Asian Market Today: अमेरिकी AI कंपनियों की शानदार कमाई से एशियाई बाजारों में तेजी,Kospi 3.6% तक उछला

Asian Market Today: एशियाई बाजारों में तेजी देखने को मिली। अमेरिकी इक्विटी-इंडेक्स फ्यूचर्स में आई बढ़त का असर एशियाई बाजारों पर दिखा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर से सबसे ज्यादा फायदा उठाने वाली कुछ बड़ी कंपनियों की शानदार कमाई ने निवेशकों का टेक्नोलॉजी शेयरों के प्रति उत्साह फिर से जगा दिया है।

MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स 0.6% ऊपर चढ़ा, जिसमें दक्षिण कोरिया और जापान सबसे आगे रहे। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) इंडेक्स 3.62% उछल गया। इससे पहले, दक्षिण कोरिया के बाजार में हाल ही में एक IPO की शुरुआत बेहद खराब रही थी, जिससे अब बाजार ने जोरदार वापसी की है। जापान में, निक्केई 225 (Nikkei 225) में 1.76% और व्यापक टॉपिक्स (Topix) इंडेक्स में 1.12% की बढ़त दर्ज की गई। हैंग सेंग फ्यूचर्स भी 0.5% ऊपर रहा।

भारत में, GIFT निफ्टी (जो यह संकेत देता है कि दिन की शुरुआत में शेयर बाजार कैसा रहेगा) ने सूचकांकों के लिए एक सकारात्मक (हरे निशान में) शुरुआत का अनुमान जताया है।

इसके अलावा, बुधवार को जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए सब्सक्रिप्शन भी शुरू होने जा रहा है। बाजार के जानकारों ने इसे ‘सभी IPO की जननी’ (Mother of all IPOs) करार दिया है, क्योंकि उम्मीद है कि यह देश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा IPO होगा। करेंसी मार्केट में, जापानी येन 158.29 प्रति डॉलर के स्तर पर लगभग स्थिर रहा, जबकि ऑफशोर युआन 6.6746 प्रति डॉलर पर बना रहा।

अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में भी तेजी दिखी। नैस्डैक 100 (Nasdaq 100) फ्यूचर्स 0.7% ऊपर चढ़े। वहीं, स्पेसएक्स (SpaceX) के शेयरों में एक्सटेंडेड ट्रेडिंग के दौरान करीब 7% की उछाल आई, क्योंकि कंपनी ने अपने तीसरी तिमाही के नतीजे जारी किए हैं।

सुपर माइक्रो कंप्यूटर (Super Micro Computer) ने भी उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया और पोस्ट-मार्केट ट्रेडिंग में 15% की तेजी दर्ज की, जिससे AI-इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयरों को बढ़ावा मिला। दूसरी ओर, नेटफ्लिक्स (Netflix) के शेयरों में गिरावट आई, क्योंकि कंपनी ने भविष्य के लिए निराशाजनक अनुमान (forecast) जारी किया है।

स्पेसएक्स (SpaceX) की इस तेजी के पीछे एलन मस्क की सैटेलाइट, रॉकेट और AI कंपनी का शानदार प्रदर्शन रहा। सितंबर में समाप्त तिमाही के लिए कंपनी ने 4.4 अरब डॉलर की नेट इनकम दर्ज की, जबकि इसका रेवेन्यू एक साल पहले की तुलना में 161% बढ़ गया है।

इसके अलावा, मस्क ने बताया कि स्पेसएक्स और टेस्ला ने संभावित विलय (merger) की संभावना तलाशने के लिए विशेष कमेटियां बनाई हैं। यह कदम अब तक के सबसे बड़े कॉर्पोरेट गठबंधन की दिशा में एक शुरुआती पहल है।

पिछले हफ्ते AI वैल्यूएशन और फाइनेंसिंग को लेकर चिंताओं के कारण टेक्नोलॉजी शेयरों में काफी उतार-चढ़ाव आया था, लेकिन हालिया नतीजों ने निवेशकों को कुछ राहत दी है। अब निवेशकों की नज़र कंपनियों के आने वाले नतीजों पर है। वे यह देखना चाहेंगे कि क्या विकास के आंकड़े AI इंफ्रास्ट्रक्चर में लगाए जा रहे अरबों डॉलर के निवेश को सही ठहराते हैं।

इस बीच, मंगलवार को उतार-चढ़ाव भरे सत्र के बाद, एशियाई बाज़ार की शुरुआती ट्रेडिंग में तेल की कीमतों में आई तेज़ी बनी रही। मंगलवार को ट्रेडर्स अमेरिका-ईरान युद्ध को खत्म करने की कोशिशों से जुड़ी अलग-अलग खबरों का आकलन कर रहे थे। एशियाई बाज़ार की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड 109.52 डॉलर पर कारोबार कर रहा था, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 0.7% की बढ़त के साथ 98.48 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

बॉन्ड बाजार में, न्यूयॉर्क सत्र के दौरान लॉन्ग-टर्म US ट्रेज़री का प्रदर्शन बेहतर रहा, जिसका असर डॉलर पर पड़ा। इस साल अब तक US ट्रेज़री यील्ड पर तेल की कीमतों का काफी असर रहा है, लेकिन पिछले हफ्ते बॉन्ड निवेशकों ने कच्चे तेल की कीमतों पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया, क्योंकि AI निवेश से जुड़े शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Silver Prices: चांदी में रिकॉर्ड हाई से 46% की गिरावट, जेपी मॉर्गन ने कीमतों के लिए अनुमान घटाया

Silver Prices: चांदी में निवेश करने वालों को पिछले कुछ महीनों में बड़ा झटका लगा है। 29 जनवरी को चांदी की कीमत ₹3,84,632 प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। लेकिन 19 अक्टूबर तक यह गिरकर ₹2,08,380 प्रति किलो रह गई। यानी रिकॉर्ड हाई से करीब 45.8% की गिरावट आई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी दबाव में है। मंगलवार को इसकी कीमत करीब 56.50 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। जनवरी के 121 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर से यह करीब 54% नीचे है।

चांदी की कीमतों पर दबाव क्यों?

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और बॉन्ड यील्ड भी ऊंची बनी हुई है। इससे बाजार को लग रहा है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रख सकते हैं। चांदी पर इसका दबाव पड़ रहा है, क्योंकि इससे नियमित ब्याज आय नहीं होती।

चांदी का भाव कितना गिर सकता है?

J.P. Morgan Global Research को उम्मीद है कि 2026 की चौथी तिमाही में चांदी करीब 63 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर सकती है। बैंक ने 2026 के लिए औसत भाव का अनुमान 84 डॉलर से घटाकर 70 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। 2027 के लिए उसका अनुमान 63 डॉलर प्रति औंस है।

Bloomberg Intelligence के कमोडिटी रणनीतिकार माइक मैकग्लोन ने भी गिरावट की आशंका जताई है। Kitco के मुताबिक, उनके अनुसार चांदी निकट भविष्य में 50 डॉलर प्रति औंस तक गिर सकती है। लंबे समय तक इसका भाव 50 से 84 डॉलर के दायरे में रह सकता है।

तेल, डॉलर और अमेरिकी ब्याज दरों पर नजर

मंगलवार को ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। मध्य पूर्व और पूर्वी यूरोप में बढ़ते तनाव ने तेल की कीमतों को सहारा दिया। महंगा तेल महंगाई बढ़ा सकता है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें ऊंची रखने या बढ़ाने की आशंका बढ़ती है।

बाजार को उम्मीद है कि फेड 27-28 अक्टूबर की बैठक में दरें नहीं बदलेगा। हालांकि, दिसंबर में ब्याज दर बढ़ने की आशंका भी बढ़ी है। आने वाले अमेरिकी CPI और PPI आंकड़े इस दिशा में अहम होंगे। महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा रहे, तो चांदी पर दबाव बढ़ सकता है।

भारतीय निवेशकों को क्या करना चाहिए?

मई में इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से घरेलू चांदी की कीमतों को कुछ सहारा मिला है। लेकिन इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार की गिरावट पूरी तरह नहीं रुक सकती।

चांदी में आगे भी उतार-चढ़ाव रह सकता है। निवेशकों को कच्चे तेल, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर नजर रखनी चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ कीमत गिरने को सस्ता खरीदने का संकेत न मानें। एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय चरणों में खरीदारी करने से समय चुनने का जोखिम कुछ कम हो सकता है।

Gold Price Today: सोने में गिरावट पर लगा ब्रेक, दशहरा पर 24 और 22 कैरेट दोनों का भाव चढ़ा

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Commodity Cornor: क्रूड में नरमी से महंगाई की चिंता हुई कम , यील्ड में गिरावट से सोने को मिला सहारा

सोने की कीमतों में स्थिरता रही। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई को लेकर चिंताएं कम हुई, जबकि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट ने सोने को और सहारा दिया। शाम के सत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाजिर सोना (स्पॉट गोल्ड) लगभग 4,165 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रहा, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स पिछले बंद भाव से 0.09 प्रतिशत बढ़कर 4,185 डॉलर प्रति औंस (12:40 GMT) के करीब पहुंच गया।

अंतरराष्ट्रीय रुझानों के अनुरूप, घरेलू बाजार में MCX पर हाजिर सोना शाम के सत्र में 1,45,353 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था, जबकि 4 दिसंबर की डिलीवरी के लिए MCX गोल्ड फ्यूचर्स 0.08 प्रतिशत गिरकर 1,47,793 रुपये प्रति 10 ग्राम (18:16 IST) पर आ गया।

LKP सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) वाइस प्रेसिडेंट जतिन त्रिवेदी ने कहा, “सोने में काफी हद तक स्थिरता रही। 4,190 डॉलर के ऊपरी स्तरों से प्रॉफिट बुकिंग के बाद, यह कॉमेक्स (Comex) सोने के रुझान का अनुसरण कर रहा है। 4,200 डॉलर का स्तर एक अहम रेजिस्टेंस (बाधा) बना हुआ है, जबकि डॉलर इंडेक्स के मजबूत होने से सोने में तेजी सीमित हो रही है।”

डॉलर इंडेक्स 0.09 फीसदी बढ़कर 101.93 पर कारोबार कर रहा था, जबकि फ्यूचर्स ट्रेड में ब्रेंट क्रूड 1.17 प्रतिशत गिरकर 108.58 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

PL कैपिटल के कमोडिटी प्रमुख आशीष राजोदिया ने कहा, “अगर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी रहती है और यील्ड कम रहती है, तो सोने और चांदी में रिकवरी जारी रह सकती है। हालांकि, अगर तेल की कीमतों में फिर से उछाल आता है या फेड (अमेरिकी केंद्रीय बैंक) की ओर से कोई सख्त रुख (hawkish signal) देखने को मिलता है, तो सोने की ये बढ़त खतरे में पड़ सकती है।”

उन्होंने आगे कहा कि बाजार अब यह मानकर चल रहा है कि 27-28 अक्टूबर की बैठक में फेड ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। “अब सबकी नजरें फेड के बयान के लहजे और महंगाई के आंकड़ों के अगले दौर पर टिकी हैं।” ओम्निसिएंस कैपिटल के CEO विकास गुप्ता का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक सोने के बड़े खरीदार हैं, लेकिन साथ ही कुछ बड़े विक्रेता भी हो सकते हैं जो सोना बेच रहे हैं, जिससे सोने की कीमतें नियंत्रित बनी हुई हैं।

गुप्ता ने कहा, “भारत में त्योहारों और शादियों का सीजन आने वाला है। आमतौर पर इससे सोने की कीमतें बढ़ती हैं। हालांकि, फेड (Fed) द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना को देखते हुए, वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें दबाव में रह सकती हैं। भारत में त्योहारों के दौरान सोने की कीमतों में थोड़ी तेजी आ सकती है, लेकिन उसके बाद कीमतें स्थिर रहने की संभावना है।”

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Dollar Vs Rupee : अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 3 पैसे गिरकर 94.92 पर हुआ बंद, जानिए आगे कैसी रह सकती है रुपए की चाल

Dollar Vs Rupee : सोमवार, 19 अक्टूबर को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया अपनी शुरुआती बढ़त गंवाते हुए 3 पैसे की गिरावट के साथ 94.92 के स्तर पर बंद हुआ। घरेलू शेयर बाजारों में भारी गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण रुपये पर दबाव पड़ा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निकासी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के लगातार बने दबाव के बीच, रुपये की लगातार 6 सेशन की तेजी का सिलसिला टूट गया और यह गिरावट के साथ बंद हुआ।

इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 94.90 पर खुला। दिन के कारोबार के दौरान, यह 94.75 के हाई और 94.97 के निचले स्तर तक गया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया आज 94.92 पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से 3 पैसे कम है।

शुक्रवार को, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा डॉलर की हाजिर मांग को नियंत्रित करने के उपायों के चलते, रुपया लगातार छठे सत्र में मजबूत हुआ था और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 10 पैसे की बढ़त के साथ 94.89 पर बंद हुआ।

16 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते के दौरान, डॉलर की मांग को नियंत्रित करने के लिए RBI द्वारा उठाए गए कदमों की मदद से भारतीय रुपये में लगभग 2 प्रतिशत की मजबूती आई थी।

लेमन (Lemonn) के रिसर्च हेड, गौरव गर्ग ने कहा कि RBI के कदम शॉर्ट टर्म में करेंसी के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इसमें कोई टिकाऊ सुधार तेल की कीमतों में नरमी, विदेशी पूंजी की निकासी रुकने और बाहरी दबावों में कमी पर आने पर निर्भर करेगा।

गर्ग ने आगे कहा कि हालांकि रुपये में सुधार उत्साहजनक है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या RBI के सपोर्ट के साथ-साथ ग्लोबल और घरेलू बुनियादी हालात (फंडामेंटल्स) भी बेहतर होते हैं।

इस बीच छह बड़ी मुद्राओं के एक बॉस्केट के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स 0.09 प्रतिशत की बढ़त के साथ 101.93 पर कारोबार कर रहा है। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क, ब्रेंट क्रूड, वायदा कारोबार (फ्यूचर्स ट्रेड) में 1.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 108.58 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।

मिरे एसेट शेरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी का कहना है कि डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी के चलते उम्मीद है कि रुपया पॉजिटिव रुख के साथ कारोबार करेगा। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और FII की निकासी इसमें बड़ी तेजी को सीमित कर सकती हैं।

HDFC सिक्योरिटीज में रिसर्च एनालिस्ट, दिलीप परमार का कहना है कि भारतीय रुपया लगातार सातवें सत्र में भी मजबूत हुआ। हालांकि, दिन के दौरान हुई अधिकांश बढ़त गंवाने के बाद, यह मामूली तेजी के साथ बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में सुधार और मंगलवार को बाजार में छुट्टी होने से पहले घरेलू शेयरों में मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) के कारण, रुपये की तेजी सीमित रही। वहीं, RBI के दखल और अमेरिकी डॉलर के स्थिर रहने से रुपये को सहारा मिला। तकनीकी रूप से देखें तो स्पॉट USDINR के लिए 94.70 के स्तर पर सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, जबकि 95.50 के स्तर पर रेजिस्टेंस है।

घरेलू इक्विटी बाजार में, सेंसेक्स 876.37 अंक गिरकर 73,852.90 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 257.20 अंक गिरकर 22,888.95 पर आ गया। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) खरीदार बन गए और उन्होंने कुल 1,165.92 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इस बीच, शुक्रवार को जारी RBI के आंकड़ों के अनुसार, 9 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 8.578 अरब डॉलर घटकर 7.26 अरब डॉलर रह गया।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के हेड ऑफ रिसर्च, राजीव शरण का कहना है कि सोमवार को रुपया लगातार सातवें सत्र में मजबूत हुआ। शुरुआती कारोबार में यह 94.8 के स्तर को छू गया और डॉलर के मुकाबले 94.95 के आसपास बना रहा। इस तरह, महीने की शुरुआत में 97 के स्तर से आई इसकी जोरदार रिकवरी कायम रही। शुक्रवार को जारी RBI के आंकड़ों से पता चलता है कि इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी है। 9 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार 8.6 अरब डॉलर घटकर 7.26 अरब डॉलर रह गया। इस तरह, सितंबर की शुरुआत से अब तक कुल 60 अरब डॉलर की कमी आई है। यह एक अहम आंकड़ा है क्योंकि केंद्रीय बैंक ने केवल करेंसी सट्टेबाजों को चेतावनी ही नहीं दी, बल्कि अपने नियमों को सख्त करने से पहले एक ‘कृत्रिम आधार’ (artificial floor) बनाने के लिए भारी रकम भी खर्च की।

हालांकि शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने 1,166 करोड़ रुपये की खरीदारी की, लेकिन ब्रेंट क्रूड का 110 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ना यह बताता है कि RBI हमेशा के लिए बाजार में शांति नहीं बनाए रख सकता। अब बाजार के बुनियादी कारकों (market fundamentals) को ही स्थिति संभालनी होगी।

 

Market Outlook : बाजार की तेजी को लगा ब्रेक, जानिए 21 अक्टूबर को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Petrol Diesel Price Today: 19 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी, जानें अपने शहर का भाव

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 19 अक्टूबर 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

Petrol Diesel Price Today: 18 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल की कीमतें अपडेट, टंकी फुल कराने से पहले जानें रेट

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 18 अक्टूबर 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

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ट्रम्प ने भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाला कानून रोका:बोले-इसमें अमेरिका का फायदा; 8 दिन पहले रूस से डीजल खरीदने की डील की थी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने वाले कानून को फिलहाल रोक दिया है। ट्रम्प ने शुक्रवार को इस फैसले से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर किए और कहा कि यह कदम अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता था। इन देशों में चीन, भारत, स्लोवाकिया समेत हंगरी और अजरबैजान शामिल थे। प्रतिबंध से जुड़े कानून का मकसद रूस की कमाई के रास्ते बंद करना था, ताकि यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के लिए उसे पैसा जुटाने में मुश्किल हो। खास बात ये है कि ट्रम्प ने 9 अक्टूबर को ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल खरीदने की डील की थी। ट्रम्प को 30 दिन के अंदर फैसला लेना था ट्रम्प ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल (लिंडसे ग्राहम एक्ट) पर 18 सितंबर 2026 को साइन किए थे। 16 सितंबर को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने इसे 262-159 वोटों से मंजूरी दी थी। कानून पर साइन करने के बाद ट्रम्प को प्रतिबंध लगाने का फैसला 30 दिन के अंदर करना था। हालांकि, ट्रम्प ने इससे पहले ही प्रतिबंधों और टैरिफ पर छूट दे दी। भारत के तेल आयात में रूस का 45% हिस्सा भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है। अगस्त 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 45% थी। भारत ने अगस्त में रूस से रोजाना औसतन 20.8 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था। ऐसे में रूस से तेल खरीदने पर 100% तक टैरिफ लगने का खतरा भारत के लिए चिंता की वजह था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा था कि भारत तेल की उपलब्धता और दुनिया के हालात को देखकर अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने का फैसला करता है। भारत पहले भी अमेरिकी अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठा चुका है। जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर असर के बीच रूस से तेल की सप्लाई कम करना दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ा सकता है।
इसलिए अमेरिका के लिए रूस पर और सख्त प्रतिबंध लगाना आसान फैसला नहीं है। मिडटर्म चुनाव से पहले तेल की कीमतों की चिंता ट्रम्प ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब अमेरिका में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। यूक्रेन के रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। इससे दुनिया में तेल महंगा हो रहा है। ट्रम्प चाहते हैं कि तेल की कीमतें कम हों, ताकि अमेरिका में पेट्रोल सस्ता हो सके। नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने हैं। इन चुनावों में मतदाता महंगाई और पेट्रोल की कीमतों जैसे मुद्दों पर सरकार का काम देखेंगे। इस फैसले से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की नाराज हैं। यूरोपीय अधिकारियों ने भी इसका विरोध किया। इसी हफ्ते अमेरिकी संसद के दोनों दलों के कुछ सदस्यों ने ट्रम्प से डीजल की बिक्री पर दी गई छूट वापस लेने की मांग की। अमेरिकी सांसदों ने ट्रम्प के फैसले का विरोध किया कानून को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों पार्टियों का समर्थन मिला था। हालांकि रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले नए कानून को फिलहाल रोकने के ट्रम्प के फैसले की अमेरिकी सांसदों ने आलोचना की। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक कुछ सांसदों को पहले से आशंका थी कि ट्रम्प कानून के तहत रूस पर सख्ती नहीं करेंगे। ————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 30 हजार भारतीय मजदूरों ने काम छोड़ा:इनके पास पूरे कागजात नहीं, पकड़े जाने का डर अमेरिका के कैलिफोनिया में करीब 30 हजार भारतीय मजदूरों को खेती का काम छोड़ना पड़ा है। इनमें से कई मजदूरों के पास अमेरिका में रहने और काम करने के पूरे कागजात नहीं हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Crude Price: कच्चे तेल में उबाल, कीमत 3.7% बढ़कर एक बार फिर 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब

कच्चे तेल की कीमत में फिर से तगड़ा उछाल है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत मई के बाद पहली बार 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई। इसकी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव है, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति में जल्द राहत मिलने की उम्मीदें कम हो रही हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 3.94 डॉलर (3.7 प्रतिशत) बढ़कर 109.86 डॉलर पर बंद हुआ, जो 19 मई के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 3.44 डॉलर (3.5 प्रतिशत) बढ़कर 101.41 डॉलर पर बंद हुआ, जो 17 सितंबर के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

इस सप्ताह अब तक ब्रेंट क्रूड की कीमत 4.9 प्रतिशत और WTI की कीमत 10.4 प्रतिशत चढ़ी है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, ईरान समर्थित हूती विद्रोही सऊदी अरब पर लगातार मिसाइल और ड्रोन से हमले कर रहे हैं। वहीं रूस और यूक्रेन एक-दूसरे के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर निशाना बना रहे हैं।

इस साल 70 प्रतिशत चढ़ा कच्चा तेल

इस साल कच्चे तेल की कीमतों में 70 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई है, क्योंकि मध्य पूर्व और रूस में चल रहे युद्धों के कारण आपूर्ति बाधित हुई है। फिजिकल बाजारों में भी तंगी के संकेत मिल रहे हैं; डीजल जैसे रिफाइंड उत्पादों की कीमतों में और भी तेज उछाल आया है। यूरोप में इस कमोडिटी के लिए फ्यूचर्स की कीमतें इस साल दोगुनी से भी ज्यादा हो गई हैं।

Windfall Tax: सरकार ने पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाया, डीजल पर ड्यूटी और घटी

रूस से डीजल रिलीज के समझौते पर रोक की कोशिश

शुक्रवार को अमेरिकी सांसदों ने एक बिल पेश किया, जिसका मकसद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के बीच हुए उस समझौते को रोकना है, जिसके तहत रूस से कई सौ मिलियन बैरल डीजल रिलीज किया जाना था। समझौते पर रोक का कदम ऐसे किसी भी उपाय के खिलाफ व्यापक विरोध को दर्शाता है, जिससे रूस को अपने युद्ध कोष (War Chest) को मजबूत करने का मौका मिल सके।

अगर वैश्विक बाजारों से रूसी डीजल बाहर रहता है, तो अन्य जगहों की रिफाइनरियों को मांग पूरी करने के लिए ऑयल प्रोसेसिंग बढ़ानी पड़ेगी। हालांकि, ट्रंप ने फिर दोहराया है कि रूस डीजल जारी करने के समझौते पर अमल करेगा। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ब्लैक सी के आसपास लगातार तनाव बना हुआ है। रूस की रियाजान तेल रिफाइनरी पर हाल ही में हमला हुआ है। इसके कारण वहां कामकाज रोकना पड़ा। इस हमले ने डीजल रिलीज के समझौते के पूरा होने को लेकर संदेह और बढ़ा दिया है।

Petrol Diesel Price Today: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आज क्या हुआ बदलाव? चेक करें ताजा रेट

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 17 अक्टूबर 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

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Market Outlook: बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 19 अक्टूबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook: 16 अक्टूबर को भारतीय इक्विटी इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए हैं। निफ्टी 23,100 के स्तर के ऊपर टिके रहने में कामयाब रहा है। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 413.66 अंक या 0.56 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,729.27 पर और निफ्टी 148.80 अंक या 0.65 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,146.15 पर बंद हुआ है। इस दौरान लगभग 2221 शेयरों में तेजी आई, 1791 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 185 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज्यादा तेजी दिखाने वाले शेयरों में टेक महिंद्रा, टीसीएस, इंफोसिस, भारती एयरटेल और एमएंडएम (M&M) शामिल रहे, जबकि इंटरग्लोब एविएशन, बीएसई लिमिटेड, मैक्स हेल्थकेयर, टाटा कंज्यूमर और जियो फाइनेंशियल के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट रही।

FMCG, ऑयल एंड गैस और फार्मा को छोड़कर अन्य सभी सेक्टोरल सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। इनमें इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, मेटल, PSU बैंक और इंफ्रा सेक्टर में 1-2 प्रतिशत की तेजी देखी गई। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 0.12 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि स्मॉलकैप सूचकांक बिना किसी बड़े बदलाव के (फ्लैट) बंद हुआ।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि आज भारतीय इक्विटी बाजार में रिकवरी का सिलसिला जारी रहा। इसमें IT शेयरों में लगातार हुई खरीदारी का अहम योगदान रहा। मजबूत तिमाही नतीजों और मैनेजमेंट की अच्छी टिप्पणियों ने इस सेक्टर की कमाई के आउटलुक को लेकर भरोसा बढ़ाया है।

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और रुपये की मजबूती ने भी बाजार के सेंटीमेंट को सहारा दिया। हालांकि,इनपुट कॉस्ट बढ़ने के कारण दूसरी तिमाही (Q2) में मार्जिन घटने की चिंताओं के चलते FMCG शेयरों पर दबाव बना रहा। अलग-अलग सेक्टरों में दिख रहा यह अंतर बताता है कि लगातार बने लागत के दबाव के बीच निवेशक ऐसी कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं जिनके अर्निंग आउटलुक अच्छे नजर आ रहे हैं। रुपये की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में कमी से भले ही नियर टर्म में कुछ सपोर्ट मिले,लेकिन ग्लोबल महंगाई बढ़ने और भू-राजनीतिक जोखिमों को देखते हुए सावधानी बरतने की जरूरत है। इस रिकवरी को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि IT के अलावा अन्य सेक्टरों में भी अर्निंग मजबूत हो। इसके लिए घरेलू मांग में सुधार और मार्जिन पर दबाव का कम होना जरूरी है।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा का कहना है कि शुक्रवार को बाजार में लगातार दूसरे दिन रिकवरी देखने को मिली। गुरुवार की जोरदार तेजी के बाद,बेंचमार्क इंडेक्स ऊंचे स्तर पर कारोबार करते नजर आए। बाजार की शुरुआत सपाट रही,लेकिन बाद में कुछ खास शेयरों,खासकर टेक्नोलॉजी शेयरों में खरीदारी के चलते बाजार को मजबूती मिली। इसके बाद बाजार एक रेंज में आ गया,लेकिन इसने अपनी अधिकांश बढ़त बनाए रखी। अंत में निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ही अपने दिन के उच्चतम स्तरों के करीब बंद हुए।

सेक्टर के लिहाज से देखें तो,IT शेयरों ने लगातार चौथे सत्र में बढ़त को लीड किया। तिमाही नतीजों से मिले मोमेंटम के कारण इनमें करीब 4% की तेजी आई। मेटल और ऑटो शेयरों ने भी बाजार की तेजी में योगदान दिया। हालांकि, कुछ FMCG, रियल्टी और एनर्जी शेयरों में कमजोरी के कारण बाजार की तेजी सीमित रही। ब्रॉडर मार्केट के इंडेक्स लगातार दूसरे सत्र में सुस्त रहे और मिडकैप तथा स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग सपाट स्तर पर बंद हुए।

तिमाही नतीजों के बाद IT शेयरों में आई तेजी,बाजार की रिकवरी की मुख्य वजह रही है, जबकि दूसरे सेक्टरों ने भी इसमें सहायक भूमिका निभाई है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत हुआ, जिससे घरेलू बाजार को कुछ राहत मिली। हालांकि, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रही। इसके अलावा, लगातार बनी हुई महंगाई और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को लेकर चिंताएं अभी भी हैं,जिसके चलते सतर्क रहने की जरूरत है।

आगे की बात करें तो सोमवार को शुरुआती कारोबार में बाजार बड़े बैंकों जैसे HDFC बैंक, एक्सिस बैंक और ICICI बैंक के तिमाही नतीजों पर प्रतिक्रिया देगा। इसके साथ ही वीकेंड के दौरान ग्लोबल स्तर पर होने वाली घटनाओं का भी बाजार पर असर पड़ सकता है। तकनीकी नजरिए से देखें तो निफ्टी 23,300 के स्तर के करीब पहुंच रहा है। अगर यह मजबूती से इस स्तर के ऊपर निकलता है तो रिकवरी 23,500–23,700 के स्तर तक बढ़ सकती है। वहीं,गिरावट की स्थिति में 22,700–22,900 का दायरा सपोर्ट का काम कर सकता है। मिले-जुले संकेतों और तिमाही नतीजों के मौसम को देखते हुए, बाजार पर रुख पॉजिटिव लेकिन सतर्क है। हमें चुनिंदा शेयरों में निवेश करने और अनुशासित तरीके से ट्रेड मैनेज करने पर जोर देना चाहिए।

SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह का कहना है कि शुक्रवार को निफ्टी ने लगातार दूसरे सत्र में अपनी तेजी जारी रखी और 0.65% की बढ़त के साथ बंद हुआ। डेली चार्ट पर,इंडेक्स ने एक ऐसी कैंडल बनाई है जिसमें नीचे की तरफ एक ‘विक’ (wick) है। यह शुरुआती प्रॉफिट बुकिंग के बाद पूरे सत्र में लगातार बनी रही खरीदारी की दिलचस्पी को दिखाता है। लगातार आठ हफ्तों की गिरावट के बाद निफ्टी ने लगातार दूसरे हफ्ते भी बढ़त के साथ क्लोजिंग जो निचले स्तरों पर फिर से खरीदारी लौटने का संकेत है।

टेक्निकल नजरिए से देखें तो निफ्टी अपने 20-डे EMA के ऊपर कारोबार करता रहा। RSI निचले स्तरों से ऊपर की ओर बढ़ता रहा, जबकि पॉजिटिव MACD क्रॉसओवर और बढ़ता हुआ हिस्टोग्राम बेहतर होते मोमेंटम और दिशा में धीरे-धीरे हो रहे बदलाव का संकेत देते हैं। हालांकि,चालू रिकवरी को मजबूत करने के लिए,तत्काल रेजिस्टेंस स्तरों के ऊपर लगातार खरीदारी होना जरूरी होगा।

आगे 25-डे EMA के पास मौजूद 22980–23000 का जोन, तत्काल सपोर्ट का काम करेगा। अगर निफ्टी इस रेंज के नीचे टूटता है तो 22850 के स्तर तक शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिल सकती है। ऊपर की तरफ, 50-डे EMA के पास वाला 23300–23320 का जोन एक रुकावट का काम कर सकता है। अगर इस रेंज के ऊपर तेजी बनी रहती है तो मौजूदा रिकवरी और तेज हो सकती है और भाव और ऊंचे स्तरों तक जा सकते हैं।

बैंक निफ्टी व्यू

सुदीप शाह ने कहा कि बैंक निफ्टी एक दायरे में बना रहा,हालांकि प्राइस एक्शन में धीरे-धीरे ऊपर की ओर झुकाव बेहतर होते सेंटीमेंट का संकेत देता है। इंडेक्स ने नीचे की तरफ एक विक (wick) के साथ छोटी बॉडी वाली कैंडल बनाई और लगभग फ्लैट बंद हुआ। इससे पता चलता है कि निचले स्तरों पर खरीदारी में दिलचस्पी तो है, लेकिन किसी स्पष्ट दिशा को लेकर अभी भी पक्का भरोसा नहीं है। पोजीशनल नजरिए से देखें तो कंसोलिडेशन जारी है। अगली दिशा तय करने के लिए एक निर्णायक ब्रेकआउट की जरूरत होगी। RSI अभी भी न्यूट्रल दायरे में है, जबकि फ्लैट ADX यह बताता है कि किसी खास दिशा में कोई मजबूत मोमेंटम नहीं है।

55200–55300 का जोन बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट का काम करेगा। अगर इंडेक्स इस रेंज के नीचे जाता है तो इसमें फिर से बिकवाली का दबाव आ सकता है और यह 54800 के स्तर तक गिर सकता है। ऊपर की तरफ, 56300–56400 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है। अगर इंडेक्स मजबूती से इस रेंज के ऊपर निकलता है तो नई खरीदारी आ सकती है और बैंक निफ्टी 56900 के स्तर तक जा सकता है।

 

 

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