अमेरिकी सैनिकों को पटाया की इस ‘बदनाम स्ट्रीट’ में एंट्री पर बैन! जानिए थाइलैंड में आखिर क्या कर रहे हैं जवान?

US Navy Sailors in Pattaya: समुद्र के बीच लगातार 286 दिनों की थका देने वाली तैनाती, जंग के तनाव वाले हालात और फिर अचानक थाइलैंड का सबसे मशहूर पार्टी डेस्टिनेशन ‘पटाया’। अमरीकी नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन के हजारों जवानों के लिए यह सफर किसी सपने जैसा साबित हो रहा है।

लगातार महीनों तक समुद्र में रहने और ईरान युद्ध से जुड़े ऑपरेशन्स के बाद जब अमेरिकी सैनिक सूखी जमीन पर उतरे, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। आइए जानते हैं कि पटाया के रंगीन माहौल में ये अमेरिकी जवान आखिर क्या-क्या कर रहे हैं।

286 दिनों बाद जमीन पर पेडीक्योर और रिलैक्सेशन

थकाऊ तैनाती का असर मिटाने के लिए अमेरिकी नौसेना के पुरुष और महिला सैनिक सबसे पहले पटाया के सैलून में नजर आए। ‘कलर नेल सैलून’ में नौसेना के जवान अपनी थकान दूर करने के लिए पेडीक्योर करवाते दिखे। गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, सैलून वर्कर अरिसा सुएक्कान्या ने बताया कि अमेरिकी सेना द्वारा इतने लंबे समय बाद थाइलैंड को पहली पोर्ट-ऑफ-कॉल चुनना उनके लिए बेहद उत्साहजनक है।

नौसैनिकों ने माना कि जहाज पर कच्चा खाना खाने और कठिन हालातों में रहने के बाद जमीन पर पैर रखते ही कंधे से भारी बोझ उतर गया।

खाने पर टूटे जवान: ‘थाई फूड और बर्गर से दोस्ती’

जहाज पर मिलने वाली अधपकी बीफ और कच्चे आलू की शिकायतों के बाद, थाइलैंड पहुंचते ही जवानों ने सबसे पहले भरपेट खाना खाया। एक सैनिक ने बर्गर किंग में दो बड़े बर्गर ऑर्डर किए, जबकि दूसरे जवान ने मुस्कुराते हुए कहा कि ‘अब से मेरी और थाई फूड की पक्की दोस्ती हो चुकी है’। जवान न सिर्फ लोकल फूड एन्जॉय कर रहे हैं, बल्कि दर्जी की दुकानों पर कस्टम-मेड सूट सिलवाने के ऑर्डर दे रहे हैं।

रेड लाइट एरिया और ‘वॉक-इन स्ट्रीट’ का जलवा

पटाया अपनी नाइटलाइफ और रेड लाइट एरिया के लिए दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन अमेरिकी कमांडरों ने जवानों के लिए कुछ सख्त नियम भी तय किए हैं।नौसैनिकों को पटाया की बदनाम बीयर बार वाली सड़क ‘सोई 6’ पर रात ढलने के बाद जाने से मना किया गया है।

हालांकि, मशहूर ‘वॉकिंग स्ट्रीट’ जवानों के लिए खुली है। वहां के पब और बार्स ने अमेरिका का स्वागत करते हुए विशाल नियॉन बोर्ड लगाए हैं और ‘सैनिक आईडी कार्ड’ दिखाने पर 10% तक का डिस्काउंट दिया जा रहा है।

मोजे, खिलौने और ब्रांडेड कपड़े खरीद रहे जवान

हजारों डॉलर जेब में होने के बावजूद कई जवान बहुत ही साधारण चीजें खरीदते दिखे। एक सैनिक मॉल में नाइकी और Vans के स्टोर से नए मोजे खरीद रहा था, तो दूसरा अपनी पत्नी के लिए H&M से ‘हैलो किटी’ का सॉफ्ट टॉय खरीदता नजर आया।

पटाया के मेयर पोरमेट नगाम्पिचेट के अनुसार, अगर 5,000 अमेरिकी सैनिक रोजाना 100 से 150 डॉलर खर्च करते हैं, तो इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को करीब 10 करोड़ थाई बात (लगभग 3 मिलियन डॉलर) का फायदा होगा।

क्या होती है टेस्टोस्टेरोन जांच? अमेरिका में सैनिकों के लिए इसे क्यों किया गया अनिवार्य

क्या होती है टेस्टोस्टेरोन जांच? अमेरिका में सैनिकों के लिए इसे क्यों किया गया अनिवार्य

US Army Testosterone Test

Testosterone screening in US: अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने 30 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी सक्रिय और रिजर्व सैन्य कर्मियों के लिए टेस्टोस्टेरोन की कमी की अनिवार्य जांच से संबंधित नए और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की घोषणा के बाद तत्काल प्रभाव से लागू किए गए इस नियम का उद्देश्य सैनिकों की शारीरिक क्षमता, ऊर्जा और सैन्य तैयारी को बेहतर बनाना है।

 

पेंटागन के अनुसार, इन नए मानकों का मुख्य उद्देश्य पुरुषों और महिलाओं दोनों में हार्मोनल असंतुलन और ऊर्जा की कमी से जुड़ी समस्याओं की पहचान कर उनका समय पर उपचार करना है, जिससे अमेरिकी सेना की समग्र युद्ध तत्परता को मजबूती मिल सके। ALSO READ: होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का लगभग पूरा कंट्रोल? ट्रंप के दावे से मचा हड़कंप ; तेल के दाम चढ़े

पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग नियम

पेंटागन के दिशा-निर्देशों के अनुसार 30 वर्ष या उससे अधिक के पुरुषों के लिए रक्त में टेस्टोस्टेरोन स्तर की नियमित और अनिवार्य जांच की जाएगी। रायटर की रिपोर्ट के अनुसार, 30 वर्ष से कम आयु के पुरुष युवा सैनिकों की जांच केवल उनकी व्यक्तिगत मांग पर या डॉक्टर द्वारा किसी चेतावनी संकेत की पहचान करने पर ही होगी। ALSO READ: अमेरिका के हाथ लगा दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार! ट्रंप ने वेनेजुएला के साथ किया ऐतिहासिक समझौता

 

वहीं महिला सैनिकों के लिए नियमित ब्लड टेस्ट अनिवार्य नहीं किया गया है। हालांकि, उनमें अत्यधिक थकान और अनियमित मासिक धर्म चक्र की जांच की जाएगी। यह लक्षण हार्मोनल गड़बड़ी और 'रिलेटिव एनर्जी डेफिशिएंसी इन स्पोर्ट्स' (RED-S) से जुड़े हो सकते हैं।

 

इसके अलावा, दस्तावेज़ में मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के बाद की उन महिला सैनिकों के लिए भी ऑफ-लेबल टेस्टोस्टेरोन देने के स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं, जो कामेच्छा में अत्यधिक कमी का सामना कर रही हैं।

विशेषज्ञों की चिंता और एफडीए की बैठक

रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ लंबे समय से टेस्टोस्टेरोन के उपयोग का समर्थन करते रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस व्यापक जांच नीति के वैज्ञानिक आधार पर सवाल उठाए हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बड़े पैमाने पर होने वाली अनिवार्य जांच से अनावश्यक या संभावित रूप से हानिकारक उपचार की स्थिति पैदा हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बात के पुख्ता प्रमाण नहीं हैं कि सभी सैन्य कर्मियों की टेस्टोस्टेरोन जांच करने से देश की युद्ध क्षमता में कोई बड़ा सुधार होगा।

 

इस विषय पर बढ़ती चर्चाओं के बीच, अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (US FDA) ने सितंबर के मध्य में विशेषज्ञों की एक बैठक बुलाई है, जिसमें टेस्टोस्टेरोन के चिकित्सा उपयोग और इसके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

क्या होती है टेस्टोस्टेरोन जांच?  

टेस्टोस्टेरोन जांच (Testosterone Test) एक सामान्य ब्लड टेस्ट है, जिससे आपके खून में मौजूद टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की मात्रा का पता लगाया जाता है। टेस्टोस्टेरोन को मुख्य रूप से पुरुष सेक्स हार्मोन कहा जाता है, जो पुरुषों के अंडकोष में बनता है, लेकिन यह महिलाओं के अंडाशय (Ovaries) और दोनों के एड्रिनल ग्लैंड में भी कम मात्रा में बनता है। यह हार्मोन मांसपेशियों की ताकत, हड्डियों का घनत्व, दाढ़ी-मूंछ के बाल, शुक्राणु के निर्माण और सेक्स ड्राइव को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। यह रक्त में मौजूद सभी प्रकार के टेस्टोस्टेरोन (प्रोटीन से बंधे और फ्री दोनों) की कुल मात्रा को मापता है।

एक ट्रेन, कई खूबसूरत मंजिलें! वंदे भारत से बनाएं परफेक्ट वीकेंड प्लान

वीकेंड पर आप दिल्ली की भागदौड़ से थोड़ा ब्रेक लेना चाहते हैं, तो इसके लिए बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं है। वंदे भारत एक्सप्रेस से सफर करके कम समय में एक अच्छी छोटी ट्रिप का मजा लिया जा सकता है। ट्रेन का आरामदायक सफर आपका समय भी बचाता है और सफर की थकान भी कम करता है।

कम दिनों की छुट्टी में ऐसी जगह चुनना सही रहता है, जहां घूमने के लिए ज्यादा समय मिले और सफर में पूरा दिन न निकल जाए। वीकेंड ट्रिप के लिए ट्रेन से ट्रिप करना इसलिए भी अच्छा ऑप्शन है, क्योंकि आप आराम से सफर करते हुए अपने परिवार या दोस्तों के साथ क्वालिटी टाइम बिता सकते हैं।

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1. चंडीगढ़, पंजाब-हरियाणा

वीकेंड में कम समय में घूमने के लिए चंडीगढ़ एक अच्छा ऑप्शन है। दिल्ली से चंडीगढ़ की वीकेंड ट्रिप के लिए 22447 वंदे भारत एक्सप्रेस सुविधाजनक ऑप्शन है। ट्रेन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS) से सुबह 5:50 बजे चलकर करीब 2 घंटे 48 मिनट में चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन (CDG) सुबह 8:38 बजे पहुंचती है। AC Chair Car का किराया करीब ₹855 और Executive Chair Car का करीब ₹1,585 है। एक दिन की ट्रिप में सुबह रॉक गार्डन और रोज गार्डन घूमने के बाद सुखना झील घूम सकते हैं। शाम को झील के आसपास समय बिताने के बाद सेक्टर-17 मार्केट में शॉपिंग और लोकल फूड का आनंद लिया जा सकता है। अगर 2 दिन का समय है, तो दूसरे दिन कैपिटल कॉम्प्लेक्स और शहर के आसपास की जगहें देख सकते हैं।

 

2. देहरादून, उत्तराखंड

पहाड़ों और हरियाली के बीच छोटा-सा ब्रेक लेना चाहते हैं तो देहरादून का प्लान बनाया जा सकता है। देहरादून जाने के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस 22457 दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल (ANVT) से शाम 5:50 बजे चलती है और करीब 4 घंटे 45 मिनट में रात 10:35 बजे देहरादून (DDN) पहुंचती है। AC Chair Car का किराया करीब ₹1,075 और Executive Chair Car का करीब ₹1,900 है। शहर में एक दिन हो तो रॉबर्स केव, सहस्त्रधारा और फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट आसानी से घूमे जा सकते हैं। शाम को किसी लोकल कैफे में बैठकर देहरादून का माहौल एंजॉय करें। दो दिन मिल रहे हों तो अगले दिन मसूरी की ओर निकलना बेहतर रहेगा।

 

3. अजमेर, राजस्थान

अगर वीकेंड पर धार्मिक स्थलों के साथ राजस्थान की संस्कृति देखना चाहते हैं, तो अजमेर को चुन सकते हैं। दिल्ली से अजमेर जाने के लिए वंदे भारत का रूट जयपुर होते हुए अजमेर तक जाता है। इस यात्रा में करीब 5 घंटे 15 मिनट लगते हैं और AC Chair Car का किराया लगभग ₹1,150 से शुरू होने की जानकारी अवेलेबल है। स्टेशन पहुंचने के बाद अजमेर शरीफ दरगाह से घूमने की शुरुआत करें और फिर अढ़ाई दिन का झोपड़ा देखा जा सकता है। दिन के दूसरे हिस्से में आना सागर झील के आसपास वक्त बिताएं और शाम को स्थानीय बाजार में राजस्थानी मिठाइयों और खाने का स्वाद लें। दो दिन का प्लान है तो अगले दिन अजमेर से पुष्कर जाकर पुष्कर झील और ब्रह्मा मंदिर घूम सकते हैं।

 

4. वाराणसी, उत्तर प्रदेश

वाराणसी की यात्रा बाकी जगहों से थोड़ी लंबी है, लेकिन धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव के लिए यह खास डेस्टिनेशन है। वाराणसी के लिए 22436 वंदे भारत एक्सप्रेस नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS) से सुबह 6:00 बजे चलती है और करीब 8 घंटे में दोपहर 2:00 बजे वाराणसी जंक्शन (BSB) पहुंचती है। AC Chair Car का किराया करीब ₹1,835 और Executive Chair Car का करीब ₹3,385 है। यहां एक दिन का समय हो तो काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा घाट को प्राथमिकता दें। शाम होते ही दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती देखना न भूलें। पुरानी गलियों में घूमकर बनारसी खान-पान का स्वाद भी लिया जा सकता है।

 

5. जयपुर, राजस्थान

शाही महलों, किलों और बाजारों से भरी जयपुर की यात्रा दिल्ली से वीकेंड पर आसानी से की जा सकती है। जयपुर के लिए दिल्ली से वंदे भारत की ट्रिप करीब 3 घंटे 37 मिनट से 3 घंटे 50 मिनट में पूरी हो सकती है। मौजूदा शेड्यूल में एक वंदे भारत दिल्ली कैंट (DEC) से दोपहर 3:10 बजे चलकर शाम 7:00 बजे जयपुर जंक्शन (JP) पहुंचती है। AC Chair Car का किराया करीब ₹835 और Executive Chair Car का करीब ₹1,610 है। दूसरी वंदे भारत दिल्ली कैंट से शाम 6:28 बजे चलकर रात 10:05 बजे जयपुर पहुंचती है। एक दिन में आमेर किला, सिटी पैलेस, हवा महल और जंतर-मंतर को कवर किया जा सकता है। घूमने के बाद शाम का समय जौहरी बाजार या बापू बाजार में शॉपिंग के लिए रखें और दाल बाटी चूरमा, प्याज कचौरी जैसे स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लें।

ट्रम्प ने अमेरिकी नौसेना मजबूत करने के लिए वॉरफाइटर चुना:हंग काओ को दी जिम्मेदारी, पिता के साथ वियतनाम से भागकर अमेरिका आए थे

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने हंग काओ को नेवी सेक्रेटरी बनाने का फैसला किया है। उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘सच्चे वॉरियर’ हैं। वह अमेरिकी नौसेना और मरीन कॉर्प्स को दुनिया की सबसे मजबूत सेना बनाए रखने के लिए सही व्यक्ति हैं। काओ को सैन्य अनुभव वाला अधिकारी माना जाता है। वह 31 साल तक अमेरिकी नौसेना में रहे हैं और इराक, अफगानिस्तान और सोमालिया जैसे इलाकों में मिशन का हिस्सा रहे हैं। काओ का जन्म 1971 में दक्षिण वियतनाम के साइगॉन में हुआ था। जब वे 4 साल के थे तब दक्षिण वियतनाम में अमेरिका समर्थक सरकार गिर गई थी। उस पर उत्तर वियतनाम की कम्युनिष्ट सरकार ने कब्जा कर लिया था। इसके बाद काओ का परिवार भागकर अमेरिका पहुंचा था। नौसेना से रिटायर होने के बाद राजनीति में उतरे, दो बार हार मिली काओ ने 1989 में अमेरिकी नौसेना में अपना करियर शुरू किया। उनका काम समुद्र के अंदर खतरनाक मिशन करना और बम या दूसरे विस्फोटकों से जुड़े खतरों से निपटना था। उन्होंने इराक, अफगानिस्तान और सोमालिया में कई सैन्य मिशनों में काम किया। अंडरवॉटर मिशनों की कमान संभाली और स्पेशल ऑपरेशंस से जुड़े काम भी किए। करीब तीन दशक के सैन्य करियर के बाद वह 2021 में कैप्टन के पद से रिटायर हुए। नौसेना से रिटायर होने के बाद काओ ने राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 2022 में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और 2024 में सीनेट के लिए वर्जीनिया से चुनाव लड़ा। हालांकि, दोनों चुनावों में उन्हें हार मिली। अक्टूबर 2025 में काओ को अमेरिकी नौसेना का अंडरसेक्रेटरी नियुक्त किया गया। यह नौसना में दूसरा सबसे बड़ा पद था। अप्रैल 2026 में ट्रम्प ने तत्कालीन नेवी सेक्रेटरी जॉन फेलन को पद से हटा दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक फेलन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बीच नहीं बन रही थी। इसके बाद काओ को कार्यवाहक सेक्रेटरी की जिम्मेदारी दी गई थी। तब से काओ अमेरिकी नौसेना की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब ट्रम्प उन्हें इसी पद पर स्थायी रूप से नियुक्त करना चाहते हैं। हंग काओ स्थायी नेवी सेक्रेटरी कैसे बनेंगे? काओ की नियुक्ति अभी पक्की नहीं हुई है। दरअसल, राष्ट्रपति का काम नेवी सेक्रेटरी के पद के लिए नामित करना है। अंतिम मंजूरी अमेरिकी सीनेट देती है। 1. नामांकन सीनेट के पास जाएगा
ट्रम्प का आधिकारिक नामांकन सीनेट को भेजा जाएगा। इसके बाद काओ के रिकॉर्ड और उनकी योग्यता की जांच की जाएगी। 2. सीनेट की सुनवाई होगी
काओ को सीनेट की समिति के सामने पेश होना पड़ सकता है। वहां उनसे उनकी सोच, नौसेना की नीतियों, जहाज निर्माण, सैन्य तैयारियों और दूसरे मुद्दों पर सवाल पूछे जा सकते हैं। 3. समिति फैसला करेगी
सुनवाई और जांच के बाद समिति उनके नामांकन को आगे बढ़ा सकती है। इसके बाद मामला पूरी सीनेट के सामने जाएगा। 4. वोटिंग होगी
सीनेटर काओ के नाम पर वोट करेंगे। सीनेट में 100 सदस्य होते हैं, अगर उन्हें 51 वोट मिले तो उन्हें यह जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। ईरान युद्ध के बीच काओ के लिए नौसेना संभालना आसान नहीं काओ ऐसे समय में नौसेना की स्थायी जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं, जब अमेरिकी सेना का ईरान के खिलाफ अभियान चल रहा है। इस दौरान अमेरिकी नौसेना की तैनाती और उस पर काम का दबाव बढ़ा है। अमेरिकी विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन नौ महीने से ज्यादा समय तक समुद्र में तैनात रहा। इस दौरान उसका एक बड़ा हिस्सा ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के समर्थन में बीता। इतनी लंबी तैनाती के कारण जहाज पर मौजूद सैनिकों की थकान, मानसिक सेहत और जरूरी सामान की कमी को लेकर सवाल उठे। अमेरिकी सांसदों ने भी पेंटागन से इन हालात पर जवाब मांगा। अगस्त में काओ ने अब्राहम लिंकन की लंबी तैनाती का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि मिशन की जरूरत के कारण जहाज की तैनाती बढ़ाई गई और सैनिकों की सुरक्षा सबसे अहम है। काओ के सामने नौसेना का बेड़ा बढ़ाने, नए युद्धपोत तैयार करने और सैनिकों पर लंबी तैनाती का दबाव कम करने की चुनौती होगी। चीन भी अमेरिकी नौसेना के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

घुटनों को दें रोजाना थोड़ी केयर, दर्द और जकड़न में काम आएंगी ये 7 आदतें

घुटनों में दर्द आजकल काफी आम समस्या हो गई है। घुटना हमारे शरीर का एक बहुत जरूरी जोड़ है, जो खड़े होने, चलने, सीढ़ियां चढ़ने और बैठने जैसे रोज के कामों में हमारा साथ देता है। ऐसे में जब घुटने में दर्द, जकड़न या सूजन होने लगे तो छोटे-छोटे काम भी मुश्किल लग सकते हैं। घुटने का दर्द सिर्फ बढ़ती उम्र की वजह से ही नहीं होता, बल्कि चोट, ज्यादा वजन, लंबे समय तक बैठे रहने या घुटने पर ज्यादा प्रेशर पड़ने की वजह से भी परेशानी हो सकती है।

यदि घुटनों में हल्का दर्द है या मामूली खिंचाव की वजह से परेशानी हो रही है, तो रोज की कुछ आसान आदतों से राहत पाने में मदद मिल सकती है। लेकिन दर्द लगातार बना रहे, बढ़ता जाए या घुटने में ज्यादा सूजन और चलने में परेशानी हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। वहीं सामान्य और हल्के दर्द में कुछ आसान घरेलू उपाय आपकी परेशानी को कम करने और घुटनों को आराम देने में मदद कर सकते हैं।

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1. अदरक वाली चाय का सेवन 

अदरक में जिंजरोल जैसे नेचुरल कंपोनेंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर में सूजन से जुड़े प्रोसेस पर असर डाल सकते हैं। इसलिए कुछ लोगों को अदरक की चाय से हल्की परेशानी में आराम महसूस हो सकता है, लेकिन इसे घुटने के दर्द का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। एक इंच अदरक के टुकड़ों को एक कप पानी में करीब 5 मिनट उबालकर छान लें। स्वाद के लिए नींबू या थोड़ा शहद मिला सकते हैं।

2. अचानक दर्द हो तो RICE तरीका अपनाएं

दर्द अचानक पैर मुड़ने, गिरने या चोट लगने के बाद शुरू हुआ है, तो शुरुआती समय में RICE तरीका अपनाया जा सकता है। इसमें Rest यानी आराम, Ice यानी बर्फ, Compression यानी हल्का दबाव और Elevation यानी पैर को ऊंचा रखना शामिल है। दर्द बढ़ाने वाली एक्टिविटी रोकें और बर्फ को कपड़े में लपेटकर 15 से 20 मिनट तक लगाएं। जरूरत पड़ने पर हल्का क्रेप बैंडेज लगाएं और आराम करते समय पैर को तकिए पर थोड़ा ऊंचा रखें।

3. नी-कैप के साथ सही जूते-चप्पल पहनें

कुछ लोगों को घुटने का सपोर्ट यानी नी-कैप पहनने से चलने-फिरने में सहारा मिल सकता है, लेकिन यह हर किसी के लिए जरूरी नहीं है। यदि इस्तेमाल करें तो सही साइज का नी-कैप ही पहनें। साथ ही ऐसे जूते-चप्पल चुनें जिनमें पैर को अच्छा सपोर्ट मिले और चलने में आराम रहे।

4. एप्सम सॉल्ट वाले गर्म पानी में पैर रखें

एप्सम सॉल्ट को गर्म पानी में डालकर पैर रखने से कुछ लोगों को जकड़न और थकान में आराम महसूस हो सकता है, हालांकि इसके असर के पक्के सबूत नहीं हैं। एक बाल्टी गर्म पानी में करीब दो कप एप्सम सॉल्ट डालकर पैरों को 15 से 20 मिनट तक रखा जा सकता है। पानी बहुत ज्यादा गर्म न हो और बाद में पैरों को अच्छी तरह सुखा लें।

5. स्ट्रेचिंग करें और हल्की एक्सरसाइज रूटीन में शामिल करें

घुटनों में दर्द होने पर पूरी तरह आराम करने के बजाय हल्की एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग करना मददगार हो सकता है। इससे घुटने के आसपास की मसल्स एक्टिव रहती हैं और जोड़ को हिलाने में आसानी होती है। हैमस्ट्रिंग स्ट्रेच के लिए कुर्सी पर बैठकर एक पैर सामने सीधा करें और थोड़ा आगे झुकें। काफ स्ट्रेच में दीवार पर हाथ रखकर एक पैर पीछे करें और एड़ी जमीन पर रखें। इसके अलावा कुर्सी पर बैठकर पैर को सीधा करके 5 सेकंड रोकें और फिर नीचे करें।

6. घुटने की हल्के गर्म तेल से मालिश करें

घुटने के आसपास हल्के हाथों से मालिश करने से कुछ लोगों को दर्द और जकड़न में आराम महसूस हो सकता है। इसके लिए तिल, नारियल या सरसों के तेल को हल्का गुनगुना करके इस्तेमाल कर सकते हैं। घुटने और आसपास की मसल्स पर करीब 10 मिनट तक हल्के हाथों से गोल-गोल मालिश करें।

7. डाइट में ओमेगा-3 वाली चीजें शामिल करें

ओमेगा-3 शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है और सूजन से जुड़े प्रोसेस में भूमिका निभाता है। इसलिए इसे बैलेंस डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। मछली खाने वाले लोग मैकेरल यानी बांगड़ा, सार्डिन और हिलसा जैसी मछली खा सकते हैं, जबकि शाकाहारी लोग अलसी, अखरोट और चिया सीड्स को डाइट में शामिल कर सकते हैं। साथ ही बहुत ज्यादा तला-भुना खाना कम करना बेहतर है।

घुटने के दर्द के लिए डॉक्टर को दिखाएं

घुटने के दर्द में घरेलू उपायों से राहत न मिले या दर्द बार-बार परेशान करे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। यदि दर्द दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बना रहे, घुटने में ज्यादा सूजन, लालिमा या गर्माहट महसूस हो, पैर पर वजन रखने या खड़े होने में परेशानी हो, घुटना अचानक जवाब देने लगे, जोड़ टेढ़ा या असामान्य दिखाई दे या आप घुटने को पूरी तरह मोड़ या सीधा न कर पा रहे हों, तो इसे नजरअंदाज न करें।

पानी की कमी के लक्षण और उसे दूर करने के 5 असरदार घरेलू तरीके, जानिए पांच मिनट में

ज्यादा पानी पीने के लिए किसी नियम की जरूरत नहीं होती। दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीना, पानी वाली चीजें खाना और शरीर के संकेतों पर ध्यान देना सबसे आसान तरीका है। जाने शरीर के लिए पर्याप्त पानी पीना क्यों जरूरी है, पानी की मात्रा कैसे बढ़ाई जा सकती है और किन आसान आदतों को अपनाकर पूरे दिन हाइड्रेट रहा जा सकता है।

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कम पानी पीने के नुकसान

पानी शरीर के लगभग हर अंग के सही काम करने के लिए जरूरी है। यह शरीर का टेम्परेचर कंट्रोल रखता है, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाता है, पाचन में मदद करता है और किडनी के जरिए शरीर से गंदगी बाहर निकालने में सहायता करता है। पर्याप्त पानी पीने से बॉडी सेल्स भी सही तरीके से काम करती हैं। पानी की कमी होने पर थकान, सिरदर्द, ध्यान लगाने में परेशानी, कब्ज और होंठ सूखने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

सही समय

एक्सपर्ट के अनुसार, पानी पीने की आदत धीरे-धीरे बनानी चाहिए। सुबह उठते ही एक गिलास पानी पिएं, हर भोजन और स्नैक के साथ पानी लें, हमेशा अपने पास पानी की बोतल रखें और जरूरत हो तो मोबाइल में रिमाइंडर लगाएं। सादा पानी पसंद न आए तो उसमें नींबू, खीरा, पुदीना या नेचुरल फ्लेवर मिलाकर पी सकते हैं। इससे पानी पीना आसान हो जाता है।

हाइड्रेटेड फूड्स

हाइड्रेशन सिर्फ पानी पीने से ही नहीं होता, बल्कि कई फूड्स भी इसमें मदद करते हैं। तरबूज, संतरा, खीरा, टमाटर, दही और सूप जैसे फूड्स में पानी की मात्रा ज्यादा होती है। इन्हें रोजाना की डाइट में शामिल करने से शरीर को अतिरिक्त तरल मिलता है और पानी की जरूरत पूरी करने में मदद मिलती है।

डिहाइड्रेशन

यदि शरीर में पानी की कमी होने लगे तो प्यास ज्यादा लगना, मुंह सूखना, गहरे पीले रंग का पेशाब, कम पेशाब आना, चक्कर आना, सिरदर्द, कमजोरी और ध्यान न लगना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। पेशाब का हल्का पीला रंग सामान्य हाइड्रेशन का संकेत माना जाता है, जबकि गहरा रंग इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत है।

लक्षण

कई लोग बिजी शेड्यूल, ट्रैवलिंग, बार-बार बाथरूम जाने से बचने की आदत या सादा पानी पसंद न आने की वजह से पर्याप्त पानी नहीं पीते। वहीं, बुखार, उल्टी, दस्त, ज्यादा पसीना आना, गर्म मौसम और कुछ दवाएं भी शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती हैं। इसलिए मौसम और अपनी फिजिकल एक्टिविटी के अनुसार पानी का सेवन बढ़ाना जरूरी होता है।

सुरक्षित तरीके से हाइड्रेट

एक्सपर्ट का कहना है कि एक बार में बहुत ज्यादा पानी पीने के बजाय पूरे दिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीना बेहतर होता है। जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी नुकसानदायक हो सकता है। अपनी उम्र, मौसम, फिजिकल एक्टिविटी और स्वास्थ्य के अनुसार पानी पिएं।

डॉक्टर से सलाह

अगर पर्याप्त पानी पीने के बाद भी बार-बार प्यास लगे, बार-बार डिहाइड्रेशन हो, बहुत कम पेशाब आए, अचानक वजन कम होने लगे, धुंधला दिखाई दे या लगातार कमजोरी और चक्कर महसूस हों, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। ये लक्षण डायबिटीज, किडनी की बीमारी, हार्मोन संबंधी समस्या या किसी अन्य स्वास्थ्य परेशानी का संकेत हो सकते हैं।

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स्वाइन फ्लू को लेकर ICMR का बड़ा बयान, देश में नहीं मिला कोई नया वेरिएंट, जानिए कहां बढ़ रहे H1N1 के मरीज?

ICMR's major statement on swine flu

ICMR's major statement on swine flu : देश में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के किसी नए और खतरनाक वेरिएंट के फैलने की आशंका के बीच भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के वैज्ञानिकों ने स्थिति स्पष्ट की है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, भारत में H1N1 का कोई नया वेरिएंट सामने नहीं आया है। फिलहाल देश में फैल रहा इन्फ्लूएंजा-A यानी H1N1 pdm09 वायरस पहले से मौजूद स्ट्रेन का ही हिस्सा है। स्वाइन फ्लू की अफवाहों के बीच आईसीएमआर की यह रिपोर्ट देश के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि यह वायरस साल 2025 से ही देश में बना हुआ है, इसलिए किसी को भी डरने की कोई जरूरत नहीं है।

 

देश में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के किसी नए और खतरनाक वेरिएंट के फैलने की आशंका के बीच भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के वैज्ञानिकों ने स्थिति स्पष्ट की है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, भारत में H1N1 का कोई नया वेरिएंट सामने नहीं आया है। फिलहाल देश में फैल रहा इन्फ्लूएंजा-A यानी H1N1 pdm09 वायरस पहले से मौजूद स्ट्रेन का ही हिस्सा है।

 

स्वाइन फ्लू की अफवाहों के बीच आईसीएमआर की यह रिपोर्ट देश के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि यह वायरस साल 2025 से ही देश में बना हुआ है, इसलिए किसी को भी डरने की कोई जरूरत नहीं है।

 

वैज्ञानिकों के मुताबिक, वर्तमान वायरस मौसमी फ्लू वैक्सीन में शामिल वायरस से मेल खाता है। लेकिन बच्चों और बुजुर्गों में लक्षण बिगड़ने पर थोड़ी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। इन लोगों में बीमारी की वजह से परेशानी थोड़ी बढ़ सकती है। अगर किसी के लक्षण 3-4 दिन में ठीक न हों, या सांस लेने में तकलीफ जैसी दिक्कत होने लगे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। H1N1 के लक्षण आम मौसमी फ्लू जैसे हो सकते हैं। इनमें बुखार, खांसी, सिरदर्द, बदन दर्द और थकान शामिल हैं।

 

यहां बढ़ रहे स्वाइन फ्लू के मामले

दिल्ली में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। राजधानी में इन्फ्लूएंजा ए के 2392 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 1,777 मामले एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू के हैं। मामलों को देखते हुए दिल्ली सरकार ने अस्पतालों और स्वास्थ्य अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि अस्पतालों में इलाज के लिए डॉक्टर, बेड और दवाइयां पर्याप्त हैं। स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले पर नजर रख रहा है।

 

छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ने लगे हैं। अब तक 38 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा 25 मरीज रायपुर के हैं। रायपुर में मिले मरीजों में आधे से अधिक अभी एक्टिव हैं। इसके अलावा बिलासपुर, दुर्ग, बलौदाबाजार, बस्तर, बेमेतरा और रायगढ़ में भी मरीज मिले हैं। इसे लेकर अब स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट है।

 

मध्य प्रदेश में स्वाइन फ्लू का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। उज्जैन में एच-1एन-1 संक्रमण से ग्रस्त महिला की मौत के बाद अब प्रदेशभर से स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आने लगे हैं। बीते 5 दिनों के आंकड़ों पर गौर करें तो इंदौर और उज्जैन में स्वाइन फ्लू के 4 मामले सामने आए थे, जबकि सिर्फ शनिवार को ही अलग-अलग शहरों से 3 संकर्मितों की पुष्टि हुई है।

गौरतलब है कि स्वाइन फ्लू (H1N1) एक संक्रामक वायरल बीमारी है जो सांस के जरिए, खांसने या छींकने से फैलती है। इसके मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द और थकान शामिल हैं। सही समय पर आराम, तरल पदार्थों के सेवन और डॉक्टर की सलाह से यह ठीक हो जाता है।

Delhi-NCR में H1N1 और डेंगू का बढ़ा खतरा, डॉक्टरों ने बताया किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

दिल्ली-NCR के अस्पतालों में इन दिनों बुखार, फ्लू और डेंगू जैसी मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। ओपीडी (OPD) और इमरजेंसी में इनकी संख्या काफी ज्यादा देखी जा रही है। डॉक्टरों ने बताया है कि पिछले कुछ हफ्तों में इन्फ्लूएंजा A या H1N1 के मामलों में तेजी से उछाल आया है।

डॉक्टरों ने News18 को बताया कि मॉनसून के दौरान ज्यादा नमी और रुक-रुक कर होने वाली बारिश, साथ ही भीड़-भाड़ वाली बंद जगहें और फ्लू का टीका लगवाने वालों की कम संख्या इस बढ़ोतरी की वजह हैं।

हालांकि, ज्यादातर मरीज घर पर आराम और देखभाल से ठीक हो जाते हैं। लेकिन डॉक्टरों ने सलाह दी है कि सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या ऑक्सीजन लेवल गिरने जैसे लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

मौसम और घर के अंदर भीड़-भाड़ की वजह से बढ़ीं बीमारियां

दिल्ली के BLK-Max सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन विभाग के हेड और वाइस चेयरमैन डॉ. राजिंदर कुमार सिंघल ने कहा, “पिछले कुछ हफ्तों में, पूरे इलाके में तेज बुखार वाली बीमारियों के लिए आउटपेशेंट (OPD) आने वालों और इमरजेंसी में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है।”

उन्होंने कहा कि मामलों में रेस्पिरेटरी वायरस इन्फेक्शन और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का मिला-जुला असर दिख रहा है। उन्होंने आगे कहा, “मौसम का बदलना, ज्यादा नमी और बीच-बीच में होने वाली बारिश से कम्युनिटी में पैथोजन (बीमारी फैलाने वाले कीटाणु) के जिंदा रहने और फैलने की रफ्तार काफी बढ़ जाती है।”

सिंघल ने कहा कि H1N1 के मामलों में बढ़ोतरी तीन वजहों से हो रही है: पहला, नमी वाला गर्म मौसम, जिससे इन्फेक्शन वाली बूंदें हवा में ज्यादा देर तक बनी रहती हैं। दूसरा, ” लोगों का बंद और एयर कंडीशन वाले कमरों में ज्यादा समय बिताना जहां हवा का बहाव ठीक नहीं होता और वायरस तेजी से फैलता है। और तीसरा, “फ्लू का सालाना वैक्सीनेशन कम होना और साफ-सफाई की आदतों में लापरवाही बरतना, जिससे बहुत से लोग बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।”

दिल्ली में H1N1 के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी

फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. अर्जुन खन्ना ने हाल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि इस साल दिल्ली में H1N1 के 1,449 मामले सामने आए हैं, जो पिछले साल इसी समय के मुकाबले लगभग छह गुना ज्यादा हैं। उन्होंने कहा कि संक्रमण शुरू में हल्का लग सकता है, लेकिन कमजोर मरीजों में यह निमोनिया, खून में ऑक्सीजन का खतरनाक स्तर तक गिरना और कभी-कभी फेफड़ों के गंभीर रूप से फेल होने जैसी स्थिति में बदल सकता है।

खन्ना ने कहा, “बात साफ है: हर बार बुखार होने पर घबराएं नहीं, लेकिन इन्फ्लूएंजा को हल्के में भी न लें।” उन्होंने आगे कहा, “हम ऐसे बहुत से मरीज देख रहे हैं जिन्हें तेज बुखार, शरीर में तेज दर्द, खांसी, गले में खराश और बहुत ज्यादा थकान है। हमें चिंता है कि कुछ मरीजों की हालत उतनी तेजी से बिगड़ रही है, जितनी आम वायरल बुखार में उम्मीद नहीं की जाती।”

खन्ना ने बढ़ते मामलों के पीछे मानसून का मौसम, स्कूलों, ऑफिस और सार्वजनिक परिवहन जैसी भीड़भाड़ वाली बंद जगहों में खराब वेंटिलेशन और फ्लू वायरस में लगातार होने वाले बदलाव को जिम्मेदार बताया। उनका मतलब है कि पिछले संक्रमण या वैक्सीन से मिली सुरक्षा हमेशा के लिए नहीं रहती।

फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग में रेस्पिरेटरी मेडिसिन और रेस्पिरेटरी क्रिटिकल केयर के HOD, डॉ. विकास मौर्य ने भी कहा कि पिछले साल की तुलना में इस साल H1N1 पॉजिटिव पाए जाने वाले मरीजों की संख्या में “भारी उछाल” आया है। उन्होंने बताया कि फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों में से लगभग 70-80% H1N1 पॉजिटिव पाए जा रहे हैं, और इसके बाद इन्फ्लूएंजा के अन्य स्ट्रेन और रेस्पिरेटरी वायरस का नंबर आता है।

मौर्य ने कहा, “मानसून के दौरान होने वाला हर बुखार H1N1 की वजह से नहीं होता। हम अन्य वायरल रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन भी देख रहे हैं, जिनमें इन्फ्लूएंजा के अन्य स्ट्रेन जैसे H3N2 के साथ-साथ राइनोवायरस, एडेनोवायरस और COVID-19 जैसे इन्फेक्शन शामिल हैं। चिंता की एक और बात वे वायरस हैं जिनकी पहचान अभी उपलब्ध टेस्ट से नहीं हो पाती, लेकिन मरीज के लक्षणों से लगता है कि यह वायरल इन्फेक्शन है।”

लक्षण और खतरे के संकेत

डॉक्टरों ने News18 को बताया कि H1N1 का असर आम सर्दी-जुकाम की तुलना में अचानक और ज्यादा गंभीर होता है। इसमें तेज बुखार और कंपकंपी, शरीर में तेज दर्द, सिरदर्द और बहुत ज्यादा थकान, सूखी खांसी और गले में खराश जैसे लक्षण होते हैं। बच्चों में उल्टी या दस्त जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं।

खन्ना ने कहा, “सिर्फ 102 या 103 डिग्री बुखार खतरनाक नहीं है। खतरे के संकेत तब होते हैं जब इसके साथ सांस लेने में तकलीफ, सीने में बेचैनी, असामान्य रूप से बहुत ज्यादा नींद आना, उलझन या ऑक्सीजन का स्तर कम होना जैसे लक्षण दिखें।”

उन्होंने कहा, “ऐसे में इसका इलाज घर पर नहीं किया जाना चाहिए।”

खन्ना ने आगे कहा कि अगर कोई मरीज ठीक होता हुआ दिखे और फिर अचानक उसे दोबारा तेज बुखार आ जाए और खांसी बढ़ जाए, तो इसे निमोनिया या किसी दूसरी गंभीर समस्या का संभावित संकेत मानकर इलाज किया जाना चाहिए।

किन्हें और कब टेस्ट करवाना चाहिए?

डॉ. सिंघल के अनुसार, हल्के मामलों में फ्लू के लिए रूटीन टेस्टिंग की जरूरत नहीं होती, लेकिन ज्यादा जोखिम वाले ग्रुप्स के लिए इसकी पुरजोर सलाह दी जाती है — जैसे 65 साल से ज्यादा उम्र के लोग, 5 साल से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, और डायबिटीज, फेफड़ों की पुरानी बीमारी, अस्थमा, किडनी की बीमारी, दिल की बीमारी या कमजोर इम्यूनिटी (जैसे कैंसर के इलाज या ऑर्गन ट्रांसप्लांट की वजह से) वाले लोग।

ऐसे लोगों के लिए भी टेस्टिंग की सलाह दी जाती है जिनकी हालत बिगड़ रही हो, जैसे सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या ऐसा बुखार जो ठीक न हो रहा हो।

खन्ना ने अस्पताल में भर्ती 29,000 से ज्यादा H1N1 मरीजों पर हुई एक बड़ी स्टडी का भी जिक्र किया, जिसमें पाया गया कि एंटीवायरल दवाएं जल्दी शुरू करने से मौतें कम हुईं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर बहुत ज्यादा बीमार और ज्यादा जोखिम वाले मरीजों में टेस्ट के नतीजे आने से पहले ही एंटीवायरल इलाज शुरू कर सकते हैं।

सिंघल ने कहा कि ओसेल्टामिविर (Oseltamivir) जैसी एंटीवायरल दवाएं तब सबसे अच्छा काम करती हैं जब उन्हें लक्षण शुरू होने के 48 घंटों के अंदर शुरू किया जाए।

मानसून के दौरान डेंगू के मामले भी बढ़ रहे हैं

दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट में इंटरनल मेडिसिन के डायरेक्टर डॉ. अरविंद अग्रवाल ने कहा, “हमारी OPD सेवाओं में हर दिन डेंगू या H1N1 के शक वाले 15 से 20 मामले सामने आ रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “इनमें से 2 से 3 मरीजों को गंभीर पेट दर्द, लगातार उल्टी या ब्लड प्लेटलेट काउंट में तेजी से गिरावट जैसे गंभीर लक्षणों के कारण भर्ती करना पड़ता है।” उन्होंने आगे कहा कि बाकी मरीजों का इलाज OPD में ही हो जाता है, जिसमें वे खुद अपनी सेहत पर नजर रखते हैं और ओरल रिहाइड्रेशन (मुंह से तरल पदार्थ लेना) का तरीका अपनाते हैं।

अग्रवाल ने कहा, “हम लोगों को सलाह देते हैं कि वे अपने आस-पास पानी जमा न होने दें, मच्छर भगाने वाली चीजों का इस्तेमाल करें, साफ-सफाई बनाए रखें और लगातार बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।”

डॉक्टरों की सलाह और सावधानियां

डॉक्टरों ने गंभीर बीमारी से बचने के लिए सालाना फ्लू वैक्सीन लगवाने की सलाह दी है, खासकर ज्यादा जोखिम वाले लोगों और हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए। इसके साथ ही, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकने, कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से हाथ धोने या हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने, और बिना बुखार की दवा लिए बुखार उतरने के कम से कम 24 घंटे बाद तक घर पर रहने की भी सलाह दी गई है।

उन्होंने खुद से एंटीबायोटिक्स लेने के खिलाफ भी चेतावनी दी है, क्योंकि ये फ्लू जैसे वायरल इन्फेक्शन पर असर नहीं करतीं और भविष्य में होने वाले इन्फेक्शन का इलाज मुश्किल बना सकती हैं। जब तक डॉक्टर खास तौर पर एंटीवायरल दवा न लिखें, तब तक पैरासिटामोल जैसी बुखार कम करने वाली दवाएं लेना और खूब तरल पदार्थ (fluids) लेना पहला कदम होना चाहिए।

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Ebola Virus: क्या है इबोला वायरस? जानिए इसके लक्षण, संक्रमण और बचाव के आसान उपाय

Ebola Virus: क्या है इबोला वायरस? जानिए इसके लक्षण, संक्रमण और बचाव के आसान उपाय

Ebola Virus

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कांगो में फैली इबोला बीमारी अब तक के इतिहास में दूसरी सबसे बड़ी महामारी है। कुछ साल पहले फैली ये महामारी पश्चिमी अफ्रीका में हजारों लोगों की जान ले चुकी है। वर्तमाान में फ़िलहाल 1094 संक्रमण मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 277 लोगों की जान गई है। इबोला एक प्रकार का वायरस है। यह दुनिया भर के सबसे घातक वायरसों में से एक है। इससे सामान्य फ्लू के वायरस की तरह निपटा नहीं जा सकता, इसलिए जानकारी ही बचाव है। 

 

जानिए इबोला के लक्षण

अचानक बुखार आना, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश और थकान। जितनी जल्दी संभव हो सके डॉक्टरों को सूचित करें। इबोला से संक्रमित मरीज के कपड़ों और इस्तेमाल होने वाले कपड़ों को भी जला देना चाहिए।

 

डॉक्टर्स और देश भर के विशेषज्ञों ने 5 प्रकार की सावधानियां बरतने का आग्रह किया है। 5 सरलतम सावधानियां अपनाकर इबोला नामक खतरनाक वायरस के संक्रमण से बचा जा सकता है-

 

1. हाथों को रखें स्वच्छ

अपने हाथों को हमेशा साबुन और पानी से साफ रखें। हाथों को सुखाने के लिए स्वच्छ तौलिए का इस्तेमाल करें। वायरस को मारने का यह सबसे प्रभावी तरीका है। हाथ धोने के लिए अच्छी कंपनी का हैंडवॉश इस्तेमाल करें।

 

2. हाथ ना मिलाएं

हाथ मिलाने से यथासंभव बचें क्योंकि यह वायरस शरीर के सीधे संपर्क से तेजी से फैलता है।

 

3. स्पर्श से बचें

अगर आपको किसी व्यक्ति पर इबोला से संक्रमित होने का संदेह है तो उन्हें स्पर्श न करें। यह वायरस पेशाब, मल, रक्त, उल्टी, पसीना, आंसू, शुक्राणु और योनि से होने वाले स्राव के संपर्क से फैलता है। अगर आपको लगता है कि किसी व्यक्ति की मौत इबोला वायरस की वजह से हुई है, तो उसके शरीर को छूने से बचें। किसी बीमार व्यक्ति की तुलना में मृत व्यक्ति से वायरस के संक्रमण का खतरा अधिक होता है।

 

4. नॉनवेज से बचें

बंदर, चिंपैंजी, चमगादड़ का मांस नहीं खाएं क्योंकि विशेषज्ञों का मानना है कि मनुष्यों में इसका संक्रमण इन्हीं जानवरों के संपर्क में आने से हुआ। शिकार करने और जानवरों को छूने से बचें। यह सावधानी जरूर रखें कि मांस को ठीक से पकाया गया है।

 

5. डॉक्टर के पास जाने में हिचके नहीं

डॉक्टर से डरें नहीं, वे आपकी मदद करने के लिए हैं। अस्पताल किसी भी मरीज के लिए सबसे सही जगह है। यहां मरीज को पानी की कमी से बचाया जा सकता है और दर्द निवारक दवा भी दी जा सकती हैं।

 

9-5 की नौकरी के बाद UK में लोग करते हैं ये काम, भारतीय महिला ने VIDEO में दिखाया पूरा सच

ब्रिटेन में रह रही भारतीय महिला अनुष्का व्यास का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। वीडियो में उन्होंने UK और भारत की 9-5 नौकरी के बाद की जिंदगी का अंतर दिखाने की कोशिश की है। अनुष्का ने गुरुवार शाम करीब 5:30 बजे अपने घर के पास एक पार्क का वीडियो शेयर किया, जहां लोग काम खत्म करने के बाद परिवार के साथ समय बिताते, घूमते और फिटनेस पर ध्यान देते नजर आए। उनका कहना है कि UK में नौकरी के बाद भी लोगों के पास अपनी जिंदगी के लिए वक्त बचता है।

वहीं, भारत में ऑफिस खत्म होने के बाद लंबा सफर, ट्रैफिक और कई बार अतिरिक्त काम दिन का बाकी समय भी ले लेते हैं। अनुष्का के मुताबिक, इसी वजह से कई लोगों की पूरी उम्मीद वीकेंड पर टिक जाती है। उनके वीडियो ने सोशल मीडिया पर वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

गुरुवार शाम 5:30 बजे पार्क का दिखाया नजारा

अनुष्का ने इंस्टाग्राम पर शेयर वीडियो में गुरुवार शाम करीब 5:30 बजे अपने घर के पास एक पार्क का नजारा दिखाया। उन्होंने बताया कि यह न तो वीकेंड था और न ही कोई छुट्टी का दिन। इसके बावजूद पार्क में लोग परिवार के साथ समय बिता रहे थे, पिकनिक कर रहे थे और फिटनेस पर ध्यान दे रहे थे।

‘यहां काम के बाद भी जिंदगी बचती है’

अनुष्का के मुताबिक, UK में लोग अपना काम खत्म करने के बाद परिवार और निजी जिंदगी के लिए समय निकाल पाते हैं। उनके अनुसार, शाम का समय सिर्फ घर पहुंचने और आराम करने में ही नहीं निकलता, बल्कि लोग घूमने, एक्सरसाइज करने और अपनों के साथ वक्त बिताने का मौका भी पाते हैं।

भारत में 9-5 के बाद शुरू होती है दूसरी जद्दोजहद?

अनुष्का ने भारत की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि कई लोगों के लिए ऑफिस का समय खत्म होने के बाद भी दिन खत्म नहीं होता। ऑफिस से निकलने के बाद ट्रैफिक और लंबा सफर समय ले लेता है। कई बार बॉस की तरफ से अतिरिक्त काम भी मिल जाता है। ऐसे में घर पहुंचते-पहुंचते काफी देर हो जाती है।

वीकेंड का भी नहीं मिल पाता पूरा आराम

उन्होंने कहा कि लगातार थकान के कारण कई लोग वीकेंड का इस्तेमाल भी सिर्फ आराम करने में कर देते हैं। ऐसे में परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताना या अपनी सेहत और फिटनेस पर ध्यान देना मुश्किल हो जाता है।

‘सिर्फ पैसा नहीं, क्वालिटी ऑफ लाइफ भी जरूरी’

अनुष्का का कहना है कि बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस भी उन वजहों में शामिल है, जिनके कारण कुछ भारतीय विदेश में बसना पसंद करते हैं। उनके मुताबिक, अच्छी नौकरी और कमाई के साथ सुकून, परिवार के लिए समय और अपनी जिंदगी जीने की आजादी भी जरूरी है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी राय रखी। कुछ लोगों ने UK के वर्क-लाइफ बैलेंस को बेहतर बताया, तो कुछ ने भारतीय वर्क कल्चर में बदलाव की जरूरत पर बात की। एक यूजर ने इसे “अनरियल वर्क-लाइफ बैलेंस” बताया, जबकि दूसरे ने कहा कि काम के बाद मिलने वाला सुकून भी बेहद जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

Video: 5 दिन से 50 फीट गहरे कुएं से बाहर आने की जद्दोजहद कर रहा था कोबरा, अचानक फिर गिरा नीचे; दूसरी कोशिश में ऐसे बची सांप की जान