इंदौर में आयोजित होगा राज्य स्तरीय- लक्ष्य मंथन योगासन प्रतियोगिता

इंदौर में आयोजित होगा राज्य स्तरीय- लक्ष्य मंथन योगासन प्रतियोगिता

yogasan

इंदौर। योग, स्वास्थ्य संवर्धन एवं सामाजिक चेतना के प्रसार के उद्देश्य से मध्य प्रदेश शासन के 'योग आयोग' के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में राज्य स्तरीय “लक्ष्य ‘मंथन’ योगासन प्रतियोगिता” का आयोजन किया जा रहा है।

 

आयोजन की विस्तृत कार्य योजना साझा करते हुए 'लक्ष्य पर्यावरण एवं वाटर सॉल्यूशन वेलफेयर सोसायटी' के अध्यक्ष डॉ. प्रमोद नन्दवाल ने बताया कि संस्था पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और सामाजिक जागरूकता के साथ-साथ स्वस्थ व तनावमुक्त जीवनशैली के निर्माण के लिए सतत प्रयासरत है। इसी श्रृंखला में प्रदेश की उभरती युवा प्रतिभाओं को एक सशक्त मंच प्रदान करने तथा योगासन को खेल के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के संकल्प के साथ इस व्यापक प्रतियोगिता की रूपरेखा तैयार की गई है।

 

आयोजन के तीन चरण

डॉ. नन्दवाल ने बताया कि प्रतियोगिता को तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा:

प्रारंभिक (क्वालिफाइंग) चरण: प्रथम एवं द्वितीय क्वालिफाइंग चरण 30 अगस्त तथा 06 सितंबर को सेंट अर्नोल्ड हायर सेकेंडरी स्कूल (स्कीम नं. 74, विजय नगर, इंदौर) में आयोजित होंगे।

फाइनल राउंड: दोनों क्वालिफाइंग चरणों से चयनित श्रेष्ठ प्रतिभागी 12 सितंबर को बास्केटबॉल कॉम्प्लेक्स, इंदौर में आयोजित होने वाले फाइनल राउंड में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

सहभागिता: प्रतियोगिता का स्वरूप समावेशी रखा गया है। इसमें मध्य प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों, योग महाविद्यालयों, मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण केंद्रों, योग संस्थानों के साथ-साथ स्वतंत्र योग साधक भी सहभागिता कर सकेंगे।

yoga poster

 

आयु वर्ग एवं प्रतियोगिता की श्रेणियां

प्रतियोगिता को आयु और दक्षता के आधार पर दो प्रमुख वर्गों में विभाजित किया गया है:

आयु वर्ग: 8 से 14 वर्ष तथा 14 से 20 वर्ष (बालक एवं बालिका वर्ग पृथक-पृथक)। इसके अतिरिक्त 20 वर्ष से अधिक आयु के साधकों के लिए भी 2 विशेष प्रतियोगिताओं का आयोजन रखा गया है।

व्यक्तिगत योग प्रतियोगिता: इसके अंतर्गत प्रतिभागियों को निर्धारित योग प्रोटोकॉल और पाठ्यक्रम में से चयनित कठिन आसनों का प्रदर्शन करना अनिवार्य होगा।

युगल (पेयर) योगासन प्रतियोगिता: इसमें दो प्रतिभागियों को तय नियमों, संगीत की धुन और सामूहिक तालमेल के साथ अपनी प्रस्तुति देनी होगी। यह प्रारूप प्रतिभागियों में व्यक्तिगत अनुशासन के साथ-साथ टीम भावना को भी प्रोत्साहित करेगा।

 

मूल्यांकन एवं निष्पक्षता

आयोजन की निष्पक्षता और उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान दिया गया है:

निर्णायक मंडल: निर्णायक मंडल में राष्ट्रीय स्तर की योग निर्णायक परीक्षा उत्तीर्ण एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्णयन का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।

वैज्ञानिक मानक: मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक एवं तकनीकी मानकों पर आधारित होगी, जिसमें आसनों की शुद्धता, शारीरिक संतुलन, लचीलापन, तकनीक, प्रस्तुति शैली एवं निर्धारित योग नियमों की सटीकता को परखा जाएगा।

सुरक्षा एवं नियम: पूरा आयोजन खेल नियमों, सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करते हुए संपन्न कराया जाएगा।

yaga teacher yogasan pratiyogita

आयोजन समिति का आह्वान

आयोजन समिति के वरिष्ठ सदस्यों—डॉ. हेमंत शर्मा, श्री अनिल अग्रवाल, सुश्री रौनक सोनी, श्री प्रेम दुआ, श्री मनोज वर्मा एवं श्री चंद्रशेखर तिवारी—ने प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों, योग संस्थानों एवं योगप्रेमियों से इसमें अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता करने का आह्वान किया है।

 

Vedanta Group: इन कंपनियों में हिस्सेदारी खरीद-बेच सकते हैं प्रमोटर, ₹3000 करोड़ तक जुटाने की तैयारी

Vedanta Group: माइनिंग दिग्गज वेदांता ग्रुप की हाल में लिस्ट हुई कुछ कंपनियों में जल्द ही प्रमोटर खरीद-बिक्री कर सकते हैं। Oil & Gas और Iron & Steel कारोबार में प्रमोटर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी में हैं। इसके लिए खुले बाजार से धीरे-धीरे शेयर खरीदने का रास्ता अपनाया जा सकता है। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने CNBC-TV18 को यह जानकारी दी है।

खुले बाजार से होगी खरीदारी

सूत्रों के मुताबिक, प्रमोटर चुनिंदा कंपनियों के शेयर खुले बाजार से धीरे-धीरे खरीद सकते हैं। इसे Creeping Purchase कहा जाता है। इसमें एक साथ बड़ी हिस्सेदारी खरीदने के बजाय समय के साथ थोड़ा-थोड़ा शेयर खरीदा जाता है।

SEBI के नियमों के तहत प्रमोटर इस तरीके से एक साल में अपनी हिस्सेदारी 5% तक बढ़ा सकते हैं। हालांकि, असल खरीदारी कितनी होगी और किस कंपनी में होगी, यह अभी साफ नहीं है।

₹2,000 से ₹3,000 करोड़ जुटाने की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, प्रमोटर Oil & Gas और Iron & Steel कारोबार में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए 2,000 से 3,000 करोड़ रुपये जुटा सकते हैं। इसके लिए Vedanta Ltd. या Vedanta Aluminium के शेयरों को गिरवी रखने या बेचने का विकल्प अपनाया जा सकता है।

हालांकि, Vedanta ने इस खबर की पुष्टि नहीं की है। CNBC-TV18 के सवाल पर कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि वह बाजार में चल रही अटकलों पर टिप्पणी नहीं करती।

अनिल अग्रवाल ने क्या कहा था?

इन डीमर्ज्ड कंपनियों की लिस्टिंग के समय Vedanta Group के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा था कि उनके लिए ‘मालिक बने रहना जरूरी नहीं है।’ उन्होंने कहा था कि कंपनी की ग्रोथ के लिए वह हर संभव कदम उठाएंगे। इसमें कारोबार का पुनर्गठन और विदेशों में विस्तार भी शामिल है।

वेदांता ग्रुप के शेयरों का हाल

मंगलवार को Vedanta का शेयर 2.70%% गिरकर 276 रुपये पर बंद हुआ। वहीं Vedanta Oil & Gas का शेयर 39.64 रुपये पर लगभग सपाट रहा।

Vedanta Iron & Steel का शेयर 5% के अपर सर्किट के साथ 38.81 रुपये पर पहुंच गया। दूसरी ओर, Vedanta Aluminium Metal का शेयर 0.69% गिरकर 469.35 रुपये पर बंद हुआ।

Info Edge share price: ब्रोकरेजेज की बुलिश रिपोर्ट ने भरा जोश, 7% से ज्यादा भागा शेयर, जानिए टारगेट प्राइस

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

न कॉलेज डिग्री, न अंग्रेजी! अरबपति बिजनेसमैन कैसे बने वेदांता ग्रुप के अनिल अग्रवाल?

वेदांता ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन अनिल अग्रवाल देश के जाने-माने बिजनेसमैन हैं।  पटना से शुरू हुआ उनका सफर एक बड़ी ग्लोबल नेचुरल रिसोर्स कंपनी के प्रमुख बनने तक पहुंचा। उनका जीवन एक कारोबारी के रूप में मेहनत और मजबूत इरादे की मिसाल माना जाता है। खास बात यह है कि अनिल अग्रवाल ने कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं की थी।

‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ के मुताबिक, अनिल अग्रवाल ने बिहार की राजधानी पटना के मिलर हाई स्कूल से मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने किसी विश्वविद्यालय में पढ़ाई नहीं की और उनके पास कॉलेज की डिग्री भी नहीं है। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी या आगे की पढ़ाई करने के बजाय अपने पिता द्वारका प्रसाद अग्रवाल के कारोबार में शामिल होने का फैसला किया। उनके पिता एल्युमीनियम के कंडक्टर बनाने का काम करते थे। यहीं से अनिल अग्रवाल के कारोबारी सफर की शुरुआत हुई। आगे चलकर उन्होंने अपने कारोबार को बड़ा किया और वेदांता समूह को एक बड़ी कंपनी के रूप में स्थापित किया।

19 साल की उम्र में मुंबई पहुंचे अनिल अग्रवाल

बिजनेस के नए मौके तलाशने के लिए अनिल अग्रवाल ने 19 साल की उम्र में पटना छोड़कर मुंबई जाने का फैसला किया। वेदांता की ओर से उनके सफर के बारे में दी गई जानकारी के मुताबिक, जब वह मुंबई पहुंचे, तब उनके पास साधन सीमित थे। हालांकि, एक सफल कारोबारी बनने का उनका इरादा मजबूत था। मुंबई पहुंचने के बाद शुरुआती दौर में उन्होंने कई तरह के कारोबार में हाथ आजमाया। कई कोशिशों के बाद आखिरकार उन्हें धातु और खनन के क्षेत्र में सफलता मिली।

साल 1976 में अनिल अग्रवाल ने उस कारोबार की नींव रखनी शुरू की, जो आगे चलकर वेदांता समूह बना। समय के साथ उनका कारोबार लगातार बढ़ता गया और एल्युमीनियम, जिंक, कॉपर, लौह अयस्क, तेल और गैस समेत कई नेचुरल रिसोर्स के क्षेत्रों तक फैल गया। इस तरह पटना से शुरू हुआ अनिल अग्रवाल का सफर धीरे-धीरे एक बड़े कारोबारी समूह के निर्माण तक पहुंच गया।

2003 में बदली कारोबार की तस्वीर

अनिल अग्रवाल के कारोबारी सफर में साल 2003 एक बड़ा पड़ाव साबित हुआ। इसी साल वेदांता रिसोर्सेज लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हुई। यह लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी। इस लिस्टिंग के बाद अनिल अग्रवाल के कारोबार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने में मदद मिली। कॉलेज की डिग्री न होने के बावजूद अनिल अग्रवाल ने अपने व्यावहारिक अनुभव, जोखिम लेने की हिम्मत और कारोबार की समझ के दम पर एक बड़ा कारोबारी समूह खड़ा किया। पटना में स्कूल की पढ़ाई पूरी करने से लेकर वेदांता समूह का नेतृत्व करने तक का उनका सफर बताता है कि किसी कारोबारी की सफलता में सिर्फ डिग्री ही नहीं, बल्कि अनुभव, मेहनत और मजबूत इरादा भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि सीमित साधनों के बावजूद सही मौके पहचानकर और लगातार कोशिश करते हुए एक बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है।

Vedanta Demerger: वेदांता अब रियल एस्टेट कारोबार भी अलग करेगी, शेयरधारकों को मिलेगा नया शेयर

Vedanta Demerger: अनिल अग्रवाल के मालिकाना हक वाली मेटल और माइनिंग कंपनी वेदांता लिमिटेड ने अपने रियल एस्टेट कारोबार को भी अलग करने का ऐलान किया है। यह फैसला कंपनी के पावर, ऑयल एंड गैस, आयरन एंड स्टील और एल्युमिनियम कारोबार की अलग लिस्टिंग के करीब दो महीने बाद आया है।

कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में कहा कि रियल एस्टेट बिजनेस को एक अलग लिस्टेड कंपनी बनाया जाएगा। यह डिमर्जर गोइंग कंसर्न आधार पर होगा। यानी कारोबार पहले की तरह चलता रहेगा, सिर्फ उसकी अलग कंपनी बन जाएगी।

शेयरधारकों को क्या मिलेगा?

वेदांता के मौजूदा शेयरधारकों को 20 शेयर पर 1 नया शेयर मिलेगा। यानी अगर आपके पास वेदांता के 20 शेयर हैं, तो डिमर्जर के बाद नई रियल एस्टेट कंपनी का 1 शेयर मिलेगा। हालांकि, इसके लिए रिकॉर्ड डेट का ऐलान अभी नहीं किया गया है।

क्या करती है रियल एस्टेट यूनिट?

वेदांता की यह यूनिट रिहायशी, कमर्शियल, रिटेल, इंडस्ट्रियल और हॉस्पिटैलिटी प्रोजेक्ट्स के विकास से जुड़ा काम करती है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, टाउनशिप, लीजिंग, इंडस्ट्रियल एस्टेट और स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) जैसे प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर सकती है। 31 मार्च 2026 तक वेदांता के रियल एस्टेट कारोबार का टर्नओवर सिर्फ ₹1.26 करोड़ था। यह कंपनी के कुल स्टैंडअलोन टर्नओवर का महज 0.001% है।

डिमर्जर से क्या होगा फायदा?

वेदांता का कहना है कि अलग कंपनी बनने के बाद रियल एस्टेट कारोबार अपने सेक्टर पर पूरी तरह फोकस कर सकेगा। इससे कारोबार बढ़ाने में आसानी होगी। नई कंपनी अपने हिसाब से निवेशक, रणनीतिक साझेदार और कर्जदाता भी जोड़ सकेगी। इससे विस्तार की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है।

वेदांता के शेयरों का हाल

डिमर्जर के ऐलान और जून तिमाही के नतीजों के बाद वेदांता का शेयर 0.8% की बढ़त के साथ ₹266.65 पर बंद हुआ। पिछले एक महीने में स्टॉक 5.02% गिरा है। कंपनी का मार्केट कैप 99.44 हजार करोड़ रुपये है।

Hyundai Motor Q1 Results: प्रॉफिट 35% घटकर 889 करोड़ रुपये, रेवेन्यू में मामूली गिरावट

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।