आकाश अंबानी ने जियो प्लेटफॉर्म्स की प्राथमिकताएं बताईं, कहा-इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा उठाने पर होगा फोकस

जियो प्लेटफॉर्म्स अपनी ग्रोथ स्ट्रेटेजी के फोकस में बदलाव कर रही है। अब तक कंपनी का जोर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर रहा है। अब कंपनी अपने नेटवर्क का मैक्सिमम फायदा उठाने पर फोकस कर रही है। कंपनी ने पिछले सालों में पूरे देश में कनेक्टिविटी बढ़ाने पर भारी निवेश किया है। अब वह अपने सर्विसेज पोर्टफोलियो का विस्तार करना चाहती है और निवेश की गई पूंजी पर रिटर्न बढ़ाना चाहती है। इस बारे में जियो प्लेटफॉर्म्स के एमडी आकाश अंबानी ने बताया।

इंफ्रास्ट्रक्चर से मैक्सिमम वैल्यू हासिल करने पर होगा फोकस

मनीकंट्रोल को दिए ईमेल इंटरव्यू में अंबानी ने कहा, “हमारे कैपिटल एलोकेशन की दिशा सस्टेनेबल लॉन्ग टर्म वैल्यू क्रिएट करने के मकसद पर निर्भर करेगी। हम वहां निवेश करना जारी रखेंगे, जहां हमें टेक्नोलॉजी, कस्टमर डिमांड और उपलब्ध मौकों का फायदा उठाने के लिहाज से ऐसा करना सही लगेगा।” उन्होंने कहा कि मीडियम और लॉन्ग टर्म में हमारा फोकस उस इंफ्रास्ट्रक्चर से मैक्सिमम वैल्यू हासिल करना है, जिसे हमने बनाया है।

पिछले सालों में कंपनी ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश किया है

जियो प्लेटफॉर्म्स ने व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया है। मार्च 2026 में कंपनी के 3,60,382 नेटवर्क टावर्स थे। इसमें 10 लाख रूट किलोमीटर से ज्यादा लंबा फाइबर नेटवर्क शामिल है। कंपनी के वायरलेस ब्रॉडबहैंड नेटवर्क के तहत देश की आबादी का 99 फीसदी से ज्यादा हिस्सा आता है। फिक्स्ड ब्रॉडबैंड का कवरेज करीब 98 फीसदी पिन कोड्स तक है। FY26 में इंडिया के वायरलेस डेटा ट्रैफिक में जियो की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी थी।

अब पूंजीगत निवेश की रफ्तार में धीर-धीरे कमी आ रही

कई सालों तक भारी निवेश करने के बाद अब इनवेस्टमेंट की तेज रफ्तार कम हुई है। FY26 में कंपनी का कैश कैपिटल एक्सपेंडिचर घटकर 34,184 करोड़ रुपये रही। यह FY25 में 44,268 करोड़ रुपये थी। FY24 में 53,510 करोड़ रुपये थी। नेटवर्क कैपेक्स अकेले 40,617 करोड़ रुपये से घटकर 29,377 करोड़ रुपये पर आ गया। उधर, बिजनेस की ऑपरेटिंग अर्निंग्स अब अच्छे लेवल पर पहुंच गई है। जियो प्लेटफॉर्म्स का ऑपरेशन से रेवेन्यू FY26 में बढ़कर 1.47 लाख करोड़ रुपये हो गया। EBITDA 76,255 करोड़ रुपये रहा। यह करीब 52 फीसदी का मार्जिन है। कंपनी का नेट प्रॉफिट 30,049 करोड़ रुपये रहा।

जियो की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल विदेश में करने पर भी होगा फोकस

कंपनी ने शॉर्ट टर्म में कंपनी की प्राथमिकताओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा इसमें नेटवर्क क्वालिटी बनाए रखना, होम ब्रॉडबैंड और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस का विस्तार करना और एंटरप्राइज एंड डिजिटल सर्विसेज का विस्तार शामिल हैं। जियो AI-एनेबल्ड एंटरप्राइज सॉल्यूशंस, IoT, क्लाउड कंप्यूटिंग और AR/VR में भी मौकों पर नजर रखेगी। उन्होंने कहा कि जियो की टेक्नोलॉजी कपैबिलिटी के लिए विदेश में मौकों की तलाश भी प्राथमिकता में शामिल होगी।

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जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर को निवेश के लिए खुल जाएगा

जियो प्लेटफॉर्म्स के 30,200 करोड़ रुपये के आईपीओ में सिर्फ नए शेयर इश्यू होंगे। इसमें कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल नहीं है। यह आईपीओ 21 अक्तूबर यानी बुधवार को खुलेगा और 23 अक्तूबर यानी शुक्रवार को बंद होगा। कंपनी ने प्रति शेयर 1,065-1,119 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर कंपनी की वैल्यूएशन करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये है। कंपनी आईपीओ से आने वाले पैसे के बड़े हिस्से का इस्तेमाल अपनी सब्सिडियरी रिलायंस का कर्ज चुकाने के लिए करेगी।

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Jio IPO: ‘कमाई बढ़ाने के लिए नई रणनीति पर फोकस’, आकाश अंबानी ने कहा- सिर्फ टैरिफ बढ़ाने पर नहीं रहेगा जोर

Jio IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स अपनी कमाई बढ़ाने के लिए सिर्फ मोबाइल रिचार्ज महंगे करने पर निर्भर नहीं रहना चाहती। कंपनी अब डेटा की बढ़ती खपत, प्रीमियम डिजिटल सेवाओं, होम ब्रॉडबैंड और कॉरपोरेट सेवाओं से कमाई बढ़ाने की तैयारी में है। Jio का लक्ष्य अपने 50 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों से ज्यादा रेवेन्यू हासिल करना है।

Jio Platforms के चेयरमैन आकाश अंबानी ने Moneycontrol को बताया कि कंपनी हर GB डेटा के लिए ज्यादा पैसे वसूलने को ही कमाई बढ़ाने का एकमात्र तरीका नहीं मानती। उनके मुताबिक, टैरिफ कारोबार का एक हिस्सा है। लेकिन कमाई बढ़ाने के दूसरे रास्ते भी हैं।

Jio ग्राहकों को देगी प्रीमियम सेवाएं

Jio अपनी डिजिटल सेवाओं को और बेहतर बनाने पर काम कर रही है। कंपनी चाहती है कि ग्राहक प्रीमियम सेवाओं का ज्यादा इस्तेमाल करें। इसके अलावा, होम ब्रॉडबैंड और फिक्स्ड वायरलेस इंटरनेट का विस्तार भी किया जाएगा।

कंपनी कॉरपोरेट ग्राहकों के साथ अपना कारोबार बढ़ाना चाहती है। साथ ही, इंटरनेट कनेक्शन के साथ दूसरी सेवाएं भी जोड़ी जाएंगी। इनमें OTT वीडियो, म्यूजिक, क्लाउड स्टोरेज और AI आधारित सेवाएं शामिल हैं।

आकाश अंबानी के मुताबिक, ग्राहक इन सेवाओं का ज्यादा इस्तेमाल करेंगे, तो कमाई बढ़ाने के नए मौके मिलेंगे। प्रीमियम इंटरनेट कनेक्टिविटी और AI सेवाएं भी इसमें अहम भूमिका निभा सकती हैं।

Airtel से पीछे है Jio की प्रति ग्राहक कमाई

वित्त वर्ष 2026 में Jio की औसत प्रति यूजर कमाई यानी ARPU 214 रुपये प्रति माह रही। वहीं, Bharti Airtel की ARPU 257 रुपये थी।

एनालिस्ट्स का मानना है कि Jio के पास कमाई बढ़ाने की काफी गुंजाइश है। कंपनी के पास ग्राहकों की संख्या ज्यादा है। उसके नेटवर्क पर डेटा का इस्तेमाल भी काफी होता है। ऐसे में प्रीमियम सेवाओं और डेटा की बढ़ती खपत से कंपनी को फायदा मिल सकता है।

हालांकि, आकाश अंबानी ने यह नहीं बताया कि अगली बार मोबाइल टैरिफ कब बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि आने वाले समय में कीमतें किस स्तर पर स्थिर हो सकती हैं। उनके मुताबिक, टैरिफ का फैसला ग्राहकों की जरूरत, बाजार में प्रतिस्पर्धा, महंगाई और नेटवर्क पर होने वाले निवेश को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

Jio Platforms का ₹30,213 करोड़ का IPO

Jio Platforms का ₹30,213 करोड़ का IPO 21 अक्टूबर को खुला है और 23 अक्टूबर को बंद होगा। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू है। इसके लिए 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है।

इस IPO में 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जा रहे हैं। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) नहीं है। ऊपरी प्राइस बैंड पर कंपनी का वैल्यूएशन करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये है। शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को BSE और NSE पर होनी है।

₹27,500 करोड़ से चुकाया जाएगा कर्ज

वित्त वर्ष 2026 में Jio Platforms का रेवेन्यू 1.47 लाख करोड़ रुपये रहा। कंपनी को 30,049 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हुआ। वहीं, EBITDA 76,255 करोड़ रुपये रहा।

IPO से मिलने वाली रकम में से 27,500 करोड़ रुपये Reliance Jio Infocomm का कर्ज चुकाने के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे। यह Jio Platforms की सब्सिडियरी कंपनी है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Jailer 2 Box Office Day 5: रजनीकांत की फिल्म ने सोमवार की कमाई का रिकॉर्ड बनाया, 500 करोड़ी बनने के करीब ‘जेलर’

Jailer 2 Box Office Day 5: साउथ सुपरस्टार रजनीकांत का जलवा बॉक्स ऑफिस पर बरकरार है। उनकी फिल्म ‘जेलर 2’ ने सोमवार के दिन भी कमाई का धाकड़ रिकॉर्ड अपने नाम किया। रजनीकांत की लेटेस्ट फिल्म बॉक्स ऑफिस पर काफी अच्छा चल रही है। इसकी रफ्तार अब भी धीमी नहीं हुई है। बड़े ओपनिंग वीकेंड के बाद भी, जेलर 2 ने सोमवार को भी दर्शकों को खींचना जारी रखा। नेल्सन दिलीपकुमार के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म ने सोमवार को भारत में करीब 49.50 करोड़ रुपये की कमाई की।

ट्रेड वेबसाइट सैकनिल्क के मुताबिक, इससे सिर्फ पांच दिनों में इसका वर्ल्डवाइड कलेक्शन 477.75 करोड़ रुपये हो गया। आसान शब्दों में कहें तो, जेलर 2 अब दुनिया भर में 500 करोड़ रुपये के आंकड़े से सिर्फ 22 करोड़ रुपये दूर है। इस फिल्म ने किसी तमिल फिल्म द्वारा पहले सोमवार को सबसे बड़े कलेक्शन का नया रिकॉर्ड भी बनाया है। फिल्म ने सोमवार को भारत में 49.50 करोड़ रुपये की कमाई की, जिसने विजय की लियो को पीछे छोड़ दिया, जिसने 2023 में अपने पहले सोमवार को 39.50 करोड़ रुपये कमाए थे।

रजनीकांत की पिछली फिल्म, जेलर, 27.30 करोड़ रुपये के साथ लिस्ट में तीसरे नंबर पर है। विजय की बिगिल 22.80 करोड़ रुपये के साथ दूसरे नंबर पर है, जबकि मणिरत्नम की पोन्नियिन सेलवन: पार्ट 1 22.35 करोड़ रुपये के साथ पांचवें नंबर पर है।

फिल्म का ओपनिंग डे सबसे बड़ा दिन था, जब इसने भारत में 16,599 शो में 59.70 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। दूसरे दिन कलेक्शन घटकर 37.10 करोड़ रुपये रह गया, लेकिन वीकेंड में इसमें तेजी आई। सिर्फ पांच दिनों में, जेलर 2 इस साल की दो और बड़ी भारतीय रिलीज, बॉर्डर 2 और हनुमान अंश से भी आगे निकल गई है। यह फिल्म अब तक की सबसे बड़ी तमिल फिल्मों की लिस्ट में भी ऊपर चढ़ रही है।

इसके अगले टारगेट में पोन्नियिन सेलवन : पार्ट 1 है, जिसने दुनिया भर में 488 करोड़ रुपये कमाए, और कुली, जिसने 518 करोड़ रुपये कमाए। उसके बाद, यह लियो को 605 करोड़ रुपये और जेलर को 609 करोड़ रुपये का टारगेट दे सकती है। जेलर 2 में, रजनीकांत टाइगर मुथुवेल पांडियन का रोल कर रहे हैं, जो एक मूर्ति-स्मगलिंग रैकेट की जांच करते हैं। कास्ट में विद्या बालन, एसजे सूर्या, राम्या कृष्णन, मिथुन चक्रवर्ती और सूरज वेंजरामूडू भी हैं। मोहनलाल, शिवा राजकुमार और ऋतिक रोशन गेस्ट रोल में हैं।

नेल्सन दिलीपकुमार ने फिल्म लिखी और डायरेक्ट की है। आर निर्मल एडिटिंग के इंचार्ज हैं, अनिरुद्ध रविचंदर ने म्यूजिक दिया है, और विजय कार्तिक कन्नन सिनेमैटोग्राफर हैं।

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Retirement Planning: सुकन्या समृद्धि, पीपीएफ और SIP में मंथली ₹10000 इनवेस्ट करने से कितना बड़ा फंड बनेगा? समझें पूरा कैलकुलेशन

रिटायरमेंट प्लानिंग जल्द करने के कई फायदे हैं। निवेश के लिए ज्यादा समय मिलता है। पैसे को बढ़ने के लिए भी पर्याप्त समय मिल जाता है। करियर की शुरुआत में व्यक्ति पर आर्थिक जिम्मेदारी कम होती है। इससे निवेश करने में दिक्कत नहीं आती है। सवाल है कि अगर 40 साल का कोई व्यक्ति अगले 15 साल के लिए निवेश करना चाहता है तो उसके लिए बेस्ट इनवेस्टमेंट ऑप्शन क्या होगा?

15 साल में निवेश से बनेगा बड़ा फंड

एक्सपर्ट्स का कहना है कि 15 साल का पीरियड निवेश के लिए अच्छा है। अगर हर महीने 10000 रुपये का निवेश 15 साल तक किया जाए तो अच्छा फंड तैयार हो सकता है। लंबी अवधि के निवेश के लिए कुछ अच्छे विकल्प हैं। इनमें पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) और म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में SIP शामिल हैं।

पीपीएफ और SSY सरकारी की स्कीम

पीपीएफ और एसएसवाय सरकारी की स्कीम हैं। ये फिक्स्ड रिटर्न स्कीम हैं। इसका मतलब है कि निवेश से पहले आपको अंदाजा मिल जाता है कि किसी खास अवधि तक निवेश करने के बाद आपके लिए कितना बड़ा फंड तैयार होगा। सरकार की स्कीम होने की वजह से यह पूरी तरह सुरक्षित हैं। इनमें पैसा डूबने का डर ना के बराबर है। इसके अलावा इनके रिटर्न पर शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता है।

SIP से मंथली निवेश करने में रिस्क

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में SIP उन लोगों के लिए सही है, जो निवेश पर रिस्क ले सकते हैं। इसकी वजह यह है कि म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम सिप से हर महीने निवेश के पैसे को शेयर बाजार में लगाती है। इसलिए स्कीम के रिटर्न पर शेयर बाजार के प्रदर्शन का सीधा असर पड़ता है। शेयर बाजार का प्रदर्शन अच्छा रहने पर ज्यादा रिटर्न मिलता है, जबकि प्रदर्शन खराब होने पर रिटर्न भी कम रह सकता है।

एसएसवाय में निवेश का पीरियड 15 साल

अब हम देखेंगे कि तीनों इनवेस्टमेंट ऑप्शंस में मंथली 10,000 रुपये के निवेश से 15 साल में कितना बड़ा फंड तैयार होता है। सबसे पहले हम SSY का उदाहरण लेते हैं। यह स्कीम उन लोगों के लिए है, जिनकी बेटियां हैं। माता-पिता मैक्सिमम दो बेटियों के नाम से सुकन्या समृद्धि अकाउंट ओपन कर सकते हैं। एक बेटी के नाम से सिर्फ एक अकाउंट ओपन होगा। बेटी की उम्र 10 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

एसएसवाय का इंटरेस्ट रेट सालाना 8.2 फीसदी

सुकन्या समृद्धि स्कीम का इंटरेस्ट रेट 8.2 फीसदी है। इस स्कीम में सिर्फ 15 साल तक निवेश करना होता है। अकाउंट ओपन करने के 21 साल बाद स्कीम मैच्योर हो जाती है। इसका मतलब है कि अगर बेटी की उम्र अभी 5 साल है तो मंथली 10,000 रुपये 15 साल तक निवेश करने पर साल 2047 तक करीब 55,42,062 लाख रुपये का फंड तैयार हो जाएगा। इसमें 15 साल में कुल निवेश 18,00,000 रुपये होगा। इस पर आपको 37,42,062 रुपये का इंटरेस्ट मिलेगा। मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स नहीं लगेगा।

retirement table

पीपीएफ का इंटरेस्ट रेट सालाना 7.1 फीसदी 

PPF की स्कीम 15 साल में मैच्योर हो जाती है। इसका इंटरेस्ट रेट अभी 7.1 फीसदी है। इस तरह आप 15 साल में कुल 18,00,000 रुपये निवेश करेंगे। इस पर आपको कुल 14,54,567 रुपये का इंटरेस्ट मिलेगा। कुल मिलाकर 15 साल बाद आपको कुल 32,54,567 लाख रुपये मिलेंगे। इस पैसे पर आपको कोई टैक्स नहीं चुकाना होगा। अगर आप इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करते हैं तो आप निवेश के पैसे पर डिडक्शंस क्लेम कर सकते हैं।

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सिप से निवेश करने में बनेगा सबसे बड़ा फंड

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में मंथली 10000 रुपये का निवेश करने पर कुल 47,59,314 रुपये का फंड बनेगा। इस कैलकुलेशन में सालाना 12 फीसदी रिटर्न माना गया है। इसका मतलब है कि 15 साल में आपका 18 लाख रुपये का निवेश कंपाउंडिंग की वजह से 29,59,314 रुपये का रिटर्न जेनरेट करता है। लेकिन, ध्यान देने वाली बात यह है कि इस पैसे पर आपको कैपिटल गेंस टैक्स चुकाना होगा। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस का रेट 12.5 फीसदी है। इस रेट से कुल 5,94,914.25 रुपये टैक्स लगेगा। इसके बावजूद 15 साल का रिटर्न पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना से ज्यादा है।

चीन के अमीर अरबपतियों पर कस रहा टैक्स का शिकंजा, जानिए यहां के रईसों की कैसे बढ़ने वाली हैं मुश्किलें

चीनी कारोबारी अपनी कमाई पर कर बचाने के लिए ग्लोबल एक्सचेंज पर बिजनेस लिस्ट करने और अपने अरबों डॉलर ऑफशोर रखने का तरीका अपनाते रहे हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकता है, क्योंकि टैक्स अधिकारियों ने जुलाई में कहा कि वे स्थानीय करदाताओं के लिए विदेशी ट्रस्ट से होने वाले मुनाफे पर 20% टैक्स लगाना शुरू करेंगे। इन लोगों के पास अब 22 अक्टूबर तक बिना किसी पेनल्टी के अपनी देनदारियों को टैली करने, रिपोर्ट करने और चुकाने का समय है।

ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, इस कदम से दुनिया के 500 सबसे अमीर लोगों में से आठ और उनके लाभार्थी सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक इन टाइकून्स के ऑफशोर ट्रस्ट के जरिए चीन में बड़े ऑपरेशन वाले बिजनेस में लिस्टेड स्टेक हैं। चीनी सरकार ने किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक तौर से अलग नहीं किया है। यह साफ़ नहीं है कि इनमें से किसी अरबपति को अपने विदेशी ट्रस्ट से हुए मुनाफे पर टैक्स देना होगा या उनसे ऐसा करने के लिए कहा गया है। ब्लूमबर्ग के रेगुलेटरी फाइलिंग के आधार पर की गई गणना के मुताबिक, शुक्रवार तक उनकी होल्डिंग्स कुल मिलाकर लगभग $140.2 बिलियन थीं।

चीन की कुछ सबसे जानी-मानी कंपनियों की स्थापना करने वाले आठ अरबपतियों ने अपने ट्रस्ट ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स और केमैन आइलैंड्स जैसे टैक्स हेवन में खोले हैं। वीडियो गेम डेवलपर NetEase Inc. चलाने वाले विलियम डिंग इनमें शामिल हैं। विदेशों में उनके लगभग $37 बिलियन रखे हैं, और कॉलिन हुआंग, जिन्होंने ई-कॉमर्स की बड़ी कंपनी PDD Holdings Inc. लॉन्च की और चीन के बाहर उनके पास $29 बिलियन हैं।

एल्युमिनियम बनाने वाली कंपनी चाइना होंगकियाओ ग्रुप लिमिटेड के एक स्पोक्सपर्सन ने कहा कि उसके फाउंडर झांग बो और कंपनी की लीडरशिप को टैक्स पॉलिसी में बदलाव से जोड़ना “बेबुनियाद और गुमराह करने वाला है।” बाकी सात कंपनियों के प्रतिनिधियों ने टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। विदेशों में ज्यादातर पैसा उन निवेशों से जमा हुआ था जो कंपनियों ने अमेरिका या हांगकांग में इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग पूरी करने से पहले किए थे। उनमें से कुछ कारोबार, जैसे PDD और पॉप मार्ट, ने ट्रेडिंग शुरू करने के बाद से वैल्यू में बहुत बढ़ोतरी की है, जिससे उनके संस्थापकों को कागज पर अरबों डॉलर मिले हैं।

लॉ फर्म इंस एंड कंपनी हांगकांग के पार्टनर केविन वू ने कहा कि टैक्स में हड़पने से पुराने मनी ट्रस्ट पर ज्यादा असर पड़ता है। उन्होंने कहा, “कंपनी के पब्लिक होने के बाद मूल्य बहुत बढ़ जाता है।” जिन होने वाले क्लाइंट्स ने बहुत पहले अपनी कंपनियों को लिस्ट किया था, वे “ऐसे इनवेंटिव वकीलों की मांग कर रहे हैं जो सिर्फ नियम बताने के बजाय ट्रस्ट को रीस्ट्रक्चर कर सकें।” उन्होंने ब्लूमबर्ग द्वारा पहचाने गए आठ अरबपतियों के बजाय अपनी बातचीत का जिक्र करते हुए कहा।

टैक्स कलेक्शन का यह अभियान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के “आम खुशहाली” के अभियान का ही एक हिस्सा है, जिसमें घरेलू टेक्नोलॉजी की बड़ी कंपनियों पर कार्रवाई और बैंकरों की सैलरी में कटौती शामिल थी। भले ही पिछले कुछ सालों में इनमें से कुछ पाबंदियां कम हुई हैं, लेकिन लंबे समय से चल रही प्रॉपर्टी की मंदी ने स्थानीय सरकारों के फाइनेंस को भी गहरा झटका दिया है, जिससे रेवेन्यू के दूसरे सोर्स खोजने पड़े हैं।

यूनियन बैंकेयर प्रिवी में एशिया के सीनियर इकोनॉमिस्ट कार्लोस कैसानोवा ने कहा, “उन्हें स्थानीय और केंद्र सरकार के लेवल पर रेवेन्यू के सोर्स को बेहतर बनाने की जरूरत है और वे एक चैनल के तौर पर ऑफशोर वेल्थ की तलाश कर रहे हैं।”

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Tinder CEO ने कर्मचारियों से पूछा सफलता का मतलब, जवाब सुनकर हुए हैरान, जानें क्या होगा नया नियम

आज के दौर में डेटिंग ऐप पर मैच मिलना आसान हो सकता है, लेकिन क्या उस मैच से कोई अच्छी बातचीत या सच्चा रिश्ता भी बनता है? Tinder के नए CEO स्पेंसर रास्कॉफ ने जब अपनी टीम से यही सवाल पूछा, तो उन्हें ऐसा जवाब मिला जिसने कंपनी की सोच पर ही सवाल खड़े कर दिए। कई कर्मचारियों के पास सफलता को समझाने के लिए ठोस जवाब नहीं था, जबकि कुछ का ध्यान केवल कमाई और मुनाफे पर था। इसके बाद कंपनी ने तय किया कि अब सफलता सिर्फ पैसों से नहीं, बल्कि लोगों के बीच बनने वाले कनेक्शन से भी मापी जाएगी।

जब CEO के सवाल पर कर्मचारी हो गए खामोश

स्पेंसर रास्कॉफ ने जुलाई 2025 में Tinder की कमान संभाली थी। इसके बाद उन्होंने कर्मचारियों से पूछा कि आखिर उनकी नजर में ऐप की सफलता क्या है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई कर्मचारी इस सवाल का जवाब नहीं दे पाए। जिन लोगों ने जवाब दिया, उनमें से कई ने तिमाही मुनाफे और वित्तीय लक्ष्यों का जिक्र किया। रास्कॉफ को महसूस हुआ कि कंपनी शायद उस मूल मकसद से दूर हो गई है, जिसके लिए लोग Tinder का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने Fortune को दिए इंटरव्यू में माना कि नए फीचर्स और इनोवेशन की कमी के कारण ऐप यूजर्स की बदलती उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहा था।

अब मैच नहीं, बातचीत भी होगी सफलता का पैमाना

Tinder ने इस समस्या से निपटने के लिए एक नया तरीका अपनाया है। कंपनी ने ‘स्पार्क्स’ (Sparks) नाम का मापदंड पेश किया, जिसके तहत उन बातचीतों को गिना जाता है, जहां मैच होने के बाद दोनों लोग कम से कम छह बार एक-दूसरे को जवाब देते हैं। लाखों मैसेज के विश्लेषण में कंपनी ने पाया कि इस तरह बातचीत आगे बढ़ने पर फ्लर्टिंग और आमने-सामने मिलने की योजना बनने की संभावना अधिक होती है। यानी अब Tinder के लिए सिर्फ दो लोगों का मैच होना काफी नहीं है। कंपनी यह भी देखना चाहती है कि उस मैच के बाद बातचीत कितनी आगे बढ़ती है।

यूजर्स को समझने के लिए बनाए दो काल्पनिक किरदार

कर्मचारी अलग-अलग लोगों की डेटिंग से जुड़ी जरूरतों को बेहतर समझ सकें, इसके लिए कंपनी ने दो काल्पनिक यूजर पर्सोना भी बनाए हैं। इनमें एबी को एक चिंतित रोमांटिक और जैस्मिन को खुशमिजाज, मिलनसार शख्स के रूप में दिखाया गया है। इस पहल का उद्देश्य टीम को यह समझाना है कि हर यूजर की पसंद, उम्मीदें और रिश्ता तलाशने का तरीका एक जैसा नहीं होता।

तेजी से नए फीचर्स ला रहा है Tinder

कंपनी अब डबल डेट, आमने-सामने मिलने वाले इवेंट और AI आधारित मैचमेकिंग जैसी सुविधाओं पर भी काम कर रही है। रास्कॉफ के मुताबिक, कंपनी अब एक साल पहले की तुलना में 70 फीसदी ज्यादा कोड तैयार कर रही है। इससे नए फीचर्स तेजी से लॉन्च करना संभव हुआ है। जनवरी में विकसित एक इवेंट फीचर को लॉस एंजिलिस में सिर्फ आठ सप्ताह में लॉन्च कर दिया गया, जबकि पहले ऐसे प्रोजेक्ट में छह से 12 महीने लग सकते थे।

क्या Tinder की नई रणनीति रंग ला रही है?

रास्कॉफ के मुताबिक, कंपनी के प्लेटफॉर्म पर मैचों में सालाना आधार पर 14 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। साथ ही, बेहतर बातचीत के संकेतकों में भी सुधार देखने को मिला है। हालांकि, इन शुरुआती आंकड़ों से यह तय नहीं होता कि यूजर्स को लंबे समय तक बेहतर रिश्ते मिलेंगे या नहीं। लेकिन Tinder की नई रणनीति एक अहम बदलाव जरूर दिखाती है, अब कंपनी का ध्यान सिर्फ इस बात पर नहीं है कि कितने लोग मैच कर रहे हैं, बल्कि इस पर भी है कि उन मैचों से आगे कोई सार्थक जुड़ाव बन रहा है या नहीं।

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Neogen Chemicals Share Price: एनालिस्ट की पसंद बना ये केमिकल स्टॉक, दे सकता है 24% का रिटर्न

Neogen Chemicals Share Price: पिछले 6 महीनों में अच्छे रिटर्न के बाद घरेलू ब्रोकरेज फर्म ‘एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग’ ने Neogen Chemicals पर कवरेज शुरू किया है। उन्होंने इसे ‘Buy’ की रेटिंग दी है और ₹3,050 का टारगेट प्राइस तय किया है। इसका मतलब है कि ₹2,482 के मौजूदा मार्केट प्राइस से इसमें लगभग 23% की तेजी आ सकती है।

ब्रोकरेज का मानना ​​है कि स्पेशलिटी केमिकल्स बनाने वाली यह कंपनी अब कमाई में तेज बढ़ोतरी के दौर में प्रवेश करने वाली है। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि कंपनी का बैटरी केमिकल्स का कारोबार बढ़ रहा है, जिसे घरेलू बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, ग्राहकों की मंजूरी और चीन के बाहर की सप्लाई चेन में मिल रहे मौकों का समर्थन मिल रहा है।

एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने कहा Neogen Chemicals के पास एक मजबूत स्पेशलिटी केमिकल्स कारोबार है और साथ ही बैटरी के क्षेत्र में भी बड़े मौके हैं। चूंकि प्लांट काफी हद तक तैयार हो चुके हैं और ग्राहकों द्वारा मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है, इसलिए मुख्य रुकावटें अब पीछे छूट गई हैं। अब कमाई में तेजी आना बाकी है, जो विकास और री-रेटिंग का एक बेहतरीन मौका बनाता है।”

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि FY26 से FY30 के बीच Neogen का रेवेन्यू, EBITDA और टैक्स के बाद का एडजस्टेड प्रॉफिट (PAT) क्रमशः 45%, 49% और 87% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ेगा। हालांकि, इस निवेश की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नई सुविधाएं समय पर शुरू होती हैं या नहीं, ग्राहक कितना माल खरीदते हैं, और कंपनी अपने बढ़े हुए कर्ज को कैसे संभालती है।

ब्रोकरेज स्टॉक पर बुलिश क्यों

आने वाले वर्षों में बैटरी केमिकल्स, नियोजेन के विकास का सबसे बड़ा जरिया बनने की उम्मीद है। इसकी सब्सिडियरी कंपनी, ‘नियोजेन आयोनिक्स’, बैटरी इलेक्ट्रोलाइट और लिथियम हेक्साफ्लोरोफॉस्फेट (LiPF6) बनाती है। LiPF6 एक महत्वपूर्ण सॉल्ट है जिसका इस्तेमाल लिथियम-आयन बैटरी में किया जाता है। कंपनी इसके लिए ‘MU आयोनिक सॉल्यूशंस’ की जापानी मैन्युफैक्चरिंग तकनीक का इस्तेमाल करती है और जापान की ‘मोरिता’ के साथ एक जॉइंट वेंचर के जरिए अपना सॉल्ट कारोबार चलाती है।

एंटीक का अनुमान है कि नियोजेन के कुल रेवेन्यू में बैटरी केमिकल्स का हिस्सा FY26 के 4% से बढ़कर FY30 तक 62% हो जाएगा। FY26 तक यह सेगमेंट घाटे में था, क्योंकि उस दौरान इलेक्ट्रोलाइट और सॉल्ट बनाने की सुविधाएं तैयार हो रही थीं और ग्राहकों से मंजूरी लेने की प्रक्रिया चल रही थी। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि FY27 तक यह कारोबार EBITDA के स्तर पर ‘ब्रेक-ईवन’ (यानी बिना नुकसान या मुनाफे की स्थिति) तक पहुंच जाएगा। एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग का कहना है कि, “कमीशनिंग में देरी के कारण काम की गति (रैंप-अप) कुछ आगे खिसक गई है, लेकिन इससे मध्यम अवधि की कमाई के अनुमानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि FY30E (वित्त वर्ष 2030) के हमारे अनुमान जिन क्षमताओं और ग्राहकों की मंजूरी पर आधारित हैं, वे पहले से ही मौजूद हैं।”

ब्रोकरेज का मानना ​​है कि ग्राहकों द्वारा दी जाने वाली योग्यता(क्वालिफिकेशन) कंपनी को एक प्रतिस्पर्धी बढ़त दिला सकती है। इस तरह की मंजूरी मिलने में 12-24 महीने लग सकते हैं, और एक बार किसी उत्पाद को मंजूरी मिल जाने के बाद, बैटरी निर्माता आमतौर पर अपने सप्लायर को बदलना नहीं चाहते। नियोजेन ने अमेरिका के तीन इलेक्ट्रोलाइट निर्माताओं के साथ अपने प्लांट का अंतिम ऑडिट पूरा कर लिया है। इससे कंपनी उन अमेरिकी टैक्स-क्रेडिट नियमों से जुड़ी मांग को पूरा करने की स्थिति में आ गई है, जो 2027 से कुछ चीनी सप्लायरों से सामान लेने पर रोक लगाते हैं।

भारत में बैटरी निर्माण क्षमता बढ़ने के साथ, घरेलू स्तर पर भी अवसर बढ़ सकते हैं। नियोजेन की दहेज और पाखाजन इकाइयां स्थानीय सेल निर्माताओं को सेवा देने के लिए तैयार हैं, जबकि इसकी लिथियम सॉल्ट क्षमता निर्यात के अतिरिक्त अवसर प्रदान करती है। बैटरी रसायनों के अलावा, कंपनी का स्पेशलिटी केमिकल्स का स्थापित कारोबार कमाई का एक स्थिर आधार देता है। इसे कॉन्ट्रैक्ट सिंथेसिस एंड मैन्युफैक्चरिंग (CSM), एडवांस्ड इंटरमीडिएट्स और दहेज प्लांट में आग लगने की घटना के बाद उत्पादन में हुए सुधार से भी मजबूती मिलती है।

स्टॉक का परफॉर्मेंस

इस केमिकल स्टॉक में पिछले 3 महीनों में 14%, 6 महीनों में 64% और पिछले 1 साल में 70% की तेजी आई है। हालांकि, हाल के समय में इसमें 1 हफ्ते में 2% और पिछले 1 महीने में 0.3% की गिरावट देखी गई है। अक्टूबर 2026 में यह स्टॉक अपने 52-हफ्तों के उच्चतम स्तर ₹2785 पर पहुंच गया था, जबकि दिसंबर 2025 में यह अपने 52-हफ्तों के निचले स्तर ₹978 पर था।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

उत्तराखंड में दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस पर बवाल, भाई के बचाव में उतरे मिका सिंह ने दिया सिंगिंग छोड़ने का चैलेंज, जानें क्या है पूरा मामला

उत्तराखंड में एक कार्यक्रम के दौरान दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में राज्य के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल सिंगर के प्रदर्शन पर नाराजगी जताते नजर आए। इसके बाद दलेर मेहंदी पर शराब पीकर स्टेज पर आने के आरोप लगाए गए। अब उनके भाई और सिंगर मिका सिंह ने इन आरोपों पर खुलकर अपनी बात रखी है। मिका ने यहां तक कह दिया कि अगर कोई दलेर मेहंदी को शराब पीते हुए देखने का दावा साबित कर दे, तो वह सिंगिंग छोड़ देंगे।

‘दलेर मेहंदी ने कभी शराब नहीं पी’, मिका सिंह का दावा

मिका सिंह ने अपने भाई का बचाव करते हुए शराब पीने के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि दलेर मेहंदी का नाम कभी शराब पीने से नहीं जुड़ा और उनके खिलाफ इस तरह की बातें करना ठीक नहीं है। मिका ने अपने बयान में चुनौती देते हुए कहा कि अगर किसी एक व्यक्ति के पास भी ऐसा सबूत है कि उसने दलेर मेहंदी को शराब पीते देखा है, तो वह संगीत की दुनिया छोड़ने के लिए तैयार हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

तबीयत खराब होने के बावजूद स्टेज पर पहुंचे थे दलेर?

मिका सिंह ने यह भी बताया कि दलेर मेहंदी पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं और उनकी बड़ी सर्जरी भी हुई थी। मिका के मुताबिक, संभव है कि खराब तबीयत के बावजूद पहले से किया गया वादा निभाने के लिए दलेर कार्यक्रम में पहुंचे हों।

उन्होंने बताया कि कलाकार कई बार बीमारी और थकान के बावजूद अपने तय कार्यक्रम पूरे करते हैं। मिका ने कहा कि अगर किसी कलाकार ने शो के लिए हामी भर दी है, तो वह अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश करता है, भले ही उसकी तबीयत ठीक न हो। हालांकि, दलेर मेहंदी की तबीयत को लेकर मिका की ओर से दी गई इस सफाई के बीच शराब पीने के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

35 लाख रुपये की फीस और लिप-सिंकिंग पर उठा सवाल

यह विवाद उत्तराखंड के टिहरी जिले में नवरात्रि के दौरान आयोजित कुंजापुरी मेले का है। 18 अक्टूबर को हुए कार्यक्रम में दलेर मेहंदी की प्रस्तुति के बीच मंत्री सुबोध उनियाल मंच पर पहुंचे और नाराजगी जताई।

मंत्री ने आरोप लगाया कि सिंगर मंच पर ठीक से गा नहीं रहे थे और गानों पर केवल लिप-सिंक कर रहे थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि कार्यक्रम के लिए दलेर मेहंदी को 35 लाख रुपये दिए गए थे, इसलिए उनसे बेहतर प्रस्तुति की उम्मीद थी। उनियाल ने धार्मिक आयोजन में कथित तौर पर शराब पीकर प्रस्तुति देने पर भी आपत्ति जताई। हालांकि, शराब के नशे में होने का आरोप साबित नहीं हुआ है।

अब विवाद के बीच चर्चा में हैं दोनों भाई

एक तरफ मंत्री ने दलेर मेहंदी की प्रस्तुति पर सवाल उठाए हैं, तो दूसरी तरफ मिका सिंह अपने भाई के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं। फिलहाल इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के बयानों के कारण सोशल मीडिया पर बहस जारी है।

अब देखने वाली बात होगी कि यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है और दलेर मेहंदी की ओर से इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

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Daily Voice : अमेरिकी मध्यावधि चुनाव बाजार के लिए कर सकते हैं ट्रिगर का काम, चुनिंदा आईटी शेयरों पर रहे नजर

Daily Voice : IT शेयरों में हालिया तेजी भले ही अभी किसी टिकाऊ रिकवरी का संकेत न हो,लेकिन हर उछाल पर आईटी शेयरों में बिकवाली की एकतरफा रणनीति अपनाना भी जल्दबाजी हो सकती है। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजे बाजारों के लिए एक ट्रिगर का काम कर सकते हैं,लेकिन इस बात की संभावना कम है कि केवल इसी वजह से बाजार में कोई बड़ी तेजी या कच्चे तेल में भारी गिरावट आएगी। ये बातें अल्फएक्यूरेट एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक और संस्थापक राजेश कोठारी ने मनीकंट्रोल से हुई एक बातचीत में कही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि आईटी शेयरों में आई हालिया तेजी पॉजिटिव संकेत है लेकिन निवेशकों को अभी यह नहीं मान लेना चाहिए कि इस सेक्टर में टिकाऊ तेजी की शुरुआत हो गई है। पोर्टफोलियो में कोई बदलाव करने से पहले तेल सप्लाई की स्थिति,डॉलर,बॉन्ड यील्ड और कॉर्पोरेट अर्निंग पर नजर रखने की जरूरत है।

आईटी में तीन बातों पर नजर रखने की जरूरत

राजेश कोठारी के मुताबिक IT शेयरों में हालिया तेजी उत्साहजनक है,लेकिन इसे एक टिकाऊ तेजी मान लेने में सावधानी बरतने की जरूरत है। बड़ा सवाल यह है कि क्या यह तेजी इंडस्ट्री की अर्निंग आउटलुक से मेल खाती है या यह सिर्फ ‘ओवरसोल्ड’लेवल्स से आई खरीदारी है? हमें आईटी में तीन बातों पर नजर रखने की जरूरत है:

मांग की स्थिति: विशेष रूप से अमेरिका और यूरोप में टाले जा सकने वाला टेक्नोलॉजी खर्च (discretionary technology spending)अहम बना हुआ है। बेहतर सौदे हासिल करने का नतीजा रेवेन्यू ग्रोथ के रूप में दिखना चाहिए।

AI से बदलाव और अवसर: AI कमाई के नए स्रोत पैदा कर सकता है, लेकिन यह पारंपरिक बिलिंग मॉडल को भी बदल सकता है और कीमतों पर दबाव डाल सकता है।

वैल्यूएशन और अर्निंग आउटलुक: भारी तेजी के बाद, जिन शेयरों की कीमत उनकी कमाई की संभावनाओं से आगे निकल गई है, उनमें मुनाफावसूली (प्रॉफिट-टेकिंग) देखने को मिल सकती है।

राजेश कोठारी का मानना ​​है कि आईटी सेक्टर में तेजी आने पर हर शेयर बेच देने की रणनीति जल्दबाजी हो सकती है, लेकिन इस तेजी के पीछे भागना भी कोई समझदारी नहीं है। आईटी में उन कंपनियों को ही प्राथमिकता देनी चाहिए जिनकी ग्रोथ की संभावनाएं बेहतर हो रही हैं, जिनके ग्राहकों के साथ मजबूत संबंध हैं और जिनके पास AI से कमाई करने के ठोस मौके हैं। ऐसी कंपनियों से दूर रहने की जरूरत है जो अभी भी कमजोर मांग से जूझ रही हैं।

क्या आप कंजम्पशन सेक्टर को लेकर सतर्क हैं? कंजम्पशन डिमांड और इससे जुड़े शेयरों पर आपकी क्या राय है?

राजेश कोठारी ने कहा कि कंजम्पशन सेक्टर को लेकर पूरी तरह सतर्क रहने के बजाय,चुनिंदा रुख अपनाना पसंद करेंगे। जरूरी चीजों पर होने वाले खर्च और गैर-जरूरी (वैकल्पिक) चीजों पर होने वाले खर्च के बीच का अंतर समझना जरूरी है। कई ‘फास्ट फ्रीक्वेंसी’ डेटा इंडिकेटर कंजम्पशन ट्रेंड में सुधार दिखा रहे हैं (जैसे रिटेल क्रेडिट ग्रोथ, टू-व्हीलर की बिक्री में बढ़ोतरी, आदि)।

इस सेक्टर में ऐसी कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जिनके पास मजबूत ब्रांड, अच्छा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, कीमतों को तय करने की ताकत, अच्छी बैलेंस शीट और सही वैल्यूएशन हों। वैकल्पिक उपभोग (discretionary consumption) के सेक्टर में केवल कीमतों में बढ़ोतरी पर निर्भर रहने के बजाय, बिक्री की मात्रा (volume) में बढ़त के संकेतों पर भी नजर रखने की जरूरत है।

क्या आप आने वाले समय में ‘अल नीनो’ (El Niño) को बड़ा जोखिम मानते हैं? इसका महंगाई, ग्रामीण मांग और भारत के विकास पर क्या असर पड़ सकता है?

इसके जवाब उन्होंने कहा कि ‘अल नीनो’ एक जोखिम तो है,लेकिन इसे देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि भारत के विकास का पूरा आउटलुक ही खराब हो जाएगा। कोई निष्कर्ष निकालने से पहले फसल उत्पादन, जलाशयों के जल-स्तर, खाने-पीने की चीजों की कीमतों के रुझान और ग्रामीण मांग के इंडीकेटरों पर नजर रखने की जरूरत है।

Q2FY27 में बैंकों के नतीजे कैसे रह सकते है? क्या इनके मौजूदा वैल्यूएशन अच्छे लग रहे है या इन स्तरों से आगे बढ़ने की गुंजाइश सीमित है?

इसके जवाब में राजेश कोठारी ने कहा कि बैंक शेयरों का प्रदर्शन उत्साहजनक है। ज़्यादातर बैंकों ने लोन वितरण (डिस्बर्समेंट) में अच्छी बढ़ोतरी और मज़बूत एसेट क्वालिटी की जानकारी दी है। अच्छे बैंकों में मध्यम अवधि के नजरिए निवेश के अच्छे मौके दिख रहे हैं लेकिन वैल्यूएशन के नजरिए से चुनिंदा शेयरों पर ही दांव लगाने की सलाह होगी।

ऐसे बैंकों पर फोकस करने की सलाह होगी जिनकी अर्निंग ग्रोथ को टिकाऊ कोर इनकम,अच्छी एसेट क्वालिटी और मजबूत फंडिंग फ्रेंचाइजी का सपोर्ट हासिल हो। अगले दो से तीन तिमाहियों में मार्जिन में सुधार की स्थिति कैसी रहती है, इस पर भी नजर रहनी चाहिए।

 

दिग्गज निवेशक आशीष कचोलिया ने एक्सप्रो इंडिया में लगभग 1% हिस्सेदारी बेची, ऋषि कजारिया ने स्वराज सूटिंग में बढ़ाई हिस्सेदार

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

ड्रैगन फ्रूट की खेती से छप्परफाड़ कमाई! महाराष्ट्र के किसान ने अपनाया ऐसा तरीका, आज सालाना ₹2 करोड़ का कारोबार!

किसान अगर कुछ नया करने की ठान ले, तो खेती से भी करोड़ों रुपये कमाए जा सकते हैं। महाराष्ट्र के सोलापुर के रहने वाले महेश असाबे ने इसे सच कर दिखाया है। उनके परिवार ने कुछ साल पहले सिर्फ 3 एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट उगाना शुरू किया था। आज उनका फार्म 60 एकड़ तक फैल चुका है और सालाना कारोबार करीब 2 करोड़ रुपये पहुंच गया है। खास बात यह है कि महेश ने खेती को बेहतर बनाने के लिए नई तकनीक अपनाई और दूसरे देशों से भी सीख ली। उनकी यह कहानी उन किसानों के लिए खास है, जो खेती से अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं।

पिता ने शुरू की थी खेती

महेश असाबे महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के अकोला गांव के रहने वाले हैं। उनका परिवार पहले मक्का जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करता था। महेश ने एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग में बीटेक किया और इसके बाद एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड फूड प्रोसेसिंग में एमटेक की पढ़ाई पूरी की।

साल 2013-14 में उनके पिता ने ड्रैगन फ्रूट की खेती करने का फैसला लिया। उन्होंने इस फल के बारे में पढ़ा था और जाना था कि इसकी खेती में अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत होती है। सूखे इलाकों में भी इसकी खेती की जा सकती है। यही बात उन्हें इस फसल की ओर खींच लाई।

बांग्लादेश से मंगाए 9,000 पौधे

ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू करना परिवार के लिए एक नया प्रयोग था। इसके लिए उन्होंने बांग्लादेश से करीब 9,000 पौधे मंगवाए। Startup Pedia के मुताबिक, पौधों पर शुरुआती निवेश करीब ₹9.9 लाख था। परिवार ने तीन एकड़ जमीन पर खेती शुरू की। साल 2015-16 में पहली फसल तैयार हुई और प्रति एकड़ करीब पांच टन उत्पादन मिला। उपज बेचकर परिवार को लगभग ₹5 लाख की कमाई हुई।

धीरे-धीरे ड्रैगन फ्रूट की मांग और कीमत बढ़ने लगी। साल 2017 तक परिवार इसे ₹150 से ₹250 प्रति किलो के भाव पर बेचने लगा। इससे खेती को बड़े स्तर पर ले जाने का हौसला मिला।

इजरायल और वियतनाम से सीखी खेती की नई तकनीक

महेश ने खेती को सिर्फ पारंपरिक तरीके तक सीमित नहीं रखा। पढ़ाई के दौरान वह 45 दिनों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए इजरायल गए। वहां उन्होंने पानी का बेहतर इस्तेमाल, आधुनिक कृषि तकनीक और उत्पादन बढ़ाने के तरीके सीखे। साल 2018 में उन्होंने वियतनाम का दौरा भी किया, जहां ड्रैगन फ्रूट की खेती के तरीकों को समझा। लौटकर उन्होंने अपने खेत में एक-एक एकड़ के अलग-अलग प्रदर्शन प्लॉट तैयार किए, ताकि खेती की विभिन्न तकनीकों को आजमाया जा सके।

3 एकड़ से 60 एकड़ तक पहुंचा फार्म

आज महेश असाबे Rukmini Farms and Nursery का संचालन करते हैं। उनके फार्म में ड्रैगन फ्रूट के अलावा अनार, सीताफल और अमरूद भी उगाए जाते हैं।

खेती में पानी बचाने के लिए ड्रिप इरिगेशन और तालाब जैसी सुविधाएं विकसित की गईं। निराई जैसे नियमित कामों में मशीनों का इस्तेमाल भी शुरू किया गया, जिससे खेती को संभालना आसान हुआ।

ड्रैगन फ्रूट से ₹1.25 करोड़ की सालाना कमाई

Startup Pedia के मुताबिक, महेश ड्रैगन फ्रूट की खेती से हर साल करीब ₹1.25 करोड़ कमाते हैं। उनके फार्म में सालाना लगभग 200 टन ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन होता है। दूसरे फलों से होने वाली कमाई को जोड़ दें, तो उनके कारोबार का सालाना टर्नओवर करीब ₹2 करोड़ पहुंच जाता है।

महेश की कहानी बताती है कि खेती में नई तकनीक अपनाना, बाजार की मांग समझना और लगातार सीखते रहना कितना महत्वपूर्ण है। तीन एकड़ से शुरू हुआ उनका सफर आज दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

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