UP Panchayat Chunav 2026: यूपी पंचायत चुनाव पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, तीन महीने के भीतर इलेक्शन कराने के निर्देश

UP Panchayat Chunav 2026: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने तीन महीने के भीतर यूपी पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में बने रहने की बात कही गई है। इस आदेश के बाद प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियों और समयसीमा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार, पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को तीन महीने के भीतर पूरा कराने की बात कही गई है। यह आदेश ग्राम पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने और आगे की प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

निवर्तमान ग्राम प्रधानों की भूमिका पर भी निर्देश

कोर्ट ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में बनाए रखने की बात भी कही है। इससे चुनाव होने तक ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक कामकाज को जारी रखने की व्यवस्था प्रभावित होगी। हालांकि, प्रशासक के तौर पर उनकी शक्तियों और जिम्मेदारियों का सटीक दायरा आधिकारिक आदेश के विस्तृत डिटेल्स आने के बाद ही स्पष्ट होगा। कोर्ट ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिसमें निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले को अवैध बताया गया था। इसका मतलब है कि अगले तीन महीने तक पंचायतों का कामकाज प्रशासकों के माध्यम से जारी रह सकता है।

चुनाव की तैयारियों पर रहेगी नजर

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब राज्य सरकार और संबंधित प्रशासनिक विभागों की ओर से पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर उठाए जाने वाले कदम अहम होंगे। चुनाव की तारीखों, अधिसूचना और अन्य प्रक्रियाओं से संबंधित आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि तीन महीने के अंदर यूपी के पंचायत चुनाव हो जाने चाहिए। पहले कयास ये कगाए जा रहे थे कि विधानसभा चुनाव के बाद पंचायत चुनाव होगा। यह फैसला जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने करीब तीन घंटे तक चली सुनवाई के बाद सुनाया।

सरकार के आदेश को कोर्ट ने बताया वैध

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि प्रशासकों की नियुक्ति को लेकर यूपी सरकार की ओर से जारी शासनादेश पूरी तरह वैध है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि पंचायत निकायों के चुनाव निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे कराए जाएं। इस फैसले से पंचायत चुनाव की तैयारी और समयसीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। अदालत ने प्रशासकों को चुनाव समाप्त होने तक कामकाज जारी रखने की व्यवस्था भी बरकरार रखी है।

OBC आयोग की प्रक्रिया से अलग होगी चुनाव की तैयारी?

हाई कोर्ट ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग अपना काम बिना किसी बाधा के जारी रखेगा। लेकिन पंचायत चुनाव कराने की प्रक्रिया आयोग की कार्यवाही पूरी होने पर निर्भर नहीं रहेगी। यानी आयोग की प्रक्रिया के कारण चुनाव को अनिश्चितकाल तक टाला नहीं जा सकेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव मौजूदा नियमों और व्यवस्था के तहत कराए जाएंगे।

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चुनाव प्रक्रिया में 27 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान का पालन करना होगा। इस फैसले के बाद अब राज्य सरकार के सामने तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने की समयसीमा पूरी करने की जिम्मेदारी होगी। हालांकि, चुनाव की तारीखों और मतदान के शेड्यूल को लेकर सरकार की ओर से जारी होने वाली आधिकारिक अधिसूचना महत्वपूर्ण होगी।

UP Shiksha Mitra: दिवाली से पहले यूपी के 1.27 लाख शिक्षामित्रों को बड़ा तोहफा, इस बार डबल से ज्यादा आएगी सैलरी

UP Shiksha Mitra Mandeya 2026: उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों के लिए दिवाली से पहले बड़ी खुशखबरी आई है। सीएम योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार ने बढ़े हुए मानदेय के भुगतान के लिए ₹460.23 करोड़ का बजट जारी कर दिया है। इसके बाद प्रदेश के 1,27,841 शिक्षामित्रों को सितंबर और अक्टूबर महीने का बढ़ा हुआ मानदेय मिलने का रास्ता साफ हो गया है। खास बात यह है कि दोनों महीनों की सैलरी एक साथ उनके बैंक खातों में भेजी जा सकती है।

₹10 हजार से बढ़कर ₹18 हजार हुआ मानदेय

सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय को ₹10,000 से बढ़ाकर ₹18,000 प्रति माह करने की घोषणा की थी। अब सितंबर और अक्टूबर के बढ़े हुए मानदेय के भुगतान के लिए बजट जारी किया गया है। यानी पात्र शिक्षामित्रों को दो महीने के लिए कुल ₹36,000 तक का भुगतान मिल सकता है, जो पहले के दो महीने के ₹20,000 मानदेय से ₹16,000 अधिक है।

सभी जिलों को भेजा गया बजट

NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा विभाग की ओर से जारी बजट सभी जिलों को भेज दिया गया है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि शिक्षामित्रों के खातों में राशि भेजने में किसी तरह की लापरवाही न हो।

दूसरे कर्मचारियों को भी मिल सकता है दिवाली गिफ्ट

शिक्षामित्रों के बाद यूपी सरकार के अन्य कर्मचारियों को भी दिवाली से पहले राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी की जा सकती है। इसके अलावा कर्मचारियों को करीब ₹3,000 से 7,000 रुपये तक बोनस मिलने की भी संभावना है। इससे प्रदेश के लाखों कर्मचारी और पेंशनर्स राहत की सांस लेंगे।

स्थायी नौकरी की मांग अब भी जारी

मानदेय बढ़ने के बावजूद शिक्षामित्रों की स्थायी रोजगार की मांग खत्म नहीं हुई है। शिक्षामित्र लंबे समय से नियमितीकरण और शिक्षक भर्ती में उचित लाभ दिए जाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे वर्षों से सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। लेकिन उन्हें स्थायी नियुक्ति या विशेष TET में उचित अवसर नहीं दिया जा रहा।

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हालांकि, हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों को विशेष TET में शामिल होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। शिक्षामित्रों का आरोप है कि सालों की सेवा के बावजूद उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया में पर्याप्त वेटेज या अवसर नहीं मिल रहा है। इस नाराजगी को देखते हुए योगी सरकार की तरफ से आगामी यूपी चुनाव से पहले शिक्षामित्रों को मनाने की कोशिश जारी है।

नोएडा के DLF मॉल में घी, रिफाइंड ऑयल चुराते पकड़ी गई महिला, बिना पैसे दिए फरार होना चाहती थी महिला

नोएडा के सेक्टर 18 स्थित DLF मॉल ऑफ इंडिया के एक स्टोर का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक महिला पर कथित तौर घी और रिफाइंड कुकिंग ऑयल चुराने का आरोप लगाया जा रहा है। वीडियो में एक महिला को मॉल की सिक्योरिटी टीम ने पकड़ रखा है और उसे लेकर जा रही है। बताया जा रहा है कि महिला मॉल के स्टोर से बिना चीजों का भुगतान किए सामान लेकर जाते हुए पकड़ी गई है। हालांकि, पुलिस और मॉल मैनेजमेंट ने यह कन्फर्म नहीं किया है कि महिला ने कोई सामान चुराया है।

लगभग 30 सेकंड के इस वीडियो में दो महिला सिक्योरिटी गार्ड कथित चोरी की आरोपी महिला को स्टोर के अंदर रोककर ले जाते हुए नजर आ रही हैं। महिला को बाहर निकलते समय अपना चेहरा ढकते हुए देखा जा सकता है। घटना के दौरान, स्टोर के एक कर्मचारी को उस पर सामान चुराने का आरोप लगाते हुए सुना जा सकता है। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो के साथ कई दावे किए गए हैं कि महिला लगभग एक महीने से स्टोर आ रही थी और कथित तौर पर कई बार बिना पेमेंट किए घी और रिफाइंड ऑयल ले गई थी। कुछ पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि उसकी गतिविधियां स्टोर के CCTV कैमरों में कैद हो गई थीं।

हालांकि, इन आरोपों को सपोर्ट करने वाला कोई CCTV फुटेज वायरल वीडियो के साथ शेयर नहीं किया गया है। वीडियो में भी महिला को कोई सामान चुराते या बिना पेमेंट किए स्टोर से जाते हुए नहीं दिखाया गया है। वीडियो के चर्चा में आने के बाद, सेक्टर 20 पुलिस से जानकारी मांगी गई। पुलिस ने कहा कि उनकी शुरुआती जांच में पता चला है कि महिला ने स्टोर से लिए गए सामान के लिए पेमेंट किया था। अधिकारियों ने कहा कि मॉल मैनेजमेंट ने भी पुलिस को यही जानकारी दी। पुलिस ने कहा, “महिला ने सामान के लिए पेमेंट किया था। सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे आरोप साबित नहीं हुए हैं।”

इस वीडियो पर सोशल मीडिया पर कई तरह के रिएक्शन आए हैं, कई यूजर्स ने इस घटना को शेयर और कमेंट किया है। खबर है कि इसे 100 से ज्यादा लोगों ने शेयर किया है। पुलिस ने कहा कि फुटेज से अभी सिर्फ यह पता चलता है कि महिला को सिक्योरिटी वालों ने रोका था और स्टोर के एक कर्मचारी ने उस पर चोरी का आरोप लगाया था। महिला को किन हालात में रोका गया और स्टोर के अंदर क्या हुआ, यह सिर्फ वायरल वीडियो से पक्के तौर पर पता नहीं लगाया जा सकता। अधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया पर किए गए दावों को तब तक साबित सच नहीं माना जाना चाहिए जब तक कि उनके पीछे सबूत न हों।

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Bharat Taxi in UP: यूपी के सभी 75 जिलों में ‘भारत टैक्सी’ सुविधा शुरू! इसे चलाने वाले ड्राइवरों को 5 लाख रुपये तक का कवर, सारी डिटेल जानिए

Bharat Taxi in UP: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (23 सितंबर) को यूपी में ‘भारत टैक्सी’ सेवा और ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ का शुभारंभ कर दिया। एक तरफ ‘भारत टैक्सी’ के जरिए ड्राइवरों को कमीशन से राहत और सामाजिक सुरक्षा देने की बात कही गई है। वहीं, दूसरी तरफ छोटे और सीमांत किसानों के लिए दीर्घकालिक कर्ज की ब्याज दर घटाकर 6 प्रतिशत कर दी गई है। देश के पहले सहकारिता आधारित प्लेटफॉर्म ‘भारत टैक्सी; का परिचालन सहकार टैक्सी सहकारिता लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। ‘Bharat Taxi’ पहले से ही लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज में चल रही है।

ड्राइवरों को नहीं देना होगा कमीशन

सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा, “‘भारत टैक्सी’ देश का पहला सहकारी मॉडल पर आधारित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जिसे सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड संचालित करता है।” CM ने बताया कि ‘भारत टैक्सी’ फिलहाल लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज में संचालित हो रही है। उन्होंने कहा कि इस सेवा से जुड़ने वाले ड्राइवरों से कमीशन नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें ₹5 लाख तक की सामाजिक सुरक्षा कवरेज मिलेगी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि अब तक टैक्सी ड्राइवरों के लिए सामाजिक सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने कहा कि भारत टैक्सी के जरिए ड्राइवरों को सुरक्षा के साथ सम्मान और गरिमा देने का प्रयास किया जा रहा है।

‘ये पूरे भारत की टैक्सी है’

सीएम योगी ने कहा, “जब व्यक्ति अपनी गाड़ी पर भारत टैक्सी लिखाएगा और जो भी उस कार का चालक होगा, भारत टैक्सी के ब्रांड को संचालित करने का कार्य करेगा, तो उसको इस बात पर गौरव की अनुभूति होगी कि ये टैक्सी केवल एक यात्री को ढोने की नहीं, ये पूरे भारत की टैक्सी है। भारत को संचालित करने की भारत की गति को प्रगति में बदलने की टैक्सी है। उसके मन में इस बात की निश्चिंतता भी होगी कि मुझे यह सुविधा 5,00,000 रुपए की सामाजिक सुरक्षा की गारंटी भी दे रही है…जब किसी को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी मिलती है तो उसमें एक निश्चिंतता होती है और फिर वह व्यक्ति पूरी तन्मयता के साथ, पूरी जिम्मेदारी के साथ अपने कार्य को कर पाता है…आज यह टैक्सी लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज में संचालित हो रही है।”

एयरपोर्ट, मेट्रो और पुलिस से भी समझौता

मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत टैक्सी ने लखनऊ एयरपोर्ट, लखनऊ मेट्रो और लखनऊ पुलिस के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किए हैं। उन्होंने इस पहल के विस्तार पर जोर देते हुए कहा कि ‘भारत टैक्सी’ से आने वाले समय में लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रस्तावित बस सर्विस को भी इसी तरह के सहकारी मॉडल से विकसित करने की संभावना जताई।

किसानों के लिए 11% से घटकर 6% हुआ ब्याज

सीएम योगी ने ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ की भी शुरुआत की। इसके तहत उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम्य विकास बैंक से मिलने वाले दीर्घकालिक ऋण पर ब्याज दर 11 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दी गई है। इस योजना का उद्देश्य आने वाले वर्षों में करीब 5 लाख छोटे और सीमांत किसानों को कर्ज की सुविधा उपलब्ध कराना है। आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने किसानों के लिए ब्याज दर कम करने का फैसला किया और अब इसका परिणाम सामने है। उन्होंने कहा कि किसान समृद्ध होगा तो देश भी समृद्ध होगा।

पांच ड्राइवरों और पांच किसानों को मिला लाभ

कार्यक्रम के दौरान पांच भारत टैक्सी ड्राइवरों को शेयर सर्टिफिकेट दिए गए। वहीं, किसान योजना के पांच लाभार्थियों को लोन स्वीकृति पत्र सौंपे गए। मुख्यमंत्री ने सहकारिता विभाग का ‘उर्वरक सेतु’ मोबाइल ऐप और उत्तर प्रदेश सहकारी डेटाबेस सेंटर का मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया।

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सरकार के सहकारी मॉडल पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत सहकारी क्षेत्र देश की मजबूती से जुड़ा है। सरकार और केंद्र की ओर से सहकारी सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार, भारत टैक्सी का उद्देश्य किसी निजी ऐप आधारित टैक्सी एग्रीगेटर को खत्म करना नहीं, बल्कि ड्राइवर-केंद्रित और लोगों के लिए किफायती परिवहन का एक वैकल्पिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है। सहकारी मॉडल में ड्राइवर सदस्य और हितधारक के रूप में जुड़े होंगे, ताकि उनके आर्थिक और सामाजिक हितों को बढ़ावा दिया जा सके।

कौशांबी की पटाखा फैक्ट्री में जोरदार ब्लास्ट, 3 की मौत, 10 से ज्यादा लोग झुलसे, कई मकान भी जमींदोज

Kaushambi Firecracker Factory Blast: यूपी के कौशांबी जिले में दर्दनाक हादसा हो गया है। यहां के पिपरी थाना के मनौरी में एक पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट होने से 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 से अधिक लोग गभीर रूप से झुलसे गए। इन सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बता दें कि इस ब्लास्ट में मकान भी जमींदोज हुए है।

वहीं हादसे की खबर सुनते ही मौके पर पहुंची पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम घटना स्थल पर रेस्क्यू करने में जुटी गई है। डीएम और एसपी भी घटनास्थल पर पहुंचकर जायजा ले रहे हैं। यह पटाखा फैक्ट्री आदिल डीजे पुत्र निजामुद्दीन की बताई जा रही है।

आसपास का इलाका धुएं से भर गया

बता दें कि हादसा कौशांबी जिले के मोहम्मदपुर गांव में हुआ, जो प्रयागराज बॉर्डर पर स्थित है। यहां से मनौरी स्थित एयरफोर्स स्टेशन करीब डेढ़ किलोमीटर दूर है। हादसे के वक्त फैक्ट्री में करीब 25 मजदूर काम कर रहे थे। धमाके की आवाज करीब दो किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। विस्फोट के बाद फैक्ट्री से धुएं का घना गुबार उठा और आसपास का इलाका धुएं से भर गया। पटाखों में आग लगने के कारण लगातार धमाके होते रहे।

सीएम योगी ने अधिकारियों को दिए निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद कौशाम्बी में हुए हादसे का संज्ञान लेते हुए मृतकों के शोक संतप्त परिजन के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि घायलों का इलाज अच्छी तरह से किया जाए। इसके अलावा, सीएम योगी ने मृतकों के परिजनों से बात कर हर संभव सहायता मुहैया करवाने की भी बात कही है। साथ ही, घायलों के जल्द स्वस्थ होने की भी कामना की है।

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Hathras Victim Family Relocation: हाथरस पीड़िता के परिवार को 3 महीने में नोएडा या गाजियाबाद करें शिफ्ट; हाईकोर्ट का UP सरकार को निर्देश

Hathras Victim Family Relocation: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने हाथरस दुष्कर्म मामले की पीड़िता के परिवार के पुनर्वास को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने राज्य सरकार के 22 फरवरी, 2025 के फैसले को रद्द करते हुए उसे तीन महीने के भीतर पीड़िता के परिवार को गाजियाबाद या नोएडा में बसाने का निर्देश दिया। जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस जसप्रीत सिंह की पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट ने पहले राज्य सरकार को पीड़िता के परिवार को गाजियाबाद या नोएडा में बसाने के अनुरोध पर विचार करने का निर्देश दिया था। लेकिन सरकार ने इस अनुरोध पर समुचित ध्यान नहीं दिया।

पीठ ने कहा कि सरकार ने अदालत के निर्देशों की अनदेखी करते हुए अपने फैसले में परिवार को पुनर्वास के लिए कासगंज, एटा और अलीगढ़ में से किसी एक स्थान को चुनने का विकल्प दिया था। सोमवार को दिए गए आदेश में पीठ ने कहा कि 22 फरवरी, 2025 के फैसले में सरकार ने गाजियाबाद या नोएडा में पुनर्वास के परिवार के अनुरोध का कोई उल्लेख नहीं किया था। इसलिए इसे हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में लिया गया फैसला नहीं माना जा सकता।

NCR में बसाने की मांग

पीठ ने कहा कि इस मामले में राज्य की ओर से अनावश्यक विरोध दिखाई देता है। उसके रवैये से परिवार के इस आरोप को बल मिलता है कि सरकार इस मामले को अपने खिलाफ मुकदमे की तरह देख रही है। पीड़िता के परिवार की ओर से पेश वकील महमूद प्राचा ने कहा कि कासगंज, एटा और अलीगढ़ हाथरस के करीब हैं। इससे परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा होती है। उन्होंने कहा कि इन जिलों में परिवार का कोई रिश्तेदार भी नहीं रहता है।

उन्होंने कहा कि इसके विपरीत परिवार के रिश्तेदार गाजियाबाद और नोएडा में रहते हैं, जहां बसने पर वे बिना किसी भय के सामान्य जीवन जी सकेंगे। अदालत ने निर्देश दिया कि पुनर्वास पूरा होने के बाद परिवार के एक सदस्य को रोजगार भी दिया जाए, जैसा कि 26 जुलाई, 2022 के आदेश में निर्देश दिया गया था।

मुख्य सचिव को अहम निर्देश

पीठ ने यूपी के अपर मुख्य सचिव (गृह) को अनुपालन शपथपत्र दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि आदेश का पालन नहीं होने की स्थिति में उन्हें 30 नवंबर, 2026 को व्यक्तिगत रूप से उसके समक्ष पेश होना होगा।

क्या है केस?

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में 14 सितंबर, 2020 को एक दलित युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म की कथित घटना सामने आई थी। घटना के करीब दो सप्ताह बाद दिल्ली के एक अस्पताल में युवती की मौत हो गई थी।

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मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए अपने बयान में पीड़िता ने चार आरोपियों पर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। यह भी आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने परिवार की सहमति के बिना रात में पीड़िता का जबरन अंतिम संस्कार कर दिया था। हालांकि, पुलिस ने इस दावे को गलत बताया था।

महज 4 महीने में 10 मुकदमों के 22 अपराधियों को सुना दी फांसी की सजा, यूपी के इस जज की फैसलों की जबर्दस्त चर्चा

UP News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत अपने फैसलों को लेकर जबर्दस्त चर्चा में है। पिछले चार महीनों के दौरान जज रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट ने 10 अलग-अलग मुकदमों में अपने फैसले सुनाए हैं। इनमें कुल 22 अपराधियों को फांसी की सजा सुनाई गई है।

सरकारी वकील कुलदीप कुमार ने सोमवार को पीटीआई को बताया कि पिछले चार महीनों में इन 10 मामलों में दोषी ठहराए गए सभी 22 व्यक्तियों को मौत की सजा दी गई है। जिन मुकदमों में यह सजा सुनाई गई है उनमें एक वकील की हत्या, होमगार्ड की हत्या, हाईवे पर डकैती और दूसरे हत्याकांड के संगीन मामले शामिल हैं।

अप्रैल से अगस्त तक मृत्युदंड के फैसलों का पूरा ब्योरा

सरकारी वकील के मुताबिक 6 अप्रैल 2026 को वकील समीर सैफी हत्याकांड में तीन अभियुक्तों को फांसी की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद 28 अप्रैल को एक अन्य मामले में चार लोगों को मौत की सजा दी गई। मई महीने में 20 मई को एक व्यक्ति को फांसी की सजा सुनाई गई जबकि 20 जून को दो अपराधियों को मृत्युदंड दिया गया।

जुलाई के महीने में भी अदालत का कड़ा रुख जारी रहा। 2 जुलाई को एक व्यक्ति को, 6 जुलाई को दो लोगों को और 17 जुलाई को चार अपराधियों को फांसी की सजा सुनाई गई। इसके बाद अगस्त महीने में 12 अगस्त को एक व्यक्ति और 13 अगस्त को चार और अपराधियों को मौत की सजा सुनाई गई।

27 साल पुराने अपहरण और हत्याकांड में मिली मौत की सजा

अदालत ने 12 अगस्त को सुनाए गए फैसले में लगभग 27 साल पुराने एक लकड़ी व्यापारी के अपहरण और हत्या के मामले में एक शख्स को फांसी की सजा सुनाई। यह वारदात साल 1999 में हुई थी। इसमें फिरौती के लिए सलीम नाम के व्यापारी का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई थी। अदालत ने इस मामले में शहनवाज को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया और उस पर 1.10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

12 साल पुराने पवन कुमार हत्याकांड में 4 दोषियों को फांसी

इसके अगले ही दिन 13 अगस्त को मुजफ्फरनगर की फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने 12 साल पुराने एक अन्य हत्याकांड में चार व्यक्तियों को फांसी की सजा सुनाई। यह घटना 14 जुलाई 2014 को शामली जिले के भभीसा गांव में घटी थी। जहां पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने पवन कुमार के घर में घुसकर अंधाधुंध गोलीबारी कर दी थी।

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इस गोलीबारी में पवन कुमार की मौत हो गई थी जबकि उनका भाई अशोक कुमार गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस घटना के संबंध में शिकायत भी घायल भाई अशोक कुमार ने ही दर्ज कराई थी। जज दिवाकर ने पवन कुमार की हत्या का दोषी पाए जाने पर रामवीर, राजीव, राहुल और हरेंद्र कुमार को फांसी की सजा सुनाई और सभी दोषियों पर 1.70 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

Cow Urine: अब दूध के साथ गोमूत्र से भी बंपर कमाई करेंगे किसान! यूपी के इन जिलों में ₹10 प्रति लीटर खरीद शुरू

Cow Urine Pilot Project: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले गो-संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल शुरू की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत बुलंदशहर में गोमूत्र की खरीद का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके तहत किसानों और पशुपालकों से 10 रुपये प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदा जा रहा है। योगी सरकार ने बुलंदशहर में किसानों से गाय का मूत्र इकट्ठा करने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। उम्मीद है कि इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी। साथ ही महिलाओं को कमाई का एक अतिरिक्त जरिया मिलेगा। साथ ही उन गायों की देखभाल में मदद मिलेगी जो अब दूध नहीं देतीं।

इकट्ठा किए गए गाय के मूत्र का इस्तेमाल खेती-बाड़ी के कामों में कच्चे माल के तौर पर किए जाने की उम्मीद है। ऐसी आशा है कि यह केमिकल वाले उत्पादों की जगह ले सकता है। अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो एक औपचारिक नीति बनाई जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि चुनाव से पहले इस प्रोजेक्ट को पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।

क्या है मकसद?

इस पहल का उद्देश्य गोमूत्र से कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार करना, पशुपालकों की अतिरिक्त आमदनी बढ़ाना, महिलाओं को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराना और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना है। पायलट प्रोजेक्ट सफल रहने पर इसे प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी लागू करने की तैयारी है।

बुलंदशहर के 15 गांवों में शुरू हुआ मॉडल

यह पहल बुलंदशहर की स्याना तहसील के नरसेना गांव में डॉ. प्रवीण के नेतृत्व में एक किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से शुरू की गई है। फिलहाल आसपास के 15 गांवों को इस परियोजना से जोड़ा गया है। इन गांवों में गोमूत्र जमा करने के लिए स्थानीय कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं। इन केंद्रों के जरिए वर्तमान में करीब 500 लीटर गोमूत्र प्रतिदिन एकत्र किया जा रहा है। भविष्य में गोमूत्र की खरीद कीमत को बढ़ाकर 20 रुपये प्रति लीटर करने की भी योजना बताई गई है।

पशुपालकों को नहीं जाना पड़ेगा दूर

गोमूत्र संग्रह के लिए गांवों में 200 लीटर क्षमता वाले टैंक लगाए गए हैं। इससे पशुपालकों को गोमूत्र बेचने के लिए दूर स्थित किसी केंद्र तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। गांव में ही कलेक्शन और खरीद की व्यवस्था होने से इस योजना में अधिक से अधिक पशुपालकों को जोड़ने में मदद मिल रही है। खासकर ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

महिलाओं को हर लीटर पर 2 रुपये कमीशन

इस मॉडल की एक खास बात महिलाओं की आर्थिक भागीदारी है। गांवों में गोमूत्र संग्रह में मदद करने वाली महिलाओं को हर लीटर पर 2 रुपये कमीशन दिया जा रहा है। इससे महिलाओं के लिए गांव में रहते हुए अतिरिक्त आमदनी का एक नया जरिया तैयार हुआ है। इस पहल से करीब 300 महिलाओं को शुरुआत में जोड़ा गया है। उन्हें इस मॉडल में शेयरधारक भी बनाया गया है।

यानी महिलाएं सिर्फ गोमूत्र संग्रह करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें पूरे आर्थिक मॉडल से सीधे जोड़ा गया है। डॉ. प्रवीण ने न्यूज एजेंसी यूएनआई को बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल गोमूत्र की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है। बल्कि इसे महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जोड़ना है।

गोमूत्र से बनाए जाएंगे खेती में काम आने वाले उत्पाद

संग्रह किए गए गोमूत्र का इस्तेमाल कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार करने में किया जा रहा है। इसके लिए गोमूत्र में विभिन्न जड़ी-बूटियों को मिलाकर कृषि में इस्तेमाल होने वाले मिश्रण और उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों को स्थानीय समितियों और सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इस मॉडल का उद्देश्य खेती में इस्तेमाल होने वाले कुछ रासायनिक उत्पादों के विकल्प के रूप में गोमूत्र आधारित प्राकृतिक उत्पादों को बढ़ावा देना भी है।

दूध के साथ गोमूत्र से भी आमदनी

ग्रामीण इलाकों में पशुपालन से होने वाली आमदनी मुख्य रूप से दूध और डेयरी उत्पादों पर निर्भर रहती है। इस पहल के जरिए पशुपालकों की आय में गोमूत्र को भी एक अतिरिक्त आर्थिक संसाधन के रूप में जोड़ने की कोशिश की जा रही है। यानी पशुपालक परिवारों के लिए एक ही पशु से दूध के अलावा गोमूत्र के जरिए भी अतिरिक्त आय का रास्ता बनाया जा रहा है। विशेष रूप से पशुपालन से जुड़े परिवारों की महिलाओं के लिए यह पहल घर और गांव के आसपास रहते हुए अतिरिक्त कमाई का जरिया बन सकती है।

सहकारी समितियों के जरिए बाजार तक पहुंचेंगे उत्पाद

गोमूत्र से तैयार कृषि उत्पादों को केवल किसानों तक पहुंचाने पर ही जोर नहीं है, बल्कि इनके लिए स्थानीय बाजार तंत्र भी विकसित किया जा रहा है। तैयार उत्पादों को सहकारी समितियों और स्थानीय समितियों के जरिए किसानों और बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इससे गांव में संग्रह से लेकर उत्पाद तैयार करने और फिर उसकी बिक्री तक एक स्थानीय आर्थिक चक्र विकसित करने की कोशिश है।

गो-संरक्षण, रोजगार और प्राकृतिक खेती को जोड़ने की कोशिश

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, बुलंदशहर में शुरू किया गया मॉडल गो-संरक्षण, ग्रामीण रोजगार, महिला सशक्तीकरण और प्राकृतिक/जैविक खेती को एक साथ जोड़ने वाली पहल के तौर पर देखा जा रहा है। इस मॉडल में गांवों से गोमूत्र इकट्ठा किया जाता है। फिर महिलाएं कलेक्शन प्रक्रिया से आमदनी हासिल करती हैं।

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इसके बाद गोमूत्र से कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार कर उन्हें सहकारी समितियों और स्थानीय समितियों के माध्यम से बाजार तक पहुंचाया जाता है। फिलहाल, यह योजना पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बुलंदशहर में चलाई जा रही है। इसके अनुभव और परिणामों के आधार पर इसे उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी विस्तार देने की तैयारी है।

यूपी में संपत्ति रजिस्ट्री के नए नियम: पहचान के लिए आधार अनिवार्य, रिश्तों की पहचान और बाकी चीजों के लिए ये नए 5 Rules जान लें

UP Property Registration New Rules: उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति की रजिस्ट्री और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्देश जारी किया है। इस नए नोटिफिकेशन के तहत सरकार ने साफ कर दिया है कि आधार कार्ड पर दर्ज रिश्तों की डिटेल (जैसे- पिता, पति या अभिभावक का नाम) को अब कानूनी रिश्ते का अंतिम या निर्णायक सबूत नहीं माना जाएगा।

हमारे सहयोगी सीएनबीसी टीवी 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। इसमें राज्य के सभी रजिस्ट्रेशन कार्यालयों और सहायक महानिरीक्षकों को इन नए दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया है।

आइए जानते हैं संपत्ति रजिस्ट्री और सरकारी योजनाओं में होने वाली कानूनी दिक्कतों को रोकने के लिए विभाग द्वारा अनिवार्य किए गए इन 5 नए नियमों के बारे में।

प्रशासनिक मूल्यांकन के लिए अनिवार्य किए गए 5 नए नियम

उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति रजिस्ट्रेशन, सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए आधिकारिक मूल्यांकन के दौरान इन 5 नियमों का पालन अनिवार्य किया है:-

नियम 1 (पहचान और पते का प्रमाण): आधार कार्ड को विशेष रूप से सिर्फ पहचान और पते के वैध प्रमाण के रूप में ही स्वीकार किया जाना चाहिए।

नियम 2 (रिश्तों पर निर्णायक नहीं): आधार कार्ड पर दर्ज परिवार या माता-पिता की डिटेल को किसी भी रिश्ते के निर्णायक या कानूनी रूप से बाध्यकारी सबूत के तौर पर नहीं माना जा सकता है।

नियम 3 (पारिवारिक सत्यापन): ऐसे आवेदन, योजनाएं या कानूनी दस्तावेज जिनमें पारिवारिक रिश्ते का अनिवार्य सत्यापन आवश्यक है, वहां अधिकारी सिर्फ आधार कार्ड के आधार पर अंतिम निर्णय नहीं ले सकते हैं।

नियम 4 (मान्य दस्तावेजों की जांच): रिश्तों के सत्यापन के लिए विभागों को मौजूदा नियमों के तहत मानक और कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त दस्तावेजों की जांच करनी होगी। इसके तहत जन्म प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर की नकल, उत्तराधिकार प्रमाणपत्र या सक्षम अदालतों/प्राधिकारियों द्वारा जारी संबंध प्रमाणपत्र को ही मान्य माना जाएगा।

नियम 5 (द्वितीयक सूचना): आधार कार्ड पर माता-पिता या पति/पत्नी के नाम के किसी भी उल्लेख को स्थापित कानूनी सबूत के बजाय केवल एक द्वितीयक सूचनात्मक संदर्भ के रूप में देखा जाना चाहिए।

क्या है आधार कार्ड का मूल उद्देश्य?

उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्देश भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि आधार कार्ड का मूल और प्राथमिक उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति की पहचान और पते को स्थापित करना है न कि उसकी वंशावली या वैवाहिक स्थिति को प्रमाणित करना। यही कारण है कि आधार कार्ड पर दर्ज C/o (केयर ऑफ), S/o (पुत्र), D/o (पुत्री), या W/o (पत्नी) जैसे शब्दों के साथ लिखी गई पारिवारिक जानकारी केवल सूचनात्मक प्रकृति की होती है।

दस्तावेजों के मानकों को लेकर देशव्यापी सख्ती

उत्तर प्रदेश सरकार का यह राज्य स्तरीय निर्देश दस्तावेज़ीकरण के मानकों को लेकर देश भर में की जा रही सख्ती का ही एक हिस्सा है। आपको बता दें कि हाल ही में आयोजित ‘पासपोर्ट सेवा दिवस’ के दौरान विदेश मंत्रालय (MEA) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इसी तरह की कानूनी सीमा को रेखांकित किया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से स्पष्ट किया था कि एक भारतीय पासपोर्ट सिर्फ एक यात्रा दस्तावेज है और इसे नागरिकता का अंतिम या निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता है।

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