नेपाल की टनल से 9 दिन बाद जिन संजय शाह को निकाला गया क्या वो मंत्र के सहारे जिंदा रहे?

नेपाल में आई तबाही के असर अब तक वहां दिख रहा है। इस विनाशकारी बाढ़ में अब तक एक हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 2000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। वहीं इस भीषण तबाही के बीच ऐसी भी कहानियां भी सामने आ रही हैं, जिससे लोगों को हौसला मिल रहा है। ऐसी ही कहानी नेपाल के एक पावर प्लांट में काम करने वाले संजय साह की सामने आई है। संजय साह को नौ दिनों बाद टनल से रेस्क्यू किया गया है।

कमाल की है संजय साह की कहानी 

बता दें कि, पावर प्लांट में काम करने वाले संजय साह के सामने उस वक्त मुश्किल फैसला था, जब प्लांट के पास पहाड़ का बड़ा हिस्सा टूटकर गिर गया। वह चाहते तो अपनी जान बचाने के लिए वहां से निकल सकते थे, लेकिन उन्होंने रुककर दूसरे लोगों की मदद करने का फैसला किया। करीब नौ दिन तक बर्फ, पत्थरों और मलबे के बीच फंसे रहने के बाद शुक्रवार को संजय और एक अन्य कर्मचारी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस बचाव से इस बड़ी आपदा के बाद लापता लोगों की तलाश कर रही टीमों को भी नई उम्मीद मिली है।

टनल से नौ दिन बाद किया गया रेस्क्यू

नेपाल के अधिकारियों की ओर से जारी किए गए एक वीडियो में 30 वर्षीय संजय साह स्ट्रेचर पर लेटे नजर आए। उनके चेहरे पर ऑक्सीजन मास्क लगा हुआ था। उन्होंने सेना के अधिकारियों को बताया, “मैं टनल के कंट्रोल रूम में था। आमतौर पर वहां चार से छह लोग रहते हैं, लेकिन उस दिन करीब 40 से 45 लोग मौजूद हो सकते थे। मेरी जिम्मेदारी सभी की जान बचाना थी। जब इतना बड़ा हादसा हुआ, तब मेरा वहां से भागना सही नहीं होता।”

लगातार किया मंत्रों का जाप

उन्होंने बताया कि जैसे ही उन्हें ऊपर पहाड़ पर हादसा होने की जानकारी मिली, उन्होंने सुरंग में मौजूद लोगों को तुरंत सतर्क किया और बाहर निकलने के लिए कहा। हालांकि, खुद बाहर जाने का मौका उन्हें नहीं मिल पाया और जब तक उन्होंने निकलने की कोशिश की, तब तक रास्ता बंद हो चुका था। अधिकारियों के मुताबिक, त्रिशूली नदी के किनारे बने छह हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में करीब 900 लोगों के फंसे होने की आशंका है। साह ने बताया कि उन्होंने सुरंग में बिताए उन नौ दिनों के दौरान हिम्मत बनाए रखने के लिए मंत्रों का जाप किया।

फिलहाल हॉस्पिटल में कराया गया भर्ती 

सुरंग के अंदर तीन-चार अन्य मजदूरों से संपर्क बनाए रखा और बताया कि कुछ लोग अभी भी पहाड़ के अंदर फंसे हो सकते हैं। साह और उनके साथ बचाए गए कबीर महारजन, जो मैकेनिकल सुपरवाइजर हैं, इस हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से सुरक्षित निकाले गए पहले मजदूर हैं। हादसे के कुछ घंटे बाद कुछ मजदूर दूसरी सुरंग से बाहर निकलने में सफल रहे थे। नेपाली सेना की ओर से जारी वीडियो में साह को एक मजदूर की पीठ पर ले जाकर बाहर लाते हुए देखा गया, इस दौरान उनका चेहरा मिट्टी और कीचड़ से भरा हुआ था। बचाए गए संजय साह और कबीर महारजन को इलाज के लिए काठमांडू के एक आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां दोनों को आईसीयू में रखा गया है।

 

Top News 4 September: देशभर में जन्माष्टमी की धूम, ISRO का EOS-05 लॉन्च, क्रूड 100 डॉलर के करीब

Top News 4 September: देशभर में जन्माष्टमी की धूम, ISRO का EOS-05 लॉन्च, क्रूड 100 डॉलर के करीब

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Top News 4 September : देशभर में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम, इसरों ने अंतरिक्ष में ईओएस-05 उपग्रह प्रक्षेपित किया। इंडियन बास्केट में क्रूड फिर 100 डॉलर के करीब पहुंचा। नेपाल भीषण बाढ़ के बाद भूकंप से थर्राया। अभिजीत दीपके की पीएम मोदी को अनोख चुनौती। 4 सितंबर की बड़ी खबरें :   

 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम 

देशभर में जन्माष्‍टमी पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। मथुरा, वृंदावन समेत देशभर के कृष्ण मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़। शुक्रवार मध्यरात्रि 12 बजे होने वाले कृष्ण जन्मोत्सव की सभी तैयारियां हो चुकी है। पीएम नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दी। ALSO READ: कान्हा की नगरी में गूंजा कृष्ण नाम, जन्मभूमि से निकली भव्य श्रीकृष्णोत्सव शोभायात्रा, भक्तों का उमड़ा सैलाब

 

इसरो ने अंतरिक्ष में भेजा ईओएस-05 उपग्रह

इसरो ने ईओएस-05 उपग्रह का आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण किया। जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट के माध्यम से प्रक्षेपित उपग्रह भारत का पहला अत्याधुनिक भू-तुल्यकालिक इमेजिंग सैटेलाइट है।

 

क्रूड फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब

अमेरिका और ईरान के बीच जंग से तेल की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचती नजर आ रही है। इंडियन बास्केट में आज कच्चे तेल के दाम 99.35 डॉलर प्रति बैरल हो गए। ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 91.92 डॉलर प्रति बैरल है। 

 

नेपाल में भूकंप

नेपाल और तिब्बत में ग्लेशियर आपदा के बाद आई विनाशकारी बाढ़ के बीच गुरुवार को तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप आया। भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के जोशीमठ से करीब 128 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था। भूकंप के बाद फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है। ALSO READ: Tibet Earthquake : भीषण बाढ़ की तबाही के बाद नेपाल पर एक और मुसीबत, हिमालयी क्षेत्र में क्यों मंडरा रहा है खतरा

 

अभिजीत दीपके की पीएम मोदी को चुनौती

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी शैक्षणिक योग्यता पर उठ रहे सवालों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक अनोखी चुनौती दी है। अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई के रिकॉर्ड पर हाल ही में शुरू हुए विवाद के बाद दीपके ने पीएम मोदी से कहा कि चलिए दोनों अपनी-अपनी डिग्री सार्वजनिक करते हैं। ALSO READ: अमेरिका में पढ़ाई पर घिरे अभिजीत दीपके ने PM मोदी को दी चुनौती, जानिए क्या कहा…

बिहार डूबेगा या बचेगा?:नेपाल में दूसरा ग्लेशियर फटने वाला है; 8 दिनों में ऐसा क्या हुआ कि सरकार बोली- हालात गंभीर हैं

बिहार डूबेगा कि बचेगा…नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के 8 दिन बाद अब हर कोई जानना चाहता है। राज्य की 8 नदियां- गंगा, सोन, पुनपुन, कोसी, गंडक, बुढ़ी गंडक, बागमती और घाघरा खतरे के निशान से ऊपर हैं। दूसरी तरफ नेपाल में दूसरे ग्लेशियर के फटने का अलर्ट जारी कर दिया गया है। ऐसा क्यों कहा जा रहा कि अबकी ग्लेशियर फटा तो पटना सहित 10 शहर डूब जाएंगे, हिमालय की चोटी पर क्या चल रहा है, समझेंगे; बूझे की नाही में…। बिहार की चिंता बढ़ाने वाले 3 बड़े फैक्टर 1. नेपाल में फटने वाला है दूसरा ग्लेशियर चीन के जल संसाधन मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल में एक नया ग्लेशियल लेक फटने वाला है। कब फटेगा, इसका सटीक अंदाजा लगाना कठिन है। नया ग्लेशियल लेक लांगटांग लिरुंग हिमालय के पश्चिमी ढलान पर, रसुवा में तेनजिंग के ठीक सामने है। दरअसल… नेपाल से निकलने वाली 7 से 9 बड़ी नदियां बहकर बिहार-UP के मैदानी इलाकों में आती हैं। जब नेपाल के पहाड़ों में भारी बारिश होती है, तो इन्हीं नदियों के जरिए बिहार में बाढ़ का पानी आता है। इसे ऐसे समझिए… केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, कोसी, गंडक, बागमती और घाघरा ही वे नदियां हैं, जो बिहार में बाढ़ लाती हैं। इसलिए अगर अबकी बार ग्लेशियर फटा तो फिर भारी मात्रा में पानी बिहार पहुंचेगा। 2. 8 नदियां उफान पर, दबाव बढ़ा तो टूट जाएंगे बाढ़ ताजा हालात है कि बिहार की आठ नदियां गंगा, सोन, पुनपुन, कोसी, गंडक, बुढ़ी गंडक, बागमती और घघरा खतरे के निशान से ऊपर हैं। 3 सितंबर तक बिहार जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक… वहीं, नेपाल में आई तबाही के दिन 26 अगस्त से 3 सितंबर की सुबह 8 बजे तक बिहार में 3 बैराज से 1.98 करोड़ क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। एक क्यूसेक पानी यानी 28.3 लीटर/प्रति सेकंड। मतलब 56,119.4 करोड़ लीटर/प्रति सेकंड पानी बिहार में 9 दिन के अंदर आ चुका है। मतलब अगर नेपाल में दूसरा ग्लेशियर टूटा तो बिहार में हालात खराब हो जाएंगे। क्योंकि अभी ही नदियों में पानी काफी बढ़ गया है। आगे पानी आने पर तबाही ही मचेगी। 3. नेपाल में बारिश का अलर्ट, नदियों में बढ़ेगा पानी बिहार की सबसे बड़ी चिंता नेपाल में भारी बारिश का अलर्ट है। नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग के मुताबिक, भोटेकोशी और त्रिशूली नदी फिलहाल चेतावनी स्तर से नीचे बह रही हैं, फिर भी रसुवा और नुवाकोट में अचानक बाढ़ आने की ज्यादा संभावना है। दोनों जिलों में भोटेकोशी, त्रिशूली और छोटी नदियों का जलस्तर काफी बढ़ सकता है, जिससे अचानक बाढ़ आने का भारी खतरा है। वहीं, नेपाल के मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों यानी 6 सितंबर तक भारी बारिश की चेतावनी दी है। नेपाल के जल संसाधन विभाग ने कहा कि कोशी बेसिन की सप्तकोशी, तमोर, अरुण, दूधकोशी, तामाकोशी और सुनकोशी तथा नारायणी बेसिन की नारायणी, त्रिशूली, बूढ़ी गंडकी, मर्स्यांगदी, सेती और काली गंडकी जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। विभाग ने नेपाल की छोटी नदियों में पानी बढ़ने की भी बातें कही है। इधर… पटना मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, 5 सितंबर तक पूरे बिहार में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और सीवान जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। जबकि, पटना, नालंदा, जहानाबाद, नवादा, गया, लखीसराय, शेखपुरा और बेगूसराय में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। …तो क्या बड़े शहर भी डूब सकते हैं? बिल्कुल। राज्य की नदियों में बढ़ते पानी से 13 जिले दरभंगा, मधुबनी, पश्चिम चंपारण, कटिहार, मधेपुरा, पूर्णिया, सहरसा, खगड़िया, वैशाली, बेगूसराय, भागलपुर, समस्तीपुर, मुंगेर प्रभावित हैं। बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग ने 3 सितंबर की शाम अलर्ट जारी करते हुए कहा कि पटना में गंगा नदी हाई फ्लड लेबल को क्रास करने वाली है। इसलिए सभी पदाधिकारी और लोग अलर्ट रहें। निचले इलाकों को बचाने के लिए तुरंत तैयारी में जुट जाएं। विभाग ने कहा है कि दक्षिण बिहार की सोन, पुनपुन, दरधा में बढ़ते पानी को देखते हुए नालंदा, भोजपुर, वैशाली, सारण, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद में लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। मतलब साफ है कि अगर नेपाल से और पानी आया तो बिहार के कम से कम 10 से ज्यादा शहर डूब सकते हैं। जिसमें राजधानी पटना भी शामिल हो सकता है। ऐसा पहले भी हो चुका है…

Tibet Earthquake : भीषण बाढ़ की तबाही के बाद नेपाल पर एक और मुसीबत, हिमालयी क्षेत्र में क्यों मंडरा रहा है खतरा

Tibet Earthquake : भीषण बाढ़ की तबाही के बाद नेपाल पर एक और मुसीबत, हिमालयी क्षेत्र में क्यों मंडरा रहा है खतरा

Nepal flood

Tibet Earthquake : नेपाल और तिब्बत में ग्लेशियर आपदा के बाद आई विनाशकारी बाढ़ के बीच गुरुवार को तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप आया। भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के जोशीमठ से करीब 128 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था। भूकंप के बाद फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है। अधिकारियों की ओर से नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

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नेपाल में बाढ़ के बीच आया भूकंप

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तिब्बत में भूकंप ऐसे समय आया है, जब हिमालयी क्षेत्र पहले से ही एक बड़ी ग्लेशियर आपदा के बाद आई भीषण बाढ़ से जूझ रहा है। इस आपदा का असर तिब्बत और नेपाल के कई इलाकों में देखने को मिला है। ताजा अपडेट के मुताबिक, इस आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 1,252 हो गई है, जबकि कम से कम 4,216 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ और ग्लेशियर से जुड़ी इस आपदा ने हिमालयी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है।

 

5.0 तीव्रता के भूकंप का क्या मतलब है?

 

NCS के अनुसार, तिब्बत में आए भूकंप की तीव्रता 5.0 थी। इस तीव्रता के भूकंप को सामान्यतः मध्यम श्रेणी का भूकंप माना जाता है। इस तरह के भूकंप में इमारतों में स्पष्ट कंपन महसूस किया जा सकता है। कमजोर या खराब निर्माण वाली इमारतों को मामूली से मध्यम नुकसान पहुंच सकता है, जबकि अच्छी तरह से निर्मित संरचनाएं आम तौर पर गंभीर संरचनात्मक क्षति से बची रहती हैं।

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सिर्फ 10 किलोमीटर गहराई में आया भूकंप

 

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र जमीन के अंदर करीब 10 किलोमीटर की गहराई में था। कम गहराई वाले भूकंपों को अपेक्षाकृत ज्यादा नुकसानदायक माना जाता है, क्योंकि भूकंपीय ऊर्जा को सतह तक पहुंचने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ती है। इस वजह से ऊर्जा रास्ते में कम कमजोर होती है और सतह पर झटके ज्यादा महसूस किए जा सकते हैं।

 

हिमालयी क्षेत्र में लगातार बनी हुई चिंता

 

तिब्बत में आए इस भूकंप ने हिमालयी क्षेत्र में जारी प्राकृतिक आपदाओं के बीच चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में ग्लेशियर आपदा के बाद तिब्बत और नेपाल में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। ऐसे में भूकंप और अन्य प्राकृतिक घटनाओं पर भारत, नेपाल और तिब्बत के अधिकारियों की नजर बनी हुई है। फिलहाल तिब्बत में आए 5.0 तीव्रता के भूकंप से किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

Nepal Flood News: नेपाल की उस लड़की की कहानी जिसके घर के 17 लोग विनाशकारी बाढ़ में मारे गए

Nepal Flood News: नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। हिमालयी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक रासुवा में तबाही का मंजर अभी भी साफ दिखाई दे रहा है। घर, सड़कें और पुल बह चुके हैं। बड़ी संख्या में परिवार अपने घरों से विस्थापित होकर अस्थायी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। इस त्रासदी के बीच एक युवती की कहानी ने इस आपदा की भयावहता को सामने ला दिया है।

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, रासुवा के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रहने वाली एक युवती ने अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। उसका घर भी बाढ़ में बह गया। उसके पास अब अपने परिवार की यादों के तौर पर सिर्फ मोबाइल फोन में मौजूद तस्वीरें बची हैं। नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,100 के पार हो गई है।

एक झटके में पूरा परिवार उजड़ गया

कॉपिला तमांग नाम की इस युवती के परिवार ने इससे पहले 2015 के विनाशकारी भूकंप की त्रासदी भी झेली थी। उस आपदा में उनका घर तबाह हुआ था। लेकिन परिवार ने दोबारा जिंदगी शुरू की और नया घर बनाया। इस बार बाढ़ ने उस नए घर को भी नहीं छोड़ा। अमेरिकी चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ में उनकी मां, बहन, दादी समेत परिवार के कुल 17 सदस्य मारे गए। इनमें महज एक महीने का एक बच्चा भी शामिल था।

वापस लौटने पर सबकुछ बर्बाद!

कॉपिला उस समय काठमांडू में थीं। जैसे ही उन्हें पहाड़ी इलाके में बाढ़ आने और परिवार के फंसने की खबर मिली, वह वापस लौट गईं। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उन्होंने CNN से कहा कि उन्हें बेहद अकेलापन महसूस हो रहा है। परिवार के छोटे बच्चे के लिए यह त्रासदी और भी मुश्किल है। उनका सात साल का छोटा भाई अभी यह समझ नहीं पा रहा कि उसकी मां अब वापस नहीं आएगी। कॉपिला ने कहा कि अब उसे अपने छोटे भाई के लिए खुद मजबूत बनना होगा।

राहत शिविर में रात होते ही सताने लगता है डर

बाढ़ से बचाए गए और विस्थापित परिवारों को फिलहाल अस्थायी शिविरों, स्कूलों और अधूरी इमारतों में शरण दी गई है। लेकिन यहां पहुंचने के बाद भी लोगों को सुरक्षा का भरोसा नहीं मिल पा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई परिवारों को अब भी डर है कि कहीं दोबारा बाढ़ न आ जाए। रात में जब भी पानी बढ़ने या नई बाढ़ की चेतावनी मिलती है, कुछ लोग सुरक्षित ऊंचाई की तलाश में जंगल और पहाड़ी इलाकों की ओर चले जाते हैं।

कई विस्थापित लोग खुले या अधूरे भवनों की छतों पर रात गुजार रहे हैं। एक 17 वर्षीय युवक ने सीएनएस से बातचीत में बताया कि उसके दो छोटे भाई-बहन भी बाढ़ में मारे गए। राहत शिविरों में रात के समय लोग अपने परिवार के सदस्यों को याद कर रोते हैं। कई लोगों के लिए नींद तक मुश्किल हो गई है।

13 साल की बच्ची भी बाढ़ के बीच फंसी

नेपाल की इस आपदा में बच्चों की मुश्किलें भी बेहद गंभीर हैं। एक 13 वर्षीय बच्ची ने बताया कि बाढ़ आने के समय वह अपने परिवार से अलग हो गई थी। उसे कुछ समय तक यह तक पता नहीं था कि उसके माता-पिता कहां हैं। UNICEF के अनुसार, 26 अगस्त को आई बाढ़ से नेपाल के रासुवा, नुवाकोट और धादिंग इलाकों में कम से कम 17,000 बच्चे प्रभावित हुए हैं।

इस विनाशकारी तबाही में कई स्कूल पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। हजारों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। एक अन्य मामले में स्कूल से लौटते समय बाढ़ की चपेट में आए बच्चों को अपनी जान बचाने के लिए ऊंचे स्थानों की ओर भागना पड़ा। कुछ बच्चों ने पेड़ों पर चढ़कर अपनी जान बचाई।

लोगों के सामने सिर्फ घर नहीं, पूरी जिंदगी दोबारा बसाने की चुनौती

इस बाढ़ ने नेपाल के प्रभावित इलाकों में लोगों से सिर्फ उनके घर और सामान ही नहीं छीने। बल्कि कई परिवारों के पूरे के पूरे सदस्य खत्म हो गए। कई लोगों को अभी तक अपने लापता परिजनों के शव नहीं मिले हैं, जिससे उनके लिए इस त्रासदी को स्वीकार करना और भी मुश्किल हो गया है।

CNN के अनुसार, कुछ परिवारों के लापता सदस्य अभी तक आधिकारिक लापता लोगों की लिस्ट में भी दर्ज नहीं हो पाए थे। अब राहत शिविरों में रहने वाले लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगली रात सुरक्षित होगी या फिर एक और बाढ़ उन्हें अपना सब कुछ छोड़कर भागने पर मजबूर कर देगी। उनके पास घर लौटने के लिए कई जगह घर ही नहीं बचे हैं।

मृतकों की संख्या 1,100 के पार

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बुधवार को बढ़कर 1,127 हो गई। हिमालयी क्षेत्र में आई इस आपदा के एक सप्ताह बाद भी बचावकर्मी हजारों लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, चितवन से 348, नवलपरासी पूर्व से 217, नवलपरासी पश्चिम से 190 और नुवाकोट से 155 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह गोरखा से 66, धादिंग से 59, रसुवा से 45 और तनाहूं से 38 शव बरामद हुए हैं।

पुलिस ने बताया कि 1,113 शवों का पोस्टमार्टम और कानूनी पहचान की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। जबकि 95 शव परिजनों को सौंपे जा चुके हैं। लापता परिजनों की पहचान में परिवारों की मदद के लिए 911 अज्ञात शवों का विवरण नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। पुलिस के मुताबिक, अब तक सुरक्षा बलों ने प्रभावित इलाकों से 6,541 लोगों को सुरक्षित निकाला है। जबकि 4,858 लापता लोगों की तलाश अभी जारी है।

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अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में 7,912 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है।  नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के ढहने या हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आ गई थी। इस बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई थी।

Nepal Floods: बाढ़ से भयानक तबाही के बाद भारत-अमेरिका-चीन से मुआवजा क्यों मांगने लगा नेपाल?

Nepal Floods: नेपाल ने विनाशकारी बाढ़ के बाद अब इंटरनेशनल मदद की मांग का अपना रुख बदलते हुए ‘क्लाइमेट मुआवजे’ की मांग उठाई है। नेपाल का कहना है कि जलवायु संकट पैदा करने में उसका योगदान बेहद कम है। लेकिन ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और चरम मौसम की घटनाओं का सबसे ज्यादा खामियाजा हिमालयी देश को भुगतना पड़ रहा है। ‘द काठमांडू पोस्ट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल ने मानवीय सहायता मांगने के बजाय विनाशकारी अचानक आई बाढ़ के लिए ‘क्लाइमेट मुआवजे’ की मांग करने का अपना कूटनीतिक रुख बदल लिया है।

नेपाल का तर्क है कि यह हिमालयी देश उस जलवायु संकट का खामियाजा भुगत रहा है, जिसे पैदा करने में उसकी भूमिका बहुत कम थी ‘द काठमांडू पोस्ट’ के मुताबिक, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि उनका देश अब सहायता को महज मानवीय मदद के तौर पर नहीं देख रहा, बल्कि इसे जलवायु जिम्मेदारी और मुआवजे के मुद्दे से जोड़ रहा है। यह विनाशकारी बाढ़ 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के गिरने या हिमस्खलन के कारण आई थी।

‘यह दान नहीं, न्याय और मुआवजे का मामला’

विदेश मंत्री ने कहा कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में नेपाल का योगदान लगभग नगण्य है। इसके बावजूद जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और हिमालयी आपदाओं का सामना नेपाल को करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि नेपाल अपनी कूटनीतिक रणनीति को ‘मदद’ से ‘न्याय और मुआवजे’ की ओर ले जा रहा है। उनके मुताबिक यह किसी देश की ओर से दी जाने वाली चैरिटी नहीं, बल्कि जलवायु संकट के लिए जिम्मेदारी और मुआवजे का सवाल है।

भारत, चीन और अमेरिका को बताया बड़ा प्रदूषक

नेपाल के विदेश मंत्री ने चीन, अमेरिका और भारत को दुनिया के प्रमुख इंडस्ट्रियल एमिटर्स में शामिल बताते हुए कहा कि इन देशों की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है कि वे नेपाल जैसे जलवायु संवेदनशील देशों को मुआवजा दें। खनाल ने कहा कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा एमिटर्स है, उसके बाद अमेरिका और भारत का स्थान आता है। उन्होंने दावा किया कि नेपाल ने इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को औपचारिक क्लाइमेट कंपेंसेशन क्लेम लेटर भी भेजा है।

‘यह बाढ़ नहीं, हिमालयी सुनामी थी’

विदेश मंत्री ने हालिया आपदा की भयावहता बताते हुए इसे सामान्य बाढ़ मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पानी की लहरें 20 से 30 मीटर तक ऊंची थीं। उनकी रफ्तार करीब 180 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई गई। इसी वजह से उन्होंने इसे ‘हिमालयी सुनामी’ करार दिया। बाढ़ के पानी ने घरों, गाड़ियों, सड़कों और पुलों को बहा दिया। जबकि कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा।

नेपाल ने UN से मांगी 5 अरब डॉलर की मदद

आपदा के बाद नेपाल ने पुनर्निर्माण और रिकवरी की लागत करीब 5 अरब डॉलर आंकी है। साथ ही, देश ने जलवायु आपदाओं से उबरने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े विशेष फंड से तत्काल वित्तीय सहायता की मांग की है। नेपाल के जलवायु अधिकारियों का कहना है कि मानव जनित जलवायु परिवर्तन ने उन परिस्थितियों को और गंभीर बनाया, जिनके बीच यह भयावह आपदा सामने आई।

नेपाल का तर्क है कि जो देश जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे कम जिम्मेदार हैं, वे ही अक्सर इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि हिमालय के ग्लेशियर लगातार पिघलते रहे तो गंगा और त्रिशूली जैसी नदियों पर निर्भर दक्षिण एशिया के अरबों लोगों की जल सुरक्षा भी गंभीर खतरे में पड़ सकती है।

नेपाल में मौतों का आंकड़ा 1,000 के करीब

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर मंगलवार को 987 हो गई> सुरक्षा बल देश के अलग-अलग हिस्सों में तलाश एवं बचाव अभियान के दौरान और शव बरामद कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, 3,916 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में नेपाल सेना समेत सुरक्षा बलों ने तलाश और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

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नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, चितवन से 321 शव, नवलपरासी पूर्व से 216, नवलपरासी पश्चिम से 170 और नुवाकोट से 95 शव बरामद किए गए हैं।इसी तरह, गोरखा से 65, धादिंग से 55, तनहूं से 38 और रसुवा से 27 शव बरामद किए गए हैं। NDRRMAए ने बताया कि अचानक आई बाढ़ से आठ जिले प्रभावित हुए हैं।