Bharat Taxi in UP: यूपी के सभी 75 जिलों में ‘भारत टैक्सी’ सुविधा शुरू! इसे चलाने वाले ड्राइवरों को 5 लाख रुपये तक का कवर, सारी डिटेल जानिए

Bharat Taxi in UP: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (23 सितंबर) को यूपी में ‘भारत टैक्सी’ सेवा और ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ का शुभारंभ कर दिया। एक तरफ ‘भारत टैक्सी’ के जरिए ड्राइवरों को कमीशन से राहत और सामाजिक सुरक्षा देने की बात कही गई है। वहीं, दूसरी तरफ छोटे और सीमांत किसानों के लिए दीर्घकालिक कर्ज की ब्याज दर घटाकर 6 प्रतिशत कर दी गई है। देश के पहले सहकारिता आधारित प्लेटफॉर्म ‘भारत टैक्सी; का परिचालन सहकार टैक्सी सहकारिता लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। ‘Bharat Taxi’ पहले से ही लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज में चल रही है।

ड्राइवरों को नहीं देना होगा कमीशन

सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा, “‘भारत टैक्सी’ देश का पहला सहकारी मॉडल पर आधारित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जिसे सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड संचालित करता है।” CM ने बताया कि ‘भारत टैक्सी’ फिलहाल लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज में संचालित हो रही है। उन्होंने कहा कि इस सेवा से जुड़ने वाले ड्राइवरों से कमीशन नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें ₹5 लाख तक की सामाजिक सुरक्षा कवरेज मिलेगी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि अब तक टैक्सी ड्राइवरों के लिए सामाजिक सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने कहा कि भारत टैक्सी के जरिए ड्राइवरों को सुरक्षा के साथ सम्मान और गरिमा देने का प्रयास किया जा रहा है।

‘ये पूरे भारत की टैक्सी है’

सीएम योगी ने कहा, “जब व्यक्ति अपनी गाड़ी पर भारत टैक्सी लिखाएगा और जो भी उस कार का चालक होगा, भारत टैक्सी के ब्रांड को संचालित करने का कार्य करेगा, तो उसको इस बात पर गौरव की अनुभूति होगी कि ये टैक्सी केवल एक यात्री को ढोने की नहीं, ये पूरे भारत की टैक्सी है। भारत को संचालित करने की भारत की गति को प्रगति में बदलने की टैक्सी है। उसके मन में इस बात की निश्चिंतता भी होगी कि मुझे यह सुविधा 5,00,000 रुपए की सामाजिक सुरक्षा की गारंटी भी दे रही है…जब किसी को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी मिलती है तो उसमें एक निश्चिंतता होती है और फिर वह व्यक्ति पूरी तन्मयता के साथ, पूरी जिम्मेदारी के साथ अपने कार्य को कर पाता है…आज यह टैक्सी लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज में संचालित हो रही है।”

एयरपोर्ट, मेट्रो और पुलिस से भी समझौता

मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत टैक्सी ने लखनऊ एयरपोर्ट, लखनऊ मेट्रो और लखनऊ पुलिस के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किए हैं। उन्होंने इस पहल के विस्तार पर जोर देते हुए कहा कि ‘भारत टैक्सी’ से आने वाले समय में लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रस्तावित बस सर्विस को भी इसी तरह के सहकारी मॉडल से विकसित करने की संभावना जताई।

किसानों के लिए 11% से घटकर 6% हुआ ब्याज

सीएम योगी ने ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ की भी शुरुआत की। इसके तहत उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम्य विकास बैंक से मिलने वाले दीर्घकालिक ऋण पर ब्याज दर 11 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दी गई है। इस योजना का उद्देश्य आने वाले वर्षों में करीब 5 लाख छोटे और सीमांत किसानों को कर्ज की सुविधा उपलब्ध कराना है। आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने किसानों के लिए ब्याज दर कम करने का फैसला किया और अब इसका परिणाम सामने है। उन्होंने कहा कि किसान समृद्ध होगा तो देश भी समृद्ध होगा।

पांच ड्राइवरों और पांच किसानों को मिला लाभ

कार्यक्रम के दौरान पांच भारत टैक्सी ड्राइवरों को शेयर सर्टिफिकेट दिए गए। वहीं, किसान योजना के पांच लाभार्थियों को लोन स्वीकृति पत्र सौंपे गए। मुख्यमंत्री ने सहकारिता विभाग का ‘उर्वरक सेतु’ मोबाइल ऐप और उत्तर प्रदेश सहकारी डेटाबेस सेंटर का मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया।

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सरकार के सहकारी मॉडल पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत सहकारी क्षेत्र देश की मजबूती से जुड़ा है। सरकार और केंद्र की ओर से सहकारी सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार, भारत टैक्सी का उद्देश्य किसी निजी ऐप आधारित टैक्सी एग्रीगेटर को खत्म करना नहीं, बल्कि ड्राइवर-केंद्रित और लोगों के लिए किफायती परिवहन का एक वैकल्पिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है। सहकारी मॉडल में ड्राइवर सदस्य और हितधारक के रूप में जुड़े होंगे, ताकि उनके आर्थिक और सामाजिक हितों को बढ़ावा दिया जा सके।

Cow Urine: अब दूध के साथ गोमूत्र से भी बंपर कमाई करेंगे किसान! यूपी के इन जिलों में ₹10 प्रति लीटर खरीद शुरू

Cow Urine Pilot Project: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले गो-संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल शुरू की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत बुलंदशहर में गोमूत्र की खरीद का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके तहत किसानों और पशुपालकों से 10 रुपये प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदा जा रहा है। योगी सरकार ने बुलंदशहर में किसानों से गाय का मूत्र इकट्ठा करने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। उम्मीद है कि इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी। साथ ही महिलाओं को कमाई का एक अतिरिक्त जरिया मिलेगा। साथ ही उन गायों की देखभाल में मदद मिलेगी जो अब दूध नहीं देतीं।

इकट्ठा किए गए गाय के मूत्र का इस्तेमाल खेती-बाड़ी के कामों में कच्चे माल के तौर पर किए जाने की उम्मीद है। ऐसी आशा है कि यह केमिकल वाले उत्पादों की जगह ले सकता है। अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो एक औपचारिक नीति बनाई जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि चुनाव से पहले इस प्रोजेक्ट को पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।

क्या है मकसद?

इस पहल का उद्देश्य गोमूत्र से कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार करना, पशुपालकों की अतिरिक्त आमदनी बढ़ाना, महिलाओं को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराना और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना है। पायलट प्रोजेक्ट सफल रहने पर इसे प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी लागू करने की तैयारी है।

बुलंदशहर के 15 गांवों में शुरू हुआ मॉडल

यह पहल बुलंदशहर की स्याना तहसील के नरसेना गांव में डॉ. प्रवीण के नेतृत्व में एक किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से शुरू की गई है। फिलहाल आसपास के 15 गांवों को इस परियोजना से जोड़ा गया है। इन गांवों में गोमूत्र जमा करने के लिए स्थानीय कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं। इन केंद्रों के जरिए वर्तमान में करीब 500 लीटर गोमूत्र प्रतिदिन एकत्र किया जा रहा है। भविष्य में गोमूत्र की खरीद कीमत को बढ़ाकर 20 रुपये प्रति लीटर करने की भी योजना बताई गई है।

पशुपालकों को नहीं जाना पड़ेगा दूर

गोमूत्र संग्रह के लिए गांवों में 200 लीटर क्षमता वाले टैंक लगाए गए हैं। इससे पशुपालकों को गोमूत्र बेचने के लिए दूर स्थित किसी केंद्र तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। गांव में ही कलेक्शन और खरीद की व्यवस्था होने से इस योजना में अधिक से अधिक पशुपालकों को जोड़ने में मदद मिल रही है। खासकर ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

महिलाओं को हर लीटर पर 2 रुपये कमीशन

इस मॉडल की एक खास बात महिलाओं की आर्थिक भागीदारी है। गांवों में गोमूत्र संग्रह में मदद करने वाली महिलाओं को हर लीटर पर 2 रुपये कमीशन दिया जा रहा है। इससे महिलाओं के लिए गांव में रहते हुए अतिरिक्त आमदनी का एक नया जरिया तैयार हुआ है। इस पहल से करीब 300 महिलाओं को शुरुआत में जोड़ा गया है। उन्हें इस मॉडल में शेयरधारक भी बनाया गया है।

यानी महिलाएं सिर्फ गोमूत्र संग्रह करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें पूरे आर्थिक मॉडल से सीधे जोड़ा गया है। डॉ. प्रवीण ने न्यूज एजेंसी यूएनआई को बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल गोमूत्र की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है। बल्कि इसे महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जोड़ना है।

गोमूत्र से बनाए जाएंगे खेती में काम आने वाले उत्पाद

संग्रह किए गए गोमूत्र का इस्तेमाल कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार करने में किया जा रहा है। इसके लिए गोमूत्र में विभिन्न जड़ी-बूटियों को मिलाकर कृषि में इस्तेमाल होने वाले मिश्रण और उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों को स्थानीय समितियों और सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इस मॉडल का उद्देश्य खेती में इस्तेमाल होने वाले कुछ रासायनिक उत्पादों के विकल्प के रूप में गोमूत्र आधारित प्राकृतिक उत्पादों को बढ़ावा देना भी है।

दूध के साथ गोमूत्र से भी आमदनी

ग्रामीण इलाकों में पशुपालन से होने वाली आमदनी मुख्य रूप से दूध और डेयरी उत्पादों पर निर्भर रहती है। इस पहल के जरिए पशुपालकों की आय में गोमूत्र को भी एक अतिरिक्त आर्थिक संसाधन के रूप में जोड़ने की कोशिश की जा रही है। यानी पशुपालक परिवारों के लिए एक ही पशु से दूध के अलावा गोमूत्र के जरिए भी अतिरिक्त आय का रास्ता बनाया जा रहा है। विशेष रूप से पशुपालन से जुड़े परिवारों की महिलाओं के लिए यह पहल घर और गांव के आसपास रहते हुए अतिरिक्त कमाई का जरिया बन सकती है।

सहकारी समितियों के जरिए बाजार तक पहुंचेंगे उत्पाद

गोमूत्र से तैयार कृषि उत्पादों को केवल किसानों तक पहुंचाने पर ही जोर नहीं है, बल्कि इनके लिए स्थानीय बाजार तंत्र भी विकसित किया जा रहा है। तैयार उत्पादों को सहकारी समितियों और स्थानीय समितियों के जरिए किसानों और बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इससे गांव में संग्रह से लेकर उत्पाद तैयार करने और फिर उसकी बिक्री तक एक स्थानीय आर्थिक चक्र विकसित करने की कोशिश है।

गो-संरक्षण, रोजगार और प्राकृतिक खेती को जोड़ने की कोशिश

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, बुलंदशहर में शुरू किया गया मॉडल गो-संरक्षण, ग्रामीण रोजगार, महिला सशक्तीकरण और प्राकृतिक/जैविक खेती को एक साथ जोड़ने वाली पहल के तौर पर देखा जा रहा है। इस मॉडल में गांवों से गोमूत्र इकट्ठा किया जाता है। फिर महिलाएं कलेक्शन प्रक्रिया से आमदनी हासिल करती हैं।

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इसके बाद गोमूत्र से कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार कर उन्हें सहकारी समितियों और स्थानीय समितियों के माध्यम से बाजार तक पहुंचाया जाता है। फिलहाल, यह योजना पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बुलंदशहर में चलाई जा रही है। इसके अनुभव और परिणामों के आधार पर इसे उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी विस्तार देने की तैयारी है।