चीन ने टनल बोरिंग मशीनों के एक्सपोर्ट पर लगाया बैन, क्या ये भारत के मेट्रो और टनल प्रोजेक्ट्स को झटका देने की चाल?

भारत में मेट्रो, हाई-स्पीड रेल और सुरंगों के निर्माण पर चीन के एक नए फैसले का असर पड़ सकता है। चीन ने टनल बोरिंग मशीन (TBM) समेत कुछ अहम मशीनों के निर्यात पर नए प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। इन मशीनों का इस्तेमाल जमीन के नीचे सुरंग बनाने में होता है। ऐसे में चीन के इस कदम से भारत की कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के सामने मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

चीन के वाणिज्य मंत्रालय (MOFCOM) ने कहा कि ये प्रतिबंध राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए लगाए गए हैं। निर्यात पर ये पाबंदियां 18 नवंबर से लागू होंगी।

TBM के प्रतिबंध से भारत की कई परियोजनाओं पर पड़ेगा असर

टनल बोरिंग मशीनों (TBM) और उनसे जुड़ी चीजों के निर्यात पर लगी इन पाबंदियों से भारत की कई परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है। इनमें अंडरग्राउंड मेट्रो सिस्टम, हाई-स्पीड रेल लाइनें और सीमावर्ती इलाकों सहित कई जगहों पर बन रही सुरंगें शामिल हैं।

गौरतलब है कि चीन पहले भी भारत को TBM के निर्यात पर पाबंदियां लगाता रहा है। साल 2024 में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जर्मनी के वाइस चांसलर रॉबर्ट हाबेक के सामने यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने बताया था कि चीन एक जर्मन कंपनी को वहां निर्मित टनल बोरिंग मशीनें भारत निर्यात करने नहीं दे रहा है।

वाणिज्य मंत्रालय की घोषणा के अनुसार, चीन के नए प्रतिबंधों में ‘वॉकिंग एक्सकेवेटर’ (चलने वाले उत्खनन यंत्र) और ‘प्लेट्यू-टाइप वेट शॉटक्रिट मशीनें’ भी शामिल हैं।

क्या है ‘वॉकिंग एक्सकेवेटर’ मशीन?

बता दें कि ‘वॉकिंग एक्सकेवेटर’ एक ऐसी मशीन है जिसे हर तरह के भू-भाग पर चलने के लिए डिजाइन किया गया है। यह अपने वर्किंग अटैचमेंट, आउट्रिगर या पहियों की मिली-जुली गतिविधियों का इस्तेमाल करके कठिन इलाकों में भी खुदाई का काम कर सकती है।

‘प्लेट्यू-टाइप वेट शॉटक्रिट मशीन’ का इस्तेमाल ऊंचे पठारी इलाकों में किया जाता है। यह सीमेंट और दूसरी निर्माण सामग्री को नोजल तक पहुंचाती है। इसके बाद हवा और एक खास केमिकल की मदद से इस मिश्रण को तेज दबाव के साथ किसी सतह पर छिड़का जाता है। इसका इस्तेमाल निर्माण कार्यों में सतह को मजबूत बनाने के लिए किया जाता है।

घोषणा के मुताबिक, इन नए उपायों के तहत ड्रेजर (तलछट हटाने वाली मशीन) से जुड़ी कुछ वस्तुओं के निर्यात नियंत्रण को भी बेहतर बनाया गया है। इनमें स्लरी पंप, ड्रैगहेड और कटरहेड जैसी चीजें शामिल हैं, जो तय तकनीकी मानकों को पूरा करती हैं।

AI से सोलर पावर तक, 14 तकनीकों पर नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी में चीन

वहीं शुक्रवार को, MOFCOM ने एक ड्राफ्ट प्लान जारी किया, जिसमें 14 तरह की तकनीकों पर नए निर्यात प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। इन तकनीकों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बायोटेक्नोलॉजी से लेकर फोटोवोल्टिक सोलर पावर तक के क्षेत्र शामिल हैं।

इन प्रस्तावित प्रतिबंधों का वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा पर बड़ा असर पड़ सकता है, खासकर उन देशों के लिए जो चीनी AI पर निर्भर हैं।

सोमवार को जारी घोषणा के मुताबिक, इन प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले सामान का निर्यात करने वाली कंपनियों को चीन के वाणिज्य मंत्रालय से लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए उन्हें चीन के निर्यात नियंत्रण कानून और दोहरे इस्तेमाल वाली वस्तुओं से जुड़े नियमों का पालन करना होगा।

घोषणा में यह भी कहा गया है कि निर्यातकों को प्रतिबंधित सामान की सही पहचान करनी होगी और सीमा शुल्क से जुड़े दस्तावेजों में उसकी पूरी जानकारी देनी होगी। साथ ही, हर सामान के लिए तय दोहरे इस्तेमाल वाले निर्यात नियंत्रण कोड का उल्लेख करना भी जरूरी होगा।

सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, जिन वस्तुओं पर निर्यात नियंत्रण लागू नहीं है, लेकिन जिनकी तकनीकी विशेषताएं या प्रदर्शन समान हैं, उनके मामले में निर्यातकों को अपने दावों को साबित करने के लिए विस्तृत तकनीकी पैरामीटर देने होंगे।

अगर सीमा शुल्क अधिकारियों को दी गई जानकारी की सटीकता, उसके पूरा होने या उसकी असलियत पर शक होता है, तो वे उसकी दोबारा जांच कर सकते हैं। MOFCOM की घोषणा के अनुसार, जांच पूरी होने तक संबंधित सामान की खेप को आगे भेजने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

ये निर्यात नियंत्रण उन ड्रेजर स्लरी पंपों पर लागू होंगे, जिनका इनलेट व्यास कम से कम 0.55 मीटर है और जिनकी अधिकतम रोटेशनल स्पीड 400 चक्कर प्रति मिनट (rpm) से अधिक नहीं है।

क्या होते हैं ड्रेजर स्लरी पंप?

बता दें कि ड्रेजर स्लरी पंप भारी-भरकम सेंट्रीफ्यूगल पंप होते हैं। इन्हें नदियों, झीलों, बंदरगाहों और महासागरों की तलहटी से पानी और ठोस पदार्थों (जैसे रेत, बजरी, गाद, मिट्टी और खदान के अवशेष) के सघन मिश्रण को खींचने और एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है।

ऐसे पंपों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए मुख्य पुर्जे भी निर्यात नियंत्रण के दायरे में आएंगे। इनमें कम से कम 1.3 मीटर के आंतरिक व्यास वाले पंप केसिंग और कम से कम 1.3 मीटर व्यास वाले इम्पेलर शामिल हैं।

घोषणा के अनुसार, इन नियंत्रणों में ‘ट्रेलिंग सक्शन हॉपर ड्रेजर’ (TSHD) में इस्तेमाल होने वाले ड्रैगहेड (जिनके सक्शन पाइप का व्यास कम से कम 0.55 मीटर है) और ‘कटर सक्शन ड्रेजर’ (CSD) में इस्तेमाल होने वाले कटरहेड (जिनके बाहरी कटर रिंग का व्यास कम से कम 2.1 मीटर है) भी शामिल हैं।

TSHD और CSD पानी के नीचे जमा तलछट (sediments) को निकालने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले दो प्रमुख प्रकार के समुद्री जहाज हैं। हालांकि, ये पूरी तरह से अलग-अलग तंत्रों (mechanisms) पर काम करते हैं और अलग-अलग वातावरण के लिए उपयुक्त होते हैं।

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Tesla, Knight Rider, Ferrari and the air thrusted car

Tesla, Knight Rider, Ferrari and the air thrusted car
Tesla, Knight Rider, Ferrari and the air thrusted car

Pretty much the entire world is all agog, watching the new Tesla Roadster take flight.

To be clear, these stunts were performed by a specially prepped Roadster and without a driver. Tesla chief Elon Musk even went on to say that he was not sure that this would be legal.

But flight booster-aided model (Rocket) aside, Tesla is promising a regular ‘Performance’ Roadster with a ground effects fan, a la McMurtry, as well as a ‘Thrust’ version with air thrusters for acceleration and a claimed spine-crushing 0 to 100kph acceleration time of under 1 second.

Interestingly, this isn’t the first time this idea has been thought of. Hollywood’s Knight Rider had his Turbo Boost jump and Super Pursuit mode, but closer to the real world, carmaker Ferrari toyed with the idea of gas thrust boosters and even had a patent issued back in 2018.

While the Tesla Roadster is all-electric, the Italian carmaker’s patent describes an internal combustion-powered car with an additional system comprising a compressed air tank and multiple horizontally as well as vertically oriented nozzles.

The patent says these can generate air jets for massively quick acceleration thrust, beyond what the engine and the limits of the tyres’ grip would provide.

The vertically oriented pushers can also generate a downward force to enhance road grip and downforce, while the horizontal pushers can be deployed to increase steering turn-in ability. Interestingly, the patent says its system would also generate correctional forces; for example, if the car is losing grip, an opposing thrust can be generated to correct the car’s line or even slow it down in extreme risk situations.

The patent also describes the use of the system on a motorcycle, Street Hawk style. Ferrari has clearly not put the system into production, and it’s not known if the Italian car maker is pursuing its development. So it would be interesting to see if Ferrari would hold rights or a claim over the Tesla Roadster system and how the two car makers would respond.

ये कार उड़ती भी है और हवा में पलटी भी मारती है! Elon Musk की Tesla ने दिखाया नया Roadster

Tesla : Tesla ने नई Roadster से पर्दा उठा दिया है। कंपनी का दावा है कि यह कार हवा में भी उछल सकती कंपनी का दावा है कि यह सुपरकार सिर्फ सड़क पर दौड़ेगी ही नहीं, बल्कि हवा में भी उछल सकती है। Yahoo Finance की रिपोर्ट के मुताबिक, कार में लगे एयर थ्रस्टर्स की मदद से यह कुछ देर के लिए हवा में उठ सकती है।टेक्सास के वाको में SpaceX फैसिलिटी में हुए डेमो में Tesla Roadster को रैंप से छलांग लगाते, हवा में 360 डिग्री घूमते और फिर सुरक्षित जमीन पर उतरते दिखाया गया। इस दौरान CEO एलन मस्क ने कहा, “खैर, यह काम कर गया।”

रैंप से छलांग लगाकर हवा में पहुंची Tesla Roadster

टेक्सास के वाको में SpaceX की फैसिलिटी में Tesla ने नई Roadster का डेमो किया। इसमें कार को रैंप से उछलते और हवा में घूमते हुए दिखाया गया। वैक्यूम फैन सिस्टम की मदद से कार रैंप पर टिकी रही, जबकि एयर थ्रस्टर्स ने हवा में उसका संतुलन बनाए रखने में मदद की। इसके बाद कार सुरक्षित जमीन पर उतर गई।कार्यक्रम में Roadster को कई Tesla गाड़ियों, यहां तक कि एक सेमी ट्रक के ऊपर से गुजरते हुए भी दिखाया गया। कंपनी ने इस डेमो के जरिए कार के खास फीचर्स और नई तकनीक को दिखाने की कोशिश की।

तीन वेरिएंट में आएगी कार

Tesla ने नई Roadster को तीन वेरिएंट में पेश किया है। हर मॉडल में सीटों की संख्या और परफॉर्मेंस के हिसाब से अलग-अलग फीचर्स मिलेंगे।

पहला वेरिएंट : यह सड़क पर चलाने के लिए तैयार दो सीटों वाला मॉडल है। इसमें मल्टी-मोड सक्शन सिस्टम दिया गया है, जो सड़क पर प्रदर्शन को बेहतर बनाता है।

दूसरा वेरिएंट : यह भी दो सीटों वाला मॉडल है। इसमें सक्शन सिस्टम के साथ पीछे की ओर कोल्ड-गैस थ्रस्टर्स दिए गए हैं। कंपनी के मुताबिक, यह 0 से 60 मील प्रति घंटे की रफ्तार 0.9 सेकंड से कम में पकड़ सकता है।

तीसरा वेरिएंट : यह एक सीट वाला मॉडल है। इसमें कार के चारों ओर कोल्ड-गैस थ्रस्टर्स लगे हैं, जो आगे और ऊपर की ओर गति देने के साथ हवा में घूमने में मदद करते हैं। इसी वेरिएंट को सीमित दूरी तक उड़ान भरने में सक्षम बताया गया है।

https://x.com/elonmusk/status/2110913107094606330

 

Starlink Row In India: कमल हासन से लेकर कुणाल कपूर तक, भारत में स्टारलिंक विवाद पर बोले एक्टर्स

Starlink Row In India: कमल हासन के बाद बॉलीवुड एक्टर कुणाल कपूर ने SpaceX के फाउंडर और CEO एलन मस्क के उस दावे पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में कुछ ताकतवर लोगों (ओलिगार्क्स) ने मार्केट पर अपना कब्जा बनाए रखने के लिए उनकी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस, स्टारलिंक (Starlink) को “ब्लॉक” कर दिया है। कुणाल ने एलन की सोच को “औपनिवेशिक मानसिकता” (colonial mindset) बताया और टेक अरबपतियों की “मसीहा बनने की भावना” (saviour complex) की ओर इशारा किया।

कुणाल ने एलन मस्क की ‘औपनिवेशिक मानसिकता’ पर सवाल उठाए

कुणाल ने लिखा- “इस वीक एलन मस्क की बातों को सुनकर लगा कि वह पश्चिमी टेक अरबपतियों का मसीहा बनने की कोशिश में लगे हैं। वे आपके देश में आकर आपको भविष्य बेचते हैं। अगर आप उनका स्वागत करते हैं तो आप एक ऐसे देश माने जाते हैं जो तरक्की चाहता है। अगर आप उन्हें इंतजार करवाते हैं तो अचानक आपके लोग पीड़ित बन जाते हैं, जिन्हें किसी ‘चुने हुए व्यक्ति’ द्वारा उनके अपने ही संस्थानों से बचाने की जरूरत होती है।”

कुणाल ने अतीत की उन घटनाओं का जिक्र किया जब देशों ने एलन की मदद लेने से इनकार किया था। उन्होंने नकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी। एक्टर ने 2018 में थाईलैंड में हुए बचाव अभियान का जिक्र किया, जब वाइल्ड बोअर्स सॉकर टीम के 11 से 16 साल की उम्र के 12 सदस्यों और उनके 25 साल के असिस्टेंट कोच को थाम लुआंग गुफा परिसर से बचाया गया था। बचाव दल ने उस मिनी-सबमरीन का इस्तेमाल नहीं किया जो एलन ने ऑपरेशन के लिए दी थी, जिससे वे नाराज हो गए थे।

उन्होंने अगस्त 2024 में ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट द्वारा X (पहले ट्विटर) को देश भर में सस्पेंड करने का भी जिक्र किया, क्योंकि यह प्लेटफॉर्म कोर्ट के आदेशों का पालन करने में विफल रहा था। कुणाल ने लिखा, “यह एक पैटर्न है। जब थाई बचाव दल ने फंसे हुए लड़कों के लिए मस्क द्वारा भेजी गई मिनी-सबमरीन का इस्तेमाल नहीं किया और गोताखोर वर्नोन अनस्वर्थ ने इस विचार को अव्यावहारिक बताया, तो मस्क ने उन पर ‘पेडो गाइ’ (बच्चों का शोषण करने वाला व्यक्ति) होने का आरोप लगाया।

जब ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट ने X को अपने फैसलों का पालन करने का आदेश दिया, तो मस्क ने जज को ‘तानाशाह’ कहा। स्क्रिप्ट शायद ही कभी बदलती है। बस देश बदलता है। औपनिवेशिक मानसिकता का मतलब हमेशा किसी देश पर राज करना नहीं होता। कभी-कभी यह सोच होती है कि आप वहां एक मसीहा बनकर आए हैं और अगर देश तुरंत आपको ऐसा नहीं मानता, तो जरूर देश में ही कुछ गड़बड़ है।”

एलन मस्क ने क्या कहा था?

एलन ने भारत में स्टारलिंक की संभावनाओं के बारे में कई ट्वीट किए हैं, जिनमें अंबानी परिवार का भी जिक्र किया गया है। उन्होंने लिखा, “स्टारलिंक के पास 165 से ज्यादा देशों में लाइसेंस है और इसने भारत सरकार के हर नियम और जरूरत को पूरा करने में पांच साल बिताए हैं, तो फिर अभी तक लाइसेंस क्यों नहीं मिला? क्या अंबानी ही भारत के असली बॉस हैं?”

क्या बोले कमल हासन

टेक अरबपति की चौंकाने वाली बातों के तुरंत बाद एक्टर और नेता कमल हासन ने उन पर सवाल उठाते हुए कहा, “किसी भी अरबपति को देश की पॉलिसी तय नहीं करनी चाहिए – चाहे वह भारत हो या अमेरिका।” शुक्रवार को हासन ने मस्क की पहली पोस्ट को री-शेयर किया और स्टारलिंक-भारत विवाद पर अपनी राय रखी। एक्टर ने कहा कि, “भारत जानता है कि हमारे नेटवर्क और स्पेक्ट्रम रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर हैं न कि सिर्फ कमर्शियल एसेट्स। भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।”

एक कड़े बयान में हासन ने कहा कि भारत को भारतीय और ग्लोबल, दोनों तरह के प्रोवाइडर्स का स्वागत करना चाहिए, जो भी दूर-दराज के इलाकों के लिए सबसे प्रैक्टिकल और किफायती ‘लास्ट-माइल सॉल्यूशन’ दे सके।

भारत के संचार मंत्रालय ने इस सुझाव को खारिज कर दिया कि देश का रेगुलेटरी फ्रेमवर्क भेदभावपूर्ण है। गुरुवार को जारी एक बयान में मंत्रालय ने कहा, “सोशल मीडिया पर सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए भारत के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की निष्पक्षता के बारे में एक पोस्ट शेयर किया जा रहा है, जिसमें यह सुझाव दिया गया है कि इसे भेदभावपूर्ण तरीके से लागू किया जा रहा है। सरकार ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं सहित सभी टेलीकम्युनिकेशन सेवाओं के लिए एक निष्पक्ष और भेदभाव-रहित ऑथराइजेशन फ्रेमवर्क लागू किया है।”

Elon Musk: एक फैसला और डूब गए ₹1.75 लाख करोड़! AI पर ये दांव मस्क को पड़ गया भारी?

Elon Musk: दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्क की संपत्ति में बुधवार को अचानक $21 बिलियन (करीब ₹1.75 लाख करोड़) से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई। मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के शेयरों में आई अचानक गिरावट को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्पेसएक्स एनवीडिया के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चिप्स खरीदने के लिए $40 बिलियन का भारी-भरकम कर्ज जुटाने की योजना बना रही है, जिसके सामने आते ही निवेशकों में खलबली मच गई।

कैसे घटी मस्क की नेटवर्थ?

फोर्ब्स की रियल-टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट के अनुसार, बुधवार सुबह तक मस्क की कुल संपत्ति घटकर $1.03 ट्रिलियन रह गई, जो एक ही दिन में 2.04% की गिरावट है।

इतनी बड़ी कमी की वजह बना है उनकी कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट। स्पेसएक्स के शेयर करीब 2% गिरकर $168.86 पर कारोबार कर रहे थे, वहीं टेस्ला के शेयरों में भी 1.5% की गिरावट देखी गई।

मस्क के पास स्पेसएक्स में ऑप्शंस सहित लगभग 38% हिस्सेदारी है। यही वजह है कि रॉकेट और एआई क्षेत्र की इस दिग्गज कंपनी के शेयरों में जरा सी भी हलचल मस्क की कुल संपत्ति पर बड़ा असर डालती है।

क्यों गिरे स्पेसएक्स के शेयर?

स्पेसएक्स के शेयरों में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह $40 बिलियन की नई फाइनेंसिंग की खबरें हैं। कंपनी अपने एआई इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार करने के लिए एनवीडिया के एआई चिप्स खरीदना चाहती है।

‘फाइनेंशियल टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस $40 बिलियन के फंड में $10 बिलियन का बैंक लोन और $30 बिलियन का इन्वेस्टमेन्ट-ग्रेड डेट शामिल होगा।ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, यह सौदा 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है, हालांकि बातचीत अभी शुरुआती स्तर पर है।

क्रेडिट मार्केट में दिखी घबराहट: बॉन्ड और डिफॉल्ट स्वैप पर असर

$40 अरब के अतिरिक्त कर्ज की खबर से क्रेडिट मार्केट में चिंता बढ़ गई। स्पेसएक्स के 5-साल के क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप यानी जो कंपनी के डिफॉल्ट होने के जोखिम का बीमा होता है उसका स्प्रेड बढ़कर 197.6 बेसिस पॉइंट्स के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। जून में जब यह शुरू हुआ था, तब यह महज 110 बेसिस पॉइंट्स पर था। 194 बेसिस पॉइंट्स का मतलब है कि निवेशकों को $1 मिलियन के स्पेसएक्स कर्ज के बीमे के लिए सालाना $19,400 चुकाने होंगे। साथ ही साल 2056 में मैच्योर होने वाले स्पेसएक्स के बॉन्ड्स पर यील्ड स्प्रेड अमेरिकी ट्रेजरी के मुकाबले बढ़कर 2.36% पर पहुंच गया।

IPO के बाद एक और बड़ा फाइनेंसिंग राउंड

कंपनी का यह कदम शेयर बाजार में लिस्टिंग के महज कुछ ही महीनों बाद आया है। स्पेसएक्स ने जून में $135 प्रति शेयर के भाव पर अपना आईपीओ लॉन्च किया था और नैस्डैक पर SPCX टिकर के तहत लिस्ट हुई थी। आईपीओ के जरिए कंपनी ने करीब $85.7 बिलियन जुटाए थे।

जून के अंत में कंपनी ने 2031 से 2056 की मैच्योरिटी वाले $25 बिलियन के सीनियर नोट्स जारी किए थे। तब रेटिंग एजेंसियों (Moody’s – Baa1, Fitch – BBB+, S&P – BBB) ने इसे इन्वेस्टमेन्ट-ग्रेड रेटिंग दी थी। अगर $40 बिलियन की यह नई फाइनेंसिंग पूरी हो जाती है, तो कंपनी के कुल कर्ज में भारी बढ़ोतरी होगी।

एनवीडिया चिप्स पर स्पेसएक्स का बड़ा दांव

एआई की रेस में आगे रहने के लिए मस्क की कंपनी पूरी तरह से एनवीडिया के हार्डवेयर पर निर्भर है। अगस्त में स्पेसएक्स की अर्निंग्स कॉल के दौरान मस्क ने साफ कहा था कि, ‘हमने पूरी तरह से एनवीडिया पर निर्माण करने का फैसला किया है क्योंकि हमारा मानना है कि ‘वेरा रुबिन आर्किटेक्चर’ सबसे बेहतरीन है।’

दरअसल, इस समय पूरी टेक इंडस्ट्री (अल्फाबेट, मेटा, ओरेकल, अमेजन) डेटा सेंटर्स और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए डेट मार्केट से भारी कर्ज उठा रही है। एनवीडिया ने भी एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के लिए अपोलो, ब्लैकस्टोन और गोल्डमैन सैक्स जैसे दिग्गजों के साथ $500 बिलियन का प्लेटफॉर्म बनाने की घोषणा की है।

गिरावट के बाद भी नंबर-1 और ट्रिलियनेयर बने हुए हैं मस्क

$21 बिलियन के नुकसान के बावजूद एलन मस्क दुनिया के सबसे अमीर इंसान बने हुए हैं और उनका ‘ट्रिलियनेयर’ का टैग बरकरार है। मस्क ने सबसे पहले जून में स्पेसएक्स के सफल आईपीओ के बाद $1 ट्रिलियन का आंकड़ा पार किया था, जब कंपनी की मार्केट वैल्यू लगभग $2 ट्रिलियन पहुंच गई थी। हालांकि इसके बाद शेयरों में गिरावट से उनकी संपत्ति $1 ट्रिलियन से नीचे आ गई थी, लेकिन इसी हफ्ते स्पेसएक्स और टेस्ला में आई तेजी के चलते उन्होंने दोबारा यह मुकाम हासिल किया था।

Production-spec Tesla Roadster global unveil on October 1

Production-spec Tesla Roadster global unveil on October 1
Tesla Roadster teased

The production-spec Tesla Roadster is set to be unveiled on October 1, 2026, with the American brand announcing the same via its official social media handle. Moreover, a subsequent teaser image released by Tesla reveals a few design details of the upcoming Roadster, with the company also making statements including “10.01” and “Go for launch”. This is to be the production-spec model of the Tesla Roadster, with the concept first being showcased to the public in November 2017.

  • Teaser shows full-width LED tail-lights and a rear wing.
  • Depicted with four nozzles at the back. 

Tesla Roadster design

The teaser shows the rear silhouette of this electric sports car

The first teaser by Tesla shows a large rear wing, full-width LED tail-lights and what appear to be four horizontally arranged nozzles. These nozzles were originally set to be part of the so-called ‘SpaceX option package’ for the Tesla Roadster, with brand co-founder and CEO, Elon Musk, saying that they will be “rocket thrusters to improve acceleration, top speed, braking and cornering”. Owing to these design additions, the production-spec Tesla Roadster looks more dramatic than the concept which was showcased nearly a decade ago. It’s unclear what other design changes Tesla has made to the production-spec Roadster.

Tesla Roadster technical details

The Roadster concept originally claimed a maximum range of 620 miles

According to Tesla, the Roadster concept offered a maximum range of 620 miles (approximately 998km), a top speed in excess of 250mph (over 402kph) and a 0-60mph (0-97kph) time of 1.9 seconds. Responding to a comment on X, Elon Musk has previously stated that the SpaceX rocket thruster option package will allow the production-spec Roadster to accelerate from 0-60mph in just 1.1 seconds.

Tesla Roadster unveil

The American brand has repeatedly delayed the launch of the Roadster

Those interested in buying the Roadster could reserve one by paying GBP 38,000, as per Tesla. The Roadster is finally set to be unveiled at Waco, Texas, with Tesla having invited those who have reserved the car to attend the event. That said, this is not the first time Tesla is announcing a timeline for the launch of the Roadster. Back in November 2025, brand boss Elon Musk stated on social media that the Tesla Roadster will be launched in April 2026 – a timeline that wasn’t met.

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AI की सुस्त रफ्तार पर तेज गिरावट, 13% टूट गया SoftBank का शेयर, ये है कनेक्शन

सॉफ्टबैंक ग्रुप के शेयरों में बिकवाली की ऐसी आंधी आई कि यह करीब तीन महीने में सबसे तेज स्पीड से नीचे फिसल गया। यह दबाव ऐसे समय में आया है, जब एंथ्रॉपिक पीबीसी (Anthropic PBC) और चैटजीपीटी (ChatGPT बनाने वाली कंपनी ओपनएआई (OpenAI) ने डेवलपर्स से सुरक्षा कारणों से एआई डेवलपमेंट की स्पीड सुस्त करने को कहा है। इसके चलते जापान के टेक इंवेस्टर सॉफ्टबैंक (SoftBank) को लेकर मार्केट की चिंता बढ़ गई और धड़ाधड़ इसके शेयरों की बिक्री बढ़ गई। जापान के मार्केट में इसके शेयर आज सोमवार 14 सितंबर को 13% से अधिक टूट गए जोकि जून के आखिरी दिनों के बाद से इसके लिए सबसे बड़ी गिरावट है।

SoftBank को क्यों लगा झटका

एआई की रफ्तार सुस्त करने की अपील ने सॉफ्टबैंक के शेयरों को तगड़ा झटका दिया है। इसकी वजह ये है कि एआई इंडस्ट्री में निवेश के लिए सॉफ्टबैंक लगातार ताबड़तोड़ कर्ज ले रहा है और यह ओपनएआई के सबसे बड़े निवेशकों में शुमार है। इसमें सॉफ्टबैंक का कुल निवेश अक्टूबर तक करीब $6.5 हजार करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि सॉफ्टबैंक के फाउंडर मासायोशी सोन (Masayoshi Son) के एआई की संभावनाओं पर अत्यधिक भरोसे को लेकर अब निवेशक चिंता जता रहे हैं। मासायोशी ने अरबों डॉलर के कई प्रोजेक्ट्स शुरू किए हैं, लेकिन रेवेन्यू कितना मिलेगा, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने ‘एआई बबल’ की आशंकाओं को खारिज कर दिया है लेकिन इस आक्रामक रणनीति के चलते सॉफ्टबैंक भारी-भरकम वोलैटिलिटी के रिस्क में आ गई है।

क्या है सॉफ्टबैंक की योजना?

सॉफ्टबैंक की योजना ¥1 ट्रिलियन ($6.5 बिलियन) यानी ₹62 हजार करोड़ से अधिक के रिटेल बॉन्ड जारी करने की है। इसके अलावा ओपनएआई के शेयरों से जुड़े करीब $1000 करोड़ के लोन हासिल करने की है। यह एबीबी रोबोटिक्स और डिजिटलब्रिज जैसी कंपनियों के अधिग्रहण के लिए फंड जुटा रही है। सॉफ्टबैंक की योजना दुनिया भर में डेटा सेंटर बनाने की भी है।

AI पर बहस तेज, Trump ने कहा निगेटिव ताकतें कर रही शिकायतें, इतना गंभीर है मामला

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

OpenAI IPO: पहले सेफ्टी, फिर आईपीओ; इस साल नहीं लिस्ट होगी ChatGPT, खुद Sam Altman ने किया ऐलान

OpenAI IPO: चैटजीपीटी (ChatGPT) की पैरेंट कंपनी ओपनएआई का आईपीओ इस साल 2026 में भी नहीं आने वाला है। ये बातें खुद कंपनी के सीईओ सैम आल्टमैन (Sam Altman) ने कही है। फॉर्च्यून के साथ एक इंटरव्यू में सैम आल्टमैन ने कहा कि फिलहाल कंपनी का ध्यान एआई तकनीक से जुड़ी सुरक्षा से मसलों को सुलझाने पर है और ऐसे में इस साल कंपनी की शेयर मार्केट में लिस्ट होने की कोई योजना नहीं है। शनिवार को सामने आए इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि आईपीओ लाने के लिए यह गलत समय होगा और अगले साल से पहले यह होने वाला नहीं हैं।

OpenAI के सीईओ Sam Altman किस खतरे से कर रहे सेफ्टी की बात?

ओपनएआई के सीईओ सैम आल्टमैन का कहना है कि इस दशक के आखिरी तक सभी के मारे जाने का लगभग 10% रिस्क उठाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि इस समय दुनिया एक नए दौर में एंट्री कर रही है और जैसा कि अब तक होता आया है, उसी तरह से इस दौर में भी अलग तरह से काम करना होगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पूरी मानवता को फायदा पहुंचाने वाला ऐसा काम किया जाए, लेकिन यह भी सुनिश्चित हो कि कोई भी इसके करीब का भी रिस्क न उठाए।

बता दें कि एआई से इंसानों के अस्तित्व के खत्म होने की चर्चा अब चर्चा का मुख्य विषय बन चुकी है। अभी हाल ही में एंथ्रॉपिक के एक रिसर्चर ने इससे जुड़ी चिंता जताते हुए इस्तीफा दिया तो और खलबली मच गई। रिसर्चर ने चिंता जताई कि एंथ्रॉपिक एआई को लेकर गैर-जिम्मेदाराना तरीके से काम कर रही थी और यह दशक के आखिरी तक सभी इंसानों को खत्म कर सकता है। एंथ्रॉपिक के एक मौजूदा एंप्लॉयी ने भी X (पूर्व नाम Twitter) पर एक पोस्ट में कहा कि अगले दशक तक इस तरह की स्थिति बनने की आशंका 10% से अधिक हो सकती है। ऐसे में इसे लेकर सैम आल्टमैन का कहना है कि इस बात को लेकर सभी को एक राय होना चाहिए कि ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाना है जिससे एआई के हाथों इंसानों को अपना कंट्रोल देने का रिस्क हो जाए।

जून में दाखिल किया था का IPO का एप्लीकेशन

ओपएनएआई ने जून महीने में आईपीओ के लिए गोपनीय तरीके से एप्लीकेशन फाइल किया था। अब सामने आ रहा है कि कंपनी इस साल आईपीओ नहीं लाने वाली है लेकिन यह नहीं बताया कि यह शेयर मार्केट में कब लिस्ट होगी। वैसे एआई सेक्टर की एक और कंपनी एंथ्रॉपिक भी आईपीओ की तैयारी कर रही है और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह स्पेसएक्स (SpaceX) के रिकॉर्ड आईपीओ से भी बड़ा हो सकता है। स्पेसएक्स का $86 अरब का आईपीओ इस साल आया था।

AI का खतरा आया सामने, डरे Elon Musk, इस काम के लिए Dario Amodei की कॉल पर Sam Altman भी हुए राजी

AI बेकाबू! Dario Amodei, Sam Altman और Elon Musk आए साथ; ग्रोथ की रफ्तार सुस्त करने पर राजी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की दुनिया तेजी से बढ़ रही है लेकिन इसी इंडस्ट्री की एक दिग्गज कंपनी एंथ्रॉपिक (Anthropic) के सीईओ डेरियो एमोडेई (Dario Amodei) इसकी रफ्तार कम करने की वकालत कर रहे हैं। इस मामले में उन्हें ओपनएआई (OpenAI) के सीईओ सैम आल्टमैन (Sam Altman) और टेस्ला (Tesla) के मालिक एलॉन मस्क (Elon Musk) से सपोर्ट मिला है। डेरियो का कहना है कि एआई डेवलपमेंट की रफ्तार सुस्त करनी होगी ताकि भविष्य में इंसानों का एडवांस्ड एआई सिस्टम्स पर नियंत्रण न खो जाए। एमोडेई ने ये बातें ऐसे समय में कही है जब कई टेक एक्सपर्ट्स एआई के अनियंत्रित विकास और इस्तेमाल को लेकर चिंता जता चुके हैं।

क्या कहना है Anthropic के Dario Amodei का

एमोडेई ने एआई के खतरों को लेकर एक निबंध लिखा है। इसमें उन्होंने लिखा है कि एआई जिंदगी की क्वालिटी में काफी सुधार कर सकता है, लेकिन इसमें बड़े खतरे भी हैं। उनका कहना है कि एआई की रफ्तार सुस्त करनी ही होगी और अगर इसकी ग्रोथ बिना कंट्रोल के जारी रही तो एक ऐसा समय भी आ सकता है कि जब इंसानों की इस पर नियंत्रण की क्षमता पीछे रह जाए।

एमोडेई ने X (पूर्व नाम Twitter) पर लिखा है कि एआई इंडस्ट्री की रफ्तार सुस्त क्यों होनी चाहिए और ऐसा करने के लिए तीन चरण की योजना भी पेश की है, जिसमें से पहले चरण को एंथ्रॉपिक ने एकतरफा तौर पर अपनाने की प्रतिबद्धता जताई है। एमोडेई का कहना है कि एंथ्रॉपिक थर्ड पार्टी एवैल्युएटर्स को अपने सिस्टम तक स्थायी एंप्लॉयी के लेवल का एक्सेस देगी, ताकि वे सेफ्टी की जांच कर सकें, घटनाओं की जानकारी दे सकें और ट्रेनिंग के दौरान एआई मॉडल के अलाइनमेंट का आकलन कर सकें।

किस कारण जता रहे खतरा

एमोडेई का कहना है कि उन्होंने 12 साल से एआई पर इसलिए काम किया क्योंकि उनका मानना है कि यह इंसानों की जिंदगी बेहतर कर सकता है और अगले पांच साल में यह बड़ी अधिकतर बीमारियों का इलाज कर सकता है, आर्थिक विकास तेज कर सकता है तो लोकतंत्र और सशक्तिकरण के नए दौर की शुरुआत कर सकता है। हालांकि अब उन्होंने चेतावनी दी है कि बाकी शक्तिशाली तकनीकों की तरह एआई के साथ भी गंभीर खतरे जुड़े हैं हुए हैं जैसे कि एआई सिस्टम पर नियंत्रण खत्म हो जाए या साइबर हमले और आतंकी हरकतों के लिए इसका गलत इस्तेमाल और आर्थिक अस्थिरता। एमोडेई का मानना है कि कमर्शियल तौर पर कॉम्पटीशन से ये रिस्क बढ़ सकते हैं।

उन्होंने इससे जुड़े खतरे को लेकर ओपनएआई और हगिंग फेस से जुड़े एक घटना का भी जिक्र किया, जिसमें एआई एजेंट्स के एक ग्रुप ने उन टारगेट पर अटैक किया, जिसके लिए निर्देश ही नहीं दिया गया था। एमोडेई का कहना है कि से ऐसे ग्रुप पूरे इंटरनेट पर कब्जा भी कर सकते हैं।

क्या कहना है Tesla के Elon Musk और OpenAI के Sam Altman का

सैम आल्टमैन ने एमोडेई का सपोर्ट करते हुए कहा कि ओपनएआई में भी पिछले कुछ हफ्ते फ्रंटियर एआई के डेवलपमेंट की रफ्तार सुस्त करने पर चर्चा हुई। उन्होंने एमोडेई के थर्ड पार्टी एवैल्युएटर्स को एंप्लॉयी जैसा एक्सेस देने के आइडिया का सपोर्ट किया और कहा कि ओपनएआई में भी ऐसा होगा। एलॉन मस्क ने भी एमोडेई का सपोर्ट करते हुआ कहा कि डेरियो सही हैं।

 

‘भारत में इंटरव्यू अमेरिका से ज्यादा कठिन, लेकिन सैलरी आधी’ टेक प्रोफेशनल का दावा, Reddit पोस्ट वायरल

भारत में टेक सेक्टर की नौकरी हासिल करना कई युवाओं के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होता। खासकर बड़ी टेक कंपनियों के इंटरव्यू में मुश्किल coding questions और कई दौर की technical screening उम्मीदवारों की अच्छी-खासी तैयारी करवा देती है। अब Reddit पर एक टेक प्रोफेशनल की पोस्ट ने इसी मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है।

पोस्ट करने वाले यूजर का कहना है कि भारत में टेक जॉब इंटरव्यू अमेरिका की तुलना में कहीं ज्यादा कठिन होते हैं, जबकि कई मामलों में मिलने वाली सैलरी काफी कम होती है। इस दावे के बाद Reddit पर टेक इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने अपने अनुभव साझा करने शुरू कर दिए।

‘भारत में इंटरव्यू ज्यादा मुश्किल

टेक प्रोफेशनल ने अपनी पोस्ट में लिखा कि भारत में होने वाले इंटरव्यू अमेरिका की तुलना में काफी कठिन हैं और इसके बदले मिलने वाला मुआवजा भी कम है। उसके मुताबिक अमेरिकी कंपनियां उम्मीदवार को परखते समय केवल coding skills पर निर्भर नहीं रहतीं। वहां practical experience, system design और behavioural skills को भी काफी महत्व दिया जाता है। इसके उलट भारत में कई कंपनियों के इंटरव्यू में कठिन algorithm और coding problems पर ज्यादा जोर दिया जाता है।

45 मिनट में दो Hard सवाल?

Reddit यूजर ने दावा किया कि भारत में कई कंपनियों के hiring process में उम्मीदवारों को कई coding rounds से गुजरना पड़ता है। उसने खास तौर पर दावा किया कि कुछ जगहों पर staff-level पदों के उम्मीदवारों से 45 मिनट में दो कठिन coding problems हल करने की उम्मीद की जाती है। यूजर के अनुसार, अमेरिका में senior candidates के लिए professional experience और system-design skills ज्यादा अहम हो सकती हैं, जबकि भारत में coding rounds का दबाव काफी ज्यादा दिखाई देता है।

क्या असली नौकरी और इंटरव्यू की तैयारी अलग-अलग चीजें हैं?

यही सवाल इस पूरी बहस के केंद्र में है। कई Reddit यूजर्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मुश्किल coding problems हल करने में माहिर होना और असल दुनिया में किसी product या system को बनाने की क्षमता दो अलग चीजें हैं। एक यूजर ने दावा किया कि उसने ऐसे भारतीय उम्मीदवारों को देखा है जो coding questions में शानदार प्रदर्शन करते थे, लेकिन अपने वास्तविक काम को समझाने या system design पर चर्चा करने में संघर्ष करते थे। वहीं कुछ विदेशी उम्मीदवार experience-based सवालों में ज्यादा सहज नजर आए।

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‘इंटरव्यू कभी-कभी इंटरव्यूअर का शो बन जाता है’

एक अन्य यूजर ने भारतीय इंटरव्यू प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि कई बार इंटरव्यू उम्मीदवार की क्षमता परखने से ज्यादा इंटरव्यू लेने वाले की अपनी समझ और ‘स्मार्टनेस’ दिखाने का मंच बन जाता है। उसका कहना था कि भारत में कुछ इंटरव्यू जरूरत से ज्यादा कठिन और वास्तविक नौकरी की जिम्मेदारियों से दूर होते हैं। खासकर तब, जब इंटरव्यू में उम्मीदवार को सीमित समय में ऐसे सवाल दिए जाएं जिनका रोजमर्रा के काम से सीधा संबंध न हो।

कुछ लोगों ने कहा- ‘मुश्किल है तो खुद को अपस्किल करो’

हालांकि Reddit पर हर कोई भारतीय इंटरव्यू प्रक्रिया के खिलाफ नहीं था। कुछ यूजर्स ने तर्क दिया कि अगर कंपनियां कठिन सवाल पूछने के बावजूद पर्याप्त उम्मीदवार खोज पा रही हैं, तो इसका मतलब है कि बाजार उस मॉडल को स्वीकार कर रहा है। एक यूजर ने कहा कि उम्मीदवारों को शिकायत करने के बजाय अपनी skills बेहतर करने पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि आने वाले समय में hiring bar कम होने की संभावना नहीं है।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

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