उत्तराखंड में दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस पर बवाल, भाई के बचाव में उतरे मिका सिंह ने दिया सिंगिंग छोड़ने का चैलेंज, जानें क्या है पूरा मामला

उत्तराखंड में एक कार्यक्रम के दौरान दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में राज्य के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल सिंगर के प्रदर्शन पर नाराजगी जताते नजर आए। इसके बाद दलेर मेहंदी पर शराब पीकर स्टेज पर आने के आरोप लगाए गए। अब उनके भाई और सिंगर मिका सिंह ने इन आरोपों पर खुलकर अपनी बात रखी है। मिका ने यहां तक कह दिया कि अगर कोई दलेर मेहंदी को शराब पीते हुए देखने का दावा साबित कर दे, तो वह सिंगिंग छोड़ देंगे।

‘दलेर मेहंदी ने कभी शराब नहीं पी’, मिका सिंह का दावा

मिका सिंह ने अपने भाई का बचाव करते हुए शराब पीने के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि दलेर मेहंदी का नाम कभी शराब पीने से नहीं जुड़ा और उनके खिलाफ इस तरह की बातें करना ठीक नहीं है। मिका ने अपने बयान में चुनौती देते हुए कहा कि अगर किसी एक व्यक्ति के पास भी ऐसा सबूत है कि उसने दलेर मेहंदी को शराब पीते देखा है, तो वह संगीत की दुनिया छोड़ने के लिए तैयार हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

तबीयत खराब होने के बावजूद स्टेज पर पहुंचे थे दलेर?

मिका सिंह ने यह भी बताया कि दलेर मेहंदी पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं और उनकी बड़ी सर्जरी भी हुई थी। मिका के मुताबिक, संभव है कि खराब तबीयत के बावजूद पहले से किया गया वादा निभाने के लिए दलेर कार्यक्रम में पहुंचे हों।

उन्होंने बताया कि कलाकार कई बार बीमारी और थकान के बावजूद अपने तय कार्यक्रम पूरे करते हैं। मिका ने कहा कि अगर किसी कलाकार ने शो के लिए हामी भर दी है, तो वह अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश करता है, भले ही उसकी तबीयत ठीक न हो। हालांकि, दलेर मेहंदी की तबीयत को लेकर मिका की ओर से दी गई इस सफाई के बीच शराब पीने के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

35 लाख रुपये की फीस और लिप-सिंकिंग पर उठा सवाल

यह विवाद उत्तराखंड के टिहरी जिले में नवरात्रि के दौरान आयोजित कुंजापुरी मेले का है। 18 अक्टूबर को हुए कार्यक्रम में दलेर मेहंदी की प्रस्तुति के बीच मंत्री सुबोध उनियाल मंच पर पहुंचे और नाराजगी जताई।

मंत्री ने आरोप लगाया कि सिंगर मंच पर ठीक से गा नहीं रहे थे और गानों पर केवल लिप-सिंक कर रहे थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि कार्यक्रम के लिए दलेर मेहंदी को 35 लाख रुपये दिए गए थे, इसलिए उनसे बेहतर प्रस्तुति की उम्मीद थी। उनियाल ने धार्मिक आयोजन में कथित तौर पर शराब पीकर प्रस्तुति देने पर भी आपत्ति जताई। हालांकि, शराब के नशे में होने का आरोप साबित नहीं हुआ है।

अब विवाद के बीच चर्चा में हैं दोनों भाई

एक तरफ मंत्री ने दलेर मेहंदी की प्रस्तुति पर सवाल उठाए हैं, तो दूसरी तरफ मिका सिंह अपने भाई के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं। फिलहाल इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के बयानों के कारण सोशल मीडिया पर बहस जारी है।

अब देखने वाली बात होगी कि यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है और दलेर मेहंदी की ओर से इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

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2000+ जानवरों की जान बचाने वाले One-Man Army | Uttarakhand | The Better India Hindi

2000+ जानवरों की जान बचाने वाले One-Man Army | Uttarakhand | The Better India Hindi

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नाले में फंसा कोई कुत्ता या सड़क किनारे ज़िंदगी से लड़ रही कोई गाय… इनकी मदद के लिए कितने लोग आगे आते हैं? अगर बात उत्तराखंड, नैनीताल के हल्द्वानी शहर की हो तो ऐसी किसी भी परिस्थिति में बंटी ज़रूर आते हैं, चाहे दिन हो या आधी रात!

इन्हें One-man Army कहना गलत नहीं होगा, क्योंकि पशुओं को बचाने के लिए ये अकेले ही काम करते हैं। एक बाइक, एक फर्स्ट-ऐड बैग और एक रस्सी के दम पर करीब 2000 जानवरों की जान बचा चुके हैं।

इस काम की सीख उन्हें अपनी नानी से मिली थी, आज नानी दुनिया में नहीं, लेकिन बंटी ने इस काम को पूरी ज़िंदगी सौंप दी है।

अगर आप भी एक पशु-प्रेमी हैं, तो इनसे ज़रूर जुड़ें

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60 की उम्र में JCB के टायर रिपेयर करती हैं नैनीताल की ‘Iron Lady’ कमला नेगी | Kamla Negi | Iron Lady

60 की उम्र में JCB के टायर रिपेयर करती हैं नैनीताल की ‘Iron Lady’ कमला नेगी | Kamla Negi | Iron Lady

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F60 साल की उम्र में जब ज्यादातर लोग आराम की जिंदगी की ओर बढ़ते हैं, नैनीताल की कमला नेगी आज भी ट्रक, डंपर, बस और JCB जैसे भारी वाहनों के टायर रिपेयर करती हैं। 26 सालों से इस काम से जुड़ी कमला नेगी ने न सिर्फ लोगों की सोच बदली, बल्कि यह भी दिखाया कि किसी काम की कोई उम्र या जेंडर नहीं होता।

@nainital_iron_lady

60 की उम्र में JCB के टायर रिपेयर करती हैं नैनीताल की ‘Iron Lady’ कमला नेगी | Kamla Negi | Iron Lady | Uttarakhand | Woman Mechanic

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Badrinath Dham DJ Video Row: जहां शंख बजाना मना, वहां कैसे बजा तेज डीजे और लाउड म्यूजिक! बद्रीनाथ धाम विवाद पर DM गौरव ने अब उठाया ये कदम

Badrinath Dham DJ Video Row: उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में हाल में सांस्कृतिक महोत्सव के दौरान हुए शोर-शराबे के साथ तेज आवाज में म्यूजिक बजाने और नाच-गाने के कार्यक्रम को लेकर भारी विरोध शुरू हो गया है। इसके बाद चमोली जिला प्रशासन ने भारतीय सेना की स्थानीय बटालियन गढ़वाल स्काउटस को एक कारण बताओ नोटिस भेजा है। बद्रीनाथ धाम में ऐसे आयोजन की अनुमति प्रदान करने को वरिष्ठ बीजेपी नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी द्वारा सांस्कृतिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताए जाने के बाद पिछले सप्ताह हुए महोत्सव को लेकर विरोध ने जोर पकड़ लिया है।

19 और 20 सितंबर को हुए कार्यक्रम में तेज आवाज में म्यूजिक और डांस के वीडियो सामने आने के बाद साधु-संतों, पुजारियों और नेताओं ने बी आपत्ति जताई। मामला इतना बढ़ा कि चमोली जिला प्रशासन ने गढ़वाल स्काउट्स के कमांडिंग ऑफिसर को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांग लिया।

कमांडिंग आफिसर को भेजा गया नोटिस

चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने गढ़वाल स्काउट के कमांडिंग आफिसर को भेजे नोटिस में कहा है कि बद्रीनाथ धाम में इस प्रकार के सामूहिक आयोजन और उसमें ऊंची आवाज में म्यूजिक का प्रयोग करना उसकी गरिमा के विपरीत है। इससे वहां प्रतिदिन होने वाले पूजा कार्यक्रमों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। साथ ही धार्मिक विद्वानों को असप्रसन्नता होती है एवं स्थानीय प्रशासन की छवि भी प्रभावित होती है।

उन्होंने इस प्रकार के आयोजन के औचित्य पर सवाल उठाते हुए पूछा, “क्या बदरीनाथ धाम में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने के संबंध में कोई अनुमति सक्षम स्तर से प्राप्त की गई थी। कार्यक्रम में तेज म्यूजिक का प्रयोग किन कारणों से किया गया?” जिलाधिकारी ने यह ताकीद भी की कि भविष्य में बदरीनाथ धाम में इस प्रकार की पुनरावृत्ति नहीं होने दी जाए।

DM गौरव कुमार ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “मैं आपको बताना चाहता हूँ कि 19 और 20 सितंबर को भारतीय सेना ने बामनी और माणा गाँवों के इलाकों में ‘वाइब्रेंट विलेज’ स्कीम के तहत सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए। सेना के अनुरोध पर जिला प्रशासन ने इस कार्यक्रम के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रचार के लिए स्टॉल लगाए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों को तय करने या उनसे जुड़े भुगतान को संभालने में जिला प्रशासन या राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं थी।”

जिलाधिकारी ने आगे कहा, “ये सभी गतिविधियाँ भारतीय सेना द्वारा की गईं। भारतीय सेना को एक नोटिस जारी कर पूछा गया है कि बद्रीनाथ धाम इलाके में बिना पूर्व अनुमति के ऐसा कार्यक्रम क्यों आयोजित किया गया। इसके अलावा, वहां भविष्य में ऐसे किसी भी कार्यक्रम पर रोक लगा दी गई है। मंदिर की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप किसी भी कार्यक्रम के लिए SDM से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।”

सेना का बयान

इस बारे में भारतीय सेना ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। सेना के एक प्रवक्ता ने इस संबंध में पूछे जाने पर न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “इस संबंध में आधिकारिक बयान आने पर उसे मीडिया के साथ साझा किया जाएगा।” पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. जोशी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बदरीनाथ में शोर-शराबे वाले म्यूजिक इवेंट के आयोजन को अनुमति दिए जाने पर सवाल उठाते हुए उसे न केवल सांस्कृतिक मर्यादाओं का उल्लंघन,बल्कि धाम की पवित्रता पर भी सीधा आघात बताया।

दिग्गज BJP नेता नाराज

डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य ने इस धाम की स्थापना हिमालयी पर्यावरण में शांतिपूर्ण तरीके से भगवत भजन के लिए की थी। नाराजगी व्यक्त करते हुए BJP नेता ने कहा, “उल्लेखनीय है कि इस स्थान पर शंख बजाना भी मना है परंतु हम उसे भूलकर शोर-शराबे वाले संगीत कार्यक्रमों का आयोजन कर भारतीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय मूल्यों की घोर उपेक्षा तो कर ही रहे है, साथ में इतनी ऊंचाई पर हजारों लोगो के नाचने से उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की भी उपेक्षा कर रहे है। यह इस बात का प्रतीक है कि अब देवभूमि को बाजारू संस्कृति के रूप में बदला जा रहा है।”

उन्होंने शंकराचार्यों तथा महात्माओं से संस्कृति के इस क्षरण को रोकने के लिए प्रभावी रूप से आवाज उठाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकारों से भी उनका आग्रह है कि वे ऐसे आयोजनों पर प्रतिबंध लगाकर देवभूमि की मर्यादा को बनाये रखें। उन्होंने कहा, “हिमालय देवात्मा है, भगवान शंकर का निवास और मां गंगा का उद्गम है, इसे नाच ग्रह बनाना करोड़ो भारतीयों की आस्था पर गहरा आघात है।”

क्या है पूरा मामला?

बद्रीनाथ धाम में 19 और 20 सितंबर को ‘देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव-2026’ का आयोजन किया गया था। इसका उद्देश्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपरा और सीमांत क्षेत्र के स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ ही महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उद्यमिता और पर्यटन को बढ़ावा देना बताया गया था। महोत्सव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी बतौर चीफ गेस्ट शामिल हुए थे ।

हालांकि, उत्तराखंड चार धाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने आरोप लगाया कि आयोजकों ने बताए गए उद्देश्यों की बजाय धाम की धार्मिक परपंराओं और मान्यताओं के विपरीत नाच गाने और शोर-शराबे वाले कार्यक्रम किए। धाम में स्थित अराइवल प्लाजा में हुए कार्यक्रमों की निंदा करते हुए महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने कहा, “हमारा विरोध सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजन को लेकर नहीं बल्कि उसके स्वरूप और प्रस्तुति को लेकर है। यहां बद्रीनाथ की धार्मिक और पौराणिक मर्यादाओं के अनुरूप कार्यक्रम होने चाहिए।”

उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ धाम में शंख की ध्वनि की भी मनाही है। वहां तेज ध्वनि और संगीत का शोर उत्पन्न करना धाम की धार्मिक गरिमा के अनुरूप नहीं है। आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम के शंकराचार्य मठ ने भी इस आयोजन को परंपरा-विरुद्ध, सांस्कृतिक फूहड़ता एवं धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन बताते हुए इस पर घोर आपत्ति जताई।

संतों ने किया कड़ा विरोध

शंकराचार्य स्वामी अवधेशानंद के शिष्य और मठ के प्रभारी स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि ने कहा कि बदरिकाश्रम वह पावन क्षेत्र है जहां ऋषियों-मुनियों ने अत्यंत शांति और संयम के नियम तय किये है। उन्होंने कहा, “इस क्षेत्र में शंख बजाना तक वर्जित है, ताकि तपस्यारत भगवान नर-नारायण एवं साधकों की एकाग्रता में कोई विघ्न न पड़े । लेकिन इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से यहां का धार्मिक वातावरण बिगाड़ा जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि जहां ब्रह्मकमल जैसे अति संवेदनशील पुष्प को भी विशेष नियमों, पवित्रता और श्रद्धा के साथ प्रभु चरणों में अर्पित किया जाता है, वहां संगीत की तेज ध्वनि में नाच-गाने और फूहड़ता का सांस्कृतिक प्रदूषण कहां तक उचित है? स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि ने मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह करते हुए परंपराओं के उल्लंघन, मर्यादाहीन कृत्यों और फूहड़ आयोजनों के जिम्मेदार आयोजकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।

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विवाद के बीच, उत्तराखंड DIPR की तरफ से X पर एक पोस्ट में बड़ा ऐलान किया गया है। DIPR ने कहा, “श्री बद्रीनाथ धाम सहित जनपद चमोली के सभी धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों की गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से जिलाधिकारी श्री गौरव कुमार द्वारा धार्मिक स्थलों के आस-पास उच्च आवृत्ति (हाई फ्रीक्वेंसी) वाले साउंड सिस्टम का प्रयोग कर धार्मिक स्थलों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले कार्यक्रमों को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया गया है।”

14 साल तक पहनी एयरफोर्स की वर्दी, अब देहरादून में चलाती है बुटिक! वजह सुन आप भी करेंगे सलाम

14 साल तक भारतीय वायु सेना में नौकरी करने के बाद एक पूर्व महिला अधिकारी ने अपनी रोज की जिंदगी को बदलने का फैसला किया। उन्होंने नौकरी छोड़ी और देहरादून वापस आकर कपड़ों की दुकान शुरू कर ली। उनका यह कदम किसी बड़े सपने को पूरा करने के लिए नहीं था, बल्कि एक खास वजह से लिया गया भावनात्मक फैसला था।

आखिर क्या है इस फैसले की वजह?

इस महिला का इंस्टाग्राम पर @thefaujifounder नाम से एक अकाउंट है, जहां उन्होंने एक वीडियो में अपनी कहानी बताई। उन्होंने कहा कि उनकी दुकान पर आने वाले लोग उनसे पूछते हैं कि आखिर वायु सेना की अधिकारी से वह कपड़ों की दुकान चलाने वाली कैसे बन गईं। उन्होंने बताया कि उन्होंने शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी के तौर पर 14 साल तक सेवा की, लेकिन नौकरी छोड़ने के बाद उन्हें लगा कि अब परिवार के साथ रहना ज्यादा जरूरी है। उनके बच्चे बड़े हो रहे थे और माता-पिता भी बुजुर्ग हो रहे थे।

इसके बाद वह देहरादून लौट आईं। उनका घर उनकी दुकान से सिर्फ 100 मीटर दूर है। उन्हें कपड़ों और क्रिएटिव काम में इंटरेस्ट थी, इसलिए उन्होंने सोचा कि क्यों न ऐसा काम किया जाए, जिससे परिवार के पास रहने को भी मिल सके। इसी सोच के साथ उन्होंने कपड़ों की दुकान शुरू कर दी।

सोशल मीडिया पर पसंद आई उनकी यह कहानी

वह कहती है कि उनका यह फैसला किसी बड़े मुकाम तक पहुंचने के लिए नहीं था। वह बस अपने बच्चों के साथ रहकर जिंदगी को मजे से जीना चाहती थीं। उनकी कहानी सोशल मीडिया पर भी लोगों को पसंद आई। कई लोगों ने कहा – परिवार के साथ समय बिताना बहुत कीमती और यादगार पल होता है।

ये कहानी इसलिए लोगों के दिल को छू रही है क्योंकि इसमें कोई मोटिवेशनल ज्ञान नहीं है। एक मां का सिंपल फैसला है – करियर से ज्यादा जरूरी है परिवार के साथ रहना।

सोशल मीडिया पर लोग कमेंट कर रहे हैं – आपने वर्दी उतारी है, जज्बा नहीं।

महिलाओं के सम्मान में उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, पुरस्कारों की राशि बढ़ाई गई

महिलाओं के सम्मान में उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, पुरस्कारों की राशि बढ़ाई गई

Uttarakhand Government award: उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राज्य में महिला शक्ति के समर्पण, संघर्ष और उत्कृष्ट योगदान का सम्मान करने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने प्रतिष्ठित 'वीरांगना तीलू रौतेली पुरस्कार' और 'आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार' की सम्मान राशि में बढ़ोतरी करने की घोषणा की है। इस फैसले से प्रदेश भर की महिलाओं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है।

 

सरकार द्वारा जारी नए आदेशों के अनुसार, 'वीरांगना तीलू रौतेली पुरस्कार' की मानदेय राशि को ₹51,000 से बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, 'आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार' की राशि को भी ₹51,000 से बढ़ाकर ₹61,000 करने का निर्णय लिया गया है।

महिला शक्ति के समर्पण और संघर्ष को नमन

यह फैसला राज्य की उन साहसी, कर्मठ और प्रतिभावान महिलाओं को सम्मानित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिन्होंने समाज में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य किया है। पुरस्कार राशि में वृद्धि का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के अथक प्रयासों को पहचान देना तथा उन्हें भविष्य में और बेहतर कार्य करने के लिए निरंतर प्रोत्साहित और प्रेरित करना है।

 

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताएं स्वास्थ्य, पोषण और बाल विकास के क्षेत्र में सबसे निचले स्तर पर जाकर अपनी सेवाएं देती हैं। ऐसे में सम्मान राशि में वृद्धि से उनके मनोबल में अभूतपूर्व बढ़ोतरी होगी और वे अधिक निष्ठा से अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगी।

तीलू रौतेली कौन थीं?

वीरांगना तीलू रौतेली (तिलोत्तमा देवी रौतेला) उत्तराखंड (गढ़वाल) की एक ऐतिहासिक और अदम्य साहसी महिला योद्धा थीं, जिन्हें 'गढ़वाल की झांसी की रानी' भी कहा जाता है। उन्होंने कम उम्र में ही अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए युद्ध लड़े थे। उत्तराखंड सरकार हर साल समाज सेवा, खेल, शिक्षा, साहसिक कार्य और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिलाओं और बालिकाओं को 'तीलू रौतेली पुरस्कार' से सम्मानित करती है।

चमोली में हाइड्रो प्रोजेक्ट पर बड़ा हादसा, सुरंग में गले तक भरा पानी और गाद, 7 मजदूरों की मौत, 6 लापता

Chamoli Tunnel Accident: उत्तराखंड के चमोली जिले में एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट साइट पर बन रही सुरंग में पानी और मलबा घुसने से सात मजदूरों की मौत हो गई और 11 अन्य घायल हो गए। अधिकारियों के अनुसार, अभी 6 लापता मजदूरों की तलाश जारी है।

शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, पिपलकोटी इलाके में टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (THDC) प्रोजेक्ट की सुरंग के अंदर कुल 22 मजदूर फंस गए थे। बाद में सभी 22 लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें से सात की मौत की पुष्टि हुई है और 11 घायल हैं। फिलहाल, घायल मजदूरों का इलाज पास के अस्पताल में चल रहा है।

वहीं, अधिकारियों ने बताया कि प्रोजेक्ट का निर्माण हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (HCC) कर रही है।

रेस्क्यू टीमों ने ऑपरेशन तेज किया

घटना के बाद पुलिस, स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF), सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) और दूसरी एजेंसियां ​​मौके पर पहुंचीं। ऑपरेशन में मदद के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस और सेना की टीमों को भी तैनात किया गया।

NDRF इंस्पेक्टर अमृत लाल मीणा ने बताया कि सुरंग में पानी काफी ज्यादा भरा हुआ था और पानी का स्तर छाती तक पहुंच गया था। बचाव दल के सदस्य सुरंग के अंदर गए और उन शवों को बाहर निकाला जो पानी में डूबे हुए थे और ऊपर से दिखाई नहीं दे रहे थे।

मीणा ने मीडिया को बताया, “हम पानी के बीच से गुजरे और टीम के कुछ सदस्यों के पास पानी के अंदर ऑपरेशन करने के लिए खास उपकरण थे। चारों शव पानी में डूबे हुए थे और ऊपर से दिखाई नहीं दे रहे थे, इसलिए हम अंदर गए और घटना स्थल से चारों शवों को बाहर निकाला।”

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हादसे पर चिंता जताई। उन्होंने संबंधित एजेंसियों को राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर तेज करने के निर्देश दिए।

आपदा प्रबंधन और पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटरों से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें तैनात की जाएंगी।

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Video: कीचड़ और घुटनों तक पानी में भी नहीं थमी हाथी की रफ्तार, टॉर्च दिखाकर भगाने की कोशिश पर लोगों की ओर दौड़ा गजराज

सोशल मीडिया पर जंगली हाथी का एक हैरान कर देने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें वह कीचड़ से भरे धान के खेत में लोगों के बीच अचानक आक्रामक होता नजर आ रहा है। घुटनों तक पानी और दलदल के बावजूद हाथी जिस तेजी से आगे बढ़ता है, उसे देखकर मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच जाती है। वीडियो में कुछ लोग हाथी को खेत से दूर भगाने के लिए टॉर्च की रोशनी का इस्तेमाल करते दिखाई देते हैं। शुरुआत में हाथी उनके बीच से आगे बढ़ता नजर आता है, लेकिन कुछ ही देर में वह अचानक लोगों की तरफ दौड़ पड़ता है।

हाथी को अपनी ओर आता देख वहां मौजूद लोग इधर-उधर भागने लगते हैं। इस दौरान कुछ लोग गिरते हुए भी नजर आते हैं। वीडियो ने जंगली हाथियों के बेहद शक्तिशाली और तेज होने के साथ-साथ उनके करीब जाने या उन्हें डराने के खतरे को लेकर एक बार फिर चर्चा छेड़ दी है।

टॉर्च की रोशनी दिखाते ही दौड़ा हाथी

वीडियो में हाथी पानी और कीचड़ से भरे खेत में बेहद तेजी से आगे बढ़ता दिखता है। मुश्किल जमीन के बावजूद उसकी रफ्तार देखकर लोग भी हैरान रह गए। कुछ लोग लगातार टॉर्च लहराकर हाथी को डराने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान हाथी अचानक लोगों की तरफ तेजी से बढ़ा। हाथी को अपनी ओर आता देखकर वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और वे जान बचाकर भागने लगे। इस भगदड़ में कुछ लोग जमीन पर गिरते हुए भी दिखाई दिए।

उत्तराखंड के अधिकारी ने बताया हाथी की रफ्तार का राज

यह वीडियो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के विशेष सचिव डॉ. पीएम धकाते ने X पर साझा किया। उन्होंने लोगों को आगाह करते हुए बताया कि हाथी को धीमा समझना बेहद खतरनाक हो सकता है, खासकर कीचड़ भरे इलाके में।

उन्होंने समझाया कि हाथियों के चौड़े पंजे उनका वजन बड़े क्षेत्र में बांट देते हैं। इसी वजह से वे ऐसे दलदली और कीचड़ वाले इलाकों में भी उम्मीद से कहीं अधिक तेजी से आगे बढ़ सकते हैं।

हाथी को डराने की कोशिश पड़ सकती है भारी

डॉ. धकाते ने चेतावनी दी कि हाथी को डराने या घेरने की कोशिश स्थिति को और खतरनाक बना सकती है। अगर हाथी खुद को खतरे में या चारों तरफ से घिरा हुआ महसूस करता है, तो वह पीछे हटने के बजाय हमला कर सकता है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि जंगल में हाथी दिखाई देने पर उससे पर्याप्त दूरी बनाए रखें और उसे डराने के लिए चिल्लाने, टॉर्च लहराने या पटाखे चलाने जैसी हरकतों से बचें।

‘हाथी को निकलने का रास्ता दें’

अधिकारी ने लोगों को खास तौर पर हाथी का रास्ता रोकने या उसे चारों ओर से घेरने से बचने की सलाह दी। उनके मुताबिक, जंगली हाथी को हमेशा पीछे हटने और सुरक्षित दिशा में जाने के लिए खुला रास्ता मिलना चाहिए। वीडियो को श्याम उरांव और संतोष लकड़ा के नाम से क्रेडिट किया गया है। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि जंगली हाथियों को करीब से भगाने या डराने की कोशिश कितनी जोखिम भरी हो सकती है। ऐसे मामलों में दूरी बनाए रखना और हाथी को शांतिपूर्वक निकलने देना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।

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‘नदी का रौद्र रूप…तेज बहाव में बह गया पुल’, चमोली का खौफनाक वीडियो वायरल

उत्तराखंड के चमोली जिले में भारत-चीन सीमा के पास लता गांव के नजदीक बादल फटने के बाद हालात बिगड़ गए। इस घटना का एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) का एक पुल तेज बहाव वाले बाढ़ के पानी में बहता नजर आ रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि नदी का पानी अचानक तेज हो गया। पानी का बहाव पुल के चारों तरफ तेजी से बढ़ता दिखाई देता है। कुछ ही देर में पानी की तेज लहरें पुल के ढांचे से टकराने लगती हैं।

पानी का दबाव इतना ज्यादा था कि पुल ज्यादा देर तक टिक नहीं सका। तेज बहाव ने देखते ही देखते पुल को अपनी चपेट में ले लिया और कुछ ही पलों में पूरा पुल पानी के साथ बह गया। वीडियो में बादल फटने के बाद अचानक बढ़े पानी की ताकत और उससे हुई तबाही साफ नजर आती है। सीमावर्ती इलाके में हुई इस घटना से वहां हुए नुकसान की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। फिलहाल इस घटना में किसी के घायल होने की तत्काल सूचना नहीं मिली है।

खबर अपडेट हो रही है….

अस्पताल पहुँचने में लगते थे घंटे, तो बना दी उड़ने वाली कार | Ravi Tamta | Flying Car | Uttarakhand

क्या हो अगर पहाड़ों के ऊपर से उड़कर जाया जा सके, वो भी बिना एयरपोर्ट के?

इसी सोच से उत्तराखंड के अल्मोड़ा के रवि तम्टा ने 13 साल तक लगातार प्रयोग किए और एक इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल का प्रोटोटाइप तैयार किया।

रवि के पास न इंजीनियरिंग की डिग्री थी न कोई बड़ी लैब थी, बस एक समस्या को हल करने की जिद थी।

उनका सपना है कि पहाड़ी इलाकों में, खासकर मेडिकल इमरजेंसी के दौरान, लोगों तक जल्दी पहुँचा जा सके।

फ्लाइंग व्हीकल अभी प्रोटोटाइप स्टेज में है और इसे कई और टेस्ट से गुजरना बाकी है।

लेकिन रवि की कहानी बताती है –
बड़े आविष्कार हमेशा बड़ी लैब में नहीं जन्म लेते। कभी-कभी एक मुश्किल सवाल ही उनकी शुरुआत होता है।

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