नेपाल के मलबे में जिंदगी के निशान तलाशने की आखिरी कोशिश! अपने 36 लापता नागरिकों को बचाने ऑस्ट्रेलिया ने भेजी हाई-टेक ‘ड्रोन फौज’

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद से ही रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भारत सहित कई देश नेपाल की मदद के लिए अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कर रहे हैं और मलबों में फंसे लोगों को निकालने के लिए सर्च अभियान चला रहे हैं। इसी क्रम में ऑस्ट्रेलिया के आपदा राहत विशेषज्ञ भी लोगों की तलाश में शामिल होने के लिए शुक्रवार को नेपाल के लिए रवाना हुए। वहीं, इस भयानक आपदा के बाद ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने अपने 36 लापता नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है।

बता दें कि 26 अगस्त को ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के बाद नेपाल में आई अचानक बाढ़ में अब तक 1,200 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 5,000 लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल सरकार के मुताबिक, लापता लोगों में 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि नेपाल सरकार के अनुरोध पर 15 सदस्यों वाली ‘ऑस्ट्रेलियाई आपदा सहायता प्रतिक्रिया टीम’ को तैनात किया गया है। इस टीम में ज्यादातर सदस्य राज्य की आपातकालीन सेवाओं के ड्रोन पायलट हैं।

ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी ने दी जानकारी

न्यू साउथ वेल्स फायर एंड रेस्क्यू के कमिश्नर जेरेमी फ्यूट्रेल ने शुक्रवार को सिडनी एयरपोर्ट पर पत्रकारों से कहा, “हमें अभी भी उम्मीद है कि कुछ जगहों पर लोग जीवित हो सकते हैं और उम्मीद है कि यह टीम ऐसे लोगों का पता लगाने में मदद कर सकेगी।”

उन्होंने कहा, “इस टीम में मुख्य रूप से हमारे खास ड्रोन के पायलट शामिल हैं।” उन्होंने आगे बताया कि उनके पास अलग-अलग तरह के ड्रोन हैं जो हवा से बड़े इलाकों का सर्वे कर सकते हैं और ऐसी तंग जगहों पर भी जा सकते हैं जहां बचाव कर्मियों का पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

जेरेमी फ्यूट्रेल ने आगे कहा, “हम जो मदद दे रहे हैं, वह नेपाली अधिकारियों के अनुरोध पर दी जा रही है। इसके तहत उन्हें ऐसे कई साधन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनसे उन्हें वाकई मदद मिलेगी।”

उन्होंने कहा, इसके अलावा, ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस के 7 विशेषज्ञ भी शनिवार को नेपाल पहुंचेंगे। ये विशेषज्ञ आपदा में मारे गए या लापता लोगों की पहचान करने में मदद करेंगे।

19 ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी पहले से ही नेपाल में मौजूद 

बता दें कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने गुरुवार को इनकी तैनाती की घोषणा की थी। विदेश मंत्री पेनी वोंग ने बताया कि 19 ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी पहले से ही नेपाल में मौजूद हैं, जिनमें कॉन्सुलर अधिकारी, मानवीय सहायता से जुड़े पुलिसकर्मी और रक्षा व पुलिस के जवान शामिल हैं।

गौरतलब है कि नेपाल के विदेश मंत्री ने पिछले हफ्ते कहा था कि उन्हें विशेष और तकनीकी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत है।

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि बचे हुए लोगों के मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है, लेकिन चीन की सीमा के पास बचाव कार्य जारी है।

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, लापता ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के कुछ रिश्तेदार भी खुद तलाश करने के लिए नेपाल गए हैं।

ऑस्ट्रेलिया के ट्रेजरर जिम चाल्मर्स ने शुक्रवार को बताया कि 36 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक अभी भी लापता हैं, जबकि रात भर में दो लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।

उन्होंने ABC न्यूज ब्रेकफास्ट को बताया, “हमें उन 36 ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के बारे में अभी भी बहुत चिंता है जिनका अभी तक पता नहीं चल पाया है।”

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नेपाल के त्रिभुवन त्रिशूली स्कूल की इमारत तो बह गई पर प्रिंसिपल ने 1600 बच्चों को बचा लिया! अब भारत इस स्कूल को फिर बनवाएगा

Nepal Flood: नेपाल के नुवाकोट जिले में स्थित त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी को हीरो माना जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने 26 अगस्त को त्रिशूली घाटी में आई भयानक बाढ़ के दौरान स्कूल के सभी 1,643 छात्रों की जान बचाने में मदद की थी। हालांकि, स्कूल की इमारत अब नष्ट हो चुकी है, इसलिए दवाड़ी ने भारत सरकार से अपील की है कि वे स्कूल को फिर से बनाने और बच्चों को उनकी पढ़ाई जारी रखने के लिए सुरक्षित जगह उपलब्ध कराने में मदद करें।

स्कूल से जल्दी निकलो

मीडिया से बात करते हुए दवाड़ी ने बताया कि कैसे स्कूल की एक आम सुबह समय के साथ एक मुश्किल दौड़ में बदल गई। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 9:20 बजे, मुझे एक दोस्त का जरूरी फोन आया, जिसमें उन्हें चेतावनी दी गई थी कि पास के एक गांव में नदी का पानी भर गया है। वहां, से जल्दी निकलो। इसके कुछ ही देर बाद, एक घबराए हुए पैरेंट स्कूल पहुंचे और बताया कि नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।

बिना देरी किए स्कूल की बेल बजाने का दिया आदेश

उस समय सैकड़ों छात्र स्कूल की तीन मंजिला इमारत के अंदर या आस-पास थे, जो नदी से लगभग 60 मीटर की ऊंचाई पर स्थित थी। हालात तेजी से बिगड़ते देख, दवाड़ी ने बिना देरी के स्कूल की घंटी बजाने का आदेश दिया और शिक्षकों को निर्देश दिया कि वे क्लासरूम खाली कराएं और बच्चों को ऊंची जगह पर ले जाएं।

प्रींसिपल ने बस ड्राइवरों से भी किया संपर्क

उन्होंने स्कूल बस ड्राइवरों से भी संपर्क किया और उन्हें वापस लौटने को कहा। हालांकि, एक बस से संपर्क नहीं हो पा रहा था। राजेंद्र दावाड़ी ने बाहर आकर देखा तो वही बस लोहे के पुल को पार कर स्कूल की तरफ बढ़ रही थी और नीचे नदी का विकराल पानी स्कूल परिसर की तरफ तेजी से आ रहा था। प्रिंसिपल साहब ने पूरी ताकत से चिल्लाकर और हाथ हिलाकर ड्राइवर को इशारा किया। ड्राइवर ने पलक झपकते ही बस को रिवर्स किया और सुरक्षित दूरी पर ले गया। बस के हटते ही वो पुल ताश के पत्तों की तरह ढह गया और नदी में समा गया।

जान बचाकर पहाड़ी पर भागे बच्चे

जैसे-जैसे खतरा बढ़ा, छात्र पहाड़ी की ओर जाने लगे। खबर है कि एक लड़की को पैनिक अटैक आया और उसे मोटरसाइकिल से सुरक्षित जगह ले जाना पड़ा, जबकि बाकी बच्चे पैदल ही भाग निकले। जब छात्र नदी से दूर जा रहे थे, तो दवाड़ी उनके साथ ही रहे।

बाद में बाढ़ का पानी उस इलाके में फैल गया, जिससे स्कूल बर्बाद हो गया और नदी के किनारे बनी इमारतें बह गईं। जब पानी का तेज बहाव घाटी से गुजर रहा था, तब छात्रों ने एक बोधि वृक्ष के नीचे शरण ली।

प्रिंसिपल दावाड़ी ने 1,643 मासूमों को बचाया

हालांकि, इस आपदा से प्रिंसिपल दावाड़ी ने 1,643 मासूमों को तो सुरक्षित बचा लिया, लेकिन स्कूल ने अपने दो बहादुर साथियों को खो दिया। 32 साल के नए सोशल हिस्ट्री टीचर संतोष परियार क्लास लेने के बाद खाना पकाने अपने कमरे पर गए थे और बाढ़ में बह गए। वहीं, स्कूल के सफाईकर्मी सुल्तान लामा की भी मौत हो गई। बताया जाता है कि वे स्कूल को सुरक्षित करने के लिए वापस लौटे थे।

दुनियाभर की मीडिया में नेशनल हीरो के तौर पर सराहे जाने के बाद भी राजेंद्र दावाड़ी की आंखों में अपनों को खोने का गम है। मलबे के ढेर को देखते हुए वे बेहद विनम्रता से बस एक ही बात कहते हैं, “मैं करता भी तो क्या? उस वक्त मेरे बच्चों की जान से बढ़कर कुछ नहीं था।”

स्कूल बनाने के लिए भारत से मदद की मांग

दावाड़ी के लिए, रेस्क्यू ऑपरेशन एक और चुनौती की शुरुआत भर थी। स्कूल की इमारत के तबाह हो जाने के बाद, अब वे स्कूल को फिर से बनाने के लिए भारत से मदद मांग रहे हैं, ताकि सैकड़ों बच्चे अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कर सकें।

भारत ने दी मदद की गारंटी

वहीं, नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने X पर एक पोस्ट में लिखा, मैंने नुवाकोट के बिदुर में स्थित त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाडी से मुलाकात की। रसुवा में अचानक आई बाढ़ (flash flood) में स्कूल के बह जाने से ठीक पहले, उनके समय पर लिए गए फैसले ने 1600 से ज्यादा स्कूली बच्चों की जान बचाई। यह स्कूल 1950 के दशक में बनाया गया था। इसका डिजाइन एक भारतीय इंजीनियर ने तैयार किया था, जो त्रिशूली हाइड्रोपावर प्लांट के निर्माण से जुड़े थे, और इसे भारत की मदद से बनाया गया था। इस स्कूल की नई इमारत भी 2022 में भारत की मदद से HICDP प्रोग्राम के तहत बनाई गई थी। श्रीवास्तव ने दवाड़ी को भरोसा दिलाया कि भविष्य में भारत, नेपाल में भारतीय दूतावास के माध्यम से स्कूल के पुनर्निर्माण में मदद करेगा।

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टनल में फंसे लोगों का रेस्क्यू करने पहुंची स्पेशल टीम, जानिए नेपाल की मदद में भारत ने कैसे झोंकी ताकत

Nepal Flood: चीन-नेपाल बॉर्डर के पास ग्लेशियर टूटने से आई भयानक बाढ़ के बाद भारत ने नेपाल में बड़े पैमाने पर मानवीय और तकनीकी बचाव अभियान शुरू कर दिया है। इस ऑपरेशन में सुरंग से बचाव करने वाली खास टीमें, मेडिकल टीमें और फोरेंसिक एक्सपर्ट शामिल हैं, जो पीड़ितों की DNA-आधारित पहचान करने का काम कर रहे हैं। बता दें कि बाढ़ में 903 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं।

हिमालय में अचानक ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा-नुवाकोट-लांगटांग इलाके में पड़ा। बाढ़ की चपेट में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी, तीर्थयात्री और पर्यटक भी आ गए। कई लोग सुरंगों के अंदर फंस गए, जबकि सड़कें और पुल बह जाने से कई इलाकों का संपर्क भी टूट गया।

भारत ने रेस्क्यू और फोरेंसिक टीमें भेजीं

भारत ने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों (खासकर त्रिशूली, चिलिमे और लांगटांग के पास) में फंसे कर्मचारियों को खोजने और बचाने में मदद के लिए डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और सुरंग-बचाव विशेषज्ञों की 11 सदस्यों वाली एक खास टीम भेजी है।

नेपाल में कई फोरेंसिक टीमें भी भेजी गई हैं। शुरुआत में छह टीमें भेजी गई थीं, लेकिन बाद में 19 सदस्यों वाले एक खास फोरेंसिक ग्रुप के बारे में जानकारी मिली, जिसमें गांधीनगर की नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) की 10 सदस्यों वाली DNA प्रोफाइलिंग यूनिट भी शामिल थी।

फोरेंसिक टीम ने रविवार को काठमांडू में अपना काम शुरू दिया। नेपाल में भारत के राजदूत ने टीम से मुलाकात की और उन्हें जानकारी दी। इसके बाद टीम ने नेपाल पुलिस की सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल के फोरेंसिक विभाग के अधिकारियों के साथ तकनीकी बातचीत की।

भारत ने लगभग 68.5 टन राहत सामग्री भी हवाई मार्ग से पहुंचाई है, जिसमें कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट शामिल हैं।

हाइड्रोपावर साइट्स पर तलाशी जारी

भारत की टनल-रेस्क्यू टीम, चिलिमे और लांगटांग में क्षतिग्रस्त हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइट्स पर नेपाली सेना के साथ मिलकर काम कर रही है।

खराब मौसम के बावजूद, टीम लांगटांग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास एक स्ट्रक्चर में दाखिल हुई और एक व्यक्ति के शव को बाहर निकाला। हालांकि तलाशी और बचाव अभियान जारी हैं।

नुवाकोट के त्रिशूली-चिलिमे हाइड्रोपावर बेल्ट में, भारतीय टेक्निकल कर्मचारियों ने उन सुरंगों का जायजा लिया है जहां मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। रसुवा का लांगटांग और चीन से सटा सीमा क्षेत्र भी बचाव अभियान के लिए प्राथमिकता वाले इलाकों में शामिल है।

हालांकि, खराब मौसम, अस्थिर जमीन और झील के पानी से अचानक दोबारा बाढ़ आने के खतरे के कारण हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू और जमीन के रास्ते प्रभावित इलाकों तक पहुंचना काफी मुश्किल हो रहा है।

पीड़ितों की DNA से पहचान

नेपाल के जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे पहचान न हो पाने वाले पीड़ितों को सामूहिक रूप से दफनाने से पहले उनके DNA सैंपल सुरक्षित रखें। हर शव पर एक खास पहचान नंबर और जगह की जानकारी के साथ टैग किया जाएगा।

भारतीय फोरेंसिक टीमें बरामद शवों/अवशेषों से DNA और रिश्तेदारों से रेफरेंस सैंपल लेकर ‘डिजास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन’ (आपदा पीड़ितों की पहचान) का काम कर रही हैं। पहचान पक्की करने और परिवारों को शव सौंपने में मदद के लिए इन प्रोफाइलों का मिलान किया जाएगा।

वहीं, लापता नेपाली और विदेशी नागरिकों के बरामद शवों या शरीर के अंगों की पहचान के लिए DNA टेस्ट की सुविधा दी जा रही है।

नेपाल में मौजूद लापता व्यक्ति के करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध किया गया है कि वे DNA प्रोफाइलिंग के लिए ताजा ब्लड सैंपल और पासपोर्ट साइज की दो फोटो पैथोलॉजी लैब, नेपाल पुलिस हॉस्पिटल, महाराजगंज, काठमांडू या नजदीकी जिला पुलिस ऑफिस में जमा करें।

इसके अलावा, विदेश में रहने वाले करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध है कि वे अपने देश की किसी अधिकृत लैब में DNA प्रोफाइलिंग करवाएं और तुलना के लिए DNA प्रोफाइल की सॉफ्ट कॉपी नेपाल पुलिस के आधिकारिक ईमेल पते dnacodis@nepalpolice.gov.np पर भेजें।

रिश्तेदार तय अस्पतालों में DNA सैंपल जमा कर सकते हैं।

वहीं, त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में, लापता रिश्तेदारों के बारे में जानकारी पाने के लिए परेशान परिवारों का आना जारी है। अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि 56 घायल मरीजों का इलाज किया गया, जिनमें से तीन इंटेंसिव केयर में हैं और एक मरीज की मौत हो गई है। अस्पताल में 59 शव भी लाए गए थे, जिनमें से आठ की पहचान कर ली गई और अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया।

भारतीय नागरिकों का रेस्क्यू जारी, और लोग मदद के इंतजार में

भारत ने 160-170 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को बचाने की जानकारी दी है, जबकि 29-30 अगस्त तक लगभग 287-290 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा था।

विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि 149 भारतीयों को बचाया गया है। बाद में पुष्टि की गई कि 403 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से चीन से नेपाल पहुंच गए हैं, जबकि चीनी तरफ मौजूद 500 और भारतीयों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।

काठमांडू में भारतीय दूतावास ने इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर – +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 और +977 981 032 6117 – और ईमेल eoikathmandufloodsupport@gmail.com शुरू किए हैं।

सीमा के दोनों तरफ फंसे भारतीयों को निकालने के लिए नेपाली अधिकारियों और जरूरत पड़ने पर चीनी अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाने का काम जारी है।

बचाव कार्यों में बड़ी रुकावटें

नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के मुताबिक, लापता 933 लोग आसपास के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी थे। वहीं, 592 विदेशी नागरिक और 127 नेपाली नागरिक भी लापता लोगों में शामिल हैं, जो विदेशी समूहों के साथ यात्रा कर रहे थे।

बचाव अभियान के लिए करीब 20,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। अब तक जमीन के रास्ते 8,730 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। वहीं, हेलीकॉप्टरों ने 363 उड़ानें भरी हैं और 3,081 लोगों को एयरलिफ्ट किया है। इनमें 236 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा, बाढ़ में फंसे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों से 279 लोगों को सीधे बचाया गया है।

रविवार को धादिंग के कृष्णभीर इलाके में भूस्खलन और सड़क का बड़ा हिस्सा धंसने के बाद पृथ्वी हाईवे का संपर्क टूट गया। तेज बहाव वाली त्रिशूली नदी ने सड़क की सुरक्षा दीवार और उसकी नींव को भी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद प्रशासन ने इस रास्ते पर वाहनों और पैदल लोगों की आवाजाही रोक दी।

वहीं, काठमांडू से राहत सामग्री प्रभावित और संपर्क से कटे इलाकों तक भेजी जा रही है। 50 ट्रांसपोर्ट वाहनों और 8 हेलीकॉप्टर उड़ानों के जरिए खाने-पीने की चीजें, संचार उपकरण और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। राहत और बचाव अभियान लंबे समय तक जारी रखने के लिए ईंधन का भंडार भी सुरक्षित रखा जा रहा है।

इस बीच, नेपाल पुलिस ने बताया कि कृषि विकास बैंक की त्रिशूली ढुंगे शाखा से करीब 1.5 करोड़ नेपाली रुपये नकद, अनुमानित 50 करोड़ रुपये का सोना और जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया है।

वहीं, नेपाल सरकार ने राहत और बचाव कार्यों के लिए आपातकालीन फंड भी जारी किया है। इसके तहत रसुवा और नुवाकोट को 1-1 करोड़ नेपाली रुपये, धादिंग को 50 लाख नेपाली रुपये और 15 स्थानीय निकायों को कुल 6.75 करोड़ नेपाली रुपये दिए गए हैं।

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Nepal Flash Flood: तबाही के बाद नेपाल में फिर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा, भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ा, जारी हुआ अलर्ट

Nepal Flash Flood: नेपाल में 26 अगस्त को आए विनाशकारी बाढ़ ने सबकुछ तबाह कर दिया। बाढ़ में अब तक कम से कम 800 लोगों के मरने की खबर है वहीं हजारों लोग लापता है। अभी लोग इस तबाही से उबर भी नहीं पाए हैं कि नेपाल में एक बार फिर बाढ़ का खतरे का अलर्ट आने लगा। भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद अधिकारियों ने रविवार को नई चेतावनी जारी की है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित जगह पर जाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। वहीं, राहत और बचाव टीमें पहले आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में लगातार काम कर रही हैं।

लोगों को भेजा जा रहा अलर्ट

रविवार सुबह लोगों के मोबाइल पर बाढ़ को लेकर चेतावनी मैसेज भेजे जा रहे है। इसके बाद से पहले से प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ गई। वहींलगातार मिल रही अलग-अलग चेतावनियों के कारण प्रभावित गांवों के लोगों के बीच भी डर और असमंजस का माहौल बना हुआ है। इसी बीच राहत और बचाव दल काठमांडू को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से जोड़ने वाले प्रमुख हाईवे को फिर से खोलने में जुटे हुए हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।

चीन से मिली जानकारी

नेपाल में बाढ़ को लेकर जारी नई चेतावनी चीन से मिली ताजा जानकारी के बाद जारी की गई है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के प्रमुख धर्म राज उप्रेती ने बताया कि ऊपरी इलाकों में पानी का बहाव बढ़ने की सूचना मिली है। इसके बाद नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा गया है। न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, करीब 5.6 किलोमीटर दूर बना एक बड़ा गड्ढा अब भी चिंता का कारण बना हुआ है, जिसमें बड़ी मात्रा में पानी जमा है। अधिकारियों ने इसकी स्थिति पर लगातार नजर रखने की बात कही है।

लापता लोगों की तलाश जारी

26 अगस्त को आए बाढ़ और भूस्खलन ने नेपाल के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई है और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है। नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। आपदा एजेंसी के अनुसार, देश में मृतकों की संख्या बढ़कर 788 हो गई है, जबकि 2,502 लोग अब भी लापता हैं। वहीं, चीन की सीमा से लगे प्रभावित क्षेत्र में भी भारी नुकसान हुआ है, जहां अधिकारियों ने 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। राहत और बचाव अभियान के बीच लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है।

ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने से आई बाढ़

नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ के बाद सैकड़ों विदेशी नागरिकों के लापता होने की खबर है। इनमें कई लोग नौकरी, पहाड़ों की यात्रा और धार्मिक यात्रा के लिए हिमालयी क्षेत्र में पहुंचे थे। बताया जा रहा कि ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने और बड़ी मात्रा में पानी व मलबा नीचे आने से नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ गया। तेज बहाव की चपेट में आने से कई घर, पुल और अन्य ढांचे बह गए, जिससे नेपाल और तिब्बत के कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ है।

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Nepal Flash Flood : नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद डरावनी तस्वीर, मौतों के बाद शव रखने की जगह का संकट

Nepal Flash Flood : नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद डरावनी तस्वीर, मौतों के बाद शव रखने की जगह का संकट

बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल में मृतकों की संख्या 700 के पार पहुंच गई है। अब हिमालयी देश के सामने एक और गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मुर्दाघरों और अस्पतालों में शव रखने की जगह कम पड़ने लगी है। बड़ी संख्या में बरामद शवों को सुरक्षित रखने के लिए अस्पतालों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

 

हालात को देखते हुए नेपाल सरकार ने फैसला किया है कि जिन शवों की पहचान नहीं हो सकी है और जिन पर कोई दावा करने वाला नहीं है, उन्हें एयरटाइट बैग में दफनाया जाएगा। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

 

उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल उन्हीं शवों का सरकारी स्तर पर प्रबंधन किया जाएगा, जिनकी पहचान नहीं हो पाई है। दफनाने से पहले उनकी DNA और अन्य जरूरी साक्ष्य सुरक्षित किए जाएंगे, ताकि भविष्य में उनकी पहचान स्थापित की जा सके।

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दफनाने से पहले लिए जाएंगे DNA सैंपल

 

अज्ञात और लावारिस शवों को दफनाने से पहले अधिकारियों द्वारा उनके DNA सैंपल लिए जाएंगे। इसके अलावा प्रत्येक शव को एक अलग पहचान या रेफरेंस नंबर दिया जाएगा और उस स्थान का टैग भी लगाया जाएगा।

 

अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रक्रिया से भविष्य में परिवारों को अपने लापता परिजनों के शवों की पहचान करने और उन्हें वापस हासिल करने में मदद मिल सकेगी। शनिवार दोपहर तक 100 से अधिक शवों की DNA प्रोफाइलिंग पूरी की जा चुकी थी।

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1.5 मीटर गहराई में दफनाए जाएंगे शव

 

नेपाल सरकार के अनुसार, अज्ञात शवों को जमीन के करीब 1.5 मीटर नीचे दफनाया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें बाद में निकाला जा सके। शवों के बीच करीब 40 सेंटीमीटर का अंतर रखा जाएगा, जिससे DNA मैच होने पर संबंधित शव को आसानी से निकाला जा सके।

 

दफन स्थल पर कंक्रीट प्लेटफॉर्म पर एक साइन बोर्ड भी लगाया जाएगा। पूरी प्रक्रिया की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी, ताकि शवों से संबंधित जानकारी सुरक्षित रखी जा सके।

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चितवन में सबसे ज्यादा शव बरामद

 

बाढ़ और भूस्खलन के बाद सबसे ज्यादा शव चितवन जिले में बरामद किए गए हैं। द हिमालयन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यहां अब तक 233 शव मिले हैं, लेकिन इनमें से केवल छह की पहचान हो सकी है और उन्हें उनके परिवारों को सौंपा गया है।

 

अधिकारी पहचान प्रक्रिया को तेज करने में जुटे हैं। अब तक 135 शवों के DNA सैंपल लिए जा चुके हैं। इसके लिए चितवन के कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज, चितवन मेडिकल कॉलेज, भरतपुर अस्पताल और काठमांडू तथा पाल्पा के मेडिकल कॉलेजों के साथ समन्वय किया जा रहा है।

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शवों को सड़ने से बचाने के लिए बनाए गए कूलिंग सेंटर

 

गर्मी और लंबे समय तक शव रखे जाने के कारण उनके खराब होने का खतरा भी बढ़ रहा है। इसे देखते हुए अधिकारियों ने कुछ घरों को कूलिंग सेंटर में बदल दिया है, ताकि शवों को सुरक्षित रखा जा सके और उनकी पहचान के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

 

734 लोगों की मौत, 2498 अब भी लापता

 

नेपाल सरकार के मुताबिक रविवार को बाढ़ और आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 734 हो गई। वहीं 2,498 लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक 4,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

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इस बीच भोटेकोशी नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने से प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित जिलों में रहने वाले लोगों और बचाव दलों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने लोगों से एहतियाती कदम उठाने की अपील की है।

Nepal Flood: ‘शायद इस बार फोन उठ जाए…’ नेपाल बाढ़ में लापता स्वाति के परिवार ने नहीं छोड़ी उम्मीद

नेपाल में 26 अगस्त को आई भयानक बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी बदल दी है। इस तबाही में से अबतक कुल 691 लोगों को मौत हो चुकी है। वहीं 3000 हजार से ज्यादा लोग लापता है। इनके परिवार के लोगों इनकी तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बाद टोरंटो में रहने वाली 50 वर्षीय इंजीनियर स्वाति बागरेचा भी लापता हैं। स्वाति बागरेचा कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गई थी। 26 अगस्त को बाढ़ आने के बाद से उनका परिवार उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहा है। मोबाइल फोन की घंटी बजने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिल रहा है। स्वाति के परिवार ने उनकी तलाश के लिए भारतीय और कनाडाई दूतावास से मदद मांगी है।

फोन पर रिंग जा रहा है

PTI के मुताबिक, टोरंटो में रहने वाली 50 वर्षीय इंजीनियर स्वाति बागरेचा के परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक आई बाढ़ के बाद से स्वाति का कोई पता नहीं चल पाया है। परिवार उनके फोन की हर घंटी का इंतजार कर रहा है, इस उम्मीद में कि शायद उनकी कोई खबर मिल जाए। लेकिन फोन का जवाब न मिलने से चिंता और बढ़ती जा रही है। PTI ने स्वाति के भाई डॉ. प्रशांत बागरेचा ने बताया, “उनका मोबाइल फोन अभी भी बज रहा है, लेकिन वह हमारी कॉल रिसीव नहीं कर रही हैं। हम उनकी सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित हैं।”

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं

दिल्ली की रहने वाली स्वाति 8 अगस्त को ईशा फाउंडेशन के 77 लोगों के एक समूह के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं। परिवार के अनुसार, 26 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे उनसे आखिरी बार संपर्क हुआ था। इसी दिन नेपाल में अचानक भारी बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति बन गई थी। इसके बाद से स्वाति से संपर्क नहीं हो पाया है। परिवार के मुताबिक, स्वाति 26 अगस्त को इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए नेपाल-तिब्बत सीमा पर पहुंची थीं। इसके बाद उनसे परिवार की कोई बात नहीं हो सकी। वहीं, उनकी 14 साल की बेटी अनुष्का फिलहाल अपनी बड़ी बहन के साथ मुंबई में रह रही है।

परिवार ने मदद की अपील की

26 अगस्त को नेपाल के रसुवा इलाके में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे बाढ़ आ गई। बाढ़ का पानी आगे चलकर त्रिशूली और गंडक नदी तंत्र तक पहुंच गया और कई निचले इलाकों में हालात बिगड़ गए। प्रशांत के मुताबिक, मोबाइल की लोकेशन से जानकारी मिली कि स्वाति का फोन चीन की सीमा के पास किसी इलाके में सक्रिय था। हालांकि, फोन को ट्रैक करने में परेशानी आ रही है क्योंकि उसका मोबाइल नंबर टोरंटो में रजिस्टर्ड है। स्वाति के परिवार ने उनकी तलाश में मदद के लिए नेपाल में भारतीय और कनाडाई दूतावास से संपर्क किया है। परिवार ने दोनों देशों के अधिकारियों से स्वाति को सुरक्षित ढूंढने और उन्हें वापस लाने में मदद करने की अपील की है।

शिवराज सिंह चौहान ने परिवार से की बात

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय विधायक मुकेश टंडन के प्रयासों के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी स्वाति के परिवार से बातचीत की। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि स्वाति की तलाश के लिए जरूरी राजनयिक और प्रशासनिक स्तर पर हर संभव कोशिश की जाएगी। साथ ही, उनकी सुरक्षित वापसी के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर मदद पहुंचाने का आश्वासन भी दिया गया।

‘बेहद उदार’: नेपाल के राष्ट्रपति पौडेल ने की PM मोदी की तारीफ, बाढ़ में मदद के लिए भारत का जताया आभार

Nepal flood: नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शनिवार को भारत का धन्यवाद किया। उन्होंने 26 अगस्त को हिमालयी देश में आई भयानक अचानक बाढ़ के बाद भारत की मदद और समर्थन के लिए आभार जताया। इस बाढ़ में 626 लोगों की मौत हुई है। नेपाल ने संकट के इस मुश्किल समय में मदद करने के लिए भारत के प्रयासों की भी तारीफ की। इस दौरान राष्ट्रपति पौडेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “बेहद उदार” बताया।

पौडेल ने मदद के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया

X पर एक पोस्ट में, पौडेल ने आपदा के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की चिंता और भारत सरकार की मदद के लिए उनका आभार जताया।

उन्होंने लिखा, “नेपाल सरकार और यहां के लोगों की ओर से मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उनकी चिंता और संवेदना के लिए दिल से धन्यवाद करता हूं। साथ ही, नेपाल में आई इस आपदा के बाद भारत सरकार की ओर से दिए गए उदार समर्थन और सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त करता हूं।””

नेपाल के राष्ट्रपति ने आपदा में मारे गए भारतीय नागरिकों के प्रति भी शोक व्यक्त किया।

पौडेल ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “हम 26 अगस्त, 2026 की आपदा में भारतीयों की दुखद मौत पर भारत सरकार और वहां के लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना और सहानुभूति भी व्यक्त करते हैं।”

नेपाल का कहना है कि भारत पुनर्निर्माण में मदद के लिए तैयार है

नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने बताया कि भारत ने बाढ़ से हुई तबाही के बाद पुनर्निर्माण के लिए उदार मदद देने की बात कही है।

नेपाल ने इस भयानक बाढ़ के बाद भारत की मदद और उसके तुरंत दिए गए समर्थन की भी तारीफ की है। बाढ़ के कारण कई इलाकों में घरों और जरूरी बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। अब नेपाल के सामने इन इलाकों को दोबारा बसाने और बुनियादी सुविधाओं को ठीक करने की बड़ी चुनौती है।

इस आपदा से भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं और पौडेल ने उनकी मौत पर शोक व्यक्त किया है।

बर्फ और चट्टानों के खिसकने से आई बाढ़

यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने से बर्फ और चट्टानों के खिसकने (एवलांच) के कारण आई। इसके बाद पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव बुधवार को मध्य नेपाल से होते हुए नीचे की ओर बढ़ा, जिससे कस्बों और गांवों में भारी तबाही हुई।

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626 शव, 2,400 लापता… नेपाल में बाढ़ से हाहाकार, भारत-चीन समेत कई देश मदद को आगे आए

Nepal Flood: नेपाल की भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर खोज, बचाव और राहत अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे में अब तक 626 शव बरामद किए जा चुके हैं और करीब 2,400 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, 187 से ज्यादा विदेशी नागरिकों समेत 4,450 से ज्यादा लोगों को बचाया गया है। इसके अलावा, रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन में आपातकालीन अभियान जारी हैं, और नेपाल ने बचाव और राहत कार्यों के लिए खास अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी है।

626 शव बरामद, 2,400 लापता

भोटे कोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है और बड़े पैमाने पर आपातकालीन राहत कार्य शुरू करने पड़े हैं।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, 626 शव बरामद किए गए हैं, जबकि लगभग 2,400 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, अब तक 4,450 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है, जिनमें 187 से अधिक विदेशी नागरिक शामिल हैं।

सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जिलों में तलाशी, बचाव और इमरजेंसी मेडिकल ऑपरेशन जारी हैं। अधिकारी अभी भी लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं और प्रभावित इलाकों में लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाई जा रही है।

नेपाल ने खास अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी है

नेपाल ने बचाव और राहत कार्यों के बीच खास अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की है।

सुरंग से बचाव कार्यों के लिए भारत से 11 सदस्यों वाली एक तकनीकी टीम भेजी गई है। चीन से भी सुरंग से बचाव के लिए एक और खास टीम के आने की उम्मीद है।

भारत ने नेपाल की मदद के लिए 57 टन से ज्यादा राहत सामग्री भी भेजी है। चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और दूसरे अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से भी जरूरी सामान आ रहा है।

इस मदद से तुरंत बचाव और राहत कार्यों में सहायता मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अधिकारी आपदा के बड़े पैमाने से निपट रहे हैं।

विदेशी नागरिकों के लिए इमरजेंसी कंट्रोल रूम

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बाढ़ से प्रभावित विदेशी नागरिकों की मदद के लिए एक खास इमरजेंसी कंट्रोल रूम बनाया है। यह कंट्रोल रूम परिवारों के साथ तालमेल बिठाएगा, पहचान की प्रक्रियाओं में मदद करेगा और स्वदेश वापसी से जुड़ी प्रक्रियाओं को संभालेगा।

बता दें कि बाढ़ से बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। ऐसे में उनके परिवारों और संबंधित अधिकारियों के साथ संपर्क और तालमेल बनाना राहत और बचाव अभियान का एक अहम हिस्सा बन गया है।

नुकसान का आकलन जारी

नेपाल सरकार ने बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन शुरू कर दिया है। यह आकलन मुख्य बुनियादी ढांचे पर केंद्रित है, जिसमें पुल, सड़कें और पनबिजली परियोजनाएं शामिल हैं।

वहीं, बाढ़ से हुई भारी तबाही को देखते हुए, नेपाल को उम्मीद है कि लंबी अवधि में पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय मदद भी अहम भूमिका निभाएगी। इसलिए नेपाल सरकार न केवल तत्काल बचाव और राहत कार्यों के लिए, बल्कि क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए भी मदद मांग रही है।

नेपाल ने विदेशी मदद ठुकराने की खबरों को गलत बताया

नेपाल सरकार ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि उसने अंतरराष्ट्रीय मदद लेने से इनकार कर दिया था। सरकार ने फिर से कहा है कि आपदा के बाद बचाव, राहत और पुनर्निर्माण के कामों के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की बहुत जरूरत है।

अधिकारियों ने आम लोगों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से यह भी अपील की है कि वे सिर्फ आधिकारिक तौर पर पुष्टि की गई जानकारी पर ही भरोसा करें और बिना पुष्टि किए गए आंकड़ों को न तो छापें और न ही प्रसारित करें।

ध्यान दें कि राहत और पुनर्निर्माण के कामों में मदद के लिए सीधे प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में QR कोड या ऑनलाइन लिंक के जरिए योगदान दिया जा सकता है।

नेपाल पर्यटकों के लिए खुला है

बाढ़ से हुई तबाही के बीच, अधिकारियों ने साफ किया है कि नेपाल विदेशी यात्रियों और पर्यटकों के लिए खुला है और वहां कामकाज जारी है, खासकर उन इलाकों में जो बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित नहीं हुए हैं।

यह जानकारी ऐसे समय में दी गई है जब भोटे कोशी नदी की बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य जारी हैं।

वहीं, अधिकारी लापता लोगों की तलाश, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और प्रभावित समुदायों तक राहत पहुंचाने पर ध्यान दे रहे हैं, साथ ही बुनियादी ढांचे को हुए बड़े नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है।

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Nepal Flood Update: ‘चीन में फंसे हैं 400 से अधिक भारतीय, 320 अब भी लापता’; नेपाल त्रासदी पर विदेश मंत्रालय ने क्या बताया?

Nepal Flood Update: नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई बाढ़ के बाद कम से कम 320 भारतीय अब भी लापता हैं। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (28 अगस्त) को बताया कि करीब 400 अन्य भारतीय चीन की तरफ फंसे हुए हैं। मंत्रालय ने कहा कि भारत काठमांडू को राहत एवं बचाव प्रयासों में हरसंभव सहायता देने के लिए तैयार है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि चीन की तरफ फंसे 96 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से सड़क मार्ग से नेपाल पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि 21 भारतीय शुक्रवार दोपहर नई दिल्ली पहुंचे। ये लोग एक दिन पहले नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों से काठमांडू पहुंचे थे।

तमिलनाडु के इन निवासियों का राष्ट्रीय राजधानी के हवाई अड्डे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्वागत किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार (28 अगस्त) को बताया कि नेपाल-चीन सीमा के चीनी हिस्से में फंसे 400 से ज्यादा भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित सैकड़ों अन्य लोगों से संपर्क करने की कोशिशें जारी हैं। नेपाल के अधिकारियों द्वारा शेयर की गई ताजा जानकारी के अनुसार, बुधवार को अचानक आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 547 हो गई है।

320 भारतीयों की तलाश जारी

जायसवाल ने कहा, “जहां तक उन भारतीयों की संख्या का सवाल है, जिनसे हम संपर्क नहीं कर पा रहे हैं या जो लापता हैं, इस समय यह संख्या 320 है।” उन्होंने कहा, “भारतीय मूल के करीब 100 लोग ऐसे भी हैं, जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। ये भारतीय मूल के लोग हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए हो सकते हैं, लेकिन उनके पास अन्य देशों की नागरिकता है।” जायसवाल ने कहा कि करीब 400 भारतीय चीन की तरफ फंसे हुए हैं, लेकिन वे सुरक्षित हैं।

उन्होंने कहा, “वे अपने परिवारों के संपर्क में हैं। हमारे दूतावास ने भी उनमें से कई लोगों से संपर्क किया है। उनके परिवार के कई सदस्यों ने भी बीजिंग स्थित हमारे दूतावास द्वारा संचालित हेल्पलाइन नंबरों के जरिए हमसे संपर्क किया है।” जायसवाल ने कहा, “हमारा दूतावास चीन में स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है। इस बात पर काम कर रहा है कि वहां फंसे इन लोगों को किस तरह निकाला जा सकता है।”

जयशंकर ने की हाईलेवल मीटिंग

इस बीच, जयशंकर ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की और नेपाल की स्थिति की समीक्षा की। बैठक के दौरान लापता भारतीयों की स्थिति का पता लगाने पर विशेष ध्यान दिया गया। काठमांडू और बीजिंग में भारत के राजदूत भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक में शामिल हुए। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, “नेपाल में जारी राहत और बचाव प्रयासों पर चर्चा की। काठमांडू और बीजिंग स्थित हमारे दूतावासों ने भारतीय नागरिकों की स्थिति और उनके सुरक्षित होने के संबंध में ताजा जानकारी दी।”

मौत का आंकड़ा 547 पहुंचा

नेपाल में कई और शव बरामद किए जाने के साथ ही भीषण बाढ़ से मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 547 हो गई। इस बीच, तलाश और बचाव अभियान सतर्कता के साथ जारी है, क्योंकि भोटेकोशी नदी इलाके में जलस्तर बढ़ने से दोबारा इस आपदा का खतरा मंडरा रहा है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने कहा कि इस सप्ताह की शुरुआत में जिस स्थान पर भीषण बाढ़ आई थी वहां जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।

एनडीआरआरएमए ने अपने ताजा नोटिस में कहा, “बुधवार को जिस स्थान पर अचानक बाढ़ आई थी, उसी जगह पर अब कीचड़-युक्त पानी का स्तर बढ़ जाने से उस क्षेत्र में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।” मध्य नेपाल के रसुवा और अन्य इलाकों में बुधवार को आई जबरदस्त बाढ़ के बाद यह चेतावनी जारी की गई है। बुधवार को आई बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है। बस्तियों, सड़कों, पुलों और पनबिजली के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।

लोगों को सतर्क रहने की अपील

NDRRMA ने तलाश और बचाव कार्यों में शामिल लोगों के साथ-साथ अलग-अलग वजहों से भोटेकोशी और त्रिशूली इलाकों में रह रहे लोगों से अपील की है कि वे अत्यधिक सतर्क रहें। साथ ही किसी भी तरह का खतरा महसूस होने पर तुरंत सुरक्षित जगहों पर चले जाएं।

नेपाल पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि इस हिमालयी देश के आठ जिलों से 547 शव बरामद किए गए हैं। जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं। पुलिस के अनुसार, नवलपरासी पूर्व से 134, चितवन से 221, गोरखा से 44 और नुवाकोट से 38 शव बरामद किए गए।

इसी तरह, धादिंग से 40, तनाहू से 29, नवलपरासी पश्चिम से 28 और रसुवा से 13 शव बरामद किए गए हैं। चीनी अधिकारियों के अनुसार, तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में पांच लोगों की मौत हो गई है। नेपाल के रसुवा और आसपास के जिलों में बुधवार सुबह अचानक बाढ़ आने के बाद से कम से कम 977 लोग लापता हैं। इनमें 86 सुरक्षाकर्मी, 517 विदेशी पर्यटक और 127 नेपाली यात्री शामिल हैं।

अब तक प्रभावित इलाकों से 1,545 घायल व्यक्तियों और फंसे हुए लोगों को बचाया जा चुका है। इनमें से 84 लोगों का काठमांडू के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज हो रहा है, जहां परिजन बड़ी बेसब्री से अपनों की तलाश कर रहे हैं। नेपाल पुलिस ने तिब्बत की तरफ एक बांध के फिर से टूटने की सूचना मिलने के बाद अलर्ट जारी किया है।

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नेपाल पर्यटन बोर्ड ने शुक्रवार को बताया कि इस त्रासदी के बाद बाढ़-प्रभावित अलग-अलग इलाकों से कम से कम 121 विदेशी पर्यटकों को बचाया गया है, जिनमें 85 भारतीय शामिल हैं। पर्यटन बोर्ड के मुताबिक, बचाए गए पर्यटकों में दक्षिण कोरिया के 9 और चीन के 16 नागरिक शामिल हैं। पुलिस बयान के अनुसार, इस त्रासदी के बाद तीसरे दिन भी तलाश और बचाव अभियान जारी रहा। अभियान में 7,451 सुरक्षाकर्मी जुटे हुए हैं जिनमें नेपाल सेना के 2,391 जवान शामिल हैं।

Nepal flash floods: नेपाल पर फिर मंडराया विनाशकारी बाढ़ का खतरा! तिब्बत में झील का बांध टूटा, नेपाली पुलिस ने जारी किया अलर्ट

Nepal flash floods alert: पड़ोसी देश नेपाल में एक बार फिर विनाशकारी बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इस सप्ताह के शुरु में नेपाल में जो स्थान अचानक आई बाढ़ की चपेट में आया था वहां जलस्तर बढ़ने के बाद नेपाल प्रशासन ने एक बार फिर बाढ़ की चेतावनी जारी की है। यह चेतावनी शुक्रवार (28 अगस्त) को जारी की गई। अधिकारियों ने इलाके के लोगों और बचाव कर्मियों से सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है। नेपाल के त्रिशूली में पुलिस अधिकारी पी. चौधरी ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि बचाव कार्य रोक दिए गए हैं

अधिकारियों ने बताया कि नेपाल-चीन सीमा के पास पहले आई प्राकृतिक आपदा से जमा हुए मलबे के कारण बनी एक झील का पानी शुक्रवार (28 अगस्त) को बढ़कर बहने लगा। इसके बाद नेपाली अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों में मौजूद रेस्क्यू टीमों और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया।

नेपाल पुलिस ने तत्काल अलर्ट जारी करते हुए बताया कि उसे सूचना मिली है कि तिब्बत की ओर पानी रोकने वाला एक नेचुरल बैरियर (Natural Barrier) टूट गया है। इस खबर के बाद पहले से बाढ़ की मार झेल रहे इलाकों में एक बार फिर खतरे की स्थिति बन गई है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने कहा कि उसी स्थान पर जलस्तर बढ़ने से इलाके में एक बार फिर बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है।

कीचड़ वाले पानी का स्तर बढ़ा

यह चेतावनी बुधवार को रसुवा और मध्य नेपाल के अन्य हिस्सों में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद जारी की गई है। इस बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई है और बस्तियों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। प्राधिकरण ने एक नए नोटिस में कहा, “जिस जगह पर अचानक बाढ़ आई थी वहां कीचड़ वाले पानी का स्तर बढ़ गया है और इलाके में फिर से बाढ़ आने का खतरा है।”

NDRRMA ने खोज एवं बचाव अभियान में शामिल लोगों और अलग-अलग वजहों से भोटेकोशी एवं त्रिशूली इलाकों में रह रहे लोगों से कहा है कि वे बहुत सतर्क रहें। साथ ही किसी भी तरह का खतरा महसूस होने पर तुरंत सुरक्षित जगहों पर चले जाएं। तिब्बत की तरफ एक बांध के फिर से टूटने की खबर मिलने के बाद नेपाल पुलिस ने भी अलर्ट जारी किया है।

तिब्बत की ओर एक बांध फिर से टूटा

नेपाल पुलिस ने Xपर एक पोस्ट में कहा, “ऐसी सूचना है कि तिब्बत की ओर एक बांध फिर से टूट गया है।” नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने गुरुवार को नेपाल-चीन सीमा के पास एक नयी झील बनने के बाद भोटेकोशी नदी के निचले इलाकों में बाढ़ के नए खतरे की चेतावनी दी थी।

चीनी अधिकारियों ने नेपाल को बताया था कि झील में लगभग 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो गया है और अगले तीन दिनों में इसमें 30 लाख क्यूबिक मीटर और पानी आ सकता है, जिससे बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। यह झील छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास बनी है। ये नदियां तिब्बत से निकलती हैं और भोटे कोशी नदी की सहायक नदियों के तौर पर नेपाल में बहती हैं।

दो दिन पहले तबाही, अब फिर नया खतरा!

यह नया संकट उस विनाशकारी घटना के महज दो दिन बाद सामने आया है, जब हिमालयी सीमा क्षेत्र में ग्लेशियर के बड़े हिस्से के ढहने के बाद अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। उस आपदा के दौरान बड़ी मात्रा में चट्टान, मिट्टी, बर्फ और अन्य मलबा जमा हो गया था। इसी मलबे के कारण ऊपरी इलाके में एक झील जैसी संरचना बन गई। लगातार पानी जमा होने के कारण शुक्रवार को यह झील ओवरफ्लो होने लगी। इससे उन इलाकों पर फिर से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है, जो बुधवार की फ्लैश फ्लड में पहले ही बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं।

25 लाख घन मीटर से ज्यादा हुआ झील में पानी

रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार तक झील में पानी की मात्रा 25 लाख घन मीटर से अधिक हो चुकी थी। इससे एक दिन पहले इंजीनियरिंग टीम ने झील में करीब 15 से 20 लाख घन मीटर पानी होने का अनुमान लगाया था। यानी बहुत कम समय में झील में पानी की मात्रा तेजी से बढ़ी, जिससे अधिकारियों की चिंता और बढ़ गई। अगर इस तरह बनी झील का प्राकृतिक या मलबे से बना बांध अचानक टूटता है, तो बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर तेजी से पहुंच सकता है। इससे पहले से प्रभावित इलाकों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।

रेस्क्यू ऑपरेशन भी करना पड़ा अस्थायी रूप से बंद

झील से जुड़े इस नए खतरे के कारण प्रभावित क्षेत्र में चल रहा बचाव अभियान भी कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। सुरक्षा को देखते हुए रेस्क्यू कर्मियों को जोखिम वाले क्षेत्रों से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लोगों को संभावित बाढ़ की चपेट में आने से बचाना और स्थिति पर लगातार नजर रखना है।

नेपाल को चीन से मिली झील टूटने की सूचना

हालांकि, नेपाली अधिकारियों ने शुरुआत में यह स्पष्ट किया कि झील के पूरी तरह टूटने या फटने की सूचना की नेपाल की तरफ से स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई थी। रसुवा जिला प्रशासन कार्यालय के सहायक मुख्य जिला अधिकारी और सूचना अधिकारी द्रुबा प्रसाद अधिकारी के मुताबिक, नेपाली अधिकारियों को चीनी अधिकारियों की ओर से इस संबंध में जानकारी दी गई थी। उन्होंने कहा कि चीन की ओर से सूचना मिली है कि एक झील टूट सकती है। लेकिन नेपाली पक्ष अभी तक इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर पाया है।

प्रभावित क्षेत्र में बढ़ी चिंता

लगातार दो प्राकृतिक आपदाओं के बाद सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों और राहत-बचाव एजेंसियों के सामने चुनौती और बढ़ गई है। पहले बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी थे। लेकिन अब मलबे से बनी झील के ओवरफ्लो होने की खबर ने एक और संभावित बाढ़ की आशंका पैदा कर दी है। अधिकारियों की नजर झील में पानी के स्तर और प्राकृतिक अवरोध की स्थिति पर बनी हुई है।

स्थिति बिगड़ने की स्थिति में संवेदनशील इलाकों से लोगों को और अधिक सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी की जा रही है। यानी दो दिन पहले आई तबाही के बाद नेपाल के हिमालयी क्षेत्र में संकट अभी टला नहीं है। मलबे से बनी झील में तेजी से बढ़ता पानी और उसके ओवरफ्लो होने की स्थिति ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।