनी है। हालांकि, तारीख अभी तय नहीं हुई है।

क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। रुबियो ने बताया कि विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी पहली बैठक क्वाड से जुड़ी थी, जिसमें जयशंकर भी शामिल थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच सात या आठ बार बातचीत हो चुकी है। उन्होंने अटलांटा में G20 के दौरान एक और बैठक होने की जानकारी भी दी।

रुबियो के मुताबिक, क्वाड अब सिर्फ बैठकों और समझौतों तक सीमित नहीं है। इसके तहत ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगली शिखर बैठक में भी ऐसे फैसलों और उनके नतीजों की घोषणा होनी चाहिए, जिनका वास्तविक असर दिखाई दे।

जयशंकर के साथ रिश्तों की तारीफ

रुबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अपने रिश्तों को शानदार बताया। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी पहली बैठक में जयशंकर शामिल थे। इसके बाद दोनों कम से कम 12 बार मिल चुके हैं। जयशंकर चार बार अमेरिका भी गए हैं। दोनों की मुलाकातें अंतरराष्ट्रीय बैठकों और सम्मेलनों में भी हुई हैं।

रुबियो ने कहा कि जब भी दोनों किसी बैठक या कार्यक्रम के लिए एक ही शहर में होते हैं, तो मिलने का समय जरूर निकालते हैं। उनके मुताबिक, पिछले डेढ़ साल में दोनों के बीच मजबूत कामकाजी रिश्ता बना है। इससे कई संवेदनशील और मुश्किल मुद्दों को संभालने में मदद मिली है।

जामनगर में रिलायंस से मुलाकात क्यों?

रुबियो ने अपनी जामनगर यात्रा को रिलायंस की रिफाइनिंग क्षमता और ऊर्जा सहयोग से जोड़ा। उन्होंने कहा कि रिलायंस के पास कच्चे तेल को उपयोगी उत्पादों में बदलने की असाधारण क्षमता है। उन्होंने इसे भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए अहम बताया।

रुबियो के मुताबिक, रिलायंस भारत को ऊर्जा आपूर्ति के अलग-अलग स्रोतों से जोड़ने में मदद कर सकती है। उन्होंने वेनेजुएला के तेल का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, वेनेजुएला अपना तेल उत्पादन बढ़ा रहा है और भारत लंबे समय से इस तरह के कच्चे तेल को रिफाइन करने में सक्षम रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि रिलायंस ने अमेरिका में रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश किया है। रुबियो ने कहा कि जामनगर में कंपनी के कामकाज को देखने और उसके अधिकारियों से बातचीत करने का मकसद ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाशना है।

उन्होंने कहा कि खास तौर पर पश्चिमी गोलार्ध से आने वाले कच्चे तेल को रिफाइन करने में सहयोग दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो सकता है। इससे भारत को ऊर्जा आपूर्ति के नए विकल्प मिलेंगे और अमेरिका को भी लाभ होगा।

‘बस कुछ हफ्तों की बात…’, भारत से ट्रेड डील पर US विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दे दिया बहुत बड़ा संकेत

‘एक ही शहर में हों तो मिलना तय!’ एस जयशंकर संग अपनी केमिस्ट्री और Quad पर बोले मार्को रुबियो

Marco Rubio S Jaishankar Relation: भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। नेटवर्क18 के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए एक स्पेशल इंटरव्यू में रुबियो ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अपने गहरे और मजबूत कामकाजी रिश्तों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि दोनों देश QUAD के जरिए अपने रणनीतिक सहयोग को एक नए मुकाम पर ले जा रहे हैं।

‘एक ही शहर में हों तो मिलना तय’: जयशंकर संग मजबूत केमिस्ट्री

मार्को रुबियो ने खुलासा किया कि पिछले डेढ़ साल के दौरान वे और विदेश मंत्री एस. जयशंकर कम से कम 12 बार मिल चुके हैं। रुबियो के अमेरिकी विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी पहली मुलाकात भी जयशंकर के साथ ही हुई थी।

रुबियो ने कहा, ‘जब भी हम किसी वैश्विक सम्मेलन, अंतरराष्ट्रीय बैठक या एक ही शहर में होते हैं, तो हम एक-दूसरे से मिलना कभी नहीं भूलते। हमने एक बेहद सकारात्मक और मजबूत वर्किंग रिलेशनशिप बनाई है।’

उन्होंने जोर देकर कहा कि इसी मजबूत बॉन्डिंग की बदौलत दोनों देश पिछले डेढ़ साल में कई नाजुक और संवेदनशील मुद्दों को बहुत आसानी से सुलझाने में सफल रहे हैं।

Quad सम्मेलन में होंगे ऐतिहासिक फैसले

भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की सदस्यता वाले ग्रुप Quad के भविष्य पर बात करते हुए रुबियो ने कहा कि यह संगठन अब सिर्फ बैठकों और समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर ठोस कार्रवाई की ओर बढ़ रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि आगामी क्वाड लीडर्स समिट केवल एक ‘गेट-टुगेदर’ नहीं होगी। इस शिखर सम्मेलन में चारों देश ठोस और बड़े फैसलों का ऐलान करेंगे।

वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत-US के रिश्ते बेहद अहम

मार्को रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच वैश्विक मामलों को लेकर एक जैसी सोच है। दोनों देशों के पास रक्षा, सुरक्षा, तकनीक और व्यापार के क्षेत्र में अपने संबंधों को और गहराई तक ले जाने के ‘असाधारण अवसर’ मौजूद हैं।

‘नाजी जर्मनी जैसा है ईरानी शासन…’, मार्को रुबियो बोले- ‘कट्टरपंथी शिया मौलवियों’ से समझौता बेहद मुश्किल

‘नाजी जर्मनी जैसा है ईरानी शासन…’, मार्को रुबियो बोले- ‘कट्टरपंथी शिया मौलवियों’ से समझौता बेहद मुश्किल

Marco Rubio On Iran: भारत आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान और उसकी शीर्ष नेतृत्व प्रणाली पर जमकर निशाना साधा है। नेटवर्क18 के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि ईरान के साथ शांति समझौते पर पहुंचना बेहद मुश्किल है, क्योंकि देश की कमान थियोलॉजी यानी धार्मिक नीतियों से संचालित होने वाले ‘कट्टरपंथी शिया मौलवियों’ के हाथों में है।

नाजी U-Boat रणनीति से की तुलना, भारतीय नाविकों की मौतों पर जताई चिंता

मार्को रुबियो ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए ईरान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने ईरान की इन हरकतों की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी की सबमरीन रणनीतियों से की।

रुबियो ने कहा, ‘ईरान खुलेआम कह रहा है कि वे निर्दोष नाविकों को मारने और कमर्शियल जहाजों को डुबोने की कोशिश कर रहे हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ऐसा कभी नहीं देखा गया। पूरी दुनिया को एक साथ आकर इसकी कड़ी निंदा करनी चाहिए।’

उन्होंने बताया कि इन हमलों में कई भारतीय नाविकों ने भी अपनी जान गंवाई है, क्योंकि वैश्विक मर्चेंट नेवी में भारतीय नाविकों की बड़ी संख्या है। वैसे अमेरिकी नौसेना अधिकांश ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर रही है।

‘कट्टरपंथी मौलवियों के हाथ में कमान’, कूटनीति पर संकट

तेहरान के साथ राजनयिक समझौते और भविष्य में सैन्य तनाव की संभावना पर रुबियो ने स्पष्ट किया कि ईरानी नेतृत्व की कट्टरपंथी सोच के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है।

उन्होंने कहा, ‘ईरानी शासन के साथ डील करना बहुत कठिन है। दुर्भाग्य से वे समझौता करना नहीं जानते और वे कट्टरपंथी शिया मौलवियों द्वारा नियंत्रित हैं।’ रुबियो ने स्पष्ट किया कि उनका हमला सामान्य शिया समुदाय पर नहीं, बल्कि शासन चला रहे कट्टरपंथियों पर है।

अमेरिका की ‘इकोनॉमिक एस्फिक्सिया’ नीति जारी रहेगी

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि वाशिंगटन तेहरान पर असाधारण आर्थिक दबाव बनाना जारी रखेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान अपने नागरिकों की भलाई के बजाय मिलने वाले हर डॉलर का उपयोग आतंकवाद को स्पॉन्सर करने, मिसाइलें और ड्रोन बनाने में करता है।

इससे पहले अगस्त में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने ईरान के खिलाफ ‘इकोनॉमिक एस्फिक्सिया’ यानी आर्थिक तौर पर पंगु बनाने की रणनीति का ऐलान किया था, जिसके तहत डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, गोल्ड, एविएशन और शिपिंग सेक्टर्स पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए हैं।

‘बस कुछ हफ्तों की बात…’, भारत से ट्रेड डील पर US विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दे दिया बहुत बड़ा संकेत

इशाक डार के सामने राजनाथ सिंह ने आतंकवाद पर घेरा:कहा- आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ एकजुट हों, चीन पर भी निशाना

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को किसी भी तरह सही नहीं ठहराया जा सकता। मंत्री ने कहा कि आतंकवाद से निपटने में दोहरा रवैया नहीं होना चाहिए। आतंकियों को पैसा देने, उनका समर्थन करने और उन्हें पनाह देने वालों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार भी बैठक में मौजूद थे। राजनाथ ने कहा कि आतंकवाद से निर्दोष लोगों की जान जाती है। इससे निवेश और कारोबार प्रभावित होते हैं, समाज में कट्टरता बढ़ती है। उन्होंने सदस्य देशों से आतंकवाद के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई करने की अपील की। राजनाथ ने अपने भाषण में पाकिस्तान या इशाक डार का नाम लेकर सीधे कोई आरोप नहीं लगाया। उन्होंने बिना नाम लिए चीन पर भी निशाना साधा और कहा कि कनेक्टिविटी के नाम पर किसी भी देश की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। राजनाथ बोले- संप्रभुता का सम्मान करते हुए योजनाएं बनें राजनाथ सिंह ने कहा कि देशों को जोड़ने वाली परियोजनाएं सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हुए बनाई जानी चाहिए। इसके लिए सभी संबंधित देशों से सलाह-मशविरा करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि इन सिद्धांतों का पालन नहीं करने वाली परियोजनाएं लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकतीं। भारत ऐसी परियोजनाओं का समर्थन करता है, जो देशों के बाजारों को जोड़ें, व्यापार बढ़ाएं और विकास के नए रास्ते खोलें। लेकिन इनके नाम पर किसी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। राजनाथ सिंह ने चीन का नाम नहीं लिया, लेकिन संप्रभुता और कनेक्टिविटी पर उनकी बात भारत के इसी पुराने रुख से जुड़ती है। इसके पीछे सबसे अहम मामला चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का है। BRI प्रोजेक्ट का विरोध करता है भारत चीन ने 2013 में बेल्ट एंड रोड (BRI) पहल शुरू की थी। इसका मकसद सड़क, रेल, बंदरगाह और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के जरिए चीन को एशिया, यूरोप और अन्य क्षेत्रों के बाजारों से जोड़ना है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) बेल्ट एंड रोड (BRI) पहल की प्रमुख परियोजनाओं में से एक है। यह चीन के शिनजियांग क्षेत्र को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ता है। इसका एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से गुजरता है। भारत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के उन इलाकों को अपना हिस्सा मानता है, जिन पर पाकिस्तान का कब्जा है। भारत का कहना है कि इन इलाकों में चीन की परियोजनाएं उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े सवाल उठाती हैं। राजनाथ सिंह के बयान की 4 और अहम बातें… – चाबहार बंदरगाह पर: राजनाथ ने ईरान के चाबहार बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इनसे मध्य एशिया को बड़े बाजारों से जोड़ने और व्यापार बढ़ाने में मदद मिल सकती है। – SCO की भूमिका पर: राजनाथ ने कहा कि संगठन में सिर्फ नई संस्थाएं बनाने से उपलब्धियां नहीं बढ़ेंगी। नई व्यवस्थाएं ऐसी होनी चाहिए, जो सदस्य देशों की जरूरतें पूरी करें, पहले से चल रहे काम को न दोहराएं और लोगों को सीधा फायदा पहुंचाएं। – दुनिया की आर्थिक चुनौतियों पर: भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार में रुकावटें, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा की चिंताएं और तकनीक के क्षेत्र में बढ़ता अंतर वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। राजनाथ ने इनसे निपटने के लिए आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करने और व्यापार व निवेश को आसान बनाने पर जोर दिया। – व्यापार को आसान बनाने पर: राजनाथ ने कहा कि देशों को जोड़ने के लिए केवल सड़क, रेल और बंदरगाह बनाना काफी नहीं है। सीमा शुल्क की प्रक्रिया आसान करनी होगी, डिजिटल दस्तावेजों का इस्तेमाल बढ़ाना होगा और सामान की ढुलाई से जुड़ी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना होगा, ताकि कारोबार की लागत घटे।

इशाक डार के सामने राजनाथ सिंह ने आतंकवाद पर घेरा:कहा- आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ एकजुट हों, चीन पर भी निशाना

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को किसी भी तरह सही नहीं ठहराया जा सकता। मंत्री ने कहा कि आतंकवाद से निपटने में दोहरा रवैया नहीं होना चाहिए। आतंकियों को पैसा देने, उनका समर्थन करने और उन्हें पनाह देने वालों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार भी बैठक में मौजूद थे। राजनाथ ने कहा कि आतंकवाद से निर्दोष लोगों की जान जाती है। इससे निवेश और कारोबार प्रभावित होते हैं, समाज में कट्टरता बढ़ती है। उन्होंने सदस्य देशों से आतंकवाद के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई करने की अपील की। राजनाथ ने अपने भाषण में पाकिस्तान या इशाक डार का नाम लेकर सीधे कोई आरोप नहीं लगाया। उन्होंने बिना नाम लिए चीन पर भी निशाना साधा और कहा कि कनेक्टिविटी के नाम पर किसी भी देश की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। राजनाथ बोले- संप्रभुता का सम्मान करते हुए योजनाएं बनें राजनाथ सिंह ने कहा कि देशों को जोड़ने वाली परियोजनाएं सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हुए बनाई जानी चाहिए। इसके लिए सभी संबंधित देशों से सलाह-मशविरा करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि इन सिद्धांतों का पालन नहीं करने वाली परियोजनाएं लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकतीं। भारत ऐसी परियोजनाओं का समर्थन करता है, जो देशों के बाजारों को जोड़ें, व्यापार बढ़ाएं और विकास के नए रास्ते खोलें। लेकिन इनके नाम पर किसी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। राजनाथ सिंह ने चीन का नाम नहीं लिया, लेकिन संप्रभुता और कनेक्टिविटी पर उनकी बात भारत के इसी पुराने रुख से जुड़ती है। इसके पीछे सबसे अहम मामला चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का है। BRI प्रोजेक्ट का विरोध करता है भारत चीन ने 2013 में बेल्ट एंड रोड (BRI) पहल शुरू की थी। इसका मकसद सड़क, रेल, बंदरगाह और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के जरिए चीन को एशिया, यूरोप और अन्य क्षेत्रों के बाजारों से जोड़ना है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) बेल्ट एंड रोड (BRI) पहल की प्रमुख परियोजनाओं में से एक है। यह चीन के शिनजियांग क्षेत्र को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ता है। इसका एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से गुजरता है। भारत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के उन इलाकों को अपना हिस्सा मानता है, जिन पर पाकिस्तान का कब्जा है। भारत का कहना है कि इन इलाकों में चीन की परियोजनाएं उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े सवाल उठाती हैं। राजनाथ सिंह के बयान की 4 और अहम बातें… – चाबहार बंदरगाह पर: राजनाथ ने ईरान के चाबहार बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इनसे मध्य एशिया को बड़े बाजारों से जोड़ने और व्यापार बढ़ाने में मदद मिल सकती है। – SCO की भूमिका पर: राजनाथ ने कहा कि संगठन में सिर्फ नई संस्थाएं बनाने से उपलब्धियां नहीं बढ़ेंगी। नई व्यवस्थाएं ऐसी होनी चाहिए, जो सदस्य देशों की जरूरतें पूरी करें, पहले से चल रहे काम को न दोहराएं और लोगों को सीधा फायदा पहुंचाएं। – दुनिया की आर्थिक चुनौतियों पर: भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार में रुकावटें, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा की चिंताएं और तकनीक के क्षेत्र में बढ़ता अंतर वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। राजनाथ ने इनसे निपटने के लिए आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करने और व्यापार व निवेश को आसान बनाने पर जोर दिया। – व्यापार को आसान बनाने पर: राजनाथ ने कहा कि देशों को जोड़ने के लिए केवल सड़क, रेल और बंदरगाह बनाना काफी नहीं है। सीमा शुल्क की प्रक्रिया आसान करनी होगी, डिजिटल दस्तावेजों का इस्तेमाल बढ़ाना होगा और सामान की ढुलाई से जुड़ी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना होगा, ताकि कारोबार की लागत घटे।

भारत से अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश:वीडियो में उम्मीदवार की तारीफ, मुंबई में बैठे शख्स को हर पोस्ट के 15 डॉलर मिले

अमेरिका में चुनाव के दौरान वोटरों को प्रभावित करने के लिए भारत से सोशल मीडिया पर वीडियो फैलाए गए। इन वीडियो में आम लोग सड़कों पर खड़े होकर एक उम्मीदवार की तारीफ करते और महंगाई जैसे मुद्दों पर अपनी राय देते नजर आए। वीडियो ऐसे बनाए गए थे, जैसे लोग अपनी मर्जी से उम्मीदवार का समर्थन कर रहे हों। लेकिन इन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए पैसे दिए जा रहे थे। मुंबई में बैठा आयुष जैन हर पोस्ट के बदले करीब 15 डॉलर (1400 रुपए) कमा रहा था। गलत जानकारी फैलाने वाले सोशल मीडिया पोस्ट पर नजर रखने वाले दो रिसर्च ग्रुप्स के मुताबिक, इन वीडियो को पोस्ट करने वाले ज्यादातर अकाउंट भारत से चलाए जा रहे थे। डेमोक्रेट उम्मीदवार के समर्थन में 36 वीडियो पोस्ट किए गए यह मामला अगस्त में मिशिगन राज्य में सीनेट चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार को चुनने से पहले का है। सोशल मीडिया पर कम से कम 36 वीडियो पोस्ट किए गए जिन्हें लाखों बार देखा गया। एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम और थ्रेड्स पर डाले गए इन वीडियो में ज्यादातर सांसद हेली स्टीवंस की तारीफ की गई थी। इनमें लोग महंगाई और रोजी-रोटी जैसे मुद्दों पर बात करते हुए स्टीवंस का समर्थन करते नजर आए। हालांकि, वीडियो बनाने वालों की पहचान सामने नहीं आई है और यह भी साफ नहीं है कि इनके पीछे पैसा किसने लगाया था। रिपोर्ट के मुताबिक, यह अभियान स्टीवंस को उनके प्रतिद्वंद्वी डॉ. अब्दुल एल-सैयद के खिलाफ जीत दिलाने की कोशिश कर रहे किसी राजनीतिक समूह से जुड़ा हो सकता है। लेकिन इन वीडियो को फैलाने में स्टीवंस के चुनाव अभियान या उनके समर्थक समूहों का हाथ होने का कोई सबूत सामने नहीं आया है। 4 अगस्त को चुनाव में एल-सैयद ने जीत हासिल की। हर 1000 व्यू पर मिलते थे 1 से 5 डॉलर पेंसिल्वेनिया की कंपनी ने आयुष को काम पर रखा था अमेरिका के पेंसिल्वेनिया राज्य की ‘लुमिना क्लिपर्स’ नाम की एक कंपनी ने आयुष जैन को हायर किया था। यह कंपनी सोशल मीडिया पर बॉट अकाउंट के जरिए पोस्ट की पहुंच बढ़ाने का काम करती है। बॉट ऐसे अकाउंट होते हैं, जिनका इस्तेमाल बड़ी संख्या में पोस्ट और इन्फोर्मेशन फैलाने के लिए किया जा सकता है। इस कंपनी का फोन नंबर UAE का है और इसे पुर्तगाल में रहने वाले आयरलैंड के नागरिक राइस मैके चलाते हैं। मैके ने माना कि उनकी कंपनी ने मिशिगन के इन वीडियो को फैलाने में भूमिका निभाई थी। इसके लिए आयुष जैन और उनके जैसे दर्जनों अन्य लोगों को काम पर रखा गया था। हालांकि, उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि उन्हें यह काम किसने दिया था और इसके लिए कितना पैसा खर्च हुआ। 28 अकाउंट ने पैसे लेकर फैलाए वीडियो इस अभियान का सबसे पहले पता ‘एंटीबॉट4नवालनी’ नाम के समूह ने लगाया। समूह ने एक्स पर ऐसे 28 अकाउंट की पहचान की, जो पैसे लेकर वीडियो पोस्ट कर रहे थे। इन पोस्ट को 70 लाख से ज्यादा बार देखा गया। इसके बाद क्लेमसन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और थ्रेड्स पर भी ऐसे अकाउंट खोजे। इनमें से कुछ अकाउंट पहले चीन से जुड़े बॉट नेटवर्क के जरिए चलाए गए अभियानों में भी सामने आ चुके थे। रिसर्चर्स के मुताबिक, ये अकाउंट आम तौर पर कार्टून और मनोरंजन से जुड़े वीडियो पोस्ट करते थे लेकिन चुनाव के दौरान अचानक राजनीतिक वीडियो फैलाने लगे। डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेट उम्मीदवार के चुनाव के बाद भी इन अकाउंट से राजनीतिक पोस्ट जारी रहीं। इनमें कैलिफोर्निया में गवर्नर पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार स्टीव हिल्टन के समर्थन वाली पोस्ट भी शामिल थीं। ————————– यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प मिडटर्म चुनाव हार सकते हैं:10 में से 9 सर्वे में पीछे, महंगाई-ईरान जंग से लोकप्रियता घटी, अपने ही उम्मीदवार दूरी बना रहे अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

Brent Crude 111 डॉलर के करीब पहुंचा, एशियाई शेयर बाजारों में तेज गिरावट

क्रूड ऑयल की कीमतों में 20 अक्तूबर को जोरदार तेजी दिखी। ब्रेंट क्रूड 1.39 फीसदी की तेजी के साथ 111.16 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 1.78 फीसदी चढ़कर 100 डॉलर के पार निकल गया। यह क्रूड ऑयल का बीते 5 महीनों का सबसे हाई लेवल है। क्रूड की यह तेजी न सिर्फ भारत बल्कि दुनियाभर के शेयर बाजारों को बड़ी चोट पहुंचा सकती है।

20 मई के बाद पहली बार क्रूड 111 डॉलर पर

क्रूड ऑयल की कीमतों में नई तेजी की वजह सऊदी अरब में इंफ्रास्ट्रक्चर पर हूती विद्रोहियों के हमले हैं। गल्फ में भी ऑयल टैंकर्स सहित जहाजों पर हमलों की खबर है। इससे क्रूड की कीमतों में तेज उछाल आया है। 20 मई के बाद पहली बार क्रूड का भाव इस लेवल पर पहुंचा है। हालांकि, फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रही हैं।

ब्रेंट क्रूड में जल्द ज्यादा नरमी का अनुमान नहीं 

ING के एनालिस्ट्स ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट में क्रूड की कीमतों के आउटलुक के बारे में बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रूड की कीमतों को मौजूदा लेवल पर सपोर्ट मिल रहा है। स्थिति नाजुक बनी हुई है, जिससे क्रूड पर रिस्क प्रीमियम बढ़ा है। हालांकि, क्रूड की सप्लाई जारी है, जिससे रिस्क प्रीमियम में धीर-धीरे कमी आ सकती है। लेकिन, फिलहाल कीमतों में नरमी आने के संकेत नहीं हैं।

गल्फ में लगातार हमलों का क्रूड की सप्लाई पर असर

केपलर (kpler) ने अपनी रिपोर्ट में सोमवार को बताया था कि बीते दो हफ्तों में कम से कम 18 जहाजों पर हमलों की खबर है। इससे क्रूड पर रिस्क प्रीमियम बना हुआ है। इधर, हूती विद्रोहियों ने सोमवार को कहा कि उन्होंने सऊदी अरब में एनर्जी, एयरपोर्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। अरामको की साइट को भी निशाना बनाया गया है।

हूती विद्रियों का सऊदी अरब के इंफ्रा पर हमला जारी

हूती विद्रोहियों ने सोमवार को यमन में सुरक्षा बलों के एक प्रशिक्षण शिविर को निशान बनाया, जिसमें 58 लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इन नए हमलों से मध्यपूर्व में अस्थिरता का खतरा बढ़ा है। साथ ही इसका असर एनर्जी की सप्लाई पर पड़ रहा है। इस वजह से पिछले कई दिनों से ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है।

अमेरिका डीजल की सप्लाई के लिए रूस से समझौते को मजबूर

उधर, अमेरिका में क्रूड ऑयल का रिजर्व पिछले हफ्ते गिरने का अनुमान है। अमेरिका में पहले से ही ऑयल खासकर डीजल की कीमतें काफी ऊपर चल रही हैं। इससे अमेरिका को डीजल की सप्लाई के लिए रूस से समझौता करना पड़ा है। लेकिन, इससे ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। क्रूड में उछाल सिर्फ अमेरिका के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए खराब खबर है।

भारत सहित दुनियाभर में महंगाई के बेकाबू होने का खतरा

महंगे क्रूड की वजह से दुनियाभर में महंगाई बेकाबू हो सकती है। इससे केंद्रीय बैंकों को इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने पिछले महीने इंटरेस्ट रेट में 25 बीपीएस की वृद्धि की थी। इस महीने की 28 तारीख को फेड की पॉलिसी आने वाली है। महंगाई को काबू में करने के लिए फेड एक बार फिर इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। इधर, भारत में इस महीने की शुरुआत में RBI ने रेपो रेट रेट 0.25 फीसदी बढ़ाया था। अनुमान है कि केंद्रीय बैंक दिसंबर में एक बार फिर रेपो रेट बढ़ा सकता है।

20 अक्टूबर को एशियाई शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट 

क्रूड में उछाल का असर 20 अक्तूबर को शेयर बाजारों पर देखने को मिला। भारतीय शेयर बाजार दशहरा के मौके पर बंद हैं। लेकिन, दूसरे एशियाई बाजारों में तेज गिरावट देखने को मिली। जापान का निक्केई 1.63 फीसदी नीचे चल रहा था। सिंगापुर का स्ट्रेट टाइम्स 0.25 फीसदी गिरकर चल रहा था। हैंगसेंग में 1.38 फीसदी की गिरावट दिखी। ताइवान का सूचकांक 1.14 फीसदी नीचे चल रहा था। दक्षिण कोरिया के बाजार कोस्पी में 3.88 फीसदी की गिरावट दिखी।

अंतरिक्ष में अगले 5 साल में जंग छिड़ सकती है:अमेरिका-चीन समेत कई देश तैयारी में जुटे; इससे इंटरनेट, बैंकिंग जैसी सुविधा पर असर पड़ेगा

अगले 5 साल में अंतरिक्ष में जंग छिड़ सकती है। विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और चीन जैसे देश एक-दूसरे की सैटेलाइट को निशाना बना सकते हैं। इंटरनेट, टीवी, मौसम की जानकारी और बैंकिंग जैसी कई सेवाएं सैटेलाइट पर निर्भर हैं। अगर युद्ध के दौरान सैटेलाइट को नुकसान पहुंचा, तो इन सेवाओं पर असर पड़ सकता है। विमानों और जहाजों को रास्ता पता करने में भी परेशानी हो सकती है। अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ क्यों बढ़ रही है? चीन के 5 सैटेलाइट ने एक साथ अभ्यास किया अमेरिकी स्पेस फोर्स के मुताबिक, चीन के 5 सैटेलाइट अंतरिक्ष में एक-दूसरे के करीब आए और ऐसी गतिविधियां कीं, जिनका इस्तेमाल जंग में हो सकता है। चीन ऐसी मशीनें बना रहा है, जो अंतरिक्ष में दूसरे सैटेलाइट को पकड़ सकती हैं या उन्हें उनकी जगह से हटा सकती हैं। कुछ रिपोर्टस के मुताबिक रूस के सैन्य सैटेलाइट भी दूसरे देशों के सैटेलाइट के करीब पहुंचकर उनकी निगरानी कर रहे हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को यह आशंका भी है कि रूस के कॉसमॉस-2553 सैटेलाइट में परमाणु हथियार से जुड़े उपकरणों के कुछ हिस्से भेजे गए थे। ब्रिटेन ने अंतरिक्ष की सुरक्षा के लिए यूनिट बनाई ब्रिटेन की वायुसेना ने सितंबर में अपने सैटेलाइट की सुरक्षा के लिए एक यूनिट बनाई है। अमेरिका ने 2019 में अपनी अंतरिक्ष सेना बनाई थी। इसका काम अमेरिकी सैटेलाइट की सुरक्षा करना और अंतरिक्ष में दूसरे देशों की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखना है। 4 देश सैटेलाइट को मिसाइल से नष्ट करने की क्षमता का परीक्षण कर चुके दुनिया के कुछ ताकतवर देश सैटेलाइट को नष्ट करने वाली मिसाइलों का परीक्षण भी कर चुके हैं। इनमें शामिल हैं: अंतरिक्ष में हमला किस तरीके से हो सकता है जीपीएस के सिग्नल रोककर सैटेलाइट से मिलने वाले सिग्नल की मदद से मोबाइल, विमान और जहाज अपनी लोकेशन पता करते हैं। अगर कोई देश इन सिग्नल को रोक दे, तो मोबाइल में सही लोकेशन नहीं दिखेगी। विमानों और जहाजों को भी अपनी सही जगह और रास्ता पता करने में परेशानी हो सकती है। युद्ध के दौरान ऐसा करके दूसरे देश की सेना के लिए रास्ता तय करना और अपनी लोकेशन पता करना मुश्किल बनाया जा सकता है। गलत लोकेशन बताकर इस तरीके में नकली सिग्नल भेजकर मोबाइल, विमान या जहाज को उसकी गलत लोकेशन बताई जाती है। इसे स्पूफिंग कहते हैं। उदाहरण के लिए, कोई जहाज समुद्र में एक जगह मौजूद है, लेकिन नकली सिग्नल की वजह से उसके सिस्टम में दूसरी जगह दिखाई देने लगती है। इससे जहाज का रास्ता तय करना मुश्किल हो सकता है। सैटेलाइट को चलाने वाले कंप्यूटर पर हमला करके सैटेलाइट को जमीन पर मौजूद केंद्रों से नियंत्रित किया जाता है। हैकर इन केंद्रों के कंप्यूटर सिस्टम पर हमला कर सकते हैं। इससे सैटेलाइट से संपर्क टूट सकता है, जरूरी जानकारी चोरी हो सकती है या उसका कामकाज प्रभावित हो सकता है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने इजराइलियों से कहा- नेतन्याहू को दोबारा प्रधानमंत्री बनाएं:किसी और को चुना तो ईरान के खिलाफ अमेरिका को अकेले लड़ना पड़ेगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजराइल के लोगों से प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को दोबारा प्रधानमंत्री चुनने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बीबी नेतन्याहू आपको कभी निराश नहीं करेंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Silver Gold Price Today : एशियाई बाजारों में शुरुआती कारोबार में सोने-चांदी के भाव में नरमी, जानिए आगे कैसी रह सकती है इनकी चाल

Silver Gold Price Today : मंगलवार को एशियाई बाजारों के शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतों में गिरावट आई है। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीति और रिटेल महंगाई के आंकड़ों पर नजर रखे हुए हैं। इससे ब्याज दरों की आगे की दिशा के बारे में संकेत मिल सकते हैं। फिलहाल हाजिर सोना (स्पॉट गोल्ड) 0.3% गिरकर 4,126.84 डॉलर प्रति औंस पर दिख रहा है। वहीं, दिसंबर की डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.3% गिरकर 4,146.00 डॉलर पर दिख रहा है।

निवेशकों का फोकस अब यूएस फेड की 27-28 अक्टूबर की नीति बैठक और अगले हफ्ते आने वाले अमेरिकी ‘पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स’ (PCE) डेटा पर है। यूएस फेड 2% महंगाई दर का लक्ष्य लेकर चल रहा है, इसलिए वह इस डेटा पर बहुत बारीकी से नजर रखे हुए है।

यूएस फेड ने सितंबर में अपनी बेंचमार्क ब्याज दरों को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 3.75%-4.00% की रेंज में कर दिया था। CME के ​​’फेडवॉच टूल’ के मुताबिक ट्रेडर्स का मानना ​​है कि इस बात की 83% संभावना है कि केंद्रीय बैंक अगले हफ्ते दरों में कोई खास बदलाव नहीं करेगा,जबकि दिसंबर में दरों के बढ़ने की उम्मीद 94% बनी हुई है।

इस बीच बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काज़ुओ उएदा ने कहा है कि रिटेल महंगाई दर केंद्रीय बैंक के 2% के लक्ष्य के काफी करीब है। ग्लोबल स्तर पर AI की भारी मांग और टाइट जॉब मार्केट के कारण महंगाई का दबाव बढ़ रहा है, जिससे ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना के संकेत मिलते हैं।

आमतौर पर, ऊंची ब्याज दरों का असर सोने की कीमतों पर पड़ता है क्योंकि इससे सोना (बुलियन) अपने पास रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ बढ़ जाती है, जबकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता।

जियोपोलिटिकल फ्रंट की बात करें तो यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने सोमवार को कहा कि उन्होंने सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रा, हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों पर कई हमले किए हैं।

दूसरी कीमती धातुओं की बात करें तो, स्पॉट सिल्वर 0.7% गिरकर 56.69 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। वहीं, प्लैटिनम 1,639.65 डॉलर पर सपाट दिख रहा है। जबकि, पैलेडियम 0.7% गिरकर 1,112.08 डॉलर पर आ गया है।

एक्सपर्ट्स की राय

स्मॉलकेस मैनेजर और ओमनीसाइंस कैपिटल के सीईओ विकास गुप्ता का कहना है कि अगले 2-3 के नजरिए से सोने को लेकर आम राय यही है कि इसकी कीमतें बढ़ेंगी। इस अवधि के दौरान महंगाई और ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी होगी। हालांकि,ये दोनों चीजें एक साथ नहीं हो सकतीं।

विकास गुप्ता का मानना है कि केंद्रीय बैंक सोने के बड़े खरीदार हो सकते हैं,लेकिन साथ ही ऐसे बड़े विक्रेता भी हो सकते हैं जो उसी समय सोना बेचें,जिससे सोने की कीमतें नियंत्रण में बनी रह सकती है।

भारत में त्योहारों और शादियों का सीजन आने वाला है। आमतौर पर इससे सोने की कीमतें बढ़ती हैं। हालांकि,फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना को देखते हुए,ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतें दबाव में रह सकती हैं। भारत में त्योहारों के दौरान सोने की कीमतों में थोड़ी तेजी आ सकती है,लेकिन उसके बाद कीमतें स्थिर रहने की संभावना है।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स में हेड ऑफ रिसर्च,राजीव शरण का कहना है कि भारत में दशहरा मनाया जा रहा है और इस समय 24-कैरेट सोना लगभग 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है। पिछले महीने यह अपने रिकॉर्ड हाई से 6% से ज्यादा नीचे आया है। इस त्योहारी सीजन में जो बदलाव आया है वह सोने के प्रति भारतीय परिवारों के लगाव में नहीं,बल्कि इसे खरीदने के तरीके में है। भारतीय अपने त्योहारी बजट को तो स्टेबल रख रहे हैं,भले ही इसके लिए उन्हें कम वजन वाले आभूषण खरीदने पड़ें।

साथ ही लोग सोने के सिक्कों,बार और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में अधिक निवेश कर रहे हैं। यह बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि त्योहारी खरीदारी अब केवल गहने खरीदने तक सीमित न रहकर, संपत्ति को सुरक्षित रखने के एक व्यवस्थित तरीके में बदल रही है। आगे चलकर, अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें सोने की कीमतों में बहुत तेज उछाल नहीं आने देंगी,जिससे निकट भविष्य में सोने की कीमत में 5% तक की उतार-चढ़ाव वाली रेंज बनी रहने की संभावना है। इस दशहरे पर,खरीदार कीमतों में आई हालिया गिरावट को किसी चेतावनी के रूप में नहीं, बल्कि खरीदारी शुरू करने के एक अच्छे मौके के तौर पर देख रहे हैं।

 

 

Gold Price Today: सोने में गिरावट पर लगा ब्रेक, दशहरा पर 24 और 22 कैरेट दोनों का भाव चढ़ा

 

 

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