Video: नाई की दुकान से इंटरनेट तक… Techie ने 90s के गानों वाला ऐसा डिजिटल अड्डा बनाया कि Paytm फाउंडर भी तारीफ करने लगे

आज के दौर में जब हेयरकट के साथ प्रीमियम सैलून, हेयर स्पा और महंगे हेयर ट्रीटमेंट आम हो गए हैं, वहीं इंटरनेट पर एक छोटे से डिजिटल प्रयोग ने लोगों को पुराने दिनों की याद दिला दी है। टेक प्रोफेशनल यश भारद्वाज ने एक ऐसा अनोखा प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसने सोशल मीडिया यूजर्स के बीच पुरानी यादों का पिटारा खोल दिया। यह पहल उस दौर की झलक दिखाती है, जब मोहल्ले की छोटी-सी नाई की दुकान सिर्फ बाल कटवाने की जगह नहीं होती थी, बल्कि वहां बैठकर गाने सुनना और आसपास के लोगों से बातचीत करना भी अनुभव का हिस्सा हुआ करता था। आज की तेज रफ्तार जिंदगी के बीच 90s की ऐसी यादों को डिजिटल अंदाज में दोबारा सामने लाने की कोशिश लोगों को काफी पसंद आ रही है।

आखिर इस वेबसाइट में ऐसा क्या खास है, जिसने इंटरनेट यूजर्स को पुराने जमाने में पहुंचा दिया? यही वजह है कि यह अनोखा प्रयोग तेजी से चर्चा में आ गया है।

Yash Bhardwaj ने बनाया Salon.wtf

डेवलपर यश भारद्वाज ने इस प्रोजेक्ट को Salon.wtf नाम दिया है। वेबसाइट पर ऐसे गानों का संग्रह उपलब्ध है, जो पुराने भारतीय बार्बरशॉप की याद दिलाते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने प्रोजेक्ट को साझा करते हुए लिखा कि यह वेबसाइट उस दौर की याद दिलाती है, जब लोग महंगे सैलून के बजाय ‘सैलून’ या मोहल्ले की नाई की दुकान पर जाते थे और करीब ₹20 में साधारण हेयरकट के साथ ऐसे गाने सुनते थे, जो माहौल को खास बना देते थे।

इंटरनेट यूजर्स बोले- ‘इसने तो पुराना जमाना याद दिला दिया’

वेबसाइट सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स के बीच इसकी चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों ने कहा कि यह प्रोजेक्ट उन्हें ऐसे समय में वापस ले गया, जब इंटरनेट और प्रीमियम सैलून रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा नहीं थे। एक यूजर ने इसे इंटरनेट पर इंसानी रचनात्मकता का शानदार उदाहरण बताया और कहा कि ऐसी चीजें इंटरनेट की असली खूबसूरती दिखाती हैं।

वेबसाइट में गाने इस्तेमाल करने पर उठा कॉपीराइट सवाल

प्रोजेक्ट को लेकर सिर्फ तारीफ ही नहीं हुई, बल्कि इसके कानूनी पहलू पर भी सवाल उठे। एक यूजर ने, जो खुद कुछ इसी तरह के प्रोजेक्ट पर काम कर रहा था, भारद्वाज से पूछा कि ऑनलाइन संगीत इस्तेमाल करते समय कॉपीराइट से जुड़ी किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। इस पर भारद्वाज ने बताया कि वेबसाइट अपने सर्वर पर गाने स्टोर नहीं करती।

‘गाने मेरे सर्वर पर नहीं हैं’

भारद्वाज के अनुसार, वेबसाइट YouTube की मौजूदा प्लेबैक व्यवस्था का इस्तेमाल करती है। उन्होंने बताया कि वीडियो और frame को वेबसाइट के इंटरफेस में छिपाकर केवल ऑडियो अनुभव रखा गया है। उनके मुताबिक, गाने YouTube के माध्यम से ही चल रहे हैं और उन्होंने मूल प्लेयर को अपने तरीके से पेश किया है। हालांकि, किसी वेबसाइट का इस तरह का संगीत उपयोग वास्तव में कानूनी रूप से अनुमत है या नहीं, यह संबंधित प्लेटफॉर्म की शर्तों और लागू कॉपीराइट कानूनों पर निर्भर कर सकता है।

Paytm के संस्थापक भी हुए पुराने दिनों के फैन

वेबसाइट की लोकप्रियता बढ़ने के साथ यह पोस्ट Paytm के संस्थापक विजय शेखर शर्मा तक भी पहुंच गई। उन्होंने X पर इस प्रोजेक्ट को साझा किया और इसकी तारीफ की। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को भारत की पुरानी मोहल्ला बार्बरशॉप और उस दौर के संगीत से जुड़ी यादों को फिर से जीवंत करने वाली कोशिश के तौर पर सराहा।

एक वेबसाइट ने खोल दिया यादों का पिटारा

Salon.wtf की खासियत सिर्फ पुराने गाने नहीं हैं। इसकी लोकप्रियता इस बात को दिखाती है कि तकनीक के जरिए पुरानी यादों को किस तरह नए अंदाज में पेश किया जा सकता है। जहां आज लोग हेयरकट के लिए चमकदार सैलून और डिजिटल अपॉइंटमेंट पसंद करते हैं, वहीं यह छोटा-सा इंटरनेट प्रोजेक्ट लोगों को उस दौर में वापस ले जा रहा है, जब ₹20 का हेयरकट, रेडियो पर बजता गाना और मोहल्ले की नाई की दुकान ही एक अलग तरह का अनुभव हुआ करता था।

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न कॉलेज डिग्री, न अंग्रेजी! अरबपति बिजनेसमैन कैसे बने वेदांता ग्रुप के अनिल अग्रवाल?

वेदांता ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन अनिल अग्रवाल देश के जाने-माने बिजनेसमैन हैं।  पटना से शुरू हुआ उनका सफर एक बड़ी ग्लोबल नेचुरल रिसोर्स कंपनी के प्रमुख बनने तक पहुंचा। उनका जीवन एक कारोबारी के रूप में मेहनत और मजबूत इरादे की मिसाल माना जाता है। खास बात यह है कि अनिल अग्रवाल ने कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं की थी।

‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ के मुताबिक, अनिल अग्रवाल ने बिहार की राजधानी पटना के मिलर हाई स्कूल से मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने किसी विश्वविद्यालय में पढ़ाई नहीं की और उनके पास कॉलेज की डिग्री भी नहीं है। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी या आगे की पढ़ाई करने के बजाय अपने पिता द्वारका प्रसाद अग्रवाल के कारोबार में शामिल होने का फैसला किया। उनके पिता एल्युमीनियम के कंडक्टर बनाने का काम करते थे। यहीं से अनिल अग्रवाल के कारोबारी सफर की शुरुआत हुई। आगे चलकर उन्होंने अपने कारोबार को बड़ा किया और वेदांता समूह को एक बड़ी कंपनी के रूप में स्थापित किया।

19 साल की उम्र में मुंबई पहुंचे अनिल अग्रवाल

बिजनेस के नए मौके तलाशने के लिए अनिल अग्रवाल ने 19 साल की उम्र में पटना छोड़कर मुंबई जाने का फैसला किया। वेदांता की ओर से उनके सफर के बारे में दी गई जानकारी के मुताबिक, जब वह मुंबई पहुंचे, तब उनके पास साधन सीमित थे। हालांकि, एक सफल कारोबारी बनने का उनका इरादा मजबूत था। मुंबई पहुंचने के बाद शुरुआती दौर में उन्होंने कई तरह के कारोबार में हाथ आजमाया। कई कोशिशों के बाद आखिरकार उन्हें धातु और खनन के क्षेत्र में सफलता मिली।

साल 1976 में अनिल अग्रवाल ने उस कारोबार की नींव रखनी शुरू की, जो आगे चलकर वेदांता समूह बना। समय के साथ उनका कारोबार लगातार बढ़ता गया और एल्युमीनियम, जिंक, कॉपर, लौह अयस्क, तेल और गैस समेत कई नेचुरल रिसोर्स के क्षेत्रों तक फैल गया। इस तरह पटना से शुरू हुआ अनिल अग्रवाल का सफर धीरे-धीरे एक बड़े कारोबारी समूह के निर्माण तक पहुंच गया।

2003 में बदली कारोबार की तस्वीर

अनिल अग्रवाल के कारोबारी सफर में साल 2003 एक बड़ा पड़ाव साबित हुआ। इसी साल वेदांता रिसोर्सेज लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हुई। यह लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी। इस लिस्टिंग के बाद अनिल अग्रवाल के कारोबार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने में मदद मिली। कॉलेज की डिग्री न होने के बावजूद अनिल अग्रवाल ने अपने व्यावहारिक अनुभव, जोखिम लेने की हिम्मत और कारोबार की समझ के दम पर एक बड़ा कारोबारी समूह खड़ा किया। पटना में स्कूल की पढ़ाई पूरी करने से लेकर वेदांता समूह का नेतृत्व करने तक का उनका सफर बताता है कि किसी कारोबारी की सफलता में सिर्फ डिग्री ही नहीं, बल्कि अनुभव, मेहनत और मजबूत इरादा भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि सीमित साधनों के बावजूद सही मौके पहचानकर और लगातार कोशिश करते हुए एक बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है।

Dog Surgery Viral Video: 26 साल के करोड़पति ने ‘कुत्ता’ बनने के लिए उड़ाए 220 करोड़? वायरल वीडियो ने खड़े किए सवाल

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो चर्चा में है, जिसने लोगों को हैरान कर दिया है। वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि जापान के 26 वर्षीय करोड़पति जासो ने खुद को कुत्ते जैसा दिखाने के लिए करीब 220 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। पोस्ट के मुताबिक, उन्होंने कई सर्जरी करवाईं और अब उनका हाव-भाव और रहन-सहन कुत्ते जैसा है। हालांकि, इस दावे की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा

वायरल पोस्ट में कहा गया है कि जासो ने अपनी शक्ल और शरीर को कुत्ते जैसा बनाने के लिए बड़ी रकम खर्च की। दावा यह भी है कि सर्जरी के बाद वह कुत्ते की तरह चलने-फिरने और रहने की कोशिश करते हैं। वीडियो के साथ शेयर किया गया यह दावा सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया और देखते ही देखते लोग इस असामान्य कहानी पर अपनी प्रतिक्रियाएं देने लगे।

करोड़पति ने चुना ऐसा अजीब शौक?

वीडियो वायरल होने के बाद यूजर्स के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हुई कि अगर किसी व्यक्ति के पास करोड़ों रुपये हैं तो वह उन्हें अपनी पसंद के मुताबिक खर्च कर सकता है, लेकिन 220 करोड़ रुपये खर्च कर खुद को कुत्ते जैसा बनाने का दावा लोगों को असामान्य लगा। कुछ यूजर्स ने इस पर मजेदार टिप्पणियां कीं, जबकि कुछ ने इसे इंसान के अनोखे शौक की मिसाल बताया।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

पोस्ट के कमेंट सेक्शन में लोगों की प्रतिक्रियाएं भी अलग-अलग रहीं। कुछ लोगों ने मजाक करते हुए कहा कि आमतौर पर करोड़पति महंगी कार, बंगला या लग्जरी लाइफस्टाइल पर पैसा खर्च करते हैं, लेकिन यहां मामला बिल्कुल अलग है। वहीं, कुछ यूजर्स ने वीडियो को लेकर हैरानी जताई और कहा कि अगर यह दावा सही है तो इतनी बड़ी रकम खर्च करने का फैसला वाकई चौंकाने वाला है।

कुछ लोगों ने वीडियो पर ही उठाए सवाल

हर कोई वायरल दावे को सच मानने के लिए तैयार नहीं है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल किया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति आखिर कौन है और क्या वाकई उसने इतनी बड़ी रकम सर्जरी पर खर्च की है। कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली तस्वीरों और वीडियो के साथ कई बार अधूरी या गलत जानकारी जोड़ दी जाती है। ऐसे में केवल पोस्ट या वीडियो के आधार पर किसी बड़े दावे को सच मानना सही नहीं होगा।

अभी तक दावे की पुष्टि नहीं

फिलहाल जासो के बारे में किए जा रहे इन दावों की किसी विश्वसनीय आधिकारिक स्रोत से पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए 220 करोड़ रुपये खर्च करने, कई सर्जरी कराने या कुत्ते जैसा जीवन जीने की बात को फिलहाल सोशल मीडिया का दावा ही माना जाना चाहिए। वीडियो जरूर तेजी से वायरल हो रहा है, लेकिन इसके पीछे की वास्तविक कहानी क्या है, यह आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

Gen Z की अनोखी नौकरी वाली मांग ने छेड़ी बहस, IITian फाउंडर ने बताया क्यों कैंडिडेट को किया सिलेक्ट

Gen Z की अनोखी नौकरी वाली मांग ने छेड़ी बहस, IITian फाउंडर ने बताया क्यों कैंडिडेट को किया सिलेक्ट

नौकरी के इंटरव्यू में कैंडिडेट आमतौर पर सैलरी, छुट्टियों, वर्क फ्रॉम होम और जॉब रोल से जुड़ी बातें पूछते हैं। लेकिन नोएडा के एक फाउंडर के सामने एक उम्मीदवार ने ऐसी मांग रख दी, जिसने इंटरव्यू का माहौल ही बदल दिया। कैंडिडेट ने बेहद आत्मविश्वास के साथ कहा कि उसे हर दोपहर 30 मिनट की नींद लेने की जरूरत होगी, क्योंकि इससे उसकी productivity बेहतर होती है। हैरानी की बात यह थी कि उसने यह बात न तो मजाक में कही और न ही किसी झिझक के साथ।

फाउंडर नितिन वर्मा के मुताबिक, उम्मीदवार ने अपनी इस जरूरत को ऐसे रखा जैसे वह सैलरी पर बातचीत कर रहा हो। पहली प्रतिक्रिया में उन्हें इंटरव्यू खत्म करने का ख्याल आया, लेकिन बाद में उन्होंने इस मांग को एक अलग नजरिए से देखने का फैसला किया। सवाल यह था कि क्या कर्मचारी के काम के नतीजे अच्छे हों तो 30 मिनट की nap वास्तव में बड़ी समस्या है?

 ‘हर दोपहर मुझे Nap चाहिए’

IIT-backed कंपनी के फाउंडर और CEO नितिन वर्मा ने LinkedIn पर इस इंटरव्यू का अनुभव शेयर किया। उनके मुताबिक, उम्मीदवार ने पूरी गंभीरता और आत्मविश्वास के साथ कहा कि दोपहर की 30 मिनट की झपकी उसके काम को बेहतर बनाती है। वर्मा ने बताया कि उम्मीदवार ने यह बात ऐसे रखी, जैसे वह सैलरी पर बातचीत कर रहा हो। उनका पहला विचार इंटरव्यू खत्म करने का था, लेकिन फिर उन्होंने सोचा कि क्या यह मांग वाकई इतनी गलत है।

फाउंडर को पसंद आई कैंडिडेट की बेबाकी

नितिन वर्मा ने माना कि छोटी दोपहर की नींद से फोकस, एनर्जी और याददाश्त बेहतर हो सकती है। उन्होंने मजाक में कहा कि कॉरपोरेट ऑफिस में दोपहर की मीटिंग्स के दौरान कई लोग वैसे भी ऊंघते नजर आते हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि यह उम्मीदवार अपनी जरूरत खुलकर बता रहा था। फाउंडर के मुताबिक, ज्यादातर लोग इंटरव्यू में खुद को कंपनी की पसंद के हिसाब से पेश करते हैं, जबकि इस कैंडिडेट ने साफ बताया कि वह किस तरह काम करने पर सबसे ज्यादा productive रहता है।

‘मुझे फर्क नहीं पड़ता तुम कब सोते हो’

वर्मा ने कैंडिडेट को फिक्स 30 मिनट की Nap Break देने के बजाय साफ कहा कि उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि कर्मचारी कब आराम करता है। उनके लिए जरूरी यह है कि सौंपा गया काम समय पर पूरा हो। यानी शर्त सीधी थी, काम पूरा करो, तो घंटे गिनने की जरूरत नहीं; काम नहीं हुआ तो कोई Nap मदद नहीं करेगी।

आखिरकार मिल गई नौकरी

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि कैंडिडेट को नौकरी मिल गई। फाउंडर ने कहा कि उसकी Nap की मांग असली मुद्दा नहीं थी। उन्हें उसकी ईमानदारी और आत्मविश्वास ने प्रभावित किया। इस घटना ने उन्हें यह सोचने पर भी मजबूर किया कि क्या आधुनिक वर्कप्लेस में कर्मचारियों की productivity को ऑफिस में बिताए घंटों से मापा जाना चाहिए या उनके actual results से।

LinkedIn पर लोगों ने क्या कहा?

पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने इसे बदलते workplace culture का संकेत बताया। कुछ ने कहा कि अगर कर्मचारी अपना काम पूरा कर रहा है तो उसे अपनी working style में थोड़ी आजादी मिलनी चाहिए। वहीं, कुछ यूजर्स ने Gen Z के इस अंदाज पर मजाक भी किया। एक यूजर ने कहा कि Gen Z को पता है कि जरूरी benefits के लिए negotiation कैसे करनी है।

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खुश नहीं हैं तो ऑफिस मत आइए! ये कंपनी देती है 10 दिन की Unhappy Leave, हर्ष गोयनका ने छेड़ी नई बहस

RPG एंटरप्राइजेज के चेयरमैन ने चीनी रिटेल चेन ‘पैंग डोंग लाई’ के फाउंडर और रिटेल टाइकून ‘यू डोंग लाई’ द्वारा शुरू की गई एक अनोखी पॉलिसी का जिक्र किया। यह पॉलिसी एक आसान सिद्धांत पर काम करती है- “अगर आप खुश नहीं हैं, तो काम पर न आएं।” इस सिस्टम के तहत, मैनेजमेंट छुट्टी देने से मना नहीं कर सकता, क्योंकि इसका मकसद कर्मचारियों को आराम का समय खुद तय करने की आजादी देना है।

हर्ष गोयनका ने एक्स पर पोस्ट शेयर किया है। उन्होंने लिखा- चीन की रिटेल कंपनी ‘पैंग डोंग लाई’ अपने कर्मचारियों को 10 दिन की पेड “अनहैपी लीव” देती है। कंपनी के फाउंडर यू डोंगलाई की सोच साफ है- “अगर आप खुश नहीं हैं, तो काम पर न आएं।” कहा जाता है कि मैनेजर इस तरह की छुट्टी की रिक्वेस्ट को मना नहीं कर सकते।

उन्होंने आगे लिखा-क्या यह कुछ ज़्यादा ही है? शायद। हमें इस बात पर और गहराई से सोचने की ज़रूरत है कि क्या भारतीय माहौल में ‘अनहैपी लीव’ की जरूरत है या फिर क्या बर्नआउट (काम के तनाव से होने वाली थकान) को रोकने और ऐसा वर्कप्लेस बनाने का कोई बेहतर तरीका हो सकता है, जहां लोग सच में काम पर आना चाहें।

गोयनका ने बदलते ग्लोबल वर्क कल्चर को देखते हुए यह पोस्ट शेयर किया है। लेकिन उनके प्रोफेशनल नेटवर्क में इसे लेकर बहुत अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कमेंट बॉक्स में लोग-लोग अपने विचार शेयर कर रहे हैं।

कुछ लोगों को उनका ये सजेशन पसंद नहीं आया। लोगों का कहना है कि अगर पूरी टीमें परफॉर्मेंस टारगेट पूरे न होने के बाद महीने के आखिरी दिनों जैसी अहम तारीखों पर “अनहैप्पी लीव” (unhappy leave) के लिए अप्लाई करती हैं, तो यह खतरनाक हो सकता है। कंपनी पर गहरा असर पड़ेगा।

वहीं कई प्रोफेशनल्स का तर्क है कि छुट्टी देने से सिस्टम की कई समस्याओं को ठीक नहीं किया जा सकता है। वहीं कुछ ने कहा कि लीडर्स को अटेंडेंस मैनेज करने के बजाय “उत्साह बढ़ाने” पर ध्यान देना चाहिए, जिससे मेंटल हेल्थ की वजह से छुट्टी लेने की जरूरत अपने आप कम हो जाएगी।

Emcure Pharma Q1 Results: नमिता थापर की कंपनी का मुनाफा 42% बढ़ा, रेवेन्यू रहा 23% ज्यादा

एमक्योर फार्मा का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 42 प्रतिशत बढ़कर 293.98 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले मुनाफा 206.95 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू लगभग 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 2,580.45 करोड़ रुपये रहा, जो जून 2025 तिमाही में 2,100.54 करोड़ रुपये था। कंपनी ने शेयर बाजारों को बताया है कि जून 2026 तिमाही में उसके कुल खर्च 2,188.99 करोड़ रुपये के रहे, जबकि एक साल पहले खर्च 1,809.97 करोड़ रुपये के थे।

एमक्योर फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड का नाता शार्क टैंक इंडिया में जज के तौर पर दिख चुकीं नमिता थापर से है। वह इसमें होल टाइम डायरेक्टर हैं। नमिता के पिता सतीश रमनलाल मेहता कंपनी के फाउंडर, CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। जून 2026 तिमाही में कंपनी का EBITDA एक साल पहले से 27.8 प्रतिशत बढ़कर 532.5 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन भी बढ़कर 20.6 प्रतिशत पर पहुंच गया।

कंपनी का कहना है कि जून 2026 तिमाही के दौरान उसका देश के अंदर कारोबार 10.2 प्रतिशत बढ़कर 1,095.3 करोड़ रुपये हो गया। वहीं अंतरराष्ट्रीय कारोबार 34.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1,485.1 करोड़ रुपये का रहा।

Emcure Pharma का शेयर लाल निशान में बंद

एमक्योर फार्मा जुलाई 2024 में शेयर बाजार में लिस्ट हुई थी। इसका IPO 1,952.03 करोड़ रुपये का रहा था। कंपनी का शेयर 6 अगस्त को BSE पर 1 प्रतिशत गिरावट के साथ 1936.10 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी का मार्केट कैप 36700 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। यह BSE 500 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर 6 महीनों में 28 प्रतिशत और एक साल में 36 प्रतिशत मजबूत हुआ है। 2 साल में कीमत लगभग 50 प्रतिशत बढ़ी है।

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45वीं सालाना आम बैठक 21 सितंबर को

एमक्योर फार्मा की 45वीं सालाना आम बैठक 21 सितंबर 2026 को होने वाली है। इस मीटिंग में वित्त वर्ष 2026 के लिए घोषित किए जा चुके 3.60 रुपये प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड पर शेयरहोल्डर्स की मंजूरी भी ली जाएगी। मंजूरी मिलने पर 30 दिनों के अंदर डिविडेंड का पेमेंट कर दिया जाएगा। इस डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट 4 सितंबर है। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में दर्ज होंगे, वे डिविडेंड के हकदार होंगे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Ather का सबसे सस्ता Electric Scooter, कीमत सुनकर रह जाएंगे हैरान, 120Km Range के साथ आएगा Konarc

auther scooter

Ather Energy भारतीय इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी में है। कंपनी ने अपने नए EL Platform आधारित फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर का पहला वीडियो टीजर जारी कर दिया है। इस नए इलेक्ट्रिक स्कूटर का नाम Ather Konarc बताया गया है। कंपनी इसे 29 अगस्त 2026 को होने वाले Ather Annual Community Day के दौरान भारतीय बाजार में पेश करेगी।

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सबसे खास बात यह है कि कंपनी के CEO और को-फाउंडर तरुण मेहता ने नए इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमत को लेकर भी बड़ा संकेत दिया है। उनके मुताबिक, Ather EL Platform वाले इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमत 1 लाख रुपये से 1.25 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के बीच हो सकती है।

TVS iQube और Bajaj Chetak से होगा मुकाबला

अगर Ather Konarc की कीमत 1 लाख से 1.25 लाख रुपये के बीच रहती है, तो इसका मुकाबला भारतीय बाजार में पहले से मौजूद कई लोकप्रिय इलेक्ट्रिक स्कूटरों से होगा। इसमें TVS iQube, Bajaj Chetak और Hero Vida VX2 जैसे मॉडल प्रमुख प्रतिद्वंद्वी हो सकते हैं।

 

1 से 1.25 लाख रुपये के बीच होगी कीमत

 

Ather लंबे समय से एक किफायती फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर पर काम कर रही है। पहले माना जा रहा था कि कंपनी इसे 1 लाख रुपये से कम कीमत में लॉन्च कर सकती है, लेकिन अब कंपनी के CEO के संकेतों के बाद यह संभावना कम नजर आ रही है। अगर कीमत इसी रेंज में रहती है, तो Ather Konarc कंपनी का सबसे किफायती इलेक्ट्रिक स्कूटर बन सकता है। इसकी कीमत Ather Rizta से थोड़ी कम रखे जाने की उम्मीद है।

 

वीडियो टीजर में दिखा स्कूटर का डिजाइन

नए टीजर वीडियो में स्कूटर का पूरा डिजाइन सामने नहीं आया है, लेकिन इसके कई प्रमुख हिस्सों की झलक मिली है। वीडियो में फ्रंट व्हील, डिस्क ब्रेक, फ्रंट एप्रन, रियर सेक्शन और लाइटिंग सेटअप दिखाई देता है। स्कूटर के फ्रंट में पूरी चौड़ाई में फैला LED DRL दिया जा सकता है। वहीं हेडलैंप को हैंडलबार पर रखा गया है, जैसा कि पारंपरिक स्कूटरों में देखने को मिलता है। स्कूटर के डिजाइन में ज्यादा आक्रामक स्टाइलिंग के बजाय फैमिली-केंद्रित और प्रैक्टिकल डिजाइन देखने को मिल सकता है।

 

Konarc नाम के पीछे क्या है कनेक्शन?

Ather ने अपने नए इलेक्ट्रिक स्कूटर को Konarc नाम दिया है। टीजर वीडियो में सूर्य को उगते हुए दिखाया गया है, जिससे माना जा रहा है कि कंपनी ने ओडिशा के प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर से प्रेरणा ली है। स्कूटर के फ्रंट और रियर हिस्से में LED लाइटिंग सेटअप दिया जा सकता है। पीछे की तरफ बड़ा और थोड़ा भारी डिजाइन, ऑल-LED टेल लैंप और टर्न इंडिकेटर्स देखने को मिल सकते हैं।

 

100-120 km तक की रेंज मिलने की उम्मीद

Ather Konarc के आधिकारिक स्पेसिफिकेशन अभी सामने नहीं आए हैं। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें 100 से 120 किलोमीटर तक की राइडिंग रेंज मिलने की उम्मीद है। स्कूटर को फैमिली यूज को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसमें लंबी और चौड़ी सीट के साथ पर्याप्त अंडर-सीट स्टोरेज मिलने की उम्मीद है।

 

2 kWh से 5 kWh तक की बैटरी सपोर्ट करेगा EL Platform

 

Ather का नया EL Platform कंपनी के आगामी किफायती इलेक्ट्रिक स्कूटरों के लिए महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है। कंपनी के मुताबिक इसे 26 लाख किलोमीटर से अधिक के फील्ड डेटा के आधार पर विकसित किया गया है। यह एक फ्लेक्सिबल प्लेटफॉर्म है, जिसे अलग-अलग आकार और सेगमेंट के इलेक्ट्रिक स्कूटरों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी ने पुष्टि की है कि EL Platform 2 kWh से 5 kWh तक के बैटरी पैक को सपोर्ट कर सकता है। Konarc को पहले कंपनी के अंदर EL01 कोडनेम से जाना जाता था।

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Ather Konarc कब लॉन्च होगा?

Ather Konarc को 29 अगस्त 2026 को कंपनी के Annual Community Day के दौरान आधिकारिक तौर पर पेश किए जाने की उम्मीद है। लॉन्च के समय इसकी कीमत, बैटरी क्षमता, रेंज और अन्य फीचर्स की पूरी जानकारी सामने आएगी।

 

Ather Konarc की संभावित खासियतें

  • संभावित कीमत : 1 लाख-1.25 लाख रुपए (एक्स-शोरूम)
  • लॉन्च/डेब्यू : 29 अगस्त 2026
  • प्लेटफॉर्म : Ather EL Platform
  • संभावित रेंज : 100-120 km
  • बैटरी सपोर्ट : 2 kWh-5 kWh
  • LED DRL और LED लाइटिंग
  • फैमिली-फोकस्ड डिजाइन
  • लंबी और चौड़ी सीट
  • पर्याप्त अंडर-सीट स्टोरेज 

200 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं प्रशांत किशोर और उनकी पत्नी, देश के इन राज्यों में है प्रॉपर्टी

बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर ने आज नए चैप्टर की शुरुआत की है। 3 अगस्त 2026 को बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे सामने आए हैं। बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी हार तो प्रशांत किशोर को जीत हासिल हुई है। जन सुराज पार्टी के फाउंडर प्रशांत किशोर 19,324 वोटों से जीते हैं। प्रशांत को 64,151 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार को 44,827 वोट मिले हैं। उनकी यह जीत इस लिहाज से अहम है कि बांकीपुर में बीते 31 साल से लगातार भाजपा का ही कब्जा था। इस जीत के बाद आइए जानते हैं प्रशांत किशोर की संपत्ति के बारे में।

200 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं प्रशांत किशोर और उनकी पत्नी

चुनाव आयोग में जमा किए गए हलफनामे के मुताबिक, उपचुनाव के जरिए राजनीति में कदम रखने वाले किशोर ने अपनी कुल संपत्ति 96 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई है। इनमें 22.19 करोड़ रुपये की चल संपत्ति (कैश, बैंक जमा, निवेश आदि) और 73.87 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति (जमीन और मकान) शामिल है। वहीं, उन पर करीब 5.78 करोड़ रुपये का कर्ज भी है। हलफनामे के अनुसार, उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास ने 101 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति घोषित की है। इसमें 89.51 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 12.42 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है।

देश के इन राज्यों में संपत्ति

दोनों पति-पत्नी की घोषित कुल संपत्ति 198 करोड़ रुपये से ज्यादा है। वहीं, हलफनामे में दर्ज अन्य संपत्तियों और निवेश को जोड़ने पर उनकी संयुक्त संपत्ति 208 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। प्रशांत किशोर के पास पटना के पाटलिपुत्र में एक मकान, दिल्ली के वसंत विहार में एक घर है। यूपी के गाजियाबाद स्थित इंदिरापुरम में एक अपार्टमेंट में दो फ्लैट हैं। बिहार के रोहतास जिला स्थित कोनार गांव में पैतृक संपत्ति भी है।

चुनावी हलफनामे के मुताबिक, किशोर के पास 65,570 रुपये नकद हैं, जबकि उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास के पास 1.95 लाख रुपये नकद हैं। दस्तावेज में किशोर का पेशा राजनीतिक सलाहकार (पॉलिटिकल कंसल्टेंट) बताया गया है। वहीं, डॉ. जाह्नवी दास नई दिल्ली के अपोलो इंद्रप्रस्थ अस्पताल में सीनियर एडवाइजर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) के पद पर कार्यरत हैं। राजनीति में आने से पहले किशोर ने करीब आठ साल तक संयुक्त राष्ट्र (UN) के साथ पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने पहले भारत और बाद में अफ्रीका में स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े कई कार्यक्रमों पर काम किया।

2011 में छोड़ी थी नौकरी 

बता दें कि, साल 2011 में किशोर ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की नौकरी छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने राजनीतिक सलाहकार (पॉलिटिकल कंसल्टिंग) के क्षेत्र में कदम रखा। अपनी रणनीति और चुनावी अनुभव के दम पर वह देश के सबसे चर्चित चुनावी रणनीतिकारों में शामिल हो गए। जेडीयू (JD(U)) से अलग होने के बाद उन्होंने साल 2022 में ‘जन सुराज’ अभियान शुरू किया। फिर अक्टूबर 2024 में इसे एक राजनीतिक पार्टी का रूप दिया। अब बांकीपुर उपचुनाव जीतकर उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की पहली चुनावी जीत दर्ज की है।

‘गंभीरता से करें विचार…’, बांकीपुर में जीत के बाद प्रशांत किशोर ने दी बीजेपी को बड़ी सलाह

Bankipur Bypoll Result 2026: बिहार की राजनीति में तीन अगस्त 2026 का दिन एक बड़े उलटफेर वाला साबित हुआ है। बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों ने सभी को हैरान कर दिया है। बांकीपुर में बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा है तो वहीं जन सुराज पार्टी ने बिहार में अपना खाता खोल लिया है। जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने बीजेपी को करारी शिकस्त देते हुए बांकीपुर सीट से जीत हासिल कर ली है। चुनाव आयोग (ECI) की वेबसाइट के अनुसार, 32वें राउंड तक चले मतगणना के बाद प्रशांत किशोर को 63,946 वोट मिले। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा से 19246 वोटों से मात दी है। वहीं इस जीत के बाद प्रशांत किशोर का पहला रिएक्शन सामने आया है।

उपचुनाव में जीत के बाद जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा कि वह चुनाव हारने वाले सभी उम्मीदवारों को भी बधाई देते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जीत और हार दोनों होती रहती हैं, इसलिए हर उम्मीदवार का सम्मान होना चाहिए। प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर का यह चुनाव सिर्फ एक विधायक चुनने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह बिहार में बीजेपी और एनडीए सरकार के कामकाज पर जनता का फैसला भी था। उनका कहना है कि बांकीपुर के लोगों ने अपने वोट के जरिए एक साफ संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को जनता के इस फैसले पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और बिहार के हित में राज्य की जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को सौंपनी चाहिए, जो ईमानदारी से बिहार के विकास के लिए काम कर सके।

भाजपा के लिए बड़ा झटका

बिहार के बांकीपुर में जन सुराज पार्टी के फाउंडर प्रशांत किशोर 19,324 वोटों से जीते हैं। प्रशांत को 64,151 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार को 44,827 वोट मिले हैं। बांकीपुर सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की पारंपरिक सीट है। वे यहां से लगातार 5 बार विधायक रहे हैं। उनके राज्यसभा जाने के बाद इस सीट पर उपचुनाव कराया गया। काउंटिंग के दौरान चुनाव आयोग की वेबसाइट पर कुछ गड़बड़ देखने को मिली। सुबह से वेबसाइट पर 31 राउंड की काउंटिंग बताई जा रही थी। 31 राउंड पूरे होते ही पहले 36 राउंड काउंटिंग दिखाई जाने लगी। बाद में फिर 32 राउंड की काउंटिंग दिखा दी गई।

BASIC Home Loan: 2029 तक 500 नए फाइनेंस सेंटर खोलेगी, हर साल ₹60,000 करोड़ तक होम लोन का टारगेट

BASIC Home Loan: फिनटेक कंपनी BASIC Home Loan ने 2029 तक देशभर में 500 BASIC Finance Centres खोलने की योजना बनाई है। कंपनी का मकसद होम लोन को ज्यादा आसान और तेज बनाना है। इसके लिए टेक्नोलॉजी के साथ स्थानीय एक्सपर्ट्स की मदद ली जाएगी। कंपनी का लक्ष्य इन सेंटरों के जरिए हर साल ₹50,000-60,000 करोड़ के होम लोन डिस्बर्स करना है।

पहले इन राज्यों पर रहेगा फोकस

बेसिक होम लोन के मुताबिक, शुरुआत में कंपनी उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में विस्तार करेगी। इसके बाद पूरे देश में नेटवर्क बढ़ाया जाएगा। खास फोकस टियर-2 और टियर-3 शहरों पर रहेगा। कंपनी अफोर्डेबल और मिड-इनकम हाउसिंग सेगमेंट में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।

क्यों जरूरी हैं नए फाइनेंस सेंटर?

कंपनी का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म आने के बाद भी लोग होम लोन लेते समय सलाह चाहते हैं। उन्हें सही बैंक चुनने, पात्रता समझने और दस्तावेज तैयार करने में मदद की जरूरत पड़ती है। नए BASIC Finance Centres यही काम करेंगे। यहां AI टेक्नोलॉजी और स्थानीय सलाहकार मिलकर ग्राहकों को बेहतर और तेज सेवा देंगे।

2027 तक 200 सेंटर खोलने का लक्ष्य

BASIC Home Loan के को-फाउंडर और CEO अतुल मोंगा ने कहा कि टेक्नोलॉजी ने होम लोन आसान बनाया है, लेकिन भरोसा और सही सलाह आज भी उतनी ही जरूरी है। वहीं, कंपनी के सीनियर डायरेक्टर अमरदीप शर्मा ने बताया कि 2027 के आखिर तक 200 फाइनेंस सेंटर शुरू करने का लक्ष्य है। इनके जरिए हर साल ₹15,000-20,000 करोड़ के होम लोन डिस्बर्स करने की योजना है।

स्थानीय कारोबारियों को भी मिलेगा मौका

बेसिक होम लोन का इस विस्तार के साथ 400-500 नए फाइनेंस सेंटर पार्टनर्स भी जोड़ेगी। इसमें स्थानीय उद्यमियों और फाइनेंशियल एडवाइजर्स को शामिल किया जाएगा। उन्हें कंपनी का टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म, लेंडर्स का नेटवर्क और ऑपरेशनल सपोर्ट मिलेगा। साथ ही लगातार ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

अब तक कैसा रहा सफर?

BASIC Home Loan अब तक 4 लाख से ज्यादा परिवारों को होम लोन दिलाने में मदद कर चुकी है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी ₹50,000 करोड़ से ज्यादा के होम लोन डिस्बर्स करा चुकी है। उसके पास 30,000 से ज्यादा एजेंट्स का नेटवर्क और देशभर में 120 से ज्यादा BASIC Finance Centres हैं।

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