उत्तराखंड में दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस पर बवाल, भाई के बचाव में उतरे मिका सिंह ने दिया सिंगिंग छोड़ने का चैलेंज, जानें क्या है पूरा मामला

उत्तराखंड में एक कार्यक्रम के दौरान दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में राज्य के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल सिंगर के प्रदर्शन पर नाराजगी जताते नजर आए। इसके बाद दलेर मेहंदी पर शराब पीकर स्टेज पर आने के आरोप लगाए गए। अब उनके भाई और सिंगर मिका सिंह ने इन आरोपों पर खुलकर अपनी बात रखी है। मिका ने यहां तक कह दिया कि अगर कोई दलेर मेहंदी को शराब पीते हुए देखने का दावा साबित कर दे, तो वह सिंगिंग छोड़ देंगे।

‘दलेर मेहंदी ने कभी शराब नहीं पी’, मिका सिंह का दावा

मिका सिंह ने अपने भाई का बचाव करते हुए शराब पीने के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि दलेर मेहंदी का नाम कभी शराब पीने से नहीं जुड़ा और उनके खिलाफ इस तरह की बातें करना ठीक नहीं है। मिका ने अपने बयान में चुनौती देते हुए कहा कि अगर किसी एक व्यक्ति के पास भी ऐसा सबूत है कि उसने दलेर मेहंदी को शराब पीते देखा है, तो वह संगीत की दुनिया छोड़ने के लिए तैयार हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

तबीयत खराब होने के बावजूद स्टेज पर पहुंचे थे दलेर?

मिका सिंह ने यह भी बताया कि दलेर मेहंदी पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं और उनकी बड़ी सर्जरी भी हुई थी। मिका के मुताबिक, संभव है कि खराब तबीयत के बावजूद पहले से किया गया वादा निभाने के लिए दलेर कार्यक्रम में पहुंचे हों।

उन्होंने बताया कि कलाकार कई बार बीमारी और थकान के बावजूद अपने तय कार्यक्रम पूरे करते हैं। मिका ने कहा कि अगर किसी कलाकार ने शो के लिए हामी भर दी है, तो वह अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश करता है, भले ही उसकी तबीयत ठीक न हो। हालांकि, दलेर मेहंदी की तबीयत को लेकर मिका की ओर से दी गई इस सफाई के बीच शराब पीने के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

35 लाख रुपये की फीस और लिप-सिंकिंग पर उठा सवाल

यह विवाद उत्तराखंड के टिहरी जिले में नवरात्रि के दौरान आयोजित कुंजापुरी मेले का है। 18 अक्टूबर को हुए कार्यक्रम में दलेर मेहंदी की प्रस्तुति के बीच मंत्री सुबोध उनियाल मंच पर पहुंचे और नाराजगी जताई।

मंत्री ने आरोप लगाया कि सिंगर मंच पर ठीक से गा नहीं रहे थे और गानों पर केवल लिप-सिंक कर रहे थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि कार्यक्रम के लिए दलेर मेहंदी को 35 लाख रुपये दिए गए थे, इसलिए उनसे बेहतर प्रस्तुति की उम्मीद थी। उनियाल ने धार्मिक आयोजन में कथित तौर पर शराब पीकर प्रस्तुति देने पर भी आपत्ति जताई। हालांकि, शराब के नशे में होने का आरोप साबित नहीं हुआ है।

अब विवाद के बीच चर्चा में हैं दोनों भाई

एक तरफ मंत्री ने दलेर मेहंदी की प्रस्तुति पर सवाल उठाए हैं, तो दूसरी तरफ मिका सिंह अपने भाई के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं। फिलहाल इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के बयानों के कारण सोशल मीडिया पर बहस जारी है।

अब देखने वाली बात होगी कि यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है और दलेर मेहंदी की ओर से इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

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चारधाम यात्रा: अटूट आस्था, VIP संस्कृति और व्यवस्थाओं की अग्निपरीक्षा

चारधाम यात्रा: अटूट आस्था, VIP संस्कृति और व्यवस्थाओं की अग्निपरीक्षा

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यात्राएँ केवल पर्यटन नहीं, बल्कि स्वयं को जानने, जन-आस्था को अनुभव करने और प्रकृति के निकट पहुँचने का अवसर होती हैं। धार्मिक यात्रा मनुष्य को सांसारिक भागदौड़ से दूर कर आत्मचिंतन और ईश्वर के सान्निध्य में जाने का मार्ग दिखाती है। इसी भावना के साथ 26 सितंबर को मध्य प्रदेश के देवास से उत्तराखंड की चारधाम यात्रा प्रारंभ हुई। 15 दिनों के इस सफर ने मुझे आध्यात्मिक संतोष तो दिया, लेकिन धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की कठिनाइयों ने कई गंभीर प्रश्न भी खड़े किए।

 

माँ गंगा की आरती से हिमालय की दिव्यता तक

हरिद्वार में माँ गंगा की भव्य आरती, मंत्रोच्चार और दीपों से जगमगाती जलधारा ने मन को भावविभोर कर दिया। ऋषिकेश के आध्यात्मिक वातावरण से होते हुए यात्रा माँ यमुनोत्री पहुँची। लगभग छह से सात किलोमीटर के दुर्गम पहाड़ी मार्ग पर पैदल चढ़ाई, थकान और हल्की बारिश के बीच माँ यमुना के दर्शन हुए। इसके बाद उत्तरकाशी में श्री काशी विश्वनाथ महादेव और गंगोत्री में माँ गंगा के दर्शन किए। हिमालय की विशालता ने अनुभव कराया कि प्रकृति के सामने मनुष्य का अहंकार कितना छोटा है।

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केदारनाथ: आस्था अटूट, लेकिन व्यवस्था पर सवाल

यात्रा का सबसे कठिन पड़ाव बाबा केदारनाथ धाम रहा। लगभग 20 से 22 किलोमीटर के दुर्गम मार्ग पर चढ़ाई, घोड़े-खच्चरों की आवाजाही और यात्रियों की भीड़ के बीच आगे बढ़ना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। लगभग 12 घंटे की मशक्कत के बाद रात करीब दो बजे धाम पहुँचना संभव हुआ, जबकि दर्शन का सौभाग्य अगले दिन शाम लगभग छह बजे मिला। बाबा केदारनाथ के सम्मुख पहुँचते ही मन श्रद्धा से भर गया और सारी थकान मानो क्षणभर में मिट गई।

 

लेकिन घंटों की प्रतीक्षा ने सवाल भी खड़ा किया कि क्या श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए?

 

देश के कोने-कोने से लोग धन, समय और शारीरिक सामर्थ्य खर्च करके अपने आराध्य तक पहुँचते हैं। इनमें बुजुर्ग, महिलाएँ और अस्वस्थ लोग भी होते हैं। कठिन यात्रा के बाद घंटों कतार में खड़े रहना और अंततः कुछ सेकंड के दर्शन पाना उनकी पीड़ा को बढ़ाता है। इस समस्या के बीच VIP संस्कृति भी चिंता का विषय है। विशेष व्यक्तियों को प्राथमिकता देने से यदि आम श्रद्धालुओं को अतिरिक्त प्रतीक्षा करनी पड़े, तो यह व्यवस्था उनकी आस्था और सम्मान दोनों को ठेस पहुँचाती है।

 

ईश्वर के दरबार में हर भक्त बराबर है; किसी की विशेष सुविधा आम श्रद्धालु की परेशानी का कारण नहीं बननी चाहिए। हिमालय की कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ सरकार और प्रशासन के सामने चुनौती अवश्य हैं, लेकिन बेहतर योजना और जवाबदेही की आवश्यकता को नकारा नहीं जा सकता। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ना उपलब्धि हो सकती है, पर उनकी परेशानियाँ बढ़ना व्यवस्था की सफलता नहीं है।

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त्रियुगीनारायण से बद्रीनाथ तक

केदारनाथ के बाद त्रियुगीनारायण मंदिर में दर्शन का अवसर मिला। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मंदिर की अखंड धूनी तथा भगवान विष्णु की उपस्थिति इस स्थान की आध्यात्मिक महत्ता बढ़ाती है। इसके बाद बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्रीविशाल के दर्शन के साथ यात्रा पूर्ण हुई। इन पवित्र स्थलों ने श्रद्धा, समर्पण और भारतीय संस्कृति की गहराई का अनुभव कराया।

 

आस्था या सोशल मीडिया का प्रदर्शन?

यात्रा के दौरान धार्मिक स्थलों पर तस्वीरें लेने और रील बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति भी दिखाई दी। अनुभव साझा करना गलत नहीं है, लेकिन जब कैमरा श्रद्धा पर हावी हो जाए, तो तीर्थयात्रा का वास्तविक उद्देश्य पीछे छूटने लगता है। प्रश्न यह है कि हम ईश्वर के दर्शन करने जाते हैं या दुनिया को यह दिखाने कि हम दर्शन करने गए थे? भक्ति का वास्तविक आनंद लाइक और कमेंट में नहीं, बल्कि उस क्षण में है जब मन बिना किसी दिखावे के अपने आराध्य के सामने झुकता है।

 

सरकार और प्रशासन के लिए स्पष्ट संदेश

चारधाम यात्रा में उमड़ती भीड़ सरकार और प्रशासन के लिए अवसर से अधिक जिम्मेदारी है। दर्शन व्यवस्था, यातायात, पार्किंग, पेयजल, स्वच्छता, चिकित्सा और आपातकालीन सहायता को मजबूत करना अनिवार्य है। बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएँ सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा VIP व्यवस्था के कारण आम श्रद्धालुओं का आवागमन और दर्शन बाधित नहीं होने चाहिए।

 

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सम्मान कोई सरकारी एहसान नहीं, बल्कि प्रशासन की बुनियादी जिम्मेदारी है। सरकार को घोषणाओं से आगे बढ़कर धरातल पर सुधार दिखाना होगा। समय रहते व्यवस्थाएँ नहीं सुधारी गईं, तो बढ़ती भीड़ भविष्य में गंभीर कठिनाइयाँ पैदा कर सकती है। विकास के साथ हिमालय के नाजुक पर्यावरण की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।

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आस्था का सम्मान, व्यवस्था की जवाबदेही

10 अक्टूबर को लौटते समय मन में चारधाम के दर्शन का संतोष था, लेकिन व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता भी स्पष्ट थी। सरकार को जवाबदेही निभानी होगी, प्रशासन को संवेदनशील बनना होगा और यात्रियों को अनुशासन तथा पर्यावरण संरक्षण का पालन करना होगा।

 

आस्था अटूट है, लेकिन श्रद्धालुओं की सहनशीलता को व्यवस्था की कमजोरियों का विकल्प नहीं बनाया जा सकता। ईश्वर के दरबार में समानता तभी सार्थक होगी, जब प्रत्येक भक्त को समान सम्मान और यथासंभव सुविधाजनक दर्शन मिलें। क्योंकि चारधाम की यात्रा पैरों से जितनी पूरी होती है, उससे कहीं अधिक हृदय और आत्मा से पूरी होती है।

 

हर हर महादेव! जय बद्रीविशाल! जय माँ गंगे! जय माँ यमुना!

Stocks to Buy: 73% तक रिटर्न दे सकते हैं ये 5 शेयर, ब्रोकरेज ने खरीदने की सलाह दी

Stocks to Buy: लगातार आठ हफ्तों तक बिकवाली के दबाव में रहने के बाद भारतीय शेयर बाजार में पिछले कारोबारी हफ्ते तेजी लौटी। Nifty 50 में 0.44% और Sensex में 0.78% की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, ग्लोबल अनिश्चितता, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, कच्चे तेल की कीमतों और RBI के ब्याज दर बढ़ाने से बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा।

इस बीच, ब्रोकरेज फर्मों ने कई शेयरों पर खरीदने की सलाह दी है। इनमें मेटल, ऑटोमोबाइल, लॉजिस्टिक्स, बैंकिंग और एंटरटेनमेंट सेक्टर की कंपनियां शामिल हैं। ब्रोकरेज के टारगेट प्राइस और दिए गए मौजूदा भाव के आधार पर इन पांच शेयरों में करीब 46% से 73% तक तेजी की संभावना है।

इन 5 शेयरों में कितनी तेजी की संभावना?

कंपनीमौजूदा शेयर भावटारगेट प्राइससंभावित तेजी
Shyam Metalics₹1,062.80₹1,55045.84%
Mahindra & Mahindra₹2,792₹4,26052.58%
PVR Inox₹1,331₹2,13560.41%
TCI Express₹467₹77064.88%
HDFC Bank₹708.20₹1,22572.97%

Shyam Metalics

मेटल कंपनी Shyam Metalics पर UBS ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट प्राइस 24% बढ़ाकर 1,550 रुपये कर दिया है। शेयर का मौजूदा भाव 1,062.80 रुपये है। इस हिसाब से इसमें करीब 45.84% तेजी की संभावना है।

UBS को कंपनी की विस्तार योजनाओं और ज्यादा वैल्यू वाले प्रोडक्ट्स पर बढ़ते फोकस से ग्रोथ की उम्मीद है। ब्रोकरेज के मुताबिक, कंपनी अपनी परियोजनाओं को इंडस्ट्री के औसत से कम लागत और कम समय में पूरा कर सकती है। इससे क्षमता बढ़ाने और निवेश पर बेहतर रिटर्न हासिल करने में मदद मिल सकती है।

Mahindra & Mahindra

ऑटोमोबाइल कंपनी Mahindra & Mahindra के शेयर पर Citi ने खरीदने की सलाह दी है। ब्रोकरेज ने 4,260 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। शेयर का मौजूदा भाव 2,792 रुपये है। इस आधार पर इसमें करीब 52.58% तेजी की संभावना है।

Citi को कंपनी के पैसेंजर व्हीकल, कमर्शियल व्हीकल और थ्री-व्हीलर कारोबार में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है। ब्रोकरेज के अनुमान के मुताबिक, सितंबर तिमाही में कंपनी की कुल गाड़ियों की बिक्री सालाना आधार पर 15.7% बढ़ सकती है। पैसेंजर व्हीकल की बिक्री में 26%, कमर्शियल व्हीकल में 17.8% और थ्री-व्हीलर में 38.7% बढ़ोतरी का अनुमान है।

हालांकि, ट्रैक्टर की बिक्री में 5.6% गिरावट की आशंका है। बढ़ती कमोडिटी लागत और प्रोडक्ट मिक्स से मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। Citi को रेवेन्यू में 26.7% बढ़ोतरी की उम्मीद है, जबकि EBITDA में 1.8% गिरावट का अनुमान है।

PVR Inox

एंटरटेनमेंट कंपनी PVR Inox पर CLSA ने ‘Outperform’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने 2,135 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। शेयर का मौजूदा भाव 1,331 रुपये है। इस हिसाब से इसमें करीब 60.41% तेजी की संभावना है।

CLSA को हिंदी, क्षेत्रीय भाषाओं और हॉलीवुड फिल्मों की बेहतर रिलीज से सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। ब्रोकरेज का मानना है कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर लगातार कंटेंट देखने से दर्शकों में थकान बढ़ रही है। ऐसे में लोग फिर से सिनेमाघरों में फिल्म देखने का रुख कर सकते हैं।

PVR Inox के पास करीब 1,800 स्क्रीन हैं। कंपनी ने छोटे शहरों में स्मार्ट स्क्रीन के विस्तार के लिए 300 जगहों की पहचान की है। CLSA को उम्मीद है कि इस विस्तार से कंपनी को ग्रोथ मिलेगी। बेहतर कैश जनरेशन और हाल में किए गए शेयर बायबैक को भी ब्रोकरेज ने अपने आकलन में शामिल किया है।

TCI Express

लॉजिस्टिक्स कंपनी TCI Express पर Jefferies ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट प्राइस 770 रुपये रखा है। शेयर का मौजूदा भाव 467 रुपये है। इसके आधार पर इसमें करीब 64.88% तेजी की संभावना है।

Jefferies को कंपनी के शिपमेंट वॉल्यूम में सुधार की उम्मीद है। इससे ट्रकों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और कमाई बढ़ सकती है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि सितंबर 2026 तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 10% और EBITDA 8% बढ़ सकता है।

हालांकि, मिडिल ईस्ट में तनाव से कारोबारी गतिविधियों पर असर पड़ने का जोखिम है। Jefferies के मुताबिक, शिपमेंट वॉल्यूम में रिकवरी जारी रहने पर कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और कमाई को फायदा मिल सकता है।

HDFC Bank

प्राइवेट सेक्टर के HDFC Bank पर Emkay ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए 1,225 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। शेयर का मौजूदा भाव 708.20 रुपये है। इस आधार पर इसमें करीब 72.97% तेजी की संभावना है।

Emkay का मानना है कि लंबे समय से कमजोर प्रदर्शन के कारण बैंक का वैल्यूएशन आकर्षक स्तर पर आ गया है। शेयर में रिकवरी के लिए बैंक को अपने मुख्य कारोबार में सुधार दिखाना होगा। डिपॉजिट जुटाने और लोन ग्रोथ में प्रगति से निवेशकों का भरोसा लौट सकता है।

ब्रोकरेज के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होने या उनका रुख बदलने से भी शेयर को सपोर्ट मिल सकता है। हालांकि, वैल्यूएशन में दोबारा बढ़ोतरी बैंक के कारोबारी प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।

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सबके लिए समय है… फिर अपने सपनों के लिए क्यों नहीं?

सबके लिए समय है... फिर अपने सपनों के लिए क्यों नहीं?

There is time for everything, then why not for your dreams

रात को सोने से पहले आप बीते दिन के बारे में सोचते हैं। कितने काम किए, कितनी जिम्मेदारियां निभाईं, कितने लोगों की जरूरत पूरी की, लेकिन जिस काम को करने की इच्छा सुबह मन में उठी थी, वह आज भी छूट गया। आप खुद को समझाते हैं- कल जरूर समय निकालूंगा।

 

कभी-कभी ऐसे ही कई महीने बीत जाते हैं। जीवन चलता रहता है, पर भीतर कोई इच्छा चुपचाप प्रतीक्षा करती रहती है। उसे याद करते ही एक कसक उठती है- क्या मेरा जीवन केवल जरूरी काम निपटाते हुए बीत जाएगा?

 

इस प्रश्न में आपके भीतर बचे हुए सपने की आवाज है। उसे सुनिए। हो सकता है वह आपको किसी अधूरे काम की याद दिला रही हो, किसी दबे हुए हुनर की ओर बुला रही हो या जीवन को थोड़ा अधिक अर्थपूर्ण बनाने का आग्रह कर रही हो।

 

हम अक्सर अपनी इच्छाओं को इसलिए पीछे रख देते हैं क्योंकि जिम्मेदारियां सामने खड़ी होती हैं। परिवार, आजीविका और संबंधों का महत्त्व अपनी जगह है लेकिन उन्हें निभाते हुए अपनी क्षमताओं के लिए थोड़ी जगह बचाना भी जरूरी है। आपके भीतर जो अच्छा है, उसे विकसित होने का अवसर मिलना चाहिए।

 

अपने आप से पूछिए, कौनसा काम करने के बाद मुझे केवल थकान नहीं, मन में संतोष भी मिलता है? किस काम को बेहतर करने की इच्छा बार-बार लौटती है? लोग किस बात के लिए मेरी सहायता लेते हैं? इन प्रश्नों के उत्तर आपकी छिपी प्रतिभा का परिचय दे सकते हैं।

 

हो सकता है आप कठिन बात आसानी से समझा लेते हों। लोगों की परेशानी धैर्य से सुनते हों। किसी अव्यवस्थित काम को संवार देते हों। लिखने, सिखाने, बनाने या समस्याएं सुलझाने में आपकी सहज रुचि हो। जिसे आप सामान्य समझकर अनदेखा करते आए हैं, वही आपकी विशेष क्षमता हो सकती है।

वेस्टइंडीज ने पहले टी20 मैच में भारत को जीत के लिये दिया 172 रन का लक्ष्य।

वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की टी20 श्रृखंला के पहले मुकाबले में भारत ने मंगलवार को यहां टॉस जीत कर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया। इकाना स्टेडियम में खेले जाने वाले मैच में युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी को मौका नहीं मिला है। उनके अलावा रवि विश्नोई,नीतिश कुमार रेड्डी और प्रिंस यादव भी अंतिम एकादश में शामिल नहीं किये गये हैं वहीं वेस्टइंडीज की ओर से अकील हुसैन आज अपना सौवां टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने जा रहे हैं और ऐसा करने वाले वे इस प्रारूप में चौथे वेस्ट इंडीज खिलाड़ी बन जाएंगे।

पहले गेंदबाजी के फैसले को सही ठहराते हुये भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा इकाना की पिच के बारे में हम नहीं जानते कि यह कैसा खेलेगी मगर लगता है कि गेंदबाजों को इसमें थोड़ा उछाल मिले । उन्होने कहा कि एशियाई खेलों के थकान भरे सफर के बाद टीम कल ही यहां पहुंची है मगर आज के मैच को लेकर सभी खिलाड़ी पूरी ऊर्जा खर्च करने को तैयार हैं।

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उधर, वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने कहा टाॅस जीतने की दशा में मै भी पहले गेंदबाजी करना पसंद करता। भारत में चेज़ करना ज़्यादा बेहतर होता है। हम बस हालात के हिसाब से ढलना चाहते हैं और हमें यहाँ ऐसा ही करना होगा। हमें खिलाड़ियों के अनुभव का फ़ायदा उठाना होगा और उम्मीद है कि हम यहाँ अच्छा खेलेंगे। हमारे पास गेंदबाज़ी के छह विकल्प हैं और कुछ ऑलराउंडर भी हैं।

गौरतलब है कि वेस्टइंडीज के खिलाफ भारतीय टीम एक दिवसीय श्रृखंला 2-1 से अपने नाम कर चुकी है जबकि टी20 सीरीज में आज लखनऊ में उसका पहला मुकाबला है।

टीमे इस प्रकार हैं:

भारत – अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर),ईशान किशन, श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, नमन धीर, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, मयंक यादव और अर्शदीप सिंह।

वेस्टइंडीज – शाई होप (कप्तान, विकेटकीपर), कामिल पूरन, शिमरोन हेटमायर, रोवमैन पॉवेल, शेरफेन रदरफोर्ड, रोमारियो शेफर्ड, मैथ्यू फोर्ड, रोस्टन चेज़, शमर स्प्रिंगर, अकील हुसेन और शमर जोसेफ।

Pic Credit : UNI

IND vs WI: पहले टी20 से ड्रॉप होंगे वैभव सूर्यवंशी? कोच ने दिया ये बड़ा अपडेट

IND vs WI: भारत और वेस्टइंडीज के बीच वनडे सीरीज के बाद अब 5 मैचों की टी20 सीरीज खेला जाएगा। सीरीज का पहला मुकाबला 6 अक्टूबर को इकाना स्टेडियम, लखनऊ में खेला जाएगा। वहीं इस मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी एक्शन में नजर आ सकते हैं। वहीं पहले मुकाबले से पहले वैभव के खेलने को लेकर बड़ा अपडेट आया है। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाले पहले T20I में भारत की प्लेइंग XI में बदलाव देखने को मिल सकता है। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को इस मुकाबले में टीम से बाहर रखा जा सकता है। अभिषेक शर्मा के साथ संजू सैमसन के पारी की शुरुआत कर सकते हैं।

वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले मैच से पहले भारत के बॉलिंग कोच मोर्ने मोर्कल ने कहा कि, सूर्यवंशी के लिए सीनियर खिलाड़ियों के साथ ज्यादा समय बिताना बेहद जरूरी है।

वैभव को लेकर कोच ने क्या कहा

मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोर्ने मोर्कल ने कहा, “हम सभी वैभव के टैलेंट से अच्छी तरह वाकिफ हैं। वह जितना ज्यादा समय इस माहौल में अच्छे खिलाड़ियों के साथ बिताएगा और जितना अधिक इस स्तर पर ट्रेनिंग करेगा, उतना ही यह उसके क्रिकेट के लिए फायदेमंद होगा।” मोर्कल ने आगे कहा कि सूर्यवंशी टीम के साथ रहकर, अनुभवी खिलाड़ियों को देखकर और उनकी तैयारी के साथ-साथ बल्लेबाजी के तरीके को समझकर काफी कुछ सीख सकते हैं। उन्होंने कहा, “अगर उसे खेलने का मौका नहीं मिल रहा है, तो भी वह बस, डगआउट और होटल में काफी अनुभव रखने वाले खिलाड़ियों के साथ समय बिता रहा है।”

कौन करेगा ओपनिंग

बॉलिंग कोच मोर्कल ने पहले T20I के लिए भारत की ओपनिंग जोड़ी को लेकर कोई पक्की जानकारी नहीं दी। उन्होंने कहा कि प्लेइंग XI तय करने से पहले टीम सभी उपलब्ध ऑप्शनों पर विचार करेगी। मोर्कल ने कहा, “मेरा मतलब है कि एशियन गेम्स में अभिषेक और सूर्यवंशी ने ही पारी की शुरुआत की थी। अब हम आज रात फैसला करेंगे कि इस सीरीज के लिए हमारे लिए सबसे सही ओपनिंग कॉम्बिनेशन क्या रहेगा।”

सूर्यवंशी को मिलेगा मौका?

एशियन गेम्स में वैभव सूर्यवंशी ने अभिषेक शर्मा के साथ ओपनिंग की थी। लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले T20I में संजू सैमसन को ओपनिंग का मौका मिल सकता है। ऐसे में 15 साल के सूर्यवंशी को इस मुकाबले में प्लेइंग XI से बाहर बैठना पड़ सकता है। मोर्कल ने बताया कि, एशियन गेम्स के बाद खिलाड़ियों को आराम का ज्यादा समय नहीं मिला और कई खिलाड़ी कुछ दिन पहले ही भारत लौटे हैं। इसलिए टीम चुनते समय खिलाड़ियों की यात्रा और थकान को भी ध्यान में रखा जाएगा। सूर्यवंशी भारत की एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम का हिस्सा थे। वैभव टीम के सभी मुकाबले खेले थे, लेकिन बल्लेबाजी में वह अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रहें।

विश्व हृदय दिवस 2026: हार्ट अटैक से बचाव के 6 आसान उपाय, आज से अपनाएं ये आदतें

विश्व हृदय दिवस 2026: हार्ट अटैक से बचाव के 6 आसान उपाय, आज से अपनाएं ये आदतें

World Heart Day 2026

विश्व हृदय दिवस हर साल 29 सितंबर को मनाया जाता है। इस बार की थीम है-  “दिल की धड़कन को न चूकें,”। 2022 में हृदय रोग से 19.8 मिलियन लोगों की मृत्यु हुई थी। वर्तमाान में कोरोना काल के बाद अचानक से हृदय गति रुक जाने के मामले भी बढ़े हैं। ऐसे में  जानिए कि किस तरह लाइफ स्टाइल बदलकर प्राकृतिक तरीके से हार्ट अटैक  से खुद को बचा सकते हैं।

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हदय रोग के कारण:

  • उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन)
  • उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर
  • मधुमेह
  • धूम्रपान या तंबाकू का सेवन
  • मोटापा या शरीर का अतिरिक्त वजन
  • शारीरिक निष्क्रियता
  • अत्यधिक कफ बना रहना
  • अत्यधिक शराब का सेवन
  • दीर्घकालिक तनाव
  • हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास
  • बड़ी हुई उम्र
  • नींद की खराब गुणवत्ता या अनुपचारित स्लीप एपनिया
  • नमक, चीनी और संतृप्त या ट्रांस वसा से भरपूर अस्वास्थ्यकर आहार
  • दीर्घकालिक गुर्दे की बीमारी और कुछ सूजन संबंधी स्थितियाँ

 

हृदय रोग के लक्षण

  • सीने में दर्द , दबाव, जकड़न या बेचैनी
  • सांस फूलना, खासकर गतिविधि के दौरान या आराम करते समय
  • सांस फूलने या सीने में तकलीफ के कारण व्यायाम करने में कठिनाई होना।
  • अस्पष्ट थकान या कमजोरी
  • दर्द जो हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैलता है
  • दिल की धड़कन तेज, धीमी या अनियमित होना ( धड़कन का अनियमित होना)
  • चक्कर आना, सिर हल्का महसूस होना या बेहोशी
  • पैरों, टखनों या पंजों में सूजन
  • ठंडे पसीने आना, मतली या उल्टी होना, खासकर सीने में तकलीफ के साथ

 

हृदय रोग का प्राकृतिक इलाज:

  1. शराब, तंबाकू, सिगरेट, नमक, चीनी और तेल का त्याग करना।
  2. हर रात 7-9 घंटे की अच्छी नींद लें।
  3. उपवास नहीं कर सकते हैं तो भोजन के बीच कम से कम 10 घंटे काअंतराल रखें।
  4. नियमित योगासन करें या अनुलोम विलोम प्राणायाम करें।
  5. डॉक्टर की सलाह पर रोज एक अखरोट खाएं।
  6. शुद्ध सात्विक और प्राकृतिक भोजन ही करें। सलाद का सेवन करें। 

 

कौन सी सब्जियां कम करती हैं कोलेस्ट्रॉल?

कुछ खास सब्जियों में घुलनशील फाइबर पाया जाता है जो खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने में मदद करता है। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ सब्जियों के बारे में:

 

लहसुन: लहसुन में एलिसिन नामक एक यौगिक पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है।

प्याज: प्याज में भी एलिसिन पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।

बैंगन: बैंगन में नियासिन नामक विटामिन होता है जो अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ावा देता है।

पालक: पालक में विटामिन K और फोलेट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

ब्रोकली: ब्रोकली में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं।
 

कोलेस्ट्रॉल कम करने के अन्य उपाय

स्वस्थ आहार: फाइबर से भरपूर आहार लें, जैसे कि फल, सब्जियां, और साबुत अनाज।

व्यायाम: नियमित रूप से व्यायाम करें।

मोटापे को कम करें: अगर आप मोटे हैं तो अपना वजन कम करें।

धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा सकता है।

तनाव कम करें: तनाव को कम करने के लिए योग, ध्यान या अन्य आराम करने की तकनीक का अभ्यास करें।

 

कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बहुत जरूरी है। अपनी डाइट में उपरोक्त बताई गई सब्जियों को शामिल करके आप कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर सकते हैं और दिल की बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं।

 

ध्यान रखें

  • आप अपने डॉक्टर से पूछकर अपनी डाइट में बदलाव कर सकते हैं।
  • नियमित रूप से ब्लड टेस्ट करवाते रहें।
  • स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर आप कई बीमारियों से बच सकते हैं।

 

‘द अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन’ में प्रकाशित एक नए अध्ययन और मेटा-एनालिसिस के अनुसार, लाल, नीले और बैंगनी रंग के खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले प्राकृतिक बायोएक्टिव तत्व ‘एंथोसायनिन’ का अधिक सेवन स्वस्थ व्यक्तियों में हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है।

 

एंथोसायनिन पौधों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले ऐसे यौगिक हैं, जो कई फलों और सब्जियों को लाल, बैंगनी और नीला रंग प्रदान करते हैं। बेरीज़ (Berries) को इसका सबसे समृद्ध स्रोत माना जाता है। विशेष रूप से अमेरिका में उगाई जाने वाली ब्लूबेरी एंथोसायनिन का बेहतरीन स्रोत है, जो हृदय स्वास्थ्य को मजबूत करने में सहायक होती है।

 

Video: 81 साल की उम्र में पत्नी के लिए 14 घंटे उठाता रहा भारी सामान, कहानी सामने आते ही लोगों ने जुटाए ₹2 करोड़

अमेरिका के टेक्सास में 81 साल के Don Johnson की कहानी इन दिनों लोगों के बीच चर्चा में है। उम्र के उस पड़ाव पर, जब इंसान आराम और परिवार के साथ सुकून के पल बिताना चाहता है, Johnson अपनी पत्नी के इलाज के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे। उनकी पत्नी Josephine कैंसर से जूझ रही हैं और इलाज का खर्च लगातार बढ़ रहा था। ऐसे में Johnson ने उम्र की परवाह किए बिना काम करना जारी रखा। वह खोया हुआ सामान उसके मालिकों तक पहुंचाने का काम करते थे और कई-कई घंटे सड़क पर बिताते थे। उनकी जिंदगी की मुश्किलों का अंदाजा तब हुआ, जब एक ग्राहक के घर लगे कैमरे में वह भारी सूटकेस लेकर सीढ़ियां चढ़ते नजर आए।

थके हुए Johnson को देखकर ग्राहक Erin Howell भावुक हो गईं। इसके बाद उन्होंने उनकी मदद के लिए फंडरेजर शुरू किया। देखते ही देखते यह कहानी लोगों तक पहुंची और बड़ी संख्या में लोगों ने Johnson और उनकी पत्नी के लिए मदद का हाथ बढ़ाया।

सीढ़ियों पर भारी बैग उठाते दिखे Johnson

Johnson खोए हुए सामान को उसके मालिकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। एक दिन वह Erin Howell के घर सामान पहुंचाने पहुंचे। घर के सिक्योरिटी कैमरे में वह भारी सूटकेस लेकर सीढ़ियां चढ़ते नजर आए। उनकी थकान और मेहनत देखकर Howell भावुक हो गईं और उन्होंने Johnson की कहानी लोगों के साथ साझा करने का फैसला किया।

पत्नी के इलाज के लिए चुना मुश्किल काम

Johnson और Josephine की शादी को 57 साल हो चुके हैं। Josephine को जानलेवा कैंसर का पता चलने के बाद परिवार की आर्थिक मुश्किलें बढ़ती गईं। मेडिकल बिल, दवाइयों और रोजमर्रा के खर्चों ने Johnson को काम करने के लिए मजबूर कर दिया।

उन्होंने कई जगह नौकरी तलाशने की कोशिश की, लेकिन उम्र के कारण उन्हें काम नहीं मिल पाया। आखिरकार उन्होंने सामान डिलीवर करने का काम शुरू किया। Johnson के मुताबिक, यही वह काम था जो उन्हें मिल सका।

14 घंटे की शिफ्ट और हजारों मील का सफर

Johnson कई बार दिन में करीब 14 घंटे तक काम करते थे। इस दौरान उन्हें लंबी दूरी तक गाड़ी चलाने के साथ भारी सामान भी उठाना पड़ता था। तीन साल में वह खोया हुआ सामान पहुंचाते हुए अपनी कार से 200,000 मील से ज्यादा दूरी तय कर चुके हैं। लगातार सफर और काम के कारण उनकी कार में भी कई तकनीकी परेशानियां आने लगीं, लेकिन पत्नी के इलाज का खर्च जुटाने के लिए उन्होंने काम जारी रखा।

एक वीडियो ने बदल दी जिंदगी

Howell ने जब कैमरे में रिकॉर्ड हुई Johnson की तस्वीरें देखीं तो उन्होंने उनके लिए फंडरेजर शुरू करने का फैसला किया। उनका मकसद Johnson और Josephine पर पड़े आर्थिक बोझ को कम करना था। 2 सितंबर को शुरू हुए इस अभियान में अब तक 2.44 लाख डॉलर से ज्यादा जुटाए जा चुके हैं, जबकि लक्ष्य 3 लाख डॉलर रखा गया है। भारतीय मुद्रा में जुटाई गई रकम करीब ₹2.87 करोड़ बैठती है।

अब शायद काम छोड़ पाएंगे Johnson

लोगों की मदद मिलने के बाद Johnson को उम्मीद जगी है कि अब उन्हें इतनी मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि वह काम करना बंद कर पाएंगे और यह उनके लिए बेहद खास एहसास है।

पत्नी को मिली नई उम्मीद

इस मदद का असर Josephine पर भी पड़ा है। बीमारी और आर्थिक परेशानियों के बीच लोगों की दुआओं और समर्थन ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत महसूस कराया है। उनका कहना है कि अब वह इस मुश्किल दौर का सामना कर सकती हैं और लोगों का प्यार उनके लिए खुशी का एहसास लेकर आया है।

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सोने से पहले 10 मिनट अपनाएं यह आसान और सस्ते घरेलू तरीके, दिनभर के थके पैरों के लिए काम की ट्रिक!

खूबसूरत और हेल्दी पैरों के लिए अब आपको पार्लर जाकर महंगे पेडीक्योर पर पैसा खर्च करने की जरुरत नहीं है। आजकल नेचुरल और हाउसहोल्ड इंग्रीडिएंट से तैयार एक सिंपल फुट केयर हैक लोगों के बीच काफी पॉपुलर हो रहा है। एक्सपर्ट के अनुसार, घर की लिचें में मिलने वाले इंग्रीडिएंट से बना यह मिक्सचर पैरों की स्किन को गहराई से साफ करता है और उन्हें पोषण देता है। इस असरदार मिक्सचर को तैयार करने और पैरों पर अप्लाई करने की प्रोसेस बेहद सरल है, जो आपके फुट केयर रूटीन को बजट-फ्रेंडली और आसान बनाती है।

नमक और सिरके के पानी के फायदे

नमक और सिरके को पानी में मिलाकर पैरों को भिगोने से सफाई में मदद मिल सकती है और पैरों की बदबू कुछ कम महसूस हो सकती है। सिरके में एसिडिक गुण होते हैं, जबकि नमक अतिरिक्त नमी को सोखने में मदद करता है। गुनगुने पानी में पैर रखने से थकान और भारीपन से भी थोड़ी राहत मिल सकती है।

ऐसे तैयार करें फुट सोक

एक बड़े बर्तन में करीब 1 लीटर गुनगुना पानी लें और उसमें आधा कप सिरका और 2 बड़े चम्मच मोटा नमक डालें। नमक को थोड़ा घुलने दें और फिर पैरों को करीब 15 से 20 मिनट तक पानी में रखें। पानी बहुत गर्म नहीं होना चाहिए, वरना स्किन में जलन हो सकती है।

फुट सोक से पहले रखें सावधानी

सेंसेटिव स्किन वाले लोगों, खुले घाव, कट या किसी तरह की स्किन की परेशानी होने पर इस तरीके को आजमाने से पहले एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर है। सिरका चोट या क्रैक स्किन पर जलन बढ़ा सकता है। पैरों में तेज खुजली, रेडनेस, घाव या गंभीर फंगल इंफेक्शन जैसी प्रॉब्लम पहले से मौजूद हो, तो घरेलू उपाय पर डिपेंड रहने के बजाय सही मेडिकल ट्रीटमेंट लेना जरूरी है।

पैरों की सफाई के बाद रखें ये ख्याल

फुट सोक के बाद पैरों को साफ पानी से धोकर अच्छी तरह सुखाएं। खासतौर पर उंगलियों के बीच नमी नहीं रहनी चाहिए, क्योंकि गीली स्किन पर फंगस बढ़ने का खतरा हो सकता है। पैरों को सुखाने के तुरंत बाद लंबे समय तक बंद और गर्म जूते पहनने से भी बचें।

घर में मिलने वाली कुछ आम चीजों से ही पैरों की देखभाल आसान हो सकती है और इसके लिए ज्यादा खर्च करने की भी जरूरत नहीं पड़ती। इस तरह के घरेलू तरीके को सही मात्रा और सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है, ताकि पैरों को साफ और आरामदायक रखने में मदद मिल सके।

अच्छी कमाई छोड़कर चुना मानसिक सुकून, लेकिन पति को मंजूर नहीं! महिला की पोस्ट ने सोशल मीडिया पर छेड़ी नई बहस

अच्छी सैलरी वाली नौकरी हर किसी के लिए सपनों जैसी लग सकती है, लेकिन लगातार काम का दबाव इंसान को अंदर से थका भी सकता है। ऐसी ही कहानी एक टेक प्रोफेशनल महिला ने साझा की है। उसका कहना है कि काम के तनाव और बर्नआउट ने उसकी जिंदगी इस कदर मुश्किल कर दी थी कि उसे नौकरी छोड़ने का फैसला लेना पड़ा। अब कुछ महीने बाद पति के दोबारा नौकरी तलाशने के दबाव ने उसकी परेशानियां बढ़ा दी हैं।

पैनिक अटैक और नींद की समस्या से जूझ रही थी महिला

महिला ने प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म ब्लाइंड पर अपनी कहानी साझा की। उसने बताया कि वह एक बड़ी टेक कंपनी में काम करती थी, लेकिन नौकरी का दबाव लगातार बढ़ता गया। हालात ऐसे हो गए थे कि उसे पैनिक अटैक, रातों में नींद न आना और तेज चिंता जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। आखिरकार कुछ महीने पहले उसने नौकरी छोड़ दी। उसका मानना था कि काम से थोड़ा ब्रेक लेने से वह खुद को संभाल पाएगी और मानसिक तौर पर बेहतर महसूस कर सकेगी।

पति की सैलरी से घर चलाने की थी उम्मीद

महिला के मुताबिक, नौकरी छोड़ने से पहले उसने और उसके पति ने अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर सोचा था। उसे लगा कि फिलहाल पति की कमाई से घर चलाया जा सकता है और उसे कुछ समय खुद को ठीक करने के लिए मिल जाएगा। लेकिन कुछ समय बाद स्थिति बदलने लगी।

पति ने कहा- मैं अकेला कमाने वाला नहीं बनना चाहता

महिला का दावा है कि उसके पति ने हाल में उसे दोबारा नौकरी के लिए आवेदन करने को कहा। बात तब ज्यादा चुभ गई, जब पति ने कथित तौर पर कहा कि वह परिवार का अकेला कमाने वाला व्यक्ति नहीं बनना चाहता। महिला के लिए यह बात इसलिए भी परेशान करने वाली थी क्योंकि वह कई सालों तक अच्छी कमाई करती रही थी और घर के खर्चों में अपना योगदान देती थी। उसने लिखा कि अब उसे ऐसा महसूस होने लगा है जैसे उसकी नौकरी छोड़ने की वजह से उसे परिवार पर आर्थिक बोझ की तरह देखा जा रहा है।

‘अगर हालात उलटे होते तो क्या मैं भी यही करती?’

महिला ने अपनी पोस्ट में एक सवाल भी उठाया। उसने सोचा कि अगर नौकरी छोड़ने की स्थिति उसके पति की होती और वह खुद कमाने वाली होती, तो क्या वह भी पति पर जल्दी काम पर लौटने का दबाव डालती? उसके लिए यह सिर्फ नौकरी का सवाल नहीं, बल्कि रिश्ते में समझ, जिम्मेदारियों और एक-दूसरे की मुश्किल घड़ी में साथ देने का सवाल बन गया है।

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सोशल मीडिया पर बंट गई लोगों की राय

महिला की कहानी वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों की राय दो हिस्सों में बंट गई। कुछ लोगों ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रहा है तो उसे ठीक होने के लिए समय मिलना चाहिए। वहीं, कई यूजर्स ने पति के नजरिए को भी समझने की कोशिश की। उनका कहना था कि परिवार का पूरा आर्थिक बोझ एक व्यक्ति पर होना भी काफी तनावपूर्ण हो सकता है। एक यूजर ने सवाल किया कि अगर पति भी इसी तरह की मानसिक परेशानियों से जूझ रहा होता, तो क्या वह नौकरी छोड़कर लंबे समय तक घर पर रह सकता था?

‘कुछ महीने’ का ब्रेक भी बना चर्चा का मुद्दा

कुछ लोगों ने महिला के पोस्ट में लिखे ‘कुछ महीने पहले’ वाले हिस्से पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि संभव है कि पति को यह चिंता हो रही हो कि आगे की योजना क्या है और महिला दोबारा काम कब शुरू करना चाहती है। वहीं, कुछ लोगों ने इसे पति-पत्नी के बीच पहले से साफ बातचीत की कमी बताया।

असली सवाल नौकरी का नहीं, समझ का है

इस पूरी कहानी ने वर्क-लाइफ बैलेंस से आगे जाकर पति-पत्नी की जिम्मेदारियों पर बहस छेड़ दी है। एक तरफ मानसिक थकान से जूझ रहे व्यक्ति को संभलने का समय चाहिए, तो दूसरी तरफ परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां भी अपनी जगह हैं।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

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