Market This Week :उतार-चढ़ाव के बीच बाजार लगातार चौथे हफ्ते गिरावट के साथ हुआ बंद, रुपये में जारी रही बढ़त

Market This Week : भारतीय शेयर बाजार लगातार चौथे हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुए। इस हफ्ते बाजार में काफ़ी उतार-चढ़ाव रहा। पश्चिम एशिया में फिर से बढ़ रहे तनाव,कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और FII की लगातार बिकवाली के चलते बाजार पर दबाव दिखा। हालांकि,रुपये की मजबूती,DII की खरीदारी,अच्छे GST कलेक्शन और अगस्त में ऑटोमोबाइल की अच्छी बिक्री ने बाजार को सपोर्ट दिया। 4 सितंबर को खत्म हुए हफ्ते में BSE सेंसेक्स 749.08 अंक या 0.96% गिरकर 76,515.43 पर बंद हुआ। जबकि निफ़्टी 277.95 अंक या 1.14% की गिरावट के साथ 23,897.70 पर बंद हुआ।

निफ़्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.5% की गिरावट

इस हफ्ते निफ़्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.5% की गिरावट आई। इस गिरावट में KEI इंडस्ट्रीज, पॉलीकैब इंडिया, हैवेल्स इंडिया, KPIT टेक्नोलॉजीज़, ICICI प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी, हीरो मोटोकॉर्प, नेशनल एल्युमीनियम कंपनी, 360 ONE WAM, लॉरस लैब्स, हिताची एनर्जी इंडिया और ट्यूब इन्वेस्टमेंट्स ऑफ़ इंडिया जैसी कंपनियों का योगदान रहा। दूसरी ओर, लेन्सकार्ट सॉल्यूशंस, LIC हाउसिंग फाइनेंस, IDFC फर्स्ट बैंक और टाटा कम्युनिकेशंस बढ़त वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल रहीं।

निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स सपाट हुआ बंद

निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स ने हफ्ते के दौरान 20,187.80 का नया हाई छुआ, लेकिन आखिर में यह लगभग सपाट बंद हुआ। IFCI, वेल्सपन कॉर्प, कैप्रि ग्लोबल कैपिटल, RBL बैंक, ब्रिगेड एंटरप्राइजेज, अर्बन कंपनी और इंद्रप्रस्थ गैस उन कंपनियों में शामिल थीं जिनमें सबसे ज़्यादा बढ़त देखने को मिली। जबकि आरती इंडस्ट्रीज, केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया, अमारा राजा एनर्जी एंड मोबिलिटी, स्वान कॉर्प और दीपक फर्टिलाइजर्स एंड पेट्रोकेमिकल्स कॉर्पोरेशन में सबसे ज़्यादा गिरावट आई।

सेक्टोरल इंडेक्सों पर एक नजर

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी ऑटो इंडेक्स 4% और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स 2.6% नीचे रहा,जबकि निफ्टी मीडिया, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी FMCG में से हर एक में 2% की गिरावट आई। हालांकि,निफ्टी ऑयल एंड गैस में 1% की बढ़त हुई।

FIIs की बिकवाली रही जारी

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार तीसरे हफ़्ते भी बिकवाली जारी रखी, हालांकि इसकी रफ़्तार धीमी रही। उन्होंने इस हफ़्ते 5,611.94 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाज़ार को मज़बूत सपोर्ट देना जारी रखा और हफ़्ते के दौरान 23,156.38 करोड़ रुपये का निवेश किया।

मार्केट कैपिटलाइज़ेशन 4.5 लाख करोड़ रुपये घटा

इस हफ़्ते BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन 4.5 लाख करोड़ रुपये घट गया,जिसकी मुख्य वजह बड़ी कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट थी। मार्केट वैल्यू में सबसे ज़्यादा कमी स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की वजह से आई, इसके बाद भारती एयरटेल, मारुति सुज़ुकी इंडिया और महिंद्रा एंड महिंद्रा का नंबर रहा। दूसरी ओर इस हफ़्ते रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील और एक्सिस बैंक ने सबसे ज़्यादा वेल्थ क्रिएट की।

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भारतीय रुपया लगातार दूसरे हफ्ते हुआ मजबूत

भारतीय रुपया लगातार दूसरे हफ्ते मजबूत हुआ और इस दौरान दो महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इस हफ्ते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 89 पैसे बढ़कर 94.49 रुपये पर बंद हुआ। जबकि, 21 अगस्त को रुपया 95.38 रुपये पर बंद हुआ था। इस हफ़्ते के दौरान,घरेलू मुद्रा 95.48 रुपये से 94.27 रुपये के दायरे में कारोबार करती रही।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल, Network18 ग्रुप का हिस्सा है। Network18 को इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट कंट्रोल करता है, और रिलायंस इंडस्ट्रीज इसकी एकमात्र बेनिफिशियरी है।)

 

Stock Market Rise: 4 दिन बाद बाजार ग्रीन, जन्माष्टमी पर सेंसेक्स 362 अंक चढ़ा; फिर भी निवेशकों के ₹40894 करोड़ साफ

शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला शुक्रवार को कृष्ण जन्माष्टमी पर टूट गया। 4 दिन गिरावट में बंद होने के बाद 4 सितंबर को बाजार ने हरे निशान में क्लोजिंग की। सेंसेक्स 362.57 अंक चढ़कर 76,515.43 पर और निफ्टी 24.25 अंकों की बढ़त के साथ 23,897.70 पर बंद हुआ। लेकिन इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 40894 करोड़ रुपये घट गया।

3 सितंबर को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,88,71,693.344 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट बंद होने पर यह 4,88,30,799.53 करोड़ रुपये रह गया। यानि कि 40,893.814 करोड़ रुपये की कमी। दिन में सेंसेक्स पिछली क्लोजिंग से 730 अंक तक चढ़कर 76,883.14 के हाई तक गया। निफ्टी भी पिछली क्लोजिंग से 132 अंकों की बढ़त के साथ 24,005.75 के हाई तक गया।

मार्केट बंद होने पर NSE पर SBI लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, टाटा स्टील, HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, रिलायंस इंडस्ट्रीज और ट्रेंट टॉप गेनर रहे। वहीं HCL टेक्नोलॉजीज, भारती एयरटेल, मारुति सुजुकी इंडिया, बजाज फिनसर्व और मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट टॉप लूजर रहे।

रुपया और मजबूत

4 सितंबर को अमेरिकी मुद्रा डॉलर के मुकाबले भारतीय करेंसी रुपया 2 पैसे बढ़कर 94.49 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। एक दिन पहले डॉलर के मुकाबले रुपया 22 पैसे की मजबूती के साथ 94.51 पर बंद हुआ था। विदेशी मुद्रा जमा में उम्मीद से काफी अधिक राशि जुटने से देश के भुगतान संतुलन की स्थिति में सुधार होने से रुपये को सपोर्ट मिला। भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को कहा कि 31 अगस्त तक फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) या FCNR(B) जमा के तौर पर देश में 127.226 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश आया।

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एक दिन पहले कैसा रहा था बाजार

3 सितंबर को शेयर बाजार में पहले तेजी और बाद में गिरावट दिखी थी। बाजार लगातार चौथे दिन लाल निशान में बंद हुआ था। सेंसेक्स 417.49 अंक टूटकर 76,152.86 पर और निफ्टी 41 अंक फिसलकर 23,873.45 पर बंद हुआ। इससे पहले दिन में सेंसेक्स पिछली क्लोजिंग से 354.13 अंक तक उछलकर 76,924.48 के हाई तक गया था। निफ्टी भी पिछली क्लोजिंग से करीब 111 अंकों की बढ़त के साथ 24,025.40 के हाई तक गया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Commodity Market: कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल! ब्रेंट $95 के पार, जानिए सोने-चांदी का हाल

Commodity Market Updates: आज शुक्रवार, 4 सितंबर को वैश्विक कमोडिटी बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। मध्य पूर्व में गहराते सैन्य तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच एक बार फिर से भड़की तबाही की चिंगारी के चलते कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंका गहरा गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। दूसरी ओर, अमेरिकी एंप्लॉयमेंट डेटा से ठीक पहले सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती व स्थिरता बनी हुई है।

कच्चे तेल में आई यह तेजी मध्य जुलाई के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त की ओर इशारा कर रही है। आइए आपको बताते हैं कमोडिटी बाजार का पूरा अपडेट।

कच्चे तेल की कीमतों में उबाल: ब्रेंट $95 और WTI $91 के पार

मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई रुकने के डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों की कीमतों में शुक्रवार को बढ़त दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 15 सेंट (0.2%) चढ़कर $95.67 प्रति बैरल पर पहुंच गया। वीकली आधार पर इसमें 7.1% की भारी बढ़त देखी जा रही है। वही अमेरिकी WTI क्रूड 26 सेंट (0.3%) की बढ़त के साथ $91.56 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। हफ्ते भर में WTI में 9.8% का उछाल दर्ज किया गया है। यह 20 जुलाई के बाद कच्चे तेल में दर्ज की गई अब तक की सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी है।

सोने-चांदी का हाल: US Fed के नरम रुख से मिला सहारा

कच्चे तेल की आग के बीच सोने की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है और यह भी मामूली साप्ताहिक बढ़त दर्ज करने की राह पर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड $4,477.10 प्रति औंस के मजबूत स्तर पर टिका हुआ है। दिसंबर का अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.4% गिरकर $4,522.60 प्रति औंस पर रहा। सिल्वर (चांदी) 0.1% बढ़कर $66.90 प्रति औंस पर पहुंच गई, जबकि प्लैटिनम और पैलेडियम में मामूली सुस्ती रही।

निवेशक अब आज शाम जारी होने वाले अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल डेटा का इंतजार कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर अगला कदम उठाने का संकेत मिलेगा।

गुरुवार को गोल्ड में क्यों आई थी 2% की तेजी?

अमेरिकी फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर ने कहा था कि अगर महंगाई दर स्थिर रहती है तो वे ब्याज दरें न बढ़ाने का समर्थन करेंगे। उनके इस बयान के बाद ट्रेडर्स ने सितंबर में रेट हाइक की उम्मीदें कम कर दीं, जिससे गुरुवार को सोने में 2% का बड़ा उछाल आया था।

डॉलर इंडेक्स में हल्की नरमी

दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत मापने वाला डॉलर इंडेक्स 0.05% घटकर 99.54 पर आ गया। डॉलर कमजोर होने से विदेशी खरीदारों के लिए डॉलर में कोटेड कमोडिटी (सोना-तेल) खरीदना तुलनात्मक रूप से सस्ता हो जाता है, जिससे कीमतों को सहारा मिलता है।

यूरो (Euro): $1.1589 पर स्थिर।

जापानी येन (Yen): डॉलर के मुकाबले 0.07% मजबूत होकर 158.59 प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

 

Stock Market Rise: 4 दिन बाद शानदार तेजी, सेंसेक्स 594 अंक तक उछला; लेकिन निवेशकों ने गंवाए ₹18000 करोड़

शेयर बाजार में शुक्रवार, 4 सितंबर को सुबह के कारोबार में शानदार तेजी है। सेंसेक्स खुलने के कुछ ही पलों के अंदर करीब 594 अंक तक उछल गया। लेकिन इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 18000 करोड़ रुपये घट गया। सेंसेक्स हरे निशान में खुलने के बाद 76,746.80 के हाई तक गया। इसी तरह निफ्टी भी हरे निशान में खुला और फिर 76.4 अंकों की बढ़त के साथ 23,949.85 के हाई तक गया।

3 सितंबर को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,88,71,693.344 करोड़ रुपये रहा था। गुरुवार को मार्केट खुलने के कुछ पलों के अंदर यह 4,88,53,640.70 करोड़ रुपये हो गया। यानि कि 18,052.644 करोड़ रुपये की कमी।

एक दिन पहले कैसा रहा था बाजार

3 सितंबर को शेयर बाजार में पहले तेजी और बाद में गिरावट दिखी थी। बाजार लगातार चौथे दिन लाल निशान में बंद हुआ था। सेंसेक्स 417.49 अंक टूटकर 76,152.86 पर और निफ्टी 41 अंक फिसलकर 23,873.45 पर बंद हुआ। इससे पहले दिन में सेंसेक्स पिछली क्लोजिंग से 354.13 अंक तक उछलकर 76,924.48 के हाई तक गया था। निफ्टी भी पिछली क्लोजिंग से करीब 111 अंकों की बढ़त के साथ 24,025.40 के हाई तक गया।

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रुपया और मजबूत

4 सितंबर को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 5 पैसे मजबूत होकर 94.46 पर पहुंच गया। एक दिन पहले अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 22 पैसे की मजबूती के साथ 94.51 पर बंद हुआ था। विदेशी मुद्रा जमा में उम्मीद से काफी अधिक राशि जुटने से देश के भुगतान संतुलन की स्थिति में सुधार होने से रुपये को सपोर्ट मिला। भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को कहा कि 31 अगस्त तक फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) या FCNR(B) जमा के तौर पर देश में 127.226 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश आया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

नेपाल की आपदा ने नए सिरे से बढ़ाई भारत की चिंता

नेपाल की आपदा ने नए सिरे से बढ़ाई भारत की चिंता

threat after nepal disaster in india

प्रभाकर मणि तिवारी

भारत में खासकर पूर्वी हिमालय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बनने वाली पनबिजली परियोजनाएं, इनके तहत बनने वाले बांध और सुरंगों से पैदा होने वाले खतरे अक्सर सुर्खियां बटोरते रहे हैं। लेकिन अब नेपाल के भयावह हादसे में बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। उनको आशंका है कि जम्मू-कश्मीर के अलावा उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में कभी भी नेपाल जैसे हादसे का खतरा मंडरा रहा है। ALSO READ: जलवायु न्याय की मांग कर रहा है आपदा प्रभावित नेपाल

 

हाल के वर्षों में इन राज्यों में भूस्खलन और सुरंग धंसने की अलग-अलग घटनाओं में कई लोग मारे जा चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद पहाड़ों की कटाई करके ऐसी परियोजनाएं बनाने का काम जारी है। इनमें खासकर सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश की स्थिति सबसे चिंताजनक है।

 

अरुणाचल का संकट

चीन सरकार अरुणाचल प्रदेश से सटे इलाके में एक विशालकाय बांध बना रही है। बीते साल इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था। करीब डेढ़ सौ अरब अमेरिकी डॉलर की लागत वाली इस परियोजना के वर्ष 2033 तक पूरा होने का लक्ष्य है। विशेषज्ञ इसे वाटर बम बताते हैं। लेकिन भूवैज्ञानिकों की असली चिंता इस परियोजना का आकार नहीं बल्कि इसकी लोकेशन है। यह मेडॉग परियोजना उस फॉल्ट जोन के पास स्थित है, जहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें मिलती हैं। इसकी वजह से यह इलाका भूकंप के प्रति बेहद संवेदनशील है। बीते साल भी तिब्बत के शिगात्से इलाके में रिक्टर स्केल पर 7.1 की तीव्रता वाले एक भूकंप के कारण वहां 120  से ज्यादा लोगों की मौत के अलावा कुछ बांधों को नुकसान पहुंचने की खबरें आई थी।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि चीनी परियोजना के तहत बनने वाले बांध को भूकंपरोधी तकनीक से बनाने के बावजूद किसी बड़े भूकंप की स्थिति में जमीन धंसने और चट्टानों के टूटने का खतरा पैदा हो सकता है। इससे बांध पर तो खास असर नहीं होगा। लेकिन नदी के निचले हिस्से में स्थित भारतीय इलाकों को नेपाल जैसी आपदा झेलनी पड़ सकती है। इससे नदी का बहाव बदल सकता है। इससे पहले भी ऐसी कुछ घटनाएं हो चुकी हैं। वर्ष 2000 में तिब्बत में एक बांध टूटने से पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में बाढ़ आ गई थी। इससे पहले वर्ष 2017 में अरुणाचल प्रदेश की सियांग नदी का पानी अचानक काला पड़ गया था। तब इसके लिए तिब्बत में खनन गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया गया था। यही सियांग नदी असम में प्रवेश करने के बाद ब्रह्मपुत्र कहलाती है।

 

विशेषज्ञों ने चेताया है कि चीनी परियोजना के तहत बनने वाला विशालकाय बांध पूर्वोत्तर भारत में बड़े पैमाने पर तबाही ला सकता है। ALSO READ: मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों पर जलवायु के गंभीर खतरे का डर

 

भारत की जवाबी रणनीति

इसके असर की काट के लिए भारत सरकार ने भी राज्य के अपर सियांग में 11 हजार मेगावाट क्षमता वाली एक बहुउद्देशीय परियोजना बनाने का फैसला किया है। लेकिन स्थानीय लोग और संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों के सामने विस्थापन का खतरा पैदा हो जाएगा। अरुणाचल प्रदेश में आधा दर्जन पनबिजली परियोजनाएं चल रही हैं जबकि करीब तीन दर्जन छोटी-बड़ी परियोजनाओं का काम चल रहा है। इनमें दिबांग, अपर सियांग, लोअर सुबनसिरी और इटालीन जैसी बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। राज्य सरकार ने 2025-35 को 'पनबिजली का दशक' घोषित किया है।

 

भूवैज्ञानिकों का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश में हिमालय की संरचना भी उस नेपाल-तिब्बत सीमा जैसी है जो हाल में प्राकृतिक हादसे का शिकार हुआ है। खासकर इटालीन परियोजना तो भूकंप के प्रति बेहद संवेदनशील इलाके में है। वहां ग्लेशियल झीलों के फटने का खतरा भी बना हुआ है।

 

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने देश भर में ऐसे 195 ग्लेशियल झीलों की पहचान की है जिनके फटने से बाढ़ आने का खतरा है। किसी ग्लेशियर के पिघलने से बनी झील को रोकने वाली बर्फ, चट्टान या मलबे जैसी प्राकृतिक दीवार के अचानक टूटने के बाद आने वाली बाढ़ को 'ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड' या 'ग्लोफ' कहा जाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इनमें से 32 झीलें अकेले अरुणाचल में ही हैं।

 

क्या है विशेषज्ञों का आकलन?

पूर्वोत्तर के मशहूर भूवैज्ञानिक डा. प्रमोद चंद्र सरमा डीडब्ल्यू से कहते हैं, “हिमालय प्राकृतिक रूप से एक नाजुक पर्वतीय प्रणाली है।इसका पूर्वी क्षेत्र अभी युवा है। इस इलाके में हमेशा भूकंप, भूस्खलन, हिमस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा बना रहता है। जलवायु परिवर्तन इस खतरे को और बढ़ा रहा है। इसके साथ ही पनबिजली परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर बनने वाले बांधों ने इस जोखिम को कई गुना बढ़ा दिया है।”

 

पर्यावरणविद डीके अपांग डीडब्ल्यू से कहते हैं, “राज्य में प्रस्तावित तमाम बड़ी परियोजनाएं भूकंप के लिहाज बेहद संवेदनशील इलाकों में स्थित हैं। चीनी बांध परियोजना ने प्राकृतिक विपदा के खतरे को काफी बढ़ा दिया है।”

 

सियांग बहुउद्देशीय परियोजना का लंबे समय से विरोध कर रहे सियांग इंडीजीनस फार्म्स फोरम (एसआईएफएफ)  के प्रमुख जेजांग डीडब्ल्यू से कहते हैं, “अपर सियांग इलाका चीनी सीमा से सटा है। इसका निर्माण पूरा होने पर यहां भी नेपाल जैसा हादसा होने का खतरा बढ़ जाएगा।” ALSO READ: हिमालय क्षेत्र में भविष्य में भी ग्लेशियर फ्लड आने का गंभीर खतरा

 

क्या हैं बचाव के उपाय?

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को अर्ली-वार्निंग सिस्टम पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि ऐसे हादसे के बारे में समय रहते जानकारी मिल सके। इसके साथ ही इलाके में मौसम और हिमालय की ऊंचाई पर बने ग्लेशियरों और झीलों की स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी का तंत्र विकसित करना होगा।

 

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी नाम नहीं छापने की शर्त पर डीडब्ल्यू को बताते हैं, “सरकार अर्ली वार्निंग सिस्टम पर काम कर रही है। पहले चरण में 46 बेहद संवेदनशील बांधों में से 40 में यह प्रणाली लागू की जा चुकी है। चरणबद्ध तरीके से दूसरी परियोजनाओं में भी इसे लागू किया जाएगा।

 

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 में कहा था कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बीते करीब तीन दशकों के दौरान कार्बन का सबसे ज्यादा उत्सर्जन करने वाले दो देशों, भारत और चीन के बीच स्थित नेपाल के ग्लेशियरों में जमा बर्फ की मात्रा एक-तिहाई कम हो गई है।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि इसे ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है कि भौगोलिक रूप से अस्थिर हिमालयी क्षेत्र में सियांग और उसके जैसे बड़े बांधों का निर्माण उचित है या नहीं?

रूबियो बोले- भारत-ईरान के बीच ट्रेड डील की जानकारी नहीं:अमेरिकी विदेश मंत्री की चेतावनी- ईरान से ट्रेड करने वाले देशों पर भी प्रतिबंध लगाएंगे

पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की मुलाकात के बाद अमेरिका ने भारत-ईरान व्यापार संबंधों को लेकर अपनी स्थिति साफ की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच फिलहाल किसी ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है। हालांकि, उन्होंने साथ ही चेतावनी दी कि अगर कोई देश ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करता है तो उस देश पर भी अमेरिका प्रतिबंध लगा सकता है। रुबियो ने एक इंटरव्यू के दौरान ये बात कही। SCO में मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की मुलाकात अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात के बाद आया है। दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंध, व्यापार और पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की। मोदी ने कहा था कि भारत ईरान के साथ अपने पुराने संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और नए क्षेत्रों को इसमें शामिल करने पर भी जोर दिया गया था। मोदी ने कहा था कि भारत BRICS और SCO जैसे मंचों पर ईरान के साथ सहयोग जारी रखेगा। उन्होंने पेजेश्कियन को 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने का न्योता भी दिया। पश्चिम एशिया के तनाव पर बातचीत अमेरिका का ईरान की कमाई के 5 रास्तों पर बैन दरअसल, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था के 5 अहम क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। जिनका इस्तेमाल ईरान दूसरे देशों में अपनी आर्थिक गतिविधियों के लिए करता है। इनमें डिजिटल एसेट्स (जैसे क्रिप्टोकरेंसी), टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग सेक्टर शामिल हैं। अमेरिका इन क्षेत्रों के जरिए ईरान की कमाई और अंतरराष्ट्रीय कारोबार को रोकना चाहता है। यानी अगर कोई देश इन क्षेत्रों में ईरान के साथ ऐसा कारोबार करता है जिससे उसे पैसा या आर्थिक फायदा मिलता है। तो अमेरिका उस देश पर भी प्रतिबंध लगा सकता है या उसे अमेरिकी डॉलर की वित्तीय व्यवस्था से बाहर कर सकता है। अमेरिका बोला- अब ईरान के पास सिर्फ दो रास्ते बचे अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि हमने ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ शुरू किया है। यह ईरान और उसके सहयोगी देशों के खिलाफ एक अभियान है। ईरान के सामने अब सिर्फ दो रास्ते हैं। पहला- पूरी तरह से दुनिया से अलग-थलग पड़ना और गुजारे लायक अर्थव्यवस्था। दूसरा- फिर से सामान्य स्थिति की ओर बढ़ना और वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से शामिल होने का मौका पाना। भारत की 4 कंपनियों पर भी प्रतिबंध अमेरिका ने ईरान से तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार के आरोप में भारत की 4 कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, इन कंपनियों ने ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पाद खरीदने या भारत लाने में भूमिका निभाई। इनमें पोर्टीज पार्टनर्स, सदाशिवा ओवरसीज, पीपी सॉफ्टटेक और प्रकृति इंफ्रा इम्पेक्स इंडिया शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की तेल से होने वाली कमाई रोकने और उसके कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने के लिए की गई है। भारत पर क्या असर पड़ सकता है, 5 पॉइंट में समझें… तेल: भारत ईरान से कच्चा तेल खरीदता है तो अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भुगतान और खरीद मुश्किल हो सकती है। चाबहार पोर्ट: ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारत की रणनीतिक और कारोबारी रुचि है। अमेरिकी प्रतिबंधों का असर इस परियोजना पर पड़ सकता है। डॉलर में भुगतान: अगर ईरान से जुड़े भारतीय कारोबार पर अमेरिकी वित्तीय प्रतिबंध लगते हैं, तो डॉलर में लेन-देन करना मुश्किल हो सकता है। व्यापार: ईरान के साथ कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों को अमेरिकी नियमों का पालन करना पड़ सकता है। कूटनीतिक दबाव: अमेरिका भारत से भी ईरान के साथ आर्थिक संबंध सीमित करने को कह सकता है। हालांकि, भारत अपने राष्ट्रीय हित और ऊर्जा जरूरतों के आधार पर फैसला करेगा। —————————- ये खबर भी पढ़ें… 2 दिन बाद अमेरिका का ईरान पर फिर मिसाइल हमला, 19 की मौत, 68 घायल अमेरिका ने 2 दिन बाद फिर ईरान पर हमला किया है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात सिरिक, खुजस्तान, केश्म द्वीप और बंदर अब्बास में मिसाइल और ड्रोन स्ट्राइक की। ईरान के अनुसार इन हमलों में 19 लोगों की मौत हुई है, जबकि 68 लोग घायल हुए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

गन्ने के खेत से विदेशी बाजार तक पहुंची यूपी की एक्सपोर्ट चेन, निर्यात नीति ने बदली तस्वीर

गन्ने के खेत से विदेशी बाजार तक पहुंची यूपी की एक्सपोर्ट चेन, निर्यात नीति ने बदली तस्वीर

Yogi Farmer

उत्तर प्रदेश में निर्यात की बढ़ती रफ्तार अब केवल विदेशी बाजारों तक पहुंचने वाली बोतलों और उत्पादों की कहानी नहीं रह गई है। इसकी शुरुआत गन्ने के खेत, शीरा और अनाज से होकर उद्योगों तक पहुंच रही है और वहां से पैकेजिंग, भंडारण व परिवहन के रास्ते विदेशी बाजार तक जा रही है। योगी सरकार की त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति 2026-29 ने इस पूरी एक्सपोर्ट चेन को नई गति दी है।

 

वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में प्रदेश के आबकारी निर्यात में पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 45.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि इसी अवधि में राष्ट्रीय वृद्धि 18.3 प्रतिशत रही – इस तरह प्रदेश की वृद्धि राष्ट्रीय औसत की दोगुनी से भी अधिक रही। वहीं मात्रा की दृष्टि से प्रदेश का निर्यात 163 प्रतिशत बढ़ा। सबसे अहम उपलब्धि यह रही कि यूपी ने करीब 39.9 लाख डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि दर्ज की।

बस्ती के शीरे से विदेशी बाजार तक पहुंची कमाई

निर्यात की इस बढ़ती श्रृंखला में कृषि उत्पादों की भूमिका भी अहम है। बस्ती से 25 हजार क्विंटल शीरे का विदेश निर्यात किया गया, जिससे करीब पांच लाख अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई। शीरा भिन्न शुल्क वर्गीकरण में आता है, इसलिए यह अर्जन उपरोक्त आंकड़ों से अतिरिक्त है। यानी खेतों में तैयार होने वाले कृषि उत्पाद अब स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रसंस्करण के बाद सीधे वैश्विक बाजार का हिस्सा बन रहे हैं। निर्यात बढ़ने के साथ अप्रैल-जुलाई 2026 के मध्य यूपी की इकाइयों ने अन्य राज्यों को भी पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 1.64 करोड़ अधिक बोतलें भेजीं, जो करीब 45.7 प्रतिशत की वृद्धि है।

नई इकाइयों से बढ़ा निवेश, बंद प्लांट भी हुए सक्रिय

निर्यात की बढ़ती संभावनाओं ने प्रदेश में नए निवेश के साथ पुरानी औद्योगिक क्षमता को भी सक्रिय किया है। उन्नाव में यूनाइटेड ब्रुअरीज और हरदोई में माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज नई इकाइयां स्थापित कर रही हैं। फर्रुखाबाद में वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने इकाई स्थापित की है। वहीं एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स ने मुरादाबाद की बंद पड़ी इकाई को दोबारा शुरू किया है। गोरखपुर की कियान डिस्टिलरी ने एथेनॉल उत्पादन के साथ पेय आसवनी और ब्रुअरी के लिए भी आवेदन किया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, रैडिको खेतान भी अन्य राज्यों से अपने सीतापुर और रामपुर संयंत्रों में निर्यात उत्पादन स्थानांतरित कर रही है।

127.8 लाख अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा यूपी का निर्यात 

अप्रैल-जून 2026 में देश से करीब 10.17 करोड़ अमेरिकी डॉलर का आबकारी निर्यात हुआ। इसमें उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 127.8 लाख डॉलर रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 87.9 लाख डॉलर था। यानी महज एक साल में प्रदेश ने करीब 39.9 लाख डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि हासिल की। राष्ट्रीय निर्यात में यूपी की हिस्सेदारी भी 10.2 प्रतिशत से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई और प्रदेश महाराष्ट्र एवं पंजाब के बाद देश में तीसरे स्थान पर है। प्रदेश ने तिमाही के प्रत्येक माह में वृद्धि दर्ज की।

कृषि से पैकेजिंग तक दिख रहा असर

आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि निर्यात में वृद्धि का असर केवल आबकारी इकाइयों तक सीमित नहीं है। उद्योग की पिछली कड़ी गन्ना, शीरा और अनाज जैसे कृषि उत्पादों से जुड़ी है, जबकि आगे कांच की बोतल, पैकेजिंग, ढक्कन, लेबलिंग, भंडारण और परिवहन जैसे अनेक क्षेत्र जुड़े हैं। उत्पादन और निर्यात बढ़ने के साथ इन सभी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं। इस तरह निर्यात नीति ने खेत से लेकर फैक्ट्री और फैक्ट्री से विदेशी बाजार तक यूपी की एक व्यापक एक्सपोर्ट चेन को गति देने का काम किया है।

 

Gold Price Drop: लगातार 5वें दिन फिसला सोना, ऑल-टाइम हाई से ₹10700 की टूट; जानें गिरावट की ये 4 बड़ी वजहें

Gold Prices Today Fall: भारतीय वायदा बाजार पर सोने की कीमतों में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 24 अगस्त को ₹1,63,229 प्रति 10 ग्राम के अपने ऑल-टाइम हाई पर पहुंचने के बाद, MCX पर सोना अब तक ₹10,700 से ज्यादा टूटकर ₹1,52,514 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) में भी सोना $4,734 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर से गिरकर लगभग $4,420 प्रति औंस पर पहुंच गया है। महज एक सत्र में MCX पर सोना करीब ₹1,900 और COMEX पर $75 तक फिसल गया।

सोने की कीमतों में गिरावट के 4 मुख्य कारण

1. अमेरिकी फेड रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका: जैक्सन होल सम्मेलन में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के सख्त रुख ने सोने के बाजार को प्रभावित किया है। फेड द्वारा सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना से निवेशक अब सोने से पैसा निकालकर अन्य सुरक्षित और ब्याज देने वाले विकल्पों में लगा रहे हैं।

2. मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल: ब्याज दरें बढ़ने के संकेतों से अमेरिकी डॉलर (USD) मजबूत हुआ है और ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी हुई है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे वैश्विक स्तर पर सोने की मांग घट जाती है।

3. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और महंगाई की चिंता: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और अमेरिका-ईरान विवाद के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। महंगाई बढ़ने की आशंका के चलते केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने से बच रहे हैं, जिससे सोने पर दबाव बना हुआ है।

4. घरेलू मांग पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर: आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स की कमोडिटी एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जरूरत न होने पर सोना न खरीदने की अपील का असर घरेलू सेंटीमेंट पर पड़ा है। इससे भारतीय बाजार में त्योहारी सीजन से पहले ज्वैलरी और रिटेल मांग में थोड़ी सुस्ती की आशंका है।

अगस्त का प्रदर्शन और सितंबर के लिए आउटलुक

ऑगमोंट बुलियन की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त महीने में सोने ने 9.4% और चांदी ने 15% का मजबूत रिटर्न दिया, जो इस साल का सबसे मजबूत मासिक प्रदर्शन था। ऐसे में बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस हफ्ते जारी होने वाले अमेरिकी लेबर मार्केट डेटा सोने की अगली चाल तय करेंगे। अगर डेटा मजबूत आता है तो डॉलर और मजबूत होगा, जिससे सोने में गिरावट जारी रह सकती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

पुतिन, भारत-चीन के साथ मिलकर बनाना चाहते हैं ‘SCO बैंक’, जिस पर नहीं चलेगा अमेरिका का कोई दांव! जानिए ये पूरी प्लानिंग

Putin SCO Development Bank Proposal: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सदस्य देशों से एक नया ‘SCO डेवलपमेंट बैंक’ बनाने का आह्वान किया है। पुतिन का मानना है कि यह बैंक पश्चिमी देशों और अमेरिका के प्रभुत्व वाले वित्तीय तंत्र से पूरी तरह स्वतंत्र होकर काम करेगा, जिसका इस्तेमाल पश्चिमी देश आर्थिक और भू-राजनीतिक दबाव बनाने के लिए ‘हथियार’ के रूप में करते हैं।

किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित 2026 के SCO शिखर सम्मेलन में बोलते हुए पुतिन ने कहा कि प्रस्तावित विकास बैंक को उन देशों के वित्तीय ढांचे से जितना संभव हो सके स्वतंत्र रखा जाना चाहिए, जो अंतरराष्ट्रीय मामलों में एकतरफा फायदा उठाने के लिए आर्थिक हथियारों का इस्तेमाल करते हैं।

क्या है ‘SCO डेवलपमेंट बैंक’?

डेवलपमेंट बैंक या विकास बैंक ऐसी वित्तीय संस्थाएं होती हैं, जो सदस्य देशों में ऊर्जा, परिवहन, बुनियादी ढांचे और सीमा पार परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक फंडिंग प्रदान करती हैं। पुतिन के अनुसार, यह बैंक सदस्य देशों के बीच बड़े आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को बिना किसी पश्चिमी रुकावट के फाइनेंस करने का काम करेगा।

यह बैंक SCO बिजनेस काउंसिल और इंटरबैंक एसोसिएशन की तरह सदस्य राष्ट्रों के आपसी व्यापारिक और व्यावसायिक रिश्तों को एक नया आयाम देगा।

डॉलर के दबदबे को खत्म करने और सैंक्शंस से बचने की कोशिश

यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस और ईरान जैसे देश भारी पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं। यही वजह है कि मॉस्को अब अमेरिकी डॉलर और SWIFT जैसे पश्चिमी वित्तीय तंत्र पर अपनी निर्भरता को खत्म करना चाहता है।

98% व्यापार स्थानीय मुद्राओं में: पुतिन ने खुलासा किया कि पिछले साल SCO देशों के साथ रूस का व्यापार $400 अरब से अधिक रहा। सबसे खास बात यह है कि रूस और SCO देशों के बीच 98% से अधिक लेनदेन अब उनकी अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है।

वैकल्पिक भुगतान प्रणाली: प्रस्तावित बैंक SCO के भीतर एक वैकल्पिक पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम है, ताकि पश्चिमी पाबंदियों का इन देशों के व्यापार पर कोई असर न पड़े।

SCO का बढ़ता दायरा और ‘मल्टीपोलर वर्ल्ड’

2001 में रूस, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान द्वारा स्थापित SCO का विस्तार पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से हुआ है। भारत और पाकिस्तान 2017 में इसमें शामिल हुए, जबकि ईरान 2023 में इसका पूर्ण सदस्य बना।

पुतिन ने SCO को उभरती हुई बहुध्रुवीय दुनिया का एक अत्यंत प्रभावशाली केंद्र बताया और कहा कि इस ब्लॉक का मजबूत होना सभी सदस्य देशों की आर्थिक समृद्धि के लिए जरूरी है।

SCO बैंक को लेकर भारत-चीन की ये है रणनीतिक चुनौतियां

चीन द्वारा समर्थन दिए जाने के बावजूद प्रस्तावित SCO डेवलपमेंट बैंक को जमीन पर उतारना बेहद जटिल है, क्योंकि भारत और चीन जैसे देशों के प्रमुख वित्तीय संस्थान और कॉर्पोरेट्स वैश्विक अर्थव्यवस्था और पश्चिमी बैंकिंग प्रणाली से गहराई से जुड़े हुए हैं। ऐसे में अमेरिकी सेकंडरी सैंक्शंस का खतरा बना रहता है, जिससे बचने के लिए दोनों देशों के बैंक बेहद सतर्क रुख अपनाते हैं।

इसके अलावा, भारत का हमेशा से यह स्पष्ट और संतुलित रुख रहा है कि SCO को किसी भी स्थिति में पश्चिमी-विरोधी मंच के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, जो इस बैंक को पूरी तरह से पश्चिमी वित्तीय तंत्र से काटने के बजाय केवल एक वैकल्पिक व्यवस्था तक सीमित रखता है।

भारत के लिए यह बैंक पश्चिमी वित्तीय तंत्र को पूरी तरह से नकारने के बजाय आपसी व्यापार और परियोजनाओं को बिना किसी तीसरे देश की दखलअंदाजी के सुचारू रूप से चलाने का एक अतिरिक्त वित्तीय चैनल बन सकता है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : US में बॉन्ड यील्ड बढ़ने और क्रूड में उछाल से भारतीय बाजार के सेंटिमेंट कमजोर दिख रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी 100 प्वाइंट से ज्यादा नीचे आ गया है। शुक्रवार को FIIs की कैश और वायदा मिलाकर 5600 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली देखने को मिली। इनके नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट फिर दो लाख के पार चले गए हैं। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

28 अगस्त को उतार-चढ़ाव भरे सेशन में भारतीय इक्विटी इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए और लगातार दो दिनों की गिरावट का सिलसिला खत्म होगा। IT शेयरों में बढ़त की वजह से निफ्टी 24,150 के ऊपर बंद होने में कामयाब रहा था। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 330.92 अंक या 0.43 प्रतिशत बढ़कर 77,264.51 पर और निफ्टी 84.80 अंक या 0.35 प्रतिशत बढ़कर 24,175.65 पर बंद हुआ। वीकली बेसिस पर देखें तो मार्केट में लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट जारी रही। बीते हफ्ते BSE सेंसेक्स और निफ्टी50 दोनों में 0.3% की गिरावट आई। ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले कमजोर रहा और निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में बहुत कम बदलाव के साथ कारोबार खत्म हुआ

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

28 अगस्त को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 5,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के शेयर बेचे,लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 5,183 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर इसकी भरपाई कर दी और लगातार 14वें दिन भी खरीदारी जारी रखी।

Stock Market LIVE Updates : GIFT Nifty से मिल रहे कमजोर शुरुआत के संकेत, US और एशियाई बाजारों में गिरावट

एशियाई करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई करेंसी में मिला-जुला असर दिख रहा है। इंडोनेशियाई रुपिया 0.29% और जापानी येन 0.09% मजबूत हुए हैं। दक्षिण कोरियाई वॉन में 0.04% की गिरावट आई है,जबकि फिलीपींस पेसो 0.10% कमजोर हुआ है। थाई बाहत 0.19% और ताइवान डॉलर 0.17% गिरे हैं। चीनी रेनमिनबी में 0.14% की नरमी आई हैं,जबकि मलेशियाई रिंगित 0.20% टूटा है। सिंगापुर डॉलर भी 0.02% नीचे आया है।

वेस्ट एशिया टेंशन और बढ़ी

वेस्ट एशिया टेंशन और बढ़ गई है। लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान का पलटवार हुआ है। ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान के सुप्रीम लीडर र्मोजतबा खामेनेई ने कहा है कि डॉलर की भूमिका धीरे-धीरे खत्म करने की जरूरत है। इधर क्रूड 90 डॉलर के पार चला गया है।

US फेड चेयरमैन ने दिए दरें बढ़ाने के संकेत, बॉन्ड यील्ड 4.7 के पार, डॉलर इडेक्स में उछाल

US फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने दरें बढ़ाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि महंगाई लक्ष्य से ज्यादा रही तो कदम उठाने पड़ेंगे। इस बयान के बाद बॉन्ड यील्ड 4.7 के पार चली गई है। डॉलर इंडेक्स में भी उछाल आया है। सोना-चांदी ठंडे पड़े हैं। अमेरिकी बाजार भी कमजोरी के साथ बंद हुए। वहीं एशिया भी कमजोर दिख रहा है। निक्केई और कॉस्पी 2% फिसले हैं।

सबसे बड़े IPO का रास्ता हुआ साफ

देश के सबसे बड़े IPO का रास्ता साफ हो गया है। सेबी ने जियो प्लैटफॉर्म्स के IPO को मंजूरी दे दी है। जियो प्लैटफॉर्म्स 27 करोड़ फ्रेश शेयर जारी करेगी। इस रकम का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में होगा।

HDFC बैंक से रिटायर होंगे शशिधर जगदीशन

शशिधर जगदीशन दोबारा HDFC बैंक के MD&CEO नहीं बनेंगे। ये 26 अक्टूबर को रिटायर होंगे। उन्होंने कहा है कि वे दोबारा नियुक्ति नहीं चाहते। उन्होंने बैंक के बोर्ड से कहा है कि उत्तराधिकारी तलाश करने का प्रोसेस तेज किया जाए।

सुभाष चंद्रा के रीपेमेंट प्लान का विरोध

ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज की और से बड़ी खबर आई है। सुभाष चंद्रा के रीपेमेंट प्लान का विरोध किया गया है। NCLT के फैसले को कैनरा, HDFC बैंक और LIC हाउसिंग फाइनेंस चुनौती देंगे।

MSCI की आज रीबैलेंसिंग

आखिरी आधे घंटे में आज MSCI की रीबैलेंसिंग होगी। लॉरस लैब्स,लेंसकार्ट,अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस और ग्रो शामिल होंगे। वहीं बालकृष्ण इंडस्ट्रीज, SBI कार्ड्स और एस्ट्रल बाहर होंगे। MSCI में भारत के वेटेज में भी हल्की बढ़त होगी।