Delhi Weather: दिल्ली में झमाझम बारिश से बदला मौसम, AQI 116 दर्ज; जानें अगले 6 दिन कैसा रहेगा हाल?

Delhi Weather: दिल्ली में हफ्ते की शुरुआत जोरदार बारिश के साथ हुई। सोमवार, 12 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी में भारी बारिश और आंधी-तूफान का दौर चला। जिसे देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ घंटों तक आंधी-तूफ़ान जारी रहने की संभावना है।

IMD के ताजा अनुमान के मुताबिक, बारिश के इस दौर के बाद अगले छह दिनों तक आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं, लेकिन बारिश होने की संभावना कम है। हालांकि, अभी हो रही भारी बारिश के बावजूद, आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान 31 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है।

वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, 12 अक्टूबर को सुबह 6 बजे दिल्ली के आनंद विहार में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगभग 116 था, जिसमें मुख्य प्रदूषक PM 10 की मात्रा सबसे ज्यादा रही।

बारिश की बात करें तो इससे इलाके में ठंडक बढ़ गई है और आसमान में बादल छाए रहने से मौसम में काफी बदलाव आया है। हालांकि, इस भारी बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में जलजमाव हो गया है, खासकर करोल बाग के पास झंडेवालान मंदिर इलाके में।

13-17 अक्टूबर तक कैसा रहेगा मौसम?

रविवार शाम को जारी IMD के सात दिनों के मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक, 13 अक्टूबर को दिल्ली में अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। वहीं, 14 अक्टूबर को अधिकतम तापमान बढ़कर 33 से 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है।

मौसम विभाग के अनुसार, 15 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 31 से 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। वहीं, 16 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। इन सभी दिनों में आसमान में हल्के बादल छाए रह सकते हैं, लेकिन बारिश होने की संभावना नहीं है।

इसके अलावा, 17 अक्टूबर की बात करें तो दिल्ली में अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक, इस दिन भी आसमान में हल्के बादल छाए रह सकते हैं, लेकिन बारिश होने की संभावना नहीं है।

IMD  ने ट्रैफिक को लेकर दी चेतावनी

IMD ने ट्रैफिक में रुकावट की चेतावनी भी दी है और लोगों को सलाह दी है कि वे अपनी मंजिल के लिए निकलने से पहले ट्रैफिक जाम की स्थिति देख लें। इस दौरान गाड़ी दुर्घटनाओं की ज्यादा संभावना और निचले इलाकों में पानी भरने को लेकर लोगों के लिए चिंता जताई गई है। विभाग ने लोगों से ट्रैफिक से जुड़ी सलाह मानने और पानी भरने वाले इलाकों से बचने की अपील की है।

बता दें कि पिछले 24 घंटों में, IMD ने दिल्ली में अधिकतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की, जबकि न्यूनतम तापमान 21 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच स्थिर रहा। अधिकतम तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।

गौरतलब है कि राजधानी में बारिश का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर लगातार पड़ रहा है, इसलिए लोगों से सतर्क रहने और मौसम में और बदलावों के लिए तैयार रहने की अपील की गई है।

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Nepal Flood alert: पड़ोसी देश नेपाल में एक बार फिर से बाढ़-लैंडस्लाइड से हाहाकार मच गया है। गोरखा जिले में रविवार (11 अक्टूबर) तड़के बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। बाढ़ से 35 से अधिक मकान और पुल नदी में बह गए। घटना के बाद प्रशासन ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और ऊंचाई वाले इलाकों में शरण लेने की सलाह दी है। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल इस घटना में किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं है। गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि उन्हें रविवार तड़के करीब 4:35 बजे बड़े पैमाने पर बाढ़ आने की सूचना मिली।

शुरुआती जानकारी के अनुसार, बाढ़ चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका-6 क्षेत्र से नीचे की ओर आई और नदी के किनारे स्थित बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाली सेना की एक टुकड़ी को खोज और बचाव अभियान के लिए हवाई और जमीनी रास्ते से भेजा गया है। इस टुकड़ी ने जगत इलाके से 6 लोगों को हवाई रास्ते से सुरक्षित बाहर निकाला। यह इलाका लैंडस्लाइड की चपेट में आ सकता है।

36 मकान और पुल बहे

‘काठमांडू पोस्ट’ की खबर के अनुसार, चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के वार्ड संख्या तीन के अध्यक्ष राम कुमार गुरुंग ने बताया कि बूढ़ी गंडकी नदी में आई बाढ़ से सल्लेरी, पायूका और जगत में नदी किनारे स्थित मकान बह गए। बाढ़ में वार्ड को जोड़ने वाला एक पुल भी बह गया। गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि शुरुआती खबरों के अनुसार, सिउरीबास के ऊपरी इलाके में लैंडस्लाइड हुआ था।

उन्होंने कहा कि अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। स्थानीय लोगों को संदेह है कि चुमनुब्री-6 में लोकपा और चुमलिंग के बीच बूढ़ी गंडकी की सहायक नदी स्यार का प्रवाह बाधित हो गया होगा, जिससे बाढ़ आई। अधिकारियों ने बताया कि अचानक आई बाढ़ से उत्तरी गोरखा के कई इलाकों में 35 से अधिक मकान बह गए।

लैंडस्लाइड से रास्ता बंद होने के बाद आई बाढ़

मुख्य जिला अधिकारी मिश्रा के मुताबिक, शुरुआती रिपोर्टों में सिउरीबास के ऊपर लैंडस्लाइड होने की बात सामने आई है। चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के अध्यक्ष नीमा लामा ने बताया कि भूस्खलन के कारण चुमके खोला नामक जलधारा का रास्ता बाधित हो गया था। इसके बाद पानी का बहाव बढ़ा और अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई। इस घटना के कारण नदी के आसपास रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ गया। प्रशासन को आशंका है कि तेज बहाव से नदी के किनारे बसे अन्य इलाकों में भी नुकसान हुआ हो सकता है।

कई लोग लापता

नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाढ़ में कई पुल बह गए हैं। फिलहाल, चार लोग लापता बताए जा रहे हैं। नेपाली सेना उनकी तलाश कर रही है। न्यूज पोर्टल ‘ऑनलाइन खबर’ के अनुसार, चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका की उपाध्यक्ष लक्ष्मी गुरुंग ने कहा कि रविवार सुबह बूढ़ी गंडकी नदी में आई बाढ़ ने उन्हें रसुवा में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ की याद दिला दी। उन्होंने कहा, “बूढ़ी गंडकी में आई बाढ़ ने भोटेकोशी की बाढ़ की याद दिला दी। इसमें दर्जनों मकान बह गए हैं। फिलहाल नुकसान का सही आकलन करना संभव नहीं है।”

जगत में 5 से 7 मकान बहने की सूचना

गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा के अनुसार, जगत इलाके में नदी के तल के पास बने पांच से सात मकान बाढ़ के पानी में बह गए। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि नदी के निचले हिस्सों में कुछ अन्य मकान भी बह गए हो सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं मिली है। प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए आगे की जानकारी का इंतजार है।

नेपाल की सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, “बुढ़ी गंडक नदी में बाढ़ आने के बाद नेपाली सेना की एक टुकड़ी को खोज और बचाव अभियान के लिए हवाई और ज़मीनी रास्ते से भेजा गया। इस टुकड़ी ने जगत इलाके से 6 लोगों को हवाई रास्ते से सुरक्षित बाहर निकाला। यह इलाका भूस्खलन की चपेट में आ सकता है। काठमांडू में तैनात कम्पोजिट क्विक रिएक्शन टीम को भी हवाई जहाज से इसी इलाके में भेजा गया है।”

बूढ़ी गंडकी नदी के किनारे रहने वालों को चेतावनी

बाढ़ के बाद प्रशासन ने बूढ़ी गंडकी नदी के किनारे स्थित बस्तियों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है। लोगों से नदी के करीब जाने से बचने और सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की गई है। अचानक आई बाढ़ ने एक बार फिर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और नदी के जलस्तर में तेज बदलाव से पैदा होने वाले खतरे को उजागर किया है।

ऐसे क्षेत्रों में भूस्खलन से जलधारा का रास्ता अवरुद्ध होने पर पानी जमा हो सकता है। बैरिकेट्स टूटने या पानी का रास्ता बदलने से अचानक तेज बहाव पैदा हो सकता है। फिलहाल, गोरखा जिले में बाढ़ से हुए नुकसान की पूरी तस्वीर सामने आना बाकी है। प्रशासन की प्राथमिकता नदी के किनारे बसे लोगों को सुरक्षित रखना और प्रभावित इलाकों की स्थिति का आकलन करना है।

NDRRMA ने जारी किया अलर्ट

सुबह 6:40 बजे, नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने अपने बाढ़ पूर्वानुमान विभाग से एक SMS अलर्ट भेजा। इसमें लोगों से कहा गया कि वे बाढ़ का पानी उतरने तक नदी के पास न जाएं। खासकर त्रिशूली दोभान तक के इलाके में बिल्कुल न जाएं। ऊंची जगहों पर ही रहें। अधिकारी अभी भी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि पानी का स्तर अचानक क्यों बढ़ा और उसमें मिट्टी और गाद क्यों बहकर आई।

स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि सुबह करीब 4 बजे नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और इसके बहाव की आवाज दूर से ही सुनी जा सकती थी। चुमनुबरी ग्रामीण नगरपालिका के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी नारायण सपकोटा ने यह जानकारी दी। मिश्रा ने कहा कि जिला कार्यालय जमीनी स्तर से जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने बताया कि स्थिति का हवाई जायजा लेने के लिए नेपाली सेना का हेलीकॉप्टर भेजने की तैयारी चल रही है।

बिहार में भी बाढ़ का खतरा

बूढ़ी गंडकी नदी में भयानक बाढ़ आने से भारतीय राज्य बिहार में भी खतरा बढ़ गया है। अधिकारियों ने कहा कि यह नदी आगे चलकर त्रिशूली से मिलती है। फिर दोनों का पानी देवघाट के पास नारायणी नदी में पहुंचता है। यही नदी भारत में गंडक के नाम से बिहार में आती है। फिर आगे गंगा में मिल जाती है। ऐसे में अगर पानी का बहाव बढ़ता है, तो बिहार में गंडक किनारे बसे इलाकों पर असर पड़ सकता है। इनमें पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और वैशाली जैसे जिले शामिल हैं। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि नेपाल में आई बाढ़ से बिहार में जलस्तर बढ़ेगा या नहीं।

इससे पहले नेपाल में 26 अगस्त 2026 को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में विनाशकारी बाढ़ आई थी, जिसने कई जिलों में भारी तबाही मचाई थी। उस बाढ़ में बड़ी संख्या में लोग मारे गए और हजारों लोग लापता बताए गए थे। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, 26 अगस्त 2026 की बाढ़ में कम से कम 1,455 लोगों की मौत हुई थी और 5,285 लोग लापता थे।

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नेपाल में पहाड़ का हिस्सा टूटकर नदी में गिरा:मलबे से भरा कालीगंडकी का रास्ता; अब तक 14 मौत

नेपाल के मुस्तांग जिले में रविवार को भारी बारिश के बीच पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा टूटकर कालीगंडकी नदी में जा गिरा। इस घटना में 14 लोगों की मौत हुई है। सोशल मीडिया पर इससे जुड़ा एक वीडियो वायरल है। इसमें चट्टानों और मिट्टी का पूरा मलबा कुछ ही सेकेंड में ढलान से नीचे आता दिख रहा है। देखते-देखते नदी का रास्ता मलबे से भर गया। इस दौरान वहां मौजूद लोगों की चीखें सुनाई दे रही हैं। नेपाल 1 महीने में दूसरी बार भीषण बाढ़ से जूझ रहा है। इससे पहले 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में बाढ़ आई थी। इसमें 1453 लोगों की मौत हुई, जबकि 5500 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से जुड़ी 3 तस्वीरें राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में नेपाल के अलग-अलग जिलों में बाढ़, भूस्खलन, भारी बारिश से जुड़ी घटनाओं समेत 272 हादसे हुए। इन घटनाओं में 21 लोगों की मौत हुई है, 4 लोग लापता हैं और 26 लोग घायल हुए हैं।

इसमें सबसे ज्यादा भूस्खलन की 97 घटनाएं हुई हैं। इनमें 19 लोगों की मौत हुई, 4 लोग लापता हैं और 4 घायल हुए हैं। चितवन में दो नदियां खतरे के निशान से ऊपर
चितवन जिले में रविवार सुबह नारायणी नदी और रिउ नदी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगीं। देवघाट में नारायणी नदी का जलस्तर 9.23 मीटर पहुंच गया, जबकि खतरे का निशान 9 मीटर है। रिउ नदी का जलस्तर भी 3.92 मीटर तक पहुंच गया। यहां खतरे का निशान 3.8 मीटर है। भारी बारिश के कारण चितवन में कई जगह भूस्खलन और मिट्टी धंसने की घटनाएं हुईं। इससे सड़कें बंद हो गईं। कर्णाली प्रांत में भी भूस्खलन के कारण हाईवे पर यातायात प्रभावित हुआ। चितवन में दो नदियां खतरे के निशान से ऊपर चितवन जिले में रविवार सुबह नारायणी नदी और रिउ नदी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगीं। देवघाट में नारायणी नदी का जलस्तर 9.23 मीटर पहुंच गया, जबकि खतरे का निशान 9 मीटर है। रिउ नदी का जलस्तर भी 3.92 मीटर तक पहुंच गया। यहां खतरे का निशान 3.8 मीटर है। भारी बारिश के कारण चितवन में कई जगह भूस्खलन और मिट्टी धंसने की घटनाएं हुईं। इससे सड़कें बंद हो गईं। कर्णाली प्रांत में भी भूस्खलन के कारण हाईवे पर यातायात प्रभावित हुआ। ———————- ये खबर भी पढ़ें… नेपाल में फिर से बाढ़-लैंडस्लाइड, 21 की मौत:घर-पुल बहे, हाईवे बंद; एक महीने पहले आई बाढ़ में 1453 मौतें नेपाल में लगातार बारिश के बीच बाढ़ और भूस्खलन से हालात बिगड़ गए हैं। अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

नेपाल बाढ़- 7 सुरंगों में फंसे कर्मचारियों की तलाश जारी:अब तक 13 हजार से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू, 5 हजार अब भी लापता

नेपाल में आई बाढ़ के 13 दिन बाद भी राहत और बचाव अभियान जारी है। रेस्क्यू टीम अलग-अलग 7 हाईड्रोपॉवर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों की तलाश कर रही हैं। अब तक 13 हजार से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है, जबकि 4894 लोग अब भी लापता हैं। इनमें 587 विदेशी नागरिक शामिल हैं। पहाड़ी इलाकों, टूटे रास्तों और भारी मलबे के कारण बचाव अभियान में कई मुश्किलें आ रही हैं। नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से 1,356 लोगों की मौत हुई है। वहीं तिब्बत में 43 लोगों की मौत हुई है और 519 लापता हैं। नेपाल रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़ी तस्वीर नेपाल बाढ़ से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे दिए ब्लॉग से गुजर जाइए…

नेपाल के मलबे में जिंदगी के निशान तलाशने की आखिरी कोशिश! अपने 36 लापता नागरिकों को बचाने ऑस्ट्रेलिया ने भेजी हाई-टेक ‘ड्रोन फौज’

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद से ही रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भारत सहित कई देश नेपाल की मदद के लिए अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कर रहे हैं और मलबों में फंसे लोगों को निकालने के लिए सर्च अभियान चला रहे हैं। इसी क्रम में ऑस्ट्रेलिया के आपदा राहत विशेषज्ञ भी लोगों की तलाश में शामिल होने के लिए शुक्रवार को नेपाल के लिए रवाना हुए। वहीं, इस भयानक आपदा के बाद ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने अपने 36 लापता नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है।

बता दें कि 26 अगस्त को ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के बाद नेपाल में आई अचानक बाढ़ में अब तक 1,200 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 5,000 लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल सरकार के मुताबिक, लापता लोगों में 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि नेपाल सरकार के अनुरोध पर 15 सदस्यों वाली ‘ऑस्ट्रेलियाई आपदा सहायता प्रतिक्रिया टीम’ को तैनात किया गया है। इस टीम में ज्यादातर सदस्य राज्य की आपातकालीन सेवाओं के ड्रोन पायलट हैं।

ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी ने दी जानकारी

न्यू साउथ वेल्स फायर एंड रेस्क्यू के कमिश्नर जेरेमी फ्यूट्रेल ने शुक्रवार को सिडनी एयरपोर्ट पर पत्रकारों से कहा, “हमें अभी भी उम्मीद है कि कुछ जगहों पर लोग जीवित हो सकते हैं और उम्मीद है कि यह टीम ऐसे लोगों का पता लगाने में मदद कर सकेगी।”

उन्होंने कहा, “इस टीम में मुख्य रूप से हमारे खास ड्रोन के पायलट शामिल हैं।” उन्होंने आगे बताया कि उनके पास अलग-अलग तरह के ड्रोन हैं जो हवा से बड़े इलाकों का सर्वे कर सकते हैं और ऐसी तंग जगहों पर भी जा सकते हैं जहां बचाव कर्मियों का पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

जेरेमी फ्यूट्रेल ने आगे कहा, “हम जो मदद दे रहे हैं, वह नेपाली अधिकारियों के अनुरोध पर दी जा रही है। इसके तहत उन्हें ऐसे कई साधन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनसे उन्हें वाकई मदद मिलेगी।”

उन्होंने कहा, इसके अलावा, ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस के 7 विशेषज्ञ भी शनिवार को नेपाल पहुंचेंगे। ये विशेषज्ञ आपदा में मारे गए या लापता लोगों की पहचान करने में मदद करेंगे।

19 ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी पहले से ही नेपाल में मौजूद 

बता दें कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने गुरुवार को इनकी तैनाती की घोषणा की थी। विदेश मंत्री पेनी वोंग ने बताया कि 19 ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी पहले से ही नेपाल में मौजूद हैं, जिनमें कॉन्सुलर अधिकारी, मानवीय सहायता से जुड़े पुलिसकर्मी और रक्षा व पुलिस के जवान शामिल हैं।

गौरतलब है कि नेपाल के विदेश मंत्री ने पिछले हफ्ते कहा था कि उन्हें विशेष और तकनीकी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत है।

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि बचे हुए लोगों के मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है, लेकिन चीन की सीमा के पास बचाव कार्य जारी है।

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, लापता ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के कुछ रिश्तेदार भी खुद तलाश करने के लिए नेपाल गए हैं।

ऑस्ट्रेलिया के ट्रेजरर जिम चाल्मर्स ने शुक्रवार को बताया कि 36 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक अभी भी लापता हैं, जबकि रात भर में दो लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।

उन्होंने ABC न्यूज ब्रेकफास्ट को बताया, “हमें उन 36 ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के बारे में अभी भी बहुत चिंता है जिनका अभी तक पता नहीं चल पाया है।”

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दो महीने पहले कर दी थी नेपाल बाढ़ की भविष्यवाणी, इंटरनेट पर वीडियो वायरल

नेपाल बाढ़ को लेकर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें 12 जून को एक पादरी नेपाल में बाढ़, आग या राजनीतिक संकट की भविष्यवाणी कर रहा है। नेपाल 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद अभी भी बेहाल है।

Tibet Earthquake : भीषण बाढ़ की तबाही के बाद नेपाल पर एक और मुसीबत, हिमालयी क्षेत्र में क्यों मंडरा रहा है खतरा

Tibet Earthquake : भीषण बाढ़ की तबाही के बाद नेपाल पर एक और मुसीबत, हिमालयी क्षेत्र में क्यों मंडरा रहा है खतरा

Nepal flood

Tibet Earthquake : नेपाल और तिब्बत में ग्लेशियर आपदा के बाद आई विनाशकारी बाढ़ के बीच गुरुवार को तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप आया। भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के जोशीमठ से करीब 128 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था। भूकंप के बाद फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है। अधिकारियों की ओर से नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

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नेपाल में बाढ़ के बीच आया भूकंप

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तिब्बत में भूकंप ऐसे समय आया है, जब हिमालयी क्षेत्र पहले से ही एक बड़ी ग्लेशियर आपदा के बाद आई भीषण बाढ़ से जूझ रहा है। इस आपदा का असर तिब्बत और नेपाल के कई इलाकों में देखने को मिला है। ताजा अपडेट के मुताबिक, इस आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 1,252 हो गई है, जबकि कम से कम 4,216 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ और ग्लेशियर से जुड़ी इस आपदा ने हिमालयी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है।

 

5.0 तीव्रता के भूकंप का क्या मतलब है?

 

NCS के अनुसार, तिब्बत में आए भूकंप की तीव्रता 5.0 थी। इस तीव्रता के भूकंप को सामान्यतः मध्यम श्रेणी का भूकंप माना जाता है। इस तरह के भूकंप में इमारतों में स्पष्ट कंपन महसूस किया जा सकता है। कमजोर या खराब निर्माण वाली इमारतों को मामूली से मध्यम नुकसान पहुंच सकता है, जबकि अच्छी तरह से निर्मित संरचनाएं आम तौर पर गंभीर संरचनात्मक क्षति से बची रहती हैं।

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सिर्फ 10 किलोमीटर गहराई में आया भूकंप

 

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र जमीन के अंदर करीब 10 किलोमीटर की गहराई में था। कम गहराई वाले भूकंपों को अपेक्षाकृत ज्यादा नुकसानदायक माना जाता है, क्योंकि भूकंपीय ऊर्जा को सतह तक पहुंचने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ती है। इस वजह से ऊर्जा रास्ते में कम कमजोर होती है और सतह पर झटके ज्यादा महसूस किए जा सकते हैं।

 

हिमालयी क्षेत्र में लगातार बनी हुई चिंता

 

तिब्बत में आए इस भूकंप ने हिमालयी क्षेत्र में जारी प्राकृतिक आपदाओं के बीच चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में ग्लेशियर आपदा के बाद तिब्बत और नेपाल में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। ऐसे में भूकंप और अन्य प्राकृतिक घटनाओं पर भारत, नेपाल और तिब्बत के अधिकारियों की नजर बनी हुई है। फिलहाल तिब्बत में आए 5.0 तीव्रता के भूकंप से किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

Bihar Mystery Fish: नेपाल की बाढ़ के साथ बिहार पहुंची अजीब मछलियां, इनको खाते ही हो रहीं बड़ी दिक्कतें! सरकार ने अब ये बताया

Bihar Mystery Fish: नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद बिहार की नदियों में सीमा पार से बहकर आ रही अज्ञात और अजीब किस्म की मछलियों ने हड़कंप मचा दिया है। बाढ़ के पानी के साथ आई इन मछलियों को खाने के बाद लोगों के बीमार पड़ने की खबरें सामने आ रही हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने अडवाइजरी जारी कर लोगों को ऐसी मछलियों को खाने से से बचने की सख्त हिदायत दी है।

मछलियां क्यों बन रही हैं खतरनाक और बीमारी की क्या है वजह?

मत्स्य विभाग के मुताबिक बाढ़ के दौरान मछलियां तालाबों, झीलों, नदियों और जलाशयों से निकलकर पानी के तेज बहाव के साथ लंबी दूरी तय करती हैं। इस दौरान ये मछलियां कीचड़, गंदे नाले, सड़े-गले शवों और दूसरे हानिकारक प्रदूषकों के लगातार संपर्क में रहती हैं। इस वजह से ये मछलियां हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस, फंगी और खतरनाक केमिकल से संक्रमित हो जाती हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब तक पर्यावरण सामान्य न हो जाए और साफ मछलियां उपलब्ध न हों, तब तक बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियों का सेवन बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए।

सरकार की अपील और लक्षण दिखने पर क्या करें?

बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने नागरिकों से सुरक्षा के मद्देनजर कई दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। कहा गया है कि किसी भी अनजानी या अजीब दिखने वाली मछली को खाने के लिए इस्तेमाल न करें। बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियों को न खरीदें, न बेचें और न ही भोजन के रूप में इस्तेमाल करें। बिना विभागीय जांच और वेरिफिकेशन के किसी भी अनजान मछली को खाने लायक न समझें।

अगर ऐसी मछली खाने के बाद उल्टी, दस्त/डायरिया, पेट दर्, चक्कर आना या सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो रही हैं तो तुरंत अस्पताल जाएं या डॉक्टर की सलाह लें। साथ ही ये भी कहा गया है कि ऐसी असामान्य मछलियां दिखने पर तुरंत जिला मत्स्य अधिकारी या स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना दें और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें।

पश्चिमी चंपारण में जागरूकता अभियान

अनजान मछलियों के खतरे को देखते हुए प्रशासन सक्रिय हो गया है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी चंपारण की जिला मत्स्य अधिकारी नूतन ने बताया कि क्षेत्र में व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नेपाल की बाढ़ से आ रही मछलियां अत्यधिक संक्रामक हैं और इनमें कई बीमारियां फैली हुई हैं। इनको खाने से पेट में तेज दर्द, उल्टी और पेचिश जैसे गंभीर लक्षण उभर रहे हैं। प्रशासन की ओर से विक्रेताओं को ऐसी मछलियां न बेचने और आम जनता को इन्हें न खरीदने व न खाने की सलाह दी जा रही है।

उधर नेपाल पुलिस ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आधिकारिक निर्देश जारी कर अपने नागरिकों से बाढ़ के पानी में बहकर आई मछलियों और अन्य नदी आधारित खाद्य पदार्थों का सेवन न करने का अनुरोध किया है।

नेपाल में बाढ़ से 1127 लोगों की मौत, बिहार में अलर्ट

नेपाल पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ की वजह से नेपाल में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1127 हो गई है। शवों के बरामद होने का सिलसिला अभी भी जारी है। नेपाल की नदियों में जलस्तर बढ़ने की वजह से निचले इलाकों में स्थित बिहार में हाई अलर्ट जारी है।

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नेपाल बाढ़ में अबतक 1068 लोगों की मौत:4600 से ज्यादा की तलाश जारी; एक लड़की ने 17 रिश्तेदारों को खोया; चीन के 100 नागरिक लापता

नेपाल में बाढ़ के एक हफ्ते बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। आपदा में लापता लोगों की तलाश के बावजूद कई परिवारों को अपने परिजनों की कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। कई इलाकों में कीचड़ और मलबा जमा होने से राहत कार्य मुश्किल बना हुआ है। 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद अब तक 1,068 शव बरामद किए गए हैं, जिनमें 400 के केवल आंशिक अवशेष मिले हैं। करीब 4,606 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें 500 विदेशी नागरिक हैं। नेपाल में सड़क और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे कई चीनी नागरिक लापता हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में करीब 100 चीनी नागरिकों का अब तक पता नहीं चला है। नेपाल और चीन के प्रभावित परिवारों की मांग है कि उनके परिजनों की सही और स्पष्ट जानकारी दी जाए। एक नेपाली लड़की ने बताया कि इस आपदा में उसने अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। बाढ़ प्रभावित बिदुर में विस्थापित परिवार अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं, लेकिन उन्हें अब भी दोबारा बाढ़ आने का डर सता रहा है। नेपाल त्रासदी की 4 तस्वीरें… नेपाल के 5 लोगों के शव यूपी में मिले उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी से मिले नेपाल के पांच नागरिकों के शव मंगलवार को सोनौली सीमा पर सौंपे गए। ये लोग नेपाल में आई अचानक बाढ़ में बह गए थे। शव नेपाल पुलिस को सौंपे गए। इनमें दो महिलाएं और तीन पुरुष हैं। नेपाल में शव जलाने की बजाय दफनाए जा रहे नेपाल में बाढ़ के बाद सैकड़ों अज्ञात शवों को जलाने के बजाय दफनाया जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि शवों के अवशेष सुरक्षित रहें और DNA जांच से पहचान कर परिजनों को सौंपे जा सकें। दरअसल, पानी और कीचड़ में लंबे समय तक दबे रहने से शवों की हालत बहुत खराब हो चुकी है। कई शव पानी में फूल गए हैं और तेजी से सड़ रहे हैं। इससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है। दूसरी तरफ शवगृह और अस्थायी केंद्र भी शवों से भर चुके हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना संभव नहीं है। यही वजह है कि अज्ञात शवों को सामूहिक कब्रों में दफनाया जा रहा है।

नेपाल बाढ़ में अबतक 1068 लोगों की मौत:4600 से ज्यादा की तलाश जारी; एक लड़की ने 17 रिश्तेदारों को खोया; चीन के 100 नागरिक लापता

नेपाल में बाढ़ के एक हफ्ते बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। आपदा में लापता लोगों की तलाश के बावजूद कई परिवारों को अपने परिजनों की कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। कई इलाकों में कीचड़ और मलबा जमा होने से राहत कार्य मुश्किल बना हुआ है। 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद अब तक 1,068 शव बरामद किए गए हैं, जिनमें 400 के केवल आंशिक अवशेष मिले हैं। करीब 4,606 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें 500 विदेशी नागरिक हैं। नेपाल में सड़क और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे कई चीनी नागरिक लापता हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में करीब 100 चीनी नागरिकों का अब तक पता नहीं चला है। नेपाल और चीन के प्रभावित परिवारों की मांग है कि उनके परिजनों की सही और स्पष्ट जानकारी दी जाए। एक नेपाली लड़की ने बताया कि इस आपदा में उसने अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। बाढ़ प्रभावित बिदुर में विस्थापित परिवार अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं, लेकिन उन्हें अब भी दोबारा बाढ़ आने का डर सता रहा है। नेपाल त्रासदी की 4 तस्वीरें… खबर से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…