Mohan Bhagwat: ‘सिर्फ सत्ता बदलने से समस्याएं खत्म नहीं होतीं’, फ्रांस-बांग्लादेश के हालात का जिक्र कर बोले मोहन भागवत

Mohan Bhagwat: देश में हाल के दिनों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि “भारत को कमजोर करने” की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इन कोशिशों को “कुछ ऐसे तत्वों का समर्थन मिल रहा है, जो अपनी निजी महत्वाकांक्षाओं से प्रेरित हैं।”

RSS के विजयादशमी समारोह में, फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल में चल रही अशांति की ओर इशारा करते हुए RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, “कुछ पश्चिमी ताकतें समाजों को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं। फ्रांस और अल्बानिया में जो हो रहा है, उसे देखिए; साथ ही बांग्लादेश और नेपाल के घटनाक्रमों पर भी नजर डालिए। बाहरी प्रभाव इस तरह की अशांति को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसमें सत्ता परिवर्तन की बातें भी शामिल हैं। लेकिन, केवल सत्ता परिवर्तन से किसी देश की समस्याएं हल नहीं हो जातीं।”

भागवत ने आगे कहा, “भारत और संघ को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं। पिछले एक दशक में, भारत ने अनुशासित तरीके से प्रगति की है, और कुछ ऐसी ताकतें हैं जो इस प्रगति में बाधा डालना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी कोशिशों को कुछ ऐसे तत्वों का साथ मिल रहा है, जो अपनी निजी महत्वाकांक्षाओं से प्रेरित हैं।”

भागवत ने आरोप लगाया कि दुनिया भर में इस तरह की गतिविधियां चलाई जाती हैं, ताकि अपने स्वार्थ साधने वाले लोग और उनके “मोहरे” अपना दबदबा बनाए रखें। उन्होंने कहा कि भारत की तरक्की इन कोशिशों के आड़े आती है।

उन्होंने कहा कि “असली समस्या यह है कि समाज को इन चुनौतियों को समझने की जरूरत है। लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन एक अहम हिस्सा हैं, लेकिन विरोध का मकसद समस्याओं का समाधान खोजना होना चाहिए, न कि समाज में और ज्यादा बंटवारा पैदा करना।”

बता दें कि RSS प्रमुख की यह टिप्पणी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार की नियुक्ति में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच आई है।

भागवत ने की युवाओं की तारीफ

अपने संबोधन के दौरान भागवत ने देश और दुनिया के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का श्रेय भारत की युवा पीढ़ी को दिया। उन्होंने कहा कि समाज के भीतर हुए इस प्रयास ने इन ताकतों के कथित मंसूबों को नाकाम कर दिया है।

एक विकासशील देश में विरोध-प्रदर्शनों और आंदोलनों के बारे में बात करते हुए, RSS प्रमुख ने कहा कि समस्याएं बनी रहेंगी क्योंकि भारत अभी पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “अगर समस्याएं हैं, तो आंदोलन भी होंगे। लोकतंत्र में आंदोलन तो होंगे ही।”

मोहन भागवत ने हाल ही में हुई ‘फ्लाईदुबई’ (Flydubai) घटना का भी जिक्र किया, उन्होंने कहा, “RSS हिंदू चेतना को जगाने और पूरे समाज को एक सुसंगठित और मजबूत समाज के रूप में ढालने का काम कर रहा है… इन्हीं मूल्यों ने कैप्टन स्मित मच्छार को वह करने के लिए प्रेरित किया, जो उन्होंने किया…”

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INDIA Bloc Protest: CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर आर-पार की लड़ाई, INDIA गठबंधन आज सुप्रीम कोर्ट तक करेगा मार्च

INDIA Bloc Protest: INDIA गठबंधन सोमवार, 12 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी में एक नया विरोध प्रदर्शन करने जा रहा है। यह विरोध चुनाव में कथित गड़बड़ियों, वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा है।

इससे पहले विपक्षी गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने और इस मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत से हस्तक्षेप करने की मांग करने की योजना बनाई थी। माना जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस पहल की अगुवाई करेंगे।

हालांकि, CJI ने विपक्ष के नेताओं की मुलाकात की मांग को ठुकरा दिया है। उन्होंने कहा कि चूंकि यह मामला पहले से ही अदालत में विचाराधीन है, इसलिए उन्हें याचिका दायर करके अदालत का रुख करना चाहिए।

इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, नेताओं को ईमेल के जरिए एक विस्तृत जवाब भेजा गया, जिसमें इस फैसले के पीछे की वजहें बताई गई थीं। इस जवाब में कहा गया कि इन आरोपों पर प्रशासनिक स्तर पर बात करने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के जरिए बेहतर ढंग से विचार किया जा सकता है।

बता दें कि यह प्रस्तावित प्रदर्शन, दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लिए जाने, भारी सुरक्षा तैनाती और हिंसा के आरोपों के एक दिन बाद हो रहा है।

वहीं, कांग्रेस ने प्रस्तावित आंदोलन को देखते हुए अपने सांसदों से सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद रहने को कहा है।

राहुल गांधी ने केंद्र पर युवाओं को दबाने का आरोप लगाया

INDIA गठबंधन के अगले दौर के विरोध प्रदर्शनों की घोषणा करते हुए, राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए पिछले प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस और BJP कार्यकर्ताओं ने छात्रों और महिलाओं के खिलाफ हिंसा की थी।

शनिवार को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट किए, जिसमें उन्होंने ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दिल्ली पुलिस पर “गुंडागर्दी” करने और RSS-BJP कार्यकर्ताओं को प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने की छूट देने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “अमित शाह की दिल्ली पुलिस ने न केवल खुद गुंडागर्दी की है, बल्कि RSS-BJP के असली गुंडों को महिलाओं और युवाओं के खिलाफ हिंसा करने के लिए खुली छूट और बढ़ावा भी दे रही है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘मोगैंबो’ (फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ में अमरीश पुरी का निभाया मशहूर विलेन का किरदार) कहकर संबोधित करते हुए गांधी ने कहा कि युवाओं को दबाने की कोशिशों से उनका गुस्सा और बढ़ेगा।

12 अक्टूबर को होने वाले विरोध प्रदर्शन की घोषणा करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “सोमवार, 12 अक्टूबर को कांग्रेस, पूरा INDIA गठबंधन और देश के युवा एक बार फिर बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरेंगे। और इस बार भी, यह आवाज पूरे देश में गूंजेगी – पहले से कहीं ज्यादा जोरदार तरीके से।”

गांधी ने प्रधानमंत्री पर चुनावी गड़बड़ियों और असहमति की आवाज को दबाकर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप भी लगाया।

दिल्ली के हालात के बारे में बताते हुए उन्होंने लिखा, “आज नई दिल्ली में यह नजारा देखने को मिला: पूरा शहर बंद है, इंटरनेट बंद कर दिया गया है, और पुलिस व बीजेपी के गुंडे छात्रों की पिटाई कर रहे हैं।”

राहुल गांधी ने दावा किया कि विपक्ष ने प्रधानमंत्री को घेर लिया है और कहा कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों पर कथित तौर पर हमला हुआ, उन्हें न्याय मिलेगा।

उन्होंने कहा, “आज जिन युवाओं और छात्रों पर हमला हुआ, उन्हें न्याय मिलेगा और हमलावरों को माकूल जवाब दिया जाएगा।” साथ ही उन्होंने कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

CJI ने INDIA ब्लॉक के नेताओं की मुलाकात की अपील ठुकराई

बता दें कि विपक्षी नेताओं ने सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत से मिलने की योजना बनाई थी। वे उनसे मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे। इसमें कथित ‘वोट चोरी’, वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ी चिंताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर दखल देने की अपील की जानी थी।

हालांकि, CJI ने यह कहते हुए मुलाकात की अपील ठुकरा दी कि यह मामला पहले से ही अदालत में विचाराधीन है। उन्होंने नेताओं को सलाह दी कि वे याचिका के जरिए अदालत का दरवाजा खटखटाएं।

इससे पहले विपक्षी गठबंधन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी एक ज्ञापन सौंपा था, जिसमें चुनावी प्रक्रिया को लेकर ऐसी ही चिंताएं जताई गई थीं।

दिल्ली में बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लिए जाने के बाद INDIA ब्लॉक का विरोध प्रदर्शन

यह प्रस्तावित मार्च शनिवार को दिल्ली में की गई कड़ी सुरक्षा कार्रवाई के बाद हो रहा है, जब अधिकारियों ने CEC के खिलाफ प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया था।

विपक्षी नेताओं और CJP समर्थकों ने आरोप लगाया कि हिरासत में लेना गैर-कानूनी था, जबकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए एहतियातन गिरफ्तारियां की गई थीं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को कई जगहों पर करीब 7,000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था और बाद में उन सभी को रिहा कर दिया गया।

हिरासत में लिए गए लोगों में AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, CPI(M) नेता पिनाराई विजयन और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार शामिल थे।

कार्यकर्ताओं के आरोपों के मुताबिक, CJP के नेता अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को भी विमान से उतारने के बाद हिरासत में लिया गया था।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार की शर्त पर 50,000 रुपये का बेल बॉन्ड और जमानतदार का बॉन्ड जमा करने के बाद तीनों को रिहा कर दिया गया।

हालांकि, तीनों नेताओं ने अपनी हिरासत को गैरकानूनी बताया। उन्होंने कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

आशुतोष रंका ने कहा, “हम कोई खतरनाक अपराधी नहीं हैं; हम विरोध करने के लिए नरेंद्र मोदी या अमित शाह के घर नहीं जा रहे हैं। तय जगह पर विरोध करने से शांति भंग नहीं होती।”

सौरव दास ने SIR के मुद्दे पर राजनीतिक एकजुटता की अपील करते हुए कहा: “विचारधारा से परे, सभी राजनीतिक दलों को SIR के मुद्दे पर एकजुट होना चाहिए। अगर वोट देने का अधिकार छीन लिया जाता है, तो यह किसी भी पार्टी के लिए अच्छा नहीं है।”

सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को सामान्य सेवाएं जारी रखने का निर्देश दिया

विरोध प्रदर्शनों के दौरान लगाई गई पाबंदियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। यह नोटिस मेट्रो और ट्रेन सेवाओं के संबंध में कोर्ट के निर्देशों के कथित उल्लंघन पर अवमानना ​​की कार्यवाही की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया गया।

बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि दिल्ली मेट्रो अपने सामान्य शेड्यूल के अनुसार चले और कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए इंटरनेट सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी रहें।

कोर्ट ने यह भी कहा कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य लोगों को उनके पेशेवर कर्तव्यों का पालन करने से नहीं रोका जाना चाहिए।

बता दें कि दिल्ली मेट्रो ने रविवार को सामान्य कामकाज फिर से शुरू कर दिया, हालांकि मुख्य रास्तों पर भारी बैरिकेडिंग अभी भी जारी थी।

प्रदर्शनकारी कई जगहों पर इकट्ठा हुए और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी की। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस की बसों में बैठाकर ले जाते हुए भी देखा गया।

जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे लोगों में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और क्रांतिकारी युवा संगठन (KYS) जैसे छात्र संगठनों के सदस्य भी शामिल थे। इन सभी को हिरासत में लिया गया।

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‘Gyanesh, it’s done bro…’ का नारा लगाते बैरिकेड पर चढ़े राहुल गांधी; अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी सांसद डिटेन

Rahul Gandhi-India Bloc EC March: देश की राजधानी में मंगलवार को विपक्षी INDIA गठबंधन ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की अगुआई में दर्जनों विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार से चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर विरोध मार्च निकाला। सुरक्षा बलों ने इस मार्च को संसद मार्ग पर ही नीति आयोग और आकाशवाणी भवन के बीच भारी बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।

बैरिकेड पर चढ़े राहुल गांधी, बोले- ‘ज्ञानेश, अब बहुत हुआ!’

सुरक्षा बलों द्वारा रास्ता रोके जाने पर माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। इसी दौरान राहुल गांधी प्रदर्शनकारियों के बीच लगे बैरिकेड्स पर चढ़ गए और हाथों में तिरंगा लहराते हुए सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मुख्य चुनाव आयुक्त को संबोधित करते हुए लिखा, ‘Gyanesh it’s done bro. Time to resign’ यानी ज्ञानेश, अब बहुत हो गया ब्रो! अब इस्तीफा देने का समय आ गया है।

इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, पवन खेड़ा और केसी वेणुगोपाल आकाशवाणी भवन के गेट तक पहुंच गए, जहां से पुलिस ने राहुल और प्रियंका गांधी को हिरासत में ले लिया।

सड़क पर ही धरने पर बैठे सांसद, कई बड़े चेहरे हिरासत में

बैरिकेडिंग के पास मार्च रुकने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता अभिषेक बनर्जी व डेरेक ओ’ब्रायन और सीपीआई (एम) के जॉन ब्रिटास समेत तमाम सांसद सड़क पर ही धरने पर बैठ गए।

सांसदों ने हाथों में तख्तियां और पोस्टर ले रखे थे, जिनमें सीईसी ज्ञानेश कुमार को संघ (RSS) की गणवेश में दिखाया गया था। सांसदों ने ‘भाजपा है CEC है’, ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ और ‘लोकतंत्र बिकाऊ नहीं है’ जैसे तीखे नारे लगाए। बाद में पुलिस ने अखिलेश यादव और अभिषेक बनर्जी समेत कई नेताओं को बसों में भरकर हिरासत में ले लिया।

पैरामिलिट्री फोर्स तैनात, संजय राउत ने उठाए सवाल

विपक्ष के मार्च को देखते हुए संसद भवन और चुनाव आयोग मुख्यालय के आसपास तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था और भारी बैरिकेडिंग की गई थी। शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने इस भारी सुरक्षा बल की तैनाती पर तीखा हमला बोला।

संजय राउत ने कहा, ‘हम सांसद हैं, इस देश के जिम्मेदार नागरिक हैं। हमें रोकने के लिए इतनी बड़ी तादाद में सुरक्षा बल तैनात करने की क्या ज़रूरत थी? हम निहत्थे हैं और शांतिपूर्वक पैदल जा रहे थे।’ राउत ने यह भी दावा किया कि मौके पर बीएसएफ और सीआईएसएफ के जवानों को तैनात किया गया था और केंद्रीय मंत्रियों के आवासों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई थी।

क्या है विवाद की वजह?

विपक्ष का यह भारी विरोध प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के बाद सामने आया है, जो सोमवार को मतदाता नामांकन से जुड़े ‘फॉर्म 6’ (Form 6) को लेकर की गई थी। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि उसने फॉर्म 6 के किसी भी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है और वह चुनाव आयोग के रिकॉर्ड की जांच करेगी कि क्या नियमों में बदलाव किए गए थे और इसकी अनुमति किसने दी थी।

इसी मुद्दे पर चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को एक बयान जारी कर कहा था कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म 6 के साथ जोड़े गए घोषणापत्र को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के रुख को लेकर देश को गुमराह किया है।

‘वोट चोरी देशद्रोह है…’, चुनाव आयोग और भाजपा पर भड़के राहुल गांधी,कहा- बख्शे नहीं जाओगे

'वोट चोरी देशद्रोह है...', चुनाव आयोग और भाजपा पर भड़के राहुल गांधी,कहा- बख्शे नहीं जाओगे

rahul gandhi attacks BJP and EC on SIR

मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मचे घमासान और मतभेदों की रिपोर्ट सामने आने के बाद देश की सियासत गरमा गई है। इस खुलासे के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए चुनाव आयोग, भाजपा और आरएसएस पर करारा हमला बोला है। उन्होंने सीधे तौर पर ‘वोट चोरी’ को देश की जनता के खिलाफ अपराध और ‘देशद्रोह’ करार दिया है। ALSO READ: चुनाव आयोग में आंतरिक कलह? दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार दर्ज कराई आपत्तियां, विपक्ष ने उठाए सवाल

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि वोट चोरी भारतीय जनता के खिलाफ अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है। इसे आयोजित करने वाले भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग ने देशद्रोह का कृत्य किया है। न्याय जरूर मिलेगा।

10 माह में 14 बार आपत्ति

गौरतलब है कि इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर  पर कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्ति जताई।

 

सफाई में क्या बोला चुनाव आयोग?

इस मामले पर चुनाव आयोग ने सफाई देते हुए कहा है कि ECI में मतभेदों के बावजूद सर्वसम्मति से फैसले लिए जाते हैं। कई मीडिया खबरों में मामले की सीधी जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया कि किसी भी चुनाव आयुक्त ने कोई असहमति नहीं जताई। उन्होंने केवल कुछ टिप्पणियां की थीं जिन पर आयोग ने विचार किया। ECI द्वारा लिए गए सभी फैसलों पर तीनों अधिकारियों मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के हस्ताक्षर हैं।

लंदन में पहली बार गंगा आरती, हजारों लोग शामिल हुए:थेम्स नदी के किनारे वाराणसी घाटों जैसी झलक

लंदन में रविवार को पहली बार थेम्स नदी के किनारे गंगा आरती का आयोजन हुआ। इस आरती में हजारों लोग शामिल हुए थे। भजन और मंत्रों के जाप के साथ हुई आरती ने थेम्स के किनारे वाराणसी के घाटों जैसी झलक दिखाई। चिन्मय मिशन UK ने टोटली थेम्स फेस्टिवल के साथ मिलकर यह आयोजन किया। यह चिन्मय मिशन के 75 साल पूरे होने के मौके पर हो रहे कार्यक्रमों का हिस्सा था। आरती के जरिए नदी, प्रकृति और जीवन के लिए आभार जताया गया। फीडबैक को देखते हुए थेम्स नदी के किनारे गंगा आरती हर साल आयोजित की जा सकती है। भजन, मंत्र और दीपों के साथ हुई आरती कार्यक्रम में भजन, मंत्रोच्चार और संगीत प्रस्तुतियां हुईं। बड़ी संख्या में लोगों ने आरती में हिस्सा लिया और दिए जलाकर नदी के लिए सम्मान जताया। चिन्मय मिशन UK की रेजिडेंट टीचर ब्रह्मचारिणी श्रीप्रिया चैतन्य ने कहा कि पीढ़ियों से लोग गंगा के किनारे नदी, प्रकृति और जीवन के लिए सम्मान जताने के लिए दिए जलाते हैं। थेम्स पर हुई यह आरती इसी भावना को लंदन तक पहुंचाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि चिन्मय मिशन के लिए गंगा सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि ज्ञान के प्रवाह का भी प्रतीक है। मिशन के संस्थापक स्वामी चिन्मयानंद ने वेदांत के ज्ञान को लोगों तक पहुंचाने के लिए अपना जीवन लगा दिया था। चिन्मय मिशन के 75 साल पूरे होने के मौके पर यह आयोजन उनकी इसी विरासत को याद करने का एक तरीका था। थेम्स में नहीं बहाए गई पूजा सामाग्री इस आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि आरती के दौरान थेम्स नदी में कोई दिए, फूल या दूसरी पूजा सामग्री नहीं डाली गई। चिन्मय मिशन के प्रवक्ता ने बताया कि आरती में इस्तेमाल किए गए दीपक भी नदी में नहीं छोड़े गए, बल्कि किनारे पर ही रखे गए। कार्यक्रम में कचरा कम करने और सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल घटाने पर भी ध्यान दिया गया। यानी आयोजन में धार्मिक परंपरा के साथ नदी और पर्यावरण की जिम्मेदारी को भी जोड़ा गया। चिन्मय मिशन के 350 से ज्यादा केंद्र चिन्मय मिशन की स्थापना 1951 में हुई थी। यह वेदांत पर आधारित वैश्विक संगठन है और दुनिया भर में इसके 350 से ज्यादा केंद्र हैं। वहीं, टोटली थेम्स फेस्टिवल 1997 से आयोजित हो रहा है। इसमें थेम्स नदी से जुड़े कला, पर्यावरण, विरासत और शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम होते हैं। ————————– ये खबर भी पढ़ें… ब्रिटेन पहुंचे मोहन भागवत, हिंदू संगठनों ने स्वागत किया 100 से ज्यादा ब्रिटिश हिंदू संगठनों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत का ब्रिटेन पहुंचने पर स्वागत किया। पूरी खबर पढ़ें…

RSS चीफ मोहन भागवत लंदन के मंदिर-गुरुद्वारे में पहुंचे:ब्रिटेन के 20 संगठनों ने मेयर को लेटर लिखकर दौरे का बॉयकॉट किया

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को लंदन के मंदिरों और गुरुद्वारे के दौरे के साथ अपने विदेश दौरे के ब्रिटेन चरण की शुरुआत की। यह जानकारी RSS ने दी। RSS के केंद्रीय कार्यकारी दल के सदस्य सुनील अंबेकर और ब्रिटेन दौरे के समन्वयक संगठन Integral UK के संयोजक रोहित अंबेकर ने मीडिया कॉन्फ्रेंस में बताया कि भागवत इस दौरान धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों, रिसर्चर्स और अन्य प्रमुख लोगों से मिलेंगे। उन्होंने कहा कि भागवत RSS के निस्वार्थ सेवा और सामाजिक सद्भाव के अनुभव के साथ ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी पूरी दुनिया एक परिवार है, का संदेश साझा करेंगे। RSS के मुताबिक, लंदन का कार्यक्रम भागवत के अमेरिका और कनाडा दौरे में दिए गए संदेश को आगे बढ़ाता है। यह RSS की शताब्दी वर्ष से जुड़े तीन देशों के आउटरीच कार्यक्रम का हिस्सा है। मंदिर और गुरुद्वारे पहुंचे सुनील अंबेकर और रोहित अंबेकर ने बताया कि अंतरधार्मिक संवाद के तहत भागवत विल्सडन स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर और खालसा जथा ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारा जा चुके हैं। उन्हें लंदन के एक जैन मंदिर में भी जाना है। ब्रिटेन दौरे का मुख्य कार्यक्रम रविवार को होगा। इसमें ‘सेलिब्रेशन ऑफ वननेस’ थीम पर सामुदायिक नेताओं का स्वागत समारोह और ‘सभ्यतागत संवाद’ रखा गया है। यह कार्यक्रम ब्रिटेन में 1966 में स्थापित हिंदू सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन हिंदू स्वयंसेवक संघ (HSS) UK ने शुरू किया है। इसे Integral UK का समर्थन मिला है। प्रवक्ताओं के मुताबिक, पूरे ब्रिटेन के 310 से ज्यादा सामुदायिक संगठन और एसोसिएशन इसमें शामिल होने की उम्मीद है। बंद कमरे में बैठकें और प्रवासी भारतीयों से मुलाकात भागवत बुधवार को लंदन पहुंचे थे। गुरुवार को उन्होंने ‘बंद कमरे में हुई गोलमेज बैठकों’ के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद कारोबार और राजनीति से जुड़े प्रवासी भारतीय समुदाय के प्रमुख लोगों की बड़ी सभा हुई। सुनील अंबेकर ने बताया कि ब्रिटेन के लोग RSS को समझने में काफी रुचि रखते हैं। उन्होंने कहा कि भागवत ने लोगों की ओर से उठाए गए सभी मुद्दों पर बात की। उनके मुताबिक, कार्यक्रम में भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिकों के साथ ब्रिटेन के नेता, संसद से जुड़े लोग, कारोबारी, करोड़पति और अरबपति तथा FTSE 100 कंपनियों और अन्य कॉरपोरेट्स से जुड़े लोग शामिल थे। हालांकि, प्रवक्ता ने कार्यक्रम में शामिल लोगों के बारे में ज्यादा जानकारी देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को गोपनीय तरीके से आयोजित किया गया था, ताकि चर्चा खुलकर हो सके। भागवत के दौरे पर उठी चिंताओं पर RSS का जवाब ब्रिटेन में कुछ सिविल सोसाइटी समूहों और सांसदों ने भागवत के दौरे को लेकर चिंता जताई है। इस पर सुनील अंबेकर ने कहा, “हम शांति, एकीकरण और एकता के लिए यहां हैं। इसलिए हम हर किसी से बातचीत के लिए तैयार हैं। लोकतंत्र में अलग-अलग आवाजें हो सकती हैं। ऐसी आवाजें उठना सामान्य बात है।” उन्होंने कहा कि RSS को लेकर कई गलतफहमियां हैं, क्योंकि बुनियादी समझ में कमी है। उनके मुताबिक, “भारत किसी राष्ट्र-राज्य की राजनीतिक अवधारणा जैसा नहीं है। यह एक सांस्कृतिक अवधारणा है।” सुनील अंबेकर ने कहा कि हिंदुत्व कोई स्थिर अवधारणा नहीं है। इसमें हर तरह के धर्म और सभी धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान और सत्य में विश्वास की बात है। उन्होंने कहा, “यही हिंदुत्व है, यही भारत है। मुझे लगता है कि यह दौरा इन विचारों को साफ करने में मदद करेगा।” रविवार को सार्वजनिक संबोधन RSS प्रमुख का रविवार को प्रवासी भारतीय समुदाय को दिया जाने वाला सार्वजनिक संबोधन लाइव प्रसारित किए जाने की उम्मीद है। RSS प्रमुख के साथ ब्रिटेन के मीडिया के लिए कोई बातचीत नहीं रखी गई है। भागवत के कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी लोगों की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… न्यूयॉर्क में भागवत बोले- भारत के DNA में एकता-विविधता: हम अलग होकर भी एकदूसरे से जुड़े RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 29 अगस्त को करीब 42 मिनट स्पीच दी। उन्होंने कहा कि एकता और विविधता भारत के DNA में है। लोग अलग दिखते हैं, उनके रहने के तरीके हैं, लेकिन सभी के बीच एक जन्मजात जुड़ाव है। पूरी खबर पढ़ें…

बंगाल में खुलेंगे RSS के 1000 नए स्कूल, शिक्षा विभागों का होगा विलय; जानें बड़ा ऐलान

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक योजना के बारे में जानकारी दी है। इसके तहत अगले एक साल में हर जिले, नगर पालिका और पंचायत में RSS से जुड़ी संस्था विद्या भारती के कम से कम 1,000 स्कूल खोलने का लक्ष्य है। इसके अलावा राज्य के चार शिक्षा विभागों को मिलाकर एक विभाग बनाने की भी बात कही गई है। इस योजना के तहत मदरसा शिक्षा के लिए अलग विभाग नहीं होगा। सीएम ने विद्या भारती की 74वीं वर्षगांठ के मौके पर रामकृष्ण मिशन इंस्टीट्यूट ऑफ कल्चर में आयोजित कार्यक्रम में इसकी जानकारी दी है। वहीं इस कार्यक्रम में सुवेंदु अधिकारी ने संस्था की भूमिका को लेकर अपनी बात रखी।

सीएम ने इन जगहों पर स्कूलों खोलने की कही बात

उन्होंने विद्या भारती से बच्चों को देश और समाज से जुड़ी शिक्षा देने की दिशा में काम करने की अपील की। साथ ही, उन्होंने संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारियों को सचिवालय बुलाकर सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक करने और इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए कहा। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने संस्था से मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना में स्कूलों की संख्या बढ़ाने पर खास ध्यान देने को कहा। उन्होंने इन इलाकों में ज़्यादा एंटी-नेशनल एक्टिविटीज होने का दावा भी किया। अधिकारी ने पिछली टीएमसी सरकार पर शिक्षा का माहौल खराब करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विद्या भारती जैसी संस्थाओं को राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद करनी चाहिए।

टीएमसी पर लगाए ये आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली टीएमसी सरकार के दौरान शिक्षा का माहौल खराब हो गया था। उन्होंने टीएमसी पर लोगों को बांटने के लिए बंगाली पाठ्यक्रम में बदलाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में ‘मां’ की जगह ‘अम्मा’ शब्द का इस्तेमाल किया गया। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि पाठ्यक्रम में ईश्वर चंद्र विद्यासागर और स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं को भी नजरअंदाज किया गया। श्यामा प्रसाद मुखर्जी के “एक देश, एक विधान, एक निशान, एक प्रधान” के नारे का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यही सोच शिक्षा के क्षेत्र में भी लागू होनी चाहिए।

सीएम ने क्या कहा

सीएम ने कहा कि, “हम ऐसा कोई इंतजाम नहीं होने देंगे जहां हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट सभी यूनिवर्सिटीज को देखेगा, वहीं दूसरा डिपार्टमेंट आलिया यूनिवर्सिटी को देखेगा।” आलिया यूनिवर्सिटी को अभी राज्य का माइनॉरिटी अफेयर्स डिपार्टमेंट मैनेज करता है। सीएम ने आगे कहा,” मैंने बोर्ड टॉपर्स को सम्मानित किया। बाद में, माइनॉरिटी अफेयर्स डिपार्टमेंट ने 27 मुस्लिम स्टूडेंट्स के नामों वाली एक अलग फाइल भेजी। मैंने पूछा क्यों? मैं पहले ही 20 स्टूडेंट्स को सम्मानित कर चुका हूँ, और उनमें मुस्लिम, जैन और बौद्ध शामिल हैं।” पश्चिम बंगाल में फिलहाल विद्या भारती के 313 स्कूल चल रहे हैं, जबकि पूरे देश में यह संस्था 12,000 से ज्यादा स्कूल और 10,000 बाल संस्कार केंद्र संचालित करती है।

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ब्रिटेन पहुंचे मोहन भागवत, हिंदू संगठनों ने स्वागत किया:सरकार ने संसद में कहा- दौरा इमिग्रेशन नियमों की शर्तें पूरी करता है; पहले उठे थे सवाल

100 से ज्यादा ब्रिटिश हिंदू संगठनों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत का ब्रिटेन पहुंचने पर स्वागत किया। वे तीन देशों के दौरे के अंतिम चरण में गुरुवार को लंदन पहुंचे हैं। भागवत का दौरा संगठन की स्थापना के 100 साल पूरे होने के मौके पर चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय संपर्क अभियानों का हिस्सा है। इस दौरे के तहत वे अमेरिका और कनाडा भी जा चुके हैं। ब्रिटेन के सुरक्षा मंत्री डैन जार्विस ने गुरुवार को संसद में लिखित सवाल का जवाब देते हुए कहा कि भागवत की यात्रा देश के इमिग्रेशन नियमों की शर्तें पूरी करती है। दरअसल, ब्रिटिश-भारतीय सांसद नादिया व्हिटोम ने पिछले हफ्ते संसद में सवाल पूछा था कि कि क्या इस दौरे की पूरी समीक्षा नियमों के तहत की गई है मंत्री ने कहा- सभी लोगों को इमिग्रेशन नियम पूरे करने होंगे

मंत्री डैन जार्विस ने जवाब दिया कि गृह मंत्रालय व्यक्तिगत मामलों पर टिप्पणी नहीं कर सकता। हालांकि, मंत्रालय खतरों की पूरी श्रेणी से निपटने और हिंसा व व्यक्तियों तथा समुदायों के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देने वाले विचार फैलाने वालों पर कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, “ब्रिटेन में प्रवेश की मांग करने वाले सभी लोगों को इमिग्रेशन नियमों की शर्तें पूरी करनी होंगी।” 2018 में भी अमेरिका गए थे भागवत मोहन भागवत इससे पहले सितंबर 2018 में अमेरिका गए थे। उन्होंने शिकागो में 7 से 9 सितंबर 2018 तक आयोजित दूसरे वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस में हिस्सा लिया था। इस कार्यक्रम में 60 देशों से करीब 2,500 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। भागवत ने कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया था। 2018 के इस दौरे की उपलब्ध रिपोर्टों में भागवत की किसी अमेरिकी राजनयिक से मुलाकात या उन्हें किसी औपचारिक राजनयिक सम्मान दिए जाने का जिक्र नहीं मिलता। उनका दौरा मुख्य रूप से वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस और उससे जुड़े कार्यक्रमों पर केंद्रित था। —————————– ये खबर भी पढ़ें… न्यूयॉर्क में भागवत बोले- भारत के DNA में एकता-विविधता:हम अलग होकर भी एकदूसरे से जुड़े, गलत सोच इंसान को जानवरों के करीब ले जाती है RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 29 अगस्त करीब 42 मिनट स्पीच दी। पूरी खबर पढ़ें…

Gen Z के मुद्दों पर विपक्ष को जवाब देंगे पीएम मोदी: 11 साल बाद वडोदरा में युवाओं के बीच भरेंगे हुंकार

Gen Z के मुद्दों पर विपक्ष को जवाब देंगे पीएम मोदी: 11 साल बाद वडोदरा में युवाओं के बीच भरेंगे हुंकार

PM Modi Gujarat Visit

विदेश दौरे से लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के दौरे पर रहेंगे। 2014 के लोकसभा चुनाव में अपना संसदीय क्षेत्र रहे वडोदरा से पीएम मोदी Gen Z और युवाओं के मुद्दों पर विपक्ष को कड़ा जवाब देंगे। दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद इस कार्यक्रम की तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। NEET पेपर लीक और फिर CJP के नेतृत्व वाले Gen Z विरोध प्रदर्शनों के बाद, पीएम मोदी व्यक्तिगत रूप से किसी विश्वविद्यालय में पहुंचकर छात्रों और युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। 

 

MS यूनिवर्सिटी पवेलियन में आयोजित होगा विशेष कार्यक्रम

पीएम मोदी के मुख्य कार्यक्रम के लिए महाराजा सयाजीराव (MS) यूनिवर्सिटी पवेलियन को अंतिम रूप दिया गया है। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष हेमांग जोशी ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। 8 सितंबर को होने वाले इस विशेष कार्यक्रम में 6,000 से अधिक युवाओं और छात्रों के शामिल होने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भी पीएम मोदी ने अपना पहला रोड शो वडोदरा में ही आयोजित किया था। 

 

वडोदरा और पीएम मोदी का खास और अटूट रिश्ता

 

संसदीय करियर में पीएम मोदी को सबसे ज्यादा प्यार और वोट शेयर वडोदरा से ही मिला है। 2014 के चुनाव में उन्हें 8,45,464 वोट मिले थे, जो कुल मतदान का 72.75% था। 2024 के चुनाव में वडोदरा सीट से बीजेपी के नए प्रत्याशी हेमांग जोशी को कुल 8,73,189 वोट मिले, जो कुल वोट का 72.04% है। पीएम मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से पहले अपनी आखिरी विजय रैली भी वडोदरा में ही निकाली थी। RSS प्रचारक और बीजेपी संगठनकर्ता के रूप में वे यहां लंबा समय बिता चुके हैं। 

 

पीएम मोदी के इस दौरे का विशेष राजनीतिक महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने जन्मदिन से ठीक 10 दिन पहले वडोदरा का दौरा कर रहे हैं। 17 सितंबर को पीएम मोदी का जन्मदिन है, जब वे 76 वर्ष के हो जाएंगे। इसके अलावा, 7 अक्टूबर को वे संवैधानिक पद पर अपने 25 वर्ष पूरे करने जा रहे हैं। इन महत्वपूर्ण उपलब्धियों और आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों से पहले युवाओं के बीच जाकर संवाद करना बीजेपी की विशेष रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
 

कड़ी सुरक्षा के बीच कार्यक्रम का होगा लाइव प्रसारण

पीएम मोदी के कार्यक्रम के लिए विश्वविद्यालय पवेलियन में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। यद्यपि इस कार्यक्रम में सीमित संख्या में छात्र ही भाग लेंगे, लेकिन इस पूरे कार्यक्रम का देशभर में लाइव प्रसारण उपलब्ध रहेगा ताकि पीएम मोदी का संदेश अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंच सके। 

Nepal Flash Flood: तबाही के बाद नेपाल में फिर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा, भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ा, जारी हुआ अलर्ट

Nepal Flash Flood: नेपाल में 26 अगस्त को आए विनाशकारी बाढ़ ने सबकुछ तबाह कर दिया। बाढ़ में अब तक कम से कम 800 लोगों के मरने की खबर है वहीं हजारों लोग लापता है। अभी लोग इस तबाही से उबर भी नहीं पाए हैं कि नेपाल में एक बार फिर बाढ़ का खतरे का अलर्ट आने लगा। भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद अधिकारियों ने रविवार को नई चेतावनी जारी की है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित जगह पर जाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। वहीं, राहत और बचाव टीमें पहले आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में लगातार काम कर रही हैं।

लोगों को भेजा जा रहा अलर्ट

रविवार सुबह लोगों के मोबाइल पर बाढ़ को लेकर चेतावनी मैसेज भेजे जा रहे है। इसके बाद से पहले से प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ गई। वहींलगातार मिल रही अलग-अलग चेतावनियों के कारण प्रभावित गांवों के लोगों के बीच भी डर और असमंजस का माहौल बना हुआ है। इसी बीच राहत और बचाव दल काठमांडू को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से जोड़ने वाले प्रमुख हाईवे को फिर से खोलने में जुटे हुए हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।

चीन से मिली जानकारी

नेपाल में बाढ़ को लेकर जारी नई चेतावनी चीन से मिली ताजा जानकारी के बाद जारी की गई है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के प्रमुख धर्म राज उप्रेती ने बताया कि ऊपरी इलाकों में पानी का बहाव बढ़ने की सूचना मिली है। इसके बाद नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा गया है। न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, करीब 5.6 किलोमीटर दूर बना एक बड़ा गड्ढा अब भी चिंता का कारण बना हुआ है, जिसमें बड़ी मात्रा में पानी जमा है। अधिकारियों ने इसकी स्थिति पर लगातार नजर रखने की बात कही है।

लापता लोगों की तलाश जारी

26 अगस्त को आए बाढ़ और भूस्खलन ने नेपाल के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई है और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है। नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। आपदा एजेंसी के अनुसार, देश में मृतकों की संख्या बढ़कर 788 हो गई है, जबकि 2,502 लोग अब भी लापता हैं। वहीं, चीन की सीमा से लगे प्रभावित क्षेत्र में भी भारी नुकसान हुआ है, जहां अधिकारियों ने 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। राहत और बचाव अभियान के बीच लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है।

ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने से आई बाढ़

नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ के बाद सैकड़ों विदेशी नागरिकों के लापता होने की खबर है। इनमें कई लोग नौकरी, पहाड़ों की यात्रा और धार्मिक यात्रा के लिए हिमालयी क्षेत्र में पहुंचे थे। बताया जा रहा कि ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने और बड़ी मात्रा में पानी व मलबा नीचे आने से नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ गया। तेज बहाव की चपेट में आने से कई घर, पुल और अन्य ढांचे बह गए, जिससे नेपाल और तिब्बत के कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ है।

Mohan Bhagwat Canada Visit: ‘हिंदू जागे तो दुनिया जागेगी’, कनाडा में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने दिया एकता का संदेश