UP News: ‘जो भगवान श्री राम का विरोध करें…’; यूपी चुनाव से पहले अखिलेश यादव को बड़ा झटका, अभय सिंह समेत सपा के 3 विधायक BJP में शामिल

UP News: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख अखिलेश यादव को बड़ा झटका लगा है। बुधवार (14 अक्टूबर) को SP के तीन बागी विधायक भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। समाजवादी पार्टी के ये तीन बागी विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी हैं। राकेश प्रताप सिंह अमेठी की गौरीगंज विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। जबकि अभय सिंह अयोध्या की गोसाईंगंज सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं, विनोद चतुर्वेदी जालौन की कालपी विधानसभा सीट से विधायक हैं।

इन विधायकों ने 2022 का चुनाव SP के टिकट पर जीता था। लेकिन 2024 के राज्यसभा चुनाव में BJP उम्मीदवार के पक्ष में वोट कर दिया था। यूपी के अमेठी में बुधवार (14 अक्टूबर) को BJP प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मौजूदगी में तीनों बागी सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुवेर्दी BJP में शामिल हुए।

कौन हैं MLA अभय सिंह?

अभय सिंह भगवान राम की नगरी अयोध्या की गोसाईगंज विधानसभा सीट से विधायक हैं। सिंह भी समाजवादी पार्टी के एक प्रमुख नेता हैं। राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग के बाद अभय सिंह पर कार्रवाई हुई थी। बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग के बाद समाजवादी पार्टी ने अभय सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेदों और राजनीतिक बयानों के कारण उनका नाम पहले भी सुर्खियों में रहा है। औपचारिक सदस्यता से पहले भी अभय सिंह कई मौकों पर भगवा पार्टी के मंच पर दिखाई दिए थे। 2027 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सियासत का प्रमुख केंद्र बन चुकी अयोध्या का सियासी तापमान अब और बढ़ने की उम्मीद है।

बुधवार को गोसाईंगंज के विधायक अभय सिंह आधिकारिक तौर पर भगवा पार्टी का दामन थाम लिया। इसके बाद अब वह BJP के लिए निर्भय होकर मैदान में उतर सकेंगे। अभय सिंह ने SP के टिकट पर 2012 और 2022 में गोसाईंगंज विधानसभा सीट जीती। 2017 के विधानसभा चुनाव में वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार इंद्र प्रताप उर्फ खब्बू तिवारी से हार गए थे। जबकि 2022 में सिंह ने BJP उम्मीदवार आरती तिवारी को 13,079 वोटों से हराया।

‘जो श्री राम का विरोध करेगा, हम लोग उसके विरोधी हो जाएंगे’

समाजवादी पार्टी के विधायक अभय सिंह ने BJP में शामिल होने पर न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “जो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का विरोध करें, जो राष्ट्र का विरोध करेंगे, हम लोग उसके विरोधी हो जाएंगे। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के बारे में जन-जन तक हिंदी और अवधि में पहुंचाने वाले, तुलसीदास ने राम चरित मानस को लिखा। उस रामचरित मानस को जलाया जाए, फाड़ा जाए। उसके बाद इस घटना पर कोई टिप्पणी न की जाए। उसके बाद दर्शन से रोका जाए। ये सब चीजें ऐसी हैं जो उचित नहीं हैं।”

कौन हैं राकेश प्रताप सिंह?

राकेश प्रताप सिंह अमेठी के गौरीगंज से विधायक हैं। सिंह हाईस्कूल तक की पढ़ाई की हुई है। वह साल 2012, 2017 और 2022 में तीन बार विधायक चुने गए हैं। 2022 में राकेश प्रताप सिंह सपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। उन्होंने शानदार जीत भी दर्ज की थी। लेकिन 2024 के राज्यसभा चुनाव के बाद से राकेश प्रताप सिंह सपा को धोखा देकर अपनी पार्टी के अन्य बागी विधायकों के साथ चले गए। इसके बाद अखिलेश यादव ने साल 2025 के जून महीने में राकेश सिंह को सपा से निकाल दिया था।

विनोद चतुर्वेदी के बारे में जानें

जालौन जिले की कालपी विधानसभा सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी भी  BJP में शामिल हो गए हैं। उन्होंने 2022 में समाजवादी पार्टी (SP) के टिकट पर निषाद पार्टी के उम्मीदवार छोटे सिंह को 2,816 वोटों से हराकर कालपी विधानसभा सीट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। कालपी निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने से पहले चतुर्वेदी ने यूपी के जालौन जिले में उरई विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। वे 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इंडियन नेशनल कांग्रेस (INC) के उम्मीदवार के तौर पर उरई सीट से चुने गए थे।

अखिलेश पर बोला हमला

राकेश प्रताप सिंह ने उनके BJP में शामिल होने पर ANI से कहा, “मैं अपने क्षेत्रवासियों का धन्यवाद देता हूं जिन्होंने हमारा समर्थन किया और मुझसे अनुरोध किया कि भाजपा की सदस्यता लीजिए। उन लोगों ने मुझसे कहा कि वे मेरे साथ हैं… 98% लोग जो अपना बूथ जिताते या हराते थे, वे समाजवादी पार्टी का परित्याग करेंगे और BJP की सदस्यता लेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “विधायक विनोद चतुर्वेदी, अभय सिंह और मैं स्वयं भाजपा में शामिल हो रहा हूं। हमारे साथ ऐसे करीब 1000 लोग जो जनप्रतिनिधि या पूर्व जनप्रतिनिधि हैं वो शामिल होंगे…लगभग 1 दर्जन विधायक मंच पर मौजूद रहेंगे।”

इसके अलावा राकेश प्रताप सिंह ने एक X पोस्ट में लिखा, “14 अक्टूबर 2026 का दिन मेरे राजनीतिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक दिन है। यह मेरे लिए केवल भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने का अवसर नहीं, बल्कि सनातन की रक्षा, अपनी आस्था, अपने संस्कारों और अपने सिद्धांतों के साथ एक नई राजनीतिक यात्रा प्रारंभ करने का बहुमूल्य दिन है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने अपने राजनीतिक जीवन में सदैव अपनी सनातन संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक मूल्यों को सर्वोपरि रखा है। बीते समय में समाजवादी पार्टी के भीतर सनातन धर्म, हमारी धार्मिक परंपराओं और पवित्र ग्रंथों को लेकर जिस प्रकार की टिप्पणियां और घटनाएं सामने आईं, उनसे मेरी भावनाएँ बार-बार आहत हुईं। विशेष रूप से जब मुझ जैसे सैकड़ों विधायकों एवं राजनैतिक व्यक्तियों को आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम जी के दर्शन करने ना जाने देना, तो वह क्षण मेरे लिए अत्यंत पीड़ादायक था। उसी दिन मेरे मन में यह विचार दृढ़ हो गया था कि जिस राजनीतिक विचारधारा के साथ मेरी आस्था और मेरा अंतर्मन सहमत नहीं है, उसके साथ आगे बढ़ना मेरे लिए संभव नहीं होगा।”

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UP Shiksha Mitra: दिवाली से पहले यूपी के 1.27 लाख शिक्षामित्रों को बड़ा तोहफा, इस बार डबल से ज्यादा आएगी सैलरी

UP Shiksha Mitra Mandeya 2026: उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों के लिए दिवाली से पहले बड़ी खुशखबरी आई है। सीएम योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार ने बढ़े हुए मानदेय के भुगतान के लिए ₹460.23 करोड़ का बजट जारी कर दिया है। इसके बाद प्रदेश के 1,27,841 शिक्षामित्रों को सितंबर और अक्टूबर महीने का बढ़ा हुआ मानदेय मिलने का रास्ता साफ हो गया है। खास बात यह है कि दोनों महीनों की सैलरी एक साथ उनके बैंक खातों में भेजी जा सकती है।

₹10 हजार से बढ़कर ₹18 हजार हुआ मानदेय

सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय को ₹10,000 से बढ़ाकर ₹18,000 प्रति माह करने की घोषणा की थी। अब सितंबर और अक्टूबर के बढ़े हुए मानदेय के भुगतान के लिए बजट जारी किया गया है। यानी पात्र शिक्षामित्रों को दो महीने के लिए कुल ₹36,000 तक का भुगतान मिल सकता है, जो पहले के दो महीने के ₹20,000 मानदेय से ₹16,000 अधिक है।

सभी जिलों को भेजा गया बजट

NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा विभाग की ओर से जारी बजट सभी जिलों को भेज दिया गया है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि शिक्षामित्रों के खातों में राशि भेजने में किसी तरह की लापरवाही न हो।

दूसरे कर्मचारियों को भी मिल सकता है दिवाली गिफ्ट

शिक्षामित्रों के बाद यूपी सरकार के अन्य कर्मचारियों को भी दिवाली से पहले राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी की जा सकती है। इसके अलावा कर्मचारियों को करीब ₹3,000 से 7,000 रुपये तक बोनस मिलने की भी संभावना है। इससे प्रदेश के लाखों कर्मचारी और पेंशनर्स राहत की सांस लेंगे।

स्थायी नौकरी की मांग अब भी जारी

मानदेय बढ़ने के बावजूद शिक्षामित्रों की स्थायी रोजगार की मांग खत्म नहीं हुई है। शिक्षामित्र लंबे समय से नियमितीकरण और शिक्षक भर्ती में उचित लाभ दिए जाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे वर्षों से सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। लेकिन उन्हें स्थायी नियुक्ति या विशेष TET में उचित अवसर नहीं दिया जा रहा।

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हालांकि, हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों को विशेष TET में शामिल होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। शिक्षामित्रों का आरोप है कि सालों की सेवा के बावजूद उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया में पर्याप्त वेटेज या अवसर नहीं मिल रहा है। इस नाराजगी को देखते हुए योगी सरकार की तरफ से आगामी यूपी चुनाव से पहले शिक्षामित्रों को मनाने की कोशिश जारी है।

नोएडा के DLF मॉल में घी, रिफाइंड ऑयल चुराते पकड़ी गई महिला, बिना पैसे दिए फरार होना चाहती थी महिला

नोएडा के सेक्टर 18 स्थित DLF मॉल ऑफ इंडिया के एक स्टोर का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक महिला पर कथित तौर घी और रिफाइंड कुकिंग ऑयल चुराने का आरोप लगाया जा रहा है। वीडियो में एक महिला को मॉल की सिक्योरिटी टीम ने पकड़ रखा है और उसे लेकर जा रही है। बताया जा रहा है कि महिला मॉल के स्टोर से बिना चीजों का भुगतान किए सामान लेकर जाते हुए पकड़ी गई है। हालांकि, पुलिस और मॉल मैनेजमेंट ने यह कन्फर्म नहीं किया है कि महिला ने कोई सामान चुराया है।

लगभग 30 सेकंड के इस वीडियो में दो महिला सिक्योरिटी गार्ड कथित चोरी की आरोपी महिला को स्टोर के अंदर रोककर ले जाते हुए नजर आ रही हैं। महिला को बाहर निकलते समय अपना चेहरा ढकते हुए देखा जा सकता है। घटना के दौरान, स्टोर के एक कर्मचारी को उस पर सामान चुराने का आरोप लगाते हुए सुना जा सकता है। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो के साथ कई दावे किए गए हैं कि महिला लगभग एक महीने से स्टोर आ रही थी और कथित तौर पर कई बार बिना पेमेंट किए घी और रिफाइंड ऑयल ले गई थी। कुछ पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि उसकी गतिविधियां स्टोर के CCTV कैमरों में कैद हो गई थीं।

हालांकि, इन आरोपों को सपोर्ट करने वाला कोई CCTV फुटेज वायरल वीडियो के साथ शेयर नहीं किया गया है। वीडियो में भी महिला को कोई सामान चुराते या बिना पेमेंट किए स्टोर से जाते हुए नहीं दिखाया गया है। वीडियो के चर्चा में आने के बाद, सेक्टर 20 पुलिस से जानकारी मांगी गई। पुलिस ने कहा कि उनकी शुरुआती जांच में पता चला है कि महिला ने स्टोर से लिए गए सामान के लिए पेमेंट किया था। अधिकारियों ने कहा कि मॉल मैनेजमेंट ने भी पुलिस को यही जानकारी दी। पुलिस ने कहा, “महिला ने सामान के लिए पेमेंट किया था। सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे आरोप साबित नहीं हुए हैं।”

इस वीडियो पर सोशल मीडिया पर कई तरह के रिएक्शन आए हैं, कई यूजर्स ने इस घटना को शेयर और कमेंट किया है। खबर है कि इसे 100 से ज्यादा लोगों ने शेयर किया है। पुलिस ने कहा कि फुटेज से अभी सिर्फ यह पता चलता है कि महिला को सिक्योरिटी वालों ने रोका था और स्टोर के एक कर्मचारी ने उस पर चोरी का आरोप लगाया था। महिला को किन हालात में रोका गया और स्टोर के अंदर क्या हुआ, यह सिर्फ वायरल वीडियो से पक्के तौर पर पता नहीं लगाया जा सकता। अधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया पर किए गए दावों को तब तक साबित सच नहीं माना जाना चाहिए जब तक कि उनके पीछे सबूत न हों।

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Video: फैमिली कोर्ट बना अखाड़ा! सुनवाई के बाद भिड़े पति-पत्नी, जमकर हुई मारपीट

उत्तर प्रदेश के महाराजगंज में फैमिली कोर्ट के बाहर पारिवारिक विवाद को लेकर जमकर हंगामा हुआ। मेंटेनेंस केस की सुनवाई खत्म होने के बाद महिला, उसके पति और रिश्तेदारों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया की मामला मारपीट तक पहुंच गया। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला

क्या है पूरा मामला

ये घटना 24 सितंबर का बताया जा रहा है। ये 24 सितंबर को महाराजगंज जिला मुख्यालय स्थित फैमिली कोर्ट में ये घटना हुई है। यहां प्रिया त्रिपाठी और उनके पति मनीष कुमार मिश्रा अपने पारिवारिक विवाद से जुड़ी सुनवाई के लिए पहुंचे थे। प्रिया के अनुसार, कोर्ट में सुनवाई पूरी होने के बाद ग्राउंड फ्लोर पर विवाद शुरू हुआ। उनका आरोप है कि वहां उनके पति मनीष और उनके साथ मौजूद एक व्यक्ति ने उनके साथ मारपीट की। प्रिया ने कहा कि, उनके पति ने उनके बाल खींचे और गला दबाने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि उन्हें बचाने के लिए उनकी बहन प्रियंका और पिता लक्ष्मीकांत आगे आए, लेकिन आरोप है कि उनके साथ भी हाथापाई की गई।

पुलिस ने स्थिती को संभाला

विवाद कुछ ही देर में बढ़ गया और दोनों पक्षों के लोग आपस में भिड़ गए। कोर्ट परिसर में बनाए गए वीडियो में दोनों तरफ से एक-दूसरे पर थप्पड़ और मुक्के चलाते हुए लोग नजर आ रहे हैं। वीडियो में प्रिया के साथ आया एक व्यक्ति भी मनीष के साथ मारपीट करता दिखाई देता है। शोर-शराबा सुनकर मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी तुरंत पहुंचे और दोनों पक्षों को अलग कर स्थिति को संभाला।

पिछले कुछ समय से था मतभेद

जानकारी के अनुसार, शादी के कुछ समय बाद से ही प्रिया और मनीष के बीच मतभेद चल रहे थे। अब कोर्ट परिसर में हुई मारपीट के मामले में पुलिस सभी आरोपों की जांच कर रही है। जांच के दौरान घटना से जुड़े वीडियो और अन्य सबूतों को भी देखा जा रहा है, ताकि विवाद की पूरी वजह और घटनाक्रम का पता लगाया जा सके।

प्रिया ने दर्ज करवाई शिकायत

घटना के बाद प्रिया ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले को आगे बढ़ाने पर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। कोतवाली महाराजगंज के एसएचओ धर्मेंद्र सिंह के मुताबिक, पुलिस ने शिकायत के आधार पर दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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यूपी के एटा की कोर्ट में काम करने के दौरान लेडी जज को आया हार्ट अटैक

एटा (UP), 21 सितंबर (PTI): एटा कोर्ट परिसर में सोमवार को उस समय अचानक हलचल बढ़ गई, जब कोर्ट में कामकाज के दौरान एडिशनल सिविल जज आरती मौर्य की तबीयत बिगड़ गई। घटना के बाद कोर्ट परिसर में मौजूद कर्मचारियों और अन्य लोगों का ध्यान उनकी ओर गया। सिचुएशन को देखते हुए उन्हें तुरंत मेडिकल सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और संबंधित अधिकारी भी मामले पर नजर रखने लगे।

अप्रैल में आई थीं एटा

आरती मौर्य एटा की कोर्ट नंबर 23 में एडिशनल सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के पद पर तैनात हैं। उनकी एटा में पोस्टिंग इसी साल अप्रैल में हुई थी। उन्होंने 2019 में न्यायिक सेवा में कदम रखा था। 32 वर्षीय आरती मौर्य मूल रूप से मैनपुरी की रहने वाली हैं। न्यायिक सेवा में आने के बाद उन्होंने अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाली हैं और फिलहाल एटा कोर्ट में अपनी सेवाएं दे रही हैं।

अस्पताल में कराया गया भर्ती

तबीयत बिगड़ने के बाद आरती मौर्य को वीरांगना अवंतीबाई लोधी ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी विभाग में ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने उनकी जांच की और स्थिति का आकलन किया। डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें हार्ट अटैक आया था। इसके बाद मेडिकल टीम ने तुरंत शुरुआती इलाज शुरू किया। उनकी कंडीशन को देखते हुए डॉक्टरों ने आगे बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए उन्हें दूसरे मेडिकल सेंटर रेफर करने का फैसला लिया।

पुलिस को मिली घटना की सूचना

कोतवाली नगर के स्टेशन हाउस ऑफिसर धर्मेंद्र पवार ने बताया कि पुलिस को कोर्ट परिसर में जज की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिली थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस को अस्पताल में उनके भर्ती होने की जानकारी मिली। बाद में डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए दूसरे सेंटर भेजे जाने की बात सामने आई। उनकी स्थिति को देखते हुए आगे का इलाज स्पेसलिस्ट की निगरानी में कराया जा रहा है।

कोर्ट में काम के दौरान अचानक सामने आई इस मेडिकल इमरजेंसी के बाद वहां मौजूद लोगों के बीच काफी चिंता देखी गई। इस तरह की सिचुएशन में मेडिकल इमरजेंसी बहुत जरुरी मानी जाती है। फिलहाल आरती मौर्य को बेहतर इलाज कराने पर ध्यान दिया जा रहा है और मेडिकल टीम उनकी कंडीशन के हिसाब से आगे का ट्रीटमेंट कर रही है।

मुजफ्फरनगर से ई-रिक्शा लेकर स्पीति वैली पहुंचा लड़का, 12,500 फीट पर पहुंचते ही वायरल हुआ वीडियो

मुजफ्फरनगर के रहने वाले सुमित कुमार प्रजापति इन दिनों अपने अनोखे सफर की वजह से सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। जहां लोग स्पीति वैली जाने के लिए कार, बाइक या एसयूवी का सहारा लेते हैं, वहीं सुमित अपनी ई-रिक्शा लेकर पहाड़ों की ओर निकल पड़े। उनका यह सफर सिर्फ घूमने-फिरने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर मोड़ पर एक नई चुनौती और नया अनुभव सामने आ रहा है। सुमित ने इस यात्रा की शुरुआत 15 अगस्त को की थी। सफर शुरू करते समय उन्होंने इंस्टाग्राम पर बताया था कि वह रोजाना वीडियो के जरिए लोगों को अपनी यात्रा की जानकारी देंगे।

रास्ते में उन्हें किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, लोग उनकी ई-रिक्शा को देखकर कैसी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और यात्रा किस तरह आगे बढ़ रही है इन सभी चीजों को वह कैमरे में कैद करते रहे। अब तक उन्होंने कुल 27 वीडियो के जरिए अपनी यात्रा की कहानी साझा की है।

मनाली तक पहुंचने का तरीका भी था खास

सुमित के इंस्टाग्राम पेज के मुताबिक, वह अपने दोस्तों के साथ गाड़ी से मनाली पहुंचे। उनकी ई-रिक्शा को ट्रक में लादकर मनाली तक पहुंचाया गया। इसके बाद यात्रा का सबसे दिलचस्प हिस्सा शुरू हुआ। 19 अगस्त को सुमित मनाली से ई-रिक्शा पर सवार होकर अकेले स्पीति वैली की ओर निकल पड़े। पहाड़ों के मुश्किल रास्तों पर तीन पहियों वाली इलेक्ट्रिक सवारी को आगे बढ़ते देखकर लोग भी हैरान रह गए। उनके एक वीडियो पर यूट्यूब इंडिया ने भी प्रतिक्रिया दी और मजेदार अंदाज में लिखा, “मॉडर्न प्रॉब्लम्स को देसी सॉल्यूशन चाहिए।”

‘बैटरी कहां चार्ज होगी?’ लोगों ने पूछा सवाल

जैसे ही सुमित के वीडियो सोशल मीडिया पर आने लगे, लोगों के मन में सबसे पहला सवाल ई-रिक्शा की बैटरी को लेकर उठा। यूजर्स पूछने लगे कि पहाड़ों के बीच आखिर ई-रिक्शा को चार्ज कहां किया जाएगा। सुमित ने बताया कि वह जिस जगह रुकते हैं, वहीं अपनी ई-रिक्शा को चार्ज करते हैं। इतना ही नहीं, किसी आपात स्थिति में काम आने के लिए उन्होंने जेनरेटर भी अपने साथ रखा है।

फैंस की एक बात मानकर बदल दिया सफर का अंदाज

सुमित की पहली वीडियो देखने के बाद एक सोशल मीडिया यूजर ने उनसे कहा कि अगर ई-रिक्शा इतनी दूर जा रही है तो इसमें सवारियां क्यों नहीं बैठाते। सुमित ने इस सुझाव को मान लिया। इसके बाद उन्होंने ई-रिक्शा में सवारियां बैठाकर स्पीति की ओर सफर जारी रखा। इससे उनकी यात्रा का अनुभव और भी अलग हो गया। अब वह सिर्फ अपनी मंजिल की ओर बढ़ने वाले यात्री नहीं थे, बल्कि रास्ते में मिलने वाले लोगों के साथ भी इस अनोखे सफर को साझा कर रहे थे।

12,500 फीट की ऊंचाई पर ई-रिक्शा ने सबको रोका

जैसे-जैसे सुमित ऊंचाई की ओर बढ़े, उनकी ई-रिक्शा लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन गई। करीब 12,500 फीट की ऊंचाई वाले पथरीले रास्तों पर तीन पहियों वाली इस सवारी को चलते देखकर कई लोग रुक गए। कुछ लोगों ने सुमित के वीडियो बनाए, कुछ ने उनकी हिम्मत की तारीफ की और कई लोग तालियां बजाते नजर आए। वहीं, कुछ लोगों के लिए यह समझना ही मुश्किल था कि आखिर ई-रिक्शा इतनी खड़ी चढ़ाई और खराब रास्तों को पार कैसे कर रही है।

कुंजुम पहुंचकर बनाया रिकॉर्ड

26 अगस्त को सुमित अपनी ई-रिक्शा लेकर कुंजुम पहुंचे। उन्होंने इसे अपनी यात्रा की बड़ी उपलब्धि बताया और दावा किया कि ई-रिक्शा से वहां तक पहुंचने वाला यह पहला ऐसा सफर है। इस उपलब्धि ने उनकी यात्रा को और खास बना दिया। सोशल मीडिया पर पहले जहां लोग उनकी ई-रिक्शा को लेकर सवाल पूछ रहे थे, वहीं अब उनके सफर की चर्चा उपलब्धि के तौर पर होने लगी।

‘कार नहीं थी, लेकिन सपना तो था’

1 सितंबर को शेयर किए गए वीडियो में सुमित ने अपने सफर के पीछे की कहानी बताई। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का सपना होता है कि वह कभी शहर से दूर पहाड़ों के किसी गांव में जाकर सुकून के कुछ पल बिताए। उनका भी ऐसा ही सपना था, लेकिन उनके पास कार नहीं थी। इसके बावजूद उन्होंने रुकने के बजाय अपनी ई-रिक्शा को ही सफर का साथी बना लिया। सुमित का कहना है कि जहां लोग मुश्किल पहाड़ी रास्तों पर 4×4 गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं, वहीं वह बैटरी से चलने वाले तीन पहियों के वाहन के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उनकी कहानी अब सोशल मीडिया पर सिर्फ एक अनोखी यात्रा नहीं, बल्कि इस बात की मिसाल बन गई है कि सपने देखने के साथ उन्हें पूरा करने का हौसला भी जरूरी है।

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UP News : योगी सरकार का बड़ा एक्शन! लापरवाही पर 5 तहसीलदार निलंबित, 13 अन्य को नोटिस, जानें पूरा मामला

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योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राजस्व मामलों में लापरवाही और उदासीनता पर कड़ी कार्रवाई की गई है। राजस्व अदालतों में लंबित वादों के समयबद्ध निस्तारण में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राजस्व परिषद ने पांच तहसीलदारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जबकि 13 तहसीलदारों व नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। 7 सितंबर को प्रदेश के सभी राजस्व न्यायालयों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-34 के तहत दाखिल वादों की तहसीलवार और अधिकारीवार गहन समीक्षा की गई थी, जिसके बाद यह सख्त कार्रवाई की गई।

 

निलंबित किए गए अधिकारियों में अमित यादव तहसीलदार संडीला हरदोई, कृष्ण कुमार मिश्रा तहसीलदार देवरिया, सौरभ कुमार तहसीलदार जौनपुर, रंजन वर्मा तत्कालीन नायब तहसीलदार अयोध्या व सम्प्रति तहसीलदार गाजीपुर और अलख शुक्ला तहसीलदार जनपद प्रतापगढ़ शामिल हैं। इससे पहले 1 सितंबर 2026 को भी चार तहसीलदारों और एक नायब तहसीलदार को निलंबित किया गया था। यह कार्रवाई 29 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री द्वारा राजस्व अदालतों में लंबित वादों के समयबद्ध निस्तारण की उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद दिए गए निर्देशों के क्रम में की जा रही है। समीक्षा में राजस्व वादों का निर्धारित समय सीमा के भीतर हर स्थिति में निस्तारण सुनिश्चित करने और किसी भी स्तर पर बरती गई लापरवाही अथवा उदासीनता पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।

 

13 तहसीलदारों व नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस

इसके अलावा वादों के निस्तारण में बरती गई लापरवाही के दृष्टिगत 13 तहसीलदारों व नायब तहसीलदारों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इनमें चंद्रशेखर वर्मा तत्कालीन तहसीलदार देवरिया व सम्प्रति तहसीलदार गोरखपुर, गोपाल जी तत्कालीन नायब तहसीलदार देवरिया व सम्प्रति नायब तहसीलदार कुशीनगर, रविरंजन कश्यप तहसीलदार जौनपुर, राकेश कुमार तत्कालीन तहसीलदार जौनपुर व सम्प्रति तहसीलदार बलरामपुर, कविता ठाकुर तत्कालीन तहसीलदार बाराबंकी व सम्प्रति तहसीलदार गोंडा, देवानन्द तिवारी तत्कालीन तहसीलदार सुल्तानपुर व सम्प्रति तहसीलदार फिरोजाबाद, स्नेहल वर्मा तत्कालीन नायब तहसीलदार अयोध्या व सम्प्रति नायब तहसीलदार लखनऊ, राहुल सिंह तहसीलदार अमेठी, अनिल कुमार तहसीलदार प्रतापगढ़, यजुवेन्द्र सिंह नायब तहसीलदार लखनऊ, सुखवीर सिंह नायब तहसीलदार लखनऊ, रमाशंकर मिश्रा नायब तहसीलदार रायबरेली और शार्द सिंह तहसीलदार लखनऊ शामिल हैं।

 

राजस्व परिषद की ओर से इन अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू की जा रही है। मामलों में जवाबदेही निर्धारित करते हुए नियमानुसार अग्रेतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों का समयबद्ध और प्रभावी निस्तारण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री द्वारा की गई समीक्षा के क्रम में राजस्व परिषद द्वारा राजस्व न्यायालयों के कार्यों की प्रगति और निस्तारण की स्थिति पर विशेष निगरानी रखते हुए अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है।

 

राजस्व परिषद ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई सिर्फ एक बार होने वाली कार्रवाई नहीं, बल्कि एक सतत और निरंतर प्रक्रिया का हिस्सा है। राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निस्तारण में लापरवाही और उदासीनता किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी। वादों के समयबद्ध निस्तारण में अपेक्षित प्रगति नहीं पाए जाने अथवा कार्यों में लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ बिना किसी शिथिलता के नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, जिससे प्रदेश के किसानों और आम नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और सुलभ न्याय उपलब्ध हो सके।

Divya Mittal: कौन हैं दिव्या मित्तल जिन्होंने 13 साल करके छोड़ दी IAS की नौकरी और दिया इस्तीफा?

उत्तर प्रदेश की 2013 बैच की आईएएस दिव्या मित्तल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (आईएएस) के पद पर उन्होंने 13 सालों तक काम किया। वहीं सोशल मीडिया पर एक लंबे-चौड़े पोस्ट के जरिए उन्होंने इस बात की जानकारी दी है। अपने पोस्ट में दिव्या मित्तल ने लिखा, “आज मैंने 13 साल की इस यादगार यात्रा को अपनी इच्छा से खत्म करते हुए IAS से इस्तीफा दे दिया है।” वहीं इस पोस्ट के बाद से सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई कि कौन है दिव्या मित्तल। दिव्या ने आईएएस ऑफिसर बनने के लिए लंदन से वापस भारत आई थी। आइए जानते हैं कौन हैं कौन है दिव्या मित्तल

कौन है दिव्या मित्तल

दिव्या मित्तल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली से की है। वहीं 12वीं के बाद IIT दिल्ली में 2001 से 2005 के बीच बीटेक की डिग्री पूरी की। इसके बाद उन्होंने CAT परीक्षा पास की और IIM बेंगलुरु में MBA में प्रवेश लिया। 2005-07 के दौरान पढ़ाई पूरी होने के बाद दिव्या ने लंदन में नौकरी मिल गई। लेकिन लंदन में कुछ समय काम करने के बाद भारत लौटने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले प्रयास में UPSC पास कर IPS सेवा हासिल की और इसके अगले प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 68 हासिल करते हुए IAS के लिए चयनित हुईं।

देश के लिए कुछ करना था

सोशल मीडिया पर किए इमोशनल पोस्ट में दिव्या ने कहा, “आज मैंने 13 साल की इस यादगार यात्रा को अपनी इच्छा से खत्म करते हुए IAS से इस्तीफा दे दिया है। एक साधारण परिवार में पली-बढ़ी और एक अच्छे व सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात मेहनत करके IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ाई की और इसके बाद लंदन में नौकरी भी मिल गई। लेकिन सब कुछ हासिल करने के बाद भी मन में कुछ कमी महसूस होती थी। अपने देश से दूर रहना हमेशा खलता था।”

‘मेरी पढ़ाई, मेरा आत्मविश्वास और दुनिया में कहीं भी अपने दम पर आगे बढ़ने की ताकत, सब इसी देश की देन थी। मुझे लगा कि इस मिट्टी का कर्ज चुकाना चाहिए। मैं चाहती थी कि जिस भारत का सपना मैंने देखा है, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। इसी सोच के साथ मैं वापस भारत आई और IAS अधिकारी बनने का मौका मिला।”

हर जगह से काफी कुछ सीखने को मिला

पोस्ट में आगे कहा, “इस दौरान मुझे बहुत कुछ करने और सीखने का मौका मिला। देवरिया ने मुझे सिखाया कि सही बात के साथ खड़ा होना कोई विकल्प नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई सच नहीं होता, यह सिर्फ हमारी सोच हो सकती है। मां विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर यह समझ आया कि असली ताकत किसी पद से नहीं, बल्कि उनकी कृपा और लोगों के भरोसे से मिलती है। मेरी सबसे बड़ी सीख यह रही कि अपने लिए देखे गए सपने तो पूरे हो चुके थे, अब बारी अपने लोगों के सपनों को पूरा करने की थी। इस जीवन में सबसे ज्यादा खुशी तब मिली, जब किसी परिवार को पहली बार जमीन का अधिकार मिला, किसी दिव्यांग व्यक्ति को सम्मान के साथ जीने का मौका मिला या किसी किसान के खेत तक पानी पहुंचा। लोगों के संघर्ष में उनके साथ चलते हुए मैंने जाना कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक इंसान होता है और उसकी गरिमा का सम्मान करना ही असली न्याय है।”

मूर्ख थी जो सोचती थी

पोस्ट में आगे कहा, “मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूं। सच यह है कि सबसे ज्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज और भी बढ़ता गया। लोगों ने मेरी खुशी में मुझसे भी ज्यादा खुश हुए। जब मैं खुद थकी या परेशान होती थी, तब भी उन्होंने मुझ पर पूरा भरोसा बनाए रखा। इसी भरोसे ने मुझे आगे बढ़ते रहने की ताकत दी। मुझे इतना प्यार, सम्मान और अपनापन मिला कि मेरी जिंदगी पूरी तरह भर गई। इस सफर में मेरे साथ काम करने वाले साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बड़ा योगदान रहा, जिन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया और मिलकर काम किया।”

 

नम आंखों से दे रही इस्तीफा

दिव्या ने पोस्ट के आखिर में कहा, “आज दिल में आभार है और आंखें नम हैं। बस एक तस्वीर बार-बार आंखों के सामने आ रही है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वह बुजुर्ग मां, जिसने अपने गांव में पहली बार पानी पहुंचते देखा था। उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस कांपते हाथों से मेरे सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया। आज मेरा पद जरूर छूट गया है, लेकिन उनका वह प्यार भरा स्पर्श मैं जिंदगी भर नहीं भूल पाऊंगी। और इस देश की मिट्टी ने जो सपना मुझे दिया है, वह भी हमेशा मेरे साथ रहेगा।”

Mohan Bhagwat New York Visit: ‘अगर कोई हिंदू नहीं चाहता कि भारत में मुस्लिम रहें, तो…’; न्यूयॉर्क में क्या बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत?

Mohan Bhagwat New York Visit: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार (29 अगस्त) को न्यूयॉर्क में ‘वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी’ (एक दुनिया: एक मानवता) नाम के धर्म गुरुओं के एक सम्मेलन को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने अलग-अलग धर्मों के बीच एकता और सद्भाव की अपील की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत में कोई मुस्लिम न रहे, ऐसा सोचने वाला हिंदू नहीं हो सकता। भागवत ने कहा कि आज धर्मों की पहचान मुख्य रूप से रीति-रिवाजों से होती है। उन्होंने कहा, “धार्मिक अनुशासन का पालन करने और दिव्यता की राह पर चलने के लिए रीति-रिवाजों का अनुशासन भी जरूरी है। लेकिन धर्म का मकसद क्या है? यह हमें सच्चाई की ओर ले जाता है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं ऐसे समाज में काम कर रहा हूं जो पारंपरिक रूप से कहता है कि धर्म भले ही अलग-अलग हों, लेकिन मानवता एक है। सच्चाई एक है और मानवता उसी सच्चाई का नतीजा है।” भागवत ने कहा, “हिंदुत्व का मतलब मुस्लिम को बाहर (देश से) करना नहीं है। मुस्लिम नहीं होने चाहिए ऐसा सोचना हिंदुत्व नहीं हो सकता। धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक है।” भागवत ने कहा कि अगर आप खुद को हिंदू कहते हैं, तो आपको यह मानना होगा कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं।

भागवत ने अपने संबोधन में समाज को प्राचीन परंपराओं के बारे में शिक्षित करने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की परंपराएं विदेशी आक्रमणों के बावजूद बची हुई हैं। इन परंपराओं ने लोगों को ‘एक दुनिया, एक मानवता’ का पाठ पढ़ाया है।

‘इंसानों के बीच कोई फर्क नहीं होता’

मोहन भागवत ने कहा, “असल में मैंने 2018 में दिल्ली में एक लेक्चर सीरीज के दौरान यह बात कही थी। वहां मुस्लिम भाई भी मौजूद थे। उन्होंने मुझसे सवाल पूछा, “आप एक हिंदू संगठन हैं, आप हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं, तो हम मुसलमानों का क्या होगा? क्या आप हमें बाहर निकाल देंगे?” मैंने उनसे कहा, “नहीं…, हिंदुत्व यह नहीं है। अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह जाएगा।” अगर आप खुद को हिंदू कहलाना चाहते हैं, तो आपको यह मानना ​​होगा कि सभी रास्ते एक ही मंजिल तक ले जाते हैं। और हर इंसान की अपनी गरिमा होती है। इंसानों के बीच कोई फर्क नहीं होता।”

RSS चीफ ने आगे कहा, “मैं कोई धार्मिक विद्वान नहीं हूं, न ही आपकी तरह कोई धार्मिक अथॉरिटी हूं। लेकिन मैं एक ऐसे समाज में काम कर रहा हूं जो ट्रेडिशनली कहता है कि धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत एक है। सच एक है, और इंसानियत उस सच का उत्पाद है। इसलिए इंसानियत एक है। वह सच एक सच है, लेकिन उसे बताने वाले के हिसाब से कई तरीकों से बताया गया है। क्योंकि इंसान होने के नाते, हम उस सॉफ्टवेयर के कैदी हैं जो हमारे दिमाग में बनाया गया है।”

हिंदू धर्म पर मोहन भागवत का संदेश

अपने संबोधन के दौरान RSS प्रमुख ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि हिंदू जीवन शैली का पालन करने के कई रास्ते हैं। लेकिन वे सभी एक ही परम सत्य की ओर ले जाते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इंसानों के बीच कोई बुनियादी अंतर नहीं है। हर किसी को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है।

भागवत ने यह भी कहा कि संगठन ने भारत में रहने वाले मुस्लिम और ईसाई समुदायों के साथ बातचीत शुरू की है। उन्होंने कहा, “बातचीत पहला कदम है। सेवा एक और कदम है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह बातचीत के बाद ही हो। ये दोनों काम साथ-साथ होने चाहिए। हम सेवा कर रहे हैं। और जब हम सेवा करते हैं, तो कोई भेदभाव नहीं करते।”

उन्होंने आगे कहा, “यही वजह है कि प्रचार-प्रसार के मामले में हम काफी पीछे हैं। गलत नैरेटिव (धारणाओं) की वजह से एक गलत सोच बन गई है। लेकिन जब लोग असल में आकर और समझदारी के साथ हमारे काम को देखते हैं, तो वे गलत धारणाएं बहुत तेज़ी से खत्म हो सकती हैं।”

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आधुनिक राजनीति पर भागवत के विचार!

RSS प्रमुख ने आधुनिक राजनीति के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि राजनीति काफी हद तक जनमत पर निर्भर करती है। खासकर लोकतंत्र में कोई भी राजनेता आसानी से इसके खिलाफ नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि घटनाओं के होने से पहले ही राजनीति को बदलें और उसे सही दिशा में प्रभावित करें। हम युद्ध रोकना चाहते हैं। हम ये सभी काम करना चाहते हैं। इसलिए किसी न किसी समय हमें राजनीति को प्रभावित करना ही होगा।” हालांकि, भागवत ने संकेत दिया कि राजनीति के कारण धार्मिक सद्भाव नहीं बन पा रहा है।

Nepal Flood Update: ‘चीन में फंसे हैं 400 से अधिक भारतीय, 320 अब भी लापता’; नेपाल त्रासदी पर विदेश मंत्रालय ने क्या बताया?

Nepal Flood Update: नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई बाढ़ के बाद कम से कम 320 भारतीय अब भी लापता हैं। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (28 अगस्त) को बताया कि करीब 400 अन्य भारतीय चीन की तरफ फंसे हुए हैं। मंत्रालय ने कहा कि भारत काठमांडू को राहत एवं बचाव प्रयासों में हरसंभव सहायता देने के लिए तैयार है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि चीन की तरफ फंसे 96 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से सड़क मार्ग से नेपाल पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि 21 भारतीय शुक्रवार दोपहर नई दिल्ली पहुंचे। ये लोग एक दिन पहले नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों से काठमांडू पहुंचे थे।

तमिलनाडु के इन निवासियों का राष्ट्रीय राजधानी के हवाई अड्डे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्वागत किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार (28 अगस्त) को बताया कि नेपाल-चीन सीमा के चीनी हिस्से में फंसे 400 से ज्यादा भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित सैकड़ों अन्य लोगों से संपर्क करने की कोशिशें जारी हैं। नेपाल के अधिकारियों द्वारा शेयर की गई ताजा जानकारी के अनुसार, बुधवार को अचानक आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 547 हो गई है।

320 भारतीयों की तलाश जारी

जायसवाल ने कहा, “जहां तक उन भारतीयों की संख्या का सवाल है, जिनसे हम संपर्क नहीं कर पा रहे हैं या जो लापता हैं, इस समय यह संख्या 320 है।” उन्होंने कहा, “भारतीय मूल के करीब 100 लोग ऐसे भी हैं, जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। ये भारतीय मूल के लोग हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए हो सकते हैं, लेकिन उनके पास अन्य देशों की नागरिकता है।” जायसवाल ने कहा कि करीब 400 भारतीय चीन की तरफ फंसे हुए हैं, लेकिन वे सुरक्षित हैं।

उन्होंने कहा, “वे अपने परिवारों के संपर्क में हैं। हमारे दूतावास ने भी उनमें से कई लोगों से संपर्क किया है। उनके परिवार के कई सदस्यों ने भी बीजिंग स्थित हमारे दूतावास द्वारा संचालित हेल्पलाइन नंबरों के जरिए हमसे संपर्क किया है।” जायसवाल ने कहा, “हमारा दूतावास चीन में स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है। इस बात पर काम कर रहा है कि वहां फंसे इन लोगों को किस तरह निकाला जा सकता है।”

जयशंकर ने की हाईलेवल मीटिंग

इस बीच, जयशंकर ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की और नेपाल की स्थिति की समीक्षा की। बैठक के दौरान लापता भारतीयों की स्थिति का पता लगाने पर विशेष ध्यान दिया गया। काठमांडू और बीजिंग में भारत के राजदूत भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक में शामिल हुए। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, “नेपाल में जारी राहत और बचाव प्रयासों पर चर्चा की। काठमांडू और बीजिंग स्थित हमारे दूतावासों ने भारतीय नागरिकों की स्थिति और उनके सुरक्षित होने के संबंध में ताजा जानकारी दी।”

मौत का आंकड़ा 547 पहुंचा

नेपाल में कई और शव बरामद किए जाने के साथ ही भीषण बाढ़ से मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 547 हो गई। इस बीच, तलाश और बचाव अभियान सतर्कता के साथ जारी है, क्योंकि भोटेकोशी नदी इलाके में जलस्तर बढ़ने से दोबारा इस आपदा का खतरा मंडरा रहा है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने कहा कि इस सप्ताह की शुरुआत में जिस स्थान पर भीषण बाढ़ आई थी वहां जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।

एनडीआरआरएमए ने अपने ताजा नोटिस में कहा, “बुधवार को जिस स्थान पर अचानक बाढ़ आई थी, उसी जगह पर अब कीचड़-युक्त पानी का स्तर बढ़ जाने से उस क्षेत्र में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।” मध्य नेपाल के रसुवा और अन्य इलाकों में बुधवार को आई जबरदस्त बाढ़ के बाद यह चेतावनी जारी की गई है। बुधवार को आई बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है। बस्तियों, सड़कों, पुलों और पनबिजली के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।

लोगों को सतर्क रहने की अपील

NDRRMA ने तलाश और बचाव कार्यों में शामिल लोगों के साथ-साथ अलग-अलग वजहों से भोटेकोशी और त्रिशूली इलाकों में रह रहे लोगों से अपील की है कि वे अत्यधिक सतर्क रहें। साथ ही किसी भी तरह का खतरा महसूस होने पर तुरंत सुरक्षित जगहों पर चले जाएं।

नेपाल पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि इस हिमालयी देश के आठ जिलों से 547 शव बरामद किए गए हैं। जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं। पुलिस के अनुसार, नवलपरासी पूर्व से 134, चितवन से 221, गोरखा से 44 और नुवाकोट से 38 शव बरामद किए गए।

इसी तरह, धादिंग से 40, तनाहू से 29, नवलपरासी पश्चिम से 28 और रसुवा से 13 शव बरामद किए गए हैं। चीनी अधिकारियों के अनुसार, तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में पांच लोगों की मौत हो गई है। नेपाल के रसुवा और आसपास के जिलों में बुधवार सुबह अचानक बाढ़ आने के बाद से कम से कम 977 लोग लापता हैं। इनमें 86 सुरक्षाकर्मी, 517 विदेशी पर्यटक और 127 नेपाली यात्री शामिल हैं।

अब तक प्रभावित इलाकों से 1,545 घायल व्यक्तियों और फंसे हुए लोगों को बचाया जा चुका है। इनमें से 84 लोगों का काठमांडू के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज हो रहा है, जहां परिजन बड़ी बेसब्री से अपनों की तलाश कर रहे हैं। नेपाल पुलिस ने तिब्बत की तरफ एक बांध के फिर से टूटने की सूचना मिलने के बाद अलर्ट जारी किया है।

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नेपाल पर्यटन बोर्ड ने शुक्रवार को बताया कि इस त्रासदी के बाद बाढ़-प्रभावित अलग-अलग इलाकों से कम से कम 121 विदेशी पर्यटकों को बचाया गया है, जिनमें 85 भारतीय शामिल हैं। पर्यटन बोर्ड के मुताबिक, बचाए गए पर्यटकों में दक्षिण कोरिया के 9 और चीन के 16 नागरिक शामिल हैं। पुलिस बयान के अनुसार, इस त्रासदी के बाद तीसरे दिन भी तलाश और बचाव अभियान जारी रहा। अभियान में 7,451 सुरक्षाकर्मी जुटे हुए हैं जिनमें नेपाल सेना के 2,391 जवान शामिल हैं।