OYO का अब आईपीओ में सिर्फ 3350 करोड़ रुपये के नए शेयर इश्यू करने का प्लान, जानिए वजह

ओयो की पेरेंट कंपनी प्रिज्म अपने प्रस्तावित आईपीओ में अपने नए शेयरों की संख्या घटाकर आधी करना चाहती है। पहले वह आईपीओ में 6,650 करोड़ रुपये के नए शेयर इश्यू करने वाली थी। अब वह 3,350 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी करने के बारे में सोच रही है। सूत्रों ने मंगलवार को यह बताया।

स्ट्रॉन्ग कैश जेनरेशन की वजह से कंपनी ने बदला प्लान

इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने पीटीआई को बताया कि स्ट्रॉन्ग कैश जेनरेशन की वजह से प्रिज्म इश्यू का साइज घटाना चाहती है। कंपनी का कैश जेनरेशन स्ट्रॉन्ग बना हुआ है। बैलेंसशीट भी स्ट्रॉन्ग है। इससे कंपनी को अब पहले के मुकाबले कम कैपिटल की जरूरत है।

पहले कंपनी को ज्यादा पूंजी की जरूरत थी 

एक सूत्र ने बताया कि कंपनी ने जब आईपीओ का प्लान बनाया था तब उसे ज्यादा पूंजी की जरूरत थी। लेकिन, हाल में बेहतर फाइनेंशियल परफॉर्मेंस के बाद अब कंपनी को कम पूंजी की जरूरत है। सूत्र ने बताया कि कंपनी अब उतनी ही पूंजी जुटाना चाहती है, जितनी उसकी जरूरत है। कंपनी का प्लान अगले दो से तीन साल में कर्ज चुकाने का है।

पहले कंपनी का प्लान 6650 करोड़ जुटाने का था

OYO ने पहले आईपीओ से 6,650 करोड़ रुपये जुटाने का प्लान बनाया था। इसमें से कंपनी 5,000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करने वाली थी। आईपीओ के रिवाइज्ड स्ट्रक्चर के मुताबिक, कंपनी इश्यू से आने वाले ज्यादातर पैसे का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी।

मूडीज ने पेरेंट कंपनी प्रिज्म का आउटलुक बदला

रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स ने प्रिज्म के आउटलुक को ‘स्टेबल’ से बदलकर ‘पॉजिटिव’ कर दिया है। उसने इस बी2 कॉर्पोरेट फैमिली रेटिंग भी दी है। मूडीज ने कहा है कि उसे अगले 12-18 महीनों में ओयो की एबिड्टा बढ़कर करीब 3,000 करोड़ रुपये पहुंच जाने की उम्मीद है। FY26 में कंपनी का EBITDA दोगुना यानी 2,630 करोड़ रुपये हो गया। FY25 में यह 1,080 करोड़ रुपये था।

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ओयो में सॉफ्टबैंक की सब्सिडियरी की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी

ओयो की शुरुआत 2013 में हुई थी। रीतेश अग्रवाल इसके फाउंडर हैं। उनकी इस कंपनी में 30.52 फीसदी हिस्सेदारी है। इस कंपनी में सबसे ज्यादा करीब 40 फीसदी हिस्सेदारी एसवीएफ इंडिया होल्डिंग्स (केमैन) की है, जो सॉफ्टबैंक ग्रुप कॉर्प की सब्सिडियरी है।

चीन के अमीर अरबपतियों पर कस रहा टैक्स का शिकंजा, जानिए यहां के रईसों की कैसे बढ़ने वाली हैं मुश्किलें

चीनी कारोबारी अपनी कमाई पर कर बचाने के लिए ग्लोबल एक्सचेंज पर बिजनेस लिस्ट करने और अपने अरबों डॉलर ऑफशोर रखने का तरीका अपनाते रहे हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकता है, क्योंकि टैक्स अधिकारियों ने जुलाई में कहा कि वे स्थानीय करदाताओं के लिए विदेशी ट्रस्ट से होने वाले मुनाफे पर 20% टैक्स लगाना शुरू करेंगे। इन लोगों के पास अब 22 अक्टूबर तक बिना किसी पेनल्टी के अपनी देनदारियों को टैली करने, रिपोर्ट करने और चुकाने का समय है।

ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, इस कदम से दुनिया के 500 सबसे अमीर लोगों में से आठ और उनके लाभार्थी सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक इन टाइकून्स के ऑफशोर ट्रस्ट के जरिए चीन में बड़े ऑपरेशन वाले बिजनेस में लिस्टेड स्टेक हैं। चीनी सरकार ने किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक तौर से अलग नहीं किया है। यह साफ़ नहीं है कि इनमें से किसी अरबपति को अपने विदेशी ट्रस्ट से हुए मुनाफे पर टैक्स देना होगा या उनसे ऐसा करने के लिए कहा गया है। ब्लूमबर्ग के रेगुलेटरी फाइलिंग के आधार पर की गई गणना के मुताबिक, शुक्रवार तक उनकी होल्डिंग्स कुल मिलाकर लगभग $140.2 बिलियन थीं।

चीन की कुछ सबसे जानी-मानी कंपनियों की स्थापना करने वाले आठ अरबपतियों ने अपने ट्रस्ट ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स और केमैन आइलैंड्स जैसे टैक्स हेवन में खोले हैं। वीडियो गेम डेवलपर NetEase Inc. चलाने वाले विलियम डिंग इनमें शामिल हैं। विदेशों में उनके लगभग $37 बिलियन रखे हैं, और कॉलिन हुआंग, जिन्होंने ई-कॉमर्स की बड़ी कंपनी PDD Holdings Inc. लॉन्च की और चीन के बाहर उनके पास $29 बिलियन हैं।

एल्युमिनियम बनाने वाली कंपनी चाइना होंगकियाओ ग्रुप लिमिटेड के एक स्पोक्सपर्सन ने कहा कि उसके फाउंडर झांग बो और कंपनी की लीडरशिप को टैक्स पॉलिसी में बदलाव से जोड़ना “बेबुनियाद और गुमराह करने वाला है।” बाकी सात कंपनियों के प्रतिनिधियों ने टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। विदेशों में ज्यादातर पैसा उन निवेशों से जमा हुआ था जो कंपनियों ने अमेरिका या हांगकांग में इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग पूरी करने से पहले किए थे। उनमें से कुछ कारोबार, जैसे PDD और पॉप मार्ट, ने ट्रेडिंग शुरू करने के बाद से वैल्यू में बहुत बढ़ोतरी की है, जिससे उनके संस्थापकों को कागज पर अरबों डॉलर मिले हैं।

लॉ फर्म इंस एंड कंपनी हांगकांग के पार्टनर केविन वू ने कहा कि टैक्स में हड़पने से पुराने मनी ट्रस्ट पर ज्यादा असर पड़ता है। उन्होंने कहा, “कंपनी के पब्लिक होने के बाद मूल्य बहुत बढ़ जाता है।” जिन होने वाले क्लाइंट्स ने बहुत पहले अपनी कंपनियों को लिस्ट किया था, वे “ऐसे इनवेंटिव वकीलों की मांग कर रहे हैं जो सिर्फ नियम बताने के बजाय ट्रस्ट को रीस्ट्रक्चर कर सकें।” उन्होंने ब्लूमबर्ग द्वारा पहचाने गए आठ अरबपतियों के बजाय अपनी बातचीत का जिक्र करते हुए कहा।

टैक्स कलेक्शन का यह अभियान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के “आम खुशहाली” के अभियान का ही एक हिस्सा है, जिसमें घरेलू टेक्नोलॉजी की बड़ी कंपनियों पर कार्रवाई और बैंकरों की सैलरी में कटौती शामिल थी। भले ही पिछले कुछ सालों में इनमें से कुछ पाबंदियां कम हुई हैं, लेकिन लंबे समय से चल रही प्रॉपर्टी की मंदी ने स्थानीय सरकारों के फाइनेंस को भी गहरा झटका दिया है, जिससे रेवेन्यू के दूसरे सोर्स खोजने पड़े हैं।

यूनियन बैंकेयर प्रिवी में एशिया के सीनियर इकोनॉमिस्ट कार्लोस कैसानोवा ने कहा, “उन्हें स्थानीय और केंद्र सरकार के लेवल पर रेवेन्यू के सोर्स को बेहतर बनाने की जरूरत है और वे एक चैनल के तौर पर ऑफशोर वेल्थ की तलाश कर रहे हैं।”

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ड्रैगन फ्रूट की खेती से छप्परफाड़ कमाई! महाराष्ट्र के किसान ने अपनाया ऐसा तरीका, आज सालाना ₹2 करोड़ का कारोबार!

किसान अगर कुछ नया करने की ठान ले, तो खेती से भी करोड़ों रुपये कमाए जा सकते हैं। महाराष्ट्र के सोलापुर के रहने वाले महेश असाबे ने इसे सच कर दिखाया है। उनके परिवार ने कुछ साल पहले सिर्फ 3 एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट उगाना शुरू किया था। आज उनका फार्म 60 एकड़ तक फैल चुका है और सालाना कारोबार करीब 2 करोड़ रुपये पहुंच गया है। खास बात यह है कि महेश ने खेती को बेहतर बनाने के लिए नई तकनीक अपनाई और दूसरे देशों से भी सीख ली। उनकी यह कहानी उन किसानों के लिए खास है, जो खेती से अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं।

पिता ने शुरू की थी खेती

महेश असाबे महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के अकोला गांव के रहने वाले हैं। उनका परिवार पहले मक्का जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करता था। महेश ने एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग में बीटेक किया और इसके बाद एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड फूड प्रोसेसिंग में एमटेक की पढ़ाई पूरी की।

साल 2013-14 में उनके पिता ने ड्रैगन फ्रूट की खेती करने का फैसला लिया। उन्होंने इस फल के बारे में पढ़ा था और जाना था कि इसकी खेती में अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत होती है। सूखे इलाकों में भी इसकी खेती की जा सकती है। यही बात उन्हें इस फसल की ओर खींच लाई।

बांग्लादेश से मंगाए 9,000 पौधे

ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू करना परिवार के लिए एक नया प्रयोग था। इसके लिए उन्होंने बांग्लादेश से करीब 9,000 पौधे मंगवाए। Startup Pedia के मुताबिक, पौधों पर शुरुआती निवेश करीब ₹9.9 लाख था। परिवार ने तीन एकड़ जमीन पर खेती शुरू की। साल 2015-16 में पहली फसल तैयार हुई और प्रति एकड़ करीब पांच टन उत्पादन मिला। उपज बेचकर परिवार को लगभग ₹5 लाख की कमाई हुई।

धीरे-धीरे ड्रैगन फ्रूट की मांग और कीमत बढ़ने लगी। साल 2017 तक परिवार इसे ₹150 से ₹250 प्रति किलो के भाव पर बेचने लगा। इससे खेती को बड़े स्तर पर ले जाने का हौसला मिला।

इजरायल और वियतनाम से सीखी खेती की नई तकनीक

महेश ने खेती को सिर्फ पारंपरिक तरीके तक सीमित नहीं रखा। पढ़ाई के दौरान वह 45 दिनों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए इजरायल गए। वहां उन्होंने पानी का बेहतर इस्तेमाल, आधुनिक कृषि तकनीक और उत्पादन बढ़ाने के तरीके सीखे। साल 2018 में उन्होंने वियतनाम का दौरा भी किया, जहां ड्रैगन फ्रूट की खेती के तरीकों को समझा। लौटकर उन्होंने अपने खेत में एक-एक एकड़ के अलग-अलग प्रदर्शन प्लॉट तैयार किए, ताकि खेती की विभिन्न तकनीकों को आजमाया जा सके।

3 एकड़ से 60 एकड़ तक पहुंचा फार्म

आज महेश असाबे Rukmini Farms and Nursery का संचालन करते हैं। उनके फार्म में ड्रैगन फ्रूट के अलावा अनार, सीताफल और अमरूद भी उगाए जाते हैं।

खेती में पानी बचाने के लिए ड्रिप इरिगेशन और तालाब जैसी सुविधाएं विकसित की गईं। निराई जैसे नियमित कामों में मशीनों का इस्तेमाल भी शुरू किया गया, जिससे खेती को संभालना आसान हुआ।

ड्रैगन फ्रूट से ₹1.25 करोड़ की सालाना कमाई

Startup Pedia के मुताबिक, महेश ड्रैगन फ्रूट की खेती से हर साल करीब ₹1.25 करोड़ कमाते हैं। उनके फार्म में सालाना लगभग 200 टन ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन होता है। दूसरे फलों से होने वाली कमाई को जोड़ दें, तो उनके कारोबार का सालाना टर्नओवर करीब ₹2 करोड़ पहुंच जाता है।

महेश की कहानी बताती है कि खेती में नई तकनीक अपनाना, बाजार की मांग समझना और लगातार सीखते रहना कितना महत्वपूर्ण है। तीन एकड़ से शुरू हुआ उनका सफर आज दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

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JIO Platforms के IPO को लेकर फुल जोश में मार्केट दिग्गज, 4 साल में मार्केट कैप डबल होने की जता रहे उम्मीद

Jio Platforms IPO : जियो प्लेटफार्म्स के IPO का काउंटडाउन शुरू हो गया है। आज यह इश्यू एंकर निवेशकों के लिए खुला। इसमें घरेलू और विदेशी कंपनियां बढ़ चढ़कर बोलियां लगा सकती हैं। बुधवार से यह IPO सभी निवेशकों के लिए खुलेगा। इसका प्राइस बैंड 1065 से 1119 रुपए प्रति शेयर के बीच है। Jio Platforms अपने 30000 करोड़ से ज्यादा के इश्यू साइज से भारतीय बाजार में एक नया इतिहास रचने जा रही है। डिजिटल इंडिया के इस पोस्टर BOY ने महज 10 सालों में देश में डिजिटल क्रांति की इबारत लिखी है। ये सिर्फ एक टेलीकॉम कंपनी नहीं, उससे कहीं बढ़कर है। यह देश का सबसे बड़ा डिजिटल और मोबाइल ब्रॉडबैंड नेटवर्क है।

JIO PLATFORMS के IPO को लेकर बाजार के दिग्गज फुल जोश में हैं। दिग्गज निवेशकों ने इसमें बढ़कर चढ़कर निवेश करने की सलाह दी है। एनाम ग्रुप के को-फाउंडर वल्लभ भंशाली ने कहा है। सिर्फ 10 साल में बेहतरीन कंपनी बनकर तैयार हुई है। रमेश दमानी ने कहा है कि जियो IPO को निवेशक हाथों हाथ लेंगे। उधर देवेन चोकसी ने कहा है कि कंपनी की ग्रोथ बेहतरीन है। इसका मार्केट कैप 4 साल में डबल हो जाएगा।

जियो प्लेटफॉर्म्स IPO पर उदय कोटक ने कहा कि यह दुनिया की अकेली ऐसी कंपनी है जिसके पास प्रोपराइटरी एंड-टू-एंड कनेक्टिविटी (Proprietary End-to-End Connectivity है। समय के साथ लगातार तेज ग्रोथ बनी हुई है।

फिच रेटिंग्स के डायरेक्टर, गिरीश मदान ने कहा है कि जियो प्लेटफॉर्म्स मार्केट लीडर है। आगे ARPU बढ़ाने की काफी गुंजाइश है। कंपनी की बैलेंस शीट दमदार है। कंपनी की नेट डेट टू EBITDA 1x से कम है। यह आगे और नीचे आएगा। कंपनी क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत है।

JIO IPO पर मार्केट एक्सपर्ट राकेश बंसल ने कहा कि जियो IPO के लिए नए डीमैट अकाउंट खुल रहे हैं। वहीं, कंप्लीट सर्किल के गुरमीत चड्ढा ने कहा कि अच्छे वैल्युएशन पर, निवेशकों के लिए इसमें कमाई के अच्छे मौके हैं।

JIO IPO पर SMIFS की राय है कि इसमें निवेशक लंबे वक्त के लिए सब्सक्राइब करें। रेलिगेयर की भी इसमें सब्सक्राइब करने की सलाह है। मोतीलाल ओसवाल का भी JIO IPO पर पॉजिटिव व्यू है।

बोनांजा का कहना है का JIO IPO का वैल्युएशन वाजिब है। यह भारती से डिस्काउंट पर मिल रहा है। अर्निंग ग्रोथ और टैरिफ बढ़ने पर आगे ठीक-ठाक ग्रोथ देखने को मिलेगी। वहीं, मंगलदास केशव का कहना है कि JIO IPO उम्मीद से बेहतर वैल्युएशन पर आय है। IPO प्राइसिंग वाजिब नजर आ रही है।

JIO IPO पर वेंचुरा की राय है कि आगे टैरिफ बढ़ोतरी और प्रीमियमाइजेशन अहम फैक्टर का काम करेंगे। यह भारती के इंडिया टेलीकॉम कारोबार के मुकाबले प्रीमियम पर है।

दिग्गज निवेशकों की राय

इसके साथ ही बाजार के दिग्गज निवेशक भी जियो प्लेटफॉर्म जैसे बड़े IPO को भारतीय बाजार की मजबूती की कहानी कह रहे हैं। सभी ने एक लाइन में कहा निवेशक जियो IPO को हाथों हाथ लेंगे। BSE के मेंबर और बाजार के दिग्गज निवेश रमेश दमानी के मुताबिक जियो के IPO को निवेशक हाथों हाथ लेंगे। जियो के 55 करोड़ ग्राहक हैं जो एक तिहाई भारतीयों को सेवा दे रही है। सिर्फ 10 साल में मुकेश अंबानी ने जियो को IPO के लिए तैयार कर दिया। हैरानी होती है कि भारत में जियो जैसी इतनी बड़ी कंपनी है। मुकेश अंबानी हर बड़े प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करते हैं। मुकेश अंबानी ने 10 साल में जियो को IPO के लिए तैयार किया। निवेशक जियो IPO को हाथों हाथ लेंगे।

HDFC AMC के MD नवनीत मुनोत ने कहा कि भारतीय बाजार में बड़े IPO आ रहे हैं। बड़े IPOs बाजार की मजबूती बता रहे हैं। कंपनियां अरबों डालर जुटाने में कामयाब हो रही हैं। भारतीय बाजार में काफी मजबूती है।10 साल पहले जियो ने बड़ी शुरुआत की। जियो प्लेटफॉर्म अब बड़ी रकम जुटा रहा है।

DRChoksey FinServ के MD,देवेन चौकसी ने कहा कि JIO IPO निवेशकों के लिए बेहतर मौका है। कंपनी का मार्केट कैप 10 लाख करोड़ रुपए है। पिछले कुछ साल में EBITDA ग्रोथ 18% रही। अगले कुछ साल में 20% CAGR ग्रोथ की उम्मीद। अगले 4 साल में इसका EBITDA दोगुना हो सकता है। कंपनी का मार्केट कैप 10 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 20 लाख करोड़ रुपए हो सकता है।

Elixir Equities के डायरेक्टर दीपन मेहता के मुताबिक जियो के IPO का वैल्युएशन काफी अच्छा है और लिस्टिंग पर अच्छे रिटर्न मिलने की उम्मीद है। AI और डाटा सेंटर इंडस्ट्री इसके लिए ग्रोथ का अहम ट्रिगर होंगे। डाटा कंजम्प्शन बढ़ने से इंडस्ट्री ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। जियो IPO को लेकर आउटलुक पॉजिटिव है।

 

 

(डिस्क्लेमर: नेटवर्क 18 मीडिया एंड इनवेस्टमेंट लिमिटेड पर इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट का मालिकाना हक है। इसकी बेनफिशियरी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।)

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

करोड़ों की प्रॉपर्टी देखने पहुंचे अशनीर ग्रोवर, रियल एस्टेट कारोबारी ने दे डाला नौकरी का ऑफर

भारतपे के पूर्व को-फाउंडर अशनीर ग्रोवर अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार वह खुद एक मजेदार सोशल मीडिया पोस्ट का हिस्सा बन गए हैं। गुरुग्राम के एक रियल एस्टेट कारोबारी ने उनकी प्रॉपर्टी विजिट पर चुटकी लेते हुए उन्हें नौकरी तक ऑफर कर दी। मामला गुरुग्राम के महंगे रिहायशी प्रोजेक्ट DLF Camellias का है, जहां अशनीर की विजिट के दौरान फ्लैट के बजाय क्लब, सुविधाओं और हरियाली को दिखाए जाने पर कारोबारी ने सवाल उठाए। उनकी पोस्ट अब सोशल मीडिया पर चर्चा में है।

फ्लैट देखने पहुंचे अशनीर

गुरुग्राम के रियल एस्टेट कारोबारी अभिषेक भारद्वाज ने X पर एक पोस्ट साझा करते हुए अशनीर ग्रोवर की साइट विजिट पर मजाकिया टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि अशनीर की यह विजिट उनकी पत्नी के चैनल पर शेयर किए गए एक वीडियो में दिखाई गई थी, जिसका शीर्षक ‘Home Beyond the Price Tag’ है। अभिषेक के मुताबिक, फ्लैट में किरायेदार होने और दरवाजा नहीं खुलने की स्थिति में विजिट के दौरान क्लब, दूसरी सुविधाएं और हरियाली दिखाई गई। उन्होंने इस अनुभव की तुलना प्रॉपर्टी ब्रोकरों के उस आम तरीके से की, जिसमें फ्लैट नहीं दिखा पाने पर खरीदार को आसपास की सुविधाएं दिखाकर व्यस्त रखा जाता है।

‘क्लब दिखा दिया, हरियाली दिखा दी, फ्लैट की बात ही नहीं की’

200 से ज्यादा प्रॉपर्टी डील करने का अनुभव रखने वाले अभिषेक ने कहा कि गुरुग्राम के प्रीमियम रिहायशी प्रोजेक्ट्स में कई खरीदारों के लिए फ्लैट के साथ उसका पता और सोसायटी भी काफी मायने रखती है। ऐसी जगहों पर उपलब्ध फ्लैट कम होने के कारण खरीदार कई बार प्रॉपर्टी देखने से पहले ही उसमें दिलचस्पी दिखाने लगते हैं।

हालांकि, अभिषेक का मानना है कि अच्छी साइट विजिट में खरीदार को असली फ्लैट दिखाना जरूरी है। उन्होंने मजाक में कहा कि अगर किरायेदार दरवाजा नहीं खोल रहा हो, तो वह उसके साथ एक घंटे बैठकर चाय पीने को भी तैयार हैं, लेकिन खरीदार को फ्लैट दिखाए बिना वापस नहीं जाने देंगे।

अशनीर ग्रोवर को दे दी फील्ड एसोसिएट की नौकरी

अभिषेक ने अपनी पोस्ट में अशनीर पर तंज कसते हुए लिखा कि उन्होंने साइट विजिट बिल्कुल उसी अंदाज में की, जैसा प्रॉपर्टी इंडस्ट्री में कई बार देखने को मिलता है। उन्होंने कहा, ‘क्लब दिखा दिया, हरियाली दिखा दी, फ्लैट की बात ही नहीं की।’ इसके बाद कारोबारी ने अशनीर को फील्ड एसोसिएट की नौकरी का ऑफर दे दिया। उन्होंने बताया कि वह फिलहाल साइट विजिट के लिए लोगों की तलाश कर रहे हैं और अशनीर ने तो पहली विजिट में ही इंडस्ट्री का तरीका दिखा दिया।

सोशल मीडिया पर चर्चा में आई पोस्ट

अभिषेक ने अपनी पोस्ट के आखिर में अशनीर से मजाकिया अंदाज में पूछा, ‘इंटरव्यू कब दे रहे हो?’ उनकी इस टिप्पणी ने प्रॉपर्टी विजिट के तरीके और महंगी सोसायटी में घर खरीदने के अनुभव को लेकर चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, यह पूरा मामला कारोबारी की सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए दावों और व्यंग्य पर आधारित है।

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जिस IIT-IIM की डिग्री के लिए लाखों युवा मेहनत करते हैं, उससे बच्चों को दूर क्यों रखना चाहते हैं ये शख्स?

भारत में IIT-IIM में दाखिला मिलना बड़ी कामयाबी माना जाता है, लेकिन क्या अच्छी जिंदगी के लिए प्रतिष्ठित डिग्री जरूरी है? IIM अहमदाबाद से पढ़े एक शख्स की सोच ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। वह नहीं चाहते कि उनके बच्चे सिर्फ समाज की उम्मीदों पर खरे उतरने के लिए IIT या IIM का रास्ता चुनें। उनके मुताबिक, जिंदगी में अपनी पसंद से काम करना और खुश रहना भी उतना ही मायने रखता है। उनकी यह सोच ऐसे समय में सामने आई है, जब लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सालों लगा देते हैं और परिवार भी उनसे बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद करते हैं।

IIM से पढ़े पिता की सोच ने क्यों खींचा ध्यान?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फाउंडर आबिद हसन ने अपने IIM अहमदाबाद से पढ़े एक दोस्त के साथ हुई बातचीत साझा की। उन्होंने बताया कि उनका दोस्त नहीं चाहता कि उसके बच्चे IIT या IIM में जाने को अपनी जिंदगी का लक्ष्य बनाएं। अगर वे इन संस्थानों में पढ़ने के बजाय अपनी जिंदगी का आनंद लेना चुनते हैं, तो उसे इससे भी खुशी होगी।

आबिद हसन ने इस सोच को शिक्षा और करियर की सफलता का एक अलग नजरिया बताया। उनके मुताबिक, शायद प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ने का असली फायदा यही है कि इंसान एक ऐसे मुकाम पर पहुंचे, जहां उसे अपनी जिंदगी के फैसले लेने के लिए किसी डिग्री या सामाजिक पहचान की जरूरत न पड़े।

बड़ी डिग्री ही सफलता की गारंटी नहीं

इस पोस्ट पर एक अन्य IIM ग्रेजुएट ने भी अपनी राय साझा की। उन्होंने कहा कि वह भी अपने बच्चों पर प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ने का दबाव नहीं डालना चाहेंगे। उनके मुताबिक, कई IIM ग्रेजुएट आगे चलकर अपना कारोबार शुरू करते हैं। ऐसे में बच्चों को उद्यमी बनने के लिए MBA करना ही क्यों जरूरी हो?

उन्होंने व्यावहारिक अनुभव, हुनर और अपनी रुचि के मुताबिक काम करने की आजादी को अहम बताया। उनके अनुसार, कई बार माता-पिता डिग्री को इतना महत्व देने लगते हैं कि बच्चों की वास्तविक दिलचस्पी पीछे छूट जाती है।

आर्थिक सुरक्षा से मिल सकती है सपनों को उड़ान

चर्चा में एक यूजर ने कहा कि इतिहास के कई प्रभावशाली कवि, लेखक और स्वतंत्रता सेनानी संपन्न परिवारों से आते थे। आर्थिक सुरक्षा होने पर लोगों को रचनात्मक और बौद्धिक रुचियों को आगे बढ़ाने का ज्यादा अवसर मिल सकता है।

सिर्फ ₹5 की कॉफी ने खड़ा किया ₹180 करोड़ का बिजनेस! जानिए कैसे ‘हट्टी कापी’ बनी देश का मशहूर ब्रैंड?

नई दिल्ली। बेंगलुरु में 5 रुपये प्रति कप कॉफी बेचने से शुरू हुआ एक छोटा सा कारोबार आज करीब 180 करोड़ रुपये की कंपनी बन चुका है। इस कंपनी का नाम है हट्टी कापी (Hatti Kaapi)। यूएस महेंद्र (U.S. Mahendra) ने साल 2009 में एक इमारत की सीढ़ियों के नीचे छोटी सी जगह से इसकी शुरुआत की थी। आज कंपनी के आउटलेट ऑफिस, एयरपोर्ट और होटलों तक पहुंच चुके हैं।

महेंद्र कर्नाटक के हासन जिले में पले-बढ़े थे और उन्हें कॉफी के बिजनेस की अच्छी समझ थी। वह कैफे कॉफी डे के फाउंडर वीजी सिद्धार्थ से भी इंस्पायर्ड थे। उन्होंने कॉफी के अच्छे टेस्ट और सर्विस पर ध्यान दिया। बाद में उन्होंने जंबराडी गांव के 15 से 20 किसानों से कॉफी खरीदनी शुरू की।

देश-विदेश तक ऐसे पहुंचा हट्टी कापी का बिजनेस

हट्टी कापी की पॉपुलैरिटी बढ़ने के बाद कंपनी ने अपने आउटलेट को बढ़ा दिया है। साल 2014 में इंफोसिस ने अपने कैंपस में इसे जगह दी। इसके बाद डेलॉइट और SAP जैसी कंपनियों के ऑफिस और एयरपोर्ट पर भी इसके काउंटर खुल गए। कंपनी मैरियट इंटरनेशनल से जुड़े होटलों को भी सर्विस दे रही है और पैक की हुई कॉफी ऑनलाइन बेचती है।

अब हट्टी कापी का कारोबार भारत से बाहर भी पहुंच गया है। कंपनी लंदन में मौजूद है और एम्स्टर्डम, अमेरिका, दुबई के साथ यूरोप के दूसरे शहरों में भी बिजनेस बढ़ाने की प्लानिंग बना रही है।

बिजनेस बढ़ाने के लिए कंपनी ने अलग-अलग इंवेस्टर्स से पैसा जुटाया। Tracxn के आंकड़ों के मुताबिक:

• मई 2024 में कंपनी को करीब 21.9 लाख डॉलर का इन्वेस्टमेंट मिला।

• अप्रैल 2025 में करीब 10.2 लाख डॉलर की फंडिंग मिली।

• कंपनी ने कुल 13 चरणों में करीब 66.83 करोड़ रुपये जुटाए।

• 19 अगस्त 2025 तक कंपनी की कीमत करीब 180 करोड़ रुपये आंकी गई थी।

हट्टी कापी की कमाई साल 2025 में करीब 44.11 करोड़ रुपये रही। इसके बावजूद कंपनी को 18.59 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। साल 2024 में यह घाटा 3.86 करोड़ रुपये था। हट्टी कापी ने कॉफी से शुरुआत करके देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई है। उनकी कंपनी की कमाई के साथ घाटा भी हुआ है। अब कंपनी के इस बिजनेस को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।

Jio Platforms IPO: दिग्गज फंड मैनेजर समीर अरोड़ा ने जियो प्लेटफॉर्म्स को बताया दमदार स्टॉक, जानिए उन्होंने क्या कहा

Jio Platforms IPO: हेलियोस कैपिटल के फाउंडर समीर अरोड़ा ने जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों को दमदार बताया है। उनका मानना है कि जियो ने बड़े लेवल की डिजिटल कनेक्टिविटी बनाई है। साथ ही ऐसा नेटवर्क बनाया है, जिस पर देश की न्यू एज कंपनियां बनाई जाएंगी। जियो ने उनके लिए फाउंडेशनल प्लेटफॉर्म तैयार किया है।

लंबी अवधि में ग्रोथ की काफी संभावना 

उन्होंने कहा है कि जियो प्लेटफॉर्म की निरंतर ग्रोथ की काफी संभावनाएं हैं। इस वजह से यह हाई-कनविक्शन स्टॉक बन जाता है। टेलीकॉम मार्केट में कंपनी की एंट्री 2016 में हुई थी। यह समय भारत में टेलीकॉम मार्केट के लिए मील का पत्थर बना। कंपनी की एग्रेसिव प्राइसिंग और फ्री वॉयस एंड डेटा ऑफरिंग्स ने पूरे टेलीकॉम मार्केट को बदल दिया।

जियो की वजह से देश में बढ़ा डेटा कंजम्प्शन

हेलियोस के फाउंडर के मुताबिक, जियो ने मोबाइल ब्रॉडबैंड पर फोकस बढ़ाया, जिसके बाद देश में डेटा की खपत में नाटकीय बदलाव देखने को मिला। एक दशक बाद आज कंपनी ने ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जिस पर मोबाइल सर्विसेज, एंटरटेनमेंट, ब्रॉडबैंड, क्लाउड और एंटरप्राइज सॉल्यूशंस उपलब्ध हैं।

जून में सब्सक्राइबर्स की संख्या 53 करोड़ के पार

इस साल जून के अंत में जियो के सब्सक्राइबर्स की संख्या 53.3 करोड़ थी। इसमें 5जी के 28.49 करोड़ सब्सक्राइबर्स शामिल हैं। पिछले वित्त वर्ष में इंडिया के वायरलेस डेटा ट्रैफिक में जियो की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी रही। जियो के वायरलेस ब्रॉडबैंड नेटवर्क के दायरे में देश की आबादी का 99 फीसदी हिस्सा आता है। कंपनी ने इस बारे में अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्ट्स में बताया है।

2जी के 26 करोड़ सब्सक्राइबर्स पर जियो की नजर

जियो ने पिछले एक दशक में जो प्लेटफॉर्म तैयार किया है, उसका फायदा उठाने का वक्त अब आ गया है। देश में डेटा का कंजम्प्शन बढ़ रहा है। सब्सक्राइबर्स 2जी से 4जी और 5जी में माइग्रेट कर रहे हैं। इस साल जून के अंत में देश में 2जी इस्तेमाल करने वाले सब्सक्राइबर्स की संख्या 26.1 करोड़ थी। यह जियो जैसी कंपनी के लिए एक बड़ा मौका है।

आईपीओ के पैसे से कंपनी की बैलेंसशीट को मिलेगी मजबूती

जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ से आने वाले पैसे का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी। कंपनी ने जियो इंफोकॉम के लिए कर्ज लिया था, जिसमें से 27,500 करोड़ रुपये वह आईपीओ के पैसे से चुकाएगी। इससे कंपनी की बैलेंसशीट को मजबूती मिलेगी। जियो इंफोकॉम जियो प्लेटफॉर्म्स की सब्सिडियरी है। यह देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है।

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लिस्टिंग के बाद कंपनी 10 लाख करोड़ क्लब में होगी शामिल 

जियो ने आईपीओ के लिए 1065-1119 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर कंपनी की वैल्यूएशन 10.3 लाख करोड़ रुपये है। यह FY26 में कंपनी की अर्निंग्स का करीब 34.3 गुना है। शेयर की लिस्टिंग के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स देश की 10 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन वाली कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो जाएगी।

How to Buy Home: ₹30000 की सैलरी में भी खरीद सकते हैं अपना घर, समझिए कैसे बनाएं पूरा प्लान

How to Buy Home: अपना घर खरीदने का सपना हर कोई देखता है। लेकिन महीने की सैलरी ₹30,000 के आसपास हो, तो लगता है कि आज के जमाने में घर खरीदना शायद मुमकिन नहीं है। किराया, राशन, बिजली का बिल और बच्चों की फीस देने के बाद बचता ही कितना है? ऐसे में होम लोन की EMI चुकाना बड़ी जिम्मेदारी लगती है।

हालांकि, कम सैलरी में भी घर खरीदा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि आप अपनी कमाई के हिसाब से घर चुनें। बड़ा लोन लेने के बजाय ऐसी EMI रखें, जिसे हर महीने आसानी से चुका सकें। आइए, उदाहरण से समझते हैं कि ₹30,000 की सैलरी में घर खरीदने का प्लान कैसे बना सकते हैं।

₹30,000 की सैलरी पर कितना होम लोन लें?

BASIC Home Loan के CEO और को-फाउंडर अतुल मोंगा का कहना है कि अगर आप ₹10 लाख का होम लोन लेते हैं, तो ब्याज दर और लोन की अवधि के हिसाब से EMI करीब ₹10,000 हो सकती है। मोंगा के मुताबिक, अगर आपकी सैलरी ₹30,000 है, तो घर खरीदना सिर्फ कमाई पर निर्भर नहीं करता। ये भी जरूरी है कि आप घर खरीदने की कितनी अच्छी तैयारी करते हैं। घर

इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए कि आपकी सैलरी ₹30,000 है। इसमें से ₹8,000 घर और किराने, ₹3,000 बिजली और दूसरे बिलों, ₹4,000 आने-जाने और ₹5,000 परिवार के अन्य खर्चों में जाते हैं। इस तरह कुल खर्च ₹20,000 हुआ। अब आपके पास ₹10,000 बचते हैं।

सैलरी के हिसाब से खर्च का पूरा हिसाब समझें

महीने का हिसाबरकम
कुल सैलरी₹30,000
राशन और घर का खर्च₹8,000
बिजली, मोबाइल और दूसरे बिल₹3,000
आने-जाने का खर्च₹4,000
परिवार के दूसरे खर्च₹5,000
कुल खर्च₹20,000
खर्च के बाद बची रकम₹10,000

ये सिर्फ उदाहरण है। आप अपने परिवार के खर्च के हिसाब से इसमें बदलाव कर सकते हैं। जैसे कि कुछ पैसे बचाकर इमरजेंसी के लिए रख सकते हैं।

डाउन पेमेंट के लिए पैसे कैसे जुटाएं?

बैंक आमतौर पर घर की पूरी कीमत का लोन नहीं देते। घर खरीदते समय आपको भी कुछ पैसा लगाना पड़ता है। इसी को डाउन पेमेंट कहते हैं। इसके अलावा रजिस्ट्री और स्टांप ड्यूटी जैसे खर्च भी हो सकते हैं।

मान लीजिए, आपको ₹15 लाख का घर पसंद आया। बैंक ₹12 लाख का लोन देने को तैयार है। ऐसे में बाकी ₹3 लाख आपको अपनी तरफ से लगाने होंगे। रजिस्ट्री और दूसरे खर्चों के लिए अलग से पैसा भी चाहिए हो सकता है।

इसलिए घर खरीदने से पहले बचत शुरू करें। हर महीने ₹5,000 बचाने पर एक साल में ₹60,000 जमा होंगे। इसी तरह, तीन साल में ब्याज को छोड़कर ₹1.80 लाख जमा हो सकते हैं। अगर परिवार से आर्थिक मदद मिले या बोनस की रकम बचा सकें, तो डाउन पेमेंट का लक्ष्य जल्दी पूरा हो सकता है।

होम लोन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अतुल मोंगा के मुताबिक, होम लोन लेने से पहले सबसे पहले अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरें और प्रोसेसिंग फीस देखें। सिर्फ कम ब्याज दर देखकर लोन लेने से बचना चाहिए। लोन की अवधि और दूसरी शर्तें भी समझना जरूरी है।

कमाई और बैंकिंग रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने से आवेदन की प्रक्रिया आसान हो सकती है। अगर भविष्य में आपकी कमाई बढ़ती है और आपके पास अतिरिक्त पैसा आता है, तो लोन की कुछ रकम पहले चुकाने पर भी विचार कर सकते हैं। इसे पार्ट-प्रीपेमेंट कहते हैं। इससे बकाया लोन और कुल ब्याज घट सकता है।

मोंगा का कहना है कि आखिरकार मकसद सिर्फ होम लोन लेना नहीं होना चाहिए। जरूरी यह है कि लोन की रकम इतनी हो, जिसकी EMI परिवार लंबे समय तक आसानी से चुका सके। इसके लिए परिवार के दूसरे जरूरी खर्चों और भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों से समझौता नहीं करना पड़े।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

नौकरी नहीं मिली तो परेशान थे, अब बिना अप्लाई किए रोज आ रहे ऑफर, वायरल हुई शख्स की पोस्ट

जिंदगी में कई बार ऐसा होता है कि जिस चीज की हमें सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उसे हासिल करना उतना ही मुश्किल लगता है। नौकरी चाहिए तो कंपनियां जवाब नहीं देतीं और पढ़ाई के लिए लोन मांगो तो बैंक पीछे हट जाते हैं। लेकिन वक्त बदलते ही तस्वीर भी बदल जाती है। गोवा के एक फाउंडर अक्षत श्रीवास्तव ने लिंक्डइन पर अपना ऐसा ही अनुभव साझा किया है। उनका कहना है कि अब जब उन्हें नौकरी या लोन की जरूरत नहीं है, तो दोनों के ऑफर लगातार मिल रहे हैं। उनकी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।

जब 100 कंपनियों से किया संपर्क

अक्षत श्रीवास्तव ने बताया कि आज उन्हें लिंक्डइन पर रोजाना करीब दो जॉब ऑफर मिलते हैं, जबकि वह नौकरी की तलाश में भी नहीं हैं। लेकिन जब वह खुद नौकरी पाने के लिए कोशिश कर रहे थे, तब हालात बिल्कुल अलग थे। उस समय उन्होंने करीब 100 कंपनियों से संपर्क किया था, लेकिन उनमें से सिर्फ दो कंपनियों की तरफ से जवाब आया। यह अनुभव बताता है कि नौकरी की तलाश में मेहनत करने के बावजूद मनचाहा मौका मिलना हमेशा आसान नहीं होता।

विदेश में पढ़ाई के लिए लोन लेना भी था मुश्किल

अक्षत ने अपनी पोस्ट में एजुकेशन लोन का किस्सा भी साझा किया। विदेश में एमबीए करने के लिए उन्हें आर्थिक मदद की जरूरत थी। इसके लिए उन्होंने कई बैंकों से संपर्क किया, लेकिन उन्हें महसूस हुआ कि पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने वाला लोन मिलना मुश्किल होगा। वहीं, अब जब उन्हें कर्ज की जरूरत नहीं है, तो उनके मुताबिक, उन्हें रोजाना करीब पांच लोन ऑफर मिल रहे हैं। इसी विरोधाभास ने उनके अनुभव को चर्चा का विषय बना दिया है।

जरूरत के वक्त ही क्यों नहीं मिलते मौके?

अक्षत की पोस्ट पर कई यूजर्स ने अपने अनुभव साझा किए। एक यूजर ने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी नौकरी में खुश होता है, तब रिक्रूटर्स उसे नौकरी के ऑफर देते हैं। लेकिन जैसे ही वह नौकरी तलाशना शुरू करता है, कंपनियों की तरफ से जवाब मिलना मुश्किल हो जाता है। कुछ लोगों ने इस स्थिति को जिंदगी का अजीब संयोग बताया, जबकि अन्य ने इसके पीछे व्यावहारिक वजहें तलाशने की कोशिश की।

‘काबिलियत बढ़ाओ, कामयाबी खुद पीछे आएगी’

एक यूजर ने इस अनुभव को किस्मत से जोड़ने के बजाय व्यक्ति की योग्यता और विश्वसनीयता से जोड़ा। उसके मुताबिक, कंपनियां उम्मीदवार की क्षमता, अनुभव और उपलब्धियों को देखकर फैसला करती हैं। इसी तरह बैंक भी कर्ज देने से पहले व्यक्ति की आर्थिक स्थिति और उसे चुकाने की क्षमता का आकलन करते हैं।

अपनी बात समझाने के लिए यूजर ने फिल्म 3 इडियट्स का मशहूर डायलॉग भी याद दिलाया, “काबिल बनो, कामयाबी झक मारकर पीछे आएगी।”

अक्षत का अनुभव हर किसी की जिंदगी पर लागू हो, यह जरूरी नहीं। लेकिन उनकी पोस्ट ने एक अहम सवाल जरूर खड़ा किया है: क्या सफलता के लिए सिर्फ मौके तलाशना काफी है, या खुद को बेहतर बनाना भी उतना ही जरूरी है?

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