जंतर-मंतर मारपीट मामला : स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंद शहर से हिरासत में लिया, CJP ने दिया था 72 घंटे का अल्टीमेटम, पढ़िए क्या था पूरा मामला

जंतर-मंतर मारपीट मामला : स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंद शहर से हिरासत में लिया, CJP ने दिया था 72 घंटे का अल्टीमेटम, पढ़िए क्या था पूरा मामला

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता के साथ कथित मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंद शहर से हिरासत में लिया गया है। स्वतंत्र की गिरफ्तारी के लिए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन कर किया था। शुक्रवार को CJP के प्रतिनिधिमंडल ने संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंचकर मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका भी शामिल थे। 

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क्या था पूरा मामला

खुद को 'हिन्दुत्व एक्टिविस्ट' बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज पर आरोप है कि उन्होंने CJP के प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट की थी। वायरल वीडियो क्लिप में भारद्वाज कथित तौर पर यह कहते नजर आए कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान संजय कुमार की 'खोपड़ी फोड़ दी थी' और कथित घटना की गंभीरता के बावजूद जेल जाने से बच गए। CJP ने उस प्रदर्शन का आयोजन किया था, जिसके दौरान कथित मारपीट की घटना हुई थी। संगठन लगातार स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग कर रहा है। CJP का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की।

दिल्ली पुलिस ने खोपड़ी में फ्रैक्चर के दावे को नकारा

विवाद उस समय और बढ़ गया जब गुरुवार को दिल्ली पुलिस ने कहा कि 38 वर्षीय संजय कुमार को झड़प के दौरान सिर में साधारण चोट लगी थी। पुलिस ने उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि संजय कुमार की खोपड़ी में फ्रैक्चर हुआ है।  पुलिस के मुताबिक स्वतंत्र भारद्वाज और एक अन्य आरोपी सूरज कुमार को घटनास्थल पर हिरासत में लिया गया था। दोनों से पूछताछ की गई और उन्हें नोटिस भी जारी किए गए। दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा है कि मामले में जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

 

 

कौन हैं स्वतंत्र भारद्वाज?

स्वतंत्र भारद्वाज एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। उन पर जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। यह मामला उस समय फिर चर्चा में आ गया जब भारद्वाज से जुड़े एक पॉडकास्ट की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई।

 

हालांकि, स्वतंत्र भारद्वाज ने संजय पर हमला करने के आरोप से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने आत्मरक्षा में प्रतिक्रिया दी थी। भारद्वाज के मुताबिक, उन्हें करीब 10-15 लोगों ने घेर लिया था और उन्हें डर था कि उनके साथ मारपीट या उनकी हत्या तक की जा सकती है। उन्होंने वायरल पॉडकास्ट क्लिप को भी कथित तौर पर गलत तरीके से पेश किए जाने का दावा किया और कहा कि उनकी राजनीतिक संबद्धता को लेकर लोगों ने उस क्लिप को मजाक या व्यंग्य के तौर पर बनाया था।

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निशु आजाद ने क्या आरोप लगाए?

निशु आजाद ने भारद्वाज के दावों को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि आरोपी और उसके समर्थकों ने उन्हें परेशान किया और दुष्कर्म की धमकियां भी दीं। निशु के अनुसार, इन धमकियों को लेकर उन्होंने अलग से FIR भी दर्ज कराई है। आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान संजय के साथ गंभीर मारपीट हुई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि आरोपी अब तक बाहर क्यों है और पुलिस से मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर संजय की खोपड़ी में फ्रैक्चर होने की बात को लेकर गलत सूचना फैलाई गई थी। पुलिस के अनुसार, संसद मार्ग थाने में मामला दर्ज किया जा चुका है और आरोपी से पूछताछ भी की गई है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि जांच और कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपी को अभी कुछ नोटिस दिए जाने बाकी हैं।  जांच पूरी होने के बाद सक्षम अदालत में चार्जशीट दाखिल करने समेत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मामले को मिला राजनीतिक रंग

निशु आजाद के मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कुछ नेताओं ने निशु के प्रति समर्थन जताया है। इसके बाद जंतर-मंतर की घटना और स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े आरोपों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है।

विजय के ‘पीएम दांव’ पर सियासत गर्माई : DMK और कांग्रेस का तंज, क्या 2029 में विजय बनेंगे प्रधानमंत्री?

विजय के 'पीएम दांव' पर सियासत गर्माई : DMK और कांग्रेस का तंज, क्या 2029 में विजय बनेंगे प्रधानमंत्री?

CM Vijay Thalapathy

TVK Vijay Prime Minister Demand: तमिलनाडु की राजनीति में हाल में हुए बड़े बदलाव के बाद अब एक नया सियासी भूचाल खड़ा हो गया है। अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय (Thalapathy Vijay) की पार्टी तमिलगा वेत्री कज़गम (TVK) ने राज्य विधानसभा चुनाव में इतिहास रचते हुए 108 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की और अकेले दम पर 35% वोट शेयर हासिल किया। लगभग 60 सालों से चले आ रहे डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) के बारी-बारी के शासन को खत्म कर विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बन चुके हैं।

 

35% वोट शेयर का यह आंकड़ा तमिलनाडु के पूर्व लोकप्रिय मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन (MGR) को मिले वोट शेयर से भी 2 प्रतिशत अधिक है। बिना किसी गठबंधन के अकेले चुनाव लड़कर इतना बड़ा जनादेश हासिल करने का दावा करते हुए टीवीके समर्थक अब एक कदम आगे बढ़ गए हैं और विजय को 'भारत का अगला प्रधानमंत्री' प्रोजेक्ट करने लगे हैं। ALSO READ: परिसीमन पर तमिलनाडु CM विजय ने PM मोदी को लिखा पत्र, लोकसभा सीटों की संख्या 543 पर स्थायी रूप से तय करने की मांग

विधानसभा में उठा 'दक्षिण का पीएम' का मुद्दा

हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा के सत्र के दौरान टीवीके के वरिष्ठ नेता और मंत्री आधव अर्जुन (Aadhav Arjuna) ने यह कहकर नया विवाद छेड़ दिया कि 'दक्षिण भारत के किसी तमिल नेता को देश का अगला प्रधानमंत्री बनना चाहिए'।

 

इसके बाद से पूरे तमिलनाडु में टीवीके कार्यकर्ताओं और विजय के प्रशंसकों ने जगह-जगह पोस्टर्स और होर्डिंग्स लगा दिए हैं, जिनमें विजय को 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस बहस से जुड़े रील्स और वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहे हैं।

कांग्रेस भड़की : 'दिल्ली में राहुल गांधी ही पीएम चेहरा'

टीवीके के इस नए दांव ने उनकी सहयोगी कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व को असहज और नाराज कर दिया है।

 

कांग्रेस नेताओं का रुख : तमिलनाडु कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया है कि भले ही विजय तमिलनाडु में एक बड़ा राजनीतिक चेहरा हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर और दिल्ली की राजनीति में राहुल गांधी ही विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के एकमात्र उम्मीदवार हैं।

 

कांग्रेस का कहना है कि 2029 के आम चुनाव में राहुल गांधी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा, इसलिए टीवीके कार्यकर्ताओं का विजय को पीएम पद का दावेदार बताना जल्दबाजी और अनुचित है। विजय के मंत्रिमंडल में शामिल 2 विधायकों ने भी इसका खुला विरोध किया है और मंत्री पद से इस्तीफे की धमकी भी दी है। 

 

दूसरी ओर, राज्य के अन्य विपक्षी दलों ने विजय को प्रधानमंत्री बनाने की बात को 'एक बड़ा मज़ाक' करार देते हुए खारिज कर दिया है और कहा है कि ऐसा होने की कोई व्यावहारिक संभावना नहीं है। ALSO READ: तमिलनाडु CM विजय के यू-टर्न पर भड़के CJP नेता अभिजीत दीपके, कहा डर लग रहा है तो सुधारो व्यवस्था

DMK प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन का तीखा तंज

इस पूरे राजनीतिक घमासान के बीच डीएमके के मुख्य प्रवक्ता और कम्यूनिकेशन टीम के अध्यक्ष टीकेएस एलंगोवन (TKS Elangovan) ने टीवीके और विजय पर जोरदार कटाक्ष किया है।

 

“टीवीके को तमिलनाडु में स्पष्ट बहुमत (118 सीटें) खुद नहीं मिला था। विजय केवल कांग्रेस और वीसीके (VCK) जैसी पार्टियों के समर्थन के बल पर सरकार चला रहे हैं। जब राज्य में ही उनकी सरकार दूसरों के बैसाखियों पर टिकी है, तो वे पूरे देश के प्रधानमंत्री कैसे बन सकते हैं?”

 

उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा- “एक दौर था जब हमने मांग की थी कि तमिलनाडु को एक अलग देश बनाया जाए। अगर तमिलनाडु कभी एक अलग देश बनता है, तो शायद विजय वहां के प्रधानमंत्री जरूर बन सकते हैं!”

2029 के लिए क्या हैं सियासी मायने?

तमिलनाडु में सत्ता में आते ही टीवीके द्वारा राष्ट्रीय राजनीति में अपनी महत्वाकांक्षा जाहिर करना इस बात का संकेत है कि पार्टी खुद को सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रखना चाहती। हालांकि, कांग्रेस के साथ उभरते मतभेद और डीएमके का हमला यह दर्शाता है कि विजय के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाना और क्षेत्रीय सहयोगियों को साधे रखना एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।

कनाडा में पंजाबी मूल का पुलिस अफसर गिरफ्तार:घर से दस्तावेजों से भरे बक्से ले गई पुलिस; धोखाधड़ी-चोरी और विश्वासघात के 9 केस

कनाडा के वैनकूवर पुलिस विभाग (VPD) में करीब 20 साल से सेवा दे रहे पंजाबी मूल के पुलिस अफसर और युवाओं के लिए काम करने वाली संस्था किड्स प्ले यूथ के प्रमुख कुलविंदर सिंह उर्फ काल दोसांझ को लंबी जांच के बाद गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उनके कथित सहयोगी सरबजीत सिंह गिल को भी गिरफ्तार किया है। काल दोसांझ पर धोखाधड़ी, चोरी और विश्वासघात समेत 9 केस दर्ज हैं, जबकि सरबजीत सिंह गिल पर धोखाधड़ी और चोरी से जुड़े 6 मामले दर्ज हैं। इधर, काल दोसांझ की पत्नी और सरी से पार्षद पद की उम्मीदवार सैंडी दोसांझ ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पुलिस घर पहुंची, उस समय उनकी बेटी सो रही थी और उनकी सास घर पर थीं, जबकि काल दोसांझ घर पर नहीं थे। उन्होंने कहा कि पुलिस ने बिना किसी पूर्व सूचना के उनके परिवार को घर से बाहर निकाल दिया। सैंडी ने कार्रवाई का संबंध उनके पार्षद चुनाव लड़ने से होने की आशंका भी जताई और कहा कि उन्होंने या उनके परिवार ने कोई अपराध नहीं किया, वे निर्दोष हैं। सरे स्थित घर पर पुलिस की छापेमारी पुलिस ने सरे में 129 स्ट्रीट और 59 एवेन्यू के पास स्थित काल दोसांझ के घर पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों को घर से दस्तावेजों से भरे कई बक्से बाहर ले जाते हुए देखा गया।ब्रिटिश कोलंबिया प्रॉसिक्यूशन सर्विस ने दोसांझ और सरबजीत सिंह गिल के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि की है। दोसांझ पर 9, साथी पर 6 केस दर्ज पुलिस के अनुसार, काल दोसांझ पर कुल 9 आपराधिक आरोप लगाए गए हैं। इनमें: वहीं, सरबजीत सिंह गिल पर धोखाधड़ी और चोरी से जुड़े कुल 6 मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, दोनों के खिलाफ दर्ज मामलों से जुड़े कथित अपराध 8 दिसंबर 2017 से 25 जुलाई 2025 के बीच हुए। ये मामले वैनकूवर, सरे और ब्रिटिश कोलंबिया के अन्य क्षेत्रों से जुड़े बताए गए हैं। रियल एस्टेट निवेश के नाम पर धोखाधड़ी का आरोप मामले से जुड़ी शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह कथित मामला एक बड़े निवेश घोटाले से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ लोगों से रियल एस्टेट में निवेश करने और उस पर भारी रिटर्न देने का वादा करके बड़ी रकम ली गई थी। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इन आरोपों को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। फगवाड़ा के पास गांव के रहने वाले हैं दोसांझ कुलविंदर सिंह उर्फ काल दोसांझ मूल रूप से पंजाब में फगवाड़ा के पास एक गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने करीब 20 वर्षों तक वैनकूवर पुलिस विभाग में सेवा दी है। पुलिस सेवा के अलावा वे सरे स्थित ‘किड्सप्ले फाउंडेशन’ से भी जुड़े हुए थे। यह संस्था युवाओं को अपराध और नशे से दूर रखने और उन्हें सकारात्मक अवसरों की ओर प्रेरित करने के लिए काम करती है। स्थानीय समुदाय में दोसांझ अपने सामाजिक और धर्मार्थ कार्यों के लिए भी पहचाने जाते थे। पत्नी सैंडी दोसांझ की बड़ी बातें… ************* ये खबर भी पढ़ें: कांग्रेस MLA ने CM की पत्नी का लीगल नोटिस फाड़ा: खैहरा बोले- जो चाहे कर लो, मैं जवाब नहीं दूंगा; रेप केस में ₹5 करोड़ रिश्वत के आरोपों का मामला पंजाब के CM भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा और अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को लीगल नोटिस भेजा है। नोटिस में दोनों से 24 घंटे के भीतर माफी मांगने को कहा गया है। नोटिस में कहा गया है कि अगर दोनों ने ऐसा नहीं किया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। (पढ़ें पूरी खबर)

ब्रिटेन पहुंचे मोहन भागवत, हिंदू संगठनों ने स्वागत किया:सरकार ने संसद में कहा- दौरा इमिग्रेशन नियमों की शर्तें पूरी करता है; पहले उठे थे सवाल

100 से ज्यादा ब्रिटिश हिंदू संगठनों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत का ब्रिटेन पहुंचने पर स्वागत किया। वे तीन देशों के दौरे के अंतिम चरण में गुरुवार को लंदन पहुंचे हैं। भागवत का दौरा संगठन की स्थापना के 100 साल पूरे होने के मौके पर चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय संपर्क अभियानों का हिस्सा है। इस दौरे के तहत वे अमेरिका और कनाडा भी जा चुके हैं। ब्रिटेन के सुरक्षा मंत्री डैन जार्विस ने गुरुवार को संसद में लिखित सवाल का जवाब देते हुए कहा कि भागवत की यात्रा देश के इमिग्रेशन नियमों की शर्तें पूरी करती है। दरअसल, ब्रिटिश-भारतीय सांसद नादिया व्हिटोम ने पिछले हफ्ते संसद में सवाल पूछा था कि कि क्या इस दौरे की पूरी समीक्षा नियमों के तहत की गई है मंत्री ने कहा- सभी लोगों को इमिग्रेशन नियम पूरे करने होंगे

मंत्री डैन जार्विस ने जवाब दिया कि गृह मंत्रालय व्यक्तिगत मामलों पर टिप्पणी नहीं कर सकता। हालांकि, मंत्रालय खतरों की पूरी श्रेणी से निपटने और हिंसा व व्यक्तियों तथा समुदायों के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देने वाले विचार फैलाने वालों पर कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, “ब्रिटेन में प्रवेश की मांग करने वाले सभी लोगों को इमिग्रेशन नियमों की शर्तें पूरी करनी होंगी।” 2018 में भी अमेरिका गए थे भागवत मोहन भागवत इससे पहले सितंबर 2018 में अमेरिका गए थे। उन्होंने शिकागो में 7 से 9 सितंबर 2018 तक आयोजित दूसरे वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस में हिस्सा लिया था। इस कार्यक्रम में 60 देशों से करीब 2,500 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। भागवत ने कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया था। 2018 के इस दौरे की उपलब्ध रिपोर्टों में भागवत की किसी अमेरिकी राजनयिक से मुलाकात या उन्हें किसी औपचारिक राजनयिक सम्मान दिए जाने का जिक्र नहीं मिलता। उनका दौरा मुख्य रूप से वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस और उससे जुड़े कार्यक्रमों पर केंद्रित था। —————————– ये खबर भी पढ़ें… न्यूयॉर्क में भागवत बोले- भारत के DNA में एकता-विविधता:हम अलग होकर भी एकदूसरे से जुड़े, गलत सोच इंसान को जानवरों के करीब ले जाती है RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 29 अगस्त करीब 42 मिनट स्पीच दी। पूरी खबर पढ़ें…

Manish Brahmbhatt: कॉकरोच जनता पार्टी में बगावत! जानिए कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट, अभिजीत दिपके से अलग होकर बनाई CJP-लोकतांत्रिक

Who is Manish Brahmbhatt: सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार (3 सितंबर) को नई राजनीतिक पार्टी ‘कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक (CJP-D)’ के गठन की घोषणा की। उन्होंने इसे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विकल्प के रूप में पेश किया। ब्रह्मभट्ट ने CJP के मुखिया अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाले पार्टी पर उस छात्र आंदोलन से दूर जाने का आरोप लगाया, जिससे यह संगठन उभरा था। ब्रह्मभट्ट ने पहले CJP की राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का विरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन अब आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी लोगों की मनमाने ढंग से चुनी गई टीम बन गया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल रहे स्वयंसेवकों तथा प्रदर्शनकारियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा है।

पीटीआई के मुताबिक ब्रह्मभट्ट ने कहा, “आज हम कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक की शुरुआत कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि नया मंच आंदोलन में शामिल रहे लोगों की सामूहिक ताकत को एकजुट करने का प्रयास करेगा। CJP की शुरुआत पहले एक ऑनलाइन व्यंग्य मंच के रूप में हुई थी। बाद में इसने पेपर लीक और एजुकेशन से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर दिल्ली में छात्रों के नेतृत्व में आंदोलन किया। इसके बाद संगठन ने देशभर में अपनी गतिविधियों का विस्तार करने की योजना की घोषणा की।

दीपके पर AAP से जुड़े होने का आरोप!

ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि CJP के नए नेतृत्व में आंदोलनकारियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी से जुड़े कई लोगों को इसमें शामिल किया गया। जबकि अन्य राजनीतिक दलों से जुड़े स्वयंसेवकों और प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले लोगों को बाहर रखा गया। ब्रह्मभट्ट ने सवाल किया, “आम आदमी पार्टी से जुड़े आठ लोगों को ही क्यों शामिल किया गया है?”

उन्होंने कहा कि शिवसेना, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस समेत विभिन्न दलों से जुड़े लोगों ने आंदोलन में हिस्सा लिया था। लेकिन नए संगठनात्मक ढांचे में उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। ब्रह्मभट्ट ने कहा कि उनके नेतृत्व वाला संगठन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए एक राष्ट्रीय टीम बनाने और फैसले लेने की प्रक्रिया में स्वयंसेवकों और प्रदर्शनकारियों को शामिल करने की कोशिश करेगा।

कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट?

सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट CJP आंदोलन से जुड़े प्रमुख वालंटियर और कोऑर्डिनेटर रहे हैं। चुनावी राजनीति में भी वे कोई नया चेहरा नहीं हैं। ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में बगावत’ करने वाले नेता के तौर पर उभरने से पहले ब्रह्मभट्ट ने 2022 का गुजरात विधानसभा चुनाव पालनपुर से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें 964 वोट (0.53%) मिले थे। वे पांचवें स्थान पर रहे थे। इस सीट से राज्य में सत्ताधारी BJP के अनिकेत गिरीशभाई ठाकर ने 95,588 वोट पाकर जीत दर्ज की थी।

पेशेवर और शैक्षणिक पृष्ठभूमि

‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ के ‘MyNeta’ प्लेटफॉर्म पर मौजूद ब्रह्मभट्ट के चुनावी हलफनामे के अनुसार, चुनाव के समय वे 37 साल के मैनेजमेंट कंसल्टेंट थे। उन्होंने हेमचंद्राचार्य नॉर्थ गुजरात यूनिवर्सिटी से B.Com और F.Y. LLB की पढ़ाई की है।

संपत्ति और विवाद से जुड़े मामले

चुनावी हलफनामे में उनकी घोषित संपत्ति लगभग 44.42 लाख रुपये थी। उन्होंने कोई देनदारी (कर्ज) नहीं बताई थी। उनके चुनावी हलफनामे में चार लंबित आपराधिक मामलों का भी जिक्र है। इनमें IPC की धारा 325 (जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना), 505(2) (समूहों के बीच दुश्मनी या नफरत फैलाने वाले बयान), 114 (अपराध के समय मौजूद रहकर उकसाना), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 153 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना), 501 (मानहानि करने वाली सामग्री छापना) और 502 के तहत आरोप शामिल हैं। हालांकि, ये मामले लंबित हैं। इनमें उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है।

CJP में विवाद और भूख हड़ताल की वजह!

बताया जा रहा है कि ब्रह्मभट्ट का हालिया राजनीतिक उभार जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हुए छात्र-युवा आंदोलन से हुआ। विवाद तब शुरू हुआ जब अगस्त में CJP ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी और शीर्ष नेतृत्व का ऐलान किया। इसमें अभिजीत दीपके को राष्ट्रीय संयोजक, जबकि सौरव दास और आशुतोष रांका को सह-संयोजक बनाया गया। ब्रह्मभट्ट का दावा है कि इस आंदोलन से करीब 450 कोऑर्डिनेटर जुड़े थे। लेकिन 12 सदस्यीय कोर टीम बनाते समय जमीनी कार्यकर्ताओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

अगस्त में जब दीपके ने अपने आवास पर कोर टीम की बैठक बुलाई, तो ब्रह्मभट्ट अपने साथी राहुल पांड्या के साथ विरोध दर्ज कराने पहुंचे थे। इस फैसले में प्रतिनिधित्व न मिलने पर कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। हेल्थ बिगड़ने पर ब्रह्मभट्ट और पांड्या को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। उन्होंने कहा कि मूल आंदोलन देश का था। यह इसलिए सफल हुआ क्योंकि लोगों ने इसमें अपना खून-पसीना लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन की सफलता के बाद इसे बेच दिया गया।

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अमेरिका में $1 के सिक्के पर ट्रम्प की तस्वीर:250वीं वर्षगांठ पर जारी हुआ, बिक्री शुरू होने के कुछ घंटे बाद आउट ऑफ स्टॉक

अमेरिका ने अपनी 250वीं वर्षगांठ के मौके पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर वाला $1 का खास सिक्का जारी किया है। अमेरिकी मिंट ने बुधवार दोपहर 12 बजे इसकी बिक्री शुरू की। बिक्री शुरू होने के कुछ घंटे बाद ही सिक्का आउट ऑफ स्टॉक हो गया। दोपहर करीब 3 बजे अमेरिकी मिंट की वेबसाइट पर 25 सिक्कों का रोल उपलब्ध नहीं था। वहीं, 100 सिक्कों का बैग भी आउट ऑफ स्टॉक दिख रहा था। सिक्के के एक तरफ ट्रम्प की तस्वीर है। इसके साथ ‘IN GOD WE TRUST’ और ‘LIBERTY’ लिखा है। दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति की मुहर और अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के लिए ‘250’ लिखा गया है। 25 सिक्कों के रोल की कीमत 61 डॉलर अमेरिकी मिंट के मुताबिक, 25 सिक्कों के रोल की कीमत 61 डॉलर और 100 सिक्कों के बैग की कीमत 154.50 डॉलर है। बिक्री शुरू होने के करीब आधे घंटे बाद ही वेबसाइट पर लोगों को वेटिंग एरिया में भेजा जाने लगा। वहां करीब 1 घंटे का वेटिंग टाइम बताया गया। गुरुवार दोपहर 2 बजे तक एक परिवार अधिकतम 2 खरीदारी कर सकता था। अमेरिकी मिंट ने बताया कि 2.5 लाख सिक्कों को खास ‘4 जुलाई’ निशान के साथ रैंडम तरीके से रोल और बैग में रखा गया है। ये सिक्के 4 जुलाई को बनाए गए थे। अमेरिका में इसी दिन स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। 1926 के बाद पहली बार जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर अमेरिकी मिंट के मुताबिक, इससे पहले किसी जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर 1926 में सिक्के पर दिखाई गई थी। उस समय राष्ट्रपति कैल्विन कूलिज की तस्वीर अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा पर हस्ताक्षर की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर जारी आधे डॉलर के सिक्के पर लगाई गई थी। अमेरिकी कानून के तहत किसी जीवित राष्ट्रपति या जीवित पूर्व राष्ट्रपति की तस्वीर सिक्के पर लगाना प्रतिबंधित है। हालांकि, अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के लिए कांग्रेस नेसर्कुलेटिंग कलेक्टिबल कॉइन रीडिजाइन एक्ट पास किया। इसके तहत ट्रेजरी को इस अवसर पर खास $1 के सिक्के जारी करने की अनुमति मिली। कानून में यह भी कहा गया है कि सिक्के के पीछे वाले हिस्से पर किसी जीवित व्यक्ति का पोर्ट्रेट नहीं हो सकता। ट्रम्प की तस्वीर सिक्के के आगे वाले हिस्से पर है, इसलिए इसे कानून के मुताबिक माना गया है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… नीदरलैंड्स ने अमेरिका-कनाडा से 86 टन सोना हटाकर लंदन भेजा:बैंक ऑफ इंग्लैड में रखा, कहा- संकट आने पर यहां आसानी से बेच सकेंगे नीदरलैंड्स ने अमेरिका और कनाडा में रखा अपना 86 टन सोना निकालकर लंदन भेज दिया है। डच सेंट्रल बैंक (DNB) के मुताबिक, यह ट्रांसफर मार्च से अगस्त के बीच कई महीनों में किया गया। अब यह सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखा गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

H-1B वीजा भारतीय प्रोफेशनल्स पर नया संकट मंडराया:अमेरिका में जॉब छूटी, 10 हजार भारतीय लौटे; पिछले साल से दोगुने

अमेरिका में भारतीय प्रोफेशनल्स की लाइफलाइन यानी H-1B वीजा पर नया संकट मंडरा रहा है। अमेरिका में छंटनी के दौर में लगभग 10 हजार भारतीय प्रोफेशनल्स को जॉब छूटने के बाद भारत लौटना पड़ा है। क्योंकि 60 दिन के ग्रेस पीरियड में भी उन्हें नई नौकरी नहीं मिल पाई। अमेरिकी सिजिटनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेस (यूएससीआईएस) के इस साल की पहली छमाही के आंकड़ों में ये खुलासा हुआ है। इसकी तुलना में पिछले साल भर में लगभग 5100 भारतीय प्रोफेशनल्स को अमेरिका छोड़ना पड़ा था। ओवरस्टे करने पर कार्रवाई होगी अमेरिका में H-1B वीजा पर प्रोफेशनल्स को नई जॉब के लिए 60 दिन के दौरान नया एम्प्लॉयर खोजने का समय मिलता है। इस दौरान काम नहीं कर सकता है। इसके बावजूद यदि कोई ओवरस्टे करता है तो कड़ी कार्रवाई होती है। रिमूवल प्रोसीडिंग्स जैसे डिपोर्ट किया जा सकता है। इसके बाद अमेरिका में री-एंट्री बैन भी लग सकता है। 60 दिन की मोहलत खत्म करने पर अड़े ट्रम्प राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प H-1B वीजा पर सख्त रवैया अपनाए हुए हैं। 60 दिन में नई नौकरी खोजने की मोहलत के प्रावधान को भी खत्म करने वाले बिल पर अड़े हुए हैं। उन्होंने इस प्रावधान को खत्म करने वाले बिल को मंजूरी दे दी है। बिल पर आगे क्या होगा? बिल को अमेरिकी कांग्रेस में रखा जाएगा। इसमें ट्रम्प को बहुमत है, लेकिन ट्रम्प के कट्‌टरपंथी समर्थक इसे पास कराने पर अड़े हुए हैं। ये सभी प्रवासी विरोधी हैं। बिल पास होने पर क्या होगा? बिल पास हुआ तो H-1B धारकों को जॉब छूटते ही अमेरिका को छोड़कर जाना होगा। 60 दिन तक नौकरी ढूंढने की मोहलत खत्म कर दी जाएगी। H-1B संसद की मंजूरी से लाया गया है, इसलिए ट्रम्प इसे संसद से ही नए बिल के जरिए पलट सकते हैं। कोर्ट में चुनौती संभव है? H-1B वीजा में 60 दिन की मोहलत वाले प्रावधान को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। ट्रम्प के पहले के आदेश जैसे टैरिफ और जन्मजात नागरिकता जैसे मनमाने आदेशों को कोर्ट पलट चुका है। भारतीय नए देश तलाशेंगे? भारतीय प्रोफेशनल्स कनाडा, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का रुख करने भी लगे हैं। ये सभी देश आसान शर्तों पर प्रोफेशनल वीजा जारी भी कर रहे हैं। ————————– अमेरिका में 2 लाख विदेशियों के वीजा रद्द होंगे: इतिहास में पहली बार एक साथ इतने वीजा कैंसिल होंगे अमेरिकी सरकार 2 लाख विदेशी नागरिकों के बिजनेस (B1) और टूरिस्ट वीजा (B2) रद्द करने की तैयारी कर रही है। पूरी खबर पढ़ें…

H-1B वीजा पर भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए नया संकट:नौकरी गई तो 60 दिन की मोहलत भी खत्म हो सकती है, अमेरिका छोड़ना पड़ेगा

अमेरिका में भारतीय प्रोफेशनल्स की लाइफलाइन माने जाने वाले H-1B वीजा पर नया संकट मंडरा रहा है। अमेरिका में चल रही छंटनी के बीच इस साल की पहली छमाही में करीब 10 हजार भारतीय प्रोफेशनल्स को नौकरी जाने के बाद अमेरिका छोड़कर भारत लौटना पड़ा। इन्हें 60 दिन के ग्रेस पीरियड में नई नौकरी नहीं मिल पाई। अमेरिकी सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेस (USCIS) के इस साल की पहली छमाही के आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है। इसकी तुलना में पूरे 2025 में करीब 5,100 भारतीय प्रोफेशनल्स को अमेरिका छोड़ना पड़ा था। यानी इस साल सिर्फ छह महीने में यह संख्या पिछले पूरे साल के मुकाबले लगभग दोगुनी हो गई। नौकरी जाने पर अभी 60 दिन का समय H-1B वीजा पर काम कर रहे किसी प्रोफेशनल की नौकरी चली जाती है तो मौजूदा नियमों के तहत उसे अधिकतम 60 दिन का ग्रेस पीरियड मिलता है। इस दौरान वह नया एम्प्लॉयर तलाश सकता है और अपना H-1B स्टेटस बनाए रखने की कोशिश कर सकता है। अगर इस अवधि में नई नौकरी नहीं मिलती तो उसे अमेरिका में रहने का वैध आधार खत्म होने से पहले देश छोड़ना पड़ सकता है। तय अवधि खत्म होने के बाद भी अमेरिका में रुके रहना ओवरस्टे माना जा सकता है। ऐसे मामले में इमिग्रेशन अधिकारियों की कार्रवाई हो सकती है। इसमें रिमूवल प्रोसीडिंग्स यानी देश से निकाले जाने की कार्रवाई और कुछ परिस्थितियों में अमेरिका में दोबारा प्रवेश पर रोक भी शामिल हो सकती है। ट्रम्प 60 दिन की मोहलत खत्म करने पर अड़े राष्ट्रपति ट्रम्प H-1B वीजा को लेकर सख्त रुख अपना रहे हैं। अब 60 दिन के ग्रेस पीरियड को खत्म करने की कोशिश भी इसी नीति का हिस्सा बताई जा रही है। ट्रम्प प्रशासन की ओर से इस प्रावधान को खत्म करने वाले बिल को मंजूरी दी गई है। अगर यह कानून बनता है तो H-1B धारकों के लिए नौकरी जाने के बाद नई नौकरी तलाशने की मौजूदा 60 दिन की सुविधा खत्म हो सकती है। बिल पर आगे क्या होगा? बिल को अमेरिकी कांग्रेस में रखा जाएगा। वहां इसे पास कराने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। रिपब्लिकन पार्टी के पास कांग्रेस में बहुमत है, लेकिन बिल को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग राय हो सकती है। ट्रम्प के कट्टर समर्थक H-1B व्यवस्था को और सख्त करने और प्रवासियों की संख्या कम करने की मांग करते रहे हैं। बिल पास होने के बाद ही यह साफ होगा कि मौजूदा 60 दिन की व्यवस्था पूरी तरह खत्म होगी या इसमें कोई बदलाव किया जाएगा। कोर्ट में चुनौती संभव अगर ग्रेस पीरियड खत्म करने वाला कानून या उससे जुड़ा सरकारी आदेश लागू होता है तो उसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है। ट्रम्प प्रशासन के इमिग्रेशन से जुड़े कई फैसले पहले भी अदालतों तक पहुंचे हैं। जन्मजात नागरिकता समेत कुछ आदेशों को लेकर सरकार को कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ा है। हालांकि H-1B के 60 दिन वाले प्रावधान को खत्म करने वाले किसी नए कानून को अदालत किस आधार पर और किस हद तक रोक सकती है, यह उसके अंतिम स्वरूप और कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगा। कनाडा-जर्मनी जैसे देशों का रुख कर रहे भारतीय H-1B को लेकर बढ़ती सख्ती के बीच भारतीय प्रोफेशनल्स दूसरे देशों के विकल्प भी तलाश रहे हैं। कनाडा, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में प्रोफेशनल्स के लिए अलग-अलग वीजा और इमिग्रेशन प्रोग्राम मौजूद हैं। अगर अमेरिका में नौकरी जाने के बाद H-1B धारकों के रुकने की मौजूदा सुविधा खत्म होती है, तो इन देशों का आकर्षण भारतीय टेक प्रोफेशनल्स और दूसरे हाई-स्किल्ड वर्कर्स के लिए बढ़ सकता है। इसका असर सिर्फ उन लोगों पर नहीं पड़ेगा, जो अभी अमेरिका में काम कर रहे हैं। अमेरिका में नौकरी करने की तैयारी कर रहे हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स को भी अपना करियर प्लान बदलना पड़ सकता है। ————————– अमेरिका में 2 लाख विदेशियों के वीजा रद्द होंगे: इतिहास में पहली बार एक साथ इतने वीजा कैंसिल होंगे अमेरिकी सरकार 2 लाख विदेशी नागरिकों के बिजनेस (B1) और टूरिस्ट वीजा (B2) रद्द करने की तैयारी कर रही है। पूरी खबर पढ़ें…

सीएम डॉ. मोहन यादव ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, कहा एमपी आएं तो अपने कांग्रेस के शासनकाल का हिसाब भी जनता को बताएं

सीएम डॉ. मोहन यादव ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, कहा एमपी आएं तो अपने कांग्रेस के शासनकाल का हिसाब भी जनता को बताएं

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा। सीएम डॉ. मोहन यादव ने एक ओर राहुल का प्रदेश में स्वागत किया, तो वहीं दूसरी ओर उनसे यह भी कहा कि वे उनकी पार्टी का सारा हिसाब-किताब जनता को बताएं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वर्षों तक देश की जनता के साथ अन्याय किया। इसके लिए उसे देश से माफी मांगनी चाहिए। 

 

राजधानी भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मुझे मालूम पड़ा है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मध्यप्रदेश आने वाले हैं। मध्यप्रदेश की धरती पर उनका स्वागत है। राहुल गांधी, आप जनता के बीच आइए। लेकिन, यहां आने के साथ अपने अतीत के शासनकाल का हिसाब भी जनता के सामने रखिए। आपके परनाना, आपकी दादी और आपके पिता ने लंबे समय तक दिल्ली में बैठकर देश की सरकार चलाई। उनके शासनकाल में राज्य के भीतर जो परिस्थितियां उत्पन्न हुईं और जनता को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ा, उन सबके लिए भी आपको जनता के सामने जवाब देना चाहिए। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की जनता जागरूक है। वह इतिहास को भी जानती है और वर्तमान को भी समझती है। इसलिए आप मध्यप्रदेश आइए, जनता के बीच और अपने परिवार के लंबे शासनकाल की गलतियों के लिए जनता से माफी मांगिए। मध्यप्रदेश आपका इंतजार कर रहा है।

 

कांग्रेस शासनकाल में बदतर थी हालत-कांग्रेस ने अपने कार्यकाल के दौरान स्कूली छात्रों को लैपटॉप, साइकल समेत कोई सुविधा नहीं दी। कांग्रेस के शासनकाल में 26 जनवरी-15 अगस्त के लड्डू के लिए भी छात्र तरस जाते थे। कांग्रेस नेताओं को युवाओं से माफी मांगनी चाहिए। मध्यप्रदेश 1956 में बना। 1956 से लेकर 2002-03 तक राज्य का बजट समग्र रूप से 20 हजार करोड़ का था। शिक्षा विभाग के हाल थे कि वह शिक्षकों के लिए 300 रुपये का पैटर्न लाया। प्रदेश में आजादी के बाद 55 साल में केवल केवल 5 मेडिकल कॉलेज थे। यह प्रदेश में शिक्षा की हालत थी।

चीन ने युद्ध की तैयारी के लिए बदला रक्षा कानून:आम लोगों के संसाधन इस्तेमाल कर सकेगी सरकार; 1 अक्टूबर से लागू होंगे नए नियम

चीन ने अपने रक्षा कानून में बड़ा बदलाव किया है। अब युद्ध या बड़े संकट के समय सरकार सिर्फ सेना पर निर्भर नहीं रहेगी। जरूरत पड़ने पर आम लोगों, निजी कंपनियों और देश के दूसरे संसाधनों का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। चीन की संसद (नेशनल पीपुल्स कांग्रेस) ने 28 अगस्त को राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून में बदलाव को मंजूरी दी। नया कानून 1 अक्टूबर से लागू होगा। नए कानून में सिर्फ संसाधन लेने की ही नहीं, उन्हें सरकार के कब्जे में लेने की व्यवस्था भी है। आदेश मानने से इनकार या जानबूझकर देरी करने पर कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान है। 2010 के बाद पहली बार कानून में बड़ा बदलाव राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून 2010 में बनाया गया था। अब पहली बार इसमें बड़ा बदलाव किया गया है। नए कानून में 14 अध्याय और 82 अनुच्छेद हैं। चीन के मुताबिक, इसका मकसद यह है कि किसी खतरे के समय देश शांति से युद्ध की स्थिति में तेजी से जा सके। इसके लिए आर्थिक और सामाजिक ताकत को भी रक्षा के काम में लगाया जा सकेगा। नए कानून में देश की संप्रभुता, एकता, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा के साथ ‘विकास हितों’ की रक्षा को भी शामिल किया गया है। कम्युनिस्ट पार्टी तय करेगी, कब और कैसे जुटेंगे संसाधन अमेरिका के जेम्सटाउन फाउंडेशन की विशेषज्ञ सामंथा हॉफमैन के मुताबिक, नए कानून में पार्टी के नेतृत्व, संगठन, रिजर्व फोर्स, भर्ती, जरूरी सामान के भंडार और रक्षा से जुड़ी शिक्षा जैसे क्षेत्रों में बदलाव किए गए हैं। कानून के अनुच्छेद 3 और 16 में राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी की व्यवस्था को कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के अधीन किया गया है। पहले इसमें स्टेट काउंसिल और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन की प्रमुख भूमिका थी। हॉफमैन के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर पार्टी सैन्य, नागरिक, आर्थिक और सामाजिक संसाधनों को एक साथ जुटाकर अपने रणनीतिक लक्ष्यों के लिए इस्तेमाल कर सकती है। अस्पताल, इंटरनेट और ट्रांसपोर्ट को भी तैयार रहना होगा नए कानून के मुताबिक परिवहन, डाक, दूरसंचार, साइबर सुरक्षा, चिकित्सा और दवा आपूर्ति, खाद्य और अनाज आपूर्ति और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों को राष्ट्रीय रक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार रहना होगा। इन क्षेत्रों की इकाइयों को विशेष टीमें बनानी होंगी। उन्हें ट्रेनिंग भी दी जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर वे तुरंत काम कर सकें। साइबर सुरक्षा को खास तौर पर शामिल किया गया है। कानून में नई और उन्नत तकनीकों के इस्तेमाल से रक्षा क्षमता बढ़ाने की बात भी कही गई है। रिजर्व फोर्स तैयार करने, भर्ती व्यवस्था मजबूत करने और रणनीतिक रूप से जरूरी सामान का भंडार बढ़ाने के भी प्रावधान हैं। अब चीन में विकास भी राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा 2010 के कानून में चीन की संप्रभुता, एकता, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा को खतरा होने पर रक्षा व्यवस्था सक्रिय करने की बात थी। अब इसमें ‘विकास हितों’ को भी शामिल कर दिया गया है। यानी चीन के लिए खतरा सिर्फ सीमा या देश की सुरक्षा से जुड़ा नहीं होगा। अर्थव्यवस्था, जरूरी संसाधनों तक पहुंच, विदेशों में मौजूद चीनी संपत्तियां और तकनीकी विकास से जुड़े हित भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा माने जा सकते हैं। जेम्सटाउन फाउंडेशन की विशेषज्ञ सामंथा हॉफमैन के मुताबिक, यह बदलाव 2020 में संशोधित चीन के राष्ट्रीय रक्षा कानून से भी जुड़ा है। उस कानून में भी देश के विकास हितों को खतरा होने पर रक्षा लामबंदी शुरू करने की व्यवस्था की गई थी। खबर अपडेट हो रही है…