JIO Platforms के IPO को लेकर फुल जोश में मार्केट दिग्गज, 4 साल में मार्केट कैप डबल होने की जता रहे उम्मीद

Jio Platforms IPO : जियो प्लेटफार्म्स के IPO का काउंटडाउन शुरू हो गया है। आज यह इश्यू एंकर निवेशकों के लिए खुला। इसमें घरेलू और विदेशी कंपनियां बढ़ चढ़कर बोलियां लगा सकती हैं। बुधवार से यह IPO सभी निवेशकों के लिए खुलेगा। इसका प्राइस बैंड 1065 से 1119 रुपए प्रति शेयर के बीच है। Jio Platforms अपने 30000 करोड़ से ज्यादा के इश्यू साइज से भारतीय बाजार में एक नया इतिहास रचने जा रही है। डिजिटल इंडिया के इस पोस्टर BOY ने महज 10 सालों में देश में डिजिटल क्रांति की इबारत लिखी है। ये सिर्फ एक टेलीकॉम कंपनी नहीं, उससे कहीं बढ़कर है। यह देश का सबसे बड़ा डिजिटल और मोबाइल ब्रॉडबैंड नेटवर्क है।

JIO PLATFORMS के IPO को लेकर बाजार के दिग्गज फुल जोश में हैं। दिग्गज निवेशकों ने इसमें बढ़कर चढ़कर निवेश करने की सलाह दी है। एनाम ग्रुप के को-फाउंडर वल्लभ भंशाली ने कहा है। सिर्फ 10 साल में बेहतरीन कंपनी बनकर तैयार हुई है। रमेश दमानी ने कहा है कि जियो IPO को निवेशक हाथों हाथ लेंगे। उधर देवेन चोकसी ने कहा है कि कंपनी की ग्रोथ बेहतरीन है। इसका मार्केट कैप 4 साल में डबल हो जाएगा।

जियो प्लेटफॉर्म्स IPO पर उदय कोटक ने कहा कि यह दुनिया की अकेली ऐसी कंपनी है जिसके पास प्रोपराइटरी एंड-टू-एंड कनेक्टिविटी (Proprietary End-to-End Connectivity है। समय के साथ लगातार तेज ग्रोथ बनी हुई है।

फिच रेटिंग्स के डायरेक्टर, गिरीश मदान ने कहा है कि जियो प्लेटफॉर्म्स मार्केट लीडर है। आगे ARPU बढ़ाने की काफी गुंजाइश है। कंपनी की बैलेंस शीट दमदार है। कंपनी की नेट डेट टू EBITDA 1x से कम है। यह आगे और नीचे आएगा। कंपनी क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत है।

JIO IPO पर मार्केट एक्सपर्ट राकेश बंसल ने कहा कि जियो IPO के लिए नए डीमैट अकाउंट खुल रहे हैं। वहीं, कंप्लीट सर्किल के गुरमीत चड्ढा ने कहा कि अच्छे वैल्युएशन पर, निवेशकों के लिए इसमें कमाई के अच्छे मौके हैं।

JIO IPO पर SMIFS की राय है कि इसमें निवेशक लंबे वक्त के लिए सब्सक्राइब करें। रेलिगेयर की भी इसमें सब्सक्राइब करने की सलाह है। मोतीलाल ओसवाल का भी JIO IPO पर पॉजिटिव व्यू है।

बोनांजा का कहना है का JIO IPO का वैल्युएशन वाजिब है। यह भारती से डिस्काउंट पर मिल रहा है। अर्निंग ग्रोथ और टैरिफ बढ़ने पर आगे ठीक-ठाक ग्रोथ देखने को मिलेगी। वहीं, मंगलदास केशव का कहना है कि JIO IPO उम्मीद से बेहतर वैल्युएशन पर आय है। IPO प्राइसिंग वाजिब नजर आ रही है।

JIO IPO पर वेंचुरा की राय है कि आगे टैरिफ बढ़ोतरी और प्रीमियमाइजेशन अहम फैक्टर का काम करेंगे। यह भारती के इंडिया टेलीकॉम कारोबार के मुकाबले प्रीमियम पर है।

दिग्गज निवेशकों की राय

इसके साथ ही बाजार के दिग्गज निवेशक भी जियो प्लेटफॉर्म जैसे बड़े IPO को भारतीय बाजार की मजबूती की कहानी कह रहे हैं। सभी ने एक लाइन में कहा निवेशक जियो IPO को हाथों हाथ लेंगे। BSE के मेंबर और बाजार के दिग्गज निवेश रमेश दमानी के मुताबिक जियो के IPO को निवेशक हाथों हाथ लेंगे। जियो के 55 करोड़ ग्राहक हैं जो एक तिहाई भारतीयों को सेवा दे रही है। सिर्फ 10 साल में मुकेश अंबानी ने जियो को IPO के लिए तैयार कर दिया। हैरानी होती है कि भारत में जियो जैसी इतनी बड़ी कंपनी है। मुकेश अंबानी हर बड़े प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करते हैं। मुकेश अंबानी ने 10 साल में जियो को IPO के लिए तैयार किया। निवेशक जियो IPO को हाथों हाथ लेंगे।

HDFC AMC के MD नवनीत मुनोत ने कहा कि भारतीय बाजार में बड़े IPO आ रहे हैं। बड़े IPOs बाजार की मजबूती बता रहे हैं। कंपनियां अरबों डालर जुटाने में कामयाब हो रही हैं। भारतीय बाजार में काफी मजबूती है।10 साल पहले जियो ने बड़ी शुरुआत की। जियो प्लेटफॉर्म अब बड़ी रकम जुटा रहा है।

DRChoksey FinServ के MD,देवेन चौकसी ने कहा कि JIO IPO निवेशकों के लिए बेहतर मौका है। कंपनी का मार्केट कैप 10 लाख करोड़ रुपए है। पिछले कुछ साल में EBITDA ग्रोथ 18% रही। अगले कुछ साल में 20% CAGR ग्रोथ की उम्मीद। अगले 4 साल में इसका EBITDA दोगुना हो सकता है। कंपनी का मार्केट कैप 10 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 20 लाख करोड़ रुपए हो सकता है।

Elixir Equities के डायरेक्टर दीपन मेहता के मुताबिक जियो के IPO का वैल्युएशन काफी अच्छा है और लिस्टिंग पर अच्छे रिटर्न मिलने की उम्मीद है। AI और डाटा सेंटर इंडस्ट्री इसके लिए ग्रोथ का अहम ट्रिगर होंगे। डाटा कंजम्प्शन बढ़ने से इंडस्ट्री ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। जियो IPO को लेकर आउटलुक पॉजिटिव है।

 

 

(डिस्क्लेमर: नेटवर्क 18 मीडिया एंड इनवेस्टमेंट लिमिटेड पर इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट का मालिकाना हक है। इसकी बेनफिशियरी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।)

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Fall: महानवमी पर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 538 अंक तक फिसला; निवेशकों ने गंवाए ₹3.23 लाख करोड़

लगातार 2 कारोबारी सत्रों में बढ़त देखने के बाद भारतीय शेयर बाजारों में 19 अक्टूबर को महानवमी के मौके पर गिरावट है। सेंसेक्स बढ़त में खुला लेकिन फिर चंद पलों में पिछली क्लोजिंग से 538 अंक टूटकर 74,191.21 के लो तक गया। इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 3.23 लाख करोड़ रुपये घट गया। इसी तरह निफ्टी भी बढ़त में खुलने के बाद पिछली क्लोजिंग से 175 अंक से ज्यादा टूटकर 22,970.50 के लो तक गया।

शुक्रवार को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,73,46,932.132 करोड़ रुपये रहा था। सोमवार को मार्केट खुलने के कुछ ही देर में यह 4,70,22,982.02 करोड़ रुपये हो गया। यानि कि 3,23,950.112 करोड़ रुपये की कमी।

शुक्रवार को कैसी रही थी चाल

आईटी कंपनियों के शेयरों में तगड़ी खरीदारी और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों से शुक्रवार, 16 अक्टूबर को शेयर बाजारों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बढ़त देखी गई थी। सेंसेक्स 413.66 अंक या 0.56 प्रतिशत बढ़कर 74,729.27 पर बंद हुआ था। निफ्टी 148.80 अंक या 0.65 प्रतिशत बढ़कर 23,146.15 पर बंद हुआ था। बीते सप्ताह सेंसेक्स में 2,256.94 अंक या 3.11 प्रतिशत और निफ्टी में 625.7 अंक या 2.77 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Bank of Baroda Share Price: ₹1.42 लाख करोड़ के मुकदमे पर डूबे ₹3700 करोड़, 3% टूटे शेयर, ये है पूरा मामला

Bank of Baroda Share Price: एनएमसी हेल्थकेयर ग्रुप और यूएई एक्सचेंज (UAE Exchange) के फाउंडर बीआर शेट्टी ने अपने ग्रुप में फर्जीवाड़े को लेकर बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) को कोर्ट में घसीटा तो शेयर मार्केट में हाहाकार मच गया। बीआर शेट्टी ने बैंक और 25 अन्य के खिलाफ याचिका दायर कर $1500 करोड़ (₹1.42 लाख करोड़) का हर्जाना मांगा है और साथ ही पेमेंट मिलने तक सालाना 18% की दर से ब्याज भी मांगा है। इसने शेयरों पर ऐसा दबाव बनाया कि यह धड़ाम हो गया और निवेशकों की दौलत ₹3700 करोड़ घट गई।

निचले स्तर पर खरीदारी के बावजूद शेयर संभल नहीं पाए। फिलहाल बीएसई पर यह 2.40% की गिरावट के साथ ₹231.90 के भाव पर है। इंट्रा-डे में यह 3.00% फिसलकर ₹230.45 तक आ गया था। बैंक का मार्केट कैप फिलहाल ₹1.19 लाख करोड़ है।

Bank of Baroda कैसे फंसा इस मामले में?

बीआर शेट्टी का आरोप है कि बैंक ऑफ बड़ौदा ने उनकी कंपनियों में हुई कथित वित्तीय गड़बड़ियों में मदद की और बाद में ऐसी गारंटियों के आधार पर उन्हें जिम्मेदार ठहराया, जिन पर उनके साइन ही नहीं हैं। इसे लेकर उन्होंने बैंक और 25 अन्य के खिलाफ याचिका दायर कर $1500 करोड़ का हर्जाना मांगा है। इसमें से $500 करोड़ की डिमांड उन्होंने सीधे तौर पर हुआ वित्तीय नुकसान के लिए मांगी है तो $500 करोड़ बिजनेस और निवेश के मौकों को झटके से जुड़े नुकसान और $500 करोड़ छवि को हुए नुकसान के लिए मांगे हैं। इसके अलावा उन्होंने सालाना 18% की दर से ब्याज भी मांगा है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

बैंक ऑफ बड़ौदा ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। 26 फरवरी 2026 को बीएसई पर यह ₹325.55 के भाव पर था, जोकि इसके शेयरों के लिए रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से सात महीने में यह 31.22% टूटकर 29 सितंबर 2026 को ₹223.90 तक आ गया, जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

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लाल मार्केट में इक्विटी म्यूचु्अल फंडों पर निवेशकों का दांव, SIP में आया रिकॉर्ड निवेश, Gold ETF की बढ़ी चमक

Mutual Fund Data: शेयर मार्केट में मचे तूफान के बीच पिछले महीने सितंबर में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश तेजी से बढ़ा। हालांकि डेट फंडों से ताबड़तोड़ निकासी से ओवरऑल म्यूचुअल फंड में निवेश निगेटिव रहा। म्यूचुअल फंड बॉडी AMFI (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) के लेटेस्ट आंकड़ों से यह बात सामने आई है। पिछले महीने सितंबर में इक्विटी फंड्स में निवेश करीब ₹9000 करोड़ बढ़ गया तो डेट फंड्स से निकासी मासिक आधार पर तीन गुना से अधिक बढ़ गई। वहीं सितंबर में SIP में कॉन्ट्रिब्यूशन रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गया लेकिन खातों की संख्या में कमी आई।

Equity Funds में सबसे अधिक क्रेज दिखा SmallCap Funds का

अगस्त महीने में इक्विटी फंडों में निवेश लगभग 19% बढ़ा था और फिर सितंबर महीने में नेट इनफ्लो में और बढ़ोतरी हुई। मासिक आधार पर ₹8,977.93 करोड़ की बढ़ोतरी मासिक निवेश में बड़ी तेजी है। AMFI के आंकड़ों के हिसाब से पिछले महीने इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीमों में ₹38,306.55 करोड़ का निवेश आया जोकि अगस्त महीने में ₹29,328.62 करोड़ के निवेश की तुलना में करीब 31% अधिक रहा।

कैटेगरीवाइज बात करें तो सबसे अधिक ₹9,038.57 करोड़ का निवेश स्मॉल-कैप फंडों में आया। इसके बाद मिड-कैप फंडों में ₹7,834.84 करोड़ का निवेश हुआ। इन दोनों में कुल ₹16,873.41 करोड़ का निवेश आया, जो सभी इक्विटी फंडों में हुए कुल निवेश का लगभग 44% है।

सितंबर महीने में फ्लेक्सी-कैप फंडों में भी निवेश बढ़कर ₹6,701.80 करोड़ हो गया, जबकि अगस्त में यह ₹5,059.42 करोड़ था।

लॉर्ज-कैप फंड के भी निवेशक सितंबर में लौटे और लगातार दो महीने तक शुद्ध निकासी के बाद सितंबर में निकासी से अधिक निवेश किया। लॉर्ज कैप फंडों में पिछले महीने ₹859.47 करोड़ का शुद्ध निवेश आया।

इक्विटी इनफ्लो में उछाल के बावजूद इक्विटी म्यूचुअल फंड्स का AUM सितंबर में घटकर ₹37.54 लाख करोड़ रह गई। अगस्त में यह ₹39.21 लाख करोड़ थी यानी इसमें लगभग 4.3% की गिरावट आई।

डेट फंडों से ताबड़तोड़ निकासी

सितंबर में डेट म्यूचुअल फंडों में सबसे बड़ा बदलाव दिखा। इन फंडों से शुद्ध निकासी बढ़कर ₹1.83 लाख करोड़ हो गई, जबकि अगस्त में यह ₹8,127 करोड़ थी।

सबसे अधिक निकासी लिक्विड फंडों से हुई। सितंबर में इनसे ₹95,743.20 करोड़ निकाले गए, जबकि अगस्त में इनमें ₹19,934.29 करोड़ का निवेश आया था। सितंबर में मनी मार्केट फंडों से भी ₹50,846.21 करोड़ की निकासी हुई, जबकि अगस्त में इन फंडों में ₹11,734.71 करोड़ का निवेश आया था। इन दोनों फंडों से कुल मिलाकर से लगभग ₹1.47 लाख करोड़ की शुद्ध निकासी हुई और इन्होंने डेट फंडों पर ओवरऑल दबाव डाला।

डेट फंड्स का एयूएम मासिक आधार पर अगस्त में ₹19.33 लाख करोड़ से 8.8% फिसलकर सितंबर में ₹17.64 लाख करोड़ पर आ गया।

हाइब्रिड फंड्स हुआ निगेटिव, ईटीएफ इनफ्लो में उछाल

पिछले महीने सितंबर में हाइब्रिड म्यूचुअल फंडों में भी काफी बदलाव देखने को मिला। पिछले महीने इससे ₹456.68 करोड़ की शुद्ध निकासी हुई, जबकि अगस्त में इसमें ₹10,045.34 करोड़ का शुद्ध निवेश आया था। इसकी बड़ी वजह ऑर्बिट्रेज फंड्स रहे, जिनसे सितंबर महीने में ₹3,956.38 करोड़ निकाले गए, जबकि अगस्त में इनमें ₹3,789.02 करोड़ का निवेश आया था।

पिछले महीने बैलेंस्ड-एडवांटेज फंडों से भी ₹912.43 करोड़ की निकासी हुई। वहीं मल्टी-एसेट एलोकेशन फंडों में निवेश का सिलसिला जारी रहा और इनमें ₹3,666.98 करोड़ आए।

पिछले महीने एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में ₹15,501.40 करोड़ का निवेश आया, जो अगस्त के ₹10,160.87 करोड़ से लगभग 53% अधिक है।

सितंबर महीने में गोल्ड ईटीएफ में निवेश लगभग 71% बढ़कर ₹4,450.61 करोड़ हो गया, जबकि अगस्त में यह ₹2,596.70 करोड़ था तो सिल्वर ETF में भी इस दौरान निवेश भी ₹9,959.96 करोड़ से बढ़कर ₹1,974.32 करोड़ हो गया।

इंडेक्स फंडों की बात करें तो अगस्त महीने में इसमें ₹787.49 करोड़ का निवेश आया था, जबति पिछले महीने इससे ₹3,614.03 करोड़ की शुद्ध निकासी हुई थी।

विदेशी बाजारों में निवेश करने वाले ओवरसीज फंडों से निकासी जारी रही। सितंबर में इनसे ₹159.18 करोड़ निकाले गए, जबकि अगस्त में निकासी ₹72.19 करोड़ थी।

सितंबर महीने में लाइफ साइकिल फंडों में ₹143.75 करोड़ और सॉल्यूशन-ओरिएंटेड स्कीमों में ₹373.90 करोड़ का निवेश आया।

SIP में निवेश पहुंचा रिकॉर्ड हाई पर

सितंबर में मासिक SIP कॉन्ट्रिब्यूशन बढ़कर ₹32,490 करोड़ के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया। अगस्त में यह ₹32,297 करोड़ था। इस बढ़ोतरी के साथ सितंबर 2026 में एसआईपी का एयूएम ₹17.86 लाख करोड़ हो गया। हालांकि एक खास बात ये है कि सितंबर में लगभग 63 लाख नए एसआईपी रजिस्टर हुए, जबकि 73 लाख एसआईपी या तो मेच्योर हो गए या उन्हें बंद कर दिया गया। सितंबर की शुरुआत से लेकर आखिरी तक एसआईपी अकाउंट्स की संख्या 10.75 करोड़ से 10.06 करोड़ पर आ गई।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Suzlon Energy Share Price: ये 6 बातें तय करेंगी शेयरों की चाल, समझ लें सुजलॉन में निवेश से पहले

Suzlon Energy Share Price: 8 अक्टूबर को एक साल के निचले स्तर पर आने के बाद से विंट टर्बाईन बनाने वाली सुजलॉन एनर्जी के शेयरों ने शानदार वापसी की है। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल के बुलिश रुझान से इसे और सपोर्ट मिला और यह 3% से अधिक उछल पड़ा। मोतीलाल ओसवाल ने ₹65 के टारगेट प्राइस के साथ इसकी खरीदारी की रेटिंग को बरकरार रखा है। ओवरऑल इसे कवर करने वाले 12 एनालिस्ट्स में से 10 ने इसे खरीदारी और 2 ने होल्ड रेटिंग दी है। किसी भी एनालिस्ट ने इसे बेचने की सलाह नहीं दी है। अब शेयरों की बात करें तो फिलहाल बीएसई पर यह 1.84% की बढ़त के साथ ₹38.27 पर है। इंट्रा-डे में यह 3.14% उछलकर ₹38.76 तक पहुंच गया था।

Suzlon पर Motilal Oswal को भरोसा क्यों कायम?

तीन महीने में सुजलॉन एनर्जी के शेयर 31% नीचे आए। इस गिरावट के साथ अब यह वित्त वर्ष 2028 की प्रति शेयर कमाई (EPS) के मुकाबले 17.5 गुना पर है जोकि इसके एक साल के औसत फारवर्ड P/E से करीब 20% डिस्काउंट पर है। ऐसे में सुजलॉन का शेयरों का वैल्यूएशन काफी आकर्षक हो गया। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक सुजलॉन की कमाई वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में अधिक होती रही है और कंपनी के सालाना EBITDA में इसकी 60-65% हिस्सेदारी रहती है। ऐसे में इस बार भी वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में ऐसी ही मजबूती के आसार हैं क्योंकि डिलीवरी पहली छमाही में 1.2 गीगावाट से बढ़कर दूसरी छमाही में 2.1 गीगावाट पहुंच सकती है।

जून तिमाही के आखिरी में सुजलॉन एनर्जी की ऑर्डर बुक 5.9 GW थी, जिससे वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही तक डिलीवरी की तस्वीर साफ दिख रही है। ब्रोकरेज फर्म को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-2028 के दौरान सुजलॉन एनर्जी का EBITDA सालाना 22% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़ेगा।

इस वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में देश की विंड कैपेसिटी 3 गीगावाट बढ़ी और ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक अब तक दूसरी छमाही में पहली की तुलना में डेढ़ गुना इंस्टॉलेशन होता रहा है तो इस बार दूसरी छमाही में करीब 4.5 गीगावाट के इंस्टॉलेशन की उम्मीद है जोकि सुजलॉन जैसी विंड टर्बाईन बनाने वाली कंपनियों के लिए पॉजिटिव है। सरकार ने इस वित्त वर्ष 2027 में 7.5–8 GW नई पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ने का लक्ष्य तय किया हुआ है।

मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि शाम के समय बिजली की बढ़ती मांग से विंड-सोलर हाइब्रिड और FDRE (फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी) प्रोजेक्ट्स के जरिए विंड कैपेसिटी बढ़ोतरी को सपोर्ट मिल सकता है और यह सुजलॉन एनर्जी के लिए पॉजिटिव है।

मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक सुजलॉन एनर्जी को तीन वजहों- DevCo को अच्छे रिस्पांस, निर्यात और पुराने टर्बाईनों को बदलने के मौके से मजबूत सपोर्ट मिल सकता है। डेवको मॉडल की बात करें तो इस वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों में ही 600 MW से अधिक के ऑर्डर मिले, जो कुल ऑर्डर का 60% हिस्सा हैं।

मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक सुजलॉन को सरकार के स्थानीय प्रोत्साहन से मजबूत सपोर्ट मिल रहा है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

सुजलॉन एनर्जी के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 6 नवंबर, 2025 को बीएसई पर यह ₹61.45 के भाव पर था, जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 11 महीने में यह 40.93% टूटकर 8 अक्टूबर 2026 को यह एक साल के निचले स्तर ₹36.30 पर आ गया।

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Retiring at 45: जल्द रिटायरमेंट की तैयारी! नौकरी छोड़ने से पहले कर लें ये कैलकुलेशन

Retiring at 45: जल्दी रिटायर होना काफी आकर्षक लग सकता है लेकिन ऐसा फंड तैयार करना जो 30-40 वर्षों तक या उससे अधिक समय तक खर्चों को पूरा कर सके, इसके लिए सावधानीपूर्वक प्लानिंग की जरूरत होती है। मान लीजिए कि 34 साल की उम्र में आपकी हर महीने की सैलरी ₹1.5 लाख है और आप 45 साल की उम्र तक रिटायर होना चाहते हैं। ऐसे में आपके सामने पहली बड़ी चुनौती यह अनुमान लगाने की है कि भविष्य में आपके खर्च कितने होंगे, रिटायरमेंट के लिए कितने बड़े फंड की जरूरत पड़ेगी और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर महीने कितना निवेश करना होगा।

Retiring at 45: ये है पूरा कैलकुलेशन

बजाज कैपिटल के ज्वाइंट चेयरमैन और एमडी संजीव बजाज का का कहना है कि 45 साल की उम्र में रिटायर होना एक बड़ा लक्ष्य है, लेकिन इसकी शुरुआत निवेश के विकल्प चुनने से नहीं, बल्कि यह समझने से होनी चाहिए कि 45 साल की उम्र में आपका खर्च कितना होगा। चूंकि आपकी उम्र 34 साल है तो आपके पास 11 साल हैं इस प्लानिंग के लिए और इन्हीं 11 साल में जिंदगी भर के लिए खर्चों का इंतजाम करना है। संजीव के मुताबिक इसमें दो चीजों का हल खोजना है- एक तो कम समय में पर्याप्त बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार करना और दूसरा यह सुनिश्चित करना कि वह फंड लंबे समय तक आपके खर्चों को पूरा कर सके।

एक आसान उदाहरण से समझिए इसे। मान लीजिए कि आपका हर महीने का खर्च अभी ₹60 हजार है और अगर महंगाई सालाना 6% की रफ्तार से बढ़े तो जब आप 45 साल के होंगे, तब यही खर्च बढ़कर लगभग ₹1.14 लाख प्रति माह हो सकता है। अब अगर आप रिटायरमेंट के दौरान हर साल अपने फंड का 3.5% निकालने का टारगेट रखते हैं, और महंगाई के हिसाब से निकाली जाने वाले पैसे को हर साल बढ़ाते हैं, तो 40 साल से अधिक के रिटायरमेंट के लिए आपको लगभग ₹3.9 करोड़ के फंड की जरूरत हो सकती है।

अब आता है असली गणित। 11 साल में इस ₹3.9 करोड़ के फंड को तैयार करने के लिए अगर मान लेते हैं कि निवेश की गई पूंजी पर सालाना 10% की रफ्तार से रिटर्न मिल रहा है तो आपको हर महीने लगभग ₹1.7 लाख निवेश करना होगा जोकि ₹1.5 लाख की मौजूदा इनकम से कम है। ऐसे में मौजूदा जीवनशैली और इनकम के हिसाब से 45 साल की उम्र में पूरी तरह रिटायर होना मुश्किल होगा। हालांकि इस कैलकुलेशन से आपको पता चल गया कि कहां क्या बदलाव करना है।

अगर अर्ली-रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 45 साल से 50 वर्ष कर दी जाए तो हर महीने ₹1.15 लाख के निवेश में काम हो जाएगा। इसके अलावा कुछ और तरीके भी अपना सकते हैं जैसे कि रिटायरमेंट के बाद अनुमानित खर्चों को कम करना, सैलरी बढ़ने पर निवेश की रकम बढ़ाना और 45 साल की उम्र के बाद पूरी तरह काम छोड़ने के बजाय पार्ट-टाइम काम या कंसल्टिंग से कुछ कमाई जारी रखना।

कुछ सावधानी और रिस्क समझना भी जरूरी

जल्दी रिटायरमेंट की योजना बनाते समय स्वास्थ्य से जुड़े खर्चों पर खास ध्यान देना चाहिए क्योंकि आमतौर पर नौकरी छोड़ने के बाद कंपनी की तरफ से मिलने वाला हेल्थ इंश्योरेंस भी समाप्त हो जाता है। ऐसे में आपको अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी और भविष्य में मेडिकल खर्चों के लिए अलग से योजना बनानी होगी।

एक और अहम रिस्क मार्केट में बिकवाली का दबाव है। अगर रिटायरमेंट के तुरंत बाद शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आ जाती है और आपको अपने खर्चों के लिए गिरते हुए निवेश से पैसा निकालना पड़ता है, तो आपके रिटायरमेंट फंड पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कुछ वर्षों के खर्च के बराबर पैसे कम रिस्क वाले एसेट्स में रखने चाहिए। इससे जब शेयर मार्केट में हाहाकार मचा हो, तब जल्दबाजी में पैसे निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

तीन काम करें सबसे पहले

अर्ली-रिटायरमेंट के लिए तीन काम सबसे पहले करना चाहिए-

तीन महीने तक के अपने वास्तविक खर्चों का रिकॉर्ड रखें। इससे आपको पता चलेगा कि हर महीने आपकी जरूरतों पर वास्तव में कितना पैसा खर्च होता है।

म्यूचुअल फंड, शेयर, पीपीएफ और ईपीएफ समेत अपने सभी मौजूदा निवेशों की पूरी लिस्ट बनाएं।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Jio IPO: कम हो रहा कर्ज का बोझ, आईपीओ से पहले तेजी से हो रहा कैश जेनेरेट

Jio IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ लाने की तैयारियों में जुटी है। उससे पहले कंपनी की सेहत काफी मजबूत हुई है और यह अधिक नगदी जेनेरेट कर रही है तो कर्ज पर इसकी अपनी निर्भरता भी कम हो रही है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स का नेट लेवरेज रेश्यो वित्त वर्ष 2024 में 0.88 गुना से घटकर वित्त वर्ष 2026 में 0.36 गुना रह गया। इससे कंपनी को वित्तीय फैसले लेने में अधिक सहूलियत मिली है। जियो का लक्ष्य अपनी मुनाफे वाली ग्रोथ को आगे बढ़ाने का है। आईपीओ के तहत नए शेयर जारी करके जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी रिलायंस जियो इंफोकॉम का कर्ज हल्का करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।

क्या कहना है एक्सपर्ट का

जियो प्लेटफॉर्म्स का यह आईपीओ ऐसे समय में आ रहा है, जब इसका फोकस नेटवर्क का विस्तार करने और नए ग्राहक जोड़ने से हटकर पिछले एक दशक में बनाए गए इंफ्रास्ट्रक्चर से अधिक कमाई करने पर है। इसका मतलब हुआ कि कंपनी अपने मौजूदा ग्राहकों से कमाई बढ़ाने के साथ-साथ मोबाइल कनेक्टिविटी के अलावा दूसरे कारोबारों को भी डेवलप करने पर फोकस कर रही है।

एंबिट कैपिटल रिसर्च के एनालिस्ट विवेकानंद एस का कहना है कि आईपीओ से जियो की वित्तीय सेहत मजबूत होने की उम्मीद है क्योंकि इसके कैपिटल स्ट्रक्चर अधिक कंजर्वेटिव हो जाएगा। उनका कहना है कि अब अगले चरण की ग्रोथ में कंपनी का फोकस कमाई बढ़ाने पर होगा तो कैपिटल एक्सपेंडिचर पर अधिक कंट्रोल दिख सकता है।

कैसी है Jio Platforms की सेहत

जियो प्लेटफॉर्म्स के कारोबारी सेहत की बात करें तो ऑपरेशंस से इसका रेवेन्यू वित्त वर्ष 2024 में ₹1.10 लाख करोड़ से वित्त वर्ष 2026 में ₹1.47 लाख करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी का शुद्ध मुनाफा भी ₹21,423 करोड़ से बढ़कर ₹30,049 करोड़ हो गया। साथ ही अहम बात ये है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर के बाद कंपनी की नगदी वित्त वर्ष 2024 में ₹1,449 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹42,071 करोड़ हो गई, जिससे इसके सामने भविष्य में निवेश करने और कर्ज हल्का करने की गुंजाइश बढ़ी है।

इस दौरान कंपनी का ARPU यानी प्रति यूजर औसतन मंथली रेवेन्यू ₹181.7 से ₹214 पर पहुंच गया तो प्रति यूजर मासिक डेटा खपत 28.7 GB से बढ़कर 42.3 GB हो गई। विवेकानंद का कहना है कि ग्राहक अनलिमिटेड डेटा और सस्ती सेवाओं का भरपूर फायदा उठा रहे हैं, जिससे कंपनी को कस्टमर सरप्लस के रूप में काफी फायदा मिल रहा है।

जियो ने नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश और आक्रामक प्राइसिंग के जरिए देश के मोबाइल मार्केट को बदल दिया, जिससे कॉम्पिटिटर्स को भी ऐसा ही करना पड़ा। हालांकि अब टेलीकॉम इंडस्ट्री को अपनी सर्विस से ज्यादा रेवेन्यू कमाने की जरूरत है। कंपनी ने मोबाइल सर्विस के अलावा एक एंड-टू-एंड 5जी स्टैक डेवलप किया है जिसमें कोर नेटवर्क टेक्नोलॉजी, रेडियो इक्विपमेंट और नेटवर्क सॉफ्टवेयर शामिल हैं। मार्च 2026 तक जियो प्लेटफॉर्म्स और उसकी यूनिट्स ने 6,817 पेटेंट एप्लीकेशन फाइल किए थे, जिनमें से 1,009 को वैश्विक मंजूरी मिल चुकी थी। जियो ने अपना प्री-6G स्टैक और Giga MIMO रेडियो भी डेवलप किया है, जिसे कंपनी ने पिछले हफ्ते नई दिल्ली में इंडिया मोबाइल कांग्रेस में दिखाया था।

जियो अपने होम ब्रॉडबैंड बिजनेस का भी विस्तार कर रही है। आईपीओ के ड्राफ्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 के आखिरी तक उसके पास 2.71 करोड़ फिक्स्ड ब्रॉडबैंड कस्टमर थे, जिससे उसका मार्केट शेयर 42.6% हो गया।

कंपनी की योजना पार्टनरशिप और मैनेज्ड-सर्विस अरेंजमेंट के जरिए अपनी खास नेटवर्क टेक्नोलॉजी को विदेशी टेलीकॉम ऑपरेटर्स तक पहुंचाने की भी है। इसके सफल होने पर भारतीय ऑपरेशन्स के अलावा कंपनी के लिए रेवेन्यू का एक और जरिया बन सकता है।

How to read stock chart: चार्ट पढ़ने का सही तरीका, धड़ाधड़ बनेगा शेयर मार्केट से पैसा

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

How to read stock chart: चार्ट पढ़ने का सही तरीका, धड़ाधड़ बनेगा शेयर मार्केट से पैसा

How to read stock chart: अगर आप स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग करते हैं तो प्राइस चार्ट में एक चीज जरूर नोटिस की होगी कि भाव एक सीधी रेखा में नहीं चलते हैं। वे अक्सर कुछ खास प्राइस लेवल पर रुकती हैं, उछाल लेती हैं या अपनी दिशा बदल देती हैं। ऐसा बार-बार होता है, जैसे कि कोई फर्श (Floor) या छत (Ceiling) मौजूद हो। यह कोई संयोग नहीं है बल्कि टेक्निकल एनालिसिस की सबसे पुरानी और अहम अवधारधाओं में से एक है। ऐसे में ट्रेडिंग के लिए सपोर्ट और रेजिस्टेंस को समझना बहुत जरूरी है क्योंकि यह सिर्फ चार्ट देखने वाले शख्स और इसे वास्तव में समझने वाले के बीच बड़ा फर्क पैदा करता है।

क्या है Support और Resistance

सपोर्ट वह प्राइस लेवल होता है, जहां किसी गिरावट के दौरान भाव का नीचे जाना रुक सकता है या यह ऊपर की तरफ मुड़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस लेवल पर खरीदारी करने वालों की दिलचस्पी इतनी बढ़ जाती है कि वे बिकवाली के दबाव को कम कर देते हैं। यह एक तरह से फर्श की तरह काम करता है, जहां से नीचे जाने में शेयर को कठिनाई हो सकती है।

रेजिस्टेंस इसके बिल्कुल विपरीत होता है। यह वह प्राइस लेवल है, जहां तेजी के दौरान शेयरों के भाव का ऊपर जाना रुक सकता है या कीमत वापस नीचे की तरफ मुड़ सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस स्तर पर बिकवाली का दबाव खरीदारी के दबाव से अधिक हो जाता है। यह एक छत (Ceiling) की तरह होता है, जिसे ऊपर की तरफ तोड़ना मुश्किल होता है।

एक उदाहरण से समझें। नीचे चार्ट में Siemens के शेयरों की छह महीने में ₹3300 और ₹4200 के बीच की उठा-पटक का चार्ट है। इसमें देख सकते हैं कि जब भी शेयर की कीमत ₹3,300 के करीब गिरती है, तो खरीदार एक्टिव हो जाते हैं और भाव चढ़ने लगते हैं तो दूसरी तरफ जब भी शेयर की कीमत ₹4,150–₹4,200 के करीब पहुंचती है, तो सेलर्स एक्टिव हो जाते हैं और भाव फिसलने लगते हैं। इस स्थिति में ₹3300 सपोर्ट और ₹4150-₹4200 रेजिस्टेंस के तौर पर काम कर रहा है।

support

क्यों होते हैं ये लेवल्स

सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल कोई मैजिक लाइन नहीं हैं, जो किस्मत से नहीं बनती हैं बल्कि ये ट्रेडर्स के खरीदारी-बिक्री के पैटर्न को दिखाते हैं। इनके बनने की कुछ वजह हैं-

मार्केट साइकोलॉजी: ट्रेडर्स को पुराने अहम प्राइस लेवल याद रहते हैं। जब शेयरों की कीमत दोबारा उन लेवल पर पहुंचती है, तो वे फिर से खरीदने या बेचने का फैसला ले सकते हैं। इससे ये लेवल मजबूत हो सकते हैं।

सप्लाई और डिमांड: सपोर्ट के पास खरीदारी बढ़ सकती है, जबकि रेजिस्टेंस के पास बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।

मनोवैज्ञानिक स्तर: ₹1,000, ₹2,000 या ₹5,000 जैसे राउंड नंबर्स अक्सर अहम प्राइस लेवल के तौर पर काम करती हैं।

संस्थागत ट्रेडिंग: बड़े संस्थागत निवेशक और ट्रेडर्स कई बार अहम प्राइस लेवल के आसपास बड़े ऑर्डर लगाते हैं।

ऑर्डर क्लस्टरिंग: सपोर्ट और रेजिस्टेंस के आस-पास स्टॉप लॉस ऑर्डर और प्रॉफिट टारगेट हो सकते हैं। जब शेयर ये लेवल तोड़ती हैं, तो कई ऑर्डर एक साथ एक्टिव हो सकते हैं, जिससे तेज ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन देखने को मिल सकता है।

Role Reversal: सपोर्ट बन सकता है रेजिस्टेंस तो रेजिस्टेंस नया सपोर्ट

सपोर्ट और रेजिस्टेंस फिक्स्ड नहीं होते हैं बल्कि ऐसा भी हो सकता है कि सपोर्ट अगला रेजिस्टेंस बन जाए या रेजिस्टेंस नया सपोर्ट बन जाए। इस रोल रिवर्सल को पोलरिटी फ्लिपिंग कहते हैं।

अगर कोई प्राइस लेवल काफी समय से सपोर्ट का काम कर रहा था, लेकिन भाव उससे भी नीचे आ गए। ऐसे में जिन ट्रेडर्स ने उस स्तर पर शेयर खरीदे थे, वे घाटे में आ गए तो शेयर जब दोबारा पुराने सपोर्ट लेवल तक पहुंचती है, तो उनमें से कुछ ट्रेडर्स अपने नुकसान से बाहर निकलने या ब्रेक-ईवन पर बेचने की कोशिश कर सकते हैं। इससे उस लेवल पर बिकवाली बढ़ सकती है और जो स्तर पहले सपोर्ट था, वह अब रेजिस्टेंस बन सकता है।

वहीं दूसरी तरफ जब शेयर किसी रेजिस्टेंस को तोड़कर ऊपर निकलते हैं, तो बाद में उसी लेवल पर वापस आने पर वहां खरीदारी बढ़ सकती है। इस तरह पुराना रेजिस्टेंस नया सपोर्ट बन सकता है।

उदाहरण के लिए, पेटीएम का शेयर ₹1,250–₹1,270 के लेवल के ऊपर टिक नहीं पा रहा था और यह लेवल रेजिस्टेंस का काम कर रहा था। हालांकि जब शेयर इस रेजिस्टेंस को तोड़कर ऊपर निकल गया और ₹1,400 तक पहुंच गया और इसके बाद शेयर वापस गिरकर ₹1,290 तक आए और फिर वहां से उछलकर ऊपर जाने लगे। इस स्थिति में ₹1,250–₹1,270 का पुराना रेजिस्टेंस अब नए सपोर्ट के रूप में काम करने लगा।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Rally: फैब फ्राइडे, सेंसेक्स 879 अंक चढ़ा; निफ्टी 22500 के पार, निवेशकों की दौलत ₹3 लाख करोड़ बढ़ी

2 दिन की गिरावट के बाद शुक्रवार, 9 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजारों में शानदार तेजी लौटी। सेंसेक्स 879.09 अंकों या 1.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,472.33 पर बंद हुआ। निफ्टी 288.65 अंकों या 1.3 प्रतिशत के उछाल के साथ 22,520.45 पर बंद हुआ। इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 3 लाख करोड़ रुपये बढ़ गया। दिन में सेंसेक्स पिछली क्लोजिंग से 1,075.96 अंक तक चढ़कर 72,669.20 के हाई तक गया। इसी तरह निफ्टी भी पिछली क्लोजिंग से 348.95 अंक तक चढ़कर 22,580.75 के हाई तक गया।

गुरुवार को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 462.33 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा था। शुक्रवार को मार्केट बंद होने के बाद यह 465.33 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया। यानि कि 3 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी। IT स्टॉक्स में तेजी, कच्चे तेल की कीमत में गिरावट, रुपये में बढ़त जैसे फैक्टर्स के चलते बाजार में तेजी आई।

निफ्टी पर ऑयल एंड गैस को छोड़कर दूसरे सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए हैं। सबसे ज्यादा 3 प्रतिशत की तेजी IT इंडेक्स में दिखी। निफ्टी पर अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज, ITC, आयशर मोटर्स, TCS और HCL टेक्नोलॉजीस टॉप गेनर रहे। वहीं BSE, रिलायंस इंडस्ट्रीज, JSW स्टील और सिप्ला टॉप लूजर रहे।

एक दिन पहले क्या रहा था हाल

गुरुवार, 8 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट रही थी। यह काफी तगड़ी थी। सेंसेक्स 1,045.46 अंक या 1.44 प्रतिशत का गोता लगाकर ढाई साल से अधिक के निचले स्तर 71,593.24 पर बंद हुआ था। कारोबार के दौरान एक समय यह 1,310.95 अंक तक लुढ़क गया था। निफ्टी 371.25 अंक या 1.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 21 महीने के निचले स्तर 22,231.80 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी 423.15 अंक तक लुढ़का था।

कच्चे तेल के दाम में तेजी और घरेलू व वैश्विक स्तर पर मौद्रिक नीति के और सख्त होने की आशंका के चलते ऐसा हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक ने अक्टूबर की मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू मीटिंग में रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है।

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रुपये की चाल

शुक्रवार को भारतीय करेंसी रुपये में तेजी रही। यह अमेरिकी मुद्रा डॉलर के मुकाबले 16 पैसे चढ़कर 96.72 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। एक दिन पहले रुपया, अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 13 पैसे की गिरावट के साथ 96.88 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों समेत लगातार बने व्यापक आर्थिक दबाव के कारण रुपये में गिरावट आई।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market Gain: बाजार में तेजी लौटी, सेंसेक्स 438 अंक तक उछला, निवेशकों की दौलत ₹66563 करोड़ बढ़ी

गुरुवार को भारी बिकवाली के बाद भारतीय शेयर बाजारों में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को तेजी ने फिर दस्तक दी। सेंसेक्स हरे निशान में खुला और चंद पलों में पिछली क्लोजिंग से 438.43 अंक तक चढ़कर 72,036.03 के हाई तक गया। इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 66,563 करोड़ रुपये बढ़ गया। इसी तरह निफ्टी भी बढ़त में खुलने के बाद पिछली क्लोजिंग से 151.65 अंक तक चढ़कर 22,383.45 के हाई तक गया।

गुरुवार को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,62,33,248.126 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट खुलने के कुछ ही देर में यह 4,62,99,811.44 करोड़ रुपये हो गया। यानि कि 66,563.314 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी।

एक दिन पहले कैसी रही थी चाल

गुरुवार, 8 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट रही थी। यह काफी तगड़ी थी। सेंसेक्स 1,045.46 अंक या 1.44 प्रतिशत का गोता लगाकर ढाई साल से अधिक के निचले स्तर 71,593.24 पर बंद हुआ था। कारोबार के दौरान एक समय यह 1,310.95 अंक तक लुढ़क गया था। निफ्टी 371.25 अंक या 1.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 21 महीने के निचले स्तर 22,231.80 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी 423.15 अंक तक लुढ़का था।

कच्चे तेल के दाम में तेजी और घरेलू व वैश्विक स्तर पर मौद्रिक नीति के और सख्त होने की आशंका के चलते ऐसा हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक ने अक्टूबर की मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू मीटिंग में रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है।

Stocks to Watch: 9 अक्टूबर को TCS, Wipro, Infosys, JSW Steel, NCC समेत इन शेयरों पर रहेगी नजर, दिख सकती है बड़ी उठापटक

रुपये की चाल

शुक्रवार को भारतीय करेंसी रुपये में तेजी है। यह शुरुआती कारोबार में 23 पैसे मजबूत होकर 96.65 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। एक दिन पहले रुपया, अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 13 पैसे की गिरावट के साथ 96.88 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों समेत लगातार बने व्यापक आर्थिक दबाव के कारण रुपये में गिरावट आई।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।