Delhi Weather: दिल्ली में झमाझम बारिश से बदला मौसम, AQI 116 दर्ज; जानें अगले 6 दिन कैसा रहेगा हाल?

Delhi Weather: दिल्ली में हफ्ते की शुरुआत जोरदार बारिश के साथ हुई। सोमवार, 12 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी में भारी बारिश और आंधी-तूफान का दौर चला। जिसे देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ घंटों तक आंधी-तूफ़ान जारी रहने की संभावना है।

IMD के ताजा अनुमान के मुताबिक, बारिश के इस दौर के बाद अगले छह दिनों तक आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं, लेकिन बारिश होने की संभावना कम है। हालांकि, अभी हो रही भारी बारिश के बावजूद, आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान 31 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है।

वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, 12 अक्टूबर को सुबह 6 बजे दिल्ली के आनंद विहार में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगभग 116 था, जिसमें मुख्य प्रदूषक PM 10 की मात्रा सबसे ज्यादा रही।

बारिश की बात करें तो इससे इलाके में ठंडक बढ़ गई है और आसमान में बादल छाए रहने से मौसम में काफी बदलाव आया है। हालांकि, इस भारी बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में जलजमाव हो गया है, खासकर करोल बाग के पास झंडेवालान मंदिर इलाके में।

13-17 अक्टूबर तक कैसा रहेगा मौसम?

रविवार शाम को जारी IMD के सात दिनों के मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक, 13 अक्टूबर को दिल्ली में अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। वहीं, 14 अक्टूबर को अधिकतम तापमान बढ़कर 33 से 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है।

मौसम विभाग के अनुसार, 15 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 31 से 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। वहीं, 16 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। इन सभी दिनों में आसमान में हल्के बादल छाए रह सकते हैं, लेकिन बारिश होने की संभावना नहीं है।

इसके अलावा, 17 अक्टूबर की बात करें तो दिल्ली में अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक, इस दिन भी आसमान में हल्के बादल छाए रह सकते हैं, लेकिन बारिश होने की संभावना नहीं है।

IMD  ने ट्रैफिक को लेकर दी चेतावनी

IMD ने ट्रैफिक में रुकावट की चेतावनी भी दी है और लोगों को सलाह दी है कि वे अपनी मंजिल के लिए निकलने से पहले ट्रैफिक जाम की स्थिति देख लें। इस दौरान गाड़ी दुर्घटनाओं की ज्यादा संभावना और निचले इलाकों में पानी भरने को लेकर लोगों के लिए चिंता जताई गई है। विभाग ने लोगों से ट्रैफिक से जुड़ी सलाह मानने और पानी भरने वाले इलाकों से बचने की अपील की है।

बता दें कि पिछले 24 घंटों में, IMD ने दिल्ली में अधिकतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की, जबकि न्यूनतम तापमान 21 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच स्थिर रहा। अधिकतम तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।

गौरतलब है कि राजधानी में बारिश का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर लगातार पड़ रहा है, इसलिए लोगों से सतर्क रहने और मौसम में और बदलावों के लिए तैयार रहने की अपील की गई है।

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Nepal Flood alert: पड़ोसी देश नेपाल में एक बार फिर से बाढ़-लैंडस्लाइड से हाहाकार मच गया है। गोरखा जिले में रविवार (11 अक्टूबर) तड़के बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। बाढ़ से 35 से अधिक मकान और पुल नदी में बह गए। घटना के बाद प्रशासन ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और ऊंचाई वाले इलाकों में शरण लेने की सलाह दी है। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल इस घटना में किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं है। गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि उन्हें रविवार तड़के करीब 4:35 बजे बड़े पैमाने पर बाढ़ आने की सूचना मिली।

शुरुआती जानकारी के अनुसार, बाढ़ चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका-6 क्षेत्र से नीचे की ओर आई और नदी के किनारे स्थित बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाली सेना की एक टुकड़ी को खोज और बचाव अभियान के लिए हवाई और जमीनी रास्ते से भेजा गया है। इस टुकड़ी ने जगत इलाके से 6 लोगों को हवाई रास्ते से सुरक्षित बाहर निकाला। यह इलाका लैंडस्लाइड की चपेट में आ सकता है।

36 मकान और पुल बहे

‘काठमांडू पोस्ट’ की खबर के अनुसार, चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के वार्ड संख्या तीन के अध्यक्ष राम कुमार गुरुंग ने बताया कि बूढ़ी गंडकी नदी में आई बाढ़ से सल्लेरी, पायूका और जगत में नदी किनारे स्थित मकान बह गए। बाढ़ में वार्ड को जोड़ने वाला एक पुल भी बह गया। गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि शुरुआती खबरों के अनुसार, सिउरीबास के ऊपरी इलाके में लैंडस्लाइड हुआ था।

उन्होंने कहा कि अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। स्थानीय लोगों को संदेह है कि चुमनुब्री-6 में लोकपा और चुमलिंग के बीच बूढ़ी गंडकी की सहायक नदी स्यार का प्रवाह बाधित हो गया होगा, जिससे बाढ़ आई। अधिकारियों ने बताया कि अचानक आई बाढ़ से उत्तरी गोरखा के कई इलाकों में 35 से अधिक मकान बह गए।

लैंडस्लाइड से रास्ता बंद होने के बाद आई बाढ़

मुख्य जिला अधिकारी मिश्रा के मुताबिक, शुरुआती रिपोर्टों में सिउरीबास के ऊपर लैंडस्लाइड होने की बात सामने आई है। चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के अध्यक्ष नीमा लामा ने बताया कि भूस्खलन के कारण चुमके खोला नामक जलधारा का रास्ता बाधित हो गया था। इसके बाद पानी का बहाव बढ़ा और अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई। इस घटना के कारण नदी के आसपास रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ गया। प्रशासन को आशंका है कि तेज बहाव से नदी के किनारे बसे अन्य इलाकों में भी नुकसान हुआ हो सकता है।

कई लोग लापता

नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाढ़ में कई पुल बह गए हैं। फिलहाल, चार लोग लापता बताए जा रहे हैं। नेपाली सेना उनकी तलाश कर रही है। न्यूज पोर्टल ‘ऑनलाइन खबर’ के अनुसार, चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका की उपाध्यक्ष लक्ष्मी गुरुंग ने कहा कि रविवार सुबह बूढ़ी गंडकी नदी में आई बाढ़ ने उन्हें रसुवा में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ की याद दिला दी। उन्होंने कहा, “बूढ़ी गंडकी में आई बाढ़ ने भोटेकोशी की बाढ़ की याद दिला दी। इसमें दर्जनों मकान बह गए हैं। फिलहाल नुकसान का सही आकलन करना संभव नहीं है।”

जगत में 5 से 7 मकान बहने की सूचना

गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा के अनुसार, जगत इलाके में नदी के तल के पास बने पांच से सात मकान बाढ़ के पानी में बह गए। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि नदी के निचले हिस्सों में कुछ अन्य मकान भी बह गए हो सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं मिली है। प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए आगे की जानकारी का इंतजार है।

नेपाल की सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, “बुढ़ी गंडक नदी में बाढ़ आने के बाद नेपाली सेना की एक टुकड़ी को खोज और बचाव अभियान के लिए हवाई और ज़मीनी रास्ते से भेजा गया। इस टुकड़ी ने जगत इलाके से 6 लोगों को हवाई रास्ते से सुरक्षित बाहर निकाला। यह इलाका भूस्खलन की चपेट में आ सकता है। काठमांडू में तैनात कम्पोजिट क्विक रिएक्शन टीम को भी हवाई जहाज से इसी इलाके में भेजा गया है।”

बूढ़ी गंडकी नदी के किनारे रहने वालों को चेतावनी

बाढ़ के बाद प्रशासन ने बूढ़ी गंडकी नदी के किनारे स्थित बस्तियों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है। लोगों से नदी के करीब जाने से बचने और सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की गई है। अचानक आई बाढ़ ने एक बार फिर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और नदी के जलस्तर में तेज बदलाव से पैदा होने वाले खतरे को उजागर किया है।

ऐसे क्षेत्रों में भूस्खलन से जलधारा का रास्ता अवरुद्ध होने पर पानी जमा हो सकता है। बैरिकेट्स टूटने या पानी का रास्ता बदलने से अचानक तेज बहाव पैदा हो सकता है। फिलहाल, गोरखा जिले में बाढ़ से हुए नुकसान की पूरी तस्वीर सामने आना बाकी है। प्रशासन की प्राथमिकता नदी के किनारे बसे लोगों को सुरक्षित रखना और प्रभावित इलाकों की स्थिति का आकलन करना है।

NDRRMA ने जारी किया अलर्ट

सुबह 6:40 बजे, नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने अपने बाढ़ पूर्वानुमान विभाग से एक SMS अलर्ट भेजा। इसमें लोगों से कहा गया कि वे बाढ़ का पानी उतरने तक नदी के पास न जाएं। खासकर त्रिशूली दोभान तक के इलाके में बिल्कुल न जाएं। ऊंची जगहों पर ही रहें। अधिकारी अभी भी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि पानी का स्तर अचानक क्यों बढ़ा और उसमें मिट्टी और गाद क्यों बहकर आई।

स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि सुबह करीब 4 बजे नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और इसके बहाव की आवाज दूर से ही सुनी जा सकती थी। चुमनुबरी ग्रामीण नगरपालिका के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी नारायण सपकोटा ने यह जानकारी दी। मिश्रा ने कहा कि जिला कार्यालय जमीनी स्तर से जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने बताया कि स्थिति का हवाई जायजा लेने के लिए नेपाली सेना का हेलीकॉप्टर भेजने की तैयारी चल रही है।

बिहार में भी बाढ़ का खतरा

बूढ़ी गंडकी नदी में भयानक बाढ़ आने से भारतीय राज्य बिहार में भी खतरा बढ़ गया है। अधिकारियों ने कहा कि यह नदी आगे चलकर त्रिशूली से मिलती है। फिर दोनों का पानी देवघाट के पास नारायणी नदी में पहुंचता है। यही नदी भारत में गंडक के नाम से बिहार में आती है। फिर आगे गंगा में मिल जाती है। ऐसे में अगर पानी का बहाव बढ़ता है, तो बिहार में गंडक किनारे बसे इलाकों पर असर पड़ सकता है। इनमें पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और वैशाली जैसे जिले शामिल हैं। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि नेपाल में आई बाढ़ से बिहार में जलस्तर बढ़ेगा या नहीं।

इससे पहले नेपाल में 26 अगस्त 2026 को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में विनाशकारी बाढ़ आई थी, जिसने कई जिलों में भारी तबाही मचाई थी। उस बाढ़ में बड़ी संख्या में लोग मारे गए और हजारों लोग लापता बताए गए थे। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, 26 अगस्त 2026 की बाढ़ में कम से कम 1,455 लोगों की मौत हुई थी और 5,285 लोग लापता थे।

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हिमालय की 4 खतरनाक ग्लेशियर झीलों का पानी सुखाएगा नेपाल! क्या है पूरी तैयारी डिटेल में जानिए

काठमांडू। नेपाल में ग्लेशियल झीलों से आने वाली बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया जा रहा है। सरकार ऊंचे पहाड़ी इलाकों की चार खतरनाक झीलों का पानी कम करने की तैयारी कर रही है। इससे झीलों का प्राकृतिक बांध टूटने और अचानक नीचे के इलाकों में बाढ़ आने का खतरा कम करने में मदद मिलेगी।

इन चार झीलों का पानी कम किया जायेगा

रिपोर्टर गोपाल शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल इस योजना में थुलागी, लोअर बरुन, लुमडिंग त्सो और होंगू-2 झीलों को शामिल कर रहा है। ये झीलें करीब 4,050 से 5,483 मीटर की ऊंचाई पर हैं और इन्हें नेपाल की ज्यादा खतरे वाली ग्लेशियल झीलों में गिना जाता है।

इन झीलों का पानी कंट्रोल करके पास की नदियों में छोड़ा जाएगा। इसके लिए नहरों और खास गेट वाले स्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया जाएगा। लेकिन असली काम शुरू करने से पहले इन झीलों की जांच और डिजाइन तैयार किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रोसेस में छह साल तक लग सकते हैं।

50 मिलियन डॉलर का प्रोजेक्ट है

इस पूरे काम पर करीब 50 मिलियन डॉलर खर्च होने का अनुमान है। इसमें झीलों का पानी कम करने के साथ बाढ़ की निगरानी और लोगों को समय पर चेतावनी भी मिलेगी।

इस प्रोजेक्ट में सेंसर लगाए जाएंगे और बाढ़ आने से पहले इसकी जानकारी दी जाएगी। नीचे रहने वाले लोगों को समय पर खतरे के बारे में बताया जाएगा, ताकि वे पहले से सावधान हो सकें। इस काम में ग्रीन क्लाइमेट फंड, UNDP और नेपाल सरकार मदद कर रहे हैं।

ग्लेशियल झीलों से क्यों बढ़ रहा खतरा?

ग्लेशियर पिघलने से पहाड़ों में बनी झीलों में पानी बढ़ रहा है। यदि इन झीलों को रोकने वाली प्राकृतिक दीवार टूट जाए, तो बहुत सारा पानी अचानक नीचे आ सकता है। इसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF कहा जाता है। भूकंप, हिमस्खलन और खराब मौसम से भी इसका खतरा बढ़ सकता है।

नेपाल पहले भी त्सो रोल्पा और इमजा जैसी ग्लेशियल झीलों का पानी कम कर चुका है। अब हाल की बाढ़ के बाद ऐसी झीलों से होने वाले खतरे को कम करने की जरूरत पर और ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।

बिहार की बाढ़ में सैकड़ों लोगों का सहारा बना प्रशांत का Floating Station | Bihar Flood Relief

बिहार की बाढ़ में सैकड़ों लोगों का सहारा बना प्रशांत का Floating Station | Bihar Flood Relief

बिहार की बाढ़ में जब रास्ते डूब गए, तब प्रशांत कुमार ने मदद का रास्ता तैरता बना दिया।
उनका Floating Water Station बाढ़ प्रभावित इलाकों में सैकड़ों लोगों तक पानी, दवाइयाँ और ज़रूरी सामान पहुँचा रहा है, इसमें लगा Water Purification System हर दिन 4,000 लीटर साफ़ और सुरक्षित पानी उपलब्ध करा सकता है।
एक Engineer की सोच, जो बाढ़ के बीच सैकड़ों लोगों के लिए उम्मीद बन गई।
आइए, प्रशांत की इस सोच का साथ दें, ताकि ऐसे innovative solutions और ज्यादा लोगों तक मदद पहुँचा सकें और बाढ़ के बीच किसी जरूरतमंद तक ज़रूरी सुविधाएँ पहुँचने से न रुकें।

@param_shant
@centreofresilience

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Nepal Flood Alert: नेपाल में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, दारचुला में लैंडस्लाइड से चौलानी नदी का रास्ता रुका; हाई अलर्ट पर प्रशासन

Nepal Flood: नेपाल 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ से हुए नुकसान से अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाया है कि अब एक और चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। नेपाल के दारचुला जिले में बड़े लैंडस्लाइड के बाद चौलानी नदी का बहाव कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ है। इसके चलते प्रशासन ने नदी के आसपास और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अधिकारियों ने अचानक पानी बढ़ने और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने को कहा है। लोगों से कहा गया है कि वे नदी के पास जाने से बचें और किसी भी खतरे की स्थिति में सुरक्षित जगह पर चले जाएं।

भट्टर इलाके में हुआ लैंडस्लाइड

नेपाल के दारचुला जिले के अपी हिमाल रूरल म्युनिसिपैलिटी के भट्टर इलाके में लैंडस्लाइड की वजह से बड़ी मात्रा में मलबा चौलानी नदी में जा गिरा है। इससे नदी का पानी कुछ समय के लिए रुक गया है। प्रशासन को आशंका है कि अगर आगे और लैंडस्लाइड हुआ तो नदी का रास्ता पूरी तरह बंद हो सकता है। ऐसे में अचानक पानी का बहाव बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। प्रशासन ने चौलानी नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। सुरक्षा कर्मियों को भी संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है, ताकि लोगों को समय पर जानकारी दी जा सके और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।

प्रशासन रखें है नजर

सुदूरपश्चिम के मुख्यमंत्री खगराज भट्ट ने अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखने को कहा है। प्रशासन ने बाढ़ या किसी अन्य आपदा की स्थिति में लोगों की मदद के लिए इमरजेंसी फोन नंबर भी जारी किए हैं। आर्म्ड पुलिस फोर्स के मुताबिक, फिलहाल चौलानी नदी का पानी नॉर्मल लेवल पर बह रहा है। इसके बावजूद सुरक्षा टीम को बलांच इलाके में तैनात किया गया है, ताकि नदी की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके और खतरा बढ़ने पर आसपास के लोगों को समय रहते जानकारी दी जा सके।

प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव काम जारी

चौलानी नदी को चमेलिया नदी के नाम से भी जाना जाता है। यह अपी हिमाल क्षेत्र से निकलकर आगे महाकाली नदी में जाकर मिलती है, जो नेपाल और भारत की सीमा का हिस्सा है। नेपाल के कई हिस्से पहले से ही बाढ़ और अचानक आई बाढ़ से प्रभावित हैं। हाल की बारिश और बाढ़ के कारण कई लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है और जान-माल का भी नुकसान हुआ है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम अभी जारी है। ऐसे में चौलानी नदी के बहाव में आई रुकावट ने चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि अगर फिर से तेज बारिश होती है तो नदी का पानी अचानक बढ़ सकता है और स्थिति गंभीर हो सकती है।

नेपाल के मलबे में जिंदगी के निशान तलाशने की आखिरी कोशिश! अपने 36 लापता नागरिकों को बचाने ऑस्ट्रेलिया ने भेजी हाई-टेक ‘ड्रोन फौज’

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद से ही रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भारत सहित कई देश नेपाल की मदद के लिए अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कर रहे हैं और मलबों में फंसे लोगों को निकालने के लिए सर्च अभियान चला रहे हैं। इसी क्रम में ऑस्ट्रेलिया के आपदा राहत विशेषज्ञ भी लोगों की तलाश में शामिल होने के लिए शुक्रवार को नेपाल के लिए रवाना हुए। वहीं, इस भयानक आपदा के बाद ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने अपने 36 लापता नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है।

बता दें कि 26 अगस्त को ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के बाद नेपाल में आई अचानक बाढ़ में अब तक 1,200 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 5,000 लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल सरकार के मुताबिक, लापता लोगों में 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि नेपाल सरकार के अनुरोध पर 15 सदस्यों वाली ‘ऑस्ट्रेलियाई आपदा सहायता प्रतिक्रिया टीम’ को तैनात किया गया है। इस टीम में ज्यादातर सदस्य राज्य की आपातकालीन सेवाओं के ड्रोन पायलट हैं।

ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी ने दी जानकारी

न्यू साउथ वेल्स फायर एंड रेस्क्यू के कमिश्नर जेरेमी फ्यूट्रेल ने शुक्रवार को सिडनी एयरपोर्ट पर पत्रकारों से कहा, “हमें अभी भी उम्मीद है कि कुछ जगहों पर लोग जीवित हो सकते हैं और उम्मीद है कि यह टीम ऐसे लोगों का पता लगाने में मदद कर सकेगी।”

उन्होंने कहा, “इस टीम में मुख्य रूप से हमारे खास ड्रोन के पायलट शामिल हैं।” उन्होंने आगे बताया कि उनके पास अलग-अलग तरह के ड्रोन हैं जो हवा से बड़े इलाकों का सर्वे कर सकते हैं और ऐसी तंग जगहों पर भी जा सकते हैं जहां बचाव कर्मियों का पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

जेरेमी फ्यूट्रेल ने आगे कहा, “हम जो मदद दे रहे हैं, वह नेपाली अधिकारियों के अनुरोध पर दी जा रही है। इसके तहत उन्हें ऐसे कई साधन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनसे उन्हें वाकई मदद मिलेगी।”

उन्होंने कहा, इसके अलावा, ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस के 7 विशेषज्ञ भी शनिवार को नेपाल पहुंचेंगे। ये विशेषज्ञ आपदा में मारे गए या लापता लोगों की पहचान करने में मदद करेंगे।

19 ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी पहले से ही नेपाल में मौजूद 

बता दें कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने गुरुवार को इनकी तैनाती की घोषणा की थी। विदेश मंत्री पेनी वोंग ने बताया कि 19 ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी पहले से ही नेपाल में मौजूद हैं, जिनमें कॉन्सुलर अधिकारी, मानवीय सहायता से जुड़े पुलिसकर्मी और रक्षा व पुलिस के जवान शामिल हैं।

गौरतलब है कि नेपाल के विदेश मंत्री ने पिछले हफ्ते कहा था कि उन्हें विशेष और तकनीकी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत है।

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि बचे हुए लोगों के मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है, लेकिन चीन की सीमा के पास बचाव कार्य जारी है।

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, लापता ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के कुछ रिश्तेदार भी खुद तलाश करने के लिए नेपाल गए हैं।

ऑस्ट्रेलिया के ट्रेजरर जिम चाल्मर्स ने शुक्रवार को बताया कि 36 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक अभी भी लापता हैं, जबकि रात भर में दो लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।

उन्होंने ABC न्यूज ब्रेकफास्ट को बताया, “हमें उन 36 ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के बारे में अभी भी बहुत चिंता है जिनका अभी तक पता नहीं चल पाया है।”

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नेपाल की टनल से 9 दिन बाद जिन संजय शाह को निकाला गया क्या वो मंत्र के सहारे जिंदा रहे?

नेपाल में आई तबाही के असर अब तक वहां दिख रहा है। इस विनाशकारी बाढ़ में अब तक एक हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 2000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। वहीं इस भीषण तबाही के बीच ऐसी भी कहानियां भी सामने आ रही हैं, जिससे लोगों को हौसला मिल रहा है। ऐसी ही कहानी नेपाल के एक पावर प्लांट में काम करने वाले संजय साह की सामने आई है। संजय साह को नौ दिनों बाद टनल से रेस्क्यू किया गया है।

कमाल की है संजय साह की कहानी 

बता दें कि, पावर प्लांट में काम करने वाले संजय साह के सामने उस वक्त मुश्किल फैसला था, जब प्लांट के पास पहाड़ का बड़ा हिस्सा टूटकर गिर गया। वह चाहते तो अपनी जान बचाने के लिए वहां से निकल सकते थे, लेकिन उन्होंने रुककर दूसरे लोगों की मदद करने का फैसला किया। करीब नौ दिन तक बर्फ, पत्थरों और मलबे के बीच फंसे रहने के बाद शुक्रवार को संजय और एक अन्य कर्मचारी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस बचाव से इस बड़ी आपदा के बाद लापता लोगों की तलाश कर रही टीमों को भी नई उम्मीद मिली है।

टनल से नौ दिन बाद किया गया रेस्क्यू

नेपाल के अधिकारियों की ओर से जारी किए गए एक वीडियो में 30 वर्षीय संजय साह स्ट्रेचर पर लेटे नजर आए। उनके चेहरे पर ऑक्सीजन मास्क लगा हुआ था। उन्होंने सेना के अधिकारियों को बताया, “मैं टनल के कंट्रोल रूम में था। आमतौर पर वहां चार से छह लोग रहते हैं, लेकिन उस दिन करीब 40 से 45 लोग मौजूद हो सकते थे। मेरी जिम्मेदारी सभी की जान बचाना थी। जब इतना बड़ा हादसा हुआ, तब मेरा वहां से भागना सही नहीं होता।”

लगातार किया मंत्रों का जाप

उन्होंने बताया कि जैसे ही उन्हें ऊपर पहाड़ पर हादसा होने की जानकारी मिली, उन्होंने सुरंग में मौजूद लोगों को तुरंत सतर्क किया और बाहर निकलने के लिए कहा। हालांकि, खुद बाहर जाने का मौका उन्हें नहीं मिल पाया और जब तक उन्होंने निकलने की कोशिश की, तब तक रास्ता बंद हो चुका था। अधिकारियों के मुताबिक, त्रिशूली नदी के किनारे बने छह हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में करीब 900 लोगों के फंसे होने की आशंका है। साह ने बताया कि उन्होंने सुरंग में बिताए उन नौ दिनों के दौरान हिम्मत बनाए रखने के लिए मंत्रों का जाप किया।

फिलहाल हॉस्पिटल में कराया गया भर्ती 

सुरंग के अंदर तीन-चार अन्य मजदूरों से संपर्क बनाए रखा और बताया कि कुछ लोग अभी भी पहाड़ के अंदर फंसे हो सकते हैं। साह और उनके साथ बचाए गए कबीर महारजन, जो मैकेनिकल सुपरवाइजर हैं, इस हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से सुरक्षित निकाले गए पहले मजदूर हैं। हादसे के कुछ घंटे बाद कुछ मजदूर दूसरी सुरंग से बाहर निकलने में सफल रहे थे। नेपाली सेना की ओर से जारी वीडियो में साह को एक मजदूर की पीठ पर ले जाकर बाहर लाते हुए देखा गया, इस दौरान उनका चेहरा मिट्टी और कीचड़ से भरा हुआ था। बचाए गए संजय साह और कबीर महारजन को इलाज के लिए काठमांडू के एक आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां दोनों को आईसीयू में रखा गया है।

 

नेपाल की बाढ़ से बिहार को बचा रहा है 57 साल पुराना गंडक बैराज | Gandak Barrage Valmikinagar | Nepal

नेपाल की बाढ़ से बिहार को बचा रहा है 57 साल पुराना गंडक बैराज | Gandak Barrage Valmikinagar | Nepal

हिमालय की तबाही भारत की चौखट तक पहुँच गई।
नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बाद त्रिशूली और नारायणी नदियों में पानी का सैलाब उमड़ पड़ा, जो गंडक नदी के रास्ते बिहार पहुँचा।

वाल्मीकिनगर में इंजीनियरों ने 57 साल पुराने गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए, और करीब 1.5 लाख क्यूसेक पानी नियंत्रित तरीके से छोड़ा गया, ताकि अचानक बढ़े पानी के दबाव को संभाला जा सके।

हालांकि, निचले इलाकों के कई गांवों में बाढ़ आई और लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचाना पड़ा।
फिर भी, इस पुराने Engineering Marvel ने बाढ़ के पानी को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई।

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Bihar Mystery Fish: नेपाल की बाढ़ के साथ बिहार पहुंची अजीब मछलियां, इनको खाते ही हो रहीं बड़ी दिक्कतें! सरकार ने अब ये बताया

Bihar Mystery Fish: नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद बिहार की नदियों में सीमा पार से बहकर आ रही अज्ञात और अजीब किस्म की मछलियों ने हड़कंप मचा दिया है। बाढ़ के पानी के साथ आई इन मछलियों को खाने के बाद लोगों के बीमार पड़ने की खबरें सामने आ रही हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने अडवाइजरी जारी कर लोगों को ऐसी मछलियों को खाने से से बचने की सख्त हिदायत दी है।

मछलियां क्यों बन रही हैं खतरनाक और बीमारी की क्या है वजह?

मत्स्य विभाग के मुताबिक बाढ़ के दौरान मछलियां तालाबों, झीलों, नदियों और जलाशयों से निकलकर पानी के तेज बहाव के साथ लंबी दूरी तय करती हैं। इस दौरान ये मछलियां कीचड़, गंदे नाले, सड़े-गले शवों और दूसरे हानिकारक प्रदूषकों के लगातार संपर्क में रहती हैं। इस वजह से ये मछलियां हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस, फंगी और खतरनाक केमिकल से संक्रमित हो जाती हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब तक पर्यावरण सामान्य न हो जाए और साफ मछलियां उपलब्ध न हों, तब तक बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियों का सेवन बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए।

सरकार की अपील और लक्षण दिखने पर क्या करें?

बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने नागरिकों से सुरक्षा के मद्देनजर कई दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। कहा गया है कि किसी भी अनजानी या अजीब दिखने वाली मछली को खाने के लिए इस्तेमाल न करें। बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियों को न खरीदें, न बेचें और न ही भोजन के रूप में इस्तेमाल करें। बिना विभागीय जांच और वेरिफिकेशन के किसी भी अनजान मछली को खाने लायक न समझें।

अगर ऐसी मछली खाने के बाद उल्टी, दस्त/डायरिया, पेट दर्, चक्कर आना या सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो रही हैं तो तुरंत अस्पताल जाएं या डॉक्टर की सलाह लें। साथ ही ये भी कहा गया है कि ऐसी असामान्य मछलियां दिखने पर तुरंत जिला मत्स्य अधिकारी या स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना दें और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें।

पश्चिमी चंपारण में जागरूकता अभियान

अनजान मछलियों के खतरे को देखते हुए प्रशासन सक्रिय हो गया है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी चंपारण की जिला मत्स्य अधिकारी नूतन ने बताया कि क्षेत्र में व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नेपाल की बाढ़ से आ रही मछलियां अत्यधिक संक्रामक हैं और इनमें कई बीमारियां फैली हुई हैं। इनको खाने से पेट में तेज दर्द, उल्टी और पेचिश जैसे गंभीर लक्षण उभर रहे हैं। प्रशासन की ओर से विक्रेताओं को ऐसी मछलियां न बेचने और आम जनता को इन्हें न खरीदने व न खाने की सलाह दी जा रही है।

उधर नेपाल पुलिस ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आधिकारिक निर्देश जारी कर अपने नागरिकों से बाढ़ के पानी में बहकर आई मछलियों और अन्य नदी आधारित खाद्य पदार्थों का सेवन न करने का अनुरोध किया है।

नेपाल में बाढ़ से 1127 लोगों की मौत, बिहार में अलर्ट

नेपाल पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ की वजह से नेपाल में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1127 हो गई है। शवों के बरामद होने का सिलसिला अभी भी जारी है। नेपाल की नदियों में जलस्तर बढ़ने की वजह से निचले इलाकों में स्थित बिहार में हाई अलर्ट जारी है।

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Nepal Flood News: नेपाल की उस लड़की की कहानी जिसके घर के 17 लोग विनाशकारी बाढ़ में मारे गए

Nepal Flood News: नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। हिमालयी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक रासुवा में तबाही का मंजर अभी भी साफ दिखाई दे रहा है। घर, सड़कें और पुल बह चुके हैं। बड़ी संख्या में परिवार अपने घरों से विस्थापित होकर अस्थायी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। इस त्रासदी के बीच एक युवती की कहानी ने इस आपदा की भयावहता को सामने ला दिया है।

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, रासुवा के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रहने वाली एक युवती ने अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। उसका घर भी बाढ़ में बह गया। उसके पास अब अपने परिवार की यादों के तौर पर सिर्फ मोबाइल फोन में मौजूद तस्वीरें बची हैं। नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,100 के पार हो गई है।

एक झटके में पूरा परिवार उजड़ गया

कॉपिला तमांग नाम की इस युवती के परिवार ने इससे पहले 2015 के विनाशकारी भूकंप की त्रासदी भी झेली थी। उस आपदा में उनका घर तबाह हुआ था। लेकिन परिवार ने दोबारा जिंदगी शुरू की और नया घर बनाया। इस बार बाढ़ ने उस नए घर को भी नहीं छोड़ा। अमेरिकी चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ में उनकी मां, बहन, दादी समेत परिवार के कुल 17 सदस्य मारे गए। इनमें महज एक महीने का एक बच्चा भी शामिल था।

वापस लौटने पर सबकुछ बर्बाद!

कॉपिला उस समय काठमांडू में थीं। जैसे ही उन्हें पहाड़ी इलाके में बाढ़ आने और परिवार के फंसने की खबर मिली, वह वापस लौट गईं। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उन्होंने CNN से कहा कि उन्हें बेहद अकेलापन महसूस हो रहा है। परिवार के छोटे बच्चे के लिए यह त्रासदी और भी मुश्किल है। उनका सात साल का छोटा भाई अभी यह समझ नहीं पा रहा कि उसकी मां अब वापस नहीं आएगी। कॉपिला ने कहा कि अब उसे अपने छोटे भाई के लिए खुद मजबूत बनना होगा।

राहत शिविर में रात होते ही सताने लगता है डर

बाढ़ से बचाए गए और विस्थापित परिवारों को फिलहाल अस्थायी शिविरों, स्कूलों और अधूरी इमारतों में शरण दी गई है। लेकिन यहां पहुंचने के बाद भी लोगों को सुरक्षा का भरोसा नहीं मिल पा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई परिवारों को अब भी डर है कि कहीं दोबारा बाढ़ न आ जाए। रात में जब भी पानी बढ़ने या नई बाढ़ की चेतावनी मिलती है, कुछ लोग सुरक्षित ऊंचाई की तलाश में जंगल और पहाड़ी इलाकों की ओर चले जाते हैं।

कई विस्थापित लोग खुले या अधूरे भवनों की छतों पर रात गुजार रहे हैं। एक 17 वर्षीय युवक ने सीएनएस से बातचीत में बताया कि उसके दो छोटे भाई-बहन भी बाढ़ में मारे गए। राहत शिविरों में रात के समय लोग अपने परिवार के सदस्यों को याद कर रोते हैं। कई लोगों के लिए नींद तक मुश्किल हो गई है।

13 साल की बच्ची भी बाढ़ के बीच फंसी

नेपाल की इस आपदा में बच्चों की मुश्किलें भी बेहद गंभीर हैं। एक 13 वर्षीय बच्ची ने बताया कि बाढ़ आने के समय वह अपने परिवार से अलग हो गई थी। उसे कुछ समय तक यह तक पता नहीं था कि उसके माता-पिता कहां हैं। UNICEF के अनुसार, 26 अगस्त को आई बाढ़ से नेपाल के रासुवा, नुवाकोट और धादिंग इलाकों में कम से कम 17,000 बच्चे प्रभावित हुए हैं।

इस विनाशकारी तबाही में कई स्कूल पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। हजारों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। एक अन्य मामले में स्कूल से लौटते समय बाढ़ की चपेट में आए बच्चों को अपनी जान बचाने के लिए ऊंचे स्थानों की ओर भागना पड़ा। कुछ बच्चों ने पेड़ों पर चढ़कर अपनी जान बचाई।

लोगों के सामने सिर्फ घर नहीं, पूरी जिंदगी दोबारा बसाने की चुनौती

इस बाढ़ ने नेपाल के प्रभावित इलाकों में लोगों से सिर्फ उनके घर और सामान ही नहीं छीने। बल्कि कई परिवारों के पूरे के पूरे सदस्य खत्म हो गए। कई लोगों को अभी तक अपने लापता परिजनों के शव नहीं मिले हैं, जिससे उनके लिए इस त्रासदी को स्वीकार करना और भी मुश्किल हो गया है।

CNN के अनुसार, कुछ परिवारों के लापता सदस्य अभी तक आधिकारिक लापता लोगों की लिस्ट में भी दर्ज नहीं हो पाए थे। अब राहत शिविरों में रहने वाले लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगली रात सुरक्षित होगी या फिर एक और बाढ़ उन्हें अपना सब कुछ छोड़कर भागने पर मजबूर कर देगी। उनके पास घर लौटने के लिए कई जगह घर ही नहीं बचे हैं।

मृतकों की संख्या 1,100 के पार

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बुधवार को बढ़कर 1,127 हो गई। हिमालयी क्षेत्र में आई इस आपदा के एक सप्ताह बाद भी बचावकर्मी हजारों लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, चितवन से 348, नवलपरासी पूर्व से 217, नवलपरासी पश्चिम से 190 और नुवाकोट से 155 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह गोरखा से 66, धादिंग से 59, रसुवा से 45 और तनाहूं से 38 शव बरामद हुए हैं।

पुलिस ने बताया कि 1,113 शवों का पोस्टमार्टम और कानूनी पहचान की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। जबकि 95 शव परिजनों को सौंपे जा चुके हैं। लापता परिजनों की पहचान में परिवारों की मदद के लिए 911 अज्ञात शवों का विवरण नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। पुलिस के मुताबिक, अब तक सुरक्षा बलों ने प्रभावित इलाकों से 6,541 लोगों को सुरक्षित निकाला है। जबकि 4,858 लापता लोगों की तलाश अभी जारी है।

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अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में 7,912 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है।  नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के ढहने या हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आ गई थी। इस बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई थी।