Brent Crude 111 डॉलर के करीब पहुंचा, एशियाई शेयर बाजारों में तेज गिरावट

क्रूड ऑयल की कीमतों में 20 अक्तूबर को जोरदार तेजी दिखी। ब्रेंट क्रूड 1.39 फीसदी की तेजी के साथ 111.16 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 1.78 फीसदी चढ़कर 100 डॉलर के पार निकल गया। यह क्रूड ऑयल का बीते 5 महीनों का सबसे हाई लेवल है। क्रूड की यह तेजी न सिर्फ भारत बल्कि दुनियाभर के शेयर बाजारों को बड़ी चोट पहुंचा सकती है।

20 मई के बाद पहली बार क्रूड 111 डॉलर पर

क्रूड ऑयल की कीमतों में नई तेजी की वजह सऊदी अरब में इंफ्रास्ट्रक्चर पर हूती विद्रोहियों के हमले हैं। गल्फ में भी ऑयल टैंकर्स सहित जहाजों पर हमलों की खबर है। इससे क्रूड की कीमतों में तेज उछाल आया है। 20 मई के बाद पहली बार क्रूड का भाव इस लेवल पर पहुंचा है। हालांकि, फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रही हैं।

ब्रेंट क्रूड में जल्द ज्यादा नरमी का अनुमान नहीं 

ING के एनालिस्ट्स ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट में क्रूड की कीमतों के आउटलुक के बारे में बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रूड की कीमतों को मौजूदा लेवल पर सपोर्ट मिल रहा है। स्थिति नाजुक बनी हुई है, जिससे क्रूड पर रिस्क प्रीमियम बढ़ा है। हालांकि, क्रूड की सप्लाई जारी है, जिससे रिस्क प्रीमियम में धीर-धीरे कमी आ सकती है। लेकिन, फिलहाल कीमतों में नरमी आने के संकेत नहीं हैं।

गल्फ में लगातार हमलों का क्रूड की सप्लाई पर असर

केपलर (kpler) ने अपनी रिपोर्ट में सोमवार को बताया था कि बीते दो हफ्तों में कम से कम 18 जहाजों पर हमलों की खबर है। इससे क्रूड पर रिस्क प्रीमियम बना हुआ है। इधर, हूती विद्रोहियों ने सोमवार को कहा कि उन्होंने सऊदी अरब में एनर्जी, एयरपोर्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। अरामको की साइट को भी निशाना बनाया गया है।

हूती विद्रियों का सऊदी अरब के इंफ्रा पर हमला जारी

हूती विद्रोहियों ने सोमवार को यमन में सुरक्षा बलों के एक प्रशिक्षण शिविर को निशान बनाया, जिसमें 58 लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इन नए हमलों से मध्यपूर्व में अस्थिरता का खतरा बढ़ा है। साथ ही इसका असर एनर्जी की सप्लाई पर पड़ रहा है। इस वजह से पिछले कई दिनों से ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है।

अमेरिका डीजल की सप्लाई के लिए रूस से समझौते को मजबूर

उधर, अमेरिका में क्रूड ऑयल का रिजर्व पिछले हफ्ते गिरने का अनुमान है। अमेरिका में पहले से ही ऑयल खासकर डीजल की कीमतें काफी ऊपर चल रही हैं। इससे अमेरिका को डीजल की सप्लाई के लिए रूस से समझौता करना पड़ा है। लेकिन, इससे ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। क्रूड में उछाल सिर्फ अमेरिका के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए खराब खबर है।

भारत सहित दुनियाभर में महंगाई के बेकाबू होने का खतरा

महंगे क्रूड की वजह से दुनियाभर में महंगाई बेकाबू हो सकती है। इससे केंद्रीय बैंकों को इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने पिछले महीने इंटरेस्ट रेट में 25 बीपीएस की वृद्धि की थी। इस महीने की 28 तारीख को फेड की पॉलिसी आने वाली है। महंगाई को काबू में करने के लिए फेड एक बार फिर इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। इधर, भारत में इस महीने की शुरुआत में RBI ने रेपो रेट रेट 0.25 फीसदी बढ़ाया था। अनुमान है कि केंद्रीय बैंक दिसंबर में एक बार फिर रेपो रेट बढ़ा सकता है।

20 अक्टूबर को एशियाई शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट 

क्रूड में उछाल का असर 20 अक्तूबर को शेयर बाजारों पर देखने को मिला। भारतीय शेयर बाजार दशहरा के मौके पर बंद हैं। लेकिन, दूसरे एशियाई बाजारों में तेज गिरावट देखने को मिली। जापान का निक्केई 1.63 फीसदी नीचे चल रहा था। सिंगापुर का स्ट्रेट टाइम्स 0.25 फीसदी गिरकर चल रहा था। हैंगसेंग में 1.38 फीसदी की गिरावट दिखी। ताइवान का सूचकांक 1.14 फीसदी नीचे चल रहा था। दक्षिण कोरिया के बाजार कोस्पी में 3.88 फीसदी की गिरावट दिखी।

चीन ने टनल बोरिंग मशीनों के एक्सपोर्ट पर लगाया बैन, क्या ये भारत के मेट्रो और टनल प्रोजेक्ट्स को झटका देने की चाल?

भारत में मेट्रो, हाई-स्पीड रेल और सुरंगों के निर्माण पर चीन के एक नए फैसले का असर पड़ सकता है। चीन ने टनल बोरिंग मशीन (TBM) समेत कुछ अहम मशीनों के निर्यात पर नए प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। इन मशीनों का इस्तेमाल जमीन के नीचे सुरंग बनाने में होता है। ऐसे में चीन के इस कदम से भारत की कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के सामने मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

चीन के वाणिज्य मंत्रालय (MOFCOM) ने कहा कि ये प्रतिबंध राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए लगाए गए हैं। निर्यात पर ये पाबंदियां 18 नवंबर से लागू होंगी।

TBM के प्रतिबंध से भारत की कई परियोजनाओं पर पड़ेगा असर

टनल बोरिंग मशीनों (TBM) और उनसे जुड़ी चीजों के निर्यात पर लगी इन पाबंदियों से भारत की कई परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है। इनमें अंडरग्राउंड मेट्रो सिस्टम, हाई-स्पीड रेल लाइनें और सीमावर्ती इलाकों सहित कई जगहों पर बन रही सुरंगें शामिल हैं।

गौरतलब है कि चीन पहले भी भारत को TBM के निर्यात पर पाबंदियां लगाता रहा है। साल 2024 में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जर्मनी के वाइस चांसलर रॉबर्ट हाबेक के सामने यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने बताया था कि चीन एक जर्मन कंपनी को वहां निर्मित टनल बोरिंग मशीनें भारत निर्यात करने नहीं दे रहा है।

वाणिज्य मंत्रालय की घोषणा के अनुसार, चीन के नए प्रतिबंधों में ‘वॉकिंग एक्सकेवेटर’ (चलने वाले उत्खनन यंत्र) और ‘प्लेट्यू-टाइप वेट शॉटक्रिट मशीनें’ भी शामिल हैं।

क्या है ‘वॉकिंग एक्सकेवेटर’ मशीन?

बता दें कि ‘वॉकिंग एक्सकेवेटर’ एक ऐसी मशीन है जिसे हर तरह के भू-भाग पर चलने के लिए डिजाइन किया गया है। यह अपने वर्किंग अटैचमेंट, आउट्रिगर या पहियों की मिली-जुली गतिविधियों का इस्तेमाल करके कठिन इलाकों में भी खुदाई का काम कर सकती है।

‘प्लेट्यू-टाइप वेट शॉटक्रिट मशीन’ का इस्तेमाल ऊंचे पठारी इलाकों में किया जाता है। यह सीमेंट और दूसरी निर्माण सामग्री को नोजल तक पहुंचाती है। इसके बाद हवा और एक खास केमिकल की मदद से इस मिश्रण को तेज दबाव के साथ किसी सतह पर छिड़का जाता है। इसका इस्तेमाल निर्माण कार्यों में सतह को मजबूत बनाने के लिए किया जाता है।

घोषणा के मुताबिक, इन नए उपायों के तहत ड्रेजर (तलछट हटाने वाली मशीन) से जुड़ी कुछ वस्तुओं के निर्यात नियंत्रण को भी बेहतर बनाया गया है। इनमें स्लरी पंप, ड्रैगहेड और कटरहेड जैसी चीजें शामिल हैं, जो तय तकनीकी मानकों को पूरा करती हैं।

AI से सोलर पावर तक, 14 तकनीकों पर नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी में चीन

वहीं शुक्रवार को, MOFCOM ने एक ड्राफ्ट प्लान जारी किया, जिसमें 14 तरह की तकनीकों पर नए निर्यात प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। इन तकनीकों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बायोटेक्नोलॉजी से लेकर फोटोवोल्टिक सोलर पावर तक के क्षेत्र शामिल हैं।

इन प्रस्तावित प्रतिबंधों का वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा पर बड़ा असर पड़ सकता है, खासकर उन देशों के लिए जो चीनी AI पर निर्भर हैं।

सोमवार को जारी घोषणा के मुताबिक, इन प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले सामान का निर्यात करने वाली कंपनियों को चीन के वाणिज्य मंत्रालय से लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए उन्हें चीन के निर्यात नियंत्रण कानून और दोहरे इस्तेमाल वाली वस्तुओं से जुड़े नियमों का पालन करना होगा।

घोषणा में यह भी कहा गया है कि निर्यातकों को प्रतिबंधित सामान की सही पहचान करनी होगी और सीमा शुल्क से जुड़े दस्तावेजों में उसकी पूरी जानकारी देनी होगी। साथ ही, हर सामान के लिए तय दोहरे इस्तेमाल वाले निर्यात नियंत्रण कोड का उल्लेख करना भी जरूरी होगा।

सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, जिन वस्तुओं पर निर्यात नियंत्रण लागू नहीं है, लेकिन जिनकी तकनीकी विशेषताएं या प्रदर्शन समान हैं, उनके मामले में निर्यातकों को अपने दावों को साबित करने के लिए विस्तृत तकनीकी पैरामीटर देने होंगे।

अगर सीमा शुल्क अधिकारियों को दी गई जानकारी की सटीकता, उसके पूरा होने या उसकी असलियत पर शक होता है, तो वे उसकी दोबारा जांच कर सकते हैं। MOFCOM की घोषणा के अनुसार, जांच पूरी होने तक संबंधित सामान की खेप को आगे भेजने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

ये निर्यात नियंत्रण उन ड्रेजर स्लरी पंपों पर लागू होंगे, जिनका इनलेट व्यास कम से कम 0.55 मीटर है और जिनकी अधिकतम रोटेशनल स्पीड 400 चक्कर प्रति मिनट (rpm) से अधिक नहीं है।

क्या होते हैं ड्रेजर स्लरी पंप?

बता दें कि ड्रेजर स्लरी पंप भारी-भरकम सेंट्रीफ्यूगल पंप होते हैं। इन्हें नदियों, झीलों, बंदरगाहों और महासागरों की तलहटी से पानी और ठोस पदार्थों (जैसे रेत, बजरी, गाद, मिट्टी और खदान के अवशेष) के सघन मिश्रण को खींचने और एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है।

ऐसे पंपों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए मुख्य पुर्जे भी निर्यात नियंत्रण के दायरे में आएंगे। इनमें कम से कम 1.3 मीटर के आंतरिक व्यास वाले पंप केसिंग और कम से कम 1.3 मीटर व्यास वाले इम्पेलर शामिल हैं।

घोषणा के अनुसार, इन नियंत्रणों में ‘ट्रेलिंग सक्शन हॉपर ड्रेजर’ (TSHD) में इस्तेमाल होने वाले ड्रैगहेड (जिनके सक्शन पाइप का व्यास कम से कम 0.55 मीटर है) और ‘कटर सक्शन ड्रेजर’ (CSD) में इस्तेमाल होने वाले कटरहेड (जिनके बाहरी कटर रिंग का व्यास कम से कम 2.1 मीटर है) भी शामिल हैं।

TSHD और CSD पानी के नीचे जमा तलछट (sediments) को निकालने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले दो प्रमुख प्रकार के समुद्री जहाज हैं। हालांकि, ये पूरी तरह से अलग-अलग तंत्रों (mechanisms) पर काम करते हैं और अलग-अलग वातावरण के लिए उपयुक्त होते हैं।

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Pragyan Ojha: गंभीर-कोहली के बीच नहीं है सबकुछ ठीक? प्रज्ञान ओझा के सामने सबसे बड़ी चुनौती

BCCI ने भारत के पूर्व क्रिकेटर प्रज्ञान ओझा नया चीफ सिलेक्टर बनाया है। प्रज्ञान अजित अगरकर की जगह लेंगे। इसके साथ ही बोर्ड ने पूर्व भारतीय स्पिनर रमेश पोवार को भी सीनियर पुरुष चयन समिति में शामिल करने की पुष्टि की है। वहीं प्रज्ञान ओझा का बोर्ड और खिलाड़ियों के साथ उनके अच्छे संबंध हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीसीसीआई प्रमुख ने प्रज्ञान ओझा से कहा था कि वह परेशानी दूर करने में मदद करें। उन्हें मुख्य कोच गौतम गंभीर और विराट कोहली के बीच बातचीत की कमी को दूर करने की जिम्मेदारी भी दी गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, सिलेक्शन कमिटी में साउथ ज़ोन को रिप्रेजेंट करने वाले ओझा ने अपने कार्यकाल के दौरान कभी-कभी कोहली से इस मुद्दे पर बात की थी। ओझा और कोहली ने भारत के लिए एक-दूसरे के साथ 22 मैच खेले हैं।

ओझा को दी जिम्मेदारी

ऐसी खबरें है कि इंग्लैंड दौरे के बाद जब पूर्व मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने रोहित शर्मा को वनडे टीम से बाहर रखने का फैसला किया था, तो इसकी जानकारी रोहित तक पहुंचाने की जिम्मेदारी प्रज्ञान ओझा को दी गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय ओझा और रोहित दोनों ब्रिटेन में थे। ओझा ने वहीं रोहित को चयनकर्ताओं के इस फैसले के बारे में बताया था।

24 टेस्ट मैच खेल चुके हैं ओझा

राष्ट्रीय चयनकर्ता के तौर पर प्रज्ञान ओझा अब तक ज्यादा चर्चा में नहीं रहे थे। लेकिन भारतीय क्रिकेट की एक अहम जिम्मेदारी संभालने के बाद उन पर पहले से कहीं ज्यादा दबाव होगा। अजीत अगरकर के मुख्य चयनकर्ता रहते हुए भारतीय टीम ने आईसीसी की दो बड़ी ट्रॉफियां जीती थीं। ऐसे में उनकी जगह लेना प्रज्ञान ओझा के लिए आसान नहीं होगा। प्रज्ञान ओझा ने भारत के लिए 24 टेस्ट मैच खेले हैं। उन्हें उनके अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर मुख्य चयनकर्ता के पद पर आगे बढ़ाया गया। ऐसी खबरें हैं कि, ओझा के बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के साथ भी अच्छे संबंध हैं। चयन से जुड़े मामलों में लक्ष्मण की भूमिका और प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

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Varun Dhawan: वरुण धवन ने किया कन्या पूजन, सोशल मीडिया शेयर की खूबसूरत तस्वीर

Varun Dhawan: पूरा देश नवरात्रि का त्योहार मना रहा है। सेलिब्रिटी भी इसमें पीछे नहीं हैं। बॉलीवुड अभिनेता वरुण धवन ने पारंपरिक ‘कन्या पूजन’ के साथ नवरात्रि मनाई और अपने प्रशंसकों को इस उत्सव की एक झलक दिखाई। अभिनेता ने एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वे इस रस्म के दौरान कुछ छोटी बच्चियों के साथ बैठे नजर आ रहे हैं।

वरुण धवन ने कन्या पूजन की एक तस्वीर शेयर की

वरुण ने अपने प्रशंसकों को नवरात्रि के जश्न की झलक दिखाई। तस्वीर में वे मैरून रंग की टी-शर्ट पहने फर्श पर पालथी मारकर बैठे हैं। उनके हाथ में हाथ से बना एक “हैप्पी नवरात्रि” का साइन है। वे कैमरे की ओर देखकर मुस्कुरा रहे हैं। उनके आस-पास कुछ छोटी बच्चियां बैठी हैं। उनके सामने आर्ट का सामान और ड्रॉइंग से भरा एक गुलाबी डिब्बा रखा है। अभिनेता ने हिंदी में लिखा- “आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।”

वरुण धवन का वर्क फ्रंट

इस साल अभिनेता की दो फिल्में रिलीज हुईं, जिनमें जनवरी 2026 में आई ‘बॉर्डर 2’ शामिल है। इस फिल्म में वरुण के साथ सनी देओल, दिलजीत दोसांझ, अहान शेट्टी, मोना सिंह, मेधा राणा, अन्या सिंह और सोनम बाजवा नजर आए। इसके बाद जून 2026 में ‘है जवानी तो इश्क होना है’ रिलीज हुई। डेविड धवन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में वरुण के साथ पूजा हेगड़े और मृणाल ठाकुर मुख्य भूमिकाओं में थीं।

खबरों के अनुसार वे यश राज फिल्म्स की पहली हॉरर फीचर फिल्म में काम करने के लिए बातचीत कर रहे हैं, जिसका निर्देशन अभय पन्नू करेंगे। इस प्रोजेक्ट से जुड़े एक सूत्र ने इस साल की शुरुआत में हिंदुस्तान टाइम्स को बताया- “वरुण YRF की पहली हॉरर फिल्म में मुख्य भूमिका निभाएंगे। यश राज फिल्म्स (YRF) पहली बार हॉरर जॉनर में कदम रख रहा है।” अगर सब कुछ ठीक रहा, तो 2018 की ‘स्लाइस-ऑफ-लाइफ’ ड्रामा फिल्म ‘सुई धागा’ के बाद यह YRF के साथ अभिनेता का पहला काम होगा।

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हाल ही में वरुण धवन ने ‘बेटर न्यूट्रिशन’ में निवेश करके न्यूट्रिशन के क्षेत्र में कदम रखा है। यह ब्रांड रोजमर्रा के खाने को अधिक पौष्टिक बनाने पर केंद्रित है और ‘शार्क टैंक इंडिया’ के सीज़न 4 में भी नजर आया था। इस बॉलीवुड अभिनेता को बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु के साथ इस ब्रांड का एंबेसडर बनाया गया है। वरुण के लिए यह साझेदारी एक निजी जुड़ाव भी रखती है। उन्होंने हाल ही में कृषि भूमि खरीदी है और अब वे अपने खेत को ‘बायोफोर्टिफाइड’ खेत में बदलने के लिए इस कंपनी के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

Disha Patani Meet Disha Patani: फायरिंग की घटना के बाद टाइगर से मिलने पहुंची एक्स गर्लफ्रेंड दिशा पाटनी, पैपराजी को किया इग्नोर

Disha Patani Meet Disha Patani: रविवार को मुंबई के जुहू इलाके में अज्ञात लोगों के गोलीबारी किए जाने के बाद बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ घायल हो गए। इस घटना के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अभिनेता के आवास पर उनसे मिलने पहुंचे। इस मुश्किल समय में उनके साथ रहने के लिए अभिनेत्री दिशा पाटनी भी उनके घर पहुंचीं।

दिशा पाटनी टाइगर श्रॉफ के आवास पर पहुंचीं

पैपराजी द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो में दिशा को टाइगर के घर पहुंचते हुए देखा जा सकता है। वहां पहुंचने पर अभिनेत्री काफी परेशान नजर आ रही थीं। कार से उतरने के बाद उन्होंने पैपराजी की ओर ध्यान नहीं दिया और टाइगर से मिलने के लिए जल्दी से अंदर चली गईं।

टाइगर और दिशा कई सालों तक रिलेशनशिप में रहे हैं। हालांकि दोनों में से किसी ने भी कभी सार्वजनिक रूप से अपने रिश्ते की पुष्टि नहीं की। फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के दौरान दोनों एक-दूसरे के करीब आए और 2018 की एक्शन फिल्म ‘बागी 2’ और म्यूजिक वीडियो ‘बेफिक्रा’ में साथ नजर आए। उन्हें अक्सर डिनर डेट, छुट्टियों और बाहर घूमते हुए एक साथ देखा जाता था, जिससे उनके रोमांस को लेकर अटकलें तेज हो गईं। जुलाई 2022 में ऐसी खबरें आईं कि लगभग छह साल तक डेट करने के बाद टाइगर और दिशा अलग हो गए हैं। सूत्रों ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ को बताया था कि दोनों उसी साल की शुरुआत में अलग हो गए थे, लेकिन उनके बीच अभी भी अच्छे संबंध हैं।

रविवार को टाइगर जुहू के पुष्पा पार्क स्थित एक क्लब में फुटबॉल खेलकर लौट रहे थे, तभी बाइक पर सवार तीन लोगों ने उनकी कार पर कम से कम पांच राउंड फायरिंग की। इस घटना में टाइगर के ड्राइवर और एक ऑटो-रिक्शा चालक घायल हो गए। ड्राइवर के घायल होने के बाद टाइगर ने खुद गाड़ी की कमान संभाल ली।

नानावटी अस्पताल के सूत्रों ने बताया- “टाइगर के ड्राइवर के बाएं हाथ में गोली लगी है और शायद उन्हें सर्जरी की जरूरत पड़े। अभिनेता को मामूली खरोंचें आईं हैं। जांच के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।” एक फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का दौरा किया, बैलिस्टिक सबूत जुटाए, गाड़ी का मुआयना किया और यह पता लगाने की कोशिश की कि कुल कितने राउंड फायरिंग हुई थी। पुलिस ने हमलावरों की पहचान करने के लिए आसपास की जगहों के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले। बाद में इस मामले के सिलसिले में सांताक्रूज से एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया।

गोलीबारी के तुरंत बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग के दो सदस्यों अनिल पंडित और हरमन संधू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करके इस हमले की जिम्मेदारी ली। “हमने उसे (टाइगर श्रॉफ को) फोन करके समझाया था, लेकिन वह नहीं समझा। इसलिए आज हमने उसे अच्छे से समझा दिया है कि मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में जो कोई भी हमारी बात नहीं मानेगा या सलमान खान के साथ काम करेगा, उसका नंबर अगला होगा। इंतजार करें और देखें।

एलियन की दस्तक या कोई सामान्य पतंग? पंजाब के जालंधर से सामने आया रहस्यमयी वीडियो हुआ वायरल

पंजाब के जालंधर में आसमान में दिखाई दी एक रहस्यमयी चीज इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक अजीब वस्तु नजर आ रही है, जिसे देखकर लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं। कुछ यूजर्स इसे एलियन या UFO से जोड़ रहे हैं, जबकि कई लोगों का मानना है कि यह कोई सामान्य पतंग हो सकती है। वीडियो साझा करने वाली महिला का दावा है कि उसने इस वस्तु को दोपहर से लेकर शाम तक आसमान में देखा।

दूर से पतंग जैसी दिखने वाली यह चीज कैमरे में जूम करने पर अलग नजर आती है। इसी वजह से लोगों की उत्सुकता बढ़ गई है। हालांकि, अभी तक इसकी वास्तविक पहचान की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जालंधर के आसमान में दिखाई देने वाली यह रहस्यमयी वस्तु क्या थी?

दोपहर से शाम तक आसमान में नजर आने का दावा

इंस्टाग्राम पर ‘meenal.verma’ नाम के अकाउंट से साझा किए गए वीडियो में महिला ने बताया कि उसने पहली बार इस वस्तु को दोपहर करीब 3:30 बजे देखा था। हैरानी की बात यह थी कि शाम 5:25 बजे भी वह उसे उसी इलाके के आसमान में दिखाई दी।

महिला के मुताबिक, दूर से देखने पर यह किसी पतंग जैसी लगती थी, लेकिन कैमरे से जूम करके देखने पर उसका आकार कुछ अलग नजर आया। काफी देर तक दिखाई देने के कारण महिला भी समझ नहीं पाई कि आखिर आसमान में मौजूद यह चीज क्या है।

किसी ने बताया UFO, तो किसी ने कहा सामान्य पतंग

वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने अपने-अपने अंदाज में इसकी पहचान बतानी शुरू कर दी। कुछ लोगों ने इसे UFO यानी अज्ञात उड़ने वाली वस्तु बताया, जबकि दूसरे यूजर्स ने इसे सामान्य पतंग होने की संभावना जताई।

एक यूजर ने अनुमान लगाया कि यह NASA के Advanced Composite Solar Sail System (ACS3) जैसा हो सकता है। वहीं, एक अन्य यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि एलियन अब पंजाब भी पहुंच गए हैं। हालांकि, ये प्रतिक्रियाएं व्यक्तिगत अनुमान हैं और इनके समर्थन में कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है।

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वीडियो की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल

रहस्यमयी वस्तु को लेकर चर्चा के बीच कुछ लोगों ने वीडियो की स्पष्टता पर सवाल उठाए। एक यूजर ने टिप्पणी की कि ऐसी घटनाओं के वीडियो अक्सर साफ क्यों नहीं होते। वहीं, कुछ अन्य लोगों ने दावा किया कि उन्होंने भी आसमान में ऐसी वस्तु देखी थी और पहले उसे पतंग समझा था।

क्या जालंधर में सच में दिखाई दिया एलियन?

फिलहाल इस घटना को एलियन या UFO से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो की प्रामाणिकता और उससे जुड़े दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है। किसी वस्तु की पहचान के लिए उसकी स्पष्ट तस्वीर, उड़ान का तरीका और अन्य विश्वसनीय जानकारी जरूरी होती है।

फिलहाल यह वीडियो लोगों के बीच उत्सुकता जरूर बढ़ा रहा है, लेकिन आसमान में दिखाई देने वाली वस्तु वास्तव में क्या थी, इसका जवाब अभी सामने नहीं आया है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

किस भारतीय मिठाई को कहा जाता है ‘मिठाइयों का राजा’? जानें सही जवाब

इजराइली कंपनी के विज्ञापनों के जरिए जासूसी की कोशिश:बिना क्लिक के डिवाइस में घुस सकता है मालवेयर; UN और नाटो के नेटवर्क तक पहुंच

टोरंटो यूनिवर्सिटी की सिटिजन लैब की जांच में खुलासा हुआ है कि इजराइली कंपनी डिस्कवर टेक के विज्ञापनों के जरिए मोबाइल और कंप्यूटर में जासूसी मालवेयर (एक तरह का सॉफ्टवेयर) पहुंचाने की कोशिश की गई। इसके लिए यूजर को विज्ञापन पर क्लिक करने की जरूरत भी नहीं थी। जांच में 1.20 लाख से ज्यादा वेबसाइटों और 75 हजार से ज्यादा ऐप पर ऐसे विज्ञापनों के रिकॉर्ड मिले। इनमें संयुक्त राष्ट्र (UN) और नाटो के नेटवर्क तक विज्ञापन पहुंचने की बात भी सामने आई है। रिकॉर्ड में भारत में इस्तेमाल होने वाले ट्रूकॉलर, एमएक्स प्लेयर और लूडो स्टार जैसे ऐप भी शामिल हैं। मोबाइल नंबर जुटाने की भी कोशिश जांच में ‘डार्क कार्टोग्राफर’ नाम के एक अन्य समूह का भी पता चला। यह समूह विज्ञापनों के जरिए 30 से ज्यादा देशों में लोगों के मोबाइल नंबर पता लगाने की कोशिश कर रहा था। भास्कर एनालिसिस: 6 पॉइंट में समझें, कैसे होती थी जासूसी 1. निशाना कैसे बनाते थे? हैकिंग करने वाले सामान्य विज्ञापनों के जरिए फोन और कंप्यूटर तक पहुंचने की कोशिश करते थे। इसके लिए यूजर का विज्ञापन पर क्लिक करना जरूरी नहीं था। कुछ मामलों में विज्ञापन स्क्रीन पर दिखाई दिए बिना भी कोड डिवाइस तक पहुंच सकता था। 2. डिवाइस की पहचान कैसे करते थे? विज्ञापन से जुड़े कोड के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होती थी कि कौन-सा व्यक्ति किस ऐप या वेबसाइट का इस्तेमाल कर रहा है। डिवाइस से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जाती थी। 3. जासूसी सॉफ्टवेयर कैसे पहुंचता था? पहले जुटाई गई जानकारी के आधार पर चुनिंदा डिवाइस को निशाना बनाया जाता था। विज्ञापन के जरिए उन डिवाइस तक जासूसी सॉफ्टवेयर पहुंचाने की कोशिश होती थी। यूजर को इसकी जानकारी नहीं होती थी। 4. कितने बड़े पैमाने पर हुई कोशिश? जांच के मुताबिक, डिस्कवर टेक ने 161 देशों में विज्ञापन दिखाने की कोशिश की। कंपनी के एक सर्वर पर जनवरी से जून 2026 के बीच 36.4 लाख से ज्यादा संभावित यूजर्स के रिकॉर्ड मिले। इन यूजर्स के डिवाइस तक कोड पहुंचाने की व्यवस्था थी। जांचकर्ताओं के मुताबिक, इस नेटवर्क का दायरा इससे भी बड़ा हो सकता है। 5. हमले पकड़ में क्यों नहीं आए? विज्ञापन सामान्य दिखाई देते थे और हर यूजर को एक जैसा कोड नहीं भेजा जाता था। चुनिंदा डिवाइस को ही निशाना बनाए जाने से इस गतिविधि का पता लगाना मुश्किल हो सकता था। 6. गूगल ने क्या कार्रवाई की? रिपोर्ट के मुताबिक, डिस्कवर टेक 2020 से गूगल की प्रमाणित विज्ञापन कंपनियों की सूची में शामिल थी। सिटिजन लैब के खुलासे के बाद गूगल ने कंपनी को इस सूची से हटा दिया। ये आंकड़े विज्ञापनों के रिकॉर्ड से जुड़े हैं। सीधे हैक हुए डिवाइस या जासूसी के शिकार यूजर्स की संख्या नहीं है। बीबीसी, न्यूयॉर्क टाइम्स और रक्षा एजेंसियों तक पहुंचे विज्ञापन जांच में बीबीसी, न्यूयॉर्क टाइम्स, फॉक्स न्यूज, सीबीसी और याहू जैसी वेबसाइटों पर संदिग्ध विज्ञापन दिखने के रिकॉर्ड मिले। इनके अलावा अमेरिका के रक्षा विभाग, स्वीडन के सशस्त्र बलों और नॉर्वे की पुलिस के नेटवर्क तक भी विज्ञापन पहुंचे। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के नेटवर्क पर भी ऐसे विज्ञापन दिखे। कई देशों के सरकारी कार्यालयों और चुनावों की निगरानी करने वाली संस्थाओं के नेटवर्क भी इनके निशाने पर रहे। ————————- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाला कानून रोका: बोले-इसमें अमेरिका का फायदा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने वाले कानून को फिलहाल रोक दिया है। ट्रम्प ने शुक्रवार को इस फैसले से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर किए और कहा कि यह कदम अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

ट्रम्प ने भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाला कानून रोका:बोले-इसमें अमेरिका का फायदा; 8 दिन पहले रूस से डीजल खरीदने की डील की थी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने वाले कानून को फिलहाल रोक दिया है। ट्रम्प ने शुक्रवार को इस फैसले से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर किए और कहा कि यह कदम अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता था। इन देशों में चीन, भारत, स्लोवाकिया समेत हंगरी और अजरबैजान शामिल थे। प्रतिबंध से जुड़े कानून का मकसद रूस की कमाई के रास्ते बंद करना था, ताकि यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के लिए उसे पैसा जुटाने में मुश्किल हो। खास बात ये है कि ट्रम्प ने 9 अक्टूबर को ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल खरीदने की डील की थी। ट्रम्प को 30 दिन के अंदर फैसला लेना था ट्रम्प ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल (लिंडसे ग्राहम एक्ट) पर 18 सितंबर 2026 को साइन किए थे। 16 सितंबर को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने इसे 262-159 वोटों से मंजूरी दी थी। कानून पर साइन करने के बाद ट्रम्प को प्रतिबंध लगाने का फैसला 30 दिन के अंदर करना था। हालांकि, ट्रम्प ने इससे पहले ही प्रतिबंधों और टैरिफ पर छूट दे दी। भारत के तेल आयात में रूस का 45% हिस्सा भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है। अगस्त 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 45% थी। भारत ने अगस्त में रूस से रोजाना औसतन 20.8 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था। ऐसे में रूस से तेल खरीदने पर 100% तक टैरिफ लगने का खतरा भारत के लिए चिंता की वजह था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा था कि भारत तेल की उपलब्धता और दुनिया के हालात को देखकर अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने का फैसला करता है। भारत पहले भी अमेरिकी अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठा चुका है। जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर असर के बीच रूस से तेल की सप्लाई कम करना दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ा सकता है।
इसलिए अमेरिका के लिए रूस पर और सख्त प्रतिबंध लगाना आसान फैसला नहीं है। मिडटर्म चुनाव से पहले तेल की कीमतों की चिंता ट्रम्प ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब अमेरिका में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। यूक्रेन के रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। इससे दुनिया में तेल महंगा हो रहा है। ट्रम्प चाहते हैं कि तेल की कीमतें कम हों, ताकि अमेरिका में पेट्रोल सस्ता हो सके। नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने हैं। इन चुनावों में मतदाता महंगाई और पेट्रोल की कीमतों जैसे मुद्दों पर सरकार का काम देखेंगे। इस फैसले से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की नाराज हैं। यूरोपीय अधिकारियों ने भी इसका विरोध किया। इसी हफ्ते अमेरिकी संसद के दोनों दलों के कुछ सदस्यों ने ट्रम्प से डीजल की बिक्री पर दी गई छूट वापस लेने की मांग की। अमेरिकी सांसदों ने ट्रम्प के फैसले का विरोध किया कानून को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों पार्टियों का समर्थन मिला था। हालांकि रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले नए कानून को फिलहाल रोकने के ट्रम्प के फैसले की अमेरिकी सांसदों ने आलोचना की। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक कुछ सांसदों को पहले से आशंका थी कि ट्रम्प कानून के तहत रूस पर सख्ती नहीं करेंगे। ————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 30 हजार भारतीय मजदूरों ने काम छोड़ा:इनके पास पूरे कागजात नहीं, पकड़े जाने का डर अमेरिका के कैलिफोनिया में करीब 30 हजार भारतीय मजदूरों को खेती का काम छोड़ना पड़ा है। इनमें से कई मजदूरों के पास अमेरिका में रहने और काम करने के पूरे कागजात नहीं हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

रूस के कामचटका में 7 तीव्रता का भूकंप:2025 में यहां साल का सबसे तेज भूकंप आया, इससे उठी सुनामी में गांव बहा

रूस के कामचटका प्रायद्वीप में शुक्रवार को 7 तीव्रता का भूकंप आया। यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) के मुताबिक यह दोपहर 3:30 बजे आया। भूकंप 152 किमी की गहराई में आया। फिलहाल वहां सुनामी का खतरा नहीं है। पिछले साल 30 जुलाई को रूस के कामचटका प्रायद्वीप के तट के पास 8.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था। यह 2025 का सबसे शक्तिशाली भूकंप था। इसके बाद आई सुनामी ने तटीय इलाकों में तबाही मचाई और एक गांव का कुछ हिस्सा समुद्र में बह गया। जापान में 9.9 तीव्रता का गलत अलर्ट, 12 मिनट में वापस लिया जापान की मौसम एजेंसी ने शुक्रवार को गलती से 9.9 तीव्रता के भूकंप का अलर्ट जारी कर दिया। यह चेतावनी रूस के कामचटका प्रायद्वीप में 7.0 तीव्रता का भूकंप आने के बाद जारी हुई थी। हालांकि, एजेंसी ने करीब 12 मिनट बाद इसे वापस ले लिया। जापान टाइम्स के मुताबिक, अलर्ट स्थानीय समय के अनुसार दोपहर करीब 12:36 बजे जारी हुआ था। इसमें होक्काइडो से तोकाई इलाके तक तेज झटके आने की चेतावनी दी गई थी। NHK के मुताबिक, जापान मौसम एजेंसी ने दोपहर 12:48 बजे चेतावनी रद्द कर दी। एजेंसी ने कहा कि भूकंप की तीव्रता का अनुमान जरूरत से ज्यादा लगाया गया था। 2025 में यहां 1200 से ज्यादा भूकंप आए थे यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में कामचटका में 1200 से ज्यादा भूकंप दर्ज किए गए थे। इनमें से अधिकांश छोटे-मोटे (मैग्निट्यूड 2.0 से 4.0 के बीच) थे, लेकिन 4.0 या इससे ऊपर के 150 से ज्यादा भूकंप हुए। इस क्षेत्र में पिछले साल 3 बड़े भूकंप 7.0 या उससे अधिक तीव्रता के दर्ज किए गए थे। साल 2025 का सबसे विनाशकारी भूकंप जुलाई को रूस के कामचटका में पर आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 8.8 मापी गई। यह पिछले 10 वर्षों का सबसे बड़ा झटका था। इसने कई देशों को प्रभावित किया। यह भूकंप समुद्री क्षेत्र में आए जिसके कारण ज्यादा तबाही नहीं हुई। कामचटका में बार-बार भूकंप क्यों आते है? कामचटका प्रशांत महासागर के उस इलाके में है, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। यह प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला ऐसा क्षेत्र है, जहां दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप आते हैं और ज्वालामुखी फटते हैं। कामचटका में बार-बार भूकंप आने की मुख्य वजह जमीन के नीचे मौजूद विशाल प्लेटों की हलचल है। यहां प्रशांत प्लेट धीरे-धीरे ओखोत्स्क प्लेट के नीचे खिसक रही है। इस प्रक्रिया को सबडक्शन कहते हैं। दोनों प्लेटों के बीच घर्षण से चट्टानों में दबाव जमा होता रहता है। जब यह दबाव अचानक बाहर निकलता है, तो भूकंप आता है। प्लेटों की इसी हलचल से जमीन के नीचे गर्म पिघला हुआ पदार्थ बनता है, जिसे मैग्मा कहते हैं। यह बाहर निकलता है तो ज्वालामुखी फटता है। यहां कई सक्रिय ज्वालामुखी मौजूद हैं। समुद्र के नीचे तेज भूकंप आने पर सुनामी का खतरा भी रहता है। इस इलाके में जमीन के नीचे प्लेटों की हलचल लगातार जारी रहती है। इसलिए यहां भविष्य में भी भूकंप आने की आशंका बनी रहेगी। ——————– यह खबर भी पढ़ें… पनामा में 7.6 तीव्रता का भूकंप, 400 इमारतों को नुकसान:18 घंटे में 100 और झटके आए, 9 देशों में सुनामी की चेतावनी जारी पनामा में शुक्रवार दोपहर आए 7.6 तीव्रता के भूकंप से भारी नुकसान हुआ। अब तक 27 लोगों के घायल होने की खबर है। भूकंप का केंद्र राजधानी पनामा सिटी से करीब 200 किलोमीटर दूर अजुएरो प्रायद्वीप के पास था। पूरी खबर पढ़ें…

‘वह बस वहां से गुजर रहे थे’: CEC-विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के आरोपों पर इमरान खान के वकीलों का जवाब

Imran Khan Controversy: बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान की कानूनी टीम ने अब उन दावों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। टीम का कहना है कि वह बस उस इलाके से गुजर रहे थे। यह स्पष्टीकरण तब आया है जब अधिकारियों ने अभिनेता – जो अमेरिकी नागरिक हैं और जिनके पास ‘ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया’ (OCI) कार्ड है – को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया है।

‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, खान के वकीलों ने इस दावे को चुनौती दी है कि उन्होंने उस विरोध प्रदर्शन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी।

वहीं, विरोध प्रदर्शन में उनकी मौजूदगी को लेकर यह विवाद तब और अहम हो गया, जब ‘फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस’ (FRRO) ने उन्हें देश छोड़ने का नोटिस जारी किया।

इस घटनाक्रम ने अभिनेता के आव्रजन (इमिग्रेशन) दर्जे और भारत में विदेशी नागरिकों की राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े नियमों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

अगस्त क्रांति मैदान में क्या हुआ?

10 अक्टूबर को मुंबई पुलिस ने अगस्त क्रांति मैदान में जुटे या वहां पहुंचने की कोशिश कर रहे सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया था। ये लोग कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से बुलाए गए प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे। इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही थी।

पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों में इमरान खान भी शामिल थे। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर पुलिस वैन के अंदर की अपनी एक तस्वीर शेयर की और कैप्शन लिखा, “लगता है मैं ड्राइव पर जा रहा हूं।”

वहीं, बीजेपी नेता किरीट सोमैया के पुलिस से संपर्क करने के बाद, उस जगह पर अभिनेता की मौजूदगी विवाद का विषय बन गई। सोमैया ने सवाल उठाया कि विदेशी नागरिक होने के बावजूद, अभिनेता ने एक राजनीतिक प्रदर्शन में कैसे हिस्सा लिया। सोमैया ने खान के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि प्रदर्शन में उनकी भागीदारी से यह सवाल उठता है कि क्या उन्होंने विदेशी नागरिकों और OCI कार्डधारकों पर लागू नियमों का पालन किया है। इसके बाद खान को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस दिया गया, जिससे यह विवाद और गहरा गया।

अब अभिनेता के वकीलों ने प्रदर्शन में उनकी मौजूदगी को लेकर लगाए गए आरोपों को चुनौती दी है। उनका कहना है कि अभिनेता प्रदर्शन में हिस्सा नहीं ले रहे थे, बल्कि वे बस उस इलाके से गुजर रहे थे।

इमरान खान को भारत छोड़ने के लिए क्यों कहा गया है?

‘जाने तू… या जाने ना’ और ‘डेल्ही बेली’ जैसी फिल्मों के लिए पहचाने जाने वाले इमरान खान, अमेरिका के नागरिक हैं और उनके पास OCI कार्ड है। हालांकि, OCI का दर्जा पात्र विदेशी नागरिकों को कुछ शर्तों के साथ भारत आने और यहां रहने की अनुमति देता है, लेकिन इससे उन्हें भारत की नागरिकता नहीं मिल जाती।

नागरिकता अधिनियम के तहत, OCI कार्ड धारकों को वे राजनीतिक अधिकार नहीं मिलते जो भारतीय नागरिकों को प्राप्त हैं; इनमें वोट देने या चुनाव लड़ने का अधिकार शामिल है। अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाले संवैधानिक संरक्षण – जिनमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने का अधिकार शामिल है – विशेष रूप से केवल भारतीय नागरिकों को ही दिए गए हैं।

हालांकि, भारत में विदेशी नागरिकों के राजनीतिक प्रदर्शनों में शामिल होने को लेकर कानूनी स्थिति इतनी सीधी नहीं है कि उन पर पूरी तरह से रोक हो। इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के तहत सरकार को भारत में विदेशी नागरिकों की मौजूदगी और उनके आचरण को नियंत्रित करने के व्यापक अधिकार मिले हैं। लेकिन इस कानून में स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा गया है कि विदेशी नागरिकों या OCI कार्डधारकों के प्रदर्शन में शामिल होने पर पूरी तरह प्रतिबंध है।

ऐसे में इमरान खान के मामले में यह जानना अहम है कि उन्हें भारत छोड़ने का नोटिस किन कानूनी आधारों पर जारी किया गया है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि उनके खिलाफ कार्रवाई किस वजह से की गई।

वकीलों ने अपने दावे के समर्थन में CCTV फुटेज मांगी

इमरान खान की कानूनी टीम ने संकेत दिया है कि वे घटना के दिन उनकी गतिविधियों का पता लगाने के लिए उस इलाके की CCTV फुटेज मांगेंगे। वकीलों का कहना है कि फुटेज से यह स्पष्ट हो सकेगा कि अभिनेता वहां प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे या सिर्फ उस इलाके से गुजर रहे थे।

अधिवक्ता जुल्फिकार मेमन ने ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ से कहा, “पुलिस इलाके की CCTV फुटेज निकलवाए, सब कुछ साफ हो जाएगा।”

बचाव पक्ष के मुताबिक, खान नाना चौक से गुजर रहे थे, तभी पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण रास्ता रुक गया और मीडिया के लोग उनके पास आ गए। वकीलों ने शिकायतकर्ता के उस आरोप को चुनौती दी है, जिसमें दावा किया गया है कि अभिनेता ने प्रदर्शन में उसी तरह हिस्सा लिया था, जैसा शिकायत में बताया गया है।

बता दें कि हिरासत में लिए जाने से कुछ समय पहले मीडिया से बात करते हुए, खान ने वहां अपनी मौजूदगी के बारे में एक अलग ही बात कही थी। उन्होंने कहा, “मैं यहां एक नागरिक के तौर पर हूं, एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर जो इसी शहर में रहता है। मैं यह देखने आया हूं कि लोगों की आवाजाही की आजादी पर रोक क्यों लगाई जा रही है, और लोगों की आवाज को क्यों दबाया जा रहा है।”

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